अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा कई दशकों तक अदालत में रहा लेकिन अंततः उस पर आदेश आया। लेकिन देश में इस श्रेणी के कई धर्म संगत मुद्दे हैं जिन पर विवाद का हल अभी तक नहीं निकला है। ऐसा ही एक विवादित मुद्दा है काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देव दीवाली के मौके पर आज अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हैं और इसी बीच भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने काशी विश्ववनाथ की मुक्ति का मसला उठाया है। उन्होंने कहा है कि औरंगजेब ने वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ कर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी, उसके स्थान पर दोबारा काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण होना चाहिए।
The present Kashi Vishvanath temple in Varanasi was built by Holkar Kingdom Rani Ahilyabhai because she could not see the early possibility of recovering the Gyanvapi Kashi Vishvanath Mandir site where a masjid had been built on order of Aurangzeb. But we must now recover it
सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर कहा, “वाराणसी के वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण होलकर साम्राज्य की रानी अहिल्याबाई ने करवाया था। क्योंकि वह उस स्थान पर ज्ञानवापी काशी विश्वनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना की प्रारंभिक संभावना नहीं देख सकती थीं जहाँ औरंगजेब के आदेश पर मस्जिद निर्माण हुआ था। लेकिन अब हमें इसको वापस हासिल करना होगा।”
हाल ही में काशी में बाबा विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद के सम्बन्ध में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने जिला जज की अदालत में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहे मुक़दमे को चुनौती दी गई थी। याचिका को स्वीकार कर लिया गया था। हालाँकि, कोर्ट ने देर से याचिका दायर करने के लिए बोर्ड पर 3000 रुपए का जुर्माना भी लगाया था।।
मुग़ल आक्रान्ताओं के भारत में दाखिल होने के बाद से काशी विश्वनाथ मंदिर पर आक्रमण शुरू हो गए थे। सबसे पहला आक्रमण 11वीं शताब्दी में कुतुबुद्दीन ऐबक ने किया था और इसमें मंदिर का शिखर पूरी तरह टूट गया था फिर भी मंदिर प्रांगण में पूजा पाठ जारी था। 1585 में राजा टोडरमल ने काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था, लेकिन 1669 में औरंगजेब ने इस मंदिर को पूरी तरह तोड़ दिया था। इसके बाद ठीक उसी जगह पर मस्जिद का निर्माण भी कराया था। 1780 के दौरान मालवा की रानी अहिल्याबाई ने ज्ञानवापी परिसर के ठीक बगल में नए मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे आज काशी विश्वनाथ मंदिर के नाम से पहचाना जाता है।
शेहला रशीद के खिलाफ उनके पिता अब्दुल रशीद शोरा ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बेटी पर संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उनसे अपनी जान को खतरा बताया है। जवाब में शेहला रशीद ने सिलसिलेवार ट्वीट के जरिए पिता के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने पिता को हिंसक और गालीबाज बताया है। अपनी माँ के साथ मारपीट का आरोप लगाया है।
जेके न्यूज वायर के अनुसार अब्दुल ने शेहला के खिलाफ जाँच की माँग की है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को पत्र लिख कर खुद की सुरक्षा की भी माँग की है। पिता के आरोपों के बाद शेहला रशीद ने एक बयान जारी कर उन्हें नकार दिया। उन्होंने अपने पिता को ‘पत्नी को पीटने वाला, दुष्ट आदमी’ बताया है और कहा है कि उन लोगों ने उनके खिलाफ केस दर्ज करवाने का फैसला लिया है। शेहला ने आरोप लगाया कि उनके पिता ने उनकी माँ को गाली दी और प्रताड़ित किया।
उन्होंने कहा कि परिवार ने उनके खिलाफ पहले घरेलू हिंसा के तहत शिकायत दर्ज की थी। शेहला ने आरोप लगाया, “उन्होंने कभी अपने सपनों में नहीं सोचा था कि उनकी आज्ञाकारी पत्नी और डरपोक बेटियाँ उनके खिलाफ बोलेंगी। चूँकि उन्हें माननीय न्यायालय द्वारा घर में प्रवेश करने से रोका गया था, इसलिए वे सस्ते स्टंट का सहारा लेकर न्यायिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं।”
1) Many of you must have come across a video of my biological father making wild allegations against me and my mum & sis. To keep it short and straight, he’s a wife-beater and an abusive, depraved man. We finally decided to act against him, and this stunt is a reaction to that. pic.twitter.com/SuIn450mo2
शेहला ने कहा कि यह कोई राजनीतिक मामला नहीं है, क्योंकि यह तब से चल रहा है जब से उन्होंने होश सँभाला है। 2005 में मोहल्ला समिति से उन्हें पत्र भेजकर कहा गया कि वह हमें प्रताड़ित न करें। अदालत ने उन पर 17-11-2020 से घर में प्रवेश करने से रोकने का आदेश दिया।
