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‘सुपरमॉम’ सुषमा का दिखाया रास्ता, जिस पर आगे बढ़कर परदेस में फँसी महिलाओं को बचा रहा विदेश मंत्रालय

भारत की विदेश नीति पर अक्सर सवाल खड़े किए जाते रहते हैं। यह सिलसिला पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ा है। इस तथ्य का एक और पहलू है, कि भले कितने भी सवाल उठे हों, लेकिन अंततः मदद भी उस सरकार से ही माँगी जाती है और वही सरकार मदद के लिए आगे आती है। बीते कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए जिनमें नौकरी और अन्य लालच देकर भारत के नागरिकों को दूसरे देशों में भेजा गया। वहाँ उनके साथ शोषण शुरू हो गया, जिसके बाद उन्हें सरकार से मदद की गुहार लगानी पड़ी। 

आज ही एक ऐसा मामला सामने आया, हैदराबाद की एक महिला ने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि यूएई स्थित ओमान से उनकी बेटी को वापस लाया जाए।

दरअसल, महिला की बेटी का निकाह ओमान के एक युवक से किया गया था। कुछ समय बाद महिला को पता चला कि उसका दामाद मानसिक रूप से अस्वथ्य है। वह उनकी बेटी के साथ मारपीट और शोषण करता है, खाना तक नहीं देता है। इस बात की जानकारी होने के बाद उन्होंने अपनी बेटी को वहाँ से वापस लाने का भारत सरकार से निवेदन किया है। 

यह तो सिर्फ आज की घटना है। ऐसी कई घटनाएँ हैं जिनमें विदेश में मौजूद भारतीय नागरिकों के साथ शोषण हुआ। इसी तरह नफ़ीसा (परिवर्तित नाम) नाम की युवती को शफी नाम के ट्रैवल एजेंट ने नौकरी का झाँसा देकर दुबई भेज दिया। वहाँ उसे भयावह प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, उसकी पूरी ज़िंदगी जहन्नुम में तब्दील हो गई। ऐसा सिर्फ उसके साथ ही नहीं बल्कि कई अन्य महिलाओं के साथ भी हुआ। 

2020 के दिसंबर महीने में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। आरोपित शफी ने हैदराबाद की 5 महिलाओं को नौकरी दिलाने के बहाने दुबई भेजा और वहाँ उनके साथ तमाम तरह का अत्याचार शुरू हो गया। महिलाओं को वेतन मिलना तो दूर उनसे 15 घंटे काम कराया जाता था और उन्हें खाना तक नहीं दिया जाता था। इन सभी के लिए उम्मीद की इकलौती किरण थी भारत सरकार और सरकार ने अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी बखूबी निभाई।  

ऐसे में 2020 के उस वक्त का ज़िक्र ज़रूरी हो जाता है जब कोरोना वायरस से घिरे वुहान शहर से भारतीय छात्रों को वापस बुलाया जा रहा था। केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय की इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में अहम नाम शामिल था, दिवंगत सुषमा स्वराज का। ऐसी नेता जिन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए ‘सुपर मॉम’ का दर्जा दिया गया था। 

विदेश मंत्री रहते उन्होंने कहा था कि अग़र आप मंगल ग्रह पर भी फँस गए तो भी भारतीय दूतावास आपकी मदद करेगा। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री रहीं सुषमा ने दूर-दराज देशों में फँसे अपने लोगों को वापसी करवाने में अहम भूमिका निभाई थी। चाहे वह पाकिस्तान से गीता की वापसी हो ​या फिर युद्धग्रस्त यमन से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी वे लोगों की मदद के लिए तत्पर रहती थीं। इसी सक्रियता के कारण ही वाशिंगटन पोस्ट ने उन्हें ‘सुपरमॉम’ के नाम से नवाजा था। भारत सरकार ने प्रवासी भारतीय केंद्र और विदेशी सेवा संस्थान का नाम बदलकर दिवंगत सुषमा स्वराज के नाम पर रखने की घोषणा की थी

पिछले कुछ समय में इस तरह कई मामले सामने आए हैं, जिनमें भारत के नागरिकों को झाँसा देकर अन्य देशों भेजा गया। इसके बाद वहाँ पर उन्हें अनेक प्रकार का अत्याचार और शोषण का सामना करना पड़ा। मुश्किल हालातों का सामना करने के बाद लोगों ने ‘भारत सरकार’ से मदद माँगी और सरकार ने अपने लोगों की आशाओं पर खरा उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन घटनाओं के आधार पर ऐसा कहा जा सकता है कि आने वाले समय में भारत सरकार अपने नागरिकों पर मुसीबत आने की सूरत में सशक्त भूमिका निभाएगी।  

व्यंग्य: नमस्कार, मैं भारत का सल्फेटिया वामपंथ, RSS ने करवाया अमेरिका में बवाल

भले ही दक्षिणपंथी ट्रम्प के समर्थकों ने अमेरिकी संसद पर हमला कर दिया, पर आज मैं आह्लादित हूँ कि उनमें से एक के हाथों में तिरंगा भी था। अब मैं आराम से उस तिरंगाधारी को RSS का ब्राह्मणवादी, पितृसत्तात्मक, भगवा आतंकी बोल कर, अपने लिब्रांडू समाज के व्हाट्सएप्प ग्रुपों में छा जाऊँगा।

