JNU की छात्र नेता रहीं शेहला रशीद पर उनके अब्बा अब्दुल रशीद शोरा ने आतंकियों जहूर वटाली और रशीद इंजीनियर से 3 करोड़ रुपए लेने के आरोप लगाए हैं। इसी क्रम में ‘ABP न्यूज़’ पर शेहला रशीद सफाई देने फोन लाइन पर आईं, लेकिन कठिन सवालों का जवाब देने के बजाए फोन रख कर भाग खड़ी हुईं। उन्होंने अपने अब्बू शोरा को लालची भी करार दिया। पत्रकार विकास भदोरिया के इंटरव्यू में ये सब हुआ।
शेहला रशीद के अब्बा ने कहा कि उनके लिखे पत्र में 2017 के बाद शहेला रशीद ने जो किया, उसका कच्चा चिट्ठा है। उन्होंने कहा कि शेहला रशीद के जम्मू कश्मीर की राजनीति में आने के निर्णय के बाद दिक्कतें शुरू हुईं, क्योंकि उन्होंने अचानक से अपनी राजनीति में यू-टर्न ले लिया। उन्होंने बताया कि इसकी पूरी साजिश अमेरिका में रची गई थी और उन्हें चुप कराने के लिए उनके ऊपर घरेलू हिंसा का केस कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले ये पता लगाना ज़रूरी है कि शेहला रशीद अवैध गतिविधियों में कहाँ तक लिप्त हैं। इसके बाद शो में शेहला रशीद भी जुड़ीं और उनसे आरोपों को लेकर जवाब माँगा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनके ऊपर कोई आरोप नहीं है बल्कि उनके अब्बा के ऊपर घरेलू हिंसा का आरोप है और उनके खिलाफ वारंट भी जारी हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार के साथ हिंसा और गाली-गलौज के कारण अब्दुल रशीद शोरा को मोहल्ले वालों ने घर से निकाल दिया था।
शेहला रशीद ने पत्रकार से कहा कि वो उनके अब्बा से पूछें कि वो अपनी बीवी को क्यों पीटते थे और घर से क्यों निकाल देते थे? शेहला रशीद ने अपने अब्बा को ‘लालची किस्म का इंसान’ करार देते हुए कहा कि आरोप कोई भी लगा सकता है, लेकिन सबूत ही नहीं हैं। उन्होंने उल्टा एंकर विकास भदौरिया से कहा कि अगर मैं आपके बारे में कह दूँ कि आपने अपने संपादक की हत्या कर दी, तो क्या आरोप लग गया? उन्होंने कहा:
“जब हम बहुत छोटे थे तो हम माँ-बेटियों को ये घर से निकाल देते थे, वो भी रात के 9 बजे। ये किस हक़ से बोल रहे हैं? हम किस स्कूल में पढ़ते थे, हमारी स्कूल यूनिफॉर्म क्या थी, हम फी कहाँ से भरते थे और किताबें कहाँ से खरीदते थे – इन्हें कुछ नहीं पता। इनकी उपस्थिति हमारी ज़िंदगी में सिर्फ इसीलिए है, ताकि ये हमें परेशान कर सकें। हमारी माँ ने नया घर बनाया तो ये वहाँ भी धमक गए और पूछने लगे कि रुपए कहाँ से आए और उन्हें क्यों नहीं दिए गए?”
9:50 के बाद शेहला रशीद ने कटा फोन कॉल (वीडियो साभार: ABP न्यूज़)
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अब्दुल रशीद शोरा ने शेहला से पूछा कि जब वो दिल्ली में पढ़ाई पूरी करने के लिए पहली बार जम्मू कश्मीर से बाहर गईं और जालंधर गईं, तो किसके साथ गई थी? शेहला रशीद ने इसका जवाब देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्हें कोई डिबेट नहीं करनी है और कोर्ट में मामला सुलझाया जाएगा। उन्होंने मुद्दों से ध्यान भटका कर कोर्ट की बातें करनी शुरू कर दी।
विकास भदौरिया ने शेहला को टोका कि अगर वो आरोपों और सवालों का जवाब नहीं देती हैं तो ये माना जाएगा कि वो सवालों से भाग रही हैं। शेहला बार-बार कहती रहीं कि वो कोर्ट में जवाब देंगी और उसके बाद फोन कॉल कट कर दिया। फोन काटने से पहले उन्होंने पूछा कि उनके अब्बा आखिर आतंकी जहूर वाटाली से मिले ही क्यों थे? अब्दुल रशीद शोरा ने कहा कि उनकी बेटी पूरे प्रेस को बहका रही है और वो सारे सबूत पेश करेंगे। अपने अब्बू अब्दुल रशीद शोरा के आरोपों का जवाब देने की बजाए शेहला ने फोन काट दिया।
इससे पहले शोरा ने बताया था, “शेहला ने पार्टी तब बनाई थी, जब वह यूएस गई थीं। इन्हें सारा फंड राष्ट्र विरोधी ताकतों से प्राप्त होता है। कोई राष्ट्रीय पार्टी इन्हें फंड नहीं देगी। अपने लिए सुरक्षा माँगने के साथ मैंने डीजी सर से इन फंड पर जाँच करने को भी कहा है।” उन्होंने ये भी खुलासा किया कि उनकी बेटीलेफ्ट पार्टी की एक्टिव सदस्य थी और वह मेरठ से चुनाव लड़ने वाली थी। शोरा के मुताबिक, शेहला ‘कुख्यात गतिविधियों’ में शामिल है।
कृषक आंदोलन के दौरान ऑपइंडिया इस हफ्ते आपके बीच लेकर आ रहा बिहार के किसानों की स्थिति। हमारा उद्देश्य अलग-अलग कृषि जानकारों व किसानों से बात करके यह जानना है कि आखिर यहाँ किसानों की समस्या क्या है। क्यों इतनी परेशानियों के बावजूद भी यहाँ का किसान आंदोलन नहीं करता? और क्यों बाढ़ जैसी समस्याओं से प्रभावित होने के बाद भी इस जगह को छोड़ कर नहीं जाता?