वहीं अब्दुल रशीद शोरा ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनकी बेटी शेहला रशीद उन्हें जान से मारने की धमकी दे रही है। उनकी बड़ी बेटी आसमा रशीद, पत्नी जुबैदा शोरा और सुरक्षा गार्ड शाकिब अहमद उसका साथ दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की धमकी उन्हें 2017 से दी जा रही है, जब शेहला अचानक से कश्मीर की राजनीति में उतरी। उसने पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी ज्वाइन की और फिर जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट पार्टी का हिस्सा बनी।
Letter written to J and K DGP by Shehla Rashid’s father (source: Jammu Kashmir Now)
उन्होंने कहा कि उनके लिए यह सरप्राइज एलिमेंट था। अब्दुल रशीद ने कहा कि शेहला सीपीआई पार्टी की रजिस्टर्ड मेंबर थी। 2017 में जहूर वटाली की गिरफ्तारी से 2 महीने पहले अब्दुल रशीद को जहूर वटाली और रशीद इंजीनियर ने श्रीनगर में वटाली के घर पर बुलाया था। उस समय शेहला PhD में थी। वहाँ पर उन लोगों ने JKPM पार्टी के लॉन्च के बारे में बताया और अब्दुल रशीद से आग्रह किया कि वो शेहला रशीद को उनके गेम प्लान में शामिल होने दें।
Letter written to J and K DPG by Shehla Rashid’s father (source: Jammu Kashmir Now)
मीटिंग के दौरान अब्दुल रशीद को 3 करोड़ रुपए ऑफर किए गए थे, ताकि वो शेहला को कुख्यात गतिविधियों में शामिल होने दें। रशीद ने कहा कि उन्हें पता चल गया था कि ये पैसे अवैध तरीके से आए थे और इसका उपयोग देश-विरोधी गतिविधियों में होने वाला था, इसलिए उन्होंने मना कर दिया और अपनी बेटी से भी उन सबके साथ शामिल होने से मना किया। उनके मना करने के बावजूद उनकी पत्नी, बड़ी बेटी और शेहला का सिक्योरिटी गार्ड इसका हिस्सा बने।
Letter written to J and K DGP by Shehla Rashid’s father (source: Jammu Kashmir Now)
एक हफ्ते के बाद शेहला दिल्ली से श्रीनगर आई। शेहला ने अपने पिता से कहा कि उन्होंने पैसे ले लिए हैं और वो इस ट्रांजेक्शन और राशीद इंजीनियर एवं जहूर वटाली के साथ उसकी मीटिंग के बारे में किसी को कुछ न बताए। यह उनकी जान के लिए खतरा हो सकता है। शेहला ने यह भी कहा कि वो आगे और भी पैसे लेंगी इसलिए वो अपना मुँह बंद रखें। अब्दुल रशीद का दावा है कि एक जिम्मेदार पिता होने के नाते उन्हें इन देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों से दूर रहने के लिए कहा।
मीडिया से बात करते शेहला के पिता अब्दुल रशीद बोरा (साभार : Jammu-Kashmir Now)
अब्दुल रशीद ने दावा किया कि उनके घर में देश विरोधी गतिविधियाँ चल रही है। इसमें उन्होंने शेहला, अपनी पत्नी, बड़ी बेटी और शेहला के सिक्योरिटी गार्ड के शामिल होने की बात कही। उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी गार्ड हमेशा बंदूक लेकर शेहला के साथ रहता है। उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी दी जा रही है। उन लोगों ने उन्हें घर से निकाल फेंकने के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत फँसाया।
उनका कहना है कि अदालत से कानूनी उपाय मिलने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने सहयोग नहीं किया। जब वह अदालत के आदेशों के साथ अपने घर पहुँचे तो शाकिब ने कथित तौर पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी, जिसके डर से शोरा श्रीनगर से जम्मू भाग कर आ गए।
शिकायत में उन्होंने शाकिब और उसके सहयोगियों, शेहला राशिद, आसमा रशीद और जुबैदा के बैंक विवरण, नई दिल्ली में उनके द्वारा अर्जित संपत्ति, उनके ईमेल खातों एवं फिरोज पीरजादा, जहूर वटाली और राशीद इंजीनियर के साथ उनके रहस्यमय वित्तीय डील के बारे में जाँच की अपील की है। उन्होंने कहा कि ये लोग महिला सशक्तिकरण और NGO के नाम पर कुख्यात गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
3 things happened in last 72 hrs:
1. Shehla Rashid’s father confirmed she works with terrorists. 2. Poster boy of #FarmersProtest turns out to be terrorist supporter. 3. B Grade Bollywoodiya got caught defending Turbaned Ramta Jogi so she protected her tweets.
Shehla Rashid’s father was threatened and had to run to Jammu to file this complaint according to this statement. He alleges that she has been receiving funds from dubious sources. Claims to be unemployed but runs NGO’s pic.twitter.com/lPXhpxf4f8
पिता-बेटी के इस आरोप-प्रत्यारोप के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की काफी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही है। इसी क्रम में फिल्म मेकर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने लिखा कि अब तो शेहला के पिता ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि वो आतंकवादियों के साथ काम करती है।
Abdul Rashid Shora, father of Shehla Rashid, has filed Complaint against her for getting death threats from her.
He demanded Investigation against her for being involved in ‘notorious activities & alledged that There are anti-national activities going in his house.
