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’15 साल में लड़कियाँ प्रजनन के लायक तो शादी 21 में क्यों’ – अपनी बहन-बेटी को किस उम्र में ब्याहेंगे ये कॉन्ग्रेसी नेता?

जिन लोगों को इस बात से आपत्ति होती है कि समाज के बनाए नियमों में सरकार या कानून का हस्तक्षेप एक बनी-बनाई रूढ़िवादी व्यवस्था को तार-तार कर देगा, उन लोगों को कॉन्ग्रेस मंत्री सज्जन सिंह वाली सूची में शामिल हो जाने की जरूरत है। इन नेता का सवाल है कि लड़की जब 15 साल की उम्र में बच्चा पैदा करने में सक्षम हो जाती है तो फिर शादी की उम्र 21 साल की करने की क्या आवश्यकता है? कॉन्ग्रेस नेता सज्जन सिंह चाहते हैं कि विवाह की उम्र जब 18 साल तय है, तो उसे 18 ही रहने दिया जाए।

प्रगतिशील भारत की नजर से देखें तो सज्जन सिंह का बयान थोड़ा अजीब जरूर है, लेकिन हैरान करने वाला बिलकुल भी नहीं है। ऐेसा इसलिए क्योंकि सज्जन सिंह जिस पार्टी के दिग्गज नेताओं में शुमार हैं, उस पार्टी की सोच भी हमेशा से यही रही है कि जब उन्होंने लंबे समय से देश को सामाजिक तौर पर गड्ढे में ढकेलने का काम किया तो आखिर अब उसे उभारने का प्रयास क्यों हो रहा है? इसके अलावा, यह वही राजनीतिक दल है जिसमें महिलाओं को ‘100 टका टंच माल’ की संज्ञा देने वाले दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेता मौजूद हैं।

जाहिर है, जिनके लिए देश का विकास या राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले कब्ज का विषय बन जाएँ, उन्हें महिलाओं के अधिकारों या भविष्य की चिंता पर भौखलाहट क्यों नहीं होगी। महिलाओं के विषय में दोयम दर्जे की राय रखने वाले क़ॉन्ग्रेस नेता का विरोध करना आज केवल समय की बर्बादी है। इसलिए इससे बेहतर है कि हम  शुक्रिया अदा करें केंद्र में बैठे एक ऐसा नेतृत्व का जो इस बात पर विमर्श को तैयार है कि आखिर लड़कियों के शादी की उम्र 18 बढ़ा दी जानी चाहिए। लेकिन साथ ही उन लड़कियों की चिंता भी करें, जिनका संबंध ऐसे नेताओं से है। सोचिए कि ऐसी सोच वाले कॉन्ग्रेसी नेता अपने घर की बहन बेटियों की शादी किस उम्र में करवाएँगे और शादी के लिए क्या मानदंड तय करेंगे?

वास्तविकता में मोदी सरकार को लड़कियों की उम्र पर चर्चा करने से ज्यादा ऐसी मानसिकता पर काम करने की जरूरत है, जिनके महिलाओं के अधिकारों की या उनके हित में की जाने वाली बात किसी हथौड़े की मार से कम नहीं होती। या जिनके लिए बदलाव का अर्थ सिर्फ़ उनके खुद के विकास व विस्तार तक ही सीमित होता है। बात जैसे ही लड़की की शादी या उसके भविष्य की आती है तो सब स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन कर ज्ञान देने लगते हैं। वो भी ,तब जब वह जनता के प्रतिनिधि के तौर पर चुने जा चुके हों।

दूर-दराज के गाँव में बैठा कोई पिछड़े समुदाय का व्यक्ति भी आज समझाने पर इस बात को समझता है कि लड़कियों की समाज में भूमिका क्या है और क्यों सरकार उन्हें बराबरी की हिस्सेदारी दिलवाना चाहती है। लेकिन अफसोस सज्जन सिंह जैसे नेताओं के दिमाग में लड़कियों की महत्ता केवल प्रजनन तक सीमित है। उनके दिमाग में आज भी लड़की की बिंब केवल भोग वस्तु के रूप में उभरता है और शादी का मतलब केवल बच्चा पैदा करना होता है।

आज के आधुनिक दौर में जब इस बहस ने जोर पकड़ लिया है कि आखिर लड़की की शादी की सही उम्र क्या है 18 या 21? और कानूनी तौर पर अभी तक सारी बात 18 साल पर टिकी हुई है। तो मोदी सरकार इसलिए इस पर बातचीत नहीं कर रही, क्योंकि उन्हें ये मुद्दा भी राजनीति में इस्तेमाल करना है, बल्कि इसलिए कर रहे हैं ताकि उन लड़कियों के पास विस्तार की संभावनाएँ पैदा हो पाएँ, जिनके परिवार वाल कानून के डर से केवल उन्हें 18 साल तक घर में रोक कर रखते हैं और उम्र पार होते ही उनकी शादी कर देते हैं और फिर नए जीवन में कदम रखते ही वह सामाजिक, मानसिक और आर्थिक रूप से शून्य हो जाती हैं। बाद में पारिवारिक दवाब के नाम पर वह रोज खुद की इच्छाओं से समझौता करती हैं और उनके भीतर की ऊर्जा, सृजनात्मकता, तर्कशीलता सिर्फ़ घर के चार कोनों की मोहताज हो जाती है।

