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अब लव के नाम पर नहीं होगा जिहाद: CM शिवराज ने भी किया कड़े कानून बनाने का ऐलान

उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बाद मध्य प्रदेश ने भी अब लव जिहाद से निपटने के लिए कड़ा कानून बनाने का निर्णय लिया है। इस बात की घोषणा स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की है।

उन्होंने सोमवार (नवंबर 2, 2020) को समाचार एजेंसी से बातचीत में स्पष्ट कहा कि अब लव के नाम पर कोई जिहाद नहीं होगा। यदि कोई ऐसा करेगा तो ठीक कर दिया जाएगा और उसके लिए कानूनी व्यवस्थाएँ निर्मित होंगी।

याद दिला दें, इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हरियाणा के मुख्यमंत्री ऐसे ऐलान कर चुके हैं। अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी इसका ऐलान करके लोगों को आश्वस्त किया है। उन्होंने लव जिहाद के अलावा किसानों से संबंधित मुद्दों पर भी बात की।

क्या कहा था सीएम योगी आदित्यनाथ ने

जौनपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा था, “हमने जो कहा था, वह करके दिखाया है। साथ ही यह भी कहने के लिए आए हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश दिया है कि शादी-ब्याह के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक नहीं है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसे मान्यता मिलनी चाहिए। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार भी निर्णय ले रही है कि हम लव जिहाद को सख्ती से रोकने का प्रयास करेंगे।”

इस मुद्दे पर आगे बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था:

“हम लव जिहाद के मामलों को रोकने के लिए एक प्रभावशाली क़ानून बनाएँगे। छद्म वेश में, चोरी-छिपे नाम बदल कर जो लोग बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हैं, उनके लिए पहले से मेरी चेतावनी है। अगर वह सुधरे नहीं तो राम नाम सत्य है की यात्रा अब निकलने वाली है। हम लोग मिशन शक्ति के कार्यक्रम को इसलिए आगे बढ़ा रहे हैं। मिशन शक्ति के कार्यक्रम का मतलब है कि हम हर बेटी को, हर बहन को सुरक्षा की गारंटी देंगे। इन सारी बातों के बावजूद अगर किसी ने दुस्साहस किया तो उनके लिए ऑपरेशन शक्ति अब तैयार है। इसका उद्देश्य यही है कि हम हर हाल में लड़कियों की सुरक्षा करेंगे और उनके सम्मान की सुरक्षा करेंगे। इसके अलावा न्यायालय के आदेश का भी पालन होगा और बहन-बेटियों का सम्मान सुनिश्चित होगा।”

लव जिहाद पर हरियाणा का फैसला

योगी आदित्यनाथ द्वारा भरी रैली में लव जिहाद से संबंधित कानून बनाए जाने का ऐलान करने के बाद हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने भी इस बात की जानकारी दी थी कि उनके राज्य में भी लव जिहाद के खिलाफ़ कानून बनाने पर विचार चल रहा है।

विज ने एक टीवी चैनल से भी कहा, “योगी आदित्यनाथ जी जो कहते हैं, जब कहते हैं, सत्य कहते हैं। ये लव जिहाद का इलाज करना जरूरी है बच्चियों को बचाने के लिए। अगर इसके लिए कानून बनाना पड़े, कुछ और करना पड़े तो, किया जाना आवश्यक है। हम इस पर विचार कर रहे हैं।”

यहाँ बता दें कि इससे पहले हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर भी मेवात में लगातार आ रही कई धर्मांतरण की खबरों के बाद यह ऐलान कर चुके थे कि वह धर्म स्वतंत्र विधेयक नियम लेकर आएँगे ताकि धर्म परिवर्तन के मामले में मजबूती व सख्ती से कार्य हो सके।

लड़कियों से छेड़खानी करने वाला कॉन्ग्रेस नेता अनुज मिश्रा पहुँचा जेल, पिटते हुए वीडियो हुई थी वायरल

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष व यौन शोषण के आरोपित अनुज मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार (नवंबर 2, 2020) को सत्र न्यायालय में पेशी के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब अनुज 14 दिन तक उरई जिले की जेल में रहेंगे।

इससे पहले उनकी एक वीडियो सामने आई थी। वीडियो में जालौन जिले में कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष को एक लड़की से पिटते देखा गया था। इस लड़की ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। हालाँकि अनुज ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया था और सभी चीजों को अपने ख़िलाफ़ साजिश करार दिया था। इस मामले में यूपी कॉन्ग्रेस ने 5 लोगों की टीम बनाई है। यह टीम इस मामले पर आगे की जाँच करेगी।

उरई के सीओ संतोष कुमार ने वीडियो संज्ञान में आने के बाद बताया कि अनुज मिश्रा के ख़िलाफ़ यौन शोषण का मामला दर्ज हुआ है। दोनों पक्ष एक दूसरे को लंबे समय से जानते थे। इस पूरे केस में आगे की जाँच जारी है। पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि अनुज के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 354 के तहत मामला दर्ज हुआ है।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी यह वायरल वीडियो शेयर की थी। इस वीडियो पर उन्होंने कैप्शन लिखा था, “कॉन्ग्रेस का असली चाल चरित्र और चेहरा।” वहीं सीएम योगी के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा था, “हाथरस से जालौन की दूरी कुछ घंटों की ही है श्रीमती प्रियंका गाँधी जी, ज़रा गाड़ी निकाल कर अपने ज़िलाध्यक्ष से पूछ आइए – महिलाओं और बच्चियों से छेड़खानी करना कब बंद करेंगे?”

