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सोनिया गाँधी ने जस्टिस वर्मा से क्यों माँगी माफी? कॉन्ग्रेस की निर्भया कांड के बाद भी महिला सुरक्षा के प्रति बेपरवाही का सबूत

निर्भया कांड की आठवीं वर्षगाँठ और सोनिया गाँधी के 74 वें जन्मदिन के अवसर पर देश में बलात्कार की घटनाओं को रोकने के लिए कठोर बलात्कार से संबंधित कानूनी फ्रेमवर्क को लागू करने में कॉन्ग्रेस पार्टी के लापरवाही भरे दृष्टिकोण पर फिर से गौर करना आवश्यक है।

महिला आबादी के बचाव और सुरक्षा के प्रति देश की अंतरात्मा को झकझोर देने वाले भीषण निर्भया मामले के बाद कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए- 2 सरकार ने CJI वर्मा (रिटायर्ड) की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम का गठन किया, जिसमें बदलावों की जाँच और कानूनी फ्रेमवर्क में बदलाव के सुझाव दिए गए, जिससे कि बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को कम करने में मदद मिल सके। समिति द्वारा 23 जनवरी, 2013 को रिपोर्ट सबमिट की गई थी।

कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधि आधी रात को जस्टिस वर्मा के घर गए

इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक साक्षात्कार में न्यायमूर्ति वर्मा ने खुलासा किया कि एक कॉन्ग्रेस सदस्य 5 जनवरी की आधी रात को उनके घर आया था। उन्होंने पार्टी के सुझावों को व्यक्तिगत रूप से समिति को सौंपने पर जोर दिया था। कथित तौर पर उस व्यक्ति को जनार्दन द्विवेदी ने भेजा था।

न्यायमूर्ति वर्मा ने पत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कॉन्ग्रेस सदस्य को पत्र को या तो गेट पर छोड़ने को कहा या फिर अगले दिन विज्ञान भवन में समिति के कार्यालय में देने के लिए कहा।

स्वाभाविक रूप से एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के प्रतिनिधि के अस्थिर व्यवहार ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश को संशय में डाल दिया। उन्होंने इस घटना को कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के संज्ञान में लाया और फिर इसके प्रति अपनी अस्वीकृति व्यक्त की। इस घटना के बाद, सोनिया गाँधी ने जस्टिस वर्मा को फोन किया और व्यक्तिगत रूप से अपनी पार्टी के प्रतिनिधि के दुर्व्यवहार के लिए माफी माँगी।

सुशील कुमार शिंदे ने समिति की रिपोर्ट प्राप्त करने की जहमत नहीं उठाई: न्यायमूर्ति वर्मा

पूर्व CJI ने यह भी खुलासा किया था कि तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, जिन्होंने समिति को नियुक्त किया था, ने समिति के साथ एक बार भी बातचीत नहीं की थी। कमेटी की रिपोर्ट के बारे में कॉन्ग्रेस पार्टी इतनी बेपरवाह थी कि रिपोर्ट को स्वीकार करने के लिए न तो सुशील कुमार शिंदे और न ही केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह मौजूद थे। रिपोर्ट को मंत्रालय में संयुक्त सचिव द्वारा स्वीकार किया गया था।

इमाम, मदरसा शिक्षक वर्षों से मदरसों, मस्जिदों में अल्लाह के नाम पर बच्चों का बलात्कार करते रहे हैं: तस्लीमा

मजहबी कट्टरपंथ पर अक्सर बेबाक टिप्पणी देने वाली लेखिका तस्लीमा नसरीन (Taslima Nasrin) ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश के मस्जिद-मदरसों में हर दिन बलात्कार होते हैं। तस्लीमा नसरीन ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए बांग्लादेश के मस्जिद-मदरसों की स्थिति को लेकर यह बयान दिया है।

