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‘मोदी मर जा तू’ गाने वाली महिलाओं के बाद ‘किसानों के बच्चों’ का इस्तेमाल: किसान ‘आंदोलन’ बना शाहीन बाग

वर्तमान में नए कृषि कानून के ख़िलाफ़ चल रहे किसानों के आंदोलन और पिछले साल शाहीन बाग में CAA/NRC के ख़िलाफ़ हुए आंदोलन में धीरे-धीरे कई समानताएँ नजर आना शुरू हो गई हैं।वामपंथियों और कट्टरपंथियों के समर्थन के बाद इस प्रदर्शन में शाहीन बाग की तरह अब बच्चों को आंदोलन का चेहरा बनाया जा रहा है। 

एनडीटीवी द्वारा शेयर की गई वीडियो में हम देख सकते हैं कि मोहाली से आए लोग अपने बच्चों को साथ लेकर आए हैं, जो वीडियो में कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि वह किसान परिवार से हैं और चूँकि इस आंदोलन को पूरी दुनिया का समर्थन मिलने लगा है, तो वो भी यहाँ शामिल होने आए हैं।

इसके अलावा बच्चों के अभिभावक भी कह रहे हैं कि वो नहीं चाहते कि उनके बच्चे इस प्रदर्शन से दूर रहें। वीडियो में एक चौथी कक्षा का बच्चा बैनर लिए बोलता नजर आ रहा है, जिसे देख मन में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या उस मासूम को इस बात की जानकारी भी है कि प्रदर्शन किस चीज को लेकर है या कड़ाके की ठंड में जिस प्रदर्शन का वो हिस्सा बनने के लिए आया है उसका नेतृत्व करने वाले लोग समाधान की माँग नहीं कर रहे बल्कि एक जिद्द लिए दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं, बिलकुल उसी तरह जैसे पिछले साल शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी बैठे थे।

याद दिला दें कि इसी प्रकार बच्चों का इस्तेमाल पिछले साल सीएए/एनआरसी के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन में हुआ था। लोगों ने अपने बच्चों को प्रदर्शन पर लाकर बिठा दिया था और बच्चों से नारे लगवाए गए थे “जो हिटलर की चाल चलेगा, वो हिटलर की मौत मरेगा, जामिया तेरे खून से इंकलाब आएगा, जेएनयू तेरे खून से इंकलाब आएगा.. हम लड़कर लेंगे आजादी।”

इससे पहले भी शाहीन बाग के प्रदर्शन से मिलती जुलती कई तस्वीरें किसान आंदोलन से सामने आई थीं। जैसे इस प्रोटेस्ट के शुरू होते ही हमने सबसे पहले शाहीन बाग की दादी बिलकिस और भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर रावण को मौके पर पहुँचते देखा था।

फिर, सिंघू बॉर्डर से बिरयानी के वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने पिछले साल के प्रोटेस्ट को याद किया था। वीडियो में देखा गया था कि आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। 

प्रोटेस्ट के 15वें दिन वहाँ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई थी जिसने साबित कर दिया था कि पूरे आंदोलन को किसानों ने हाईजैक कर लिया है। तस्वीर में नजर आया था कि किसान महिलाएँ हाथ में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे कट्टरपंथियों और अर्बन नक्सलियों की रिहाई माँग रही थी। पोस्टर के सभी चेहरे वही थे जो सीएए/एनआरसी के ख़िलाफ़ आवाज उठा रहे थे। लोगों ने ये देख कर पूछा था कि क्या ये लोग भी अब किसान बन गए हैं।

8 तारीख को किसानों के भारत बंद ने भी शाहीन बाग की याद दिलाई थी। उस समय भी चक्का जाम जैसी नीतियाँ अपनाई गई थीं। अब बच्चों का नजर आना भी इसी बात का प्रमाण हैं कि ये दोनों प्रदर्शन एक ही मॉडल पर हैं। फर्क बस ये है कि आंदोलन का नाम एंटी-सीएए से एंटी कृषि बिलों में बदल गया है और बुजुर्ग दादी की जगह पर किसान आ गए हैं।

जिस अखबार ने लादेन को लिखा था ‘शहीद’, उसी का पत्रकार पहुँचा था हाथरस, योगी सरकार ने कोर्ट में पेश किया सबूत

उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड के दौरान हिरासत में लिए केरल के स्वघोषित पत्रकार सिद्दीक कप्पन (Siddique Kappan) की रिहाई को लेकर यूपी सरकार लगातार विरोध कर रही है। हाल में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके कप्पन की बेल याचिका नामंजूर करवाने के लिए हैरान करने वाले कई प्रमाण पेश किए।

केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (KUWJ) के पत्रकार सिद्दीक कप्पन पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के साथ जुड़े होने का आरोप है। 5 अक्टूबर को उसकी गिरफ्तारी हाथरस जाते समय की गई थी। KUWJ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर इस गिरफ्तारी को अवैध बताया था और कप्पन की जमानत माँगी थी। लेकिन, यूपी सरकार ने कप्पन की रिहाई पर विरोध दर्ज कराते हुए सोमवार (14 दिसंबर 2020) को कहा कि कप्पन कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया और पीएफआई से जुड़ा है।

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना बस यही है कि यदि आरोपित की जमानत याचिका को मंजूरी दी गई तो इससे जाँच बाधित होगी और आरोपित दोबारा उन्हीं गतिविधियों में शामिल होगा, साथ ही जाँच एजेंसियों के लिए अनुपलब्ध हो जाएगा।

इतना ही नहीं सरकार ने अपने हलफनामे में कप्पन के पत्रकार होने की बात का भी विरोध किया। साथ ही KUWJ की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए। KUWJ पर कप्पन की वास्तविक पहचान छिपाने का आरोप भी लगाया गया और कहा गया कि कप्पन ने जिस अखबार में काम करने का दावा किया है, वो न्यूजपेपर “थेजस (Thejas)” दिसंबर 2018 में ही बंद हो चुका है।