गौरतलब है कि अनुज मिश्रा की वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि दो लड़कियाँ उन्हें खूब पीट रही हैं। लड़की वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता से कहती हैं , “अब लड़कियों को गाली दोगे? अब छेड़खानी करोगे? अब लड़कियों पर ट्राय करोगे?” जिस पर कॉन्ग्रेस नेता अनुज मिश्रा लड़कियों के पैर पकड़ कर उनसे माफ़ी माँगते हैं, उन्हें बहन कह कर संबोधित करते हैं और अंत में कहते हैं कि अब वह ऐसा कभी नहीं करेंगे।

बता दें कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद से कॉन्ग्रेस नेता अनुज मिश्रा की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर में वह प्रियंका गाँधी वाड्रा के साथ नज़र आ रहे हैं।

विएना के सबसे बड़े यहूदी धर्मस्थल के बाहर आतंकी हमला: 100 राउंड फायरिंग में 2 की मौत, 15 घायल

फ्रांस और कनाडा के बाद ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में आतंकी हमला हुआ है, जिसमें 2 की मौत हो गई है। हमलावरों की गोलीबारी में सोमवार (नवंबर 2, 2020) को एक आतंकी सहित 2 की मौत हो गई। साथ ही इस हमले में कई लोग घायल भी हुए हैं। बता दें कि विएना में कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के कारण फिर से लॉकडाउन लगाया गया है। ऑस्ट्रिया के चांसलर ने इस बात पर ख़ुशी जताई कि पुलिस एक हमलावर को मार गिराने में सक्षम हुई।

सिटी सेंटर के एक चहल-पहल वाले इलाके में रात 8 बजे गोलीबारी की गई। ऑस्ट्रिया की सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इसमें कई बंदूकधारी शामिल थे और उन सबकी तलाश की जा रही है। वहाँ के गृह मंत्री ने कहा है कि ये एक आतंकी हमला ही प्रतीत होता है। सभी आतंकी रायफल लिए हुए थे। जहाँ पुलिस उनकी तलाश में लगी है, सेना को कहा गया है कि वो शहर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निगरानी करे।

विएना के मेयर ने बताया कि 15 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 7 की हालत गंभीर है। शहर के सबसे प्रमुख यहूदी धर्मस्थल (सिनेगॉग) के सामने फायरिंग हुई, लेकिन वो निशाना था या नहीं – इस बारे में कुछ नहीं बताया गया है। तब तक सिनेगॉग को बंद किया जा चुका था। कम से कम 100 राउंड फायरिंग की गई है। लॉकडाउन से पहले ये अंतिम शाम थी और सभी बार्स ने अपने टेबलों को बाहर ही लगा रखा था।

सभी बार और रेस्टॉरेंट अगले एक महीने के लिए बंद रहने वाले हैं, इसीलिए लोग इस शाम का भरपूर मजा लेना चाहते थे। ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबेस्टियन कुर्ज़ ने इसे ‘घिनौना आतंकी हमला’ करार देते हुए कहा कि पुलिस दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रों ने भी ऑस्ट्रिया के साथ सहानुभूति जताई है। उन्होने ऑस्ट्रिया को दोस्त राष्ट्र बताया। विएना में फ़िलहाल लोगों को खुले में न घूमने को कहा गया है।

विएना पुलिस ने कहा है कि उच्च-स्तर पर जाँच की जा रही है। एक ही क्षेत्र में कुल 6 जगह फायरिंग हुई है, इसीलिए पुलिस को आशंका है कि हमलावर बड़ी संख्या में थे। ऑटोमैटिक हथियारों से फायरिंग की गई। आसपास के लोगों ने बताया कि उन्हें पहले लगा कि पटाखे फूट रहे हैं, लेकिन बाद में पता चला कि गोलीबारी हो रही है। पुलिस ने कहा कि लोग इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर न शेयर करें।

पिछले कुछ दिनों में फ्रांस में ताबड़तोड़ हमले हुए हैं। पैगम्बर मुहम्मद के कार्टून्स को लेकर शार्ली हेब्दो पत्रिका के दफ्तर के बाहर नरसंहार हुआ। उसके बाद एक शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या कर दी गई। फिर एविगनन (Avignon) शहर में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए धारदार हथियार से पुलिसकर्मियों के एक समूह पर हमला कर दिया। हाल ही में लियोन शहर में शॉटगन से लैस अपराधी ने एक ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरी को गोली मार दी।

YouTube पर सबसे ज्यादा देखा गया यह वीडियो, लाख-करोड़ नहीं… 7 अरब से भी ज्यादा: न हीरो है, न हिरोइन

YouTube पर सबसे ज्यादा देखे गए वीडियो का कल (2 नवंबर, 2020) एक नया रिकॉर्ड बना। Baby Shark नाम के YouTube वीडियो को ज्यादा देखे गए वीडियो का ताज मिला। इसे अब तक 7.04 बिलियन व्यूज (7040000000) मिल चुके हैं।

Baby Shark नाम का यह YouTube वीडियो बच्चों का वीडियो है। इसमें कोई हीरो या हिरोइन नहीं है। दो बच्चे हैं और मछलियों वाले कुछ ग्राफिक्स। बस! न सरसों का खेत और न ही पहाड़ों पर लहराती सिल्क की साड़ी।

खैर! वापस आते हैं Baby Shark वीडियो पर। यह वीडियो 17 जून 2016 को YouTube पर अपलोड किया गया था। इसे कोरियाई-अमेरिकी गायक होप सेगोइन (Hope Segoine) द्वारा रिकॉर्ड किया गया था। दक्षिण कोरियाई शैक्षणिक कंपनी पिंकफॉन्ग (Pinkfong) ने इस गाने को प्रोड्यूस किया था।

