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1277 करोड़ रुपए की कंपनी: इंडियन कैसे करते हैं पखाना (पॉटी), देते हैं इसकी ट्रेनिंग और प्रोडक्ट

इंडिया के लोग पखाना कैसे करते हैं? आप बोलेंगे बैठ कर! सामान्य सा सवाल, सामान्य सा जवाब। लेकिन जूडी एडवर्ड को जब कॉन्स्टिपेशन हुआ तो हम भारतीयों के पखाने करने के इसी स्टाइल को अपना कर उन्होंने इससे निजात पाई।

जूडी के लिए उनका कब्ज बहुत कष्टकारी था। उन्होंने दुनिया को इससे निजात पाने के इंडियन पखाना शैली के बारे में बताने की ठान ली। लेकिन तब उन्हें नहीं पता था कि पखाना कैसे करें, यह बताना भी अपने आप में एक बिजनस बन जाएगा। बिजनस वो भी 1277 करोड़ रुपए (175 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का।

जूडी एडवर्ड, उनके पति बिल और बेटे बॉबी ने 2010 में एक ऐसा स्टूल बनाया था, जिसे पैर के नीचे रख कर वेस्टर्न टॉयलेट में इंडियन पखाने जैसा आनंद लिया जा सकता है। यह प्रोडक्ट इतना फेमस हुआ कि पहले ही साल में 10 लाख अमेरिकी डॉलर का बिजनस कर लिया। चीन जैसे मैनुफेक्चरिंग हब से भी पहले ही साल में इसके 2000 स्टूल के ऑर्डर आए।

2020 आते-आते स्क्वॉटी पॉटी (Squatty Potty) के 50 लाख स्टूल हर साल बिकने लगे। Squatty Potty – जी हाँ, कंपनी का नाम यही है।

यह तरह-तरह के वीडियो और फोटो बना कर वेस्टर्न टॉयलेट में पखाना करने वाले लोगों को इंडियन पखाना स्टाइल के फायदे के बारे में भी बताते हैं। कब्ज के जिस कष्ट से कभी जूडी गुजर चुकी हैं, वो नहीं चाहती हैं कि उससे कोई और गुजरे… और साथ में बिजनस तो चल ही रहा है।

स्टार्स जो करते हैं Squatty Potty का यूज

ऐशले ग्रैहम, जिमी किमेल, सैली फिल्ड, हॉवर्ड स्टर्न और ब्रायन क्रैन्स्टन जैसे बड़े A-ग्रेड सेलिब्रिटी से लेकर कई अन्य हॉलिवुड सेलिब्रिटी भी इसका यूज करते हैं। ऐशले ग्रैहम तो इसके यूज से इतना खुश हो गई थीं कि उन्होंने एक साथ 5 Squatty Potty खरीद कर अपने दोस्तों को गिफ्ट किया था।

इंडिया में भी Squatty Potty का बिजनस!

जिन भारतीयों के पखाना करने के स्टाइल को कॉपी कर यह बिजनस खड़ा किया गया है, उनको भी उन्हीं के देश में Squatty Potty अपने स्टूल बेच रहा है। बिजनस यही है। जहाँ से पैसे आए, आते रहे।

वेस्टर्न टॉयलेट के नीचे रखने लायक Squatty Potty का स्टूल इंडिया में 3200 रुपए में बेचा जा रहा है। हास्यास्पद यह है कि इसमें भी वो लिमिटेड पीरियड ऑफर के साथ इसे 1760 रुपए में बेच रहे हैं।

भाषण देने को लेकर गाली-गलौज, कॉन्ग्रेसियों ने एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