लड़कियों की शादी की उम्र के मुद्दे पर बहस होनी चाहिए और यही समय की माँग है। बात चाहे मानसिक दृष्टिकोण से हो या फिर सामाजिक या शारीरिक नजरिए से, इस मुद्दे पर जब तक बात होनी शुरू नहीं होगी, नहीं पता चल सकेगा कि आखिर लड़कियों का भविष्य किस समाज के हाथ में है, या कितने सज्जन सिंह जैसे नेता समाज के हितैषी बनकर लड़कियों के सुनहरे भविष्य के विरोधी बने हुए हैं।

‘कॉन्ग्रेस MLA असलम शेख के गुंडे दलित बच्चों को नशीली दवाओं और पोर्न की लगा रहे है लत’: दलित पॉजिटिव मूवमेंट ने की कार्रवाई की माँग

दलित पॉजिटिव मूवमेंट (दलित और ओबीसी के अधिकारों की बात रखने वाले) ने नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन राइट्स (NCPCR) को एक पत्र लिखते हुए मुंबई के मालवानी के रेस्टीव क्षेत्र में गुंडों द्वारा दलित बच्चों को कथित नशीली दवाओं और अश्लील हरकतों की लत लगाने का आरोप लगाते हुए तत्काल मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है।

दलित अधिकार संस्था ने आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस विधायक असलम शेख के क्षेत्र में स्थानीय गुंडे दलित बच्चों को नशे और अश्लील हरकतों की लत की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि गुंडों द्वारा भाजपा नेता गोपाल शेट्टी और आशीष शेलार के नामों का दुरुपयोग कर इलाके में दलित परिवारों के विरोध को दबाया जा रहा है।

दलित पॉजिटिव मूवमेंट ने मलवानी इलाके के दलित बच्चों में गुंडों द्वारा लगाए गए नशीली दवाओं और पोर्न की लत पर संज्ञान लेते हुए एनसीपीसीआर के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो को एक ईमेल लिखा कि दलित बच्चों को नशीली दवाओं और अश्लील चीजों की लत के लिए मजबूर करने वालें कथित कॉन्ग्रेस नेता के गुंडों को रोकने के लिए उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की।

इसके अलावा दलित अधिकार संस्था ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले से दलित सहित हिंदुओं के 12 और मामलों की भी जाँच करने के लिए केंद्रीय खुफिया एजेंसी की एक टीम का गठन करने की माँग की है, जोकि मुस्लिम उत्पीड़नकर्ताओं और रियल एस्टेट माफिया के दबाव में मुंबई के मालवानी क्षेत्र से पलायन कर रहे है।

गौरतलब है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र मुंबई के मालवानी में ड्रग्स और अश्लील चीजों की लत के अलावा हिंदू अल्पसंख्यकों को लगातार धमकी भी दी जाती है साथ ही मुस्लिम गुंडों द्वारा उन्हें उनके घरों और जमीनों को छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। जहाँ एक समय 100 से अधिक हिंदू परिवार इस इलाके में रहते थे, वहाँ अब केवल 8-10 हिंदू परिवार ही बचे हैं। वह भी अब मुस्लिम गुंडों के उत्पीड़न के डर से इलाके को छोड़ने की योजना बना रहे हैं।

इलाके के निवासियों के अनुसार, गुंडे स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायक असलम शेख से राजनीतिक संरक्षण पाकर लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं। बता दें विधायक असलम महाविकास आघाडी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं। पीड़ितों ने दावा किया कि, कथित तौर पर नेता का समर्थन पाकर मुस्लिम गुंडों ने अनाधिकृत रूप से उनकी ज़मीनों पर अतिक्रमण कर लिया और सरकारी जमीनों पर जबरन मदरसों और दरगाहों का निर्माण कर लिया है।

इस महीने की शुरुआत में भाजपा के मुंबई अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा ने मालवानी में हिंदू अल्पसंख्यक की दुर्दशा का संज्ञान लिया और इस क्षेत्र का दौरा किया था। भाजपा नेता लोढा ने अन्य स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ क्षेत्र के निवासियों के साथ मुलाकात की और उनके साथ हुए अन्याय को सुना।

पार्टी द्वारा की जाने वाली कार्रवाई के बारे में बात करते हुए, भाजपा नेता सुनील कोली ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों को मामले में कार्रवाई शुरू करने और 15 जनवरी को मामले से जुड़ी रिपोर्ट सौंपने का एक अल्टीमेटम दिया है। साथ ही उन्होंने बताया कि अगर पुलिस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठती हैं तो भाजपा सड़कों पर उतरेगी और क्षेत्र में मुस्लिम गुंडों के हाथों दलितों के उत्पीड़न का विरोध करेगी।

TMC के पूर्व सांसद को ED ने किया गिरफ्तार, कंपनी पर है ₹1900 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

पश्चिम बंगाल मे विधानसभा चुनावों से पहले TMC नेताओं की खबरें लगातार मीडिया में आ रही हैं। इस बार प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व TMC सांसद केडी सिंह को गिरफ्तार किया है। TMC नेता को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, TMC के पूर्व सांसद अप्रैल, 2014 में तृणमूल कॉन्ग्रेस के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गए थे। कहा जा रहा है कि पूछताछ के दौरान उन्होंने लेन-देन की जानकारी नहीं दी, इसी के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

जानकारी के अनुसार, TMC नेता केडी सिंह की एक कंपनी है- अल्केमिस्ट इन्फ्रा रियलटी लिमिटेड। इस पर ईडी ने 2016 में केस दर्ज किया था। ये मामला PMLA, 2002 के तहत दर्ज किया गया था। कंपनी पर करीब 1900 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगा था। वहीं SEBI की ओर से भी इस कंपनी के डायरेक्टर और शेयर होल्डर्स पर केस दर्ज किया जा चुका है।