तस्लीमा नसरीन ने लिखा, “बांग्लादेश में रोजाना मस्जिद-मदरसे में बलात्कार हो रहे हैं। अल्लाह के नाम पर बलात्कार हो रहे हैं। मदरसे के बलात्कारी-शिक्षक, बलात्कारी-मस्जिद के इमामों का मानना है कि अगर वो पाँच वक्त की नमाज अदा करेंगे तो उनके गुनाह आजाद होंगे, क्योंकि अल्लाह माफ कर रहा है।”

हालाँकि, तस्लीमा का यह बयान एकबार फिर विवाद का विषय बनता नजर आ रहा है लेकिन वास्तविकता यह है कि अक्सर ऐसे कई मामले देखे गए हैं जब मदरसे या फिर किसी मजहबी जगह पर मजहब विशेष के लोग बलात्कार या सामाजिक अपराध की किसी घटना को अंजाम देते हुए पाए गए हैं। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे अपराध फौरन ही सबके सामने भी आ जाते हैं।

गौरतलब है कि विवादित लेखिका तस्लीमा नसरीन अक्सर मजहब विशेष के आडम्बरों के खिलाफ अपनी आवाज उठाती हैं। यही वजह भी है कि कट्टरपंथियों ने कई बार उनके खिलाफ फतवे जारी कर उनकी हत्या तक की भी धमकी दी है। इस कारण उन्हें अपना देश बांग्लादेश छोड़ना पड़ा और अब वो निर्वासित होकर भारत में रह रही हैं।

कुछ ही समय पहले लेखिका ने एआर रहमान की बेटी खतीजा द्वारा बुर्का पहनने पर भी सवाल उठाया था और कहा था कि उनकी बेटी को ऐसा देख मुझे घुटन होती है। जिसके बाद एआर रहमान की बेटी ने तस्लीमा को जवाब दिया कि अगर मुझे देखकर आपको घुटन होती है तो उन्हें ताजी हवा में साँस लेनी चाहिए।

तीस हजार बाबरी बाकी है, और उसे ले कर रहेंगे: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on 30000 Babris remain, Hindus must have it

हिन्दुओं के लिए ही नहीं, पूरे भारतीय समाज के लिए पाँच सौ वर्षों से खड़े एक कोढ़ और एक लुटेरे नस्ल के आतंकी विचारधारा की कहानी कहती एक इमारत ‘जय श्री राम’ के नारों से 6 दिसम्बर को भरभरा कर गिर गई। बाबरी एक घटिया इमारत थी, ढह गई। बाद में न्यायालय ने भी कह दिया कि वहाँ राम मंदिर था। बाबर मर गया, बाबरी ढह गई। जहाँ मंदिर था, मंदिर वहीं बनेगा।

बाबरी जिनके लिए जिंदा है वो रंग-पेंट ले कर पोस्टर बनाते रहें, घर में वैसे ही लगा कर रखें जैसे कश्मीरी आतंकियों के घर में ईरान के कासिम सुलेमानी की तस्वीरें लगी होती हैं। अपने घर में जिन्हें बाबर को बाप मानना है, वो मानते रहें। बहुसंख्यकों को गलत इतिहास की भाँग पिला कर एक समय तक ही सुलाया जा सकता है। अब वह समय आ गया है कि जब भी कोई ‘बाबरी जिंदा है‘ कहे, तो हमें कहना चाहिए कि हाँ, तीस हजार जिंदा है, और एक-एक को तोड़ कर, मंदिर वहीं बनाएँगे।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

सिलीगुड़ी में BJP कार्यकर्ता की हत्या के बाद बंगाल पुलिस ने भाजपा नेताओं पर ही कर दी कार्रवाई, गैर जमानती धाराओं में FIR

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को हुई हिंसा में भाजपा कार्यकर्ता की मौत के बाद राज्य पुलिस ने भाजपा के ही कई दिग्गज नेताओं के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर कर दिया है। पुलिस ने बंगाल में भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय और राज्य अध्यक्ष दिलीप घोष समेत कई नेताओं का नाम एफआईआर में शामिल किया है। 