रामगढ़ स्थित सीसीएल तोपा परियोजना कार्यालय परिसर में मजदूरों की समस्या को लेकर प्रदर्शन कर रहे कॉन्ग्रेस नेता आपस में ही भीड़ गए। कहा जा रहा यह विवाद धरना-प्रदर्शन में संबोधन का अवसर न मिलने को लेकर शुरू हुआ। जिसके बाद कॉन्ग्रेसियों ने एक-दूसरे पर गाली गलौज करते हुए जमकर मारपीट की। इस घटना में कॉन्ग्रेसी नेता श्याम सिंह घायल हो गए। पुलिस ने उन्हें सदर अस्पताल भेज कर प्राथमिक उपचार कराया। गौरतलब है कि इस मामले में दोनों ही पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर गाली गलौज और मारपीट की प्राथमिकी दर्ज करने का आवेदन दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गाँधी के सत्य व अहिंसा मार्ग पर चलने का दावा करने वाले कॉन्ग्रेसी इस कदर आपस में भीड़ गए कि उन्हें छुड़ाने के लिए दूसरे लोगों को बीच में आना पड़ा। दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता बुधवार को मजदूरों की विभिन्न माँगों को लेकर परियोजना कार्यालय में धरना दे रहे थे। इस दौरान पहले भाषण देने की होड़ के चलते इनमें आपस में ही विवाद हो गया।

साभार: न्यूज़ 18

इस विवाद ने तब और जोर पकड़ लिया जब 2 गुट में बँटे कॉन्ग्रेसियों के एक पक्ष के नेता ने दूसरे पक्ष के नेताओं को गाली दे दी। जिसके बाद दूसरा पक्ष भी भड़क गया और पहले पक्ष को मारने पर उतारू हो गया। जिसके बाद दोनों गुट के नेता आपस में भीड़ गए। दोनों पक्षों ने एक दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। बताया जा रहा है कि इस घटना में कई नेता घायल भी हो गए हैं।

साभार: न्यूज़ 18

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के मांडू प्रखंड कार्यकारी अध्यक्ष सह यंग ब्रिगेड कॉन्ग्रेस सेवादल के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह ने धरना में संबोधन का अवसर न मिलने पर आपत्ति जताई थी और दूसरे पक्ष को जमकर भला बुरा कहा। जिसपर गुस्साए राजीव गाँधी पंचायती राज के प्रदेश को-आर्डिनेटर शांतनु मिश्रा, कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष मुन्ना पासवान, पूर्व जिलाध्यक्ष बलजीत सिंह बेदी और मांडू प्रखंड अध्यक्ष सुधीर सिंह ने उन पर लातों और घूसों की बौछार कर दी।

घटना के बाद दोनों पक्षों ने पुलिस में एक दूसरे के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। घटना में घायल श्याम सिंह दूसरे पक्ष के कॉन्ग्रेसी नेताओं पर लात-घूँसों और मुक्कों से मारकर जख्मी करने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरे पक्ष की श्याम सिंह के खिलाफ मारपीट, जाति सूचक शब्द का इस्तेमाल करने व धमकी देने की शिकायत दर्ज की है।

सारे लकड़बग्घे एक साथ आ जाएँ… मैं तुम सब भेड़ियों को नहीं छोड़ूँगी: जावेद अख्तर वाले केस में समन पर कंगना रनौत

गीतकार जावेद अख्तर द्वारा दायर मानहानि मामले में मुंबई पुलिस ने अभिनेत्री कंगना रनौत को तलब किया है। समन में उन्हें शुक्रवार (जनवरी 22, 2021) को जुहू पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा गया है। इस नए समन पर कंगना ने तल्ख प्रतिक्रिया दी है।

क न्यूज रिपोर्ट शेयर करते हुए कंगना ने कहा, “आज मुझे एक और समन जारी किया गया है। सारे लकड़बग्घे एक साथ आ जाएँ और मुझे जेल में डाल दें। मेरा उत्पीड़न करें और 500 केस मेरे ऊपर लादकर मुझे सलाखों के पीछे करें। मर कर भी मेरी राख कहेगी मैं तुम सब भेड़ियों को नहीं छोड़ूँगी।”

गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2020 में अंधेरी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आरआर खान ने मुंबई पुलिस को गीतकार जावेद अख्तर द्वारा अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले में जाँच के निर्देश दिए थे।