थेजस के पूर्व संपादकों को लेकर हलफनामे में कहा गया कि वह भी पीएफआई के सदस्य थे और कप्पन अखबार में पत्रकार के तौर पर नहीं बल्कि कॉन्ट्रिब्यूटर के लिहाज से काम करता था। सरकार की ओर से प्रमाण पेश करने के लिए अखबार के मुख्य पेज की कॉपी का भी यूज किया गया। ये पृष्ठ 30 नवंबर 2011 को प्रकाशित अखबार का मुख्य पेज है। इस पृष्ठ से ज्ञात होता है कि थेजस अखबार के विचार कितने कट्टरपंथी थे कि वो ओसामा बिन लादेन जैसे खूँखार आतंकी को “शहीद” लिखने तक से नहीं चूके।

राज्य की ओर से पेश किए गए हलफनामे में कप्पन को मास्टरमाइंड कहकर पेश किया गया है और कई दंगों में उसकी भूमिका भी बताई गई है। यूपी सरकार की जाँच में कहा गया है कप्पन के तार कई पीएफआई सदस्यों, जो सिमी नाम के आतंकी संगठन से संबंद्ध रखते हैं, उनसे पाए गए हैं। इसके अतिरिक्त दस्तावेजों से भी कई खुलासे हुए हैं।

एफिडेविट में कहा गया है कि कप्पन और तीनों अन्य आरोपितों के ख़िलाफ़ पैसों की संदिग्ध लेन-देन पर भी जाँच चल रही है। इन चारों को दिल्ली दंगों के आरोपितों में से एक मोहम्मद दानिश के निर्देश पर भेजे जाने का उल्लेख हलफनामे में पढ़ने को मिलता है। कथित पत्रकार पर जानकारी देते हुए राज्य ने आरोप लगाया कि कप्पन ने पूछताछ में अपने दिल्ली वाले घर की जानकारी छिपाई और सोशल मीडिया अकॉउंट की सूचना भी साझा नहीं की।

अब KUWJ ने इस एफिडेविट पर जवाब देने के लिए कोर्ट से समय माँगा है, जिसकी वजह से पूरे केस की सुनवाई जनवरी के तीसरे माह में होगी। बता दें कि अपने फोन के जरिए और सोशल मीडिया के माध्यम से कप्पन लगातार पीएफआई सदस्यों के संपर्क में था। इनमें कुछ का संबंध प्रतिबंधित संगठन सिमी से भी था।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के नेता रऊफ शरीफ को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को तिरुवनंतपुरम से गिरफ्तार किया था। रऊफ शरीफ देश छोड़कर भागने की फिराक में था, मगर ED ने समय रहते कार्रवाई की और उसे धर दबोचा।

ईडी की रिपोर्ट में कहा गया था कि उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड को लेकर हुए विवाद के बाद रऊफ शरीफ ने पीएफआई के सदस्यों और स्व-घोषित पत्रकार सिद्दीक कप्पन को वहाँ जाने के लिए फंड दिया था। जिसके बाद यूपी पुलिस ने सिद्दीक कप्पन को अतीकुर्र रहमान और मसूद अहमद समेत चार पीएफआई कार्यकर्ताओ को मथुरा से गिरफ्तार किया था। 

हिरोइन के इंटीमेट सीन के कारण पति से झगड़ा और आत्महत्या? वीजे चित्रा सुसाइड मामले में हेमनाथ गिरफ्तार

तमिल की मशहूर टेलीविजन एक्ट्रेस वीजे चित्रा के आत्महत्या मामले में पुलिस ने उनके पति हेमनाथ को गिरफ्तार कर लिया है। हेमनाथ पर चित्रा की माँ ने गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई है।

उन्होंने दावा किया कि हेमनाथ चित्रा को प्रताड़ित करते थे, जिसके कारण ये सब हुआ। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद हेमनाथ को सुसाइड के लिए उकसाने के आरोप में अरेस्ट किया है। चित्रा की माँ का कहना है कि उनकी बेटी खुद फँदे से नहीं लटक सकती, इसलिए इस मामले में निष्पक्ष जाँच हो।

बता दें कि चित्रा की मौत के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि आत्महत्या के पीछे आर्थिक परेशानी वजह हो सकती है। लेकिन अब हेमनाथ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज होने के बाद इस केस में नया एंगल आया है।

चित्रा को परेशान करने के आरोप में हेमनाथ के ख़िलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मामला दर्ज हुआ है। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पहले पूनमल्ली कोर्ट में पेश किया था और फिर उन्हें पोन्नेरी जेल में भेज दिया गया। पुलिस के पास उनके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत इकट्ठा हो गए हैं।

कहा जा रहा है कि हेमनाथ एक टीवी सीरियल में चित्रा के इंटीमेट सीन दिए जाने से खफा थे और जिस दिन चित्रा ने आत्महत्या की, उस दिन भी हेमनाथ ने उनके साथ गलत बर्ताव किया था। घटना के बाद से पुलिस कई दिनों तक चित्रा के दोस्तों और उनके पति से पूछताछ करती रही और इस पूछताछ के बाद ही गिरफ्तारी की गई।

उल्लेखनीय है कि 9 दिसंबर को चित्रा ने चेन्नई के बाहरी इलाके में स्थित एक होटल में फाँसी लगाई थी। वह होटल में रात के करीब ढाई बजे पहुँची थी। इसके बाद वह अपने कमरे में फ्रेश होने गईं और खुद को अंदर से बंद कर लिया। जब चित्रा ने काफी देर तक दरवाजा नहीं खोला तो उनके पति ने होटल स्टाफ की मदद ली और दूसरी चाभी से गेट खोला गया। अंदर चित्रा छत से लटकी हुईं थीं।

