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यादवों के इलाके में रहकर भो$₹* वोट तुम कमल को दोगे?: RJD के गुंडो ने परिवार पर किया हमला

बिहार चुनाव में RJD के गुंडों ने एक परिवार पर हमला करते हुए उनके साथ सिर्फ इस कारण बदसलूकी की क्योंकि उन्होंने भाजपा को वोट दिया था। बिहार में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मतदान के दूसरे चरण के दिन सोशल मीडिया पर एक वीडिया सामने आई है। यह वीडियो बिहार के फतुहा जिले की बताई जा रही है। JDU नेता संजय कुमार झा ने इसे अपने ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें एक कवींद्र महतो नामक बुजुर्ग का परिवार अपने ऊपर हुए हमले की घटना बताते हुए सुना जा सकता है।

ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया है कि बिहार के फतुहा में RJD के गुंडों ने कवींद्र महतो के परिवार पर हमला करके उनसे गाली-गलौज की क्योंकि उन्होंने भाजपा को वोट दिया था।

वीडियो शेयर करते हुए अंकुर लिखते हैं, “तेजस्वी के गुंडो ने इनसे कहा, ‘यादव के इलाके में रहकर वोट कमल को दोगे।’ कल्पना कीजिए कि आरजेडी के सत्ता में आने से स्थिति क्या होगी?”

वहीं, संजय सिंह झा ने इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा है कि इस बार बिहार में जंगलराज लाने की नापाक कोशिशें कामयाब नहीं होंगी।

क्या है वीडियो में?

वीडियो में कवींद्र महतो के बेटे को कहते सुने जा सकता है, “कुछ लोग चाहते थे कि हम लोग वोट देने न जाएँ क्योंकि उन्हें पता था कि हम उनके मनपसंद पार्टी को वोट नहीं देंगे। तो जब हम वोट देकर लौटे और घर पर आकर कपड़े उतारने लगे तभी वो आ गए। वो चाहते थे कि लालटेन को वोट दिया जाए।”

यहाँ बता दें कि लालटेन RJD का चुनाव चिह्न है, जिसका नेतृत्व इस बार लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव कर रहे हैं और युवाओं को सुनहरे भविष्य के सपने दिखा रहे हैं। जबकि उनके कार्यकर्ता व समर्थक ऐसी घटनाओं को अंजाम देते पाए जा रहे हैं।

वीडियो में नजर आ रही परिवार की एक महिला को कहते सुना जा सकता है, “जिसको मन करेगा हम उसे वोट देंगे।” वहीं, युवक की माँ और कवींद्र महतो की पत्नी बताती हैं कि हमलावरों ने उन्हें मारते हुए गाली भी दी और कहा कि वो उन लोगों को यहाँ नहीं रहने देंगे। वीडियो में एक आवाज यह भी आती है कि 7-8 साल से यह लोग तंग कर रहे हैं।

कवींद्र महतो की पत्नी बताती है कि हमलावरों ने उन्हें गाली देते हुए कहा,”यादवों के इलाके में रहकर भो$₹* वोट तुम कमल को दोगे?” वह आगे अपने गाल पर लगी चोटों को दिखाते हुए बताती हैं कि उन पर भी किस तरह हमला हुआ और उनके बेटे को कैसे मारा गया।

इसके बाद कवींद्र महतो भी वीडियो में अपनी चोट दिखाते हैं। उनके हाथ में चोट आई है। वीडियो में परिवार को कहते सुना जा सकता है कि उन पर ईंट, रॉड, पत्थर से हमला हुआ है और उनका वार्ड नंबर 14 है।

50+ आतंकियों को फ्रांस ने मार गिराया: फाइटर प्लेन और मिसाइलों से किया हमला, आतंकवाद के खिलाफ एक्शन में फ्रांस

अलकायदा के आतंकियों पर फ्रांस ने तगड़ा प्रहार किया है। फ्रांस की वायुसेना ने अफ्रीकी देश माली में सक्रिय अलकायदा के आतंकवादियों पर जोरदार हवाई हमला बोला है। फ्रांस एयरफोर्स ने माली में बुरकिनो फासो और नाइजर की सीमा के पास एक एयर स्ट्राइक की, जिसमें कम से कम अलकायदा के 50 आतंकियों के मारे जाने की खबर है। फ्रांस ने यह हमला सोमवार (नवंबर 2, 2020) को किया। फ्रांस ने यह हमला मिराज फाइटर जेट और ड्रोन्स के जरिए किया। 

फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ले ने माली की सरकार से मुलाकात के बाद कहा कि 30 अक्‍टूबर को माली में फ्रेंच एयरफोर्स ने एक आक्रामक कार्रवाई की, जिसमें 50 ज‍िहादी मारे गए। इस दौरान बड़ी संख्‍या में हथियार भी बरामद किए गए। इस इलाके में माली की सरकार इस्‍लाम‍िक आतंकवादियों का सामना कर रही है। फ्रांसीसी रक्षामंत्री ने कहा कि 30 बाइक भी हवाई हमले में नष्‍ट हो गई है।