बता दें कि ममता सरकार में मंत्री रह चुके केडी सिंह की इससे पूर्व 239 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई थी। उस दौरान उनके रिजॉर्ट, शोरूम और बैंक खाते तक सीज हुए थे। सितंबर 2019 में प्रवर्तन निदेशालय ने नई दिल्ली और चंडीगढ़ में केडी सिंह से जुड़े जगहों की तलाशी ली थी। तब केडी सिंह के अल्केमिस्ट ग्रुप की 14 कंपनियों के संबंध में तलाशी की गई थी।

इस तलाशी अभियान के दौरान कई दस्तावेज जब्त किए गए थे। वहीं दिल्ली में केडी सिंह के आधिकारिक आवास से सर्च ऑपरेशन के दौरान 10000 डॉलर की विदेशी मुद्रा के साथ 32 लाख रुपए की नकदी बरामद हुई थी।

‘तहलका’ मैग्जीन से जुड़े हैं केडी सिंह के तार

गौरतलब है कि केडी सिंह पर बहुत पहले से गैर-कानूनी तरीके से निवेशकों से पूंजी जुटाने के आरोप लगते रहे हैं। दूसरी ओर उन्होंने ‘तहलका’ मैग्जीन में भी निवेश किया हुआ था, जिसके संपादक तरुण तेजपाल पर साल 2013 में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। उस समय भी केडी सिंह विवाद का हिस्सा इसीलिए बने थे क्योंकि प्रबंधन तेजपाल को बचाने में जुटा हुआ था।

बता दें कि साल 2013 में तरुण तेजपाल पर एक लड़की के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। पीड़िता का कहना था कि तेजपाल ने उनके साथ दो बार जबरदस्ती की और मुँह खोलने पर बुरे परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। बाद में गोवा पुलिस में शिकायत के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा और तेजपाल पर केस दर्ज हुआ था।

उन्हीं दिनों केडी सिंह की तहलका की प्रकाशक अनंत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड में मेजर शेयर होल्डिंग उजागर हुई थी और वह चर्चा में आए थे। हालाँकि कुछ मीडिया खबरों में कहा गया था कि केडी सिंह ने अपनी छवि चमकाने के लिए अपनी कंपनियों का निवेश तहलका में कराया

‘गालीबाज’ देवदत्त पटनायक के खिलाफ पुरी जगन्नाथ मंदिर के बारे में झूठ फैलाने पर शिकायत दर्ज: जानें क्या है मामला

फर्जी ‘माइथोलॉजी’ एक्सपर्ट देवदत्त पटनायक के खिलाफ ओडिशा के भुवनेश्वर में शिकायत दर्ज कराई गई है। पटनायक के खिलाफ यह शिकायत ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर के बारे में फर्जी खबरें और झूठ फैलाकर हिंदू समाज में जाति के आधार पर विभाजन को लेकर की गई है।

कार्यकर्ता अनिल बिस्वाल ने पुरी के भगवान जगन्नाथ के खिलाफ झूठे और अपमानजनक ट्वीट करने और जगन्नाथ भक्तों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए ओडिशा के भुवनेश्वर में राजधानी पुलिस स्टेशन में विवादास्पद लेखक देवदत्त पटनायक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

कार्यकर्ता अनिल बिस्वाल ने ट्विटर पर बताया कि देवदत्त पटनायक ने पुरी जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं के खिलाफ झूठ फैलाया है, जिसका उद्देश्य जाति के आधार पर हिंदुओं के बीच विभाजन करना है।

उन्होंने कहा, “यह ऐसी टिप्पणी है, जिसे जानबूझकर जगन्नाथ मंदिर और हिंदू परंपराओं को बदनाम करने के लिए किया गया है। इस व्यक्ति का हिंदू देवताओं और हिंदू धर्म का बार-बार अपमान करने का इतिहास है। श्री जगन्नाथ मंदिर में किसी भी हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख के प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं है।”

इससे पहले, देवदत्त पटनायक ने यह कहकर विवाद को जन्म दिया था कि पुरी जगन्नाथ मंदिर में दलितों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।

पटनायक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए, बिस्वाल ने कहा कि स्व-घोषित ‘माइथोलॉजिस्ट’ द्वारा की गई टिप्पणी न केवल झूठी है, बल्कि लाखों जगन्नाथ भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से की गई है।

उन्होंने कहा कि हर दिन एससी, एसटी, ओबीसी सहित सभी संप्रदायों के हजारों भक्त श्री मंदिर में जाते हैं और पुरी जगन्नाथ मंदिर में किसी भी तरह के जाति आधारित भेदभाव का कोई मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से गलत आरोप है कि दलितों को श्री जगन्नाथ मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है।”

अपनी शिकायत में, अनिल बिस्वाल ने ओडिशा पुलिस से भक्तों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए आईपीसी की धारा 295 ए, 500, 505, और आईटी अधिनियम धारा 67 के तहत लेखक के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

बता दें कि देवदत्त पटनायक के ट्वीट की काफी निंदा की गई थी। पुरी जगन्नाथ मंदिर जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करता है। यहाँ पर सेवादारों की एक महत्वपूर्ण संख्या गैर-ब्राह्मण हैं।