पहले भी हिंदू लड़की से शादी, फिर ज्योति को भी फाँसा: बेटियों को इस्लामी परवरिश, न्याय के लिए भटक रही पीड़िता

अब जब देश में कई राज्यों की सरकारें ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ कानून बना रही हैं, तो जाहिर सी बात है कि ऐसी घटनाओं के कम होने की उम्मीद है। इसी बीच उत्तराखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ एक पढ़ी-लिखी महिला, जिसे कानून, संविधान और आईपीसी-सीआरपीसी का पूरा ज्ञान है, वो भी इस ‘लव जिहाद’ का शिकार हो गईं। अधिवक्ता ज्योति बिश्नोई की शादी 2009 में अब्बास सिद्दीकी से हुई थी।

‘पहाड़ टीवी’ के पत्रकार अमित गोदियाल ने पीड़िता से बात कर के जाना कि उनके साथ क्या हुआ था। ज्योति ने बताया कि अब्बास ने शादी के समय उन्हें विश्वास दिलाया था कि वो जैसे चाहें, वैसे रह सकती हैं। इसके बाद वो ज्योति को लेकर पठानकोट चला गया। ज्योति को इस्लामी धर्मांतरण भी नहीं करना पड़ा। ज्योति ने बताया कि शादी के कुछ समय बाद अब्बास उन पर जामज पढ़ने और इस्लाम के हिसाब से खाने-पीने का दबाव बनाने लगा।

शादी के 1 वर्ष बाद दोनों की बेटी हुई। ज्योति ने बताया कि उसी दौरान उन्हें पता लगा कि अब्बास ने एक और शादी (वो भी हिंदू नाम की लड़की से ही) की हुई है, जो उसने उनसे छिपाया। इसके बाद ज्योति उसे छोड़ कर मायके आ गई। पीछे से अब्बास के परिवार वाले भी पहुँचे। ज्योति ने बताया कि उन्होंने अब्बास को छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन उसके परिवार वालों ने किसी तरह मान-मनव्वल कर के उन्हें साथ रहने के लिए मना लिया।

बाद में दूसरी बेटी भी हुई। ज्योति ने बताया कि अब्बास और उसके परिवार वालों ने फिर से लड़ाई-झगड़े शुरू कर दिए। उनकी बेटियों पर इस्लाम के हिसाब से रहन-सहन के लिए पाबंदियाँ लगाई जाने लगीं। जब ज्योति ने कहा कि उनकी बेटियाँ पूजा भी करेंगी, तो हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें फेंक दी गईं। ज्योति बताती हैं कि दो बेटियाँ होने के बाद उन्हें इसीलिए प्रताड़ित किया जाने लगा कि बेटा क्यों नहीं हुआ?

ज्योति बिश्नोई ने बताया कि वो अपने बच्चों को नहीं पढ़ा पाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब्बास सिद्दीकी ने उनका हाथ तक तोड़ किया। कभी वो उन्हें लेकर वैष्णो देवी भी गया था, लेकिन अब बच्चियों को भी उसने अपने वश में कर रखा है। ज्योति ने कहा कि अगस्त 2020 में उन्हें घर से निकाल दिया गया। उन्होंने बताया कि अब्बास सिद्दीकी जेल में है और उसका पहले से ही आपराधिक इतिहास रहा है।

ज्योति बिश्नोई का पूछना है कि उनकी बच्चियाँ अपने अब्बा से मिलने जेल जा सकती हैं, आखिर क्या कारण है कि वो अपनी माँ से मिलने नहीं आती? उन्होंने कहा कि प्रशासन भी उन्हें ये साबित करने को कहता है कि वो उन बच्चियों की माँ हैं। उन्होंने कहा कि अब्बास उनकी बच्चियों को धमकाता है कि अगर वो उनसे मिलीं तो वो जहर खा लेगा। ज्योति ने कहा कि जब कानून को जानने वाली लड़की के साथ ऐसा हो सकता है, तो सोचिए कि उसका कैसा ब्रेनवॉश हुआ होगा! ज्योति ने बताया:

“मेरी बेटी के पैरों में समस्या थी और उसका इलाज चल रहा था। मेरी मज़बूरी थी कि मैं इसके लिए अब्बास सिद्दीकी पर निर्भर थी, नहीं तो मेरी बेटी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाती। आप 10 वर्ष पहले की ज्योति और अब मुझे देखेंगे तो अंतर साफ़ नजर आएगा। अब्बास ने अब मुझे निशाँ नाम दे दिया है। मुझे प्रशासन ने भरोसा दिया कि मुझे अपनी बच्चियों से मिलवाया जाएगा। बच्चों को CWC के पास भेजा गया, जहाँ उनकी काउंसिलिंग हुई। लेकिन, बच्चों को मुझे नहीं सौंपा गया। जब अब्बा जेल में है और बच्चों के दोनों चाचा नशेड़ी हैं, ऐसे में उन्हें कौन संभालेगा? अब्बास अब तीसरी शादी भी करने जा रहा है। उसके पीछे बहुत सारे लोग हैं, मेरे साथ कोई नहीं है।”

ज्योति बिश्नोई की मुख्य चिंता इस बात को लेकर है कि उनकी बच्चियों को गलत परवरिश देकर उनके दिमाग में गलत बातें भरी जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चियों को बताया जाता है कि देखो, तुम्हारी माँ कितने लोगों को लेकर आ रही है। उनका चरित्र-हनन भी किया जाता है। ‘हिन्दू जागरण मंच’ के उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश आनंद इस मामले में पीड़िता की मदद करने में लगे हुए हैं।

‘पहाड़ टीवी’ के अमित गोदियाल ने उनसे भी बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि हिन्दू समाज की बच्ची को धोखा देकर ले जाया गया और फिर सड़क पर छोड़ दिया गया। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने न्याय के लिए 3 दिनों का धरना भी दिया। उन्होंने बताया कि प्रशासन इसे पति-पत्नी का झगड़ा मान कर काउंसिलिंग में लग गया। अंत में अब मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने नेता याकूब सिद्दीकी पर प्रशासन को बरगलाने का आरोप लगाया।