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‘इस्लाम खतरे में है, जितने हिंदुओं को मारना पड़े मारेंगे, घरों में आग लगाएँगे’: मोदी सरकार को घुटनों पर लाने का उमर खालिद-ताहिर हुसैन का प्लान

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में आरोपित बनाए गए आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसके कबूलनामे का जिक्र दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में है। इसमें उसने बताया है कि कैसे उमर खालिद और खालिद सैफी के संपर्क में आकर उसने दंगों की तैयारी की।

इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ताहिर हुसैन ने बताया कि वह United Against Hate ग्रुप का हिस्सा है और इसी के जरिए वह खालिद सैफी व उमर खालिद से जुड़ा। उसके कबूलनामे के मुताबिक वह इन लोगों के भाषण सुनता था। खालिद ने उससे कहा था, “CAA में बड़ा दंगा करेंगे। जिससे सरकार हिल जाएगी। बस मैं इलाके में लड़के तैयार रखूँ।”

ताहिर ने बताया कि 8 जनवरी को खालिद सैफी ने उसकी मुलाकात उमर खालिद से करवाई। उमर ने कहा, “जब तक कुछ बड़ा धमाका नहीं करेंगे तब तक केंद्र सरकार नहीं हिलेगी। 370 और राम मंदिर पर हम चुप रहे, पर CAA वापस करवा कर रहेंगे। तब तक सरकार घुटनों पर नहीं आएगी, जब तक हम बड़ा धमाका नहीं करेंगे। इसके लिए देश में चाहे जितनी आग लगानी पड़े। विदेशों में सरकार की बदनामी हो इसके लिए जितने घरों में आग लगानी पड़ी, जितने हिंदुओं को मारना हो मारेंगे।”

बता दें कि उमर खालिद भी इससे पूर्व कबूलनामे में दंगों में अपनी भूमिका का खुलासा कर चुका है। उसने 16 और 17 फरवरी 2020 को हुई मीटिंग को लेकर बताया था, “हमने 16 और 17 फरवरी की शाम एक मीटिंग में तय किया कि दंगा ही एकमात्र तरीका है जिससे भारत सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। फिर मैंने ही लोगों से कहा कि वे अपने पास पत्थर, तेजाब, पेट्रोल और हथियारों को इकट्ठा करके रखें और जब जरूरत पड़े इसका इस्तेमाल करें।”

उसने कहा, “मैं अमरावती और महाराष्ट्र भी प्रदर्शन में शामिल होने गया था। जहाँ मैंने कहा कि हम सब डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान 24 फरवरी को सड़कों पर आकर भारत सरकार पर दबाव बनाएँगे और हमारे लोगों ने अपनी योजना के मुताबिक डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान ही 24 तारीख को दिल्ली के अलग-अलग इलाको में चक्का जाम दंगे करवाना शुरू कर दिए। देखते ही देखते उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाको में दंगे फैल गए।”

यहाँ याद दिला दें कि ताहिर हुसैन ने बताया था कि उसे उमर खालिद ने ही कहा था कि पैसों की चिंता करने की जरूरत नहीं है। दिल्ली में बैठे दोस्त और पीएफआई पैसों का इंतजाम कर रहे हैं। ताहिर के अनुसार उमर खालिद ने उससे कहा था, “आप सिर्फ़ दंगों की तैयारी करो। दंगों के लिए लोगों को इकट्ठा करो। सामान खरीदो और पैसों की चिंता बिलकुल मत करो। खालिद आपको पैसे दिलवाएगा।”

बता दें कि ताहिर हुसैन ने गुलफाम के साथ हुए पैसों के लेन-देन पर भी बताया और कहा कि उसी ने पैसों से बंदूक के लिए कारतूस और अन्य सामग्री खरीदी। खालिद ने ही ताहिर को उमर के हवाले से ये भी कहा कि ‘इस माह’ दंगे होंगे। उसने उमर का हवाला देकर कहा कि इस्लाम खतरे में है। सैफी के कबूलनामे से साफ पता चलता है कि उन्हें पहले से खबर थी कि चक्का जाम करने से दंगे भड़क सकते हैं।

उसके मुताबिक ट्रंप के दौरे के दौरान सड़कें जाम की गई और लोगों को जब परेशानी हुई तो दंगे शुरू हो गए। 24 फरवरी को जब सैफी ने ताहिर हुसैन से बात की तो उसे जानकारी दी गई कि सब कुछ प्लान के मुताबिक हो रहा है। हिंदुओं के घरों को आग लगाई जा चुकी है।

गौरतलब है कि दिल्ली दंगों में आरोपित बनाए गए इन सभी कट्टरपंथियों के कबूलनामे दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में उल्लेख किया है। ये चार्जशीट कोर्ट में दायर की जा चुकी है। कड़कड़डूमा कोर्ट इस पर संज्ञान ले रहा है।

‘महिलाएँ रेप के लिए उकसाती हैं’: कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी की खुली पोल-पट्टी तो डिलीट मारे ट्वीट

ट्विटर पर अक्सर बीजेपी विरोधी पोस्ट और फेक न्यूज़ शेयर करने वाले केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के कॉन्ग्रेस नेता सलमान निज़ामी ने दावा किया है कि कैपिटल हिल विरोध-प्रदर्शन के दौरान भारतीय तिरंगा लहराने वाला व्यक्ति मोदी समर्थक है, जो लोकतंत्र की हत्या करने के लिए ट्रम्प समर्थकों के साथ कंधे से कंधा मिला कर प्रदर्शन में शामिल था।

