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‘तुम सभी मारे जाओगे.. अल्लाहु अकबर’: फ्रांस के जिस स्कूल में पढ़ाते थे सैमुअल पैटी, उसे धमकी

फ्रांस में शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या को लगभग एक महीने हो चुके हैं और वहाँ हुए विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला भी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। इसी बीच उस स्कूल को फिर से धमकी मिली है, जहाँ सैमुअल पैटी पढ़ाया करते थे। ‘Sainte-Anne’ स्कूल के शिक्षकों को को फिर से धमकी दी गई है। इस्लामी कट्टरवादियों ने फिर से धमकाया है और उन सभी को जान से मार डालने की धमकी दी है।

फ्रांस के बौर्डिओक्स के पास बॉस्केट में स्थित इस स्कूल में एक बार फिर से भय का वातावरण व्याप्त हो गया है। रविवार (नवंबर 15, 2020) को स्कूल में लिखा हुआ मिला, “तुम सभी मारे जाओगे। स.. सैमुअल पैटी.. अल्लाहु अकबर”। इतना ही नहीं, दो अन्य स्कूलों में भी दीवारों पर इस तरह की धमकियाँ दी गई हैं। इस मामले में अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन पुलिस जाँच में आतंक समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।

हाल ही में फ्रांस के ‘Savigny-le-Temple (Seine-et-Marne)’ क्षेत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े एक कोर्स की पढ़ाई के दौरान एक छात्र भड़क गया और उसने शिक्षक को धमकी दे डाली कि वो उसका वही हाल कर देगा, जो सैमुअल पैटी का हुआ था। सैमुअल की एक छात्र ने सिर्फ इसीलिए हत्या कर दी थी, क्योंकि उन्होंने कक्षा में पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाया था, जो फ्रेंच पत्रिका ‘शार्ली हेब्दो’ में प्रकाशित हुआ था।

फ्रांस में शिक्षक पैटी की हत्या के बाद से ही सरकार इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ एक्शन में है। राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी कहा था कि आज इस्लाम के नाम पर हिंसा और हत्याओं को बढ़ावा दिया जा रहा है और ऐसे लोग हैं, जो इस्लाम के नाम पर हिंसक अभियान चलाते हुए हत्याओं और नरसंहार को जायज ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि आतंकवाद इस्लाम की भी समस्या है, क्योंकि इसके 80% पीड़ित मुस्लिम ही हैं और वो इसके पहले पीड़ित हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया था कि इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ जंग जारी रहेगी।

सेक्युलर भारत से लेकर सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक तक: टीना डाबी और अतहर की शादी पर कुछ यूँ कूदा था लिबरल गिरोह

UPSC 2015 बैच की टॉपर टीना डाबी और उनके पति IAS अतहर खान ने तलाक के लिए याचिका दायर की है। आज कई लोग इस पर टिप्पणी से ये कहते हुए मना कर रहे कि ये तो उनका व्यक्तिगत मामला है। लेकिन, इन्हीं लोगों ने इस शादी के मुद्दों को सार्वजनिक बनाया था और ज्ञान की बरसात कर दी थी। 2018 में ये शादी हुई थी। अतहर खान भी 2015 में UPSC परीक्षा में द्वितीय रहे थे।

कहा जाता है कि ट्रेनिंग के दौरान ही दोनों के बीच नजदीकियाँ बढ़ीं और बाद में उन्होंने शादी कर ली। कई राजनेताओं और पत्रकारों ने इस शादी को लेकर खूब डंका बजाय और इसे ‘सेक्युलर इंडिया की पहचान’ से लेकर सांप्रदायिक एकता तक का प्रतीक भी बता दिया। हालाँकि, टीना द्वारा अपने नाम से खान सरनेम हटाना और अतहर द्वारा उन्हें इंस्टाग्राम पर अनफॉलो करने के बाद से ही पता चल गया था कि दोनों के बीच काफी कुछ सही नहीं चल रहा।

दोनों की शादी को 2018 में कई नेताओं और पत्रकारों सहित लिबरल गिरोह के लोगों ने सेलिब्रेट किया था। सोशल मीडिया पर उन्होंने इसे एक उदाहरण बताते हुए ख़ुशी जताई थी। किसी की शादी का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए, लेकिन इन लोगों ने इसे ‘सांप्रदायिक सद्भाव’ की मिसाल के रूप में प्रस्तुत कर अपने एजेंडे के लिए इस मौके का इस्तेमाल किया। इसमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रहे राहुल गाँधी सबसे आगे थे।

राहुल गाँधी ने दोनों को बधाई देते हुए यहाँ तक कामना की थी कि ‘असहिष्णुता और सांप्रदायिक घृणा के इस बढ़ते दौर में’ इन दोनों का प्यार और परवान चढ़े और सभी भारतीयों के लिए प्रेरणा बने। पत्रकार बरखा दत्त भी ज्ञान बाँचने में पीछे नहीं रहीं और उन्होंने दावा किया कि इन दोनों से आशाएँ मिलती हैं, दोनों का प्यार और उनकी उपलब्धियाँ भारत की पहचान हैं। वामपंथी कविता कृष्णन ने कई स्क्रीनशॉट्स शेयर कर उन लोगों की आलोचना की, जो इस शादी का विरोध कर रहे थे।

कविता कृष्णन ने लिखा था कि इन दोनों की शादी को लेकर घृणा फैलाई जा रही है और इसे ‘लव जिहाद’ बताया जा रहा है। उन्होंने तपन घोष को इस शादी का विरोध करने के लिए फासिस्ट बताया और कहा कि वो भी कल को ‘अजय सिंह बिष्ट’ (योगी आदित्यनाथ) की तरह मुख्यमंत्री बन सकते हैं क्योंकि भाजपा राज में ‘घृणा फैलती है’। ‘इंडिया टुडे’ जैसे मीडिया संस्थानों ने भी इस शादी के महिमामंडन में कोई कसर नहीं छोड़ी।

‘जनता का रिपोर्टर’ ने तो एक के बाद एक लेख शेयर कर के टीना डाबी और अतहर की शादी का महिमामंडन किया। साथ ही ताजमहल के पास इन दोनों की तस्वीर को शेयर करते हुए बताया कि ये कैसे एक-दूसरे से अपने प्यार का इजहार कर रहे हैं। साथ ही एक अन्य तस्वीर में इसे ‘सीरियस कपल गोल्स’ बताया। शादी और तलाक व्यक्तिगत मामले हैं, लेकिन एक विशेष एजेंडे के तहत इन दोनों की शादी को लेकर लिबरल गिरोह ने ज्ञान बाँटा।

अभी कुछ दिन पहले टीना के फैंस ने नोटिस किया कि उन्होंने अपने अकाउंट से न केवल ‘कश्मीरी बहू’ का टैग हटाया है, बल्कि उसके साथ-साथ अपने पति को भी ट्विटर पर अनफॉलो कर दिया है। इंस्टास्टोरी पर भी जय श्रीराम लिखते हुए हनुमान चालीसा की चौपाई- “सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहु को डरना। जय श्रीराम” लिखी थी। तलाक की अर्जी डालने की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे ‘लव जिहाद’ से जोड़ा और यह कदम उठाने के लिए टीना की सराहना की। 

बोले गिरिराज- बिहार लव जिहाद पर बनाए सख्त कानून, ईसाई लड़कियों पर भी हो रहा अत्याचार

देश की कई भाजपा शासित राज्य सरकारों ने लव जिहाद के विरुद्ध सख्त क़ानून बनाने का ऐलान किया है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री और फायरब्रांड भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने लव जिहाद के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बिहार में लव जिहाद के मुद्दे पर क़ानून बनाने की बात का समर्थन किया है। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय से यह मुद्दा देश के कई प्रदेशों में बड़ी समस्या बन कर उभरा है। 

शुक्रवार (20 नवंबर 2020) को बिहार की राजधानी पटना में मीडियाकर्मियों ने बात करते हुए गिरिराज सिंह लव जिहाद पर क़ानून बनाए जाने को लेकर बयान दिया। केंद्रीय मंत्री ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अनुरोध किया कि सरकार के लिए समझना अनिवार्य हो चुका है, लव जिहाद और जनसंख्या नियंत्रण इन दोनों विषयों का साम्प्रदायिकता से कोई सरोकार नहीं है। 

उन्होंने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा, “लव जिहाद देश के सभी राज्यों में केवल हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य गैर मुस्लिम समुदायों में भी परेशानी के रूप में देखा जाना चाहिए। केरल में ईसाइयों की आबादी अधिक है और वहाँ भी लोगों ने लव जिहाद के मुद्दे को लेकर चिंता जताई है।” 

दरअसल इस साल के जनवरी महीने में केरल की साइरो-मालाबार चर्च ने दावा किया था कि पिछले 3 सालों में 12 ईसाई महिलाओं को लव जिहाद में फँसाया गया और इसके बाद उनसे इस्लाम कबूल करवा लिया गया। इतना ही नहीं उन महिलाओं को सीरिया भी भेज दिया गया था। चर्च ने इस पूरे घटनाक्रम को इस्लामिक स्टेट (IS) का बड़ा षड्यंत्र बताया था, जिसके तहत वह केरल का धार्मिक और सामजिक सौहार्द बिगाड़ना चाह रहे थे। 

गिरिराज सिंह ने इस घटना के दौरान लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि लव जिहाद के नाम पर ईसाई लड़कियों के साथ अत्याचार किया जा रहा है और उन्हें जान से मारा जा रहा है। अंत में भाजपा नेता ने कहा कि बिहार में लव जिहाद के विरुद्ध क़ानून बनाने से ही हालात बेहतर होंगे, तभी इस समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। राज्य सरकार को यह समझना होगा कि लव जिहाद को रोकने के लिए क़ानून निर्माण का सीधा सरोकार सामाजिक समरसता से है, न कि साम्प्रदायिकता से। 

दरअसल हाल फ़िलहाल में देश के कई भाजपा शासित राज्यों ने लव जिहाद को रोकने के लिए सख्त क़ानून बनाने का ऐलान किया है। इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश की राज्य सरकारें शामिल हैं।      

अंतरधार्मिक, अंतरजातीय विवाह पर उत्तराखंड में मिलेंगे ₹50000, ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने के आरोप के बाद सरकार ने दी सफाई

उत्तराखंड सरकार के एक आदेश पर विवाद पैदा हो गया है। टिहरी गढ़वाल के जिला समाज कल्याण पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित एक आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय एकता की भावना को जीवित रखने और सामाजिक एकता को बनाए रखने के लिए अंतरजातीय तथा अंतरधार्मिक विवाह काफी सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इससे भिन्न-भिन्न परिवारों में एकता की भावना सुदृढ़ होने की बात भी कही गई है। लोगों ने इसे ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देना करार दिया है।

समाज कल्याण विभाग ने ऐलान किया कि इस प्रकार के विवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से उत्तराखंड के अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाहित दम्पति को प्रोत्साहन स्वरूप 50,000 रुपए प्रदान किए जाते हैं। अंतरधार्मिक विवाह के बारे में बताया गया है कि ये संघ या ब्यूरो द्वारा मान्यता प्राप्त मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर या अन्य देवस्थान में संपन्न हुआ हो। इसके लिए आवेदन-पत्र भी निःशुल्क मिलता है।

ऐसे विवाह के रजिस्ट्रेशन के बाद अगले एक वर्ष तक आवेदन किया जा सकता है। इस पर ‘सुदर्शन न्यूज़ टीवी’ के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने पूछा कि ‘लव जिहाद’ करने वाले को सजा की जगह 50,000 का सरकारी इनाम दिया जा रहा है? उन्होंने पूछा कि देवभूमि उत्तराखंड में ये उल्टी गंगा क्यों बह रही है? उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से पूछा कि जब सारे राज्य ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध कानून बना रहे तो उत्तराखंड में इसे बढ़ावा क्यों?

उन्होंने आशंका जताई कि कोई ‘UPSC जिहाद’ वाला अधिकारी ही ऐसा करा रहा है। बता दें कि उनके शो ‘UPSC जिहाद’ को लेकर काफी विवाद हुआ और अभी भी यह मामला कोर्ट से लेकर सरकारी दफ्तर तक लटका पड़ा है। इस आदेश के बाद एक व्यक्ति ने उत्तराखंड सरकार के विभिन्न हैंडलों को ट्विटर पर टैग कर के पूछा कि क्या ये सच है? साथ ही ऐसा आदेश जारी करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की भी माँग की।

इस पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार आलोक भट्ट ने बताया कि सम्बंधित विभाग के डायरेक्टर का कहना है कि ये आदेश 1976 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार के एक नोटिफिकेशन के आधार पर जारी किया गया है। बता दें कि तब उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का ही भाग था और अलग राज्य नहीं बना था। भट्ट ने बताया कि इस मामले में अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है और सही कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, एक खबर के अनुसार, अंतर्जातीय विवाह करने वाले उत्तराखंड सरकार को इस विषय में जानकारी ही नहीं देते हैं। मई 2019 की खबर में बताया गया था कि तब तक मात्र 83 लोगों ने ही इस योजना का लाभ उठाया था। इस मामले में दम्पति का सत्यापन विधायक या सांसद भी कर सकता है। बताया गया था कि विभाग को आवेदन भी कम ही मिल रहे हैं। इस योजना के तहत दम्पति को ढाई लाख रुपए मिलते हैं, जिनमें से 50 हजार राज्य सरकार देती है। जबकि लोगों का कहना है कि उत्तराखंड के प्रशासन का ये आदेश ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देता है।

इधर उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के मामलों से निपटने के लिए जल्द ही सख्त कानून आ सकता है। वैसे भी इस तरह के मामलों को लेकर प्रदेश की योगी सरकार का रूख हमेश से कड़ा रहा है। अब सख्त कानून बनाने के लिए उप्र के गृह विभाग ने न्याय व विधि विभाग को प्रस्ताव भेजा है। विधि विभाग प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। इसमें 7 साल तक की सजा का प्रावधान हो सकता है। इस बात की जाँच की जाएगी कि शादी धोखे से तो नहीं हुई है।

‘डरे हुए’ हामिद अंसारी ने राष्ट्रवाद को बताया बीमारी, कहा- कोरोना से पहले ही देश ‘दो महामारी’ का हो चुका है शिकार


उपराष्ट्रपति पद से विदा होने के बाद से हामिद अंसारी ‘बेहद डरे हुए’ हैं। वे पहले ही कह चुके हैं कि भारत के गणतंत्र की संस्थाएँ बहुत खतरे में हैं। एक बार फिर उनका यह ‘डर’ सामने आया है। अब उन्होंने राष्ट्रवाद के साथ आक्रामकता को जोड़ा है और इसे बीमारी बताया है। वे पूर्व में राष्ट्रवाद को ‘जहर’ भी बता चुके हैं।

शुक्रवार (20 नवंबर 2020) को अंसारी ने कहा कि देश कोरोना से पहले ही दो महामारी का शिकार हो चुका है। ये हैं- धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद। बकौल अंसारी, इनके मुकाबले देशप्रेम अधिक सकारात्मक अवधारणा है, क्योंकि यह सैन्य और सांस्कृतिक रूप से रक्षात्मक है।

वे कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर की किताब ‘The Battle of Belonging’ के आभासी विमोचन के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने देश के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश ऐसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विचारधाराओं की वजह से ख़तरे में नज़र आ रहा है जो उसे ‘हम और वह’ की श्रेणी में विभाजित करने का प्रयास कर रही हैं। 

महामारी को केंद्र में रखते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, “कोरोना से पहले ही हमारा देश दो बड़ी महामारियों को झेल चुका है, धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद। धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद की तुलना में देशभक्ति कहीं अधिक सकारात्मक अवधारणा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि यह सांस्कृतिक और सैन्य दृष्टिकोण से रक्षात्मक है।” 

अंसारी ने कहा, “4 वर्षों की छोटी अवधि में भारत ने उदार राष्ट्रवाद के बुनियादी दृष्टिकोण से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीतिक छवि निर्मित करने तक एक लंबी यात्रा तय की है, जो सार्वजनिक क्षेत्र में पूर्णतः स्थापित हो चुकी है।” उन्होंने कहा कि अभी तक हमारे व्यावहारिक मूल्य एक बहुआयामी समाज की अस्तित्वगत वास्तविकता, लोकतांत्रिक राजनीति और धर्मनिरपेक्ष राज्य की तरह प्रस्तुत किए जाते थे। इन सारी बातों को स्वतंत्रता आंदोलन तक स्वीकार किया जाता था, यह बातें संविधान के समानांतर थीं और संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में निहित थीं। भारतीय समाज का बहुआयामी पहलू इसमें मौजूद 4635 समुदायों से ही स्पष्ट होता है। 

महामारी को उल्लेख करते हुए हामिद अंसारी ने कहा, “कोविड 19 एक भयावह महामारी है लेकिन इसके पहले हमारा समाज दो महामारियों का शिकार हो चुका है, धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद। धार्मिक अवधारणा को धर्म के आधार पर किए जाने वाले ढोंग के रूप में परिभाषित किया जा रहा है और आक्रामक राष्ट्रवाद के बारे में पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका है। यह विचारधारा के लिहाज़ से जहर जैसा है जो किसी संकोच के बिना लोगों के व्यक्तिगत अधिकारों पर अतिक्रमण करता है और अधिकारों को क्षीण करता है।”

पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि रिकॉर्ड्स बताते हैं कि यह कई बार नफ़रत का रूप ले लेता है और एक ऐसी घुट्टी के रूप में काम करता है जो प्रतिशोध के लिए उकसाता है। तमाम लोगों ने इसके उदाहरण कहीं और नहीं बल्कि अपनी ही ज़मीन पर देखे होंगे। देशभक्ति स्वभाव के लिहाज़ से बेहद सकारात्मक अवधारणा है चाहे वह सांस्कृतिक रूप में हो या सैन्य रूप में। यह आम लोगों की भावनाओं को सही दिशा देती है।

आज कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता घर से भी नहीं निकल सकते: कपिल सिब्बल ने नेतृत्व पर फिर उठाए सवाल

पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने एक बार फिर से कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी में अपनी आवाज़ उठाने के लिए कोई मंच ही नहीं है, क्योंकि वो कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने अपने उस बयान से सहमति जताई, जिसमें उनका कहना था कि देश में कॉन्ग्रेस अब भाजपा के सामने एक प्रभावशाली विपक्ष नहीं है।

‘इंडिया टुडे’ के राजदीप सरदेसाई के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आप एक प्रभावशाली विकल्प कैसे बन सकते हैं, जब आपके पास पिछले 18 महीनों से कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष तक नहीं है और पार्टी में इसे लेकर कोई विचार-विमर्श ही नहीं हुआ है कि चुनाव में हार क्यों हो रही है। उन्होंने साफ़ किया कि वो गाँधी परिवार के खिलाफ बगावत नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अधीर रंजन चौधरी की भी आलोचना की, जिन्होंने उन्हें नसीहत दी थी।

उन्होंने लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को सलाह दी कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आ रहे हैं और उन्हें ये साबित करने के लिए मेहनत करना चाहिए कि राज्य में कॉन्ग्रेस एक ताकत है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टार प्रचारकों की सूची में भी उन्हें शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि आज कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता घर से भी नहीं निकल सकते, क्योंकि उनसे पूछा जाता है कि आपकी पार्टी को क्या हो रहा है?

उन्होंने पूछा कि आम कार्यकर्ताओं की भावनाओं का क्या? उन्होंने कहा कि उनकी भावनाओं को तो ठेस पहुँची ही है, साथ में कॉन्ग्रेस के लाखों कार्यकर्ताओं के साथ भी यही हुआ है। उन्होंने कहा कि वो जानते हैं कि एक दिन में बदलाव नहीं हो सकता, लेकिन हम 2014 हारे और 2019 भी हारे। उन्होंने दावा किया कि वो किसी को चुनौती नहीं दे रहे, लेकिन हमें बाहर निकल कर जनता को कॉन्ग्रेस की विचारधारा के बारे में बताना होगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वो कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में बदलाव की माँग कर रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि जब राहुल गाँधी ही कह रहे हैं कि वो पार्टी का अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहते, तो फिर नेतृत्व में बदलाव की माँग करने के आरोप उन पर कैसे लगाए जा सकते हैं? उन्होंने कहा कि लोग अभी भी राहुल गाँधी की ओर देख रहे हैं, क्योंकि ये सिर्फ पार्टी ही नहीं, बल्कि देश को भी ‘चंद लोगों से’ बचाना है, लोकतंत्र को बचाना है।

कपिल सिब्बल ने कॉन्ग्रेस नेतृत्व पर फिर खड़े किए सवाल (वीडियो साभार: इंडिया टुडे)

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी वफादारी किसी खास व्यक्ति के प्रति नहीं, बल्कि देश के लिए है। उन्होंने ऐलान किया कि वो तब तक सवाल उठाना बंद नहीं करेंगे, जब तक विचार-विमर्श और संवाद शुरू नहीं हो जाता। उन्होंने अधीर रंजन चौधरी को सलाह दी कि वो उनकी चिंता छोड़ कर पश्चिम बंगाल की चिंता करें। उन्होंने अशोक गहलोत को भी सलाह दी कि वो कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं की चिंता करें।

उधर पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने भी कहा कि कॉन्ग्रेस के नीतिगत ढाँचे की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी के प्रदर्शन में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट ही आई है। उन्होंने सलाह दी कि कॉन्ग्रेस को इतना साहसी बनना होगा कि गिरावट के उन कारणों को पहचाने और उन पर काम करे। चिदंबरम ने कहा कि उपचुनाव इस बात प्रमाण हैं कि कॉन्ग्रेस की संगठनात्मक दृष्टिकोण से कोई पकड़ नहीं रह गई है। इतना ही नहीं जिन राज्यों में उपचुनाव हुए हैं, उनमें कॉन्ग्रेस कमज़ोर ही हुई है। 

इंडिया टुडे से लेकर द वायर तक, सबके झूठ का ED ने किया पर्दाफाश, कहा- PFI और भीम आर्मी के लिंक की हो रही पड़ताल

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब मीडिया के गढ़े झूठों का भी पर्दाफाश करना शुरू कर दिया है। हाल में न्यूज 18 ने एक खबर चलाई थी कि केंद्रीय जाँच एजेंसी ने दावा किया है कि कट्टरपंथी समूह पीएफआई और भीम आर्मी के बीच कोई लिंक नहीं है। अब इसी खबर को शेयर करते हुए ईडी ने साफ किया है कि यह खबर सरासर झूठ है।

ईडी ने अपने ट्विटर पर खबर के संबंध में लिखा, “ये खबर गलत है। वास्तविकता में ईडी, पीएफआई अधिकारियों से बरामद विश्वनीय सबूतों के आधार पीएफआई और भीम आर्मी के फाइनेंशिल लिंक्स की पड़ताल कर कर रही है।”

न्यूज 18 की रिपोर्ट, जिसे अब डिलीट किया जा चुका है, में दावा किया गया था, “प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा है कि चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली भीम आर्मी और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के बीच कोई संबंध नहीं है। एजेंसी ने उन दावों को भी खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि हाथरस मामले के जरिए हिंसा भड़काने के लिए कथित विदेशी फंडिंग के 100 करोड़ रुपए बरामद किए गए।”

गौरतलब है कि केवल न्यूज 18 ने ही नहीं बल्कि कई मीडिया चैनल ने यह झूठा दावा अपनी रिपोर्ट्स में किया था। इस सूची में एक नाम इंडिया टुडे का भी है। इंडिया टुडे ने अपनी 9 अक्टूबर की रिपोर्ट में कहा था कि प्रवर्तन निदेशायलय को भीम आर्मी और पीएफआई के बीच लिंक नहीं मिले हैं, जिन्हें सीएए विरोधी आंदोलनों में हिंसा भड़काने वाला कहा जा रहा था।

इस रिपोर्ट में भी यह लिखा था कि ईडी ने 100 करोड़ बरामद होने वाले दावों को झूठा कहा है। उनका यह बयान यूपी डीजीपी ब्रिज लाल के दावों के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भीम आर्मी समेत कई बाहरी हाथरस मृतका के परिवार को बरगलाना चाहते हैं।

इसके बाद प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर ने भी इस मामले में जमकर झूठ फैलाया। उन्होंने भी पीएफआई और भीम आर्मी के लिंक को खारिज किया।

बता दें कि इस संबंध में रिपोर्ट्स अक्टूबर माह की शुरुआत में आई थी और कई संस्थानों ने इसे कवर किया था, लेकिन ईडी के खुलासे के बाद भी हमारे खबर लिखने तक सिर्फ न्यूज 18 ने इसे डिलीट किया है।

हाथरस केस

पिछले दिनों यूपी के हाथरस में 14 सितंबर को 19 साल की युवती के साथ हुई बर्बरता के कारण उसने 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपना दम तोड़ा था। मृतका के घरवालों ने उसके साथ बलात्कार का आरोप लगाया था। हालाँकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस एंगल को खारिज किया गया था। वहीं इस पूरे मामले को राजनीतिक दृष्टि से भी खूब भुनाया गया था।

मामले में जाँच के दौरान पीएफआई और नक्सल कनेक्शन सामने आए थे। पुलिस ने जाँच में पाया था कि जो महिला लड़की की भाभी बनकर मीडिया से बात कर रही थी, उसे वास्तविकता में कैमरे में बोलने के लिए पहले से तैयार किया गया था। इसके बाद इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग उठी थी और राज्य सरकार के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे केस को सीबीआई को सौंप दिया था।

कर्नाटक: होयसल काल की महाकाली की मूर्ति को किया खंडित

कर्नाटक के हसनपुर जिले में स्थित डोड्डागडावल्ली मंदिर (Doddagaddavalli Temple) में शुक्रवार (नवंबर 20, 2020) को होयसल काल (Hoysala-era) में बनी महाकाली की मूर्ति खंडित कर दी गई। इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में होयसल वंश ने करवाया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इसकी देखरेख करता है।  

कथित तौर पर, यह मामला शुक्रवार की सुबह संज्ञान में आया जब स्थानीय लोग मंदिर पहुँचे और उन्होंने महाकाली की प्रतिमा टूटी पाई। आशंका जताई जा रही है कि उपद्रवी मंदिर में छिपे खजाने की तलाश में आए होंगे और सुरक्षा की कमी का फायदा उठाते हुए मूर्ति तोड़ डाली।

बेंगलुरु सर्कल के पुरातत्वविद अधीक्षक (Superintending Archaeologist of Bengaluru Circle) शिवकांत बाजपेई ने द हिंदू को बताया, “मैंने हसन एसपी आर श्रीनिवास गोड़ा (R. Srinivasa Gowda) से घटना के संबंध में बात की है और जिसने भी यह किया है हम उसके ख़िलाफ़ निश्चित तौर पर एक्शन लेंगे।” 

बता दें कि महाकाली की मूर्ति को हुए नुकसान के लिए एएसआई को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विशेषज्ञ, डॉ. शाल्वपिल अयंगर (Dr Shalvapille Iyengar) ने हसन न्यूज़ को बताया :

“डोड्डागडावल्ली चतुशकुता मंदिर की भद्रकाली या दक्षिणा काली प्रतिमा को उपद्रवियों द्वारा नष्ट कर दिया गया है। यह हमारी विरासत को बड़ा नुकसान है। इस मंदिर का निर्माण 1113 ई0 में होयसल वंश के विष्णुवर्धन के शासनकाल में हुआ था। यह महालक्ष्मी का एक अनूठा मंदिर है और भद्रकाली की प्रतिमा दक्षिण गर्भगृह में रखी गई है।”

उन्होंने आगे मंदिर की महत्ता पर बात करते हुए कहा, “सरकार को उपद्रवियों को कड़ी सजा देनी चाहिए। इस समय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) हेरीटेज वीक मना रहा है, लेकिन उसी समय यह विरासत क्षतिग्रस्त हो गई है। यह हमारी विरासत और इतिहास का बहुत नुकसान है। एएसआई को इस बड़े नुकसान का जवाब देना चाहिए और उन्हें ही इस अपूरणीय क्षति के लिए जिम्मेदार होना चाहिए।”

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सीटी रवि ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, “डोड्डगडावल्ली के महालक्ष्मी मंदिर में इस अभद्रता को देखकर भीतर से अशांत और व्याकुल हूँ। मुझे अच्छे से वहाँ की अपनी यात्रा याद है।” आगे उन्होंने कर्नाटक के गृहमंत्री से इस मामले में स्पेशल टीम गठित करके मामले में पड़ताल करके दोषियों को सजा दिलाने की बात कही।

बता दें कि डोड्डागडावल्ली गाँव में स्थित लक्ष्मी देवी मंदिर वास्तुशिल्प के लिहाज से बेहद हैरान करने वाला मंदिर है। इसका निर्माण चतुरस्कुटा शैली में हुआ है। इसे होयसल राजा विष्णुवर्धन द्वारा 1113 ई0 में बनवाया गया था।

‘सब सुख लहै तुम्हारी सरना…’: IAS टॉपर टीना डाबी और उनके शौहर अतहर खान ने तलाक की दी अर्जी

साल 2015 में UPSC की टॉपर रहीं टीना डाबी (Tina Dabi) और उनके शौहर अतहर खान (Athar Khan) ने जयपुर की फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर की है। अतहर खान ने टीना डाबी के साथ ही UPSC परीक्षा पास में दूसरा स्थान हासिल किया था। दोनों की शादी साल 2018 में हुई थी। टीना और अतहर दोनों राजस्थान कैडर के अधिकारी हैं और फिलहाल इन्हें जयपुर में पोस्टिंग मिली हुई है।

IAS टॉपर टीना डाबी और उनके पति अतहर खान की मर्जी से दायर इस अर्जी में कहा गया, “हम आगे साथ नहीं रह सकते। ऐसे में कोर्ट हमारी शादी को शून्य घोषित करें।”

उल्लेखनीय है कि टीना डाबी और अतहर आमिर-उल-शफी खान के बीच ट्रेनिंग के दौरान नजदीकियाँ बढ़ी थीं। इसके बाद इन्होंने साल 2018 में शादी कर ली। इसके बाद टीना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर खान लिखने के साथ-साथ ‘कश्मीरी बहू’ का टैग भी लगा लिया था।

हालाँकि, अभी कुछ दिन पहले टीना के फैंस ने नोटिस किया कि उन्होंने अपने अकाउंट से न केवल ‘कश्मीरी बहू’ का टैग हटाया है, बल्कि उसके साथ-साथ अपने पति को भी ट्विटर पर अनफॉलो कर दिया है। इंस्टास्टोरी पर भी जय श्रीराम लिखते हुए हनुमान चालीसा की चौपाई- “सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहु को डरना। जय श्रीराम” लिखी थी।

इस बीच यह भी देखा गया कि अतहर खान ने भी टीना को इंस्टाग्राम से अनफॉलो कर दिया। इसके बाद अटकलें लगने लगी कि दोनों जल्द ही अलग हो सकते हैं। तलाक की अर्जी दाखिल किए जाने की खबर आने के बाद भी सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे स्पष्ट तौर पर लव जिहाद से जोड़ा और यह कदम उठाने के लिए टीना की सराहना की। वहीं, कुछ यूजर्स का यह भी कहना था कि पति-पत्नी में झगड़े होते हैं, लेकिन इसमें अलग होने वाली बात नहीं है।

मुश्किल में इंडिया टुडे? टीआरपी स्कैम में मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच करेगी ED, मूल FIR में नहीं था रिपब्लिक का नाम

टीआरपी (TRP) स्कैम में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) करेगी। ईडी ने इस संबंध में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट यानी ECIR दर्ज कर ली है। ECIR पुलिस एफआईआर के समतुल्य होती है। रिपब्लिक टीवी के अनुसार ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों और उन सभी चैनल की जाँच करेगी, जिनका उल्लेख ओरिजनल एफआईआर (FIR) में किया गया है।

इस मामले की सीबीआई जाँच भी चल रही है। कहा जा रहा है कि पूरे केस में मुंबई पुलिस की पड़ताल की भी जाँच की जा सकती है। रिपब्लिक टीवी ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि मुंबई में ईडी टीआरपी स्कैम से संबंधित सभी मामलों की एक साथ पड़ताल करेगी।

यहाँ बता दें कि टीआरपी मामले में ईडी दूसरी केंद्रीय जाँच एजेंसी है, जिसने केस दर्ज किया है। इससे पहले सीबीआई ने पूरे मामले पर एफआईआर रजिस्टर की थी।

टीआरपी केस

गौरतलब है कि 8 अक्टूबर को आयोजित एक प्रेस वार्ता में मुंबई पुलिस कमिश्नर ने रिपब्लिक टीवी और अर्णब गोस्वामी पर कई गम्भीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि चैनल ने टीआरपी से जुड़ी जानकारी में बदलाव करने के लिए आम लोगों को पैसे दिए थे और उनसे कहा गया था कि वह उनका चैनल चलाकर अपना टीवी ऑन रखें।

हालाँकि, उसी दिन देर शाम तक रिपब्लिक टीवी ने सबूतों के साथ अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि असली रिपोर्ट में उनके चैनल का नाम कहीं भी नहीं है, बल्कि उन पर सवाल उठाने वाले इंडिया टुडे का नाम ओरिजनल एफआईआर में है। इसके बाद इंडिया टुडे और मुंबई पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े हो गए। बाद में मुंबई पुलिस कमिशनर को मानना भी पड़ा था कि एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम है।