विमान से आतंकवादियों पर मिसाइलें

उन्‍होंने बताया कि यह हमला उस समय किया गया, जब ड्रोन ने पता लगाया कि बड़ी संख्‍या में मोटरसाइकल पर सवार लोग तीनों देशों की सीमा पर मौजूद हैं। इसके बाद ये जिहादी पेड़ों के नीचे छिप गए और निगरानी से बचने का प्रयास करने लगे। इसके बाद फ्रांसीसी वायुसेना ने अपने दो मिराज फाइटर जेट और ड्रोन विमान वहाँ भेजे। इन विमानों ने आतंकवादियों पर मिसाइलें दागीं, जिससे उनका सफाया हो गया।

सेना के प्रवक्‍ता कर्नल फ्रेडरिक बार्बी ने कहा कि 4 आतंकवादियों को पकड़ा गया है। उनके पास से विस्‍फोटक और सूइसाइड जैकेट बरामद की गई है। उन्‍होंने कहा क‍ि यह ज‍िहादियों का समूह सेना के एक अड्डे पर हमले की तैयारी में था। बार्बी ने कहा कि इस्‍लामिक स्‍टेट के आतंकवादियों के साथ ग्रेटर सहारा इलाके में एक मुठभेड़ चल रही है। इसमें करीब 3 हजार सैनिक शामिल हैं।

फ्रांसीसी वायुसेना ने जिस इलाके में हमला किया, वो इस्लामिक आतंकियों के कब्जे में था। हमला करने से पहले ड्रोन के जरिए पूरे हालात की जानकारी ली गई। आतंकी बड़ी संख्या में मोटरसाइकलों पर सवार होकर तीन देशों की सीमाओं पर थे। यह जानकारी पुख्ता होने के बाद फ्रांस ने अपने दो मिराज फाइटर जेट भेजे और आतंकियों पर मिसाइल से हमला किया।

फ्रांस सरकार की ओर से सोमवार को जारी बयान के मुताबिक आतंकवाद के खिलाफ लगातार उनका ऑपरेशन जारी है। मौजूदा वक्त में सेंट्रल माली में अलकायदा आतंकियों की गतिविधियाँ बढ़ गई थीं। जिस वजह से माली सेना की मदद को फ्रांस आगे आया और एयर स्ट्राइक की। 

मुस्लिम देशों के निशाने पर फ्रांस 

दरअसल कुछ दिन पहले एक शिक्षक ने क्लास में बच्चों को विवादित कार्टून दिखाया। जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस्लामिक कट्टरपंथ पर निशाना साधा। साथ ही कहा कि वो अभिव्यक्ति की आजादी पर बैन नहीं लगाएँगे, जिसको जो कार्टून बनाना हो बनाए या जो मन में है वो बोले। इससे इस्लामिक देश फ्रांस पर भड़क गए और दुनिया भर में उसके खिलाफ प्रदर्शन हुआ।। हालांकि इस दौरान भी भारत फ्रांस के साथ खड़ा दिखा। साथ ही पीएम मोदी ने आतंकी हमलों की निंदा की थी।

इसके बाद फ्रांस के एविगनन (Avignon) शहर में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए धारदार हथियार से पुलिसकर्मियों के एक समूह पर हमला कर दिया। इसके बाद पुलिस वालों ने उस व्यक्ति पर जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई जिसमें उस व्यक्ति की मौत हो गई। इससे पहले नीस शहर के चर्च में 1 महिला समेत 3 लोगों की गला काट कर हत्या 

आखिर कैसे लिबरल्स के ‘पोस्टर बॉय’ बन गए तेजस्वी यादव? किस आधार पर माँग रहे हैं वोट?

भारतीय ‘लिबरलिज़्म’ का एक नया उभरता चेहरा हैं बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव। कुछ ही हफ़्तों में ये युवक अपनी ‘दिव्य’ कर्मठता से लेकर अपनी विनम्रता, परिपक्वता तथा लोगों की समस्याओं को लेकर अपनी गहरी समझ तक, हर चीज़ के लिए विख्यात हो गए हैं। यह बात है तो रोचक, क्योंकि आमतौर पर ऐसे गुण अर्जित करने में एक पूरा जीवनकाल बीत जाता है। परन्तु तेजस्वी ने जैसे यह सब रातोंरात पा लिया हो।

हालाँकि, एक प्रश्न अनुत्तरित ही रह जाता है। आखिर तेजस्वी वोट माँग किस आधार पर रहे हैं? भारतीय नागरिक होने के नाते तेजस्वी को प्रश्न पूछने का पूर्ण अधिकार है। वे बिहार के मुख्यमंत्री से कोई भी प्रश्न पूछ सकते हैं। परन्तु वह उससे कुछ अधिक कर रहे हैं। वह अपनी पार्टी को एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं और इसलिए उन्हें अवश्य ही यह बताना चाहिए कि वे किस आधार पर वोट माँग रहे हैं।

तो आखिर आधार है क्या? क्या हैं तेजस्वी के कीर्तिमान?