निजामी ने यह भी दावा किया कि पीएम मोदी ने ‘अब की बार ट्रम्प सरकार’ का नारा बुलंद किया था और दूसरे देश के प्रमुख के लिए प्रचार किया था। बता दें कॉन्ग्रेसी नेता के दोनों दावे झूठे हैं। विन्सेन्ट ज़ेवियर नाम के जिस व्यक्ति ने झंडा लहराया था, वह केरल का एक इंजीनियर है जो अमेरिका में रहता है। वह रिपब्लिकन पार्टी का एक सदस्य है और कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर का समर्थक भी। वहीं पीएम मोदी ने ट्रंप के समर्थन में ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ का नारा दिया था, यह दावा भी फर्जी और निराधार है।

फेक न्यूज़ फैलाने वाले कॉन्ग्रेस नेता को आड़े हाथों लेते हुए ट्विटर यूजर ने निज़ामी द्वारा ट्वीट किए गए कई पुराने ट्वीट्स को ढूँढ निकाला, जिसमें उसने महिलाओं को लेकर बेहद ही भद्दी, कामुक और अशोभनीय टिप्पणी की है। निज़ामी ने महिलाओं के खिलाफ होने वाले हिंसक अपराधों के बारे में विचित्र अटकलें लगाते हुए कहा है कि महिलाएँ स्वयं ही अपने साथ हो रहे अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं।

निज़ामी ने साल 2013 में किए गए एक ट्वीट में दावा किया कि ‘केवल आकर्षक महिलाओं का बलात्कार होता है।’

इसके अलावा एक अन्य ट्वीट में निजामी ने दावा किया कि महिलाएँ अपनी बाहरी रूप-रंग से यौन उत्पीड़न के लिए मर्दों को उकसाती हैं। यौन आकर्षण प्राथमिक कारण है कि एक बलात्कारी किसी पीड़िता का चयन करता है।

सिर्फ महिलाओं का आकर्षण ही नहीं, निजामी ने महिलाओं को स्वयं के बलात्कार के लिए भी दोषी ठहराया है। निज़ामी के अनुसार, जो महिलाएँ ‘उत्तेजक’ कपड़े पहनती हैं, वे खुद ही अपने लिए परेशानी खड़ी करती हैं।

जैसे ही आज सोशल मीडिया पर पुराने ट्वीट्स तेजी से शेयर होने लग गए, निजामी ने तुरंत उन्हें डिलीट कर दिया है और उन लोगों को ब्लॉक कर दिया, जो उनसे ऐसे घटिया ट्वीट के पीछे के मकसद के बारे में पूछ रहे थे।

दिलचस्प बात यह है कि सलमान ने अपने आपत्तिजनक ट्वीट्स के लिए एक बहुत ही घटिया सी सफाई लोगों के सामने पेश की। उन्होंने कहा कि 2013 के ट्वीट अन्य राजनेताओं के जवाब में थे और उस समय वह “पत्रकार” थे। सलमान को लगता है कि पत्रकार होने के नाते यकीनन लोगों को बकवास बातें करने की छूट मिल जाती है।

गौरतलब है कि निजामी को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का बेहद करीबी माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2014 में उन्हें राहुल के इशारे पर जम्मू और कश्मीर प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति के संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था।

निज़ामी एक फेक न्यूज़ पेडलर के रूप में भी जाना जाता है जो मोदी सरकार के खिलाफ अक्सर फेक न्यूज़ फैलाता रहता है। निज़ामी ने पहले भी कई बार भारत विरोधी और अलगाववादी ट्वीट भी शेयर किए हैं। इसके अलावा उसने आतंकवादी अफ़ज़ल गुरु का खुलेआम समर्थन किया था।

अब सौरव गांगुली की करीबी MLA वैशाली डालमिया ने TMC की खोली पोल, लक्ष्मी रतन भी मंत्री पद से दे चुके हैं इस्तीफा

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सौरव गांगुली की एक और करीबी व बल्ली विधानसभा से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) विधायक वैशाली डालमिया ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। इससे पहले सौरव के खास लक्ष्मी रतन शुक्ला ने मंत्री पद से अपना इस्तीफा ममता सरकार को सौंपा था।

वैशाली डालमिया पूर्व क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर जगमोहन डालमिया के बेटी होने के साथ सौरव गांगुली की अच्छी फैमिली फ्रेंड भी हैं। ऐसे में उनकी नाराजगी को सौरव गांगुली से जोड़ कर देखा जा रहा है। हालाँकि, डालमिया का कहना है कि उन्हें तृणमूल कॉन्ग्रेस के शासन में राज्य की चिंता है। उन्होंने ने पार्टी के वर्क कल्चर पर सवाल उठाए हैं

उन्होंने कहा कि पार्टी में कुछ लोग दूसरों को काम नहीं करने दे रहे। ऐसे लोग दीमक की तरह पार्टी को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं। इंडिया टीवी को दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से अपने विधानसभा में हो रहे भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज उठा रही हैं। उनकी मानें तो पार्टी के लोग ही एक-दूसरे को पिछले 3-4 साल से काम करने नहीं दे रहे हैं।

