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अब मुख्तार अंसारी की पत्नी और साले पर यूपी पुलिस ने कसा शिकंजा: ₹28 करोड़ 58 लाख की संपत्ति जब्त

योगी सरकार अपराधी और माफियाओं के खिलाफ लगातार शिकंजा कस रही है। उत्तर प्रदेश के जाने माने बाहुबली और पूर्वांचल के बड़े माफिया मुख्तार अंसारी को प्रशासन ने आड़े हाथों ले लिया है। आए दिन उसके और उसके करीबियों के अवैध मकानों की कुर्की और उन्हें बुलडोजर से ध्वस्त करने के मामले सामने आ रहे है।

इसी कड़ी में शनिवार (7 सितंबर, 2020) शाम गाजीपुर पुलिस ने मुख्तार की पत्नी आफशा अंसारी और सालों के नाम रजिस्टर्ड 28 करोड़ 58 लाख की संपत्ति की कुर्की की। इतना ही नहीं पुलिस ने ढोल-डुग्गी बजवाते हुए अवैध संपत्ति के निर्माण और जमीन को कुर्क करने का नोटिस चस्पा किया है।

पुलिस अधीक्षक डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि अपराधिक गैंग आईएस-191 के लीडर मुख्तार अंसारी की पत्नी और दो सालों के विरुद्ध गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद एनबीडब्ल्यू वारंट जारी किया गया था, कोर्ट द्वारा निर्धारित तारीख पर नहीं पहुँचने के बाद तीनों के खिलाफ इनाम घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा कि अब इसकी 28.58 करोड़ रुपए की अनाधिकृत संपत्ति को पुलिस टीम ने कुर्क किया है। मुख्तार अंसारी की पत्नी आफसा अंसारी व उनके साले सरजील रजा और अनवर शहजाद संगठित आपराधिक गिरोह के रूप में अपराध करते है।

जेल में बंद मुख्तार अंसारी पर सख्त कार्रवाई करते हुए बबेड़ी गाँव स्थित एक करोड़ 80 लाख की संपत्ति (गाटा संख्या 607 रकबा 0.539 हेक्टेयर) को प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में शनिवार को कुर्क कर दिया गया। पुलिस के अनुसार अन्य संपत्तियों पर भी कार्रवाई अति शीघ्र करवाई जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक तरफ जहाँ मुख्तार सलाखों के पीछे है वहीं उसकी पत्नी आफसा, सरजील रजा और अनवर शहजाद फरार चल रहे हैं। पत्नी आफसा मुख्तार के अवैध कारनामों की बराबर की हिस्सेदार है। पुलिस ने उस पर भी कुर्क जमीन पर अवैध कब्जे का केस दर्ज किया हुआ है।

आफसा अंसारी पर सरकारी धन गबन करने का भी केस है। वहीं सरजील रजा, अनवर शहजाद पर सरकारी ठेका हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज लगाने का केस दर्ज है। गैंगस्टर केस के तीनों आरोपितों की धर पकड़ में यूपी पुलिस जुटी हुई है।

गौरतलब है कि इससे पहले यूपी प्रशासन ने माफिया और पूर्व विधायक मुख़्तार अंसारी के गाजीपुर स्थित अवैध साम्राज्य में ‘मुख़्तार अंसारी का ताजमहल’ कहे जाने वाले उसके गजल होटल को ध्वस्त कर दिया था। गजल होटल मुख़्तार अंसारी की बीवी और बेटों के नाम पर पंजीकृत था।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियंत्रक प्राधिकारी बोर्ड विनियमित क्षेत्र गाजीपुर ने बीते शनिवार को गजल होटल के मालिक अब्बास अंसारी व उमर अंसारी की अपील खारिज करते हुए इस पर कार्रवाई की थी। जिला प्रशासन जिले में भी एक के बाद एक कार्रवाई कर रही है। अब तक मुख्तार से जुड़े कुल 68 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क और अवमुक्त कराई जा चुकी है।

कानपुर लव जिहाद के मामले में SIT ने पूरी की जाँच: 9 मामलों में मिले चौकाने वाले सबूत

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कानपुर में लव जिहाद के मामलों की जाँच के लिए अगस्त में एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया था। पुलिस ने 14 केस में से आधे की जाँच पूरी कर ली है। इन 14 मामलों में कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। बता दें हाल ही में लव-जिहाद के मामलों पर सख्त रुख दिखाते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि लव जिहाद वाले नहीं सुधरे तो उनकी ‘राम नाम सत्य’ वाली यात्रा निकल जाएगी।

एनबीटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी के गठन के बाद इस्लाम धर्म कबूल कर निक़ाह करने वाले सारे मामलों पर संज्ञान लिया गया था। जिनमें 12 धर्मांतरण के मामले पहले के थे, वहीं 11 मामले मात्र तीन महीनों के अंदर इसी साल सामने आए थे। जिनमें सबसे ज्यादा चर्चित मामला शालिनी से फिजी फातिमा बनी युवती का था।

मीडिया को सूत्रों से जानकारी मिली है कि पुलिस ने जाँच दौरान जबरन इस्लाम कबूलवाने वाले 14 मामलों को एक अलग श्रेणी में रखा था। इनमें से 9 मामले एसआईटी को ऐसे मिले है जिसमें हिंदू लड़कियों को जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन करवाने के ठोस सबूत भी सामने आए है।

