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‘AAP सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य को मजाक बना दिया है, दिल्ली बन जाएगी देश की कोरोना कैपिटल’- HC

दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात है कि देश की राजधानी में कोरोना वायरस से पनपी महामारी की तीसरी लहर आ चुकी है। इसी के मद्देनजर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी इस मुद्दे को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि हालात ऐसे ही बने रहे तो बहुत जल्द दिल्ली पूरे देश की ‘कोरोना कैपिटल’ बन जाएगी। 

न्यायाधीश हिमा कोहली और सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने इस मुद्दे पर चिंता जारी करते हुए अपना नज़रिया पेश किया। पीठ ने कहा, “कोरोना महामारी दिल्ली की सरकार पर पूरी तरह हावी हो चुकी है। दिल्ली आम आदमी पार्टी सरकार यहाँ की जनता के स्वास्थ्य को हल्के में लिया अब उन्हें अलग से इसका सामना करना पड़ेगा। इस तरह के हालात दिल्ली की कार्यप्रणाली पर तमाम प्रश्न खड़े करते हैं।”

पीठ ने कटाक्ष करते हुए कहा कि दिल्ली की AAP सरकार ने नागरिकों के स्वास्थ्य का मजाक बनाकर रख दिया है और इस मामले से अलग से निपटा जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने टेस्टिंग के मामले में पहले नंबर पर आने के कई दावे किए हैं लेकिन मामलों की संख्या यहाँ सबसे अधिक है।

इसके बाद पीठ ने महामारी के विषय पर कहा, “सरकार इस बात को लेकर तमाम तरह के दावे करती है कि वह टेस्टिंग के मामले में सबसे आगे हैं लेकिन मामलों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से बढ़ोतरी हुई है। यह शहर बहुत जल्द देश का ‘कोरोना कैपिटल’ बन जाएगा। यह सब कुछ लगातार बढ़ते हुए मामलों की संख्या के चलते होगा। अब हमें इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेना होगा।” 

दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ ने यह टिप्पणी चिकित्सकों, पैरा मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मचारियों, शिक्षकों, अभियंताओं और उत्तरी दिल्ली नगरपालिका के तहत आने वाले कर्मचारियों के रुके हुए वेतन भुगतान के संबंध में दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी की। इसके पहले दिल्ली में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों पर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को खुद तीसरी लहर का डर सता रहा था। 

इस पर बयान देते हुए अरविन्द केजरीवाल ने कहा था, “दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। हम कह सकते हैं कि राजधानी में यह कोरोना महामारी की तीसरी लहर (Third wave) है। हम फ़िलहाल इस मुद्दे की पूरी तरह से निगरानी कर रहे हैं और इससे संबंधित हर ज़रूरी कदम उठाएंगे।”

बुधवार (4 नवंबर 2020) तक राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के कुल 6842 नए मामले सामने आए थे। इसके साथ दिल्ली में कोरोना महामारी से प्रभावित मरीजों की संख्या 4,09983 पहुँच गया था।

‘F*ck you fascist’: ट्रम्प के खिलाफ प्रदर्शन कर रही देविना सिंह ने न्यूयॉर्क पुलिसकर्मी के चेहरे पर थूका, गिरफ्तार

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव लगभग पूरे हो चुके हैं और जल्द ही तस्वीर भी साफ़ हो जाएगी। इसी बीच एक डोनाल्ड ट्रम्प के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक घटना में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक महिला ने न्यूयॉर्क पुलिस डिपार्टमेंट (NYPD) के अधिकारी पर अभद्र टिप्पणी करते हुए उसके चेहरे पर थूक दिया। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में बना हुआ है।

पुलिस अधिकारी को ‘फ़क यू फ़ासिस्ट कहकर’ गाली देने वाली और उस पर थूकने वाली इस युवती का नाम देविना सिंह है। 24 वर्षीय देविना सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एलिज़ाबेथ मर्लिन रोज़नर (Elizabeth Rosner) नाम की ट्विटर यूज़र द्वारा साझा किए गए वीडियो में पूरी घटना स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स  के मुताबिक़ यह घटना अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर स्थित वेस्ट विलेज क्षेत्र की है जहाँ भारी संख्या में लोग मौजूद थे। अमेरिका में हो रहे चुनाव के दौरान अपने अपने राजनीतिक दलों के समर्थन में उतरे तमाम लोगों में से एक महिला ने वहाँ मौजूद एक एनवाईपीडी अधिकारी से बेहद अभ्रद्रता पूर्वक तरीके से कहा, “f*ck you, fascist”।

पुलिस अधिकारी को अपशब्द कहने वाली महिला इतने पर ही नहीं रुकी। इसके बाद उसने चिल्लाते हुए एनवाईपीडी अधिकारी के चेहरे पर थूक दिया। इस पर अधिकारी महिला को पकड़ लेता है और उसे जमीन पर गिराकर उसे हथकड़ी लगाकर एक पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार करता है। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों और सुरक्षाबलों के बीच हाथापाई भी हुई और यह भी वीडियो में बेहद स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। 

इस घटना को ट्वीट करते हुए न्यूयॉर्क पुलिस डिपाटर्मेंट ने लिखा है कि इस तरह का बर्ताव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फ़िलहाल इस वीडियो को लेकर लाखों लोग दे चुके हैं और इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सिर्फ ट्विटर पर ही इस वीडियो को ख़बर लिखे जाने तक लगभग 22 लाख से अधिक लोग देख चुके थे।

अमेरिका में चुनाव परिणाम आने के ठीक पहले और चुनावी गतिविधियों के बीच इस तरह की तमाम घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। वहाँ के अलग अलग क्षेत्रों में आम लोग सड़कों पर अपने अपने राजनीतिक दलों के लिए सड़कों पर उतरे हुए हैं।

ईशनिंदा के आरोप में सिक्योरिटी गार्ड अहमद नवाज ने बैंक मैनेजर को मारी गोली: पाकिस्तानियों ने मनाया जश्न, देखें वीडियो

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जहाँ कथिततौर पर ईशनिंदा के आरोप में बैंक मैनेजर को गोली मारने वाले एक सिक्योरिटी गार्ड के अहमद नवाज समर्थन में उतरे पाकिस्तानी उसके साथ जश्न मनाते और उसका अभिवादन करते नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तानी एक्टिविस्ट राहत ऑस्टिन ने ख़ुशब की क़ैदाबाद तहसील में नेशनल बैंक ऑफ़ पाकिस्तान शाखा के एक मैनेजर को ईशनिंदा के आरोप में गोली मारने वाले सिक्योरिटी गार्ड अहमद नवाज का वीडियो शेयर किया है। वीडियो में अहमद एक भीड़ का नेतृत्व करते, नारे लगाते और हत्या का जश्न मनाते हुए सड़क पर दिखाई दे रहा है। इस प्रदर्शन के बीच एक व्यक्ति को भीड़ से निकलते और उसे चूमते हुए भी देखा जा सकता है।

एक अन्य वीडियो में आप देख सकते हैं कि भीड़ किस तरह हत्या के आरोपित को संरक्षण देते और हत्या के लिए उसे बधाई देती नजर आ रही है। भीड़ के साथ आरोपित मजहबी नारे लगाता है, जिसका अर्थ है “पैगंबर का अपमान करने वालों का सर कलम कर दो।”

एक अन्य वीडियो में गार्ड को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि मृतक प्रबंधक ने पैगम्बर का अपमान किया था।

गौरतलब है कि यह घटना 4 नवंबर (बुधवार) को ख़ुशब की तहसील क़ैदाबाद में हुई थी। बैंक शाखा में तैनात सुरक्षाकर्मी अहमद नवाज ने नेशनल बैंक ऑफ़ पाकिस्तान के अधिकारी मुहम्मद इमरान हनीफ को गोली मारकर घायल कर दिया था। नवाज ने कहा कि उन्होंने हनीफ को कथित ईशनिंदा करने के आरोप में खुलेआम गोली मार दी थी। हालाँकि, पाकिस्तानी पुलिस ने पुष्टि की कि कुछ दिनों से दोनों के आपसी विवाद चल रहा था। जिस वजह से घटना को अंजाम दिया गया।

वहीं जैसे ही सुरक्षा गॉर्ड को पुलिस हिरासत में ले रही थी, एक बड़ी संख्या में भीड़ उसके समर्थन में उतर आई और उसके पक्ष में नारे लगाते हुए दिखी।

पैगंबर मुहम्मद या उनके खिलाफ बोलना ईश निंदा माना जाता है, जिस पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने मासूम लोगों को मौत के घाट उतारने का काम किया है। बीते दिनों यह नजारा फ्रांस में देखने को मिला जब शिक्षक द्वारा पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाने पर उसका सर कलम कर दिया गया था।

वहीं पूर्व हिंदू महासभा के नेता और हिंदू समाज पार्टी के संस्थापक कमलेश तिवारी की हत्या और बेंगलुरु में हुए दंगों के पीछे की वजह भी यही थी। अक्सर असहज तथ्यों को बोलने की हिम्मत रखने वालों के खिलाफ नफरत और असहिष्णुता देखी ही जाती है।

अर्णब की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने भेजा रायगढ़ के SP को समन: माँगी पूरी जानकारी

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली से लेकर भोपाल तक में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार व मुंबई पुलिस की खुल कर आलोचना हो रही है। ऐसे में महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने रायगढ़ एसपी को कारण बताओ नोटिस भेज दिया है।

महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने रायगढ़ एसपी को नोटिस भेजकर कल सुबह उन्हें पेश होने को कहा है। साथ ही सारे सबूत आयोग के समक्ष पेश करने के आदेश भी दिए गए हैं।

बता दें कि वकील आदित्य मिश्रा ने अर्णब गोस्वामी की अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के समक्ष एक याचिका दायर की थी और मामले पर तत्काल विचार करने का आह्वान किया था।

इस पूरे मामले में रिपब्लिक टीवी ने कुछ देर पहले बताया है कि मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक के एग्जिक्यूटिव एडिटर निरंजन नारायणस्वामी को भी समन जारी किया है। वह अलीबाग में पिछले 24 घंटे से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उन्हें मुंबई पुलिस द्वारा अब तक चौथी बार समन भेजा गया है।

गौरतलब है कि अर्णब गोस्वामी को बुधवार को बिना समन जारी किए जबरदस्ती घर से उठाया गया था। कुछ पुलिस अधिकारी उनके घर पहुँचे थे और उनके साथ मारपीट करते हुए उन्हें एक पुराने केस में गिरफ्तार किया था।

इसके बाद अर्णब की कई वीडियोज सामने आई थी। वीडियो में उनके शरीर पर मारपीट के निशान साफ नजर आए थे, जिसे देख जगह-जगह मुंबई पुलिस के रवैये की आलोचना हुई थी।

देर रात तक अदालत की सुनवाई चलने के बाद अर्णब को कल 18 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया जबकि मुंबई पुलिस लगातार 14 दिन की हिरासत का अनुरोध कर रही थी। अदालत ने पुलिस से कहा कि हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है।

दूसरी ओर अदालत द्वारा गोस्वामी को न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद उनके वकील आबाद पोंडा और गौरव पारकर ने जमानत के लिए याचिका दाखिल कर दी है। वकील पोंडा ने कहा, ‘‘अदालत ने पुलिस से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले को गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।”

डॉ जावेद के जहरीले इंजेक्शन से खाँसी के मरीज की मौत, मृतक को लौटने थे ₹1 लाख

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित टांडा इलाके के मंजारा गाँव में जावेद नाम के एक डॉक्टर ने खाँसी वाले मरीज की जान ले ली। परिजनों का आरोप है कि मरीज जब डॉक्टर जावेद के पास गया तो उसने उसको गलत इंजेक्शन दिया जिससे मरीज की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने कार्रवाई की माँग करते हुए थाने के बाहर जमकर प्रदर्शन किया।

मृतक के भाई अनिल कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “मेरे भाई को खाँसी थी। वो दवाई लेने के लिए डॉ जावेद के पास गया था। जावेद को उनके एक लाख रुपए लौटाने थे। उसने मेरे भाई को जहरीला इंजेक्शन लगाया जिसके बाद उसकी मौत हो गई। जब हम न्याय की माँग करने थाने पहुँचे तो थाना प्रभारी ने हमारे साथ मारपीट की।”

इस पूरे मामले को लेकर रामपुर जिलाधिकारी अंजनेय कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने शिकायत ले ली है और जाँच होने के बाद सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अपनी ओर से पूरे मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि यूपी के रामपुर से यह मामला सामने आने के बाद लोग इस पर हैरानी व्यक्त कर रहे हैं। लोगों का पूछना है कि आखिर कोई डॉक्टर अपने मरीज के साथ ऐसा कैसे कर सकता है। वहीं एक रविशंकर नाम के यूजर का लिखना है कि भारतीय पुलिस के पास हिंदुओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की पूरी आजादी है, लेकिन समुदाय विशेष के अपराध खिलाफ़ एफआईआर भी दर्ज नहीं कर सकते।

समाचार एजेंसी एएनआई के ट्वीट पर रामपुर पुलिस से जुड़े पुलिसकर्मी रोहित यादव का ट्वीट भी आया है। इस ट्वीट में उन्होंने बताया है कि इस घटना की बाबत पुलिस ने झोलाछाप को हिरासत में ले लिया है और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने जानकारी दी है कि मृतक के पंचायत नामा की कार्रवाई की जा चुकी है तथा अन्य विधिक कार्रवाई की जा रही हैं।

रामपुर पुलिस ने भी अपने ट्विटर अकॉउंट से बताया है कि मृतक का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के जिला अस्पताल भिजवा दिया गया है। कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य है। अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है।

हिंदुत्व को मिटाने में सब लगा हुआ है: जाले विधानसभा के रुझान

बिहार में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जाले विधानसभा इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि कॉन्ग्रेस ने यहाँ से एक जिन्ना समर्थक व AMU छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी को प्रत्याशी के रूप में उतारा है। ऐसे में क्षेत्र के वर्तमान विधायक व भाजपा प्रत्याशी जिवेश मिश्रा किन मुद्दों के साथ इस बार यहाँ चुनाव लड़ रहे हैं, इस पर ऑपइंडिया ने उनसे विस्तार से बात की।

वह इस बातचीत में बताते हैं कि कॉन्ग्रेस पूरे मिथलांचल तथा सीमांचल को कट्टरपंथ के प्रयोगशाला के तौर पर देख रही है और इसलिए जिस मशकूर ने जिन्ना का पोस्टर लगाकर ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ का नारा दिया था, उसे ही अपने प्रत्याशी के रूप में उतारा है। जिवेश मिश्रा को पूरी उम्मीद है कि उनके क्षेत्र की जनता यह देख कर कॉन्ग्रेस को मुँहतोड़ जवाब देगी, जिसका असर 10 नवंबर को देखने को मिलेगा।

पूरे इंटरव्यू का वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

पटाखों से प्रदूषण, प्रदूषण से कोरोना इसलिए पटाखे न जलाएँ.. मैं भी पूजा करूँगा- अरविन्द केजरीवाल

देश भर में पूरी ऊर्जा और उत्साह से मनाया जाने वाला त्यौहार दिवाली बेहद नज़दीक है। इस त्यौहार की तैयारियाँ भी शुरू हो चुकी हैं लेकिन तैयारियों के साथ साथ पटाखे जलाने से होने वाले प्रदूषण पर भी बयानबाजी शुरू हो चुकी है। इसी कड़ी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिवाली के ठीक पहले आम लोगों से निवेदन करते हुए एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में केजरीवाल ने जनता से निवेदन करते हुए कहा है कि वह लोगों के साथ पूजा करने को तैयार हैं लेकिन कोई पटाखे न जलाए

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने सीधे प्रसारण के दौरान संबोधित करते हुए इस मुद्दे पर अपनी बात कही। उन्होंने कहा, “इस बार भी हम सभी लोग मिलकर दिवाली मनाएँगे, पटाखे नहीं जलाएँगे। किसी भी हालत में पटाखे नहीं जलाने हैं अगर पटाखे जलाएँगे तो हम लोग अपने ही बच्चों की ज़िन्दगी के साथ खेलेंगे। ऐसा करके हम लोग अपने दिल्ली के परिवार की ज़िन्दगी के साथ खेलेंगे। पटाखे नहीं जलाएँगे और दिवाली का त्यौहार एक साथ मनाएँगे।” 

इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, “इस बार हम दिवाली के लिए अलग इंतज़ाम कर रहे हैं। दिवाली वाले दिन 14 तारीख को 7 बज कर 39 मिनट से हम सारे लोग (दिल्ली के 2 करोड़ लोग) मिल कर लक्ष्मी पूजन करेंगे। मैं अपने मंत्रियों के साथ दिल्ली में एक जगह लक्ष्मी पूजन शुरू करूँगा, 7 बज कर 39 मिनट पर और कुछ टीवी चैनल उसका सीधा प्रसारण करेंगे।” 

केजरीवाल ने ये बातें एक डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली इस समय कोरोना और प्रदूषण से जंग लड़ रही है। हम सबके पूरे प्रयास हैं कि इन दोनों से हम जीत जाएँ, प्रदूषण की वजह से कोरोना स्थिति और खराब हो रही है।

दिल्ली की जनता से निवेदन करते हुए अरविन्द केजरीवाल ने कहा, “मैं आप सभी से अपील करता हूँ, दिल्ली के मेरे सभी भाइयों-बहनों और दिल्ली परिवार के सभी सदस्यों से अपील करता हूँ कि आप सब लोग उस वक्त अपना टीवी ऑन करके अपने अपने घर में, अपने अपने परिवार के साथ मिल कर/बैठ कर। वहाँ पर पंडित जी मंत्रोच्चारण करेंगे और उस वक्त आप सभी लोग अपने घरों में लक्ष्मी पूजन करें।”  

कर्नाटक: भाजपा नेता की हत्या के मामले में कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी गिरफ्तार

बृहस्पतिवार (नवंबर 05, 2020) को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्नाटक सरकार में पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता विनय कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी साल 2016 के दौरान धारवाड़ से भारतीय जनता पार्टी के नेता रहे योगेश गौड़ा की हत्या के संबंध में की गई है। कॉन्ग्रेस नेता विनय कुलकर्णी पर यह कार्रवाई राकेश रंजन की अगुवाई वाली 6 सदस्यों की सीबीआई टीम ने की है। 

कॉन्ग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी को धारवाड़ जिले के बाराकोटरी स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। फ़िलहाल सीबीआई की टीम उन्हें पूछताछ के लिए धारवाड़ के उपनगरीय पुलिस थाने लेकर गई है, और उनसे इस मामले में पूछताछ जारी है। इसके अलावा, सीबीआई ने इस पूरे प्रकरण के अन्य पहलुओं पर भी जाँच शुरू कर दी है।

दरअसल 15 जून साल 2016 को कॉन्ग्रेस नेता विनय कुलकर्णी के मुखर आलोचक और भाजपा नेता योगेश गौड़ा की धारवाड़ जिले के सप्तपुर में कुल पाँच बदमाशों ने हत्या कर दी थी। क्योंकि योगेश गौड़ा उस वक्त जिम में मौजूद थे इसलिए पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी। जाँच पड़ताल के बाद यह बात सामने आई थी कि पाँचों आरोपित कॉन्ग्रेस नेता विनय कुलकर्णी के सहयोगी थे। इस दौरान कुलकर्णी कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री पद पर भी थे। 

इसके बाद कॉन्ग्रेस नेता कुलकर्णी के इस्तीफे की माँग भी काफी बड़े पैमाने पर उठी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इस मामले के तहत लगाए गए आरोपों को भाजपा का षड्यंत्र कह कर टाल दिया था।

उनका कहना था कि कुलकर्णी लिंगायत आंदोलन के दौर से ही सक्रिय नेता रहे हैं इसलिए लोग उनकी छवि धूमिल करना चाहते हैं। आरोपों के अनुसार कथित तौर पर यह हत्या संपत्ति विवाद के चलते की गई थी। भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद पिछले साल के सितंबर महीने में इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी थी।  

प्रेस फ्रीडम है क्या? क्या वाकई पहले के मामलों को अर्णब के समकक्ष रखा जा सकता है?

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी बहस का विषय है। कुछ लोग इस पर खुलकर राय रख रहे हैं और कुछ लोग खुद को इस से अलग रख रहे हैं। प्रेस की स्वतंत्रता आखिर है क्या? सबसे पहली बात तो यह कि प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है। इसका मकसद एक ‘वॉचडॉग’ की तरह काम करना होता है, हालाँकि, आदर्श परिस्थितियों में ही यह संभव है वरना प्रेस अक्सर पालतू पशु की तरह ही नजर आती है।

प्रेस जिस घोटाले को उजागर करना चाहता है उसे इस सवाल पूछने और उसका दमन करने के बजाय उसका जवाब दिया जाना चाहिए। रिपब्लिक टीवी के खिलाफ मुंबई पुलिस और सोनिया सेना की मुहिम पर एक वर्ग सवाल किए जा रहा है कि NDTV, वायर, या फिर क्विंट के समय आप क्यों चुप थे? लेकिन क्या इन सबके मामले प्रेस या पत्रकारिता से ही जुड़े हुए थे?

NDTV की आतंकी हमले की कवरेज

NDTV पठानकोट आतंकी हमले की लाइव रिपोर्टिंग कर चुका है, जो कि गैरकानूनी होने के साथ ही देश के प्रति भी गैरजिम्मेदाराना रवैया था। प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस है, करोड़ों के हेरफेर की बात है, तो फिर इसकी जाँच प्रेस पर हमला कैसे कही गई? जबकि जो कुछ भी महराष्ट्र में अर्णब के खिलाफ चल रहा है वह तो स्पष्ट तौर पर राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है।

वायर: सिद्दार्थ वरदराजन

यूएस की नागरिक सिद्दार्थ वरदराजन, जो कि प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ के भी संस्थापक हैं, ने एक ट्वीट में खुला झूठ लिखा था। तबलीगी जमात को बचाने के लिए ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चलाते हुए लिखा कि जिस दिन इस इस्लामी संगठन तबलीगी जमात का मजहबी कार्यक्रम हुआ, उसी दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 25 मार्च से 2 अप्रैल तक अयोध्या प्रस्ताविक विशाल रामनवमी मेला का आयोजन नहीं रुकेगा क्योंकि भगवान राम अपने भक्तों को कोरोना वायरस से बचाएँगे।

‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चला तो दी लेकिन वो पकड़ा गया। ‘द वायर’ ने अपने लेख में ऐसा दावा किया और उसके संपादक वरदराजन ने इस लेख को शेयर भी किया। लेकिन, उनकी पोल खुलते देर न लगी। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने सिद्धार्थ वरदराजन की ये चोरी पकड़ ली और उन्हें जम कर फटकार लगाई। उन्होंने सिद्धार्थ को चेताया कि अगर उन्होंने अपनी इस फेक न्यूज़ को तुरंत डिलीट नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी और उन पर मानहानि का मुकदमा भी चलाया जाएगा।

फर्जी बयानों के जरिए, किसी राज्य की सरकार और सीधा उसके मुख्यमंत्री के हवाले से कुछ भी मनगढ़ंत बयान चला देना, वह भी एकदम मजहबी मामलों में, क्या इसमें भी प्रेस की स्वतन्त्रता का हवाला दिया जाना चाहिए था?

प्रशांत कनौजिया

‘इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी’ इस वाक्य का पत्रकारिता से कितना वास्ता है? प्रशांत कनौजिया ने ये शब्द उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को लेकर एक फर्जी तस्वीर शेयर करते हुए लिखी थी। लखनऊ पुलिस ने 8 जून 2019 को खुद को स्वतंत्र पत्रकार कहने वाले प्रशांत जगदीश कनौजिया को उसके आवास से गिरफ्तार किया था।

6 जून को कनौजिया ने फेसबुक और ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें हेमा नाम की एक युवती मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर खड़ी होकर खुद की योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बता रही थी। साथ ही वो ये भी दावा कर रही थी कि सीएम योगी उसके साथ एक साल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर रहे हैं। प्रशांत ने इस वीडियो को ‘इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी’ कैप्शन के साथ शेयर किया था।

द क्विंट – राघव बहल

ED का काम ही पैसों की हेरफेर पर नजर रखना और कार्रवाई करना है। उन्हें ‘द क्विंट’ के खिलाफ सबूत मिले तो उन्होंने कार्रवाई की। यह एक प्रक्रिया के ही अंतर्गत हुआ और राघव बहल के घर और ऑफिस में छापा मारा गया। इसे कैसे आप प्रेस फ्रीडम पर हमला बता देंगे?

इस विषय पर विस्तृत चर्चा आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं

आपातकाल 2.0 में आपका स्वागत है: महाराष्ट्र सदन में इंदिरा के साथ नजर आए उद्धव ठाकरे

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बुधवार (नवंबर 04, 2020) को मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के विरोध में दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन के बाहर ’आपातकाल 2.0’ के पोस्टर चिपकाए। इन पोस्टर्स में लिखा है- “आपातकाल 2.0 में आपका हार्दिक स्वागत है।”

एक पुराने बंद मामले की फ़ाइल अदालत की सहमति के बिना खोलकर अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद, महाराष्ट्र की उद्धव सरकार और महाराष्ट्र पुलिस को लगातार आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया से लेकर देशभर में इस अलोकतांत्रिक कार्रवाई का विरोध स्पष्ट रूप से नज़र आ रहा है। इसी कड़ी में देश की राजधानी दिल्ली में ‘आपातकाल 2.0’ के पोस्टर्स लगाए गए हैं।

इन पोस्टर्स में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि उद्धार ठाकरे की तुलना इंदिरा गाँधी से की जा रही है। पोस्टर में एक तरफ उद्धव ठाकरे की तस्वीर लगी है और दूसरी तरफ इंदिरा गाँधी की और नीचे लिखा हुआ है – ‘आपातकाल 2.0।’ यानी, महाराष्ट्र की उद्धव सरकार द्वारा अर्णब गोस्वामी पर की गई कार्रवाई इंदिरा गाँधी के आपातकाल के दौर की याद दिलाती है।

जिस तरह कॉन्ग्रेस के शासन वाली इंदिरा सरकार में पत्रकारों को अत्याचार और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। ठीक वैसा ही शिवसेना – कॉन्ग्रेस और एनसीपी की गठबंधन सरकार में भी हो रहा है। 

यह पोस्टर कॉन्ग्रेस मुख्यालय समेत राजधानी दिल्ली के तमाम क्षेत्रों में लगाया जा चुका है। दिल्ली की सड़कों पर चस्पा किए गए इन पोस्टर्स में लिखा है, ‘आपातकाल 2.0 में आपका हार्दिक स्वागत है।’

इन पोस्टर्स का उद्देश्य यह दिखाना है कि महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार की यह अलोकतांत्रिक कार्रवाई आपातकाल के भयावह दौर की यादें ताज़ा करती है। इस घटनाक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन का कहना है, “महाराष्ट्र में सत्ता और शक्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है। राज्यपाल को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए।” 

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को 14 दिन की पुलिस हिरासत में रखने के लिए मुंबई की अदालत में याचिका दायर की थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा कि हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है। साथ ही, अर्णब को जल्द ही जमानत मिलने की भी सम्भावना है, जिसका आशय है कि शायद उन्हें न्यायिक हिरासत में भी न रहना पड़े।

मुंबई पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को बीते दिन (4 नवंबर 2020) एक पुराने ‘बंद मामले’ में गिरफ्तार किया था। आधी रात में चली सुनवाई के बाद अलीबाग न्यायालय ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसका मतलब यह है कि इस दौरान मुंबई पुलिस उनसे पूछताछ नहीं कर पाएगी। अदालत में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा दायर की गई माँग याचिका खारिज किए जाने के बाद अर्नब ने अदालत से निकलते हुए कहा था, “मुंबई पुलिस हार चुकी है।”