Meanwhile turns out Shehla Rashid’s own father is claiming that she’s threatening to kill him. Also revealed the mystery behind her new found wealth, despite her being unemployed https://t.co/1zicKKxwW9
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर जारी किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच टाइम्स ऑफ़ इंडिया द्वारा साझा किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में बना हुआ है। यह वीडियो राजधानी दिल्ली के गाजीपुर क्षेत्र का है जिसमें आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के इस वीडियो के साथ कैप्शन भी लिखा हुआ है, “गाजीपुर में किसानों के विरोध-प्रदर्शन की जगह पर बिरयानी का समय हो चुका है।” वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों लोग बिरयानी के लिए पंक्ति बना कर खड़े हैं।
वीडियो पर कुछ ही समय में काफी प्रतिक्रियाएँ सामने आई क्योंकि इस नज़ारे ने शाहीन बाग़ की यादें ताज़ा कर दी, जब पिछले साल दिसंबर महीने में तमाम इस्लामी सीएए और एनआरसी के तथाकथित ‘विरोध’ में धरने पर बैठे थे। नेटिज़न्स ने दिल्ली की सीमाओं पर जारी ‘किसानों’ के विरोध-प्रदर्शन और शाहीन बाग में हुए विरोध-प्रदर्शन के बीच समानताएँ स्थापित करनी शुरू कर दी।
किसानों के लिए बिरयानी ने दिलाई शाहीन बाग़ के धरने की याद
इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए तमाम नेटिज़न्स ने विचार प्रकट किया कि किसानों का विरोध, शाहीन बाग़ प्रदर्शन का सीज़न-2 है। एक सोशल मीडिया यूज़र ने इस विरोध प्रदर्शन का ज़िक्र करते हुए लिखा, “कुदरती बिरयानी, पिंचर प्रोटेस्ट की अपार सफलता के बाद पेश है भारत की सबसे बड़ी नौटंकी का दूसरा सीज़न, शाहीनबाग़ 2। जिसकी थीम है, “कुदरती बिरयानी किसानों का विरोध-प्रदर्शन।”
After roaring success of “Kudrati Biryani-PincherProtests”
Presenting Season 2 of India’s biggest Nautanki (aka Reality Show):
वहीं एक ट्विटर यूज़र ने आरोप लगाते हुए कहा कि कट्टरपंथी इस्लामी संगठन, वामपंथी दल, आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस जिन्होंने शाहीन बाग़ ‘विरोध-प्रदर्शन’ को बढ़ावा दिया वही इस तथाकथित किसान आंदोलन के पीछे हैं।
शाहीन बाग़ प्रदर्शन को मिली थी भरपूर फंडिंग और समर्थन (और बिरयानी भी)
ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट ने इस मुद्दे का ज़िक्र किया ही था कि शाहीन बाग़ में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों और सहयोगियों के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। बिरयानी के साथ-साथ पानी की बोतल, फलों का रस और खाने की चीज़ें भी बाँटी गई थीं। अगर इतने से बात स्पष्ट नहीं होती है तो वहाँ पर एक म्यूज़िक सिस्टम भी लगा हुआ था, जिसका प्रतिदिन का किराया आठ से दस हज़ार रुपए था। इसके अलावा वहाँ पर लगाए गए टेंट का प्रतिदिन का किराया लगभग दस से तीस हज़ार रुपए के बीच था। दिन के वक्त में वहाँ पर 200 से 300 लोग हमेशा ही बैठे रहते थे, जिन्हें मुफ्त चाय-नाश्ता और भोजन दिया जाता था। यानी इस तरह के विरोध-प्रदर्शन का प्रतिदिन खर्च लगभग दस लाख रुपए था।
इतना ही नहीं भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने एक वीडियो भी साझा किया था जिसमें साफ़ देखा जा सकता था कि प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को 500 से लेकर 700 रुपए तक दिए जा रहे थे। जो व्यक्ति वीडियो में नज़र आया था उसका यहाँ तक कहना था कि यह लोग शिफ्ट में काम करते थे, जिससे वहाँ भीड़ कम नज़र नहीं आए। महिलाओं को अपने खाली वक्त में वहाँ बैठने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। व्यक्ति ने यह भी बताया कि प्रदर्शन करने वालों के प्रबंधित रूप से ‘ड्यूटी के घंटे’ तय होते थे, उसके मुताबिक़ शाहीन बाग़ धरना-प्रदर्शन स्थानीय लोगों के लिए आमदनी का ज़रिया से बढ़ कर कुछ नहीं था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शाहीन बाग़ धरने में शामिल होने वाली तमाम महिलाएँ किसानों के विरोध प्रदर्शन में भी शामिल होने पहुँची थीं। किसान यूनियन के नेताओं का दावा है कि इस विरोध-प्रदर्शन में लगभग 3 लाख किसान हिस्सा ले रहे हैं।
देव दीपावली के खास अवसर पर सोमवार (30 नवंबर 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुँचे। पीएम मोदी ने देव दीपावली उत्सव का पहला दीया प्रज्जवलित किया। पीएम के दीप जलाने के बाद गंगा के दोनों किनारों पर सजे लाखों दीप जगमगा उठें।
चेत सिंह घाट पर लाइट एंड साउंड शो की तस्वीर
राजघाट पर दीपदान के बाद पीएम क्रूज से रविदास घाट की ओर रवाना हुए। इस दौरान घंटे भर गंगा के दोनों किनारे पर होने वाले दीपदान का नजारा लिया। चेत सिंह घाट के सामने रुक कर यहाँ रामायण पर आधारित लेजर शो को देखा। इसके बाद सड़क मार्ग से सारनाथ रवाना हुए।