संयोग से, राजद के कीर्तिमानों का इतिहास है तो सही, परन्तु इतना भयावह की इनके प्रबल समर्थक भी इनका बचाव करने में संकोच करते हैं। कुख्यात जंगलराज और उसके अपराधों तथा अन्यायों की विरासत। क्या कोई भी, मतदाताओं के आँखों में आँखें डालकर एक कारण बता सकता है, जिससे यह सिद्ध होता हो कि राजद के 15 वर्ष उसके बाद आने वाली सरकार से बेहतर रहे हों? बल्कि यथायोग्य, लालू यादव वर्तमान में एक हज़ार करोड़ रुपयों के महाघोटाले में आरोपित भी हैं।

तो क्या इसी आधार पर वोट माँगे जा रहे हैं? यह तो संभव नहीं। बल्कि तेजस्वी स्वयं भी इस आधार पर वोट नहीं चाहते हैं। उनका कहना है कि पिता के अपराधों को पुत्र पर नहीं थोपा जाना चाहिए। चलिए ठीक है, यही माना जाए। इनके समर्थक कहते हैं कि वे उन्हें लालू के 15 वर्षों के आधार पर समर्थन नहीं दे रहे। परन्तु फिर कौनसा आधार है शेष रहता है?

तेजस्वी को क्या अलग बनाता है बिहार के उन करोड़ों युवाओं से? क्यों वही, कोई और नहीं? क्योंकि वे लालू के बेटे हैं, है न? तो हमें लालू का शासनकाल भी भूल जाना चाहिए और किसी को केवल इसलिए वोट दे देना चाहिए कि वह लालू का बेटा है। यह किस प्रकार का तर्क है?

तेजस्वी यादव को भी कुछ समय का कार्यकारी अनुभव है। उन्होनें 18 महीने नीतीश कुमार के सहायक के रूप में बिताए हैं। क्या उन्होनें उन 18 महीनों में कुछ अलग साध लिया? यदि हाँ, तो उनके समर्थक हमें बताते क्यों नहीं? यदि सचमुच कुछ हो, तो तेजस्वी स्वयं ही हमें क्यों नहीं बता देते?

उपमुख्यमंत्री रहते हुए, तेजस्वी के कार्यकाल के विषय में जो हम जानते हैं वो यह कि उन्हें उस दौरान एक सरकारी बँगला आवंटित किया गया था। 2017 में जब राजद की सरकार नहीं रही, तब अपेक्षानुसार तेजस्वी द्वारा उनका सरकारी आवास छोड़ दिया जाना चाहिए था। परन्तु ऐसा हुआ नहीं। इसके उलट, वे स्वयं कई कानूनी चुनौतियाँ दर्ज करवाते रहे। यह तब तक चला, जब तक फ़रवरी 2019 में उच्चतम न्यायलय ने ज़ाहिर निर्णय न सुना दिया कि तेजस्वी को वह आवास छोड़ना ही होगा। क्या यही है वह आधार जिस पर तेजस्वी वोट माँग रहे हैं?

तो किस प्रकार तेजस्वी ने कर्मठ और लोगों की समस्याओं के प्रति सजग होने की प्रतिष्ठा अर्जित की? क्या वे बीते कुछ हफ़्तों में राज्य भ्रमण कर रहे थे? कैसे बने वे राजद के नेता? क्या उन्होनें राजद का वास्तविक नेता घोषित होने के लिए इसके अन्य नेताओं से किसी संघर्ष में विजय हासिल की?

तो फिर तेजस्वी को क्या खास बनाता है? लालू का बेटा होना और बीते कुछ दिनों में एक हेलीकॉप्टर की सवारी करते रहना? ये वही हैं, जिन्होंने संसार की समस्त सुविधाएँ मुहैय्या होने के बावजूद, दसवीं पास करने तक की मेहनत न की।

अचानक कैसे बन गए तेजस्वी परिश्रम तथा कर्मठता के पोस्टर बॉय? क्या ये उन सब का अपमान नहीं है, जो जीवन में कुछ पाने के लिए दिन रात परिश्रम करते हैं?