2018 में, कुछ झूठी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को उनकी जाति के कारण पुरी जगन्नाथ मंदिर के अंदर ‘गलत व्यवहार’ किया गया था। हालाँकि, वे रिपोर्ट झूठी थीं और राष्ट्रपति भवन ने ऐसी किसी भी घटना से इनकार किया था। राष्ट्रपति और प्रथम महिला ने मंदिर का दौरा किया था और गर्भगृह के पास दर्शन किया था जैसा कि सभी भक्त करते हैं।

देवदत्त पट्टनायक: सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ और गालियाँ

देवदत्त पटनायक का सोशल मीडिया वेबसाइटों पर लोगों को गाली देने का इतिहास है। इसके अलावा उन्हें अक्सर मान्यताओं को लेकर झूठ बोलते हुए पाया गया है। देवदत्त पट्टनायक का उन लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने का इतिहास रहा है जो उनके विचार के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जब तथाकथित इतिहासकार ने सोशल मीडिया पर भद्दे कमेंट और अभद्र गालियों का उपयोग किया है। पटनायक ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में भी झूठे दावे किए थे और हिंदुओं और हिंदुत्व का उपहास करने और उन्हें अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनके घृणित अपमानजनक व्यवहार और हिंदू विरोधी रवैये के कारण, सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करने पर नाराजगी व्यक्त की थी।

हिन्दूफोबिया से ग्रसित देवदत्त पटनायक, जिन्हें सोशल मीडिया पर कुछ लोग देवदत्त ‘नालायक’ भी कहते हैं, ने पिछले दिनों भगवान हनुमान का मजाक बनाया था। उन्होंने ट्विटर पर लिखा था कि रामायण के बारे में जो नई बातें सामने आ रही हैं, उसने हिंदुत्व ब्रिगेड को आक्रोशित और बेचैन कर दिया है। उन्होंने लिखा कि भगवान श्रीराम नेपाल के थे और रावण श्रीलंका का था। साथ ही आगे लिखा कि भारत बंदरों का देश है। इस ट्वीट के साथ देवदत्त पटनायक ने भगवान हनुमान का चित्र डाला था, जो बताता है कि वो उनका अपमान करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। लोगों ने उनके इस ट्वीट की जम कर निंदा की थी।

समर्थकों के अकाउंट किए डिलीट तो युगांडा सरकार ने Facebook-Twitter पर ही लगा दिया बैन, ट्विटर ने किया ‘मानवाधिकार’ का विलाप

युगांडा में राष्ट्रपति चुनावों की तैयारियाँ जारी हैं। युगांडा में 14 जनवरी को होने वाले राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों से ठीक दो दिन पहले, यानी 12 जनवरी को पहले ट्विटर और फेसबुक के साथ अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया है। कंपाला में राष्ट्र को संबोधित करते हुए वहाँ के राष्टपति मुसेवेनी ने फेसबुक पर ‘घमंडी’ होने का आरोप लगाया।

दरअसल, कुछ दिन पहले ही फेसबुक ने दो मुसेवेनी समर्थकों के एकाउंट्स को ‘प्लेटफ़ॉर्म का दुरुपयोग’ करने के आरोप में प्रतिबंधित कर दिया था, जिसके बाद राष्ट्रपति ने फेसबुक को ही प्रतिंधित करने का फैसला किया। उन्होंने सत्ता विरोध में अपने कुछ समर्थकों के एकाउंट्स को बंद करने तक के फैसले लेने पर फेसबुक की आलोचना की और कहा कि फेसबुक को यह कहने का कोई अधिकार नहीं है कि युगांडा में कौन अच्छा है और कौन बुरा।

वैचारिक मुद्दों पर संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर प्रतिबंध लगाकर बोलने की आजादी पर रोक लगाने के लिए ट्विटर को दुनिया भर में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक, युगांडा ने कुछ सरकारी प्रतिनिधियों के सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक करने के बाद यह फैसला लिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, युगांडा सरकार ने मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को युगांडा संचार आयोग (UCC) के माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रोवाइडर्स को सोशल मीडिया ऐप्स और वेबसाइट्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया है। बताया गया कि ट्विटर और फेसबुक कुछ सरकार समर्थक आवाजों को रोककर चुनाव में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे थे।

दरअसल, अब फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी राजनीतिक मामलों में एक पक्ष बनने लगे हैं। ये मंच लोगों के राजनीतिक और वैचारिक पसंदों और नापसंदों पर मुहर लगाने या नकारने का ठेका लेकर घूम रहे हैं और यहाँ तक कि ये भी तय कर रहे हैं कि किस नेता के समर्थकों को उनकी सेवाएँ इस्तेमाल करने का अधिकार है और किन्हें नहीं।

ट्विटर और फेसबुक जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों द्वारा चुनावों में जारी हस्तक्षेप के बीच, युगांडा के अधिकारियों ने मंगलवार को इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप्लिकेशन को बंद करने का आदेश दिया। यह कदम देश के राष्ट्रपति चुनाव से दो दिन पहले उठाया गया। यह मुताबला युगांडा के मौजूदा राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी और विपक्षी फ्रंटरनर एवं लोकप्रिय गायक बोबी वाइन के बीच है।

ट्विटर, फेसबुक पर लगा युगांडा में चुनावी हस्तक्षेप का आरोप 

सोशल मीडिया कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला तब हुआ जब फेसबुक ने कुछ सरकार से जुड़े खातों को मनमाने ढंग से डिलीट कर दिया। फेसबुक ने दावा किया कि उसने चुनाव से पहले सार्वजनिक बहस में हेरफेर करने के लिए खातों को यह कहते हुए हटाया कि वे सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय से बँधे थे। चुनावों से पहले युगांडा के अधिकारियों पर नकेल कसने के बाद युगांडा ने फेसबुक और ट्विटर पर इंटरनेट से प्रतिबंध लगा दिया।

सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के बाद, युगांडा के राष्ट्रपति के मुसेवेनी ने कहा,“इन प्लेटफॉर्म्स का समान रूप से उपयोग किया जाना चाहिए, यदि आप किसी भी हिस्से को लेना चाहते हैं, तो आप युगांडा में काम नहीं कर सकते, क्योंकि युगांडा हमारा देश है हम उन्हें यह तय करने नहीं दे सकते कि कौन अच्छा है और कौन बुरा।”

राष्ट्रपति मुसेवेनी ने कहा, “मैं माफी माँगता हूँ कि युगांडा की सरकार ने फेसबुक को युगांडा में बंद कर दिया है, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन अपरिहार्य है। अगर वे यहाँ काम करना चाहते हैं, तो उन्हें न्यायसंगत बनना होगा।”

युगांडा सरकार ने ट्विटर पर कहा, “हम माँग करते हैं कि फेसबुक और ट्विटर सीधे उन लोगों को लिखें, जिन्होंने अपना अकाउंट खो दिया। चूँकि फेसबुक ने अपने बयान में युगांडा के MoICT का हवाला दिया, इसलिए उन्हें हमें लिखने दें ताकि निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिल सके। फेसबुक पर हटाए गए खाते युगांडा सरकार के कर्मचारियों के हैं।”

ट्विटर पर प्रतिबंध से नाराजगी, ’मानवाधिकारों के उल्लंघन’ का दावा

युगांडा में सोशल मीडिया ऐप्स पर अस्थायी प्रतिबंध के बाद, ट्विटर ने चुनावों में तकनीकी दिग्गजों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए युगांडा सरकार की कार्रवाई की निंदा करने के लिए ‘ट्वीट’ किया। ट्विटर ने इसे ’मानवाधिकारों का उल्लंघन’ बताया है।

माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ने एक ट्वीट पोस्ट करते हुए कहा, “युगांडा चुनाव से पहले, हम ऐसी रिपोर्ट सुन रहे हैं कि इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप को ब्लॉक करने का आदेश दिया जा रहा है। हम इंटरनेट शट डाउन की कड़ी निंदा करते हैं- वे बेहद हानिकारक हैं और बुनियादी मानवाधिकारों एवं #opininternet के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं।”

ट्विटर ने इंटरनेट पर फ्रीडम ऑफ स्पीच के मुद्दे पर अपनी खुद के पाखंड को उजागर करने वाले एक ट्वीट में दावा किया, “ट्विटर पर सार्वजनिक बातचीत सहित सूचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तक पहुँच, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के दौरान, विशेष रूप से चुनावों से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है।”

गौरतलब है कि शुक्रवार (जनवरी 08, 2021) को डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट सस्पेंड करने के बाद ट्विटर ने कहा था, “डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंट के हालिया ट्वीट को देखने के बाद हमने उनके अकाउंट को स्थायी रूप से हिंसा को और भड़काने के जोखिम को देखते हुए सस्पेंड कर दिया है।”

ट्विटर पर पहले से ही पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग सितंबर 2018 की उस घटना को याद कर रहे हैं, जब एक महिला एक्टिविस्ट लॉरा लूमर ने कैपिटल हिल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ चल रही सुनवाई में घुस कर ट्विटर के CEO जैक डॉर्सी को खरी-खोटी सुनाई थी। उन्होंने CEO जैक को पक्षपात वाला रवैया त्यागने की चेतावनी दी थी और आरोप लगाया था कि ट्विटर विरोधी विचारधारा के लोगों को सेंसर करने में लगा हुआ है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में कई सोशल मीडिया कम्पनियाँ दक्षिणपंथियों को निशाना बनाती रहती हैं और वामपंथी विचारधारा के विरोधियों को प्रतिबंधित करती रहती हैं। काफी बार ये गुप्त-रूप से किया जाता है, जिसे शैडो-बैन भी कहते हैं। डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थकों ने भी सोशल मीडिया से प्रतिबंधित किए जाने के बाद ‘Parler’ को ही अपनी बात रखने का जरिया बनाया था। अब गूगल और एप्पल के स्टोर्स से पार्लर डाउनलोड के लिए उपलब्ध नहीं है। गूगल ने उसे भी हटा दिया है।

‘भारतीय पर्यटक दीप देसाई ने काबुल में किया अफगान लड़की का बलात्कार’: जानिए क्या है Pak मीडिया में चल रही खबर का सच!

पाकिस्तान के न्यूज़ पोर्टल्स पहले से ही फेक न्यूज़ फैलाने में अव्वल हैं। अब उन्होंने फिर से एक कारनामा किया है। अबकी पाकिस्तान में प्रतिष्ठित माने जाने वाले कई मीडिया संस्थानों ने एक व्यक्ति की तस्वीर शेयर करते हुए दावा किया कि ये भारतीय पर्यटक दीप देसाई है, जिसने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक अफगान लड़की का बलात्कार किया है। ये घटना दिसंबर 28, 2020 की बताई जा रही है।