लेजर शो देखने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्रूज रविदास घाट पहुँचा। रविदास घाट से पीएम मोदी सड़क मार्ग से सारनाथ रवाना हुए। सड़क मार्ग पर भी उनके स्वागत के लिए जगह-जगह आयोजन रखा गया था।
प्रधानमंत्री के स्वागत में इस बार गंगा के दोनों किनारे जगमगा रहे हैं। सभी 84 घाटों के साथ ही गंगा पार रेती को भी रोशन किया गया है। प्रधानमंत्री ने राजघाट पर संबोधन के बाद क्रूज से काशी की देव दीपावली का करीब एक घंटे तक नजारा देखा।
पीएम मोदी ने कहा कि पहले काशी बार-बार आता था लेकिन इस बार आने में विलंब हो गया। जब इतना समय बीत गया तो लगता था जैसे कुछ खो गया है। आज जब आया तो मन प्रफुल्लित हो गया। आप लोगों के दर्शन से मन ऊर्जावान हो गया।
PM मोदी ने कहा, “कोरोना काल में भी एक दिन आपसे दूर नहीं रहा। कोरोना के केस कैसे बढ़ रहे, अस्पताल की व्यवस्था, गरीबों को भोजन मिल रहा है या नहीं आदि से हमेशा जुड़ा रहा। काशी में जिस तरह से सेवाभाव हुआ है, वह अद्भुत है। आपके सेवाभाव को प्रणाम करता हूँ।”
उन्होंने कहा कि आपने गरीब से गरीब की जो सेवा की है उसने मेरे दिल को छू लिया है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आपकी सेवा में कोई कमी नहीं रहने दूँगा।
मोदी ने कहा, “मेरे लिए सौभाग्य का अवसर है कि ऐसे जगमगाते माहौल में आने का मौका मिला है। माँ गंगा की अविरल धारा की तरह यहाँ विकास की गंगा बहती रहेगी।”
उन्होंने कहा कि काशी की ओर पूरे विश्व का पर्यटन देख रहा है। विश्वनाथ मंदिर के साथ ही दुर्गा मंदिर और दूसरे मंदिरों को सुधारा जा रहा है।
घाटों की तस्वीर तेज गति से बदल रही है। सुबह बनारस को फिर से आभा मिली है।
माँ गंगा का जल भी निर्मल हो रहा है। यही तो प्राचीन भारत का आधुनिक अवतार है। यही बनारस का सदा बना रहने वाला रस है।
पीएम ने भोजपुरी में संतों को नमन के साथ संबोधन की शुरुआत की।
काशी के कोतवाल की जय, माता अन्नपूर्णा की जय, माँ गंगा की जय, जो बोले सो निहाल, नमो बुद्धाय से पीएम मोदी ने राजघाट पर अपने संबोधन की शुरुआत की और सभी को देव दीपावली, कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व की बधाई दी।
उन्होंने काशी के संतों और महापुरुषों को भोजपुरी में याद कर नमन किया। वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी और प्रयागराज के बीच 2474 करोड़ की सिक्स लेन परियोजना का सोमवार (नवंबर 30, 2020) की दोपहर लोकर्पण किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार (30 नवंबर 2020) को दीप प्रज्वलित कर कशी में देव दीपावली महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे।
देश समेत पूरी दुनिया की निगाहें आज काशी के इस भव्य आयोजन पर टिकी हुई हैं। इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कोरोना काल ने भले ही बहुत कुछ बदल दिया है लेकिन काशी की ये ऊर्जा, काशी की ये भक्ति, ये शक्ति उसको थोड़े कोई बदल सकता है।” प्रधानमंत्री मोदी ने इसके अलावा संस्कृति, आस्था और मूल्यों को विरासत बताते हुए कई अहम बातें कहीं। यह भारत के इतिहास में पहला ऐसा मौक़ा है जब देश का कोई प्रधानमंत्री देव दीपावली के अवसर पर काशी में मौजूद है।
#WATCH | यूपी, वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीप प्रज्ज्वलित कर देव दीपावली महोत्सव का शुभारंभ किया। pic.twitter.com/O1uhMNtVcy
ऐसा कहा जाता है कि काशी की उत्तर वाहिनी गंगा के तट पर कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाने वाली देव दीपावली को पूरा देवलोक धरती पर होता है। काशी के घाट पर मनाई जाने वाली देव दीपावली का इतिहास लगभग साढ़े तीन दशक पुराना है। शुरुआत हुई थी काशी के ही पंचगंगा घाट से और तब सिर्फ स्थानीय लोग घाट पर दीया जलाते थे, लेकिन पहली बार साल 1985 के दौरान मंगला गौरी मंदिर के महंत नारायण गुरु ने देव दीपावली को विस्तृत करने का प्रयास किया। अस्सी के दशक में भी स्वच्छता गंगा के घाटों के लिए बड़ी समस्या थी जिसको मद्देनज़र रखते हुए महंत नारायण गुरु ने कहा कि घाटों पर दिया जलाया जाना चाहिए। उन्होंने पंचगंगा के अलावा कुल 5 घाटों पर दीप प्रज्वलित करना शुरू किया।
(साभार – सोशल मीडिया)
नारायण गुरु ने इस आयोजन के लिए लोगों से सहयोग माँगना भी शुरू किया, दुकानदारों से तेल और घी माँगा। धीरे-धीरे जनता इस आयोजन की सार्थकता को देखते हुए सहयोग के लिए आगे आई। एक समाचार समूह में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक नारायण गुरु का कहना था कि उस दौर में 100 दीयों पर लगभग 12 रुपए खर्च होते थे। कालान्तर में इस आयोजन का दायरा 6 घाटों से बढ़ कर मुख्य घाटों तक बढ़ गया। मंगला गौरी मंदिर के महंत नारायण गुरु की अगुवाई में 90 के दशक तक देव दीपावली का यह आयोजन काशी के 84 में से 31 घाटों तक विस्तृत हो गया था।
