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जिस जलीकट्टू को बताया था पशुओं पर अत्याचार, उसे राहुल गाँधी ने बताया तमिल संस्कृति: खुद पहुँचे देखने

तमिलनाडु के मदुरई के अवनीयापुरम में जलीकट्टू (Jallikattu) का खेल शुरू हो चुका है। कॉन्ग्रेस ने जिस खेल को कभी ‘बर्बर’ बताकर भाजपा पर इसके राजनीतिकरण का आरोप लगाया था, उसी जलीकट्टू का मजा लेने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी अवनियापुरम के इस कार्यक्रम में पहुँच चुके हैं।

राहुल गाँधी शायद ये भूल गए कि उन्हीं की पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और यहाँ तक कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस जलीकट्टू को ‘हिंसक’ और पशुओं पर अत्याचार वाला खेल बता चुके हैं। यही नहीं, साल 2016 के कॉन्ग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में जलीकट्टू को प्रतिबंधित करना भी शामिल था।

सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी की जलीकट्टू में शामिल होने को लेकर जमकर खिंचाई हो रही है। वर्ष 2016 में, कॉन्ग्रेस ने जल्लीकट्टू को ‘बर्बर’ हरकत कहते हुए भाजपा पर इसे समर्थन देकर राजनीति करने का आरोप लगाया था।

वहीं, शशि थरूर ने तो जनवरी, 2016 में भाजपा को घेरते हुए पशु कल्याण बोर्ड से आग्रह कर लिया था कि वो ‘बैलों को यातना’ देने वाले इस खेल पर एक्शन ले।

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने बृहस्पतिवार (जनवरी 14, 2021) को जलीकट्टू में शामिल होने के बाद बयान दिया, “मैं यहाँ आया हूँ क्योंकि मुझे लगता है कि तमिल संस्कृति, भाषा और इतिहास भारत के भविष्य के लिए आवश्यक हैं और इसका सम्मान करने की आवश्यकता है।”

राहुल गाँधी ने कहा कि तमिल संस्कृति को देखना काफी प्यारा अनुभव था और उन्हें ये देखकर बेहद खुशी हुई कि जलीकट्टू को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से आयोजित किया जा रहा है। राहुल ने कहा कि वो उन लोगों को संदेश देने के लिए गए हैं, जो ये सोचते हैं कि वो तमिल संस्कृति को खत्म कर देंगे।

जिस बिलाल खान से किया था प्रेम विवाह, उसी ने सिर काट कर खेत में गाड़ा: झारखंड पुलिस ने खुदवा कर निकाला

झारखंड की राजधानी राँची स्थित ओरमाँझी में युवती की सिर कटी लाश बरामद हुई थी। लगभग 10 दिनों से अधिक की जाँच के बाद पुलिस वीभत्स हत्या की गुत्थी सुलझाने के काफ़ी करीब पहुँच चुकी है।

पुलिस ने इस प्रकरण में नया खुलासा किया है, युवती का कटा हुआ सिर उसके पहले पति बिलाल खान के खेत से बरामद किया गया है। युवती का सिर बिलाल खान के खेत में दफ़नाया गया था, जिसे पुलिस अधिकारियों ने खोद कर निकलवाया है। 

दरअसल रविवार (3 जनवरी 2021) को झारखंड के राँची में एक युवती की सिरकटी लाश मिली थी। इसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। वारदात ओरमाँझी थाना इलाके के जिराबार जंगल में अंजाम दी गई थी।

महिला का शव नग्न अवस्था में मिला था और सिर कटा हुआ था। इसके बाद पुलिस की टीम ने जाँच शुरू कर दी थी। युवती के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं मिला था। युवती का गुप्‍तांग भी काट दिया गया था। 

वारदात के कई दिन बाद पुलिस ने इसके मुख्य आरोपित और युवती के शव की पहचान की थी। आरोपित की पहचान बिलाल खान उर्फ़ शेख बेलाल के रूप में हुई, जो हाल ही में जेल से निकला था, इसके बाद ही वह फ़रार हो गया था।

जिस युवती की लाश बरामद की गई थी, बिलाल उसका उसका पहला पति है। पुलिस अभी भी उसकी तलाश में जुटी हुई है। इसके अलावा पुलिस ने दूसरे पति खालिद को भी हिरासत में लिया है। युवती पिछले 2 महीने से लापता थी।

