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गर्लफ्रेंड की 65 साल की दादी का गला रेता, 10 साल के भाई का भी मर्डर: घरवालों ने कहा था- दूसरे मजहब का है, मत मिलो

महाराष्ट्र के नागपुर में कल (दिसंबर 10, 2020) एक नाबालिग ने एकतरफा प्यार में लड़की की 65 साल की बुजुर्ग दादी और 10 साल के छोटे भाई को मौत के घाट उतार दिया। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना को अंजाम देने के बाद नाबालिग ने ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर ली। 

घटना गिट्टीखदान क्षेत्र के हजारीपहाड़ में गुरुवार की दोपहर हुई। नाबालिग पहले लड़की के घर पहुँचा। चाकू से लड़की की दादी का गला काटा और बाद में उसके छोटे भाई पर हमला करके फरार हो गया। बुजुर्ग महिला की गलती बस ये थी कि उन्होंने अपनी पोती को दूसरे मजहब के युवक से बात करने से मना किया था।

जानकारी के अनुसार, नाबालिग लड़के की मुलाकात 20 वर्षीय लड़की से पिछले साल नवंबर में इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। कुछ समय बाद वह दोनों एक-दूसरे से मिलने लगे। लेकिन परिवार को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने लड़की को समझाया और फिर लड़की ने नाबालिग से मिलना छोड़ दिया।

लड़की के इस तरह बात बंद करने से युवक को लड़की की दादी पर गुस्सा आया और सबक सिखाने के लिए वह चाकू लेकर उनके घर पहुँचा। घर जाकर उसने लड़की से मिलने की इच्छा जाहिर की मगर दादी (लक्ष्मीबाई) ने उसे रोक दिया। इसी बीच विवाद बढ़ गया और दोनों में झड़प हो गई। हाथापाई के दौरान जैसे ही लक्ष्मीबाई जमीन पर गिरीं, लड़के ने फौरन चाकू निकाल कर उनका गला रेत दिया।

दादी की हत्या के बाद वहाँ मौजूद 10 साल के मासूम ने पूरा मंजर देख कर जब चीखना-चिल्लाना शुरू किया तब, लड़के ने बच्चे पर भी हमला कर दिया। बाद में दोनों को अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुके थे।

पड़ोसियों द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद गिट्टीखदान पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर सुनील चव्हाण ने घटनास्थल पर पहुँकर जाँच की। पूरे मामले को आईपीसी की धारा 302 के तहत दर्ज किया गया है। आरोपित की माँ ने बताया है कि उनका बेटा 17 साल का है। उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि उनको ये नहीं पता था कि उनका बेटा क्या करने जा रहा है।

न्यूज मराठी की खबर के अनुसार, इन हत्याओं के बाद इलाके में खलबली मच गई है। पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि लड़का मनकापुर इलाके का रहने वाला था, जिसने हत्या को अंजाम देने के बाद ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दी थी।

शेहला रशीद के पिता को ₹10 करोड़ की मानहानि का नोटिस, कहा था- बेटी के पीरजादा से नापाक रिश्ते

जेएनयू एक्टिविस्ट शेहला रशीद के ‘बायोलॉजिकल पिता’ अब्दुल रशीद शोरा, जिन्होंने हाल ही में आरोप लगाया था कि उनकी बेटी भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलीभगत कर रही है और इसके लिए पैसे लेती है, को कश्मीरी व्यवसायी और राजनीतिज्ञ फिरोज पीरजादा द्वारा 10 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा गया है।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को लिखे पत्र में शेहला रशीद के पिता अब्दुल रशीद शोरा ने दावा किया था कि शेहला ने कश्मीर केंद्रित राजनीति में शामिल होने के लिए ‘कुख्यात लोगों’ से 3 करोड़ रुपए नकद लिए हैं। उन्होंने माँग की थी कि फिरोज पीरजादा, जहूर वटाली (एनआईए द्वारा गिरफ्तार) और रशीद इंजीनियर के बीच के ‘रहस्यमय वित्तीय डील’ की जाँच की जाए।

समाचार पत्र अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीरजादा की ओर से भेजे गए चार पेज के नोटिस में कहा गया है कि अब्दुल रशीद शोरा के आरोपों से उनके मुवक्किल (फिरोज पीरजादा) की प्रतिष्ठा को व्यापक नुकसान पहुँचा है। नोटिस में कहा गया है कि उन पर जो भी आरोप लगाए गए वह पूरी तरह आधारहीन हैं।