ये मामला जावेद अख्तर ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान अपने खिलाफ टिप्पणी करने पर कंगना रनौत के खिलाफ दायर किया था। कोर्ट ने पुलिस को 16 जनवरी 2021 तक अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिपब्लिक टीवी को दिए एक साक्षात्कार में कंगना रनौत ने बॉलीवुड माफिया पर बात करते हुए गीतकार जावेद अख्तर के ‘नास्तिक’ होने के बारे में खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि जावेद अख्तर जैसे लोग, जो ‘नास्तिक’ होने का दिखावा करते हैं, वास्तव में, इंडस्ट्री के भीतर लोगों पर नज़र रखते हैं कि वे इस्लाम के समर्थक हैं या नहीं? कंगना ने कहा कि ये लोग इंडस्ट्री में इस्लाम समर्थकों या उनके हित में रहने वाले लोगों को ‘फ़िल्टर’ करते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं।

‘रिपब्लिक टीवी’ को दिए एक और इंटरव्यू में कंगना रनौत ने बताया था कि जावेद अख्तर ने उन्हें अपने घर बुला कर कहा था, “तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि वह तुम्हें जेल में बंद कर देंगे। उन्होंने (ऋतिक रोशन) तुम्हारे खिलाफ़ सारे सबूत इकट्ठा कर लिए हैं। वह समझ चुके हैं कि केस पूरी तरह उनके हाथों में है। तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि तेरा मुँह काला हो जाएगा तो तू जाएगी कहाँ?”

जावेद अख्तर ने इन्हीं बयानों के मद्देनजर कंगना के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 409 और 500 के तहत मानहानि का मुकदमा दायर हुआ था। उन्होंने कहा था कि रनौत के साक्षात्कार को रिपब्लिक टीवी चैनल और YouTube पर लाखों लोगों ने देखा था।

नरेंद्र मोदी, जापानी PM, ट्रम्प और कुत्ता: रॉयटर्स ने दिखाई नस्लभेदी मानसिकता

जो बायडेन (Joe Biden) ने 20 जनवरी 2021 को 46वें अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। इस दौरान दुनिया भर के मीडिया संगठनों ने विशेष कवरेज, वीडियो और सूचना के प्रचार-प्रसार में कोई कसर नहीं छोड़ी। मीडिया ने हर पहलू से यह साबित करने की कोशिश की, कि कैसे नए अमेरिकी राष्ट्रपति का अंदाज अपने पूर्ववर्ती से अलग है।

ब्रिटेन स्थित थॉमसन रॉयटर्स समूह के स्वामित्व वाली समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों और उनके ‘कुत्तों’ को लेकर एक वीडियो साझा किया। इसमें जो बायडेन का जर्मन शेफर्ड कुत्ता ‘मेजर’ व्हाइट हाउस में एंट्री लेते हुए दिखा रहा है। वह व्हाइट हाउस में रहने के लिए आने वाला पहला रेस्क्यू डॉग है। रॉयटर्स ने बताया है कि सिर्फ बायडेन ही नहीं, अन्य पूर्व राष्ट्रपति भी व्हाइट हाउस में अपने पालतू जानवरों के साथ रह चुके हैं।

रॉयटर्स ने अपने वीडियो में बताया है कि जॉर्ज बुश द्वारा व्हाइट हाउस में लाए गए दो कुत्ते ‘बेज़ले और बार्नी’ की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ओबामा सनी ‘और’ बो नाम के दो कुत्तों को लेकर व्हाइट हाउस में आए थे।

रॉयटर्स की रिपोर्ट में संबंधित राष्ट्रपतियों के कुत्तों की छवियाँ साझा करते हुए बताया गया है कि क्लिंटन दंपती चॉकलेट लैब्राडोर रिट्रीवर- ’बडी’ को लाए थे। जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश और परिवार के पास व्हाइट हाउस में कई कुत्ते थे, जिसमें बुश की पत्नी बारबरा द्वारा लिखी गई बच्चों की पुस्तक मिल्ली का स्टार भी शामिल है।

व्हाइट हाउस में कुत्ते को लाने की परंपराओं को निभाने के लिए विभिन्न पूर्व राष्ट्रपतियों और वर्तमान राष्ट्रपति जो बायडेन की प्रशंसा करते हुए रायटर्स ने कहा कि, 1860 के दशक में एंड्रयू जॉनसन के बाद से डोनाल्ड ट्रम्प ही केवल ऐसे राष्ट्रपति थे जिनके पास व्हाइट हाउस में कोई पालतू जानवर नहीं था।

