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‘कट्टर वामपंथियों की करतूत’: डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी टीम के Twitter हैंडल्स हमेशा के लिए सस्पेंड, POTUS से भी हटाए गए ट्वीट्स

सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ट्विटर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैंडल को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही उनके एक और आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘टीम ट्रम्प’ को भी सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने POTUS (प्रेजिडेंट ऑफ यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका) के ट्विटर हैंडल से ट्वीट्स किए, लेकिन ट्विटर ने उन ट्वीट्स को भी हटा दिया। हिंसा फैलाने की आशंका का आरोप लगा कर ऐसा किया गया है।

ट्विटर ने कहा है कि ताज़ा परिस्थितियों को देखते हुए और आगे हिंसा की आशंका से बचने के लिए ऐसा किया गया है। कंपनी ने कहा है कि हाल के दिनों में जिस तरह से हिंसा हुई है, आशंका है कि उनके सोशल मीडिया पर बने रहने से और डरावनी स्थिति आ सकती है। इस तरह से शुक्रवार (जनवरी 8, 2021) को अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किए गए 2 ट्वीट्स अंतिम थे, क्योंकि अब स्थायी रूप से उनका अकाउंट बंद रहेगा।

ट्विटर ने आरोप लगाया है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने इन ट्वीट्स के माध्यम से हिंसा का महिमामंडन किया। उसने कहा कि इससे भीड़ फिर से इकट्ठी होकर उग्र हो सकती है। ट्रम्प ने कहा था कि जिन 7.5 करोड़ अमेरिकी नागरिकों ने उन्हें वोट दिया है, उनके साथ भविष्य में भी किसी तरह का कोई बुरा व्यवहार नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि आगे भविष्य में हमारे बाद एक विशाल आवाज़ है। उन्होंने ‘अमेरिका फर्स्ट’ और ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का भी नारा दोहराया।

टीम ट्रम्प के अकाउंट के माध्यम से उन्होंने बयान दिया कि ट्विटर लम्बे समय से फ्री स्पीच पर पाबन्दी लगाता रहा है और अब उन्हें चुप कराने के लिए ट्विटर के कट्टर वामपंथी और डेमोक्रेट कर्मचारियों ने मिल कर ये साजिश रची है। उन्होंने कहा कि ट्विटर भले ही एक प्राइवेट कम्पनी हो, लेकिन अनुच्छेद-230 के रूप में सरकार ने उन्हें जो गिफ्ट दिया है उसी कारण वे ये दुस्साहस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इसका अंदाज़ा था, इसलिए जल्द ही बड़ी घोषणा होगी।

कई अन्य वेबसाइटों के साथ डोनाल्ड ट्रम्प की बातचीत चल रही है। साथ ही उन्होंने इशारा किया है कि वो खुद का भी कोई प्लेटफॉर्म ला सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्री स्पीच विरोधी ट्विटर कट्टर वामपंथी विचारधारा के घृणित व्यक्तियों के प्रमोशन का अड्डा बन चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग इस पर खुलेआम बोलते हैं। साथ ही चुनौती दी कि उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी डोनाल्ड ट्रम्प का अकाउंट लॉक कर दिया गया है।

उधर कई रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थन में हैं। अमेरिकी मीडिया का कहना है कि ट्रम्प अभी कहीं नहीं जा रहे हैं और वो राजनीति में प्रासंगिक बने रहेंगे और अगले चुनाव में बतौर उम्मीदवार लौट भी सकते हैं। अरबपति कारोबारी ट्रम्प के बारे में चर्चा है कि ट्रम्प समर्थक कैपिटल हिल उपद्रव को लेकर खुश हैं। कहा जा रहा है कि ‘Trumpism’ अभी यहाँ रहने वाला है और उनका अभियान सशक्त बना रहेगा।

बता दें कि कैपिटल हिल में हिंसा के बीच कॉन्ग्रेस ने जो बाइडेन की जीत पर मुहर लगा दी थी। वे 20 नंवबर को राष्ट्रपति पद सँभालेंगे। उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने इलेक्‍टोरल कॉलेज के वोटों के आधार पर जो बाइडेन के जीत का ऐलान किया है। वहीं इस फैसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे चुनाव के नतीजों से पूरी तरह असहमत है, इसके बावजूद 20 जनवरी को कानून के मुताबिक बाइडेन को सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा।

आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हमलों की जाँच के लिए SIT: CM जगन ने 9 मंदिरों की रखी आधारशिला, 8 का भूमि पूजन

आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हमलों की जाँच के लिए मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली YSRCP सरकार ने 16 सदस्यों वाली स्पेशल जाँच समिति (SIT) का गठन किया है। SIT सितम्बर 2020 के बाद राज्य में मंदिरों पर हुए हमलों की जाँच करेगी। ACB विजयवाड़ा के एडिशनल डायरेक्टर अशोक कुमार को इसका मुखिया बनाया गया है। SIT अपनी रिपोर्ट सीधे सीएम जगन को सौंपेगी।

आंध्र प्रदेश सरकार की इस SIT में 1 SP, 2 एडिशनल SP, 2 DSP, 2 ACP और 4 CI और 4 SI लेवल के पुलिस अधिकारी शामिल हैं। सरकार ने कहा है कि मंदिरों पर हमलों और प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने की इन घटनाओं ने राज्य की सांप्रदायिक शांति को भी भंग किया है, जिस कारण इस SIT का गठन किया जा रहा है। सभी पुलिस अधिकारियों और उनकी यूनिट को SIT को ज़रूरी सहयोग मुहैया कराने का निर्देश दे दिया गया है।

साथ ही FSL के निदेशक को भी सूचित कर दिया गया है कि वो किसी भी प्रकार की फॉरेंसिक सहयोग की स्थिति में SIT के साथ मिलकर काम करें। SIT के कार्यों को प्राथमिकता देने को भी कहा गया है। CID सहित अन्य ख़ुफ़िया एजेंसियों को भी SIT का सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। SIT इन हमलों के पैटर्न का अध्ययन करेगी और सभी जिलों के SP के साथ सामंजस्य बिठा कर जाँच की जाएगी।

विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम के CID के साइबर सेल के PS को भी ज़रूरी सहयोग मुहैया कराने के लिए निर्देशित किया गया है। मामले की जटिलता को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय किया गया। टीम को कहा गया है कि उन्हें जहाँ भी ज़रूरत महसूस हो, वो अतिरिक्त अधिकारियों एवं संसाधन के लिए सीधे राज्य के DGP से संपर्क कर सकते हैं। कोर्ट की निगरानी में SIT के मुखिया जाँच रिपोर्ट तैयार करेंगे।

साथ ही जाँच टीम को ये भी कहा गया है कि वो समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी मुहैया कराते रहें कि जाँच कहाँ तक आगे बढ़ी है, क्या कुछ पता चला है और आगे क्या किया जाना है। राज्य सरकार ने शुक्रवार (जनवरी 8, 2021) को ये आदेश जारी किया। उधर आंध्र प्रदेश IPS एसोसिएशन ने उन आरोपों की निंदा की है, जिसमें पुलिस अधिकारियों पर हिन्दुओं के साथ पक्षपात के आरोप लगाए गए हैं।

इस बीच मुख्यमंत्री जगन ने विजयवाड़ा में 9 मंदिरों के निर्माण की आधारशिला रखी, जिन्हें 4 साल के गैप के बाद बनाया जा रहा है। इसमें आंजनेय स्वामी, राहु-केतु, सीतम्मावरी और वेणुगोपाल मंदिर शामिल हैं। इन मंदिरों के निर्माण का शुरुआती खर्च 3.79 करोड़ रुपए आँका गया है। सीएम ने कनक दुर्गा मंदिर में भी 8 मंदिरों के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया, जिसमें 77 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पूरे दुर्गा मंदिर का कायाकल्प होना है।

ताज़ा घटनाओं की बात करें तो जनवरी 3, 2021 को ही विजयवाड़ा के सीताराम मंदिर में देवी सीता की 40 वर्ष पुरानी मूर्ति खंडित पाई गई थी। यह मंदिर विजयवाड़ा के पंडित नेहरू बस कॉम्पलेक्स में स्थित है। उससे पहले विभिन्न मंदिरों में भगवान गणेश, राम, वेंकटेश और सुब्रमण्येश्वर स्वामी की प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाया गया था। इन घटनाओं को लेकर राज्य की विपक्षी पार्टियाँ भाजपा और टीडीपी लगातार YSRCP पर हमलावर हैं। TDP का कहना है कि हाल के दिनों में 150 के करीब मंदिरों पर हमले हो चुके हैं।

महाराष्ट्र: जिला अस्पताल के न्यूबॉर्न केयर यूनिट में लगी आग, 10 नवजात शिशुओं की मौत

महाराष्ट्र के विदर्भ स्थित भंडारा जिला अस्पताल में आग लगने के कारण 10 नवजात शिशुओं की मौत हो गई। ये घटना शनिवार (जनवरी 9, 2021) की रात 2 बजे हुई। अस्पताल के नवजात (Neonatal) केयर यूनिट में आग लगने के बाद ये हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि आग लगने के कारण चारों ओर धुआँ भर गया था, जिस कारण नवजात शिशुओं का दम घुटने से मौत हो गई।