इस नोटिस के अनुसार, फिरोज पीरजादा ने जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट पार्टी (जेकेपीएम) के अध्यक्ष पद से 30 नवंबर को व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा बिजनेसमैन जहूर वटाली को वह बिल्कुल नहीं जानते और कभी मिले भी नहीं, जबकि इंजीनियर रशीद से उनकी दो बार मुलाकात हुई है।

पीरजादा की ओर से भेजे गए मानहानि के नोटिस में कहा गया है कि फिरोज पीरजादा ने शेहला रशीद को रूपए नहीं दिए। नोटिस में कहा गया है कि यदि सात दिन के अंदर 10 करोड़ रूपए का भुगतान नहीं किया जाता है तो वह कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।

उल्लेखनीय है कि ज़हूर अहमद शाह वटाली और रशीद इंजीनियर, दोनों को एनआईए ने कथित रूप से देशद्रोही गतिविधियों और आतंकी फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। शेहला रशीद के पिता अब्दुल शोरा ने आरोप लगाया था कि जहूर अहमद शाह वटाली और रशीद इंजीनियर ने पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल के साथ जेकेपीएम शुरू करने के लिए शेहला रशीद को 3 करोड़ रुपए का भुगतान किया था। उन्होंने अपनी जान का खतरा बताते हुए डीजीपी से सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी। हालाँकि, शेहला ने पिता के सभी आरोपों से इनकार किया है।

शेहला के पिता ने अफसोस जताते हुए कहा था कि उसे क्या जरूरत थी कि वह पूर्व विधायक इंजीनियर रशीद (हवाला के लेनदेन के चलते जेल में बंद) का लेक्चर जेएनयू में करवाती जबकि यूनिवर्सिटी का यह अंदरूनी मामला था।

अमित शाह बंगाल जाएँगे, डीजीपी और मुख्य सचिव को गृह मंत्रालय ने किया तलब: नड्डा के काफिले पर हुआ था पथराव

पश्चिम बंगाल में कल (10 दिसंबर 2020) भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफ़िले पर पथराव हुआ था। यह घटना बंगाल पुलिस की मौजूदगी में हुई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए बंगाल के डीजीपी और मुख्य सचिव को 14 दिसंबर को तलब किया है। इनसे सुरक्षा में चूक के बाबत जानकारी माँगी जा सकती है।

दोनों शीर्ष अधिकारियों से सुरक्षा में चूक के बाबत जानकारी माँगी जा सकती है। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि प्रदेश में जारी सिलसिलेवार राजनीतिक हिंसाओं को रोकने के लिए क्या उपाय किए गए। बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी केंद्र को इस संबंध में रिपोर्ट सौंपी है। वहीं ममता सरकार के मंत्रियों की इस घटना गैर ज़िम्मेदाराना बयानबाजी जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो गृह मंत्री अमित शाह भी अगले हफ्ते पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर जाएँगे। गृह मंत्री 19 दिसंबर को कोलकाता पहुँचेंगे। पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के काफ़िले पर हुए हमले के बाद इस दो दिवसीय दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। 

इस बीच राज्यपाल ने भी पश्चिम बंगाल की मौजूदा क़ानून-व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि भाजपा अध्यक्ष और अन्य नेताओं की सुरक्षा में लापरवाही की गई थी। इसके अलावा उन्होंने अपनी रिपोर्ट में प्रदेश की बिगड़ती क़ानून-व्यवस्था और नेताओं के साथ हो रही हिंसा की घटनाओं पर भी चिंता जताई थी।     

काफिले पर हुए हमले को लेकर बंगाल पुलिस ने कहा था कि किसी को कुछ नहीं हुआ है और सभी लोग सुरक्षित हैं। गौरतलब है कि गुरुवार (दिसंबर 10, 2020) को दक्षिण 24 परगना में एक कार्यक्रम के लिए डायमंड हार्बर की ओर जाते वक़्त नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था। इस हमले में बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी पर ईंट फेंकी गई थी। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए पूरी घटना की सूचना दी थी।

कैलाश विजयविर्गीय ने लिखा था, “बंगाल पुलिस को पहले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी। लेकिन एक बार फिर बंगाल पुलिस नाकाम रही। सिराकोल बस स्टैंड के पास पुलिस के सामने ही TMC के गुंडों ने हमारे कार्यकर्ताओं को मारा और मेरी गाड़ी पर पथराव किया।”

