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दिल्ली में कोरोना काबू करने के लिए अमित शाह ने फिर सँभाला मोर्चा: दिल्ली पहुँचे डॉक्टर, घर-घर होगा सर्वे

देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस को लेकर गृह मंत्रालय एक्शन में आ गया है। 15 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच हुई मीटिंग के फैसलों के मुताबिक संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।

गृह मंत्रालय ने 10 टीमों का गठन किया है। ये 10 टीमें 100 प्राइवेट अस्पतालों का दौरा करेंगी। यह 10 टीमें अस्पतालों में बेड की क्षमता और ICU बेड की जानकारी इकट्ठा करके वहाँ के हालात के बारे में गृह मंत्री को जानकारी देंगी।

गृह मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने बुधवार (नवंबर 18, 2020) को ट्विटर पर इन कदमों के बारे में जानकारी दी है। जिनमें ये मुख्य कदम शामिल है:-

हाउस टू हाउस सर्वे की प्लानिंग अडवांस स्टेज पर पहुँच गई है। यह सर्वे 25 नवंबर से शुरू हो सकता है। ICMR और दिल्ली सरकार RT-PCR टेस्ट की संख्या को नवंबर के आखिर तक 60 हजार रोजाना तक बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। 17 नवंबर तक यह 10 हजार टेस्ट प्रतिदिन है।

मंत्रालय ने बताया कि 45 डॉक्टर और पैरामिलिट्री फोर्स के 160 पैरामेडिक्स पहले ही दिल्ली आ चुके हैं। उनको डीआरडीओ के कोविड-19 हॉस्पिटल और छतरपुर कोविड केयर सेंटर में तैनात किया गया है। बाकी डॉक्टर्स भी कुछ दिनों में आ जाएँगे।

डीआरडीओ 250 आईसीयू बेड्स को ऐड करेगा। पहले से दिल्ली में उसके 250 आईसीयू बेड्स हैं। उधर, डीआरडीओ भी अगले चार-पाँच दिनों में 35 और BIPAP बेड एयरपोर्ट वाले कोविड सेंटर में लगाएगा।

10 बहु-विषयक टीमें बनाई गई हैं। ये दिल्ली के करीब 100 प्राइवेट हॉस्पिटल्स में जाएँगी। वहाँ जाकर देखा जाएगा कि क्या बेड कपेसिटी और टेस्टिंग बढ़ाने का कोई विकल्प मौजूद है। टीमों ने यह काम शुरू कर दिया है।

भारतीय रेलवे करीब 800 बेड वाले ट्रेन कोच देगी। इन्हें शकूर बस्ती रेलवे स्टेशन पर रखा जाएगा।

भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटिड (BEL) ने बेंगलुरु से 250 वेंटिलेटर्स भेजे हैं। यह इस हफ्ते के आखिर तक दिल्ली पहुँच जाएँगे। उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली एयरपोर्ट के पास डीआरडीओ कोविड सेंटर को 35 BIPAP मशीन दिए हैं।

बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर आईसीएमआर दिल्‍ली में कोविड 19 टेस्टिंग के लिए मोबाइल वैन उपलब्‍ध कराने में दिल्‍ली सरकार की मदद कर रहा है। अगले सप्‍ताह से इसके तहत 20000 टेस्‍ट संभव होंगे।

बता दें कि दिल्ली में कोरोना केसों की संख्या दिन प्रति दिन तेजी से बढ़ रही है। मंगलवार को कोरोना के 6,396 नए केस सामने आए थे। राजधानी दिल्ली में अब तक कोरोना के 495,598 केस सामने आ चुके हैं। इसमें से 7,812 लोग वायरस से अपनी जान गँवा चुके हैं।

कट्टर इस्लामिक संगठन के सामने झुकी पाकिस्तान, फ्रांस के खिलाफ समझौते पर साइन: फ्रांसीसी राजदूत को करेंगे निष्कासित

पाकिस्तान में हमेशा से इस्लामवादी कट्टरपंथी समूहों और इस्लामिक कट्टरपंथियों का बोलबाला रहा है। हमेशा से पाकिस्तान के एक्सटर्नल और इंटरनल पॉलिसी में इनका दबाव देखने को मिला है। वहीं पाकिस्तान के हर आधिकारिक शासन ने भी हमेशा इन अराजकतावादी समूहों को सराहा और सर्वोच्च स्थान पर रखा है।

हाल ही में पाकिस्तानी सरकार ने कट्टर इस्लामिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक(टीएलपी) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है। बता दें टीएलपी ने पैगंबर मुहम्मद के कार्टून दिखाने पर फ्रांस के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था।

पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री ब्रिगेडियर आर एजाज शाह और धार्मिक मामलों के मंत्री नूर-उल-हक कादरी ने बातचीत की और दोनों पक्षों में हुए समझौते पर हस्ताक्षर किया। समझौते में पाकिस्तान सरकार ने तहरीक-ए-लब्बैक से वादा किया है कि वो 2 महीने के भीतर फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करेगें। इसके अलावा, पाकिस्तान अपना कोई राजदूत फ्रांस नहीं भेजगा। सरकारी स्तर पर फ्रेंच उत्पादों का बहिष्कार भी किया जाएगा। यहीं नहीं तहरीक-ए-लब्बैक के गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की सुरक्षित रिहाई पर भी सरकार सहमत हो गई है।

हालाँकि, समझौते पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद, पाकिस्तान की सरकार ने यह भी कहा कि यह मुद्दा अभी भी सुलझा नहीं है। सरकार ने इस बात की भी पुष्टि नहीं की कि कैसे फ्रांसीसी उत्पादों का व्यापक बहिष्कार किया जाएगा।

विदेशी कार्यालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हाफ़िज़ चौधरी ने बीबीसी उर्दू को बताया, “पाकिस्तान ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है; समय आने पर मीडिया को सूचित किया जाएगा।”

सरकार ने कथित तौर पर टीएलपी के साथ पहले भी एक समझौता किया था, लेकिन सरकार द्वारा किए गए वादों में से किसी भी वादे को पूरा नहीं किया गया था। कुछ विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह समझौत सरकारी अधिकारियों द्वारा प्रदर्शित उनकी अनिच्छा को स्पष्ट करता है।

इस सप्ताह के रविवार से टीएलपी के समर्थकों ने राजधानी इस्लामाबाद में एक बेहद ही उग्र प्रदर्शन किया था। वहीं सरकार द्वारा उनकी माँगों पर सहमति जताने के बाद टीएलपी ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया।

प्रदर्शन कर रहे भीड़ के एक प्रवक्ता एजाज अशरफी ने कहा, “सरकार द्वारा एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद हम अपने विरोध को समाप्त कर रहे हैं जो आधिकारिक रूप से फ्रांसीसी उत्पादों का बहिष्कार करेगा।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को कट्टर बताते हुए उन पर इस्लाम पर हमला करने का आरोप लगाया था।

इमरान खान ने अपने ट्वीट में फ्रांसीसी राष्ट्रपति पर निशाना साधते हुए कल लिखा, “एक नेता की पहचान होती है कि वह इंसानों को एकजुट करता है, जैसा कि मंडेला ने लोगों को विभाजित करने की बजाय उन्हें एक करने पर जोर दिया। लेकिन एक आज का समय है, जब राष्ट्रपति मैक्रों देश से रेसिज्म, ध्रुवीकरण हटाने की बजाय अतिवादियों को हीलिंग टच और अस्वीकृत स्थान देने में लगे हैं, जो निश्चित रूप से उनकी कट्टरवादी सोच को दिखाता है।”

इमरान खान ने ट्वीट में यह भी लिखा, “यह दुखद है कि राष्ट्रपति मैक्रों ने विवादित कार्टून को बढ़ावा देते हुए जानबूझकर समुदाय वालों को भड़काने की कोशिश की है।”

पाक पीएम ने कहा कि इस समय फ्रांस राष्ट्रपति को संयम से काम लेते हुए कट्टरपंथियों को दरकिनार करने की रणनीति अपनानी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने इस्लाम की जानकारी न होने के बावजूद मजहब पर हमला करते हुए इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देना चुना, जबकि उन्हें आतंक पर हमला करना चाहिए था।

उल्लेखनीय है कि टीएलपी तहरीक-ए-लब्बैक या रसूल अल्लाह (TLYRA) आंदोलन की राजनीतिक शाखा है, जिसने पहले पाकिस्तान में ईश निंदा के विरोध में भारी भीड़ इकट्ठा की थी। खादिम हुसैन रिज़वी की अध्यक्षता वाला यह समूह 2011 में सुर्खियों में आया था, जब पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या करने वाले पुलिसकर्मी मुमताज़ कादरी की फाँसी का इस समूह ने विरोध किया था।

बता दें गवर्नर की हत्या इसलिए की गई थी क्योंकि उसने देश के ईश निंदा कानूनों के प्रति अपनी अस्वीकृति व्यक्त की थी। टीएलपी ने 2017 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कई हफ्तों तक प्रदर्शन भी किया था। संक्षेप में, इमरान खान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाने के पीछे टीएलपी का बड़ा हाथ है।

लद्दाख को चीन का हिस्‍सा बताने पर ट्विटर इंडिया ने संसदीय समिति से माँगी लिखित माफी

लद्दाख को चीन का हिस्सा दिखाने पर माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने लिखित तौर पर माफी माँगी है। इससे पहले बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी की अध्यक्षता में गठित संसदीय समिति ने ट्वीटर को ऐसा करने के लिए फटकार लगाई थी और इसे राजद्रोह जैसा करार दिया था। ट्विटर इंडिया के मुख्‍य गोपनीयता अधिकारी डेमियन करेन ने एक हलफनामे पर हस्‍ताक्षर कर माफीनामा भेजा।

मीनाक्षी लेखी ने बताया कि ट्विटर ने भारतीय भावनाओं को आहत करने के लिए माफी माँगी है और 30 नवंबर 2020 तक गलती को सुधारने की शपथ ली है। बता दें कि ट्विटर ने बीते 18 अक्‍टूबर को एक व्‍यक्ति के वीडियो कॉलिंग के दौरान लद्दाख की एक लोकेशन को चीन के हिस्‍से के रूप में दिखाया था। इसके बाद से ट्विटर का विरोध होने लगा था और भारत सरकार ने इस पर ट्विटर से जवाब माँगा था।

इस पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव ने ट्विटर के सीईओ जैक डोर्से को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई थी। ट्विटर को कड़ी चेतावनी देते हुए मंत्रालय के सचिव ने लिखा था कि इस तरह की हरकतों से सिर्फ और सिर्फ ट्विटर की छवि खराब होती है। इसके अलावा ट्विटर का यह रवैया उसकी निरपेक्षता पर भी सवाल खड़े करता है। कड़े शब्दों में यह कहा गया कि आने वाले समय में इस तरह की गलतियाँ स्वीकार नहीं की जाएँगी। यह सरासर गैर ज़िम्मेदाराना हरकत थी, जिसका सीधा प्रभाव लोगों की भावनाओं और देश की अखंडता पर पड़ता है। 

गौरतलब है कि हाल ही में ट्विटर ने लेह को केन्‍द्र शासित प्रदेश लद्दाख के बजाय जम्मू-कश्मीर के हिस्‍से के रूप में दिखाया था। इसके बाद मंत्रालय ने ट्विटर के ग्‍लोबल वाइस प्रेसिडेंट को भेजे गए अपने नोटिस में लिखा था, “ट्विटर ने यह जान-बूझकर किया है। उसने लेह को जम्मू-कश्मीर के हिस्से के रूप में दिखाकर भारत की संप्रभु संसद की इच्छा को कम करने के लिए ये कदम उठाया है, जिसने लद्दाख को भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया था।” बता दें कि लेह, केन्‍द्र शासित प्रदेश लद्दाख का मुख्‍यालय है। 

मंत्रालय ने अपने नोटिस में ट्विटर को 5 कार्य दिवसों का समय देते हुए निर्देश दिया था कि वह ‘यह बताए कि गलत मानचित्र दिखाकर भारत की क्षेत्रीय अखंडता का अपमान करने के लिए ट्विटर और उसके प्रतिनिधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्‍यों न शुरू की जाए।’

‘कब तक सीता को रुबिया बनने देंगे, कितनी नरगिस ने सुनील दत्त से शादी की’: लव जिहाद कानून पर बोले MP के प्रोटेम स्पीकर

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार लव-जिहाद के खिलाफ कानून लाने में जुटी है। इस बात की घोषणा हाल ही में राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने की थी। लेकिन अब लव जिहाद को लेकर प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। रामेश्वर शर्मा ने तो इसे आतंकी संगठन ISIS का षड्यंत्र तक बता दिया।

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान और ISI एजेंट सीता को रुबिया में बदलने की साजिश करते हैं। हम कब तक सीता को रुबिया बनने देंगे, कब तक हम सीता को मरने देंगे? मुझे नरगिस और सुनील दत्त की तरह सच्चा प्यार दिखाओ। आप ही बताइए कितनी नरगिस ने सुनील दत्त से शादी की?”

प्रोटेम स्पीकर ने कहा कि एमपी में शिवराज चौहान सरकार ने लव जिहाद पर कानून बनाने का निर्णय लिया है। कानून के संदर्भ में गृह मंत्री ने ब्रीफिंग भी दी है। उन्होंने कहा कि लव जिहाद कानून को और भी सख्त बनाए जाने की जरुरत है। इस कानून में हम अधिक सजा के प्रावधान पर विचार करेंगे।

बकौल शर्मा जिन लड़कियों को डरा धमकाकर धर्म बदलवाया जाता है, ऐसे लोगों पर धर्म बदलने की कार्रवाई के साथ अपहरण, लूट और अन्य तरह की धाराएँ भी लगाई जानी चाहिए। ऐसे मामलों में जिन सहयोगियों की मदद से पीड़िता को धमकाया या फुसलाया जाता है, उनके खिलाफ अपराधिक कार्रवाई हो। अगर बेटी के साथ गैंग रेप या रेप होता है या हत्या होती है इसके मामले में भी सह आरोपित पर केस दर्ज हो।

उन्‍होंने 5 साल नहीं, बल्कि 10 साल की सजा का प्रावधान करने की बात कही है। रामेश्‍वर शर्मा ने दलित और आदिवासी की बेटियों के धर्मांतरण के बाद उन्हें आरक्षण का लाभ न देने की माँग भी की है। उन्‍होंने यह भी कहा कि मजहबी संगठनों और कॉन्ग्रेस का विरोध करने से कुछ नहीं होगा। यह षड्यंत्र चल रहा है। हमारा विधेयक वोट के खातिर नहीं, बल्कि संस्कृति के लिए है।

उन्होंने कहा कि इस कानून में हम इस बात का प्रावधान भी करने पर विचार कर रहे हैं कि अगर कोई एससी/ एसटी महिला धर्म परिवर्तन कर दूसरे मजहब के व्यक्ति से शादी करती है, तो उससे एससी/ एसटी को मिलने वाली सुविधाएँ वापस ले ली जाए

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि लव जिहाद कानून के अंतर्गत अपहरण, बलात्कार, हत्या, डराने धमकाने के जैसी धाराओं को जोड़ा जाए इसके साथ हम विचार करेंगे कि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग की बहन, बेटी यदि धर्म परिवर्तन कर मजहब विशेष या ईसाई से शादी करती है तो उनके आरक्षण संबंधी सभी सुविधाएँ खत्म हो जानी चाहिए, क्योंकि ना तो वो हिंदू रहेगी और ना ही अनुसूचित जाति/जनजाति से रहेगी।

बता दें कि मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार (नवंबर 17, 2020) को कहा था कि मध्य प्रदेश ‘फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल, 2020’ को विधानसभा में पेश करने की तैयारी कर रहा है। इसमें लव जिहाद के खिलाफ पांच साल के कठोर कारावास का प्रावधान होगा। हम यह भी प्रस्ताव कर रहे हैं कि ऐसे अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध घोषित किया जाए।

गृह मंत्री मिश्रा ने कहा था, “आगामी विधानसभा सत्र अहम होने वाला है, क्योंकि राज्य सरकार लव जिहाद को लेकर धर्म स्वातंत्र्य कानून के लिए विधेयक पेश करेगी। विधेयक के कानून बनने के बाद आरोपित पर गैर जमानती धाराओं के तहत पाँच साल की सजा दी जाएगी। लव जिहाद के अपराध में सहयोग करने वाले को भी मुख्य आरोपित की तरह सजा का प्रावधान होगा। इसके अलावा, शादी के लिए जबरन धर्मांतरण कराने वालों को भी सजा देने का प्रावधान किया जाएगा।”

पश्चिम बंगाल में एक और BJP नेता को पीट-पीटकर मारा: परिजनों ने TMC के गुंडों पर लगाया हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेताओं पर हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। कूच बिहार में बीजेपी के एक और कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या का मामला सामने आया है। मृतक कार्यकर्ता का नाम कलाचंद कर्मकार (kalachand Karmakar) है और उनकी उम्र 55 साल है। जानकारी के मुताबिक वह बीजेपी के बूथ कमेटी के सचिव भी रहे हैं।

बीजेपी नेता पर किए गए हमले में दो अन्य कार्यकर्ता भी घायल हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक मामला कूचबिहार (Cooch Behar) जिले के तूफानगंज (Tufanganj) के नकटीगाछ ग्राम पंचायत के चमटा के करमापाड़ा इलाके का है। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव फैला हुआ है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। एसपी का कहना है कि इसमें कोई राजनीतिक एंगल नहीं है।

मृतक बीजेपी नेता के परिवार वालों ने टीएमसी के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया है। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में पाँच टीएमसी कार्यकर्ता का नाम लिया है। आरोप है कि पाँचों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से बीजेपी नेता की पिटाई की, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई। जब इलाज के लिए उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बीजेपी ने टीएमसी पर राजनीतिक हत्याओं का आरोप लगाया और यह दावा किया कि बंगाल के लोग कभी इसका समर्थन नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के मथुरापुर में गुरुवार (30 जुलाई, 2020) को भाजपा बूथ सचिव गौतम पात्र का शव पेड़ से लटका मिला था। बीते 24 घंटे के भीतर बंगाल में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के शव पेड़ से लटके मिले थे। इससे पहले पूर्वी मिदनापुर जिले के कछुरी गाँव में बीजेपी कार्यकर्ता पूर्णचंद्र दास का शव पेड़ से लटका मिला था।

मृतक के परिजनों व बीजेपी पार्टी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस पर हत्या का आरोप लगाया था। बंगाल बीजेपी ने ट्वीट करके ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था, “24 घंटे के भीतर बंगाल में एक और बीजेपी के कार्यकर्ता की राजनीति द्वेष के कारण हत्या कर दी गई। मथुरापुर में बूथ सचिव गौतम पात्र को भी बुरी तरह हत्या कर पेड़ से लटका दिया गया था। इस तरह राजनीतिक हत्याएँ राज्य की मुख्यमंत्री जो गृहमंत्री भी है उनके कार्यालय में बहुत ही आम हो चुकी है। परन्तु वह अब इस जिम्मेदारी से नहीं बच सकती हैं।”

लोक परंपराओं को बढ़ाने वाली गोवा की पहली महिला राज्यपाल मृदुला सिन्हा का निधन: PM मोदी, अमित शाह ने जताया दुःख

गोवा की पूर्व राज्‍यपाल, प्रतिष्ठित साहित्‍यकार व भाजपा नेता मृदुला सिन्‍हा (77) का बुधवार (नवंबर 18, 2020) को निधन हो गया। पीएम मोदी और अमित शाह समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताया।

उनके बारे में बता दें कि वह पूर्व राज्यपाल होने के साथ-साथ पाँचवा स्तंभ नाम से पत्रिका निकाल चुकी थीं। वह हिंदी लेखिका होने के साथ-साथ केंद्रीय कार्यसमिति की सदस्य थीं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में वह केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद को भी संभाल चुकी थीं। उन्होंने लोक परंपराओं को बढ़ाने का काम भी अपने जीवन में बड़ी शिद्दत से किया था।

उन्हें यूपी हिंदी संस्थान का साहित्य भूषण सम्मान, दीन दयान उपाध्याय पुरस्कार समेत कई दूसरे सम्मान मिले थे। कई साहित्यिक मंचों से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका था। मौजूदा जानकारी के अनुसार 27 नवंबर 1942 को बिहार के मुजफ्फरनगर के छपरा गाँव में जन्मीं मृदुला सिन्हा गोवा की पहली महिला राज्यपाल थीं।

आज उनके निधन के बाद बहुत से नेता और आमजन अपना दुख प्रकट कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, “मृदुला सिन्हा जी को जनता की सेवा के लिए उनके प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। वह एक कुशल लेखिका भी थीं, जिन्होंने साहित्य के साथ-साथ संस्कृति की दुनिया में भी व्यापक योगदान दिया। उनके निधन से दुखी हूँ। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। ओम शांति।”

गृहमंत्री अमित शाह ने लिखा, “गोवा की पूर्व राज्यपाल व वरिष्ठ भाजपा नेता मृदुला सिन्हा जी का निधन बहुत दुःखद है। उन्होंने जीवन पर्यन्त राष्ट्र, समाज और संगठन के लिए काम किया। वह एक निपुण लेखिका भी थी, जिन्हें उनके लेखन के लिए भी सदैव याद किया जाएगा। उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ। ॐ शान्ति।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा, “पूर्व राज्यपाल एवं साहित्यकार श्रीमती मृदुला सिन्हा का निधन मेरे लिए बेहद पीड़ादायक है। वे अपने लम्बे सार्वजनिक जीवन में हर दायित्व को निभाने में सहज और सफल रहीं। एक लेखिका के रूप में भी उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनका पूरा जीवन समाज और साहित्य की सेवा के प्रति समर्पित रहा।”

पत्नी सहित दबोचा गया भगोड़ा ईसाई ‘पैगम्बर’: करोड़ों की संपत्ति का है मालिक, चर्च में ‘चमत्कार’ दिखा लेता था डोनेशन

पूर्वी अफ्रीका में स्थित मलावी की पुलिस ने एक करोड़पति ईसाई ‘पैगम्बर’ को गिरफ्तार किया है, जो चमत्कार के द्वारा काफी कुछ करने का दावा करता रहा है। अपने अनुयायियों के पीच ‘पैगम्बर’ कहे जाने वाले ईसाई उपदेशक पर धोखाधड़ी से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक के मामले दर्ज हैं। उसे बुधवार (नवंबर 18, 2020) को गिरफ्तार किया गया। ईसाई उपदेशक शेफर्ड बुशिरी खुद को भी Prophet कहता है।

दक्षिण अफ्रीका की पुलिस को कई दिनों से उसकी तलाश थी। चमत्कारी होने का दावा करते-करते उसने अकूत धन-संपत्ति जमा कर ली थी। वो अपनी शानो-शौकत वाली ज़िंदगी के लिए भी जाना जाता है। पिछले सप्ताह दक्षिण अफ्रीका की अदालत ने उसे जमानत देते हुए कई शर्तें लगा दी थीं, जिसके कारण वो वहाँ से मलावी भाग गया था। ‘पैगम्बर’ के साथ-साथ उसकी पत्नी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

अब इस जोड़े को अदालत में पेश किया जाना है। प्रेटोरिया में उसके खिलाफ इंटरपोल ने नोटिस भी जारी किया था। भगोड़े ‘पैगम्बर’ शेफर्ड बुशिरी के खिलाफ मंगलवार को मलावी पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू किया था। जबकि उसके प्रवक्ता का कहना है कि शेफर्ड बुशिरी ने खुद को जानबूझ कर पुलिस के हवाले किया है, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। उसका कहना है कि ये इसीलिए किया गया, ताकि उन्हें कोई भगोड़ा न कहे।

शेफर्ड बुशिरी के प्रवक्ता का कहना है कि उन्होंने मलावी में इसीलिए आत्मसमर्पण किया, क्योंकि उन्हें लगता है कि दक्षिण अफ्रीका में न्याय नहीं मिल सकता है। साथ ही उसने अपनी जान का भय भी बताया है। प्रोटेरिया के चर्चों में उपदेश देकर उसने अपने अनुयायियों से दान के रूप में काफी धन कमाया है। माइनिंग और टेलीकम्युनिकेशन्स सहित कई बड़े लक्ज़री क्षेत्रों में उसका और उसकी पत्नी का भारी निवेश है।

दक्षिण अफ़्रीकी प्रशासन को अभी तक नहीं पता चल पाया है कि आखिर वो भागा कैसे। गिरफ्तार होने के बाद अब शेफर्ड बुशिरी के प्रत्यर्पण के लिए प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अब उसकी 27 करोड़ रुपए की एक संपत्ति को जब्त किए जाने की तैयारी चल रही है। 2.6 करोड़ का तो उसका घर ही है। साथ ही उसके प्राइवेट जेट को भी जब्त किया जाएगा। इस एयरक्राफ्ट को भी आपराधिक तरीके से खरीदा गया था। शेफर्ड बुशिरी का कहना है कि उसकी लोकप्रियता के कारण उसके खिलाफ साजिश रची जा रही है।

भारत का भगोड़ा इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक ने भी इसी तरह अकूत संपत्ति अर्जित की है और उसके वीडियो देख कर कई युवाओं ने आतंक का रास्ता अख्तियार किया है। नाइक के ऐप तथा सोशल मीडिया हैंडल तक भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं तथा इनके माध्यम से मुस्लिम युवाओं को भर्ती करने और कट्टरपंथी बनाने का कार्य किया जा रहा है। वो मलेशिया में है और उसके प्रत्यर्पण के लिए भी कोशिशें हो रही हैं।

मुंबई पुलिस कमिश्नर को 27 नवंबर से पहले पेश होने का आदेश, रिपब्लिक TV मामले पर MHRC ने भेजा नोटिस

रिपब्लिक टीवी के वाइस प्रेसीडेंट को गिरफ्तार करने के मामले मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग की ओर से समन जारी किया गया है। इस समन में उन्हें घनश्याम सिंह की गिरफ्तारी के मामले में 27 नवंबर से पहले आयोग के समक्ष पेश होने का आदेश दिया गया है। आयोग ने यह कार्रवाई वकील आदित्य आर मिश्रा की शिकायत पर की है।

बता दें कि घनश्याम सिंह को 10 नवंबर को टीआरपी मामले में मुंबई की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। उन्हें सुबह 7:40 पर उनके घर से उठाया गया था। उससे पहले भी उनसे कई मौकों पर पुलिस ने पूछताछ की थी। आदित्य ने अपनी शिकायत में आयोग से कहा है कि सिंह पर चैनल के ख़िलाफ़ बयान देने का दबाव बनाया जा रहा है। इसलिए अगर यह आरोप ठीक हैं तो फिर यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

उल्लेखनीय है कि घनश्याम की गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही 4 नवंबर को अर्णब गोस्वामी को गैरकानूनी ढंग से पुलिस ने हिरासत में लिया था। अर्णब के मामले में भी महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने रायगढ़ एसपी को समन भेजा था। महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने रायगढ़ एसपी को नोटिस भेजकर अगले दिन उन्हें पेश होने को कहा था। साथ ही सारे सबूत आयोग के समक्ष पेश करने के आदेश भी दिए गए थे।

विधानसभा चुनाव खत्म होने तक अमित शाह और नड्डा हर माह करेंगे राज्य का दौरा: बंगाल फतह के लिए BJP ने कसी कमर

पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने बुधवार (नवंबर 18, 2020) को मीडिया से बात करते हुए बड़ी सूचना दी है। उन्होंने बताया है कि जब तक विधानसभा चुनाव संपन्न नहीं हो जाते तब तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह हर महीने राज्य का दौरा करेंगे।

उन्होंने कहा, “जब तक चुनाव खत्म नहीं हो जाते अमित शाह और जेपी नड्डा अलग-अलग हर महीने राज्य का दौरा करेंगे। अभी तारीख फाइनल होना बाकी हैं। उनके नियमित राज्य में आने से पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश रहेगा।”

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, गृहमंत्री अमित शाह हो सकता है महीने में दो दिन के लिए राज्य में आएँगे जबकि नड्डा तीन दिनों के लिए आएँगे।

बता दें कि बंगाल विधानसभा चुनाव अगले साल अप्रैल-मई माह में होने हैं। ऐसे में पार्टी का यह फैसला सत्ताधारी पार्टी टीएमसी को झटका दे सकता है। प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है कि कॉन्ग्रेस और सीपीआई (एम) के गठबंधन को पहले ही लोग नकार चुके हैं।

उनका कहना है, “पश्चिम बंगाल के लोगों ने कॉन्ग्रेस, सीपीआई (एम) को और टीएमसी को मौका दिया है। हर पार्टी जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में असफल रही, अब यह उम्मीदें भाजपा द्वारा पूरी की जाएँगी।”

रिपोर्ट बताती है कि भाजपा ने राज्य में आगामी चुनावों को लेकर अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। मंगलवार को राज्य को तीन संगठनात्मक जोन में विभाजित किया गया है और दिग्गज नेताओं को इनकी जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इन दिग्गज नेताओं में सुनील देवधर, विनोद तावड़े, दुश्यंत गौतम और हरीश द्विवेदी और विनोद सोनकर जैसे नेताओं नाम शामिल है। 

भाजपा पार्टी महासचिव दुष्यंत गौतम का विश्वास के साथ कहना है कि इस बार राज्य में भाजपा आएगी। वहीं, यदि लोकसभा चुनाव के नतीजों पर गौर करें तो पता चलता है कि भाजपा इस बार टीएमसी को बराबर की टक्कर देने को पूरी तरह तैयार है।

इसके अलावा गृहमंत्री अमित शाह पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में 2/3 बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनने जा रही है। उन्होंने दावा किया हुआ है कि इस बार बंगाल का विधानसभा चुनाव वह 200 से ज्यादा सीटों से जीतेंगे और प्रदेश में उनकी सरकार ही बनेगी। उन्होंने बंगाल की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा था,  

“मैं बंगाल की जनता को आश्वस्त करने आया हूँ कि आपने कॉन्ग्रेस को भी 1 मौका दिया, कम्युनिस्टों को भी बार-बार मौके दिए और 2 मौके ममता जी को दिए। एक मौका मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा को दे दीजिए, हम 5 वर्ष के भीतर सोनार बांग्ला बनाने का वादा करते हैं।”

पाकिस्तान को अलग रखा गया था ऑपरेशन से, जो बाइडन ने किया था लादेन को मारने के अभियान का विरोध: बराक ओबामा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी नई पुस्तक में कहा है कि उन्होंने एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के ठिकाने पर छापा मारने के अभियान में पाकिस्तान को शामिल करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि यह ‘खुला रहस्य’ था कि पाकिस्तान की सेना, खासकर उसकी खुफिया सेवा में कुछ तत्वों के तालिबान और संभवत: अलकायदा से संबंध थे और वे कई बार अफगानिस्तान एवं भारत के खिलाफ सामरिक पूँजी के तौर पर इनका इस्तेमाल करते थे।

ओबामा ने ‘ए प्रोमिस्ड लैंड’ नामक अपनी किताब में राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल में एबटाबाद में मारे गए छापे की जानकारी दी है। अमेरिकी कमांडो के इस छापे में दुनिया का सर्वाधिक वांछित आतंकवादी लादेन 2 मई, 2011 को मारा गया था। उन्होंने बताया कि इस अत्यधिक खुफिया अभियान का तत्कालीन रक्षा मंत्री रोबर्ट गेट्स और पूर्व उपराष्ट्रपति एवं मौजूदा निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने विरोध किया था। 

अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति ने बताया कि एबटाबाद में पाकिस्तानी सैन्य छावनी के बाहर एक पनाहगाह में लादेन के रहने की बात स्पष्ट हो जाने के बाद अलकायदा प्रमुख को मारने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि इस अभियान की गोपनीयता बनाए रखने की आवश्यकता ने चुनौती बढ़ा दी थी।

ओबामा ने कहा, “हम जानते थे कि यदि किसी को बिन लादेन के बारे में हमारे कदम की जरा सी भी भनक लग गई, तो मौका हमारे हाथ से चला जाएगा, इसलिए पूरी संघीय सरकार में केवल कुछ ही लोगों को अभियान की योजना की जानकारी दी गई थी। पूर्व राष्ट्रपति ने आगे लिखा, “हमारे सामने और चुनौतियाँ थीं, हम जो भी विकल्प चुनते उसमें पाकिस्तान को शामिल नहीं किया जा सकता था।” 

पाकिस्तानियों को लादेन को खत्म करने के ऑपरेशन में शामिल करने के क्या खतरे थे इस बारे में ओबामा लिखते हैं कि एबटाबाद से पाकिस्तान का एक सैन्य ठिकाना मात्र कुछ ही मील की दूरी पर था, जिसके कारण इस बात की संभावना बढ़ गई थी कि पाकिस्तानियों को कुछ भी बताने से अभियान की जानकारी लीक हो सकती है। ओबामा ने लिखा कि वे एबटाबाद में भले ही कोई भी विकल्प चुनते, उन्हें सबसे खतरनाक तरीके से अपने सहयोगी के क्षेत्र में बिना अनुमति घुसना पड़ता और इससे राजनयिक संबंध भी दाव पर लगे थे तथा इसने जटिलताएँ भी बढ़ा दी थीं।

आतंकवाद में पाकिस्तान की मिलीभगत को साफ-साफ रेखांकित करते हुए बराक ओबामा ने लिखा, “हालाँकि पाकिस्तान की सरकार ने आतंकवाद विरोधी अभियान में हमारी मदद की थी, लेकिन यह एक खुला सत्य था कि पाकिस्तान के कुछ सैन्य अधिकारी, खासकर इसकी खुफिया एजेंसियों के ताल्लुकात तालिबान और यहाँ तक कि अल कायदा से थे, ये इसका इस्तेमाल रणनीतिक शक्ति के रूप में करते थे ताकि अफगानिस्तान कमजोर बना रहे और पाकिस्तान के नंबर वन दुश्मन भारत के साथ शामिल न हो जाए।” 

आखिरकार अंतिम चरण में ओबामा प्रशासन दो विकल्पों पर विचार कर रहा था। पहला विकल्प था कि हवाई हमले से पूरे कंपाउंड को ही नष्ट कर दिया जाए, दूसरा विकल्प था कि एक विशेष ऑपरेशन को अनुमति दी जाए, जहाँ एक चुनिंदा टीम हेलिकॉप्टर से चुपके से पाकिस्तान जाए, कंपाउंड में कार्रवाई को अंजाम दे और इससे पहले कि पाकिस्तान की पुलिस और सेना को पता चले और वो कोई कार्रवाई करे ये टीम पलक झपकते ही वहाँ से बाहर निकल आए। 

आखिरकार ओबामा सरकार ने गहन चर्चा और विचार के बाद दूसरे विकल्प पर हामी भरी। बराक ओबामा लिखते हैं, “रेड के लिए अंतिम अनुमति देने से पहले एक मीटिंग में तत्कालीन विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा था कि ये एक 51-49 का कॉल है, रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने भी रेड के खिलाफ राय दी, हालाँकि वो एयर स्ट्राइक के पक्ष में थे।”

आगे ओबामा ने कहा, “जो बाइडेन की राय भी रेड के खिलाफ थी, उन्होंने तर्क दिया कि इस ऑपरेशन के फेल होने के बहुत चांस थे और वे खुफिया एजेंसियों से और भी सुनिश्चित करवाना चाहते थे कि लादेन कंपाउंड में है।”

ओबामा ने कहा कि इस अभियान के बाद उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई लोगों से फोन पर बात की, जिनमें से उनके लिए सबसे मुश्किल पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से बात करना था, जिन्हें पाकिस्तान की संप्रभुता के हनन के कारण आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता। उन्होंने कहा, “हालाँकि मैंने जब उनसे बात की, तो उन्होंने बधाई दी और सहयोग देने का आश्वासन दिया।”