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अंतरधार्मिक शादी से पहले नोटिस देना प्राइवेसी का हनन: इलाहाबाद HC का फैसला

अंतरधार्मिक विवाह के रजिस्ट्रेशन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने बुधवार (जनवरी 13, 2021) को अपने फैसले में कहा है कि अंतरधार्मिक जोड़ों की शादी के लिए नोटिस का अनिवार्य प्रदर्शन अब से वैकल्पिक होगा।

हाईकोर्ट ने इस नोटिस को प्राइवेसी का हनन बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी से 30 दिन पहले जरूरी तौर पर नोटिस देने के नियम अनिवार्य नहीं है और अगर शादी कर रहे लोग नहीं चाहते, तो उनका ब्यौरा सार्वजनिक न किया जाए। हिन्दू धर्म अपनाकर मुस्लिम से शादी करने वाली एक महिला की याचिका पर अदालत ने ये फैसला दिया है।

कोर्ट ने 47 पेज के अपने फैसले में कहा, “1954 के अधिनियम की धारा 5 के तहत नोटिस देते समय यह विवाह के पक्षकारों के लिए वैकल्पिक होगा, जो लोग शादी करना चाहते हैं, वे ऑफिसर से लिखित अपील कर सकते हैं कि 30 दिन पहले नोटिस को पब्लिश किया जाए या नहीं। और 1954 के अधिनियम के तहत निर्धारित आपत्तियों की प्रक्रिया का पालन करें। यदि वे अधिनियम की धारा 5 के तहत नोटिस देते समय लिखित रूप में नोटिस के प्रकाशन के लिए ऐसा अनुरोध नहीं करते हैं, तो विवाह अधिकारी इस तरह का कोई नोटिस प्रकाशित नहीं करेगा।”

अदालत ने कहा है कि नोटिस का लगाया जाना किसी की स्वतंत्रता और गोपनीयता के मौलिक अधिकार पर आक्रमण है। किसी के दखल के बिना पसंद का जीवन साथी चुनना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। ऐसे लोगों के लिए सूचना प्रकाशित कर उस पर लोगों की आपत्तियाँ न ली जाएँ। हालाँकि विवाह अधिकारी के सामने यह विकल्प रहेगा कि वह दोनों पक्षों की पहचान -उम्र व अन्य तथ्यों को सत्यापित कर ले। हाईकोर्ट ने कहा, इस तरह की चीजों को सार्वजनिक करना प्राइवेसी और आजादी जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसके साथ ही यह मर्जी से जीवनसाथी चुनने की आजादी के आड़े भी आता है।

कोर्ट ने हिन्दू धर्म अपनाकर शादी करने वाली एक महिला साफ़िया सुल्तान की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर यह फैसला दिया है। दरअसल, साफिया सुल्तान ने अपनी मर्जी से हिन्दू लड़के अभिषेक कुमार पांडेय से शादी की और साफिया सुल्तान से अपना नाम बदलकर सिमरन कर लिया है। हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद 14 दिसंबर को फैसला सुरक्षित कर लिया था।

बता दें इस फैसले से पहले अंतरधार्मिक विवाह में जोड़े को डिस्ट्रिक्ट मैरिज ऑफिसर को शादी के लिए पहले से लिखित सूचना देनी होती थी। शादी से 30 दिन पहले ये सूचना दी जाती थी। जिसके बाद अधिकारी अपने कार्यालय में ये नोटिस लगाता है, जिस पर 30 दिनों के भीतर शादी को लेकर कोई आपत्ति करना चाहता है तो कर सकता है।

उनका कुत्ता टॉमी? यूरोपीय यूजर्स के लिए Whatsapp की अलग पॉलिसी

मोबाइल की मैसेजिंग ऐप Whatsapp की नई प्राइवेसी पॉलिसी (Whatsapp Privacy Policy) इन दिनों खूब सुर्खियों में है। WhatsApp का कहना है कि यूरोपीय यूजर्स को कंपनी की नई पॉलिसी को स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। भारत समेत दूसरी जगहों पर यूजर्स को नई पॉलिसी को स्वीकार करना अनिवार्य है। इसके लिए यूजर्स के पास 8 फरवरी तक का समय है।

नई पॉलिसी के मुताबिक, व्हाट्सऐप अपने यूजर्स का डेटा फेसबुक और दूसरी सहयोगी कंपनियों के साथ साझा करेगी। यूजर्स को बदलावों को अनिवार्य रूप से स्वीकर करना होगा। नई पॉलिसी को लेकर व्हाट्सऐप का कहना है कि यूरोपीय यूजर्स को पर्सनल डाटा फेसबुक के साथ शेयर करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। 

नई पॉलिसी के बाद दुनिया भर के करीब 200 करोड़ यूजर्स परेशान हैं। फेसबुक अपने यूजर्स को नई शर्तों को स्वीकार करने के लिए 8 फरवरी तक का समय दिया है। ऐसे यूजर्स को कंपनी की नई शर्तें स्वीकार नहीं करेंगे वे फेसबुक के मालिकाना हक वाली मैसेजिंग ऐप WhatsApp का इस्तेमाल नहीं कर पाएँगे।

व्हाट्सऐप के यूरोपीय विंग ने एक बयान जारी कर कहा कि व्हाट्सऐप के यूरोपीय यूजर्स के लिए जारी नई शर्तों में फेसबुक के साथ यूजर्स का डेटा शेयर करना शामिल नहीं है। कंपनी का कहना है व्हाट्सऐप ने यूरोपीय क्षेत्रों में अपनी नई शर्तों में डेटा शेयरिंग को लेकर सुधार किया है। मैसेंजर ऐप का कहना है कि वह अपने प्रोडक्ट में सुधार या फिर विज्ञापन के लिए अपने यूजर्स का डेटा किसी तरह से फेसबुक के साथ शेयर नहीं करते।