वामपंथी मीडिया ‘भोले किसानों’ को भड़काने के लिए कुछ भी करेगा- प्रियंका, दिलजीत जैसों की खूब तारीफ भी: कंगना

किसान आंदोलन के दौरान तथाकथित प्रदर्शनकारी किसान अर्बन नक्सल, कट्टरपंथी इस्लामी और अलगाववादियों के समर्थन में बीते दिन पोस्टर और बैनर लहराते हुए नज़र आए थे। इसके बाद बॉलीवुड अदाकारा कंगना रनौत ने उस भ्रष्ट तंत्र (सिस्टम) पर सवाल उठाया जो राष्ट्र विरोधी ताकतों को बढ़ावा दे रहे हैं। 

अपने ट्वीट की कड़ी में कंगना ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जो लोग ऐतिहासिक कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं, वह बखूबी जानते हैं कि इससे आखिरकार किसानों का ही भला होगा। बॉलीवुड अभिनेत्री के मुताबिक़ कृषि सुधार क़ानून का विरोध करने वाले अपने घटिया फ़ायदों के लिए भोले किसानों को हिंसा भड़काने के लिए उकसा रहे हैं। 

कंगना ने अपने ट्वीट में लिखा, “समस्या सिर्फ यही लोग (क़ानून का बड़े पैमाने पर विरोध करने वाले) नहीं हैं बल्कि हर ऐसा इंसान है जो इनका समर्थन करता है और कृषि क़ानून का विरोध करता है। यह सभी लोग जानते हैं कि यह क़ानून किसानों के लिए कितना अहम है फिर भी ये अपने तुच्छ फ़ायदों के लिए भोले किसानों को हिंसा भड़काने के लिए उकसा रहे हैं। किसानों के ज़ेहन में नफ़रत घोल रहे हैं और भारत बंद का लगातार समर्थन कर रहे हैं।” 

ऐसे लोगों को बढ़ावा देने वाले तंत्र की आंतरिक कार्यशैली का खुलासा करते हुए कंगना ने कहा कि प्रियंका चोपड़ा और दिलजीत दोसांझ को अवार्ड्स मिल जाएँगे। इसके अलावा वामपंथी मीडिया, कट्टरपंथी इस्लामी और तमाम ब्रांड्स इनकी तारीफ़ करेंगे। पूरा सिस्टम ऐसे षडयंत्रों से लदा हुआ है जिसमें देश विरोधी ताकतों को पनपने का मौक़ा मिलेगा, इसके विपरीत राष्ट्रवादियों की संख्या कम है। बहुत जल्द ही इन हालातों में बदलाव होंगे। 

कंगना ने अपने ट्वीट में लिखा, “वामपंथी मीडिया किसानों को भटकाने और उकसाने के लिए प्रियंका चोपड़ा और दिलजीत की जम कर तारीफ़ करेगा। इस्लाम समर्थक और भारत विरोधी फिल्म इंडस्ट्री, ब्रांड्स इन्हें ख़ूब ऑफर देंगे और अंग्रेज़ी-औपनिवेशिक नशे में चूर मीडिया घराने इन्हें अवार्ड्स से लाद देंगे।” 

कंगना के ट्वीट का अगला हिस्सा यह था, “समस्या यह है कि पूरा तंत्र ऐसा बना हुआ है जिसमें देश विरोधी ताकतों को फलने-फूलने का मौक़ा मिलता है। इस भ्रष्ट तंत्र के विरुद्ध हमारी संख्या बहुत कम है लेकिन मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूँ कि एक न एक दिन बदलाव आएगा। अच्छाई और बुराई की हर लड़ाई में, बुराई हमेशा ही मज़बूत रही है। जय श्री राम।”

प्रियंका चोपड़ा और दिलजीत ने किया था किसान आंदोलन का समर्थन

बीते रविवार को प्रियंका चोपड़ा और खालिस्तानी समर्थक दिलजीत दोसांझ ने आंदोलनरत किसानों से भावुक अपील की थी। बॉलीवुड अदाकारा की अपील के मुताबिक़, “हमारे किसान भारत के खाद्य सिपाही (Food Soldiers) हैं। इनके डर का निस्तारण करना होगा, इनकी उम्मीदों को पूरा करना होगा। बतौर संपन्न लोकतंत्र हमें सुनिश्चित करना होगा कि किसानों की माँगें बिना देरी किए पूरी की जाएँ।” 

ठीक इसी तरह दिलजीत दोसांझ ने भी कृषि क़ानूनों को लेकर जम कर विरोध किया था। इसके पहले दिलजीत गुरपटवंत पन्नू और खालिस्तान की माँग करने वाले सिख फ़ॉर जस्टिस (SFJ) का समर्थन करते हुए नज़र आए थे। 