वहीं ट्रम्प की पालतू जानवरों में कम रुचि होने के बारे में बताते हुए रॉयटर्स ने वीडियो में दो एशियाई राष्ट्र प्रमुखों, भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी और पूर्व जापानी पीएम शिंजो आबे की राष्ट्रपति ट्रम्प से हुई मुलाकात की क्लिप साझा की।

यहाँ यह बात गौर करने वाली है कि जब पालतू जानवरों’ में अरुचि की बात आई तो रायटर्स ने पूरी दुनिया मे पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के हजारों क्लिप में से सिर्फ पीएम मोदी और पूर्व पीएम शिंजो आबे को ही चुना। दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों विश्व नेताओं को, ‘लीजन ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया था – जो कि संयुक्त राज्य सशस्त्र बलों के सर्वोच्च सैन्य पुरस्कारों में से एक है।

यह बात सच है कि पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प की हजारों वीडियो क्लिप हैं, लेकिन रॉयटर्स ने व्हाइट हाउस के पालतू जानवरों और कुत्तों के वीडियो पर दो एशियाई नेताओं को दिखाना ज्यादा उचित समझा।

यहाँ कॉनन के साथ ट्रम्प का एक वीडियो है, जो बगदादी के रेड में घायल हुआ कुत्ता है। रॉयटर्स चाहता तो इस क्लिप का इस्तेमाल व्हाइट हाउस में पालतू जानवरों के बारे में बात करने के लिए कर सकता था।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अमेरिका के नए राष्ट्रपति बायडन ने अमेरिकी जनता को लोकतांत्रिक पद्धति कायम रखने के लिए बधाई दी। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “यह अमेरिका का दिन है। यह लोकतंत्र का दिन है। यह इतिहास और आशा का दिन है।”

बायडन ने शपथ लेने के बाद कहा कि यह किसी उम्मीदवार की जीत का जश्न नहीं, लोकतंत्र के उद्देश्य की जीत का जश्‍न है। जनता की इच्छाओं को सुना और समझा गया है।

जो बायडन को मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने शपथ दिलाई। उनके साथ कमला हैरिस ने देश की पहली महिला उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उन्हें सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सोनिया सोतोमयोर द्वारा शपथ दिलाई गई।

मस्जिद से ‘लव जिहाद’ का खुला राज: असद ने आशू बन लड़की का किया यौन शोषण, धराया

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। जहाँ अशोका गार्डन इलाके में 30 वर्षीय मैकेनिक ने असद ने आशू बन कर 20 वर्षीय इंजीनियरिंग की छात्रा को प्रेम जाल में फँसाया था। युवती से दोस्ती के वक्त असद ने खुद को मैकेनिकल इंजीनियर बताया था। जिसके बाद शादी का झाँसा देकर वह 2 साल तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा। फिर वह युवती पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। मामला तब खुला जब छात्रा ने उसे नमाज पढ़ते वक्त पकड़ लिया था।

एएसपी राजेश सिंह भदौरिया ने मीडिया को बताया कि मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 (लव जिहाद) की धारा 3, 5 और अन्य धाराओं में भोपाल में पहला मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, आरोपित असद को गिरफ्तार कर लिया गया है।

क्या है पूरा मामला

पुलिस के अनुसार, 23 वर्षीय पीड़िता बालाघाट की रहने वाली है। वह इंजीनियरिंग सेकंड इयर की छात्रा है। 2 साल पहले आशू से उसकी दोस्ती हुई थी जो कि खुद को मैकेनिकल इंजीनियर बताता था। उसके बाद आशू ने खुद को हिंदू बता कर पीड़िता के साथ नजदीकी बढ़ाई। जिसके बाद आशू 12 दिसंबर 2019 को पीड़िता को अशोका गार्डन स्थित अपने किराए के मकान में ले गया। वहाँ उसने छात्रा से कई बार शारीरिक संबंध बनाए। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 19 मार्च 2020 को आशू का जन्मदिन था। ऐसे में वह युवती को घुमाने के लिए रायसेन ले गया और वह एक होटल में ठहरा। वहाँ आशू ने एक काम होने का बहाना बनाते हुए कुछ देर में आने की बात कही। युवती को शक होने पर वह उसके पीछे-पीछे चली गई, जहाँ आशू एक मस्जिद में नमाज पढ़ता मिल गया। पीड़िता ने सवाल-जवाब किए तो आरोपित ने अपना नाम असली नाम असद खान बताया।