ये पूरा मुकदमा IPC की गैर जमानती धाराओं के तहत दर्ज हुआ है। एफआईआर में आरोप लगाया है गया है कि आरोपितों ने सरकारी मुलाजिमों पर हमला बोला। पुलिस द्वारा लगाई बैरिकेडिंग को तोड़ा और प्रदर्शन के दौरान आगजनी और पत्थरबाजी की।

पुलिस द्वारा एफआईआर में नाम लिखे जाने के बाद राज्य अध्यक्ष दिलीप घोष ने इसे राज्य सरकार का अंत कहा है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार को अपने अंत का एहसास हो गया है। वह झूठे इल्जाम लगाकर हमारे नेताओं को फँसाकर हमें डराना चाहती है।

बता दें कि सिलीगुड़ी में पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में भाजपा समर्थक उलेन रॉय की मौत हो गई थी। जिसके बाद भाजपा ने अपने कार्यकर्ता की मौत को हत्या करार दिया था और बंगाल की पुलिस पर गंभीर आरोप मढ़े थे। 

हालाँकि, मंगलवार को पुलिस ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट का हवाला देकर दावा किया कि उलेन की मृत्यु मृत्यु शॉटगन से लगी चोट के कारण हुई है।

अपने बयान में राज्य पुलिस ने कहा कि पुलिस शॉटगन इस्तेमाल नहीं करती। तो जाहिर है कि कल सिलीगुड़ी में हुए प्रदर्शन के दौरान हथियार बद्ध लोग लाए गए थे और उन्होंने हथियार से गोली दागी। उनका कहना था, 

“मृतक को किसी पास खड़े शख्स द्वारा पास चोट पहुँचाई गई। वहाँ पहले से हथियारों का उपयोग करके हिंसा पैदा करने की मंशा थी। अब पश्चिम बंगाल की सीआईडी इसकी जाँच करेगी। सच्चाई बाहर आएगी और जिसने भी इस अपराध की साजिश रची और अंजाम दिया उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

कॉन्ग्रेस ने चुपके से डिलीट किया ट्वीट: भारत के नक्शे से पाकिस्तान-चीन को दे दिया था लद्दाख और POK

कॉन्ग्रेस पार्टी किसानों के समर्थन की बातें कर रही है। मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को आयोजित ‘भारत बंद’ में भी किसान तो नहीं दिखे, लेकिन कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता जरूर देश भर में उपद्रव करते नजर आए। इसी बीच कॉन्ग्रेस पार्टी ने ट्विटर पर ‘भारत किसानों के साथ है, मोदी अंबानी के साथ हैं’ टैगलाइन के साथ देश का गलत नक्शा शेयर किया और कश्मीर-लदाख को पाकिस्तान-चीन को दे दिया। असम कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ‘स्टैंड विद फार्मर्स’ का टैग लगाते हुए ऐसा किया।

असम कॉन्ग्रेस ने भारत के नक़्शे से लद्दाख और POK को निकाला

‘असम कॉन्ग्रेस’ ने जो भारत का नक्शा शेयर किया है, उसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख के हिस्सों को भारत का हिस्सा न बता कर चीन और पाकिस्तान को दे दिया गया है। कॉन्ग्रेस ने जो भारत का नक्शा शेयर किया, पाकिस्तान का भी यही रुख है। पाकिस्तान भी दावा करता रहा है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख उसके मुल्क में पड़ते हैं, भारत का हिस्सा नहीं है। उसने कश्मीर के एक हिस्से पर कब्ज़ा भी कर रखा है।

तिरुवनंतपुरम से कॉन्ग्रेस के सांसद शशि थरूर को ‘लिबरल-सेक्युलर’ मीडिया का एक बड़ा वर्ग अपना पोस्टर बॉय भी मानता है। उन्होंने भी दिसंबर 2019 में कुछ ऐसा ही कारनामा किया था। उन्होंने भारत का जो नक्शा शेयर करते हुए CAA विरोधी आंदोलन का समर्थन जताया था, उसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख को भारत का हिस्सा नहीं बताया गया था। तब कॉन्ग्रेस ने ‘भारत बचाओ आंदोलन’ के नाम पर ऐसा किया था।

