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सीमा पर ड्रैगन की चालबाजियों से खराब हुए दोनों देशों के रिश्ते: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को घेरा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को भारत-चीन के संबंध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, ये नहीं हो सकता कि सीमा पर गड़बड़ी हो और बाक़ी रिश्ते सामान्य बने रहें। भारत ने अपनी तरफ से मामले को समेटने की पूरी कोशिश की है। दोनों देशों के बीच कुछ एग्रीमेंट हैं, जिनका चीन द्वारा पालन नहीं किया गया जिसकी वजह से समस्या उत्पन्न हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के थिंक टैंक लौवी इंस्टीट्यूट के साथ हो रहे ऑनलाइन बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के संबंध “बहुत क्षतिग्रस्त स्थिति” में हैं और बीजिंग के वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति बनाए रखने के लिए समझौतों के उल्लंघन के कारण दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई।

सीमा पर भारत और चीन के बीच हुए हिंसक झड़प के आठ महीने बाद जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच कुछ एग्रीमेंट हैं, जिनका पालन नहीं किया गया। LAC पर चीन की तरफ़ से की गई एकतरफ़ा कार्रवाई ने स्थिति को ख़राब किया है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि पिछले 30-40 साल में भारत-चीन के संबंध संभवत: सबसे मुश्किल दौर में हैं। हमारे समझौतों में ये तय था कि दोनों देश में से कोई सीमा पर बड़ी तादाद में सेना को लेकर न आएगा। लेकिन चीन ने इस सहमति को तोड़ा और हज़ारों की तादाद में सैनिकों को लेकर लद्दाख में सैन्य तैयारियों के साथ आया। इससे समस्या पैदा हुई और गलवान घाटी में जून में हमारी तरफ़ से 20 सैनिकों की जान गई। इससे पहले, सीमा पर पिछली बार सैनिकों की जान 1975 में गई थी।

उन्होंने आगे कहा, 1988 से भारत-चीन के संबंध सकारात्मक तरीक़े से बढ़ रहे थे। 30 साल पहले दोनों देशों के बीच वास्तव में कोई व्यापार नहीं था, लेकिन बाद में चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया। अब हालात फिर से बिगड़ रहे हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि एलएसी विवाद के कारण समग्र द्विपक्षीय संबंध दाँव पर है।

दोनों देशों में समझौता इस तथ्य पर आधारित था कि दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सहमति व्यक्त की थी। जबकि LAC पर पेट्रोलिंग के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच बहस या हल्की फुल्की झड़प चलती रहती थी जो कि एक तरह से सामान्य बात थी। लेकिन छोटी मोटी सीमा विवाद सुलझाने के लिए हम एक-दूसरे से लगातार बातचीत में रहते थे।

विदेश मंत्री ने कहा, “ये नहीं हो सकता कि सीमा पर गड़बड़ी हो और बाक़ी रिश्ते सामान्य बने रहें। हमने अपनी तरफ़ से हर स्तर पर चीन को अपनी बात बता दी है। मैं चीन के विदेश मंत्री से मिला। रक्षा मंत्री चीन के रक्षा मंत्री से मिले। इसलिए ये नहीं कह सकते कि संवाद की समस्या है। समस्या ये है कि समझौतों को ताक पर रखा गया है।”

LAC पर जारी गतिरोध को लेकर विदेश मंत्री ने कहा, “चीन लगातार सीमा पार करने की गुस्ताखी कर रहा है। पड़ोसी मुल्क समझौतों को नहीं रख रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ने से दोनों देशों के रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं। इस संकट से निपटना ही दोनों पक्षों के बीच वास्तविक मुद्दा है।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर विवाद है, लेकिन जबतक ये विवाद रहता है तब तक दोनों देशों को बॉर्डर पर शांति बरतनी होगी।

पश्चिम बंगाल में स्कूल की बिल्डिंग में लटका मिला BJP कार्यकर्ता का शव: पार्टी ने TMC गुंडों पर लगाया हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे। जैसे-जैसे साल 2021 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे आए दिन भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की घटनाओं में इजाफा हो रहा है।

ताजा मामला तूफानगंज के अंदरनफुलबरी से आया है। वहाँ बीती रात भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। पार्टी ने इस हत्या का इल्जाम टीएमसी के गुंडों पर डाला है। वहीं टीएमसी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है।

भाजपा कार्यकर्ता की पहचान 30 साल के स्वप्न दास के रूप में हुई है। मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को उनका शव तूफानगंज के एक स्कूल बिल्डिंग में लटका मिला, जिसकी सूचना पाते ही पुलिस मौके पर पहुँची और उन्होंने शव को नीचे उतार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक स्थानीय भाजपा नेता ने बताया कि घटनास्थल पर जमीन के ऊपर खून के धब्बे थे और स्वप्न दास के पैर जमीन को छू रहे थे। ये टीएमसी द्वारा की गई स्पष्ट हत्या है। इधर, टीएमसी का कहना है कि भाजपा एक अप्राकृतिक मृत्यु को सत्ताधारी पार्टी से जोड़ कर घटिया राजनीति करने का प्रयास कर रही है।

उत्तर बंगाल के मंत्री रबीन्द्र घोष ने इस मामले पर कहा, “हर मौत दुर्भाग्यपूर्ण है और तृणमूल कॉन्ग्रेस किसी भी तरह से दास की मौत में शामिल नहीं है। भाजपा केवल हर अप्राकृतिक मौत पर सस्ती राजनीति कर रही है।”