इस आर्थिक जगत में सदा हमें सचेत किया जाता है कि अतीत में किए गए कार्य भविष्य के परिणामों को सुनिश्चित नहीं करते। लुटियन्स दिल्ली से आने वाली सामयिक सूचना ने इस परम्परागत अस्वीकरण को पलट कर रख दिया है। यदि आप अपने मत को एक निवेश के रूप में देखते हैं, तो आपको यह बताया जा रहा है कि अतीत की असफलता ही दरअसल भविष्य की सफलता का आश्वासन है। तो कीजिए निवेश…

क्या आप अपना एक सफल व्यापार चाहते हैं? तो कृपया ऐसे किसी पर निवेश करें जिसके पिता व्यापार में असफल रहे हों। जानना चाहेंगे कि कौन बन सकता है एक सफल इंजीनियर? तो किसी ऐसे को खोजिए, जिसके पिता एक असफल इंजीनियर रहे हों या कभी इंजीनियर बन ही न पाए हों।

संक्षेप में कहें, तो यही है भारत के कुलीन वर्ग का सामूहिक ज्ञान। इससे मुझे एक हास्य गल्प याद आता है:

एक व्यक्ति, किसी बिल्डर से घर खरीदने जाता है और बिल्डर से पूछता है कि कहीं घर गिरने का खतरा तो नहीं होगा? ‘बेफिक्र रहें’, बिल्डर आश्वासन देता है कि उसके बनाए हुए घरों के गिरने की संभावनाएँ केवल 50 प्रतिशत ही होती हैं। व्यक्ति को शंका होती है। फिर बिल्डर समझाता है कि उसके बनाये हुए 50 प्रतिशत घर तो पहले ही गिर चुके हैं, जिसका अर्थ यह है कि जो घर आप खरीदेंगे वह पूरी तरह सुरक्षित है।

मात्र 4 महीने में कोरोनिल के ₹250 करोड़ के 25 लाख किट बिके: भारत ही नहीं, दुनिया भर में है जबरदस्त माँग

कोरोना वायरस से बचाव के लिए आई ‘पतंजलि आयुर्वेद’ की कोरोनिल किट को बाजार ने जबर्दस्त तरीके से हाथोंहाथ लिया है। ऐसा हम नहीं कह रहे, आँकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। अपने लॉन्च से अब तक मात्र 4 महीनों में बाबा रामदेव की ‘कोरोनिल’ की अब तक 25 लाख से भी ज्यादा किट्स बिक चुकी हैं। कम्पनी के आधिकारिक आँकड़े के अनुसार, ‘पतंजलि आयुर्वेद’ ने अब तक 250 करोड़ रुपए की ‘कोरोनिल किट्स’ बेचीं है। वहीं इम्युनिटी की कुल दवाओं की 85 लाख यूनिट्स बिकी हैं।

‘इंडिया टुडे’ की खबर के अनुसार, बाबा रामदेव की पतंजलि के कोरोनिल को न सिर्फ भारत, बल्कि बड़ी मात्रा में विदेशों में भी बेचा गया। अक्टूबर 18, 2020 तक इसकी 25 लाख किट्स 250 करोड़ रुपए में बिकी है। इन्हें ऑनलाइन मार्केटिंग, डायरेक्ट मार्केटिंग, जनरल मार्केटिंग, और ‘पतंजलि आयुर्वेद’ के अस्पतालों व मेडिकल सेंटरों के माध्यम से बेचा गया, जो भारत सहित दुनिया के कई देशों में कार्यरत हैं। इसे जून 23 को लॉन्च किया गया था। बता दें कि अभी तक कोरोना वायरस के इलाज के लिए कोई दवा नहीं आई है।

आयुष मंत्रालय ने भी ‘कोरोनिल’ पर विवाद होने के बाद स्पष्टीकरण माँगा था और कोरोना वायरस संक्रमण को ठीक करने के दावे के साथ इसका प्रचार न करने को कहा था। बाद में इसे कोरोना वायरस के खिलाफ एक मजबूत इम्युनिटी बूस्टर बताया गया। हालाँकि, इसकी बिक्री पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई। बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने खुद मीडिया में इसे लेकर अपनी बातें रखी थीं।

आयुष मंत्रालय ने राज्य सरकार, उत्तराखंड से भी इस दवाई कोरोनिल को लेकर जरूरी जानकारी माँगी थी। मंत्रालय ने राज्य लाइसेंसिंग ऑथोरिटी को लाइसेंस कॉपी और प्रोडक्ट को मंजूर किए जाने से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट माँगे थे। आयुष मंत्रालय ने 21 अप्रैल को जारी गैजेट नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए कहा था कि आयुर्वेदिक दवाओं की रिसर्च को लेकर बाकायदा नियम कानून जारी किए गए थे, उसी के तहत कोरोना वायरस पर रिसर्च की जा सकती है।

वहीं, दिव्य फार्मेसी ने इस नोटिस के जवाब में कहा था कि उन्होंने कभी भी कोरोना की दवा बनाने का दावा नहीं किया था। उन्होंने कहा कि हाँ हम यह कह सकते हैं कि हमने ऐसी दवाई बनाई है, जिससे कोरोना के मरीज ठीक हुए हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में को योग गुरु बाबा रामदेव सहित पाँच के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में पाँचों लोगों पर कोरोनिल का भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया गया था।

