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पाकिस्तान से आकर पीर खुशहाल ने 100 बीघे पर बनाया था चिल्लागाह, थे 400 कमरे… योगी प्रशासन ने चलवाया बुल्डोजर

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा किए हुए पीर खुशहाल के अवैध चिल्लागाह पर बुल्डोजर चला कर उसे जमींदोज कर दिया। जानकारी के अनुसार पाकिस्तान से आए पीर खुशहाल ने भोंपा थाना क्षेत्र में साल 1964 में इस जमीन को लीज पर लेकर इस पर 100 बीघा में अवैध निर्माण करवा लिया था। यहाँ कथित तौर पर 400 कमरे और इबादतगाह था। 

प्रशासन ने लीज खत्म होने पर पीर खुशहाल के परिवार को नोटिस भेजा था लेकिन जब उसे खाली नहीं किया गया तो अल्टीमेटम देकर उस पर जेसीबी चलवाने का काम शुरू हुआ।

इस दौरान पीर की बीवी ने इस कार्रवाई का विरोध किया लेकिन अधिकारियों ने हाईकोर्ट और नियम का हवाला देकर जमीन को खाली करवाया और शुरु में आरामगाह में बने दस कमरों के आगे बने बरामदे व आगे के हिस्से को गिराकर प्रशासन टीम लौट आई। इसके बाद इस आवासीय महल को गिराने का काम लगातार चला। पिछले दिनों इस निर्माण के 50 कमरे ध्वस्त किए गए।

यहाँ बता दें कि पाकिस्तान से आए पीर खुशहाल की मृत्यु साल 2017 में हुई थी। उसके घर वालों ने इस अवैध निर्माण में उसकी मजार भी बनाई हुई है। जब पिछले हफ्ते कई आला अधिकारियों समेत प्रशासन की टीम बिहारगढ़ में बने चिल्लागाह पर पहुँची तो पीर खुशहाल की बीवी नाजिया अफरीदी ने इसका विरोध किया और कहा कि धर्मस्थल को नहीं तोड़ा जा सकता।

हालाँकि, अफसरों ने नाजिया को साल 2005 में जमीन की लीज पूरी होने की बात बताई और कहा कि ध्वस्तीकण की कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि यह जमीन खाली करा कर वापस वन विभाग को सौंपी जाएगी। अगस्त महीने में इसके लिए नोटिस चिपकाया जा चुका है। अब जमीन को खाली कराने का काम हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले पीर खुशहाल की जमीन के मामले को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने 19 अगस्त 2020 को जिलाधिकारी सेल्वा जे को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में कहा गया कि वर्ष 1975 में दी गई जमीन के आवंटन का समय 31 अक्तूबर 2005 को पूरा हो गया। 

उन्होंने कहा कि पीर खुशहाल की मृत्यु भी हो चुकी है। कोर्ट में भी इस जमीन को लेकर कोई मामला नहीं है। कोर्ट ने कहा प्रशासन वन विभाग की इस जमीन को तत्काल खाली कराए। इस पत्र के बाद ही विभाग की जमीन को खाली कराने के लिए नोटिस जारी किया गया। जब लंबे समय तक वन विभाग की जमीन खाली नहीं हुई तो मंत्री संजीव बालियान ने फिर डीएम और डीएफओ से पूछा कि जमीन को खाली नहीं कराने के पीछे किसका दबाव है।

इसके बाद चिल्लाहगाह भूमि पर अवैध निर्माण को गिराने का काम 11 नवंबर को शुरू हुआ। वन क्षेत्राधिकारी ने हाल में बताया कि पीर खुशहाल की बीवी ने आवासीय महल को खाली करना शुरू कर दिया है। परिसर में बनी मस्जिद और पीर बाबा की मजार वैसी की वैसी बनी रहेगी। बाकी सभी निर्माण कार्य को ध्वस्त किया जाएगा।

हिंदुओं के तीर्थ के पास मिली पाकिस्तानी पीर को जमीन: राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ

गौरतलब हो कि इस अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ दिव्य कुमार सोती ने यह जानकारी ट्विटर पर साझा की है। उन्होंने बताया है कि पीर खुशहाल को मिली वन विभाग की जमीन हिंदुओं के तीर्थ शुक तीर्थ के बिलकुल नजदीक है, जहाँ राजा परीक्षित को संन्यासी शुक ने श्रीमद्भगवत गीता का पाठ सुनाया था।

वह कहते हैं कि अब सोचिए कितने लोगों ने भारत पर राज किया कि हम भारतीयों को वन विभाग में जाने के लिए अनुमति लेनी होती है और पीर खुशहाल को 100 बीघा जमीन लीज पर मिल गई।

उन्होंने पाकिस्तान में हिंदुओं की हालत को याद दिलाया और कहा कि उन्हें झोपड़ी भी नसीब नहीं होती जबकि यहाँ पाकिस्तान के पीर ने वन विभाग की जमीन पर 400 कमरे बना लिए।

उन्होंने बताया कि इलाके में स्थानीय लोग इस आवासीय महल में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर बात करते रहे हैं। यहाँ से ट्रक लोड होकर एलपीजी और डीजल सप्लाई का काम भी हुआ है। लेकिन, इस पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। दिव्य कुमार सोती बताते हैं कि पीर की 3 पत्नियाँ थीं, जिनमें एक पाकिस्तानी और एक अफगानिस्तानी थी।

फ्रॉड फैक्टचेकर प्रतीक सिन्हा, AltNews का एक और कारनामा: गूगल सर्च को ही सच मान कर फैला रहा झूठ

खुद को फैक्ट-चेकर बताने वाले AltNews के प्रतीक सिन्हा ने एक बार फिर से फैक्टचेक के नाम पर झूठ फैलाया है। फेसबुक पर ‘ट्रू इंडोलॉजी’ ने उसे ‘कपटपूर्ण घोटालेबाज’ बताते हुए उसकी पोल खोली है। प्रतीक सिन्हा ने इस बार जम्मू कश्मीर में एक हिन्दू संन्यासी की तस्वीर को लेकर झूठ फैलाया। ‘ट्रू इंडोलॉजी (TI)’ ने आरोप लगाया कि वामपंथी कम दिमाग वाले होते हैं, इसीलिए उन्हें मूर्ख बनाने वाले प्रतीक सिन्हा को डोनेशन मिलता है और उसका कारोबार चलता है।

दरअसल, हुआ यूँ कि ट्विटर पर प्रतीक सिन्हा ने ‘ट्रू इंडोलॉजी’ के एक दावे का फैक्टचेक किया। अब ‘ट्रू इंडोलॉजी’ का ट्विटर हैंडल सस्पेंडेड है, ऐसे में खुले सांड की तरह प्रतीक सिन्हा ने ये सोच कर झूठ फैला दिया कि इसका जवाब देने वाला तो ट्विटर पर है ही नहीं। उसने दो तस्वीरें शेयर की और दावा किया कि ‘ट्रू इंडोलॉजी’ ने जम्मू कश्मीर के एक हिन्दू संन्यासी की तस्वीर शेयर की थी और दावा किया था कि वो बर्फ में बैठा हुआ है।

इसके बाद सिन्हा ने एक अन्य तस्वीर शेयर कर के दावा किया कि वो संन्यासी बर्फ में तो बैठा ही नहीं हुआ था, इसीलिए ये दावा झूठा है। उसने ‘Getty Images’ का एक लिंक शेयर कर के अपनी बात साबित करने का भी प्रयास किया। TI ने इस बात पर आपत्ति जताई कि प्रतीक सिन्हा ने उसके लिए ‘ट्रू फ़्रॉडॉलॉजी’ शब्द का इस्तेमाल किया। साथ ही कहा कि रैंडम रिवर्स गूगल सर्च को ही वो फैक्टचेक समझता है।

प्रतीक सिन्हा और उसकी वेबसाइट AltNews की हमेशा से आदत रही है कि वो गूगल रिवर्स इमेज सर्च को ही असली फैक्टचेक समझता है और उसकी नजर में किताबों या ऐसी किसी चीज का कोई अस्तित्व ही नहीं है, जो ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हो या फिर जिनके बारे में उसे कुछ अंदाज़ा ही न हो। रिसर्च के नाम पर वो एक रिवर्स गूगल सर्च मार लेता है, बस। लेकिन, उसे पता होना चाहिए कि दुनिया इससे इतर भी है।

जिस तस्वीर को लेकर पूरा विवाद हुआ, वो ‘कश्मीर: न्यू सिल्क इंडस्ट्री’ नामक पुस्तक से लिया गया है। सिल्क व्यापारी सर थॉमस वार्डले की इस पुस्तक का प्रकाशन 1904 में हुआ था और उसमें उनके मित्र जॉफ्री डब्ल्यू मिलियम्स की क्लिक की हुई तस्वीरें थीं। इसी किताब के पेज संख्या 376 पर वो तस्वीर है, जिसके बारे में TI ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा था और उसे पोस्ट किया था। इस तस्वीर का कैप्शन है – “Holy man, Dal Lake, sitting in the snow in Winter“.

इसका अर्थ हुआ, ‘पवित्र व्यक्ति, डल झील, ठण्ड के मौसम में बर्फ के बीच बैठा हुआ‘ जबकि प्रतीक सिन्हा का दावा है कि उस तस्वीर में बर्फ तो है ही नहीं। TI ने आरोप लगाया कि एक भी पुस्तक न पढ़ने वाले प्रतीक सिन्हा को न तो जम्मू कश्मीर और न ही वहाँ के मौसम के बारे में कोई जानकारी है। अब प्रतीक सिन्हा ने ‘Getty Images’ का जो स्कीनशॉट डाला, वो बताता है कि इस तस्वीर को 1910 में लिया गया था। जबकि उसी प्लेटफॉर्म में एक और रूप में ये तस्वीर मौजूद है और उसकी तारीख 1990 है।

TI ने फेसबुक पोस्ट के जरिए प्रोपेगंडा का दिया जवाब

तो प्रतीक सिन्हा ने एक ऑनलाइन विदेशी सेकेंडरी सोर्स की मदद लेकर इस तस्वीर को झुठलाना चाहा। आखिर वो इससे साबित क्या करना चाहता था? TI के मुताबिक, इससे उसका हिन्दूफोबिया सामने आता है। उसकी सोच है कि आखिर एक हिन्दू साधु इस तरह का दुष्कर कार्य कर भी कैसे सकता है? यूट्यूब पर ऐसे न जाने कितने ही वीडियोज हैं, जिनमें भारी बर्फ के बीच साधुओं को भक्ति में मगन देखा जा सकता है।

लेकिन, एक बार सोचने लायक है कि प्रतीक सिन्हा ने जिस ‘Getty Images’ का लिंक शेयर किया, उसमें तो कहीं नहीं लिखा है कि उक्त हिन्दू संन्यासी बर्फ में नहीं बैठा हुआ है? फिर उसने इतने आत्मविश्वास के साथ ऐसा दावा कैसे कर दिया? प्रतीक सिन्हा को ये तक नहीं पता कि ठण्ड के मौसम में डल झील के पास कैसी स्थिति रहती है? वहाँ बर्फ़बारी की क्या स्थिति होती है और आसपास की पहाड़ी चोटियों पर कितना बर्फ होता है?

वैसे ये पहला मौका नहीं है, जब प्रतीक सिन्हा ने इस तरह का झूठ फैलाया है। उसकी और जुबैर की जोड़ी के साथ-साथ दोनों की वेबसाइट AltNews पर भी कई बार इस तरह के झूठ पाए गए हैं। इसी तरह से उसने अर्णब गोस्वामी को लेकर दावा किया था कि वो पत्रकार नहीं है। साथ ही राहुल और प्रियंका गाँधी हँसते हुए हाथरस जा रहे थे तो उसका झूठा फैक्टचेक कर दिया। उस पर ऐप के जरिए निजी सूचनाएँ इकट्ठा करने का भी आरोप है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू को लेकर भी वो झूठ फैला चुका है। जुबैर पर तो एक बच्ची की ऑनलाइन प्रताड़ना से जुड़ा मामला भी दर्ज हुआ था। ISRO अध्यक्ष की पूजा करते हुए तस्वीर आने के बाद वो बौखला गया था। Altnews ने तो पीएम मोदी के जन्मदिवस पर ख़ुशी मनाने वाली मुस्लिम महिलाओं के मुस्लिम होने के सर्टिफिकेट को ही ‘रद्द’ कर दिया था। AltNews की एक के बाद एक कई करतूतों को लेकर आप ऑपइंडिया पर पढ़ सकते हैं।

रहीम ने अर्जुन बनकर हिंदू विधवा से बनाए 5 दिन शारीरिक संबंध, बाद में कहा- ‘इस्लाम कबूलो तब करूँगा शादी’

झारखंड के हजारीबाग जिले के बहेरा गाँव से ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का मामला उजागर हुआ है। वहाँ एक दलित विधवा के साथ एक मुस्लिम युवक ने अपना नाम अर्जुन बताकर शारीरिक संबंध बनाए। जब महिला ने शादी की बात कही तो उसने अपनी सच्चाई उगली और शर्त रखी कि अगर महिला को उससे शादी करनी है तो धर्म परिवर्तन करना होगा। युवक का असली नाम मोहम्मद रहीम है।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने मोहम्मद रहीम के ख़िलाफ मुकदमा दायर कर लिया है। पुलिस ने पड़ताल में पाया है कि युवक बिहार के मुजफ्फरपुर जिला का निवासी है। बहेरा गाँव की महिला ने जब थाने में आवेदन किया तो उसने पुलिस को बताया कि रहीम अपना नाम अर्जुन बताकर उसके संपर्क में आया था। कई बार दोनों में कहा सुनी हुई लेकिन रहीम उससे बात करता रहा।

महिला ने उसे कई बार बात करने से भी मना किया लेकिन अर्जुन बनकर रहीम ने उसे शादी का लालच दिया। देखते ही देखते विधवा उसके झाँसे में फँस गई। 

महिला के मुताबिक, बीते 15 नवंबर को रहीम उसके घर पहुँचा और लगातार 5 दिन तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। 20 नवंबर को जब शादी की कोई बात किए बिना वह उसके घर से जाने लगा तो पीड़िता ने उस पर दबाव बनाया। उसकी बात सुनकर रहीम ने अपनी सच्चाई बताई।

उसने कहा कि अगर महिला को उससे शादी करनी है तो पहले इस्लाम कबूल करना होगा। उसने अपना नाम रहीम बताते हुए कहा कि वह मुस्लिम है, इसलिए जब तक वह इस्लाम नहीं कबूलेगी, वह उससे शादी नहीं करेगा। 

युवक की बात सुनते ही महिला ने शोर मचाया तथा ग्रामीणों की मदद से रहीम को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया गया। महिला ने भी बाद में थाने में अपना बयान देते हुए बताया कि रहीम उसे दो महीने से कॉल कर-कर के तंग करता था। बात करने से मना करने पर वह शादी का प्रलोभन देता था।

गौरतलब हो कि इससे पहले मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का केस सामने आया था। वहाँ पीड़िता ने सोशल मीडिया पर मिले मकसूद के ऊपर आरोप लगाया कि उसने खुद के शादीशुदा होने की बात युवती से छिपाई और प्रेम जाल में फाँस कर उसका शारीरिक शोषण करता रहा।

इतना ही नहीं, युवती को बड़े-बड़े सपने दिखाकर मकसूद ने उस पर इस्लामी रीति रिवाज सीखने और कुरान आदि पढ़ने के लिए भी मानसिक दबाव बनाया। बाद में महिला की माँ से भी मकसूद संपर्क में आया और उससे भी बातचीत करके शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया।

आतंकियों के सुरंग से कमांडर राठौड़ ने निकाली चौंकाने वाली चीजें, भारत ने P-5 राष्ट्रों को सौंपा Pak की करतूतों का कच्चा चिट्ठा

BSF के डायरेक्टर जनरल राकेश अस्थाना ने सोमवार (नवंबर 23, 2020) को जवानों को आदेश दिया कि वो जम्मू कश्मीर के साम्बा और राजौरी सेक्टर में भारत और पाकिस्तान की सीमा पर गश्त में तेज़ी और सतर्कता लाएँ, क्योंकि वहाँ आतंकियों के कुछ अन्य सुरंगों के भी मिलने की आशंका है। इधर भारत के विदेश सचिव हर्षवर्द्धन शृंगला ने P-5 राष्ट्रों के राजदूतों को जम्मू कश्मीर में हुई हालिया मुठभेड़ और पाकिस्तान की करतूतों के बारे में बताया।

जम्मू कश्मीर में गुरुवार (नवंबर 19, 2020) को मारे गए चारों आतंकियों के पास से भारी मात्रा में खतरनाक हथियार और गोला-बारूद भी मिले थे। उन्होंने 200 मीटर की एक सुरंग के सहारे भारत में प्रवेश किया था। BSF के जवानों ने रेंगते हुए उस सुरंग को खँगाला। अब क्षेत्र में ऐसे अन्य सुरंगों की खोज जारी है। कृष्ण पक्ष (अँधेरी रात) में बाहर निकलने से पहले सभी आतंकी उस सुरंग में ही छिपे हुए थे।

उस सुरंग में रेंगते हुए घुस कर उसके बारे में सारी जानकारी पता लगाने वाले 173 बटालियन के कमांडर राठौड़ ने वहाँ से कुछ खाने-पीने की चीजें निकालीं, जिनमें बिस्किट के पैकेट्स भी शामिल थे। जिस ‘मास्टर क्यूजीन कपकेक’ कम्पनी का बिस्किट प्राप्त हुआ, उसे लाहौर में बनाया जाता है। उस पर मई 2020 का मैन्युफैक्चरिंग डेट अंकित था और नवंबर 17, 2020 का एक्सपायरी डेट। यह भी साफ़ है कि एक पाकिस्तानी रेंजर उन्हें निर्देशित कर रहा था, ताकि वो सुरक्षित बाहर निकल कर तबाही मचा सकें।

ये भी पता चला है कि ये चारों पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के शकरगढ़ में स्थित जैश-ए-मुहम्मद के कैम्प से आए थे। इसके बाद वो रामगढ़ और हीरानगर सेक्टर के बीच स्थित साम्बा जिले के मावा की तरफ बढ़ रहे थे। उन्होंने जटवाल गाँव को अपना पिकअप पॉइंट बनाया था, जिसके साथ पाकिस्तान का नागवाल गाँव है। हालाँकि, भारत की सतर्क सुरक्षा एजेंसियों ने उस ट्रक का पता लगा लिया और भारत एक बड़े आतंकी हमले से बच निकला।

आतंकियों के पास से 1.5 लाख भारतीय रुपए मिले। तार काटने के उपकरण, चीनी ब्लैक स्टार पिस्टल, ग्रेनेड, असॉल्ट रायफल्स, और नाइट्रोसेल्यूलोज तेल ईंधन विस्फोटक मिले, जिनका इस्तेमाल पुलवामा हमले में भी किया गया था। भारत के पास स्पेशल ‘टनल इंस्पेक्शन टीम्स’ हैं, जिन्हें अन्य सुरंगों की खोज में लगाया गया है। उरी और कुपवाड़ा के उत्तर से आतंकियों के घुसने की आशंका के बाद गश्ती बढ़ा दी गई है।

जहाँ सीमा पर सुरक्षा में कोई ढिलाई नहीं है, कूटनीतिक स्तर पर भी भारत ने पाकिस्तान को घेरना शुरू कर दिया है और कई देशों के राजनयिकों को पाकिस्तान की करतूतों के बारे में जानकारी देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत ने P-5 (यूके, यूएस, रूस, फ़्रांस और चीन) देशों से कहा है कि वो पाकिस्तान पर दबाव बनाएँ कि वो द्विपक्षीय समझौतों का पालन करे और अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं करे।

जापान सहित अन्य देशों के राजनयिकों को भी इस बारे में जानकारी दी गई। खुद विदेश सचिव ने सूचना सम्बंधित दस्तावेज देकर राजनयिकों को आतंकियों से हुई मुठभेड़ और इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ होने को लेकर अवगत कराया। इन ‘इनफार्मेशन डॉकेट्स’ में सारे घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी थी। भारत ने दुनिया को ये बताया कि जम्मू कश्मीर में स्थानीय DDC के चुनावों को रोकने के लिए पाकिस्तान ऐसा कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने (नवंबर 20, 2020) गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव और शीर्ष खुफिया अफसरों के साथ नगरोटा एनकाउंटर पर एक समीक्षा बैठक भी की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमारे सुरक्षाबलों ने एक बार फिर अपनी बहादुरी और प्रतिबद्धता दिखाई है और जम्मू कश्मीर में डेमोक्रेटिक एक्सरसाइज को लक्षित करने वाली नापाक साजिश को नाकाम कर दिया है।

दिल्ली में बुर्का पहन चलाई गोली: बुर्के का प्रयोग घड़ी चुराने से ले कर बम फोड़ने तक में होता रहा है

दिल्ली के चौहान बांगर इलाके से एक महिला को गिरफ्तार किया गया। नाम है – नुसरत। यह एक बंद दुकान पर पिस्टल से 4 गोली चला कर गंदी-गंदी गालियाँ बक रही थीं। इस अपराध के दौरान नुसरत पूरे ‘पारंपरिक’ लिबास मतलब बुर्के में थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार नुसरत नाम की यह औरत फहीम की बंद दुकान की शटर पर गोली चला रही थी। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

वायरल वीडियो में नुसरत को गंदी-गंदी गालियों के अलावा यह कहते सुना जा सकता है कि वो गैंगस्टर नसीर की बहन है। इसी वीडियो में देखा जा सकता है कि जब वो गोली चला रही होती है तो उसके इंतजार में एक बाइक वाला किनारे खड़ा रहता है और फिर उसी पर बैठ कर वो चली जाती है।

दिल्ली पुलिस के डीसीपी (नॉर्थ-ईस्ट) वेद प्रकाश सुर्या के अनुसार फहीम के पास किसी शाहरुख नाम के शख्स का मोबाइल फोन बंधक पड़ा हुआ था, जो वो नहीं लौटा रहा था। इसी को लेकर वो फहीम को धमकाने गई थी और गोली चला कर उसे डरा रही थी। इसके लिए उसने लोनी के किसी मकसूद से पिस्टल खरीदी थी।

बुर्का और अपराध

1892 में ओटोमन साम्राज्य में एक व्यक्ति ने बुर्क़े की सहारा लेकर डकैती की कोशिश की। कहते हैं कि उस समय के सुल्तान अब्दुल हमीद द्वितीय में बुर्क़े पर प्रतिबंध लगा दिया। अगर आधुनिक दौर की बात करें तो बुर्क़े का सहारा लेकर 1937 में अमीन अल हुसैनी नामक अपराधी फ़िलिस्तीन से बुर्क़ा पहन कर भागने में सफल हुआ और लेबनान जाकर नाज़ी समर्थित गतिविधियों में शामिल रहा। उसके बाद 1948 के एक वाकये में इराक़ी सेना ने बुर्क़ा पहन कर फ़िलिस्तीन में घुसपैठ किया।

इसके बाद लंदन, टोरंटों, पुणे, ग्लासगो, फिलाडेल्फिया से ज़ेवरों की चोरी से लेकर, दुकानों से दारू चुराने, लाहौर में चर्चों पर बम फेंकने, कहीं बच्चे चुराने, कहीं किसी आतंकी को जेल से भगाने, सैनिकों और पुलिसकर्मियों को अफ़ग़ानिस्तान में कई बार बम से उड़ाने, पैंपोर पुलिस चीफ़ मंजूर अहमद को मारने, एवम् दसियों बार बैंकों में डाका डालने से लेकर ब्रिटेन से संदिग्ध आतंकी यासिन ओमर का भाग निकलने, पाकिस्तान में 2007 में बन्नू में 15 को मारने, पेशावर चेकप्वाइंट पर तालिबानी महिला के खुद को उड़ाने, रोटरडम में पॉकेटमारी में अचानक वृद्धि आने, कर्बला जाते हुए इस्कंदरिया में इराकी शिया श्रद्धालुओं की सुसाइड बॉम्बिंग, मुंबई हमले, जॉर्डन में 2008-9 में 50 लोगों द्वारा 170 अपराधी वारदातें, सोमालिया के 2009 वाले होटल बॉम्बिंग में, सिंगापुर के आतंकी क़ैदी के भागने में, 2010 में पाकिस्तान के खार में 41 लोगों की सुसाइड बॉम्बिंग में हत्या, उसी दिसंबर में सउदी पुलिस पर गोली चलाने में, 2011 में सोमालिया के आंतरिक मंत्री की हत्या में, उसी साल पाकिस्तान में बम धमाकों की जाँच करती पुलिस टोली पर महिला बमबाजों के हमले में, काबुल के रिसॉर्ट होटल पर हमले में, इस्ताम्बुल पुलिस स्टेशन पर 2015 के सुसाइड बॉम्बिंग में, बोको हरम के जिहादियों के भागने में, सउदी मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले में, चैड के अंज़ेमीना बाजार के धमाके में, येमेन के सना में शिया मस्जिद पर हुए हमले में, बलूचिस्तान के इमामबर्गा शिया मस्जिद की सुसाइड बॉम्बिंग में, इंडोनेशियाई बलात्कारी और क़ातिल अनवर के जेल से भागने में, इराक़ के पश्चिमी अनबर इलाके में विस्थापित लोगों के कैम्प पर हुए सुसाइड बॉम्बिंग में पेशावर के कृषि कॉलेज पर हुए तालिबानी हमले में, अफ़ग़ानिस्तान के शिया मस्जिद पर हुए टेरर अटैक में, श्री लंका के ईस्टर हमलों में… सबमें एक ही चीज कॉमन है: बुर्क़ा।

इसमें दसियों मामले ऐसे हैं जो बैंकों में डकैती से लेकर घड़ियाँ छीन कर भागने और बुर्क़े में होने का लाभ उठाकर पॉकेटमारी तक के हैं। पूरे यूरोप और अमेरिका में बैंकों में डाका डालने का यह एक पसंदीदा तरीक़ा है क्योंकि इस पर आप सवाल नहीं कर सकते। सवाल इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि आपको संवेदनहीन से लेकर बिगट और रेसिस्ट तक के टैग झेलने पड़ सकते हैं।

जिस तुर्की के चाँद को देख कर भारत के लोग ईद मनाते थे, वहाँ भी हिजाब या किसी भी तरह के वैसे कपड़े पर प्रतिबंध लगा, हटा और फिर लग गया जिससे लोगों की पहचान छुपती हो। साथ ही ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फ़्रान्स, बेल्जियम, ताजिकिस्तान, लातविया, बुल्गारिया, कैमरून, चैड, कॉन्गो-ब्रैज़ाविल, गेबोन, नीदरलैंड्स, चीन, मोरक्को और श्री लंका में बुर्क़े पर प्रतिबंध है।

तमिलनाडु: हिंदू महासभा नेता की घर के बाहर निर्मम हत्या, सुरक्षा देने की माँग पुलिस ने ठुकरा दी थी

तमिलनाडु हिंदू महासभा के राज्य सचिव नागराज की रविवार (नवंबर 22, 2020) को होसुर के आनंद नगर में उनके आवास के पास हत्या कर दी गई। रिपोर्टों के अनुसार, सुबह 8 बजे उनके आवास के पास एक अज्ञात गिरोह द्वारा उन्हें काट दिया गया। बताया जा रहा है कि अज्ञात बदमाशों ने पहले उन्हें घर से बाहर आने के लिए कहा और फिर बाहर आने पर बेरहमी से उनकी हत्या कर दी।

वहीं कुछ अन्य रिपोर्टों में बताया गया है कि नागराज सुबह सैर पर निकले थे। इसी दौरान बदमाशों ने उनके सामने अपनी कार रोक दी और फिर उनके साथ मारपीट करने लगे। जब पीड़ित नागराज ने भागने की कोशिश की, तो आरोपितों ने पीछा किया और सार्वजनिक जगह पर ही उनकी हत्या कर दी। इसके बाद आरोपित वहाँ से भागने में सफल रहे। आरोपितों ने नागराज के सिर और पर पेट पर वार किया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

हिंदू महासभा नेता ने पुलिस सुरक्षा माँगी थी

घटना की जानकारी मिलने पर, कृष्णागिरी पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और मामले की जाँच शुरू कर दी। नागराज के शव को पोस्टमार्टम के लिए कृष्णागिरी सरकारी अस्पताल भेज दिया गया। कथित तौर पर नागराज ने हत्या से कुछ महीने पहले पुलिस से सुरक्षा की माँग की थी, लेकिन पुलिस ने तब उन्हें सुरक्षा प्रदान करने से इनकार कर दिया था। नागराज के परिवार में पत्नी, बेटा और तीन बेटियाँ हैं।

हत्या के बारे में बात करते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) बंदी गंगाधर ने दावा किया कि शुरुआती रिपोर्ट में भीषण घटना के पीछे व्यक्तिगत दुश्मनी की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि नागराज के हत्यारों को पकड़ने के लिए 6 टीमों का गठन किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमें संदेह है कि नागराज की रियल एस्टेट और मनी-लेंडिंग बिजनेस में प्रतिद्वंद्विता थी।” पुलिस ने सांप्रदायिक या राजनीतिक एंगल को दरकरिनार करते हुए कहा कि अपराध करने वाले 3-5 लोगों के गिरोह पर संदेह है।

सितंबर में कृष्णगिरी में दलित भाजपा नेता की हत्या कर दी गई थी

गौरतलब है कि सितंबर में रंगनाथन नाम के एक दलित भाजपा नेता को कृष्णागिरि के केलमंगलम में उनके घर के बाहर बेरहमी से काट दिया गया था, जब वह अपने बेटे का जन्मदिन मना रहे थे। रंगनाथन AIADMK छोड़ने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे और उन्हें कुंडुमारनप्पल्ली गाँव के बीजेपी यूथ विंग अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

408 पन्ने, ₹106 करोड़: कॉन्ग्रेस हेडक्वार्टर में पहुँचाई गई बेहिसाब नकदी, 2016-19 के बीच कैशियर ने रिसीव की

नई दिल्ली के अकबर रोड स्थित कॉन्ग्रेस मुख्यालय में कैशियर द्वारा 106 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी प्राप्त करने की बात सामने आ रही है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार 2016 से 2019 के बीच ये पैसे भेजे गए थे और अब आयकर विभाग इसके स्त्रोत की जाँच कर रहा है।

न्यूज चैनल का दावा है कि उसके पास आयकर विभाग का 408 पन्नों का डोजियर है। इससे पता चलता है कि यह बेहिसाब नकदी बारी-बारी से कई किश्तों में पार्टी मुख्यालय पहुँचाई गई। अकबर रोड स्थित मुख्यालय में कैशियर ने द्वारा इसे प्राप्त किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है;

  • 13 फरवरी 2019 से 4 अक्टूबर 2019 के बीच 74,62,00,000 राशि दी गई।
  • अगस्त 2016 से सितंबर 2016 के बीच पार्टी के अकबर रोड कार्यालय में कैशियर ने 26,50,00,000 रुपए प्राप्त किए।
  • अप्रैल 2017 से सितंबर 2019 के बीच कॉन्ग्रेस मुख्यालय को 5,22,00,000 राशि दी गई।

इन लेन-देन की कुछ बारीकियों से पता चलता है कि 27 फरवरी, 2019 को 5.4 करोड़ रुपए सौंपे गए थे। 28 फरवरी, 2019 को 3.75 करोड़ रुपए दिए गए। वहीं 20 अप्रैल, 2019 को, एआईसीसी कार्यालय में 6.40 करोड़ रुपए की राशि सौंपी गई। इसके बाद 24 अप्रैल, 2019 को 5.45 करोड़ रुपए की एक और किश्त दी गई। दिलचस्प बात यह है कि इस राशि के कुछ हिस्से 2019 के आम चुनावों से ठीक पहले भेजे गए थे।

इस खुलासे के बाद बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कॉन्ग्रेस को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि 2016 में जब नोटबंदी लागू किया गया था तो कॉन्ग्रेस पार्टी ने लगातार इसकी आलोचना की। अब कॉन्ग्रेस पार्टी को मुख्यालय में आए इस धन का जवाब देना होगा। अमित मालवीय ने कहा, “यह गाँधी परिवार के पैसे के प्रति लालच और भूख की ओर इशारा करता है। दस्तावेजों और आईटी के कार्रवाई के बारे में बताने की जरूरत है और यह किसी और को नहीं बल्कि सोनिया गाँधी को बताना चाहिए, क्योंकि अभी वही पार्टी प्रमुख हैं।”

18 लाख उइगर कैद, 613 इमाम गायब; इस्लामिक तरीके से दफनाने भी नहीं दे रहा है चीन

चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर समुदाय के सरकारी दमन को लेकर कई रिर्पोटें सामने आ चुकी है। अब पता चला है कि सैकड़ों इमाम भी हिरासत में लिए जा चुके हैं। इमामों को हिरासत में लिए जाने से उइगरों के बीच दहशत का माहौल है। वे मरने से भी डरते हैं, क्योंकि इस्लामिक तरीके से उन्हें दफनाने वाला भी कोई नहीं है। रेडियो फ्री एशिया के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने य​ह ​बात कही है।

नॉर्वे में रहने वाले इंटरनेशनल सिटीज़ ऑफ़ रिफ्यूज नेटवर्क (ICORN) के अब्दुवेली अयुप ने बताया कि शिनजियंगा के उइगरों से बातचीत के बाद यह तथ्य सामने आया। इससे पता चला कि करीब 613 इमाम गायब हैं। 2017 से ही करीब 18 लाख उइगरों और अल्य अल्पसंख्यकों को कैंपों में कैद करके रखा गया है।

वाशिंगटन स्थित उइगर मानवाधिकार प्रोजेक्ट (UHRP) द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। वेबिनार का विषय था: कहॉं हैं इमाम, उइगर धार्मिक हस्तियों को बड़े पैमाने पर हिरासत में रखने के साक्ष्य। अयूप ने बताया कि उन्होंने 2018 में मई से नवंबर के बीच उइगरों से बातचीत की। इससे पता चला कि इमामों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया है।

उइगर समुदाय की भाषा में शिक्षा को बढ़ावा देकर सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों के लिए लड़ने की वजह से अयुप को 2013-2014 के दौरान महीनों तक कैद में रह कर यातनाएँ झेलनी पड़ी थी। उन्होंने कैंपों में रह चुके 16 कैदियों से भी बातचीत की थी जिन्होंने बताया कि शिनजियांग में उइगरों को हिरासत में लेने की घटनाओं में इजाफा हुआ है।

नीदरलैंड में अब निर्वासित जीवन बिता रहे एक कैदी ने बताया था कि शिनजियांग की राजधानी उरुमकी के कैंपों में तो जाने के लिए इतनी भीड़ है कि लोगों को पंजीकरण करने के बाद इंतजार करना पड़ता है। जब कोई मर जाता है तो दूसरा कैदी अंदर भेजा जाता है। उनकी मस्जिदें ध्वस्त कर दी गई हैं। इमाम गिरफ्तार हो चुके हैं। यहॉं तक कि मौत के बाद इस्लामिक तरीके से दफनाने तक का अधिकार नहीं है।

लंदन यूनिवर्सिटी की स्कूल ऑफ़ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज़ (SOAS) में प्रोफेसर रैशेल हैरिस ने बताया कि उइगर समुदाय के सिर्फ पुरुष इमामों को ही निशाना नहीं बनाया जा रहा है। औरतों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। इस मुद्दे पर कहना था कि ऐसे इमाम जो पुरुष हैं, सिर्फ वही ऐसे धार्मिक चेहरे नहीं हैं जिन्हें उइगर समाज में निशाना बनाया जा रहा है। रैशेल ने कहा, “वह मस्जिदों में सक्रिय नहीं होती हैं स्वाभाविक तौर पर उनकी भूमिका घरों में अहम होती है। लेकिन वह हर ज़रूरी काम काम करती हैं जो पुरुष इमाम करते हैं। वह (महिला इमाम) महिलाओं की मदद करती हैं इसलिए वह महिलाओं के अंतिम संस्कार में भूमिका निभाती हैं। वह बच्चों को कुरान पढ़ाने में मदद करती हैं। इसके अलावा वह सामजिक विवादों को सुलझाने में भी काफी मदद करती हैं।”

‘रोशनी’ के नाम पर नाते-रिश्तेदारों के लिए भी हड़पी जमीन, पीडीपी-NC-कॉन्ग्रेस नेताओं के सामने आए नाम

जम्मू-कश्मीर के रोशनी घोटाला केस में CBI ने जाँच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि ये घोटाला तकरीबन 25 हजार करोड़ रुपए का है। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने रोशनी एक्ट को असंवैधानिक बताते हुए इसके तहत बाँटी गई सभी जमीनों का नामांतरण रद्द करने और 6 महीने में जमीनें वापस लेने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने ही एक्ट की आड़ में हुए घोटाले की जाँच CBI को सौंपी थी।

जानकारी के मुताबिक, जाँच एजेंसी ने इस मामले में राज्य सरकार के अधिकारियों को आरोपित बनाया है। घोटाले में जम्मू-कश्मीर के कई पूर्व मंत्री समेत कई नेताओं के नाम सामने आए हैं। इन सबने सरकारी जमीन को अवैध तरीके से अपने नाम करा लिया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इनके नाम अब तक सामने आ चुके हैं;

  • इस घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पार्टी PDP के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू के भी शामिल होने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा उनकी माँ शहजादा भानो, भाई एजाज हुसैन द्राबू और इफ्तिकार अहमद द्राबू के नाम भी सामने आए हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने खुद के नाम के साथ-साथ अपने रिश्तेदारों के नाम पर भी एक-एक कनाल जमीन कर ली।
  • कॉन्ग्रेस नेता केके अमला के भी इस घोटाले में शामिल होने की पुष्टि हुई है। केके अमला की रिश्तेदार रचना अमला, वीणा अमला और फकीर चंद अमला के नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं। केके अमला कॉन्ग्रेस के बड़े नेता हैं और श्रीनगर में उनका काफी नामचीन होटल भी है। इन पर भी अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम पर भूमि आवंटित कराने का आरोप है। इन्होंने इस एक्ट के तहत 11 कनाल से अधिक सरकारी जमीन अपने नाम की है।
  • मुस्ताक अहमद चाया का भी नाम शामिल है। मुस्ताक अहमद चाया कश्मीर के बिजनेस टाइकून और प्रमुख होटल व्यवसायी हैं। उन्होंने इस एक्ट के तहत 10 कनाल 4 मरले भूमि अपने नाम करवाई।
  • मोहम्मद शफी पंडित मुख्य सचिव रैंक के ऑफिसर रह चुके हैं। इन्होंने भी अपने और अपने परिवारों के नाम पर काफी जमीन आवंटित कराई है।
  • रोशनी घोटाले में पीडीपी नेता सैयद अखून का भी नाम शामिल है। बाहु सुंजवा इलाके में एक कनाल भूमि अपने नाम किया था। बता दें कि जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 के निरस्त किए जाने के बाद सैयद अखून को भी हिरासत में लिया गया था, हालाँकि 19 सितंबर 2019 को इन्हें रिहा कर दिया गया था।
  • पूर्व बैंक चेयरमैन एमवाई खान, पूर्व गृह मंत्री सज्जाद किचलू, पूर्व मंत्री अब्दुल मजीद वानी, असलम गोनी सैयद मुजफ्फर आगा, एमवाई खान, अब्दुल मजीन वाणी, असलम गोनी, हरून चौधरी, सुज्जैद किचलू, तनवीर किचलू और कुछ अन्य लोगों का नाम भी आरोपितों में शामिल हैं।

क्या है रोशनी एक्ट भूमि घोटाला?

वर्ष 2001 में तत्‍कालीन फारूक अब्दुल्ला सरकार ने जम्‍मू-कश्‍मीर में यह एक्ट लागू किया था। इस योजना के तहत 1990 से हुए अतिक्रमण को इस एक्ट के दायरे में कट ऑफ सेट किया गया था। सरकार का कहना था कि इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जो सरकारी जमीन पर कई सालों से खेती कर रहे है। लेकिन नेताओं ने जमीनों पर कब्जे जमाने का काम शुरू कर दिया। वर्ष 2005 में तब की मुफ्ती सरकार ने 2004 के कट ऑफ में छूट दी। उसके बाद गुलाम नबी आजाद ने भी कट ऑफ ईयर को वर्ष 2007 तक के लिए सीमित कर दिया।

कितनी जमीन पर अवैध कब्जे?

जम्मू-कश्मीर में लाखों एकड़ सरकारी जमीन पर नेताओं, पुलिस, प्रशासन और रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अफसरों का कब्जा था। इस एक्ट के जरिए ही करीब ढाई लाख एकड़ जमीन पर कब्जे को कानूनी रूप दे दिया गया। करोड़ों रुपए की ये जमीनें नाम मात्र की कीमतों पर दी गई थीं। शुरुआती जाँच में पता चला है कि राज्य के कई पूर्व मंत्रियों ने खुद के साथ रिश्तेदारों के नाम पर भी कई एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा किया था।

132 आरोपों की चार्जशीट के जवाब में TRS ने कहा- BJP सरकार पर दायर होनी चाहिए 132 करोड़ चार्जशीट

तेलंगाना में स्थानीय चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति (TSR) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने कहा है कि BJP सरकार पर 132 करोड़ चार्जशीट दायर होनी चाहिए। केंद्रीय पर्यावरण और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक चार्जशीट रिलीज़ कर चंद्रशेखर राव की अगुवाई वाली प्रदेश सरकार पर कुल 132 आरोप लगाए गए थे। इसके बाद केटी रामाराव की तरफ से यह प्रतिक्रिया आई है। 

रामाराव ने कहा, “भाजपा ने साल 2014 के आम चुनावों के पहले आम जनता से वादा किया था कि हर भारतीय को 15 लाख रुपए मिलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए भाजपा पर 132 करोड़ चार्जशीट दायर की जानी चाहिए। इसके अलावा भाजपा पर 12 करोड़ चार्जशीट इस देश के युवाओं द्वारा दायर की जानी चाहिए, क्योंकि यह सरकार अपने वादे के मुताबिक़ 2 करोड़ नौकरियाँ नहीं दे पाई।” 

खैराताबाद और जुबली हिल संसदीय क्षेत्रों में कई रोड शो के दौरान उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए केटीआर ने और भी कई बातें कही। उन्होंने कहा, “आप (भाजपा) हम पर चार्जशीट क्यों दायर करेंगे? क्या आप अन्नपूर्णा केंद्र बनवाने के लिए चार्जशीट दायर कर रहे हैं या सीसीटीवी कैमरे और एलईडी लाइट्स लगवाने के लिए? किस वजह से हम पर चार्जशीट दायर की जा रही है, पावर से जुड़ी दिक्कतें ठीक करवाने के लिए, पानी से जुड़ी समस्याएँ हल कराने के लिए या हैदराबाद में निवेश लेकर आने के लिए?” 

इसके बाद रामाराव ने भाजपा को निशाना बनाते हुए कहा टीआरएस नेता कोरोना महामारी और हाल ही में आई बाढ़ के वक्त अपने लोगों के साथ खड़े थे, जबकि भाजपा और कॉन्ग्रेस पता नहीं कहाँ व्यस्त थे। बारिश के बाद आई बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्र के लगभग 6.5 लाख परिवारों को सरकार की तरफ से 10 हज़ार रुपए का आर्थिक सहयोग किया गया था। रामाराव ने आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कर यह सहायता कार्यक्रम रुकवा दिया। 

रामाराव ने कहा, “4 दिसंबर के बाद हम इस कार्यक्रम को दोबारा शुरू करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि जिन परिवारों को आर्थिक सहयोग नहीं मिला है उन तक मदद पहुँचे।” भाजपा ने बाढ़ प्रभावित आबादी की मदद के लिए 25 हज़ार रुपए की आर्थिक मदद का ऐलान किया था। इसकी आलोचना करते हुए रामाराव ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता है कि भाजपा को ऐसा करने से रोक कौन रहा है? वह आज ही इसे क्यों नहीं शुरू कर देते हैं।” अंत में पिछले ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) चुनावों का उल्लेख करते हुए रामाराव ने कहा, “इस बार हम आपके (जनता) सहयोग से सीटों का शतक लगाना चाहते हैं। हमारे नेताओं को चुनने पर ही प्रदेश का विकास संभव होगा।”