उन्होंने बताया कि अब्बास सिद्दीकी पुलिसकर्मियों से मारपीट के आरोप में जेल में है। उन्होंने कहा कि CWC से जुड़ा एक वकील भी है, जो कॉन्ग्रेस से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन भी कॉन्ग्रेस के दबाव में है, क्योंकि कॉन्ग्रेस पार्टी चाहती ही नहीं है कि इस मामले में न्याय मिले। उन्होंने कहा कि अगर इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक भी जाना होना तो जाएँगे, लेकिन ज्योति को न्याय दिला कर रहेंगे।

बता दें कि हाल ही में उत्तराखंड के एक आदेश को लेकर बवाल हुआ था, जिसमें बताया गया था कि अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाहित दम्पति को प्रोत्साहन स्वरूप 50,000 रुपए प्रदान किए जाते हैं। बाद में न सिर्फ आदेश जारी करने वाले पर कार्रवाई की गई, बल्कि इस पुराने कानून को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। आक्रोशित लोगों ने पूछा था कि पूछा कि ‘लव जिहाद’ करने वाले को सजा की जगह 50,000 का सरकारी इनाम दिया जा रहा है?

BJP को हराना है तो विपक्ष को एकजुट होना होगा: गोवा जिला पंचायत में भाजपा की जीत पर राजदीप सरदेसाई

बिहार और हैदराबाद में अपना लोहा मनवाने के बाद भाजपा ने गोवा के जिला पंचायत चुनावों में भी जीत की ताल ठोक दी है। गोवा में सत्ताधारी भाजपा ने जिला पंचायत चुनावों में 49 सीटों में से 32 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कॉन्ग्रेस को यहाँ भी सिर्फ 4 सीटें मिलीं और आम आदमी पार्टी व एनसीपी के खाते में 1 सीट आई।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस जीत के बाद राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया और कहा, “लोगों ने हम पर विश्वास जताया।” वहीं राज्य के भाजपा अध्यक्ष सदानंद तनावड़े ने कई आंदोलनों की चर्चा करते हुए कहा कि जिन एनजीओ और राजनीतिक पार्टियों द्वारा ये प्रोटेस्ट शुरू किए गए, उनका मकसद सरकार को बदनाम करना था। ये नतीजे उन सभी के मुँह पर तमाचा हैं और भाजपा की सराहना का प्रमाण हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने भी इस जीत को किसान, मजदूर, व्यापारी, महिलाओं और युवाओं का पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम प्रमोद सावंत के नेतृत्व के प्रति विश्वास बताया।

गोवा के नतीजों पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी खुशी जाहिर की है। नड्डा ने कहा कि गोवा में बीजेपी की जीत किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं का बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य सरकार की नीतियों पर भरोसा दिखाती है।

भाजपा की ओर से आधिकारिक तौर पर भी इस जीत के लिए गोवा के लोगों को धन्यवाद दिया गया। संबित पात्रा ने तो नरेंद्र मोदी को गोवावासियों का शुभ चिंतक बताया।

वहीं गोवा में कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष गिरिश चोड़ांकर ने कहा कि वो नतीजों पर गहन विश्वलेषण करेंगे। उन्होंने ये बात स्वीकार की कि उनकी पार्टी लोगों को विश्वास दिलाने में असमर्थ रही कि वह बदल रहे हैं। उन्हें (जनता को) पार्टी के (कॉन्ग्रेस) पुराने विधायकों को देख कर लगा कि यदि वह कॉन्ग्रेस को वोट देंगे तो वो भी भाजपा को जाएगा। हम जनता के मन में संदेह मिटाने में असफल हुए।

बता दें कि गोवा के जिला पंचायतों के लिए 12 दिसंबर को बैलट पेपर के जरिए मतदान हुआ था। राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने बताया था कि राज्य में 56.82 प्रतिशत (7.92 लाख योग्य मतदाताओं में से 4.50 लाख लोग) का मतदाता दर्ज किया गया था। 

गोवा जिला पंचायत चुनाव 2020 मार्च में भारत में कोरोनो वायरस महामारी की शुरुआत के बाद से राज्य में होने वाला पहला प्रमुख चुनाव था। इसे सभी कोरोना प्रोटोकॉल के बीच मतदान आयोजित किया गया था और SEC ने संक्रमित लोगों को भी अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी थी।

इस चुनाव के नतीजे आने के बाद मीडिया गिरोह के लोग भी इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। राजदीप सरदेसाई ने इसी क्रम में गोवा के नतीजों को आँकड़े के साथ पेश करते हुए बताया है कि जैसे रिजल्ट आए हैं, उस हिसाब से विपक्ष एकजुट होकर ही साल 2022 में भाजपा को हरा सकता है।

‘जूनागढ़ बनेगा पाकिस्तान, भारत ने जबरन किया था कब्जा’: अहमद अली बना वजीर-ए-आजम

जूनागढ़ के नवाबों का खानदान पाकिस्तान में रह रहा है और वहीं से जूनागढ़ को पाकिस्तान में मिलाने के ख्वाब देखता रहता है। जूनागढ़ गुजरात में गिरनार की पहाड़ियों की तलहटी में बसा हुआ है। कभी यहाँ नवाबों का शासन हुआ करता था। पाकिस्तान ने अपने नए नक़्शे में जम्मू कश्मीर के साथ-साथ जूनागढ़ पर भी दावा ठोक दिया, जिससे नवाब खानदान खुश है। जूनागढ़ के तथाकथित नवाब जहाँगीर खान ने अपने बेटे अहमद अली को नया ‘दीवान (वजीर-ए-आजम)’ नियुक्त कर दिया है।