पाकिस्तान मीडिया चला रहा है कि दीप देसाई नाम का ये व्यक्ति उस समूह का सरगना है, जिसने नाबालिग अफगान लड़की का सामूहिक बलात्कार किया और फिर इस करतूत का वीडियो भी फिल्मा लिया। रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि उसे अफ़ग़ानिस्तान की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 24 न्यूज़ एचडी, दुनिया न्यूज़ और टीवीआई डॉट कॉम डॉट पीके जैसे मीडिया संस्थानों ने इस खबर को प्रकाशित किया।

पाकिस्तान के यूट्यूब पर भी धड़ल्ले से चल रही फेक न्यूज़

यहाँ तक कि यूट्यूब पर भी कई वीडियो शेयर करके इसे हवा दी गई, क्योंकि पाकिस्तान में भारत विरोधी कोई भी कंटेंट सुपरहिट होता है, भले ही उसमें झूठ ही क्यों न हो। भारत विरोधी यूट्यूब चैनलों ने व्यूज बटोरने के लिए ये कारनामे किए। भारत के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने के लिए ऐसा किया गया, ताकि यहाँ के पर्यटक को बलात्कारी साबित कर के भारतीयों को बदनाम किया जा सके।

चल रही फेक न्यूज़

अब आपको इस खबर की सच्चाई बताते हैं। जिस तस्वीर का प्रयोग किया जा रहा है, वो भारत में ही ‘लव जिहाद’ के एक आरोपित अब्दुल्लाह का है। मेरठ में एक हिन्दू लड़की के अपहरण और बलात्कार के मामले में उसे यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। सबसे बड़ी बात तो ये कि अफ़ग़ानिस्तान में किसी भारतीय पर्यटक द्वारा किसी अफगान लड़की के बलात्कार की कोई पुष्ट खबर कहीं है ही नहीं। इसका कोई ओरिजिनल सोर्स ही नहीं है।

मेरठ में लव जिहाद की घटना का है ये आरोपित

पाकिस्तानी मीडिया चैनलों और पोर्टलों ने इस फेक न्यूज़ को भारत के ही एक ‘टीपब्लिक ऑफ बज’ नामक प्रोपेगंडा पोर्टल से उठाया था, जो अक्सर फेक न्यूज़ शेयर करता रहता है। इससे पहले उसने दिल्ली में हिन्दुओं द्वारा एक मुस्लिम लड़की के रेप की खबर प्रकाशित की थी, जो फेक निकली। उसने अफगानिस्तान की पुलिस के हवाले से इस खबर को चला दिया और पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट्स ने उसे कॉपी कर लिया।

आपको याद होगा कि चार बच्चों के अब्बू और चार बीबियों के शौहर अब्दुल्लाह ने अमन चौधरी बनकर 17 साल की किशोरी को प्रेम जाल में फँसा लिया था और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। ये खबर सितम्बर 2020 के मध्य में आई थी। पीड़ित किशोरी को पुलिस ने बरामद किया था, जिसके बाद अब्दुल्लाह भी दबोचा गया। ये घटना थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र की थी, जहाँ के रहने अले अधेड़ अब्दुल्लाह ने अमन चौधरी बनकर 17 साल की एक किशोरी को अपने प्रेमजाल में फाँसा था।

अब्दुल्ला अपना नाम अमन बताता था और नकली बाल लगाकर किशोरियों को प्रेम जाल में फँसाता था। इसके बाद आरोपित किशोरियों के साथ घिनौनी वारदात को अंजाम देता था। वो पहले से शादीशुदा है और उसके 4 बच्चे भी हैं। उसकी 4 बीवियाँ होने की बात भी पता चली थी। अब इसी की तस्वीर को पाकिस्तान का मीडिया उठाकर ‘अफ़ग़ानिस्तान का भारतीय बलात्कारी पर्यटक’ बता रहा है।

26 जनवरी को खालिस्तानी झंडा फहराने पर आतंकी समूह SFJ देगा $2.5 लाख: विदेशी नागरिकता का भी किसानों को दिया लालच

किसान आंदोलन की आड़ में खालिस्तानियों ने खुल कर ऐलान कर दिया है कि 26 जनवरी 2021 को जो कोई भी खालिस्तान का झंडा इंडिया गेट पर लहराएगा, उसे $2.5 लाख से नवाजा जाएगा। स्वतंत्र पत्रकार आदित्य राज कौल ने अपने ट्विटर पर सिख फॉर जस्टिस नाम के खालिस्तानी आतंकी समूह के बयान को साझा करते हुए इस बात की जानकारी दी।

उन्होंने लिखा, “सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने एक बयान में सिंघू सीमा पर प्रदर्शन कर रहे पंजाब के किसानों से 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड को बाधित करने के लिए इंडिया गेट पर खालिस्तान का झंडा उठा कर विरोध प्रदर्शन करने को कहा है। SFJ ने इसके लिए $ 250,000 के इनाम का ऐलान किया है।”

कौल द्वारा शेयर किए गए बयान में देख सकते हैं कि SFJ पंजाब के किसानों से चाहता है कि वह अपना विरोध दर्ज करवाएँ लेकिन 26 जनवरी को एक बार खालिस्तान का झंडा भी फहरा दें। आतंकी समूह का कहना है कि जो कोई भी ऐसा करेगा उसे कानूनी सहायता दी जाएगी और यूके में बतौर शरणार्थी रहने का प्रबंध भी किया जाएगा।

बयान में किसानों को यह कहकर भी लालच दी गई है कि वह चाहें तो पर्मानेंट अपने परिवार के साथ या जो कोई भी राजनीतिक मत जैसे खालिस्तानी झंडे को फहराहने का समर्थन करने के कारण अत्याचार का शिकार हो रहा है, उन सबके साथ वहाँ बस सकता है। 