इसके बाद एक और मुहिम छेड़ी गई जिसके तहत इसे काशी के हर घाट पर आयोजित करने का प्रयास हुआ और केंद्रीय देव दीपावली महासमिति का गठन हुआ। आने वाले कुछ वर्षों में काशी की देव दीपावली का स्वरूप दिव्य हो गया। इसी बीच काशी के तालाबों और जलाशयों पर भी देव दीपावली मनाने की शुरुआत हुई। कथित तौर पर 1992 के दौरान विवादित ढाँचा गिराए जाने के बाद भी काशी की देव दीपावली का विस्तार हुआ और नब्बे का दशक ख़त्म होते होते इस आयोजन की ख्याति पूरे विश्व में प्रचलित ही गई। एक मान्यता के अनुसार देवता भी देव दीपावली में शामिल होते हैं और इसके पीछे की पौराणिक कथा भी बेहद चर्चित है।
(साभार – सोशल मीडिया)
कहा जाता है कि भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र और देवताओं के सेनापति कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया था। इसके बाद उसके तीनों बेटों तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली (त्रिपुरासुर) ने देवताओं से प्रतिशोध लेने का प्रण किया। उन्होंने कठोर तपस्या की और तपस्या के बाद ब्रह्मा प्रकट हुए तब उनसे अमरता का वरदान माँगा। ब्रह्मा ने कहा यह संभव नहीं है कुछ और माँगो। तब त्रिपुरासुर ने कहा हमारे लिए तीन पुरी (नगर) का निर्माण कर दें। यह तीनों पुरी जब अभिजित नक्षत्र में एक पंक्ति में खड़ी हों और कोई क्रोधजित अत्यंत शांत अवस्था में असंभव रथ और असंभव बाण का सहारा लेकर हमारा वध करना चाहे तभी हमारी मृत्यु हो। ब्रह्मा ने उन्हें यह वरदान दे दिया।
वरदान के अनुसार त्रिपुरासुर को तीन पुरी प्रदान की गई। तारकाक्ष के लिए स्वर्णपुरी, कमलाक्ष के लिए रजतपुरी और विद्युन्माली के लिए लौहपुरी। इसके बाद तीनों ने ऋषि-मुनियों और देवताओं पर अत्याचार करना शुरू कर दिया, देवता भी इनका कुछ नहीं कर पाए। सभी देवता शिव की शरण में गए और उन्होंने देवताओं के कहा कि सब मिल कर प्रयास क्यों नहीं करते हैं? देवताओं ने कहा हम ऐसा कर चुके हैं लेकिन हम असफल रहे हैं। फिर शिव ने त्रिपुरासुर के वध का संकल्प लिया और देवताओं ने उन्हें अपना आधा बल दे दिया। शिव ने पृथ्वी को रथ बनाया, सूर्य और चंद्रमा इस रथ के पहिये बने, सृष्टा सारथी बने, विष्णु बाण, मेरुपर्वत धनुष और वासुकी बने धनुष की डोर।
(साभार – सोशल मीडिया)
अंत में शिव ने उस असंभव रथ पर सवार होकर धनुष चढ़ाया और अभिजित नक्षत्र में तीनों पुरी के एक पंक्ति में आते ही कठोर प्रहार किया। प्रहार के ठीक बाद तीनों पुरी जल कर भस्म हो गई और त्रिपुरासुर का भी अंत हो गया। ऐसा माना जाता है कि यह दिन कार्तिक पूर्णिमा का था। त्रिपुरासुर का अंत होते ही सभी देवता प्रफुल्लित होकर शिव की नगरी काशी पहुँचे और सभी ने गंगा के घाट पर दीप प्रज्वलित किए। यह भी एक कारण है कि कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस बार की देव दीपावली कई मायनों में विशेष है, जिसमें सबसे उल्लेखनीय है कि पहली बार देश के प्रधानमंत्री इस महापर्व का हिस्सा बन रहे हैं।
शेहला रशीद के खिलाफ उनके पिता अब्दुल रशीद शोरा ने शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि बेटी शेहला उन्हें मौत की धमकी दे रही है। जेके न्यूज वायर के अनुसार अब्दुल ने शेहला के खिलाफ जाँच की माँग की है।
अब्दुल शोरा के अनुसार शेहला ‘कुख्यात गतिविधियों’ में शामिल है। वे कहते हैं, “मेरे घर में राष्ट्र विरोधी गतिविधियाँ चल रही हैं।”
#Breaking Shehla Rashid’s Father Abdul Rashid Shora filed a complaint against her, says-‘I’m facing death threat frm my daughter Shehla Rashid’
demands Investigation against her 4 being involved in ‘notorious activities’, ‘There are anti-national activities going in my house.’ pic.twitter.com/qMj9JEPXpp
अब्दुल रशीद शोरा ने जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को अपनी शिकायत दी है। उन्होंने शेहला की ‘कुख्यात गतिविधियों’ को उजागर करते हुए उसके बैंक अकाउंट की जाँच की माँग की है।
#Breaking In a letter written to DGP, J&K, Abdul Rashid Shora claimed that Shehla took 3 Crores in cash to join Kashmir centric politics from ‘notorious people’.
he demands ‘mysterious financial dealing with’ Feroz Peerzada, Zahoor Watali (arrested by NIA) & Rasheed Engineer. https://t.co/ZglyE0LSiX
जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को लिखे पत्र में अब्दुल रशीद शोरा ने दावा किया कि शेहला ने कश्मीर केंद्रित राजनीति में शामिल होने के लिए ‘कुख्यात लोगों’ से 3 करोड़ रुपए नकद लिए हैं। उन्होंने माँग की है कि फिरोज पीरजादा, जहूर वटाली (एनआईए द्वारा गिरफ्तार) और रशीद इंजीनियर के बीच के ‘रहस्यमय वित्तीय डील’ की जाँच की जाए।
#Exclusive Here is the copy of the letter written to DGP, J&K.
एडवोकेट मोनिका अरोड़ा ने भी इस ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा है कि शेहला रशीद के पिता ने उन पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए करोड़ों रुपए लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने पिता के तौर पर शेहला को रोकने की कोशिश की, लेकिन अब उनकी खुद की जान खतरे में है। यह बहुत ही गंभीर आरोप है।
Shehla Rashid’s father accuses her of getting crores of rupees to be involved in Anti National activities. Says as a father, he tried to stop her. But now is fearful for his own life. Very very serious allegations. https://t.co/hu6Ef6dLVq
गौरतलब है कि पिछले दिनों शेहला रशीद के खिलाफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देशद्रोह के साथ कई अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। शेहला रशीद पर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद मौजूदा हालात को लेकर भारतीय सेना के खिलाफ झूठी खबरें फैलाने का आरोप था।
शेहला ने भारतीय सेना पर रात में कश्मीर के लोगों के घरों में घुसने, गैर-कानूनी रूप से लड़कों को उठाने, घरों में छानबीन करने, चावलों में तेल मिलाने, शोपियाँ में कश्मीरी लड़कों को बंधक बनाकर दहशत फैलाने जैसे कई आरोप लगाए थे।
एक ट्वीट में शेहला ने जम्मू-कश्मीर की हालत बेहद खराब होने का दावा करते हुए सशस्त्र बलों पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। सेना ने इसे खारिज करते हुए शेहला के आरोपों को बेबुनियाद बताया। साथ ही कहा था कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं।
जिन लोगों को साल 2013 तक स्मार्टफोन का चस्का लग चुका था वह सभी लोग अच्छे से जानते होंगे कि मोबाइल की दुनिया में माइक्रोमैक्स की क्या धूम थी। अलग-अलग रेंज का माइक्रोमैक्स फोन हर तीसरे-चौथे सड़क चलते इंसान के हाथ में देखने को मिल जाता था।
माइक्रोमैक्स के इतना लोकप्रिय होने के पीछे मुख्य कारण था- कम दम दाम में अपने उपभोक्ता को तमाम फीचर्स के साथ ऐसा हैवी लुक वाला फ़ोन देना, जिससे उनकी जेब पर ज्यादा असर न पड़े और सोशल लाइफ में स्टेटस भी बरकरार रहे।
साल 2014-15 तक माइक्रोमैक्स भारत की लीडिंग कंपनियों में से एक रही। लेकिन, धीरे धीरे शाओमी का सुरूर लोगों पर चढ़ना शुरू हुआ और वह माइक्रोमैक्स को छोड़ उसकी ओर आकर्षित होते गए। गलती उस समय चायनीज कंपनियों की भी नहीं थी।
क्वालिटी कंपैरिजन में माइक्रोमैक्स की कैनवस सीरिज के कई मॉडल्स को वाकई शाओमी का M1-1S पछाड़ने लगा था। बाकी की कसर वह लोग पूरी कर रहे थे जिन्हें तकनीक की जानकारी थी। हर कोई कम दाम में अच्छे फोन का पर्याय चायनीज फोनों को बताने लगा था।
साभार: gizbot
साल 2014 के अंत में और 2015 की शुरुआत में माइक्रोमैक्स की स्थिति डंवाडोल होनी शुरू हुई और इसी बीच आया शाओमी का नोट 1। जिसकी माँग ऑनलाइन नए रिकॉर्ड कायम कर रही थी। चायनीज कंपनियों को ज्यादा समय नहीं लगा माइक्रोमैक्स से लोगों का मन दूर हटाने में।
कभी जो काम सैमसंग के साथ माइक्रोमैक्स ने किया था, वही काम चीनी कंपनियों के फोन माइक्रोमैक्स के साथ करने लगे थे। सैमसंग का ग्राहक कभी उससे दूर नहीं हुआ बस जेब को देख कर माइक्रोमैक्स की ओर आकर्षित हुआ था। लेकिन चीनी कंपनियों ने तो जैसे माइक्रोमैक्स को रिप्लेस ही कर दिया। क्वालिटी में भी भी और दाम में भी।
चीन से बैर ने उभारी माइक्रोमैक्स की नैया
जब चीनी कंपनियों को लेकर भारत सरकार ने सख्त रवैया अपनाया, तब लोगों को माइक्रोमैक्स की दोबारा याद आई। ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने व चीन का बहिष्कार करने के लिए लोगों ने माइक्रोमैक्स को टैग करके ये कहना शुरू किया कि वह चीनी मोबाइलों का विकल्प ले कर आएँ।
@Micromax_Mobile plz produce some great alternative of Chinese mobiles. You have great potential and u can do it. It is the best time for u and we Indians fully ? support you. Make proud us. Goodluck#BoycottChineseProduct#AtmaNirbharBharat Jai Hind ???
ये प्रतिक्रिया माइक्रोमैक्स की डूबती नैया को किनारा देने के लिए पर्याप्त थी। माइक्रोमैक्स ने 17 जून 2020 को एक यूजर को रिप्लाई देते हुए कहा था कि वोकल फॉर लोकल के लिए आपका समर्थन देख कर हमें खुशी हुई। हम बहुत मेहनत कर रहे हैं और जल्द ही कुछ बड़े के साथ आएँगे।
— IN by Micromax #INNote1 (@Micromax__India) June 17, 2020
इस घोषणा के चंद महीनों बाद ही माइक्रोमैक्स नए रूप के साथ बाजार में लौट आया। अपनी In मोबाइल के बारे में बताते हुए कंपनी ने अपने पहले के माइक्रोमैक्स और अब के माइक्रोमैक्स डिवाइस में फर्क दिखाया। नए डिवाइस में यूज किया गया In इंडिया को रिप्रजेंट करता है।
इस मोबाइल को वैसे तो लॉन्च 3 नवंबर 2020 को किया जा चुका है लेकिन 1 दिसंबर को फ्लिपकार्ट और वेबसाइट http://micromaxinfo.com पर इसकी सेल दोपहर ऑनलाइन 12 बजे होगी। इस बार भी कंपनी ने ग्राहकों की जेब और जरूरत देखकर अपने फोन को लॉन्च किया है। इससे पहले इसकी सेल 24 नवंबर को हुई थी।
In Note 1 बाय माइक्रोमैक्स को दो वेरिएंट्स में लॉन्च किया गया है। इस फोन के 4GB रैम 64GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 10,999 रुपए तय की गई है। वहीं दूसरे 4GB रैम और 128GB स्टोरेज वेरिएंट को 12,499 रुपए में खरीदा जा सकेगा।