हालाँकि, इससे न तो जूनागढ़ की स्थिति पर कोई फर्क पड़ता है और न ही पाकिस्तान को कुछ हासिल होने वाला है। जहाँगीर खान बार-बार कहता रहता है कि ‘जूनागढ़ पाकिस्तान बनेगा’। साथ ही वो भारत पर अवैध रूप से जूनागढ़ पर कब्ज़ा करने के आरोप भी मढ़ता रहता है। उसने दोहराया कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहते हैं कि जूनागढ़ भविष्य में पाकिस्तान में वापस आएगा। ‘दीवान’ अहमद अली ने भी ‘भारत से आज़ादी’ की माँग की।

उसने ऐलान किया कि वो जल्द ही एक अभियान की शुरुआत करेगा, जिससे पूरी दुनिया को पता चले कि जूनागढ़ भारत का नहीं, बल्कि पाकिस्तान का हिस्सा है। जहाँगीर खान ने तो भारत को ‘कपटी और दोहरे रवैये’ वाला देश तक करार दिया। पाकिस्तान में आयोजित एक कार्यक्रम में ये सब नौटंकी की गई। इससे पहले एक इंटरव्यू में जहाँगीर खान ने कहा कि भारत लगातार अल्पसंख्यकों के हितों की अनदेखी कर रहा है।

उसने आरोप लगाया कि भारतीय सेना ने 1947 में ‘अवैध रूप से’ जम्मू कश्मीर पर ‘कब्ज़ा’ कर लिया था। उसने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के हिसाब से ‘कश्मीर समस्या’ के निदान की बात की। नवाबों का ये खानदान भारत के डर से भाग कर कराची में रह रहा है। जहाँगीर ने दावा किया कि तत्कालीन नवाब महाबट खान III ने कथित ‘जूनागढ़ स्टेट काउंसिल’ की सहमति के बाद राज्य को भारत में मिलाने का ऐलान किया था।

उसने दावा किया कि जूनागढ़ में भारत ने झूठा रेफेरेंडम कराया और बाकी काम भारतीय सेना ने कर दिया। वो अक्सर बलूचिस्तान सरकार के बड़े नेताओं से मिल कर भी यही रट लगाता रहता है। पाकिस्तान ने अपने नक़्शे में जूनागढ़ सहित गुजरात के कई हिस्सों पर दावा ठोका है। उसने कहा कि ‘बंदूक की नोंक’ और जूनागढ़ को हथियाया गया। साथ ही उसने जम्मू कश्मीर में भी रेफेरेंडम की माँग की और दावा किया कि इससे सब ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो जाएगा। पाकिस्तानियों ने जूनागढ़ पर दावा ठोकते हुए ट्वीट्स भी किए:

गौरतलब है कि आजाद भारत में रियासतों के विलय का जिम्मा सरदार वल्लभभाई पटेल को सौंपा गया था। उन्होंने हैदराबाद, जूनागढ़ जैसी पेचीदा रियासतों को भी बड़ी सरलता से भारत में विलय करवाया था और सबका यही मानना था कि अगर जम्मू कश्मीर का मसला उनके हाथों होता तो वह उसका भी समाधान कर लेते। लेकिन, तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पूरा मसला अपने हाथ ले लिया।

कॉन्ग्रेस 40 सीटों में सिर्फ 1 ही जीत पाई… कुछ ही घंटों में वो भी BJP में शामिल हो गया: असम BTC चुनाव

‘एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा’ – कॉन्ग्रेस को ये कहावत आज ज़रूर याद आ रही होगी। ऐसा इसीलिए, क्योंकि एक तो उसने ‘Bodoland Territorial Council (BTC)’ के चुनाव में मात्र 1 सीट जीती, ऊपर से वो जीता हुआ उम्मीदवार भी भाजपा में शामिल हो गया। सुजल सिंघा के भाजपा में आने से इस तरह से BTC में भाजपा के सीटों की संख्या बढ़ कर 10 हो गई। NDA पूर्ण बहुमत के साथ असम के BTC परिषद का गठन करने जा रहा है।

कॉन्ग्रेस को इस चुनाव में सुजल सिंघा के रूप में एक ही पार्षद प्राप्त हुआ था। लेकिन, श्रीरामपुर क्षेत्र से जीते सुजल सिंघा ने असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की उपस्थिति में गुवाहाटी के होटल लिली में सोमवार (दिसंबर 14, 2020) की शाम को आधिकारिक रूप से भाजपा जॉइन कर लिया। BTC में UPPL-BJP गठबंधन पूर्ण बहुमत में है। 40 सदस्यीय BTC में अब इन दोनों के पास 22 सीटें हैं।

भाजपा ने इस बार के चुनाव में ‘एकला चलो’ की रणनीति अपनाई थी। इससे 17 वर्षों से सत्ता में काबिज रही बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) का राजनीतिक वर्चस्व टूट गया और वो बहुमत से 4 सीटें पीछे ही छूट गई। ये पार्टी भाजपा की पुरानी सहयोगी रही है। भाजपा ने असम विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल में UPPL और गण सुरक्षा पार्टी (जीएसपी) के रूप में नए सहयोगी तलाशे हैं। स्वशासी निकाय बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के इसी गठबंधन के साथ नए समीकरण बना कर भाजपा अब विधानसभा चुनाव में उतर सकती है।

पूर्वोत्तर के कुछ जनजातीय क्षेत्रों में अधिक से अधिक राजनीतिक स्वायत्तता और विकेन्द्रीकृत शासन की अनुमति देने वाला BTC चुनाव में बोडो जनजाति के रुख का पता चलता है, जो राज्य की आबादी का 6% है। अलग राज्य बोडोलैंड की माँग लेकर कई बार हिंसा भी हो चुकी है। कुल 46 सीटों में से 6 नामांकित होते हैं और 40 पर चुनाव होते हैं। UPPL के सुप्रीमो प्रमोद बोरो अब BTC के CEM (चीफ एग्जीक्यूटिव मेंबर) का पद संभालेंगे।

