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‘कोई पटाखे नहीं, मुझे नहीं लगता किसी को पटाखे जलाने चाहिए’ – दीवाली पर Tanishq ने फिर परोसा हिंदू विरोधी प्रोपेगेंडा

ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क ने अपने लव जिहाद वाले विवादित विज्ञापन के बाद दीवाली के अवसर पर नया ऐड तैयार किया है। इस ऐड में भी उन्होंने अपने प्रचार के नाम पर हिंदू विरोधी प्रोपगेंडा परोसा है जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर एक बार फिर बॉयकॉट तनिष्क ट्रेंड करने लगा है।

इस ऐड में दीवाली के नाम पर सिर्फ़ कुछ महिलाएँ नजर आ रही हैं जो हल्के रंग की साड़ियों में हैं और तनिष्क के आभूषण धारण करके बता रही हैं कि इस दीवाली पर क्या-क्या किया जाना चाहिए और क्या-क्या नहीं। 

परंपरागत श्रृंगार के नाम पर महिलाओं ने सिर्फ़ तनिष्क की ज्वैलरी ही पहनी है। विज्ञापन में न दीवाली पूजा से संबंधित कुछ नजर आ रहा है और न ही कुछ उसकी महत्ता से संबंधित। वहीं बैकग्राउंड की बात करें तो उसमें भी सामान्य लाइटिंग है, कोई दीया या कोई साज-सज्जा नहीं है।

ऐड शुरू होते ही एक महिला इसमें कहती है, “यकीनन कोई पटाखे नहीं। मुझे नहीं लगता किसी को पटाखे जलाने चाहिए।” इसके बाद दो-तीन महिलाएँ अपनी बातें रखती हैं और अंत में इकट्ठा होकर खिलखिलाती नजर आती हैं। बस ऐड खत्म।

अब इस ऐड को लेकर कई तरह के सवाल लोगों के मन में हैं। लोगों का पूछना है कि आखिर क्या जिस तरह से दीवाली में पटाखे जलाने को मना किया जाता है उसी प्रकार क्या क्रिसमस पर न क्रिसमस ट्री लगाने की या फिर बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी न देने की अपील भी की जाती है? या यह सब सिर्फ़ हिंदुओं को निशाना बनाने का एक तरीका है?

सोचने वाली है बात है कि यह प्रचार दीवाली के लिए निर्मित हुआ है। यदि मान भी लिया जाए कि तनिष्क का प्रोपेगेंडा हिंदू विरोधी नहीं है तो फिर इसमें दीये, कैंडल्स, रंगोली, मिठाई, पूजा की थाली आदि चीजें कहाँ हैं? जो आमतौर पर दीवाली के मौके पर हर घर की शोभा बढ़ाते हैं। क्या दीवाली का मतलब सिर्फ़ तनिष्क का सोना पहनना होता है?

आज से 6 साल पहले भी तनिष्क हर त्योहार पर अपने प्रचार बनाता था, लेकिन तब फर्क बस ये था कि उनका मकसद प्रोपेगेंडा फैलाना नहीं होता था। साल 2014 के दीवाली ऐड में और आज 2020 के विज्ञापन में फर्क देखिए।

पहले बैकग्राउंड में पटाखों की आवाजें थी। लाइटों से जगमगाते घर थे। आस-पास दीये जल रहे थे और एक बेटा अपनी माँ के लिए अपने बोनस से छोटा सा तोहफा लाया था। इस ऐड में सिर्फ़ भावनाओं के साथ उत्पाद का प्रचार हुआ था। कोई बेवजह का ज्ञान या फिर कोई प्रोपेगेंडा नहीं था। किसी ने इसका कोई विरोध भी नहीं किया था।

वहीं आज, इसी तनिष्क के ऐड से उत्पाद का विज्ञापन गायब है और हिंदुओं के त्योहार को लक्षित करते हुए प्रोपेगेंडा प्रमुखता से दिखाया जा रहा है। ऐसे में लोगों का कहना बस यह है कि तनिष्क या तो हिंदुओं को बेवकूफ समझना अब बंद करे या फिर अपनी ऐड फर्म से कॉन्ट्रैक्ट तोड़े, जिनका मकसद एक बने बनाए ब्रांड इमेज को खराब करना मात्र रह गया है।

शोभा गणेशन नाम की यूजर कहती हैं कि दीवाली का त्योहार बिंदी, लक्ष्मी पूजा और भगवान श्रीराम के घर आए बिना नहीं हो सकता। यह कोई किटी पार्टी या नए साल का गेट-टूगेदर नहीं है, जहाँ ऐड में ये सारी चीजें दिखाई जा रही हैं।

कुछ लोग ऐसे प्रयासों को हिंदू त्योहारों का इस्लामीकरण करना भी बता रहे हैं। उनका कहना है कि क्या कभी हिंदुओं में बिना बिंदी या चुनरी के दीवाली मनाते किसी ने किसी को देखा है? Tanishq के इस ऐड में कोई पूजा की थाली नहीं है, न ही कहीं भगवान राम का जिक्र है, आखिर किस आधार पर यह विज्ञापन दीवाली के लिए तैयार हुआ है?

15 साल की हिंदू लड़की को किडनैप कर 6 महीने तक रेप, शाकिब को UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

31 मई 2020 को 15 साल की एक लड़की कंकरखेड़ा थाना के सिंधावाली गाँव से लापता होती है। उसे किडनैप करने का आरोप उसके गाँव के ही शाकिब पर उसके परिजन लगाते हैं। 5 महीने से ज्यादा तक लड़की का कुछ अता-पता नहीं चलता है।

दो संप्रदायों के बीच मामला होने के कारण हिंदू संगठनों ने पुलिस पर तेजी से काम करने और किडनैप लड़की को शाकिब के चंगुल से छुड़ाने का दबाव भी बनाया। इस बीच कंकरखेड़ा थाने के इंस्पेक्टर तपेश्वर सागर और एसओजी प्रभारी वरुण शर्मा की टीम ने शाकिब को गिरफ्तार किया।

यह गिरफ्तारी तब हुई, जब आरोपित शाकिब किडनैप की गई किशोरी को लेकर दिल्ली जाने की फिराक में था। लड़की भी बरामद कर ली गई है। पुलिस की पूछताछ में आरोपित शाकिब ने लड़की को बागपत में एक ईंट भट्ठे पर बंधक बनाकर रखने की बात स्वीकार कर ली है।

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित खबर के अनुसार किडनैप की गई लड़की के साथ शाकिब ने रेप भी किया है। कंकरखेड़ा थाना प्रभारी के अनुसार किशोरी को मेडिकल जाँच के लिए भेजा गया है।

इस मामले में देरी होने पर हिंदू जागरण मंच और किडनैप की गई किशोरी के परिजनों ने कंकरखेड़ा थाने के बाहर 28 अक्टूबर को धरना-प्रदर्शन भी दिया था। बात SSP तक पहुँचने पर इस मामले के लिए एक SIT का गठन कर इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा तपेश्वर सागर को नोडल अधिकारी बनाया गया। और उनके नेतृत्व में ही आरोपित को गिरफ्तार कर किडनैप किशोरी को सकुशल बचा भी लिया गया।

दिवाली पर PM मोदी देंगे अपने संसदीय क्षेत्र को ₹614 करोड़ की सौगात: वाराणसी में पूरी की गई 19 परियोजनाएँ

दीपावली से पहले पीएम नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र काशी के निवासियों को बड़ी सौगात देंगे। 9 नवंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी काशी को 682 करोड़ का उपहार देंगे। सोमवार (नवंबर 9, 2020) को पीएम मोदी वर्चुअल तरीके से 19 परियोजनाओं का लोकार्पण और 17 परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ से कार्यक्रम में शामिल होंगे। हालाँकि कई मीडिया रिपोर्ट में 33 परियोजनाएँ बताई जा रही है।

बता दें कि पीएम मोदी जिन 19 परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे उनके निर्माण में 232 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। खास बात यह है कि ये सभी 19 परियोजनाएँ कोरोना काल में पूरी हुई हैं। वहीं 17 परियोजनाओं के निर्माण में 465 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

प्रधानमंत्री मोदी अपने इस वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान 118 करोड़ से सीड स्टोर निर्माण आईपीडीएस फेस-2, 60 करोड़ से शिक्षक आवास का निर्माण, 29.6 करोड़ से रीजनल आथ्रोलॉजी विंग, 19 करोड़ से गंगा प्रदूषण नियंत्रण, गौ संरक्षण केंद्र, केंद्रीय कारागार की बाउंड्रीवाल एयरपोर्ट पर यात्री निवास ब्रिज, 8.7 करोड़ से स्पोटर्स स्टेडियम में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्य, 18.4 रामनगर अस्पताल का अपग्रेडेशन, 45 करोड़ से बीएचयू में 100 बेड का एमसीएच विंग सहित अन्य परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे।

वाराणसी कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने वर्चुअल कार्यक्रम की अधिक जानकारी देते हुए कहा कि 9 अक्टूबर को लोकार्पण होने वाली परियोजनाओं की खास बात यह है कि यह सारी परियोजनाएँ कोरोना काल के लॉकडाउन पीरियड में पूरी की गई हैं। जनपद वाराणसी में लगभग 10000 करोड़ की परियोजनाएँ संचालित हैं। यह सारी परियोजनाएँ अगले साल दिसंबर तक पूरी हो जाएँगी। इसमें कई परियोजनाएँ पहले भी पूरी हो सकती है। जिसका सीधा लाभ जनता को मिलेगा।

वाराणसी कमिश्नर ने आगे बताया कि सारनाथ बुद्ध सर्किट का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। शुरुआत में इस परियोजना को लेकर काफी कठिनाई आई थी और नतीजे भी संतोषजनक नहीं मिल पाए थे क्योंकि हर महीने हजारों की संख्या में पर्यटक धामेख स्तूप पर आते हैं तो लाइट एंड साउंड का एक शो वहाँ पर पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से शुरू किया जा रहा है। इस आधे घंटे के लाइट और साउंड के शो में बुद्ध धर्म के विकास और सारनाथ के महत्व के बारे में बताया जाएगा।

अमिताभ बच्चन के वॉइस ओवर वाले कार्यक्रम के बारे में उन्होंने कहा कि यहाँ के लिए सबसे मुख्य आकर्षण यह है कि इसमें वॉइस ओवर विख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन की आवाज में है। कमिश्नर दीपक अग्रवाल का मानना है कि इस साउंड और लाइट शो द्वारा आयोजित किया जाने वाला यह कार्यक्रम न केवल पर्यटकों और बौद्ध धर्म को मानने वालों को काफी अच्छा लगेगा, बल्कि वाराणसी की अर्थव्यवस्था में भी बढ़ोतरी होगी।

अर्णब के समर्थन में देश भर से सामने आए विभिन्न वर्गों के लोग: सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेकर जल्द रिहाई की माँग

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी से नाराज देश भर के तमाम लोग उनके समर्थन में सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया और प्रदर्शनों के माध्यम से लोग उनकी जल्द रिहाई की माँग कर रहे है। गोस्वामी को रविवार (नवंबर 8, 2020) सुबह अलीबाग क्वारंटाइन सेंटर से तलोजा जेल ले जाया गया। इस दौरान उन्होंने खुलासा किया कि उनकी जान को खतरा है और पुलिस द्वारा उनको प्रताड़ित किया जा रहा है।

रिपब्लिक टीवी के कंसल्टिंग एडिटर प्रदीप भंडारी ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अर्णब गोस्वामी को सुरक्षा प्रदान करने को लेकर स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।

दिग्गजों और नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी राष्ट्रपति से संपर्क कर इस घटना पर एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा, “यह अब हमारे लिए एक चुनौती है, क्या सत्य की जीत होगी, या अत्याचारी झूठ को शासन करने की अनुमति दी जाएगी।”

एक तरफ जहाँ बीजेपी अर्णब की गिरफ्तारी का विरोध कर रही, वहीं अब रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) में शामिल हुईं बॉलीवुड अभिनेत्री पायल घोष ने भी अर्णब का समर्थन किया है। RPI की महिला शाखा की उपाध्यक्ष पायल घोष ने ट्वीट करते हुए कहा, “न्याय की लड़ाई में हम अर्णब गोस्वामी के साथ खड़े हैं। RPI अर्णब गोस्वामी के साथ है।”

फिल्मकार अशोक पंडित ने जम्मू कश्मीर के साहित्यिक सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र के लोगों की तरफ से अर्णब की गिरफ्तारी की निंदा की है। उन्होंने कहा, “प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है और यह प्रेस / मीडिया का कर्तव्य है कि वह चीजों की आलोचना करे। जनता की आँख और कान बने। एक भारतीय पत्रकार के प्रति इस तरह का व्यवहार किया गया। देश भर में जिसका व्यापक रूप से विरोध किया जा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “रिपब्लिक टीवी चैनल के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को मुंबई में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की कोई वजह नहीं है। उन्हें सार्वजनिक रूप से धक्का दिया गया है। जो सबके आँखों के सामने हुआ है।”

अर्णब गोस्वामी के समर्थन में सेवानिवृत्त मेजर जनरल जीडी बख्शी भी दृढ़ता से सामने आए हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं, और आज एक कर्नल के बच्चे को दोषी ठहराया जा रहा है।”

राज्य सभा के सदस्य सोनल मानसिंह ने कहा, “अर्नब गोस्वामी के साथ जो हो रहा है उसे देखकर बेहद दुखी हूँ। मैं प्रार्थना करता हूँ कि सच्चाई प्रबल हो। इस तरह के ट्रीटमेंट से किसी को फायदा नहीं मिलेगा “

वहीं जयपुर में सत्र न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सीपी सिंह ने कहा, “जो हुआ, उससे पता चलता है कि अपराधियों के माध्यम से उन्हें परेशान करने के लिए उन पर दबाव डाला जा रहा है; यह राजनीतिक आतंकवाद है।”

अर्णब ने बताया अपनी जान को खतरा

गौरतलब है कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और मुख्य संपादक अर्णब गोस्वमी ने अपनी जान को खतरा बताया है। पुलिस वैन के भीतर से ही मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें उनके वकीलों से भी बात नहीं करने दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह के 6 बजे जगा दिया गया और रविवार की सुबह उन्हें धक्का भी दिया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा, “मेरी ज़िंदगी खतरे में है। मैं भारत की जनता को, पूरे देश की जनता को बताना चाहता हूँ कि मेरी जान खतरे में है।”

अर्णब की गिरफ्तारी

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी को चार नवंबर की सुबह उनके घर से पुलिस ने बिना किसी सूचना के गिरफ्तार कर लिया था। अर्णब को दो साल पुराने केस में गिरफ्तार किया गया है जो पहले ही बंद हो चुका है। गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को अलीबाग कोर्ट में पेश किया था, जहाँ पर पुलिस कस्टडी की माँग की गई थी, हालाँकि कोर्ट ने पुलिस कस्टडी से इनकार करते हुए अर्णब गोस्वामी को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

राम जन्मभूमि पर 500 साल बाद मनेगी दीपावली, जलेंगे 5.51 लाख दीप: रामलला का दर्शन कर शुभारम्भ करेंगे CM योगी

भगवान राम की नगरी अयोध्या में पाच सौ वर्ष बाद राम जन्मभूमि प्रांगण में दीप जलेंगे। यहाँ पर पाँच अगस्त को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन होने के बाद इस बार तो अयोध्या का तीन दिवसीय दीपोत्सव कार्यक्रम बेहद ही खास होगा। 11 से होने वाले तीन दिनी दीपोत्सव में 13 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगमन होगा। सीएम योगी आदित्यनाथ रामलला का दर्शन कर श्री राम जन्मभूमि परिसर में करीब पाँच सौ वर्ष बाद दीप जलाएँगे। सीएम योगी आदित्यनाथ जन्मभूमि परिसर में रामलला की आरती भी उतारेंगे।

अयोध्या में इस दौरान करोड़ों राम भक्तों के लिए भी भव्य इंतजाम किया गया है। वह लोग भी अयोध्या में श्री रामलला के दरबार में वर्चुअल हाजिरी लगाएँगे। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ‘दीपोत्सव’ में वर्चुअली भाग लेंगे। भगवान राम के श्रद्धालु अयोध्या के राम दरबार में आस्था-दीप जलाने से वंचित न रहे, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पोर्टल तैयार करवाया है। जहाँ लोग वर्चुअल दीप जलाकर श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश सरकार का अनूठा वर्चुअल दीपोत्सव प्लेटफार्म बिल्कुल रियल जैसा अनुभव देगा। पोर्टल पर श्री रामलला विराजमान की तस्वीर होगी।

500 साल की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण जारी है। ऐसे में इस बार योगी आदित्यनाथ सरकार ‘दीपोत्सव’ को खास बनाने में जुटी है। इस बार भगवान राम के भक्त आस्था व विश्वास के साथ अपने प्रभु के दरबार में वर्चुअल तरीके हाजिरी लगा पाएँगे, साथ ही उनके समक्ष दीप भी प्रज्जवलित कर आशीर्वाद पाने की भी व्यवस्था की जा रही है। 

दीप जलाने के बाद जिला प्रशासन धन्यवाद पत्र देगा। यह क्षण ऐसा होगा कि आप स्वयं दीपोत्सव में शामिल हैं। इन सब अत्याधुनिक व्यवस्थाओं के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार एक वेबसाइट तैयार करा रही है। यह वेबसाइट सुविधा प्रस्तावित मुख्य समारोह से पहले 13 नवम्बर को आमजन के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दीपोत्सव को भव्य-दिव्य बनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन स्पष्ट कहा है कि कहीं भी कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। प्रतिदिन के अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। जितने भी कार्यक्रम होंगे सभी में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपोत्सव पर राम की पैड़ी के साथ सभी मठ मंदिरों व घरों में ऐसे दीप जलेंगे, जिससे भगवान राम की नगरी अयोध्या दीप के प्रकाश से पूरी तरह से अलोकित हो जाए। इस बार करीब साढ़े पाँच लाख दीप जलाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामायण के प्रसंगों पर आधारित झाँकियों का अवलोकन करेंगे। इसके साथ ही, श्री राम, सीता और लक्ष्मण के स्वरूप की आरती कर श्री राम का राज्याभिषेक करेंगे। अयोध्या दीपोत्सव की तैयारियों पर मुख्यमंत्री की सीधी नजर है। 

योगी ने कहा कि राम की पैड़ी पर इस बार 5.51 लाख दीप जलाए जाएँ। साथ ही, सभी मठ-मन्दिरों और घरों में दीप प्रज्ज्वलन की ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या दीपों के प्रकाश से पूरी तरह आलोकित हो जाए।

सीएम ने निर्देश दिया कि इस दौरान मठ-मन्दिरों में भजन और रामायण पाठ का आयोजन कराया जाए। अयोध्या की भव्य सजावट की जाए। श्रीरामजन्मभूमि, कनक भवन, राम की पैड़ी, हनुमान गढ़ी सहित सभी मन्दिरों में बिजली की सजावट की जाए। इसी प्रकार पुलों, विद्युत पोल आदि पर बिजली की झालर लगाई जाए।

प्रदेश के पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी ने कहा कि इस साल दीपोत्सव पर 5 लाख से ज्यादा मिट्टी के दीये जलेंगे। राम जन्मभूमि स्थल पर पहली बार ऐसा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जो पिछले 500 सालों से लंबित पड़ा था।

तिवारी ने कहा कि 500 सालों तक संघर्ष करने के सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार केंद्र सरकार को राम मंदिर निर्माण शुरू करने का आदेश दे दिया। अगर कोरोना नहीं होता तो इस कार्यक्रम में करोड़ों लोग शामिल होते। उन्होंने बताया कि लोग कार्यक्रम स्थल पर न आएँ इसके लिए कार्यक्रम के डिजिटल प्रसारण की तैयारी की गई है।

‘प्रोफेटिक डीक्लरेशन’ से महिला को गर्भवती बनाने का दावा’: ईसाई प्रचारक पर 2.6 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज

केंद्रीय गृह मंत्रालय को लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग और धर्मांतरण के आरोपों पर एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने की माँग करते हुए एक आध्यात्मिक कल्याण सोसायटी के खिलाफ एक शिकायत दर्ज की गई है। ईसाई मत प्रचारक इस संगठन का नेतृत्व पंजाब के एक प्रचारक अंकुर नरूला द्वारा किया जाता है।

लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, ईसाई संगठन ने यूनाइटेड किंगडम में एक शेल कंपनी बनाई थी, जिसने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के माध्यम से 2.6 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की थी।

ईसाई प्रचारक द्वारा बनाई गई शेल कंपनी, अंकुर नरुला मिनिस्ट्रीज (यूके) लिमिटेड, लंदन के ओल्ड ग्लूसेस्टर स्ट्रीट में पंजीकृत थी। हालाँकि, यह 3 साल पहले 23 अप्रैल, 2017 को मनी लॉन्ड्रिंग के लिए एक नेटवर्क बनाने के बाद इसे डिजॉल्व कर दिया गया था। आरएसएस स्वयंसेवक विनय जोशी द्वारा संचालित संगठन लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी ने कुछ सबूत भी शेयर किए जिसमें अंकुर नरूला को विदेशी दाताओं से पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली को दरकिनार कर धन लेते पाया गया था।

“भारत के बाहर से कुछ भेजने के लिए कृपया इस नंबर पर संपर्क करें …” ईसाई प्रचारक द्वारा यह मैसेज शेयर किया गया है। जोकि यह दिखाता है कि अंकुर नरूला सरकार से अनुमति लिए बिना विदेशी योगदान स्वीकार कर रहे थे।

लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी ने उन पोस्टरों को साझा किया जिनमें अंकुर नरूला ने लोगों को ‘काले जादू’ के प्रभाव से बचाने का दावा किया था। ऐसा ही एक विवादास्पद पोस्टर जोकि अंकुर नरूला ने छपवाया था उसमें लिखा है, “काला जादू से आज़ादी पाएँ।”

ईसाई प्रचारक ने अपनी भविष्यवाणियों के माध्यम से एक महिला को गर्भवती करने का दावा भी किया था। उसके द्वारा प्रकाशित एक पोस्टर में कहा गया था, “गर्भ का आशीर्वाद, भविष्यवाणी ग्रहण करने के बाद गर्भवती हुई।”

लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी द्वारा साझा किए गए एक अन्य पोस्टर में अंकुर नरूला मिनिस्ट्रीज़ ने दावा किया, “भविष्यवाणी पूरी हुई!” उन्होंने एक महिला की तस्वीरें साझा की थीं और दावा किया था कि भविष्यवाणियों की मदद से उसके शरीर से एक सिस्ट निकाली गई। पोस्टर में लिखा था, “भविष्यवाणी ग्रहण करने के तुरंत बाद गुप्तांग के द्वारा रसौली बाहर आई।” गौरतलब है कि ऐसे ‘चमत्कारी दावों’ के साथ, ईसाई मत प्रचारक अशिक्षित और गरीब लोगों को फँसाने और उन्हें ईसाई धर्म में धर्मान्तरित करने की कोशिश करता है।

कौन है अंकित नरूला

उनकी वेबसाइट के अनुसार, अंकुर नरूला द चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स में एक पादरी हैं। चर्च पंजाब में सबसे तेजी से विस्तारित चर्च होने का दावा करता है, जिसमें 1,00,000 से अधिक लोग इंटरनेट के माध्यम से उनके उपदेशों और लाइव सत्रों में भाग लेते हैं। एक गैर-आस्तिक परिवार में जन्मे, प्रेरित अंकुर नरूला को प्रभु यीशु मसीह के बारे में तब पता चला कि जब वह अपनी जिंदगी से परेशान हो आत्महत्या करने वाला था। इसमें आगे कहा गया है, “प्रेरित के ईश्वर के प्रेम के स्पष्ट संदेश ने दुनिया भर के हजारों लोगों को प्रभु यीशु मसीह के साथ एक व्यक्तिगत संबंध बनाए रखने के लिए प्रेरित किया है।”

नोटबंदी के 4 साल- काला धन घटाने, टैक्स कलेक्शन बढ़ाने, पारदर्शिता सुदृढ़ करने में मिली मदद: PM मोदी

आज देश में नोटबंदी को पूरे चार साल हो गए हैं। नोटबंदी के चार साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (नवंबर 8, 2020) को कहा कि इससे काले धन को कम करने में मदद मिली है, कर जमा करने में वृद्धि हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 की आधी रात से 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी, जो उस समय चलन में थे। बाद में सरकार ने पाँच सौ और दो हजार के नए नोट जारी किए थे।

मोदी ने आज ट्विटर पर विमुद्रीकरण के अपनी सरकार के फैसले के लाभों को गिनाया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘नोटबंदी ने कालेधन को कम करने में, कर अनुपालन बढ़ाने में तथा पारदर्शिता सुदृढ़ करने में मदद की है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘ये परिणाम देश की प्रगति के लिए बहुत लाभकारी रहे हैं।’’ प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट के साथ एक ग्राफिक भी साझा किया है, जिसमें दर्शाया गया है कि किस तरह से विमुद्रीकरण से कर जमा होने में वृद्धि हुई, कर तथा जीडीपी अनुपात बढ़ा, भारत अपेक्षाकृत कम नकदी आधारित अर्थव्यवस्था बना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिली।

प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी से हुए फायदों के आँकड़ों की भी जानकारी दी। जिसके मुताबिक, नोटबंदी के कारण दस लाख से अधिक कैश जमा करने वाले वे तीन लाख लोग चिन्हित हुए जो आइटी रिटर्न नहीं फाइल करते थे।

डिजिटल ट्रांजेक्शन को मिला बढ़ावा- भाजपा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नोटबंदी के चार साल पूरे होने पर अपने ट्विटर हैंडल पर कहा कि साल 2016 में पीएम मोदी के नेतृत्व में की गई नोटबंदी के बाद से डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिला है। अक्टूबर 2020 के दौरान देश में 207.16 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए। NPCI के अनुसार अब तक 3.86 लाख करोड़ रुपए के UPI ट्रांजेक्शन हो चुके हैं।

बीजेपी ने एक अन्य ट्वीट करते हुए लिखा, “नोटबंदी रियल एस्टेट के लिए वरदान साबित हुई। रियल एस्टेट क्षेत्र कालेधन के ट्रांजेक्शन के लिए बेहद ही आसान जरिया बना था। नोटबंदी के वाद रियल एस्टेट सेक्टर अब अधिक पारदर्शी, संगठित, भरोसेमंद और खरीदारों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।”

इसके साथ ही बीजेपी ने बताया कि नोटबंदी ने आतंकवाद और नक्सलवाद पर गहरी चोट की। नोटबंदी से आतंकियों और नक्सलियों के बौसले पस्त हुए। नोटबंदी के बाद जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएँ लगभग समाप्त हो गई है और वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में भी भारी कमी आई है।

नोटबंदी लाने की मोदी सरकार ने कई वजहें बताईं। इसमें कालेधन का खात्मा करना, सर्कुलेशन में मौजूद नकली नोटों को खत्म करना, आतंकवाद और नक्सल गतिविधियों पर लगाम कसने समेत कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने जैसे कई वजहें गिनाई गई थीं। सरकार का तर्क है कि नोटबंदी के बाद टैक्स कलेक्शन बढ़ा और कालेधन में इस्तेमाल होने वाला पैसा सिस्टम में आ चुका है। हालाँकि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने नोटबंदी के कदम की आलोचना करते हुए रविवार को सरकार पर करारा हमला बोला। उन्‍होंने कहा कि इस कदम ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया।

‘मैं तो जिंदा हूँ’- TOI ने नीतीश के जीवित मंत्री को मार दिया, खुद को सही-सलामत बताते मंत्रीजी ने किया ट्वीट

फेक न्यूज फैलाने के कारण बिहार के मधुबनी से जदयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा ने समाचार समूह ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) की ट्विटर पर जमकर क्लास लगाई है। बता दें कि  ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने संजय कुमार झा के निधन की झूठी खबर प्रकाशित की थी।

बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरा चरण का मतदान शनिवार (नवंबर 7, 2020) की शाम समाप्त हो गया। इसी बीच ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने खबर प्रकाशित की कि मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड से चुनावी मैदान में उतरे जदयू के बागी नेता व निर्दलीय उम्मीदवार संजय झा का कोरोना वायरस से निधन हो गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर

रिपोर्ट में कहा गया कि संजय झा का यहाँ के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। वे इस अस्पताल में पिछले 10 दिनों से भर्ती थे। इसमें आगे कहा गया था कि बेनीपट्टी से टिकट न मिलने से नाराज सत्ताधारी जनता दल-युनाइटेड के नेता संजय झा ने पार्टी से बागवत कर पार्टी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे थे। इससे पहले वह राजद के जिला उपाध्यक्ष भी रहे चुके थे।

संजय कुमार झा ने ट्विटर पर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ टैग करते हुए लिखा, “मैं तो जिंदा हूँ। मुझे मृत घोषित करने वाली आपकी गलत स्टोरी ने मेरे परिवार, दोस्तों और समर्थकों को पीड़ा दी है। कृपया अपने ऑनलाइन और प्रिंट प्लेटफ़ॉर्म पर तत्काल स्पष्टीकरण जारी करें और अपने संवाददाताओं / डेस्क को तत्परता के साथ अपना काम सुनिश्चित करने के लिए कहें।”

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया हो। इससे पहले भी ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ऐसा कर चुका है। पिछले दिनों ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने ख़बर प्रकाशित किया कि कोलकाता के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और सास की हत्या कर के ख़ुद को भी गोली मार ली। लेकिन, TOI ने इसमें शिल्पी अग्रवाल नामक फूड ब्लॉगर और उनके पति अमित अग्रवाल की तस्वीर लगा दी। नाम भी उनका ही डाल दिया। जबकि दोनों सकुशल हैं।

जब ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने शिल्पी अग्रवाल और उनके पति की तस्वीर इस हत्याकांड वाली ख़बर में लगा दी तो उनके पास कई मैसेज आने लगे, जिसके बाद उन्हें सफाई देनी पड़ी कि वो ठीक हैं। इसके बाद शिल्पी ने TOI की उस ख़बर को अपने लैपटॉप पर खोल कर उसका वीडियो बनाया और फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देखिए भारत में पत्रकारिता का स्तर कितना नीचे गिर गया है। उन्होंने कहा कि TOI या भारतीय मीडिया में उनका जो भी थोड़ा-बहुत विश्वास बचा था, वो इस ख़बर के साथ ही उड़न-छू हो गया।

बता दें कि मधुबनी के बेनीपट्टी सीट से निर्दलीय उम्‍मीदवार नीरज झा का निधन हो गया है। कोरोना संक्रमित नीरज पिछले कई दिनों से एम्‍स में भर्ती थे। दस दिन पहले उन्‍हें एम्स पटना में भर्ती कराया गया था। उन्‍हें मधुमेह की भी शिकायत थी। एम्‍स में इलाज के दौरान उन्‍होंने शनिवार को अंतिम साँस ली।

नीरज झा के निधन से उनके समर्थकों में शोक की लहर है। नीरज झा जदयू से जुड़े थे लेकिन चुनाव से पहले उन्होंने पार्टी छोड़ निर्दलीय पर्चा भरा था। इस बार बेनीपट्टी सीट से 15 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे थे। जदयू नेता रहे नीरज के चुनाव मैदान में उतरने से बेनीपट्टी सीट पर मुकाबला काफी रोचक हो गया था। उनके निधन की खबर से समर्थक दु:खी हैं।