हिंदू युवती को बुर्का पहनाकर दुबई भेज रहा साबिर अली गिरफ्तार, बजरंग दल ने लगाया लव-जिहाद का आरोप

हिंदू युवती के अपहरण के प्रयास के आरोप में ओडिशा-बंगाल बॉर्डर से एक साबिर अली नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया है। युवती ओडिशा के गंजम (Ganjam) जिले की रहने वाली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने साबिर को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) अधिकारियों की मदद से 31 अक्टूबर को पकड़ा था।

साबिर बंगाल के मुर्शिदाबाद का निवासी है। इस पर आरोप है कि यह लड़की को बहला-फुसला कर गंजम जिले से दुबई भेजने की फिराक में था। हालाँकि जजपुर रोड रेलवे स्टेशन पर साबिर अली और लड़की को आरपीएफ अधिकारियों व बजरंग कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप से पकड़ने में सफलता मिली

लड़की के परिजनों ने कथित तौर पर अपनी शिकायत में युवक पर आरोप लगाया कि साबिर ने उनकी लड़की को झूठी बातें और लालच देकर फँसाया। स्थानीय रिपोर्ट्स में साबिर को गंजम के एक गाँव में शिल्पकारी का काम करने वाला बताया गया है जो कोरोना वायरस की महामारी के कारण दुबई से लौटा था। लेकिन, शुक्रवार (अक्टूबर 30, 2020) को वह लड़की को कार में बैठाकर अपने साथ भुवनेश्वर ले जा रहा था। लड़की की पहचान छिपाने के लिए उसने उसे बुर्का भी पहनवा दिया।

साबिर अली लड़की को बुर्का पहनकर पुरी-हावड़ा ट्रेन में बैठाकर भुवनेश्वर से कोलकाता ले जाना चाहता था। मगर, इसी बीच लड़की के परिजनों ने गंजम पुलिस को संपर्क किया। इसके बाद स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ताओं की मदद से आरपीएफ व पुलिस ने दोनों को जजपुर रोड रेलवे स्टेशन पर पकड़ लिया। लड़की को बरामद करके उसके परिवार के पास भेज दिया गया है। वहीं साबिर हिरासत में है।

लड़की के घरवालों ने आरोप लगाया था कि साबिर लड़की को कोलकाता से दुबई ले जाने वाला था। इसीलिए पुलिस ने साबिर का पासपोर्ट और दुबई वीजा भी जब्त किया है। ‘ऑर्गनाइजर’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साबिर शादीशुदा है और पहले भी लड़कियों को फँसाने का काम इसी तरह कर चुका है। बजरंग दल के कार्यकर्ता भी इसमें लव जिहाद का आरोप लगाते हुए दावा कर रहे हैं कि साबिर पहले भी ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है।

CAA विरोधी प्रदर्शनों का हिस्सा था मथुरा के नंदबाबा मंदिर में घुस कर नमाज पढ़ने वाला फैजल खान, लोगों को भड़काया था

मथुरा के नंदबाबा मंदिर में घुस कर जबरन नमाज पढ़ने वाले फैजल खान के बारे में पता चला है कि वो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों का भी हिस्सा रहा था। ‘टाइम्स नाउ’ चैनल ने कई तस्वीरें भी जारी की हैं, जिनमें फैजल खान को CAA विरोधी प्रदर्शनों को सम्बोधित करते हुए देखा जा सकता है। आशंका जताई जा रही है कि अयोध्या के बाद मथुरा के लिए जो लड़ाई शुरू हुई है, उसी कारण फैजल खान ने नंदबाबा मंदिर में जाकर नमाज पढ़ी।

पता चला है कि फैजल खान ने दिल्ली के शाहीन बाग़ में हुए CAA विरोधी उपद्रवों से लेकर कई अन्य प्रदर्शनों में भी हिस्सा लिया था। उसके संगठन ‘खुदाई ख़िदमतगार’ ने भी CAA के खिलाफ लोगों को भड़काया था, जिसका वो खुद ही संस्थापक है। उसने देश भर में कई जगह CAA विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। इससे अब ये आशंका जताई जा रही है कि मथुरा के नंदबाबा मंदिर में नमाज पढ़ने के पीछे इनकी मंशा ठीक नहीं थी।

बता दें कि अब उसने दावा किया है कि जब नमाज का वक्त हो गया तो मंदिर के ही लोगों ने उसे नमाज पढ़ने के लिए जगह दी और खाना भी खिलाया। उसका दावा है कि उसे वहाँ खाना भी खिलाया गया। इसके 3 दिन बाद इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और फैजल खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। वो नंदबाबा मंदिर में नमाज पढ़ कर दिल्ली भी लौट चुका था। सोमवार (नवंबर 2, 2020) को उसे जामिया नगर से गिरफ्तार किया गया।

