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दाऊद का खास गुर्गा CM योगी की रडार पर: अबू सलेम और उसके करीबियों की अवैध सम्पत्तियों की यूपी पुलिस बना रही लिस्ट

उत्तर प्रदेश में गुजरे वक्त में अपराध का खौफ कायम करने वाले माफिया गैंग और उनके सरगनाओं पर योगी सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है। अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी के बाद अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का खास साथी रहा अबू सलेम भी योगी सरकार के निशाने पर आ चुका है जो फिलहाल जेल में बंद है। पिछली सरकारों में मौज उठा रहे इन बाहुबलियों में अब योगी का खौफ साफ नजर आने लगा है।

यूपी प्रशासन अबू सलेम के भाई अबू जैश की अवैध संपत्तियों की लिस्ट बना रही है। पुलिस अभी इस मामले में अतिरिक्त जानकारी देने से बच रहीं है। कहा जा रहा है कि जिस तरह योगी सरकार ने माफिया मुख्तार और अतीक अंसारी के नाते रिश्तेदारों की करोड़ो की अवैध सम्पत्तियों को नष्ट किया है, उसी तरह अब अबू सलेम का नंबर भी जल्द लगाया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अबू सलेम की आर्थिक ताकत पर चोट पहुँचाने के लिए उसके भाई और करीबियों की संपत्ति का ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण और पुलिस ने डॉन अबू सलेम के करीबियों की सपंत्तियों के दस्तावेज, उनकी कानूनी वैद्यता आदि की जाँच शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अबू जैश के कब्जे की करोड़ों की जमीनों को लेकर प्रशासन को जानकारी मिली है। इन जमीनों मे कई सरकारी जमीनें भी शामिल हैं। पुलिस को लखनऊ में सप्रू मार्ग पर रेस्टोरेंट, मानक नगर में प्लॉटिंग की जानकारी मिली है। इसके अलावा लखनऊ के सर्वोदय नगर, ठाकुरगंज में करोड़ों की प्लॉटिंग की भी जानकारी मिली है। बताया गया है कि फैजाबाद रोड पर अवैध रूप से गेस्ट हाउस और होटल चलाया जा रहा है।

बता दें अबू सलेम का फर्जी पासपोर्ट बनवाने में उसके भाई ने मदद की थी। पुलिस अफसरों का कहना है कि संपत्ति की जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। मुख्तार अंसारी गैंग के खिलाफ कार्रवाई के दौरान ही कुछ लोगों ने पुलिस कमिश्नर से अबू सलेम के एक भाई की कई सम्पत्तियों का ब्योरा बताते हुए शिकायतें की थी। इसके बाद ही पुलिस जेल में बंद माफिया पर नकेल कसना शुरू कर दिया।

ईसा खान के ₹20 करोड़ की अवैध संपत्ति के साथ मेराज के घर पर भी चला बुलडोजर: अंसारी गिरोह पर CM योगी का वार

उत्तर प्रदेश में समस्त अवैध निर्माणों तथा संपत्तियों पर योगी सरकार की पैनी नज़र बनी हुई है। हाल ही में गाजीपुर के माफिया मुख्तार अंसारी के होटल गजल पर कार्रवाई करते हुए उसे ध्वस्त किया गया था। अब अवैध निर्माणों के मामले पर कार्रवाई तेज़ करते हुए प्रशासन ने वाराणसी में अंसारी गैंग के मेराज़ तथा मऊ में ईसा खान के गैर कानूनी इमारतों पर बुलडोज़र चलवा दिया है

मेराज़ अहमद की अवैध इमारत को ध्वस्त करता वीडीए का बुलडोजर, साभार: दैनिक भास्कर

मेराज़ अहमद, मुख्तार अंसारी के अंतरप्रांतीय गिरोह का सहयोगी तथा जैतपुरा थाना अंतर्गत अशोक कॉलोनी का रहने वाला है। उस पर फ़र्ज़ी कागज़ात के जरिए हथियारों का लाइसेंस बनवाने तथा उनके नवीनीकरण का आरोप है। उसने कुछ दिन पहले ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। उसके खिलाफ़ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 470, 471, 216 तथा 120बी के तहत कई मुकदमे चल रहे हैं।

मेराज़ अहमद का अवैध मकान, साभार: लाइव हिन्दुस्तान

मेराज़ ने अशोक विहार कॉलोनी स्थित अपने मकान के पिछले हिस्से में एक अवैध निर्माण करवा रखा था, जिसके लिए उसे 2 महीने पहले ही वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) द्वारा नोटिस भी जारी किया गया था।

नोटिस पर कोई संज्ञान न लिए जाने तथा अवैध इमारत के ज्यों के त्यों रहने के कारण वीडीए ने स्वयं कार्रवाई करते हुए उसे ध्वस्त करवाया। ध्वस्तीकरण के दौरान वीडीए की टीम तथा सीओ चेतगंज संतोष कुमार मीणा, इंस्पेक्टर जैतपुरा शशि भूषण राय सहित भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।

मेराज़ अहमद के पेरिस प्लाज़ा को ध्वस्त करता वीडीए का बुलडोजर, साभार: न्यूज़ ट्री

ईसा खान की 20 करोड़ रुपए की संपत्ति पर हुई कार्रवाई

दूसरी ओर, मऊ में गाज़ीपुर तिराहे पर अंसारी गैंग के एक और माफिया ईसा खान की अवैध इमारत को गिरवाया गया। आरोपों के अनुसार पेरिस प्लाज़ा नामक यह अवैध तीन मंजिला इमारत सरकारी आईटीआई की ज़मीन पर बिना वैध नक्शे के बनी थी। इसकी कीमत 20 करोड़ रुपए थी।

इसके संबंध में वर्ष 2004 से मुकदमा विचाराधीन था जिसमें पिछली 27 अगस्त को ध्वस्तीकरण का आदेश पारित हुआ था। बाद में इसके खिलाफ दाखिल अपील भी खारिज हो गई और आज ध्वस्तीकरण की कार्यवाई की गई। इमारत ध्वस्त करने के समय पर भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती रही। ध्वस्तीकरण से पहले ही प्लाजा सील कर दिया गया था।

अपर पुलिस अधीक्षक त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने बताया कि मुख़्तार अंसारी गिरोह के सदस्य ईसा खान की 20 करोड़ रुपए की संपत्ति को जिलाधिकारी के आदेश पर व्यापक पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्त कर दिया गया।

अंसारी का टूटा ‘ताज महल’

उल्लेखनीय है कि इससे पहले माफिया विधायक मुख्तार अंसारी के अवैध साम्राज्य पर सबसे गहरी चोट करते हुए उसके ‘ताज महल’ गजल होटल को तोड़ा गया था। गाजीपुर के गजल होटल को रविवार (नवंबर 1, 2020) की सुबह ध्वस्त किया गया था। ये मुख़्तार अंसारी की बीवी और बेटों के नाम पर पंजीकृत था।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियंत्रक प्राधिकारी बोर्ड विनियमित क्षेत्र गाजीपुर ने शनिवार को गजल होटल के मालिक अब्बास अंसारी व उमर अंसारी की अपील खारिज कर दी थी। ये दोनों मऊ से 5वीं बार विधायक चुने गए मुख़्तार अंसारी के बेटे हैं।

मिथिला के कवि कोकिल विद्यापति की जन्मस्थली उपेक्षित | Vidyapati’s Bisfi ignored, in bad shape

मैथिल लोग जहाँ भी होते हैं, विद्यापति को अपनी धरोहर मान कर स्नेहपूर्वक उनकी बातें करते हैं, लेकिन उनके जन्मस्थल बिस्फी की उपेक्षा पर चर्चा नहीं होती।

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

वीडियो: ट्रैफिक के कारण धीरे चल रही थी एंबुलेंस, मरीज की गंभीर हालत देख पुलिसकर्मी ने 2km भागकर खाली कराई रोड

सोशल मीडिया पर कभी-कभी ऐसी वीडियोज देखने को मिल जाती हैं जिनके कारण किसी का भी दिल खुश हो जाए। आज ऐसी ही एक वीडियो हैदराबाद से सामने आई है। इस वीडियो में एक ट्रैफिक पुलिस को सड़क पर भागते देखा जा सकता है।

यह वीडियो किसी साधारण स्थिति की नहीं है। वीडियो में नजर आ रहा पुलिसकर्मी सड़क पर लगे ट्रैफिक को खाली करवा कर एक एंबुलेंस के लिए रास्ता बनवा रहा है।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने मरीज को लेकर अस्पताल जाती एंबुलेंस को रास्ता दिलवाने के लिए करीब 2 किलोमीटर तक ऐसे ही दौड़ लगाई। इस बीच किसी ने उनकी वीडियो बना ली और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी।

वीडियो को देखने के बाद न केवल नेटिजन्स ने बल्कि हैदराबाद ट्रैफिक पुलिस ने भी इस निष्ठा को सलाम किया। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) अनिल कुमार ने लिखा, “HTP अधिकारी बबजी एंबुलेंस के लिए ट्रैफिक क्लियर करवा रहे हैं। शाबाश। नागरिकों की सेवा में हैदराबाद ट्रैफिक पुलिस।”

वीडियो से संबंधित जानकारी के अनुसार, बबजी ने जिस एंबुलेंस के लिए रास्ता खाली करवाया उसमें एक गंभीर हालत का मरीज था। ये एंबुलेंस अबिड्स से कोटी जा रही थी। जब ड्यूटी पर तैनात बबजी ने देखा कि ट्रैफिक के कारण वह काफी धीरे-धीरे जा रही है तो उन्होंने आगे आकर रास्ता बनवाया।

यह घटना वैसे सोमवार की है मगर वीडियो बुधवार को वायरल होनी शुरू हुई। लोगों ने इस वीडियो को देखकर बबजी को खूब सराहा। लोगों ने कहा कि एक पुलिसकर्मी के कारण पूरे देश के पुलिसकर्मियों के लिए अब मानक बन गए हैं। उन्हें उनकी इंसानियत के लिए सराहा जाना चाहिए। एक यूजर ने वीडियो अपलोड करके दावा किया कि बबजी को उनके कार्य के लिए आज सम्मानित भी किया गया।

आईपीएस दीपांशु काबरा ने लिखा,”आपकी मदद के लिए खाकी मीलों दौड़ जाएगी, पर कभी थमेगी नहीं।” आगे वह लिखते हैं, “हैदराबाद का पुलिसकर्मी एंबुलेंस की मदद के लिए कुछ मील के लिए दौड़ा। आशा करता हूँ कि मरीज अब ठीक होगा। भारत इस सच्चे समर्पण और सेवा को सैल्यूट करता है।”

आरिफ मसूद पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मामला दर्ज: कॉन्ग्रेस MLA के अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के इकबाल मैदान में फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ बीजेपी की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने शिकंजा कस दिया है। आरिफ मसूद के खिलाफ जहाँ मामला दर्ज किया गया है, वहीं स्‍थानीय प्रशासन ने गुरुवार को सुबह मसूद के कॉलेज के करीब अतिक्रमण कर बनाए अवैध निर्माण को ढहा दिया है। प्रशासन द्वारा करीब तीन घंटे चले इस अतिक्रमण में बुलडोजर से अलग-अलग जगह स्थित सीढ़ी, बाथरूम आदि तोड़े गए हैं।

पिछले दिनों राजधानी के इकबाल मैदान में कॉन्ग्रेस विधायक की अगुवाई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रो के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था। इस मामले में स्थानीय पुलिस ने विधायक आरिफ मसूद समेत 7 के खिलाफ बुधवार रात को धार्मिक भावना भड़काने का मामला दर्ज किया। वहीं, अब प्रशासन ने बड़े तालाब के करीब खानूगाँव क्षेत्र में अतिक्रमण कर बनाई गई इमारत के हिस्से को ढहा दिया है। यह विधायक मसूद के महाविद्यालय के परिसर में है।

कथिततौर पर भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद पर आरोप है कि उन्होंने भीड़ इकट्‌ठा कर भोपाल के इकबाल मैदान में फ्रांस का झंडा और वहाँ के राष्ट्रपति का पुतला जलाया था। मसूद ने केंद्र और राज्य सरकारों पर कथित तौर पर ‘हिंदूवादी’ कहते हुए हमला किया था और उन पर फ्रांसीसी सरकार का समर्थन करने का आरोप लगाया था।

मसूद ने आक्रामक तरीके से अपने भाषण में कहा कि केंद्र और राज्य की हिंदूवादी सरकार के मंत्री भी फ्रांस की हरकत का समर्थन कर रहे हैं। हम फ्रांस के साथ हिंदुस्तान की सरकार को भी चेतावनी देते हैं कि यदि सरकार ने फ्रांस का विरोध नहीं किया तो हम हिंदुस्तान में भी ईंट से ईंट बजा देंगे। जिस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सिर्फ धारा 144 के उल्लंघन का मामला दर्ज किया था। फिर बाद में अन्य मामलों ओर FIR की गई।

भोपाल आईजी उपेंद्र जैन ने एएनआई को बताया, “कॉन्ग्रेस विधायक मसूद और छह अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए के तहत गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है।” बता दें कि पिछले महीने एक कट्टरपंथी द्वारा फ्रांस में एक शिक्षक की हत्या के बाद शहर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।

राँची के रंगरेज गली में अराजक तत्वों ने तोड़ा शिवलिंग: बाजार बंद कर सड़क पर उतरे हिन्दू, कार्रवाई की माँग

झारखंड की राजधानी राँची के अपर बाजार की रंगरेज गली में स्थित मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। अराजक तत्वों ने यहाँ मंदिर में बने शिवलिंग को ही पूरा उखाड़ दिया। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें भी शेयर की जा रही हैं।

आज सुबह जब स्थानीय लोगों को इस घटना की जानकारी हुई तो सब मौके पर जुटे और पुलिस को सूचित किया। अब पुलिस मामले में आगे अपनी जाँच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज भी खँगाले जा रहे हैं। आरोपितों का पता लगाने का प्रयास हो रहा है।

घटना के बाद से लोगों में इसे लेकर काफी गुस्सा है। स्थानीय लोगों ने आक्रोश जाहिर करने के लिए आज अपर बाजार की सभी दुकानें भी बंद रखीं। हिंदूवादी संगठन से जुड़े कार्यकर्ता भी सड़कों पर आए और प्रदर्शन किया। इन सबकी यही माँग है कि मंदिर के शिवलिंग को तोड़ने वालों की गिरफ्तारी जल्द से जल्द हो।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग कोनों में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की कई घटनाएँ सामने आई है। पिछले दिनों हरियाणा के मेवात में ऐसी ही घटना घटी थी। वहाँ नवरात्रि के तीसरे दिन ही दुर्गा माता की मूर्ति को उखाड़ लिया गया था। घटना की बाद की तस्वीरों में हमें सिर्फ़ शेर के पंजे नजर आए थे।

वहाँ के स्थानीयों ने तो मूर्ति टूटने पर यही आरोप लगाया था कि पहले भी इस तरह की घटनाएँ होती आई हैं और इस बार भी उन्हें शक है कि मंदिर से कुछ दूरी पर बने मदरसे के मौलवी के इशारों पर यह काम किया गया।

ऐसे ही आँध्र प्रदेश में पिछले दिनों मंदिरों पर हमले के कई मामले सामने आए थे। खबरों से पता चला कि प्रदेश में हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँचाने के लिए कहीं अराजक तत्वों ने भगवान की मूर्तियों को तोड़़ा और कहीं रथों में आग लगाई।

इसी प्रकार कश्मीर में भी पिछले दिनों एक शिव मंदिर को ध्वस्त किया गया था। इसी शिव मंदिर में कुछ साल पहले शिवलिंग के टुकड़े-टुकड़े किए जाने की घटना सामने आई थी।

स्थानीय लोगों ने ट्विटर पर इस संबंध में लिखा था, “कुछ साल पहले यहाँ पर शिवलिंग को तोड़ दिया गया था, लेकिन हमारी आस्था देखिए, हम ये सोचकर खुश थे कि कम से कम ढाँचा तो है, मगर इस बार मंदिर को ही धराशायी कर दिया गया। आशा है कि किसी दिन हम इस मंदिर में वापस जाएँगे और प्रार्थना करेंगे। यह दुखद और भयावह है।”

14 दिनों के न्यायिक हिरासत में अर्णब गोस्वामी को रखा गया इस क्वारंटाइन सेंटर में: देखें वीडियो

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को मुंबई और अलीबाग पुलिस ने 4 नवंबर, 2020 को उनके घर से घसीटते और मारते पीटते हुए गिरफ्तार किया। अर्णब की गिरफ्तारी बुधवार सुबह हथियारों से लैस कई पुलिस अधिकारी, एनकाउंटर कॉप और शिवसेना के पूर्व सदस्य सचिन वेज के नेतृत्व में उनके घर में जबरन घुसकर की गई थी।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उन्हें अलीबाग के एक पुलिस स्टेशन में रखा और फिर उन्हें मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। जहाँ अदालत ने पुलिस कार्रवाई पर तीखी टिप्पणी करते हुए अर्नब गोस्वामी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस पूरी कार्यवाही को वकीलों की जीत के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि मुंबई पुलिस अर्णब के लिए 14 दिनों की पुलिस हिरासत की माँग कर रही थी।

मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा की गई टिप्पणियाँ इस प्रकार हैं:

  • ◆अदालत की मंजूरी के बिना मुंबई पुलिस द्वारा 2018 का आत्महत्या का मामला खोला गया।
  • ◆मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने देखा कि अर्नब को गिरफ्तार किए जाने के मामले और आत्महत्या के केस में कोई संबंध नहीं था। केस को पहले 2018 में बंद कर दिया गया था और अब फिर से खोला गया। जिसमें अर्णब गोस्वामी की भूमिका बताई जा रही है।
  • ◆फैसला सुनाने के दौरान CJM ने यह भी देखा कि पुलिस हिरासत के लिए कोई ‘उचित आधार’ नहीं है।

अर्णब को रखा गया इस क्वारंटाइन सेंटर में

अलीबाग में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अर्णब गोस्वामी की न्यायिक हिरासत मंजूर करने के बाद, उन्हें क्षेत्र के एक क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है।

क्वारंटाइन सेंटर की तस्वीर

मजिस्ट्रेट के अनुसार, अर्णब गोस्वामी को इस जगह 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया गया है।

हालाँकि, उच्च न्यायालय ने अर्णब गोस्वामी को आज अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। साथ ही सुनवाई को कल के लिए टाल दिया गया है। कल अदालत गोस्वामी के वकीलों की याचिका पर सुनवाई करेगी ताकि उन्हें राहत प्रदान की जा सके और उन्हें हिरासत से मुक्त किया जा सके।

गौरतलब है कि ऑपइंडिया हिंदी के संपादक को दिए एक साक्षात्कार में, सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने रिपब्लिक टीवी के खिलाफ मुंबई पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की थी। मंत्री ने कहा, “मुंबई पुलिस जो कर रही है, उसका कोई भी समर्थन नहीं करेगा।” मुंबई पुलिस ने इंडिया टुडे के नाम पर दर्ज एफआईआर के आधार पर टीआरपी घोटाले में रिपब्लिक टीवी को फर्जी फँसाया था।

बता दें पुलिस ने टीआरपी घोटाले में कथित तौर पर रिपब्लिक टीवी का नाम लेने के लिए गवाहों के साथ जबरदस्ती की थी। मुंबई पुलिस ने चैनल के सभी वित्तीय लेनदेन का विवरण भी माँगा था। वहीं जब अपने सारे करतूतों में मुंबई पुलिस नाकाम हो गई तो उन्होंने कब अर्णब को फँसाने के लिए 2018 में बंद कर दिए एक केस का सहारा लिया है।

बिकरू कांड: SIT ने सौंपी 3200 पन्नों की रिपोर्ट, 75 अधिकारियों के खिलाफ की कार्रवाई की सिफारिश

कानपुर के बिकरू कांड पर एसआईटी ने बुधवार (नवंबर 4, 2020) को अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। यह रिपोर्ट 3200 पन्नों की है। इसमें विशेष जाँच टीम ने अधिकारियों व कर्मचारियों को मिलाकर कुल 75 लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट के निष्कर्ष में पुलिस की गंभीर चूक सामने आई है। अब आगे प्रशासन इस रिपोर्ट पर विचार करेगा।

मीडिया खबरों के अनुसार, इस पूरे मामले में अपर मुख्य सचिव संजय आर भूसरेड्डी की अध्यक्षता में गठित SIT द्वारा काफी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है। टीम को कुल 9 बिन्दुओं पर जाँच करके अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया था।

खबरों में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जिन 75 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है, उनमें से 60 फीसदी पुलिस विभाग के ही हैं। बाकी 40 प्रतिशत प्रशासन, राजस्व, खाद्य एवं रसद तथा अन्य विभागों के हैं।

कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आरोपितों को बर्खास्त करने का फैसला ले सकती है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि कैसे पुलिसवाले विकास दुबे को थाने में चल रही हर गतिविधि के बारे में पहले से ही बताते रहते थे। घटना वाले दिन भी पुलिसवालों की दबिश के बारे में पहले से ही विकास को सब कुछ बता दिया था।

बाद में विकास दुबे ने उसी जानकारी को पाकर असलहे और गुंडों को तैयार किया व पुलिस के पहुँचते ही उन पर हमला बोल दिया। इस पूरी घटना में विकास दुबे तो मौके से फरार हो गया मगर 8 पुलिसकर्मियों को बेरहमी से मार दिया गया।

पूरी घटना की बाबत बीती 11 जुलाई को अपर मुख्य सचिव संजय भुसरेड्डी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन हुआ। इसमें अपर पुलिस महानिदेशक हरिराम शर्मा व पुलिस उप महानिरीक्षक जे रवींद्र गौड़ को सदस्य नामित किया गया था।

गठन के समय ही सरकार ने एसआईटी को जाँच पूरी कर 31 जुलाई तक रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा था। लेकिन निर्धारित समय सीमा तक जाँच पूरी नहीं हो सकी थी और एसआईटी के आग्रह पर जाँच की अवधि को कई बार बढ़ाया गया।

शासन ने एसआईटी से मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे, उसके परिवार, उसके करीबी, रिश्तेदार व गैंग के सदस्यों को मिलाकर कुल 57 लोगों की संपत्तियों और उनके ठेकों और शस्त्र लाइसेंस के संबंध में जानकारी माँगी थी। 

‘तेज रफ्तार’ पर राष्ट्रवाद भारी, बिहार की बाज़ी एनडीए ने पलटी

तेज रफ्तार, तेजस्वी सरकार। यह राजद के नेतृत्व वाले गठबंधन का नारा है। इसी गठबंधन का वादा है कि सरकार बनते ही 10 लाख सरकारी नौकरी मिलेगी। इसे कई राजनीतिक विश्लेषक मास्टरस्ट्रोक भी मानते हैं।

पहला चरण: नीतीश कुमार से नाराजगी पड़ी भारी

28 अक्टूबर को बिहार विधानसभा की 71 सीटों पर वोट डाले गए थे। ये सीटें राजद के दबदबे वाली मानी जाती हैं। हालाँकि, 2010 में जब बीजेपी और जदयू साथ थे तो उन्हें इन 71 सीटों में 61 पर जीत मिली थी। 2015 में जदयू जब राजद के साथ चली गई तो महागठबंधन को 53 सीटें मिली और तत्कालीन एनडीए केवल 14 सीटों पर सिमट गई थी।

यानी, इन सीटों पर जदयू जिधर होती है, पलड़ा उधर झुक जाता है। लेकिन, इस बार इन सीटों पर नीतीश कुमार को लेकर भारी नाराजगी साफ दिख रही थी। बालू खनन बंद होने से भी लोग नाराज थे। पलायन और रोजगार बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा था। लोजपा के अलग होने से कागजों पर भी एनडीए के समीकरण उलझे हुए थे। 71 में से 42 सीटों पर लोजपा ने उम्मीदवार दिए थे। भोजपुर, बक्सर और मगध की कुछ सीटों पर विपक्षी गठबंधन को वामदलों के साथ होने का फायदा भी हो रहा था। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के ‘हम’ का साथ होना एनडीए के लिए इस तरह का कोई प्रभाव पैदा नहीं कर रहा था।

ऐसे माहौल में मतदान से ठीक पहले मुंगेर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं पर बल प्रयोग हुआ। इन सब फैक्टर का असर इन सीटों के मतदान पर भी दिखा। इन जगहों पर मतदान के बाद भी राजद के नेतृत्व वाला गठबंधन एनडीए पर भारी दिख रहा था। बीजेपी से जुड़े सूत्रों ने ऑपइंडिया को बताया कि उनके इंटरनल सर्वे में भी पहले चरण की 71 सीटों से मिले ​फीडबैक बेहद निराशाजनक हैं।

दूसरे चरण में पलटी बाजी

इस चरण में 3 नवंबर को 94 सीटों पर मतदान हुआ। पहले चरण के मतदान के बाद मिले फीडबैक के बाद एनडीए ने नए सिरे से रणनीतियों पर अमल करना शुरू किया। मुंगेर पर डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हुई। फ्रांस में इस्लामी कट्टरपंथी घटना और मथुरा की एक मंदिर में नमाज पढ़ने के मामले ने पलायन और रोजगार के चर्चे को नेपथ्य में धकेल दिया। विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई पर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के खुलासे ने भी मोदी सरकार की छवि मजबूत करने का काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभाओं के बाद राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, ईसाई धर्मांतरण जैसे मसले चर्चा के केंद्र में आ गए।

मसलन, मुस्लिम बहुल केवटी, बिस्फी और जाले के समीकरणों का प्रभाव मधुबनी और दरभंगा की सभी 20 विधानसभा सीटों पर हो रहा है। खासकर, जाले से कॉन्ग्रेस द्वारा मस्कूर अहमद उस्मानी को प्रत्याशी बनाने का मतदाताओं के बीच सही संदेश नहीं गया। इसके अलावा इन इलाकों में ओवैसी के चुनावी कार्यक्रमों ने भी एनडीए के पक्ष में मतदाताओं को गोलबंद करने में निर्णायक भूमिका निभाई। ये दोनों ऐसे जिले हैं जहाँ मजहबी कट्टरपंथ का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ‘दरभंगा मॉड्यूल’ तो राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा है। इसके अलावा ईसाई मिशनरियाँ भी प्रभाव बढ़ा रही हैं। भले धर्मांतरण को लेकर लोग फिलहाल उतने मुखर नहीं हैं, लेकिन मजहबी कट्टरपंथ के खतरे के खिलाफ यहाँ के लोग अब खुलकर बोलने लगे हैं।

इसका सीधा फायदा एनडीए खासकर बीजेपी को हो रहा है। इसने महादलितों और अतिपिछड़ों के बीच नीतीश कुमार के कमजोर होते आधार को भी रोकने का काम किया है। विपक्ष को कई सीटों पर पप्पू यादव की जाप और ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट (जिसमें उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, बसपा, समाजवादी जनता दल लोकतांत्रिक सहित 6 पार्टियाँ शामिल हैं) के उम्मीदवारों ने भी नुकसान पहुॅंचाया है।

इन सबका ही असर है कि ​कुछ दिन पहले तक जिन सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की हार तय लग रही थी, मतदान के बाद अब उनकी जीतने की चर्चा जमीन पर अचानक से होने लगी है।

तीसरा चरण निर्णायक

7 नवंबर को तीसरे और आखिरी चरण में 78 सीटों पर वोट डाले जाएँगे। इनमें ज्यादातर सीटें सीमांचल और कोसी की हैं। साथ ही तिरहुत और मिथिलांचल की बची हुई सीटों पर भी वोट डलेंगे। कोसी और सीमांचल की सीटों पर अल्पसंख्यक, महिला और प्रवासी वोटरों का सबसे ज्यादा असर होगा। सीमांचल की तो कई सीटों पर 50 फीसदी से ज्यादा अल्पसंख्यक वोटर हैं। पर एनडीए के लिए राहत की बात यह है कि इन सीटों पर ओवैसी फैक्टर के साथ-साथ हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का मुद्दा भी काम कर रहा है। इन 78 सीटों में से 58 ऐसी हैं, जहाँ पिछली बार पुरुषों से अधिक महिलाओं ने वोट डाला था। अच्छी बात यह है कि महिलाओं खासकर, ग्रामीणों महिलाओं के बीच नीतीश कुमार की लोकप्रियता अब भी बनी हुई है। इस चरण में भितरघात और बगावत भी कई सीटों पर विपक्ष का सिरदर्द है।

इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ गोलबंदी का ही असर है कि कई सीटों पर राजद का माई समीकरण भी अब दरकता दिख रहा है, जबकि शुरुआत में यह वर्ग राजद के पक्ष में काफी मुखर और लामबंद दिख रहा था। इनको लग रहा था कि सत्ता में प्रभाव में लौटने का यही मौका है और तेजस्वी यादव की ताजपोशी तय है। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा माहौल बदलने लगा। जैसा कि रतनपुर के विशेषचंद्र कुमार कहते हैं, “हिंदुत्व को मिटाने में सभी नेता लगा हुआ है। मुस्लिम जिस भी गाँव में है हिंदू की बहू-बेटी का इज्जत भी नहीं छोड़ रहा है। आतंकवादी, गुंडा को राज दीजिएगा तो वो क्या करेगा। वो औरंगजेब जैसा करेगा। सब जानते हैं कि मोदी जी के आने के बाद देश का, समाज का, सबका विकास हुआ है।”

असल में मतदाताओं पर मोदी का यही प्रभाव बिहार में एनडीए की उम्मीदों का पतवार है।

ममता सरकार का आ चुका है आखिरी समय, बंगाल में बनेगी 2/3 बहुमत से भाजपा की सरकार: गृहमंत्री अमित शाह

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा ने राज्य में अपनी ताल ठोक दी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह स्वयं इस समय प्रदेश के दौरे पर हैं। उन्होंने ममता सरकार के ख़िलाफ़ हुंकार भरते हुए जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने बंगाल की जनता से आज ही कह दिया है, “हमें एक मौका दें, हम बंगाल को सोनार बांग्ला बनाएँगे।”

केंद्रीय गृहमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ममता सरकार का अंत करीब आ चुका है। आने वाले दिनों में यहाँ पर सोनार बांग्ला की रचना करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भरसक प्रयास होंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में 2/3 बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनने जा रही है।

उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि बंगाल एक सीमावर्ती राज्य है और यहाँ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व युवाओं को रोजगार देने के लिए उन्हें ममता सरकार को भाजपा सरकार से बदलना होगा। वह इसे दोबारा सोनार बांग्ला बनाएँगे।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, “जिस प्रकार के दमन का चक्र, विशेषकर भाजपा के कार्यकर्ताओं पर ममता सरकार ने चलाया है, मैं निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि ममता सरकार का आखिरी समय आ गया है और आने वाले दिनों में यहाँ भाजपा की सरकार दो तिहाई बहुमत से बनने जा रही है।”

जनता के बीच में अमित शाह ने कहा, “बंगाल के युवाओं को नौकरी, बंगाल के गरीबों को गरीबी से बाहर निकालने के लिए ममता सरकार को उखाड़कर फेक दीजिए।” उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की 80 से अधिक योजनाएँ जिनसे गरीबों और पिछड़े वर्ग को फायदा हो, वो जरूरतमंदों को नहीं मिल रही है। इसलिए अब समय आ गया है बदलाव लाने का।

उल्लेखनीय है कि आज भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देकर केंद्रीय गृहमंत्री ने जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने बंगाल की नब्ज टटोलकर मीडिया में बयान दिया कि बंगाल में एक ओर ममता सरकार को लेकर भयंकर जनआक्रोष दिखाई पड़ता है तो वहीं दूसरी ओर नरेंद्र मोदी के प्रति एक आशा और श्रद्धा दिखाई पड़ती है। कोलकाता पहुँचने के बाद अमित शाह पूर्व मिदनापुर के पटासपुर के बीजेपी बूथ उपाध्यक्ष मदन घोराई के परिजनों से भी मिले और ट्विटर पर तस्वीरें भी साझा की।

अमित शाह के बयान आने के बाद टीएमसी सदस्यों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी लोकसभा सदस्य सौगता रॉय (Saugata Roy) मानना है कि अमित शाह दिन में सपने देख रहे हैं। उनका पूछना है कि अगर भाजपा बंगाल को सोनार बनाने में सक्षम है तो उन्होंने यूपी को क्यों नहीं बनाया। भाजपा अमीरों की पार्टी है। आदिवासी परिवार के घर में लंच करना सिर्फ़ ड्रामा है। यहाँ की जनता उन्हें कभी सत्ता में नहीं लाएगी।