अर्बन नक्सल के लिए आवाज़ उठाते नज़र आए थे प्रदर्शनकारी

गुरुवार को टिकरी बॉर्डर पर मौजूद प्रदर्शनकारी जिनकी शुरुआत कृषि सुधार क़ानूनों के विरोध से हुई थी, वह कट्टरपंथी और आतंकी तत्वों के समर्थक गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवरा राव, आनंद तेलतुम्बड़े और हिन्दू विरोधी दंगों के आरोपित उमर खालिद, शरजील इमाम और खालिद सैफी की रिहाई की माँग करते हुए नज़र आए थे। 

भारतीय किसान यूनियन (BKU उगराह) ने मानवाधिकार दिवस पर बृहस्पतिवार (दिसंबर 10, 2020) को माओवादी-नक्सलियों के साथ संबंध के आरोप में ‘गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक (यूएपीए) UAPA के तहत गिरफ्तार किए गए कई आरोपितों की रिहाई की माँग उठाई थी।       

अप्रिय रवीश कुमार! एक ‘शांतिपूर्ण आंदोलन’ 53 लोगों की जान ले चुका है, अभी कितने बाकी हैं?

एक वामपंथी के लिए इससे ज्यादा सुकून की बात और क्या हो सकती है कि देशभर में दंगे, विरोध-प्रदर्शन, अराजकता का माहौल हो। दक्षिणपंथी सत्ता विरोध के लिए एक दिसंबर पिछले साल शाहीनबाग के रस्ते आया था और दूसरा दिसंबर हमारे सामने सिंघु बॉर्डर की शक्ल में सामने आ रहा है। एक जो बड़ा फर्क इस बार के आन्दोलन में देखा जा रहा है वो ये कि पिछले दिसंबर में फैज की नज्में पढ़ी जा रहीं थीं जबकि इस बार फैज की जगह पाश की कविता ने ले ली हैं।

वास्तव में, इस तरह के भारत बंद या देश में बढ़ती अराजकता, यह सब वामपंथी समाचार चैनल्स और रवीश कुमार जैसे प्रपंचकारियों द्वारा रोजाना लोगों के दिमाग में भरे जा रहे उन्माद का ही नतीजा होते हैं। पूँजीवादियों के विरोध में अपनी पहचान कायम रखने के अपने नशे की संतुष्टि के लिए रवीश कुमार ने निरंतर ही अपने प्राइम टाइम और फेसबुक पोस्ट के जरिए फेक ख़बरों, फर्जी दावों का सहारा लिया और जमकर ‘अम्बानी-अडानी‘ का भ्रम बेचा। कविता और लेखों के जरिए संविधान की आड़ में अपने अजेंडा को हवा देने का यह सबसे सभ्य तरीका है।

रवीश कुमार एकबार फिर अपने प्राइम टाइम में सक्रीय हो चुके हैं और अपनी पोजीशन ले ली है। व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के कुलपति ने अपने नए प्राइम टाइम वीडियो में आरोप लगाया है कि किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बदनाम किया जा रहा है।

इस दिसंबर में रवीश के दुःख का मूल किसानों का कथित शांतिपूर्ण आन्दोलन है। पिछले साल भी ठीक इन्हीं दिनों एक ‘शांतिपूर्ण आँदोलन’ आगे बढ़ रहा था। उसका नतीजा यह रहा कि दिल्ली में 53 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी। शाहीनबाग के नाम पर इन हिन्दू विरोधी दंगों ने दिल्ली के इतिहास में जिस काले अध्याय को जोड़ दिया उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकेगी।

रवीश के इन शान्तिपूर्ण आंदोलनों को यदि ‘पिछला दिसंबर बनाम नया दिसंबर’ कर के देखा जाए तो हमें इन शांतिपूर्ण आंदोलनों में एकरूपता नजर आती है। जैसे- शाहीनबाग़ में भी सड़कों को जाम कर दिया गया। दैनिक जीवन को प्रभावित करने के षड्यंत्र किए गए। संगठित तरीके से यह सब काम किया जाता रहा।

पिछले दिसंबर के ‘शांतिपूर्ण आन्दोलन’ में भी वहाँ मौजूद शायद ही किसी प्रदर्शनकारी ने नागरिकता कानून के बारे में पढ़ा था। वहाँ बिरियानी बाँटी गई और लंगर लगाए गए, जामिया में आगजनी की गई और भारत विरोधी षड्यंत्र उस शांतिपूर्ण आन्दोलन की आत्मा बने रहे।