टीएमसी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में ममता सरकार के मंत्री लक्ष्मी रतन शुक्ला ने दुखी होकर मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और अब उन्हें पार्टी के लोगों के हमले का सामना करना पड़ रहा है। ये ऐसे लोग (TMC) हैं, जो दूसरी पार्टियों से ही नहीं, बल्कि अपनी पार्टी के अंदर ही लड़ते रहते हैं। इन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी कोई लगाव नहीं है।

वह कहती हैं कि उन्हें रतन शुक्ला के इस्तीफे के बाद बहुत बुरा लग रहा है। वह अच्छा काम कर रहे थे। वह पार्टी के कामकाज से नाराज नहीं हैं, लेकिन उनकी शिकायत है कि टीएमसी पार्टी के सदस्य ही काम के दौरान रोड़ा बनने का काम करते हैं।

तृणमूल कॉन्ग्रेस में ऐसे लोग हैं जिन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं से कोई प्यार नहीं है, जो राज्य के लोगों से प्यार नहीं करते, वे सिर्फ खुद से प्यार करते हैं। वे दीमक हैं जो पार्टी को भीतर से खा रहे हैं। ये वे लोग हैं जो दूसरी पार्टियों से नहीं लड़ते बल्कि भीतर के लोगों से लड़ते हैं। उन्हें ममता बनर्जी से प्यार भी नहीं है।

क्या भाजपा में शामिल होंगी वैशाली?

वैशाली के बयान के बाद ये अटकलें लगाई गईं कि वह भाजपा में शामिल होने वालीं हैं। हालाँकि उन्होंने इस पर विराम लगाते हुए कहा कि फिलहाल उनकी भाजपा से जुड़ने की इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं लोगों के लिए काम करना जारी रखूँगी। मुझे कई बार गैर-राजनीतिक कहा गया है। अब ऐसा ही होगा। मैं लोगों के साथ काम करना जारी रखूँगी, उनके साथ खड़ी रहूँगी। ”

दीदी बनाम दादा?

वैशाली की सौरव गांगुली से करीबियों के कारण भी उनके भाजपा में शामिल होने की बातें कहीं गई थी। हाल में लक्ष्मी रतन के पद से इस्तीफा देने पर भी यही अटकलें तेज हुई थीं। जिनके पीछे सबके बड़ा कारण सौरव गांगुली की भाजपा से करीबियाँ है।

गांगुली न केवल अमित शाह और उनके बेटे जय शाह के करीबी माने जाते हैं बल्कि हाल में उन्होंने राज्यपाल धनखड़ के साथ भी मुलाकात की थी। इसी प्रकार डोना गांगुली भी भाजपा महिला मोर्चा की दुर्गा पूजा में नृत्य प्रदर्शन करते देखी गई थीं। गांगुली की लोकप्रियता का ही नतीजा है कि आगामी विधानसभा लोग को दादा बनाम दीदी के नजरिए से देख रहे हैं।

वैशाली की भाँति लक्ष्मी रतन को भी अपने फैसले के बाद साफ करता पड़ा था कि चूँकि वह कुछ समय तक राजनीति से दूरी बनाना चाहते हैं इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया है। उन्होंने किसी भी पार्टी में शामिल होने के कयासों को खारिज किया था। साथ ही कहा था कि अभी वह विधायक हैं और फिलहाल मंत्री पद से इस्तीफा देकर सिर्फ़ अपना ध्यान खेल पर लगाएँगे।

भारी बर्फबारी के बीच मंजूर अहमद की गर्भवती बीवी को लेकर 2 किमी चले जवान, अस्पताल पहुँचाया-गूँजी किलकरियाँ

कश्मीर में जारी भारी बर्फ़बारी के बीच सेना एक तरफ आतंकी मंसूबों को नाकाम करने में जुटी है, दूसरी तरफ उसके जवान हर हालात में स्थानीय लोगों की मदद को तत्पर हैं। घुटनों तक जमी बर्फ़ के बीच भारतीय सेना के जवान एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुँचाने के लिए दो किलोमीटर तक चले। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ महिला ने शुक्रवार (8 जनवरी 2021) को करलपुरा अस्पताल में एक लड़के को जन्म दिया।  

मंगलवार (5 जनवरी 2021) को कुपवाड़ा के करलपुरा स्थित भारतीय सेना, कंपनी ऑपरेशन बेस (सीओबी) में रात के लगभग 11:30 बजे मंज़ूर अहमद शेख नाम के युवक का फोन आया। फर्कियां गाँव का रहने वाला मंज़ूर कॉल पर बातचीत के दौरान काफी परेशान था। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उसने सेना के जवानों से कहा कि उसकी पत्नी को बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है और जल्द से जल्द अस्पताल में भर्ती कराए जाने की ज़रूरत है। 

जिस वक्त मंज़ूर शेख का सेना के जवानों के पास फोन आया उस वक्त पिछले एक दिन से लगातार बर्फ़बारी जारी थी। जिसकी वजह से पूरे क्षेत्र में घुटनों तक बर्फ़ जम गई थी। खराब मौसम और भीषण बर्फ़बारी की वजह से न तो सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँच सकती थीं और न ही नागरिक परिवहन से जुड़ी कोई सेवा मददगार साबित होती। आवागमन के पूरे रास्तों पर बर्फ़ जमी हुई थी।