रिपोर्ट के अनुसार, आईजी रेंज मोहित अग्रवाल को लव जिहाद के इस घिनौने खेल की रिपोर्ट 1 हफ्ते के भीतर सौंप दी जाएगी। रिपोर्ट की जो बाहरी जानकारी सामने आई है उसमें कहा गया है कि भोली भाली दूसरे समुदाय की लड़कियों को मुस्लिम समुदाय के युवकों द्वारा अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर पहले प्रेम मोहब्बत की बात करके अपने झाँसे में लिया जाता था। इसके बाद उनका ब्रेनवॉश, जबरन इस्लाम धर्म कबूल करवाकर निकाह किया जाता था।

वहीं लव-जिहाद के कई मामलों में देखा गया है कि आरोपित ज्यादातर सोशल मीडिया के जरिए युवतियों से संपर्क बनाते है। ये सभी आसपास के ही रहने वाले होते है। उनसे प्यार भारी बातें और पानी की तरह पैसों को बहा कर उनका पहले विश्वास जीतते है। फिर उनसे प्रेम संबंध बनाते है। प्रेम जाल में फँसाने के बाद तमाम तरह के इमोशनल बातें कर उन्हें अपनों के खिलाफ बरगलाया जाता है। इसके बाद बहला-फुसलाकर अपने भगा ले जाते हैं और जबरन इस्लाम धर्म कबूल कराया जाता है।

सोशल मीडिया पर अपने परिवार वालों पर ही संगीन आरोप लगाने वाली शालिनी यादव से फिजा फातिमा बनकर निकाह करने वाली युवती ने वीडियो बवाल खड़ा कर दिया था। जिसके बाद हिंदूवादी संगठनों और युवती के भाई ने इसके पीछे लव जिहाद के खेल को रचने वाले एक पूरे गैंग का खुलासा किया था। वहीं कई पीड़ित परिवार भी सामने आकर लव जिहाद का शिकार हुई अपनी बेटियों के बारे बताया था। आरोप लगाया गया था कि कानपुर में लव जिहाद की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं। शहर में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो दूसरे समुदाय की लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाकर जबरन निकाह कराता है।

गौरतलब है कि गरीब घर से होने के बावजूद मुस्लिम युवक इन कारनामों को आसानी से अंजाम दे रहे थे। जिनमें लवजिहाद के पाँच आरोपित एक ही कॉलोनी के पाए गए थे जिन्होंने 5 हिंदू लड़कियों से निकाह किया था। ये पाँचो लड़के आपस में दोस्त भी थे। वहीं जब इन सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया तो सभी ने एक से बढ़कर एक महँगे वकीलों को अपने समर्थन में खड़ा कर दिया था।

वहीं कुछ दिन पहले इस मामले में पैसों का कनेक्शन देखते हुए पुलिस ने जब इसकी जाँच की तो इस घिनौने खेल के पीछे पाकिस्तानी संगठन का पता चला था। यह संगठन मुस्लिम युवकों को हिंदू लड़कियों का ब्रेनवाश और धर्मांतरण करने के लिए फंडिंग करता था। साथ ही इस पूरे मामले की साजिश के पीछे एक मस्जिद का भी नाम सामने आया था।

एजेंसी की जाँच में 50 हज़ार से अधिक फॉलोवर्स वाले पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी का पता चला था। ये फॉलोवर्स पूरे शहर में घूम घूम कर अपने समुदाय के लोगों को इस्लाम धर्म के प्रति कट्टर बनाने और हिंदुओं के प्रति नफरत भरने और उन्हें बरगलाने का काम कर रहे थे। एजेंडे के तहत उनके द्वारा भोली-भाली हिन्दू लड़कियों को फँसाने, इस्लाम कबूल करवाने के साथ ही कई हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा था।

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उमर खालिद के खिलाफ मुकदमे की अनुमति के लिए केजरीवाल को वामपंथी, कॉन्ग्रेस और मुस्लिम कट्टरपंथियों ने दी ‘चेतावनी’

दिल्ली दंगों के आरोपित व जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद के लिए केजरीवाल सरकार के यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के बाद कॉन्ग्रेस ट्रोल और इस्लामवादियों ने दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एक साथ हल्ला बोल दिए हैं।

उमर खालिद पर मुकदमे को मंजूरी देने के लिए अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के फैसले ने वामपंथी ‘कार्यकर्ताओं’ और इस्लामवादियों को नाराज कर दिया है। इन कट्टरपंथी सदस्यों को दिल्ली सरकार से बहुत उम्मीदें थीं कि यह सांप्रदायिक दंगों के आरोपित उमर खालिद के खिलाफ अभियोजन को मंजूरी नहीं देगा, क्योंकि इन्होंने जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और अन्य पर राजद्रोह के मामले में मुकदमा चलाने से इनकार कर दिया था।

यह ध्यान रखना उचित है कि दिल्ली सरकार ने शुरू में कन्हैया कुमार पर मुकदमा चलाने के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। हालाँकि, बाद में, अत्यधिक सार्वजनिक दबाव के कारण, दिल्ली सरकार को कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ जेएनयू के राजद्रोह के मुकदमे में मुकदमा चलाने के लिए अपनी सहमति देनी पड़ी।

इसी तरह, दिल्ली सरकार ने वामपंथी कट्टरपंथी तत्वों को एक बड़ा झटका देते हुए उमर खालिद के खिलाफ मुकदमा चलाने की सहमति दे दी, जो दिल्ली में हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों की साजिश रचने के लिए कड़े आतंकवाद विरोधी गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज किया गया था। फरवरी में इसने 50 से अधिक लोगों की जान ले ली।