माइक्रोमैक्स ने अपने in फोन में कैमरे में खास ध्यान दिया है। इसके AI क्वॉड कैमरा (चार कैमरों का सेटअप) सेटअप दिया गया है, जिसमें 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा सेंसर मिलेगा। वहीं मॉड्यूल में 5 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड, 2 मेगापिक्सल का मैक्रो और 2 मेगापिक्सल डेप्थ सेंसर भी दिया गया है। सेल्फी के लिए फोन में 16 मेगापिक्सल का कैमरा है। बैटरी पावर के लिए फोन में 5000mAh की दमदार बैटरी दी गई है जो कि 18W के फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी।
डिस्प्ले इसका 6.67 इंच का IPD LCD डिस्प्ले फुल HD+ रेजोलूशन के साथ दिया गया है। खास बात ये है कि ये फोन MediaTek Helio G85 प्रोसेसर से लैस है। वहीं प्रोसेसर की बात करें तो नए फोन में एंड्रॉयड 10 ऑपरेटिंग सिस्टम दिया गया है और इसे अगले दो साल में एंड्रॉयड 11 और एंड्रॉयड 12 अपडेट दिया जाएगा।
अब भारतीयों की ओर से चायनीज कंपनी के बहिष्कार का एक नजारा हम पिछले कुछ महीनों में कई एप्स और उत्पादों पर देख ही चुके हैं। लेकिन 24 नवंबर को सेल पर लगे इस फोन ने भी यह साबित किया कि भारतीय वाकई वोकल और लोकल को सपोर्ट करने के लिए आगे आ रहे हैं जिसके चलते यह फोन 30 मिनट के अंदर सोल्ड आउट हो गया।
India ne dikha diya apna pyaar! Thank you for being #INforIndia and welcoming us back with all your hearts. We will be back next week, on 1st December at 12 noon with even more stock for the IN note 1. #INMobiles#MicromaxIsBack. pic.twitter.com/auDsd9955H
भारत के इस प्यार को देख माइक्रोमैक्स भी भावनाएँ प्रकट करने से नहीं रुक पाया। उन्होंने लिखा, “इंडिया ने अपना प्यार दिखा दिया। धन्यवाद IN for India के लिए और दिल से हमारे स्वागत के लिए। अब अगले हफ्ते आएँगे, 1 दिसंबर को 12 बजे और अधिक स्टॉक के साथ।”
रबी की फसल खासकर गेहूँ की बुवाई के बाद खाद-पानी के लिए सातवीं किस्त का इंतजार रहे किसानों के खाते में कुछ घंटों बाद मोदी सरकार 2000 रुपए की रकम भेजेगी। इस वित्तीय वर्ष की तीसरी और योजना की शुरुआत से 7वीं किस्त 1 दिसंबर से आनी शुरू हो जाएगी।
बता दें कि मोदी सरकार सलाना 6000 रुपए किसानों को तीन किस्तों में देती है। पहली किस्त अप्रैल से जुलाई, दूसरी किस्त अगस्त से नवंबर और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च तक आती है। अगर आप भी 7वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं तो लिस्ट में अपना नाम देख लें। कहीं ऐसा न हो कि दस्तावेजों में गड़बड़ी के चलते परेशानी उठानी पड़ जाए।
रिकॉर्ड में कोई भी गड़बड़ी होने पर निश्चित तौर पर आपको योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। कृषि मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, 1.3 करोड़ किसानों को आवेदन करने के बाद भी इसलिए पैसा नहीं मिल सका, क्योंकि या तो उनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी थी या फिर आधार कार्ड नहीं है। नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी से भी पैसा रुक सकता है। बता दें कि पिछले 23 महीने में केंद्र सरकार 11.17 करोड़ किसानों को सीधे 95 करोड़ रुपए से अधिक की मदद दे चुकी है।
किसान कैसे करें पहली बार रजिस्ट्रेशन
अगर आपने अभी तक पीएम किसान सम्मान निधि पाने के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, तो आप अपना रजिस्ट्रेशन कराने के बाद योजना का फायदा उठा सकते हैं। सबसे पहले आपको इस योजना से जुड़ी आधिकारिक साइट पर जाना होगा। जिसमें फार्मर्स कॉर्नर का ऑप्शन दिखाई देगा। उस पर न्यू फार्मर रजिस्ट्रेशन कॉलम पर क्लिक करें।
इसके बाद आपके सामने एक नई विंडो खुलेगी, जिसमें आपको आधार कार्ड का विवरण भरना है। फिर क्लिक हियर टू कॉनिटन्यू पर क्लिक करना पड़ेगा। इसके बाद आपके सामने एक अन्य पेज खुलेगा, जिसमें अगर आप पहले रजिस्ट्रेशन करा चुके हों, तो आपका विवरण आ जाएगा और अगर रजिस्ट्रेशन पहली बार कर रहे हैं, तो लिखा आएगा कि RECORD NOT FOUND WITH GIVEN DETAILS, DO YOU WANT TO REGISTER ON PM-KISAN PORTAL इस पर आपको YES करना होगा।
इसके बाद फॉर्म दिखेगा जिसे भरना होगा। इसमें सही-सही जानकारी भरने के बाद सेव कर दें। इसके बाद आपके सामने एक नया पेज खुलेगा, जिसमें आपसे आपकी जमीन का ब्यौरा माँगा जाएगा। खास तौर पर खसरा नंबर और खाता नंबर आदि का। इसे भरकर सेव कर दें। सेव करते ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर और रिफरेंस नंबर मिलेगा जिसे अपने पास सँभाल लें। इसके बाद पैसा आना शुरू हो जाएगा।
होम पेज पर मेन्यू बार देखें और यहाँ ‘फार्मर कार्नर’ पर जाएँ।
लाभार्थी सूची के लिंक पर क्लिक करें।
इसके बाद अपना राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक और गाँव का विवरण दर्ज करें।
इतना भरने के बाद Get Report पर क्लिक करें और पूरी लिस्ट पाएँ।
लिस्ट में नाम न होने पर इस नंबर पर करें शिकायत
कई लोगों के नाम पिछली लिस्ट में थे। लेकिन नई लिस्ट में नहीं है तो इसकी शिकायत आप पीएम किसान सम्मान के हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए आप हेल्पलाइन नंबर 011-24300606 पर कॉल कर शिकायत कर सकते हैं।
मंत्रालय से ऐसे करें संपर्क
पीएम किसान टोल फ्री नंबर: 18001155266
पीएम किसान हेल्पलाइन नंबर:155261
पीएम किसान लैंडलाइन नंबर्स: 011—23381092, 23382401
पहले पीएम किसान (PM Kisan) की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएँ।
यहाँ आपको राइट साइड पर ‘Farmers Corner’ का विकल्प मिलेगा।
यहाँ ‘Beneficiary Status’ के ऑप्शन पर क्लिक करें। नया पेज खुल जाएगा।
नए पेज पर आधार नंबर, बैंक खाता संख्या या मोबाइल नंबर में से किसी एक विकल्प को चुनिए। आपने जिस विकल्प का चुनाव किया है, उसका नंबर भरिए। इसके बाद ‘Get Data’ पर क्लिक करें।
यहाँ क्लिक करने के बाद आपको सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी मिल जाएगी। यानी कौन सी क़िस्त कब आपके खाते में आई और किस बैंक अकाउंट में क्रेडिट हुई।
भाजपा ने पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को ‘टेररिस्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ करार दिया है। इधर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को ‘गुंडा’ और राज्य में पार्टी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय को ‘बाहरी’ करार दिया। दिलीप घोष ने अभिषेक बनर्जी को ‘बच्चा’ बताया है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा के उपाध्यक्ष राजू बनर्जी ने TMC के लिए ‘टेररिस्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ वाला तमगा इस्तेमाल किया। बता दें कि अभिषेक बनर्जी सांसद भी हैं और पार्टी में उन्हें अगला नेतृत्व माना जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय सहित भाजपा के कई बड़े नेताओं को बाहरी बताया।
दिलीप घोष ने उनके आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “सभी ने पंचायत चुनाव में देखा है कि कौन गुंडा है। उन्होंने मुझे न केवल एक ठग बताया, बल्कि माफिया भी कहा है। माफिया कौन है, यह आप समझ सकते हैं। उनके काफिले में 25 कारें होती हैं और हर कोई जानता है कि उनके पास क्या-क्या है। वास्तविकता ये है कि उनकी हताशा उच्चतम स्तर पर चली गई है।”
Over time, meaning of TMC kept changing, it has now become Terrorist Manufacturing Company. This is also the perception that youth have. TMC workers too think so & hence they’re writing on walls of graveyards that TMC is coming in 2021: Raju Banerjee, West Bengal BJP vice-chief pic.twitter.com/AW1jyvfkPR
वहीं राजू बनर्जी ने अपने बयान में कहा, “समय के साथ, TMC का अर्थ बदलता रहा है। अब यह टेररिस्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (आतंकवादी विनिर्माण कंपनी) बन गई है। युवाओं के बीच भी भी यही धारणा है। तृणमूल कार्यकर्ता भी ऐसा सोचते हैं और इसलिए वे कब्रिस्तानों की दीवारों पर लिख रहे हैं कि TMC 2021 में आ रही है।” हाल ही में कैलाश विजायवर्गीय ने कहा था कि अब TMC की लगाम भाईपो (भतीजे) के साथ में चली गई है, कोई स्वाभिमानी व्यक्ति वहाँ कैसे टिक सकता है?
ममता बनर्जी की पार्टी फ़िलहाल बगावतों से जूझ रही है। जहाँ 6 जिलों और 35 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखने वाले अधिकारी परिवार के शुभेंदु ने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है, वहीं कूच विहार के विधायक मिहिर गोस्वामी भाजपा में चले गए हैं। जटू लाहिड़ी ने भी असंतोष जताया है। उन्होंने कहा है, “प्रशांत किशोर को पार्टी में किराए पर रखा गया है। उनकी नियुक्ति होने के बाद से सभी तरफ से नुकसान होना शुरू हो गया है।”
टीवी और वेब सीरीज की एक्ट्रेस ने बॉलीवुड के कास्टिंग डायरेक्टर आयुष तिवारी पर रेप का आरोप लगाया है। एक्ट्रेस की शिकायत पर मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज किया गया है। कास्टिंग डायरेक्टर के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया गया है और मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।
इस मामले में कास्टिंग डायरेक्टर का कोई रिएक्शन नहीं आया है और न ही किसी की गिरफ्तारी अभी तक हुई है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि आरोपित पिछले कुछ दिनों से उसे पोर्न वीडियो भेज परेशान कर रहा है।
पिछले दो साल से आरोपित को जानती थी एक्ट्रेस
वर्सोवा पुलिस ने मामले में जाँच शुरू करते हुए एक्ट्रेस का बयान दर्ज कर लिया है। पुलिस ने अगले सप्ताह आयुष को पूछताछ के लिए बुलाया है। एक्ट्रेस ने आरोप लगाया है कि आयुष तिवारी ने शादी का झाँसा देकर कई बार रेप किया है। एक्ट्रेस को एक वेब सीरीज के लिए आयुष तिवारी ने कास्ट किया था। जाँच में सामने आया है कि पीड़िता आरोपित को पिछले दो साल से जानती थी।
पोर्न वीडियो दिखाकर रेप का आरोप
वर्सोवा पुलिस के मुताबिक, आयुष तिवारी ने पीड़िता को शादी का लालच दिया और दो साल तक उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने आरोपित आयुष तिवारी पर पोर्न वीडियो दिखाकर रेप करने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है:
“आयुष अश्लील वीडियो दिखाकर मेरे साथ रेप करता था। कुछ समय पहले मैंने आयुष का साथ छोड़ दिया था। साथ छोड़ने के बावजूद वह मोबाइल फोन से अश्लील वीडियो भेज रहा है।”
एक्ट्रेस ने यह भी कहा है कि आरोपित पिटाई करता था। आरोपित का घर छोड़ने के बाद पीड़िता ने अपने भाई को इसकी जानकारी दी। उसने भी आयुष तिवारी को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। आखिरकार पीड़िता वर्सोवा पुलिस स्टेशन पहुँची और शिकायत दर्ज कराई।
वर्सोवा के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राघवेंद्र ठाकुर ने कहा, “हमने आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हम मामले की जाँच कर रहे हैं।”