युवती ने झूठ बोलने की वजह पूछी तो आरोपित असद उस पर निकाह करने के लिए दबाव बनाने लगा। और यह भी कहा कि मैं एक साधारण मैकेनिक हूँ। इसके बाद पीड़ित युवती उससे दूरी बनाने लगी। लेकिन असद इस्लाम कबूल कर पीड़िता पर निकाह का दबाव बनाता रहा। साथ ही निकाह नहीं करने पर जान से मारने की धमकी भी देने लगा। पीड़िता ने यह भी बताया कि असद बात न मानने पर उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर डाल कर अश्लील कमेंट भी करता था।

पीड़िता के मुताबिक, असद का मजहब पता चलने पर उसने आरोपित से दूरी बना ली, लेकिन असद ने उसका पीछा करना नहीं छोड़ा। अक्टूबर 2020 में असद ने उसे रास्ते में रोक लिया और फिर से निकाह का दबाव बनाने लगा। साथ ही, पीड़िता से मारपीट भी की। वहीं, 11 जनवरी 2021 को उसने युवती पर इस्लाम कबूल करने का फिर से दबाव बनाया। साथ ही, 19 जनवरी 2021 को असद ने युवती की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आपत्तिजनक टिप्पणी की। ऐसे में पीड़िता ने मामले की शिकायत भाजपा जिला कार्यसमिति के सदस्य संजय मिश्रा से की और थाने में केस दर्ज करा दिया। 

भोपाल से भागते वक़्त धराया

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि अपने खिलाफ केस दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद असद ने भोपाल से भागने की कोशिश की। पुलिस को इसकी भनक लग गई तो उन्होंने असद खान उर्फ आशू की तलाश शुरू कर दी और उसे रेलवे स्टेशन से दबोच लिया। इसके बाद वहीं से आरोपित को हिरासत में ले लिया गया।

मिर्जापुर की सांस्कृतिक छवि ख़राब करने के लिए वेब सीरीज बनाने वालों को SC ने भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार (जनवरी 21, 2021) को वेब सीरीज़ मिर्जापुर (Mirzapur) और अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) के निर्माताओं को एक नोटिस भेजा है। इस नोटिस में कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के जिला मिर्ज़ापुर (Mirzapur) की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक छवि खराब करने के सम्बन्ध में ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म और शो के निर्माताओं से जवाब माँगा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नोटिस मिर्जापुर जिले के निवासी एसके कुमार की एक याचिका पर जारी किया गया है। याचिकाकर्ता ने निर्माताओं पर उत्तर प्रदेश की छवि खराब करने का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता कुमार ने कहा कि मिर्ज़ापुर को ‘आतंक और अवैध गतिविधियों का केंद्र’ के रूप में चित्रित किया गया है।

मिर्जापुर नाम की यह वेब सीरीज नवंबर 16, 2018 को अमेज़न प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) पर लॉन्च की गई थी, जिसका दूसरा सीज़न कोरोना वायरस महामारी के बीच पिछले साल ही अक्टूबर माह में रिलीज़ किया गया था।

उत्तर प्रदेश में वेब सीरीज मिर्जापुर के निर्माताओं के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने और एक विशिष्ट समुदाय को आपराधिक पृष्ठभूमि के रूप में प्रदर्शित करने के लिए FIR रिपोर्ट दर्ज होने के दो दिन बाद अदालत का नोटिस आया है।