बता दें कि इससे बंगाल के सिलीगुड़ी में एक रैली के दौरान भाजपा कार्यकर्ता पर हमला करके उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया था। वहीं उसके पूर्व कूच बिहार में बीजेपी के एक और कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या का मामला सामने आया था। मृतक कार्यकर्ता का नाम कलाचंद कर्मकार (kalachand Karmakar) था जिनकी उम्र 55 साल थी। वह बीजेपी के बूथ कमेटी के सचिव भी रहे थे।

1 नवंबर को स्वप्न दास की तरह ही बंगाल के नदिया में 34 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता बिजॉय शील की लाश एक पेड़ से लटकते हुए पाई गई थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि राज्य में उन्हें रोकने के लिए आतंक का सहारा लिया जा रहा है।

मेघना हेली ब्रिज: कहानी IAF के हेलिकॉप्टर की, हीरो है आर्मी वाला… जिसने सीनियर को अनसुना कर Pak को चटाई धूल

अंग्रेजों की फौज में नायक (ऑफिसर नहीं) के तौर पर जॉइन करने वाला एक इंसान भारतीय थल सेना का लेफ्टिनेंट जनरल (जनरल, थल सेना का सबसे बड़ा अधिकारी, से बस एक पद नीचे) बनता है। नाम है – सगत सिंह।

लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह का नाम इंडियन आर्मी से ज्यादा दुश्मन की फौज में लिया जाता है – खौफ के संदर्भ में! इनके चर्चे दुश्मन फौज पाकिस्तान और चीन के अलावा एक और जगह खूब हुआ – वो है पुर्तगाल!

1961 में गोवा को पुर्तगालियों से आजादी दिलाने में इन्होंने ऐसी भूमिका अदा की थी कि इनके नाम पर 10000 डॉलर का इनाम रखा गया था। पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन के लगभग हर रेस्टॉरेंट और कैफे में इनके फोटो और नाम के पर्चे चिपकाए गए थे। लेकिन सगत सिंह को कोई पुर्तगाली पकड़ कर 10000 डॉलर जीत ले, इस मिट्टी के वो बने नहीं थे।

1967 में यह सगत सिंह ही थे, जिन्होंने चीन को 1962 की गलती दोहराने और भारतीय फौज को कमतर समझने के लिए 300+ चीनी फौजियों की लाशों का रिटर्न गिफ्ट दिया था। नाथू ला का वो युद्ध आज तक चीनी सत्ता को सालता रहता है।

जनरल सैम मानेकशॉ के साथ दाएँ से दूसरे सगत सिंह (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)

लेकिन आज कहानी 1971 की। वो कहानी जिसके बगैर बांग्लादेश को आजाद करा पाकिस्तान के दो टुकड़े करना इतना आसान न होता। इस कहानी में जाँबाजी भी है, जिद भी और जीत के लिए सीनियर को अनसुना कर अपने फैसले पर आगे बढ़ने का जुनून भी। और युद्ध की रणनीति तो खैर है ही!

मेघना नदी के पार पाकिस्तानी फौज और टूटा पुल

बांग्लादेश युद्ध के शुरू हुए सिर्फ 5 दिन हुए थे। ईस्टर्न कमांड के पास 3 कोर डिविजन (II, XXXIII और IV) और एक कम्युनिकेशन जोन (101) था। सबको अपना-अपना टास्क दिया गया था। सबने अपना टास्क 100% पूरा किया, सिवाय एक के – वो था कोर डिविजन IV, जिसको लीड कर रहे थे लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह। सगत सिंह ने टास्क तो 100% पूरा किया, लेकिन वो इसके आगे भी बढ़ गए – सीनियर ऑफिसरों को नाराज करने की सीमा तक!

मेघना नदी के पूर्वी छोर तक पहुँचना, एरिया को सिक्योर करना… ये सारे टास्क लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह की कोर डिविजन IV कर चुकी थी। लेकिन सगत रूक कर अवसर का इंतजार करने वालों में से नहीं थे। वो नदी के पार पाकिस्तानी फौजियों तक पहुँचना चाहते थे। लेकिन पुल को दुश्मन सेना ने उड़ा दिया था। यहीं पर सगत सिंह ने वो किया, जिसके लिए उन्हें अपने सीनियर ऑफिसरों से गरमा-गर्म बहस करनी पड़ी लेकिन पाकिस्तानी ऑफिसर को इस युद्ध रणनीति के कारण भौंचक रह जाना पड़ा।

स्क्वॉड्रन लीडर पुष्प कुमार वैद्य की सुनाई कहानी, फोटो साभार: bharat-rakshak

पहले बात पाकिस्तानी ऑफिसर की – कोमिला और लालमई एरिया के पाकिस्तानी कमांडर ब्रिगेडियर अत्री (रिटायर्ड) ने मानसिक हार को स्वीकार करते हुए कहा था – “भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर रात में हमारी सेना के इतने नजदीक और इतने नीचे फ्लाई करते हुए गुजरे कि उस आवाज की गूँज ने उन्हें भयभीत कर दिया, जबकि देखा जाए तो पाकिस्तानी सैनिकों को क्षति नहीं हुई थी।”