वामपंथी कट्टरपंथी और इस्लामवादी अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार पर भड़के

केजरीवाल द्वारा केस चलाने की अनुमति देने के तुरंत बाद JNU छात्र नेता अध्यक्ष आइशी घोष ने अपने ट्वीट में सीएम का नाम लिख कर स्पष्ट कहा कि ये धोखेबाजी/ विश्वासघात वो कभी नहीं भूलेंगी। आइशी ने लाइव लॉ के ट्वीट पर अपना रिप्लाई दिया, जिसमें जानकारी दी गई थी कि केजरीवाल सरकार ने उमर के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत कार्रवाई करने की इजाजत दे दी है। इसी ट्वीट पर आइशी ने लिखा, “श्रीमान अरविंद केजरीवाल प्रत्येक विश्वासघात को कभी भुलाया नहीं जाएगा।”

एक अन्य अल्ट्रा-लेफ्ट छात्र नेता साईं बालाजी ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए इसे ’आपदा’ बताया और उन पर भाजपा और आरएसएस का हिस्सा होने का आरोप लगाया।

बालाजी ने कहा कि AAP बीजेपी-आरएसएस के एजेंडे के लिए खड़ा है और उन्हें दिए गए जनादेश के खिलाफ खड़ा है।

Tweet by Sai Balaji

एक वामपंथी ट्रोल ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे ‘संघी-बी टीम’ होने का दावा किया कि उमर खालिद एक ’नायक’ था जिससे वे डरते हैं।

Tweet by one Subytweets

शेहला रशीद ने दिल्ली सरकार के फैसले का उल्लेख करते हुए, न केवल यह दावा किया कि उसके अमेरिका में दोस्त थे, बल्कि यह भी कहा कि उसके ये ‘दोस्त’ आसानी से अमेरिका में इस तथ्य के लिए सांत्वना ले सकते हैं कि उनका कम से कम वास्तविक विरोध था।

मूल रूप से, रशीद ने कहा कि आम आदमी पार्टी सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ विपक्ष की भूमिका में नहीं रही।

Tweet by Shehla Rashid

कुख्यात इस्लामी ‘पत्रकार’ राणा अयूब ने भी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोला।

Tweet by Rana Ayyub

विडंबना की बात यह है कि इन वामपंथी कार्यकर्ताओं और इस्लामवादियों ने उत्साहपूर्वक आम आदमी पार्टी के नेताओं जैसे अमानतुल्ला खान, ताहिर हुसैन के साथ मुस्लिम विरोधी भीड़ को सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान उकसाने के लिए हाथ मिलाया था। बाद में, इन्हीं लोगों ने 2020 के दिल्ली चुनावों में AAP और अरविंद केजरीवाल के लिए भी प्रचार किया था और उम्मीद की थी कि AAP सत्ता में आने के बाद उन्हें दिल्ली की सड़कों पर अराजकता पैदा करने देगी।

आम तौर पर, आम आदमी पार्टी ने इन वामपंथी और इन कट्टरपंथियों के अत्याचारों की अनदेखी की थी, इस उम्मीद में कि उनका इस्तेमाल दिल्ली चुनाव के दौरान किया जा सके।

हालाँकि, दिल्ली सरकार ने इस बार इन कट्टरपंथी तत्वों की ओर से मुँह मोड़कर, कानून के समक्ष जवाबदेह ठहराए जाने से पहले उमर खालिद को आजाद करने की उनकी उम्मीदों को कुचल दिया है।

सिर्फ कट्टरपंथी वामपंथी और इस्लामवादी ही नहीं, इन कट्टरपंथी गुटों के सदाबहार समर्थक- कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम भी AAP के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के खिलाफ हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मामले में UAPA के तहत उमर खालिद के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से आहत है।

Tweet by Congress troll

सोशल मीडिया पर हिंदू विरोधी घृणा और फर्जी खबरें फैलाने के लिए जाना जाने वाले श्रीवास्तव ने दावा किया कि उमर खालिद के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए केजरीवाल की मंजूरी ने साबित कर दिया कि AAP और कुछ नहीं, BJP की बी टीम है। दोनों की राजनीतिक और वैचारिक समानता है।

उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल ने अल्पसंख्यकों और भाजपा विरोधी कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न समर्थन किया है, जबकि यह भी कहा कि केवल कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी भाजपा और आरएसएस के खिलाफ एक विरोधी के रूप में खड़े रहे।

एक अन्य कॉन्ग्रेस ट्रोल संघमित्रा ने कहा कि दिल्ली में मुस्लिमों ने 2020 के दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी को भारी वोट दिया था, हालाँकि, केजरीवाल उमर खालिद पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देकर उन्हें ब्याज दे रहे हैं।

Tweet by Congress troll

इस तरह से कॉन्ग्रेस ने उमर खालिद जैसे कट्टरपंथी इस्लामवादी की तुलना करके दिल्ली के मुसलमानों का सामान्यीकरण किया।

Tweet by Congress troll

एक अन्य कॉन्ग्रेस ट्रोल अजय ने कहा कि उमर खालिद जेएनयू से पीएचडी होने के बावजूद अरविंद केजरीवाल की संघ परिवार की जड़ों के माध्यम से देखने की दूरदर्शिता नहीं रखते।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने दिल्ली दंगे मामले में पुलिस की तरफ से दर्ज किए गए हर केस में प्रॉसिक्यूशन की मंजूरी दे दी है। अब यह कोर्ट को देखना है कि आरोपित कौन हैं।