नर्सिंग असिस्टेंट, मेडिकल किट के साथ पहुँचे जवान

ऐसे हालातों में जब कोई विकल्प नहीं बचा रह गया तब भारतीय सेना के जवान मदद के लिए आगे आए। सेना के जवान युद्ध के दौरान मौजूद रहने वाली नर्सिंग असिस्टेंट और मेडिकल किट के साथ मंज़ूर अहमद शेख के घर पहुँचे। इसके बाद वह महिला को अपने कंधों पर लेकर बर्फ़ वाले रास्ते पर दो किलोमीटर तक चल कर करलपुरा अस्पताल लेकर गए। वहाँ पहुँचते ही तुरंत स्वास्थ्य कर्मचारियों ने महिला का उपचार शुरू किया। भारतीय सेना के जवानों ने उन्हें पहले से सूचित कर दिया था जिसकी वजह से वह उपचार के लिए तैयार हो गए थे। 

मंज़ूर अहमद शेख के परिवार वालों और प्रशासन ने भारतीय सेना का इस मानवीय प्रयास के लिए आभार जताया है। बच्चे के जन्म के बाद मंज़ूर अहमद शेख ने कंपनी ऑपरेशन बेस जाकर जवानों को मिठाई खिलाई।         

नमस्कार, मैं भारत का वामपंथ… RSS ने करवाया अमेरिकी संसद पर हमला!

नमस्कार, मैं भारत का वामपंथ हूँ, सल्फेटिया वामपंथ! भले ही दक्षिणपंथी ट्रम्प के समर्थकों ने अमेरिकी संसद पर हमला कर दिया, पर आज मैं आह्लादित हूँ कि उनमें से एक के हाथों में तिरंगा भी था। अब मैं आराम से उस तिरंगाधारी को RSS का ब्राह्मणवादी, पितृसत्तात्मक, भगवा आतंकी बोल कर, अपने लिब्रांडू समाज के व्हाट्सएप्प ग्रुपों में छा जाऊँगा। वैसे भी किसान आंदोलन में मेरे इच्छाधारी प्रदर्शनकर्मी योगेन्द्र यादव के दाने के बाद भी, कुछ खास होता नहीं दिख रहा।

पर मैं तो भारत का सल्फेटिया वामपंथ हूँ, मुझे तो चाहिए आग, रक्त, चिंगारी और बारूद ताकि मैं उनसे अपना पोषण पाता रहूँ। मैं ही तो अपनी दिमागी लकवाग्रस्त संतान ‘द वायर’ की वो दोगली पत्रकारिता हूँ जहाँ मैं कैपिटोल अटैक पर यह कहता पाया जाता हूँ कि तैयारी महीनों की थी, और पुलिस हाथ मलती रह गई, लेकिन मैं सारे सबूतों के मेरे चश्मे के शीशों के भीतर तक सटा कर दिखाने के बाद भी दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों की प्लानिंग में ताहिर हुसैन, फारूक फैजल की मौजूदगी, मुस्लिम घरों और मस्जिद की छतों के ऊपर पत्थरों का ढेर कभी देख नहीं पाता।

मैं भारत का ‘दो रुपिया दे दो न कामरेड, बीड़ी पीनी है कामरेड’ कह कर गिड़गिड़ाता जेएनयू का वो नालायक माओवंशी हूँ जो ब्लैक लाइव्स मैटर पर घंटे में सात बार स्खलित हो रहा था, और अमेरिकी संसद पर हुए इस प्रदर्शन को देख कर अलीगढ़ के लाल कुआँ वाले हकीम उस्मानी के दवाखाने की तरफ भागता पाया जाता हूँ।

मैं वो फेसबुकिया वामपंथन भी हूँ, जो ब्लैक लाइव्स मैटर के दंगों और लूट को सिर्फ इसलिए जस्टिफाय कर रही थी क्योंकि उसे कूल माना जा रहा था। मैं वो फेसबुकिया वामपंथन हूँ जो ब्लैक लाइव्स मैटर पर रंगभेद का ज्ञान देती हूँ, जबकि मेरी पूरी उम्र फाउंडेशन मार कर चेहरे को गोरा करने में सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि सॉफ्टवेयर इंजीनियर के प्रेम का और बैंक पीओ से विवाह के दोहरे आनंद का कोई जोड़ा नहीं है। मेरी सारी एक्टिविज्म तब गायब हो जाती है जब मैं सोशल मीडिया पर अपने साँवलेपन को फिल्टर के गोरेपन में छुपा लेती हूँ क्योंकि बैंक पीओ को गोरी लड़की चाहिए, और मुझे बैंक पीओ चाहिए!

मैं वो फेसबुकिया चिरकुट हूँ जिसे यह नहीं पता कि दूध जानवर से मिलता है न कि मदर डेयरी से, पर मैं वैश्विक मुद्दों पर सबसे पहले प्रोफाइल पिक्चर बदल कर काला कर लेता हूँ। मेरी वामपंथी ठरक मुझे वामपंथनों की कविताओं पर “आ हा हा! क्या लिखा है आपने… आप बस प्रेम लिखती हैं… आपके शब्द जैसे कि भोर की पहली किरण, जैसे कि घास पर टिकी ओस की बूँद, जैसे शांत नदी की सतह से उठती धुंध… आपने जो लिखा, उससे बेहतर क्या लिखा जाएगा!” जैसी बातें लिखने को मजबूर करती हैं, और इसी चक्कर में मैं इन्स्टाग्राम पर अमेरिकी लड़कियों के पोस्ट के नीचे ट्रम्प को गरियाता नजर आता हूँ कि कहीं उनकी निगाहों में आ जाऊँ। लेकिन खराब अंग्रेजी के कारण ‘नाइस मीटिंग यू, कीप इन टच’ को ‘नाइस मीटिंग, कीप टचिंग’ लिख कर वैसी गालियाँ सुनता हूँ जिसका अर्थ मुझे अर्बन डिक्शनरी पर खोजना पड़ता है, जिसे पढ़ कर मैं आह्लादित होता हूँ कि ‘चलो, गाली भी तो इंग्लिश में दी है लड़की ने, नोटिस तो किया कम से कम!’

मैं भारत का वो लम्पट पत्रकार हूँ जो सीलमपुर, मौजपुर, जाफराबाद, मेरठ, लखनऊ, फुलवारीशरीफ आदि में हो रही पत्थरबाजी, आगजनी, इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दुओं को जिंदा जला दिए जाने की घटनाओं को छिटपुट और प्रोपेगेंडा तक कहता हूँ, लेकिन अमेरिका में हो रहे प्रदर्शन को इसलिए हिंसक बताता हूँ क्योंकि वो तो ट्रम्प के समर्थक थे, तो उन्हें विरोध का अधिकार कैसे दे दिया जाए!

मैं बंगाल का वो मंत्री हूँ जो धूलागढ़, मुर्शिदाबाद, मालदा, बर्धमान आदि के दंगों और आगजनी को सिर्फ इसलिए होने देता रहा क्योंकि मुझे एक समुदाय का वोट चाहिए, लेकिन अमेरिकी संसद पर हुए प्रदर्शन में मैं RSS की साजिश सिर्फ इसलिए देख लेता हूँ क्योंकि छः दिसम्बर को बाबरी ध्वस्त की गई थी, और यह हमला छः जनवरी को हुआ था।

आज मैं सिर्फ इसलिए खुश हूँ क्योंकि उस तिरंगे वाले के कारण मैं खुल कर कह सकता हूँ कि वो मोदी का समर्थक था जो कि स्वभाववश स्वतः हिंसक होते हैं। मैं अपने किसी छुटभैया फेसबुक मित्र को वीडियो पर बुला कर इस बात पर चर्चा कर सकता हूँ कि कैसे भारत की मोदीवादी जनता के भीतर के फासीवाद ने राम मंदिर निर्णय पर ह्वाइट हाउस के सामने भगवा झंडा लहराने से ले कर छः जनवरी को हुए अमेरिकी संसद पर हमले में तिरंगा लहराने तक एक प्रमुख भूमिका निभाई है। मैं किसी रैंडम बयान को निकाल कर उसे मोदी से जोड़ सकता हूँ कि ऐसे ही बयानों के कारण इस तरह की हिंसा होती है।

मैं वो विलक्षण वामपंथी हूँ जो ‘साड्डा कुत्ता कुत्ता, त्वाड्डा कुत्ता टॉमी’ की अवधारणा से चलते हुए भारत के आतंकवादियों को उनके मुस्लिम होने के कारण, कभी हेडमास्टर का बेटा तो कभी धोनी का फैन बताता फिरता हूँ, लेकिन अमेरिका में हुए एक प्रदर्शन से मेरी अधोजटाएँ ऐसी सुलगती हैं, और अंग विशेष में ऐसा मीठा दर्द उठता है कि मुझे वो शेर याद आ जाता है:

बैठता हूँ तो दर्द उठता है,
दर्द उठता है बैठ जाता हूँ

मैं भारत का सल्फेटिया वामपंथ हूँ जो लड़कियों के खड़े हो कर मूत्र त्याग करने के अधिकार के लिए चर्चा करता है और पुरुषों को गर्भवान बनाने की वकालत करता है। क्या ये तर्क आपको नहीं बताता कि आज मैं इस प्रदर्शन को हिंसा और तिरंगे झंडे की उपस्थिति को ट्रम्प के तख्तापलट की साजिश में मोदी का सायलेंट सहयोग क्यों कह रहा हूँ?

नमस्कार

‘भाई’ से नहीं किया निकाह तो घरवालों ने उतारा महिला को मौत के घाट, प्रेमी की भी बलात्कार के बाद की हत्या

तुर्की के कमान जिले के बेरामोजू गाँव (Bayramozu Village ) में एक महिला और उसके प्रेमी को नए साल के मौके पर मौत के घाट उतार दिया गया। महिला की गलती केवल इतनी थी कि उसने अपने कजन (रिश्ते में भाई) से निकाह (शादी) करने से मना किया था और अपने प्रेमी के साथ नया जीवन शुरू करने के लिए भाग गई थी। नए साल पर उसी महिला को उसके घरवालों ने आपसी सुलह के लिए घर बुलाया और पहले उसे मौत के घाट उतारा, फिर उसके प्रेमी से बलात्कार करके उसकी भी जान ले ली।

24 वर्षीय मृतक महिला का नाम विल्डन इंस था। काफी समय से उसका परिवार उस पर उसके कजन से निकाह करने का दबाव बना रहा था। जिसके चलते 2 माह पहले वह अपने 25 साल के प्रेमी ओसमान सेलिक (osman celik) के साथ भाग गई। परिवार ने दोनों को खोजने का बहुत प्रयास किया। लेकिन दोनों की जानकारी तब मिली जब वह नए साल की पार्टी पर गाँव लौटे। जैसे ही परिवार को मालूम हुआ कि बेटी कमान में है। उन्होंने उसे सुलह के लिए घर बुला लिया।

ओसमान सेलिक (साभार: डेली मेल की रिपोर्ट)

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही महिला अपने प्रेमी के साथ अपने घर गई। वहाँ उसे बाथरूम में ले जाकर बर्बरता से मार दिया गया। वहीं उसके प्रेमी को पहले नंगा किया गया। उसका बलात्कार किया गया और फिर धारधार हथियार घोंपकर उसे भी मौत के घाट उतार दिया गया। 

गिरफ्तार हुए महिला के परिजन

वारदात को अंजाम देने के बाद परिवार ने दोनों के शव को नहलाया ताकि उनके खून से फर्श गंदी न हो। इसके बाद उन्हें गाँव के बाहर ले जाकर मिट्टी खोदकर दफना दिया गया। काफी समय तक जब सेलिक के परिवार को अपने बेटे का मालूम नहीं चला तो उन्होंने उसकी गुमशुदगी की शिकायत पुलिस में लिखवाई। 

सूचना पाते पुलिस ने इंस के परिवार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। जाँच पड़ताल के बाद मृतक महिला के घरवालों ने स्वीकार लिया कि उन्होंने ही दोनों (विल्डन और ओसमान) को मौत के घाट उतारा और बाद में दोनों का शव दफन कर दिया। पुलिस ने पूछताछ करके फौरन शव को जमीन से निकलवाया और महिला के पिता, माँ, भाई और कजन को गिरफ्तार किया। पड़ताल में पता चला कि इन सबके अलावा दो अन्य संबंधियों ने भी इस वारदात में परिवार का साथ दिया था। पुलिस पूरे मामले में अब भी अपनी आगे की जाँच कर रही है।

50+ के फेसबुक फ्रेंड थे शिकार, अश्लील वीडियो था इनका हथियार: वारिस, रईस, वाहिद, अकरम सहित 6 राजस्थान से गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक साइबर सेक्सएक्सटॉर्शन रैकेट का भांडाफोड़ करते हुए 6 साइबर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। कथिततौर पर पकड़े गए आरोपित फेसबुक पर लोगों को ब्लैकमेल करके उनसे पैसे ऐंठते थे। दिल्ली पुलिस ने भरतपुर राजस्थान से वारिस, रईस, अन्नय खान, वाहिद, मुफीद और अकरम को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर एक ऑनलाइन जबरन वसूली रैकेट चला रहे थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अपराधी कथित रूप से फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाते थे और लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते थे। ये लोग ज्यादातर 50 वर्ष से ज्यादा की उम्र वालों को अपना शिकार बनाते थे, जो आमतौर पर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं।

इसमें साइबर अपराधी किसी ना किसी माध्यम से सामने वाले शख्स को वीडियो कॉल पर जुड़ने के लिए कहते हैं, पहले फेसबुक पर दोस्ती करते हैं फिर वीडियो कॉल करने को कहते है, उनके झाँसे में आकर जब वो शख्स वीडियो कॉल जॉइन करता है तो उन्हें वीडियो कॉल पर अश्लील वीडियो दिखाया जाता था।

यह गैंग अश्लील वीडियो देख रहे व्यक्ति का वीडियो दूसरे फोन से बना लेते थे। जिसके बाद गैंग का सदस्य खुद को संबंधित सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म का सीनियर ऑफिसर बताता और पीड़ित से उनका अश्लील वीडियो डिलीट करवाने के लिए उनसे पैसे की डिमांड करता था।

रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर सेल के आलाधिकारियों को आरोपितों के फोन से तकरीबन 40 पीड़ितों की वीडियो हाथ लगे हैं। अब तक 25 लाख से ज्यादा की धोखाधड़ी ये कर चुके है, 10 एकाउंट्स को फ्रीज किया गया है। इनके पास से 17 मोबाइल फोन, 2 एटीएम कार्ड, चेक बुक आदि जब्त किए गए हैं। ज्यादातर पीड़ित की उम्र 50 वर्ष से ज्यादा की है जो फेसबुक पर ऐक्टिव रहा करते हैं। फेसबुक पर इन पीड़ितों में कुछ के प्रोफाइल कैटरिंग सर्विस देनेवाले, स्टेशनरी बिजनेस करने वाले के हैं।

अश्लील वीडियो रिकॉर्ड कर, करते थे लोगों को ब्लैकमेल

साइबर सेल के डीसीपी अन्येष रॉय ने कहा कि साइबर क्राइम यूनिट को बीते कुछ हफ्तों से ऑनलाइन उगाही रैकेट से संबंधी कई शिकायतें मिल रही थीं। लोग बता रहे थे कि कैसे कुछ लोग उनके अश्लील वीडियोज को इंटरनेट पर डालने की धमकी देकर ब्लैकमेलिंग कर रहे हैं। उन्होंने बताया, “जाँच में पता चला कि पीड़ितों को फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स के जरिए जाल में फँसाया गया। वो गैंग के सदस्यों के साथ चैट करते और उन्हें मेसेंजर या वॉट्सऐप के जरिए वीडियो कॉल करने को कहा जाता। उन्हें वीडियो कॉल के दौरान पॉर्न वीडियोज दिखाए जाते और उसी वक्त रिकॉर्डिंग भी की जाती। कुछ देर बाद उनके पास ब्लैकमेलिंग की कॉल आ जाती और 2000 से 3000 रुपए माँगे जाते।”

रॉय ने कहा कि ज्यादातर पीड़ितों ने पैसे दे दिए जबकि कुछ ने इसकी शिकायत पुलिस से की। उन्होंने कहा, तकनीकी सूचनाओं की मदद से आरोपितों का लोकेशन भरतपुर में मिला। आरोपितों ने फर्जी पहचान पत्रों के जरिए सिम कार्ड खरीदे और बैंक खाते तक खुलवा लिए। आरोपित एक-दो दिन में ही सिम कार्ड बदल लिया करते थे। सिम कार्ड फर्जी पहचान पत्रों पर देश के अलग-अलग इलाकों से लिए जाते थे। जिस बैंक में अपराधियों ने पैसे जमा करवाए, वह अलवर का था। छापेमारी के दौरान अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

सजा कम कर रिहा कर दिया गया अबू बशीर, 200 लोगों को उड़ाने वाले बम धमाके का था मास्टरमाइंडः खुद को शिक्षक बताता है आतंकी

इंडोनेशिया ने शुक्रवार (जनवरी 8, 2021) को आतंकी अबू बक्र बशीर को जेल से रिहा कर दिया। साल 2002 में इंडोनेशिया के बाली में नाइट क्लब में हुए धमाके का वह मास्टरमाइंड था। दो दशक पहले हुए उस हमले में कई विदेशियों समेत 200 लोगों की मौत हो गई थी।

इंडोनेशियाई सरकार का कहना है कि 82 साल के अबू की सजा पूरी हो गई है, इसलिए उसे रिहा किया गया है। इस्लामिक आतंकवादी नेटवर्क जेमाह इस्लामिया (JI) के सबसे कट्टर लीडरों में अबु बकर बशीर का नाम गिना जाता रहा है। कथित तौर पर उसके संबंध अल कायदा से भी है। खुद को अध्यापक बताने वाला कट्टरपंथी प्रचारक सारे आरोपों को गलत बताता रहा है। 

शुक्रवार को जकार्ता की गुनुंग सिंदूर (Gunung Sindur) जेल से उसे वैन में बैठाकर रिहा किया गया। मुमकिन है कि उसे सीधे उसके गृहनगर सोलो भेजा जाए, जहाँ वह दोबारा ‘इस्लामी शिक्षा’ देना शुरू करे। उसे साल 2011 में मामले की सुनवाई के दौरान 15 साल की सजा हुई हुई थी। लेकिन हाल में अधिकांश कैदियों की सजा में कटौती के बाद उसकी सजा भी कम कर दी गई और उसे रिहा कर दिया गया।

उसके वकील ने कोविड-19 का हवाला देकर भीड़भाड़ वाली जेल से उसे रिहा करने की माँग की थी। बशीर के बेटे ने भी उसे कट्टरपंथी विचारधारा का पीड़ित कहा था और ये भी कहा था कि वह कट्टर विचारों को सॉफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।

दो साल पहले भी मानवीय आधार पर बशीर को छोड़ने की माँग उठाई गई थी। लेकिन उस समय ऑस्ट्रेलिया में हड़कंप मच गया और उसकी रिहाई टाल दी गई। बता दें कि जिस हमले में बशीर दोषी पाया गया था उसमें ऑस्ट्रेलिया के 88 लोग मारे गए थे। हमले से बचे लोग आज भी बशीर की रिहाई का विरोध कर रहे। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने भी रिहाई पर नाराजगी जताई है।

51 साल के Laczynski नाम के सर्वाइवर का कहना है कि उस दिन वह अपने दोस्तों के साथ ऑस्ट्रेलिया वापस लौटने ही वाला था कि अचानक क्लब में हमला हुआ। उनके 5 दोस्त हमले में मारे गए। वह कहते हैं, “उस हमले ने मुझे बहुत दुखी किया। मैं केवल न्याय चाहता हूँ।”

उनके मुताबिक आज भी कई लोग ऐसे हैं जो इंडोनेशिया के क्लब में हुए हमले को नहीं भुला पाए हैं। उनके घाव का इलाज आज तक चल रहा है। सभी पीड़ित चाहते हैं कि बस किसी तरह से इंसाफ मिल जाए। बशीर की रिहाई बिलकुल बर्दाश्त नहीं की जा सकती। वह अपील करते हैं कि उसे किसी प्रकार का मंच देकर कट्टर विचारों को फैलाने न दिया जाए। वह एक राक्षस था और हमेशा रहेगा।

इसी तरह Thiolina Ferawati Marpaung, जिनकी उस विस्फोट में हमेशा के लिए आँखें खराब हो गईं, वह कहती हैं कि बशीर की रिहाई से उन्हें बहुत डर लग रहा है। बस उम्मीद ही की जा सकती है कि प्रशासन उस पर निगरानी रखे।

उल्लेखनीय है कि 2002 में बाली में धमाके के एक साल बाद जकार्ता के जेडब्ल्यू मैरिअट होटल पर हमला करने का आरोप भी जमा इस्लामिया पर लगा था। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इंडोनेशिया के जिहादी आंदोलन में अबू बक्र बशीर की काफी बड़ी छवि है और यह असंभव नहीं है कि उसके नाम का फिर से इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।