पाकिस्तानी ब्रिगेडियर एआर सिद्दकी ने तो इस पूरे मामले को किताब तक में जिक्र किया है। East Pakistan: The Endgame: An Onlooker’s Journal 1969-1971 के 195-196 पन्ने पर उन्होंने लिखा है, “दुश्मन ने शुरुआती मूव्स ऐसे चली कि पाकिस्तानी उस मूव की बस प्रतिक्रिया देते रह गए। पाकिस्तानी सेना से कम से कम भीड़े वो अपने लक्ष्य ढाका की ओर बढ़ा चला जा रहा था।”

जेएस अरोड़ा Vs सगत सिंह

जगजीत सिंह अरोड़ा बांग्लादेश युद्ध के समय ईस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। मतलब सब कुछ उनकी ही देख-रेख में होना था। सब कुछ उनके प्लान के अनुसार चल रहा था। कोई नहीं चल रहा था तो वो थे लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह। जेएस अरोड़ा इस बात से चिंतित थे।

3 दिसंबर को युद्ध शुरू हुआ और लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह मेघना नदी के पूर्वी छोर तक 5 दिसंबर को पहुँच गए थे। उनके कोर डिविजन का टास्क भी यही था। लेकिन वो 5 तारीख से ही भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर पायलटों के साथ उड़ कर मेघना नदी को क्रॉस करते हुए पाकिस्तानी फौजियों की पोजिशन को समझना शुरू कर चुके थे।

लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह का यह रुटीन बन गया था। लेकिन वह किसी प्लान के साथ नहीं उड़ते थे। मौका और समय देखते हुए अंत क्षणों में निर्णय लेते थे और यही उनकी युद्ध रणनीति भी थी। लेकिन इसमें खतरा भी था। नीचे से पाकिस्तानी फौजी भारतीय हेलीकॉप्टर पर निशाना भी लगाते रहते थे।

हेलीकॉप्टर से मेघना नदी क्रॉस करके पाकिस्तानी फौजियों की पोजिशन का आँकते लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह

मेघना नदी के पार अपने जवानों को हेलीकॉप्टर से लैंड कराने के लिए जगह खोजते लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह एक बार पाकिस्तानी गोली से बस कुछ मिलीमीटर की दूरी से बचे थे और पायलट के तो जाँघ में गोली लग गई थी। हेलीकॉप्टर में कुल 38 गोली लगी थी। लैंडिंग के बाद पायलट, को-पायलट, ग्रुप कैप्टन सभी डरे हुए थे लेकिन सगत सिंह कूल थे, बिल्कुल अपने अंदाज में! अगले दिन सगत सिंह फिर से नदी के पार थे!

ऐसे में जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जगजीत सिंह अरोड़ा अपनी युद्ध रणनीति को लेकर प्रतिबद्ध भी थे और सगत सिंह के उतावले को देखते हुए चिंतित भी। उन्होंने सगत को प्लान के तहत चलने को कहा। लेकिन सगत अपने तर्कों पर अड़े रहे। 8 दिसंबर 1971 को इस बात को लेकर दोनों के बीच गरमा-गर्म बहस हुई। लेकिन सगत हिले नहीं, जिद पर अड़े रहे। लेकिन अंत में उन्हें कमांड की बात तो माननी ही पड़ती। इसलिए लंच पर उन्होंने फिर से अपना तर्क रखा।

इसी बीच जेएस अरोड़ा के लिए एक मैसेज आया और उन्हें लंच के बीच ही हेड-क्वार्टर के लिए निकलना पड़ गया। दोनों के बीच मेघना नदी को क्रॉस करना है या नहीं, इस मुद्दे पर बात नहीं हो पाई। लेकिन गरमा-गर्म बहस से लंच के पहले चेहरे पर जो तनाव था, वो जेएस अरोड़ा के चेहरे से गायब हो चुका था लंच के दौरान आए उस मैसेज से। मैसेज था – पाकिस्तानी फौजियों के बीच मानसिक हार की लहर शुरू हो चुकी है। सगत सिंह के लिए यह काफी था।

मेघना हेली ब्रिज

खतरों से खेल कर लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह ने मेघना नदी के पार पाकिस्तानी रक्षा पंक्ति को भली-भाँति आँक लिया था। वो उस जगह को भी पिन-पॉइंट कर चुके थे, जहाँ भारतीय जवानों को हेलीकॉप्टर से लैंड कराना था। सब प्लानिंग सगत सिंह के दिमाग में थी। वो रूल बुक से नहीं चलते थे। हेलीकॉप्टर में कितने भारतीय जवान चढ़ेंगे, यह भी वो तकनीक से ज्यादा ‘जुगाड़’ के हिसाब से सोच रखे थे।

मेघना नदी को क्रॉस करना था Mi-4 हेलीकॉप्टर से। हर हेलीकॉप्टर की अधिकतम क्षमता थी 14 जवानों को लेकर जाने की। लेकिन सगत सिंह और भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने जरूरत से ज्यादा फ्यूल को निकाल कर हेलीकॉप्टर का वजन कम किया और प्रति हेलीकॉप्टर 23 जवानों को नदी के पार भेजा।