इस चुनाव में कॉन्ग्रेस ने अजमल से हाथ मिलाया था। अजमल मोदी सरकार के खिलाफ जहर उगलने के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में यह बात भी सामने आई है कि एआईडीयूएफ द्वारा संचालित ‘अजमल फाउंडेशन’ को टेरर फंडिंग वाले विदेशी संगठनों से पैसा मिला है। 2015 में हुए चुनाव में भाजपा को केवल 1 सीट ही मिली थी। कॉन्ग्रेस की सहयोगी एआईयूडीएफ इस चुनाव में खाता खोलने में भी नाकाम रही।

‘…केजरीवाल अपनी आत्मा तक बेच देंगे’: कैप्टेन और AAP में ‘किसान आंदोलन’ के क्रेडिट लेने की होड़

केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को लेकर चल रहे ‘किसान आंदोलन’ का क्रेडिट लेने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉन्ग्रेस में होड़ मची हुई है। दिल्ली और पंजाब, दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्री आपस में लड़ रहे हैं। सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को अरविंद केजरीवाल ने किसान संगठनों के ऐलान का समर्थन करते हुए अपनी पार्टी के नेताओं के साथ उपवास रखा। पंजाब के मख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने उन पर निशाना साधा।

पंजाब सीएम ने कहा कि पूरा पंजाब जानता है कि वो प्रवर्तन निदेशालय (ED) या किसी भी अन्य एजेंसियों के केस से डरने वाले नहीं हैं। वहीं, उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल तो अपनी आत्मा तक बेच देंगे, अगर इससे उनके राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति होती हो। उन्होंने दिल्ली सीएम से कहा कि अगर आपको लगता है कि आपके ‘ड्रामे’ से किसान आपके पक्ष में जाएँगे, तो ये आपकी ग़लतफ़हमी ही है।

कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने ट्विटर पर दिल्ली की AAP सरकार को याद दिलाया कि उसने नवंबर 23, 2020 को ही केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को दिल्ली गैजेट के माध्यम से अधिसूचित कर दिया था। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि पूरे पंजाब को पता है कि केजरीवाल ने किसानों के हित को बेच दिया है। उन्होंने केजरीवाल से पूछा कि आप पर मोदी सरकार का कौन सा दबाव था, जो आपने ऐसा किया? हालाँकि, इसके बाद केजरीवाल ने भी उन पर पलटवार किया।

AAP के मुखिया ने कहा कि रिकार्ड्स ये कहते हैं कि कैप्टेन अमरिंदर सिंह भी उस समिति का हिस्सा थे, जिसने इन कृषि कानूनों का मसौदा तैयार किया था। उन्होंने दावा किया कि अमरिंदर सिंह के पास इन कानूनों को रोकने की शक्ति थी। साथ ही उन्होंने पूछा कि जब इन कानूनों को लेकर केंद्र तैयारियाँ कर रहा था, तब आप मोदी सरकार के साथ क्यों थे? केजरीवाल ने इसे पूंजीपतियों का कानून बताते हुए दावा किया कि इससे महँगाई दोगुनी हो जाएगी।

इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दावा कि समिति की किसी भी बैठक में इन कृषि कानूनों को लेकर विचार-विमर्श हुआ ही नहीं था। उन्होंने दिल्ली CM पर लगातार झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि केजरीवाल का भाजपा के साथ गठजोड़ है। उन्होंने कहा कि भाजपा उन पर आरोप नहीं लगा सकती, क्योंकि उसे आपके साथ गठजोड़ को छिपाना है। वहीं केजरीवाल ने इन कानूनों को ‘जनता को कैप्टेन का गिफ्ट’ करार दिया।

ये पहली बार नहीं है, जब सोशल मीडिया पर दोनों के बीच झड़प हुई हो। किसान आंदोलन को लेकर दोनों पहले भी लड़ चुके हैं। जब अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी, तब भी AAP उन पर हमलावर हो गई थी और ‘दिल्ली दरबार में हाजिरी’ लगाने का आरोप मढ़ा था। कॉन्ग्रेस की परेशानी ये है कि दिल्ली सरकार प्रदर्शनकारियों को जो सुविधा दे रही है, ऐसे में उसकी मेहनत बेकार न चली जाए।

पंजाब में राजनीति चमकाने की इच्छा रखने वाले केजरीवाल वहाँ के मामलों में हस्तक्षेप करते रहते हैं। जुलाई-अगस्त 2020 में जब जहरीली शराब के कारण हूच में 100 से अधिक लोग मारे गए थे, जिसके बाद केजरीवाल ने इस काण्ड की सीबीआई जाँच की माँग की थी। अरविंद केजरीवाल को आड़े हाथों लेते हुए अमरिंदर सिंह ने एक बयान में आरोप लगाया कि, इतने सारे लोग मारे गए हैं और अरविंद केजरीवाल को इस घटना से राजनीतिक मुद्दा बनाने में दिलचस्पी है। उन्होंने केजरीवाल को अपने काम से काम रखने की भी सलाह दी थी।

हनीफ सैयद और औसाफ हसन सिर्फ केनरा बैंक ATM में करता था चोरी, तकनीकी खामी के चलते खतरे में 9000 ATM

एक अनपढ़ आदमी बैंक की तकनीक को चकमा देकर चोरियाँ कर रहा था। लेकिन शातिर इतना कि वह हर ATM को निशाना बनाने के बजाए सिर्फ केनरा बैंक के ATM पर ही हाथ साफ करता था। इसका कारण इसकी एक खास खामी उसे समझ आ गई थी।