अब पिछले दिसंबर की तुलना इस दिसंबर से कर के देखें तो हम देखते हैं कि इन किसान आंदोलनों की शुरुआत ही ट्रेक्टर जलाकर की गई। यहाँ भी खाने के एकदम दुरुस्त इंतजाम हैं। भारत को तोड़ने की बातें की जा रही हैं, कानून का जिक्र तक नहीं, फर्जी मानवाधिकारों का हवाला दिया जा रहा है। किसान आंदोलनों में भी वो तस्वीरें सामने आने लगी हैं जिनमें या तो चिकेन नेक से पूर्वोत्तर भारत को भारत के नक़्शे से काट दिया गया है या फिर जम्मू कश्मीर के नक़्शे से लद्दाख समेत कश्मीर को अलग किया गया है।

किसान सड़कों पर हैं, जाम की धमकी दे रहे हैं और लगातार सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच खालिस्तान जिंदाबाद, कश्मीर की आजादी के नारे और मजहबी नारों ने चुपके से किसान प्रदर्शनों के रास्ते अपने लिए जगह बना ली है।

किसान नेता यह भी माँग कर चुके हैं कि इस साल की शुरुआत में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में जितने भी आरोपित UAPA के तहत गिरफ्तार हैं, उन्हें रिहा कर दिया जाए। इनके अलावा, जितने भी शहरी नक्सली माओवादियों से सम्बन्ध या नक्सली गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं, उन्हें भी ‘क्लीन चिट’ देने की माँग की गई है।

जितने भी नाम किसान आन्दोलन में किसान नेताओं ने लिए हैं, चाहे वह शरजील इमाम हो, उमर खालिद, उनमें से कितने किसान हैं यह रहस्य बना हुआ है। शर्जील इमाम और उमर खालिद जैसे नामों की रिहाई और उन्हें क्लीन चिट देने से कौनसा कृषि सुधार हो जाएगा यह और भी बड़ा रहस्य बन चुका है।

जिन तस्वीरों को किसान आंदोलनों में दिखाया जा रहा है उनके नाम शरजील इमाम, उमर खालिद, गौतम नवलखा, पी वरवरा राव, वर्नन गोंज़ाल्वेस, अरुण फरेरा, सुधा भारद्वाज आदि हैं.. अब इन किसान आन्दोलनों में अगर कुछ बाकी रह गया है तो वह है किसानों की बात और किसानों की तस्वीर।

ऐसे में रवीश कुमार का दावा है कि इन शांतिपूर्ण आंदोलनों को बदनाम किया जा रहा है। नहीं रवीश बाबू, इन्हें बदनाम नहीं किया जा रहा बल्कि इस दिसंबर के आन्दोलन की आत्मा में भी वही है जो शाहीनबाग़ के मूल में था। इन्हें बदनाम नहीं किया जा रहा है, इन आन्दोलनों की प्रकृति ही संदेहास्पद है। धूर्त वामपंथियों को इससे शिकायत नहीं करनी चाहिए, उन्हें खुश होना चाहिए कि भारत एकबार फिर पिछले दिसंबर की ओर बढ़ रहा है।

जबरन धर्मांतरण-लव जिहाद में मदद करने पर मदरसों, चर्च से छिनेगी ज़मीन और आर्थिक अनुदान

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने जबरन धर्मांतरण और लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद) को रोकने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘धर्म स्वातन्त्रय विधेयक’ को विधानसभा में पेश करने से पहले प्रदेश सरकार ने इसमें सख्त प्रावधान शामिल किए हैं। जोड़े जा रहे नए प्रावधानों के अनुसार चर्च, मदरसे और स्कूल भी कार्रवाई के दायरे में आएँगे। 

अगर इस तरह के मज़हबी संगठन ग्रूमिंग जिहाद और जबरन धर्मांतरण की प्रक्रिया में शामिल या इसमें मदद करते हुए पाए जाते हैं, तो सरकार उन्हें दी गई तमाम सुविधाएँ वापस ले लेगी। इस तरह के मामलों में शिवराज सरकार उनका आर्थिक अनुदान रद्द कर सकती है और उन्हें प्रदान की गई सरकारी ज़मीन भी वापस ले सकती है। यह विधेयक दिसंबर महीने के अंतिम हफ़्ते तक विधानसभा में पारित किया जाना है।   

ग्रूमिंग जिहाद और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में अक्सर धार्मिक संगठनों की भूमिका सामने आती है। यह संगठन दोनों प्रक्रियाओं को अपने धर्म के प्रचार से जोड़ कर देखते हैं, जब ऐसे मामले प्रकाश में आते हैं तब संगठन दोनों पक्षों में सहमति का हवाला देकर गायब हो जाते हैं। सरकार का कहना है कि विधेयक में शामिल किए गए प्रावधानों से इन धार्मिक संगठनों की भूमिका तय होगी, तब वह क़ानूनी कार्रवाई के डर से ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देंगे।       

धर्मांतरण के लिए की गई शादियाँ होंगी अमान्य 

यह प्रावधान उन धार्मिक संगठनों पर कार्रवाई के लिए पेश किए गए हैं जो ग्रूमिंग जिहाद और धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में आर्थिक सहयोग करते हैं। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘धर्म स्वातंत्रय विधेयक’ के तहत 10 साल की जेल और 1 लाख रुपए तक का आर्थिक दंड दिया जा सकता है। इस विधेयक के मुताबिक़ जिन शादियों का एकमात्र उद्देश्य जबरन धर्मांतरण है उन्हें पूरी तरह अमान्य घोषित कर दिया जाएगा। 

ज़्यादा संख्या में धर्म परिवर्तन कराने (2 या दो से अधिक लोग) पर 5 से 10 वर्ष के कारावास और कम से कम 1 लाख रुपए के आर्थिक दंड का प्रावधान है। इस मुद्दे पर अधिकारियों का कहना है कि इस विधेयक के लागू होने के बाद जो व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन कराना चाहता है उसे एक महीने पहले से ही जिलाधिकारी (District Magistrate) के समक्ष घोषणा पत्र (Declaration) प्रस्तुत करना होगा। 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का हिस्सा है धर्मांतरण क़ानून

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 5 दिसंबर 2020 को प्रस्तावित क़ानून पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाई थी। इस बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा था कि विधेयक प्रदेश सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का हिस्सा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक़, “कम उम्र की लड़कियों को षड्यंत्र के ज़रिए बहलाना-फुसलाना आसान है। बाद में उनका जीवन नरक बन जाता है। धर्म स्वातंत्रय विधेयक 2020 हमारे ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान’ का हिस्सा है।” 

इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा था, “लव जिहाद दो समुदायों के बीच धार्मिक टकराव को बढ़ावा देता है। लव जिहाद को बढ़ावा देने वाले समूह शांति व्यवस्था भंग करने और पाकिस्तान प्रायोजित कट्टरता को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। इनसे निपटने के लिए ही इस विधेयक को लागू किया जा रहा है, इसके पारित होने के बाद ऐसा नहीं होगा कि सरकार से ज़मीन और अनुदान लेकर लव जिहाद और धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जाए।”          

हाल ही में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ग्रूमिंग जिहाद और जबरन धर्मांतरण के मामलों से निपटने के लिए इस मुद्दे पर क़ानून पारित किया था। क़ानून के प्रभावी होने के बाद से तमाम मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

‘अल्लाह-हू-अकबर, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान’- तारिक फ़तेह ने शेयर किया वीडियो, लोगों ने कहा- ‘इन्हें खालिस्तानी मत कहना’

नए कृषि कानून के विरोध में चल रहे कथित किसान आन्दोलन पर खालिस्तानी सम्बन्धों का भी आरोप लगता आया है। एक ओर जहाँ कल ही किसान नेताओं ने असम को भारत से अलग कर देने की बात कहने वाले शरजील इमाम से लेकर दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों के जिम्मेदारों की रिहाई की बात की, तो वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर एक ऐसा पुराना वीडियो सामने आया है जिसमें विदेश में सड़कों पर सिख समुदाय के कुछ लोगों को खालिस्तान-पाकिस्तान के समर्थन में और मजहबी नारे लगाते हुए देखा जा सकता है।

पाकिस्तानी मूल के कनाडाई लेखक तारिक फतेह ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “लन्दन में सिख गा रहे हैं – ‘अल्लाह-हू-अकबर, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान, पंजाब बनेगा खालिस्तान, इमरान खान जिंदाबाद’। ISI के सहयोग से जिहादी खालिस्तानी भी आपके पड़ोस में आते ही होंगे।”

इस वीडियो में पीले झंडे हाथों में लिए हुए कुछ सिख लोग एक जगह पर इकट्ठे होकर ‘वजीर ए आजम इमरान खान जिंदाबाद’ से लेकर मजहबी नारे तक ऊँची आवाज में दोहरा रहे हैं।

