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पटाखे जलाने पर राशिद ने की मीना देवी और उसके बच्चों से मारपीट, महिला की मौत

उत्तर प्रदेश स्थित एटा जिले की एक घटना में पड़ोस में रहने वाले राशिद ने एक माँ और उसके बच्चों को पटाखे फोड़ने के लिए बुरी तरह पीटा। महिला को निर्ममता से पीटने पर उसे नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ महिला की मृत्यु हो गई। उसके बेटे ने गाँव के ही आरोपित युवक (राशिद) पर मामला दर्ज कराया है। फ़िलहाल आरोपित फ़रार चल रहा है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। 

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ घटना एटा जनपद के जैथरा थाना अंतर्गत झूरा गाँव की है। मंगलवार (17 नवंबर 2020) को 45 वर्षीय मीना देवी के बेटे नेपाल सिंह ने इस मामले पूरे की जानकारी दी। उसने बताया कि उसका छोटा भाई करन पड़ोस में रहने वाले हेमराज के बेटे के साथ रात के लगभग 8:30 बजे पटाखे फोड़ रहा था। इनके साथ गाँव का ही एक और युवक पटाखे जला रहा था। 

जिस जगह पर तीनों लोग पटाखे फोड़ रहे थे उसके ठीक सामने राशिद (पुत्र लाल मोहम्मद उर्फ़ लल्लन खान) नाम के युवक की परचून की दुकान है। उसने पटाखे फोड़ने की बात पर तीनों लड़कों की बुरी तरह पिटाई कर दी। शोरगुल होने पर मीना देवी बाहर आई और बचाव करने का प्रयास किया। राशिद ने मीना देवी के साथ भी उसी तरह का बर्ताव किया और उन्हें पीट पीटकर घायल कर दिया। इसके बाद उसने मीना देवी का गला दबा दिया, जिसकी वजह से वह बेहोश होकर गिर गई। 

अपनी माँ को बेहोश देखकर मीना देवी का बेटा करन घटनास्थल पर ही रोने लगा जिससे वहाँ गाँव के लोग इकट्ठा हुए। उन्होंने मीना देवी को जैथरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना पर विस्तार से जानकारी देते हुए थानाध्यक्ष विनय कुमार शर्मा ने बताया कि पूरा विवाद पटाखे फोड़ने को लेकर शुरू हुआ था।

उन्होंने कहा कि मारपीट के दौरान महिला को गंभीर चोट आई थी जिसकी वजह से उसकी मृत्यु हुई थी। शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और आरोपित राशिद की तलाश जारी है। महिला के शव का पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंपा जा चुका है।    

अक्षय बनकर 2 बच्चों का बाप डॉ. अकरम करता रहा नर्स का बलात्कार: अश्लील वीडियो बनाए, गर्भवती होने पर धर्मांतरण का बनाया दबाव

लव जिहाद का एक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में अकरम कुरैशी नाम के चिकित्सक (डॉक्टर) पर एक नर्स ने बलात्कार करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि जब नर्स गर्भवती हुई तब उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव भी बनाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, निजी क्लीनिक में काम करने वाले अकरम ने नर्स को अपने प्रेम जाल में फँसाया। फिर उसने शादी का झांसा देकर महीनों तक उस नर्स के साथ बलात्कार किया। 

विवाह की बात आने पर अकरम कुरैशी ने नर्स पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात है, नर्स 6 महीने की गर्भवती है। डॉक्टर अकरम कुरैशी पर यह आरोप भी लगाया गया है कि सबसे पहले उसने अपनी पहचान छुपाई और अपना नाम अक्षय बताया था। इसके अलावा उसने यह बात भी सामने नहीं आने दी कि वह शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। नर्स ने यह आरोप भी लगाया है कि अकरम ने कई महीनों तक उसे जबरन बंधक बना कर यातनाएं भी दी।   

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पीड़ित महिला एक निजी क्लीनिक में बतौर नर्स काम कर रही थी। आरोपित अकरम ने अपनी मज़हबी पहचान छुपा कर उसे बहलाना फुसलाना शुरू किया। आरोपों के मुताबिक़ अकरम कुरैशी ने कहा कि उसका तलाक हो चुका है और वह उससे (नर्स) से शादी करना चाहता है। इस दौरान उसने महीनों तक नर्स का शारीरिक शोषण किया, नर्स ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपित डॉक्टर ने आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए थे। जब भी वह शादी की बात करती थी डॉक्टर वही वीडियो के ज़रिए धमका कर उसे चुप करा देता था। 

जब नर्स गर्भवती हुई तब अकरम ने गर्भपात कराने का दबाव बनाया। जब नर्स ने ऐसा कराने से मना कर दिया तब डॉक्टर ने उसके साथ मारपीट की और धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया। नर्स ने यह भी आरोप लगाया कि मंगलवार (17 नवंबर 2020) को जब वह डॉक्टर की पत्नी से मिली तब डॉक्टर की पत्नी ने उसके पेट पर लात मारी। इस हरकत की वजह से उसकी सेहत बदतर हो गई। इसके बाद वह किसी तरह वहाँ से बच कर निकली और पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई। नर्स के आरोपों के अनुसार अकरम कुरैशी ने उसका धर्म परिवर्तन कराने की पूरी तैयारी तक कर ली थी। उसने निकाहनामा (इस्लामी क़ानून के अनुसार वैवाहिक प्रमाण पत्र) तक तैयार करा लिया था। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पीड़ित महिला की साल 2012 में शादी हुई थी लेकिन कुछ कारणों की वजह से उसका तलाक हो गया था। तब से वह एक अस्पताल में बतौर नर्स काम कर रही थी। इसके बाद वह मुस्लिम डॉक्टर से संपर्क में आई जिसने खुद तलाकशुदा होने का दावा किया। डॉक्टर ने कहा था कि उसका एक बेटा है लेकिन सच तब सामने आया जब वह गर्भवती हुई। 

मुख्य आरोपित फरार

पुलिस ने इस मामले में अभी तक कुल 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। 

पुलिस द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक़ इस मामले में दो लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। आरोपित अकरम कुरैशी की पत्नी और उसके भाई की गिरफ्तार हो चुकी है और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

स्वरा ने लव-जिहाद को बताया हेट स्पीच, Zomato से विज्ञापन वापस लेने की माँग पर लोगों ने याद दिलाए भड़काऊ ट्वीट

ट्विटर ट्रोल स्वरा भास्कर ने एक बार फिर सस्ती लोकप्रियता के लिए फ़ूड डिलीवरी एप्लीकेशन जोमैटो (Zomato) को सोशल मीडिया वेबसाइट ट्विटर पर इसलिए घेरने प्रयास किया क्योंकि उसका प्रचार के बहाने समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी (Republic TV) पर आ रहा था। 

स्वरा भास्कर के मुताबिक़, रिपब्लिक भारत ‘लव-जिहाद’ के विषय पर चर्चा करके समाज में घृणा फैलाता है और उस पर जोमैटो का विज्ञापन नज़र आने का मतलब है कि जोमैटो कथित तौर पर घृणा के प्रचार में रिपब्लिक टीवी का समर्थन करता है। इस पर नेटिज़न्स ने स्वरा भास्कर को उनके उन दिनों की याद दिलाई, जब दिल्ली दंगों के दौरान वह उपद्रवी और उग्र दंगाई मजहबी भीड़ को सड़कों पर उतरने के लिए उकसा रही थी।

इस पर ‘Defund the Hate’ नाम के ट्विटर हैंडल ने भी एक ट्वीट किया और अपने ट्वीट में रिपब्लिक भारत पर आने वाले ‘जोमैटो’ के विज्ञापन पर टिप्पणी की। टिप्पणी में उसने लिखा, “जोमैटो और दीपिंदर गोयल ने फीडिंग इंडिया (feeding india) का आर्थिक सहयोग किया क्योंकि उन्हें उस पर भरोसा था। क्या हम यह मान सकते हैं कि आप (जोमैटो) इस हेट स्पीच का समर्थन करते हैं क्योंकि आपका विज्ञापन रिपब्लिक भारत पर आता है? अगर हम गलत हैं तो अपने विज्ञापन आज ही वापस लीजिए।” इस ट्वीट में रिपब्लिक भारत में हुई पैनल चर्चा का छोटा सा हिस्सा दिखाया गया था जिसमें एक संत तर्कों के साथ लव जिहाद के मुद्दे पर अपने विचार रख रहे थे। 

इस ट्वीट का जवाब देते हुए स्वरा भास्कर ने ‘विवाद के बहाने चर्चा’ में आने का एक और अवसर लपक लिया और अपने ट्वीट में लिखा, “मैं जोमैटो की रेगुलर ग्राहक हूँ, क्या आप नफरत (उनके मुताबिक़ हेट स्पीच) को डीफंड (Defund) करने की योजना बना रहे हैं? क्या आप इन नफ़रत फैलाने वालों चैनलों (रिपब्लिक भारत) से अपना विज्ञापन बंद करवा सकते हैं। मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ कि मेरे द्वारा दिए गए रुपयों से इस तरह के सांप्रदायिक उन्माद को बढ़ावा दिया जाए। कृपया अपने ग्राहकों को इस बारे में स्पष्ट जानकारी दें।” 

इस मुद्दे पर चर्चा और विवाद का दायरा बढ़ने के बाद जोमैटो ने स्वरा भास्कर का जवाब दिया। जोमैटो ने अपने ट्वीट में लिखा, “हम अपने कंटेंट के अलावा किसी के भी कंटेंट को बढ़ावा नहीं देते हैं। फ़िलहाल हम इस मुद्दे को देख रहे हैं।”

लेकिन यहाँ तक पूरे मुद्दे के सिर्फ एक पहलू पर चर्चा हो रही थी, इसके बाद ट्विटर की जनता ने स्वरा भास्कर के साम्प्रदायिक कारनामों की लिस्ट सामने रख दी। दिल्ली दंगों के दौरान स्वरा भास्कर ने तमाम ट्वीट किए थे, जिसमें लोगों को सड़कों पर इकट्ठा होने से लेकर भारी संख्या में पहुँच कर उग्र होने की बात तक शामिल थी। 

एक ट्विटर यूज़र ने तो स्वरा भास्कर से पूछा कि देश की राजधानी में दंगों जैसे हालात के वक्त वह भीड़ को उकसा रही थीं। अगर रिपब्लिक नफरत फैला रहा है तो स्वरा की हरकतों को प्रेम फैलाना नहीं कहा जा सकता है। 

इसके बाद एक और ट्विटर यूज़र ने लिखा कि राष्ट्रवादियों और देशभक्तों की आबादी का एक बड़ा ग्राहक वर्ग जोमैटो से भी जुड़ा हुआ है। वह वर्ग अर्णब को देखता है और पूरे दिल से पसंद करता है, ये सभी लोग इंतज़ार में हैं कि जोमैटो इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है। 

एक ट्विटर यूज़र ने तो स्पष्ट तौर पर लिखा कि जोमैटो को अच्छी भली संख्या में अनइनस्टॉल करने के लिए तैयार रहिए। कोई भी रैंडम स्वरा किसी संस्थान पर अपना हुकुम नहीं चला सकती है, हम इस मुद्दे को बहुत करीब से देख रहे हैं। 

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब जोमैटो इस तरह के सांप्रदायिक विवाद की वजह से सुर्ख़ियों में बना हुआ है। ऐसे ही हलाल-झटका का विवाद ज़ोमैटो विवाद के दौरान खुल कर सामने आया था। इसमें रेस्टोरेंट से घर पर खाने की डिलीवरी सर्विस देने वाली,ऐप-आधारित कंपनी पर आरोप लगा था कि एक तरफ वह ‘खाने का कोई मज़हब नहीं होता’ जैसी नैतिकता का ज्ञान बाँचती है, दूसरी ओर मुस्लिमों का तुष्टिकरण करने के लिए, 

उनकी ‘हलाल माँस ही चाहिए’ की माँग पूरा करने के लिए वह हर तरीके से तैयार रहता है। गौरतलब है कि हलाल माँस, अपनी मूल प्रकृति से ही भेदभाव वाली प्रथा है, जो गैर-मुस्लिमों को रोजगार के अवसर से वंचित करती है। यानि, हलाल माँस को वरीयता देने वाले ज़ोमैटो, मैक्डॉनल्ड्स आदि कॉर्पोरेट खुल कर कार्यस्थल पर भेदभाव (वर्कप्लेस डिस्क्रिमिनेशन) को बढ़ावा देते हैं, और बराबर के अवसरों (ईक्वल ऑपर्च्युनिटी) के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं।

इस्लाम अपनाने को मजबूर दलित महिला ऑटो-चालक, केरल की वामपंथी सरकार पर लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप

केरल के कन्नूर की रहने वाली चित्रा लेखा नाम की एक दलित महिला ऑटो चालक ने घोषणा की है कि वह राज्य में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के हाथों कथित रूप से जातिगत भेदभाव का सामना करने के बाद इस्लाम में धर्मांतरण करने जा रही हैं। केरल की चित्रा लेखा ने सोमवार, 16 नवंबर को एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से यह घोषणा की।

कथित तौर पर, चित्रा लेखा ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि केरल की सत्तारूढ़ सीपीएम पार्टी द्वारा उनकी जाति के कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि उसने सरकार या अदालतों से न्याय पाने की सारी उम्मीदें खो दी हैं। इसलिए, वह इस्लाम में परिवर्तित होकर अपनी दलित पहचान से छुटकारा पाने की योजना बना रही थी।

चित्रा ने लिखा कि उन्होंने 20 साल तक सीपीएम के जातिगत भेदभाव के खिलाफ अकेले संघर्ष किया और वह अब और नहीं सहन कर सकती। उन्होंने कहा कि वह सीपीएम को फर्जी धर्मनिरपेक्ष पार्टी कहते हुए कहा कि वह उसके डर में जीना नहीं चाहती।

सीपीएम सरकार ने छीन ली थी पिछली सरकार द्वारा आवंटित जमीन

कथित तौर पर, चित्रा लेखा ने पहले आरोप लगाया था कि सीपीएम कार्यकर्ताओं ने उन्हें जातिगत भेदभाव के कारण काम नहीं करने दिया। उसका ऑटोरिक्शा भी कथित रूप से जला दिया गया था।

चित्रा लेखा को दो साल पहले कन्नमपल्ली, कन्नूर में राज्य की पिछली यूडीएफ सरकार द्वारा एक मकान के लिए कुछ जमीन और धन आवंटित किया गया था।लेकिन, सीपीएम सरकार ने उसे आवंटित भूमि को रद्द कर दिया और उसे आवंटित धन प्रदान करने से इनकार कर दिया। चित्रा लेखा ने कलक्ट्रेट कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया था लेकिन केरल की वामपंथी सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला।

क्या एक कॉन्ग्रेस नेता दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता की बीवी को लेकर सच में फरार हो गया?: जानें क्या है वायरल सच

सोशल मीडिया पर एक न्यूजपेपर की कटिंग काफी वायरल हो रही है। इस कटिंग में यह खबर है कि एक कॉन्ग्रेसी नेता दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता की पत्नी को लेकर भाग गया।

एक तरफ जहाँ एक बार फिर कॉन्ग्रेस के घोटालों की चर्चा आम है वहीं सोशल मीडिया पर यह खबर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया यूज़र्स कॉन्ग्रेसी नेता के इस कारनामें पर जमकर मजे ले रहे, वहीं कई लोग आश्चर्यचकित होते हुए खबर की सच्चाई को लेकर एक हिंदी अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या सच में एक कॉन्ग्रेसी नेता दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता की पत्नी को लेकर भाग गया?

फैक्ट चेक

बता दें पहली नजर में यह खबर देखने पर किसी को भी लगेगा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल हो रही यह तस्वीर फर्जी है, और किसी ने शरारत करते हुए यह खबर छाप दी होगी। हालाँकि, बारीकी से निरीक्षण करने पर, यह बात सामने आई कि कॉन्ग्रेस नेता की किसी अन्य कॉन्ग्रेस नेता की पत्नी के साथ भागने की प्रकाशित रिपोर्ट सच है।

घटना मध्य प्रदेश से संबंधित है और इस साल फरवरी की है। मामला इंदौर के भवर कुँआ थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के अनुसार बता दें इस साल की शुरुआत में एक कॉन्ग्रेसी नेता की पत्नी अपने दो बच्चों के साथ लापता हो गई थी। महिला के पति ने इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज खँगाले तो पता चला कि उसकी पत्नी और बच्चे एक अन्य कॉन्ग्रेस नेता के साथ दोपहिया वाहन से जाते हुए दिखे।

जिसके बाद अपनी लापता पत्नी के लिए पुलिस से संपर्क करने के बजाय कॉन्ग्रेस नेता ने भोपाल के कॉन्ग्रेस कार्यालय का दरवाजा खटखटाना ज्यादा सही समझा। और दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता की शिकायत की। जिसके बाद पार्टी कार्यालय से कॉन्ग्रेस नेता को इंदौर वापस भेज दिया गया और उन्हें डीआईजी रूचि वर्धन शर्मा से संपर्क करने को कहा गया।

पुलिस थाने में उन्होंने माँग की थी कि उनकी पत्नी को उनके पास वापस लाया जाए। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया था कि जिस कॉन्ग्रेस नेता पर दूसरे नेता की पत्नी को भगाने का आरोप था, वह सेवादल का एक पदाधिकारी था और एक महिला कॉन्ग्रेस नेता के साथ भी जुड़ा था।

योगी सरकार की राह पर MP पुलिस: शातिर बदमाश साजिद चंदनवाला की संपत्ति पर चलाया बुलडोजर, अवैध निर्माण ध्वस्त

मध्य प्रदेश की इंदौर पुलिस ने शहर में अपराध कम करने के लिए योगी सरकार के नक़्शे-कदम पर चलते हुए बदमाशों और गुंडों के खिलाफ अभियान चला रखा है। इसी कड़ी में बुधवार (नवंबर 18, 2020) को शहर के हिस्ट्रीशीटर और शातिर बदमाश साजिद चंदनवाला के अवैध कब्जों को पुलिस ने गिरा दिया।

इस मामले में इंदौर के डीआईजी ने बताया, “हमने पहले भी इस तरह के अभियान चलाए हैं। अब हमने जिला प्रशासन और नगरपालिका के साथ मिलकर ऐसे लोगों के अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया है, जो आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं।”

माफिया साजिद चंदनवाला ने रानीपुरा क्षेत्र में अवैध रूप से तीन दुकानों और एक मकान पर कब्जा करके रखा था। जहाँ से वह कई अवैध गतिविधियों को संचालित करता था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने रानीपुरा क्षेत्र में बनी इन दुकानों और मकान को जेसीबी मशीन से गिरा दिया। 

उसके अवैध निर्माणों को जमींदोज करने की कार्रवाई 10 महीने पहले भी हुई थी। तब चंदनवाला ने मकान और दुकान पर कब्जा कर उसे खाली करने के एवज में पीड़ित से 40 लाख रुपयों की माँग की थी। इतना ही नहीं, उसने मकान मालिक को धमकाया भी था, तब पुलिस ने खातीवाला टैंक निवासी पीड़िता की शिकायत पर चंदनवाला के खिलाफ केस दर्ज किया था।

पीड़ित ने पुलिस को बताया था कि उनका रानीपुरा के पत्ती बाजार में पुश्तैनी मकान है। उसी में दो दुकानें भी हैं, जिन पर चंदनवाला ने कब्जा कर रखा है। दुकानों का किराया भी वही वसूलता है, जब भी उसे मकान और दुकान खाली करने को कहा, तो धमकाते हुए 40 लाख रुपए माँगता है। शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी देता है। पीड़ित तत्कालीन एसएसपी रुचि वर्धन मिश्र के पास पहुँचे, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि उनके पास चंदनवाला के अवैध कब्जों की पूरी लिस्ट है।

बदमाश साजिद चंदनवाला के खिलाफ 40 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, वह एनएसए और जिला बदर जैसी बड़ी धाराओं में जेल जा चुका है। साजिद ने शहर में करोड़ों की सरकारी जमीन और लोगों की दुकानों पर कब्जा करके रखा था। उसके खिलाफ शहर के लगभग सभी थानों में कोई न कोई मामला दर्ज था। लिहाजा पुलिस ने साजिद के खिलाफ कार्रवाई शुरु की है।

पुलिस का कहना है कि साजिद के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। शहर में जहाँ-जहाँ उसने अवैध कब्जा किया है वहाँ से उन्हें हटाने की कार्रवाई चलती रहेगी। पुलिस का कहना है कि शहर के सभी बदमाशों का रिकॉर्ड बना लिया गया है और सभी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी।

पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें: चीन ने भी दिया इमरान को बड़ा झटका, महत्वाकांक्षी CPEC प्रोजेक्ट को रोका

पाकिस्तान में चल रही अस्थिरताओं के बीच चीन ने उससे दूरियाँ बनानी शुरू कर दी है। कोरोना महामारी और चल रहे राजनीतिक संकट के बीच ड्रैगन ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी है। इस रोक ने यह साबित कर दिया कि ऐसा कोई सगा नहीं जिसे चीन ने ठगा नहीं। अब इस कड़ी में चीन ने अपने करीबी कहे जाने वाले दोस्त पाकिस्तान को अपना निशाना बनाया है।

एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए काफी महत्व रखता है। जिसका रुक जाना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। दरअसल, पाकिस्तान ने सीपीईसी के निवेश की कुल धनराशि का एक हिस्सा कर्ज के रूप में चीन से माँगने की योजना बनाई थी। कहा जा रहा कि चीन ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि पाकिस्तान प्रेशर में आकर ऊँची कीमत पर लोन लेने को तैयार हो जाए।

बता दें सीपीईसी की कई परियोजनाओं पर पहले ही रोक लगा दिया गया था। इनमें वे परियोजनाएँ भी शामिल हैं जिन्हें 2018 में इमरान सरकार ने सिर्फ इसलिए रोक दिया था क्योंकि इनमें पिछली सरकार के भ्रष्टाचार का संदेह था। वहीं यह भी एक सच्चाई है कि इमरान खान की अगुवाई में पाकिस्तान सरकार बड़े बुनियादी ढाँचागत कामों में सुस्त पड़ी भी हुई है।

रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि चीन द्वारा यह कदम सीपीईसी अथॉरिटी के चेयरमैन रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम का नाम भ्रष्टाचार में सामने आने के बाद लिया गया है। असीम सलीम का यह कारनामा चीन के लिए बेहद ही चौकाने वाली बात थी असल में उसने खुद मिलिट्री को साझेदार बनाया था क्योंकि उसे भ्रष्टाचार का डर था। लेकिन वहाँ भी भ्रष्टाचार के मामले आने लगे।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में माहौल इस वक्त बेहद ही खराब है। वहीं विपक्षी पार्टियाँ सरकार के खिलाफ पिछले कुछ समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों के गठबंधन ने सरकार की पाबंदी के बावजूद 22 नवंबर को पेशावर में मेगा रैली का ऐलान किया है।

बता दें कि पाकिस्तान में मौजूदा सरकार के खिलाफ 11 विपक्षी दलों ने पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के नाम से गठबंधन बनाया है, इसके प्रवक्ता अब्दुल जलील जान ने कहा, हमने इमरान सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़ दी है।

बेंगलुरु दंगा मामला: NIA ने SDPI के चार ठिकानों सहित 43 जगहों पर की छापेमारी, कई अहम दस्तावेज बरामद

देश के कई हिस्सों में दंगों के लिए आरोपित माने जाने वाली पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर एक बार फिर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) का शिकंजा कसने लगा है। एनआईए ने बुधवार (नवंबर 18, 2020) को बेंगलुरु दंगा मामले में 43 जगहों पर छापेमारी की और यह छापेमारी पीएफआई के पॉलिटिकल फ्रंट सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के चार ठिकानों पर भी मारी गई। एनआईए का दावा है कि इस छापेमारी के दौरान अनेक अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं।

एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला इसी साल बेंगलुरु में दो पुलिस थानों में दंगाइयों ने भारी उत्पात मचाया था। घातक हथियारों से लैस इन दंगाइयों ने पुलिस थानों की इमारतों सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नष्ट किया। साथ ही सरकारी कर्मचारियों पर भी हमला बोला। दंगे से आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई और इस दंगे का मकसद समाज में आतंक फैलाना था। एनआईए के आला अधिकारी के मुताबिक, बाद में यह मामला जाँच के लिए एनआईए को सौंप दिया गया। इस मामले में पीएफआई की पॉलिटिकल फ्रंट के एक पदाधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया था।

मामले की आरंभिक जाँच के दौरान यह पाया गया कि दंगा पूरी तरह से सुनियोजित था और इसमें सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के लोगों का भी हाथ था। दोनों थाना क्षेत्रों में हुए दंगे के इस मामले में क्रमशः 124 और 169 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। आज की छापेमारी के दौरान एनआईए को तलवार, चाकू और लोहे की छड़ आदि हमले में प्रयोग की गई सामग्रियाँ बरामद हुईं। साथ ही एसडीपीआई, पीएफआई से संबंधित अहम दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। मामले की जाँच जारी है।

गौरतलब है कि पीएफआई का नाम लगातार देश के विभिन्न भागों में हो रहे दंगों को भड़काने और दंगों के लिए पैसा पहुँचाने के आरोपों में आता रहा है। चाहे दिल्ली के दंगे हों, उत्तर प्रदेश हो, केरल में प्रोफेसर का हाथ काटने का मामला हो या फिर बेंगलुरु के दंगे हों, हर जगह पीएफआई का नाम सामने आता रहा है।

उल्लेखनीय है कि बेंगलुरु में हुई हिंसा मामले में फरार चल रहे कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मेयर संपत राज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर संदीप पाटील ने बताया, “कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व बेंगलुरु मेयर संपत राज को डीजे हल्ली और केजी हल्ली में हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है।”

उन पर हिंसक भीड़ को उकसा कर दंगे भड़काने का आरोप है। पिछले दिनों कोरोना के इलाज के दौरान संपत एक निजी अस्पताल में भर्ती होने के बाद फरार हो गए थे। इसके बाद से पुलिस लगातार इनकी तलाश कर रही थी।

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता संपत राज के नज़दीकी सहयोगी रियाजुद्दीन को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। रियाजुद्दीन पर आरोप था कि उसने संपत राज को छुपने और फरार होने में मदद की। वह कॉन्ग्रेसी नेता को पहले नगरहोले स्थित एक फार्म हाउस लेकर गया था और उसने कुछ दिनों तक संपत राज को वहीं छुपाया था।

बता दें कि पूरे मामले की शुरुआत एक कथित भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट को माना जाता है, जिसे कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन ने पोस्ट किया था। हालाँकि, स्थिति बिगड़ने पर इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया था लेकिन तब तक दंगाइयों ने हिंसा फैलाना शुरू कर दिया था।

‘सोनिया गाँधी, अहमद पटेल को 700 करोड़ का लाभ’: अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में नाम आने पर बीजेपी ने बोला हमला

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला फिर चर्चा में है। अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हैलीकॉप्‍टर घोटाला मामले में सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के कथित तौर पर नाम सामने आने के बाद भाजपा ने बुधवार (18 नवंबर, 2020) को पार्टी पर जमकर हमला किया। बता दें कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया गया कि सौदा होने पर पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी और वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को 700 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि इटली की अदालत द्वारा नवंबर 2012 में अगस्ता वेस्टलैंड की शुरू हुई एक जाँच ने वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे में अनियमितताओं को उजागर किया था। क्रिश्चियन मिशेल के एक खुलासे का हवाला देते हुए, राठौड़ ने कहा कि करोड़ों के अगस्ता घोटाले में वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेताओं सहित सोनिया गाँधी भी शामिल थी।

भ्रष्टाचारों से लिप्त कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए राठौड़ ने कहा, “जब भी रक्षा सौदों में घोटाले की बात आती है तो कॉन्ग्रेस का नाम आता है। उन्होंने कहा कि जीप घोटाला, टाट्रा ट्रक घोटाला, बोफोर्स घोटाला और अब अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला, ये सब कॉन्ग्रेस के शासन में हुए हैं। क्या कारण है कि रक्षा समझौतों में कॉन्ग्रेस ने हमेशा घोटाले किए हैं? पार्टी के वरिष्ठ सदस्य यानी सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी को स्पष्टीकरण देना चाहिए और इस बात का जवाब देना चाहिए कि इस घोटाले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का नाम क्यों आए हैं।”

मुख्य आरोपित क्रिश्चियन मिशेल के बयान का जिक्र करते हुए, राठौड़ ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस पार्टी के गाँधी परिवार की घोटाले में प्रत्यक्ष भूमिका थी। उन्होंने कहा, “मिशेल ने अपने बयान में ‘इटली की महिला के बेटे के साथ मुलाकात करने का जिक्र किया था जो प्रधानमंत्री बनने की कतार में हैं।”

राठौड़ ने कहा, “चार्जशीट में यह उल्लेख किया गया है कि रक्षा अधिकारियों, नौकरशाहों, राजनेताओं को किकबैक का भुगतान किया गया था और यह सब स्विस पुलिस द्वारा जब्त दस्तावेजों पर आधारित है। क्रिश्चियन मिशेल का बयान और एक अन्य आरोपित राजीव सक्सेना से पूछताछ में भी यह सब कुछ सामने आया है।”

राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए राठौड़ ने कहा कि जो व्यक्ति बार-बार, छोटी-छोटी चीजों पर ट्वीट करता है वह इतने बड़े घोटाले में स्पष्ट रूप से अपने नेताओं के नाम सामने आने के बावजूद भी चुप्पी साधे हुए हैं।

गौरतलब है कि कर्नल राज्यवर्धन राठौर का प्रेस बयान मुख्य आरोपित राजीव सक्सेना द्वारा सलमान खुर्शीद, कमलनाथ के बेटे बकुल नाथ और सोनिया गाँधी के करीबी सहयोगी अहमद पटेल के घोटाले में शामिल होने के बारे में किए गए खुलासे के बाद सामने आया है।

बता दें, 3,600 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे घोटाले में आरोपित राजीव सक्सेना ने पूछताछ में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल और सलमान खुर्शीद तथा कमलनाथ के पुत्र बकुल नाथ के नाम लिए हैं।

उल्लेखनीय है, सक्सेना को दुबई में यूएई के सरकारी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था और बाद में 30 जनवरी 2019 को भारत में प्रत्यर्पित किया गया था। वहीं प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ में उसकी 385 करोड़ रुपए की संपत्ति का मामला भी सामने आया था

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला

भारत ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य VVIP की सेवा के लिए 12 अगस्ता वेस्टलैंड AW101 हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए यूपीए शासन के तहत 2010 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें कुछ राजनेताओं और लोक सेवकों का अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग करते हुए मोटी घुस लेने का आरोप लगा था। घोटाला सामने आने के बाद 2013 में सौदा रद्द कर दिया गया था।

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाले के सामने आने के बाद इसने तमाम कॉन्ग्रेसी नेताओं की पोल खोल कर रख दी थी। वहीं बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को दुबई से भारत लाया गया था।

76 लापता बच्‍चों को ढूँढकर महिला हेड कॉन्स्‍टेबल ने माता-पिता को सौंपी उनकी खुशियाँ: दिल्ली पुलिस ने दिया ये इनाम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के समयपुर बादली पुलिस थाने में तैनात एक महिला हेड कॉन्स्टेबल को उसकी मेहनत कार्य निष्ठा और ईमानदारी को देखते हुए उच्च अधिकारियों ने उसे आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन (बिना बारी की तरक्की) देने का फैसला किया है। इस संबंध में दिल्ली पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट कर जानकारी दी गई है। बता दें कि महिला हेड कांस्टेबल सीमा ढाका को यह पुरस्कार लापता हुए 76 बच्चों को ढूँढ़ने के बाद मिला है। अपनी तरक्की की खबर सुनने के बाद सीमा ढाका भी काफी खुश हैं।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता से मिली जानकारी के मुताबिक इस वर्ष पाँच अगस्त को पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने राजधानी में लापता बच्चों को ढूँढने और उनके माता-पिता को सौंपने के लिए पुलिस खेमे को प्रोत्साहित किया। इस दौरान उन्होंने इस काम को जल्द पूरा करने वाले पुलिसकर्मियों को बिना बारी की तरक्की देने का भी वादा किया। 

श्रीवास्तव के ऐलान के मुताबिक अगर कोई कॉन्स्टेबल या हेड कॉन्स्टेबल अगर एक वर्ष के अंदर 14 वर्ष से कम उम्र के कम से कम 50 बच्चों की खोज निकालने पर आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन दिया जाएगा। इसके अलावा शर्त यह भी थी की इन बच्चों में से 15 बच्चों की उम्र आठ साल से कम होना अनिवार्य था। 15 बच्चों को खोज निकालने पर ‘असाधारण कार्य पुरस्कार’ देने की घोषणा की गई थी।

बता दें कि दिल्ली के समयपुर बादली पुलिस थाने में तैनात महिला हेड कॉन्स्टेबल सीमा ढाका ने 76 लापता बच्चों का पता लगाया, इन 76 बच्चों को दिल्ली और अन्य राज्यों से तीन महीने के भीतर पता लगाया गया। इसके साथ जिन 76 बच्चों की खोज सीमा ने की है उनमे से 56 की उम्र 14 साल से कम की है। उनके द्वारा खोजे गए बच्चों को बिहार, बंगाल एवं देश के अन्य हिस्सों से बरामद किया गया है।