रविवार (जनवरी 17, 2021) को मिर्जापुर के कोतवाली देहात पुलिस स्टेशन में यह एफआईआर स्थानीय पत्रकार अरविंद चतुर्वेदी की शिकायत के बाद दर्ज की गई, जिसमें वेब सीरीज के निर्माता रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर, भौमिक गोंदालिया और अमेजन प्राइम वीडियो के नाम थे।

शिकायतकर्ता ने कहा कि वेब सीरीज ने उनकी धार्मिक, सामाजिक और क्षेत्रीय भावनाओं को चोट पहुँचाई है, और कहा कि यह मिर्जापुर शहर की छवि को धूमिल करता है। इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने कहा कि वेब सीरीज मिर्ज़ापुर अपमानजनक सामग्री, अनाचार और अवैध संबंधों को भी दिखाती है।

हिन्दू घृणा से सनी वेब सीरीज पर जमकर हो रही हैं FIR

मिर्जापुर को यह नोटिस ऐसे समय पर भेजा गया है, जब हिन्दू घृणा में लिप्त होने के आरोप में कई अन्य वेब सीरीज भी दर्शकों के निशाने पर हैं। खासकर, ‘तांडव’ फिल्म इस समय पूरे देश में लोगों की प्रतिक्रिया के कारण चर्चा का विषय बनी हुई है।

अमेजन प्राइम की वेब सीरीज तांडव (Tandav) पर भारत के अलग-अलग हिस्सों में विवादित वेब सीरीज से जुड़े मेकर्स, डायरेक्टर और राइटर के खिलाफ केस दर्ज किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब एक नई एफआईआर मुंबई में और एक शिकायत इंदौर न्यायालय में भी दायर की गई है।

इसके अलावा, महाराष्ट्र के मुंबई में भी फिल्म के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज हो गई है। मुंबई के घाटकोपर पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 153 (A) 295 (A) 505 के तहत तांडव वेब सीरीज को लेकर FIR दर्ज हुई है। निर्माता, निर्देशक और कलाकारों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।

Covishield बनाने वाले सीरम इंस्टीट्यूट में भीषण आग: कोरोना वैक्सीन के करोड़ों डोज का यहाँ है स्टोर

दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माताओं में से एक पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के टर्मिनल-1 गेट पर आज (जनवरी 21, 2021) आग लग गई। इस दुर्घटना में कितना नुकसान हुआ, फिलहाल इसका कुछ पता नहीं है। मौके पर दमकल की 5-10 गाड़ियाँ आग बुझाने पहुँची हैं। कहा जा रहा है कि यहाँ पर वैक्सीन की कई करोड़ डोज स्टोर करके रखी गई थीं।

आनंद रंगनाथन ने इस घटना की वीडियो को अपने ट्विटर पर साझा किया है। वीडियो में देख सकते हैं कि सीरम इंस्टिट्यूट में लगी आग से हवा में बहुत धुआँ हो गया है। वह लिखते हैं, “covishield वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में बड़ी आग लगी है। आशा है कि सभी सुरक्षित हैं।”

कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि बीसीजी टीका बनाने वाली इमारत में आग लगी है। सीरम इन्स्टिट्यूट के इस हिस्से में नया प्लांट है। पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट की दूसरी मंजिल पर आग लगी है। घटना की सूचना पाते ही दमकल गाड़ियों के अलावा पुलिस भी मौके पर पहुँच गई है। राहत कार्य शुरू हो गया है।

बर्दाश्त नहीं करेंगे… कोर्ट ने बचा लिया, वरना सलाखों के पीछे होते: ‘तांडव’ पर MP के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा

अमेजन प्राइम की वेब सीरिज ‘तांडव’ पर मचे बवाल के बाद इसके मेकर्स को भले ही बुधवार (जनवरी 20, 2021) को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिल गई हो, लेकिन ये मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। इस विवाद पर हालिया बयान मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दिया है। उन्होंने कहा है कि हिंदुओं ने सिर्फ़ क्रिया की प्रतिक्रिया दी है। सवाल यह है कि ऐसी फिल्में बनती ही क्यों है?