ट्विटर पर लोगों ने गलत नक़्शे के लिए असम कॉन्ग्रेस को जम कर लताड़ लगाई। लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए कॉन्ग्रेस यहाँ तक गिर चुकी है कि वो देश के नक़्शे के साथ भी खिलवाड़ कर रही है। एक व्यक्ति ने खबर का स्क्रीनशॉट ट्वीट करते हुए बताया कि भारत का गलत नक्शा दिखाने पर जेल और जुर्माने का भी प्रावधान है। कुछ ने पूछा कि क्या कॉन्ग्रेस ने POK को पाकिस्तान का हिस्सा मान लिया है?

कॉन्ग्रेस ने डिलीट किया ट्वीट

उल्लेखनीय है की विवादों में आने के बाद असम कॉन्ग्रेस ने यह ट्वीट अब डिलीट कर दिया है। हालाँकि, पार्टी की ओर से इसे लेकर किसी भी तरह का कोई स्पष्टीकरण अभी तक नहीं दिया गया है।

1 दिन पहले ही फार्म बिल को लेकर चल रहे किसानों के विरोध और 8 दिसंबर के भारत बंद के दौरान, प्रोपेगेंडा समाचार चैनल ‘आज तक’ पर रिलायंस जियो के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भारत का गलत नक्शा देखा गया था। सोशल मीडिया यूजर दीपेश ने JioTV प्लस ऐप के फ्रंट पेज पर नजर आ रहे समाचार चैनल Aaj Tak (आज तक) की तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें भारत का गलत नक्शा देखा जा सकता है।

सुशांत सिंह राजपूत केस में NCB की सबसे बड़ी कार्रवाई: पकड़ा गया ड्रग सप्लायर रीगल महाकाल

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग एंगल सामने आने के बाद केस की जाँच में जुटी एनसीबी ने लंबे समय से फरार चल रहे ड्रग तस्कर रीगल महाकाल को गिरफ्तार कर लिया है। ये गिरफ्तारी इस केस में एनसीबी की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। रीगल को आज (दिसंबर 9, 2020) अदालत में पेश किया जाएगा।

रीगल अपने साथी व रिया और शौविक को ड्रग पहुँचाने वाले अनुज केशवाणी के साथ दूसरे लोगों को ड्रग सप्लाई किया करता था। एनसीबी ने इसके कई ठिकानों पर छापे मारने के दौरान भारी मात्रा में नशीले पदार्थ और नकद राशि बरामद की थी। एनसीबी का कहना है कि सुशांत सिंह राजपूत ड्रग्स मामले की पूरी चेन का अब पर्दाफाश हो चुका है।

बता दें कि इस केस में अब तक एनसीबी ने 20 से ज्यादा गिरफ्तारियाँ की है। इनमें कई ड्रग्स सप्लायर्स और डीलर्स हैं, जिनकी चैट्स के माध्यम से कई बॉलीवुड हस्तियों जैसे, दीपिका पादुकोण, अर्जुन रामपाल, श्रद्धा कपूर और सारा अली खान के नाम सामने आए थे। पिछले दिनों कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति भी एनसीबी द्वारा पूछताछ के लिए तलब किए गए थे।