शीला शर्मा नाम की एक ट्विटर यूजर ने यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “यह देखना शर्मनाक है कि ये खालिस्तानी उन लोगों के नारे लगा रहे हैं जिन्होंने हमारे गुरुओं की निर्मम हत्या की।”

एक अन्य ट्विटर यूजर ‘मिस्टर सिन्हा’ ने ये वीडियो रीट्वीट करते हुए लिखा है, “लंदन में अल्लाह-हू-अकबर – पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाने वाले किसान समर्थक सिख। ना भाई कोई इनको खालिस्तानी मत कहना, अन्नदाता हैं ये।”

गौरतलब है कि किसान आँदोलन गैर-राजनीतिक होने का दावा करते आ रहे हैं। बावजूद इसके, इन प्रदर्शनों में ही भारत-विरोधी षड्यंत्र भी लोगों के बीच बहस का विषय हैं। हालाँकि, अभी तक इस प्रकार के खालिस्तान के समर्थन में भारत में खुलेआम नारेबाजी नहीं देखी गई हैं लेकिन विभिन्न कयासों के बीच तारिक फ़तेह द्वारा शेयर किया गया यह पुराना वायरल वीडियो कहीं ना कहीं इन आंदोलनों के भयावह रूप लेने की ओर जरुर इशारा करता है।

भारत में 12 दिसंबर को किसानों ने जयपुर-दिल्ली और आगरा-दिल्ली रास्ता बंद करने की चेतावनी दी है। फिलहाल 26 नवंबर से चंडीगढ़ और रोहतक हाईवे पर हजारों की संख्या में हरियाणा और पंजाब के किसान डेरा डाले हुए हैं। जबकि पश्चिम यपी के किसान मेरठ-दिल्ली के रास्ते पर मोर्चा संभाले हैं। बताया जा रहा है कि हरियाणा के सोनीपत में किसानों ने रिलायंस मॉल ही बंद करवाकर उस पर ताला लगवा दिया। आंदोलन कर रहे किसानों ने अंबानी और अडानी का बॉयकाट करने का भी ऐलान किया है।


राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार (दिसंबर 09, 2020) को ही 16 खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ आतंक निरोधी कानून यूएपीए के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है। इनके खिलाफ भड़काऊ गतिविधियों में शामिल रहने और देश में क्षेत्र व धर्म के आधार पर आपसी बैर को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। इनमें से सात आरोपित फिलहाल अमेरिका में रहे हैं, जबकि तीन आरोपी कनाडा और छह आरोपी ब्रिटेन में रह रहे हैं।

मोदी सरकार को धमकी के बाद ‘किसान’ संगठनों ने दायर की SC में याचिका, नहीं मिली जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति

केंद्र सरकार के कृषि सुधार क़ानूनों को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन 16वें दिन भी जारी है। वहीं किसानों और सरकार के बीच यह टकराव अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुँच गया है। भारतीय किसान यूनियन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका के ज़रिए कृषि सुधार क़ानूनों को चुनौती दी है। 

कल (दिसंबर 10, 2020) ही मोदी को सरकार को कानून वापस लेने या गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी किसान नेताओं की तरफ से दी गई थी। आंदोलन करने वाले तथाकथित किसान नेताओं का स्पष्ट रूप से कहना है कि क़ानून वापस लिए जाएँ जबकि सरकार ने इसमें संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है।

भारतीय किसान यूनियन की याचिका में माँग की गई है कि कृषि सुधार क़ानूनों से संबंधित पूर्व याचिकाओं पर सुनवाई हो। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि क़ानून कृषि क्षेत्र को निजीकरण की तरफ लेकर जाएँगे। इन क़ानूनों को लेकर आने से पहले सरकार ने विमर्श नहीं किया था। क़ानून प्रभावी होने के बाद सरकार ने इस पर चर्चा का मौक़ा दिया है लेकिन कृषि क़ानूनों को लेकर अब तक जितनी भी बैठक हुई है उनका कोई नतीजा निकल कर नहीं आया है।       