बता दें कि इस साल के फरवरी माह में हुए दंगों में उमर खालिद को 13 सितंबर को यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस पर राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में दंगों का षड्यंत्र रचने, भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था।

यूपी में कुख्यात डॉन बदन सिंह बद्दो के शाही बंगले की हुई कुर्की: मेरठ से भागा था 2.5 लाख का इनामी हिस्ट्रीशीटर

योगी सरकार इन दिनों माफ‍िया और अवैध कार्यों से जमा की गई संपत्ति और अवैध निर्माण को लेकर कड़ी कार्रवाई कर रही है। अपराधियों पर नकेल कसने की इस कड़ी में प्रशासन ने मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और सुंदर भाटी के बाद अब वेस्ट यूपी के कुख्यात बदन सिंह पर शिकंजा कसा है। मेरठ पुलिस ने शनिवार (7 नवंबर, 2020) की सुबह ढाई लाख के इनामी हिस्ट्रीशीटर बद्दो के घर की कुर्की ढोल नगाड़े के साथ की।

यह कुर्की एसपी कृष्ण बिश्नोई और ब्रह्मपुरी सीओ अमित कुमार राय के नेतृत्व में की गई है। पंजाबीपुरा में स्थित कुख्यात बदमाश के कोठे पर ब्रह्मपुरी और टीपी थाना पुलिस ने पहुँचकर इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। पुलिस ने घर में रखा सारा कीमती सामान जब्त कर लिया। इस दौरान घर के भीतर बदन सिंह बद्दो की बहन मौजूद थी। कुर्की से पहले पुलिसने अदालत के आदेश को भी पढ़ा। कुर्की किया गया मकान बद्दो के नाम पर है।

जिसके बाद पुलिस ने समान को जब्त कर कई गाड़ियों में भरकर उन्हें थाने भेज दिया। पुलिस अधिकारियों ने पूरे घर को खंगाला और उसके बाद घर के सामान को जब्त करने की कार्यवाही की गई।

कुर्की के दौरान ढोल बजाकर लोगों को जानकारी दी जा रही थी कि बदन सिंह बद्दो की घर की कुर्की की जा रही है। अगर इस कुर्की से किसी को ऐतराज है तो वो यहाँ आ करके अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। वहीं, सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना ना हो सके।

गौरतलब है कि वेस्टर्न यूपी का कुख्यात बदमाश बदन सिंह बद्दो पिछले 20 महीने से फरार चल रहा है। मेरठ के एक होटल से अप्रैल 2019 में एक पेशी के दौरान वह पुलिस को चकमा देकर भाग गया था। जिसके बाद से आज तक बदन सिंह बद्दो का कोई पता नहीं चल पाया है। लेकिन समय-समय पर बदन सिंह बद्दो सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता है। जिस पर वह अपने विरोधियों और पुलिस धमकी देता है।

बद्दो पर अपरहण, रंगदारी और जमीन कब्जे को लेकर कई मामले दर्ज है। इसके अलावा मुजफ्फरनगर के सुशील मूंछ और बदन सिंह की जोड़ी का अपराध की दुनिया में बोलबाला है। पिछली सरकारों में लोगों पर दबदबा बनाने वाले इन बदमाशों की कमर यूपी की योगी सरकार ने तोड़ दी है। सरकार की सख्त कार्रवाई से परेशान ये अपराधी अपनी जान बचाने के लिए छुपते हुए इधर-उधर भटक रहे है।

मोस्ट वांटेड और उत्तर प्रदेश के टॉप टेन बदमाशों की सूची में शामिल बदन सिंह बद्दो के शाही बंगले की कीमत करोड़ों में है। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि बदन सिंह उर्फ बद्दो पुत्र चरन सिंह निवासी बेरीपुरा टीपीनगर एक अभ्यस्त अपराधी है। वह बार-बार अपराध कर रहा है। उसने आर्थिक और भौतिक चाहत के लिए अपराध किया, जिससे आम जनता में भय और रोष व्याप्त है। ऐसे अभ्यस्त अपराधी की लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई के लिए बद्दो को जिले का अपराध माफिया घोषित किया गया है।

‘2013 से अन्वय नाइक वित्तीय संकट में थे, अर्णब ने आत्महत्या के लिए नहीं उकसाया’: जानिए क्या कहती है 2019 की क्लोजर रिपोर्ट

महाराष्ट्र सरकार के इशारे पर रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी के खिलाफ ‘विच हंट’ में जुटी मुंबई पुलिस को 2019 में अन्वय नाइक आत्महत्या मामले में दायर क्लोजर रिपोर्ट कठघरे में खड़ा करती है।

केस का बैकग्राउंड

यह मामला इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की मृत्यु से संबंधित है, जिसने मई 2018 में आत्महत्या कर ली और अपने पीछे एक सुसाइड नोट छोड़ गया। इस सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया कि अर्णब गोस्वामी ने उनका ₹83 लाख का बकाया नहीं चुकाया। सुसाइड नोट में दो अन्य लोगों- फिरोज शेख और नितेश सारडा का भी नाम था। उन दोनों पर क्रमश: ₹4 करोड़ और 55 लाख न चुकाने का आरोप लगाया। यहाँ पर यह ध्यान देना उचित है कि मामला अप्रैल 2019 में बंद कर दिया गया था और अब अर्नब गोस्वामी को चुप कराने के लिए पुलिस द्वारा एकतरफा रूप से खोला गया है।

द इंडियन एक्सप्रेस की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, अन्वय नाइक आत्महत्या मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों को रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी, नितेश सारडा और फिरोज शेख के बीच कोई संबंध नहीं मिला। उन्हें कोई सबूत नहीं मिला जो यह सत्यापित कर सके कि तीनों ने नाइक का जीवन ‘असहनीय’ बनाया या आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार, मामले की जाँच कर रही रायगढ़ पुलिस ने अप्रैल 2019 में मजिस्ट्रेट के सामने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में ‘case summary’ दायर किया था। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि आरोपित के खिलाफ पर्याप्त सबूत के अभाव में ‘summary’ दायर किया गया। जिससे पुलिस को आरोप पत्र प्रस्तुत करने से रोका जा सके।

अर्णब गोस्वामी और अन्य आरोपितों के बीच कोई संबंध नहीं है

क्लोजर रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया, “तीनों अभियुक्तों को विभिन्न क्षेत्रों, स्थानों और तीनों के बीच कोई संबंध नहीं होने के कारण जाँच में प्रमाणित किया गया है। अब तक की जाँच में इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि सुसाइड नोट में नामजद तीन आरोपितों की ओर से की गई कार्रवाई, व्यक्तिगत रूप से या एक साथ मिलकर, मृतक के जीवन को असहनीय बना दिया या उसके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसलिए, इस मामले में साक्ष्य के अभाव में, ‘अंतिम सारांश’ को स्वीकार किया जाना चाहिए।” 

अन्वय नाइक की कंपनी भारी घाटे में थी

इसमें आगे कहा गया, “जाँच से पता चला कि पिछले छह से सात वर्षों (2018 से पहले), कॉनकॉर्ड (अन्वय नाइक की कंपनी) को वित्तीय नुकसान हो रहा है, जिसके कारण अन्वय नाइक और उनकी माँ मानसिक तनाव में थे। चूँकि उनकी माँ कंपनी में भागीदार थीं, इसलिए उन्होंने उनकी गला दबाकर हत्या कर दी, और फिर खुद को लटका दिया। ऐसा उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा।”

क्लोजर रिपोर्ट में दोहराया गया है कि कॉनकॉर्ड डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड ने कई ग्राहकों के काम को अधूरा छोड़ दिया था, जिनमें से अन्वय नाइक का नाम भी शामिल था। सुसाइड नोट में इसका जिक्र किया गया था। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया, “आरोपितों ने पुलिस के सामने पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार वेंडरों और विक्रेताओं को भुगतान किया।” रायगढ़ पुलिस द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एल जी पच्ची ने 16 अप्रैल, 2019 को स्वीकार कर लिया।

इंडियन एक्सप्रेस ने विशेष रूप से कॉनकॉर्ड ऑफ कंपनीज के साथ कॉनकॉर्ड द्वारा दायर वार्षिक वैधानिक रिटर्न को एक्सेस किया। विवरण के अनुसार, कंपनी पर वित्तीय वर्ष 2016 में ₹26.5 करोड़ का कर्ज था। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी जल्द ही निष्क्रिय हो गई और उस वर्ष के बाद से उसने वार्षिक रिटर्न दाखिल करना भी बंद कर दिया।

अन्वय नाइक के परिवार द्वारा लगाया गया आरोप

जब अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई, तो पीड़ित परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील वैभव कार्णिक ने आरोप लगाया था कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की सत्यता संदिग्ध थी। उन्होंने दावा किया, “पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट कई दस्तावेजों पर आधारित थी जैसे कि अभियुक्तों द्वारा जमा किए गए डेबिट नोट, जिनकी गिनती भी नहीं की गई थी और इसलिए, उनकी सत्यता संदिग्ध है।”

अन्वय नाइक की बेटी अदन्या नाइक ने भी दावा किया था कि अर्णब गोस्वामी और अन्य आरोपित एक-दूसरे को जानते थे। उसने आरोप लगाया, “जब मेरे पिता फिरोज शेख को भुगतान करने के लिए कहा, तो उन्होंने कहा कि गोस्वामी ने भी भुगतान नहीं किया है। उसे कैसे पता चला कि भुगतान किसने किया था? इसका मतलब है कि वे एक दूसरे से जुड़े हुए थे।” उसने यह भी दावा किया कि इस मामले की जाँच करने वाले इंस्पेक्टर सुरेश एच वरडे ने मामले को ‘अविश्वसनीय’ बनाना चाहा और शिकायत वापस लेते हुए उन्हें एक बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए धमकाया।

इस मामले में मई में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख द्वारा अवैध रूप से फिर से जाँच का निर्देश देने के बाद पीड़ित की पत्नी अक्षत नाइक ने 12 अक्टूबर को मामले को फिर से खोलने के लिए 35 कारण प्रस्तुत किए थे।

जाँच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई

इस बीच, मुंबई पुलिस ने इंस्पेक्टर सुरेश एच वरडे के खिलाफ विभागीय जाँच शुरू की थी, ताकि मामले के तथ्यों को मिटा दिया जाए। उन्हें निरीक्षक के पद से जिला यातायात विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया था कि ट्रैफिक विभाग में उनके स्थानांतरण के बावजूद वाडारे ने मामले की जाँच जारी रखी। अक्षत नाइक ने आगे आरोप लगाया कि अर्णब गोस्वामी ने अपने केबिन में मुंबई के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को अपना बयान दिया था और जाँच रिपोर्ट में उसका कोई उल्लेख नहीं है।

अर्णब गोस्वामी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया

इससे पहले, अलीबाग अदालत ने अर्णब गोस्वामी की 14 दिनों की पुलिस हिरासत की माँग को लेकर मुंबई पुलिस की याचिका खारिज कर दी थी, जिसे 4 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। आधी रात को चली सुनवाई के बाद, अलीबाग कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी एडिटर-इन-चीफ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनैना पिंगले ने कहा था कि पुलिस मृतक और गोस्वामी के बीच प्रथम दृष्टया लिंक स्थापित करने में विफल रही है। CJM ने माना, “आरोपित व्यक्तियों की गिरफ्तारी के पीछे के कारणों और आरोपित व्यक्तियों द्वारा दी गई दलीलों को ध्यान में रखते हुए, गिरफ्तारी प्रथम दृष्टया अवैध लगता है। कोई भी ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया है जो इस अदालत को गिरफ़्तार अभियुक्तों को पुलिस हिरासत में भेजने के लिए वारंट देता हो।”

मंदिर संस्कृति की पहचान, ज्ञान-गौरव के केंद्र, धार्मिक कार्यों के अलावा किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए न हो उपयोग: मद्रास HC

मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार धार्मिक कार्यों के अलावा किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए मंदिर की भूमि का उपयोग नहीं कर सकती है। तमिलनाडु में दो मंदिरों की भूमि को अलग करने के संबंध में भक्तों द्वारा की गई शिकायतों का जवाब देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि मंदिर की भूमि का उपयोग केवल मंदिर के लाभकारी उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

उच्च न्यायालय ने यह भी माना कि तमिलनाडु में मंदिर न केवल प्राचीन संस्कृति की पहचान का स्रोत हैं बल्कि यह कला, विज्ञान और मूर्तिकला के क्षेत्र में प्रतिभा के गौरव और ज्ञान का प्रमाण भी है।

अदालत ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग को निर्देश दिया कि वह समय-समय पर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए एक अधिकारी की नियुक्ति कर सभी मंदिर भूमि की पहचान और अतिक्रमणकारियों से उनकी सुरक्षा करे।

हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग तमिलनाडु सरकार के विभागों में से एक है जो राज्य के भीतर मंदिर प्रशासन के प्रबंधन और विनियमन के लिए जिम्मेदार है।

बता दें यह मामला नीलकंरई के पास श्री शक्ति मुथम्मन मंदिर और सलेम में कोट्टई मरियम्मन मंदिर की भूमि के अतिक्रमण से संबंधित है। अदालत ने मंदिर के भूमि के अतिक्रमण के खिलाफ भक्तों द्वारा दायर कई याचिकाओं के जवाब में अपने आदेशों की घोषणा की।

गौरतलब है कि यह याचिका राज्य के मत्स्य विभाग द्वारा श्री शक्ति मुथम्मन मंदिर से संबंधित कुछ भूमि पर एक आधुनिक मछली बाजार, मछली भोजनालय और कार्यालय भवन विकसित करने के बाद दायर की गई थी। विभाग ने भक्तों द्वारा की गई आपत्तियों की अवहेलना की थी।

इसी तरह, अरुलमिघु कोट्टई मरियम्मन थिरुकोइल से संबंधित कुछ जमीन बिना किसी लिखा पढ़ी के क्षेत्रीय परिवहन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई। साथ ही पुल बनाने के लिए मंदिर की कुछ जमीनों को राजमार्ग विभाग ने भी अपने कब्जे में ले लिया था।

धार्मिक संस्थानों को ठीक से बनाए रखा जाना चाहिए: मद्रास HC

न्यायमूर्ति आर महादेवन ने अपने आदेश में निर्देश दिया कि धार्मिक संस्थानों, विशेष रूप से मंदिरों की संपत्तियों का रखरखाव ठीक से किया जाना चाहिए। अदालत ने तमिलनाडु सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, एचआर एंड सीई डिपार्टमेंट, जो मंदिर की संपत्तियों का संरक्षक है, ने मंदिर की संपत्तियों का रखरखाव ठीक से नहीं किया, यह विषय इस विभाग के दायरे में आता है। इस तरह का रवैया बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

न्यायाधीशों ने मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, उन्होंने मत्स्य विभाग को भी बुलाया, जिसने एचआर और सीई विभाग के साथ एक समझौते के तहत नीलकंरई के पास एक इमारत का निर्माण किया है, जिसके लिए किराया एकत्र किया जाएगा।

इसके अलावा न्यायमूर्ति आर महादेवन ने एचआर एंड सीई डिपार्टमेंट के आयुक्त को सभी अतिक्रमणों को वापस से हटाने और भूमि पुनः प्राप्त करने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “एचआर और सीई विभाग भूमि की सुरक्षा के लिए एक दीवार लगाकर निर्माण शुरू करने के लिए कदम उठाएगा। मंदिर संबंधी उद्देश्यों को छोड़कर भूमि का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा। एचआर और सीई विभाग के कमिश्नर द्वारा प्राधिकृत अधिकारी मंदिरों और इसके गुणों के वित्तीय पहलुओं के संबंध में एक उचित रजिस्टर बनाए रखेगा और नियमित अंतराल पर संबंधित प्राधिकरण के समक्ष उसे दाखिल करेगा।”

