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फेसबुक के कंटेंट्स की निगरानी का जिम्मा संभालने वाली निकली ‘आतंकी संगठन’ की सदस्य: 20 में 18 जॉर्ज सोरोस के लोग

फेसबुक के ओवरसाइट बोर्ड का जबसे गठन का प्रस्ताव आया, तभी से वो विवादों का हिस्सा बना हुआ है। जब सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर कंटेंट्स को रेगुलेट करने के लिए इस प्लेटफॉर्म का सेटअप किया गया, तभी इसे लेकर खुलासा हुआ कि इसके 20 में से 18 सदस्य अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े हुए हैं। यहूदी मूल के जॉर्ज सोरोस डेमोक्रेट पार्टी के बड़े वित्तीय डोनर भी हैं। ऐसे में निष्पक्षता को लेकर लोगों ने सवाल उठाए। अब फेसबुक का नाम ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से जुड़ा है।

इसके बाद एक और ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने सबकी भौहें तान दी हैं। फेसबुक ओवरसाइट बोर्ड का एक सदस्य ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ का हिस्सा है। ये एक आतंकी संगठन है, जिसे कई अरब और पश्चिमी देशों में प्रतिबंधित किया जा चुका है। ये विवाद तवक्कुल करमन को लेकर है, जो नोबेल शांति पुरस्कार की विजेता रह चुकी हैं। हालाँकि, उन्हें ये पुरस्कार मिलने के बाद भी काफी विवाद हुआ था और उँगलियाँ उठी थीं।

हालाँकि, अमेरिका के राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा को भी ये पुरस्कार मिला था, जिन्होंने लीबिया पर हमला कर के उसे दासता की एक जंजीर में बाँध दिया और पूरे मध्य-पूर्व को एक तरह से अशांति के बुरे दौर में धकेल दिया। ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ का सदस्य होना ही अपनेआप में एक विवाद का विषय है। तवक्कुल इससे पहले वो ‘यमनी इस्लाह पार्टी (ISP)’ की सदस्य थीं, जिसे ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ का समर्थन हासिल था।

उन्हें 2011 में नोबेल मिला था। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ क्षेत्र में आधिकारिक अत्याचार और आतंकवाद के पीड़ितों में से एक है। ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ ने भी उनके साथ अपने जुड़ाव को स्वीकारा और नोबेल मिलने पर बधाई भी दी थी। सितम्बर 15, 2013 को बीबीसी अरबिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि जनवरी 2011 की मिस्र क्रांति की सबसे बड़ी सफलता थी कि आपातकाल के क़ानून को हटाया गया।

उन्होंने कहा था कि दुर्भाग्य से 2013 में इस क़ानून को फिर से लाया गया। उन्होंने कहा था, “मुस्लिम ब्रदरहुड और इसके कार्यकर्ता व समर्थक सैन्य शासन के खिलाफ रहे हैं और वो एक बड़े युद्ध में हैं, जिसकी कीमत वो अपने खून से चुका रहे हैं। वो अपनी दृढ़ता से ये लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि वो इस क्रांति को सही रास्ते पर लेकर जाएँगे।” अरब में तो उन्हें फेसबुक बोर्ड में शामिल किए जाने के बाद खासा विरोध हुआ था।

राजनीतिक शास्त्र के प्रोफेसर डॉक्टर अब्दुल खलीक अब्दुल्ला का कहना है कि वो फेसबुक के कंटेंट्स को सुपरवाइज करने वाले बोर्ड में रहने की काबिल नहीं हैं। अमीरात के लेखक ओला अल शेख ने कहा कि उनकी नियुक्ति को दुर्गति बताते हुए कहा था कि इससे उन्हें अरब क्षेत्र को लेकर फेसबुक कंटेंट्स में अपने मनमाफिक काम करने की छूट मिलेगी, जो खतरनाक है। मिस्र में तो उनके खिलाफ खूब विरोध हुआ।

डॉक्टर हनी राजी का कहना है कि उनकी नियुक्ति का सीधा अर्थ है इजिप्ट, सऊदी अरब और यूएई में फेसबुक की सारी जिम्मेदारी ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ को दे देना। उन्होंने कहा कि या तो उन्हें कमिटी से निकाला जाएगा, या फिर फेसबुक ही बंद हो जाएगा। उन्होंने तवक्कुल को इन तीनों मुल्कों की सत्ता का घोर विरोधी करार दिया। आतंकवाद और असहिष्णुता के विशेषज्ञ हनी नसीरा ने भी उन्हें लेकर विरोध जताया।

उन्होंने बताया कि तवक्कुल को पहले तो यमनी क्रांति का प्रतीक माना जाता था, लेकिन समय के साथ वो असहिष्णुता, भेदभाव और निष्पक्षता के अभाव की एक पहचान बन गई हैं। नोबेल पुरस्कार जीतने के बाद तवक्कुल करमन को दोहा बुला कर ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के नेता युसूफ अल करदावी ने सम्मानित किया था, ऐसी भी खबरें आई थीं। करदावी आत्मघाती बम हमलों का ऐलान कर चुका है और उसने हिटलर की भी सराहना करते हुए कहा था कि नाजी शासक ने यहूदियों को ‘दंड दिया’।

उनका कहना है कि तवक्कुल की वफादारी उन्हीं सरकारों के प्रति होती हैं, जिन्होंने लोकतंत्र और शासन के सारे नियमों को ताक पर रखा हुआ है, जैसे – तुर्की और क़तर। उन्होंने कहा कि ये दोनों ही मुल्क वस्तुनिष्ठता और निष्पक्षता के सारे सिद्धांतों को धता बताते हैं। उनका कहना है कि तवक्कुल की राजनीति के हिसाब से विभाजनकारी नीतियों और कट्टरवाद को बढ़ावा मिलता है, साथ ही जो उनसे सहमत नहीं होते उन्हें अलग-थलग करने की कोशिश होती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर अक्सर ऐसे आरोप लगते रहे हैं और उनका पक्षपाती रवैया सामने आता रहा है। इससे पहले फेसबुक के पूर्व कर्मचारी मार्क एस लकी ने कहा था कि कई बार वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दलों के इशारों पर कंटेंट मॉडरेशन टीम पर दबाव बनाया जाता है। इसके चलते कई बार फेसबुक को अपने ही कम्युनिटी स्टैंडर्ड से समझौता करना पड़ता है। साथ ही दावा किया था कि फेसबुक ने सही समय पर कार्रवाई की होती तो म्यांमार जनसंहार और श्रीलंका में हुए दंगों को आसानी से रोका जा सकता था।

हाँ रवीश! सच कहा ‘लव जिहाद’ तो भूत ही है, जिसकी लाश अक्सर सूटकेस में मिलती है

देश में इस समय ‘लव जिहाद’ पर चर्चाओं का दौर चरम पर है। जब से भाजपा शासित राज्यों ने इसे रोकने के लिए क़ानून बनाने का ऐलान किया है तभी से बुद्धिजीवियों के माथे पर चिंता की लकीरें गाढ़ी होती जा रही हैं। बीते दिनों इतने संवेदनशील मुद्दे पर ‘हें हें हें’ करते हुए देश के प्रख्यात लिब्रेश्वर पत्रकार और लघु प्रेमकथाओं (लप्रेक) के सदाबहार लेखक रवीश कुमार ने भी प्राइम टाइम कर ही दिया। किया तो किया लव जिहाद को ‘हिन्दू-मुस्लिम सिलेबस का हिस्सा’ भी बता दिया। लगभग 2 मिनट तक एक साँस में दिए गए अधकचरे प्रोपेगेंडा परस्त ज्ञान में रवीश कुमार ने और भी कई निराधार तर्क पेश किए।

18 नवंबर 2020 को प्रसारित हुए लगभग 34 मिनट की अवधि के प्राइम टाइम के शुरुआती दो मिनट की सभी पक्षपाती दलीलें रवीश कुमार का पूरा एजेंडा साफ़ कर देती है। कार्यक्रम शुरू होने के 13 सेकेंड बाद रवीश कुमार पहली पंक्ति कहते हैं, “भारत का समाज बुनियादी रूप से प्रेम का विरोधी है। किसी को प्रेम न हो जाए, अपनी पसंद से जाति या धर्म के बाहर शादी न हो जाए, इस आशंका में डूबा रहता है और डरा रहता है।” 

वामपंथ के पोलियो से ग्रसित रवीश कुमार को यहाँ समझने की आवश्यकता है कि भारतीय समाज में प्रेम के लिए स्थान हमेशा से रहा है। ऐसा समाज जिसके लिए प्रेम हमेशा से शाश्वत विषय रहा है और इसके जीवंत उदाहरण हैं भारतीय संस्कृति में प्रेम पर रचित अनेक दर्शन। लेकिन एक मज़हब ऐसा है जिसके लिए प्रेम और पाखंड एक ही रास्ते के दो छोर हैं जो अंत तक साथ चलते हैं। किस संभ्रांत समाज में अपना नाम या अपनी पहचान बदल/छुपा कर प्रेम किया जाता है? लेकिन अफसोस इस पहलू के सामने आते ही देश के प्रख्यात लिबरल पत्रकार को सांप्रदायिकता का मोतियाबिंद हो जाता है। 

इसके बाद प्रोपेगेंडा परस्त रवीश कुमार कहते हैं, “भारतीय समाज हिन्दी सिनेमा में सोते-जागते गीतों के नाम पर प्रेम गीत ही सुनता है, वहीं प्रेम से इतना डरता है। इतना डरता है कि डर का भूत खड़ा करता है। उसी एक भूत का नाम है लव जिहाद। वैसे तो यह हिन्दू-मुस्लिम नेशनल सिलेबस का हिस्सा है, लेकिन बेवक्त-बेज़रूरत इसे छेड़ने का मतलब यही है, किसी को यकीन है कि भारत के समाज को हिन्दू बनाम मुस्लिम के भूत से डराया जा सकता है। हें हें हें हें।”

यहाँ भी वैचारिक विकलांगता से मजबूर रवीश कुमार को कई बातें समझने की ज़रूरत है। लव जिहाद कोई आज या कल की समस्या नहीं है। यह पिछले काफी समय से हो रही है फिर भी रवीश कुमार जैसे स्वयंभू बुद्धिजीवी इस तरह के मामलों की सच्चाई को स्वीकारना नहीं चाहते हैं। इन्हें नहीं नज़र आता कि ऐसे मामलों में एक महिला की अस्मिता से खिलवाड़ होता है और उनका शारीरिक तथा मानसिक शोषण होता है। इतना ही नहीं उन पर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता है और इतने से बात नहीं बनती है तो सूटकेस में फिट करने का विकल्प सदाबहार है ही।  

रवीश कहते हैं, “खैर यह किसी की सियासी ज़रूरत हो सकती है लेकिन समाज की सच्चाई भी तो है। उस समाज से आप उम्मीद ही क्या करें जहाँ 90 फ़ीसदी संबंध दहेज़ के सामान से तय होते हों, वहाँ प्रेम कितना ही होगा। इसलिए जिसने प्रेम को कार और वाशिंग मशीन समझा, उससे यही उम्मीद की जा सकती है कि वह लव जिहाद के भूत को खड़ा करेगा।” इसके बाद रवीश कुमार धीरे से लव जिहाद को पितृसत्तात्मक समाज की उपज बता देते हैं। 

2 मिनट के इस प्रोपेगेंडा भरे ज्ञान में न तो पहचान छुपाने का ज़िक्र हुआ और न ही प्रेम के नाम पर बहला-फुसलाकर शारीरिक शोषण करने का ज़िक्र हुआ। न ही सहमति के विरुद्ध महिलाओं को मज़हब कबूल कराने की बात का ज़िक्र हुआ। यानी रवीश कुमार के दृष्टिकोण में मूल समस्या का एक भी बिंदु अहम नहीं है। यह समस्या नई नहीं है और विशेष रूप से रवीश कुमार जैसे पत्रकारों के साथ जो ‘तार्किक’ भी हैं और ‘तजुर्बेकार’ भी।

‘गालीबाज’ देवदत्त पटनायक और विलियम डेलरिम्पल को ‘टोरंटो लिटरेचर फेस्टिवल’ में मंच देने पर भारतीय दूतावास पर फूटा लोगों का गुस्सा

कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा 27-29 नवंबर को होने वाले तीन दिवसीय जेएलएफ टोरंटो लिटरेचर फेस्टिवल के लिए देवदत्त पटनायक और विलियम डेलरिम्पल जैसे विवादास्पद ‘इतिहासकारों’ को आमंत्रित करने के लिए सोशल मीडिया यूजर्स के आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

कनाडा के महावाणिज्य दूतावास के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट द्वारा विभिन्न हस्तियों द्वारा हिस्सा लेने वाले सत्रों के विवरण के बारे में एक ट्वीट शेयर किया गया। इस दौरान देवदत्त पटनायक 29 दिसंबर को ‘महाभारत: आधुनिक रंगमंच के लिए प्राचीन मिथक को अपनाना’ विषय पर बोलने वाले हैं।

शेयर किए गए ट्वीट में कहा गया, “27-29 नवंबर से @JLFLitfest पर हमारे समय के कुछ महान लेखकों, कवियों, इतिहासकारों, पत्रकारों के बीच बातचीत का अनुभव।”

‘इतिहासकार’ देवदत्त पट्टनायक को आमंत्रित किए जाने पर सोशल मीडिया यूजर्स का फूटा गुस्सा

इस ट्वीट के पोस्ट किए जाने के तुरंत बाद, उग्र नेटिजन्स ने देवदत्त पट्टनायक जैसे व्यक्तियों को मंच प्रदान करने के लिए कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावास को आड़े हाथों लिया। बता दें कि देवदत्त पटनायक का सोशल मीडिया वेबसाइटों पर लोगों को गाली देने का इतिहास है। इसके अलावा उन्हें अक्सर मान्यताओं को लेकर झूठ बोलते हुए पाया गया है।

एक ट्विटर यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देवदत्त सबसे बद्तमीज़ ‘विशेषज्ञ’ में से एक था जिसके साथ उन्होंने बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि पटनायक ने उन्हें बीमार कर दिया। उन्होंने कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावास की निंदा की, जिन्होंने महिलाओं के लिए गाली-गलौच की भाषा का इस्तेमाल करने वालों को मंच प्रदान किया।

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा, “देवदत्त पटनायक को बुलाने के लिए आपको शर्म आनी चाहिए, इसे तो लेखक कहना भी शर्म की बात है।”

एक ट्विटर यूजर ने कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा डाले गए ट्वीट का जवाब देते हुए उस अपमानजक ट्वीट का उदाहरण दिया जब देवदत्त पट्टनायक ने सोशल मीडिया यूजर्स को बहुत गंदा ट्वीट किया था।

ट्विटर यूजर्स ने हैरानी जताई कि क्या भारत सरकार महाभारत को मिथक मानती है, क्योंकि “देवदत्त जैसे हिंदू हिंदू विरोधी” ऐसा ही मानते हैं।

सोशल मीडिया पर आम सहमति यह है कि देवदत्त पटनायक हिंदू विरोधी, सीरियल गालीबाज और हिंदू ग्रंथों के गलत व्याख्याकार हैं। लोगों ने उन्हें जेएलएफ टोरंटो लिटफेस्ट के लिए आमंत्रित करने के लिए मंत्रालय के अधिकारियों की आलोचना की।

देवदत्त पट्टनायक- गालियाँ, विकृतियाँ और झूठ का पुलिंदा

देवदत्त पट्टनायक का उन लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने का इतिहास रहा है जो उनके विचार के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जब तथाकथित इतिहासकार ने सोशल मीडिया पर भद्दे कमेंट और अभद्र गालियों का सहारा लिया है। पटनायक ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में भी झूठे दावे किए थे और हिंदुओं और हिंदुत्व का उपहास करने और उन्हें अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनके घृणित अपमानजनक व्यवहार और हिंदू विरोधी होने के कारण, सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करने पर नाराजगी व्यक्त की है।

इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल को भारत सरकार के कार्यक्रम में आमंत्रित करने पर भड़के नेटिजन्स

पटनायक के अलावा, जेएलएफ टोरंटो लिटफेस्ट के लिए भारत सरकार द्वारा एक और विवादास्पद शख्सियत, इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल को दिए गए निमंत्रण ने सोशल मीडिया पर नेटिज़न्स के नाराजगी का कारण बना। उनमें से कई लोग इस बात से हैरान हैं कि विलियम डेलरिम्पल जैसे ‘इंडिया हेटर और ब्रेकर’ जिसने अनुच्छेद 370 हटाए जाने और सीएए लागू करने का विरोध किया, उसे क्यों सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम में बुलाया गया।

कई सोशल मीडिया यूजर्स देवदत्त पटनायक और विलियम डेलरिम्पल के स्पीकर के रूप में बुलाए जाने से इतने खिन्न थे कि उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर को टैग करके यह निवेदन करने लगे कि वो हिन्दू घृणा से सने ऐसे ‘इतिहासकारों’ को हिंदू के महाकाव्य महाभारत पर बोलने के लिए भेजे गए आमंत्रण को अपनी स्वीकृति न दें।

एक सोशल मीडिया यूजर ने हैरानी जताई कि भारतीय वाणिज्य दूतावास विलियम डेलरिम्पल को एक मंच क्यों प्रदान कर रहा है, जिसे दिल्ली दंगों पर ब्लूम्सबरी इंडिया की पुस्तक के प्रकाशन को रोकने के लिए जाना जाता है। यूजर ने सवाल किया, “@IndiainToranto भारतीय हितों के लिए काम करता है या फिर अपने निजी लोगों के लिए काम करता है?”

जिसने दिल्ली दंगों की सच्चाई बताने वाली पुस्तक का प्रकाशन रुकवा दिया

माना जाता है कि इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल ने ब्लूम्सबरी इंडिया को दिल्ली के दंगों पर किताब के प्रकाशन को वापस लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बता दें कि दिल्ली दंगों पर आधारित किताब ‘दिल्ली रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ का प्रकाशन ब्लूम्सबरी ने रोक दिया था। ऐसा करने के लिए वामपंथी, लिबरल और इस्लामी समूह ने सबसे ज़्यादा दबाव बनाया था।

इस्लामी कट्टरवादी आतिश तासीर ने खुलासा किया था कि स्कॉटिश इतिहासकार और लेखक विलियम डेलरिम्पल ही वो व्यक्ति है, जिसने इस पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगवाई थी। आतिश तासीर ने मोनिका अरोड़ा की दिल्ली दंगों पर आने वाली पुस्तक को सत्ता का प्रोपेगेंडा करार देते हुए कहा कि विलियम डेलरिम्पल ने इसके प्रकाशन पर रोक लगाने में अहम भूमिका निभाई है, जिसके लिए वो उनके आभारी हैं। उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि स्कॉटिश लेखक के बिना ये संभव नहीं हो पाता। 

जिस AIADMK ने रोकी थी BJP की यात्रा, उसके ही हजारों कार्यकर्ताओं ने किया अमित शाह का स्वागत: तमिलनाडु की राजनीति गरमाई

तमिलनाडु में जिस AIADMK के नेता भाजपा की ‘वेल यात्रा’ का विरोध कर रहे थे और सरकार इसकी अनुमति नहीं दे रही थी, उसी पार्टी के नेताओं ने चेन्नई एयरपोर्ट पर पहुँचकर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह का स्वागत किया। शनिवार (नवंबर 21, 2020) की दोपहर के बाद से ही मीनामबक्कम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाहर सरगर्मी तेज़ हो गई थी और इसके साथ ही पूरे तमिलनाडु में भी अमित शाह के आगमन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

न सिर्फ भाजपा, बल्कि AIADMK के हजारों कार्यकर्ता भी अपनी पार्टी के पोस्टर-बैनरों और झंडों के साथ एयरपोर्ट कूच कर गए और अमित शाह का स्वागत किया। मुख्यमंत्री पलानिस्वामी ने खुद एयरपोर्ट जाकर अमित शाह का औपचारिक स्वागत किया। एयरपोर्ट रूट को राज्य सरकार ने फूलों और हरियाली से सजाया हुआ था। पराई बीट्स सहित अन्य क्लासिकल म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स की मदद से संगीत का माहौल तैयार किया गया।

इन सबके अलावा एयरपोर्ट रूट से जाने वाली बसों के रास्ते को भी बदल दिया गया था। सिटी पुलिस ने चेन्नई को फ़िलहाल एक किले में बदल दिया है और सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस के अलावा सीआरपीएफ और एसटीएफ के कुल मिला कर 3000 जवानों को मोर्चेबंदी पर लगाया गया है। थ्री लेयर सिक्योरिटी के साथ बम स्क्वाड भी मौके पर तैनात है। होटल में बड़े नेताओं के साथ मिलने के बाद अमित शाह को कलेवणार आरंगम में कई प्रोजेक्ट्स को लॉन्च करना है।

अमित शाह का ये दौरा यूँ तो कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए है, लेकिन इस दौरान वो राज्य की राजनीतिक हालात का भी जायजा लेंगे। भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कई दौर की बैठकों के अलावा वो NDA की अपनी सहयोगी पार्टी AIADMK के बड़े नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। मई 2021 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा चाहती है कि वो इस बार बड़ी ताकत बनकर उभरे।

अमित शाह AIADMK के दोनों दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्रियों एमजी रामचंद्रन (MGR) और जयललिता की समाधि स्थल पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। इसके अलावा उन्हें चेन्नई मेट्रो के फेज-3 का भी उद्घाटन करना है। भाजपा के सभी जिलाध्यक्षों के साथ बैठक के दौरान चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी। सुपरस्टार रजनीकांत के साथ भी उनकी बैठक की चर्चा है, लेकिन इसे लेकर कोई पुष्ट खबर अब तक नहीं आई है।

2019 लोकसभा चुनावों के परिणाम को देख कर अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि राज्य में DMK इस बार पूरी तैयारी के साथ उतरने वाली है, क्योंकि वो लगातार तीसरा विधानसभा चुनाव नहीं हारना चाहती। पार्टी सुप्रीमो एमके स्टालिन भी पहली बार मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। AIDMK में वर्तमान सीएम पलानिस्वामी और पूर्व सीएम पन्नीरसेल्वलम, इन दोनों की एकता पर सब निर्भर करता है। रजनीकांत ने अपने पत्ते अब तक नहीं खोले हैं।

इससे पहले अपने मुखपत्र के माध्यम से AIADMK ने कहा था कि राज्य में जाति-धर्म के आधार पर लोगों को विभाजित करने वाली यात्रा नहीं निकालने दी जाएगी। उसने कहा था कि सभी सम्बंधित लोगों को समझ लेना चाहिए कि तमिलनाडु के लोगों ने बार-बार साबित किया है कि द्रविड़ प्रदेश में धर्म मानवता के लिए दिशा-निर्देशक प्रकाश-पुँज हैं, न कि घृणा और विभाजन का माध्यम। उसने कहा था कि सही मजहब शांति और प्यार का ही सन्देश देते हैं।

‘अपनी भूमि का भारत के खिलाफ इस्तेमाल तुरंत बंद करो’: भारत ने Pak के राजदूत को किया तलब, JeM की बड़ी साजिश का खुलासा

नगरोटा में आतंकियों और भारतीय सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद भारत ने पाकिस्तानी राजदूत को समन किया है। भारत ने जिस तरह से एक बड़े आतंकी हमले को नाकाम किया, वो राहत की बात है। लेकिन, अब भारत ने पाकिस्तान को आइना दिखाना भी शुरू कर दिया है, जिसने इस पूरे आतंकी हमले की साजिश रची थी। जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में आतंकियों के साथ ये मुठभेड़ गुरुवार (नवंबर 21, 2020) को हुई थी।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में जानकारी दी है कि ये सभी आतंकी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सदस्य थे, ऐसा शुरुआती जाँच में पता चला है। इसे संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। भारत सरकार ने जैश-ए-मुहम्मद द्वारा भारतीय सरजमीं पर लगातार किए जा रहे आतंकी हमलों के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए याद दिलाया कि फ़रवरी 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले सहित कई वारदातों में इसकी भूमिका रही है।

भारत सरकार ने कहा है कि जिस तरह से बड़ी मात्रा में खतरनाक हथियार और गोला-बारूद जब्त हुए हैं, उससे पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में शांति और सुरक्षा को अस्थिर करने की एक सम्पूर्ण साजिश थी। बकौल भारतीय विदेश मंत्रालय, इसका एकमात्र उद्देश्य ये था कि जम्मू कश्मीर में स्थानीय जिला विकास परिषद (DDC) के चुनावों के रूप में जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया चल रही है, उसे पटरी से उतारा जाए।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी राजदूत को समन कर उसकी इस करतूत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय ने कहा कि इस संभावित हमले को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण ही रोका जा सका। भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वो न सिर्फ आतंकियों को समर्थन देना बंद करे, बल्कि अपनी जमीन से दूसरे देशों में हमला करने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर पूरे आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूत करे।

भारत ने पाकिस्तानी राजदूत को किया समन

साथ ही भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय नियमों की याद दिलाते हुए कहा कि वो द्विपक्षीय समझौतों का पालन करे और किसी भी हालत में भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए अपनी सरजमीं का इस्तेमाल करना बंद करे। साथ ही भारत सरकार ने दोहराया कि वो पूरी मजबूती से और सख्ती के साथ, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की हिफाजत के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ये भी खुलासा हुआ है कि ख़ुफ़िया सूचनाओं के आधार पर हुए ऑपरेशन में जिन 4 आतंकियों को मार गिराया गया, वो मसूद अजहर के भाई मुफ़्ती रउफ असगर के साथ संपर्क में थे। साथ ही वो JeM के सरगना कारी जरार के साथ भी संपर्क में थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले में एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई थी। ये बता भी पता चली है कि बालाकोट में आतंकियों की ट्रेनिंग का पूराइंफ्रास्ट्रक्चर अब JeM के हवाले ही कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 20, 2020 को गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव और शीर्ष खुफिया अफसरों के साथ नगरोटा एनकाउंटर पर समीक्षा बैठक की थी। नगरोटा में मारे गए आतंकी 26/11 की बरसी पर कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे थे। पीएम मोदी ने इस समीक्षा बैठक के बाद सेना को उनकी सतर्कता के लिए उनका आभार व्यक्त किया था।

चोट्टानिकारा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बेंगलुरु के व्यापारी ने किया ₹700 करोड़ का दान, होंगे हॉस्पिटल सहित कई अन्य निर्माण

बेंगलुरु के गाणाश्रवण (Gaanasravan) नाम के एक स्वर्ण व्यापारी ने केरल के कोच्चि में प्रसिद्ध चोट्टानिकारा मंदिर को 700 करोड़ रुपए दान करने की पेशकश की है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सोमवार (नवंबर 16, 2020) को ‘स्वामीजी ग्रुप ऑफ कंपनीज’ के अधिकारियों के साथ मंदिर का दौरा किया था।

उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार और इसे अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल में बदलने के लिए 300 करोड़ रुपए की राशि देने का वादा किया है। उन्होंने गर्भगृह को सोने की प्लेटों से ढँकने का वादा किया है। इसके अलावा उन्होंने 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, गेस्ट हाउस, ऑडिटोरियम, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, वाटर सप्लाई स्कीम और रिंग रोड के निर्माण के लिए 400 करोड़ रुपए देने का वादा किया है। बताया जा रहा है कि यह अस्पताल दक्षिण भारत में मुफ्त इलाज देने वाला सबसे बड़ा अस्पताल साबित हो सकता है।

अपने फैसले के बारे में बात करते हुए, गाणाश्रवण ने कहा, “मैं बेंगलुरु से लगभग 80 किलोमीटर दूर एक गाँव में संगीतकारों के परिवार में पैदा हुआ था। पाँच साल पहले, मेरे गुरु ने मुझे चोट्टानिकारा मंदिर में प्रार्थना करने के लिए कहा, जिससे मेरी किस्मत बदल गई। मेरा स्वर्ण व्यवसाय फल-फूल रहा है और दुनिया भर में व्यापार को बढ़ा दिया। मेरा मानना ​​है कि यह अम्मा का आशीर्वाद है जिसने मुझे ऐश्वर्य दिया। इसलिए मैंने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा इस मंदिर के विकास के लिए खर्च करने का फैसला किया।”

उन्होंने बताया, “चोट्टानिकारा में 500-बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित किया जाएगा और बिना धर्म, जाति और पंथ के सभी को मुफ्त इलाज किया जाएगा। हम एक वीआईपी गेस्ट हाउस के अलावा 300 कमरों वाले 7 गेस्ट हाउस बनाने की योजना बना रहे हैं।”

गाणाश्रवण ने आगे कहा, “एक वृद्धाश्रम भी बनाया जाएगा, जिसमें 200 लोगों के रहने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा 5,000 लोगों के बैठने की क्षमता वाला एक अनाथालय और एक ऑडिटोरियम होगा। हम तिरुपति की तर्ज पर चोट्टानिकारा को एक अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करेंगे।”

उन्होंने यातायात को सुगम बनाने के लिए सड़कों को चौड़ा करने और दो रिंग रोड को विकसित करने की योजना बनाई है। साथ ही, मंदिर के पूर्वी और पश्चिमी प्रवेश द्वार पर लेटराइट पत्थरों का उपयोग करते हुए दो बड़े गोपुरम बनाए जाएँगे। उन्होंने कीझकवु मंदिर के सामने मंदिर के तालाब का जीर्णोद्धार करने की कसम खाई है और 3 करोड़ रुपए में अन्नदानम बनाए जाएँगे। इसके अलावा वह 50 करोड़ रुपए के लिए पास की भूमि का अधिग्रहण करके एक पार्किंग लॉट प्रदान करेंगे।

प्रोजेक्ट के 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है

कोचीन देवास्वोम बोर्ड (CBD) एम के शिवराजन ने बताया, “यह कार्य कोचीन देवस्वाम बोर्ड की देखरेख में गाणाश्रवण की कंपनी के कंस्ट्रक्शन विंग द्वारा निष्पादित किया जाएगा। स्वामीजी ग्रुप और सीडीबी के नाम से एक संयुक्त खाता खोला जाएगा और काम शुरू होने से पहले प्रत्येक चरण के लिए पूरी राशि इस खाते में स्थानांतरित की जाएगी। जरूरत पड़ने पर सीडीबी कार्यों की निगरानी के लिए एक चीफ इंजीनियर की नियुक्ति करेगा। वे प्रारंभिक कार्य के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के बाद सीडीबी को 5 करोड़ रुपए का भुगतान करने के लिए सहमत हुए हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि कोचीन देवस्वोम बोर्ड ने केरल उच्च न्यायालय से मंजूरी के लिए अपील की है और अदालत की मंजूरी के एक महीने के भीतर काम शुरू हो जाएगा। कार्य जनवरी 2021 में शुरू होने और 2027 तक समाप्त होने की उम्मीद है।

जिस नेता ने सबसे ज़्यादा जहरीली बयानबाजी की उसे ही बीजेपी के विरोध में ‘अल्पसंख्यकों का मसीहा’ बनाने में जुटे ‘वामपंथी’ मीडिया संस्थान

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को बिहार विधानसभा चुनावों में 5 सीटें हासिल हुई हैं। एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल (ध्रुवीकरण में कुशल) के लिए इतनी सीटें सियासत की ज़मीन पर आह्लादित होने के लिए पर्याप्त हैं। सीमांचल में हासिल हुई इस सफलता के बाद आगामी चुनावों को लेकर चर्चाओं अटकलों और समीकरणों का बाज़ार गर्म है। चुनावी पंडित, राजनीतिक पंडित और थिंक टैंक के अतिरिक्त देश के तमाम ‘स्वघोषित प्रबुद्ध’ वामपंथी मीडिया संस्थान आगामी चुनावों में ओवैसी की पार्टी के लिए राजनीतिक आयाम तलाशना शुरू कर चुके हैं। 

इस सूची में तमाम ऐसे मीडिया संस्थान हैं जिनके अनुसार ओवैसी अल्पसंख्यक समुदाय की आवाज़ बन सकते हैं। कहाँ और कैसे बन सकते हैं? इसका जवाब है, पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करके बन सकते हैं, पूरा जवाब जानना हो तो क्विंट की यह रिपोर्ट पढ़िए जिसमें ओवैसी के हिस्से में बनने वाली हर संभावना की ढपली पीटी गई है। वो भी संभवतः सिर्फ इसलिए कि बीजेपी के विरोध का झंडा बुलंद रखना है।

भले चुनाव के बाद नतीजा ढाक के तीन पात रहे। लेकिन वामपंथी न्यूज़ प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द क्विंट’ ही नहीं बल्कि इन भिन्न-भिन्न मीडिया संस्थानों (द वीक, इंडियन एक्सप्रेस, स्क्रॉल, द प्रिंट) की रिपोर्ट पढ़िए। एक राज्य के चुनाव में 5 विधानसभा सीटें जीतने पर शायद ही किसी राजनीतिक दल को इतनी अहमियत मिली है।

लेकिन उल्लेखनीय बातें यह भी नहीं हैं। उल्लेखनीय यह है कि जिस तथाकथित अल्पसंख्यक हितैषी नेता को अल्पसंख्यक समुदाय का मुखमंडल बनाया जाने की कवायद पूरे सामाजिक राजनीतिक सामर्थ्य से की जा रही है, उसकी मानसिकता और मानसिकता से उपजी बयानबाजी का स्वरूप कैसा है। पिछले कुछ महीनों में असदुद्दीन ओवैसी के कुछ बयानों को देखते और समझते हैं कि जिस नेता के लिए इस कदर माहौल बनाया जा रहा है उसकी विचारधारा असल मायनों में है क्या?   

हाल ही में इंडिया टुडे को बीते चुनावों को लेकर हो रही चर्चा के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने एक बयान दिया था। ओवैसी ने कहा था कि आज भाजपा सत्ता में है, तो इसका कारण कॉन्ग्रेस ही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के नेतृत्व को ‘नपुंसक’ करार दिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को संबोधित करते हुए कहा था कि आपकी पार्टी का नेतृत्व नरेंद्र मोदी से लड़ने में अक्षम है, इसीलिए भाजपा आज सत्ता में है। उन्होंने कहा कि जब तक वो ज़िंदा हैं, चुनाव लड़ते रहेंगे और सेक्युलरिज्म को ज़िंदा रखेंगे। 

यह तो भाषा की बात हुई, असदुद्दीन ओवैसी के बयानों में सांप्रदायिकता की सूरत भी बेहद मज़बूत रहती है। बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के प्रचार के दौरान उन्होंने बयान दिया था, “असदुद्दीन ओवैसी बिहार का तो नहीं है, मगर ये पूरा भारत असदुद्ददीन ओवैसी के बाप की मिल्कियत है। कैसे है? हमारे अब्बा, आपके अब्बा, उनके अब्बा, उनके अब्बा के अब्बा जब दुनिया में कदम रखे, तो भारत में रखे थे कदम। तो ये हमारे अब्बा की जमीन हुई और किसी माई के लाल में ताकत नहीं है कि हमको हमारी अब्बा की जमीन पर घुसपैठी करार दे। ये अब्बा की जमीन है और अब्बा की जायदाद में बेटी और बेटे का हिस्सा मिलेगा।”

हाल ही में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री ने अयोध्या में भूमि पूजन किया था। इस मुद्दे पर भी असदुद्दीन ओवैसी की सांप्रदायिकता संगत बयानबाजी जारी थी। ट्वीट करते हुए ओवैसी ने लिखा था, “बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी। इशांअल्लाह।” इस ट्वीट के साथ ओवैसी ने दो तस्वीरें भी शेयर की थी। एक तस्वीर में मस्जिद खड़ा नजर आ रहा है और दूसरे में उसके विध्वंस की घटना है।

इसी तरह सीएए और एनआरसी विरोध प्रदर्शन के दौरान हैदराबाद सांसद ने इतनी टिप्पणियाँ की थीं जिनकी गिनती नहीं लेकिन मजाल है किसी टिप्पणी में जहर की मात्रा से समझौता किया हो। ऐसी ही एक टिप्पणी थी, “जो मोदी-शाह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा वो सही मायने में मर्द-ए-मुजाहिद कह लाएगा। मैं वतन में रहूँगा, पर कागज नहीं दिखाऊँगा। कागज अग़र दिखाने की बात होगी, तो सीना दिखाएँगे कि मार गोली। मार दिल पे गोली मार, क्योंकि दिल में भारत की मोहब्बत है।”

अब पूछिए प्रश्न, अल्पसंख्यक समाज की अगुवाई का मुकुट करना चाहिए इनके नाम? या पहले अल्पसंख्यक हित के मुखौटे के पीछे छुपे असल राजनीतिक चेहरे को परखा जाए। देश का हर नेता राजनीति के रास्ते पर चलते हुए आम नागरिकों को बहुत कुछ देता है, जब कभी ‘असदुद्दीन ओवैसी ने क्या दिया’ इस पर चर्चा होगी, तब इनके बारे में क्या कहा जाएगा। भले एक नेता हर विमर्श में अल्पसंख्यकों के विमर्श को आगे रख देता है लेकिन उसकी कीमत क्या है? अगले साल पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनाव हैं, उस पर भी नज़र बनाए रखियेगा। ऐसे बयान शायद ही थमेंगे।            

कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति को NCB ने हिरासत में लिया, छापे में घर से ड्रग्स मिलने का दावा

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने कॉमेडियन भारती सिंह के मुंबई स्थित तीन घरों पर छापेमारी की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भारती और उनके पति हर्ष पर ड्रग्स लेने का आरोप है। छापेमारी के दौरान गांजा बरामद होने का दावा भी किया जा रहा है। दोनों को हिरासत में लेकर एनसीबी पूछताछ कर रही है।

मुंबई के जोनल डायरेक्टर ऑफिसर समीर वानखेड़े ने बताया, ‘भारती और उनके हसबैंड दोनों को नशीले पदार्थ रखने के मामले में सवाल जवाब के लिए हिरासत में ले लिया गया है।’

जानकारी के मुताबिक, एक ड्रग्स पैडलर की निशानदेही पर भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के घर पर छापेमारी की गई। भारती सिंह टीवी की पहली पॉपुलर एक्ट्रेस हैं, जिनके घर एनसीबी ने छापेमारी की है। इससे पहले एनसीबी ने एक्टर और मॉडल अर्जुन रामपाल और उनकी गर्लफ्रेंड गेब्रिएला के घर पर छापा मारा था। बता दें कि 9 नवंबर को अर्जुन रामपाल के घर छापेमारी के दौरान जाँच एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन और टैबलेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जब्त किया था और अर्जुन के ड्राइवर से भी पूछताछ की थी। 

अर्जुन रामपाल के घर पर छापे से एक दिन पहले, एनसीबी ने बॉलीवुड निर्माता फिरोज नाडियाडवाला की पत्नी शबाना सईद को उपनगरीय जुहू में उनके आवास पर कथित तौर पर गांजा पाए जाने के बाद गिरफ्तार किया था। फिल्म निर्माता फिरोज नाडियाडवाला भी पूछताछ के लिए NCB ऑफिस पहुँचे थे।

इससे पहले गैब्रिएला के भाई एगीसलोस डेमेट्रिडेस के अपार्टमेंट में ड्रग्स मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। अधिकारी ने बताया कि पिछले महीने, एनसीबी ने गैब्रिएला के भाई एगीसलोस डेमेट्रिडेस को एक ड्रग्स मामले में पास के पुणे जिले के लोनावाला स्थित एक रिजॉर्ट से गिरफ्तार किया था। सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े ड्रग्स मामले में एनसीबी की तरफ से की गई यह 23वीं गिरफ्तारी थी। इसके पहले क्षितिज प्रसाद और जय मधोक के रूप में 21वीं और 22वीं गिरफ्तारी हुई थी।

एनसीबी ने दीपिका पादुकोण की मैनेजर करिश्मा प्रकाश को भी समन भेज कर 27 अक्टूबर को पेश होने के लिए कहा था, लेकिन वो नहीं आईं। सोमवार (नवंबर 2, 2020) को अधिकारियों ने जानकारी दी है कि करिश्मा प्रकाश ‘अनट्रेसेबल’ हैं। करिश्मा प्रकाश के ठिकानों से NCB ने छापेमारी के दौरान पिछले महीने 1.7 ग्राम चरस और एक बोतल ‘CBD ऑइल’ जब्त किया था। ‘क्वान टैलेंट मैनेजमेंट कम्पनी’ के अन्य कर्मचारियों को भी समन भेजा गया है।

बता दें कि बॉलिवु़ड में ड्रग्स की जाँच के लपेटे में अब तक कई सेलिब्रिटीज के नाम सामने आ चुके हैं। सुशांत की गर्लफ्रेंड रहीं रिया चक्रवर्ती से इसकी शुरुआत हुई और इसके बाद दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह, अर्जुन रामपाल की पार्टनर गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स जैसे कई नामों के सामने आने का सिलसिला जारी है।

14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एनसीबी ने ड्रग्स से जुड़े व्हाट्सएप चैट के आधार पर बॉलिवुड में कथित नशीली दवाओं के इस्तेमाल के संबंध में जाँच शुरू की। एनसीबी ने इससे पहले सुशांत की गर्लफ्रेंड रहीं रिया चक्रवर्ती, उसके भाई शौविक, दिवंगत फिल्म स्टार के कुछ कर्मचारियों और कुछ अन्य लोगों को एनडीपीएस कानून की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था। रिया चक्रवर्ती और कुछ अन्य आरोपित फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

हिन्दू एकता के लिए कपिल मिश्रा की पहल से घबराया वामपंथी मीडिया, Scroll ने लव जिहाद और मिशनरियों का किया बचाव

कपिल मिश्रा ने हिन्दुओं को एक करने के प्रयास क्या शुरू किए, लिबरल गिरोह को मिर्ची लग गई। वामपंथी मीडिया बेचैन हो उठा और उसने हिंदुत्व को खतरनाक बताने से लेकर ‘लव जिहाद’ को हिन्दुओं का मनगढंत मुद्दा तक बताने लगे। इसी क्रम में ‘Scroll’ ने भी एक लेख में कपिल मिश्रा द्वारा हिन्दू इकोसिस्टम बनाने की घोषणा को खतरनाक तक करार दिया। साथ ही इसके लिए उनका मजाक भी बनाने की कोशिश की।

‘Scroll’ ने मसखरी के अंदाज़ में इस लेख को शुरू किया है और पूछा है कि अगर आपके पास कुछ खाली समय है तो क्यों न आप अपनी खास रुचियों को धार देने के लिए किसी क्लब या सोसायटी में शामिल हो जाएँ? साथ ही बताया है कि इन दिनों काफी विकल्प हैं और समाजिक सेवाओं के लिए रोटरी क्लब या लायंस क्लब हैं। फिटनेस के साथ कुछ अलग करने के लिए लाफ्टर योग क्लब हैं। पाठकों के लिए कई किताबों वाले क्लब्स हैं।

इसके बाद ‘Scroll’ लिखता है कि आप हिन्दू इकोसिस्टम भी ज्वाइन कर सकते हैं, जिसके लिए आपको बस एक फॉर्म भरना है और इसके लिए कोई एप्लीकेशन फी नहीं है। साथ ही इस लेख में कपिल मिश्रा को ‘दिल्ली दंगों से पहले भड़काऊ बयान देने के लिए जाना जाने वाला’ बताया है। भले ही ये सामने आ चुका है ताहिर हुसैन और उमर खालिद सहित कई इस्लामी कट्टरपंथियों ने दंगे किए और कपिल मिश्रा के भाषण से पहले ही ये शुरू हो गया था, ये मीडिया संस्थान एक झूठ को हजार बार बोल कर इसे सच साबित करना चाहते हैं।

कपिल मिश्रा दिल्ली सरकार में मंत्री थे। करावल नगर से उन्हें 1 लाख से भी अधिक वोट्स मिले थे, यानी कुल वोट्स के 60% के करीब। क्या वो इन सबके लिए नहीं जाने जाते, जो ‘स्क्रॉल’ उन्हें 5 मिनट के किसी भाषण को ही उनकी प्रसिद्धि का एकमात्र कारण बता कर उसे नकारात्मक रूप में पेश कर रहा है? उन्होंने तब भी संस्कृत में शपथ ली थी। दिल्ली के बाद भी कई इलाकों में CAA विरोधी दंगे हुए। उन सब में तो कपिल मिश्रा कहीं नहीं थे।

‘Scroll’ को इस बात की चिंता खाए जा रही है कि आखिर ये हिन्दू इकोसिस्टम करेगा क्या? कपिल मिश्रा पहले ही साफ़ कर चुके हैं कि ये जमीन पर और सोशल मीडिया पर, कोर्ट में, धर्म के लिए और एक-दूसरे के लिए काम करेगा। इसका सीधा अर्थ है कि इसकी सारी प्रक्रियाएँ वैध होंगी और क़ानूनी दायरे में होंगी। ये आपस में सहयोग का इकोसिस्टम है तो इसकी सराहना करने की बजाए वामपंथी मीडिया इसके खिलाफ क्यों है?

कपिल मिश्रा को लेकर ‘स्क्रॉल’ ने फैलाया प्रपंच

इसके फॉर्म में विकल्प है कि आप ऑनलाइन, जमीन पर, या फिर दोनों के लिए इसका हिस्सा बन सकते हैं। वामपंथी मीडिया को ‘घर वापसी’ ‘हिन्दू एकता’, ‘गौरक्षा’ और ‘लव जिहाद का विरोध’ – इन सभी चीजों से दिक्कत है, जबकि भारत के क़ानून में इनमें से किसी को भी अवैध नहीं माना गया है। ये सब तो समाजसेवा, महिला अधिकार और पशु अधिकार के अंतर्गत आते हैं। इन्हीं चीजों के लिए लड़ने वाले वामपंथी इससे चिढ़ क्यों रहे हैं?

‘Scroll’ का कहना है कि RSS रहस्यमयी तरीके से काम करता है, क्योंकि इसके सदस्य मीडिया में नहीं आते और एक बड़े सभ्यता के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। अर्थात, अगर कोई संगठन बाढ़, अकाल, महामारी और अन्य आपदा की स्थिति में निःस्वार्थ भाव से बिना सरकारी सहायता के लोगों की सेवा कर रहा है तो इन वामपंथियों को उससे भी परेशानी है। चूँकि वो RSS है, समाजसेवा कर सोशल मीडिया पर उसका प्रचार नहीं करता, इसलिए वामपंथियों को ये स्वीकार्य नहीं

वहीं इसी वामपंथी मीडिया को कपिल मिश्रा के नए हिन्दू इकोसिस्टम से इसलिए दिक्कत है, क्योंकि उसका मानना है कि इससे सोशल मीडिया पब्लिसिटी होगी और टीम के सदस्यों की संख्या की बातें होंगी। यानी, अगर कोई शांति से काम कर रहा है तो भी परेशानी और किसी ने सोशल मीडिया को एकता का माध्यम बनाया तो भी परेशानी। ये सब इसीलिए, क्योंकि हिन्दुओं को एक होते हुए ये लोग नहीं देख सकते।

हिन्दू इकोसिस्टम के लिए कपिल मिश्रा का आह्वान

अब ‘स्क्रॉल’ वापस ‘लव जिहाद’ पर आता है और इसे एक कंस्पिरेसी थ्योरी करार देते हुए लिखता है कि इसका हिंदुत्व से तो कोई लेना-देना ही नहीं है। अर्थात, हिन्दू महिलाओं के लिए उसके मन में कोई इज्जत नहीं है, भले ही कोई उन्हें धोखा दे, पहचान छिपाकर कर उनसे साजिशन शादी कर ले, बाद में प्रताड़ित करे या फिर हत्या कर दे। महिलाओं की मदद के लिए अगर कोई संगठन आगे आ रहा है तो इससे ‘स्क्रॉल’ को दिक्कत क्या है?

‘लव जिहाद’ की रोज एक के बाद एक घटनाएँ सामने आ रही हैं। केरल में ईसाइयों के साथ जो हुआ था, उसके बाद उन्होंने इस शब्दावली का प्रयोग किया था। अगर यहाँ हिन्दुओं की बातें छोड़ भी दें तो क्या ईसाई इस वामपंथी मीडिया के लिए अल्पसंख्यक नहीं हैं और संख्या में उनसे कई गुना ज्यादा मुस्लिम भारत में उनके लिए अल्पसंख्यक हैं? हिन्दू व ईसाई महिलाओं की प्रताड़ना को रोकने का प्रयास करना तो सराहनीय है, इसकी प्रशंसा होनी चाहिए। केरल के चर्च तक ने कहा है कि ‘लव जिहाद’ वास्तविक है।

साथ ही इसने ‘इस्लामी आक्रमण’ और ‘ईसाई मिशनरी’ को तथाकथित लिखा है। इसका अर्थ है कि वो ये नहीं मानते कि इस्लामी कट्टरता नाम की कोई चीज है भी। ‘अल्लाहु अकबर’ बोल कर चिल्लाते हुए हत्या की वारदातों और बहला-फुसला कर धर्मांतरण की ईसाई मिशनरियों की करतूतों से जुड़ी कई ख़बरों के बावजूद मीडिया का ये वर्ग चाहता है कि हिन्दू, जो इस दोनों मामलों में पीड़ित है, आँख मूँद कर ये सब सहता रहे।

अगर कोई मुस्लिम अपना मजहब छिपा कर किसी लड़की से शादी कर ले और उसे धोखा दे तो इस पर कोई क्यों न विरोध करे? अगर इस्लाम के नाम पर जम्मू-कश्मीर में सौ आतंकी संगठन खड़े हो जाएँ और दुनिया भर में ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए लोगों को मारा जाए, तो कोई क्यों आँख-कान बंद कर ले? आदिवासी और पिछड़े इलाकों में हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान कर, लालच दे कर और झूठे चमत्कार दिखा कर ईसाई मिशनरी गरीबों को ठगे और धर्मान्तरण कराएँ तो क्यों न कोई इसके खिलाफ आवाज़ उठाए?

‘लव जिहाद’ को दक्षिणपंथी शब्दावली बताने वाला ‘स्क्रॉल’ क्या ये मानेगा कि ईसाई भी दक्षिणपंथी हो गए हैं और वो हिन्दुओं के साथ मिल गए हैं, क्योंकि उन्होंने केरल में इसका प्रयोग किया? अभी जिस संगठन ने कुछ किया ही नहीं, उसका कोई कामकाज सामने आया ही नहीं, उस पर मुस्लिम घृणा का आरोप कैसे कोई लगा सकता है? उसे कैसे कोई नकार सकता है। इस लेख का सीधा मकसद है – हिन्दू एकता का मजाक बनाना और उसे घृणावादी साबित करना।

हिन्दू इकोसिस्टम पर Scroll का प्रोपेगंडा: क्या कहते हैं कपिल मिश्रा?

हमने इन आरोपों के सम्बन्ध में कपिल मिश्रा से भी बातचीत की, जिन्होंने हमें बताया कि वामपंथी तीस्ता सीतलवाड़ भी इसके खिलाफ अभियान चला रही हैं। उन्होंने हस्ताक्षर अभियान से लेकर इसके खिलाफ पत्र लिखने तक, सब किया है। ठीक इसी तरह, अब ‘Scroll’ इसके विरोध कर रहा है और शेखर गुप्ता ने भी ‘द प्रिंट’ की पूरी टीम को इसके पीछे लगा दिया है। कपिल मिश्रा कहते हैं कि विरोध की एक ही वजह है और वो है ‘हिन्दू’ शब्द।

हिन्दू इकोसिस्टम में ‘हिन्दू’ शब्द होने से ही वो सभी चिढ़े हुए हैं और इसे नकारात्मक रूप में पेश कर रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मंत्री ने बताया कि ये एक छोटी सी शुरुआत है, जो लोगों को एक प्लेटफॉर्म पर आने और एक-दूसरे की मदद और सेवा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी चीज में ‘हिन्दू’ आ जाए, तो ये चिढ़ जाते हैं। उन्होंने पूछा कि अभी इसकी कोई एक्टिविटी भी नहीं हुई है, सिर्फ सदस्य बने हैं, तभी इतना हंगामा किया जा रहा है।

उन्होंने याद दिलाया कि Scroll या फिर तीस्ता सीतलवाड़ जैसे लोग इस तरह का रिएक्शन तो आतंकी संगठनों के खिलाफ भी नहीं देते, जैसा वो हिन्दू इकोसिस्टम का विरोध करते हुए दे रहे हैं। उन्होंने पूछा कि जब इन्हें पता ही नहीं है कि ये संगठन करेगा क्या, फिर ये विरोध क्यों कर रहे हैं? सिर्फ ‘हिन्दू’ शब्द की वजह से? उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य होगा सेवा, ऑफलाइन या ऑनलाइन सनातनियों को जोड़ना।

कपिल मिश्रा ने ऑपइंडिया से कहा कि ये एक नेटवर्क बनाया जा रहा है, जिसमें लोग एक-दूसरे की मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में देश में हजारों संगठन चल रहे हैं, जिला-प्रखंड-ग्राम स्तर तक पर अलग-अलग संगठन चल रहे हैं, ऐसे में इसकी RSS से तुलना करना गलत होगा। उन्होंने कहा कि RSS के काम करने का स्तर, उनका इतिहास और उनकी कार्यप्रणाली- सब अलग हैं।

कपिल मिश्रा ने समझाया कि हिन्दू इकोसिस्टम को एक टीम की तरह लिया जा सकता है, इसे एक शुरुआत की तरह ले सकते हैं। जिस तरह से हर जिले-राज्य में टीमें होती हैं, उसी तरह से ये भी है। उन्होंने कहा कि RSS से इसकी तुलना बेमानी है और ऐसा होना ही नहीं चाहिए। साथ ही कहा कि इस टीम की पूरी सक्रियता के बारे में धीरे-धीरे पता चल जाएगा, अभी तो बस सदस्यों के फॉर्म ही भरे गए हैं।

पाकिस्तान में मिला 1300 साल पुराना भगवान विष्णु का मंदिर, पर क्या बचा रहेगा?

पाकिस्तान और इटली के पुरातत्व विशेषज्ञों (Archaeological Experts) को खुदाई के दौरान उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के स्वात शहर स्थित पहाड़ों के नज़दीक लगभग 1300 साल पुराना हिन्दू मंदिर मिला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पुरातत्वविदों को उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के बारिकोट घुंडई में खुदाई के दौरान यह मंदिर मिला। खैबर पख्तूनखवा, पुरातात्विक विभाग के फज़ल खालिक ने बताया कि यह मंदिर भगवान विष्णु का है।

पुरातत्व विशेषज्ञों ने बताया कि संभावित तौर पर इस मंदिर का निर्माण ‘हिन्दू-शाही’ काल के दौरान लगभग 1300 साल पहले कराया गया था। हिन्दू-शाही साम्राज्य ने काबुल घाटी (पूर्वी अफगानिस्तान) और गंधार (आज का पाकिस्तान) तथा वर्तमान के उत्तर पश्चिमी भारत पर शासन किया था। अनुमानित तौर पर इन्होंने ही 850 से 1026 CE के बीच हिन्दू मंदिर का निर्माण कराया था। 

खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को मंदिर के नज़दीक छावनी और पहरा देने वाले स्तंभ (वॉच टावर) के भी अवशेष मिले। इसके अलावा उन्हें खुदाई के स्थान से जलाशय (water tank) भी मिला, जिसका उपयोग हिन्दू समुदाय के लोग मंदिर जाने से पहले नहाने के लिए करते थे। खालिक ने यह भी बताया कि स्वात शहर हज़ारों साल पुराना पुरातात्विक स्थल है और इतने समय में पहली बार हिन्दू-शाही शासन काल के निशान मिले हैं। स्वात में अनेक बौद्ध मंदिर और पूजा के तमाम स्थल भी मौजूद हैं। इटालियन पुरातात्विक अभियान के मुखिया डॉक्टर लूका ने कहा कि स्वात शहर में गंधार सभ्यता के दौर का यह पहला मंदिर है। 

हाल ही में खोजी गई बुद्ध प्रतिमा को कट्टरपंथियों ने तोड़ दिया था

जुलाई 2020 में ही खोजी गई बुद्ध की प्रतिमा को स्थानीय श्रमिकों और मौलवी ने तोड़ कर टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे। पश्तून बाहुल्य खैबर पख्तूनखवा प्रांत के मर्दान शहर में एक घर की नींव की खुदाई के दौरान प्रतिमा के अवशेष बरामद हुए थे। इस घटना का वीडियो भी सामने आया था जिसमें मौलवी और श्रमिक बुद्ध की प्रतिमा को हथौड़े से खंडित करते हुए नज़र आ रहे थे। बौद्ध धर्म (जिसे वह इस्लाम विरोधी भी मानते हैं) के विरुद्ध अपना रोष जताते हुए मौके पर मौजूद सभी लोग बुद्ध की विशालकाय प्रतिमा को नष्ट करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्थानीय मौलवी की तरफ से दिए गए आदेश के बाद बुद्ध की प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की गई थी और उसने प्रतिमा को इस्लाम विरोधी भी बताया था। मौलवी ने इस घटना के ठीक पहले कहा था, “अगर यह प्रतिमा नष्ट नहीं की जाती है तो तुम्हारे निकाह का वजूद समाप्त हो जाएगा और तुम अपने मज़हब के प्रति आस्तिक नहीं रह जाओगे।” इसके बाद ही लोगों ने बुद्ध की मूर्ति के साथ तोड़फोड़ की थी जो कि मिलने के वक्त अच्छी स्थिति में थी। 

जुलाई 2020 में ही इस तरह की एक और घटना हुई थी, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित बाल्टिस्तान स्थित चिलास क्षेत्र में बौद्ध शिला बरामद की गई थी। इस शिला को भी कट्टरपंथी इस्लामियों ने नष्ट करने का पूरा प्रयास किया था, उस पर पाकिस्तान का झंडा बना दिया था और नारे तक लिख दिए थे। मीडिया रिपोर्ट के के मुताबिक़ यह मामला सुर्ख़ियों में तब आया जब वहाँ के स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें साझा की। जिस शिला पर कट्टरपंथियों ने इस्लामी नारे लिखे थे, लगभग 800 AD की थी।