व्हाट्सऐप के यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के पॉलिसी डायरेक्ट Niamh Sweeney ने एक के बाद एक ट्वीट कर बताया कि उनकी नई पॉलिसी में यह साफ और विस्तार से बताया गया है कि वो यूजर्स का डेटा कैसे और क्यों यूज करते हैं। व्हाट्सऐप का कहना है कि वह अपने यूजर्स का डेटा फेसबुक और दूसरी कंपनियों के साथ तभी शेयर करेगा, जब आइरिश डाटा प्रोटेक्शन कमिशन इससे सहमत होगा।

गौरतलब है कि अपनी प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट करने के कारण विवाद झेल रहे व्हाट्सएप (Whatsapp) ने अब अख़बारों के पहले पन्ने पर पेज भर विज्ञापन देकर लोगों को लुभाना शुरू कर दिया है। इसमें वो किस्म-किस्म के दावे करते हुए बता रहा है कि लोगों की प्राइवेसी के लिए सम्मान उसके DNA में ही है। खुद को एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन की सेवा देने में अगुवा बताते हुए Whatsapp ने कहा कि वो लोगों के बीच प्राइवेट संचार का समर्थन करता है।

Whatsapp ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि वो न तो यूजर्स के फोन कॉल सुन सकता है, न मैसेजों को पढ़ सकता है और न ही फोटो, वीडियो अथवा डॉक्युमेंट्स को देख सकता है। उसने कहा कि फेसबुक भी ऐसा नहीं करता। शेयर्ड लोकेशन और ग्रुप मैसेजों को भी उसने प्राइवेट बताया है और कहा कि वो इन्हें एक्सेस नहीं कर सकता। उसने कहा कि वो केवल एन्क्रिप्शन देखता है, कंटेंट बिलकुल नहीं देखता।

लेकिन, लोगों को Whatsapp की जो नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर अपडेट प्राप्त हुए हैं, उसमें साफ़-साफ़ उन चीजों की सूची बनाई हुई है जिसका एक्सेस वो प्राप्त करेगा। डेटा को हैंडल करने के नाम पर उसने खरीद-बिक्री, लोकेशन, संपर्क, आइडेंटीफायर्स, डायग्नोस्टिक्स, वित्तीय सूचनाएँ, कॉन्टेक्ट्स इन्फो और यूजर कंटेंट के साथ-साथ डेटा यूजेज की जानकारी भी माँग रखी है। उम्र या फीचर के प्रयोगों के हिसाब से अलग-अलग प्राइवेसी प्रैक्टिसेज की बात कही गई है।

व्हाट्सएप ने अख़बार में दिए गए विज्ञापन में मुख्य बातें ही छिपा ली हैं। उसने ये नहीं बताया कि वो वित्तीय इन्फो क्यों ले रहा है? उसने दावा किया है कि नए अपडेट से उसकी प्राइवेसी पॉलिसी पर किसी रूप में कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उधर लोग अब सिग्नल और टेलीग्राम जैसी मैसेजिंग ऐप्स का सहारा ले रहे हैं।

UP: मूत्र विसर्जन के बहाने पिस्टल छिनकर भाग रहे ₹1 लाख के इनामी बदमाश को लगी STF की गोली

उत्तर प्रदेश पुलिस को चकमा देकर भागने की कोशिश कर रहे एक अपराधी को गोली लगने की खबर सामने आई है। दरअसल, युमना एक्सप्रेस-वे के रास्ते दिल्ली से मथुरा लाए जा रहे एक लाख रुपए के इनामी बदमाश पर यूपी STF ने गोली चला दी, जो कि सिपाही की पिस्टल छीनकर भागने के फिराक में था। इस मुठभेड़ में 2 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। हादसे के बाद इलाज के लिए शातिर अपराधी अनूप और दोनों सिपाहियों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मथुरा के बहुचर्चित डॉ निर्विकल्प अपहरण कांड में फरार अपराधी अनूप को यूपी पुलिस से दिल्ली के अशोक नगर इलाके में धर दबोचा। जिसके बाद पुलिस उसे युमना एक्सप्रेस-वे के रास्ते से बुधवार (जनवरी 13, 2021) को मथुरा लेकर आ रही थी। इसी दौरान कुख्यात अपराधी ने पेशाब करने जाने का बहाना बनाते हुए पुलिस से गाड़ी रोकने के लिए कहा।

पुलिस ने उसकी बातों पर यकीन करते हुए गाड़ी को एक्सप्रेस-वे के सुरीर सर्विस मार्ग पर रोका। तभी अनूप मौका पाकर एक सिपाही की पिस्टल छीनकर भागने लगा। जब यूपी एसटीएफ ने उसका पीछा किया तो अनूप ने उन पर फायरिंग कर दी। जवाब में एक्शन लेते हुए पुलिस से भागने की कोशिश कर रहे अनूप पर गोली चला दी। बदमाश के पैरों पर गोली लगी, जिससे वह तुरंत नीचे गिर गया। हालाँकि इस मुठभेड़ में 2 सिपाही भी घायल हुए हैं।