चान्‍हो इलाके के चटवल गाँव के एक दंपती ने मृतका की पहचान की थी। दम्पति के डीएनए सैम्पल को जाँच के लिए भेजा गया था। इसके बाद लाश की पहचान हुई थी। मुख्य आरोपित बिलाल खान उर्फ़ शेख बेलाल के पोस्टर जारी कर दिए गए हैं। युवती का रेप किए जाने के बाद उसकी हत्या की गई थी। हत्या आरोपित बिलाल पिठोरिया के चंदवे बस्ती का रहने वाला है।

जाँच में मृतका चान्हो दम्पति की बेटी पाई गई। दम्पति ने बताया था कि युवती ने बिलाल खान उर्फ़ शेख बेलाल से प्रेम विवाह किया था। जल्द ही दोनों में लड़ाई-झगड़े होने लगे। युवती ने पिठोरिया थाने में उसके विरुद्ध दहेज़ प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। फिर मई 2020 में उसे गिरफ्तार किया गया था। फिर युवती अपने मायके में रहने लगी। इसके बाद उसकी दोस्ती खालिद से हुई, जो शादी में बदल गई।

खालिद पहले से शादीशुदा था। वो युवती को लेकर दिल्ली गया, लेकिन वहाँ दोनों में अनबन होने के कारण वो फिर वापस लौट आई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि शेख बेलाल ही युवती का हत्यारा है। इससे पहले वो कुख्यात सरजा जावेद उर्फ़ बम्बइया की हत्या के मामले में भी जो जेल जा चुका है। उस पर आर्म्स एक्ट के कई मामले लंबित हैं। वो 2 महीने से फरार चल रहा है। पुलिस ने उसकी जल्द गिरफ़्तारी का आश्वासन दिया है। 

ओरमाँझी में लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान गुस्साए लोगों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले को राँची के किशोरगंज चौक के पास रोक दिया। वहाँ से गुजर रहे सीएम के काफिले को रास्‍ता बदल कर रवाना होना पड़ा था।

स्कूली किताबों से हटे मुगलों का फर्जी इतिहास: RSS संबंधी संगठनों ने की संसदीय समिति से सुधार की माँग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े दक्षिणपंथी संगठन भारतीय शिक्षा मंडल, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (SSUN), शिक्षाविद जेएस राजपूत और शंकर शरण ने बुधवार (जनवरी 13, 2021) को स्कूल की पाठ्यपुस्तक और पाठ्यक्रम में सुधारों पर चर्चा करने के लिए एक संसदीय पैनल से मुलाकात की। इस संगठन के प्रतिनिधियों ने NCERT द्वारा मुगलों के फर्जी महिमामंडन आदि ‘गैर-ऐतिहासिक दावों’ को पाठ्यक्रम से हटाने की भी माँग की और भारतीय इतिहास की महान महिलाओं की भूमिका को उजागर करने पर जोर दिया।।

दरअसल, यह खुलासा हाल ही में एक RTI के जरिए सामने आया था कि NCERT के पास कक्षा-12 के पाठ्यक्रम में शामिल किए गए उन दावों का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं है, जिसमें बताया जाता है कि मुगलों ने नष्ट हो चुके मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिक्षा शाखा, विद्या भारती के पूर्व प्रमुख दीना नाथ बत्रा की अध्यक्षता वाले SSUN को मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को शिक्षा, महिलाओं, बच्चों, युवाओं और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में आमंत्रित किया गया था। बैठक में स्कूली शिक्षा, NCERT और CBSE विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक जेएस राजपूत, एनसीईआरटी के शंकर शरण, एसएसयूएन और आरएसएस से जुड़े भारतीय शिक्षा मंडल (बीएसएम) ने समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा।

पैनल में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (SSUN) ने कक्षा 11 की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘अंतराल’ में चित्रकार एमएफ हुसैन के एक अध्याय पर आपत्ति जताई। न्यास ने कहा कि छात्रों के लिए ऐसे व्यक्ति के जीवन का अध्ययन करना अनावश्यक है, जिस पर अश्लीलता को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने का आरोप लगा हो।

आरएसएस से जुड़े संगठन ने कक्षा 6 इतिहास की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 5 में ‘वर्ण व्यवस्था’ पर दिए गए खंड पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया है कि ‘पंडितों ने लोगों को चार समूहों में विभाजित किया है, जिन्हें वर्ण कहा जाता है’ और दावा किया जाता है कि ‘पंडितों के कहने पर इन समूहों के वर्गीकरण का आधार उनके ‘जन्म’ को बनाया गया। न्यास ने पूछा कि क्या कक्षा 6 के छात्रों के मन में एक वर्ग के प्रति शत्रुता को बढ़ावा देना उचित है?

समाचार पत्र ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनावरण के बाद पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों के विचार माँगे गए थे। वर्ष 2005 के बाद से पाठ्यपुस्तकों की कोई समीक्षा नहीं हुई है। इसलिए यह कार्य शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में विशेषज्ञों और संगठनों के विचारों को सुना जाएगा। उन्होंने कहा, चूँकि यह एक सर्वदलीय संसदीय पैनल है, इसलिए इस सम्बन्ध में अलग-अलग मतों को सुना जाएगा।

शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक में चर्चा किए गए मुद्दों में बोर्ड परीक्षा के लिए व्यापक प्रश्न बैंक के विचार के साथ-साथ स्कूलों को फिर से खोलने पर भी विचार किया गया। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक विनय सहस्रबुद्धे इस समिति के प्रमुख हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग ने सदस्यों को सूचित किया कि एनसीईआरटी हमारे राष्ट्रीय नायकों और देश की घटनाओं के बारे में ‘गैर-ऐतिहासिक तथ्यों’ और ‘विकृतियों’ से जुडी तमाम शिकायतों का विश्लेषण करेगा और जाँच के लिए एक पैनल गठित करने जा रही है।

विवादित रहा है ‘मार्क्सवादी हाथों से लिखा’ गया भारत का इतिहास

नई शिक्षा नीति के उद्घाटन के बाद से ही स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम और विषय निरंतर ही चर्चा का विषय रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी परंपरागत ‘मार्क्सवादी साहित्य’ की जगह वास्तविक तथ्यों को बच्चों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की बात हमेशा से ही बहस का विषय रहा है और हाल ही के कुछ दिनों में यह तेज हुई है।

NCERT के अंतर्गत पढ़ाए जाने वाले विषय और उसके लेखकों के वामपंथी रुझानों पर अक्सर ही सवालिया निशान भी उठते आए हैं। ऐसा ही एक उदाहरण एक RTI के माध्यम से भी प्रकाश में आया है। इस RTI के जारी यह तथ्य सामने आया है कि जिन मुगलों का महिमाकरण हमारे पाठ्यक्रमों में अक्सर होता आया है, उसका कोई आधिकारिक स्रोत मौजूद ही नहीं है और यह एकदम काल्पनिक बात है।

ऐसे में, लोगों की माँग यही है कि स्कूलों के पाठ्यक्रम को नए नजरिए से लिखे जाने और समीक्षा की आवश्यकता रही है। नई शिक्षा नीति-2020 को कैबिनेट की मंज़ूरी मिलने के बाद लोग यही चाहते हैं कि नया पाठ्यक्रम तथ्यपरक हो और इसमें वामपंथी अजेंडे के लिए शून्य जगह रहे। इससे पहले, वर्ष 1986 में शिक्षा नीति लागू की गई थी और 1992 में इस नीति में कुछ संशोधन किए गए थे।

‘मंदिरों के पास धर्मांतरण को बढ़ावा देती ईसाई मिशनरी’ – चंद्रबाबू नायडू के बयान पर 13 जिलों के ईसाई नेताओं ने पार्टी छोड़ी

तेलुगु देशम पार्टी के क्रिश्चियन सेल के आंध्र प्रदेश स्थित 13 जिलों के ईसाई नेताओं ने विजयवाड़ा में इकट्ठा होकर बुधवार (13 जनवरी 2021) को पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। इसकी वजह थी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का कथित विवादित बयान। इसके पहले पार्टी के वरिष्ठ अल्पसंख्यक नेता फिलिप सी टोचर (Philip C Tocher) ने भी अपने रास्ते अलग कर लिए थे। 

टीडीपी के प्रदेश अध्यक्ष किन्जरपू अट्चननायडू को अपना इस्तीफ़ा सौंपते हुए पूर्व विधायक टोचर ने लिखा, “बेहद दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मैं पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहा हूँ। इसकी वजह चंद्रबाबू नायडू द्वारा ईसाई समुदाय के लिए दिया गया नफ़रत भरा बयान है। इस बयान की वजह से हमारे समुदाय के लोग तमाम तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं।”

अल्पसंख्यक नेता फिलिप सी टोचर 1983 से ही पार्टी से जुड़े हुए थे और 2014 से 2019 के बीच टीडीपी के शासनकाल में बतौर एंग्लो इंडियन विधायक नामित किए गए थे। 

दरअसल पिछले कुछ समय के दौरान प्रदेश में मंदिरों और मूर्तियों पर हमला करने के तमाम मामले सामने आए थे। इस पर आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

हिन्दू धार्मिक स्थलों पर हमलों के मुद्दे पर चंद्रबाबू नायडू ने भी विवादित बयान दिया था। रामतीर्थम दौरे पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा था कि ईसाई मिशनरी प्रदेश के तमाम बड़े मंदिरों के इर्द-गिर्द धर्मांतरण को बढ़ावा दे रही हैं। 

इस बयान के सुर्ख़ियों में आने पर प्रदेश के कई ईसाई नेताओं ने नायडू की जम कर आलोचना की। कुछ लोगों ने विशाखापट्टनम के ग्रेटर विशाखापट्टनम म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन स्थित महात्मा गाँधी की मूर्ति के नज़दीक विरोध प्रदर्शन करते हुए माँग उठाई थी कि चंद्रबाबू नायडू को अल्पसंख्यकों से माफ़ी माँगनी चाहिए।

विजयवाड़ा के दलित ईसाई नेता पेरिका वराप्रसाद राव ने यहाँ तक कहा कि नायडू ने राजनीति में अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए इस तरह का बयान दिया है। इसी तरह 2019 के चुनावों में टीडीपी का समर्थन करने वाले एक और अल्पसंख्यक नेता जॉन बेनी लिंगम ने कृष्णा जिले के एसपी को लिखा, “हमें इस बात का संदेह है कि नायडू अपने आदमियों की मदद से इन घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और ईसाईयों को इसके लिए दोषी ठहरा रहे हैं।” 

टीडीपी क्रिस्चियन सेल के पूर्व प्रदेश संयोजक प्रवीण ने द न्यूज़ मिनट से बात करते हुए कहा, “प्रदेश में चर्च बहुत पहले समय से हैं, टीडीपी और वाईएसआरसीपी की सरकारों से भी पहले। उन्हें अब क्यों चर्चों से परेशानी हो रही है। हमें उनसे (नायडू) इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं थी। बीते 30-35 सालों में उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था। अगर उनकी पार्टी ने इस तरह की बात पहले कभी कही होती तो हम उनके साथ इतने समय तक कभी नहीं रहते।”

इसके अलावा प्रवीण ने नायडू को ढोंगी भी कहा क्योंकि कुछ ही समय पहले वह धर्म निरपेक्ष नज़र आने की कोशिश में पादरियों से शुभकामनाएँ ले रहे थे और क्रिसमस मना रहे थे।            

10 रोहिंग्या मुस्लिम राजधानी ट्रेन में, 35000* रुपए का टिकट: रेलवे पुलिस ने सबको किया गिरफ्तार

रेलवे पुलिस ने बिहार के किशनगंज से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर 10 रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया। ये सभी बुधवार (13 जनवरी 2021) की दोपहर 02501 अगरतला-नई दिल्ली राजधानी स्पेशल ट्रेन से गिरफ्तार किए गए। इसमें 3 पुरुष, 2 महिला और 5 बच्चे शामिल हैं।

गिरफ्तार किए गए सारे रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार स्थित कुटूपालंग शिविर से फरार हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इन सबकी गिरफ्तारी ट्रेन अधीक्षक की सक्रियता से संभव हो पाई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफ रेलवे) के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (सीपीआरओ) शुभानन चंद्रा ने कहा, “02501 अगरतला नई दिल्ली राजधानी स्पेशल ट्रेन में ट्रेन अधीक्षक गुवाहाटी की ड्यूटी थी। वह यात्रियों के टिकट की जाँच के लिए गुवाहाटी स्टेशन पर ट्रेन में सवार हुए थे। टिकट की जाँच के दौरान उन्हें ट्रेन के बी-7 कोच में यात्रा करने वाले कुछ यात्रियों के तौर-तरीके से संदेह हुआ।”

इसके बाद ट्रेन अधीक्षक ने उन संदिग्ध यात्रियों की जाँच के लिए रेलवे पुलिस को एक मेमो प्रेषित किया। यह जानकारी मिलने के बाद रेलवे पुलिस ने लगभग 1:40 बजे ट्रेन को न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर जाँच के लिए रोका।

जाँच के दौरान दो पुरुष और तीन महिलाओं की नागरिकता संदेह के दायरे में नज़र आई। इसके बाद उन्हें न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर ही उतार लिया गया। पूछताछ के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि वह रोहिंग्या हैं और 11 जनवरी को अगरतला स्टेशन से ट्रेन पर सवार हुए थे। 

IRCTC की साइट पर जाएँगे तो आपको थर्ड एसी का टिकट 3540 रुपए का दिखाएगा। यानी 10 आदमियों का टिकट हुआ 35400 रुपए। एजेंट से टिकट करवाने पर यह ज्यादा ही लगा होगा, इसकी पूरी संभावना है।

यह सभी 10 जनवरी को बांग्लादेश के कोमिल्ला से भारत के सोनामुरा में दाखिल हुए थे। उन्होंने पूछताछ के दौरान यह भी बताया कि वह एजेंट की सहायता से ट्रेन पर सवार हुए थे। आगामी कार्रवाई के लिए गिरफ्तार किए गए रोहिंग्याओं को न्यू जलपाईगुड़ी जीआरपी के हवाले कर दिया गया है।   

MBBS छात्रा पूजा भारती की हत्या, हाथ-पाँव बाँध फेंका डैम में: झारखंड सरकार के खिलाफ गुस्सा

परीक्षा देने के लिए घर से बाहर निकली झारखण्ड के हजारीबाग मेडिकल कॉलेज की छात्रा पूजा भारती (Puja Bharti) कुछ दिन से लापता थी और बाद में उसकी लाश पतरातू डैम (Patratu Dam) से मंगलवार (जनवरी 12, 2021) सुबह बरामद हुई। 22 साल की पूजा भारती गोड्डा की रहने वाली थी। सोशल मीडिया पर लोग मेडिकल की छात्रा पूजा भारती के लिए #JusticeForPujaBharti हैशटैग के जरिए न्याय की माँग कर रहे हैं।

मृतका गोड्डा शहर थाना क्षेत्र में लोहियानगर की रहने वाली थी। पूजा के लापता होने के बाद परिवार और उसके दोस्तों ने इसकी शिकायत पुलिस के पास दर्ज की। खोजबीन के बाद पूजा का शव पास के ही पतरातू डैम में मिला। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि लड़की का शरीर बंधा हुआ था और उसे बाँध में डुबोकर बेरहमी से मार दिया गया।

समाचार पत्र ‘जागरण’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आया है कि पूजा को जिन्दा ही डैम में फेंक दिया गया था। मेडिकल बोर्ड की मौजूदगी में हुए पोस्टमॉर्टम में पूजा भारती के पेट से पानी निकला है। डॉक्टर्स का कहना है कि मरे हुए व्यक्ति के पेट में पानी नहीं पहुँच पाता है, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि पूजा भारती को जिन्दा ही बाँधकर पानी में फेंक दिया गया।

पोस्टमॉर्टम में मृतका के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। हत्या से पहले बलात्कार की संभावना की जाँच के लिए सैम्पल भेजे जा चुके हैं और इस पर अभी रहस्य बना हुआ है।

पूजा भारती पूर्वे हत्या मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और इसकी जाँच के लिए तीन जिलों की पुलिस सत्रह लोगों का दल बनाकर काम कर रही है। पूजा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गर्ल्स हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। उसने तीन साल कोटा में रहकर मेडिकल की तैयारी करने के बाद पिछले साल ही मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था।

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एसके सिंह का कहना है कि लाश मिलने के एक दिन पहले, यानी सोमवार को सुबह 9:30 बजे से पूजा की प्रैक्टिकल परीक्षा थी, लेकिन वो उसमें शामिल नहीं हुई थी। जब पूजा के मोबाइल पर टीचर्स द्वारा फ़ोन किया गया तो मोबाइल स्विच ऑफ बताया गया। हालाँकि, एक खबर में यह बात भी सामने आई है कि मेडिकल कॉलेज के गेट पर पूजा भारती के सोमवार रात 10 बजे जाने की एंट्री मिली है।

उद्धव के मंत्री का दामाद समीर खान गिरफ्तार: ड्रग्स का है मामला, ससुर ने कहा था – ‘अर्णब गोस्वामी कर लेगा आत्महत्या’

एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों और कौशल विकास मंत्री नवाब मलिक के दामाद समीर खान को एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने ड्रग्स मामले में गिरफ्तार कर लिया है। इसके पहले एनसीबी ने उन्हें ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए समन भेजा था।   

ड्रग्स और बॉलीवुड से जुड़े मामलों की जाँच के दौरान एनसीबी को यह पता चला कि इस मामले के एक आरोपित और समीर खान के बीच रुपयों का ऑनलाइन लेन-देन हुआ है। इस मामले में ब्रिटिश नागरिक करण सजनानी और दो अन्य आरोपितों को पिछले हफ्ते 200 किलो प्रतिबंधित ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया था।

सजनानी के साथ गिरफ्तार किए गए दो अन्य लोग राहिला फर्नीचरवाला और उसकी बहन शाइस्ता फर्नीचरवाला थी। राहिला फर्नीचरवाला एक्टिविस्ट और बॉलीवुड अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा का मैनेजर भी रह चुका है। 

समीर खान और करण सजनानी के बीच लेन-देन गूगल पे पर हुआ था, जिसे लेकर एनसीबी का मानना है कि वह संभवतः ड्रग्स की खरीद के लिए हुआ था। इसके अलावा बुधवार (13 जनवरी 2021) को एनसीबी ने समीर खान को पूछताछ के लिए समन भेजा था। लंबी पूछताछ के बाद एनसीबी ने समीर खान को गिरफ्तार करने का फैसला लिया। 

मंगलवार को एनसीबी ने इस मामले में रामकुमार तिवारी को गिरफ्तार किया था, जो साउथ बॉम्बे स्थित मशहूर मुच्छड़ पनवल शॉप के मालिकों में से एक है, जिस पर अक्सर तमाम दिग्गज सेलिब्रेटी, व्यवसायी और औद्योगिक घरानों से जुड़े लोग नज़र आते हैं। एनसीबी ने उस पान शॉप के वेयरहाउस में ड्रग्स बरामद किया था। 

रामकुमार तिवारी गाँजा, ओजी कुश (OG Kush) और भाँग की तस्करी करते हुए पाया गया था, जिसमें कुछ का निर्यात अमेरिका से किया गया था। बुधवार को जिला अदालत ने रामकुमार को 15000 रुपए का जुर्माना देने के बाद जमानत पर रिहा किया था। 

पिछले साल अक्टूबर महीने के दौरान महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी खुद पर लगे आरोपों और महाराष्ट्र सरकार द्वारा दर्ज कराए गए मामलों से निराश होकर आत्महत्या कर लेंगे।

एक स्टिंग ऑपरेशन में नवाब मलिक ने अर्णब के बारे में कहा था, “इस आदमी को बहुत परेशानियाँ मिलने वाली हैं। मुझे इस बात से डर लगता है कि ये आदमी खुद उस ज़ोन में चला जाएगा। ये पागलपन है और ये फोबिया बन जाता है। यही फोबिया एक समय के बाद दिवालिएपन में तब्दील हो जाएगा।”         

पंजाब में हिंदू-सिख को बाँट कर CM बनना चाहते थे केजरीवाल, कॉन्ग्रेस ने उनके ही साथी के वीडियो से खोली पोल

पंजाब कॉन्ग्रेस ने अपने ट्विटर अकाउंट से आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास का एक पुराना वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो अपने पूर्व सहयोगी और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल को लेकर कुछ बड़े खुलासे कर रहे हैं। एक पुराने इंटरव्यू के इस हिस्से में कुमार विश्वास ने बताया कि केजरीवाल ने पंजाब चुनाव के बाद वहाँ का मुख्यमंत्री बनने की पूरी तैयारी कर ली थी और इसके लिए वो मनीष सिसोदिया को दिल्ली की कमान सौंपना चाह रहे थे।

कुमार विश्वास इस इंटरव्यू में कहते हैं, “मैंने कहा ये गलत काम मत करो। आग मत लगाओ। वहाँ भावनाओं को मत भड़काओ। पंजाब में कोई नहीं चाहता है कि वहाँ शांति भंग हो। हिंदू नहीं चाहते, सिख भी नहीं चाहते। वहाँ के किसी हिंदू ने नहीं कहा कि हम मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। लुधियाना मंदिर और दरबार साहिब के प्रति श्रद्धा बराबर है वहाँ के हिंदुओ में। इसको (अरविन्द केजरीवाल) ये लग गया था कि वहाँ 90 सीट आएँगी और वो मुख्यमंत्री बन जाएँगे वहाँ के। मैंने कहा कि पंजाब के लोग आपको स्वीकार नहीं करेंगे।”

अरविन्द केजरीवाल की रणनीति पर बात करते हुए कवि कुमार विश्वास कहते हैं, “मैंने कहा कि पंजाब में लोग बिना पगड़ी वाले आदमी को स्वीकार नहीं करेंगे। पंजाब सूबा नहीं बल्कि वो एक इमोशन है, वो भी पूरी दुनिया के लिए। पूरी दुनिया में जो पंजाबी और सिख फैले हुए हैं उनके लिए पंजाब एक इमोशन है। मैंने अरविंद से पूछा कि कैसे बनेगा कैसे? वह 200% सीएम बनना चाहता था। मैंने पूछा क्या फॉर्मूला है सीएम बनने का? तो उन्होंने (केजरीवाल) बताया कि जब 90 सीटें आ जाएँगी तो हम फुल्का ग्रुप और भगवंत मान ग्रुप में फूट डलवाएँगे।”

इसके आगे कुमार विश्वास कहते हैं, “जब मैंने पूछा कि बनेगा कैसे सीएम तो उसने बोला- वहाँ जब नब्बे सीट आ जाएँगी तो उनको लगेगा कि फुल्का बनेगा तो दूसरी तरफ लगेगा कि भगवंत मान बनेगा। फिर तीन-चार दिन न्यूज चलेगी, झगड़ा होगा। फिर तू (विश्वास) चला जाना, आशुतोष चला जाएगा। तुम दोनों वहाँ जाकर केंद्र के पर्यवेक्षक के तौर पर विधायकों से बात करना और फिर ये कहना कि वो (विधायक) कह रहे हैं कि या तो अरविंद को बनाओ या फिर हमारे कैंडिडेट को बनाओ। मैं भारी मन से दिल्ली को छोड़ दूँगा और मनीष को दिल्ली सौंप के पंजाब चला जाऊँगा। मनीष को लोग पंसद भी कर रहे हैं। फिर धीरे-धीरे वहाँ जमा भी लेंगे।”

केजरीवाल की इस धूर्तता का खुलासा करते हुए विश्वास बताते हैं, “‘मैंने कहा कि ये होगा नहीं। वो बॉर्डर स्टेट है, केंद्र से तु्म्हारी बनती नहीं है वहाँ बहुत मुश्किलें होंगी। और जिन लोगों को तुम तुष्टिकरण कर सीएम बनना चाह रहे हो वो चरस बो देंगे जान की। बहुत बुरा हाल हो जाएगा। इसके बाद उसने कहा कि सर जी आप चुप रहो आपको शपथ ग्रहण में बुलाऊँगा और दोनों भाई साथ चलेंगे। मैंने कहा कि अच्छी बात है और मैं पंजाब नहीं गया।”

थाने में घुस सूअरों ने जमाया कब्जा, जान बचाने को भागे मुस्लिम पुलिस वाले

पुलिस वाले रक्षक होते हैं। ऐसा हमें बचपन से बताया जाता है। समय सबसे बलवान होता है, यह भी बताया गया है। लेकिन पाकिस्तान में तो सूअर भी पुलिसवालों से बलवान निकले। कहानी सिंध प्रांत के नौशहरो फिरोज (Naushahro Feroze) जिले के एक थाने की है।

नौशहरो फिरोज जिले स्थित मोरो पुलिस स्टेशन (Moro police station) में मंगलवार (12 जनवरी, 2021) का दिन आम दिन की तरह था। वहाँ के सभी पुलिसवाले आम दिन की तरह अपनी हनक (दुनिया की लगभग हर पुलिस हनक में ही रहती है) में काम कर रहे थे। तभी सूअरों ने थाने पर धावा बोल दिया।

थाने में मौजूद पुलिसवाले अपनी जान बचाने (इस्लाम में सूअर को हराम माना जाता है) को बाहर भागे। मतलब गोली-बंदूक सब थाने के अंदर और सारे के सारे पुलिसवाले खाली हाथ थाने के बाहर! सूअरों का इतना खौफ कि कोई भी अंदर जाने को तैयार नहीं।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सूअरों ने थाने पर कब्जा जमाए रखा क्योंकि पुलिसवाले सब बाहर इंतजार कर रहे थे। कुछ देर बाद एक सूअर खुद ही बाहर निकल आया लेकिन दूसरे सूअर को बाहर निकालने के लिए पुलिसवालों को स्थानीय नागरिक (जरूर ही वो गैर-मुस्लिम होगा) की मदद लेनी पड़ी।