कोरोना पॉजिटिव मिलने से हड़कंप

इसके अलावा यह ख़बर भी सामने आई है कि किसानों के प्रदर्शन स्थल सिंघु बॉर्डर पर मौजूद दिल्ली पुलिस के दो अधिकारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ यह जानकारी पुलिस विभाग द्वारा दी गई है। बता दें एक डीसीपी और एक एडिशनल डीसीपी का सैम्पल भी कोरोना जाँच के लिए लिया गया है। स्थानीय जिला प्रशासन ने किसानों के प्रदर्शन स्थल पर किसानों के लिए कोरोना जाँच शिविर लगाया था। किसानों ने जाँच कराने से साफ़ मना कर दिया था, उनका कहना था पॉजिटिव आने पर सरकार उन्हें क्वारंटाइन कर देगी। 

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की नहीं मिली इजाजत

दिल्ली पुलिस ने किसानों को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की परमीशन देने से साफ़ मना कर दिया है। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए जंतर मंतर पर कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। नतीजतन कोई भी व्यक्ति या संगठन वहाँ पर विरोध प्रदर्शन के लिए नहीं पहुँच पा रहा है

गौरतलब है कि गुरूवार को तमाम संगठन किसानों के पक्ष में विरोध प्रदर्शन करने पहुँचे थे लेकिन दिल्ली पुलिस और आरएएफ़ के जवानों ने उन्हें भीतर दाखिल नहीं होने दिया था। बीते दिन किसानों ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा था कि जब तक सरकार क़ानून वापस नहीं लेती है तब तक उनका प्रदर्शन ख़त्म नहीं होगा। वही कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने किसानों से आंदोलन ख़त्म करने और क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा था।    

कॉन्ग्रेस नेता गौहर अहमद वानी गिरफ्तार: शोपियाँ में हिज्बुल आतंकियों को भगाने का आरोप

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बृहस्पतिवार (दिसंबर 10, 2020) देर शाम शोपियाँ जिले में आतंकियों को भगाने के आरोप में कॉन्ग्रेस नेता गौहर अहमद वानी (Gowhar Ahmed Wani) को गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत शोपियाँ से गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्ग्रेस नेता गौहर अहमद वानी, जो कि पेशे से वकील भी है, दक्षिण कश्मीर में इमाम साहब शोपियाँ का निवासी है। उसे गत 7 दिसंबर को आतंकवादियों को भगाते हुए पकड़ा गया था। दरअसल, कुछ आतंकवादी एक कार में यात्रा कर रहे थे और जब भारतीय सेना के 44 राष्ट्रीय राइफल्स ने को ट्रेंज़ इलाके के बाबा खदर रामपुरा चौक पर उसे रोका, तो आतंकवादी भाग निकले और कार को परगाचू के पास छोड़ दिया।

सुरक्षाबलों द्वारा पीछा किए जाने पर आतंकवादी कार छोड़कर भाग निकले जबकि गौहर वानी कार से कूद गया था और खुद को पीड़ित बताने का नाटक किया। बाद में, गौहर से पूछताछ की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने इस सिलसिले में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया है।

अधिकारीयों ने बताया कि कॉन्ग्रेस नेता वानी आतंकवादियों को शरण दे रहा था और उन्हें केंद्रशासित प्रदेश में परिवहन के साधन मुहैया करा रहा था। जम्मू कश्मीर पुलिस के अनुसार, वह आतंकी संगठनों के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) के रूप में काम कर रहा था और आतंकवादियों का बचाव करता आया है। घटना के दिन कॉन्ग्रेस नेता आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को भगा रहा था।

गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब पीडीपी नेता वहीद पारा को भी शुक्रवार (नवंबर 27, 2020) को 15 दिनों के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में भेजा गया है। पीडीपी नेता वहीद पारा को हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों के साथ 2019 के संसदीय चुनावों के दौरान अपना समर्थन प्राप्त करने के लिए कथित रूप से साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

वहीं, जम्मू-कश्मीर में जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव के लिए मतदान जारी हैं। चुनाव के मद्देनजर सरकार ने घाटी में सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ाई है। लेकिन इस बीच आतंकी संगठन लगातार घाटी में सुरक्षाबलों, नेताओं पर हमले की फिराक में हैं। लेकिन सभी खुफिया एजेंसी सतर्क हैं और लगातार आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जारी हैं।

किसान आंदोलन रोस्ट: वो अन्नदाता है… | Farmers protest roast: Farmers are ‘annadata’ by Ajeet Bharti

किसानों के आंदोलन के नाम पर ‘अन्नदाता’ कह-कह कर खूब इमोशनल ब्लैकमेल चल रहा है। जबकि वहाँ खालिस्तानी समर्थक और दिल्ली के दंगाइयों को समर्थन देने वाले वामपंथियों का जुटान हो रखा है।

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