इसी क्रम में ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती आज शंभू शरण शर्मा से बात कर रहे हैं। शंभू एक किसान हैं और लंबे समय से कृषि से जुड़े हैं। वह बेगूसराय इलाके की भौगोलिक स्थिति की जानकारी विस्तार से देते हुए बताते हैं कि छोटे जोत में भिन्न-भिन्न तरह की फसल पैदा करना उन लोगों की मजबूरी है। छोटे जोतदार होने के कारण उन्हें छोटे व्यापारियों के हाथ में अपना गल्ला मनमाने रेट पर बेच देना पड़ता है।
वह अन्य परेशानियों की चर्चा करने के बावजूद दिल्ली में हो रहे ‘आंदोलन’ को राजनीति से प्रेरित कहते हैं। वह बताते हैं कि बिहार में लोग सरकार के भरोसे एक उम्मीद में हैं कि वो व्यवस्था को सुधार देंगे।
पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसके लिए अभी से ही जमीन तैयार की जा रही है। कई विश्लेषक मौजूदा ‘किसान आंदोलन’ को इसी रूप में देख रहे हैं। इनमें तीन पार्टियाँ मुख्यतः सम्मिलित हैं – AAP, कॉन्ग्रेस और अकाली दल। शुरू तो अकाली दल ने किया था NDA छोड़ कर और कैबिनेट से हट कर, लेकिन अब कैप्टन अमरिंदर और अरविंद केजरीवाल ने इसे हाईजैक कर लिया है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जिस तरह से बयान दिए हैं और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ तू-तड़ाक वाली भाषा में बात की, उससे स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस आग में घी डालने वाला काम करना चाहती थी। राहुल गाँधी ने ट्रैक्टर पर बैठ कर ड्रामा किया और किसानों के कथित समर्थन में रैली की, लेकिन बिहार चुनाव और उपचुनावों में हुए हार के बाद वो ठंडे पड़ गए। इधर केजरीवाल की पार्टी प्रदर्शनकारियों को भोजन-पानी मुहैया करा रही है।
‘अमर उजाला’ के एक विश्लेषण में पाया गया है कि इन तीनों दलों के नेता अनौपचारिक बातचीत में मान रहे हैं कि जो भी पार्टी किसानों को जीत लेगी, आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में सत्ता की चाभी उसके ही पास रहेगी। इस चुनाव में 1 वर्ष बचे हैं और किसानों के जमावड़े के सहारे इन दलों को अपनी राजनीति चमकाने का अच्छा अवसर मिला है। बुराड़ी के मैदान में प्रदर्शनकारियों को सारी सुविधाएँ देने से लेकर केंद्र पर लगातार वार तक, निशाना 2022 ही है।
दिल्ली सरकार द्वारा सरकार की उस माँग को ठुकरा दी गई, जिसमें स्टेडियम को अस्थायी जेल के रूप में माँगा गया था। इसके बाद से AAP का हर छोटा-बड़ा नेता सोशल मीडिया पर इस ‘किसान आंदोलन’ के बारे में ही बात करता दिख रहा है। ओखला विधायक अमानतुल्लाह खान के सामने एक प्रदर्शनकारी ने ‘जय हिंद’ और ‘भारत माता की जय’ को नकारते हुए ‘अस्सलाम वालेकुम’ की खुली पैरवी की।
Farmers are fighting for their future. It’s a spontaneous reaction to the Farm Laws. They want to be heard. They’ve the right to speak their mind. Centre should listen to them. I’m ready to join Centre’s efforts to resolve the issue. pic.twitter.com/0kMqGT7EVk
रविवार (नवंबर 29, 2020) को AAP नेताओं ने इसी मसले पर एक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सभी में मोदी सरकार पर ही हमला बोला गया। केजरीवाल दिल्ली छोड़ कर पंजाब का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं, इस महत्वाकांक्षा की चर्चा अक्सर होती रही है। 2014 लोकसभा चुनाव में राज्य में पार्टी को जिस तरह से 24% से अधिक वोट शेयर मिले थे, AAP अगले चुनाव के लिए तैयारी कर रही है।
दिल्ली सरकार के जल बोर्ड ने आन्दोलनकारियों को पानी के टैंकर मुहैया कराए हैं। केजरीवाल ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को प्रदर्शनकारियों की सेवा में लगाया है। अकाली दल के नेता लगातार सिंघु बॉर्डर का दौरा कर रहे हैं और प्रदर्शनकारियों की ज़रूरतों को पूरा कर रहे हैं। दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंध कमेटी पर अकाली दल ही सत्तासीन है और इसके सहारे गुरुद्वारों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों की मदद की जा रही है।
पंजाब में सत्तासीन कॉन्ग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व किसान कानून पर लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। वहीं, पार्टी की दिल्ली यूनिट के नेता भी अपने स्तर पर प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। युवा कॉन्ग्रेस नेताओं ने किसानों को भोजन-पानी और दवा-दारू मुहैया कराने के लिए सिंघु व टिकरी बॉर्डर का दौरा किया है। राहुल और प्रियंका गाँधी छुट्टियाँ मनाते हुए ही सोशल मीडिया पर ट्वीट्स दाग रहे हैं। ‘किसान आंदोलन’ के रूप में उन्हें भी एक हवाई मुद्दा मिल गया है, क्योंकि पंजाब में चुनाव के समय गिनाने को उनके पास कुछ खास है नहीं।
एक तरफ भाजपा सरकार आंदोलनकारी किसानों पर आंसू गैस ,वाटर कैनन ,लाठी-पत्थर से हमला कर रही है।
दूसरी तरफ केजरीवाल सरकार उनके घाव पर मरहम लगाने का काम कर रही है l
सिंघु बॉर्डर पर चिकित्सा व स्वास्थ सेवाओं के लिए केजरीवाल सरकार ने बंदोबस्त किया है l pic.twitter.com/DC72sPe0Ik
यही आशंका पंजाब के गृहमंत्री अनिल विज ने जताई है। उन्होंने कहा कि किसानों का ये आंदोलन पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की राजनीति है। उनका कहना है कि अगले वर्ष पंजाब में चुनाव हैं और ऐसा लग रहा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने किसानों को उकसाकर भेजा है। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के इकलौते पंजाब राज्य से ही किसान क्यों आगे आया है, बाकी किसी प्रदेश के किसान इस आंदोलन में क्यों नहीं पहुँचे?
अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने हरसिमरत कौर के इस्तीफे को पार्टी द्वारा किसानों के लिए एक बड़े बलिदान के रूप में पेश किया था, लेकिन अब कैप्टन अमरिंदर सिंह की सक्रियता ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जैसे करतारपुर कॉरिडोर खोलने के मामले में अकाली दल ने क्रेडिट के लिए माथापच्ची की थी, अभी भी वो कॉन्ग्रेस से आगे दिखना चाहती है। हरियाणा में भी हुड्डा आंदोलन को हवा देने में लगे हैं। ‘किसान आंदोलन’ का एक ही लक्ष्य है – पंजाब चुनाव।
Instead of yet again reading the lines scripted by Centre & becoming a cheerleader for them you would do better @capt_amarinder if lead the fight from the forefront to get the farmers’ demands met.#FarmersProtestshttps://t.co/MUDlfWEnfr
पीएम मोदी ने भी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कहा कि अब विरोध का आधार फैसला नहीं, बल्कि आशंकाओं को बनाया जा रहा है। दुष्प्रचार किया जाता है कि फैसला तो ठीक है लेकिन इससे आगे चलकर ऐसा हो सकता है। जो अभी हुआ ही नहीं, जो कभी होगा ही नहीं, उसको लेकर समाज में भ्रम फैलाया जाता है। कृषि सुधारों के मामले में भी यही हो रहा है। ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके विधायक जहाँ पंजाब से आए ‘किसान आंदोलनकारियों’ के समर्थन में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने खुलासा किया है कि AAP सरकार ने तो मोदी सरकार द्वारा पारित कराए गए 3 कृषि कानूनों में से एक कानून को सोमवार (नवंबर 23, 2020) को ही प्रदेश में लागू कर दिया है। उन्होंने ‘दिल्ली राजपत्र’ के दस्तावेज की तस्वीरें शेयर कर सबूत भी दिखाया।
इस दस्तावेज के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद-123 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में, भारत के राष्ट्रपति ने ‘कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा)’ नामक अध्यादेश, 2020 प्रख्यापित किया है, जिसे विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार का राजपत्र असाधारण भाग-2, खंड-1 में प्रकाशित किया गया है। आगे लिखा है कि यह किसी भी राज्य की APMC अधिनियम या अन्य कानून के लागू होने के समय प्रवृत्त या प्रलेख के प्रभाव में आने वाले समय में लागू होगा।
इस राजपत्र का गौर करने लायक हिस्सा वो है, जिसमें लिखा है, “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली की विधानसभा ने ‘दिल्ली कृषि उपज विपणन अधिनियम, 1998’ (1999 का दिल्ली अधिनियम, संख्या-7) को अधिनियमित किया है, जो जून 2, 1999 से लागू है।” यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि सरकार ने APMC के कुछ क्षेत्रों को पुनः परिभाषित किया है, जहाँ ये कानून लागू होंगे। दस्तावेज के दूसरे पन्ने पर उन परिवर्तनों के बारे में बताया गया है।
वहीं दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल न सिर्फ इस कानून को किसान-विरोधी बता रहे हैं, बल्कि केंद्र सरकार पर इसे वापस लेने का दबाव भी बना रहे हैं। यानी, दिल्ली के किसान भी अब अपनी मंडियों से बाहर अपने उत्पाद बेच सकेंगे। इससे दिल्ली की मंडियाँ ख़त्म नहीं होंगी, वो ज्यों की त्यों बनी रहेगी – ऐसा सरकार ने साफ़ कर दिया है। साथ ही मंडी से बाहर उत्पाद बेचने पर कोई शुल्क या टैक्स नहीं भरना पड़ेगा।
वहीं आम आदमी पार्टी का कहना है कि दिल्ली में तो सब्जियों और फलों को पहले ही डीरेगुलेट किया जा चुका था, अब अनाजों को लेकर भी ये सुविधा लागू हो गई। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, पार्टी ने कहा कि किसान बस इतना चाहते हैं कि MSP से छेड़छाड़ न हो और इस मामले में पार्टी उनके समर्थन में है। सांसद मनोज तिवारी ने पूछा कि जब अपने इस कानून को लागू कर दिया है तो इसके विरोध में आपके विधायक क्यों भाग-दौड़ कर रहे हैं?
बता दें कि दिल्ली में चल रहा ‘किसान आंदोलन’ अब खालिस्तानियों और इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों के कब्जे में चला गया है। राजधानी दिल्ली के गाजीपुर क्षेत्र का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों लोग बिरयानी के लिए पंक्ति बना कर खड़े हैं। इस नज़ारे ने शाहीन बाग़ की यादें ताज़ा कर दी, जिसने दिल्ली को 100 दिनों तक बंधक बना कर रखा था।
जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद के पिता अब्दुल रशीद शोरा ने अपनी बेटी पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि शेहला ने पार्टी कब बनाई थी और उन्हें इसके लिए फंड कहाँ से मिल रहा है।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार शोरा ने बताया, “शेहला ने पार्टी तब बनाई थी, जब वह यूएस गई थीं। इन्हें सारा फंड राष्ट्र विरोधी ताकतों से प्राप्त होता है। कोई राष्ट्रीय पार्टी इन्हें फंड नहीं देगी। अपने लिए सुरक्षा माँगने के साथ मैंने डीजी सर से इन फंड पर जाँच करने को भी कहा है।”
I was restored to the right of habitation to my house in a day by a court order after the domestic violence complaint. If I’m a violent person, surely there must be a string of FIRs against me? But there are not: Abdul R Shohra, father of Shehla Rashid https://t.co/9lafEqIsR2
उन्होंने अपने ऊपर लगे घरेलू हिंसा के आरोपों को लेकर कहा, “अगर मैं हिंसक होता तो मेरे खिलाफ जरूर एफआईआर होती, लेकिन मेरे खिलाफ कोई एफआईआर नहीं है।”
उन्होंने बताया कि शेहला के घरेलू हिंसा के आरोपों पर उन्होंने कोर्ट के ऑर्डर पर स्टे लिया है, जिसके बाद उन्हें घर में रुकने की इजाजत दी गई है, लेकिन, SHO ने उन्हें रुकने नहीं दिया। इस पर उन्होंने शिकायत की है।
आज तक की खबर के अनुसार, शोरा ने कहा, “मेरे ऊपर जो शेहला ने केस किया है, उसमें खुद को बेरोजगार बताया है। लेकिन आज के वक्त में उनके अकाउंट को आप देख लीजिए। इनकी पार्टी के जो साथी हैं, उनमें रशीद इंजीनियर शामिल हैं, जिनका इतिहास खराब रहा है।”
