सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के ऊपर आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले कुणाल कामरा के मामले पर एक संसदीय कमेटी ने ट्विटर से सवाल पूछे हैं। कमेटी का पूछना है कि आखिर ट्विटर ने सुप्रीम कोर्ट व सीजेआई पर किए गए कामरा के आक्रामक ट्विट्स को क्यों प्लेटफॉर्म पर जगह दी और उसके ख़िलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की। कमेटी ने इन सवालों के जवाब देने के लिए ट्विटर को 7 दिन का समय दिया है।
भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सोशल मीडिया कंपनी की पॉलिसी हेड महिमा कौल से सख्ती से इस संबंध में प्रश्न किए हैं। मीनाक्षी लेखी के अलावा इस समिति में कॉन्ग्रेस सांसद विवेक तन्खा भी शामिल थे। तन्खा ने भी इस मामले में अपना ट्विटर के ख़िलाफ सख्त रुख व्यक्त किया।
लेखी ने बताया, “यह शर्मनाक है कि ट्विटर सुप्रीम कोर्ट और CJI के खिलाफ स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा की अपमानजनक टिप्पणियों को अपने मंच पर अनुमति दे रहा है।” उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट और CJI जैसे शीर्ष संवैधानिक अधिकारियों को गाली देने के लिए ट्विटर अपने मंच का दुरुपयोग कर रहा है।”
कमेटी अध्यक्ष ने बताया कि उनकी समिति में अलग-अलग पार्टी के राजनेता शामिल थे। इसमें कॉन्ग्रेस सांसद विवेक तन्खा, बसपा सांसद रितेश पांडे और बीजेडी सांसद भर्तृहरि महताब शामिल थे। इन सबने ट्विटर पर अपना गुस्सा व्यक्त किया।
गौरतलब है कि पिछले दिनों अर्णब गोस्वामी की रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर आई कुणाल कामरा की टिप्पणी पर कोर्ट में अवमानना का केस चलाने का निर्णय लिया गया था। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कुणाल कामरा के आपत्तिजनक ट्वीट पर अवमानना का केस चलाने की मंजूरी दी थी।
उन्होंने मंजूरी देते हुए लिखा था:
“लोग समझते हैं कि कोर्ट और न्यायाधीशों के बारे में कुछ भी कह सकते हैं। वह इसे अभिव्यक्ति की आजादी समझते हैं। लेकिन संविधान में यह अभिव्यक्ति की आजादी भी अवमानना कानून के अंतर्गत आती है। मुझे लगता है कि ये समय है कि लोग इस बात को समझें कि अनावश्यक और बेशर्मी से सुप्रीम कोर्ट पर हमला करना उन्हें न्यायालय की अवमानना कानून, 1972 के तहत दंड दिला सकता है।”
इसके बाद पिछले सप्ताह कुणाल कामरा ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करने वाले अपने ट्वीट्स के लिए अवमानना के आरोपों का सामना करते हुए कहा कि वह न तो अपनी टिप्पणी को वापस लेंगे, और न ही उनके लिए माफी माँगेंगे।
कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए अपना एक पत्र ट्वीट किया, जिसमें उसने लिखा था: “मैं अपने ट्वीट को वापस लेने या उनके लिए माफी माँगने का इरादा नहीं रखता। मेरा मानना है कि वे खुद के लिए बोलते हैं।”
देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना महामारी के चलते हालात एक बार फिर अनियंत्रित हो चुके हैं। महामारी की अनियंत्रित स्थिति पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने चिंता जाहिर की है और दिल्ली सरकार को जम कर फटकार लगाई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार (19 नवंबर 2020) को कोरोना महामारी के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कई अहम बातें कही।
न्यायालय ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने वैवाहिक समारोहों में शामिल होने वाले लोगों की संख्या सीमित करने के लिए 18 दिन का इंतज़ार क्यों किया। इसके अलावा न्यायालय ने यह भी पूछा कि कब्रिस्तानों में जगह नहीं है, लाशें शाम और रात के वक्त भी जलाई जा रही हैं, क्या आपको इस बात की ख़बर है?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी सरकार के लापरवाही भरे रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा, “आप लोग (दिल्ली सरकार) गहरी नींद में थे और आपको झकझोर कर नींद से उठाना पड़ा। जब हम आपको झकझोरते हैं तब आप कछुए की चाल चलने लगते हैं।” दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली सरकार की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए न्यायालय की तरफ से यह टिप्पणी तब आई है जब पिछले सिर्फ एक दिन के भीतर कोरोना की वजह से दिल्ली में लगभग 131 मौतें हुई।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे विस्तार से टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें क्यों 11 नवंबर को आपको (दिल्ली सरकार) गहरी नींद से जगाना पड़ा? आपने 1 नवंबर से 11 नवंबर के बीच क्या किया? आपने कोई भी निर्णय लेने के लिए 18 दिन का (18 नवंबर तक) इंतज़ार क्यों किया? क्या आपको अंदाज़ा भी है कि इस दौरान कितने लोगों की जानें गई? क्या मरने वालों से जुड़े लोगों को जवाब दे सकते हैं या उन्हें कुछ भी समझा सकते हैं?”
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने कोरोना महामारी के बढ़ते वालों को लेकर जो जानकारी न्यायालय में साझा की थी। वह जानकारी आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्रियों द्वारा प्रेस वार्ताओं में साझा की गई जानकारी से बिलकुल अलग है। इसका मतलब यह हुआ कि दिल्ली में कोरोना महामारी की वजह से हर 10 मिनट में एक मौत हो रही है या हर घंटे में 5 मौतें हो रही हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि मास्क नहीं पहनने पर लगाया जाने वाला जुर्माना और सामाजिक दूरी नहीं बनाना, यह दो बातें भी प्रभावी सिद्ध नहीं हो रही हैं।
Court: Burial grounds are overflowing, funeral pyres are burning through the night. Are you aware of that?
Court directs Delhi Govt to indicate the steps taken to ensure adequate facilities at all crematoriums @CMODelhi@SatyendarJain#COVIDー19
इसके अलावा दिल्ली उच्च न्यायालय ने कब्रिस्तान के भयावह हालातों पर भी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा, “कब्रिस्तान भरे पड़े हैं, शाम और रात के वक्त भी चिताएँ जलाई जा रही हैं। क्या आपको इस बात की भनक भी है?” इसके बाद न्यायालय ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को सख्ती से निर्देश दिया कि वह अंतिम संस्कार वाली जगहों पर उचित सुविधाएँ उपलब्ध कराए। इसके अलावा भी न्यायालय ने दिल्ली की सरकार को तमाम अहम कदम उठाने को लेकर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 26 नवंबर को होगी।
इसके पहले भी दिल्ली उच्च न्यायालय ठीक इसी मुद्दे पर केजरीवाल सरकार को लताड़ लगा चुकी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार (नवंबर 11, 2020) को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। न्यायालय ने राजधानी में बढ़ रहे कोरोना मामले पर AAP सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था कि क्या इस स्थिति से निपटने के लिए उनके पास कोई नीति या रणनीति है? जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने कहा कि पिछले 2 सप्ताह में कोरोना के मामले में दिल्ली ने महाराष्ट्र और केरल को भी पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में AAP सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाबलों ने आज सुबह जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों को ढेर कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, इन चारों आतंकी को पाकिस्तान की ओर से चुनाव को बाधित करने के मकसद से भेजा गया था। यह साजिश खूंखार जैश सरगना मसूद अजहर के भाई रऊफ लाला ने रची थी, जोकि फिलहाल पाकिस्तान में है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मौत के घाट उतारे गए चारों आतंकियों ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से मंगलवार और बुधवार की रात घुसपैठ की थी। जिनकी मदद मसूद अजहर के भाई ने की थी। रऊफ कुछ दिनों से जम्मू के सांबा और हीरानगर सेक्टर के उस पार पाकिस्तान के शक्करगढ़ इलाके में देखा गया था।
भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब रऊफ ने भारत में ऐसे किसी हमले की साजिश रची है। इससे पहले भी उसने 31 जनवरी, 2020 को घुसपैठ कराने और किसी बड़े हमले को अंजाम देने के फिराक में था। लेकिन तब भी सुरक्षाबलों ने आतंकियों को बन टोल प्लाजा के पास घेरकर मार गिराया था।
#WATCH J&K: Explosion in the truck, intercepted by security forces near Ban Toll Plaza in Nagrota, Jammu earlier this morning. Driver of the truck managed to escape.
In the encounter that ensued, four terrorists were neutralised & one Police Constable injured.
बता दें सुबह 5 बजे के करीब चावल से लदे एक ट्रक में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों का समूह जम्मू-श्रीनगर हाईवे के रास्ते कश्मीर जा रहा था। ट्रक को नाके पर रोका गया और चेकिंग की गई। सुरक्षाबलों से खुद को घिरता देख ट्रक में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी।
वहीं अपना बचाव करते हुए आतंकी जंगल की तरफ छिपने के लिए भाग निकले। जिसके बाद जवानों ने तत्काल उनकी धरपकड़ करने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान आतंकियों ने फिर से सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए चारों आतंकियों को मार गिराया। जबकि हमारे भी एसओजी के दो जवान घायल हुए हैं। जिन्हें उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।
मुठभेड़ की जानकारी देते हुए कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान ने इस तरफ आतंकियों की घुसपैठ कराने और आगामी चुनावों को बाधित करने की कोशिशें बढ़ा दी हैं। इसके लिए जम्मू पुलिस और सुरक्षाबलों ने चार पाकिस्तानियों (आतंकियों) को धराशायी कर अच्छा काम किया है। उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कश्मीर आना था।”
चुनाव को मद्देनजर सुरक्षा बलों की पुख्ता तैयारियों के बारे बताते हुए आईजीपी ने कहा, ‘‘चाहे कोई चुनाव हो या 15 अगस्त या 26 जनवरी या यहाँ तक कि कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति आ रहा हो, आतंकियों के हमले की आशंकाएँ हमेशा बनी रहती हैं, लेकिन हम पूरी तरह से तैयार हैं… हम उम्मीदवारों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं और उन्होंने कल से चुनाव प्रचार के लिए मैदान में जाना शुरू कर दिया है और डरने की कोई बात नहीं है।”
बता दें मारे गए 4 आतंकवादी के पास से सुरक्षाबलों ने 11 एके-47 राइफल, 3 पिस्तौल, चीन में बने हुए 29 ग्रेनेड और रॉकेट लॉन्चर से दागे जाने वाले 6 ग्रेनेड, 3 पिस्टल, 2 आईईडी रिमोट, 2 कटर, दवाई, कंबल, सूखे मेवे और अर्धनिर्मित विस्फोटक बरामद किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई है कि शक्करगढ़ लॉन्चिंग पेड में मौजूद फिदायीन आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराने के लिए रऊफ कई दिनों से कोशिश कर रहा था। सभी आतंकी चार और दो के ग्रुप में थे। वहीं अब सुरक्षा एजेंसियाँ मामले को गंभीरता से लेते हुए जाँच-पड़ताल में जुटी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कश्मीर मुद्दे पर कॉन्ग्रेस को घेरते हुए जमकर हमला बोला है। योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जम्मू कश्मीर को लेकर कॉन्ग्रेस का दोहरा रवैया अब उजागर हो गया है। इनके द्वारा वहाँ आतंकवाद और अलगाववाद में शामिल लोगों को प्रोत्साहित करना राष्ट्रीय एकता औऱ अखंडता के साथ सीधे-सीधे खिलवाड़ है। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को नहीं बनने देने के लिए आज कॉन्ग्रेस ही जिम्मेदार है।
कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए सीएम ने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस सदैव राष्ट्रीय अस्मिता के साथ खिलवाड़ करती रही है और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से उन तत्वों को प्रोत्साहित करती रही है, जो देश के अंदर अलगाववाद और अराजकता को बढ़ावा देते हैं।”
कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गुपकार समझौते के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करे। अन्यथा उसका यह दोहरा चरित्र न केवल देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरनाक संकेत कर रहा है अपितु पूरी कांग्रेस पार्टी को कटघरे में खड़ा कर रहा है: मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी
उन्होंने बताया, “अनुच्छेद-370 हटने के उपरांत जम्मू-कश्मीर के कुछ नेताओं ने जो एक आपसी समझौता किया था, यह गुपकार कन्वेंशन कहलाता है। इस पर हस्ताक्षर करने वाले जो लोग हैं, उनमें वहाँ के क्षेत्रीय दलों के साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता भी हैं। पी चिदम्बरम, गुलाम नबी इसका सपोर्ट करते हैं।”
कश्मीर के तमाम मुद्दों पर योगी ने कॉन्ग्रेस से सवाल भी किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस दिल्ली में कुछ औऱ बोलेगी और कश्मीर में कुछ और। कश्मीर को लेकर कॉन्ग्रेस को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि धारा 370 के बारे में उसकी क्या राय है? कॉन्ग्रेस का दोहरा रवैया घातक है।
यह देश कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से इसका जवाब मांगता है कि अनुच्छेद-370 के बारे में कांग्रेस की क्या राय है: मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभारी है, जिन्होंने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार किया। जम्मू और कश्मीर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है, उसी की बौखलाहट गुपकार समझौते के रूप में सामने आई है, जिस पर कॉन्ग्रेस के नेताओं के भी हस्ताक्षर हैं।
देश आभारी है आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी एवं गृह मंत्री श्री @amitshah जी का, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 और 35A को समाप्त करते हुए ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार किया: मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी
योगी आदित्यनाथ ने कश्मीर के नामचीन लोगों के भ्रष्टाचार को लेकर उन्होंने कहा कि कश्मीर के तमाम चेहरे अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाते थे और कश्मीर के विकास का पैसा हड़प जाते थे। मोदी की नीतियों के तहत अब जिला परिषद के जरिए गाँव तक पैसा जा रहा है तो बौखलाहट हो रही है। जिस तरह फारूख अब्दुल्ला और महबूबा के बयान आए हैं उससे कॉन्ग्रेस का जुड़ना खतनाक है। जब सीमा पर जवान लड़ रहे हैं तो दुश्मन देश से मदद लेने की बात करना क्या साबित करता है?
सुदर्शन न्यूज के प्रोग्राम बिंदास बोल-UPSC जिहाद पर सुनवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपना हलफनामा दायर कर दिया है। इस हलफनामे में मंत्रालय ने प्रोग्राम को आपत्तिजनक कहा है लेकिन फिर भी प्रोग्राम के बाकी बचे 4 एपिसोड को प्रोग्राम कोड के मुताबिक काट-छाँट करके चलाने की अनुमति दे दी है।
BREAKING: Ministry of Information and Broadcasting has filed an Affidavit stating that the “#BindasBol – #UPSCJihad” programme of #SudarshanNews is against good taste and decency, attacks religious communities and contains defamatory, deliberate and obscene half truths. pic.twitter.com/ImQ2iCKefz
सुदर्शन टीवी को भविष्य में सावधानी बरतने की होगी जरूरत
इस हलफनामे में मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि चैनल को अपनी विषय सामग्री को लेकर भविष्य में सावधानी बरतनी होगी। हलफनामे में लिखा है, “मामले में सभी तथ्यों और परिस्थियों को जाँच करने और ब्रॉडकास्टर के मौलिक अधिकारों को संतुलित करने के बाद भविष्य में सावधान रहने के लिए ये कुछ ‘सावधानियाँ’ हैं। यह निर्देश दिया जाता है कि आगे यदि प्रोग्राम कोड का उल्लंघन भविष्य में किया गया तो कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
मंत्रालय ने चैनल के शो को इस तरह से मॉडरेट करने के लिए कहा है कि प्रोग्राम कोड का कोई उल्लंघन न हो। इसमें किसी धर्म या समुदाय पर हमला, या विजुअल्स और ऐसे शब्द इस्तेमाल न करने को कहा गया जो सांप्रदायिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही मंत्रालय ने चैनल से कहा कि वह अश्लील, अपमानजनक, गलत चीजें भी अपने शो से हटाएँ।
इससे पहले मंत्रालय ने चैनल को केबल टीवी नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट के तहत प्रोग्राम कोड उल्लंघन से संबंधित शिकायतें मिलने के बाद नोटिस भेजा था। अब मंत्रालय का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अधीन है वही इस मामले पर आगे सुनवाई करेंगे।
UPSC जिहाद प्रोग्राम पर सुदर्शन टीवी के ख़िलाफ़ मुकदमा
सितंबर में सुदर्शन टीवी ने बिंदास बोल प्रोग्राम के कुछ एपिसोड प्रसारित किए थे। इसमें दावा किया गया था कि कुछ समूह हैं जो मुस्लिम युवाओं को सिविल परीक्षाओं के लिए तैयार कर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘यूपीएससी जिहाद’ कहते हुए कई ऐसे प्रमाण दिखाए थे जिससे उनका दावा मजबूत हो। इस प्रोग्राम के प्रसारण के बाद कई मुस्लिम संगठनों ने इस पर विरोध किया था और माँग की थी कि इसके अन्य भाग ब्रॉडकास्ट होने से रोके जाएँ।
मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि जिन्हें शो नहीं पसंद है वो अपना टीवी बंद कर लें। साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इस केस पर जाँच करने को कहा था कि क्या यह मामला प्रोग्राम कोड का उल्लंघन है। सुनवाई के दौरान सुदर्शन टीवी ने भी एनडीटीवी के ऐसे शो दिखाए थे कि जिसमें हिंदुओं की खराब छवि दिखाने का प्रयास हुआ था।
ऑपइंडिया का हस्तक्षेप
गौरतलब है कि कुछ समय पहले जब इस मामले ने तूल पकड़ा था और चैनल की ओर से इसके प्रसारण पर रोक हटाने की माँग की गई थी तब ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और अपवर्ड ने भी इस संबंध में ‘इंटरवेंशन एप्लीकेशन’ (हस्तक्षेप याचिका) दायर की थी। ‘फ़िरोज़ इक़बाल खान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में अनुमति-योग्य फ्री स्पीच को लेकर रिट पेटिशन दायर की गई थी।
“सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचार के लिए जो मुद्दे आए हैं, जाहिर है कि उसके परिणामस्वरूप फ्री स्पीच की पैरवी करने वालों पर प्रकट प्रभाव पड़ेगा। साथ ही ऐसी संस्थाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा, जो जनता के लिए सार्वजनिक कंटेंट्स का प्रसारण करते हैं। इसलिए याचिकाकर्ता की ओर से ये निवेदन है कि इन्हें भी इस मामले में एक पक्ष बनाया जाए। इस प्रक्रिया में एक पक्ष बना कर भाग लेने की अनुमति दी जाए।”
17 नवंबर को मशहूर गायक सोनू निगम ने आपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो साझा किया था जिस पर 1.2 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं। इस वीडियो में सोनू निगम जहाँ बैठे हुए थे वहाँ से हिमालयन रेंज नज़र आ रही थी, उन्होंने खासतौर से वामपंथी मीडिया की जम कर आलोचना की। इस दौरान उनके निशाने पर रहे ट्रिब्यून (Tribune) और सीएनएन लोकमत (CNN Lokmat)।
वीडियो में सोनू निगम ने कहा कि वह जगे और उन्होंने एक लेख पढ़ा जिसमें इस बात का ज़िक्र था कि वह अपने बच्चे को भारत में गायक बनते हुए नहीं देखना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि लेख में उनके विचारों पर की गई ‘ट्रोल टिप्पणियों’ का उल्लेख था। सोनू निगम ने वीडियो में लेख प्रकाशित करने वाले मीडिया समूह के संबंध में कहा, “यह वीडियो उन दल्लों के लिए है।” फिर उन्होंने ट्रिब्यून के संपादक को संबोधित करते हुए कहा, “तू सोता कैसे है दल्ले?”
अपने बेटे के बारे में बात करते हुए सोनू निगम ने कहा कि उनका बेटा बहुमुखी प्रतिभा का धनी है और उसकी जो मर्ज़ी होगी वह अपने जीवन में वही करेगा। उन्होंने कहा, “मेरा बेटा गाता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह गायक बनेगा।” अपनी आलोचना जारी रखते हुए बॉलीवुड गायक ने कहा कि मीडिया इतना लेफ्टिस्ट हो चुका है कि उन्हें अपने राईट (दाहिने) हाथ से नफ़रत हो चुकी है। और तो और वह अपनी दाईं आँख की पलकें तक नहीं झपकाते हैं। मीडिया को ऐसा भ्रम ही चुका है कि हर इंसान जो उनके राईट साइड खड़ा है वह पक्का ‘राईट विंग’ का है।
फिर सोनू निगम ने कहा, “मैं जो हूँ वह तुम कभी नहीं हो सकते हो, मैं एक सच्चा भारतीय हूँ। मैं केंद्रित व्यक्ति हूँ न लेफ्ट और न ही राईट और बतौर पत्रकार तुम्हें भी कुछ ऐसा ही देखना और समझना चाहिए था।” ट्रिब्यून के संपादक को एक बार फिर दल्ला कहते हुए सोनू निगम ने सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद बॉलीवुड में भाई भतीजावाद (नेपोटिज्म) पर छिड़ी बहस पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा इस मुद्दे को लेकर बॉलीवुड में कहा जाता है कि गायक अपने बच्चों को गायक बनाते हैं, अभिनेता अपने बच्चों को अभिनेता बनाते हैं और यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है। मीडिया को इस बात की सराहना करनी चाहिए कि वह गायक होने के बावजूद अपने बेटे को गायक नहीं बनाना चाहते हैं। ट्रिब्यून को अपने दायरे में रहने की नसीहत देते हुए सोनू निगम वीडियो के अंत में News18 लोकमत की भी आलोचना करते हैं। वह कहते हैं, “News18 लोकमत तू भौंक मत” और यहीं पर वह अपना वीडियो ख़त्म करते हैं।
जिस रिपोर्ट पर सोनू निगम को आया गुस्सा
15 नवंबर को टाइम्स नाउ डिजिटल ने सोनू निगम के गाने ‘ईश्वर का वह सच्चा बन्दा’ के लॉन्च के मौके पर एक साक्षात्कार प्रकाशित किया था।
टाइम्स नाउ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सोनू निगम से पूछा गया कि क्या उनका बेटा नीवन भी गायक बनने की ख्वाहिश रखता है। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “सच कहूँ तो मैं नहीं चाहता हूँ कि मेरा बेटा गायक बने और कम से कम इस देश में तो नहीं। वैसे भी वह भारत में नहीं रहता है, दुबई में रहता है। मैंने उसे पहले ही भारत से बाहर भेज दिया है, वह पैदाइशी गायक है लेकिन उसकी रुचि अन्य चीज़ों में है। फ़िलहाल वह यूएई के सबसे उम्दा ‘गेमर्स’ में से एक है। वह फोर्टनाइट (Fortnite) में दूसरे पायदान पर है, यह एक तरह का गेम है और वह इसे खेलने के मामले में यूएई का सबसे अच्छा गेमर माना जाता है। वह तमाम गुणों और हुनर के साथ एक शानदार बच्चा है और मैं उसे यह नहीं बताना चाहता हूँ कि उसे क्या करना चाहिए। देखते हैं कि वह खुद से क्या करना चाहता है।”
इसके बाद सोनू निगम ने इस बात का भी ज़िक्र किया कि कैसे तमाम लोग अच्छे संगीत को पसंद कर रहे हैं। लेकिन ट्रिब्यून और अन्य मीडिया समूहों ने वही हिस्सा उठाया जिसमें उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चे को गायक नहीं बनने देना चाहते हैं। ट्रिब्यून ने मुख्य रूप से वह तथ्य हैडलाइन में सामने रखा है जिसमें उनका बेटा दुबई जा चुका है। इसके बाद ट्रिब्यून ने तमाम ट्रॉल्स की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया जिसमें दुबई जाने की बात पर सवाल किए गए थे। इसके पहले सोनू निगम ने अज़ान के लिए लाउडस्पीकर्स पर भी सवाल खड़े किए थे।
ट्रिब्यून ने एक ट्रोल का उल्लेख करते हुए कहा, “मैं इस बात से खुश हूँ कि सोनू निगम एक ऐसे देश चले गए हैं जहाँ उन्हें अज़ान नहीं सुनाई देती है। वह भारत में अज़ान की आवाज़ से बहुत ज्यादा परेशान थे और स्पीकर्स पर पाबंदी लगाने की बात कही थी। #dubailife”
अप्रैल 2017 में सोनू निगम के एक ट्वीट में काफी विवाद खड़ा किया था, जिसमें उन्होंने अज़ान के लिए इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर्स पर गुस्सा जताया था। इसके बाद तमाम इस्लामी कट्टरपंथियों ने इस मुद्दे को लेकर उनकी जम कर आलोचना की थी, कुछ ने तो यहाँ तक कह दिया था कि सोनू निगम को गले का कैंसर हो जाए। इस ट्वीट के चर्चा में आने के बाद रिज़वान मलिक नाम के व्यक्ति ने उनके सिर पर 21 करोड़ रुपए का ईनाम रख दिया था। पश्चिम बंगाल के एक मौलवी ने इस बात पर फतवा जारी करते हुए सोनू निगम का सिर मुंडवाने वाले व्यक्ति को 10 लाख रुपए देने की बात कही थी।
इसके बाद सोनू निगम खुद टकले हो कर फतवा स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद मौलवी ने रुपयों का भुगतान करने से मना कर दिया था। ऐसा करने पर उसने दो वजहों का हवाला दिया था, कोई सोनू निगम को फटे पुराने जूतों की माला पहनाए और पूरे देश का भ्रमण कराए। इसके बाद सोनू निगम का समर्थन करने पर दो युवकों को चाक़ू मार दिया गया था। उज्जैन के निवासी शिवम राय ने फेसबुक पर बॉलीवुड गायक का समर्थन करते हुए कहा था कि वह सिर्फ सोनू निगम के गाने ही सुनेगा। इस बात पर बेगमगंज के कुछ युवक भड़क गए और उनके बीच विवाद हो गया, इसके बाद मोहम्मद नागोरी और फैज़ान खान नाम के युवक ने फोन पर उसे धमकी दी। बाद में अपने दोस्तों के साथ मिल कर उस पर चाक़ू से हमला भी कर दिया।
जबकि सोनू निगम ने असल में लाउडस्पीकर के विषय में कुछ गलत नहीं कहा था। फिर भी उन्हें इतना ट्रोल किया गया कि अंत में उन्हें अपना एकाउंट डिएक्टिवेट करना पड़ गया था। साल 2015 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने खुद कहा था कि ऐसी लगभग 822 मस्जिद और 90 मंदिर हैं जिनके पास लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने का लाइसेंस नहीं है। इसके बाद साल 2014 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि नवी मुंबई स्थित इस तरह के असंवैधानिक लाउडस्पीकर्स को हटाया जाए। इस आदेश का मुस्लिम नेताओं ने स्वागत भी किया था। सोनू निगम इस बात पर गुस्सा हुए थे कि ट्रिब्यून ने वह विवाद सामने लेकर आने का प्रयास किया जो कई साल पुराना है। इतना ही नहीं मीडिया समूहों ने अपनी बात रखने के लिए उनके बेटे का उपयोग किया।
देश की राजधानी दिल्ली में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। जहाँ प्रेमिका फैसल ने अपनी माँ शाहीन नाज और मंगेतर जुबेर के साथ मिलकर मॉडल टाउन इलाके के कारोबारी नीरज गुप्ता की बेरहमी से हत्या कर दी। वहीं पुलिस से बचने के लिए उसके शव के टुकड़े कर उसे राजधानी ट्रेन से गोवा और दिल्ली के बीच ले जाकर फेंक दिया। पुलिस ने मामले के तीनों आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सन्न कर देने वाली यह घटना दिल्ली के आदर्श नगर इलाके की है। दरसल, 14 नवंबर को कारोबारी नीरज गुप्ता घर से किसी से मिलने के लिए गए थे। लेकिन जब घर पर वापस नहीं आए तो उनकी पत्नी ने आदर्श नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि फैसल नाम की महिला जो नीरज गुप्ता के यहाँ काम करती थी, उसका नीरज गुप्ता से अवैध संबंध चल रहा था।
मामले की जाँच कर रहे डीसीपी नॉर्थ वेस्ट विजयंता आर्या के मुताबिक, नीरज गुप्ता के ऑफिस में फैसल नाम की युवती जॉब करती थी। इसी दौरान नीरज से उसका प्रेम प्रसंग चलने लगा। नीरज शादीशुदा थे और बच्चे भी हैं। इस बीच फैसल के घर वालों ने उसकी सगाई जुबेर नाम के शख्स से कर दी। इसका पता नीरज को लगा तो उसने फैसल से इस बारे में बात की। जिसके बाद दिवाली से दो दिन पहले फैसल ने आदर्श नगर केवल पार्क स्थित अपने घर पर नीरज को बुलाया। वहीं जब नीरज वहाँ पहुँचे तो वहाँ मौजूद फैसल, उसकी माँ शाहीन और मंगेतर जुबेर से उनकी बहस हो गई।
पुलिस के मुताबिक, बहस इतनी बढ़ गई कि सब हाथापाई पर उतर आए। वहीं गुस्से में नीरज ने फैसल को धक्का दे दिया। क्रोधित जुबेर ने ईंट से नीरज के सिर पर प्रहार कर दिया। और लोहे की रॉड से भी हमला कर दिया। मगर जुबेर का गुस्सा इतने पर ही नहीं रुका उसने हैवानियत की हद पार करते हुए नीरज के पेट पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया। फिर उसका गला धड़ से अलग कर दिया। नीरज की हत्या के बाद तीनों ने उसके शव को ठिकाने लगाने की प्लानिंग की।
कथिततौर पर नीरज को मरने के बाद तीनों ने मिलकर उसके बॉडी के टुकड़े कर दिए। और एक बड़ा सूटकेस खरीदा शरीर को अंदर भर दिया, एक ऐप-आधारित टैक्सी किराए पर ली और इसे निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर ले गए। रिपोर्ट के अनुसार जुबेर ट्रेन में पैंट्री में काम करता था जिसकी वजह से उसका काम और आसान हो गया। लिहाजा उसने आसानी से नीरज के शव को राजधानी ट्रेन से ले जाकर उसे दिल्ली गोवा के बीच भरूच में फेंक दिया।
बता दें पुलिस ने हत्या में कथित रूप से इस्तेमाल चाकू, लोहे की रॉड और ईंट बरामद की है। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है अधिकारी ने कहा, हम शव को बरामद करने के प्रयास कर रहे हैं। साथ ही आगे की जाँच पड़ताल जारी है।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक वकील ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के ख़िलाफ़ लालगंज दीवानी कोर्ट में शिकायत दर्ज करवाई है। वकील का नाम ज्ञान प्रकाश शुक्ल है जो ऑल इंडिया रूरल बार असोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
ज्ञान प्रकाश की नाराजगी ओबामा की किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड (A promised Land)’ में राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह पर की गई टिप्पणियों से संबंधित है। इस शिकायत में माँग की गई है कि भारतीय नेताओं के अपमान और उनके समर्थकों की भावना को आहत करने के लिए ओबामा के ख़िलाफ़ एफआईआर होनी चाहिए। अब इस शिकायत पर 1 दिसंबर में सुनवाई होगी ।
शिकायतकर्ता का कहना है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह के ख़िलाफ़ अवांछित बयान देकर भारतीय निर्वाचन प्रणाली की अवहेलना की है और साथ ही निर्वाचन आयोग जैसे नियामक संस्थान के साथ संविधान की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है।
वकील का दावा है कि जिन नेताओं के लिए ओबामा ने अपनी किताब में टिप्पणी की है उनके करोड़ों समर्थक हैं और वह ऐसी टिप्पणी से आहत हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि आहत हुए समर्थक किताब के ख़िलाफ़ सड़कों पर आ गए तो अराजकता फैल सकती है इसलिए ओबामा के ख़िलाफ एफआईआर हो। उनका यह भी कहना है कि अगर यह एफआईआर नहीं हुई तो वह अमेरिकी दूतावास के बाहर उपवास पर चले जाएँगे।
‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह पर टिप्पणी
17 नवंबर को बाजार में आई ओबामा की ‘ए प्रॉमिस लैंड’ नामक किताब में उन्होंने अपनी भारतीय यात्रा का जिक्र करते हुए यूपीए कार्यकाल पर चर्चा की है। उन्होंने इस किताब में राहुल गाँधी को एक अनगढ़ छात्र लिखा है।
उन्होंने कहा है, “उनमें (राहुल गाँधी) एक ऐसे ‘घबराए हुए और अनगढ़ (Unformed- जो तराशा न गया हो)’ छात्र के गुण हैं, जिसने अपना पूरा पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है और वह अपने शिक्षक को प्रभावित करने की चाहत रखता है, लेकिन उसमें ‘विषय में महारत हासिल’ करने की योग्यता या फिर जूनून की कमी है।”
ऐसे ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि मनमोहन सिंह ने 26/11 के बाद पाकिस्तान पर हमला करने की माँग का विरोध किया था, लेकिन उनका यह निर्णय उन्हें राजनीतिक तौर पर महँगा पड़ गया। उन्होंने मनमोहन सिंह के लिए लिखा, “उन्हें (मनमोहन सिंह) डर था कि मुस्लिमों के ख़िलाफ बन रही भावना ने भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के प्रभाव को मजबूती दी है।”
हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों और कई राज्यों के उपचुनावों में लचर प्रदर्शन के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी को अपने ही दिग्गज नेताओं से तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस कड़ी में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के बाद अब यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने बयान दिया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के नीतिगत ढाँचे की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी के प्रदर्शन में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट ही आई है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को इतना साहसी बनना होगा कि गिरावट के उन कारणों को पहचाने और उन पर काम करे।
कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम की तरफ से यह प्रतिक्रिया बिहार विधानसभा और मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश उपचुनाव में दयनीय प्रदर्शन के बाद सामने आई है। चिदंबरम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपनी संगठनात्मक क्षमता से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा। दैनिक भास्कर को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कॉन्ग्रेस के प्रदर्शन पर खुल कर आलोचना की। चिदंबरम ने कहा कि उपचुनाव इस बात प्रमाण हैं कि कॉन्ग्रेस की संगठनात्मक दृष्टिकोण से कोई पकड़ नहीं रह गई है। इतना ही नहीं जिन राज्यों में उपचुनाव हुए हैं उनमें कॉन्ग्रेस कमज़ोर ही हुई है।
महागठबंधन की हार अपना नज़रिया रखते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि महागठबंधन के जीतने की उम्मीदें थीं फिर भी हम जीतते जीतते हार गए। इन तमाम आलोचनात्मक दलीलों के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए आशावादी नज़र आते हुए उन्होंने कहा कि कुछ ही समय पहले कॉन्ग्रेस ने हिन्दी बेल्ट 3 राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावों में जीत हासिल की थी।
इसके बाद एआईएमआईएम और सीपीआई (एमएल) का उल्लेख करते हुए चिदंबरम ने कहा कि छोटे दल अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं क्योंकि इनकी ज़मीनी स्तर पर पकड़ बेहद मजबूत है। कॉन्ग्रेस, राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन की सबसे कमज़ोर कड़ी साबित हुई है। पार्टी को तमाम तरह के बदलावों की ज़रूरत है और ऐसे बदलाव नहीं होने की सूरत में राजनीतिक नुकसान बढ़ता ही जाएगा।
अंत में कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी ने अपनी संगठनात्मक क्षमता से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा। यह एक बड़ा कारण था कि कॉन्ग्रेस इतनी कम सीटों पर जीत हासिल हुई जबकि भाजपा और उसके सहयोगी दल पिछले 20 वर्षों से चुनाव जीत रहे हैं। पार्टी को सिर्फ 45 उम्मीदवार उतारने चाहिए थे, शायद तब बेहतर नतीजे हासिल होते। इसके ठीक पहले कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने भी संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर कई सवाल खड़े किए थे।
उनका कहना था कि हार दर हार के बाद पार्टी के नेतृत्व ने इस प्रक्रिया को अपनी नियति मान कर स्वीकार कर लिया। कपिल सिब्बल के इस बयान पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सलमान खुर्शीद ने आलोचना की थी। इन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि पार्टी के भीतर रह कर पार्टी को नुकसान पहुँचाने वाले नेता खुद बाहर चले जाएं। इसके अलावा लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन ने भी कपिल सिब्बल के बयान पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कपिल सिब्बल को पार्टी छोड़ ही देनी चाहिए।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पड़ोसी ने बारामती में आत्महत्या कर ली। उसने अपने सुसाइड नोट में अनेक स्थानीय एनसीपी नेताओं का ज़िक्र किया है और उन्हें ही अपनी मृत्यु के लिए जिम्मेदार ठहराया है। समाचार वेबसाइट ‘आज तक’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़, बारामती के व्यवसायी प्रीतम शाह ने इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि कई स्थानीय एनसीपी नेता रुपयों के लिए उनका उत्पीड़न कर रहे थे।
बारामती के पुलिस इंस्पेक्टर ने इस घटना पर बात करते हुए विस्तार से जानकारी दी। इंस्पेक्टर नामदेव शिंदे ने बताया कि व्यवसायी प्रीतम शाह ने बेटे ने एनसीपी के नेताओं के विरुद्ध इस संबंध में मामला दर्ज कराया है। उसने आरोप लगाया है कि एनसीपी नेताओं ने उसके पिता का उत्पीड़न किया था। फ़िलहाल यह घटना पूरे बारामती में चर्चा का मुद्दा बनी हुई है, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आरोपित एनसीपी नेता ने प्रीतम शाह को 30 फ़ीसदी की ब्याज दर पर कुछ धनराशि दी थी।
प्रीतम शाह ने पूरी राशि लौटा दी थी इसके बावजूद एनसीपी नेताओं ने उनसे रुपए ऐंठना चाहते थे और इसके लिए उसने प्रीतम शाह को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। इतना ही नहीं रिपोर्ट्स की मानें तो आरोपित एक बँगला तक अपने नाम करवाना चाहते थे। प्रीतम शाह के बेटे प्रतीक शाह ने दर्ज कराई गई शिकायत में कई नामों का उल्लेख किया है जिसमें अधिकांश एनसीपी के ही नेता हैं।
इसमें जयसिंह अशोक देशमुख, कुणाल चंद्रकांत काले, संजय कोंदिबा काटे, विकास नागनाथ धनके, प्रवीण दत्तात्रेया गलिंदे, हनुमंत सर्जेराव गवली, सुनील अवले (सनी), संघर अवले, मंगेश अमस का नाम शामिल है। इसमें से एक आरोपित बारामती बाज़ार समिति का पूर्व चेयरमैन है और अन्य सक्रिय रूप से एनसीपी का हिस्सा हैं।
तमाम आरोपितों में से बारामती नगरपालिका का पार्षद है और एक बारामती सहकारिता बैंक का निदेशक है। बारामती पुलिस ने इस प्रकरण में व्यवसायी का उत्पीड़न करने की धाराओं के अंतर्गत आरोपित नेताओं पर मामला दर्ज कर लिया है। अभी तक कुल 6 आरोपित नेता गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 3 फ़रार चल रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।