भारत के PM की तुलना ‘हिटलर’ से प्रशंसा योग्य लेकिन सीएम के बेटे को ‘पेंगुइन’ कहने की सजा जेल: ये है 2020 का भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अक्सर ‘फासीवादी‘ कहा जाता है। और लिब्रल्स की ओर से देखे तो ठीक ही तो है।

जहाँ भारत के प्रमुख विपक्षी दल, ‘बुद्धिजीवी’, शिक्षाविद, मीडिया हस्ती और प्रोपेगेंडा फैलाने वाले तमाम पत्रकारों का पूरा इकोसिस्टम मोदी को ‘हिटलर’ के रूप में बार-बार बुला सकता है और साथ ही पीएम मोदी की छवि को एडॉल्फ हिटलर के रूप में प्रदर्शित कर सकता है, वहाँ मोदी के खिलाफ कोई भी बात गलत नहीं हो सकती।

भारत ही नहीं पाकिस्तान भी नियमित रूप से पीएम मोदी पर हमला करने के लिए कॉन्ग्रेस की लाइन का इस्तेमाल करता है। मतलब मोदी की तुलना हिटलर से करना।

पाकिस्तान द्वारा किए गए इस ट्वीट को 1 साल से भी ज्यादा हो गया है।

पाकिस्तान की बात करें तो आपको याद होगा कि कैसे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के विश्वासपात्र सैम पित्रोदा ने बालाकोट हवाई हमलों के दौरान न केवल पाकिस्तान का साथ दिया था, बल्कि पीएम मोदी की तुलना हिटलर से भी की थी। उन्होंने न केवल भारतीय सशस्त्र बलों को कम आँका बल्कि हवाई हमलों पर विदेशी मीडिया के पक्षपाती नैरेटिव का समर्थन भी किया। लेकिन किसी को भी कोई फर्क नहीं पड़ता जब कोई वरिष्ठ और प्रभावशाली कॉन्ग्रेसी नेता पीएम को ’हिटलर’ कहता है।

वहीं फिल्म निर्माता जैसे नागरिक पीएम मोदी की छवि को धूमिल करने के लिए फर्जी वीडियो का सहारा लेते हैं, जिसके जरिए वह ये दर्शाते हैं कि मोदी जर्मन तानाशाह हिटलर से प्रेरित थे। मोदी को वास्तव में एक फासीवादी होना चाहिए। लेकिन मोदी ने तब भी इन बातों को इतना महत्व नहीं दिया। अनुराग कश्यप को एक लिबरल के रूप में जाना जाता है। जो सत्ता के खिलाफ सच बोलते हैं (क्या हुआ अगर सच एक नकली वीडियो है)।

वहीं जब किसी ने सिर्फ मजाकिया तौर पर एक राज्य के मुख्यमंत्री का मीम्म बनाया, तो उसे गैर-जमानती आरोपों के साथ धर लिया गया। ‘हिटलर’ ने क्या किया? खैर, अगर बात करे पिछले साल दिसंबर की तो पीएम मोदी ने नेटीज़न्स द्वारा बनाए गए उनके सूर्य ग्रहण को देखते हुए मिम्स को प्रोत्साहित किया। जिस पर यह कहा जा सकता है, हाय फासीवादी, बहुत ही फासीवादी मोदी।

गौर करें तो भारत में मीडिया हस्तियों ने भी पीएम मोदी के लिए अपनी नफरत को छुपाने की कोशिश नहीं की है। कोरोनावायरस के शुरुआती दौर में कितने ही पत्रकारों ने मनाया की काश पीएम मोदी को यह जानलेवा बीमारी हो जाए। यहीं नहीं कितनों ने तो उनके मरने की कामना भी की। देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी बातें बोलने के बावजूद उनमें से किसी को भी जेल नहीं जाना पड़ा था।

वहीं न्यूज़ चैनल मालिकों को भ्रष्टाचार का खुलासा करने के लिए गिरफ्तार किया गया और जेल में भी डाल दिया गया था, जब उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार कथिततौर पर कई क्लब को पैसे दे रही है। जिसपर उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई। तब किसी ने भी इन पत्रकारों के समर्थन में आवाज नहीं उठाया जिनके खिलाफ राज्य सरकार बल प्रयोग कर रही थी।

यह सब देखते हुए यही कहा जा सकता है कि मोदी प्रेस की स्वतंत्रता और बोलने की आजादी का गला घोंट रहे है? शर्म आती है ‘हिटलर’ पर।

बता दें सिर्फ “हिटलर” का नाम ही नहीं है जो पीएम मोदी का अपमान करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। और भी ऐसे कई अपमानजनक भाषा है जिसे तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 2017 में पीएम मोदी के लिए इस्तेमाल किए गए विभिन्न अपमानों की लिस्ट बना कर सार्वजनिक किया था।

उरी सर्जिकल स्ट्राइक के बाद राहुल गाँधी द्वारा पीएम मोदी पर ‘खून का दलाली’ करने का आरोप लगाया गया था। लेकिन देखिए मुख्यमंत्री के बेटे, जो कि एक विधायक भी है, को पेंगुइन बुलाने के लिए जेल में ठूस दिया गया है। इस शब्द का संदर्भ बॉलीवुड के अलावा राजनीति में हो रहे भाई भतीजावाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अब आप बताइए फासिस्ट कौन है? हाँ जाहिर है नरेंद्र मोदी?

और बेबी पेंगुइन किसी भी प्रकार का अपमान नहीं है क्योंकि ज्यादातर पेंगुइन प्यारे होते हैं।

विडंबनापूर्ण है, कि जो आदमी पेंगुइन को मुंबई के एक चिड़ियाघर में ले आया, जहाँ का मौसम उड़ने वाले पक्षियों के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है, वह राज्य में पर्यावरण मंत्री है। लेकिन फिर ऐसी बातें हुईं जो काफी आश्चर्यजनक थी।

यह 2020 का भारत है।

मुंबई पुलिस का दावा- ‘जेल से सोशल मीडिया पर एक्टिव थे अर्णब’, जबकि नहीं है उनका कोई सोशल मीडिया एकाउंट

रायगढ़ पुलिस ने रविवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को न्यायिक रिमांड जारी रखने के लिए तलोजा जेल शिफ्ट कर दिया गया। अर्णब की शिफ्टिंग का कारण देते हुए पुलिस ने दावा किया कि अर्णब गोस्वामी अलीबाग के क्वारंटाइन सेंटर के अंदर मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे थे। नियमों के अनुसार, वह अनुमति के बिना न्यायिक हिरासत में रहते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकते है।

क्राइम ब्रांच के इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर जमील शेख ने कहा कि अर्णब किसी का मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे थे और सोशल मीडिया पर एक्टिव थे। उन्होंने कहा, “शुक्रवार देर शाम को हमें पता चला कि गोस्वामी किसी के मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए सोशल मीडिया पर सक्रिय थे।”

बता दें पुलिस ने गोस्वामी के फोन को उनके वर्ली निवास से गिरफ्तार करने के बाद जब्त कर लिया था, इसलिए उनके पास अपना फोन नहीं था। पुलिस अधिकारी ने आगे कहा, “मामले के जाँच अधिकारी के रूप में, मैंने अलीबाग जेल अधीक्षक को लिखा था कि एक जाँच रिपोर्ट माँगी जाए कि गोस्वामी को मोबाइल कैसे मिला और किसने उन्हें क्वॉरन्टीन सेंटर में मोबाइल मुहैया कराया था। इसके बाद, हमने उन्हें तलोजा जेल में शिफ्ट कर दिया।”

गौरतलब है कि अर्नब गोस्वामी किसी भी सोशल मीडिया पर मौजूद नहीं हैं। किसी भी बड़े सोशल प्लेटफॉर्म पर उनका कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है। इसलिए यह पक्का नहीं है फिर पुलिस को कैसे पता चला कि गोस्वामी सोशल मीडिया पर सक्रिय थे।” जब अर्णब का सोशल मीडिया पर कोई आधिकारिक एकाउंट है ही नहीं तो सवाल उठता है कि पुलिस के दावे के अनुसार वे कहाँ सक्रिय थे। अगर वास्तव में उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किया था, फिर वो तो अबतक वायरल हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। इसका अभी तक कोई सबूत नहीं है कि पिछले 4 दिनों में अर्णब गोस्वामी सोशल मीडिया पर ‘सक्रिय’ थे।

इसके अलावा जब गोस्वामी के पास अपना फोन नहीं था और जेल में फोन रखने की अनुमति नहीं है तो एक और सवाल उठता है कि कैसे अर्णब गोस्वामी जेल में एक्टिव डेटा कनेक्शन के साथ एक फोन ढूँढने में कामयाब रहे? पुलिस अधिकारी ने अभी तक उस शख्स पर कोई कार्रवाई या उसका खुलासा नहीं किया है जिनसे अर्णब ने कथित तौर पर फोन लिया था और कथित फोन आखिर जेल में कैसे पहुँचा।

इस मामले में ऐसा लगता है कि अर्णब गोस्वामी पर झूठे मामले की तरह, यह भी पुलिस द्वारा गोस्वामी को तलोजा जेल में स्थानांतरित करने के लिए बनाया गया एक बहाना है। जानकारी के लिए बता दें तलोजा जेल में कई कुख्यात अपराधी और अंडरवर्ल्ड डॉन को रखा है।

अर्णब ने बताया अपनी जान को खतरा

गौरतलब है कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और मुख्य संपादक अर्णब गोस्वमी ने अपनी जान को खतरा बताया है। पुलिस वैन के भीतर से ही मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें उनके वकीलों से भी बात नहीं करने दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह के 6 बजे जगा दिया गया और रविवार की सुबह उन्हें धक्का भी दिया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा, “मेरी ज़िंदगी खतरे में है। मैं भारत की जनता को, पूरे देश की जनता को बताना चाहता हूँ कि मेरी जान खतरे में है।”

अर्णब की गिरफ्तारी

अर्णब को मुंबई के इंटीरियर डिजाइनर अन्वय और उनकी माँ को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 4 नवंबर बुधवार को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस ने उन्हें न्यायिक सहमति के बिना हिरासत में लिया था। वे 18 नवंबर तक ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। कथिततौर पर गिरफ्तारी के समय मुंबई पुलिस ने अर्णब के नाबालिग बेटे से मारपीट और उनके परिजनों से बत्तमीजी भी की थी।