नदी के पार हेलीपैड नहीं थे। यहाँ ‘जुगाड़’ तकनीक काम आई। टॉर्च जला कर 200-200 मीटर की दूरी पर रख कर H का निशान बनाया गया। उसके रिफलेक्टर को ढँक दिया गया ताकि पायलट की आँखें न चौंधियाए। वायुसेना का अधिकतम उपयोग करने के लिए सिर्फ जवानों और उनके हल्के हथियारों को ही हेलीकॉप्टर से नदी के पार भेजा गया। जबकि भारी हथियारों को बोट के सहारे नदी पार कराया गया।

9 दिसंबर की रात से शुरू हुआ मेघना हेली ब्रिज मिशन अगले 36 घंटों में 5000+ भारतीय जवानों को मेघना नदी पार करा चुका था। इस दौरान कुल 409 शॉर्टीज (चक्कर) में एक भी दुर्घटना नहीं हुई थी और 51 टन हथियार भी उस ओर पहुँच चुके थे।

साभार: एयर कमोडोर आरएम श्रीधरण का missionvictoryindia में प्रकाशित लेख

1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश की आजादी में मेघना हेली ब्रिज का रोल युद्ध रणनीति की कक्षा में सबसे अहम माना जाता है। लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह अगर अपने जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जगजीत सिंह अरोड़ा की बात मान जाते तो शायद वो मेघना नदी की पूर्वी तट पर अवसर का इंतजार ही करते रह जाते। या फिर उनके हेलीकॉप्टर पर चली 38 गोलियों में से एक भी उन्हें अपना निशाना बना लेती तो भी युद्ध की दिशा कुछ और होती। यह सब कयास इसलिए क्योंकि पाकिस्तानी फौज और सत्ता युद्ध को लंबा खींचने और UN को इसमें शामिल कर यथास्थिति बनाने की लॉबिंग कर रहा था।

मेघना हेली ब्रिज के सिर्फ 6 दिनों के बाद… वो फोटो

लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह की जाँबाजी के किस्से आर्मी वालों से लेकर एयरफोर्स और दुश्मन की सेना तक बताते हैं, लिखते रहते हैं। लेकिन यह सिर्फ उनका उतावलापन नहीं था। लंबे समय से एयरफोर्स ऑफिसरों की संगत, एक-दूसरे की समझ और भरोसे के कारण ही यह संभव हुआ था।

AAK नियाजी (पाकिस्तान के ईस्टर्न कमांड के कमांडर) सरेंडर के पेपर पर साइन करते, बगल में भारत के ईस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जगजीत सिंह अरोड़ा और पीछे लाल घेरे में लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह (फोटो साभार: DNA)

1971 के युद्ध के 10 साल पहले वो भारत के एकमात्र पैराशूट ब्रिगेड की कमान संभाल चुके थे। न सिर्फ संभाल चुके थे बल्कि 42 की उम्र में वो जितनी संख्या की जरूरत होती है, उतनी बार पैरा-जंपिंग करके पैरा-बैज भी ले चुके थे।

गोवा, नाथू ला और मेघना… इन सब ऑपरेशनों में भारत को जीत दिलाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह के लिए मेघना हेली ब्रिज उनके दिल के सबसे करीब रहा। शायद यही वजह रही कि उन्होंने रिटायरमेंट के बाद जयपुर के अपने आशियाने का नाम ‘मेघना’ रखा।

जयपुर में अपने निवास स्थान ‘मेघना’ के बाहर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड)सगत सिंह (फोटो साभार: thedailyguardian)

राहुल बनकर मिला शबाब, शादी के एक दिन पहले युवती को किया अगवा: मऊ में नए कानून के तहत 5 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मऊ में युवती को प्रेम जाल में फँसाकर उसे भगाने के आरोप में शबाब की पत्नी-भाई सहित पाँच को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपित शबाब और युवती को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को पुलिस ने बड़हलगंज पुलिया से नुरूल खान, शिवकुमार दास व भाई अकबर अली तथा भोगवा जलालपुर से उसकी पत्नी रूखसाना उर्फ मुन्नी, हुस्नबानो को गिरफ्तार किया। 

गौरतलब है कि 29 नवंबर की रात अचानक युवती लापता हो गई थी। जिसके बाद युवती कि पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिले के चिरैयाकोट थाने में दर्ज FIR में कहा गया है कि शबाब नाम के मुस्लिम युवक ने राहुल बनकर युवती को प्रेम जाल में फँसाया। उसके बाद धर्म परिवर्तन करवाने के लिए उसे भगाकर ले गया। युवती के पिता की तहरीर पर आरोपित युवक के साथ परिवार के 14 सदस्यों के खिलाफ यह मुकदमा दर्ज किया गया।

1 दिसंबर को होनी थी युवती की शादी

जिले के चिरैयाकोट बाजार निवासी एक व्यक्ति की 30 साल की बेटी की शादी 1 दिसंबर को होनी थी। विवाह की तैयारियाँ पूरी हो चुकी थी। आरोप है कि इस बीच 29 नवंबर की रात शबाब नाम का युवक उसे बहला-फुसलाकर साथ लेकर चला गया।

30 नवंबर की सुबह बेटी हुई लापता

परिवार के सदस्यों को घटना की जानकारी 30 नवंबर की सुबह हुई। इस बाबत युवती के पिता ने थाने में तहरीर दी। इसमें उन्होंने चिरैयाकोट थाने के मोलनागंज बाजार निवासी शबाब उर्फ राहुल को आरोपित बनाया है। पिता का आरोप है कि टैक्सी चलाने वाले शबाब ने अपना नाम राहुल किया और धर्मांतरण कराने के लिए उनकी बेटी को प्रेम जाल में फँसाकर भगा ले गया। पुलिस ने उत्तर प्रदेश धर्म प्रवर्तन अध्यादेश 2020 के तहत केस दर्ज किया। 