दिलचस्प बात यह है कि जिस फेसबुक आईडी से तस्वीरें वायरल की गई थी, वह वह पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार कट्टरपंथी इस्लामवादियों का मुखर वकील है, जिन्हें हाथरस के रास्ते में पकड़ा गया था। इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट में ट्रांसफर होने से पहले इस मामले को बरसाना थाने ने उठाया था। इसके साथ ही इस बात की भी जाँच शुरू कर दी गई है कि तस्वीर को वायरल करने के पीछे क्या मंशा थी।

चायनीज प्रोपेगेंडा के लिए The Hindu के खिलाफ आयकर जाँच शुरू, HT पर भी शिकायत दर्ज: रिपोर्ट

अंग्रेजी समाचार पत्र द हिंदू के ख़िलाफ़ आयकर विभाग ने अपनी जाँच शुरू कर दी है। द हिंदू पर चीन के साथ आर्थिक लेन-देन के आरोप हैं। Sputnik की रिपोर्ट के अनुसार, इस मीडिया समूह के ख़िलाफ़ 2 अक्टूबर को शिकायत दर्ज हुई थी। यह शिकायत महाराष्ट्र के ‘लीगल राइट्स ऑब्जर्वेट्री (Legal Rights Observatory)’ ने गृह मंत्रालय को भेजी थी।

इस शिकायत में चीन और समाचार पत्र के बीच हुए आर्थिक ट्रांजैक्शन को लेकर जाँच करने की माँग की गई थी। यह माँग द हिंदू अखबार में प्रकाशित चीन एम्बेसी के एक विज्ञापन से संबंधित थी, जिसे अखबार ने पूरे पेज पर पब्लिश किया था, वो भी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की 71वीं वर्षगाँठ पर। इस कारनामे को केवल प्रोपेगेंडा की तरह देखा गया था।

18 अक्टूबर को इस संबंध में गृह मंत्रालय ने शिकायत आयकर विभाग को भेजी थी और 30 दिन का समय देकर इस पूरे मामले पर अपनी रिपोर्ट जमा करने को कहा था। दरअसल, एलआरओ की ओर से दायर शिकायत में समाचार पत्र के इस कारनामे को एलएसी पर बढ़े विवाद से जोड़कर देशद्रोही कार्य कहा गया था।

संगठन ने दावा किया था कि मामले में जाँच से ही खुलासा हो पाएगा कि क्या द हिंदू को विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए चीन एम्बेसी से कोई राजस्व प्राप्त हुआ या नहीं? अगर नहीं हुआ तो भी यह परेशानी का कारण है।

हिंदुस्तान टाइम्स के ख़िलाफ़ लिखित शिकायत

एलआरओ (LRO) ने एक लिखित शिकायत करके हिंदुस्तान टाइम्स के ख़िलाफ़ भी जाँच शुरू करने की माँग की है। दरअसल, अंग्रेजी समाचार पत्र ने अपने 30 अक्टूबर के संस्करण में चीन मुखपत्र को जगह दी थी। इसी वजह से संगठन ने यह माँग उठाई। शिकायत में अखबार की इस हरकत को यूनाइटिड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट के प्रोपेगेंडा के आगे भारतीय हितों को कमतर बताने वाला कहा गया।

भारतीय अखबार चला रहे चीन का प्रोपगेंडा

यहाँ बता दें कि 1 अक्टबूर को द हिंदू ने चीन के लिए एक पूरे पेज में विज्ञापन प्रकाशित किया था। यह अखबार का तीसरा पृष्ठ था। दिलचस्प चीज यह थी कि द हिंदू ने जिसे अपने अखबार की हार्ड कॉपी में तीसरे पेज पर पब्लिश करवाया, वह पेज डिजिटल वेबासइट पर कहीं नहीं था।

द हिंदू के बाद हिंदुस्तान टाइम्स ने चाइना डेली वाले चार पृष्ठ के सप्लीमेंट को आठवें पेज पर जगह दी थी। साथ ही अखबार ने डिस्क्लेमर के साथ लिखा था, “यह सप्लीमेंट पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चीन के चाइना डेली द्वारा तैयार किया गया है। इसमें हिंदुस्तान टाइम्स की न्यूज व संपादकीय नहीं शामिल किए गए हैं।”

इस सप्लीमेंट में चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के बारे में सूचना दी गई थी। साथ ही यह भी बताया गया था कि कैसे वैश्विक स्तर पर चीन के युवा सक्रियता से काम कर रहे हैं और किस प्रकार विकास के समांतर चीन ने अपनी संस्कृति का संरक्षण किया हुआ है।

प्रेमिका से बात नहीं हुई तो निजामुल खान ने उसके भाई कमल को मार डाला, यूट्यूब पर हैं 1 मिलियन सब्सक्राइबर