‘हिम्मत है तो मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री को यूपी ले जाकर दिखाओ’: उद्धव ठाकरे की गीदड़-भभकी का राजू श्रीवास्तव ने दिया जवाब

उत्तर प्रदेश के नोएडा में बन रही फिल्म सिटी को लेकर अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे बौखला गए हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि अगर हिम्मत है तो फिल्म इंडस्ट्री को मुंबई से उत्तर प्रदेश ले जाकर दिखाएँ। उन्होंने आक्रामक अंदाज़ में कहा कि जिस भूमि पर दादा साहब फाल्के ने फिल्म निर्माण की शुरुआत की थी, उस जगह पर वो किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने देंगे। नोएडा में फिल्म सिटी बनने के फैसले के साथ ही भाजपा और शिवसेना सामने-सामने हैं।

एबीपी न्यूज़ की खबर के अनुसार, यूपी में फिल्म सिटी को लेकर बोलते हुए सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में कई सारी समस्याएँ और परेशानियाँ हैं, जिन्हें दूर करने का काम उनकी सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड इंडस्ट्री को जो भी सुविधाएँ चाहिए होंगी, वो उन्हें मुहैया करवाया जाएगा। उन्होंने महाराष्ट्र में सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले फिल्मों के निर्माण की बात करते हुए यूपी में बनने वाली फिल्म सिटी पर तंज कसा। उन्होंने कहा:

“सबसे अच्छी गुणवत्ता के फिल्मों के निर्माण के लिए लिए आपको प्रौद्योगिकी और स्थान की आवश्यकता पड़ेगी। इसे ध्यान में रखते हुए एक कार्य योजना तैयार की जाए। फिल्म इंडस्ट्री अपनी प्राथमिकताएँ निर्धारित करें और हम इसे पूरा करेंगे। आज साउंड-मिक्सिंग के लिए लोग लंदन जाते हैं। हमारे पास मुंबई में संसाधन व सुविधाएँ क्यों नहीं हो सकतीं? हम अधिक लोगों तक पहुँच के लिए राज्य में ऐसे थिएटर और सिनेमा घर स्थापित करने के लिए भी काम करेंगे, जहाँ लोगों का ज्यादा खर्च न हो।”

उद्धव ठाकरे ने ऐलान किया कि सरकार जल्द ही फिल्म और मनोरंजन उद्योग के सभी हितधारकों के साथ मिलकर मेगा-सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेगी और इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश करेगी। इससे पहले शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ में भी ‘मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री को नोएडा शिफ्ट करने के षड्यंत्र’ को लेकर आरोप लगाए गए थे। उसने मुंबई को देश की आर्थिक के साथ-साथ सांस्कृतिक राजधानी भी करार दिया था।

कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव ने उद्धव ठाकरे को करारा जवाब देते हुए कहा कि यूपी में फिल्म सिटी के निर्माण का काम मुकाबले के लिए नहीं, बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने रोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए फिल्म सिटी का खाका तैयार किया है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ और गंगाघाट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यूपी में बड़े कलाकार पहले से शूटिंग करते आ रहे हैं और क्योंकि यहाँ धार्मिक और रमणीय स्थलों की संख्या अच्छी खासी है।

‘न्यूज़ 18’ की कुमारी रंजना से बात करते हुए राजू श्रीवास्तव ने कहा कि रोजगार के लिए चिंतित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर विभाग को खँगाल रहे हैं, जहाँ सम्भावनाएँ हों और रोजगार उपलब्ध कराया जा सके, और इसी के तहत फिल्म सिटी का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी में फिल्म स्टूडियो हो या रियल लोकेशन्स हों, जहाँ मराठी फिल्में भी बनें, अंग्रेजी फिल्में भी बने और दूसरी भाषाओं की फिल्मों का भी निर्माण हो।

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कम से कम समय में उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए 1000 एकड़ की भूमि की व्यवस्था किए जाने की बात भी कही गई है। सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि ये फिल्म सिटी अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। इसके लिए पूरी योजना तैयार कर ली गई है। कुछ दिनों पहले बड़ी फ़िल्मी हस्तियों के साथ बैठक में उपस्थित लोगों को नक्शों और डायग्राम्स के जरिए इसका पूरा ब्लूप्रिंट दिखाया गया।

कर्नाटक: जनता की माँग पर CM येदियुरप्पा ने पटाखों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटाया

शुक्रवार (नवंबर 06, 2020) को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने घोषणा की कि वे हिन्दुओं के पवित्र त्योहार दिवाली पर पटाखे जलाने पर प्रतिबन्ध लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस विषय पर चर्चा की और पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। एक आदेश जारी किया जा रहा है। इसका कारण कोविड-19 महामारी है।”

हालाँकि, अपने पूर्व निर्णय को बदलते हुए, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने पटाखों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटाने का फैसला किया। मुख्यमंत्री कार्यालय से पूर्ण प्रतिबंध लगाने के 8 ही घंटे बाद दूसरा बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया, “दिवाली में पटाखों पर प्रतिबन्ध लगाने के बाद हमें कई सुझाव मिले। लोगों को अपनी तथा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए साधारण तरीके से त्योहार मनाना चाहिए।”

गौरतलब है कि इस वर्ष कई राज्यों ने दिवाली के पटाखों पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाए हैं। पराली जलने की समस्या का प्रबंधन करने में असफल रही पंजाब सरकार, जो दिल्ली-एनसीआर-पंजाब क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण का मुख्य कारण है, भी इनमें शामिल है।

हाल ही में पंजाब सरकार ने पटाखों के विक्रय पर कार्रवाई करने का दावा भी किया, जबकि इसी दौरान पराली जलाने की समस्या 4 वर्षों में सबसे अधिक थी। अन्य राज्य, जहाँ दिवाली मनाने पर हिन्दू गिरफ्तार किए जा सकते हैं, जहाँ यह सदियों चला आ रहा है, उनमें आते हैं- ओडिशा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और राजस्थान।

हालाँकि, कर्नाटक राज्य सरकार ने पटाखों पर पहले पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया था, लेकिन अब कहा गया है कि लोग यदि चाहें तो ग्रीन-पटाखे जलाकर दिवाली मना सकते हैं। अब तक, कर्नाटक की ही एकमात्र सरकार है जिसने जनता की भावनाओं का ध्यान रखा है और दिवाली में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने के अपने निर्णय को वापस लिया है।

‘पूरा भारत मेरे बाप की मिल्कियत, अब्बा की जमीन है, अब ये लड़ाई हिस्सेदारी की लड़ाई है’: असदुद्दीन ओवैसी

बिहार में विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण में प्रवेश करते ही, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक चुनावी रैली में विवादित टिप्पणी की। विवादास्पद राजनेता ने भारत पर अपने पूर्वजों का मालिकाना हक बताया।

ओवैसी ने कहा, “असदुद्दीन ओवैसी बिहार का तो नहीं है, मगर ये पूरा भारत असदुद्ददीन ओवैसी के बाप की मिल्कियत है। कैसे है? हमारे अब्बा, आपके अब्बा, उनके अब्बा, उनके अब्बा के अब्बा जब दुनिया में कदम रखे, तो भारत में रखे थे कदम। तो ये हमारे अब्बा की जमीन हुई और किसी माई के लाल में ताकत नहीं है कि हमको हमारी अब्बा की जमीन पर घुसपैठी करार दे। ये अब्बा की जमीन है और अब्बा की जायदाद में बेटी और बेटे का हिस्सा मिलेगा। अब ये लड़ाई हिस्सेदारी की लड़ाई है।”

बिहार चुनाव के अंतिम चरण की पूर्व संध्या पर ओवैसी की विवादास्पद टिप्पणी आई। AIMIM प्रमुख बिहार में एक रैली को संबोधित कर रहे थे, जब उन्होंने यह विवादित टिप्पणी की। ओवैसी की इस विवादास्पद टिप्पणी की हर तरफ आलोचना हो रही है।

ओवैसी के AIMIM का इतिहास और हिंदुओं पर अत्याचार

चूँकि, ओवैसी ने जोर देकर कहा कि उनके पूर्वज भारत के हैं, इसलिए भारतीयों के प्रति उनके पूर्वाग्रहों और उनके कार्यों को जानने की जरूरत है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन रजाकारों की विरासत है। एक जिहादी आतंकी समूह, जिसने निजाम के राज्य में हिंदुओं के खिलाफ अनगिनत अत्याचार किए। जिसे भारत के लौह पुरुष सरदार पटेल द्वारा कुचल दिया गया था। वर्ष 1927 में स्थापित मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन निज़ाम समर्थक पार्टी थी। जो कि निज़ाम के हैदराबाद को पूरी तरह से भारतीय संघ में विलय नहीं करना चाहती थी।

अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एमआईएम के कासिम रिज़वी ने नेतृत्व वाले रजाकारों को बुलवाया। दरअसल, रजाकार मूल रूप से जिहादी भीड़ थी, जिसे एमआईएम ने सड़कों पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए इस्तेमाल किया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र रहे रिजवी को वर्ष 1946 में एमआईएम का अध्यक्ष चुना गया था, जिसने रजाकारों का नेतृत्व किया था। तब उसने इस क्षेत्र में हिंदुओं के खिलाफ सबसे जघन्य अपराध किए थे। यहाँ तक कि रजाकारों ने महिलाओं और बच्चों के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार किए, हिंदुओं का उत्पीड़न किया और हिंदुओं की हत्याएँ कीं। लेकिन जल्द ही सरदार पटेल ने सामने आकर इस पागलपन का अंत कर दिया। 

उन्होंने निज़ाम को घुटने के बल लाया और उसे भारतीय संघ में प्रवेश करने के लिए मजबूर कर दिया। ऑपरेशन पोलो भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया था, जिससे रजाकार भारतीय सेना से दंग थे। यही कारण था कि उन्होंने विनम्रतापूर्वक आत्मसमर्पण कर दिया। जिसके बाद निजाम के मंत्री लईक अली और कासिम रिज़वी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जिसके चलते रिजवी ने आखिरकार नौ साल की जेल की सजा काटी और फिर उसे इस शर्त पर रिहा किया गया कि वह पाकिस्तान के लिए रवाना हो जाएगा। जिसे उसने पूरा किया।

बिहार चुनाव के लिए AIMIM मैदान में

इस चुनाव में एआईएमआईएम ने उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, बसपा एवं कुछ अन्य दलों के साथ मिलकर ‘ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर अलांयस’ (जीडीएसएफ) का गठन किया है। कुशवाहा इस गठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।