एक कर्मचारी ने जब यूनिट का दरवाजा खोला तो उसने पाया कि अंदर धुआँ ही धुआँ भरा हुआ है, जिसके बाद उसने अपने वरिष्ठों को इसकी सूचना दी। इसके बाद फायर ब्रिगेड को आग बुझाने के लिए बुलाया गया। भंडारा के अस्पताल के कर्मचारियों ने दावा किया है कि वो 7 नवजात शिशुओं को मौत के मुँह से बचाने में कामयाब रहे हैं। घटना की सूचना के बाद जिले के वरिष्ठ पुलिस-प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे।

ये घटना अस्पताल के ‘न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU)’ में हुई। उस समय वार्ड में कुल 17 नवजात शिशु मौजूद थे। बताया जा रहा है कि शार्ट सर्किट की वजह से ये हादसा हुआ। आमजनों ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा लिया। डिस्ट्रिक्ट जनरल हॉस्पिटल में इस विभाग के दो यूनिट हैं – आउटबॉर्न और इनबॉर्न। इनमें से इनबॉर्न यूनिट के शिशु सुरक्षित हैं। सिविल सर्जन प्रमोद खंडाते ने इस घटना की जानकारी दी।

बता दें कि महाराष्ट्र के अस्पतालों में हाल के दिनों में आग लगने की ये पहले घटना नहीं है। सितम्बर 2020 में राज्य के पश्चिमी क्षेत्र के कोल्हापुर स्थित एक शासकीय अस्पताल में भी शार्ट सर्किट से आग लग गई थी, जब वहाँ 400 से भी अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज चल रहा था। NCP नेता राजेश टोपे फ़िलहाल महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री हैं। अभी तक इस पर सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। महाराष्ट्र सरकार पर पहले से ही कई मामलों में सवाल उठ रहे हैं।

किसान आंदोलन में महिला पत्रकारों का यौन उत्पीड़न, प्रदर्शनकारी नितंबों पर काटते हैं चुटकी: इंडिया टुडे की एडिटर

किसान आंदोलन के नाम पर पिछले दिनों रिपब्लिक टीवी और जी न्यूज की महिला एंकर के साथ बदसलूकी हुई थी। अब इंडिया टुडे की एडिटर प्रीति चौधरी ने दावा किया है कि प्रदर्शनस्थल पर मौजूद ‘कुछ प्रदर्शनकारी’ रिपोर्टरों (पत्रकारों) का यौन उत्पीड़न भी करने लगे हैं, वहीं वहाँ मौजूद अन्य लोग ये सब होने दे रहे हैं।

प्रीति चौधरी ने दावा किया कि ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए उनकी खुद की टीम के पास कई ऐसे वाकये हैं, जब रिपोर्टर को यौन उत्पीड़न झेलना पड़ा।

उनके इस दावे के बाद कॉन्ग्रेस नेता व भारत किसान यूनियन के सदस्य भूपेंद्र चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी और यौन उत्पीड़न को जस्टिफाई करने के लिए उन रिपोर्टर्स को खबरों का भूखा कहा है, जो ‘बलपूर्वक’ खबरों को लेने का प्रयास करते हैं। उनका कहना है कि ऐसे रिपोर्टरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

अब यहाँ यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर यदि एक रिपोर्टर किसी की बाइट लेने के लिए एक सीमा को भी पार करता है, फिर भी उसके साथ हुए यौन उत्पीड़न को महज इस तर्क से कैसे जस्टिफाई किया जा सकता है कि उसने ‘बल’ का इस्तेमाल किया। प्रीति चौधरी उनके इस तर्क पर जवाब देती हैं, “अगर बाइट देना नहीं चाहते तो मत दो। लेकिन कम से कम उसके नितंबों पर चुटकी तो मत काटो।”

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के साथ 8 राउंड की बातचीत के बाद भी किसान यूनियन किसी नतीजे पर नहीं पहुँच पाई है। लगातार केवल नए कानूनों को वापस लेने की माँग की जा रही है। साथ ही नए-नए तरीके अपनाकर प्रदर्शन को तूल देने का प्रयास हो रहा है। हाल में रेवाड़ी में Gangaicha सीमा पर एक नया विरोध स्थल भी सामने आ गया है।

बता दें कि प्रीति चौधरी की शिकायत से पहले भी सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज आए थे जिसमें जी न्यूज और रिपब्लिक भारत की पत्रकारों के साथ बदसलूकी हो रही थी। हालाँकि, उस समय यौन उत्पीड़न जैसे दावे नहीं हुए थे। लेकिन अब यह बिलकुल नया खुलासा है।