Baby Shark Vs Despacito

Baby Shark के Youtube का नंबर-1 बनने के पहले यह ताज Despacito नाम के वीडियो के पास था। लुइस फोंसी और डैडी यांकी (Luis Fonsi, Daddy Yankee) का यह वीडियो Youtube पर 12 जनवरी 2017 को अपलोड किया गया था।

वापस आते हैं Baby Shark पर। कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए बच्चों में उचित तरीके से हाथ धोने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए Baby Shark वीडियो के एक नए संस्करण को इसी साल की शुरुआत में बना कर YouTube पर अपलोड किया गया था।

मथुरा के मंदिर में नमाज पढ़ने के आरोप में फैसल खान गिरफ्तार: यूपी पुलिस ने दिल्ली से पकड़ा

मथुरा के नंदबाबा मंदिर में नमाज पढ़ने वाले फैसल खान को यूपी पुलिस ने दिल्ली के जामिया नगर से गिरफ्तार कर लिया है। फैसल खान से अब पुलिस पूछताछ कर रही है। एसीएस गृह अवनीश के अवस्थी ने समाचार एजेंसी एएनआई को जानकारी दी।

इस मामले में चार लोगों पर केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि 29 अक्टूबर को मथुरा के नंद बाबा मंदिर में चार लोग आए। इनमें से दो लोगों ने मंदिर के सेवायतों को गुमराह कर मंदिर परिसर में ही नमाज पढ़ी। इस मामले में धारा 153A, 295, 505 के तहत बरसाना थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

ये शिकायत मंदिर प्रशासन की ओर से दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में कहा गया कि सोशल मीडिया पर ऐसी फोटो डालने से हिन्दू समुदाय की भावनाएँ आहत हुई हैं और आस्था को गहरी ठेस पहुँची है।

वहीं हिन्दुओं ने मंदिर में हवन कर के गंगाजल से शुद्धिकरण किया। श्रद्धालुओं ने कहा कि बिना अनुमति मंदिर में घुस कर नमाज पढ़ने के कारण उन्हें शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।

भक्तों ने पंडितों के साथ बैठ कर पूरी प्रक्रिया के साथ हवन-पूजन किया। वहीं विश्व हिन्दू परिषद ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘नमाज जिहाद’ करार दिया। संस्था के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर स्थित नंदगाँव मंदिर में जिस तरह से कुछ ‘इस्लामी जिहादियों’ ने नमाज पढ़ने की कोशिश की, उससे कई सवाल खड़े हो जाते हैं। उन्होंने पूछा कि छलपूर्वक मंदिर में घुसना और वहाँ अनायास नमाज पढ़ कर उसकी तस्वीरें-वीडियो वायरल करना क्या किसी मानसिकता की ओर संकेत नहीं करता?

वहीं फैसल खान ने ABP न्यूज से बात करते हुए कहा कि मंदिर के परिसर में नमाज पढ़कर कोई साजिश नहीं की है।

गौरतलब है कि गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को नन्दगाँव के प्रसिद्ध नंदबाबा मंदिर में दोपहर को दो युवक अपने साथियों के साथ हरी टोपी लगा कर पहुँचे। एक व्यक्ति ने अपना नाम फैसल खान बताया और अपने साथ आए साथियों का परिचय मोहम्मद चाँद, नीलेश गुप्ता और आलोक रतन के रूप में दिया। उन लोगों ने बताया कि वो मंदिर के सेवायत पुजारी कान्हा गोस्वामी के दर्शन हेतु आए हैं और हिन्दू-मुस्लिम एकता में विश्वास रखने वाले लोग हैं।

वो अपने मोबाइल फोन में कई हिन्दू साधु-संतों और महंतों के साथ अपनी तस्वीरें भी दिखाने लगे, ताकि उन पर यकीन कर लिया जाए। इसके बाद वो लोग सीधे गेट संख्या 2 के पास पहुँचे। कोरोना महामारी के कारण मंदिर में लोगों की चहल-पहल उतनी नहीं है, जिसका फायदा उठा कर फैजल और चाँद वहीं पर नमाज पढ़ने लगे और बाक़ी दोनों ने तस्वीरें क्लिक कीं। वहाँ खड़े लोगों ने नमाज पढ़ने से लाख मना किया, लेकिन वह नहीं माना।

फैजल खान और मोहम्मद चाँद का PFI लिंक

दिलचस्प बात यह है कि जिस फेसबुक आईडी से तस्वीरें वायरल की गई थी, वह वह पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार कट्टरपंथी इस्लामवादियों का मुखर वकील है, जिन्हें हाथरस के रास्ते में पकड़ा गया था। इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट में ट्रांसफर होने से पहले इस मामले को बरसाना थाने ने उठाया था। इसके साथ ही इस बात की भी जाँच शुरू कर दी गई है कि तस्वीर को वायरल करने के पीछे क्या मंशा थी।

US Elections 2020: आसान तरीके से समझिए अमेरिका में राष्ट्रपति चुनने की पूरी प्रक्रिया

अमेरिका में 3 नवंबर को हो रहे 46वें राष्ट्रपति चुनाव पर भारत समेत दुनिया भर की निगाहें हैं। रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) दोबारा जीत हासिल करेंगे या डेमोक्रेट प्रत्याशी जो बाइडेन (Joe Biden) बाजी पलट देंगे। इसको लेकर गूगल, टीवी चैनल से लेकर सोशल मीडिया तक धमक दिखेगी। आइए जानते हैं चुनाव से जुड़ी सारी बारीकियों को…

अमेरिका में लंबे समय से राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव दो मुख्य राजनीतिक पार्टियों के बीच होता है। ये दो पार्टियाँ हैं- डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी। डेमोक्रेट्स का चुनाव चिह्न गधा है और रिपब्लिकन का हाथी। पिछली बार डेमोक्रेट्स की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन थीं जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हार गई थीं। इस बार डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन हैं, जो पहले अमेरिका के उप राष्ट्रपति भी रह चुके हैं।

डेमोक्रेटिक पार्टी की विचारधारा क्या है?