हैरत की बात है! जिस पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों के साथ जानवर से भी बदतर सलूक किया जा रहा है, वहाँ इन्हीं गैर-मुस्लिमों की मदद से एक थाने पर से जानवरों (सूअरों) का कब्जा हटवाया गया। गैर-मुस्लिमों को पाकिस्तान में जिंदा रहना है तो धर्म-परिवर्तन ही एकमात्र रास्ता है – इच्छा से या जबरन!

‘औरंगजेब-शाहजहाँ ने बनवाए मंदिर’ – NCERT में बिना किसी प्रूफ के पढ़ाया जा रहा यह सब – RTI में खुलासा

मुगलों का महिमामंडन मुख्यधारा की मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर उदारवादियों और वामपंथियों द्वारा अक्सर किया जाता है। यहाँ तक भी दावे किए जाते हैं कि औरंगजेब जैसे आक्रांताओं ने भी भारत में रहते हुए मंदिरों की रक्षा की और उनकी देखरेख का जिम्मा उठाया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्कूलों में जिस पाठ्यक्रम में हमें NCERT यह सब बातें सदियों से पढ़ाते आई है, उसके पास इसकी पुष्टि के लिए कोई आधिकारिक विवरण ही मौजूद नहीं है?

एक व्यक्ति ने नवंबर 18, 2020 में एक आरटीआई (RTI) आवेदन दायर कर NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की पुस्तकों (जो स्कूलों में इस्तेमाल होती आई हैं) में किए गए दावों के स्रोत के बारे में जानकारी माँगी।

इस RTI में विशेष रूप से उन स्रोतों की माँग की गई, जिनमें NCERT की कक्षा-12 की इतिहास की पुस्तक में यह दावा किया गया था कि ‘जब (हिंदू) मंदिरों को युद्ध के दौरान नष्ट कर दिया गया था, तब भी उनकी मरम्मत के लिए शाहजहाँ और औरंगजेब द्वारा अनुदान जारी किए गए।

NCERT कक्षा-12 की पुस्तक का हिस्सा, पेज -234 (हिंदी)
NCERT कक्षा-12 की पुस्तक का हिस्सा, पेज -234

इसके अंतर्गत मुग़ल आक्रांता शाहजहाँ और औरंगज़ेब द्वारा मरम्मत किए गए मंदिरों की संख्या भी पूछी गई। इन दोनों ही सवालों के जवाब बेहद चौंकाने वाले थे। RTI में पूछे गए इन दोनों सवालों के सम्बन्ध में NCERT का जवाब था- “जानकारी विभाग की फाइलों में उपलब्ध नहीं है।”

डॉक्टर इंदु विश्वनाथन द्वारा NCERT द्वारा RTI के अनुरोध के इस जवाब की प्रति ट्वीट की है और इस पर प्रतिक्रिया करने वाले सभी लोग हैरान हैं। इंदु विश्वनाथन ने अपने ट्विटर थ्रेड में लिखा है, “दूसरे शब्दों में, भारतीय स्कूल की पाठ्यपुस्तकें यह दावा तो कर रही हैं कि ये आतताई वास्तव में उदार, और हिंदुओं के प्रति दयावान थे, लेकिन इन पुस्तकों को प्रकाशित करने वाला संगठन कोई पुख्ता सबूत देने में असमर्थ है।”

उन्होंने लिखा है कि यह हिंदुओं की संस्थागत गैसलाइटिंग किए जाने का स्तर है, जिसे अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक संस्था द्वारा मान्यता प्राप्त होना चाहिए। इसके बजाय, श्वेत अमेरिकी ‘विद्वानों’ को इससे लाभ होता है और भारतीय ‘प्रख्यात इतिहासकार’ की इसके लिए वाह-वाही होती है।

इंदु विश्वनाथन लिखती हैं कि इसके बावजूद भी ये झूठ वैकल्पिक-वास्तविकता बनाने वाली मशीनरी का हिस्सा बने हुए हैं और जब हिंदू सिर्फ सच की माँग कर रहा है तो इसके लिए उन्हें खतरनाक इस्लामोफोबिक कट्टरपंथियों की संज्ञा दी जाती है।