मुठभेड़ में घायल हुआ बदमाश नौहझील थाना क्षेत्र के गाँव कोलहर निवासी अनूप है। आगरा के आईजी सतीश गणेश ने बताया कि शातिर अपराधी अनूप पर अलग-अलग थानों में 23 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस लंबे समय से उसकी धर पकड़ में जुटी थी।

प्रभारी निरीक्षक हाईवे विनोद कुमार ने बताया कि चिकित्सक डॉ. निर्विकल्प का 10 दिसंबर-2019 को अपहरण हुआ था। इस मामले में 10 फरवरी-2020 को पुलिस ने चार के खिलाफ अपहरण कर फिरौती वसूलने के मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले के आरोपी रीगल, इनामी सनी, महेश पूर्व में पकड़े जा चुके हैं। अनूप तभी से फरार चल रहा था। प्रकरण की विवेचना क्राइम ब्रांच टीम द्वारा की जा रही है।

नोएडा एसटीएफ एएसपी आरके मिश्रा ने बताया कि एक लाख रुपए का इनामी बदमाश अनूप पिस्टल छीनकर भाग रहा था। मुठभेड़ में उसके बाएँ पैर में गोली लगी है। मुठभेड़ में दो सिपाही राजेंद्र और मनोज चिकारा भी घायल हुए हैं।

Facebook, Twitter के बाद अब Youtube ने भी सस्पेंड किया डोनाल्ड ट्रंप का चैनल: जानें क्या है कारण

फेसबुक और ट्विटर के बाद अब यूट्यूब (You Tube) ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर एक सप्ताह के लिए बैन लगा दिया है। ऑनलाइन व वीडियो प्लेटफॉर्म ने इस पाबंदी के पीछे हिंसा फैलने की चिंता को बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर मनमाने तरीके से प्रतिबंध लगाने के कुछ दिनों बाद, YouTube राष्ट्रपति ट्रम्प को निलंबित करने वाला नवीनतम सोशल नेटवर्क बन गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, Google ने दुनिया के सबसे बड़े वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अकाउंट को सस्पेंड कर दिया है और व्हाइट हाउस को YouTube पर चेतावनी भी जारी की है।

Youtube ने अपने एक बयान में कहा कि ट्रंप ने एक वीडियो अपलोड किया था जो कि हमारी नीतियों का उल्लंघन कर रहा था जिसके बाद उनके चैनल पर ऑटोमेटिक स्ट्राइक आया है। पहला स्ट्राइक कम-से-कम सात दिनों के लिए होता है। ऐसे में अगले सात दिनों तक ट्रंप अपने चैनल पर कोई वीडियो अपलोड नहीं कर पाएँगे। स्ट्राइक के अलावा उनके चैनल के कमेंट सेक्शन को भी बंद कर दिया गया है।

हालाँकि, कंपनी ने यह नहीं बताया है कि ट्रंप के किस वीडियो ने उसकी नीतियों का उल्लंघन किया है, लेकिन कहा कि यह ऐसी ‘सामग्री’ थी जिसमें ट्रम्प द्वारा मंगलवार (जनवरी 12, 2021) सुबह एक संवाददाता सम्मेलन में की गई टिप्पणियाँ शामिल थीं। YouTube ने कहा कि उसने ऐसी नीतियों का उल्लंघन किया है जो हिंसा भड़काने के लिए सामग्री का निषेध करती हैं। Google ने अब ट्रम्प को नए वीडियो या लाइव-स्ट्रीमिंग सामग्री को न्यूनतम सात दिनों के लिए अपलोड करने से रोक दिया है और कहा है कि यह अवधि बढ़ाया भी जा सकता है।

YouTube की तीन-स्ट्राइक प्रणाली के तहत, एक चैनल को पहली स्ट्राइक के बाद एक सप्ताह के लिए निलंबित किया जाता है, दूसरे स्ट्राइक के बाद दो सप्ताह के लिए और 80 दिनों के भीतर तीसरे स्ट्राइक के बाद चैनल को ब्लॉक कर दिया जाता है। अस्थायी निलंबन का मतलब है कि ट्रम्प का अकाउंट और मौजूदा वीडियो रहेंगे, हालाँकि, वह नई सामग्री अपलोड नहीं कर पाएँगे।

कंपनी ने बुधवार (जनवरी 13, 2021) शाम को एक बयान में कहा, “समीक्षा के बाद, और हिंसा के लिए चल रही चिंताओं के बारे में, हमने अपनी नीतियों के उल्लंघन के लिए डोनाल्ड जे ट्रम्प के चैनल पर अपलोड की गई नई सामग्री को हटा दिया।”

इसमें आगे कहा गया, “हिंसा के बारे में चल रही चिंताओं को देखते हुए, हमने राष्ट्रपति ट्रम्प के चैनल पर कमेंट भी बंद कर दिए हैं, क्योंकि हमने अन्य चैनलों पर किया है जहाँ कमेंट सेक्शन में सुरक्षा चिंताएँ पाई गईं।” बता दें कि यूट्यूब पर ट्रंप के चैनल का नाम Donald J. Trump है, जिसके सब्सक्राइबर्स की संख्या 2.77 मिलियन है।

कट्टरपंथी वामपंथी समूहों ने YouTube को ट्रंप के बहिष्कार की धमकी दी है

कट्टरपंथी वामपंथी समूहों द्वारा YouTube के खिलाफ विज्ञापन बहिष्कार का आयोजन करने की  धमकी के बाद डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंट को YouTube से निलंबित करने का कदम उठाया गया।

कुछ स्व-घोषित ‘नागरिक-अधिकार’ समूहों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चैनल को नहीं हटाने पर YouTube के खिलाफ विज्ञापनदाता के बहिष्कार का आयोजन करने की धमकी दी थी। जिम स्टेयर ने कहा कि ग्रुप यूट्यूब से ट्रंप के सत्यापित अकाउंट की माँग कर रहे हैं, जिनके 2.76 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं। बता दें कि जिम स्टेयर ‘स्टॉप हेट फॉर प्रॉफिट’ नाम के अभियान के आयोजकों में से एक है, जिसने जुलाई में फेसबुक को बायकॉट करने के लिए 1000 विज्ञापनदाताओं का नेतृत्व किया था। 

बता दें कि पिछले हफ्ते कैपिटल बिल्डिंग (अमेरिकी संसद भवन) में ट्रंप के समर्थकों ने हमला किया था। इसमें कैपिटल पुलिस के एक अधिकारी तथा चार अन्य लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना से नवनिर्वाचित राष्ट्रपति की जीत को प्रमाणित करने की प्रक्रिया बाधित हुई थी। इस घटना के बाद अब तक फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया मंचों ने ट्रंप के अकाउंट को निलंबित कर दिया है।

रक्षा क्षेत्र में ₹48,000 करोड़ की पहली स्वदेशी डील: कैबिनेट ने 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद को दी मंजूरी

भारतीय सेना की ताकत में और इजाफा होने जा रहा है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में जल्द 83 तेजस विमान शामिल होंगे। लंबे इंतजार के बाद, सरकार ने आज भारतीय वायु सेना के लिए स्वदेशी रूप से विकसित तेजस लड़ाकू विमान के Mk1A वर्जन की खरीद को मंजूरी दे दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमिटी ऑफ सिक्योरिटी ने एलसीए तेजस Mk1A विमान के लिए 48,000 करोड़ रुपए की रक्षा सौदों की इस खरीद को मंजूरी दे दी है। निर्णय के अनुसार, 83 विमानों को हिंदुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड (Hindustan Aeronautics limited) से अब तक के सबसे बड़े स्वदेशी रक्षा सौदे के तहत खरीदा जाएगा।

वहीं इस फैसले पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्विटर पर कहा, “भारतीय रक्षा विनिर्माण सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ये डील रक्षा क्षेत्र में गेमचेंजर साबित होगी।” उन्होंने कहा कि एलसीए-तेजस आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े की रीढ़ बनने जा रहा है। मंत्री ने कहा कि एलसीए-तेजस में बड़ी संख्या में नई प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं, जिनमें से कई का प्रयास भारत में कभी नहीं किया गया। वर्तमान में, यह 50 फीसद की स्वदेशी सामग्री के साथ लड़ाकू विमान की पहली खरीद (भारतीय स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित) श्रेणी है, जो कार्यक्रम के अंत तक उत्तरोत्तर 60 प्रतिशत तक पहुँच जाएगी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने पहले से अपने नासिक और बेंगलुरू डिवीजन में सेकेंड लाइन मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं को स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि बढ़े हुए इंफ्रास्ट्रक्चर से युक्त HAL LCA-Mk1A के उत्पादन को बढ़ाएगा जिससे भारतीय वायुसेना को समय पर डिलीवरी हो सके।

रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, मंत्रिमंडल ने हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस विमान खरीदने को मंजूरी प्रदान कर दी। इसके तहत 73 हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमके-1ए और 10 तेजस एमके-1 प्रशिक्षण विमान शामिल हैं। एचएएल उन्हें 2026 तक डिलीवर कर देगा।

तेजस एमके1 ए, तेजस एमके 1 (फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस) का एक एडवांस वर्जन है, जिसके पहले ही 16 विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा चुका है। इन Mk1 (FOC) को उनके पिछले वर्जन Mk1 (IOC) से अपग्रेड किया गया है।

हल्‍के लड़ाकू एयरक्राफ्ट Mk-1A का वैरिएंट एक स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया गया अत्याधुनिक लड़ाकू विमान है। यह विमान, जो सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए गए व्‍यूह रचना वाला (एईएसए) रडार, बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (ईडब्ल्यू) सुइट और एयर टू एयर रिफ्यूलिंग (एएआर) की महत्वपूर्ण परिचालन क्षमताओं से लैस है। जेट के मार्क ए 1 वर्जन में शुरुआती संस्करण में कुल 43 सुधार होंगे। यह भारतीय वायु सेना की ऑपरेशन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक शक्तिशाली प्लेटफार्म होगा।

तेजस एमके1 ए विमान वर्तमान में भारतीय वायु सेना द्वारा संचालित विमानों की जगह लेगा, जिसमें मिग -21 और जगुआर विमान शामिल हैं।

कॉमेडी के नाम पर डेनियल फर्नांडिस ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत का बनाया मजाक, बाद में माँगनी पड़ी माफी

दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले कथित कॉमेडियन डेनियल फर्नांडिस सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, कथित स्टैंड अप कॉमेडियन डेनियल फर्नांडिस (Daniel Fernandez) ने यूट्यूब पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उसने सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मजाक बनाया है।

इस वीडियो को देखते ही लोग भड़क उठे और उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई। कुछ दिन पहले ही एक अन्य ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारूकी को हिंदू देवी देवताओं पर टिप्पणी की वजह से गिरफ्तार किया गया था।

सुशांत की मौत का मजाक बनाने वाले कॉमेडियन डेनियल फर्नांडिस को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है। हाल ही में डेनियल ने अपनी 6.27 मिनट की वीडियो को यूट्यूब पर अपलोड किया, जिसमें उन्होंने दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह का मजाक बनाया है।