मीडिया से बातचीत में ‘तांडव’ सीरिज पर अपना मत रखते हुए उन्होंने कहा, “क्या हमारे कहने से वो ऐसी पिक्चर बनाते हैं। हम क्रिया पर प्रतिक्रिया देते हैं तो कहते हैं कि हम लोग बवाल करते हैं। क्रिया क्यों करते हो? जो हमें प्रतिक्रिया देनी पड़े।” उन्होंने कहा, “अगर इस तरह की घटना होगी तो किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। न्यायालय ने राहत दे दी इसलिए बच गए, नहीं तो सलाखों के पीछे होते।”

भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने अपने ट्वीट में इस बयान का वीडियो साझा करते हुए लिखा है, “तांडव वेब सीरीज के खिलाफ हुए प्रदर्शनों पर आपत्ति जताने वालों को समझना चाहिए कि बहुसंख्यक हिंदुओं का विरोध क्रिया पर प्रतिक्रिया है। सवाल यह है कि ऐसी फिल्में बनती ही क्यों है?”

उन्होंने कहा, “मैं हिंदू धर्म की आस्था पर सुनियोजित तरीके से चोट पहुँचाने की सोच रखने वालों को आगाह करता हूँ कि किसी भी सूरत में अब इस तरह का दुस्साहस बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

बता दें कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को वेब सीरिज ‘तांडव’ के निर्देशक अली अब्बास जफर, अमेजन प्राइम इंडिया की प्रमुख अपर्णा पुरोहित, निर्माता हिमांशु मेहरा और लेखक गौरव सोलंकी को अग्रिम जमानत दे दी थी। इन सभी के ख़िलाफ़ सीरिज के जरिए लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में केस दर्ज है। इसी मामले पर सुनवाई करते हुए बुधवार को न्यायमूर्ति पीडी नाइक ने चारों को गिरफ्तारी से 3 हफ्ते की राहत दी, जिससे इन सभी को यूपी के लखनऊ में संबंधित कोर्ट में जाने का मौका मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि इस केस में इससे पहले यूपी पुलिस की 4 सदस्यीय टीम ‘तांडव’ के खिलाफ लखनऊ में दर्ज मामले की तहकीकात करने मुंबई गई थी। ऐसे में अली अब्बास जफर और अन्य की ओर से पैरवी कर रहे वकील आबद पोंडा और अनिकेत निकम ने अदालत को कहा कि उनके मुव्वकिल को लखनऊ की अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी देने के लिए कुछ वक्त चाहिए इसलिए उन्हें फिलहाल गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी जाए। याचिका में आवेदकों ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उन पर गलत आरोप लग रहे हैं। यूपी पुलिस सबको गिरफ्तार करने मुंबई आ गई है, इसलिए उन्हें राहत की जरूरत है।

7% नहीं, अब किसानों को 12% पर लोन: मोदी सरकार का फैसला, RBI ने जारी किए निर्देश – Fact Check

देश के किसानों को भड़काने के लिए एक ओर विपक्ष अपनी राजनीति कर रहा है। दूसरी ओर मीडिया फर्जी खबरें चला कर उनको बरगला रहा है। ताजा मामला किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक खबर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लोन की ब्याज दर को 7% से बढ़ाकर 12% कर दिया गया है।

इस खबर के अनुसार 1 अप्रैल से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लोन 7 प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत ब्याज दर पर मिलेगा। इस दावे को साबित करने के लिए खबर में आरबीआई का हवाला देकर कहा गया है कि आरबीआई ने सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों को दिशा-निर्देश भी इस संबंध में जारी कर दिए हैं और यह सब जानकर किसानों में भारी रोष है।