नोएडा में कमल शर्मा नामक व्यक्ति की मौत का पुलिस ने सोमवार (नवंबर 2, 2020) को खुलासा किया। इस मामले में कमल की बहन के प्रेमी समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, मुख्य आरोपित निजामुल खान कमल की बहन से प्यार करता था। कमल इस रिश्ते के विरोध में थे। इसीलिए, निजामुल खान ने दो दोस्तों (अमित गुप्ता और सुमित शर्मा) के साथ मिलकर एलिवेटेड रोड पर कमल की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

निजामुल खान नोएडा के सेक्टर-53 में रहता है और उसके यूट्यूब पर 9.8 लाख से भी अधिक सब्सक्राइबर हैं। आरोपित सुमित कमल का दूर का रिश्तेदार है। पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) लव कुमार ने बताया कि कमल शर्मा सेक्टर-63 में स्थित एक कम्पनी में बतौर एचआर कार्यरत थे। निजामुल खान ने गुरुवार (अक्टूबर 27, 2020) को अपने दो साथियों के साथ मिल कर उनके घर की रेकी की थी। उसने बाइक से उनका पीछा किया।

एलिवेटेड रोड पर स्थित इस्कॉन मंदिर के पास से गुजरते समय निजामुल ने कमल को गोली मार दी। आसपास के लोगों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया। पीड़ित परिजनों ने इसके अगले दिन विरोध प्रदर्शन भी किया था। दरअसल, निजामुल और कमल शर्मा की बहन का परिचय एक दोस्त के माध्यम से 2014 में ही हुआ था। दोनों के बीच 2017 में प्रेम पनपा और परिजनों के विरोध के बावजूद दोनों का रिश्ता चलता रहा।

निजामुल यूट्यूब पर बाइक स्टंट कर के वीडियो अपलोड करता है और प्रति महीने 80,000 रुपए की कमाई करता है। उसके कुछ वीडियोज पर तो 85 लाख से भी ज्यादा व्यूज आए हैं। उसके चैनल पर अपलोड किए गए वीडियोज के व्यूज लाख में होते ही होते हैं। घटना के करीब 10 दिन पहले कमल शर्मा ने अपनी बहन से इस रिश्ते को लेकर नाराजगी जताई थी और उसका मोबाइल फोन भी तोड़ डाला था।

इस वजह से निजामुल की कमल शर्मा की बहन से बातचीत नहीं हो पा रही थी। उसने रिश्तेदारों के माध्यम से बातचीत करने का प्रयास किया लेकिन असफल रहा। पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जाँच के बाद आरोपितों तक पहुँची। यूपी पुलिस देवेश यादव नामक व्यक्ति को सम्मानित करेगी, जिन्होंने राह से गुजरते समय घायल कमल को अस्पताल पहुँचाया। इस घटना में इस्तेमाल बाइक, तमंचा और कारतूस जब्त किया गया है। निजामुल गिझोड़ गाँव का रहने वाला है।

इस घटना का खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बल्लभगढ़ में निकिता तोमर की तौसीफ नामक व्यक्ति ने हत्या कर दी थी और उसके बाद से ‘लव जिहाद’ के खिलाफ क़ानून की माँग जोरों पर है। निकिता तोमर के पिता ने कहा कि अगर ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध क़ानून होता तो शायद उनकी बेटी की जान नहीं जाती। यूपी और हरियाणा की सरकारें इस दिशा में विचार कर रही हैं।

‘नंदबाबा मंदिर में नमाज हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए, ली थी पुजारी से अनुमति’: फैजल खान का लिबरलों ने किया समर्थन

मथुरा के नंदबाबा मंदिर में जबरन नमाज पढ़े जाने को लेकर विवादों में आए फैजल खान ने कहा है कि वो कई दिनों की यात्रा पर था और हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए उसने ऐसा किया। खुदाई खिदमतगार संगठन से जुड़े फैजल खान का कहना है कि वो अपने साथियों के साथ मंदिर में गया था और लोगों से एकता की बात कर रहा था, तभी नमाज का समय हो गया। उसके साथ चाँद मोहम्मद और दो गाँधीवादी कार्यकर्ता भी थे।

अब उसने दावा किया है कि जब नमाज का वक्त हो गया तो मंदिर के ही लोगों ने उसे नमाज पढ़ने के लिए जगह दी। उसका दावा है कि उसे वहाँ खाना भी खिलाया गया। इसके 3 दिन बाद इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और फैजल खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। वो नंदबाबा मंदिर में नमाज पढ़ कर दिल्ली भी लौट चुका था। सोमवार (नवंबर 2, 2020) को उसे जामिया नगर से गिरफ्तार किया गया।

मंदिर के सेवायत कान्हा गोस्वामी की तहरीर पर बरसाना पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A, 295, 505 के तहत केस दर्ज किया है। फैजल का कहना है कि उसने पुजारी के कहने पर नमाज पढ़ी और इसे लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। वहीं अब कुछ लोगों ने तो मंदिर में नमाज पढ़ने वालों का समर्थन भी शुरू कर दिया है। उसे हिन्दू-मुस्लिम एकता का चैंपियन बताया जा रहा है।