वीडियो की शुरुआत में तो डेनियल फर्नांडिस दूसरे देश से भारत की तुलना करते हुए बताते हैं कि कैसे दुबई में लोग मास्क, सैनिटाइजर और साफ-सफाई पर ध्यान दे रहे हैं लेकिन हमारे देश में पहले ही कोरोना वैक्सीन की खोज हो चुकी है और उस वैक्सीन का नाम सुशांत सिंह राजपूत है।

कॉमेडियन डेनियल इतने पर ही नहीं रुके और केंद्र सरकार पर भी कॉमेडी के नाम पर तंज कसा। डेनियल ने आगे कहा कि जहाँ दूसरे देशों में कोविड से ग्रसित लोगों की संख्या और डेटा की बात हो रही है तो हमारे देश में ‘We Want Justice’, ‘रिया को जेल डालो’ तो कोविड के बारे में पूछने पर उसको भी जेल में डालो की बात हो रही है।

सुशांत के मानसिक स्वस्थ्य का मजाक उड़ाते हुए डेनियल कहते हैं कि सुशांत एक पॉपुलर बॉलीवुड एक्टर हैं, लेकिन उन्होंने सुसाइड किया है क्योंकि वह डिप्रेशन में था। उनकी मौत की खबर से पूरा देश चौंक गया था क्योंकि एक समझदार आदमी तो अपनी जान ले ही नहीं सकता और इसकी वजह एक औरत ही हो सकती है। यह लाइन बोलकर उन्होंने उन तमाम लोगों पर कटाक्ष किया जो रिया चक्रव्रती को सुशांत की मौत का जिम्मेदार बता रहे थे।

कंगना रानौत प्रकरण और सुशांत की मौत की जाँच में जुटी टीम को भी अपनी इस कॉमेडी में घसीटते हुए कॉमेडियन ने कहा कि इस केस की जाँच तीन एजेंसी कर रही हैं और CBI जाँच कमिटी की डायरेक्टर एक्ट्रेस कंगना रानौत है, वह इस जाँच को लीड कर रही हैं।

इसके अलावा, भारतीय मीडिया का भी मजाक बनाया गया और कहा कि भारतीय मीडिया बेवकूफ नहीं है बल्कि वह ऐसा होने का नाटक करती है क्योंकि उन्हें पता है कि लोग बेवकूफ हैं। इसके लिए दीपिका ड्रग्स केस का भी मजाक बनाया गया। और कई चैनल और उनके पत्रकारों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से तंज कसे।

व्हाट्सऐप की सुरक्षा पर भी सवाल उठाते हुए डेनियल ने कहा कि अब Whatsapp नहीं बल्कि पत्र लिखना शुरू करना चाहिए। वह दरअसल दीपिका और कई फिल्म स्टारों की चैट लीक होने पर सवाल उठा रहे थे। सुशांत राजपूत की मौत को लेकर चली इस पूरी मुहिम को कॉमेडियन ने ‘ड्रामा’ बताया और कहा कि इस पूरे ड्रामा के बाद क्या हुआ? डेनियल ने पूछा कि क्या कोई दोषी पाया गया? हाइकोर्ट ने भी रिया को निर्दोष बताकर छोड़ दिया गया तो वहीं, AIIMS की डॉक्टरों की टीम ने भी सुशांत की मौत को सुसाइड बताया ना कि मर्डर!

कॉमेडियन ने अपने शो के दौरान भारत की जनता को भी नहीं बक्शा और जमकर गाली दी। डेनियल ने CBI का मजाक बनाते हुए कहा कि वह तो चुप ही है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में चु**या कौन है? ‘कॉमेडियन’ डेनियल के अनुसार, ‘यह सब ड्रामा न होता, अगर लोगों ने महाराष्ट्र इलेक्शन में भाजपा को वोट दिया होता’।

मामले को तूल पकड़ता देख ‘कॉमेडियन’ डेनियल ने अपने इंस्टाग्राम पेज के जरिए लोगों से माफी माँगी है। उसने लिखा, “शायद उसका वीडियो स्वर्गीय सुशांत सिंह राजपूत के बहुत सारे प्रशंसकों को नाराज़ करता है, जिनमें से कई ने मुझसे माफी की बात कही है और मैं भी इससे सहमत हूँ! एक कॉमेडियन के रूप में, मेरा इरादा हमेशा केवल आपको हंसाने का होता है, लेकिन कभी-कभी ऐसा करने के प्रयास में उल्टा भी हो जाता है। इसलिए मैं अपनी गलती को दूर करना चाहूँगा।”

इसके आगे डेनियल ने कहा, “मैंने रिया को उसके आरोपों से बरी करने का जिक्र किया है, जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत है, जबकि रिया को जमानत पर रिहा कर गया है। लेकिन मैंने पुणे के शो में गलती से ‘बरी’ शब्द का इस्तेमाल किया। मैं इसके लिए उनसे माफी माँगता हूँ, जिनकी भावनाएँ मेरी वजह से आहत हुई हैं। इसे ठीक करने के लिए मैं इस वीडियो का एक नया संस्करण अगले सप्ताह अपलोड करूँगा।”

बता दें कि वीडियो रिलीज होने के बाद ट्विटर पर यूजर्स ने कॉमेडियन के खिलाफ कमेंट के ज़रिए गुस्सा जाहिर किया। इसके अलावा, इस वीडियो की वजह से सुशांत के परिवार की भावनाओं को भी ठेस पहुँचना लाजमी है।