पिता ने बताया है कि चिरैयाकोट कस्बे के मोलनागंज निवासी शबाब उर्फ राहुल खान, उसकी पत्नी रूखसाना उर्फ मुन्नी, इस्लाम खान उर्फ टिमल, झिंटू उर्फ अकबर अली, अफसाना बेगम, सन्नी उर्फ नदीम, बलिया जनपद के रसड़ा निवासी जफरूल उर्फ दुसड़ी, चिरैयाकोट कस्बा के जमीन बुढ़ान निवासी यासीर उर्फ मोड़ा तथा पश्चिम बंगाल के 24 परगना काजी पाडा महेशताला निवासी नवाब खान, अरबाज खान, मोंडल पाडा जलखुस महेशताला निवासी सुकुमार दास, गुवतला मस्जिद बिलजला महेशताला निवासी अफरोज खान उर्फ घून्नू, नुरूल खान, हुस्न बानो का एक सक्रिय गिरोह है।

बरेली में दर्ज हुई थी पहली FIR

बता दें कि रविवार को ही बरेली के देवरनिया थाने में एक छात्रा ने धर्म परिवर्तन का दबाव बनाए जाने के संबंध में मामला दर्ज कराया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 3/5 की धारा में FIR दर्ज कर आरोपित उवैस को गिरफ्तार किया था। कानून लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश का यह पहला मामला था।

इसके बाद बरेली के इज्जतनगर थाने में लव जिहाद का मामला सामने आया। ताहिर हुसैन ने अपनी पहचान छिपाकर हिन्दू युवती को अपने प्रेम जाल में फँसाकर उसकी मंदिर में माँग भरी और शादी की। उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। यही नहीं, प्रेग्नेंट होने पर लात घूसों से मारकर उसका गर्भपात किया।

किसानों ने ठुकराया MSP जारी रखने का प्रस्ताव, कहा- और तेज करेंगे आंदोलन, भाजपा नेताओं का करेंगे घेराव

सरकार ने किसानों को कृषि कानून में संशोधन का लिखित प्रस्ताव भेजा है। जिस पर किसान नेता सिंघु बॉर्डर पर बैठक की। किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और कृषि कानूनों की वापसी की माँग की है। सिंघु बॉर्डर पर किसान नेता ने कहा कि किसान 12 दिसंबर को दिल्ली-जयपुर और दिल्ली-आगरा राजमार्गों को अवरुद्ध करेंगे। किसानों ने ऐलान किया है कि आंदोलन अब और तेज होगा। किसानों ने बीजेपी दफ्तरों, नेताओं का घेराव करने की भी घोषणा की।

किसानों से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार ने किसान नेताओं को एक लिखित प्रस्ताव दिया, जिसमें कहा गया कि नए कृषि कानूनों में MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य बना रहेगा। वहीं किसान अपनी माँग पर अड़े हुए हैं। किसानों की ओर से माँग की गई है कि सरकार इन कानूनों वापस ले।

सरकार ने कहा है कि वह दिल्ली के पास प्रदर्शन कर रहे किसानों को ‘लिखित आश्वासन’ देने के लिए तैयार है कि खरीद के लिए मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) यथावत जारी रहेगा। गौरतलब है कि संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की माँग को लेकर किसान लगभग एक पखवाड़े से दिल्ली के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार और किसानों ने अब तक पाँच दौर की बातचीत की है, लेकिन गतिरोध अभी भी जारी है।

क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि, जो सरकार की तरफ से प्रस्ताव आया है उसे हम पूरी तरह से रद्द करते हैं। इसके अलावा अन्य नेताओं ने भी प्रेस को संबोधित किया जिसमें रिलायंस जियो के सभी प्रोडक्ट का बहिष्कार करने से लेकर दिल्ली-आगरा हाईवे बंद करने और 14 दिसंबर के बाद से अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करने की बातें भी सामने रखी गईं। किसान नेताओं ने कहा कि एक के बाद एक दिल्ली की सड़कें जाम की जाएँगी।

सरकार ने बुधवार (दिसंबर 09, 2020) को 13 किसान संगठनों को भेजे प्रस्ताव में एमएसपी पर लिखित आश्वासन देने की बात कही। सरकार ने यह भी कहा कि वह सितंबर में लागू नए कृषि कानूनों के बारे में अपनी चिंताओं पर सभी आवश्यक स्पष्टीकरण प्रदान करने के लिए तैयार है।

कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल प्रस्ताव भेजते हुआ कहा, “सरकार ने खुले दिल से और देश के कृषक समुदाय के सम्मान के साथ किसानों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया है। सरकार ने किसान यूनियनों से अपील की कि वे अपना आंदोलन समाप्त करें।”

किसानों के इस डर पर कि नए कानून के बाद मंडियाँ कमजोर होंगी, सरकार ने कहा कि एक संशोधन किया जा सकता है जिसमें राज्य सरकारें मंडियों के बाहर काम करने वाले व्यापारियों को पंजीकृत कर सकती हैं। राज्य कर और उपकर भी लगा सकते हैं जैसा कि वे उन पर एपीएमसी (कृषि उपज बाजार समिति) मंडियों में उपयोग करते थे।

आगे यह चिंता व्यक्त की गई कि बड़े कॉरपोरेट्स कृषिभूमि पर कब्जा कर लेंगे, इस प्रस्ताव स्पष्ट किया गया कि कोई भी खरीदार खेत के लिए ऋण नहीं ले सकता है और न ही किसानों को ऐसी कोई शर्त दी जाएगी। कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग के तहत फ़ार्मलैंड को संलग्न करने पर, सरकार ने कहा कि मौजूदा प्रावधान स्पष्ट है लेकिन फिर भी आवश्यकता पड़ने पर इसे और स्पष्ट किया जा सकता है।

राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और किसान नेताओं के बीच मंगलवार (दिसंबर 08, 2020) शाम एक बैठक के बाद प्रस्ताव भेजा गया था। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूसा कॉम्प्लेक्स में आयोजित बैठक में शाह ने कहा था कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एक ठोस प्रस्ताव पेश करेंगे। हालाँकि, किसान नेताओं ने अपनी माँग पर अडिग रहते हुए कहा कि उनकी एकमात्र माँग कृषि व्यापार को उदार बनाने वाले कानून को हटाने को लेकर है।

गत सितंबर माह में संसद द्वारा पारित तीन कानूनों के खिलाफ किसान 26 नवंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों ने मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक राष्ट्रीय बंद (भारत बंद) लागू किया था, जो एक तरह से फ्लॉप रहा।

अतीक अहमद के शार्प शूटर मुबारक खान की दो अवैध इमारतों पर चला योगी सरकार का बुलडोजर, देखें वीडियो

पूर्व सांसद अतीक अहमद के गैंग के शार्प शूटर मुबारक खान के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रयागराज प्रशासन ने उसकी संपत्ति को ध्वस्त किया है। प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीडीए) ने फरार चल रहे ग्राम प्रधान मुबारक खान की दो अवैध इमारतों को जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल करते हुए जमींदोज कर दिया। पीडीए से नक्शा पास कराए बिना ही ये अवैध निर्माण कराया गया था।

मुबारक खान ने 400- 400 वर्ग मीटर में दो अवैध इमारतों का निर्माण कराया था। एक ईमारत तो कब्रिस्तान की जमीन पर ही बना डाली गई थी। वहीं, दूसरी जमीन किसी अन्य व्यक्ति की जमीन पर कब्जा करके बनाया गया है। मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार, मुबारक खान भूमाफिया और हिस्ट्रीशीटर है। साथ ही वो बक्शी मोढ़ा गाँव का ग्राम प्रधान भी है। करेली सहित कई थानों में उस पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

बुधवार (दिसंबर 9, 2020) को PDA के जोनल अधिकारी आलोक पांडे के नेतृत्व में टीम जेसीबी के साथ कार्रवाई के लिए पहुँची। पीडीए की कार्रवाई का मुबारक खान के परिवार की महिलाओं ने जम कर विरोध किया। उन सभी ने महिला पुलिस के साथ कहासुनी भी की और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी की। घटनास्थल पर अभी भी भारी संख्या में पुलिस बल को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। माफियाओं की जमीनों पर अब उद्योग-धंधे लगेंगे। देखें कार्रवाई का वीडियो:

इससे पहले अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई की अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चलाया गया था। नवंबर 17, 2020 को अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई के अवैध निर्माण पर योगी सरकार का बुलडोजर चला था। अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई के जिस अवैध निर्माण को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया, वो 2500 वर्ग गज का है और खुल्दाबाद के चकिया क्षेत्र में बनाया गया था।  इमरान जई ही अतीक अहमद के सारे अवैध कारोबार को संभालता है और उसके धंधों और सम्पत्तियों का प्रबंधन करता है।

अनिल कपूर ने गलत तरीके से पहनी भारतीय वायुसेना की ड्रेस, बकी गालियाँ: IAF ने ‘AK vs AK’ के दृश्य से जताई आपत्ति

फिल्म अभिनेता अनिल कपूर ने सोमवार (नवंबर 7, 2020) को अपनी अगली फिल्म ‘AK vs AK’ से जुड़ा एक क्लिप जारी कर के कहा कि अब जनता को और मूर्ख नहीं बनाया जाएगा, इसीलिए वो फिल्म का नैरेटिव पेश कर रहे हैं। इस वीडियो में अनिल कपूर भारतीय वायुसेना (IAF) की वर्दी में दिख रहे हैं और ताबड़तोड़ गालियों का प्रयोग कर रहे हैं। भारतीय वायुसेना (IAF) ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है।

नेटफ्लिक्स की ‘AK vs AK’ के प्रचार के लिए पोस्ट किए गए इस वीडियो में अनुराग कश्यप भी दिख रहे हैं। अनुराग कश्यप उनके पास आकर एक फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाने की बात करते हैं, जिसके जवाब में भारतीय वायुसेना (IAF) के ड्रेस में दिख रहे अनिल कपूर कहते हैं, “मैं तुमको #तिया बोल चुका हूँ। फिर दोबारा भी बोल सकता हूँ, क्योंकि तूने वासेपुर बनाई है। तू ऐसा-वैसा #तिया नहीं है। तू #तियों का रणवीर सिंह है। एकदम टॉप।”