इस केस में एनसीबी ने रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक को भी गिरफ्तार किया था। हालाँकि, अभी पहले रिया को और बाद में शौविक को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि ड्रग केस के अलावा सुशांत सिंह राजपूत की मौत के केस पर भी फिलहाल जाँच चल रही है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके प्रगति रिपोर्ट पर जवाब माँगा गया है। याचिका में कहा गया था कि हत्या जैसे गंभीर मामलों में भी कानून में 90 दिन के भीतर आरोप दायर करना होता है लेकिन इस मामले में जाँच एजेंसी अपनी भूमिका निभाने में अभी तक असफल रहे और इस मामले में बेवजह देरी से न्याय प्रशासन का ही नहीं बल्कि दुनिया में देश का नाम भी बदनाम हुआ। आगे याचिका में सीबीआई को अपनी जाँच दो महीने के भीतर पूरी करके संबंधित अदालत में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

सोनिया के जन्मदिन पर कॉन्ग्रेस मना रही है ‘भ्रष्टाचार विरोधी दिवस’: लोगों ने याद दिलाए पार्टी के ‘ऐतिहासिक घोटाले’

विश्व भर में आज यानी 9 दिसम्बर को अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस मनाया जा रहा है। यह भी महज एक संयोग है कि कॉन्ग्रेस आज खालिस्तानी आतंकियों की कमर तोड़ देने वाली इंदिरा गाँधी की बहु यानी सोनिया गाँधी का जन्मदिवस मना रही है और वो भी सोनिया गाँधी की लाख मनाही के बावजूद।

मगर सोनिया गाँधी और उनके पुत्र राहुल गाँधी की इच्छा के विपरीत कॉन्ग्रेस में अक्सर बहुत से काम होते आए हैं। मसलन, हर बड़े-छोटे चुनाव में हार के बाद दोनों, माँ-बेटे कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पदों से इस्तीफा पेश करते हैं और पार्टी कार्यकर्ता उनकी इच्छा के विरुद्ध उन्हें जबरदस्ती कुर्सी वापस सौंप देते हैं। यह कॉन्ग्रेस की परम्परा है।

सोनिया गाँधी की पार्टी अक्सर यह साबित करने का प्रयास करती आई है कि वह भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती से पेश आती रही है और इसमें वह ‘जीरो टोलेरेंस’ की नीति का ही पालन करती है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस का यह दावा अपने आप में ही इस पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ होने की पहली गवाही दी है। आज कॉन्ग्रेस एक बार फिर खुदको भ्रष्टाचार के खिलाफ बताती नजर आई।

सोनिया गाँधी के जन्मदिन और भ्रष्टाचार विरोधी दिवस जैसे ‘विरोधाभासी अवसर’ पर सोशल मीडिया यूजर्स ने कॉन्ग्रेस को उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ होने का इतिहास याद दिलाने की जिम्मेदारी ली है।

ट्विटर यूजर निरुपम ने एक ऐसी लिस्ट ट्वीट की है, जिसमें कॉन्ग्रेस/यूपीए पर लगे तमाम तरह के भ्रष्टाचारों का विवरण दिया गया है।

इसमें अल्फाबेट्स के हिसाब से आदर्श घोटाला, कोल स्कैम, कॉमनवेल्थ स्कैम, बोफ़ोर्स घोटाला, एंट्रिक्स-देवास सौदा, रोजगार गारंटी स्कीम, चारा घोटाला, गाजियाबाद प्रोविडेंट फंड स्कैम, हर्षद मेहता स्टॉक मार्किट स्कैम, आईपीएल स्कैम, जूनियर टीचर्स भर्ती स्कैम, केतन पारेख स्कैम, एलआईसी हाउसिंग स्कैम, खनन स्कैम, एनबीएफसी स्कैम, ओरियंटल बैंक स्कैम, पंजाब एससीएईआरटी स्कैम तक का जिक्र है।

मल्लिकार्जुन नाम के एक ट्विटर यूजर का कहना है कि जर्मन नाज़ी सेना को अपने आप को ठीक उसी तरह से शान्ति का नोबल पुरूस्कार दे देना चाहिए, जिस तरह से कॉन्ग्रेस खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ होने का अवार्ड देती है।

यहाँ पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने पिछले सत्तर वर्षों में अपने शासन के दौरान ऐसे कई ऐतिहासिक घोटालों को होने दिया, जिससे सरकारी खजाने को कई लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। 2004 से 2014 तक कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने स्वतंत्र भारत के इतिहास के कुछ सबसे बड़े भ्रष्टाचार और घोटालों को अंजाम दिया और इस दौरान पार्टी का नेतृत्व खुद सोनिया गाँधी करती रही। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोग आज के दिन को एक हास्यास्पद संयोग बता रहे हैं।

पार्टी ने अपने सहयोगियों के साथ जीप घोटाला, 2 जी घोटाला, बोफोर्स, अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला, स्कॉर्पीन पनडुब्बी घोटाला, महाराष्ट्र सिंचाई, कोयला घोटाला, राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले सहित कई घोटालों को अंजाम दिया।

इससे पहले मंगलवार को, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने देश के किसानों के प्रति अपनी स्व-घोषित अद्वितीय श्रद्धा का प्रदर्शन करते हुए ‘महान बलिदान’ करने का फैसला किया था।

अंतरिम पार्टी अध्यक्ष ने घोषणा की थी कि वह 9 दिसंबर को अपने जन्मदिन को हाल ही में पास किए गए फ़ार्म बिल के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर नहीं मनाएगी। यह दीगर बात है कि सोनिया गाँधी फिलहाल गोवा में छुट्टियाँ मना रही हैं।

UPI ट्रांजैक्शन में नहीं आएगा कोई अतिरिक्त खर्चा: मीडिया के झूठ की PIB ने खोली पोल, जानें क्या है पूरा मामला

नया साल आने से पहले मीडिया खबरों में सरकार द्वारा किए नए बदलावों के बारे में चर्चा होनी शुरू हो जाती है। फर्क़ यदि जनता की जेब पर पड़े तो ऐसी खबरों को बढ़ चढ़ कर कवर भी किया जाता है। कुछ ऐसा ही 2-3 दिन पहले हुआ। 

अधिकतर हिंदी वेबसाइट्स पर ऐसी खबर प्रकाशित की गई जिसमें दावा था कि नए साल में UPI ट्रांजैक्शन महँगा होने वाला है और यदि थर्ड पार्टी एप्स से पेमेंट की गई तो अतिरिक्त चार्ज लगेगा।

खबरों में दावे की पुष्टि के लिए NPCI के फैसले का हवाला दिया गया और कहा गया कि NPCI ने एक जनवरी से यूपीआई के जरिए पेमेंट के लिए अतिरिक्त चार्ज लगाने का फैसला लिया है।

विभिन्न रिपोर्टों में कहा गया कि एनपीसीआई ने नए साल पर थर्ड पार्टी एप पर 30 फीसदी का कैप लगा दिया है। इसका उद्देश्य भविष्य में किसी भी थर्ड पार्टी ऐप की मोनोपॉली रोकने और साइज के हिसाब से उसे मिलने वाले खास फायदे को रोकने के लिए किया गया है।

आगे खबरों में ये भी कहा गया डिजिटल पेमेंट करने वाले ग्राहकों को फोनपे, गूगलपे, एमेजॉन पे जैसे थर्ड पार्टी ऐप्स से पेमेंट करने पर एक्सट्रा चार्ज देना होगा। हालाँकि, पेटीएम जैसे ऐप पर एनसीपीआई ने कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगाया है।

अब मीडिया के इसी दावे को खारिज करते हुए सरकार ने किसी भी यूपीआई ट्रांजैक्शन के चार्ज में हुई बढ़ोतरी से इंकार किया है। पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक में स्पष्ट किया है कि NPCI की ओर से ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि थर्ड पार्टी एप से ट्रांजैक्शन करने पर अतिरिक्त चार्ज लगेगा।

पीआईबी फैक्ट चेक ने अपने ट्विटर पर लिखा, “यह दावे गलत हैं। NPCI की ओर से ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।” इसके अलावा NPCI ने भी अपनी ओर से कहा, “NPCI यह स्पष्ट करना चाहता है कि जो खबरें आ रही हैं कि UPI ट्रांजैक्शन पर 1 जनवरी 2021 से अतिरिक्त चार्ज लगेगा, वो पूर्णत: फर्जी है। 5 नवंबर को जारी की गई हमारी प्रेस रिलीज मेें कीमत या चार्ज से जुड़ा कुछ भी नहीं है।”

‘कुतुब मीनार के भीतर 27 हिन्दू व जैन मंदिरों को तोड़ कर बनी मस्जिद’: हिन्दुओं को मिले पूजा का अधिकार, याचिका दायर

दिल्ली की एक अदालत में क़ुतुब मीनार के भीतर मंदिर होने की बात कहते हुए वहाँ हिन्दुओं को पूजा का अधिकार दिलाने हेतु याचिका दाखिल की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि क़ुतुब मीनार के भीतर ही हिन्दू और जैन मंदिर परिसर स्थित है। याचिका में कहा गया है कि अंदर 27 मंदिर हुआ करते थे, जिनमें मुख्य रूप से जैन तीर्थंकर ऋषभदेव के अलावा भगवान विष्णु प्रमुख रूप से स्थापित हैं। और इन्हीं मंदिरों को तोड़ कर ही मस्जिद का निर्माण किया गया।

इन दोनों के अलावा भगवान गणेश, शिव, माँ पार्वती, और हनुमान सहित अन्य देवी-देवताओं के कुल 27 मंदिर होने की बात कही गई है। याचिका में माँग की गई है कि इन सभी मंदिरों और प्रतिमाओं को न सिर्फ पुनः स्थापित किया जाए, बल्कि हिन्दुओं को ‘पूजा के अधिकार’ के तहत क़ुतुब मीनार परिसर में नियमित कर्मकांड और पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए। ये इलाका दिल्ली के साउथ वेस्ट जिले में स्थित है।

याचिका में माँग की गई है कि कोर्ट केंद्र सरकार को ट्रस्ट एक्ट, 1882 के तहत एक ट्रस्ट का गठन करने का निर्देश दे, और उसे क़ुतुब मीनार परिसर में स्थित मंदिरों के प्रबंधन और प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपे। साथ ही क़ुतुब मीनार के सामने परिसर में जो लोहे का पिलर स्थित है, उसे भी उन्हीं मंदिरों का एक हिस्सा मानते हुए ट्रस्ट को उसकी भी जिम्मेदारी देने की माँग की गई है। मीनार के भीतर कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद है, उसे लेकर ही विवाद है।

याचिका में माँग की गई है, “हिन्दुओं को वहाँ पूजा-पाठ, रीति-रिवाज और दर्शन के लिए उचित व्यवस्था देने के लिए कदम उठाए जाएँ। कुतुबुद्दीन ऐबक मोहम्मद गोरी का एक कमांडर था, जिसने ‘श्री विष्णु हरि मंदिर’ को ध्वस्त किया, उसे नुकसान पहुँचाया। उसने मंदिर परिसर में ही अवैध रूप से कई निर्माण शुरू किए।” याचिकाकर्ता का कहना है कि ये मंदिर वहीं, थे जहाँ कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद बनाया गया है।

ये याचिका ‘जैन तीर्थंकर ऋषभ देव और भगवान विष्णु’ का प्रतिनिधित्व का दावा करते हुए दायर की गई है। कहा गया है कि मुगल पूरी तरह से इन मंदिरों को ध्वस्त करने में नाकाम रहे और उन्होंने इनके ही अवशेषों से मस्जिद का निर्माण कर दिया। याचिका में लिखा है, “मस्जिद की एक दीवार पर मंगल कलश, नटराज, शखं-गदा-कलश और श्री यंत्र सहित कई देवी-देवताओं की तस्वीरें अभी भी मौजूद हैं।”

साथ ही इस मस्जिद के कॉरिडोर का वैदिक शैली में निर्माण किए होने का दावा किया गया है। याचिका में ASI के ‘संक्षिप्त इतिहास’ में प्रकाशित तथ्यों के आधार पर ही इन 27 मंदिरों के होने का दावा किया गया है। कहा गया है कि मस्जिद के बाहर और भीतर की 9 संरचनाएँ ऐसी हैं, जो मंदिर के हिसाब से है। सरकार ने इसे ‘राष्ट्रीय महत्व का स्मारक’ घोषित कर रखा है। देश भर में करीब 30,000 मंदिरों को ध्वस्त कर उस पर मस्जिद बनाया गया, ऐसा कई विशेषज्ञ कहते हैं।

राम मंदिर की सुनवाई के दौरान भी ASI की खुदाई में मिली चीजों और निष्कर्ष में निकले तथ्यों के आधार पर जब वहाँ मंदिर ध्वस्त कर मंदिर बनाने का सबूत दिखाया गया था, तब मुस्लिम पक्ष के वकील खासे कन्फ्यूज नजर आए थे। वरिष्ठ अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा यहाँ तक कह बैठी थीं कि खुदाई के बाद हाथी की मूर्तियों के मिलने से यह नहीं कहा जा सकता कि वहाँ मंदिर ही था। वराह की मूर्ति से लेकर कमल के निशान तक, सारे सबूत हिन्दुओं के पक्ष में ही थे।

पश्चिम बंगाल के ओंकारनाथ मठ की जमीन पर गुंडों का अतिक्रमण: माफियाओं ने स्वामी केशव रामानुज को दी मारने की धमकी

पश्चिम बंगाल ताड़केश्वर के ओंकारनाथ मठ में बड़े पैमाने पर भूमि अतिक्रमण को लेकर रियल एस्टेट माफियाओं का दबदबा बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, बिल्डरों द्वारा भूमि अतिक्रमण के खिलाफ विरोध करने पर मठ के प्रमुख को धमकी दी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में ओंकारनाथ मठ के प्रमुख त्रिवेणी स्वामी केशव रामानुज जीयूर महाराज जी ने मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण करने के मामले का विरोध किया था। जिसको लेकर एक बिल्डर ने उन्हें धमकी दी। जिसके बाद मठ के प्रमुख ने तारकेश्वर पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

बता दें हाल ही में मठ के परिसर से सटे भूमि को एक स्थानीय प्रमोटर द्वारा खरीदा गया था। तारकेश्वर जोय कृष्ण बाजार के पास की जमीन पर आने जाने की जगह नहीं थी। जिसके बाद जगह बनाने के लिए बिल्डर ने मठ से जुड़ी दलदली जमीन को ही जेसीबी से भरकर मठ परिसर के माध्यम से एक सड़क बनाना शुरू किया, जिस वजह से दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। जैसे ही इस अतिक्रमण का स्वामी महाराज ने विरोध किया, उन्हें धमकी दी गई और साथ ही दुर्व्यवहार किया गया।

गौरतलब है कि 2017 में बहु-मंजिला इमारत के निर्माण के समय मठ की सीमा की दीवार को भी ध्वस्त कर दिया गया था। उस दौरान घटना के संबंध दर्ज किया गया मुकदमा अभी भी अदालत की तारीखों के चक्कर काट रहा है।

इतना ही नहीं स्वामी केशव रामानुज जीयूर महाराज जी को कथिततौर पर स्थानीय गुंडों द्वारा मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। गुंडों ने मठ के प्रमुख को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी है। वहीं इस मामले में उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई है क्योंकि उनके पास इसके अलावा कोई चारा नहीं है।

वहीं अब मामले के सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अन्य हिंदू संगठनों के साथ मिलकर राज्य में रियल एस्टेट माफिया और भूमि अतिक्रमण के खिलाफ मंदिर को समर्थन देने के लिए मठ प्राधिकरण से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।