अनवर अली शेख ने पत्नी पूनम चव्हाण को चलती ट्रेन से ‘ढकेला’: मुंबई पुलिस ने दर्ज किया हत्या का केस

मुंबई पुलिस ने सोमवार (जनवरी 11, 2021) को अनवर अली शेख को उसकी पत्नी पूनम चव्हाण की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। शेख पर आरोप है कि उसने ट्रेन में यात्रा के दौरान 37 वर्षीय पत्नी का हाथ छोड़ दिया, जिससे वह रेलवे ट्रैक पर गिर गई और दम तोड़ दिया। शेख को एक साथी प्रत्यक्षदर्शी की गवाही के आधार पर गिरफ्तार किया गया

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया कि दोनों की तकरीबन एक महीने पहले ही शादी हुई है और हत्या का मकसद अभी तक स्पष्ट नहीं है। शेख और पूनम चव्हाण कथित तौर पर पूनम की तीन वर्षीय बेटी के साथ मानखुर्द में एक चॉल में रहते थे। बता दें कि पूनम की पहली शादी से एक बेटी थी। शेख के पास कोई स्थायी रोजगार नहीं था। वह एक ड्राइवर के रूप में काम करता था। पुलिस ने यह भी कहा कि लॉकडाउन के दौरान कपल ने भीख भी माँगी थी।

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को बेटी के साथ, दंपति पनवेल में स्थानीय यात्रा कर रहा था। लगभग 3:20 बजे, जब ट्रेन चेंबूर और गोवंडी के बीच से गुजर रही थी, महिला ने सपोर्ट पोल के चारों ओर घूमना शुरू कर दिया।

चश्मदीद ने बताया घटना का विवरण

ट्रेन में एक सह-यात्री संगीता भालेराव यह देखकर चकित रह गई कि क्या हो रहा है। पुलिस ने बताया, “संगीता भालेराव ट्रेन से वापस अपने घर जा रही थी। उन्होंने हमें बताया कि चव्हाण अपने पति के साथ ट्रेन में चढ़ी। यह निस्संदेह खतरनाक था, क्योंकि ट्रेन चल रही थी। वो ट्रेन के सपोर्ट पोल को पकड़ कर खड़ी थी। एक समय ऐसा आया, जब चव्हाण ट्रेन से नीचे की तरफ गिरने लगी, तभी उसके पति ने उसका हाथ पकड़ लिया, लेकिन फिर उसने अचानक से उसका हाथ छोड़ दिया। जिसके बाद वह पटरियों पर गिर गई और उसकी मौत हो गई। जब ट्रेन गोवंडी स्टेशन पर रुकी, तब संगीता भालेराव ने एक ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मी को इस घटना के बारे में बताया।” जिसके बाद पुलिस शेख को गिरफ्तार कर वडाला जीआरपी चौकी ले गई।

चव्हाण का शव बाद में पटरियों पर पाया गया था। पुलिस अधिकारी ने कहा कि चेंबूर और गोवंडी के बीच ट्रैक पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं है और उन्हें प्रत्यक्षदर्शी पर भरोसा करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस चव्हाण के रिश्तेदारों की जाँच करने की कोशिश कर रही है कि क्या उनके पति उन्हें परेशान कर रहे थे। बच्चे को चव्हाण की सौतेली माँ को सौंप दिया गया है।

CM योगी के दमदार फैसले, जिसने पेश की नई नजीर: लव जिहाद कानून से लेकर अपराधियों पर सख्ती तक… कितनी बदली UP

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ आए दिन सुर्खियों में रहा करते हैं उनको अपने कड़े तेवर दिखाने हों, या फिर सख्त फैसले लेने हों। वह देरी करना तो जानते ही नहीं हैं। वो कहते हैं न… ऑन द स्पाट फैसला, जी हाँ… वही करते हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। 

महिला सुरक्षा पर फैसले, लव जेहाद के खिलाफ कानून

याद कीजिए… लव जिहाद पर बहस छिड़ी थी मध्य प्रदेश में, उधर बहसा-बहसी ही जारी थी और इधर योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट में लव जिहाद को लेकर कानून भी बना दिया। योगी आदित्यनाथ की इस तेजी और मुस्तैदी पर खूब चर्चाएँ हुई थी। इसके अलावा महिलाओं से छेड़खानी, यौन शोषण करने वाले दोषियों के पोस्‍टर चौराहों पर लगाने का फैसला लिया।

महिलाओं के स्वावलंबन, महिला सुरक्षा और सम्मान के साथ नवरात्रि में मिशन शक्ति की शुरुआत की गई। प्रदेश भर में थाने, तहसीलों और ब्‍लाकों में महिला हेल्‍प डेस्‍क और पिंक महिला पुलिस तक की सुविधा दी गई। विकास दूबे वाला मामला भी याद होगा और हाथरस गैंगरेप वाला मामला भी। सीबीआई को जाँच सौंपना हो या फिर उत्तर प्रदेश पुलिस से काम लेना हो, योगी आदित्यनाथ हर मामले में अव्वल हैं।

यूपी में माफियाओं के बुरे दिनों की शुरुआत

शहरों का नाम बदलना हो या फिर अपराधियों के घर बुलडोजर चला उसे नेस्तनाबूद कर देना हो, योगी आदित्यनाथ एक झटके में फैसला करते नजर आते हैं। योगी आदित्यनाथ ने पहले ही प्रदेश में अपराधियों और माफियाओं को काबू में आ जाने के लिए ललकारा था। ऐसे में योगी सरकार ने माफियाओं पर अंकुश लगाने और उनके साम्राज्य का अंत करने के लिए संपत्तियों को जब्त करने और अवैध इमारतों पर बुलडोजर चलाने के आदेश जारी किए। अतीक, मुख्तार समेत इनके गैंग के लोगों के लिए ये साल कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक रहा। अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़ा और प्रभावी अभियान चलाया गया, जिसमें प्रशासन के बुलडोजर के पहियों के नीचे माफियाओं की अवैध सम्पत्तियाँ चकनाचूर हो गई।

यूपी दंगों में सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों से वसूली

गाजियाबाद के श्मशान घाट में हुए हादसे के मुख्य आरोपित जब पकड़े गए और सामने आया कि श्मशान घाट की गैलरी की छत के निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ था और घूस खाई गई थी तो सबको लगा अब तो कानूनी कार्यवाई होगी। लेकिन योगी आदित्यनाथ सबकी तरह नहीं सोचते। वह कुछ बड़ा सोचते हैं।

योगी आदित्यनाथ ने उन आरोपितों पर कानूनी कार्रवाई तो की ही साथ ही श्मशान घाट की गैलरी पर हुए निर्माण के नुकसान की भरपाई भी उन्हीं आरोपितों से किए जाने का ऐलान कर दिया। योगी आदित्यनाथ के इस फैसले को लोगों ने खूब पसंद भी किया।

हालाँकि, ऐसी कार्रवाई योगी आदित्यनाथ अन्य मामलों में भी कर चुके हैं फिर वो सीएए एनआरसी वाला मामला रहा हो या फिर फर्जी शिक्षकों का मामला, वह नुकसान की भरपाई भी उन लोगों से ही करने का फरमान सुना देते हैं जो उन्हें गलत नजर आता है।

जब केंद्र के सीएए कानून के विरोध में यूपी में प्रदर्शन शुरू हुए, उस दौरान माहौल बिगाड़ने के लिए दंगाइयों ने जमकर उपद्रव मचाया। सरकारी संपत्तियों का नुकसान किया। तोड़फोड़ और आगजनी की। योगी सरकार ने इन उपद्रवियों, दंगाइयों को सबक सिखाने के लिए छतिग्रस्‍त की गई सरकारी संपत्तियों के नुकसान की भरपाई उन्हीं से करवाने का फैसला लिया और वसूली के लिए योगी सरकार ने रिकवरी अध्‍यादेश जारी किया। ऐसे दंगाइयों के पोस्टर चौराहों पर लगाए गए।

योगी आदित्यनाथ के फैसलों में एक फैसला और जोड़ लीजिए, ये फैसला कैसा भी हो लेकिन इसे आप गलत फैसला तो नहीं करार दे पाएँगें। दरअसल, उत्तर प्रदेश के सूचना विभाग में चार अपर जिला सूचना अधिकारियों का प्रमोशन हुआ था। इन सबका प्रमोशन गलत पाया गया था, जो सामने आया तो योगी आदित्यनाथ ने इनको वापस वहीं भेज दिया जहाँ से इन्होंने शुरुआत की थी।

इनमें पहले अधिकारी का नाम है नरसिंह, जो कि अपर जिला सूचना अधिकारी, बरेली के पद पर तैनात थे। अब इनको चपरासी के पद पर तैनात कर दिया गया है। दूसरे अधिकारी हैं अपर जिला सूचना अधिकारी, फिरोजाबाद दयाशंकर, इनको चौकीदार बना दिया गया है। तीसरे अधिकारी हैं विनोद कुमार शर्मा, जो अपर जिला जिला सूचना अधिकारी, मथुरा की पद पर तैनात थे, इनको सिनेमा ऑपरेटर कम प्रचार सहायक बना दिया गया है।

जबकि चौथे अधिकारी हैं अनिल कुमार सिंह, जो कि अपर जिला सूचना अधिकारी, भदोही की पद पर थे इनको भी सिनेमा ऑपरेटर कम प्रचार सहायक के पद पर भेज दिया गया है। योगी आदित्यनाथ का ये फैसला बेहद सख्त और तल्ख है उन लोगों के लिए जो भ्रष्टाचार करते हुए पाए जाते हैं। इन चारों अफसरों के प्रमोशन में खेल हुआ तो योगी आदित्यनाथ ने इनका डिमोशन ही कर दिया है।

इन चारों अधिकारियों पर आरोप है कि इन लोगों ने नियम के विरुद्ध प्रमोशन हासिल किया था इसकी सूचना मुख्यमंत्री को लगी तो इन चारों अधिकारियों को इनके मूल पद पर वापिस भेज दिया गया। योगी आदित्यनाथ का ये फैसला सीख है, नजीर है और एक सबक भी है, एक मुखिया के तौर पर योगी आदित्यनाथ के फैसले उनको और मजबूत बना रहे हैं।

कोरोना काल में यूपी ने देश-दुनिया के सामने पेश की मिसाल

आबादी के हिसाब से भारत के सबसे बड़े राज्य के लिए ये साल सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा। कोरोना जैसी विकराल बीमारी से हर कोई जूझ रहा था, तब सबसे ज्यादा जनसंख्या वाली यूपी को सँभालना, सीएम योगी के लिए जरूर कठिन रहा होगा। पर उन्होंने यूपी के स्वास्थ्य क्षेत्र से लेकर आर्थिक, आपराधिक और दशकों से लोगों की आस्था से जुड़े राम मंदिर तक के मुद्दे पर पूरी जिम्मेदारी के साथ दमदार फैसलों से व्यवस्था बनाए रखी और लोगों को सुरक्षित माहौल देने की पूरी कोशिश की।