लेखक हृदयेश जोशी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वो फैजल ख़ान को कई सालों से जानते हैं। उन्होंने दावा किया कि वह कट्टरता के खिलाफ लड़ रहा है। साथ ही उन्होंने लिखा कि अपने धर्म के लोगों के बीच अनपढ़ता और बेवकूफी को मिटाने के लिए वो काम कर रहा है। उन्होंने लिखा कि फैसल खान का एक ही नारा है कि अगर नफरत फैलाई जा सकती है तो मोहब्बत को भी वायरल किया जा सकता है।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “उन्होंने लॉकडाउन के दौरान हज़ारों लोगों तक अनाज़ और ज़रूरी चीज़ें पहुँचाईं। उनका संगठन है खुदाई खिदमतगार। जो मूर्ख नहीं जानते कि खुदाई खिदमतगार क्या है, किसने शुरू किया और क्या मकसद था, वो गूगल कर सकते हैं। टीवी के एंकरों ने हमेशा की तरह कल से ही प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू कर दिया था। उनसे इससे अधिक उम्मीद भी नहीं की जा सकती।” इसी तरह कई अन्य लिबरलों ने भी फैजल का समर्थन किया।

फैजल खान ने पुजारी के ही मत्थे सब कुछ मढ़ते हुए कहा कि वो लोग तो नमाज पढ़ने के लिए मंदिर से बाहर जाना चाहते थे, लेकिन पुजारी ने ही कहा कि वो उस जगह पर हैं, जहाँ लोग नमाज पढ़ते हैं, इसीलिए वहाँ नमाज पढ़ना एकदम जायज है। जबकि मंदिर प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने नमाज पढ़ने के लिए अनुमति नहीं माँगी थी, बल्कि दर्शन की बात कही थी और बाद में धोखे से नमाज पढ़ते हुए तस्वीरें वायरल कर दीं।

गौरतलब है कि गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को नन्दगाँव के प्रसिद्ध नंदबाबा मंदिर में दोपहर को दो युवक अपने साथियों के साथ हरी टोपी लगा कर पहुँचे। एक व्यक्ति ने अपना नाम फैजल खान बताया और अपने साथ आए साथियों का परिचय मोहम्मद चाँद, नीलेश गुप्ता और आलोक रतन के रूप में दिया। उन लोगों ने बताया कि वो मंदिर के सेवायत पुजारी कान्हा गोस्वामी के दर्शन हेतु आए हैं और हिन्दू-मुस्लिम एकता में विश्वास रखने वाले लोग हैं।

दिलचस्प बात यह है कि जिस फेसबुक आईडी से तस्वीरें वायरल की गई थी, वह वह पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार कट्टरपंथी इस्लामवादियों का मुखर वकील है, जिन्हें हाथरस के रास्ते में पकड़ा गया था। इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट में ट्रांसफर होने से पहले इस मामले को बरसाना थाने ने उठाया था। इसके साथ ही इस बात की भी जाँच शुरू कर दी गई है कि तस्वीर को वायरल करने के पीछे क्या मंशा थी।

एक मुखिया जिसने पंचायत की शक्ल बदल दी, जिन्हें विधानसभा में होना चाहिए: मिलिए मंदाकिनी चौधरी से

बिहार के हरलाखी विधानसभा क्षेत्र से इस बार एक निर्दलीय उम्मीदवार का नाम मंदाकिनी चौधरी है। मंदाकिनी बिलकुल वैसी हैं, जैसे राजनीति में एक सशक्त नेत्री को होना चाहिए। उनका काम एक मुखिया के रूप में जमीन पर नजर आता है। उनकी बातें लक्ष्यहीन या हवा-हवाई किस्म की नहीं हैं। अपने विजन को चरितार्थ करने के लिए उन्हें क्या करना है और किन भूलों को सुधारना है, यह सब वह अच्छे से जानती हैं।

सरकारी नौकरी छोड़कर गाँव को कर्मभूमि के रूप में चुनने वाली मंदाकिनी ने लंबे समय से स्थानीय लोगों के बीच अपनी जगह बनाई हुई है। शुरू-शुरू में जब उन्होंने अपनी शिक्षा का सदुपयोग गाँव आकर अपने नीचे तबके वाले लोगों के उत्थान हेतु करना चाहा तो उनका बहुत मजाक बना, लेकिन उन्होंने अपना लक्ष्य तय कर रखा था। धीरे-धीरे वह आगे बढ़ीं और उनके साथ सैंकड़ों लोगों का कारवां जुड़ता गया। आज हरलाखी विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार होने के बावजूद मंदाकिनी के काम की चर्चा हर ओर है।

मंदाकिनी चौधरी से बातचीत का पूरा वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें।