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MP में कॉन्ग्रेस समर्थक कंप्यूटर बाबा का 2 एकड़ में फैला अवैध आश्रम ध्वस्त: कार्रवाई में बाधा डालने पर 6 गिरफ्तार

मध्यप्रदेश के इंदौर में कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के साथ अपने राजनीतिक संबंधों के कारण चर्चा में रहने वाले कंप्यूटर बाबा का जम्बूड़ी हप्सी गाँव में सरकारी जमीन पर बने अवैध आश्रम को रविवार (8 नवंबर, 2020) सुबह जिला प्रशासन द्वारा ढहा दिया गया। बता दें बाबा राज्य में उपचुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे थे।

कंप्यूटर बाबा के नाम से जाने जाने वाले नामदेव दास त्यागी ने अपना आश्रम 46 एकड़ में फैला रखा था। जानकारी के अनुसार बाबा ने इंदौर में गोमतगीरी क्षेत्र में 2 एकड़ सरकारी स्वामित्व वाली गौशाला भूमि का अतिक्रमण किया था। नगर निगम ने दो महीने पहले कंप्यूटर बाबा को नोटिस दिया था। निगम ने उनसे अवैध संपत्ति को खाली करने और 2000 का जुर्माना भरने के लिए कहा था।

जिला प्रशासन ने रविवार को बुलडोजर के साथ अतिक्रमित स्थल पर पहुँचकर बाबा के अवैध आश्रम को जमींदोज कर दिया। कलेक्टर मनीष सिंह के निर्देशन में टीम का नेतृत्व एडीएम अजय देव शर्मा और एसडीएम और पुलिस अधिकारियों ने किया। इतना ही नहीं प्रशासन की इस कार्रवाई में बाधा डालने वाले 6 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है।

गौरतलब है कि कंप्यूटर बाबा को मध्य प्रदेश में पिछली भाजपा सरकार के तहत मंत्री पद दिया गया था लेकिन उन्होंने छह महीने बाद उस पद को त्यागते हुए राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के आलोचक बन गए थे। जिस दौरान उन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी के करीब जाते देखा गया था। चुनावों के दौरान कंप्यूटर बाबा ने भोपाल से कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की जीत के लिए हठ योग का आयोजन किया था। उस चुनाव में दिग्विजय का सामना भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर से था। कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने के बाद उन्हें कमलनाथ सरकार द्वारा रिवर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

ध्वस्तीकरण की कॉन्ग्रेस नेता ने की आलोचना

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा, “इंदौर में बदले की भावना से कंप्यूटर बाबा का आश्रम व मंदिर बिना किसी नोटिस दिए तोड़ा जा रहा है। यह राजनैतिक प्रतिशोध की चरम सीमा है। मैं इसकी निंदा करता हूँ।”

कंप्यूटर बाबा का कॉन्ग्रेसी नेता दिग्विजय को समर्थन

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पिछले साल मई में भोपाल में एक यज्ञ किया था जिसमें कई साधुओं को आमंत्रित किया गया था। वहीं भोपाल लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के समर्थन में कम्प्यूटर बाबा ने हठ योग किया और भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ जीत का आशीर्वाद दिया था। हालाँकि बाद में साधु (जो अनुष्ठान में उपस्थित थे) ने खुलासा किया कि उनका कॉन्ग्रेस के चुनाव अभियान से कोई लेना-देना नहीं था, और वे नहीं जानते थे कि कार्यक्रम राजनीतिक उद्देश्यों के लिए आयोजित किया गया था।

पूर्व IAS शशिकांत सेंथिल होंगे कॉन्ग्रेस में शामिल: जम्मू-कश्मीर से 370 हटने पर दिया था इस्तीफा

कर्नाटक-कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी एस शशिकांत सेंथिल सोमवार (नवंबर 9, 2020) को चेन्नई में कॉन्ग्रेस में शामिल होंगे। बता दें कि दक्षिण कन्नड़ ज़िले में उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) का पद संभाल रहे सेंथिल ने पिछले साल जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद सितंबर में अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा था, ”मेरे लिए ऐसे समय पर प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर काम करते रहना अनैतिक होगा जब हमारे समृद्ध लोकतंत्र के मौलिक आधारभूत स्तंभों से समझौता किया जा रहा है।”

तमिलनाडु मामलों के प्रभारी AICC दिनेश गुंडू राव ने ET को बताया, “सेंथिल समुदायों के बीच संघर्ष, धार्मिक मुद्दों पर हिंसा और भाजपा की नीतियों के कारण परेशान हैं। वह देश को एकजुट करने के प्रयासों में शामिल होना चाहते हैं। वह राहुल गाँधी के साथ अपने विचारों पर चर्चा कर चुके हैं। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर उनका लाभ लेगी।”

शशिकांत सेंथिल गुंडू राव और राज्य कॉन्ग्रेस अध्यक्ष केएस अलागिरी की उपस्थिति में पार्टी में शामिल होंगे। 41 वर्षीय पूर्व नौकरशाह ने ट्वीट किया, “मैं सभी को सूचित करना चाहूँगा कि मैंने लड़ाई जारी रखने के अपने प्रयास में कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है। मैं एक ऐसा कार्यकर्ता रहा हूँ जो अपने पूरे जीवन में कम से कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए एक आवाज बनने की कोशिश कर रहा है, जहाँ भी मैं था और अपनी अंतिम साँस तक ऐसा ही करता रहूँगा।”

शशिकांत का कहना है कि कॉन्ग्रेस के नेता उन्हें पार्टी में पाकर खुश हैं और वह इसके संगठनात्मक ढाँचे का हिस्सा होंगे। उन्होंने कहा, “मैं एक विशिष्ट विधायक या सांसद नहीं रहूँगा। मैं चुनाव की दिशा में काम करूँगा और कॉन्ग्रेस के मूल्यों का प्रसार करूँगा। मेरा महत्वपूर्ण कर्तव्य राजनीतिक समाधान की ओर, समाज या व्यक्तियों के रूप में सभी को एक साथ लाना है। मुझे विश्वास है कि 2024 में हम निश्चित रूप से सेंध लगाएँगे।”

सेंथिल ने जम्मू-कश्मीर से अनुछेद 370 हटाने और विशेष दर्जे को समाप्त करने के विरोध में आईएएस से इस्तीफा दे दिया था। वह तब दक्षिण कन्नड़ के डिप्टी कमिश्नर थे। उस समय, शशिकांत ने कहा था कि उनके राजनीति में शामिल होने का कोई संकेत नहीं है क्योंकि वह अकादमिक ग्रुप से संबंधित हैं। उन्होंने कहा था, “मेरे लिए पैटर्न बहुत स्पष्ट है और मैं नौकरशाही के बाहर काम करूँगा ताकि स्पष्टता के साथ इस बारे में आम जनता को सूचित किया जा सके। लेकिन, राजनीति में शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं है क्योंकि मैं अकादमिक क्षेत्र में हूँ।”

दरभंगा एयरपोर्ट पर आपका स्वागत है! बेंगलुरु से उतरा पहला यात्री विमान, भावुक मिथिला वासियों ने बजाई तालियाँ

बिहार के दरभंगा में एयरपोर्ट का स्वप्न अब साकार हो गया है क्योंकि यात्री विमान के उतरने के साथ ही इसका शुभारम्भ हो गया है। दीपावली और छठ से पहले बिहार को नई सौगात मिली है। ये पहला विमान है, जो दरभंगा एयरपोर्ट पर उतरा है। ये विमान रविवार (नवंबर 8, 2020) को सुबह 11:45 बजे जब दरभंगा एयरपोर्ट पर पहुँचा तो लोगों ने तालियों से उसका स्वागत किया। साथ ही विमान को ‘वाटर सैल्यूट’ भी दिया गया।

इसके साथ आज के दिन से ही दरभंगा से दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई के लिए तीन जोड़ी स्पाइस जेट की फ्लाइट शुरू हो गई है। प्रतिदिन ऑपरेट होनी वाली तीन जोड़ी फ्लाइट के लिए बुकिंग सितम्बर 20 से ही शुरू हो गई थी। इन तीन शहरों से यहाँ आवागमन करने वाले यात्रियों की संख्या ज्यादा है। हालाँकि, कोरोना काल में आए दीपावली और छठ के कारण उत्साह इस बार कम है। अब लोगों को पटना एयरपोर्ट पर उतरने की मजबूरी नहीं होगी।

मिथिलांचल के लोग दरभंगा या इसके आसपास के शहरों के हैं तो वो सीधे दरभंगा आ सकते हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन तीनों फ्लाइट के 8 नवंबर से शुरू होने की घोषणा दो महीने पहले पटना में की थी। दरभंगा एयरपोर्ट का एरिया 1,400 वर्गमीटर है और ये भारतीय वायुसेना के अंतर्गत आता है। हवाई अड्डे के 6 चेक-इन काउंटरों वाले अंतरिम टर्मिनल भवन का निर्माण पूरा हो चुका है।

बोइंग 737-800 जैसे विमानों के लिए अनुकूल दरभंगा एयरपोर्ट अपने टर्मिनल में व्यस्त समय में 100 यात्रियों को सँभालने की ताकत रखता है। ‘हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, पहली उड़ान बेंगलुरु से उड़ान भरकर 11:05 बजे दरभंगा एयरपोर्ट में लैंड करेगी। यही फ्लाइट दिल्ली के लिए 11:45 बजे दरभंगा से टेकऑफ करने के बाद दिल्ली 1:40 बजे दोपहर में पहुँचेगी। फिर ये दिल्ली से 2:20 में निकलेगी।

बिहार के जल संसाधन मंत्री और जदयू महासचिव संजय कुमार झा ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि तमाम आशंकाओं को पीछे छोड़ते हुए आज वह शुभ दिन आ गया, जब मिथिला से देश के प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ान का बड़ा सपना साकार होने जा रहा है। उन्होंने उन सभी लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने इसके लिए प्रयास किया था। साथ ही कहा, “दरभंगा एयरपोर्ट पर आपका स्वागत है।” उन्होंने कहा कि ये दिन उन्हें भावुक कर देने वाला है।

करीब तीन दशक से ऊपर से की जा रही दरभंगा एयरपोर्ट की माँग आखिरकार 2018 में सुनी गई थी, जब नए एयरपोर्ट का शिलान्यास हुआ। इसके बावजूद लोगों को, पिछले अनुभवों के कारण, कम ही भरोसा था कि सचमुच कभी एयरपोर्ट बनेगा। लेकिन करीब दो वर्षों में एयरपोर्ट का काम पूरा हो चुका है और अब यहाँ से स्पाइस जेट की तीन उड़ानें दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जाएँगी। मोदी सरकार ने बिहार वासियों से किया वादा पूरा किया।

‘मैं एर्दोआँ को सबक सिखाऊँगा, तुर्की को कीमत चुकानी पड़ेगी’ – जो बायडेन के वीडियो से लिबरलों को मिर्ची

जहाँ एक तरफ लिबरल जमात जो बायडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति चुने जाने से खुश है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आतंकवाद को लेकर अमेरिका के रुख में शायद ही कोई बदलाव आएगा। इसका कारण है दुनिया में नया खलीफा बनने चले तुर्की को लेकर उनका रुख। जो बायडेन ने तुर्की को लेकर कहा था कि वो एक ‘असली समस्या’ है और इसे लेकर वो उसे सख्त हिदायत जारी करते।

जो बायडेन ने कहा था कि वो तुर्की को सबक सिखाते, भले ही इसके लिए उन्हें ‘सिचुएशन रूम’ में हजारों घंटे ही क्यों न व्यतीत करना पड़े या फिर सीरिया या ईराक में स्थिति सुधारने के लिए क्यों न कुछ भी करना पड़े। चुनाव प्रचार के समय ही उन्होंने साफ़ कर दिया था कि वो तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआँ (Erdogan) से बात कर उन्हें चेता देते कि उन्होंने जो कुछ भी किया है, इसके लिए उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

इधर आर्मेनियन असेंबली ऑफ अमेरिका ने भी जो बायडेन को बधाई देते हुए माँग की है कि अमेरिका में अजरबैजान और तुर्की के प्रभाव को लेकर जाँच बिठाई जाए। उसने ISIS के साथ तुर्की के गठबंधन के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्र में अशांति के लिए तुर्की ही जिम्मेदार है और उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। अमेरिका में आर्मेनिया के नागरिकों ने भी तुर्की पर शिकंजा कसने की माँग की है।

वहीं अब तुर्की की राजधानी अंकारा में भी जो बायडेन को लेकर हलचल तेज हो गई है और तुर्की के नेता कह रहे हैं कि वो नए अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ संबंधों को ठीक करने के लिए सारी कोशिशें करेंगे। ‘ग्रीक सिटी टाइम्स’ ने अनुमान लगाया है कि ट्रम्प के साथ तो एर्दोआँ के मित्रता भरे थोड़े-बहुत रिश्ते भी थे, लेकिन अब तुर्की को आशंका है कि नए राष्ट्रपति नई शर्तें लेकर आएँगे, जिससे उसे खासी परेशानी होने वाली है।

तुर्की के विदेश मंत्री का भी कहना है कि डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उनके मुल्क के गंभीर रिश्ते थे और अब आगे चुनौती भरा समय होने वाला है। डोनाल्ड ट्रम्प ने तुर्की के खिलाफ लगे कुछ प्रतिबंधों को ढीला कर दिया था, जिन्हें फिर से वापस लाया जा सकता है। साथ ही मध्य-पूर्व में तुर्की के हस्तक्षेप को कम किया जाएगा। तुर्की के ही एक पत्रकार ने स्वीकार किया है कि अब अमेरिकी कॉन्ग्रेस उसके मुल्क के खिलाफ कार्रवाई करेगा।

बता दें कि तुर्की दक्षिण एशियाई देशों में अपना विस्तार करना चाहता है। लेकिन, दूसरी तरफ इस इलाके में सऊदी अरब का प्रभाव किसी से छुपा नहीं है। इसके लिए तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआँ और उनकी सरकार की तरफ से तमाम प्रयास जारी हैं। उसका नतीजा है कि तुर्की ने अपनी छवि बतौर एक रेडिकल इस्लामिक देश स्थापित कर ली है। जुलाई 2020 में तुर्की की सरकार ने बाईज़ानटाईन कैथेद्रल हगिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद में तब्दील कर दिया था।

मुख्तार अंसारी के नजदीकी मो. आजम ने खुद ही नष्ट कराया अपना होटल, 2 दिन पहले मिला था योगी प्रशासन से आदेश

उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों की लंबी फेहरिस्त है, जिनका बीते दशकों में राज्य के भीतर काफी खौफ़ रहा है लेकिन योगी सरकार में हालातों में काफी बदलाव हुआ है। अपराधियों की गिरफ्तारी से लेकर बाहुबलियों के अवैध निर्माण, योगी सरकार की इन सभी पर कार्रवाई जारी है। हाल ही में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी समेत कई बाहुबलियों के उत्तर प्रदेश में स्थित कई अवैध निर्माण ढहाए गए। इस कार्रवाई के प्रभाव से उपजा भय सामाजिक राजनीतिक गलियारों में स्पष्ट रूप से नज़र आ रहा है। विधायक मुख्तार अंसारी के नज़दीकी मोहम्मद आज़म ने अपना अवैध निर्माण खुद ही ध्वस्त करना शुरू कर दिया है।  

पिछले कुछ समय में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसार के कई अवैध निर्माण ढहाए गए, जो कि प्रदेश के अलग-अलग शहरों में स्थित थे। अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के तहत उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित रोजा क्षेत्र में डॉक्टर मोहम्मद आज़म के होटल पर भी कार्रवाई होनी थी। इस निर्माण के साथ खामी यह थी कि इसे मास्टर प्लान द्वारा तय मानक के आधार पर नहीं बनाया जा रहा था। 

इस बात की जानकारी मिलते ही मास्टर प्लान के अधिकारियों ने 2 दिन पहले इस अवैध निर्माण के संबंध में निर्देश जारी किया था। इसके बाद उन्होंने इस निर्माण के अवैध हिस्से को एक हफ्ते में गिराने का आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि ऐसा नहीं होने पर कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा की जाएगी। इसके बाद मोहम्मद आज़म ने खुद ही अपने अवैध निर्माण को नष्ट करना शुरू कर दिया।

केवल यही नहीं, इसके अलावा भी गाजीपुर जिला प्रशासन ने कई अन्य जगहों पर कार्रवाई की। गाजीपुर स्थित हमीद सेतु के नज़दीक निर्मित शम्मे हुसैनी अस्पताल पर भी प्रशासन ने बुलडोजर चलवाया। एडीएम की अगुवाई में हुई इस कार्रवाई के तहत 24 अक्टूबर को शम्मे हुसैनी अस्पताल गिराया गया था, इस अस्पताल के मालिक डॉ. आजम सिद्दीकी और डॉ. साजिद बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी माने जाते हैं। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस अस्पताल को लगभग 40 से 50 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया था। कुछ समय बाद उच्च न्यायालय ने इस कार्रवाई पर स्टे का आदेश भी जारी किया था लेकिन तब तक अस्पताल का 80 फ़ीसदी हिस्सा गिराया जा चुका था।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार माफ़ियाओं और बाहुबलियों पर कार्रवाई को लेकर काफी सक्रिय रही है। सरकार द्वारा ‘ऑपरेशन क्लीन’ और ‘ऑपरेशन नेस्तनाबूद’ चलाया जा रहा है, इसके तहत मुख्तार अंसारी के प्रदेश भर में स्थित अवैध निर्माण गिराए जा रहे हैं। इसके अलावा पिछले 4 महीनों से मुख्तार अंसारी की गैंग से जुड़े लोगों पर प्रशासन की कार्रवाई जारी है।     

ईशनिंदा पर पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने कुछ ‘ज्ञान’ दिया, UN Watch ने लगाई लताड़

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के रवैये और नज़रिए को लेकर अक्सर सार्वजनिक मंचों पर सवाल खड़े किए जाते हैं। चाहे वह पाकिस्तान के आंतरिक राजनीतिक और रक्षा संबंधी उतार-चढ़ाव हों या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि। ताज़ा मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के नज़रिए पर प्रश्न खड़े किए गए, जब उन्होंने ईशनिंदा को लेकर टिप्पणी की। टिप्पणी का स्वरूप कुछ ऐसा था, जिसकी बड़े पैमाने पर आलोचना हुई। 

पाकिस्तानी सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक बयान साझा किया गया। यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का था। ईशनिंदा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा था, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में ईशनिंदा अस्वीकार्य और असहनीय है।” ट्विटर पर पाकिस्तानी सरकार की तरफ से की गई इमरान खान की टिप्पणी को लेकर काफी प्रतिक्रिया आई। 

इसी बीच यूएन वॉच (UN Watch) ने भी इसका जवाब दिया। यूएन वॉच ने साफ़ शब्दों में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (U.N. Human Rights Council) में पाकिस्तान की मौजूदगी को ही असहनीय बता दिया। यूएन वॉच ने अपने ट्वीट में लिखा, “संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में आपकी (पाकिस्तान) की मौजूदगी ही असहनीय है।” यानी यूएन वॉच ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की साफ़ शब्दों में आलोचना की। 

दरअसल यूएन वॉच संयुक्त राष्ट्र का इकलौता मान्यता प्राप्त गैर सरकारी समूह (NGO) है, जो मानवाधिकार से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर निगरानी रखता है, मानवाधिकारों की रक्षा करता है और तानाशाही सरकारों का सामना करता है। यूएन वॉच ने इसके बाद चीन में उईगर समुदाय से जुड़े लोगों पर हो रहे अत्याचार पर पाकिस्तान के द्विआयामी रवैये की आलोचना करते हुए ट्वीट किया। 

इस ट्वीट में यूएन वॉच ने लिखा, “आप (पाकिस्तान) हिम्मत मत करिएगा खुद को मुस्लिमों का रक्षक बताने की क्योंकि पाकिस्तान की सरकार उईगर के साथ कैम्प में हो रहे जानवरों जैसे बर्ताव पर चीनी सरकार की सराहना करती है।” यूएन वॉच की तरफ से यह प्रतिक्रिया तब आई, जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के फोकल पर्सन (डिजिटल मीडिया प्रवक्ता) अर्सलान खालिद ने इस यूएन वॉच पर टिप्पणी की थी।          

‘मुझे और तजिंदर बग्गा को गिरफ्तार कर लिया गया है’: अर्णब के समर्थन में ‘सत्याग्रह’ करने पहुँचे कपिल मिश्रा का आरोप

दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा और प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने आरोप लगाया है कि राजघाट पर अर्णब गोस्वामी के समर्थन में विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर जानकारी दी कि उन्हें और तजिंदर बग्गा को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने ऐलान किया था कि वो उद्धव ठाकरे सरकार के अत्याचार के खिलाफ और अर्णब गोस्वामी की आज़ादी के लिए रविवार (नवंबर 8, 2020) की सुबह 9 बजे धरना देंगे

उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने राजघाट और उसके आसपास के इलाकों में धारा-144 लगा दी है। उन्होंने अपने इस विरोध प्रदर्शन को सत्याग्रह का नाम दिया था। वहीं तजिंदर बग्गा ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें और कपिल मिश्रा को गिरफ्तार कर के दिल्ली पुलिस राजेंद्र नगर थाने लेकर गई है। हालाँकि, अभी तक दिल्ली पुलिस की तरफ से इस सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा गया है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने इन दोनों के गिरफ्तार किए जाने के आरोपों के बाद विरोध दर्ज कराया और कहा कि उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी थी, बावजूद इसके ये कार्रवाई की गई। तजिंदर बग्गा ने कुछ लोगों ने ट्वीट्स को रीट्वीट किया, जिसमें कहा गया था कि महीनों तक सड़कों को जाम रखने की अनुमति तो है लेकिन शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की नहीं। वहीं ‘रिपब्लिक भारत’ के डिप्टी न्यूज़ एडिटर आशुतोष चतुर्वेदी का कहना है कि इन दोनों को हिरासत में लिया गया।

उधर अर्णब गोस्वामी ने जेल शिफ्ट किए जाते समय पुलिस वैन के भीतर से ही मीडिया से बात करते हुए बताया है कि उन्हें उनके वकीलों से भी बात नहीं करने दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह के 6 बजे जगा दिया गया और रविवार की सुबह उन्हें धक्का भी दिया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। अर्णब गोस्वामी ने महाराष्ट्र की मुंबई पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनकी जान को ख़तरा है।

‘मेरी जिंदगी खतरे में, वकीलों से भी बात नहीं करने दी जा रही’ – अर्णब गोस्वामी को तलोजा जेल ले गई महाराष्ट्र पुलिस

‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और मुख्य संपादक अर्णब गोस्वमी ने अपनी जान को खतरा बताया है। बुधवार (नवंबर 4, 2020) की सुबह उन्हें गिरफ्तार किया गया था। रविवार को अर्णब गोस्वामी को पुलिस द्वारा तलोजा तेल में शिफ्ट किया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इस मामले में सुनवाई की है और अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अर्णब गोस्वामी के प्रशंसकों को उम्मीद है कि अदालत से उन्हें राहत मिलेगी और वो रिहा होंगे।

अर्णब गोस्वामी ने जेल शिफ्ट किए जाते समय पुलिस वैन के भीतर से ही मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें उनके वकीलों से भी बात नहीं करने दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह के 6 बजे जगा दिया गया और रविवार की सुबह उन्हें धक्का भी दिया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। अर्णब गोस्वामी ने महाराष्ट्र की मुंबई पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे उसकी कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगता है।

अर्णब गोस्वामी ने ये भी खुलासा किया कि पुलिस उनसे कह रही है कि वो उन्हें उनके वकीलों से संपर्क ही नहीं करने देगी। उन्होंने कहा, “मेरी ज़िंदगी खतरे में है। मैं भारत की जनता को, पूरे देश की जनता को बताना चाहता हूँ कि मेरी जान खतरे में है।’ अर्णब गोस्वामी इससे पहले अलीबाग क्वारंटाइन सेंटर में जुडिशल कस्टडी में थे। अब सभी की नजरें सोमवार को आने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर टिकी हुई हैं।

अर्णब गोस्वामी मीडिया से बात कर ही रहे थे कि पुलिसकर्मियों ने आकर उन्हें रोक दिया और फिर वैन को आगे बढ़ा दिया। कोर्ट को दी गई अर्जी में अर्णब गोस्वामी ने बताया था कि गिरफ्तारी के दौरान और एक पुलिस वैन में अलीबाग में ट्रांसफर होने के दौरान पुलिस ने उन्हें जूते से मारा, पानी तक नहीं पीने दिया। अर्णब ने अपने हाथ में 6 इंच गहरा घाव होने, रीढ़ की हड्डी और नस में चोट होने का दावा भी किया है। उनका कहना है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के वक्त जूते पहनने तक का समय नहीं दिया।

‘तिरंगा नहीं उठाएँगे, कश्मीर पर चीन का शासन करवाएँगे’… देश तोड़ने की बातें करने वाले सत्ता की मलाई देख अब लड़ेंगे चुनाव

जम्मू कश्मीर की दोनों प्रमुख स्थानीय राजनीतिक पार्टियाँ अजीबोगरीब बातें कर रही हैं। जहाँ उनके दोनों बड़े नेता चुनाव न लड़ने की बातें कर रहे हैं, वहीं उनकी पार्टियाँ साथ चुनाव लड़ने के लिए दमखम दिखा रही हैं। अब वहाँ पीपल्स फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (PFGD) ने जम्मू कश्मीर में होने वाले जिला विकास परिषद (DDC) के चुनाव साथ मिल कर लड़ने का निर्णय लिया है। वहीं उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती चुनाव नहीं लड़ेंगे।

जम्मू कश्मीर की प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी भी DDC का चुनाव लड़ेगी। बता दें कि PAGD में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, पीपल्स कॉन्फ्रेंस, आवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस, J&K पीपल्स मूवमेंट के साथ ही सीपीआई और सीपीएम भी शामिल हैं। इसका गठन अक्टूबर 15, 2020 को हुआ था। गठबंधन के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करेंगे। प्रवक्ता सज्जाद गनी लोन ने इस बात की जानकारी दी है।

पिछले साल अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद ये पहली बार है, जब जम्मू कश्मीर में हाल ही में खाली हुई पंचायत सीटों के साथ-साथ DDC का चुनाव करने का निर्णय लिया गया है। नवम्बर 28, 2020 को मतदान होना है। ऐसे में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व मंत्री आगा रुहुल्लाह मेंहदी का कहना है कि ये केंद्र सरकार का बिछाया ‘जाल’ है, ताकि जम्मू कश्मीर की पार्टियाँ चुनाव में हिंसा ले सकें। उन्होंने इन चुनावों और इसमें हिस्सा लेने का विरोध किया।

जम्मू कश्मीर में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर ने अपनी पार्टी को प्रदेश की सबसे पुरानी पार्टी बताते हुए कहा कि वो लोकतांत्रिक प्रक्रिया से कभी अलग नहीं रही है और भाजपा को किसी हाल में जीत कर दबदबा बनाने का रास्ता नहीं दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और जनसंख्या के हिसाब से उनकी कुछ चिंताएँ भी हैं। इस तरह से अब लगभग सभी प्रमुख पार्टियाँ आगामी चुनावों में हिस्सा ले रही हैं।

जहाँ फ़ारूक़ अब्दुल्ला कह रहे हैं कि जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को फिर से कायम करने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट ही उनकी एकमात्र उम्मीद बची है, वहीं उनके बेटे उमर अब्दुल्ला का कहना है कि जब तक ये केंद्र शासित प्रदेश बना रहेगा, तब तक वो व्यक्तिगत रूप से चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वो 6 वर्षों तक जिस ‘शक्तिशाली’ सदन के नेता रहे हैं, वो वहाँ सदस्य के रूप में नहीं जा सकते, क्योंकि उसे कमजोर कर दिया गया है।

जम्मू कश्मीर की एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती भी कह चुकी हैं कि जब तक जम्मू कश्मीर का पुराना संविधान और झंडा वापस नहीं आ जाता, तब तक वो न तो कोई चुनाव लड़ेंगी और न ही भारत का झंडा उठाएँगी। उन्होंने केंद्र सरकार के लिए ‘डकैत’ शब्द का प्रयोग भी किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस देश के संविधान की जगह अपना घोषणापत्र लाना चाहती है। उन्होंने कहा था कि अब उन जैसे नेताओं का इस आंदोलन में ‘खून देने का वक्त’ आ चुका है।

इसका मतलब साफ़ है कि जहाँ अब्दुल्ला और मुफ़्ती परिवार के लोग खुद किसी भी चुनाव में हिस्सा न लेकर प्रतीकात्मक विरोध भी दर्ज कराना चाह रहे हैं, ताकि लोगों को लगे कि वो अनुच्छेद-370 को भूले नहीं हैं और सब कुछ सामान्य नहीं हुआ है, लेकिन दूसरी तरफ उनकी पार्टियाँ पूरी ताकत से चुनाव लड़ती रहेंगी, क्योंकि उन्हें भाजपा को रोकना है और सत्ता की मलाई भी चाभनी है। वो दोनों तरफ से रहना चाहते हैं।

जम्मू कश्मीर में कट्टरवादियों की नजर में आतंकवादियों और अलगाववादियों की तरह उन्हें भी प्रदेश का ‘सच्चा हिमायती’ समझा जाए, इसीलिए सीनियर अब्दुल्ला चीन को इधर आकर जम्मू-कश्मीर को अपने में मिला लेने का देश-विरोधी आइडिया आता है और मुफ़्ती परिवार भारत और भारत के झंडे के खिलाफ बयान तो दे रहा है, लेकिन साथ ही भारत के संविधान और सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा भी जता रहा है। ये दल फ़िलहाल कन्फ्यूजन की स्थिति में हैं। चुनाव नहीं लड़े तो सत्ता जाएगी और चुनाव लड़े तो कट्टरपंथियों की नजरों में गिरेंगे।

कुछ ही दिनों पहले ‘पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन’ ने डॉ फारूक अब्दुल्ला को अपना अध्यक्ष और महबूबा मुफ्ती को 6 पार्टी समूह का उपाध्यक्ष घोषित किया था। यह निर्णय पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के गुपकार रोड पर स्थित निवास पर आयोजित अलायंस में शामिल घाटी के शीर्ष नेताओं की दो घंटे तक चली बैठक में लिया गया था। सज्जाद लोन को गठबंधन का प्रवक्ता बनाया गया है।

बिहार-अमेरिका की खबरों के बीच UP चुनाव में CM योगी ने किया BJP का झंडा बुलंद, कॉन्ग्रेस का सफाया

बीते दिन (7 नवंबर 2020) को बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान पूरे हुए। इसके बाद सामने आए एग्जिट पोल्स में एनडीए (भाजपा-जदयू) को बहुत अच्छे संकेत नहीं मिले हैं लेकिन इस दौरान उत्तर प्रदेश की 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी हुए थे। इन 7 सीटों पर हुए उपचुनाव के एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती हुई नज़र आ रही है। इंडिया टुडे एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल में भाजपा पूरी तरह विजेता नज़र आ रही है। 

इस एग्जिट पोल के अनुसार भारतीय जनता पार्टी को 37 फ़ीसदी तक मतदान मिल सकते हैं। वहीं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी को 27 फ़ीसदी मतदान मिल सकता है। इसके अलावा मायावती की बहुजन समाज पार्टी को 20 फ़ीसदी और 6 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले कॉन्ग्रेस को सिर्फ 8 फ़ीसदी मतदान मिलने के आसार जताए गए हैं।   

सीटों की संख्या को लेकर बात करें तो इंडिया टुडे एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा को 5 से 6 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। समाजवादी पार्टी को एक या दो सीट और बसपा और कॉन्ग्रेस को शून्य सीट मिलने की संभावना जताई गई है। उत्तर प्रदेश की इन 7 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 3 नवंबर को मतदान हुआ था। उत्तर प्रदेश की इन खाली सीटों पर हुए उपचुनावों का परिणाम 10 नवंबर को आएगा। 

इसी एग्जिट पोल के आधार पर अन्य राज्यों में हुए उपचुनावों के नतीजों को लेकर भी अनुमान लगाया गया। गुजरात में भी 8 सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा के लिए अच्छे संकेत सामने आ रहे हैं। इंडिया टुडे के एग्जिट पोल्स की मानें तो गुजरात में भाजपा 49 फ़ीसदी मतों के साथ लगभग 6 से 7 सीटें जीत सकती है। 

वहीं कॉन्ग्रेस की हालत गुजरात में भी बहुत दयनीय ही बनी हुई है, 40 फ़ीसदी मतदान के साथ कॉन्ग्रेस के हिस्से में सिर्फ एक सीट आने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि इसी एग्जिट पोल के अनुसार यह भी हो सकता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी का गुजरात में खाता ही न खुले। ठीक इसी तरह एग्जिट पोल्स के मुताबिक़ राज्य के अन्य राजनीतिक दल 11 फ़ीसदी मतदान हिस्सेदारी के साथ अपना खाता नहीं खोल पाएँगे।       

वहीं मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर हुए उपचुनाव परिणाम में भी भाजपा की स्थिति काफी बेहतर नज़र आ रही है। इंडिया टुडे के एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा 16 से 18 सीट तक जीत सकती है वहीं कॉन्ग्रेस के हिस्से में सिर्फ 10 से 12 सीट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी को मध्य प्रदेश के उपचुनाव में सिर्फ एक सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है।