कोरोना काल में यूपी ने देश-दुनिया के सामने मिसाल पेश की। कोरोना काल में सेवा के साथ-साथ अपने विकास कार्यों के माध्यम से प्रदेश ने देश दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया। कोरोना काल में ही जब सीएम के पिता का देहांत हुआ था, तब भी उन्होंने नजीर पेश किया था। देश की सबसे बड़ी आबादी वाले सूबे उत्तर प्रदेश को सँभालने के कर्तव्य के आगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ऐसी मिसाल पेश की जो शायद इससे पहले के सियासत में पहले कभी देखी या सुनी नहीं गई। 

अपने पिता के देहांत का समाचार मिलने पर योगी ने सिर्फ एक मिनट का मौन रखने के बाद अपनी बैठक को दोबारा शुरु कर दिया। सीएम की इस कर्मठता ने सूबे के अधिकारियों के सामने बेहतरीन जज्बे का उदाहरण पेश किया है। अपने पिता के दुखद देहान्त के बाद भी अपने काम-काज को एक मिनट के लिए भी विश्राम नहीं देकर उन्होंने पूरे सूबे के अधिकारियों के सामने एक बेमिसाल नजीर पेश किया।

कोरोना संकट से निपटने के लिए लॉकडाउन का एलान हुआ तो लोगों पर आर्थिक संकट बन आया। इस दौरान सीएम योगी ने आदेश दिया कि कोई भूखा न सोने पाए। यूपी में 40 लाख से अधिक मजदूरों को भोजन से लेकर, राशन, दवा के साथ ही 1 हजार रुपए का भत्ता दिया गया। युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए मिशन रोजगार के तहत 4 लाख से ज्‍यादा नौकरियाँ दी।

कोरोना संकट के बीच अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की नींव

दशकों से भारत समेत दुनिया भर के हिन्दुओं को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का इंतजार था। इस साल भव्य राम मंदिर का शिलान्यास होना था। कोरोना का संकट आया तो लोगों में एक आशंका उठी कि शायद उन्हें राम मंदिर के लिए अभी और इंतजार करना पड़े। लेकिन मुख्यमंत्री योगी ने इस संकट के बीच भी हिन्दुओं की आस्था को बनाए रखने और इंतजार को खत्म करते हुए श्रीराम के भव्य मंदिर का शिलान्यास और भूमि पूजन का कार्यक्रम आयोजित करवाया। पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों पूजन हुआ और इस अद्भुत दृश्य को पूरी दुनिया ने देखा। हालाँकि, उनके कुछ फैसलों पर विपक्ष ऊँगली उठाता है लेकिन उनके काम करने के तरीके से लगभग सभी राज्यों के मुख्यमंत्री उनसे प्रभावित होते जरूर नजर आते हैं।

6 माह पहले ही शहनाज से लव मैरिज करने वाले राधे चौहान की गला रेत कर हत्या, सार्वजनिक शौचालय में पड़ा मिला शव

महज 06 महीने पहले एक मुस्लिम युवती शहनाज से शादी करने वाले राधे चौहान की निर्मम हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस को राधे चौहान का शव मंगलवार (12 जनवरी, 2021) को नोएडा के सेक्टर-39 थानाक्षेत्र के बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास एक शौचालय में पड़ा मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को एक युवक का शव नॉएडा के बॉटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास शौचालय में पड़ा होने की सूचना मिली। जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुँच कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। बताया जा रहा है कि राधे चौहान की चाकू से गला रेतकर हत्या की गई है।

थाना प्रभारी ने शव की जानकारी देते हुए कहा कि जाँच के दौरान मृतक की पहचान 27 साल के राधे चौहान के रूप में हुई। वह सेक्टर-55 की झुग्गी बस्ती में रहता था। राधे पर किसी धारदार हथियार से हमला किया गया था। वारदात के स्थान पर मृतक शख्स खून से लतपथ मिला। पुलिस को मृतक की जेब और शौचालय से दो अलग-अलग चाकू भी मिले हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने आशंका जताई है कि युवक ने छः महीने पहले शहनाज नाम की युवती से शादी की थी, जिसके कारण राधे चौहान की हत्या कर दी गई। हालाँकि, उनकी शादी के कोई दस्तावेज पुलिस को नहीं मिले हैं। इस मामले में पुलिस कुछ लोगों से पूछताछ कर रही है। मृतक की पत्नी से भी पूछताछ करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस घटनास्थल के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाल रही है। आरोपित अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

परिजनों ने बताया कि मृतक नशे का आदी था और करीब दो महीने से घर से बाहर रहता था। पुलिस ने दावा किया है कि हत्या के आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ लिया जाएगा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जाँच कर रही है। साथ ही, मृतक के परिजनों से भी इस मामले पूछताछ की जा रही है।

WhatsApp का बवाल और प्राइवेसी | Why people are uninstalling WhatsApp

क्या व्हाट्सएप्प हमारे लोकेशन, क्रेडिट कार्ड, हमारी बातचीत, तस्वीरें किसी दूसरे एप्प को दे दे तो हमें फ़र्क़ नहीं पड़ना चाहिए? तकनीक के इस दौर में प्राइवेसी की सीमा कितनी है? क्यों अनइन्स्टॉल किया जा रहा है WhatsApp?

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