‘सेकुलर एजेंडा में औरंगजेब फिट नहीं’: संभाजी नगर पर उद्धव टाइट, कॉन्ग्रेस से चल रही फाइट

औरंगाबाद का नाम संभाजी नगर करने को लेकर महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार का तकरार खत्म होता नहीं दिख रहा है। कॉन्ग्रेस की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि औरंगजेब सेकुलर नहीं था।

उन्होंने कहा, “औरंगजेब सेकुलर नहीं था इसलिए वह सेकुलर एजेंडे में फिट नहीं बैठता है।”

यहाँ बता दें कि शिवसेना काफी समय से औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजी नगर करने की माँग करती रही है। यह माँग उस वक्त भी की गई थी, जब भाजपा के साथ शिवसेना गठबंधन सरकार का हिस्सा थी। अभी हाल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक ट्वीट में औरंगाबाद का जिक्र संभाजी नगर के तौर पर किया गया, जिसकी महाविकास अघाड़ी सरकार की सहयोगी कॉन्ग्रेस के नेताओं ने आलोचना की थी।

कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री बालासाहेब थोराट ने औरंगाबाद को संभाजी नगर करने का विरोध किया था। इसके बाद शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के माध्यम से शहर का नाम बदलने के विषय को जोर-शोर से उठाया।

इस बात से इनकार करते हुए कि नाम बदलने से महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार के भविष्य पर कोई असर पड़ेगा, लेख में बताया गया है कि कैसे शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने 30 साल पहले इसका नाम संभाजी नगर रखा था और लोगों ने इसे तहे दिल से स्वीकार भी किया था। ‘सामना’ के सम्पादकीय में कहा गया है कि नाम को आधिकारिक रूप से लागू करने के लिए बस दस्तावेजों की औपचारिकताओं को छोड़ दिया गया था।

लेख में कहा गया है कि जिस तरह से अयोध्या में श्री राम मंदिर सर्वसम्मति से बनाया जा रहा है, उसी तरह औरंगाबाद का नाम भी आम सहमति से बदल दिया जाएगा। संपादकीय में दावा किया गया कि भारत में मुस्लिम बाबर और औरंगज़ेब का तिरस्कार करते हैं और उन्हें औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजी नगर करने से कोई असहमति नहीं होगी।

73 सालों में भारत में कभी ऐसी सरकार नहीं रही, इसलिए मजबूत फ़ौज की जरूरत: इमरान खान का Video वायरल

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में इमरान खान वर्तमान भारतीय सरकार द्वारा उत्पन्न खतरे को देखते हुए पाकिस्तानी सशस्त्र बलों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं। वहीं मोदी सरकार से डर जताते हुए खान को यह भी कहते हुए सुना जा सकता है कि भारत में पिछले 73 सालों में कभी ऐसी सरकार नहीं आई, जो आज है। हालाँकि यह वीडियो कब की है, इसका पता नहीं चल पाया है।

संभवतः खान किसी रैली में बोल रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार के बाद पाकिस्तान के लिए बढ़े खतरे को मद्देनजर रखते हुए अपने देश को चेतावनी दी कि उन्हें अपनी ताकतों को मजबूत करने की जरूरत है।

पाकिस्तान पीएम इमरान ने कहा, “पाकिस्तान को एक मजबूत फौज की जरूरत है। यह आज की जरूरत है, क्योंकि हमारे साथ जो हमारा हम साया है… वहाँ 73 साल में ऐसी हुकूमत नहीं आई, जो आज हिंदुस्तान में है।”

यह क्लिप लाहौर स्थित 92 न्यूज चैनल द्वारा प्रसारित 73 वें स्वतंत्रता दिवस की रिपोर्ट का एक हिस्सा प्रतीत होता है। भारत सरकार से इमरान का यह डर मोदी शासन की राष्ट्रवादी साख को रेखांकित करता है। बता दें कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री में वर्तमान भारत सरकार द्वारा विकसित यह डर पीएम मोदी के पिछले 6 वर्षों के शासन में लिए गए निर्णय की वजह से आया है।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान द्वारा 2016 में उरी में हुए हमले में लगभग 18 भारतीय सैनिकों के बलिदान होने के बाद मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक का आदेश देने में जरा भी संकोच नहीं किया था। घातक आतंकी हमले के ग्यारह दिन बाद, 29 सितंबर 2016 को भारतीय सशस्त्र बल ने रात में नियंत्रण रेखा को पार कर पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक किया था।