इस फिल्म में अनुराग कश्यप ने एक फिल्म निर्देशक का रोल किया है और अनिल कपूर ने एक बड़े अभिनेता था। वीडियो देख कर पता चलता है कि अभिनेता किसी फिल्म की शूटिंग कर रहा है, तभी निर्देशक उसे सेट पर स्क्रिप्ट सुनाने पहुँच जाता है। फिल्म में अनिल कपूर का महिमामंडन करते हुए बताया गया है कि वो 40 वर्षों से भारत के स्टार हैं और वो कहते हैं कि उन्हें देखते ही लोगों का दिल ‘रम पम पम पम’ (‘मेरा नाम है लखन’ वाला संगीत) करने लगता है।

फिल्म के ट्रेलर में वो कहते दिखते हैं, “वो क्या है कि भारत में फ़िल्में एक्टर के झकास पर चलती है, किसी ऐरे-गैर डायरेक्टर की बकवास पर नहीं।” फिर एक कार्यक्रम में अनिल कपूर निर्देशक अनुराग कश्यप को ‘फिल्म इंडस्ट्री का सबसे बड़ा फ्रॉड’ कहते दिखते हैं और दावा करते हैं कि इसकी फिल्म से गालियाँ निकाल दो तो खुद वासेपुर के लोग भी इसकी फिल्म नहीं देखते। वो कहते हैं, “अनुराग को इतना बड़ा फुटेज क्यों दे रहे हो? वो बड़ा था, है नहीं।”

इसके बाद दोनों के बीच लड़ाई-झगड़े के कुछ दृश्य हैं। हालाँकि, आपत्ति उस दृश्य को लेकर है, जिसमें वो भारतीय वायुसेना की ड्रेस पहन कर गालियाँ बक रहे हैं। IAF ने कहा कि इस दृश्य में उनकी ड्रेस को गलत तरीके से पहना गया है। साथ ही जिस भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वो भी अनुचित है। IAF ने स्पष्ट किया कि ये बिलकुल भी भारतीय सशस्त्र बलों के व्यावहारिक मानदंडों के अनुरूप नहीं है।

भारतीय वायुसेना ने कहा कि इस आपत्तिजनक दृश्य को फिल्म से हटाया जाना चाहिए। एविएटर अनिल चोपड़ा ने भी इस दृश्य से आपत्ति जताई और कहा कि भारतीय वायुसेना के एक एयर कमांडर को इस तरह की भाषा का प्रयोग करते हुए दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि इसे काफी बुरे तरीके से प्रदर्शित किया गया है। भारतीय सेना के पूर्व अध्यक्ष जनरल वेद मलिक ने उनसे सहमति जताते हुए कहा कि ये हमारी संस्कृति है ही नहीं।

इस फिल्म के प्रमोशन के लिए दोनों फ़िल्मी हस्तियों ने ट्विटर पर आपस में झगड़ा किया। दोनों अपनी वास्तविक ज़िंदगी के पेशे को ही स्क्रीन पर भी जिएँगे। इसकी कहानी कुछ यूँ है कि फिल्म स्टार से निर्देशक का झगड़ा होने के बाद निर्देशक अपमानित महसूस करेगा और बदला लेने के लिए उसकी बेटी का अपहरण करेगा। अनिल कपूर और अनुराग कश्यप अभिनीत 1:48 घंटे की ‘AK vs AK’ एक क्राइम जॉनर की डार्क-कॉमेडी फिल्म होगी।

हिन्दू-ईसाई युवतियों को जबरन दुल्हन बनाकर चीन भेजता है पाकिस्तान : USCIRF

एक शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक ईसाई और हिंदू युवतियों/महिलाओं को चीन में दुल्हन बनने के लिए मजबूर किया जाता है और पाकिस्तान की सरकार खुद लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने के लिए जिम्मेदार है।

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अमेरिका के राजदूत सैमुअल ब्राउनबैक ने मंगलवार (दिसंबर 08, 2020) को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति अच्छी नहीं है और धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव होता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत पाकिस्तान को ‘विशेष चिंताजनक देश’ (सीपीसी) के रूप में नामित करने के कारणों में से एक के रूप में इसका उल्लेख किया।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने सोमवार (दिसंबर 07, 2020) को पाकिस्तान और चीन समेत 8 अन्य देशों को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के आरोप में चिंताजनक देशों की सूची में शामिल किया है। यूएस का कहना है कि पाकिस्तान और चीन सहित इन सभी देशों में धार्मिक आजादी नहीं है। ये देश धर्म के आधार पर भेदभाव और जुल्म रोक पाने में नाकाम साबित हुए हैं।

चीन द्वारा दशकों से लागू की गई एक-संतान नीति के कारण, और एक पुरुष वारिस की प्राथमिकता के लिए वहाँ महिलाओं की अत्यधिक कमी है। इसके लिए कम्युनिस्ट देश अन्य देशों से दुल्हन, दासियाँ और मजदूरों के रूप में महिलाओं का आयात करता आया है।

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के अन्य मुद्दों का हवाला देते हुए भारत को भी CPC में रखने की सिफारिश की थी, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने सोमवार को घोषणा करते समय इस सुझाव को अस्वीकार कर दिया।

इसके अलावा, ब्राउनबैक ने कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के बहुत से सारे काम स्वयं सरकार द्वारा किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ईशनिंदा के आरोप में पूरे विश्व में जितने लोग बंद हैं, उनमें से आधे पाकिस्तान की जेलों में हैं।

पुलवामा में आतंकी संगठन अल-बदर के 3 आतंकियों को जवानों ने किया ढेर: एक नागरिक घायल, सर्च ऑपरेशन जारी

जम्मू-कश्मीर में पुलवामा के टिकेन इलाके में सुरक्षा बलों ने बुधवार (9 दिसंबर, 2020) को तीन इस्लामिक आतंकवादियों को मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने कहा कि, एनकाउंटर में मारे गए तीनों आतंकवादी आतंकी संगठन अल बदर से जुड़े थे।

तीनों आतंकी स्थानीय निवासी थे। जम्मू और कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और राष्ट्रीय राइफल्स ने आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में इनपुट प्राप्त करने के बाद संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसके बाद बुधवार सुबह यह मुठभेड़ शुरू हुई।

जानकारी के अनुसार, जैसे ही सुरक्षाबल उनके नजदीक पहुँचे, आतंकवादियों ने उन पर फायरिंग कर दी। सुरक्षाबलों ने फौरन पोजिशन लेते हुए जवाबी कार्रवाई की। इस कार्रवाई में जवानों ने तीनों आतंकवादियों को मार गिराया। वहीं गोलीबारी में एक स्थानीय नागरिक भी घायल हो गया जिसे नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मुठभेड़ के बारे में बताते हुए IGP विजय कुमार ने कहा, “आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में एक नागरिक को उसके पैर में गोली लगी। वह फिलहाल स्थिर है। मुड़भेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए हैं। वे स्थानीय आतंकवादी थे और अल-बदर से जुड़े थे। हम यह सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र की तलाशी कर रहे हैं कि कोई पुराना / इस्तेमाल नहीं हुआ ग्रेनेड बचा न हो।”

गौरतलब है कि अल-बदर एक इस्लामी आतंकवादी संगठन है, जो पाकिस्तान द्वारा कश्मीर क्षेत्र में आतंक को फैलाने के लिए प्रायोजित है। इस आतंकी संगठन का गठन 90 के दशक के अंत में पाकिस्तानी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस द्वारा हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन के समर्थन से किया गया था।

सोनिया गाँधी ने जस्टिस वर्मा से क्यों माँगी माफी? कॉन्ग्रेस की निर्भया कांड के बाद भी महिला सुरक्षा के प्रति बेपरवाही का सबूत

निर्भया कांड की आठवीं वर्षगाँठ और सोनिया गाँधी के 74 वें जन्मदिन के अवसर पर देश में बलात्कार की घटनाओं को रोकने के लिए कठोर बलात्कार से संबंधित कानूनी फ्रेमवर्क को लागू करने में कॉन्ग्रेस पार्टी के लापरवाही भरे दृष्टिकोण पर फिर से गौर करना आवश्यक है।

महिला आबादी के बचाव और सुरक्षा के प्रति देश की अंतरात्मा को झकझोर देने वाले भीषण निर्भया मामले के बाद कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए- 2 सरकार ने CJI वर्मा (रिटायर्ड) की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम का गठन किया, जिसमें बदलावों की जाँच और कानूनी फ्रेमवर्क में बदलाव के सुझाव दिए गए, जिससे कि बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को कम करने में मदद मिल सके। समिति द्वारा 23 जनवरी, 2013 को रिपोर्ट सबमिट की गई थी।

कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधि आधी रात को जस्टिस वर्मा के घर गए

इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक साक्षात्कार में न्यायमूर्ति वर्मा ने खुलासा किया कि एक कॉन्ग्रेस सदस्य 5 जनवरी की आधी रात को उनके घर आया था। उन्होंने पार्टी के सुझावों को व्यक्तिगत रूप से समिति को सौंपने पर जोर दिया था। कथित तौर पर उस व्यक्ति को जनार्दन द्विवेदी ने भेजा था।

न्यायमूर्ति वर्मा ने पत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कॉन्ग्रेस सदस्य को पत्र को या तो गेट पर छोड़ने को कहा या फिर अगले दिन विज्ञान भवन में समिति के कार्यालय में देने के लिए कहा।

स्वाभाविक रूप से एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के प्रतिनिधि के अस्थिर व्यवहार ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश को संशय में डाल दिया। उन्होंने इस घटना को कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के संज्ञान में लाया और फिर इसके प्रति अपनी अस्वीकृति व्यक्त की। इस घटना के बाद, सोनिया गाँधी ने जस्टिस वर्मा को फोन किया और व्यक्तिगत रूप से अपनी पार्टी के प्रतिनिधि के दुर्व्यवहार के लिए माफी माँगी।

सुशील कुमार शिंदे ने समिति की रिपोर्ट प्राप्त करने की जहमत नहीं उठाई: न्यायमूर्ति वर्मा

पूर्व CJI ने यह भी खुलासा किया था कि तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, जिन्होंने समिति को नियुक्त किया था, ने समिति के साथ एक बार भी बातचीत नहीं की थी। कमेटी की रिपोर्ट के बारे में कॉन्ग्रेस पार्टी इतनी बेपरवाह थी कि रिपोर्ट को स्वीकार करने के लिए न तो सुशील कुमार शिंदे और न ही केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह मौजूद थे। रिपोर्ट को मंत्रालय में संयुक्त सचिव द्वारा स्वीकार किया गया था।