डेमोक्रेटिक पार्टी आधुनिक उदारवाद का समर्थन करती है। यह शासन के हस्तक्षेप, सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल, सस्ती शिक्षा, सामाजिक कार्यक्रमों, पर्यावरण संरक्षण नीतियों और श्रमिकों संघों में विश्वास करती है।

रिपब्लिकन किस सोच पर चलती है?

रिपब्लिकन पार्टी एक तरह से अमेरिकी राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है, जैसे सरकार के दायरे को सीमित करना, कम करों और मुक्त बाजार पूँजीवाद को, हथियार रखने के अधिकार, श्रमिक संघों के अविनियमन को बढ़ावा देना और आव्रजन तथा गर्भपात जैसे मामलों में प्रतिबंध लगाना शामिल है।

अमेरिका के चुनाव में अन्य पार्टियाँ भी हिस्सा लेती हैं ?

अमेरिकी चुनाव में अन्य पार्टियाँ भी हिस्सा लेती हैं, जिसमें लिब्रेटेरियन, ग्रीन और स्वतंत्र पार्टियाँ शामिल हैं। एक जमाने में मौजूदा अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अपनी एक पार्टी बनाकर चुनाव लड़ चुके हैं। ये सभी पार्टियाँ अपने उम्मीदवार खड़ा करती हैं लेकिन अभी उनका कोई बहुत ज्यादा असर नहीं दिखता। अमेरिका के लोग मुख्य तौर पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच से ही राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।

कौन अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ सकता है?

इस चुनाव में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के लिए ये तीन आधारभूत अर्हताएँ पूरी करना सबसे जरूरी है-

1. चुनाव लड़ने वाला व्यक्ति पैदाइशी अमेरिकी हो।

2. उसकी उम्र कम से कम 35 वर्ष होना जरूरी है।

3. उम्मीदवार बीते कम से कम 14 साल तक अमेरिका में रहा हो।

जो वोटर अब तक इलेक्शन डे (इस साल 3 नवंबर) को पोलिंग बूथ पर जाकर वोटिंग करते रहे हैं, वे घर बैठे मेल-इन या पोस्टल बैलट से वोटिंग कर रहे हैं। अमेरिका में कुछ राज्यों में इलेक्शन डे से पहले भी वोट डाले जा सकते हैं, जिसे अर्ली वोटिंग कहते हैं। इसका भी लोग फायदा उठा रहे हैं, ताकि भीड़ में न जाना पड़े। पिछले चुनावों में कुल वोटिंग का 50% मतदान तो इस साल इलेक्शन डे से एक हफ्ते पहले ही हो गया है। यह आँकड़ा और भी बढ़ सकता है।

मतदान कब शुरू होगा 

अमेरिकी समयानुसार 3 नवंबर को सुबह 6 बजे यानी भारतीय समय के मुताबिक दोपहर 3ः30 बजे वोटिंग शुरू होगी। वहाँ रात को नौ बजे तक चलेगी, यानी भारतीय समय के मुताबिक 4 नवंबर सुबह 6ः30 बजे तक वोटिंग चलती रहेगी। रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट के जो बाइडेन भी चुनाव वाले दिन ही वोट करेंगे।

मतगणना रात से शुरू होगी

अमेरिका में मतगणना हर राज्य में चुनाव प्रक्रिया पूरी होते ही मंगलवार रात (भारत में बुधवार को) ही शुरू हो जाएगी। फ्लोरिडा (Florida), विस्कोंसिन (Wisconsin), पेनसिल्वेनिया जैसे काँटे की टक्कर वाले राज्यों में मतगणना कई हफ्तों तक खिंच सकती है।

यहाँ जान सकते हैं रुझान

BBC, CNN, एबीसी न्यूज, अलजजीरा, फ्रांस-24 जैसे कई विदेशी समाचार चैनल अमेरिका के चुनाव की पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रसारण करने वाले हैं। इन चैनलों पर राज्यवार रुझान भी जारी होंगे।

परिणाम कब आएँगे

अमेरिकी चुनाव में इस बार 23.9 करोड़ मतदाता हैं, लेकिन 3 नवंबर को मतदान के आधिकारिक दिन के पहले ही 9.2 करोड़ लोग पोस्टल बैलेट (Mail In Voting) या अर्ली वोटिंग (Early Voting) के जरिए वोट दे चुके हैं। यानी 38 फीसदी वोट पहले ही पड़ चुके हैं। यह 2016 के चुनाव का दो तिहाई से भी ज्यादा है।

वोटों की गिनती

हमारे यहाँ वोटिंग होने के बाद सारी मशीनें एक जगह आती है और काउंटिंग अलग तारीख को होती है। अमेरिका में ऐसा नहीं होता। वहाँ तो वोटिंग खत्म होते ही गिनती शुरू हो जाती है। पिछले साल इलेक्शन डे के अगले दिन सुबह तक नतीजे भी आ गए थे, तब तक हमारे यहाँ शाम हो चुकी थी। इस बार काउंटिंग में थोड़ा ट्विस्ट है। इस बार कुछ स्टेट्स ने 3 नवंबर तक पोस्टल बैलेट्स भेजने की मंजूरी दी है। इस वजह से नतीजे आने में एक या दो दिन भी लग सकते हैं।

एक और बड़ा अंतर यह है कि अमेरिका में वोटर सीधे राष्ट्रपति नहीं चुनते। वहाँ, वोटर अपना प्रतिनिधि चुनते हैं, जो इलेक्टर कहलाते हैं। किसी स्टेट में कितने इलेक्टर होंगे, यह उसकी आबादी पर निर्भर करता है। कैलिफोर्निया के पास सबसे ज्यादा 55 इलेक्टर हैं। पूरे अमेरिका में 538 इलेक्टर हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र से वोटर्स को रिप्रेजेंट करते हैं। यह इलेक्टर ही आगे जाकर प्रेसिडेंट का चुनाव करते हैं।

नए राष्ट्रपति के लिए करीब दो माह का वक्त

अमेरिकी चुनाव का समय, नए राष्ट्रपति के शपथग्रहण (US President Oath Ceremony) से लेकर सब कुछ तय होता है। नवंबर में पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले मंगलवार (इस बार 3 नवंबर) को ही चुनाव होता है। राष्ट्रपति 20 जनवरी को शपथ लेते हैं। ऐसे में नतीजे देरी से आए या अदालती विवाद हुआ तो दिक्कत नहीं होगी।

रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच टक्कर

अमेरिकी चुनाव में प्रायः दो दलों रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच टक्कर होती है। रिपब्लिकन को कंजरवेटिव या ग्रैंड ओल्ड पार्टी भी कहा जाता है और ग्रामीण इलाकों में उसकी पैठ है। जॉर्ज बुश, रोनाल्ड रीगन, रिचर्ड निक्सन रिपब्लिकन पार्टी से दिग्गज राष्ट्रपति हुए हैं। रिपब्लिकन धर्म, चर्च के अधिकारों के, हथियार रखने के समर्थक और गर्भपात विरोधी रहे हैं। डेमोक्रेटों का शहरों में दबदबा है।

दो उम्रदराज नेताओं के बीच मुकाबला

बराक ओबामा ने 2008 में 44 साल की उम्र में राष्ट्रपति बनकर इतिहास रचा था। इस बार मुकाबला 74 साल के डोनाल्ड ट्रंप और 78 साल के जो बाइडेन के बीच है। बाइडेन 8 साल ओबामा शासन में उप राष्ट्रपति रहे। बाइडेन ने कमला हैरिस (Kamala Harrsis) को उप राष्ट्रपति नामित किया है।

60-65 फीसदी मतदान का अनुमान

इलेक्शन प्रोजेक्ट जैसे चुनाव विश्लेषक एजेंसियों का अनुमान है कि 24 करोड़ में से मतदान 16-17 करोड़ के पार हो सकता है। यह करीब 60-65 फीसदी रह सकता है। इनमें से 40 फीसदी पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) और चुनाव के दिन पड़े वोटों को गिनने में वक्त लगेगा।

राज्य अलग-अलग नतीजे जारी करेंगे

अमेरिका में 50 प्रांत हैं। भारत में एक साथ नतीजों के ऐलान से उलट अमेरिकी राज्यों में मतदान, पोस्टल बैलेट की गिनती और मतगणना के अलग-अलग नियम हैं। कुछ राज्यों ने पोस्टल बैलेट डाल चुके लोगों को भी इसे रद्द कराने और चुनाव वाले दिन 3 नवंबर को वोट करने का विकल्प दिया है। ऐसे चुनाव प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

ज्यादा वोट पाने वाला राष्ट्रपति हो जरूरी नहीं

अमेरिका में जनता सीधे राष्ट्रपति नहीं चुनती, यानी जो पूरे देश में सबसे ज्यादा वोट पाए वह राष्ट्रपति घोषित हो यह जरूरी नहीं है. राष्ट्रपति का फैसला निर्वाचक वोटों से होता है. पूरे देश में 538 इलेक्टोरल कॉलेज (Electoral College) हैं। हर राज्य के अपने इलेक्टोरल कॉलेज तय हैं, जैसे कैलीफोर्निया में 55, कैलीफोर्निया (California) में जिस प्रत्याशी को सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे। उसे ये पूरे 55 निर्वाचक वोट मिल जाएँगे।

बहुमत का जादुई आँकड़ा

जैसे भारत में लोकसभा की 543 सीटों में से 272 का बहुमत का आँकड़ा होता है। उसी तरह अमेरिका में बहुमत के लिए किसी भी उम्मीदवार को 269 निर्वाचक वोटों का जादुई आँकड़ा पार करना होता है। उसे कम से कम 270 वोट मिलना जरूरी है।

ये राज्य होंगे निर्णायक

अमेरिका में फ्लोरिडा, विस्कोंसिन, मिशिगन, नार्थ कैरोलिना, पेनसिल्वेनिया और ओहायो के नतीजों को निर्णायक माना जा रहा है। फ्लोरिडा जैसे राज्य में 22 दिन पहले ही वोटों की गिनती शुरू हो गई, लेकिन विस्कोंसिन में 24 पहले भी ऐसा नहीं हो सकेगा। बुश और अलगोर के चुनाव में फ्लोरिडा निर्णायक साबित हुआ था।

हाउस ऑफ रिप्रंजेटेटिव में होगा निर्णय

ऐसी स्थिति में अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में बहुमत से निर्णय होता है कि कौन अगला राष्ट्रपति होगा। उप राष्ट्रपति पद के लिए सीनेट (US Senate ) में वोटिंग होती है।

इन मुद्दों पर हो रहा चुनाव

डोनाल्ड ट्रम्प और जो बाइडेन दोनों ही इस बार प्रचार में काफी आक्रामक दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका में इस बार चीन, कोरोना वायरस, वैक्सीन, अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, नस्लीय तनाव, जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे छाए हुए हैं।