यह गैंग ATM से चोरी के लिए सिर्फ केनरा बैंक को ही टारगेट करते थे। केनरा बैंक के ATM डि-बोल्ट कंपनी के द्वारा बनाए गए हैं और इसकी खास कमी को यह गैंग समझ गया था। पुलिस ने केनरा बैंक के ऐसे 9000 ATM की बदलने या उसमें सुधार करने का संदेश बैंक मैनेजमेंट को भेज दिया है।

सूरत पुलिस ने गिरफ्तार आरोपित हनीफ सैयद और औसाफ हसन मोहम्मद सैयद से पूछताछ के आधार पर बताया कि ये ATM मशीन में क्लोन किए गए कार्ड को डालते थे और तकनीकी खामी के चलते जैसे ही मशीन से रुपए बाहर आते थे, नकली चाबी से मशीन का डिस्प्ले खोल कर उसे ऑफ-ऑन कर देते थे। इससे मशीन रिस्टार्ट हो जाती थी। रुपए तो निकल जाते थे लेकिन उसकी एंट्री नहीं होती थी।

इतना ही नहीं, इसके बाद ये बैंक को फोन करके यह भी बताते थे कि रुपए अकाउंट से कट गए हैं लेकिन पैसे ATM से बाहर नहीं आए। बैंक भी एंट्री देख कर पैसे वापस अकाउंट में डाल देती थी।

आरोपित हनीफ सैयद और औसाफ हसन मोहम्मद सैयद को सूरत से गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक 6ठी और दूसरा तीसरी क्लास तक पढ़ा है। जबकि इस तरह की खास ATM चोरी का मास्टरमाइंड साजिद बिल्कुल ही अनपढ़ है। तीन सगे भाइयों साजिद खान, इरफान खान और जहीर खान को सूरत पुलिस इस मामले में खोज रही है।

सूरत पुलिस ने बताया कि ये सभी आरोपित मेवाती गिरोह के सदस्य हैं। आपको बता दें कि मेवाती गिरोह देशभर में फ्रॉड और चोरी के लिए कुख्यात है।

गुरुद्वारा बंगला साहिब के कथा वाचक, लाइव टेलीकास्ट के दौरान कृषि कानूनों पर लाखों को कर बैठे गुमराह

सिखों के प्रमुख गुरुद्वारों में से एक, बंगला जी साहिब को यहाँ के जल के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि यहाँ के जल में उपचार के गुण हैं। दुनिया भर के सिख इस गुरुद्वारा में दर्शन करने आते हैं और पवित्र जल को अपने साथ घर ले जाते हैं। यह गुरुद्वारा मूल रूप से राजा जय सिंह का बंगला था। 1664 में दिल्ली में रहने के दौरान आठवें सिख गुरु, गुरु हर किशन सिंह यहाँ रहते थे।

उस समय चेचक और हैजा की महामारी इस क्षेत्र में फैल गई थी। गुरु हर किशन ने बीमार लोगों की ताजा जल देकर सेवा और सहायता की। जल्द ही उन्होंने इस बीमारी को खत्म कर दिया। 30 मार्च, 1664 को उनकी मृत्यु हो गई। राजा जय सिंह ने उस कुएँ के ऊपर एक छोटा तालाब बनवाया, जहाँ से गुरु हर किशन ताज़े जल को खींचते थे। अब यह माना जाता है कि इस टैंक के पानी में उपचार के गुण हैं। इसके ऐतिहासिक संबंध, लोकप्रियता, स्थान और सुंदर निर्माण के कारण, हर साल यहाँ पर लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसकी रसोई भारत में सबसे प्रसिद्ध गुरुद्वारा रसोई में से एक है। 

सुबह गुरबानी और कीर्तन

गुरबानी और कीर्तन को कई चैनलों और YouTube जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव टेलीकास्ट किया जाता है। दुनिया भर के लाखों भक्त विभिन्न चैनलों पर लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से इसे देखते हैं। गुरु ग्रंथ साहिब का शांतिपूर्ण पाठ, इसके बाद कीर्तन पथ, कई लोगों के लिए तनाव दूर करने का एक मंत्र जैसा है। प्लेटफॉर्म का उपयोग अक्सर सिख गुरुओं की कहानियों को सुनाने के लिए किया जाता है।

कृषि कानूनों के बारे में गलत जानकारी

13 दिसंबर को गुरबानी और कीर्तन पथ के बाद, कथा वाचक बाबा बंता सिंह ने गुरुओं की कहानियों को साझा किया। हालाँकि, अंत में उन्होंने किसानों के विरोध और कृषि कानूनों के बारे में बात की, जिसके दौरान उन्होंने कानूनों के बारे में कुछ गलत जानकारी साझा की। मॉर्निंग प्रेयर सेशन की समाप्ति पर उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों के बारे में बात की और कहा कि तीन कानून, जो सरकार ने पारित किए हैं, वह व्यापार, उत्पादन और वाणिज्य है। सामान्य भाषा में, इसे ‘मुक्त बाजार’ (‘free market’) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि यह अवधारणा अमेरिका और कनाडा में पहले ही विफल हो चुकी है।

दावा: उन्होंने कहा, “ये अधिनियम MSP को समाप्त करने के लिए पहला कदम है। सरकार एमएसपी को वापस लेना चाहती है। नए कानून के अनुसार, सरकारी बाजारों के साथ-साथ निजी बाजार भी होंगे। ये निजी बाजार सरकारी बाजारों की तुलना में अधिक भुगतान करेंगे। मूल्य, सुविधा और सुविधाओं की वजह से किसानों को निजी बाजारों की ओर आकर्षित किया जाएगा। जबकि सरकारी बाज़ारों में उपज को उतारने में कई दिन लग जाते हैं, निजी बाजारों में यह प्रक्रिया जल्दी हो जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा कि यह कुछ वर्षों तक जारी रहेगा। “एक बार जब किसान सरकारी बाजारों में जाना बंद कर देंगे तो सरकार उन्हें घाटे के बहाने बंद कर देगी। फिर, कॉर्पोरेट कहेंगे कि चूँकि प्रतिस्पर्धा नहीं है, इसलिए वे केवल किसानों को आधी कीमत का भुगतान करेंगे। कोई विकल्प नहीं बचने पर किसानों को कम दर पर उपज बेचनी होगी।”

तथ्य: सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एमएसपी को वापस लेने की कोई योजना नहीं है। कानूनों को पारित करने के बाद भी सरकार ने किसानों से हर समय उच्च खरीफ उपज की खरीद की है। 2021 के लिए अगली उपज के लिए एमएसपी पहले से ही निर्धारित किया गया है और सरकार ने खरीफ की उपज की खरीद पर 67,248.22 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

आवश्यक वस्तु

दावा: उन्होंने कहा कि सरकार ने भंडारण क्षमता की सीमा को हटा दिया था। कॉरपोरेट घराने जितनी चाहें उतनी उपज का भंडारण कर सकते हैं। “यहाँ तक ​​कि जिन किसानों के पास 100 एकड़ जमीन है, उनके पास अपनी उपज को स्टोर करने की सुविधा नहीं है। मुंबई में रहने वाले कॉर्पोरेट सभी अनाज, आलू, दाल आदि का भंडारण करेंगे, जिसकी वजह से बाजार में कमी पैदा होगी। जब कमी होगी, तो कीमत बढ़ जाएगी। ऐसा समय होगा जब आपको चावल के एक किलो के लिए 500 रुपए देने होंगे जो आप इन दिनों 100 रुपए में खरीदते हैं। कॉर्पोरेट अपनी इच्छा के अनुसार कीमत निर्धारित करेगा।” उन्होंने आगे कहा कि कॉरपोरेट घराने हर कमोडिटी की कीमत में इजाफा करेंगे। जैसे कि रिलायंस 50 रुपए में मकई बेचता है और किसान उसे महज 5 रुपए में बेचता है।

तथ्य: कानून [PDF] भंडारण गृह की छत की क्षमता के अनुसार भंडारण की अनुमति देता है। हर भंडारण गृह की एक विशिष्ट सीमा होती है। वे इससे अधिक स्टोर नहीं कर सकते। साथ ही सरकार हर वस्तु की कीमत पर सख्ती से निगरानी रखेगी और खराब न होने वाली उपज के लिए बागवानी उत्पादन की कीमत में 100% या 50% की वृद्धि होने पर हस्तक्षेप करेगी।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग

दावा: उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट घराने मौजूदा दरों की तुलना में किसानों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का दोगुना दाम देंगे। हालाँकि, वे कॉन्ट्रैक्ट में कई वर्षों का एक क्लाउज रखेंगे। अधिक कीमत के कारण किसान लालच में आ जाएगा। एक वर्ष के लिए, वे निर्धारित मूल्य का भुगतान करेंगे, लेकिन एक वर्ष के बाद वे कहेंगे कि कम उत्पादकता के कारण वे कम कीमत का भुगतान करेंगे।

“अगर किसान उन्हें अपनी जमीन छोड़ने के लिए कहेंगे, तो वे उन्हें कई वर्षों के लिए किए गए कॉन्ट्रैक्ट दिखाएँगे। पुलिस या एसडीएम सहित कोई भी उनकी बात नहीं सुनेगा, जहाँ किसानों को शिकायत दर्ज करने की अनुमति है। कानून किसानों को अदालत में जाने की अनुमति नहीं देता है।” उन्होंने आगे कहा कि किसान के पास कॉरपोरेट घरानों को अपनी जमीन बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।

तथ्य: कानून एक फसल के मौसम या अधिकतम पाँच साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट की अनुमति देता है। यदि फसल को उगाने के लिए पाँच साल से अधिक समय चाहिए तो किसान और स्पॉन्सर को लंबी अवधि के लिए आपसी अनुबंध में शामिल होना पड़ सकता है। कीमत को कॉन्ट्रेक्ट में उपज की गुणवत्ता के साथ उल्लेख किया जाना है।

यदि उत्पाद के आधार पर कीमत भिन्न हो सकती है, तो अनुबंध में एक गारंटीकृत मूल्य का उल्लेख किया जाना चाहिए। किसान को जो भी बोनस या प्रीमियम मिल सकता है, उसका उल्लेख कॉन्ट्रैक्ट में किया जाना चाहिए। कीमत एपीएमसी यार्ड या इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग या ट्रांजेक्शन प्लेटफॉर्म की रेखा पर तय की जा सकती है। स्पॉन्सर को उपज स्वीकार करने से पीछे हटने का अधिकार नहीं होगा। हालाँकि, वह समझौते के अनुसार उपज की गुणवत्ता की जाँच कर सकता है।

कानून कहता है [PDF] कि बीज उत्पादन के मामले में उपज को स्वीकार करने के समय दो-तिहाई भुगतान तुरंत करना पड़ता है और शेष राशि का भुगतान उपज को स्वीकार करने के 30 दिनों के भीतर करना पड़ता है। अन्य मामलों में उपज को स्वीकार करते समय भुगतान करना पड़ता है।

कानून में किसी भी पक्ष को समझौते में किसानों की भूमि को जोड़ने से रोक दिया गया है। भूमि को बेचा, हस्तांतरित या पट्टे पर नहीं दिया जा सकता है। कॉन्ट्रैक्ट केवल उपज के लिए होगा। स्पॉन्सर भूमि पर संरचना बढ़ा सकता है, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होने पर उसे इसे हटा देना होगा। यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है, तो किसान समझौते के समापन के बाद संरचना का मालिक होगा। विवाद की स्थिति में पक्षकार एसडीएम से संपर्क कर सकते हैं और मामले को 30 दिनों में निपटाना होगा। यदि पक्षकार निर्णय के परिणाम से खुश नहीं हैं, तो वे अपीलीय प्राधिकरण यानी कलेक्टर के पास अपील कर सकते हैं।