खबर के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किसानों के लिए 7 प्रतिशत लोन पर किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की थी और आज देश के बहुत से किसानों के पास केसीसी है। केसीसी लोन का कार्ड रेट वैसे बारह प्रतिशत है, लेकिन सरकार 5 परेंसट सब्सिडी देकर 7 परसेंट ब्याज लेती है, लेकिन अब किसानों को 1 अप्रैल से बारह प्रतिशत ब्याज दर पर ही केसीसी लोन दिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही इस खबर की प्रमाणिकता क्या है? इसका खुलासा पीआईबी फैक्टचेक ने किया है। पीआईबी ने खबर पर संज्ञान लेते हुए इसे फर्जी बताया है। खबर का फैक्ट चेक करते हुए पीआईबी ने लिखा, “खबर में दावा किया जा रहा है कि अब किसान क्रेडिट कार्ड लोन 7% की जगह 12% ब्याज दर पर मिलेगा। यह दावा फ़र्ज़ी है। केंद्र सरकार ने केसीसी लोन के ब्याज दर को बढ़ाने के संबंध में ऐसी कोई घोषणा नहीं की है।”

जानें क्या है किसान क्रेडिट कार्ड?

किसान क्रेडिट कार्ड बैंकों की ओर से किसानों को जारी किए जाते हैं। इनकी वैधता 5 साल की होती है और मैक्सिमम लिमिट बैंकों पर निर्भर करती है। किसानों के लिए इसकी राशि उनकी आय के आधार पर तय होती है। इस कार्ड की मदद से किसान कृषि कार्यों के लिए लोन लेते हैं। लोन पर 7 % का ब्याज लगता है। यह कार्ड पाने के लिए किसान बैंकों में अप्लाई करते हैं। बैंक किसान की योग्यता की जाँच करते हैं और 3-4 दिन में किसान को सूचित करते हैं। अगर बैंक को लगता है कि किसान यह कार्ड पाने योग्य हैं तो उससे जरूरी कागजात माँगे जाते हैं। जरूरी कागज या तो बैंकों में जमा होते हैं या बैंक की ओर से आकर कोई उन्हें घर से ले जाता है। सारी जाँच और वेरिफिकेशन के बाद किसानों को यह कार्ड उपलब्ध करवाया जाता है।

UP पुलिस ने बताया- गब्बर सिंह को मिली किस बात की सजा: Video

“अअआआ… थू.. सूअर के बच्चों।” ये वाक्य सुनते ही हमें बॉलीवुड के एक कालजयी किरदार गब्बर सिंह की याद आ जाती है। लेकिन गब्बर सिंह को शोले फिल्म में आखिर में पुलिस अधिकारी ठाकुर बलदेव सिंह द्वारा दी गई सजा भुगतनी पड़ी। गब्बर को जय-वीरू के घूँसों के साथ-साथ नोक वाले जूते से भी मार खानी पड़ी थी।

लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया है कि गब्बर सिंह को ये सजा बसंती को किडनैप करने या फिर रामगढ़ वालों पर अत्याचार के लिए नहीं मिली, बल्कि यहाँ-वहाँ थूकने के लिए मिली थी।

जी हाँ, उत्तर प्रदेश पुलिस ने कोरोना वायरस महामारी के बीच एक बेहद क्रिएटिव संदेश के जरिए लोगों को जागरूक करने के लिए डायरेक्टर रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित 1975 की फिल्म ‘शोले’ का सहारा लिया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस वीडियो सन्देश को शेयर किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “गब्बर को मिली किस बात की सजा?” इस सन्देश में फिल्म के खलनायक गब्बर सिंह को थूकते हुए दिखाया गया है और उसके बाद बताया गया है कि उसे किस तरह से इसका अंजाम भुगतना पड़ा।

वीडियो के अंत में गब्बर सलाखों के पीछे दिखाया गया है और एक सन्देश उभर आता है, “सार्वजानिक स्थानों पर थूकने से Covid-19 के प्रसार का खतरा बढ़ सकता है। यह एक दंडनीय अपराध है।”

उत्तर प्रदेश पुलिस ने वीडियो में एक अंतिम संदेश देते हुए लिखा है, “सार्वजानिक स्थानों पर न थूकें। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा ‘जान हित’ में जारी। यह वीडियो अब लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया है और बड़े स्तर पर शेयर भी किया जा रहा है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न राज्यों में सरकारें अपने-अपने तरीके आजमा रही हैं। इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक इसके प्रति जागरूकता है। यही कारण है कि लोगों को रचनात्मकता के जरिए सरकार और पुलिस जागरूक करने का प्रयास कर रही है।