अयोध्या को एक भव्य पर्यटन स्थल बनाने और श्रद्धालुओं के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएँ विकसित करने के क्रम में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने निर्माणाधीन अयोध्या एयरपोर्ट का नाम ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एयरपोर्ट’ रखने का निर्णय लिया है। मंगलवार (नवंबर 24, 2020) को उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके बाद भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में भी ख़ुशी का माहौल है।
प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आश्वासन दिया है कि प्रदेश सरकार श्रीराम लला की नगरी अयोध्या को विश्व के धार्मिक स्थलों में अग्रणी स्थान दिलाने के लिए संकल्पित है। याद हो कि इस एयरपोर्ट के निर्माण की घोषणा नवंबर 2018 में दीपोत्सव के मौके पर खुद मुख्यमंत्री ने की थी। ये यूपी के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में से एक होगा और यहाँ अंतरराष्ट्रीय के साथ-साथ घरेलू टर्मिनल्स की भी व्यवस्था होगी।
योगी आदित्यनाथ सरकार का मानना है कि एक बार राम मंदिर का निर्माण पूर्ण होने पर यहाँ देशी-विदेशी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटेगी, इसीलिए उसकी तैयारियाँ पहले से ही की जा रही हैं। अयोध्या के ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एयरपोर्ट’ के निर्माण के लिए योगी सरकार ने 525 करोड़ रुपए का फण्ड जारी किया है और 300 करोड़ रुपए पहले ही खर्च किए जा चुके हैं। दिसंबर 2021 तक इसका निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
. @UPGovt की कैबिनेट में #अयोध्या स्थित एयरपोर्ट का नाम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान #श्रीराम जी के नाम पर किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। आपकी प्रदेश सरकार #श्रीराम_लला की नगरी अयोध्या को विश्व के धार्मिक स्थलों में अग्रणी स्थान दिलाने के लिए संकल्पित है। pic.twitter.com/7NbXLvurpN
केंद्र सरकार भी अयोध्या, सोनभद्र और चित्रकूट में एयरपोर्ट्स की सुविधा बढ़ाने को लेकर सजग है और इस दिशा में काम किया जा रहा है। अप्रैल 2017 तक अयोध्या एयरपोर्ट का विकास दो चरणों में करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए हुए टेक्नो-इक्नोमिक सर्वे में पहले चरण में एटीआर-72 विमानों के लिए विकसित किया जाना था। इसमें रन-वे की लंबाई 1680 मीटर रखी जानी थी। दूसरे चरण में ए-321, 200 सीटर विमानों के संचालन के लिए एयरपोर्ट विकसित होना था।
उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कहा था, “योगी सरकार ने अयोध्या स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने के लिए 525 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें 300 करोड़ रुपए अब तक खर्च किया जा चुका है। जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है, इस बारे में जल्दी ही एक समीक्षा बैठक भी अधिकारियों की बुलाई जाएगी।” रन-वे की लंबाई 3,750 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी।
अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बायडेन के प्रशासन में भारतीय चेहरों का दबदबा होगा। जहाँ एक तरफ कमला हैरिस अफ़्रीकी-भारतीय मूल की पहली महिला हैं, जो वहाँ उपराष्ट्रपति के पद तक पहुँची हैं, तो दूसरी तरफ जो बायडेन ने यूएस की नई ‘फर्स्ट लेडी’ और अपनी पत्नी जिल के पॉलिसी डायरेक्टर (नीति निदेशक) के रूप में माला अडिगा को नियुक्त किया है। भारतीय मूल की माला अडिगा जो बायडेन के 2020 चुनावी अभियान की सीनियर पॉलिसी अडवाइजर रही हैं।
साथ ही वो जिल की वरिष्ठ सलाहकार का दायित्व भी संभालती रही हैं। इससे पहले वो बायडेन फाउंडेशन में बतौर ‘डायरेक्टर फॉर हायर एजुकेशन एंड मिलिट्री फैमिलीज’ कार्यरत रही हैं। बराक ओबामा के कार्यकाल में वो शिक्षा और संस्कृति मामले के ब्यूरो में अकादमिक कार्यक्रमों की ‘डिप्टी असिस्टैंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट’ के रूप में काम कर चुकी हैं। इसके साथ ही वो स्टेट डिपार्टमेंट के ‘ऑफिस ऑफ ग्लोबल वीमेंस इश्यूज’ में चीफ ऑफ स्टाफ रही हैं।
इसके साथ ही वो एम्बेसडर-एट-लार्ज की वरिष्ठ सलाहकार भी थीं। अनुभवी माला अडिगा ने जिस तरह से लम्बे समय से नव-निर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति, उनकी पत्नी और नई उप-राष्ट्रपति के साथ काम किया है, उसका फायदा उन्हें अगले 4 सालों तक ज़रूर मिलेगा। उनके पास ‘नेशनल सिक्योरिटी स्टाफ्स (NSS) मल्टीलेटरल एंड ह्यूमन राइट्स डायरेक्टरेट’ के मानवाधिकार निदेशक के रूप में काम करने का भी अनुभव है।
NSS में सेवा देने से पहले वो न्याय विभाग में अटॉर्नी थीं। वहाँ वो एसोसिएट अटॉर्नी जनरल की सलाहकार थीं। US डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट पर उपलब्ध उनकी जीवनी के अनुसार, सरकारी सेवा में आने से पहले माला अडिगा बराक ओबामा के चुनाव प्रचार अभियान में वालंटियर रहीं और 2 सालों तक उनके लिए काम किया था। उन्होंने ‘यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो लॉ स्कूल’, ‘यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा’ और ‘ग्रीनल कॉलेज’ से शिक्षा प्राप्त की है।
उनके पास स्पेनिश की भी डिग्री है। कर्नाटक के उडुपी जिले के कुन्दापुर तालुका में स्थित कक्कूंजे गाँव में माला अडिगा की व्हाइट हाउस में नियुक्ति के बाद ख़ुशी का माहौल है। वो के सूर्यनारायण अडिगा के परिवार से सम्बन्ध रखती हैं, जो ‘कर्नाटक बैंक लिमिटेड’ के संस्थापक हैं। ‘द व्हाइट टाइगर’ के लेखक अरविन्द अडिगा, जिन्हें 2008 में मैन बुकर पुरस्कार मिला, इसी परिवार का हिस्सा हैं। निर्मला उपाध्याय उनकी बुआ हैं।
निर्मला ने मीडिया को बताया कि माला एक प्यारी और आकर्षक ‘बच्ची’ हैं। जिल बायडेन अमेरिका की सेकंड लेडी रह चुकी हैं और पेशे से शिक्षक हैं। उनकी प्राथमिकता में शिक्षा और सैन्य मामले होंगे। 69 वर्षीय प्रोफेसर पहले ही कह चुकी हैं कि उनके पति के चुनाव जीतने के बाद वो फिर से कम्युनिटी कॉलेजों में पढ़ाना शुरू कर देंगी। अपने पति के 8 साल तक उपराष्ट्रपति रहने के दौरान वो वर्जीनिया कम्युनिटी कॉलेज में पढ़ाने जाती थीं।
47 वर्षीय माला अडिगा का जन्म भले ही अमेरिका में हुआ, लेकिन वो अपनी जड़ों को भूली नहीं हैं। वो कुन्दापुर में अपने एक सम्बन्धी के शादी समारोह में अपने पति चार्ल्स बीरो के साथ आई थीं। उनके पिता डॉक्टर रमेश 24 साल की उम्र में ही 1960 में अमेरिका में बस गए थे। उनकी माँ भी डॉक्टर थीं। उनकी 15 साल की बेटी का नाम आशा है। अपने गाँव के ‘चैतन्य स्पेशल स्कूल’ का जिम्मा भी उन्होंने ही संभाल रखा है।
माला की कजन सुजाता नकथया ने बताया कि माया एक मेहनती महिला हैं और हमेशा नई ऊँचाइयों को पाने के लिए बेताब रहती हैं। सुजाता स्कूल की सेक्रेटरी हैं। वो काफी नीचे से ऊपर आई हैं, क्योंकि पहले वो एक फ़ेडरल कम्पनी में बतौर क्लर्क कार्यरत थीं। ऐसे में अब भारतीय समुदाय को उम्मीद है कि जिल बायडेन की नीति निदेशक के रूप में माला अडिगा की नियुक्ति से भारत का पक्ष ठीक से रखा जाएगा। साथ ही दक्षिण भारत की दो महिलाओं का अमेरिकी प्रशासन में बड़े पदों पर होने से वहाँ ख़ुशी का माहौल है।
इसी तरह ‘भारत के मित्र’ एंटोनी ब्लिंकन को ‘सेक्रेटरी ऑफ स्टेट’ बनाया गया है। अर्थात, वो संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के नए विदेश मंत्री होंगे। ये भारत के लिए अच्छी, तो पाकिस्तान और चीन के लिए बुरी खबर है। वो पहले से ही जो बायडेन की विदेशी नीतियों को बनाने वाली टीम के मुखिया रहे हैं। वो जो बायडेन के उपराष्ट्रपति के कार्यकाल में उनके NSA भी रह चुके हैं। वो ‘स्टेट फॉरेन रिलेशन कमिटी’ के स्टाफ डायरेक्टर भी रहे हैं। फिर वो डिप्टी सेक्रेटरी बन गए।
हैदराबाद में नगर निगम चुनावों के मद्देनजर राजनीति तेज हो रखी है। इस बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जनता के बीच विवादित बयान देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने प्रचार के दौरान जनता से कहा कि भाजपा नेता फ्रस्ट्रेट हो रखे हैं और उन्हें अल्हम्दुलिल्लाह होटल में जाकर बिरयानी खानी चाहिए। बता दें कि, यह होटल बीफ से जुड़ी डिश बनाने के लिए फेमस है।
अब ओवैसी की इसी टिप्पणी की प्रतिक्रिया में गोशामहल से भाजपा विधायक राजा सिंह का जवाब आया है। उन्होंने ओवैसी को पोर्क बिरयानी खाने के लिए आमंत्रित किया है। एक वीडियो में वह कहते सुने जा सकते हैं, “AIMIM का सांसद असदुद्दीन ओवैसी पुराने शहर में पार्टी प्रचार में लगा हुआ है और चुनाव के दरमियाँ वो ये कहता है कि भाजपा वाले फ्रस्ट्रेशन में आ गए हैं और वह उनको बिरयानी खाने की सलाह दे रहा है।”
राजा सिंह आगे कहते हैं,
“ओवैसी ने जिस होटल का जिक्र बिरयानी खिलाने के लिए किया है। वहाँ पर बीफ की बिरयानी बनती है और वो बीजेपी वालों को कह रहा है बीफ की बिरयानी खाओ। तो मैं असदुद्दीन ओवैसी को कहना चाहता हूँ कि फ्रस्ट्रेशन में कौन है, ये तुम्हारे बयान से पता चल जाता है। बीजेपी की कभी किसी की भावनाओं को आहत करने की आदत नहीं है। लेकिन तुम्हारी ये आदत है कि चुनाव के समय पब्लिक को भड़काना है और बहुत ही गलत शब्दों का प्रयोग करना है।”
अपनी वीडियो में उन्होंने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा, “हमारे पास भी वाल्मिकी समाज के भाई-बंधु हैं, जिनके पास होटल हैं और जो बहुत सुंदर बिरयानी बनाते हैं। एक बार उनकी बिरयानी भी खाकर देख लो, वो कितनी टेस्टी बिरयानी बनाते हैं।”
आगे राजा सिंह ने ओवैसी की पार्टी के टीआरएस के साथ गठबंधन को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि समुदाय के पुराने शहर के लोग उन्हें वोट नहीं देंगे। वह बोले कि AIMIM ने कभी समुदाय की भलाई नहीं चाही। उन्होंने जनता से AIMIM का बहिष्कार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस पार्टी का ऐसे बहिष्कार हो कि इनका एक पार्षद भी न जीतने पाए।
यहाँ बता दें कि राजा सिंह ने उक्त बातें न्यूजमीटर के ट्वीट पर शेयर हुई वीडियो में कहा है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उन्होंने ओवैसी के बीफ बिरयानी के कमेंट को लेकर कहा,
“मैं आपको आज बिरयानी का निमंत्रण दे रहा हूँ। मेरे इलाके में कई वाल्मिकी समुदाय के लोग हैं, जो पोर्क के साथ बिरयानी अच्छी बनाते हैं। अगर आपको बिरयानी इतनी पसंद है तो आइए हम आपको स्वादिष्ट बिरयानी ऑफर करते हैं।”
अमित शाह को बीफ खिलाने की बात कर चुके हैं ओवैसी
ओवैसी ने भाजपा नेताओं को बीफ खिलाने की बात पहली बार नहीं की है। वह लगातार भाजपा पर निशाना साधने के बहाने अक्सर हिंंदुओं की भावना आहत करते आए हैं। उन्होंने साल 2018 में अमित शाह को बीफ बिरयानी भिजवाने को कहा था। उन्होंने अमित शाह के लिए कहा था,
“हमें नहीं पता था कि आपको बिरयानी इतनी पसंद हैं। मैं अभी केसीआर को फोन करूँगा कि वह आपको (शाह को) कम से कम कल्याणी (बीफ) बिरयानी भिजवाएँ।”
पीएम मोदी पर कस चुके हैं बीफ खाने का तंज
इसके बाद ओवैसी ने साल 2019 में भी बीफ को लेकर जहर उगला था। ओवैसी ने पुलवामा हमले को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था, “वाह, क्या दिमाग है आपके पास, आप दिल्ली से बैठ कर देख सकते हैं कि बालाकोट में 300 फोन थे, लेकिन पुलवामा में 50 किलो आरडीएक्स चला गया, आपने उसे क्यों नहीं देखा?” उन्होंने आगे कहा, “आपने बिरयानी खा ली थी क्या? हो सकता है कि बीफ बिरयानी खाकर डकार लेकर सो गए होंगे?”
ओडिशा के नयागढ़ जिले के एक पति-पत्नी ने भुवनेश्वर में विधानसभा के सामने ही आत्मदाह का प्रयास किया। कपल का आरोप था कि उनकी 5 साल की बच्ची के अपहरण और हत्या के मामले में उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है। मंगलवार (नवंबर 24, 2020) का ये मामला विधानसभा के भीतर भी गूँजा, जब कॉन्ग्रेस और भाजपा ने नवीन पटनायक की सरकार को घेरा। बताया गया है कि आरोपित BJD नेता का करीबी है।
ये घटना दोपहर के समय तब हुई, जब विधानसभा के भीतर ओडिशा की कानून-व्यवस्था को लेकर बहस चल रही थी। मृत बच्ची के पिता ने बताया कि मुख्य आरोपित नयागढ़ के BJD नेता और ओडिशा सरकार में मंत्री अरुण साहू का करीबी है। कपल की पहचान अशोक साहू और सौदामिनी के रूप में हुई है, जो जदुपुर गाँव के निवासी हैं। विधानसभा के बाहर तैनात सुरक्षा बल के जवान उन्हें बचाने में कामयाब रहे।
उन दोनों ने अपने शरीर पर केरोसिल तेल उड़ेल लिया था, लेकिन सुरक्षा बलों ने माचिस जलाने से पहले ही उन्हें रोक दिया। अशोक ने बताया कि ये जुलाई 10, 2020 की घटना है, जब उनकी 10 साल की बच्ची अपने घर में खेल रही थी। 2 सप्ताह बाद उसकी लाश घर के पीछे से मिली। उसकी आँखें फोड़ दी गई थीं और दोनों किडनियाँ गायब थीं। उन्होंने बताया कि नयागढ़ पुलिस थाने में FIR दर्ज करने के बावजूद पुलिस ने राजनीतिक दबाव में आकर कोई कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपित के खिलाफ डीएम और एसपी के शिकायत सेल में भी गुहार लगाई गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपित लगातार उन पर केस वापस लेने का दबाव बना रहा है और इसी क्रम में अगस्त 26 को उन पर हमला भी किया गया। उन्होंने बताया कि भले ही पुलिस ने 10 अभियुक्तों को इस मामले में गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपित को ही छोड़ दिया गया।
विधानसभा में कॉन्ग्रेस नेता नरसिंहा मिश्रा ने इस मामले में सरकार से बयान की माँग की। उन्होंने इसे सुरक्षा व्यवस्था में सेंध का मामला बताते हुए पूछा कि आखिर एक कपल केरोसिन तेल लेकर विधानसभा के भीतर कैसे दाखिल हो गया? उन्होंने पूछा कि क्या ये ख़ुफ़िया विभाग और पुलिस की विफलता का नतीजा नहीं है? उन्होंने पूछा कि कल को अगर कोई बम लेकर विधानसभा में घुस आए तो फिर क्या होगा?
कॉन्ग्रेस नेता एसएस सालूजा ने बच्ची के अपहरण और हत्या के आरोपित को बचाने का आरोप कैबिनेट मंत्री पर लगने को गंभीर मामला बताया। कॉन्ग्रेस नेता ताराप्रसाद बहिणीपति ने नवीन पटनायक से कहा कि वो न सिर्फ मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करें, बल्कि इस सवाल का भी जवाब दें कि 3 महीने तक पुलिस ने मुख्य आरोपित को क्यों छुआ तक नहीं? भाजपा नेता पीके नाइक ने याद दिलाया कि नवीन पटनायक राज्य के गृह मंत्री भी हैं, ऐसे में उन्हें जवाब देना पड़ेगा।
A couple tried to kill themselves at the Odisha Assembly today, insisting that a very prominent BJD leader is sheltering the rapist & murderer of their 5 year old daughter. Wonder if liberals & national media will descend on Bhubaneswar with the same outrage as with some states?
स्पीकर ऐसे पात्रो ने गृह राज्यमंत्री डीएस मिश्रा को बुधवार को इस मामले पर बयान देने को कहा है। ओडिशा में भाजपा के वरिष्ठ नेता विजयंत जय पांडा ने लिबरल गिरोह और राष्ट्रीय मीडिया से पूछा कि क्या वो उसी तरह से आवाज़ उठाएँगे, जैसे कुछ राज्यों में वो हंगामा करते हैं? वहीं नयागढ़ पुलिस ने राजनीतिक दवाब की बात अस्वीकारते हुए कहा कि कुछ क्लू मिले हैं, जिन पर काम किया जा रहा है। BJD का अब तक कोई बयान नहीं आया है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में हाथरस के एक मामले को लेकर खूब हंगामा मचाया गया था। राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी तक वहाँ पहुँचे और पूरी मीडिया का जमावड़ा लगा। फ़िलहाल सीबीआई की टीम ने मृतका के परिवार के सदस्यों से सच्चाई जानने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट कराने को कहा है। जाँच एजेंसी को पता चला है कि मुख्य आरोपित संदीप पीड़िता के भाई द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन के माध्यम से लगातार संपर्क में था।
ग्रूमिंग जिहाद या लव जिहाद सामाजिक अपराधों की श्रेणी में अपने लिए बहुत पहले से ही जगह बना चुका था। यह और बात है कि समाज इसे समझने और इसे स्वीकार करने में आज भी झिझक रहा है।
ख़ास बात यह है कि ग्रूमिंग जिहाद जैसे अपराध को चिन्हित करने वाले लोगों को ही छद्म सेक्युलर लोगों की ओर से अपराधी की नजर से देखा जाने लगा। जबकि यदि इस अपराध की गहरे में नजर दौड़ाएँ तो पता चलता है कि यह सिर्फ मजहबी उद्देश्य को पोषित नहीं करता बल्कि, एक अपराधी मानसिकता को भी सींचने का काम कर रहा था।
यानी, ग्रूमिंग जिहाद सिर्फ हिन्दू महिलाओं (और कुछ मामलों में पुरुषों का भी) का धर्मांतरण कर उनसे वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित करने तक ही सीमित ना होकर, बलात्कार, जबरन धर्मांतरण, दहेज़, और महिला उत्पीड़न की भी पहली सीढ़ी बना रहा।
एक नजर ऐसे ही कुछ मामलों पर, जो हाल ही के कुछ महीनों में सामने आए
अगस्त 04, 2020: मेरठ में सुहेल ने एक दलित युवती को पहले झूठी पहचान बताकर प्रेमजाल में फँसाया और जब पोल खुली तो लड़की के घर से उसे जबरन उठाकर उससे निकाह करने की कोशिश की।
अगस्त 04, 2020: आउटर दिल्ली के किराड़ी इलाक़े में अनवर ने खुद के मजहब की पहचान छिपा कर छद्म हिन्दू नाम अनु रखा और युवती को अपने प्रेम के जाल में फँसा कर महीनों बलात्कार करता रहा। उसने पीड़िता के साथ शादी भी रचा ली लेकिन उसे अपने घर से लाने से साफ़ इनकार कर दिया। आरोपित ने पीड़िता से लाखों रुपए भी ऐंठ लिए। अनवर पर बलात्कार, धोखाधड़ी, धमकी और अमान्य तरीके से शादी का मामला दर्ज किया गया है।
अगस्त 16, 2020: महिला ने बताया कि उसके पति का असली नाम शौकत अली है, जो पिछले 6 महीने से आर्थिक और शारीरिक रूप से उसका शोषण कर रहा था। साथ ही वो उसकी जम कर पिटाई भी करता था। महिला ने बताया कि शौकत अली ने छद्म हिन्दू नाम के साथ उसे अपने प्रेम जाल में फँसाया और फिर उससे शादी कर ली। जब वो उसके घर पहुँची और अपने ससुराल वालों से मिली, तब उसे उसके मजहब का भान हुआ। इसके कुछ दिनों बाद शौकत अली और उसके परिवार वालों ने कुल्हाड़ी से उस पर हमला किया और पीट-पीट कर घर से बाहर निकाल दिया।
अगस्त 21, 2020: शालिनी यादव ने एक वीडियो जारी कर बताया कि उसका नाम अब फिजा फातिमा हो चुका है। और उसने फैसल नाम के एक शख्स से शादी कर ली है। शालिनी के भाई ने बताया कि वह घर से 10 लाख रुपए लेकर निकली थी। फैसल ने उसे बहला-फुसलाकर प्रेमजाल में फँसाया है।
अगस्त 22, 2020: हरियाणा के पानीपत में 25 साल की विधवा को गोल्डी बनकर निजामुद्दीन ने कई बार उसे जान से मारने के लिए उसका गला भी दबाया। पैसों के लिए अपने दोस्तों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव भी बनाने लगा था। गर्भवती होने के बावजूद परिवार वाले उस पर लगातार अत्याचार करते रहते थे। महिला ने बताया कि वह पाँच माह की गर्भवती है। और ऐसी हालत में परिजनों ने उसे घर से निकाल दिया गया।
अगस्त 26, 2020: पीड़िता लंदन हायर स्टडीज के लिए गई थी। उसी दौरान बांग्लादेशी नागरिक नफीस ने उसे लुभाना शुरू कर दिया और नफीस पीड़िता का अपहरण कर बांग्लादेश ले गया। जहाँ महिला से जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया। उसे घर में बंद कर के रखा जाता था, ताकि वो किसी को भी अपने साथ हुए अत्याचार के सम्बन्ध में कुछ भी बताने की स्थिति में न रहे। लेकिन, महिला किसी तरह फोन कॉल करने में सक्षम रही और अपने माता-पिता को बताया कि बांग्लादेश में उसका यौन शोषण किया जा रहा है और उसे लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।
अगस्त 28, 2020: कानपुर निवासी आसिफ शाह ने युवती को अपने प्रेम जाल में फँसाया और ब्रेनवाश कर जबरन उसको इस्लाम धर्म कबूलने पर मजबूर किया। परिजनों को उनकी बेटी चार दिन बाद खराब और मानसिक रूप से अस्थिर हालत में मिली है। पिता ने बताया उसका शारीरिक शोषण भी हुआ है।
अगस्त 28, 2020: कानपुर के बजरिया थाना क्षेत्र में लकी खान नाम के एक युवक ने अपना हिंदू नाम बता कर नाबालिक लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और उसकी अश्लील तस्वीरें ले कर इस्लाम धर्म कबूलने और निक़ाह करने के लिए युवती को ब्लैकमेल करने लगा।
सितम्बर 01, 2020: मध्य प्रदेश के वसीम ने अपनी पत्नी अर्पिता जैन को फेसबुक पर फोटो शेयर करने के कारण मिट्टी का तेल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया। फेसबुक पर फोटो शेयर करने के कारण वसीम को अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह होने लगा था। जिसके बाद उसने यह कदम उठाया।
सितंबर 07, 2020: उन्नाव में हसीब ने पहले नाबालिग को प्रेमजाल में फँसाया फिर ब्रेनवॉश कर बहला-फुसलाकर उसे अगवा कर लिया और लड़की के घर वालों को जान से मारने की धमकी भी दी।
सितंबर 07, 2020: कानपुर की 18 वर्षीय मुस्कान को 35 साल के आसिफ ने प्रेम जाल में फँसाया और ब्रेनवॉश कर जबरन उसको इस्लाम कबूलने पर मजबूर किया। मुस्कान को धोखा देने के लिए आसिफ अपनी बीवी को आपा यानी बड़ी बहन कहता था। वहीं, बीवी उसे भाईजान कहकर बुलाती थी। इतना ही नहीं आसिफ ने अपने बच्चों को भी सिखाया था कि वे उसे मामू कहें।
सितम्बर 08, 2020: कानपुर में 14 साल की हिंदू लड़की को फ़तेह खान ने हिंदू होने का नाटक करते हुए गुमराह किया। वह पिछले 3 सालों से हिन्दू होने का दिखावा कर रहा था। फतेह खान, उर्फ आर्यन मल्होत्रा ने खुद को हिंदू साबित करने के लिए वह सब किया, जो वह कर सकता था। जैसे – उसने अपने हाथ पर कलावा (हिंदू पवित्र धागा) बाँधा, तिलक लगाया और अक्सर मंदिर जाया करता था। परिवार की शिकायत के अनुसार, आरोपित फतेह खान नाबालिग लड़की का यौन शोषण भी कर रहा है।
सितम्बर 12, 2020: रमन बने अफजल ने नेहा को बहन बनाकर घर से भगाया। घर से ₹25000 कैश, 3 लाख के गहने, एटीएम कार्ड गायब।
सितम्बर 12, 2020: मोहम्मद आफताब के मारपीट और दबाव से तंग पूजा पटेल ने लगाई फाँसी। नमाज और इस्लाम के अनुसार रहने को किया जाता था मजबूर।
सितम्बर 12, 2020: आगरा के सिकंदरा और मलपुरा क्षेत्र में इकरार और बादल खान नाम के युवकों ने अपना हिंदू नाम रखकर नाबालिग हिंदू लड़कियों को फँसाया और इस्लाम धर्म कबूल करवाकर उनसे निक़ाह कर लिया।
सितम्बर 13, 2020: कानपुर में शीबू अली ने सचिन बनकर एक लड़की को पहले प्रेमजाल में फॅंसाया। गौमांस खिलाकर इस्लाम कबूलने को किया मजबूर।
सितम्बर 16, 2020: चार बच्चों के अब्बू और चार बीबियों के शौहर अब्दुल्ला ने अमन चौधरी बनकर 17 साल की किशोरी को प्रेम जाल में फँसा लिया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया।
सितम्बर 17, 2020: कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA बदरुद्दीन के बेटे ने 10वीं की हिंदू लड़की से रेप किया, फँसा कर निकाह किया। यही नहीं लड़की का गर्भपात कर फिर उसे छोड़ दिया।
सितम्बर 17, 2020: कमर अली ने पत्रकार अमित वाजपयी बनकर 2 साल तक युवती का रेप किया।
सितम्बर 19, 2020: कानपुर में मुख्तार से राहुल विश्वकर्मा बन हिंदू लड़की को फँसाया, पहले भी एक और हिंदू लड़की को बना चुका है बेगम।
सितम्बर 20, 2020: झारखंड के गुमला में इरशाद अंसारी ने 15 साल की दलित लड़की को निकाह के लिए अगवा किया और उसके परिवार को जान से मरने की धमकियाँ दी।
सितम्बर 20, 2020: हरदोई के तीन युवक- शकील, इमरान, नूर ने हिंदू बनकर बिलासपुर की तीनों बहनों से दोस्ती की। फिर शादी और रोजगार का झाँसा देकर उन्हें लखनऊ बुलाया जहाँ 9 युवकों ने उनका बलात्कार करने की कोशिश की।
सितम्बर 25, 2020: एजाज़ ने प्रिया को एक लॉज में बंद करके रखा था, वह प्रिया पर लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था। जब वह अपने इरादों में कामयाब नहीं हुआ तो उसने चोपन में दोस्त शोएब को बुलाया और उसके साथ मिल कर प्रिया का गला रेत दिया
अक्टूबर 02, 2020: उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले की हिंदू लड़की नेहा की 25 सितंबर को उसके पति राजकुमार उर्फ़ आसिफ ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। उसने अपने मजहब की पहचान खुलने पर ऐसा किया।
अक्टूबर 07, 2020: यह लव जिहाद का अपने किस्म का अलग मामला था। एक हिन्दू युवक निकाह के लिए सुमित से सैफ खान बन गया। युवती ने पहले अपने प्रेमी युवक का नाम सुमित से सैफ खान में बदला। फिर निक़ाह कर लिया। यही नहीं, युवती के घरवालों की शिकायत पर उल्टा युवक के पिता को ही अरेस्ट कर लिया गया। सुमित की माँ का आरोप है कि लड़की ने उनके बेटे का इस कदर ब्रेनवाश कर दिया था कि वह चोरी छुपे नमाज पढ़ने और रोजा रखने लगा था।
अक्टूबर 13, 2020: अंजना से आइसा बनी महिला ने रेप के बाद धर्म परिवर्तन कर आसिफ नाम के युवक से शादी कर ली। शादी के बाद आसिफ सऊदी अरब चला गया। महिला ने आसिफ के परिजनों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। महिला ने तंग आकर आत्मदाह का भी प्रयास किया जिसमें उसकी मौत भी हो गई।
अक्टूबर 14, 2020: बिहार के मुंगेर निवासी मुस्लिम युवक ने शादी के चार साल बाद हिंदू लड़की पर इस्लाम धर्म कबूलने का दबाव बनाया, इतना ही नहीं युवक ने हिंदू युवती की माँ पर भी इस्लाम कबूलने की जबरदस्ती की।
अक्टूबर 16, 2020: मोहम्मद उवैश ने बाबू बन कर पहले लड़की को अपने प्रेमजाल में फँसाया फिर अपनी बहन के साथ मिल कर उसपर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया।
अक्टूबर 21, 2020: बिलाल ने हिन्दू बनकर युवती को अगवा किया। घरवालों ने लव जिहाद का आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी बेटी अपने साथ 8 लाख रूपए भी ले गई।
अक्टूबर 23, 2020: दिलदार ने सबसे पहले एक लड़की के साथ भाग कर शादी की, 2 बच्चे भी हुए थे। इसके बाद सोनी से शादी की। जब सोनी गर्भवती हुई तो छोड़ कर भाग गया। इलाज के अभाव में गर्भवती सोनी और बच्चे, दोनों की मौत हो गई। दिलदार ने राहुल बनकर अपने मोहल्ले में यह बताया था कि वह अपनी दिव्यांग बहन सोनी के साथ रहता था, जिसके दोनों पैर काम नहीं करते थे। अब 8वीं में पढ़ रही 13 साल की लड़की के साथ फरार होने के बाद पता चला कि जिसे वह अपनी बहन बताता था, वह असल में उसकी पत्नी थी।
अक्टूबर 23, 2020: राहुल बन नाबालिग लड़की से की दोस्ती, रेप के बाद बताया – ‘मैं साजिद हूँ, शादी करनी है तो धर्म बदलो’
अक्टूबर 27, 2020: निकिता तोमर हत्याकांड- यह वो मामला था जिसने देशभर में चल रहे ग्रूमिंग जिहाद के मजहबी अजेंडे को सबके सामने रखा और लोगों ने मुखर होकर लव जिहाद की क्रूरता का बहिष्कार का फैसला किया। निकिता को दिन दहाड़े सड़क पर गोली मार दी गई। तौसीफ ही नहीं, उसकी माँ भी निकिता पर दबाव बना रही थी कि वह धर्म परिवर्तन कर तौसीफ से निकाह कर ले। जब निकिता ने मना किया तो उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
अक्टूबर 29, 2020: मध्यप्रदेश के भोपाल में लड़की की माँ ने दूसरे समुदाय के युवक पर अपहरण का आरोप लगाया। साथ ही पुलिस को लेकर कहा है कि वह शिकायत दर्ज करवाने जब थाने गईं तो उन्हें कह दिया गया कि लड़की खुद लड़के के साथ गई है।
अक्टूबर 31, 2020: मेवात में दलित नर्स का अपहरण। इकबाल बनाता था शादी और धर्म परिवर्तन का दबाव
नवंबर 02, 2020: पीड़िता की मॉं ने कहा कि उनकी 16 साल की लड़की 11 अक्टूबर से गायब है। उसे एक समुदाय विशेष का जेसीबी ड्राइवर अपने साथ ले गया था।
नवम्बर 03, 2020: साबिर शादीशुदा है और पहले भी लड़कियों को फँसाने का काम इसी तरह कर चुका है। वह इस बार भी लड़की को अपने साथ बुर्का पहनाकर दुबई ले जा रहा था लेकिन पकड़ा गया। बजरंग दल ने इसे ग्रूमिंग जिहाद का ही मामला बताया।
नवम्बर 06, 2020: ताहिर खान ने गंभीर अवस्था मे नाबालिग हिंदू युवती को तरन्नुम नाम से चूनाभट्टी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान युवकी की संदिग्ध हालात में मृत्यु हो गई। भोपाल के कोलार इलाके के गेहूँखेड़ा में रहने वाला ताहिर खान नाम का युवक डेढ़ साल पहले नाबालिक युवती को बहला फुसलाकर झाँसी से भगाकर भोपाल ले आया था और उसके बाद उसकी कोई खोज खबर नहीं थी। युवती की मौत के बाद परिजनों को भारती के बारे में पुलिस से पता चला।
नवम्बर 13, 2020: यहाँ भी लव जिहाद की अनोखी घटना देखने को मिली। नाजरीन ने फेसबुक पर मोहित से सोनिया बनकर दोस्ती लगाई। बाद में मोहित और उसकी माँ को होटल के कमरे में बंद कर दिया गया। वहाँ मोहित का धर्म परिवर्तन कर निकाह कराया। मोहित ने आरोप लगाया कि एक अस्पताल में उसका जबरन खतना भी करा दिया गया।
नवंबर 13, 2020: कर्नाटक में खुद की पहचान छिपाकर अब्दुल ने हिन्दू युवती से दोस्ती की और फिर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया में डाल दी। अब्दुल के व्यवहार और तौर-तरीके पर संदेह होने के बाद युवती के माता-पिता ने उसके अतीत के बारे में जानने का प्रयास किया। वह हैरान रह गए जब उन्हें मालूम चला कि अब्दुल अपनी पहचान छुपा कर और हिन्दू होने का दावा करके उनकी बेटी को धोखा दे रहा है।
नवंबर 17, 2020 : गोरखपुर के गीडा इलाके की एक महिला ने अपने ही गाँव के एक व्यक्ति पर जबरन धर्मपरिवर्तन और यौन शोषण का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि आरोपित शख्स उसकी अश्लील वीडियो बना कर उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बना रहा है और ऐसा नहीं करने पर वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने की धमकी भी दे रहा है।
नवंबर 19, 2020: अक्षय बनकर 2 बच्चों का बाप डॉ. अकरम नर्स का बलात्कार करता रहा और उसने महिला की अश्लील वीडियो भी बनाई। जब वह गर्भवती हुई तो उसने महिला पर धर्मांतरण का बनाया दबाव
नवम्बर 24, 2020: रहीम ने अर्जुन बनकर हिंदू विधवा से बनाए 5 दिन शारीरिक संबंध। रहीम ने बाद में विधवा से निकाह करने के लिए उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव भी बनाया।
अगस्त 2020 से लेकर अब तक, पिछले 112 दिनों में ये वो ऐसे 43 मामले हैं, जो हम सबके सामने किसी न किसी तरह से आ सके। इसके अलावा कई ऐसी घटनाएँ रोज घटित होती हैं, जो मीडिया की नजरों तक नहीं आ पाती या फिर दूसरे मजहब की कट्टरता की शिकार महिलाएँ समाज के बीच रखने में नाकाम रहती हैं। लेकिन हर दिन कम से कम 2 घटनाएँ भी अगर हमारे सामने आती हैं तो क्या यह ग्रूमिंग जिहाद की वास्तविकता को साबित करने के लिए नाकाफी कही जा सकती हैं?
इससे भी ज्यादा चिंता का विषय यह है कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले महिला और पुरुष भी सिर्फ आभासी धर्म निरपेक्षता के आडम्बर के चलते इन अपराधों को स्वीकार करने से बचते हैं।
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल का आज (नवंबर 25, 2020) 71 साल की उम्र में निधन हो गया। वह एक महीना पहले कोरोना संक्रमित हुए थे। उनका इलाज मेदांता में चल रहा थ। उनके बेटे फैजल पटेल ने ट्वीट करके यह जानकारी दी।
फैजल ने लिखा कि वह बड़े दुख से यह बता रहे हैं कि उनके पिता अहमद पटेल का आज सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर निधन हो गया है। उन्होंने बताया कि लगभग एक महीना पहले उनके पिता कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इलाज के दौरान उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और वे मल्टी ऑर्गन फेलियर के शिकार हो गए। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्होंने आखिरी साँस ली।
अहमद पटेल के बेटे ने लोगों से अपील की है कि सभी लोग कोरोना से जुड़े प्रोटोकॉल का पालन करें और भीड़ भाड़ वाले इलाकों में जानें से बचें।
यहाँ बता दें कि अहमद पटेल सोनिया गाँधी के सबसे करीबी सलाहकारों में शामिल थे। उनकी गिनती पार्टी के दिग्गज नेताओं में होती थी। वह राज्यसभा सांसद और पार्टी के कोषाध्यक्ष भी थे।
पटेल ने 1 अक्टूबर को एक ट्वीट कर खुद के कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी दी थी। उन्होंने लिखा था “मैं कोरोना पॉजिटिव हुआ हूँ, मैं निवेदन करता हूँ कि जो मेरे नजदीकी संपर्क में आएँ है वे खुद को आइसोलेट कर लें।”
जिस बेटे ने दी सूचना, वो भी मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपित
अहमद पटेल के बेटे फ़ैसल पटेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्टर्लिंग बायोटेक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलब किया था। ED संदेसरा बंधुओं के साथ फ़ैसल पटेल के संबंधों की भी जाँच कर रही है।
फार्मास्युटिकल कंपनी के मालिक संदेसरा बंधु 5,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में आरोपित हैं। संदेसरा समूह के एक कर्मचारी सुनील यादव ने बताया था कि चेतन संदेसरा (संदेसरा समूह के निदेशक) अहमद पटेल के बेटे (फ़ैसल) को पैसे देता था।
अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में अहमद पटेल को 700 करोड़ रुपए!
3600 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे घोटाले में आरोपित राजीव सक्सेना ने पूछताछ में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल और सलमान खुर्शीद तथा कमलनाथ के पुत्र बकुल नाथ के नाम लिए हैं।
अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हैलीकॉप्टर घोटाला मामले में सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के कथित तौर पर नाम सामने आने के बाद भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया गया कि सौदा होने पर पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी और वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को 700 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी।
₹14000+ करोड़ के घोटाला में ED से पूछताछ से बचने को दिया था कोरोना का बहाना
कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक पत्र लिखा। इसमें उम्र और कोरोना महामारी के कारण उपजे हालातों का हवाला देते हुए पूछताछ से छूट माँगी। ईडी ने अहमद पटेल को 14000 करोड़ रुपए से ज्यादा के संदेसरा स्कैम में पूछताछ के लिए तलब किया था।
ईडी के प्रश्नों से बचने के लिए अहमद पटेल ने खुद को वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में रखते हुए कहा कि इस समय घर से बाहर निकलने में अधिक उम्र वालों को ज्यादा जोखिम है। इसलिए उन्होंने पत्र के जरिए ईडी से कल होने वाली पूछताछ के समन को फिलहाल टालने का आग्रह किया।
दिल्ली की अदालत ने दिल्ली पुलिस के उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में नए सप्लीमेंट्री चार्जशीट को स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपित उमर खालिद, शरजील इमाम और फैजान खान के खिलाफ यूएपीए के प्रावधानों के तहत अपराध करने के पर्याप्त सबूत हैं।
Delhi court considers & accepts fresh supplementary chargesheet in North East Delhi violence case; says there is sufficient material to proceed against accused Umar Khalid, Sharjeel Imam & Faizan Khan for offences under provisions of UAPA.
बता दें कि दिल्ली दंगों पर दायर सप्लीमेंट्री आरोप पत्र में पुलिस ने उमर खालिद को ‘आला दर्जे का देशद्रोही’ करार दिया है। साथ ही कहा है कि खालिद इस्लामी आक्रामकता और वामपंथी अराजकता की दो अलग-अगल धाराओं को मिलाने वाली मजबूत कड़ी है। पुलिस का दावा है कि उमर खालिद ने बहुत दिमाग लगाकर दिल्ली दंगों की साजिश रची थी।
भारत तेरे टुकड़े से लेकर तेरा मेरा रिश्ता क्या के नारे तक उमर का सफर
चार्जशीट की शुरुआत में कहा गया, ”जाँच से साबित हो गया कि उमर खालिद ने 2016 में ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह, इंशा अल्लाह’ का नारा देने से लेकर वर्तमान में ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या ला इलाहा इल्ललाह’ के नारे के जरिए आतंकवादी घटना को अंजाम देने की आपराधिक साजिश तक का सफर कैसे पूरा किया।” इसमें आगे कहा गया, “2016 में भारत को टुकड़े करने पर ध्यान केंद्रित था जो 2020 आते-आते सारे रिश्तों का केंद्रबिंदु उम्मा (सारी दुनिया में समुदाय विशेष के लोगों को एक कौम मानने की विचारधारा) हो गया जो धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रीय पहचान के बिल्कुल खिलाफ है।”
उमर के देशद्रोही होने के पुलिस ने दिए ये सबूत
करीब 200 पन्नों के आरोप पत्र में पुलिस ने अपने दावों की पुष्टि तकनीकी साक्ष्यों, अदालतों के बयानों, वॉट्सऐप चैट्स और इंटरनेट प्रॉटोकॉल के विश्लेषण और विस्तृत कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए करने का प्रयास किया। दिल्ली पुलिस ने नए व्हाट्सएप ग्रुप ‘CAB टीम’ के चैट्स का ट्रांसक्रिप्ट करवाकर अदालत को सौंपा। इस व्हाट्सएप ग्रुप में कोर ग्रुप के चुनिंदा सदस्य ही जुड़े थे। चार्जशीट कहती है कि दंगों की साजिश में उमर खालिद की भूमिका का पहला आधार 5 दिसंबर, 2019 को पकड़ में आया जब शरजील इमाम ने उसकी तरफ से ‘मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑफ जेएनयू’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया।
चार्जशीट के मुताबिक इन दंगों में खालिद का हाथ था। उसने दूर से इन दंगों को कंट्रोल किया था, जिसके कारण 53 लोगों की जान चली गई। उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान इन दंगों को भड़काया, ताकि इस पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय कवरेज मिले और सीएए को लेकर सरकार पर दबाव बने।
यह चार्जशीट आईपीसी की धारा 13/16/17/18 UAPA act, 120B, 109, 114,201, 124A, 147,148,149, 153A, 186, 420 समेत कई गंभीर धाराओं में दाखिल की गई है। अनुमान लगाया जा रहा है पुलिस जल्द से जल्द शेष आरोपितों के ख़िलाफ़ भी चार्जशीट दायर कर देगी।
‘लव जिहाद’ के नाम पर आज कल वामपंथी गिरोह ने एक नया एजेंडा चलाना शुरू किया है। अपने इस एजेंडे के तहत ये लोग इस बात को साबित करना चाहते हैं कि समाज में ऐसी कोई अवधारणा मौजूद ही नहीं है जो लव जिहाद की प्रमाणिकता को सिद्ध करे। ये मात्र सियासी फितूर है जिसे दक्षिणपंथियों ने फैलाया है और अब उनका (सेकुलर) समाज इससे प्रभावित हो रहा है।
इन लोगों का दावा है कि हिंदू इस लव जिहाद को इसलिए इतना गंभीर बता रहे हैं क्योंकि वह अंतर-धार्मिक प्रेम विवाह के विरुद्ध हैं। अब अंतर-धार्मिक प्रेम विवाह की परिभाषा बहुत व्यापक है इसलिए इसे केवल हिंदू-मुस्लिम तक सीमित कर देना कितना गलत है, ये बताने की जरूरत ऑपइंडिया को बिलकुल भी नहीं है।
हम बात करेंगे केवल मीडिया में प्रचलित लव जिहाद शब्द की परिभाषा पर जिसमें वास्तविकता में लव का नामों निशान तक नहीं होता। मौजूद होता है यदि कुछ, तो वो एक पैटर्न होता है, जिसे देखने समझने परखने के बाद ही उसे लव जिहाद का केस कहा जाता है। इस पैटर्न में मुस्लिम युवक पहले अपना नाम छिपाकर हिंदू लड़कियों से प्रेम का ढोंग करते हैं और फिर उन्हें अपने जाल में फँसाकर उनका धर्म परिवर्तन करवाते हैं। बाद में कभी खुद उसका रेप करते हैं तो कभी अपने ही रिश्तेदार से उसका गैंगरेप भी करवाते हैं। जरूरत न होने पर उसे मारने से भी गुरेज नहीं करते।
जैसे:
25 अगस्त को लव जिहाद का एक मामला यूपी के लखीमपुर से सामने आया था। इस केस में मोहम्मद दिलशाद ने एक दलित लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और अपने मंसूबे नाकाम होता देख उससे बलात्कार करके बेहरमी से मार डाला। दरअसल, दिलशाद को गुस्सा इस बात का था कि उसने जिस लड़की के साथ प्रेम जाल रचा, उसके घरवालों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी। पर दिलशाद चाहता था कि लड़की धर्म परिवर्तन करके उससे निकाह करे।
23 जुलाई को मेरठ के ही परतारपुर में लव जिहाद का वीभत्स चेहरा सामने आया था। प्रिया नाम की महिला को पहले शमशाद ने कुछ साल पहले अमित गुर्जर बनकर फँसाया और फिर हकीकत खुलने पर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कहने लगा। हालाँकि, प्रिया खुद को और अपनी बेटी को इन चीजों से बचाती रही। मगर, लॉकडाउन का फायदा उठाकर शमशाद ने दोनों को जान से खत्म कर दिया और घर में गड्डा खोद कर दफना दिया। इस केस का खुलासा प्रिया की सहेली चंचल के कारण पूरे 4 महीने बाद हुआ था।
अपने लेख में आगे हम ऐसे वीभत्स मामलों पर चर्चा जरूर करेंगे क्योंकि द प्रिंट में प्रकाशित हुए जैनब सिकंदर के लेख ने हिंदुओं पर आरोप लगाया है कि लव जिहाद के भूत के ईर्द गिर्द अपनी सोच को रखकर दक्षिणपंथी ‘हिंदू राष्ट्र’ के निर्माण की परिकल्पना कर रहे हैं। इस लेख का शीर्षक है, “राम मंदिर नहीं, ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून है हिंदू राष्ट्र का असली आधार।”
द प्रिंट पर प्रकाशित जैनब सिकंदर के लेख के शीर्षक से स्पष्ट है कि उनकी दिक्कत राम मंदिर से तो है ही लेकिन अब उसका कुछ किया नहीं जा सकता इसलिए हिंदू राष्ट्र के नाम से सेकुलरों को डराने के लिए वह लव जिहाद कानून का उपयोग कर रही हैं। वह इस कानून को हिंदू राष्ट्र का आधार बता रही हैं जबकि हकीकत यह है कि लव जिहाद कानून हिंदू राष्ट्र का आधार नहीं, बल्कि हिंदुओं को बचाने का प्रयास है।
यहाँ राजनीति और धर्म आपस में गड्डमड्ड नहीं हो जाएँगे यहाँ कानून बन जाने से न केवल इस्लामी कट्टरपंथ से अन्य धर्मों की रक्षा होगी बल्कि उन लड़कियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी, जिनका धर्मपरिवर्तन करवाने के बाद उन्हें मारकर फेंक दिया जाता है या समाज में ठोकरें खाने को मजबूर कर दिया जाता है।
लव जिहाद कोई काल्पनिक राक्षस नहीं है। ये वीभत्स हकीकत है। मेरठ में हुआ प्रिया का केस शायद जैनब ने पढ़ा ही नहीं या निकिता के साथ जो तौसीफ ने किया उससे वो आजतक अंजान हैं। राक्षस हैं ये जिन्हें इंसान बनाने के लिए लव जिहाद कानून के रूप में केवल एक रूपरेखा तैयार हो रही है। मुझे यकीन है कि कानून आने के बाद भी हम इससे जल्दी निजात नहीं पाएँगे। आखिर तीन तलाक के बाद कौन सा इन ‘प्रेमियों’ ने बीवियों को तलाक-तलाक-तलाक कहना छोड़ दिया है।
लेखिका चाहती हैं कि लव जिहाद की सच्चाई को स्वीकृति न मिले, तो क्या उनको चाहिए कि हिंदू लड़कियाँ उस बर्बरता की शिकार होती रहें जिसकी नींव धर्म परिवर्तन के साथ रख दी जाती है। जैनब के लेख में लिखा है;
“मोदी के भारत में एक नई फतह का परचम लहराया जा रहा है, यह हिंदू महिलाओं पर मुस्लिम मर्दों की फतह का परचम है; तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नज़रों से यह कैसे बच सकता है।“
आप खुद के लिए कि महिला पत्रकार के लिए ऐसे विवाह खुद जंग का विषय हैं, जिसमें उन्हें मुस्लिम पुरुषों की फतह चाहिए। अब जिनके मन में वाकई ‘जिहाद’ चलता होगा वो इसके लिए क्या नहीं कर गुजरते होंगे ये कल्पना से परे है।
उक्त वाक्य का मतलब क्या निकाला जाए, इसका निर्णय भी पाठक अपने विवेक पर करें। क्या इसका अर्थ यह नहीं है कि मुस्लिम मर्दों की हकीकत योगी सरकार से नहीं बच पाई या फिर ये निकालें कि अंतरधार्मिक विवाह का अर्थ लेखिका के लिए फतह का विषय तभी तक है जब तक हिंदू लड़की मुस्लिम परिवार को भागकर स्वीकार ले? क्या मुस्लिम महिलाओं का हिंदू युवकों से शादी करना अंतर-धार्मिक विवाह में नहीं आएगा।
तमाम केस हैं जब मुस्लिम महिलाओं ने हिंदू लड़कों से शादी की और बकायदा अपने मजहब के साथ अपनी पहचान बनाए रखते हुए जीवन व्यतीत किया। दूसरी ओर ऐसे सैंकड़ों मामले हैं जब हिंदू लड़की कई सपने लेकर मुस्लिम युवक के साथ जिंदगी शुरू करना चाहा लेकिन शुरुआत हुई कहाँ से? धर्म परिवर्तन से।
राम मंदिर के प्रति कुंठा का अर्थ यह नहीं कि अपनी नफरत की उलटी कहीं भी कर दी जाए। राम मंदिर धर्म आस्था का विषय है। उसे भी हिंदुओं ने लंबे संघर्ष के बाद न्यायालय के जरिए पाया है। इसलिए सैंकड़ों वर्षों पहले जो हिंदुओं के 40 हजार मंदिर पर आक्रमण करके उन्हें मिटा दिया गया, उसका दुख अब भी इनके ‘राम मंदिर’ के दुख से ज्यादा ही है। एक मंदिर की नींव इनसे देखी नहीं जा रही जाहिर है ‘लव जिहाद’ के ख़िलाफ़ कानून कैसे पच पाएगा।
वामपंथी गिरोह का लव जिहाद को भूत बताने का पैटर्न बिलकुल एक साथ सामने आया है। उधर रवीश कुमार के प्राइम टाइम की भाषा सुनाई पड़ी और दूसरी वामपंथियों पोर्टल पे प्रकाशित होते ऐसे लेख पढ़ने को मिले…ऐसा लग रहा है मानो एजेंडा का रिबन काटने से पहले एक मीटिंग में बकायादा ऐसे शब्दों के साथ किसी टीचर ने इन्हें बिंदू समझाए हों और फिर सभी लगे हुए हैं एक ही सवाल करने में।
जैनब सिकंदर को दुख यह है कि हरियाणा और मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार ने भी यूपी की योगी सरकार की तरह लव जिहाद पर कानून बनाने का निर्णय ले लिया है। उनका कहना है कि धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के ये तीन राज्य बड़ी बेशर्मी से धार्मिक कानून बनाने की घोषणा कर रहे हैं। हमारा पूछना है कि धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में निकाह से पहले धर्म परिवर्तन करवाया ही क्यों जा रहा है? पहचान छिपाकर प्रेम का ढोंग हो ही क्यों रहा है?
मेरठ मे 16 सितंबर को कंकरखेड़ा से एक अब्दुल्ला नाम का युवक गिरफ्तार हुआ। उस पर आरोप था कि वह अमन बनकर लड़कियों को फँसाता और फिर उनका अपहरण करके उनके साथ दुष्कर्म करता। उसने हाल में 3 सितंबर को एक युवती का अपहरण किया था। जिसकी बरामदगी 13 दिन बाद हुई। 42 वर्षीय अब्दुल्ला 4 बच्चों का अब्बा था।
बताइए, अब्दुल्ला को क्या जरूरत थी ये सब करने की। ऐसा व्यक्ति मानसिक रूप से पीड़ित बताया जाएगा। इस जैसों के लिए भी सरकार न बनाए कानून तो क्या करे? केरल में यदि पादरी तक लव जिहाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए गृह मंत्रालय को पत्र लिख रहे हैं तो सोचिए ये दक्षिणपंथियों के फितूर की उपज नहीं है। इसे समाज का हर तबका कोढ़ मान रहा है।
जैनब पूछती हैं कि अगर ऐसा ही होना है तो सऊदी अरब में वहाबिया पुलिस आतंक में क्या फर्क है? आप खुद सोचिए पाठक को बरगलाना ऐसी बातों को करना नहीं कहते तो किसे कहते हैं, क्या सरकार किसी प्रकार के कपड़ों को पहनने में प्रतिबंध लगा रही है? किसी को प्रेम विवाह करने से रोक रही है? नहीं, सरकार का कदम सिर्फ कट्टरपंथ के ख़िलाफ है। आपके मौलिक अधिकार छीनने के लिए कोई राज्य सरकार आतुर नहीं है।
धर्म या मजहब के नाम पर कोई फरमान नहीं सुनाया जा रहा बल्कि मजहब के नाम पर हो रहे अपराध से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास हो रहा है। आपके ऊपर है कि आप इसे कैसे लेंगी। भाजपा और आरएसएस के प्रति नफरत ने आपकी सोच को गर्त में लाकर छोड़ दिया है।
आप इसे फेमिनिस्टों का मुद्दा बनाने के लिए इसे पितृसत्ता से जोड़ रही है और यह हिंदू महिलाओं की समझ पर सवाल उठाकर उसे अस्मिता का सवाल बना रही हैं कि वो खुद का बुरा भला सोचने में अक्षम हैं।
विचार करिए! ब्रेन वॉश शब्द के मायने क्या होते हैं। कुछ दिन कानपुर के गोविंदनगर इलाके में एक आसिफ शाह नाम के युवक ने पहले एक हिंदू युवती को अपने जाल में फँसाया फिर उसका ब्रेनवॉश करके जबरन उसका धर्म परिवर्तन करवाया। बाद में लड़की खराब और मानसिक रूप से अस्थिर हालत में पाई गई। परिजनों की शिकायत पर इस मामले को धारा 366 के तहत दर्ज किया गया है।
कौन लड़की आतंकी बनना चाहती है और यदि किसी लड़के से प्रेम करने के बाद वह आईएसआईएस से जुड़ रही है तो इतने के बाद भी उसमें लड़के की गलती न समझी जाए। हर चीज पर पितृसत्ता का तेल लगाने से आपका एजेंडा तेजी से नहीं फैलेगा।
लड़का कम उम्र का हो तब भी माता-पिता उसका ध्यान उतनी सख्ती से देते हैं जितनी सख्ती से एक लड़की के लिए रोक-टोक करते हैं। हर चीज में पितृसत्ता घुसा देने से इसकी गंभीरता वाकई मरती जा रही हैं। महिलाओं के लिए फेमिनिज्म का मतलब पुरुष विरोधी होना हो गया या अधिकार के नाम पर केवल मनमानियाँ मनवाना।
इसके अलावा ये भी समझने की जरूरत है कि पितृसत्तात्मक समाज के दोषी केवल हिंदू पुरुष नहीं है। इसे परिभाषित करना है तो आप किसी भी धर्म मजहब में इसके अनेको उदाहरण देख सकते हैं लेकिन लव जिहाद की अवधारणा इससे बहुत अलग है। इसलिए इन दोनों को जोड़ना बेवकूफी से ज्यादा कुछ नहीं है।
पिछले दिनों बिहार के बेगूसरायएक हिंदू ब्राह्मण ने अपनी मर्जी ने मुस्लिम युवक आफताब से कोर्ट मैरेज की। लड़की के घर तक ने लड़के को स्वीकार, लेकिन शादी के 16 साल बाद युवक ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया और महिला पर आए दिन हमले करने लगा, उसके परिवार वाले उसे गलत शब्द बोलने लगे।
ये उदाहरण इस बात का सबूत हैं कि बिहार जैसे इलाकों में भी हिंदू धर्म में लड़कियाँ ही नहीं उनके परिवार भी हर धर्म मजहब को लेकर लिबरल हो रहे हैं, लेकिन वहीं दूसरा समुदाय घूम फिराकर पिछड़ी सोच से ऊपर नहीं उठ पा रहा और हास्यास्पद यह है कि जैनब जैसे पढ़े लिखे लोग इसे ‘प्रेम’ का देकर इसपर स्पष्टीकरण दे रहे हैं।
उन मौलवियों की बातें शायद जैनब ने नहीं सुनी जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये कहते हैं कि भारत में हिंदुओं को धर्म परिवर्तन करवाना बेहद आसान काम है या उन बच्चों की वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर कभी नहीं देखी कि जो ये बताते हैं कि उन्हें मदरसों में हिंदू लड़कियों के लिए क्या सिखाया जाता है।
जैनब का लेख में कहना है कि साल 2009 में निराधार ही एबीवीपी ने ऐसा झूठ फैलाया कि लव जिहाद के तहत 4000 लड़कियों का धर्मांतरण हुआ लेकिन वह ये नहीं बताती कि इस पर्चे में और क्या लिखा था और इसका संदर्भ क्या था।
उनके लिए यही तर्क का आधार है कि वो कानपुर में जिन लव जिहाद के मामलों जाँच हो रही थी उनमें से आधे ऐसे निकल आए हैं जो रजामंदी से हुए। उनका इससे सरोकार नहीं है पिछले दिनों में मुस्लिम युवकों ने पहले पहचान छिपाकर, फिर धर्म बदलवाकर, बाद में निकाह करके कैसे हिंदू महिलाओं के साथ बर्बरता की या फिर उन्हें मौत के घाट उतारा।
लव जिहाद की जगह ऑपइंडिया करेगा ग्रूमिंग जिहाद इस्तेमाल
यहाँ गौरतलब हो कि ऑपइंडिया ने अपने इस लेख में लव जिहाद शब्द का प्रयोग सिर्फ इसलिए किया है क्योंकि द प्रिंट ने इसका इस्तेमाल करके अपना आर्टिकल लिखा। वरना ऑपइंडिया की ओर से स्टैंड लिया गया है कि हम अपनी रिपोर्ट में ‘लव जिहाद’ शब्द के इस्तेमाल से दूरी बनाएँगे। इस प्रकार जिहाद में कोई ‘लव’ नहीं है और अगर इस शब्द को इसके जटिल वाक्य-विन्यास के साथ स्वीकार करते हैं, तो यह जिहाद की गंभीरता को दिखाने में विफल रहता है, जो कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा विशेष रूप से गैर-मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाता है। हमारा मानना है कि इसके लिए ‘ग्रूमिंग जिहाद’ शब्द कहीं अधिक उपयुक्त है क्योंकि यह उन सभी अपराधों की श्रेणी में आता है, जो महिलाओं को इस जिहाद के केंद्र में रखते हैं।
गैर-मुस्लिम महिलाओं को मुस्लिम पुरुषों के हाथों अपनी अधीनता स्वीकार करने के लिए तैयार किया जा रहा है। उनका अपहरण कर लिया जाता है, उनका बलात्कार किया जाता है, लालच दिया जाता है, उन्हें इस्लाम में परिवर्तित कर दिया जाता है, दंडित किया जाता है और उनका ब्रेनवॉश किया जाता है। मानवता के खिलाफ इन अपराधों में कोई ‘प्यार’ नहीं है। इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है कि यह जिहाद का ही एक रूप है। अब यह कहने का समय आ गया है कि यह ग्रूमिंग जिहाद है। यह ग्रूमिंग शब्द हमने यूनाइटिड किंगडम की ग्रूमिंग गैंग से जोड़ते हुए लिया है। जो एक मुस्लिम पुरुषों का गिरोह होता है और वह वहाँ लड़कियों व महिलाओं का शिकार करते हैं।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ‘लव जिहाद’ को लेकर एक बड़े फैसले में अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। ‘लव जिहाद’ के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए यूपी कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। योगी सरकार ने लव जिहाद को लेकर सख्त कानून बनाया है जिसके तहत ‘लव जिहाद’ के मामलों में दोषी पाए जाने पर जेल की हवा खानी पड़ सकती है। पिछले दिनों लव जिहाद को लेकर सख्त कानून बनाने के लिए उप्र के गृह विभाग ने न्याय व विधि विभाग को प्रस्ताव भेजा था।
UP Cabinet decides to introduce an ordinance against unlawful religious conversions: State Cabinet Minister Siddharth Nath Singh pic.twitter.com/vUPO7SLyR7
योगी सरकार ने लव जिहाद को लेकर कानून बनाने की पूरी तैयारी कर ली है। मंगलवार (नवंबर 24, 2020) को गैरकानूनी धर्म परिवर्तन अध्यादेश कैबिनेट मीटिंग में भी पास हो गया। अध्यादेश के मुताबिक, दूसरे धर्म में शादी करने पर अब डीएम की इजाजत लेनी होगी।
जानकारी के मुताबिक, योगी सरकार के अध्यादेश में दूसरे धर्म में शादी करने के लिए संबंधित जिले के जिलाधिकारी से इजाजत लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए शादी से पहले 2 माह की नोटिस देना होगा। बिना अनुमति लिए शादी करने या धर्म परिवर्तन करने पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सजा के साथ 10 हजार का जुर्माना भी देना पड़ेगा।
सामूहिक धर्म परिवर्तन पर 10 साल तक सजा
The ordinance provides for jail term of 1-5 years with Rs 15,000 penalty for forceful religious conversion. For conversions of minors & women of SC/ST community, there will be jail term of 3-10 years with Rs 25,000 penalty: State Cabinet Minister Siddharth Nath Singh https://t.co/D6uTXIAHic
इसके अलावा अध्यादेश में नाम छिपाकर शादी करने वाले के लिए 10 साल की सजा का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन पर एक से 10 साल तक की सजा होगी। साथ ही 15 हजार तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है। इसके अलावा सामूहिक रूप से गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन करने पर जहाँ 10 साल तक सजा हो सकती है, वहीं 50 हजार तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है।
अध्यादेश पर यह बोले योगी के मंत्री
We saw that the religious conversions were part of ‘love jihad’ conspiracy. There is a big conspiracy behind these conversions which was unravelled by our security agencies: UP Minister Mohsin Raza on State Cabinet clearing ordinance against forced religious conversions pic.twitter.com/ip790RJfKn
गैरकानूनी धर्म परिवर्तन अध्यादेश को लेकर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश कैबिनेट ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म समपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020’ लेकर आई है। जो उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था सामान्य रखने के लिए और महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, “बीते दिनों में 100 से ज्यादा घटनाएँ सामने आई थीं, जिनमें जबरन धर्म परिवर्तित किया जा रहा है। इसके अंदर छल-कपट, बल से धर्म परिवर्तित किया जा रहा है। इस पर कानून को लेकर एक आवश्यक नीति बनी, जिस पर कोर्ट के आदेश आए हैं और आज सीएम योगी की कैबिनेट अध्यादेश लेकर आई है।”
उल्लेखनीय है कि यूपी की तरह ही मध्य प्रदेश सरकार भी लव जिहाद के खिलाफ कड़े कानून लाने की तैयारी कर रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने अपने प्रस्तावित बिल में पाँच साल की कठोर सजा का प्रावधान किया है और मामले गैर जमानती धाराओं में दर्ज होंगे।
वहीं हरियाणा में निकिता तोमर की हत्या के बाद हरियाणा सरकार ने भी लव जिहाद के खिलाफ कानून लाने की बात कही है। फिलहाल आज योगी सरकार ने लव जिहाद पर सबसे पहले कानून लाकर इतिहास रच दिया है।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने पहले ही कहा था कि हम लव जिहाद पर नया कानून बनाएँगे ताकि कानून में लोभ, लालच, दबाव, धमकी या शादी का झाँसा देकर शादी की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।
उन्होंने कहा था, “हम लव जिहाद के मामलों को रोकने के लिए एक प्रभावशाली क़ानून बनाएँगे। छद्म वेश में, चोरी-छिपे नाम बदल कर जो लोग बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हैं, उनके लिए पहले से मेरी चेतावनी है। अगर वह सुधरे नहीं तो राम नाम सत्य है की यात्रा अब निकलने वाली है। हम लोग मिशन शक्ति के कार्यक्रम को इसलिए आगे बढ़ा रहे हैं।
मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के खिलाफ कंगना रनौत की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने अभिनेत्री कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी है, लेकिन राजद्रोह के मामले में दोनों को 8 जनवरी को मुंबई पुलिस के सामने पेश होना होगा।
कंगना रनौत और रंगोली चंदेल के वकील रिजवान सिद्दीकी ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि दोनों बहनें मुंबई में बांद्रा पुलिस के सामने 8 जनवरी को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक अपने बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित रहेंगी।
#NewsAlert – Relief for Actress Kangana Ranaut and her sister Rangoli.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि आखिर क्यों कंगना रनौत पर राजद्रोह का केस लगाया गया। राजद्रोह चार्ज का हवाला देते हुए जस्टिस शिंदे ने कहा- “क्या आप देश के नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं?” इसके साथ ही पुलिस को तब तक कंगना और रंगोली के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए भी कहा गया है।
बता दें कि अभिनेत्री कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल ने सोमवार (नवंबर 23, 2020) को बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया था, जिस पर मंगलवार (नवंबर 24, 2020) को सुनवाई हुई। यह प्राथमिकी सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए समाज में नफरत और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के आरोप में दर्ज की गई है।
फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल को सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने, सांप्रदायिक तनाव भड़काने के आरोप में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस के समक्ष सोमवार या मंगलवार को पेश होने के लिए समन भेजा था, जिसके खिलाफ कंगना ने बम्बई उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल प्राथमिकी को रद्द करने की माँग की थी।
कंगना और उनकी बहन को इससे पहले 26 और 27 अक्टूबर तथा 9 और 10 नवंबर को पुलिस के समक्ष हाजिर होने के लिए समन भेजा गया था। उन्होंने अपने वकील के माध्यम से कहा था कि वे अपने भाई की शादी के लिए हिमाचल प्रदेश में 15 नवंबर तक व्यस्त रहेंगी। मुंबई पुलिस ने इसके बाद उन्हें 23 और 24 नवंबर को तीसरा नोटिस भेजा था।
एक स्थानीय अदालत ने हाल ही में बांद्रा पुलिस को मामला दर्ज कर जाँच करने का आदेश दिया था। पुलिस ने स्थानीय अदालत के आदेश के बाद कंगना और उनकी बहन को समन भेजा था लेकिन दोनों बहन पुलिस के समक्ष हाजिर नहीं हुई और उच्च न्यायालय में प्राथमिकी को खारिज करने के लिए याचिका दाखिल की।