इस बयान में एसएफजे के जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नू की वीडियो मैसेज का उल्लेख है जिसमें उसने पंजाब किसानों के प्रदर्शन और खालिस्तान के जनमत संग्रह को शांतिपूर्ण कैंपेन कहा है। साथ ही ये भी कहा है कि भारत सरकार की ओर से अनदेखी, इन्हें दबाने की प्रक्रिया, इन्हें हिंसा में बदल सकती है।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ खालिस्तानी समूह ने 11 जनवरी 2021 को बयान जारी करके अपना झंडा फहराहने की बात कही है। वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार खालिस्तानियों की प्रदर्शन में घुसपैठ को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर सकती है। मंगलवार को सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उन्हें खूफिया ब्यूरो से खबर मिली है कि खालिस्तानी इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।

बता दें कि SFJ जैसे समूह किसान आंदोलन के प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की ओर आकर्षित करने में लगे हुए हैं। हालिया बयान से पता चलता है कि उन्हें पैसे और विदेशी नागरिकता का लोभ दिया जा रहा है। आतंकी समूह उनसे कह रहा है कि दुनिया के कानून आपके साथ हैं। यदि भारत सरकार आप पर उंगली उठाती है, तो आपको और आपके परिवारों को संयुक्त राष्ट्र कानूनों के तहत विदेशों में लाया जाएगा।

महिला एंकर के साथ 63 km तक छेड़छाड़: शाहबाज और मो वासिक अरेस्ट – सिर्फ 1 वीडियो देख UP पुलिस ने की कार्रवाई

सहारा मीडिया समूह से जुड़ी पत्रकार (एंकर) चारूल शर्मा की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए हाल में यूपी पुलिस ने दो लंपटों को गिरफ्तार कर लिया है। इनकी पहचान शाहबाज और मोहम्मद वासिक के रूप में हुई है।

कुछ दिन पहले अपने सोशल मीडिया अकॉउंट पर इन दो युवकों की तस्वीर पोस्ट करते हुए चारूल ने मेरठ पुलिस से इन्हें पकड़ने की गुहार लगाई थी। उनका कहना था कि इन दो युवकों ने उनका हापुड़ से नई सड़क तक पीछा किया।

10 जनवरी को अपने ट्वीट में चारूल ने लिखा था, “मेरठ पुलिस, क्या आप इन युवकों को ढूँढ सकते हैं। इन्होंने हापुड़ से लेकर नई सड़क तक लगातार मेरा पीछा किया और मुझे छेड़ते रहे। मैं इनके वाहन का नंबर नहीं नोट कर पाई, क्योंकि उस पर नंबर प्लेट नहीं थी।” इस ट्वीट के बाद चारू ने इनकी एक वीडियो भी पोस्ट की।

इसी मामले को संज्ञान में लेते हुए मेरठ पुलिस एक्शन में आई और छापेमारी करके इन मनचलों को गिरफ्तार कर लिया गया। यूपी पुलिस ने इसकी जानकारी अपने सोशल मीडिया पर दी।

चारूल ने यह सूचना शेयर करते हुए मेरठ पुलिस, यूपी पुलिस, पुलिस अधिकारियों और खासतौर पर एसएसपी अजय साहनी का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा केवल वीडियो में नजर आ रहे चेहरों के जरिए कि इन लोगों को पकड़ना आसान नहीं था। इस समर्थन और नि:स्वार्थ सेवाभाव के लिए धन्यवाद।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार ने भी इस संबंध में ट्वीट किया। उन्होंने चारूल को टैग करते हुए लिखा, “आपकी सूचना पर शाहबाज और मोहम्मद वासिक को यूपी पुलिस ने कुछ ही घंटों में गिरफ़्तार कर लिया, ये दोनों शोहदे हैं, पुलिस इन्हें ऐसे संस्कार सिखा रही है कि आगे से ये किसी को भी परेशान करने योग्य ना रहें। आपकी सतर्कता के लिए आभार।

बता दें कि महिला सुरक्षा मामले में यूपी पुलिस लगातार सीएम योगी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। कल ही यूपी पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर बताया था, “योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर उत्तर प्रदेश को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के लिए हम सबने बहुत मेहनत की और महिलाओं के विरुद्ध हो रहे अपराधों को कम करने के लिए काम किया।”

26 जनवरी पर नेताओं को नहीं फहराने देंगे तिरंगा, भारतीय किसान यूनियन की धमकी

भारतीय किसान यूनियन ने आज (जनवरी 13, 2021) सरकार को धमकी दी है। संगठन ने कहा है कि गणतंत्र दिवस पर किसी नेता को वह तिरंगा झंडा फहराने नहीं देंगे। न्यूज 18 के मुताबिक संगठन के युवा हरियाणा अध्यक्ष रवि आजाद ने कहा कि किसान भिवानी में बिजली मंत्री रणजीत चौटाला का विरोध करेंगे। बिजली मंत्री अगर भिवानी आए तो जिले को चारों तरफ से सील करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन चलने तक नेताओं को राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार नहीं है।

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। दिल्ली की सीमाओं पर किसान डटे हुए हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर किसान ट्रैक्टर मार्च निकालने की तैयारी में हैं। वहीं, सरकार इस पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। इस बीच पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “60 से ज्यादा अन्नदाता की शहादत से मोदी सरकार शर्मिंदा नहीं हुई, लेकिन ट्रैक्टर रैली से इन्हें शर्मिंदगी हो रही है!”

वहीं कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के जो 4 सदस्य बनाए हैं वे तो पहले ही मोदी जी के कानूनों के समर्थक हैं। ऐसी कमेटी के सदस्य क्या न्याय करेंगे। प्रधानमंत्री जी… इतने अहंकारी मत बनिए, किसानों की सुनिए नहीं तो देश आपकी बात सुनना बंद कर देगा।”

बता दें कि कृषि बिल को लेकर दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गन्ना समिति में किसानों की बैठक का आयोजन किया। इस बैठक के दौरान किसानों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में होने वाली परेड को लेकर आह्वान किया कि किसान भारी संख्या में अपने ट्रैक्टरों से परेड ग्राउंड पहुँचे। साथ ही किसान इस बिल के विरोध में जिलों में भी अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन करें।

मामले में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी का कहना है, “सुप्रीम कोर्ट ने फैसले का हम स्वागत करते हैं। जो कमेटी बनाई गई है निश्चित रूप से आने वाले समय में सबसे निष्पक्ष राय लेगी। कमेटी किसान यूनियन के लोगों से और अन्य विशेषज्ञों से भी राय लेगी और उसके बाद निर्णय देगी।”

कैलाश चौधरी ने आगे कहा, “पुराने बिल इतने अच्छे होते तो किसान गरीब और आत्महत्या के लिए मजबूर नहीं होता। इस कानून को कुछ समय देखें अगर कुछ नहीं लगेगा तो भविष्य में और भी संशोधन किया जा सकता है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों ‘इच्छाधारी प्रदर्शनकारी’ योगेंद्र यादव ने धमकी दी थी कि यदि तथाकथित ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ की माँग पूरी नहीं की जाती है तो वे गणतंत्र दिवस को निशाना बनाएँगे। क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने भी यही घोषणा की थी।

योगेंद्र यादव ने कहा था, “अगर हमारी माँगें 26 जनवरी तक पूरी नहीं होती हैं, तो किसान दिल्ली में ‘किसान गणतंत्र परेड’ करेंगे। हम राष्ट्रीय राजधानी के निकटवर्ती क्षेत्रों के किसानों से अपील करते हैं कि वे तैयार रहें और देश के हर किसान परिवार से अनुरोध करें कि यदि संभव हो तो एक सदस्य को दिल्ली भेजें।”

किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा था, “23 जनवरी को हम विभिन्न राज्यों में राज्यपालों के घरों की ओर मार्च निकालेंगे और अगर सरकार के साथ बैठक में कोई ठोस हल नहीं निकला तो आने वाली 26 जनवरी को दिल्ली में ‘ट्रैक्टर किसान परेड’ आयोजित की जाएगी।”

कोरोना वैक्सीन ले जा रहे ट्रक को रोका ममता के मंत्री सिद्दीकुल्ला ने, लकड़ी लेकर लोगों को मारने निकले

TMC मंत्री और जमीयत उलेमा-ए-हिंद (JUH) के अध्यक्ष सिद्दीकुल्ला चौधरी (Siddiqullah Chowdhury) की अगुवाई में कृषि कानूनों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान कोरोना वैक्सीन ले जाने वाले एक ट्रक को रोक दिया गया।

‘न्यूज़ एक्स’ और ‘रिपब्लिक टीवी’ की खबर के अनुसार, यह घटना बुधवार (जनवरी 13, 2021) दिन की बताई जा रही है। समाचार चैनल के अनुसार ट्रक रोकने वाली TMC की रैली द्वारा कोरोना वायरस वैक्सीन के ट्रक रोकने पर वहाँ जमकर चले लाठी-डंडे भी चले।

भाजपा के महासचिव और प्रदेश भाजपा के केंद्रीय प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने इस सम्बन्ध में एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, ”बंगाल के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कृषि कानून के खिलाफ पूर्व बर्दमान के गलसी में विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के कारण बहुत देर तक रास्ता जाम होने पर लोगों ने विरोध भी किया, मंत्रीजी हाथ में लकड़ी लेकर लोगों को मारते हुए देखे गए।”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों का लगातार विरोध कर रही हैं और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में टीएमसी के सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी सिंघु बॉर्डर भेजा गया है।

प्रदर्शन कर रहे ममता बनर्जी के मंत्री जब कृषि कानून के विरोध में सड़क पर उतरे तो वहाँ सड़क जाम होने लगी, जिसका लोगों द्वारा विरोध किया गया। इसके बाद, ममता के मंत्री हाथ में लकड़ी का डंडा लेकर लोगों को मारते नजर आए और लोगों ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर कर डाली।

उल्लेखनीय है कि देशभर में कोरोना वायरस के टीकाकरण अभियान की शुरुआत 16 जनवरी होनी है। इससे पहले देशभर में कोरोना वैक्सीन पहुँचाए जाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।इसी बीच किसान भी लगातार अपनी हठ पर अड़े हुए हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में, कोरोना वायरस की वैक्सीन को विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाने में अभी और कितनी मुश्किलें आती हैं, यह समय ही बताएगा।

केन्द्र सरकार ने 16 जनवरी से शुरू होने जा रहे टीकाकरण अभियान से पहले सोमवार (जनवरी 11, 2021) को ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (एसआईआई) और ‘भारत बायोटेक’ को कोविड-19 वैक्सीन की 06 करोड़ से अधिक वैक्सीन के लिए ऑर्डर दिया था। इस ऑर्डर की कीमत करीब 1,300 करोड़ रुपए तक बताई जा रही है।