नस्लीय तनाव

अमेरिका में मई में पुलिस के हाथों जॉर्ज फ्लॉयड नाम के अश्वेत व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद से अमेरिका में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ के आंदोलन शुरू हो गए। अमेरिका में वैसे तो नस्लीय हिंसा का लंबा इतिहास रहा है। लेकिन अमेरिकी चुनाव से पहले एक बार फिर पूरे विश्व के तमाम देशों में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हुए। अमेरिका में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में शहरों को भी काफी नुकसान पहुँचा। यही वजह है कि अमेरिका में यह विवाद चुनावी मुद्दा बना हुआ है।

आतंक के खिलाफ फ्रांस को मिला दुनिया का साथ: UAE के क्राउन प्रिन्स ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टून पर कही ये बात

अबू धाबी क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने रविवार (नवंबर 1, 2020) को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ फोन पर हाल में हुए आतंकवादी हमलों की निंदा की।

अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और यूएई सशस्त्र बलों के उप-सर्वोच्च कमांडर ने राष्ट्रपति से हाल के हमलों के पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्होंने आतंकवादियों द्वारा उनके अपराधों का बहाना करने के लिए इस्तेमाल किए गए किसी भी औचित्य को खारिज कर दिया।

क्राउन प्रिंस ने यह भी जोर देकर कहा कि हिंसा पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं का प्रतिनिधि नहीं है। क्राउन प्रिंस ने कहा, “ये हिंसक अत्याचार शांति, सहिष्णुता और प्रेम का आह्वान करने वाले सभी एकेश्वरवादी धर्मों की शिक्षाओं और सिद्धांतों के साथ असंगत हैं। जिसने मानव जीवन की पवित्रता पर जोर दिया।”

उन्होंने कहा, “किसी भी परिस्थिति में पैगंबर को हिंसा या राजनीतिकरण से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।” क्राउन प्रिंस ने विभिन्न पृष्ठभूमि के व्यक्तियों को घृणास्पद भाषण और हिंसा का सहारा लेने के बजाय सम्मानजनक बातचीत में शामिल होने का आह्वान किया।

पैगंबर ए इस्लाम के कार्टूनों को कक्षा में दिखाए जाने पर हुई फ्रांसीसी शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या के बाद हुए हमलों के बाद अबू धाबी क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को फोन किया। यूएई के क्राउन प्रिंस ने कहा कि अपराध, हिंसा और आतंकवाद का किसी भी तरह से बचाव करना गलत है। शेख मोहम्मद ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद के लिए लोगों के मन में अपार आस्था है लेकिन इस मुद्दे को हिंसा से जोड़ना और इसका राजनीतिकरण करना बिल्कुल अस्वीकार्य है।

फ्रांस के नीस शहर में एक चर्च के बाहर दो महिलाओं समेत तीन लोगों की हत्या से पूरे देश में आक्रोश है। फ्रांस ने इसे आतंकी घटना करार दिया है। इसको लेकर दुनिया के तमाम मुल्क फ्रांस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

यूएई के विदेश मंत्रालय ने आतंकवाद के खिलाफ इन आपराधिक कृत्यों की कड़ी निंदा करते हुए बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि वह हिंसा के सभी रूपों को स्थायी रूप से खारिज करता है।  

वहीं ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने इस घातक चाकू हमले की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “हम नीस शहर में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं।” ईरान, यूएई के अलावा इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हमले की निंदा की। उन्होंने ट्वीट करके सभी सभ्य देशों को फ्रांस के साथ पूर्ण एकजुटता के साथ खड़े होने की बात कही। साथ ही दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस को समर्थन दिया और कहा कि अमेरिका इस लड़ाई में अपने सबसे पुराने सहयोगी के साथ खड़ा है।

ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, “हमारा दिल फ्रांस के लोगों के साथ है। अमेरिका इस लड़ाई में अपने सबसे पुराने सहयोगी के साथ खड़ा है। इन कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवादी हमलों को तुरंत रोक देना चाहिए।”

अफगानिस्तान की काबुल यूनिवर्सिटी में आतंकी हमला: 25 लोगों की मौत, 40 से ज्यादा घायल

अफगानिस्तान के काबुल विश्वविद्यालय में सोमवार (नवंबर 02, 2020) को हुए आतंकी हमले में कम से कम 25 लोगों के मारे जाने की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 40 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मौके पर पहुँचे सुरक्षाबलों की आतंकवादियों से मुठभेड़ जारी है। पूरे कैंपस को सुरक्षाबलों ने घेर लिया है। कैंपस के अंदर से अब भी गोलीबारी की आवाजें सुनाई दे रही हैं।

हमले के समय विश्वविद्यालय में मौजूद थे अफगान और ईरानी अधिकारी

रिपोर्ट के अनुसार, काबुल विश्वविद्यालय के पास गोलाबारी तब हुई जब अफगान और ईरानी अधिकारी विश्वविद्यालय में एक पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन कर रहे थे। अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक एरियन ने पुष्टि की कि बंदूकधारियों के एक समूह ने आज दोपहर में काबुल विश्वविद्यालय के परिसर में गोलीबारी की है।

विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जबीउल्ला हैदरी ने स्थानीय टीवी स्टेशन ‘अरियाना’ को बताया कि जब गोलीबारी शुरू हुई तब कक्षाएँ भी चल रही थीं। हैदरी के अनुसार गोलीबारी के चलते विश्वविद्यालय के कर्मियों एवं सुरक्षाकर्मियों ने विद्यार्थियों को परिसर से बाहर ले जाना शुरू कर दिया।

पिछले पाँच घंटों से मुठभेड़ जारी

हमले के बाद अफगान स्पेशल फोर्स और विदेशी कमांडों की टीम भी विश्वविद्यालय परिसर में पहुँच चुकी है। पिछले पाँच घंटों से हमलावरों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ जारी है। विश्वविद्यालय जाने वाले रास्तों को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है।