अब्दुल रशीद ने इस संबंध में की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा, “मैं एक गैर राजनीतिक व्यक्ति हूँ। मैंने शेहला को इन सबसे दूर रहने को भी कहा था, लेकिन उसने नहीं सुनी। शेहला ने कश्मीर के पूर्व विधायक और अलगाववादी बोली बोलने वाले इंजीनियर रशीद को JNU में बोलने का मौका क्यों दिया? मेरी बेटी लेफ्ट पार्टी की एक्टिव सदस्य थी और वह मेरठ से चुनाव लड़ने वाली थी। शेहला को कहाँ से, कैसे और क्यों फंडिंग आती है, इसकी भी जाँच की जानी चाहिए। उसे US में बैठे कुछ अलगाववादी फंडिंग करते हैं।”
बता दें कि इससे पहले अब्दुल रशीद ने बेटी शेहला के ख़िलाफ अपनी शिकायत में बताया था कि वह उन्हें मौत की धमकी देती हैं। शोरा के मुताबिक, शेहला ‘कुख्यात गतिविधियों’ में शामिल है। वे कहते हैं, “मेरे घर में राष्ट्र विरोधी गतिविधियाँ चल रही हैं।”
अब्दुल रशीद शोरा ने इस संबंध में जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को भी अपनी शिकायत दी। इसमें उन्होंने शेहला की ‘कुख्यात गतिविधियों’ को उजागर करते हुए उसके बैंक अकाउंट की जाँच की माँग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि शेहला ने कश्मीर केंद्रित राजनीति में शामिल होने के लिए ‘कुख्यात लोगों’ से 3 करोड़ रुपए नकद लिए हैं। उन्होंने माँग की है कि फिरोज पीरजादा, जहूर वटाली (एनआईए द्वारा गिरफ्तार) और रशीद इंजीनियर के बीच के ‘रहस्यमय वित्तीय डील’ की जाँच की जाए।
1) Many of you must have come across a video of my biological father making wild allegations against me and my mum & sis. To keep it short and straight, he’s a wife-beater and an abusive, depraved man. We finally decided to act against him, and this stunt is a reaction to that. pic.twitter.com/SuIn450mo2
इन आरोपों के बाद शेहला ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए अपने पिता को हिंसक व गालीबाज बताया। उन्होंने लिखा, “उन्होंने कभी अपने सपनों में नहीं सोचा था कि उनकी आज्ञाकारी पत्नी और डरपोक बेटियाँ उनके खिलाफ बोलेंगी। चूँकि उन्हें माननीय न्यायालय द्वारा घर में प्रवेश करने से रोका गया था, इसलिए वे सस्ते स्टंट का सहारा लेकर न्यायिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं।”
गौरतलब है कि जिन शेहला पर आज राष्ट्रविरोधी ताकतों से फंड लेने के इल्जाम उनके पिता द्वारा ही लगाए जा रहे हैं, उन्हीं के जेएनयू में उपाध्यक्ष रहते हुए वहाँ फरवरी 2016 में एक कार्यक्रम में देश विरोधी नारे लगे थे। उस समय अध्यक्ष कन्हैया कुमार पुलिस की गिरफ्त में आए थे, लेकिन शेहला को सिर्फ आलोचना मिली थी। इसके बाद वह कई मुद्दों पर भारत सरकार और देश की सेना पर इल्जाम लगाती रहीं। वह अक्सर अपने कई विवादित बयानों के चलते चर्चा का कारण बनी हैं।
हरियाणा के कई इलाकों में जहाँ ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं राज्य के यमुना नगर जिले से एक चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है। यहाँ एक हिंदू लड़की से शादी करने के लिए एक मुस्लिम युवक ने हिंदू धर्म अपना लिया और बाद में लड़की के परिवार के डर से कोर्ट पहुँच कर पुलिस सुरक्षा भी ले ली।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, लड़के ने मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों से शादी करने के लिए पहले अपना नाम बदला और फिर लड़की से शादी की। दोनों का विवाह 9 नवंबर को लड़की के परिवार की इच्छा के विरुद्ध संपन्न हुआ था। पहले लड़की के घर वालों को इस बारे में पता नहीं था, लेकिन जब मालूम हुआ तो दोनों पति-पत्नी उनसे डर गए। इनका आरोप है कि इन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही थीं, इसलिए ये कोर्ट पहुँचे।
इस मामले में पंजाब और हरियाणा कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस पति-पत्नी को यमुना नगर पुलिस की प्रोटेक्शन दी गई है। बता दें कि पति-पत्नी ने कुछ दिन पहले हाईकोर्ट पहुँच कर अपनी स्थिति बयाँ की थी।
अर्जी में लिखा था कि उनकी शादी का विरोध करके संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले उनके अधिकारों को उनसे छीना जा रहा है। पति-पत्नी का कहना था कि जैसे ही उनको (लड़की के घर वालों) मौका मिलेगा, वह उन दोनों को मार देंगे।
बता दें कि रिपोर्ट में लड़की के परिवार पक्ष का कोई उल्लेख नहीं है। इसमें कहा गया कि 11 नवंबर को मामले की सुनवाई के दौरान लड़की के घर वालों ने उससे मिलने की गुजारिश की थी, लेकिन लड़की ने परिवार से मिलने से मना कर दिया। हाई कोर्ट ने भी मामले में सुनवाई के बाद यमुनानगर एसपी से पूरे मामले की गंभीरता को परख कर पति-पत्नी को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ हरियाणा सरकार लव जिहाद के ख़िलाफ कानून बनाने के लिए विचार कर रही है। वहीं, टाइम्स ऑफ इंडिया की ये खबर बिलकुल उल्टी स्थिति को बयाँ कर रही है। ऐसे में इस खबर पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
लोगों ने इसे पेड न्यूज बताया है। वहीं एक पाठक ने इसे फर्जी आर्टिकल बताया और कहा कि बस 5 साल का इतजार करें, ये युवक दोबारा अपने मजहब को अपना लेगा।
एक अन्य ने लिखा, “यह केवल लड़की के परिवार को बदनाम करने की साजिश है। अगर ये वाकई धर्म परिवर्तन करता, तो अब तक इसके समुदाय के लोग इसे मार चुके होते।”
एक पाठक का कहना है कि युवक केवल लड़की को बेवकूफ बना रहा है। कुछ समय बाद वह जब अपने मजहब में परिवर्तित होगा तो लड़की को भी इसी आधार पर परिवर्तित करवा लेगा।
जहाँ एक तरफ भारत के साथ चीन सीमा विवाद बढ़ाने में लगा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया के साथ उसके सम्बन्ध दिन पर दिन बदतर होते जा रहे हैं। दिक्कत ये है कि ऑस्ट्रेलिया काफी हद तक चीन पर आर्थिक रूप से निर्भर हो गया था, जिसके एवज में चीन अब उसे ब्लैकमेल कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया आज की तारीख़ में चीनी एक्सपोर्ट्स पर निर्भर है और इसीलिए उसकी सैन्य गतिविधियों को भी चीन अपने हिसाब से चलाना चाहता है।