वहीं तीन साल बाद 2019 में मोदी सरकार ने पाकिस्तान में जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी शिविर में हवाई हमले का आदेश दिया था। बता दें, 14 फरवरी 2019 को जेएम के प्रशिक्षित आतंकवादी ने सीआरपीएफ के काफिले के साथ अपनी विस्फोटक से लदी कार से हमला किया, जिसमें 40 सैनिक बलिदान हो गए थे। बारह दिन बाद 26 फरवरी 2019 को, भारतीय लड़ाकू जेट विमानों ने बालाकोट में जेएम के आतंकी शिविर पर बम गिराए, जिसमें 200-300 के करीब आतंकवादी मारे गए थे।

उसी के कुछ महीनों बाद भारत सरकार ने जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को अमान्य कर दिया था। सरकार के इस कदम से पाकिस्तान बौखला गया था और अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद अगस्त 2019 से ही हमला और घुसपैठ करने का प्रयास कर रहा है। लेकिन भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के विरोधों के चलते यथास्थिति को नहीं बदला जा सकता है। इसके बजाय, मोदी सरकार ने अब जम्मू-कश्मीर की बातचीत को पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जे वाले कश्मीर के क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया है।

बदायूँ गैंगरेप के नाम पर शेयर हो रही 20 साल की लड़की की तस्वीर, जानें क्या है सच्चाई?

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार को घेरने के लिए बदायूँ रेप केस का हवाला दे देकर पूरी कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाया जा रहा है। हालाँकि, सवाल उठाने वाले मामले की गंभीरता या उसकी हकीकत से कितने वाकिफ हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि वह सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ी फर्जी जानकारी शेयर करने से गुरेज नहीं कर रहे।

हो सकता है आपने भी कई जगह बदायूँ पीड़िता के नाम पर एक लड़की की तस्वीर शेयर होते देखी हो, जिसकी उम्र मुश्किल से 18-20 साल की लग रही है। जबकि बदायूँ में 50 साल की महिला के साथ वारदात को अंजाम दिया गया।

यूजर्स इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिख रहे हैं, “बदायूँ गैंगरेप-मर्डर केस, मंदिर गई 50 वर्षीय महिला को गैंगरेप के बाद मर्डर कर दिया गया। गैंगरेप के दौरान जो भयावहता की गई शायद राक्षस भी काँप जाता। लेकिन महंत और उसके चेले दानव निकले। बदायूँ पुलिस ने 2 दिन तक मामला छिपाए रखा। ये हैवानियत की पराकाष्ठा है।”

ऐसे कई पोस्ट सोशल मीडिया पर इसी कैप्शन के साथ शेयर हो रहे हैं

अब सवाल उठता है कि आखिर बदायूँ पीड़िता के नाम पर शेयर की जा रही यह तस्वीर किसकी है जिसे ट्विटर फेसबुक पर हर जगह शेयर किया जा रहा है। बता दें कि यह तस्वीर भी एक पीड़िता की ही है। लेकिन इसका संबंध बदायूँ से नहीं है।

ट्वीट को इस लिंक पर क्लिक करके देखेें

साल 2018 में इसी तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करके उन्नाव जिले के सेवक खेड़ा मौरावाँ में एक पीड़िता के लिए इंसाफ माँगा गया था। 25 दिसंबर 2018 के ट्वीट में मान सिंह यादव ने लिखा था, “एक बेटी और चढ़ी दरिंदों के हाथ। उन्नाव ज़िले सेवक खेड़ा मौराँवा की रहने वाली गोल्डी यादव, जिन्होंने उत्तर प्रदेश police की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी, आज सुबह रेप के बाद निर्मम तरीक़े से हत्या कर दी गई। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान। बहुत ही शर्मनाक।”

इसके अलावा उन्नाव पुलिस द्वारा किए गए ट्वीट भी बताते हैं कि ये घटना उन्नाव के सेवक खेड़ मौराँवा की है। गूगल पर यदि गाँव का नाम और पीड़िता का नाम डाल कर सर्च करें तो भी कई मीडिया खबरें बताती हैं कि ये तस्वीर 2018 की है।

इस लिंक पर क्लिक करके ट्वीट देखें

उल्लेखनीय है कि साल 2018 में मौरावां थाना क्षेत्र के अकोहरी गाँव में 20 वर्षीय गोल्डी की शव खेत से बरामद हुआ था। वह 24 दिसंबर की सुबह करीब आठ बजे रोजाना की तरह खेत की ओर गई थी। दो घंटे तक उसके न लौटने पर परिजन खोजबीन को निकले तो 500 मीटर दूरी पर उसका खून से सना पड़ा मिला। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर गोल्डी के लिए इंसाफ की गुहार उठी थी और अब उसकी तस्वीर को शेयर कर करके बदायूँ मामले में कुछ लोग गलत इरादों से शेयर कर रहे।

गुंडा, हरा@जादा, चु#या… यौन उत्पीड़न का केस करूँगी: गालियों से भरे 2 ऑडियो वायरल, क्यों भड़कीं मेनका गाँधी

सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता मेनका गाँधी और रामलिंगम नामक एक कारोबारी के बीच हुई एक कथित बातचीत का ऑडियो वायरल हो रहा है। इस ऑडियो में कथित तौर पर मेनका गाँधी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह उस शख्स पर यौन शोषण का केस दर्ज करा देंगी। यह ऑडियो रामलिंगम द्वारा कथित रूप से एक कुत्ते को बैट से मारने के बाद हुई बातचीत का है।

बातचीत के दौरान, मेनका गाँधी को कथित तौर पर युवक को ‘गुंडा’, ‘बदमाश’ कहते हुए सुना जा सकता है। साथ ही उन्होंने उस पर किसी मालती शाह और नितिन को परेशान करने का आरोप लगाया।

बीजेपी नेता रामलिंगम से कहती हैं, “आप उन्हें परेशान नहीं करेंगे। मैं आपके खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराऊँगी। आप जगह-जगह बकवास कर रहे हैं। आप एक लोकल गुंडे की तरह हो। आप बेरोजगार हैं। आप गुंडागर्दी का इस्तेमाल कर राजनीति में आने की कोशिश कर रहे हैं। क्या आप समझे?”

वहीं रामलिंगम को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। उनका कहना है कि उनकी बेटी को कुत्ते ने काट लिया था। हालाँकि, बातचीत के दौरान मेनका गाँधी उनकी सभी बातों को नजरअंदाज करती हैं। वह उनसे बताता है कि वह सिर्फ एक तरफ की बात सुनकर यह सब कह रही हैं। उनको दोनों पक्षों को सुनना चाहिए। लेकिन इतनी ही बात पर उनकी बात काट दी जाती है।

बातचीत के दौरान मेनका गाँधी यह भी कहती हैं कि, “आप अपने गुंडागर्दी के मुद्दों को सुलझाने के लिए बीजेपी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। क्या तुम समझ रहे रामलिंगम?” जिस पर रामलिंगम ने कहा, “मैडम सॉरी, मैंने कुत्ते को बैट से नहीं मारा। सिर्फ आत्मरक्षा में धकेला था और कुत्ते को कुछ नहीं हुआ था।”

भाजपा नेता ने एक दूसरे पॉइंट पर धमकी देते हुए कहा, “आप झूठे और बदमाश हैं…। आधे समय आप नशे में रहते हैं और आप नशे में लोगों को, महिलाओं को परेशान करते है। अब मैं आपके खिलाफ महिलाओं से छेड़छाड़ का मामला दर्ज करूँगी।” रामलिंगम का कहना है कि अगर ऐसा है तो वह इसके लिए ब्लड टेस्ट भी कराने को तैयार हैं जिसके जरिए यह पता चल जाएगा उन्होंने शराब पी है कि नहीं। उसका कहना है कि वह खुद जानवरों से प्यार करता है और उसके पास 40 गायें हैं। लेकिन मेनका गाँधी ने कहा कि वह गायों को कसाई को बेचता है।

वह रामलिंगम से कहती हैं, “जब मैं बोल रही हूँ तो क्या आप चुप रहेंगे…आप किसी भी जानवर को नहीं मारेंगे। आप स्थानीय तौर पर गुंडागर्दी नहीं करेंगे। मैं अपनी पार्टी के नेताओं को इस बात की जानकारी दूँगी कि आपका व्यवहार बुरा है। अगर इस तरह की चीजें फिर से सामने आईं तो मैं आपके खिलाफ केस दर्ज कराऊँगी और आपको जेल जाना होगा।”

रामलिंगम ने कहा, “आप बस उनकी तरफ से कही बातों पर विश्वास कर रहीं हैं। आपको यहाँ क्या हुआ है, इसके बारे में पूरी बात नहीं बताई गई है। लड़की (मालती) का हमारे क्षेत्र में कोई काम नहीं है। रात में 9:30 बजे कोई काम नहीं होता। कैसे वह हमारे क्षेत्र में आई, वह हमारे क्षेत्र में क्यों आई?” भाजपा नेता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह उनके पिता का क्षेत्र था।

एक और वायरल ऑडियो क्लिप में मेनका गाँधी को कथित तौर पर उस आदमी को ‘हरामजादा’, ‘हरामी’, ‘खूनी सूअर’ और ‘च * तिया’ कहते हुए भी सुना जा सकता है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस के हवाले से कहा, “कुत्ते द्वारा बेटी को काटने के बाद रामलिंगम ने कुत्ते को मारा था। जिसका उनके पड़ोसी नितिन और उनकी दोस्त मालती द्वारा विरोध किया गया था। इस वजह से मालती और उसके बीच बहस छिड़ गई। उसने रामलिंगम के खिलाफ शिकायत दर्ज की और रामलिंगम ने भी उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है। हमने दोनों शिकायतें दर्ज कर ली है।”

पुलिस के अनुसार, रामलिंगम के साथ-साथ पशु कार्यकर्ता मालती और नितिन के खिलाफ 2 जनवरी को एक नॉन- कॉग्नीजेबल रिपोर्ट (एनसीआर) दायर की गई। पुलिस उपायुक्त (केंद्रीय उप-विभाग) एम.एन. अनुचेत ने आईएएनएस को बताया, “ हमें कथित वायरल ऑडियो क्लिप के खिलाफ कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है और न ही यह हमारे ध्यान में आई है। अगर कोई आगे आता है और शिकायत दर्ज करता है, तो हम उस मामले को संज्ञान में लेंगे।”

रोडीज फेम राजीव ने ‘My Girl’ लिख शेयर की रिया चकवर्ती के साथ तस्वीर, भारी पड़ी तो डिलीट कर दी सफाई

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद विवादों के घेरे में आई रिया चक्रवर्ती अब पार्टियों में दिखने लगी हैं। हाल में वह वीजे अनुषा दांडेकर (VJ Anusha Dandekar) की बर्थडे पार्टी में एंजॉय करती नजर आईं। वहाँ उन्हें फरहान अख्तर और रोडीज स्टार राजीव लक्ष्मण समेत कई जाने-माने चेहरों के साथ देखा गया।

Picture of all the guests from Anusha’s birthday celebrations.
पार्टी में रिया चक्रवर्ती और अन्य

रोडीज फेम राजीव ने रिया के साथ हुई मुलाकात की कई तस्वीरें भी इंस्टा पर ‘My Girl’ लिख कर साझा की। राजीव की पत्नी सुसान ने भी एक ग्रुप पिक्चर शेयर की। एक ओर जहाँ रिया की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर खबरों का हिस्सा बन गईं। राजीव को रिया के साथ तस्वीरों को शेयर करना भारी पड़ गया।

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जैसे ही राजीव ने फोटो शेयर किया लोग जमकर उन्हें ट्रोल करने लगे और कुछ ने उनका मजाक बनाना भी शुरू कर दिया। कुछ ने राजीव और रिया की डेटिंग की खबरें भी बनाई। अंत में तंग आकर राजीव को अपनी फोटो डिलीट करनी पड़ी। साथ ही रिया से अपने रिश्ते पर सफाई भी पेश की।

राजीव ने यह पोस्ट शेयर कर बताया कि उन्होंने कैप्शन के लिए गैर जिम्मेदाराना शब्दों का चुनाव किया और खुद के लिए दिक्कत खड़ी कर दी। रिश्ते पर सफाई देते हुए राजीव ने लिखा,  “रिया मेरी प्यारी सी पुरानी दोस्त है, और मैं उससे दोबारा मिलकर बहुत खुश हूँ, और चाहता हूँ कि वह हमेशा खुश रहे।”

गौरतलब है जमानत पर छूटने के बाद ये पहली दफा है कि रिया चक्रवर्ती ने किसी पार्टी में हिस्सा लिया हो। रिया के साथ काम करने वाले रुमी जाफरी ने इससे पहले उनके लिए कहा था कि जेल में बिताए समय ने उन्हें बुरी तरह तोड़ दिया है। उन्होंने कहा था:

यह उसके लिए एक बहुत पीड़ादायक साल रहा। बेशक साल सभी के लिए बुरा था। लेकिन उसके मामले में यह दूसरे स्तर का ट्रॉमा था। क्या आप एक मध्यम वर्गीय परिवार की किसी लड़की के एक महीने जेल में बिताने की कल्पना कर सकते हैं? इसने उसके मनोबल को पूरी तरह से तोड़ दिया है।

बता दें कि सुशांत केस में ड्रग एंगल का खुलासा होने के बाद रिया को एनसीबी ने 8 सितंबर को गिरफ्तार किया था। रिया पर सुशांत सिंह राजपूत के लिए ड्रग्स की खरीद-फरोख्त करने का आरोप है। पिछले दिनों उनके अलावा शौविक, सैमुअल समेत कई लोग गिरफ्तार किए गए थे। वहीं रिया को भायखला जेल में बंद किया गया था। करीब एक माह बाद उन्हें सशर्त बेल मिली थी।

‘सुपरमॉम’ सुषमा का दिखाया रास्ता, जिस पर आगे बढ़कर परदेस में फँसी महिलाओं को बचा रहा विदेश मंत्रालय

भारत की विदेश नीति पर अक्सर सवाल खड़े किए जाते रहते हैं। यह सिलसिला पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ा है। इस तथ्य का एक और पहलू है, कि भले कितने भी सवाल उठे हों, लेकिन अंततः मदद भी उस सरकार से ही माँगी जाती है और वही सरकार मदद के लिए आगे आती है। बीते कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए जिनमें नौकरी और अन्य लालच देकर भारत के नागरिकों को दूसरे देशों में भेजा गया। वहाँ उनके साथ शोषण शुरू हो गया, जिसके बाद उन्हें सरकार से मदद की गुहार लगानी पड़ी। 

आज ही एक ऐसा मामला सामने आया, हैदराबाद की एक महिला ने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि यूएई स्थित ओमान से उनकी बेटी को वापस लाया जाए।

दरअसल, महिला की बेटी का निकाह ओमान के एक युवक से किया गया था। कुछ समय बाद महिला को पता चला कि उसका दामाद मानसिक रूप से अस्वथ्य है। वह उनकी बेटी के साथ मारपीट और शोषण करता है, खाना तक नहीं देता है। इस बात की जानकारी होने के बाद उन्होंने अपनी बेटी को वहाँ से वापस लाने का भारत सरकार से निवेदन किया है। 

यह तो सिर्फ आज की घटना है। ऐसी कई घटनाएँ हैं जिनमें विदेश में मौजूद भारतीय नागरिकों के साथ शोषण हुआ। इसी तरह नफ़ीसा (परिवर्तित नाम) नाम की युवती को शफी नाम के ट्रैवल एजेंट ने नौकरी का झाँसा देकर दुबई भेज दिया। वहाँ उसे भयावह प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, उसकी पूरी ज़िंदगी जहन्नुम में तब्दील हो गई। ऐसा सिर्फ उसके साथ ही नहीं बल्कि कई अन्य महिलाओं के साथ भी हुआ। 

2020 के दिसंबर महीने में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। आरोपित शफी ने हैदराबाद की 5 महिलाओं को नौकरी दिलाने के बहाने दुबई भेजा और वहाँ उनके साथ तमाम तरह का अत्याचार शुरू हो गया। महिलाओं को वेतन मिलना तो दूर उनसे 15 घंटे काम कराया जाता था और उन्हें खाना तक नहीं दिया जाता था। इन सभी के लिए उम्मीद की इकलौती किरण थी भारत सरकार और सरकार ने अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी बखूबी निभाई।  

ऐसे में 2020 के उस वक्त का ज़िक्र ज़रूरी हो जाता है जब कोरोना वायरस से घिरे वुहान शहर से भारतीय छात्रों को वापस बुलाया जा रहा था। केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय की इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में अहम नाम शामिल था, दिवंगत सुषमा स्वराज का। ऐसी नेता जिन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए ‘सुपर मॉम’ का दर्जा दिया गया था। 

विदेश मंत्री रहते उन्होंने कहा था कि अग़र आप मंगल ग्रह पर भी फँस गए तो भी भारतीय दूतावास आपकी मदद करेगा। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री रहीं सुषमा ने दूर-दराज देशों में फँसे अपने लोगों को वापसी करवाने में अहम भूमिका निभाई थी। चाहे वह पाकिस्तान से गीता की वापसी हो ​या फिर युद्धग्रस्त यमन से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी वे लोगों की मदद के लिए तत्पर रहती थीं। इसी सक्रियता के कारण ही वाशिंगटन पोस्ट ने उन्हें ‘सुपरमॉम’ के नाम से नवाजा था। भारत सरकार ने प्रवासी भारतीय केंद्र और विदेशी सेवा संस्थान का नाम बदलकर दिवंगत सुषमा स्वराज के नाम पर रखने की घोषणा की थी

पिछले कुछ समय में इस तरह कई मामले सामने आए हैं, जिनमें भारत के नागरिकों को झाँसा देकर अन्य देशों भेजा गया। इसके बाद वहाँ पर उन्हें अनेक प्रकार का अत्याचार और शोषण का सामना करना पड़ा। मुश्किल हालातों का सामना करने के बाद लोगों ने ‘भारत सरकार’ से मदद माँगी और सरकार ने अपने लोगों की आशाओं पर खरा उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन घटनाओं के आधार पर ऐसा कहा जा सकता है कि आने वाले समय में भारत सरकार अपने नागरिकों पर मुसीबत आने की सूरत में सशक्त भूमिका निभाएगी।