चश्मदीद ने बताया हमले का आँखों देखा हाल

एक चश्मदीद ने बताया कि हमलावरों ने काबुल विश्वविद्यालय में एक क्लास में प्रवेश किया और छात्रों पर गोलियाँ चलाईं। जिसके कारण क्लास में मौजूद कई छात्र या तो मारे गए या घायल हो गए। पूरे विश्वविद्यालय परिसर को सुरक्षाबलों ने खाली करा लिया है। आतंकियों की धड़पकड़ के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है।

टोलो न्यूज अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के हवाले से कहा है कि सभी तीन हमलावर को मार गिराया गया है। हमले के बाद पूरे विश्वविद्यालय कैंपस को सुरक्षाबलों ने घेर लिया है।

गौरतलब है कि पिछले साल इस यूनिवर्सिटी के गेट पर बम विस्फोट में आठ लोगों की जान चली गई थी। वर्ष 2016 में बंदूकधारियों ने काबुल स्थित अमेरिकी यूनिवर्सिटी पर हमला किया था और 13 लोगों को मार डाला था।

पिछले ही महीने इस्लामिक स्टेट ने राजधानी के शिया बहुल दश्त-ए-बार्ची के एक शिक्षण केंद्र में आत्मघाती बम हमलावर भेजा था जिसके हमले में 24 विद्यार्थियों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे।

सुदर्शन न्यूज के जनता मार्च को दिल्ली पुलिस ने कहा ‘अवैध धरना’: लोगों ने पूछा- शाहीन बाग में कहाँ थे?

हरियाणा के फरीदाबाद में निकिता तोमर की हत्या के बाद हर जगह सख्त कानून बनाए जाने की माँग उठ रही है। ऐसे में हिंदू लड़कियों पर होते अत्याचारों के मद्देनजर जागरूकता फैलाने के लिए सुदर्शन टीवी प्रमुख ने एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आयोजन किया था। 1 नवंबर को दिल्ली के इंडिया गेट पर इसी आयोजन में कई लोग इकट्ठा हुए।

हालाँकि, इस बीच सुदर्शन टीवी एडटिर इन चीफ सुरेश चव्हाणके ने दिल्ली पुलिस पर इस प्रदर्शन में बाधा डालने का आरोप लगा दिया। चैनल ने एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि कैसे इंडिया गेट पर एकत्रित हुए हिंदू प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस ने अवैध बल का इस्तेमाल किया। शेयर की गई वीडियोज में कुछ महिला अधिकारियों को हिंदू महिला प्रदर्शनकारी को उठा कर बस में बिठाते देखा जा सकता है।

सुदर्शन टीवी के चीफ एडिटर ने यह भी दावा किया कि उनके पत्रकार गौरव मिश्रा को भी दिल्ली पुलिस ने गैर कानूनी रूप से हिरासत में लिया, क्योंकि उन्होंने भगवा रंग का शर्ट पहना था। सुरेश चव्हाणके ने लिखा, “भगवा पहनना दिल्ली पुलिस के लिए गुनाह है?  इंडिया गेट पर जब हमारे रिपोर्टर गौरव मिश्रा कवर कर रहे थे तो पुलिस ने उन्हें भी डिटेन कर लिया। एक पुलिस वाले ने कहा, तुमने भगवा शर्ट क्यों पहना हुआ है? तुम प्रदर्शन करने आए हो?”

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ सुदर्शन न्यूज ने एक ट्वीट में यह भी आरोप लगाया कि जनता मार्च पर हमले का आदेश देने वाले दिल्ली पुलिस अधिकारी का नाम सरफराज है। वहीं दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों के मद्देनजर सफाई जारी की है। साथ ही अपने ऊपर लग रहे आरोपों को झूठा बताते हुए खारिज किया।

पुलिस का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सिर्फ़ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए कहा था। लेकिन चैनल सीआरपीसी 144 और डीडीएमए दिशानिर्देशों के तहत प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करके इंडिया गेट के पास मानसिंह रोड पर इकट्ठा होकर आगे बढ़ा। इसलिए कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए दिल्ली पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और अन्य लोगों को अवैध धरने से हटा दिया।

बता दें कि, सुदर्शन टीवी के एक आयोजन पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई देखकर कई लोगों में रोष भी है। लोगों का पूछना है कि आखिर जिस तरह से इंडिया गेट पर सुदर्शन टीवी के साथ खड़े प्रदर्शनकारियों को हटाया गया, वैसे ही समान बल का प्रयोग शाहीन बाग में क्यों नहीं किया गया था।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने दिल्ली पुलिस का यह रवैया देखकर उनपर आरोप लगाया कि जब मुस्लिम प्रदर्शनकारी लंबे समय से शाहीन बाग में रोड ब्लॉक करके बैठे थे, तब दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से एकत्रित भीड़ को उठाने के लिए क्या किया। इसके बाद हिंदू विरोधी दंगो को रोकने में कथित विफलता पर भी सवाल उठाया और पूछा कि आखिर वो आज तक मौलाना साद को क्यों नहीं पकड़ पाए।

ज्ञात हो कि पिछले दिनों हरियाणा में निकिता तोमर की हत्या के बाद से हिंदू लड़कियों की सुरक्षा को लेकर लगातार आवाजें उठ रही हैं। निकिता पर तौसीफ नाम का युवक लगातार धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बना रहा था, लेकिन जब उसने उसकी बात नहीं मानी तो वह उसे उसके कॉलेज के बाहर गोली मार कर फरार हो गया। इस घटना के बाद कई संगठनों ने लव जिहाद जैसे मामलों पर कड़े कानून को बनाने की अपील सरकार से की थी और इसी घटना के बाद सुदर्शन न्यूज ने भी जनता मार्च निकालकर जागरूकता फैलाने का फैसला किया था।

आमिर खान की बेटी का हुआ था यौन उत्पीड़न, लम्बे समय से डिप्रेशन में: पैरेंट्स के तलाक पर इरा खान ने कही ये बात

आमिर खान की बेटी इरा ने कुछ दिनों पहले वीडियो शेयर कर बताया था कि वह डिप्रेशन में हैं। अब इरा ने फिर अपना वीडियो शेयर किया है और बताया कि उन्हें कभी समझ ही नहीं आया कि वह क्यों डिप्रेस हैं। इरा ने यह भी बताया कि उनके पेरेंट्स का तलाक भी उनके डिप्रेशन की वजह नहीं था। इस वीडियो में इरा खान अपनी जिंदगी से जुड़े कई राज खोलती नजर आ रही हैं।

इरा खान की मन की बात

वीडियो में इरा खान अपनी जिंदगी से जुड़ी बातें बताते हुए कह रही हैं, “काफी लोगों ने मुझे पूछा कि मैं डिप्रेस्ड क्यों हूँ और इस बात का जवाब मैं भी नहीं दे पाऊँगी क्योंकि मुझे खुद ही नहीं पता। पिछले कई साल से मैं इसे समझने की कोशिश कर रही हूँ लेकिन कोई सीधा और सही जवाब नहीं है। आज मैं आपको मेरी आसान और सहूलियत भरी जिंदगी के बारे में बताना चाहती हूँ। पैसों को लेकर मुझे कभी दिक्कत नहीं हुई। मेरे पास एक सपोर्ट सिस्टम है। मेरे माँ-पापा, मेरे दोस्त उन्होंने कभी मुझे किसी चीज का कोई दबाव नहीं दिया। मुझे पता था कि अगर मेरी जिंदगी में कुछ भी हुआ तो मैं अपने माँ-पापा के पास जाकर उनसे बात कर सकती हूँ।”

बताया डिप्रेशन में क्या करती थी

वीडियो में इरा खान आगे कहती हैं, “मैंने खुद का ख्याल रखना बंद कर दिया। मैं बहुत ज्यादा सोने लगी। अपनी जिंदगी ना जीने के बहाने, मैं वक्त सोने में गुजारती थी। पहले मैं काफी बिजी रहती थी फिर धीरे-धीरे मैं बेड से निकल ही नहीं पाती थी। अलग-अलग चीजों में भाग लेती थी और प्रॉमिस करती थी कि मैं आऊँगी लेकिन मैं जा ही नहीं पाती थी। फिर मैंने चीजों में भाग लेना बंद कर दिया। फिर मैंने अपने दोस्तों से बात करना बंद कर दिया क्योंकि मेरा मूड रोज-रोज खराब रहने लग गया था।”

आगे बात करते हुए वह कहती हैं, “मैं म्यूजिक भी नहीं सुन पाती थी क्योंकि उसमें भी आपको खुद के साथ रहना पड़ता है, तो मुझे टीवी देखना पड़ता था ताकि मैं खुद को उलझाए रखूँ और मुझे रोना ना आए। मेरा डिप्रेशन मेरा रोना बहुत बड़ा था क्योंकि मैं ऐसी इंसान नहीं हूँ, जिसे रोना बहुत जल्दी आ जाता है। 17 साल के बाद मेरा रोना शुरू हो गया। धीरे-धीरे रोना बढ़ता गया, कभी भी ये हो जाता था लेकिन कोई वजह नहीं थी। मुझे पता नहीं था कि मैं क्या करूँ इसलिए मैं बाथरूम भाग जाती थी। मुझे पता नहीं होता था कि मैं क्यों रोती हूँ।”

अपने पैरेंट्स के तलाक के बारे में भी की बात

वीडियो में इरा खान ने अपने पैरेंट्स के तलाक के बारे में भी बात करती नजर आईं। वह कहती हैं, “जब मैं छोटी थी तो मेरे पैरेंट्स का तलाक हो गया लेकिन उसको लेकर मुझे कोई बहुत बड़ा सदमा पहुँचा हो, ऐसा कुछ नहीं हुआ। मेरे माँ-बाप अभी भी बहुत अच्छे दोस्त हैं, कोई बिखरा हुआ परिवार नहीं है। जब मैं 6 साल की थी तब मुझे टीबी हुआ, तो टीबी भी मेरे लिए इतनी बुरी चीज नहीं थी कि मैं इतनी दुखी हूँ।”

14 साल की उम्र में हुआ था यौन शोषण

वो कहती हैं, “जब मैं 14 साल की थी तो मेरा यौन शोषण हुआ था, तो मुझे पता नहीं था कि क्या हो रहा है, लेकिन जब मुझे पता चला तो मैं इससे दूर चली गई। हाँ मुझे बुरा लगा कि मैंने अपने साथ ये क्यों होने दिया, लेकिन यह भी कोई जिंदगी भर का इतना बड़ा सदमा नहीं था कि मैं डिप्रेशन में जाऊँ। मुझे घुटन हो रही है, मैं रो रही हूँ, ये मैं अपने दोस्तों और माँ-पापा को बता सकती हूँ, पर क्या बताऊँ? वह मुझसे पूछेंगे? तो मैं क्या बताऊँगी? मेरे साथ कुछ बुरा ही नहीं हुआ है जैसा मैं महसूस कर रही हूँ। इस सोच ने मुझे उनसे बात करने से रोक दिया।” बता दें कि इरा और जुनैद आमिर खान और उनकी पहली पत्नी रीना दत्त के बच्चे हैं।