भारत के साथ एक अच्छी बात ये है कि उसने कभी खुद को चीन पर पूरी तरह से निर्भर नहीं होने दिया। हाँ, चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा ज्यादा है, लेकिन हमारे अमेरिका व अन्य देशों के साथ भी बड़ा व्यापार होता है और ये लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसी तरह भारत अफ़्रीकी देशों और अन्य एशियाई देशों के साथ भी अपना व्यापार बढ़ा रहा है। इसीलिए, हम चीनी माल का बहिष्कार भी करते हैं तो हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।
अब ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और कहा है कि चीन को खुद पर शर्म आनी चाहिए। पीएम स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि ये उनके देश के राष्ट्रीय हितों का मसला है और इस बारे में उनका देश ही तय करेगा। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया अब चीन के दबाव के आगे नहीं झुकेगा। असल में चीन ने ऑस्ट्रेलिया को अपने दूतावास के माध्यम से दस्तावेजों का पिटारा सौंपा है, जिसमें 14 शिकायतों की सूची है।
इन्हीं शिकायतों में दावा किया गया है कि ऑस्ट्रेलिया विदेश के मामलों में कुछ ज्यादा ही हस्तक्षेप करता है। उदाहरण के रूप में चीनी निवेश को सुरक्षा हितों का हवाला देकर रोकने और हुवाई को 5G नेटवर्क में हिस्सेदारी से प्रतिबंधित करने को गिनाया गया है। चीन ने यहाँ तक धमकाया है कि अगर आप चीन को दुश्मन बनाओगे, तो चीन दुश्मन बन कर दिखाएगा। पीएम मॉरिसन ने कहा कि ये एक अनाधिकारिक दस्तावेज है, जो ऑस्ट्रेलिया की भूमि पर ऑस्ट्रेलिया के नियम-कानून चलने से नहीं रोक सकता।
Prime Minister Scott Morrison has demanded China apologise for publishing to Twitter a “falsified” and “repugnant” propaganda post of an Australian soldier holding a knife to the throat of a child.https://t.co/O9kxfCANEb
ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस के संक्रमण के शुरू होने को लेकर जाँच शुरू कर दी है और चीन की बेचैनी का कारण भी यही है। बीजिंग का आरोप है कि ऑस्ट्रेलिया ने इस मामले में ‘अमेरिका का प्रोपेगंडा’ फैलाना शुरू कर दिया है। अब अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया की पीठ थपथपाते हुए कहा कि उसने चीन की जासूसी पर रोक लगा दी है और अपनी सम्प्रभुता को बचाने के लिए कदम उठाए हैं, इसीलिए चीन बेचैन हो गया है।
चीन की दादागिरी इतनी बढ़ गई है कि अब उसके मंत्री अपने ऑस्ट्रेलियन समकक्षों के फोन भी नहीं उठाते। अब ऑस्ट्रेलिया ने जापान के साथ अपने रक्षा समझौतों को प्रगाढ़ करना शुरू कर दिया है, जिससे चीन अपने पड़ोसियों से भी घिर रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेना भी आपस में मिल कर करार कर रही है, जिससे चीन की पेशानी पर बल पड़ने लगे हैं। ऑस्ट्रेलिया में चीनी भी भारी संख्या में बस गए हैं, जो उसके लिए चिंता का विषय है।
ऑस्ट्रेलिया सख्त रुख ज़रूर अपना रहा है, लेकिन उसके उत्पादों पर चीन जो टैरिफ लगा रहा है, उससे उसे खासा नुकसान हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया की शराब पर उसने 200% तक का टैक्स लगा दिया है, जिससे ये इंडस्ट्री ही हाहाकार कर बैठी है। इंडस्ट्री शॉक के लिए तैयार थी लेकिन इतने बड़े टैरिफ ने उसकी कमर तोड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी शराब कम्पनियाँ जो ऑस्ट्रेलिया में निर्यात पर निर्भर थी, उनकी हालत बदतर हो गई है।
भारत में ऐसी स्थिति नहीं है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी कह चुके हैं कि भारत को तो चीन से आयात की ज़रूरत ही नहीं है। वाहन और कृषि जैसे कई अन्य सेक्टर में भी हम हर जगह पहले ही समाधान प्राप्त कर चुके हैं, इसीलिए यहाँ चीन से आयात को लेकर बात करने की ज़रूरत ही नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया की ज़रूरतें पूरा करने में लगा हुआ है। साथ ही चीन से आयात घटाया गया है और निर्यात बढ़ रहा है।
हाल ही में भारत सरकार ने चीन की 43 मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी लगा दी। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप पर बैन लगाया। इन ऐप्स को भारत की संप्रभुता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया गया था। पहली बार सरकार ने 29 जून को यही कारण बताते हुए 59 चीनी ऐप्स बैन कर दिए थे। इसके बाद 27 जुलाई को भी 47 ऐप बैन किए गए थे।
देव दीपावली के खास अवसर पर कल (नवंबर 30, 2020) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुँचे। उन्होंने उत्सव का पहला दीया प्रज्जवलित करके पूरे आयोजन का आनंद लिया। इस बीच उनकी एक वीडियो भी सामने आई। वीडियो में वह शिव स्त्रोत पर चल रहे लेजर लाइट का शो देख कर सिर हिलाते और उंगलियाँ थिरकाते दिखे। इस वीडियो को उनके ट्विटर हैंडल से शेयर करके इस पर ‘हर हर महादेव’ लिखा गया।
सोशल मीडिया पर कई लोग पीएम के इस अंदाज को लेख कर फूले नहीं समाए और उनकी तारीफ की। लोगों ने उन्हें हमारी संस्कृति का संरक्षक तक बताया। लेकिन, तभी वामपंथियों से ये खुशी देखी नहीं गई। उन्होंने वीडियो शेयर करके दोबारा इस पर अपना रोना शुरू कर दिया। प्रशांत भूषण ने तो उनके थिरकने का उपहास उड़ाते हुए उन्हें भारत को जलाने का जिम्मेदार बताया।
यह देखिए, किसानों की चिंता माननीय प्रधानमंत्री जी को कहां ले आई !
अब तो साफ साफ हो गया है कि इनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय शर्मिन्दगी दिवस के रूप में ही मनाना पडेगा! pic.twitter.com/XCRVvj9hO1
जिग्नेश मेवानी ने लिखा, “यह देखिए, किसानों की चिंता माननीय प्रधानमंत्री जी को कहाँ ले आई! अब तो साफ साफ हो गया है कि इनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय शर्मिन्दगी दिवस के रूप में ही मनाना पड़ेगा!”
यह देखिए, किसानों की चिंता माननीय प्रधानमंत्री जी को कहां ले आई !
अब तो साफ साफ हो गया है कि इनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय शर्मिन्दगी दिवस के रूप में ही मनाना पडेगा! pic.twitter.com/XCRVvj9hO1
एक यूजर वीडियो देख इतना गुस्सा हो जाता है कि वो इस समय की तुलना ब्रिटिश काल से करता है। वह कहता है,”तमिलनाडु जैसे राज्य से पैसा लूट कर यहाँ खर्च हो रहा है। ये तुम्हारे लिए इंडिया है। ये ब्रिटिश काल से भी बदतर है।”
While farmers are protesting for their livelihood our PM doesn’t shy away from sharing his entertainment session. ? Om nama shivay! https://t.co/Bp3G7ajUdS
याजिनी नाम की यूजर लिखती हैं, “जिस समय किसान अपने जीवन के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं, हमारे पीएम को ऐसी मनोरंजन वाली वीडियो शेयर करने में शर्म तक नहीं आ रही।”
गौरतलब है पीएम मोदी के ट्वीट पर लिबरल्स का ऐसा रिएक्शन देख कर कई यूजर इनका मजाक उड़ा रहे हैं। लोग इनके स्क्रीनशॉट शेयर कर-कर के लिख रहे हैं, “कहीं दीप जले, कहीं जाहिल।” कोई लिबरलों के ऐसे ट्वीट पर पलटवार कर रहा है और पूछ रहा है कि आखिर यूपीए शासन काल में क्या होता था।
कई ख़बरों में PTI के हवाले से चलाया गया कि केरल में सरकारी रेडियो व FM चैनलों को ‘प्रसार भारती’ बंद करने जा रही है। एक वामपंथी नेता ने बयान दिया, झूठे आरोप लगाए और उसे PTI ने हूबहू चला दिया। इस मामले में ‘प्रसार भारती’ का पक्ष ही नहीं जाना गया। बाद में पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ के CEO शशि शेखर ने खुद इस खबर का खंडन किया और PTI की इस खबर को फेक न्यूज़ करार दिया।
दरअसल, PTI की खबर में बताया गया कि CPI-M के सांसद बिनॉय विश्वम ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिख कर आरोप लगाया कि ‘प्रसार भारती’ सरकारी वित्त पर संचालित होने वाले TV और रेडियो चैनलों को बंद करने का प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कोई भी ऑनलाइन माध्यम उनकी जगह नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि ये ‘विशेषाधिकृत और अफवाह’ है कि कोई भी व्यक्ति कहीं से भी, कभी भी इंटरनेट सेवाओं का अच्छे से लाभ उठा सकता है।
उन्होंने इसे ‘अत्यधिक महत्वपूर्ण’ मुद्दा बताते हुए केंद्रीय मंत्री से त्वरित हस्तक्षेप की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘प्रसार भारती’ राष्ट्रीय और राज्य, दोनों ही स्तर पर सूचनाओं का प्रसारण करने वाले माध्यमों को बंद करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 769 TV चैनल तो 2017 में ही बंद किए जा चुके हैं। उनका कहना था कि केरल में AIR के 8 स्टेशन हैं और 10 सर्विसेज हैं।
उनका आरोप था कि सरकार ऐसा मानती है कि अब इन TV और रेडियो चैनलों का संचालन आर्थिक रूप से ठीक नहीं है। वो यहाँ तक कह बैठे कि नवंबर 18, 2020 को हुई ‘प्रसार भारती’ की एक बैठक में ही इस पर निर्णय लिया गया कि केरल के चैनलों में काफी मजबूती से कटौती की जाएगी। उन्होंने इन चैनलों के संचालन को मजबूत करने, उचित मात्रा में मानव संसाधन व अन्य संसाधनों को मुहैया कराने की भी अपील की।
हालाँकि, ‘प्रसार भारती’ की प्रतिक्रिया के बाद ये साफ़ हो गया कि ये आरोप नहीं बल्कि सिर्फ कोरे दावे थे, जिनका सच्चाई से कोई सरोकार था ही नहीं। ऊपर से PTI ने इसे ज्यों का त्यों चलाया। शशि शेखर ने स्पष्ट किया कि PTI द्वारा चलाई जा रही खबर कि ‘रेडियो चैनलों को बंद कर दिया जाएगा’ एक फेक न्यूज़ है। PTI ने बाद में दावा कर दिया कि उसने ऐसी कोई खबर चलाई ही नहीं है, बल्कि राज्यसभा सांसद के आरोपों को प्रकाशित किया है।
‘प्रसार भारती’ के CEO फेक न्यूज़ की खोली पोल
समाचार एजेंसी ने कहा कि उसने CEO शशि शेखर द्वारा इस खबर को नकारे जाने के बाद उनके स्पष्टीकरण को भी खबर में शामिल किया है। इसके बाद शशि शेखर ने नसीहत दी कि अच्छा होता अगर जल्दबाजी में खबर प्रकाशित करने से पहले PTI ने स्पष्टीकरण ले लिया होता। एक व्यक्ति ने ये भी दावा किया कि गुजरात में राजकोट, भुज और आहवा जैसे स्टेशनों से कार्यक्रम बंद हो जाएँगे और कर्मचारियों को अहमदाबाद भेज दिया जाएगा।
‘प्रसार भारती’ के CEO ने साफ़ किया कि ऐसा कोई निर्णय लिया ही नहीं गया है और ऐसे भ्रामक और गलत सूचनाओं को फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि न तो केरल और न ही कहीं और किसी भी रेडियो या TV स्टेशन को बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी तरह PTI ने जालंधर, भुज और गोरखपुर स्टेशनों को बंद किए जाने की अफवाह फैलाई थी, जबकि इन तीनों ही स्टेशनों से जमीनी, सैटेलाइट और इंटरनेट – इन तीनों ही माध्यमों से कार्यक्रम पेश कर रहे हैं।
Would have appreciated @pti_news seeking a clarification first before rushing to press. Thanks for the edits highlighting the clarification.
‘प्रसार भारती’ के CEO ने कहा कि AIR अकेला ब्रॉडकास्टर है जो FM, SW, डिजिटल, DRM और इंटरनेट – इन सभी माध्यमों से रेडियो स्टेशनों का संचालन करता है। साथ ही तमाम बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद देश के कठिन व दुर्गम इलाकों तक अपनी सेवाएँ पहुँचाता है। साथ ही कहा कि तकनीक का इस्तेमाल कर के इसे और सुदृढ़ बनाया जा रहा है। पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा रही है। इसके लिए डिजिटलाइजेशन और ऑटोमेशन का सहारा लिया जा रहा है।
देश के सबसे बड़े पत्रकारों के संगठन आईएफडब्लूजे (इण्डियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स) ने पीटीआई में होने वाले भाई-भतीजावाद, गलत वित्तीय प्रबंधन और निहित स्वार्थों का खुलासा करते हुए बताया था कि किस प्रकार पीटीआई हमेशा सत्ताधारी पार्टी, मुख्यतः कॉन्ग्रेस के मुखपत्र के रूप में काम करता आया है। PTI ने नई दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वेडोंग का एक इंटरव्यू लिया था, जिसमें उन्होंने भारत के विरोध में बातें कर के चीन के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया था।
भारत माता के वीर सपूतों से जब-जब चीनी सेना आँख मिलाने की गुश्ताखी करती है, तब-तब उसे अपनी आँखें भारत के सम्मान में झुकानी पड़ती हैं। इतिहास गवाह है कभी भी चीन ने भारत पर सामने से हमला नहीं किया। हमेशा वो कायराना अंदाज ही दिखाता है। 1962 के भारत-चीन युद्ध को देश के इतिहास का सबसे भीषण युद्ध माना जाता है। इस युद्ध में भारत ने कम संसाधनों के बावजूद चीन का सामना किया और कई मोर्चों पर उसके ‘दाँत खट्टे’ किए।
युद्ध में भारत ने अपने कई वीर सपूत भी खोए, इनमें से ही एक थे मेजर शैतान सिंह (Major Shaitan Singh)। शैतान सिंह 1962 में महज 37 वर्ष की आयु में देश के लिए वीरगति को प्राप्त हाे गए थे। मेजर शैतान सिंह का जन्म 1 दिसंबर 1924 काे राजस्थान के जोधपुर जिले में हुआ था।
शैतान सिंह के पराक्रम की वजह से जाना जाता है रेजांग ला दर्रे का युद्ध
37 वर्षीय शैतान सिंह के नेतृत्व में 13वीं कुमाऊँनी बटालियन की सी कंपनी ने 16000 फीट ऊँचाई पर स्थित रेजांग ला दर्रे में चीनी सैनिकों का सामना किया था। रेजांग ला दर्रे के युद्ध को मेजर शैतान सिंह के पराक्रम की वजह से जाना जाता है। 123 सैनिकों के साथ शैतान सिंह (कुल 124 भारतीय जाँबाज) अपनी पोस्ट पर सुरक्षा में तैनात थे। तभी करीब 3000 से अधिक चीनी सैनिकों ने शैतान सिंह और उनके साथियों की पोस्ट पर हमला कर दिया। भारत के हर जवान के पास केवल 400 राउंड गोलियाँ थीं और हथगोले भी बेहद कम थे, जबकि चीनी सैनिकों के पास अपार संसाधन थे।
जान की परवाह किए बिना अपने सैनिकों का हौसला बनाए रखा
चीन का तिब्बत पर हमला, फिर कब्जा और दलाई लामा के भारत में शरण लेने के बाद से भारत और चीन के रिश्तों में खटास आ चुकी थी। इसके बाद 1962 में भारत और चीन के बीच जंग छिड़ गई। इस दौरान लद्दाख में 13वीं कुमाऊँनी बटालियन की ‘सी’ कंपनी तैनात थी। मेजर शैतान सिंह की अगुवाई में 123 जवान मोर्चे पर तैनात थे। उस वक्त न तो जवानों के पास चीन का मुकाबला कर सकने लायक हथियार थे और न ही हड्डियों को गला देने वाली ठंड से बचने के लिए कपड़े उपलब्ध थे।
चीन ने 18 नवंबर 1962 की रात लद्दाख में भारतीय चौकी पर हमला बोल दिया था। चीनी सेना ने भारतीय जाँबाजों पर हमला करने के लिए सुबह 3:30 बजे का वक्त चुना। भारतीय जवानों ने रेजांग ला में चीनी सैनिकों का सामना किया। जब मेजर शैतान सिंह को आभास हुआ कि चीन की ओर से बड़ा हमला होने वाला है तो उन्होंने अपने अधिकारियों को रेडियो संदेश भेजा और मदद माँगी। उनसे कहा गया कि अभी किसी तरह की मदद पहुँचा पाना संभव नहीं है। साथ ही उनसे कहा गया कि सभी सैनिकों को लेकर पीछे हट जाओ।
मेजर ने सैनिकों को जान बचाने के लिए चौकी छोड़ने की दी पूरी छूट
मेजर शैतान सिंह ने पीछे नहीं हटने का फैसला लिया। युद्ध के दौरान मेजर शैतान सिंह ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने सैनिकों का हौसला बनाए रखा और गोलियों की बौछार के बीच एक पलटन से दूसरी पलटन जाकर सैनिकों का नेतृत्व किया। इसी दौरान उनको कई गोलियाँ लग गईं। उन्होंने अपने सैनिकों को बुलाकर कहा कि हम 124 हैं और दुश्मनों की संख्या हमसे बहुत ज्यादा हो सकती है। हमें कोई मदद भी नहीं मिल पाएगी।
हमारे पास मौजूद हथियार भी कम पड़ सकते हैं। हो सकता है कि इस लड़ाई में हम सब वीरगति को प्राप्त हो जाएँ। ऐसे में अगर कोई जान बचाना चाहता है तो वो पीछे हटने के लिए आजाद है, लेकिन मैं मरते दम तक मुकाबला करूँगा। कोई भी सैनिक पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद रणनीति तैयार की गई। शैतान सिंह ने कहा कि हमारे पास गोला-बारूद कम है और दुश्मनों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में कोशिश करें कि एक भी गोली बर्बाद न होने पाए। हर गोली निशाने पर लगे। साथ ही मारे जाने वाले हर दुश्मन से बंदूक छीन ली जाए।
चीन के सैनिकों ने चली चाल, याक के गले में लालटेन बाँधकर हाँका
रेजांग ला में तैनात मेजर शैतान सिंह के जाबाजों ने सुबह के धुँधलके में देखा कि चीन की तरफ से कुछ हलचल हो रही है। उनकी तरफ रोशनी के कुछ गोले आ रहे थे। मेजर शैतान सिंह ने गोली चलाने का आदेश दे दिया। थोड़ी देर बाद पता चला कि चीन के सैनिकों ने याक के गले में लालटेन लटका कर उन्हें भारतीय चौकी की ओर हाँक दिया था।
साभार: Veer Gatha: Stories of Param Vir Chakra Awardees
दरअसल, चीन के सैनिकों को भारत के पास मौजूद हथियारों और गोला-बारूद की जानकारी थी। इसलिए उन्होंने भारतीय सैनिकों की गोलियाँ खत्म कराने के लिए ये चाल चली थी। इसके बाद चीन के सैनिकों ने भारतीय चौकी की ओर बढ़ना शुरू कर दिया। चीनी सेना ये मान चुकी थी कि भारतीय सेना ने चौकी छोड़ दी है। लेकिन वह ये नहीं जानते थे कि उसका सामना जाँबाज शैतान सिंह और उनके वीरों से है। सुबह के करीब 5 बजे भारतीय सैनिकों ने चीन की सेना पर गोली बरसानी शुरू कर दी। कुछ ही देर में दुश्मन की लाशें गिरनी शुरू हो गई थीं।
दोनों हाथ घायल होने के बाद एक पैर से मशीनगन चलाते रहे मेजर शैतान सिंह
चीन के कुछ सैनिक मारे जाने पर मेजर शैतान सिंह ने कहा कि अभी युद्ध खत्म नहीं हुआ है। इसके बाद चीन ने दोबारा हमला कर दिया। तब तक भारतीय सैनिकों के पास गोलियाँ लगभग खत्म हो गई थीं। उस वक्त 5 से 7 गोलियाँ बची थीं। चीन की सेना ने रेजांग ला पर मोर्टार और रॉकेट से गोलाबारी शुरू कर दी। तब रेजांग ला पर कोई बंकर नहीं था और दुश्मन रॉकेट पर रॉकेट दागे जा रहा था।
इस बीच शैतान सिंह के हाथ में गोली लग चुकी थी। मेजर खून से लथपथ हो चुके थे। दो सैनिक घायल मेजर शैतान सिंह को एक बड़ी बर्फीली चट्टान के पीछे ले गए। उन्होंने मेडिकल हेल्प लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने सैनिकों को आदेश दिया कि एक मशीनगन लेकर आओ और गन के ट्रिगर को रस्सी से मेरे एक पैर से बाँध दो। इसके बाद उन्होंने दुश्मनों पर एक पैर से फायरिंग करनी शुरू कर दी।
चीन ने स्वीकारा, 1962 के युद्ध में हुआ था सबसे ज्यादा नुकसान
मेजर शैतान सिंह जानते थे कि 3000 चीनी सैनिकों के सामने 124 भारतीय हार जाएँगे। वह ये भी जानते थे कि इस जंग में सभी जवान वीरगति को प्राप्त हो जाएँगे और किसी को कभी पता नहीं चल पाएगा कि रेजांग ला में आखिर हुआ क्या था। उन्होंने दो घायल सैनिकों रामचंद्र और निहाल सिंह से कहा कि वे चौकी छोड़ कर चले जाएँ। हालाँकि, निहाल सिंह को चीनियों ने 4 अन्य गंभीर भारतीय सैनिकों के साथ बंदी बना लिया था। चीन से हुए इस युद्ध में भारत के 124 जाँबाजों ने 1,300 चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। भारत की तरफ से 13वीं कुमाऊँ की इस पलटन में केवल 10 जवान जिंदा बचे थे। इनमें भी लगभग सब गंभीर रूप से घायल थे।
कहते हैं कि बुरी तरह से घायल होने के बाद भी मेजर शैतान सिंह अपने पैरों से मशीनगन चला रहे थे। वो नजारा देख चीनी सेना पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी थी। उसके अगले दिन का सूरज जीत तो लेकर आया किन्तु भारत माँ का ये वीर सपूत तब तक उनके आँचल में गहरी नींद सो गया। चीन ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में माना कि उसे 1962 के युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था।
बर्फ पिघलने पर तीन महीने बाद मिला मेजर शैतान सिंह का शव
बहुत खोजने के बाद भी मेजर शैतान सिंह का शव कहीं नहीं मिला। बाद में जब रेजांग ला की बर्फ पिघली तो रेड क्रॉस सोसायटी और सेना ने उन्हें खोजना शुरू किया तो एक गड़रिए को बड़ी सी चट्टान में वर्दी में कुछ नजर आया। उसने इसकी सूचना अधिकारियों को दी। गड़रिए की सूचना के बाद जब सेना वहाँ पहुँची तो उन्होंने देखा कि मेजर शैतान सिंह अपनी बंदूक थामे बैठे थे। वो ऐसे लग रहे थे, जैसे अभी भी युद्ध के लिए तैयार हैं। मेजर शैतान सिंह का जोधपुर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
महज 37 साल की उम्र में देश के लिए बलिदान होने वाले मेजर शैतान सिंह को देश के सबसे बड़े वीरता पुरस्कार ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया। यहाँ बटालियन के एक और सैनिक का जिक्र जरूरी है। जवान सिंहराम ने बिना किसी हथियार और गोलियों के चीनी सैनिकों को पकड़-पकड़ कर मारना शुरू कर दिया था। मल्ल युद्ध में माहिर सिंहराम ने 10 चीनी सैनिक को बाल से पकड़ा और पहाड़ी से टकरा-टकरा कर मौत के घाट उतार दिया था।
आज दुनिया रेजांग ला पास को अहीर धाम के नाम से भी जानते हैं। दरअसल 13 कुमाऊँ के 124 जाँबाज दक्षिण हरियाणा के उस क्षेत्र से आते थे, जिसे अहीरवाल के तौर पर जानते हैं। सभी 124 जाँबाज गुड़गाँव, रेवाड़ी, नरनौल और महेंद्रगढ़ जिलों से आते थे। मेजर शैतान सिंह रेवाड़ी के रहने वाले थे। रेजांग ला युद्ध में शहीद सैनिकों की याद में रेवाड़ी और गुड़गाँव में याद में स्मारक बनाए गए हैं। रेवाड़ी में हर साल रेजांगला शौर्य दिवस धूमधाम से मनाया जाता है और वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
भारतीय सेना अब बेहद ताकतवार हो चुकी है
आज भी भारत को बार-बार गीदड़ भभकी देने वाला चीन अपनी उस पराजय को कैसे भूल जाता है। उस समय भारत के पास न तो आधुनिक हथियार थे और न ही तकनीक का सहारा। अगर कुछ था तो सिर्फ वीर सपूतों की वीरता। डँटकर भारत माता के कलेजे के टुकड़ों ने उनकी आन-बान और शान को रत्ती भर भी खरोंच नहीं लगने दिया। 58 साल बाद भारतीय सेना में बहुत से बदलाव हो चुके हैं। सेना का आकार बढ़ चुका है। राफेल जैसे आधुनिक फाइटर जेट बेड़े में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में चीन की एक गलती उसका हाल बुरा कर सकती है।
कुछ लोगों ने भारत-चीन तनाव के बीच देश को डराने का ठेका ले रखा है। ये वो लोग हैं, जो चीन का गुणगान करते हुए उसे अजेय बताते हैं और भारत के बारे में ऐसे बात करते हैं जैसे हमारी सेना की शक्ति कुछ है ही नहीं। ये वही लोग हैं, जो चाहते हैं कि आप 1962 भारत-चीन युद्ध में लद्दाख के रेजांग ला दर्रा के युद्ध को भूल जाएँ। वो चाहते हैं कि आप भारतीय सेना के गौरवमयी अतीत को भूल कर डर के साए में जिएँ।
रेजांग ला युद्ध उस लड़ाई की गाथा है, जिसके बारे में कई लोगों ने तो ये मानने से भी इनकार कर दिया था कि हमारी सेना ने इतनी बड़ी संख्या में चीनियों को मार गिराया होगा। इसीलिए, जब भी कोई आपके सामने चीन को अजेय बताए, तो उसे रेजांग ला याद दिलाएँ। जब कोई चीनी सैनिकों का डर दिखाए तो उसे मेजर शैतान सिंह और कुमाऊँ रेजिमेंट द्वारा लद्दाख को बचाने के लिए किए गए युद्ध की याद दिलाएँ। उन्हें बताएँ कि जब भारत-चीन युद्ध में हमारी हार की बात होती है, तो इस मोर्चे पर चीन कितनी बुरी तरह परास्त हुआ था, ये भी बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए।