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पैरा जंप की दुर्घटना में हवलदार प्रदीप थापा हुए थे लकवाग्रस्त: जिंदगी की जंग लड़ रहे परिवार की मदद को आगे आ रहे लोग

हमारे आस-पास इस तरह की अनेक कहानियाँ जिन्हें सुना और समझा जाना चाहिए। ऐसी ही एक कहानी 9 पैरा एसएफ (स्पेशल फोर्सेज) के एसएम (गैलेंट्री) सेवानिवृत्त, हवलदार प्रदीप थापा की है। जिनके साथ देश की सेवा करने के दौरान एक दुर्घटना हुई जिससे उनका पूरा जीवन प्रभावित हो गया। वह अपने परिवार के घर चलाने वाले इकलौते सदस्य थे इसलिए फ़िलहाल उनके लिए हालात इतने सामान्य नहीं हैं। 

सोबर मैन नाम के ट्विटर एकाउंट से इस पूरे मामले की जानकारी साझा की गई। ट्वीट में हवलदार प्रदीप थापा का परिचय दिया गया है। इसके बाद उनके बारे में बताया गया है कि हवलदार प्रदीप थापा 9 पैरा एसएफ का हिस्सा थे और सेना मैडल (गैलेंट्री) रिटायर्ड, एक पैरा जंप के दौरान वह लकवाग्रस्त हो गए थे, पैराशूट से कूद कर अलग होने के दौरान उनकी रीढ़ टूट गई थी। नतीजतन उनके शरीर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया और 17 जुलाई 2015 को उन्हें दिल्ली कैंट स्थित बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

रीढ़ पर हुई उस चोट का असर इतना ज़्यादा पड़ा कि वह अपने हाथों का इस्तेमाल भी सीमित रूप से ही कर पाते हैं। अंततः 2 मई 2018 को उन्हें उनकी सेवाओं से मुक्त कर दिया गया। हवलदार प्रदीप थापा के पर उनके घर की पूरी ज़िम्मेदारी थी, वह घर में कमाने वाले इकलौते व्यक्ति थे। लिहाज़ा उनसे ज़्यादा परेशानियाँ और चुनौतियाँ उनके परिवार वालों के सामने थीं। यानी उनका परिवार मदद की उम्मीद में था।  

हवलदार प्रदीप थापा की जानकारी देते हुए कई ट्वीट किये गए थे जिसमें एक ट्वीट सर्वाधिक उल्लेखनीय था। उस ट्वीट में इस बात का ज़िक्र था कि देश की सेवा के दौरान इस तरह की दुर्घटना का शिकार होकर मुश्किल हालातों के सामना कर रहे वीरों के लिए एक मुहिम (हीरोज़ इन नीड) चलाई जा रही है। इस मुहिम के तहत देश की सेवा करने वालों के परिवार वालों की मदद की जाएगी। यानी मुहिम के ज़रिए हवलदार प्रदीप थापा के परिवार की भी मदद की जाएगी। इस मुहिम के अंत में लिखा भी है कि किसी भी व्यक्ति की छोटी से छोटी मदद भी बड़े बदलाव की सूरत ले सकती है। 

‘फेक टीआरपी स्कैम’ में चश्मदीद ने लिया इंडिया टुडे का नाम, कहा- मिलते हैं पैसे, ऑडियो टेप से रिपब्लिक TV ने किया खुलासा

बीते दिन जैसे ही यह ख़बर सामने आई कि मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी पर व्यूअरशिप (टीआरपी) से संबंधित डाटा में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। वैसे ही इंडिया टुडे समूह का मानसिक संतुलन बिगड़ गया जबकि कुछ ही देर बाद खुलासा हुआ कि BARC की शिकायत में इंडिया टुडे का नाम है न कि रिपब्लिक टीवी का। 

हंसा रिसर्च समूह प्राइवेट लिमिटेड द्वारा की गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि BARC द्वारा लगाए गए बार-ओ मीटर के साथ बदलाव किए जाते हैं। यह समूह BARC द्वारा तैयार किए गए बार-ओ मीटर स्थापित (इनस्टॉल) करता है। शिकायत के बाद समूह के रिलेशनशिप मैनेजर विशाल भंडारी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। जाँच के दौरान उसने कई हैरान करने वाले खुलासे किए। जिसके मुताबिक़ इंडिया टुडे समेत इस तरह के कई चैनल्स हैं जो उस पर ऐसा करने के लिए दबाव बनाते थे। इसके अलावा जिन घरों में बार-ओ मीटर लगे हुए हैं उन्हें रुपए का लालच तक देते थे जिससे वह अपना टीवी चालू रखें। 

इस मामले में एक ऑडियो सामने आया है जिसमें मुख्य चश्मदीद तेजल सोलानी ने रिपब्लिक टीवी के पत्रकार से बात करते हुए कई बातें स्वीकार की हैं। उसका कहना था कि उसके बेटे को टीआरपी में बदलाव के लिए इंडिया टुडे समूह से रुपए मिलते थे। यह रहा ऑडियो, 

तेजल सोलानी उन 5 लोगों के समूह में शामिल है जिनके आधार पर टीआरपी के मामले में गिरफ्तारी हुई है। एक और खुलासे के अनुसार विशाल भंडारी ने पूछताछ में बताया कि ऑडिट टीम ने पैनल के एक घर का दौरा किया था। जिसके बाद वहाँ रहने वालों ने बताया कि उन्हें इंडिया टुडे 2 घंटे ज्यादा देखने के लिए भुगतान किया जाता था। 

मुंबई पुलिस इसके पहले कई सनसनीखेज़ आरोप लगा चुकी है कि कई समाचार चैनल टीआरपी रेटिंग से छेड़छाड़ करते हैं। प्रेस वार्ता के दौरान मुंबई पुलिस कमीश्नर परमबीर सिंह ने बताया कि रिपब्लिक समेत ऐसे 3 समाचार चैनल हैं जो इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से शामिल हैं। इसमें ऐसे घरों को रुपए का लालच दिया जाता है जहाँ BARC द्वारा बार-ओ मीटर इनस्टॉल किए जाते हैं। नतीजतन BARC द्वारा जारी किया जाने वाला टीआरपी से जुड़ा डाटा प्रभावित होता है। 

परमबीर सिंह ने कहा कि इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तार हो चुकी है, जिसमें एक आरोपित BARC के साथ काम करने वाली संस्था में कार्यरत था। इसके बाद उन्होंने बताया कि यह सभी उन घरों से डाटा उठाते थे जहाँ बार-ओ मीटर लागाया गया है और उसे समाचार चैनलों को बेच देते थे। समाचार चैनल उस जानकारी का इस्तेमाल व्यूअरशिप (टीआरपी) को प्रभावित करने के लिए करते थे। 

मुंबई पुलिस कमीश्नर के मुताबिक़ गिरफ्तार किए गए आरोपितों ने इस बात का खुलासा किया कि रिपब्लिक टीवी और 2 मराठी चैनल इस घपले में शामिल थे। फ़िलहाल मराठी चैनल्स फ़क्त मराठी और बॉक्स सिनेमा के मालिकों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बाद प्राथिमिकी (एफ़आईआर) की कॉपी रिपब्लिक टीवी और ऑपइंडिया दोनों ने देखी और समझी, उसमें रिपब्लिक टीवी का नाम कहीं नहीं लिखा था। इसके उलट उसमें इंडिया टुडे का नाम मौजूद था और कुछ अन्य चैनल्स का भी नाम शामिल था। 

इस तरह के तमाम आरोपों के बाद रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी ने अपना पक्ष रखा। उनका पूरा बयान कुछ इस प्रकार है, 

अपने बयान में अर्नब गोस्वामी ने कहा, “मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने रिपब्लिक टीवी पर झूठे आरोप लगाए हैं क्योंकि हमने उनसे सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच से जुड़े कई सवाल किए थे। रिपब्लिक टीवी मुंबई पुलिस कमिश्नर पर आपराधिक मानहानि का दावा करेगी। BARC ने ऐसी एक भी रिपोर्ट जारी नहीं की है जिसमें रिपब्लिक टीवी का नाम शामिल हो। सुशांत सिंह राजपूत मामले में परमबीर सिंह द्वारा की जाँच पर खुद शक के बादल मंडरा रहे हैं।” 

इसके बाद अर्नब ने कहा, “यह सिर्फ और सिर्फ निराशा में उठाया गया एक कदम है क्योंकि रिपब्लिक टीवी ने पालघर मुद्दे, सुशांत सिंह के मुद्दे या इस तरह के किसी भी अन्य मुद्दे पर रिपोर्ट तैयार की। इस तरह निशाना बनाने से हमारा संकल्प और मज़बूत होता है और सच की ज़मीन ठोस होती है। आज परमबीर सिंह की असलियत सामने आ गई है क्योंकि BARC की रिपोर्ट में रिपब्लिक टीवी का नाम कहीं नहीं है। उन्हें आधिकारिक तौर पर माफ़ीनामा लिखना चाहिए और अदालत में हमारा सामना करने की तैयारी कर लेनी चाहिए।”   

इस दौरान एक और उल्लेखनीय बात हुई कि प्रेस वार्ता के बाद इंडिया टुडे और मुंबई पुलिस कमीश्नर परमबीर सिंह दोनों ने ही रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी का मज़ाक बनाया। उन्होंने इस पूरे घोटाले को ‘कैश फॉर टीआरपी’ नाम दे दिया जैसे ‘कैश फॉर वोट्स’ नाम का घोटाला हुआ था जिसमें खुद राजदीप सरदेसाई पर भी आरोप लगे थे। 

इसी तरह इंडिया टुडे समूह के समाचार निर्देशक राहुल कँवल जो BARC की रेटिंग को गलत बता रहे थे जिसमें रिपब्लिक टीवी ने इंडिया टुडे समूह को बुरी तरह पीछे छोड़ दिया था। उन्होंने रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी का उपहास करने के लिए लंबी चौड़ी बातें लिख दी।

राहुल कँवल के ट्वीट
राहुल कँवल के ट्वीट

कुल मिला कर जब से इस बात का खुलासा हुआ है कि FIR में इंडिया टुडे समूह का भी नाम शामिल है तब से उसे खूब फ़जीहत का सामना कर पड़ रहा है। चश्मदीद ने ऑडियो में स्पष्ट तौर पर इंडिया टुडे का नाम लिया है। एक ऐसे लोगों का समूह जिसकी अगुवाई राजदीप सरदेसाई जैसा व्यक्ति कर रहा हो उससे नैतिकता की आशा करना अप्रत्याशित है। इस बात की कल्पना की जा सकती कि ऐसे में आखिर किस तरह इंडिया टुडे समूह के लोगों को समझ होगी कि वह निरर्थक ख़बरें देना बंद करें।               

राजस्थान: मंदिर पर अवैध कब्जे का विरोध करने वाले पुजारी को 6 लोगों ने पेट्रोल से आग लगा कर मार डाला

राजस्थान के करौली जिले में राधा गोविन्द मंदिर के 50 वर्षीय पुजारी बाबूलाल वैष्णव को एक भू-माफिया और उसके साथियों ने बृहस्पतिवार (अक्टूबर 08, 2020) को जिन्दा जला दिया। पुजारी को इस घटना के बाद जयपुर के SMS अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहाँ आज, शुक्रवार सुबह ही उनकी मौत हो गई।

स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया को इस खबर की सूचना दी। उन्होंने कहा कि सपोटरा तहसील में मंदिर के पुजारी को 6 लोगों ने पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया। दरअसल, पुजारी ने भू-माफियाओं को मंदिर की इस जमीन पर अतिक्रमण करने से रोकने का प्रयास किया था, जिसके बदले पुजारी को अपनी जान गँवानी पड़ी।

घटना के बाद मंदिर के पुजारी का जला हुआ शरीर
जयपुर के अस्पताल में पुजारी, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई

स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया को बताया कि इस इलाके में भीम आर्मी की हिन्दू-घृणा की मानसिकता को खूब फैलाया जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप यह घटना हुई है। हालाँकि, जब ऑपइंडिया ने और पूछताछ की तो पता चला कि इस तरह की बात नहीं है लेकिन हत्या के बाद भीम आर्मी जैसी पार्टियाँ इस बात को जातिवादी रंग दे कर, अस्मिता आदि से जोड़ कर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रही हैं।

स्थानीय हिंदूवादी संगठन के लोगों ने ऑपइंडिया को बताया कि पंडित जी राधा-गोविन्द मंदिर की सेवा करते थे। पुजारी को मंदिर के नाम पर जमीन दान की गई थी और इसी जमीन पर 50 साल के पुजारी अपना घर बना रहे थे। भू-माफिया इस जमीन का अतिक्रमण करना चाहते थे। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि स्थानीय मीणा समुदाय के लोग इस मंदिर पर कब्जा करना चाहते थे जिसका कि पंडित ने विरोध किया और उन्हें अपनी जान गँवानी पड़ी।

घटना को लेकर सपोटरा क्षेत्रवासियों में सपोटरा थाना पुलिस के प्रति आक्रोश है। उन्होंने पुलिस पर ऐसे मामलों में हमेशा निष्क्रियता बरतने का भी आरोप लगाया है।

लोगों का कहना है कि राजस्थान सरकार अभी तक भी इस हिंसा को लेकर उदासीन बनी हुई है। पंडित ने मृत्यु से पहले 6 लोगों का नाम लिया, जिन्होंने उन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाई। इन लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के पालघर में 16 अप्रैल को जूना अखाड़े के महाराज कल्पवृक्ष गिरि (70), उनके सहायक सुशील गिरि महाराज (35) और उनके ड्राइवर नीलेश तेलगड़े (30) की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। गडचिंचाले गाँव से निकलते वक्त करीब 500 लोगों ने उन पर हमला किया था।

चे ग्वेरा: रक्तपिपासु, होमोफ़ोबिक, नस्लवादी.. मार्क्सवादी क्रांति व लिबरल्स के रूमानी नायक से जुड़े वो खौफनाक तथ्य जिन्हें सभी नकारना चाहते हैं

आज के दिन, अक्टूबर 09, 1967 में मार्क्सवादी क्रांति के पोस्टर ब्वॉय अर्नेस्टो ‘चे’ ग्वेरा (Ernesto ‘Che’ Guevera), दुनियाभर में प्रशंसकों, वाम-उदारवादी दिग्गजों के लिए एक रूमानी नायक, वोक युवाओं की टीशर्ट पर और उनके कमरे की दीवारों पर नजर आने वाले नरसंहारक चे ग्वेरा की मौत हुई थी। उसके समर्थक उसकी तस्वीरों से कमरे सजाते हैं, कपड़ों पर उसे उकेरते हैं लेकिन उन्हें स्वयं यह मालूम नहीं होता कि वो आखिर ऐसा क्यों करते हैं? यही चे ग्वेरा (Ernesto ‘Che’ Guevera) की भी जिंदगी का संक्षिप्त वर्णन है।

चाहे व्लादिमीर लेनिन हो, फिदेल कास्त्रो या फिर चे ग्वेरा, ऐसा कोई भी सोशलिस्ट, कम्युनिस्ट क्रांतिकारी इस धरती पर पैदा हुआ हो, जिसने हजारों या लाखों की संख्या में मासूम और निर्दोषों का नरसंहार ना किया हो। जो रक्तपिपासु न रहा हो और जिसने इंसानों की हत्याओं में अपना भाग्य न देखा हो। वो भी तब, जब कि इनके कट्टर अनुयायियों की परिभाषा में ‘फासिस्ट’ होने का अर्थ सिर्फ विरोधी विचारधारा का समर्थक होना हो या फिर इस सत्तालोलुप विचारधारा का प्रतिकार करना।

आज का दिन समर्पित है लातिन अमरीकी क्रांतिकारी और कथित तौर पर कट्टरता और साम्राज्यवाद विरोध के उस प्रतीक को, जिसे दुनिया चे ग्वेरा कहती है और यह तथ्य नकारना चाहती है कि वह अपने ही जैसे अन्य कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों के जैसा क्रूर, मानसिक रूप से विक्षिप्त नरसंहारक था। वह होमोफ़ोबिक था, नरसंहारक नस्लवादी जल्लाद, जिसका सिर्फ और सिर्फ एक ही उद्देश्य था – अपने मानकों पर सही बैठने वाली ‘श्रेष्ठ सोसायटी’ का निर्माण।

1959 में क्यूबा में फिदेल कास्त्रो के सत्ता में आने के बाद कम्युनिस्ट समाज के निर्माण की प्रक्रिया में, चे ग्वेरा ने ‘नया आदमी’ का विचार प्रस्तुत किया। जो भी इस ‘नए व्यक्ति’ की अवधारणा के खिलाफ जाते, उन्हें क्रांति का विरोधी घोषित कर उन्हें ख़त्म कर दिया जाता।

बतिस्ता सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध शुरू कर उसके साम्राज्य को मिटाने के बाद इस क्रन्तिकारी ग्वेरा ने एक फायरिंग स्क्वाड तैयार किया, जहाँ वह स्वयं ही न्यायाधीश, ज्यूरी और जल्लाद था। वास्तव में, ‘कोल्ड ब्लडेड किलिंग मशीन’ – चे ग्वेरा का वास्तविक स्वरुप तो बतिस्ता साम्राज्य के पतन के बाद सामने आया जब फिदेल कास्त्रो ने उसे ‘ला काबेना’ जेल का प्रभारी नियुक्त किया।

समाजवादी-क्रांतिकारी ग्वेरा?

न्याय और समाजवाद को धरातल पर उतरने के लिए चे ग्वेरा की नीति का पता उसके इस बयान से चलता है। उसने कहा था कि लोगों को फायरिंग स्क्वाड भेजने के लिए न्यायिक सबूत अनावश्यक होते हैं क्योंकि किसी भी क्रांति में एक क्रांतिकारी को खालिस घृणा से प्रेरित होना चाहिए और एक ‘कोल्ड ब्लडेड’ हत्या करने वाली मशीन बन जाना चाहिए।

उन नए श्रमिक शिविरों में चे ग्वेरा और उसके दल ने महिलाओं और 14 साल से कम उम्र के बच्चों सहित क्यूबा के हजारों असहाय लोगों को मार डाला। 118 लोगों का क़त्ल तो उसने खुद ही किया था।

नरसंहारक मार्क्सवादी

जनवरी 1959 में कास्त्रो ब्रदर्स, ग्वेरा और उनके समर्थकों ने हवाना में भी लगभग 16,000 ऐसी वारदातों को अंजाम दिया। क्यूबा के 1 लाख लोग भाग निकले या उन्हें जेल में डाल दिया गया और 30 हजार लोग भागने के प्रयास में मारे गए।

नस्लवादी चे ग्वेरा

1965 में कास्त्रो की सत्ता सुनिश्चित और सुरक्षित कर लेने के बाद रशियन्स ने ग्वेरा को दक्षिण अफ्रीका के कोंगों तक क्रांति और विद्रोहियों के जरिए सोवियत के प्रसार की जिम्मेदारी सौंपी। जब सोवियत्स के इशारे पर कास्त्रो प्रशासन ने गुरिल्ला विद्रोह को शुरू करने के लिए चे ग्वेरा को कॉन्गो भेजा तो वहाँ के निवासियों की हिंसा के प्रति उदासीनता ने ग्वेरा को निराश किया और बदले में ग्वेरा ने उनकी नस्ल पर ही टिप्पणी की थी।

ग्वेरा ने अफ़्रीकी लोगों की नस्ल पर हमला करते हुए कहा- “अश्वेत, अफ्रीकी जाति के वे शानदार उदाहरण जिन्होंने स्नान ना कर के अपनी नस्लीय पवित्रता को बनाए रखा है। उन्होंने अपने क्षेत्र को एक नए प्रकार के गुलामों से साझा करते देखा है- पुर्तगाली। ये दोनों नस्ल कलह और झगड़ों-टंटों से भरपूर हैं। ये अपनी रोजी-रोटी के लिए लड़ रहे हैं। आलसी अश्वेत, बस सपने देखना जानते हैं. अपनी मुट्ठी भर कमाई भी शराब में खर्च कर देंगे। जबकि यूरोपीय आदमी कमाने, बचने के तरीके और व्यवसाय जनता है।”

रक्तपिपासु क्रांतिकारी – अमेरिका पर परमाणु हमला चाहता था

1962 में कैनेडी प्रशासन के दौरान सोवियत ने क्यूबा को परमाणु बम से लैस किया था लेकिन रूस और अमरीका के बीच बातचीत के बाद परमाणु बम को वापस ले लिया गया था। ग्वेरा और कास्त्रो ने बड़े भाई सोवियत से ठगा हुआ महसूस किया। खासकर, चे ग्वेरा इस कदम से नाखुश था क्योंकि वह न्यूयॉर्क और यूएसए पर बमबारी करना चाहता था। उसकी यह सोच अगले दिन के अख़बारों की सुर्खियों में थी। एक क्रांतिकारी के लिए क्या यह बहुत बड़ी बात होती?

पढ़ा-लिखा मार्क्सवादी ग्वेरा – जिसने क्रांति के नाम पर किताबों-संग्रहालयों को ही जला दिया

कास्त्रो सत्ता द्वारा कैद किए गए लोगों में एक पत्रकार महत्वपूर्ण था, जिसने स्वतंत्र पुस्तकालय का सपना देखा था। वह चाहता था कि पुत्कें सत्ता की कैद से पृथक रहें। दिलचस्प बात है कि भारत के ‘पढ़े-लिखे’ वामपंथियों और उदारवादियों के चहेते चे ग्वेरा ने विद्रोह के दौरान किताबों को इस हद तक जला दिया था कि पठन सामग्री की कमी हो गई थी।

यहाँ पर सवाल पैदा होता है कि वर्तमान वाम-उदारवादी एक ऐसे व्यक्ति को गाते और भजते हैं, जिसने हजारों पुस्तकों को ही जला दिया ताकि उससे पहले का इतिहास ही न रहे और वो कहानियाँ ही न रहें जिन्हें वो नहीं सुनना चाहते? यह भी विडम्बना है कि पुस्तकों को जलाने वाला यह क्रांतिकारी चे ग्वेरा और उसके ‘दर्शन’ उन्हें अपने से भी ज्यादा प्रिय हैं।

समलैंगिकों के प्रति नजरिया

समलैंगिक पुरुषों को चे ग्वेरा ने ‘यौन विकृतियों’ का नाम दिया था। ग्वेरा और कास्त्रो दोनों समलैंगिकता को बुर्जुआ पतन मानते थे। 1965 में एक साक्षात्कार में, कास्त्रो ने बताया कि “उस प्रकृति का एक विचलन इस अवधारणा से टकराता है कि हमारे पास एक उग्रवादी कम्युनिस्ट होना चाहिए।”

मौत के समय माँगी थी जान की भीख

1967 में ग्वेरा विद्रोह के लिए बोलिविया चला गया। मजेदार बात यह है कि निचले तबके के लोगों ने वहाँ इस सोशलिस्ट क्रांतिकारी और सोवियत का समर्थन नहीं किया जबकि बोलीविया के उच्च वर्ग उसके साथ जरूर खड़ा था। विद्रोह में हजारों बोलिवियंस लोग मारे गए। जल्द ही उसे बोलिविया की पुलिस ने अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों की मदद से पकड़ लिया।

उसका पैर गोलियों से छलनी हो गया, उसकी बंदूक उसके हाथ से छूट गई, अर्नेस्टो ‘चे’ ग्वेरा ने आत्मसमर्पण कर दिया। उसने रहम की भीख माँगते हुए कहा, “गोली मत चलाना! मैं चे ग्वेरा हूँ। मैं मरकर नहीं बल्कि जिन्दा रहकर तुम्हारे ज्यादा काम आऊँगा।”

चे ग्वेरा को कैद करने वालों ने कहा कि 14 साल के बच्चे समेत मासूम लोगों की हत्या करते समय वह साहसी और निर्भीक रहा लेकिन जब उसकी हत्या हुई, उस से पहले उसने स्वयं को जिन्दा छोड़ने की गुहार लगाई।

आखिरकार सैनिकों ने उसकी नहीं सुनी और उसके साथ वही किया गया, जो उसने असंख्य लोगों के साथ किया था – उसे मार दिया गया।

बोलीविया में पकड़े जाने के बाद मार्क्सिस्ट क्रन्तिकारी ग्वेरा

वो तमाम सच जिन्हें ग्वेरा-वादी नकारना चाहते हैं

समय के साथ ग्वेरा के भक्तों ने ऐसी किसी भी चीज़ से मुँह मोड़ लिया, जो ग्वेरा की आदर्श छवि के साथ फिट नहीं बैठती। ग्वेरा निश्चित ही एक जल्लाद था। उसकी नजरों में इंसानों की मौत कुछ भी नहीं थी। वह जानवरों पर भी अत्याचार करता था। मानसिक दिवालिएपन की यह सबसे बड़ी पहचान मानी जा सकती है।

साम्यवादी विचारों से पूरी दुनिया में क्रांति लाने का दावा करने वाले ग्वेरा की ‘क्रांति’ का वास्तविक विवरण जनवरी 1957 में, सिएरा मेस्त्रा से उसकी डायरी बताती है। जिसमें उसका एक किसान और सेना के मार्गदर्शक यूटिमियो ग्वेरा को मारने के बाद दिया बयान है।

दरअसल, ग्वेरा ने उसे सिर्फ इस वजह से मार दिया क्योंकि उसे शक था कि किसान यूटिमियो ग्वेरा खबरों को इधर-उधर करता है। उसने कहा- “मैंने उनके दिमाग के दाएँ हिस्से में एक .32 इंच की गोली दागी जो उसके बाईं और से निकली। यह समस्या का सबसे बेहतरीन समाधान था।” ग्वेरा के अनुसार किसी भी ‘धोखेबाज’ के लिए यही ‘न्याय’ था।

चे ग्वेरा की पत्नी ने अपनी पुस्तक ‘अर्नेस्टो’ में जिक्र किया था कि जनवरी 28, 1957 को अपनी पत्नी को लम्बे समय बाद लिखे एक पत्र में ग्वेरा ने लिखा था – “यहाँ क्यूबा के जंगल में हूँ, जीवित और खून का प्यासा (ब्लडथ्रस्टी)।

फेक TRP: रिपब्लिक का दावा- FIR में इंडिया टुडे का नाम, 2 घंटे तक इंडिया टुडे देखने के लिए पैसे भी बाँटे गए

रिपब्लिक टीवी पर लगा ‘फर्जी टीआरपी बटोरने’ का आरोप अब तूल पकड़ रहा है। ताजा खुलासे में रिपब्लिक टीवी ने बताया है कि उन्होंने हंसा रिसर्च ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड के डिप्टी जनरल मैनेजर नितिन दियोकर द्वारा फाइल की गई एफआईर एक्सेस की है। इससे उन्हें पता चला कि एफआईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं है, बल्कि इंडिया टुडे का नाम है।

साभार: रिपब्लिक टीवी

रिपब्लिक टीवी के अनुसार, मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद हंसा रिसर्च ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड के रिलेशनशिप मैनेजर विशाल भंडारी ने खुलासा किया है कि इंडिया टुडे व अन्य चैनलों ने उन्हें उकसाया था और उन पैनल हाउसों को पैसे की पेशकश करने को कहा था, जहाँ उन्होंने बार-ओ-मीटर सेट किए।

साभार: रिपब्लिक टीवी

इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी बताया कि विनय नाम के एक शख्स ने साल 2019 में 5 घरों में जाकर हर रोज इंडिया टुडे दो घंटे देखने को कहा गया। अपनी रिपोर्ट में रिपब्लिक टीवी ने एफआईआर की कॉपी भी लगाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विनय ने पाँचों घरों के लिए 5000 रुपए कमीशन भी बाँटा। यानी हर घर को एक हजार रुपए। और ये सब सिर्फ़ इसलिए कि वह नवंबर 2019 से मई 2020 तक इंडिया टुडे 2 घंटों के लिए देखें।

शिवसेना के साथ-साथ जश्न मना रहे अर्नब के प्रतिद्वंदी पत्रकार

मुंबई पुलिस ने आज (अक्टूबर 8, 2020) रिपब्लिक टीवी पर फर्जी टीआरपी खरीदने का आरोप लगाया था। वहीं रिपब्लिक टीवी ने भी प्रतिक्रिया में मुंबई पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह पर मानहानि का मामला दर्ज कराने की बात कही।  इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ट्विटर पर खुशी मनाते दिखे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए लिखा- असत्यमेव जयते!!!

संजय राउत के साथ रिपब्लिक टीवी के कई प्रतिद्वंदी टीवी चैनल के पत्रकार भी कटु टिप्पणी करने से नहीं चूके, जो वास्तविकता में हर दिन इस होड़ में लगे रहते हैं कि उन्हें किसी तरह रिपब्लिक टीवी की तरह व्यूअरशिप मिल जाए। 

साहिल मुर्ली मेंघानी, जिन्हें शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों का बेहद नजदीकी माना जाता है, उन्होंने भी सोशल मीडिया पर लिखा है कि रिपब्लिक टीवी  को न्यूज चैनल नहीं माना जाना चाहिए।

भूपेंद्र चौबे ने तो इस मौके को पूरे सिस्टम को क्लीन करने का अवसर बताया। उन्होंने सभी स्टेक होल्डर्स से अपील की कि वह इस मौके का फायदा उठाएँ और ऐसे सिस्टम को क्लीन करें। 

अर्नब गोस्वामी के कट्टर विरोधी व इंडिया टुडे के पत्रकार राहुल कंवल ने भी इस मौके का पूरा फायदा उठाया। साथ ही उन ‘गरीब अनपढ़ लोगों’ के साथ अपनी संवेदनाएँ जाहिर की जो इंग्लिश न्यूज चैनल को अपने टीवी पर देखने के लिए पैसे देते हैं। हालाँकि अब शायद राहुल कंवल ने अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया है। 

एनडीटीवी के अरविंद गुनासेकर (Arvind Gunasekar) भी ट्रेंड कर रहे हैशटैग का इस्तेमाल करके मौके का फायदा उठाने से नहीं चूके।

राजदीप सरदेसाई ने तो बड़ी चालाकी से ब्रेकिंग शब्द का इस्तेमाल करके रिपब्लिक टीवी का इस स्कैंडल में होने का जिक्र किया। उन्होंने स्थानीय मराठी चैनल और एक मूवी चैनल के साथ रिपब्लिक टीवी का नाम लेकर कहा कि मुंबई पुलिस ने फेक टीआरपी के रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

यहाँ गौर करने वाली बात है कि एक ओर जहाँ मुंबई पुलिस कमिश्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अर्नब गोस्वामी का नाम लिए जाने के बाद सभी पत्रकार ट्विटर पर खुशी मना रहे हैं। वहीं ये सभी आम दिनों में उनके साथ और उनके चैनल जैसी व्यूअरशिप पाने की होड़ में लगे रहते हैं।

इंडिया टुडे के पत्रकार को अर्नब ने दिखाया विक्ट्री का साइन

इंडिया टुडे की ही यदि बात करें तो आज इस मामले प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उनके रिपोर्टर मुस्तफा शेख फौरन रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्नब गोस्वामी के पास पहुँचे। मगर सबसे दिलचस्प यह देखने को मिला कि अर्नब गोस्वामी ने कुछ भी प्रतिक्रिया देने की बजाय दो उंगलियों से विक्ट्री का साइन बनाकर दिखा दिया।

मुस्तफा बार-बार अर्नब की बाइट लेने के लिए उनके पीछे दौड़ते रहे। मगर, अर्नब से उन्हें विक्ट्री साइन और चेहरे पर मुस्कान देखने को मिली। इंडिया टुडे ने दावा किया कि उनके पत्रकार को अर्नब के बाउंसर ने उनसे अलग भी किया। मुस्तफा ने पूछा, “अर्नब हम आपसे सवाल कर रहे हैं कि… ये आसान सवाल है, अगर आपने गलत नहीं किया, आप बेकसूर हैं… तो आप हमारे साथ ऐसा क्यों बर्ताव कर रहे हैं? यदि आप कह रहे हैं कि यह आपकी जीत है तो सवालों के जवाब दीजिए, अर्नब?”

अर्नब का बयान

बता दें कि परमबीर सिंह के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अर्नब ने अपने बयान की वीडियो जारी की। इसमें अर्नब गोस्वामी ने कहा, “मुंबई पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह ने रिपब्लिक टीवी पर झूठे आरोप लगाए हैं, क्योंकि हमने उनसे सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच से जुड़े कई सवाल किए थे। रिपब्लिक टीवी मुंबई पुलिस कमिश्नर पर आपराधिक मानहानि का दावा करेगी। BARC ने ऐसी एक भी रिपोर्ट जारी नहीं की है जिसमें रिपब्लिक टीवी का नाम शामिल हो। सुशांत सिंह राजपूत मामले में परम बीर सिंह द्वारा की जाँच पर खुद शक के बादल मंडरा रहे हैं।” 

इसके बाद अर्नब ने कहा, “यह सिर्फ और सिर्फ निराशा में उठाया गया एक कदम है क्योंकि रिपब्लिक टीवी ने पालघर मुद्दे, सुशांत सिंह के मुद्दे या इस तरह के किसी भी अन्य मुद्दे पर रिपोर्ट तैयार की। इस तरह निशाना बनाने से हमारा संकल्प और मज़बूत होता है और सच की ज़मीन ठोस होती है। आज परमबीर सिंह की असलियत सामने आ गई है, क्योंकि BARC की रिपोर्ट में रिपब्लिक टीवी का नाम कहीं नहीं है। उन्हें आधिकारिक तौर पर माफ़ीनामा लिखना चाहिए और अदालत में हमारा सामना करने की तैयारी कर लेनी चाहिए।”   

लालू-नीतीश से पहले सियासत में आने वाले रामविलास नहीं रहे, PM मोदी बोले- मैंने अपना दोस्त खो दिया

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार (अक्टूबर 8, 2020) को नई दिल्ली केे एस्कॉर्ट अस्पताल में निधन हो गया है। यह जानकारी उनके पुत्र और एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ट्वीट कर दी।

चिराग पासवान ने लिखा, “पापा… अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहाँ भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं। मिस यू पापा।” ट्वीट के साथ चिराग ने अपने बचपन की एक फोटो शेयर की। रामविलास पासवान इसमें उन्हें गले लगाए दिख रहे हैं।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री रामविलास पास कुछ समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में भर्ती थे। उनका 3 अक्टूबर की देर रात दिल का ऑपरेशन हुआ था। यह उनकी दूसरी हार्ट सर्जरी थी। इससे पहले भी उनकी एक बायपास सर्जरी हो चुकी थी।

चुनावों से पहले ही किसी पार्टी की लहर को पहचान लेने वाले व ‘मौसमी विज्ञानी’ कहे जाने वाले राम विलास पासवान सर्वप्रथम 1969 में विधायक चुने गए थे। वर्तमान में वह मोदी कैबिनेट में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री थे। उनकी आयु 74 वर्ष थी।

उनके निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है, “उनके निधन का दुख शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। उनके जाने से जो जगह खाली हुई है, उसे कोई नहीं भर सकता है। रामविलास पासवान जी का निधन मेरी निजी क्षति है। मैंने एक दोस्त, मूल्यवान सहयोगी और गरीबों के जीवन सम्मान से बीते ऐसा सुनिश्चित करने वाला शख्स खोया है।”

पीएम ने लिखा, “रामविलास पासवान कड़ी मेहनत और लगन से राजनीति में आगे बढ़े। एक युवा नेता के तौर पर उन्होंने इमर्जेंसी के दौरान जुल्म और हमारे लोकतंत्र पर हमले का विरोध किया। वह एक बेहतरीन सांसद, मंत्री थे।”

रामविलास पासवान का जन्म बिहार के खगड़िया जिले के शाहरबन्नी गाँव में हुआ था। उनकी पहली पत्नी राजकुमारी से उन्हें उषा और आशा नाम की दो बेटियाँ हैं। रामविलास पासवान 32 सालों में 11 चुनाव लड़ चुके हैं। उनमें से 9 जीत भी चुके हैं। उन्हें 6 प्रधानमंत्री के साथ काम करने का अनुभव था।

रामविलास पासवान के सियासी अनुभव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार से पहले ही सियासत में आ गए थे। 1977 के लोकसभा चुनाव में हाजीपुर से जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े पासवान ने चार लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कर रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद 2014 तक वे आठ बार आम चुनावों में जीते। फिलहाल वे राज्यसभा के सदस्य थे।

निजामुद्दीन ने बेटी के प्रेमी लक्ष्मीपति को शादी के नाम पर मिलने बुलाया, फिर कर दी हत्या: 3 साल से चल रहा था अफेयर

बेंगलुरु में दूसरे मजहब की लड़की से प्रेम करने पर के. लक्ष्मीपति का कत्ल कर दिया गया। लड़की के पिता ने उसे शादी की बात करने के नाम पर बुलाया था। जब लक्ष्मीपति पहुँचा तो निजामुद्दीन ने अपने बड़े बेटे सिकंदर और अन्य लोगों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। आरोपित बाप-बेटे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हत्या में शामिल इब्रत और ऑटो मोहम्मद फरार हैं। सभी आरोपित बसवनहल्ली के पास इस्लामपुरा के रहने वाले हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में एक कारखाने में काम करने के दौरान निजामुद्दीन की बेटी और 24 वर्षीय लक्ष्मीपति का प्यार पनपा। दोनों शादी करना चाहते थे। लेकिन अलग-अलग धर्म होने की वजह से परिजनों को उनका यह मँजूर नहीं था। इसे देखते हुए दोनों ने घर से भाग कर शादी करने का फैसला किया।

इससे गुस्साए लड़की के परिजनों ने लक्ष्मीपति को मारने की योजना बनाई। निज़ामुद्दीन ने लक्ष्मीपति और अपनी बेटी से संपर्क कर उनके रिश्ते को अपनाने की बात कही। इसके अलावा धूमधाम से शादी कराने का झूठा वादा कर लड़के को बेंगलुरु में मगडी तालुक के एक गाँव में बुलाया।

लड़की के पिता की बात पर विश्वास करते हुए मंगलवार की सुबह लक्ष्मीपति उनके पास पहुँचा। इसके बाद कथित तौर पर निज़ामुद्दीन ने अपने बेटे और अन्य लोगों की मदद से लक्ष्मीपति की उसके बड़े भाई नटराज के सामने गला दबाकर हत्या कर दी। नटराज किसी तरह वहाँ से भाग निकला और घटना की सूचना पुलिस को दी।

नटराज ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा, “लड़की के परिवार ने लक्ष्मीपति और मुझे गाँव में एकांत स्थान पर बुलाया। उन्होंने हमें आश्वस्त किया कि वे शादी पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। इसके बाद वह हमें एक कमरे में ले गए और शराब पिलाई। लेकिन जल्द ही, लड़की वालों ने लक्ष्मीपति को उनके धार्मिक मतभेदों के बारे में बताना शुरू कर दिया और उससे कहा कि वह कभी भी उनकी बेटी से शादी करने का सपना ना देखे।”

नटराज ने आगे कहा, “जैसे ही लक्ष्मीपति ने विरोध किया, तो वहाँ मौजूद कई लोगों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद लड़की के पिता और उसके भाई ने लक्ष्मीपति का बेल्ट से गला घोंटकर हत्या कर दी। कई लोगों ने मुझे पकडा हुआ था इसलिए मैं कुछ कर न सका।” नटराज ने अपनी शिकायत में कहा कि लड़की वालों ने मुझे भी धमकी दी कि इसके बारे में किसी को बताया तो वह मुझे भी जान से मार देंगे।

‘मेरा नाम बदल देना अगर मैं मोदी और योगी का सिर न लाया’: खुलेआम धमकी देने वाला सलमान गिरफ्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक भाषण देने वाले शख्स को बागपत पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बागपत में राष्ट्रीय लोकदल महापंचायत के दौरान गुरुवार को इस व्यक्ति ने घोषणा की थी कि वह पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ का सिर कलम कर देगा।

इसके बाद उसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होनी शुरू हुई और बागपत पुलिस के संज्ञान में आने के बाद आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया गया। युवक की पहचान बड़ौत निवासी सलमान के रूप में हुई है। उसके ख़िलाफ़ थाने में आईपीसी की धारा 153A/124A/504 506 के तहत मामला दर्ज हुआ है।

वीडियो में हम देख सकते हैं कि युवक भीड़ को संबोधित करते हुए कह रहा है, “एक हो जाओ भाइयों। मेरा नाम बदल देना अगर मैं मोदी और योगी का सिर न ले आया।” युवक का यह बयान सुनकर भीड़ भी तालियाँ बजाती है।

जानकारी के अनुसार, यह महापंचायत आरएलडी के जयंत चौधरी पर हाथरस में हुई लाठीचार्ज के बाद की गई थी। इस घटना के ख़िलाफ़ मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, बुलंदशहर, अलीगढ़ और बिजनौर में प्रदर्शन हुए थे। आरएलडी सदस्यों ने इस बाबत मथुरा के पास नौहिल बाजना-अलीगढ़ रोड पर ट्रैफिक भी बाधित किया था। साथ ही उन्होंने पीएम मोदी और सीएम योगी के पुतले भी फूँके थे।

आज सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार ने सलमान की इस वीडियो को शेयर किया और बागपत पुलिस को टैग करते हुए लिखा, “यह बागपत का वीडियो है जहाँ यह आदमी खुलेआम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के सर काटने की बातें कर रहा है। आपकी नज़रों में यह प्रदर्शन हो सकता है। मेरी नज़र में यह गुंडागर्दी और नफ़रत फैलाने का बहाना है। यूपी पुलिस इस पर संज्ञान ले एवं तुरंत कार्यवाही करे।”

साभार: दैनिक जागरण

इसके बाद एसपी बागपत अभिषेक सिंह ने मामले का त्वरित संज्ञान लिया और सख्ती दिखाते हुए आरोपित को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए। थोड़ी देर में बागपत पुलिस के ट्विटर से जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय लोकदल की सभा में प्रधानमंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला आरोपित गिरफ्तार हो गया है। अब आगे की कानूनी कार्रवाई भी विधिवत की जाएगी।

यहाँ बता दें कि पिछले कुछ समय से हाथरस मामले को लगातार जातिगत एंगल देकर राज्य में शांति-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक कई मामले सामने आ गए है जहाँ इस इस केस को आधार बनाकर सांप्रदायिकता और जातीय हिंसा फैलाने का प्रयास हुआ। अब तक पुलिस ने इस मामले में 21 मुकदमे दर्ज किए हैं।

उल्लेखनीय है कि 29 सितंबर 2020 को 19 वर्षीय हाथरस पीड़िता ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ा था। मृतका के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म होने के आरोप लगाए गए थे, लेकिन फोरेंसिक रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हुई। सीएम योगी ने जाँच के लिए एसआईटी टीम का गठन किया था। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में योगी सरकार ने सीबीआई जाँच का भी समर्थन किया। वहीं, आरोपित पक्ष लगातार खुद को बेगुनाह बता रहा है। उनका कहना है कि वो नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हैं।

ड्रग्स के कारोबार में शामिल था रिया चकवर्ती का भाई: शौविक को बेल देने से बॉम्बे हाई कोर्ट का इनकार

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद आरोपों के घेरे में आई रिया चकवर्ती को ड्रग्स मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी। लेकिन, उनके भाई शौविक की अर्जी हाई कोर्ट ने ठुकरा दी है। शौविक को ड्रग डीलर्स चेन की अहम कड़ी और उनसे और पूछताछ की जरूरत बताते हुए अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया।

शौविक को लेकर कोर्ट का मानना है कि वह ड्रग डीलर्स से सीधे संपर्क में था। हाई कोर्ट ने कहा, “इस स्टेज पर NCB के पास दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि शौविक अवैध तस्करी कर रहे ड्रग डीलर्स के साथ जुड़ा था।” जस्टिस सारंग कोतवाल ने कहा, “ड्रग डीलर्स की चेन में शौविक अहम कड़ी है।”

शौविक के अकाउंट से ‘वीड’ खरीदने के लिए पैसों का ट्रांजेक्शन हुआ था। हाई कोर्ट ने कहा कि वह एक पार्टी से ड्रग लेकर सुशांत को सप्लाई कर रहे थे। वह ड्रग्स के अवैध व्यापार में शामिल थे। शौविक पर ड्रग पेडलर अब्दुल बास‍ित परिहार, कैजान, करमजीत और सूर्यजीत के सीधे संपर्क में होने का आरोप है।

इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती को 1 लाख रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी थी। इस जमानत के साथ कई तरह की शर्तें जुड़ी हैं, जिनका रिया को पालन करना होगा। कोर्ट ने कहा था कि रिया को प्रत्येक 10 दिन बाद पुलिस स्टेशन में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी और उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा। विदेश यात्रा में जाने से पहले उन्हें कोर्ट की अनुमति लेनी होगी। अगर उन्हें ग्रेटर मुंबई छोड़ना होगा तो भी जाँच अधिकारी से इजाजत लेनी होगी।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद ड्रग्स मामले का खुलासा हुआ था। इसके बाद इसकी जाँच नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को सौंपी गई थी। एनसीबी ने कई ड्रग पेडलर्स को हिरासत में लेने के बाद रिया के भाई को 4 सितंबर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 8 सितंबर को रिया की गिरफ्तारी हुई थी। रिया पर सुशांत सिंह राजपूत के लिए ड्रग्स की खरीद-फरोख्त करने का आरोप है। इसके अलावा उन पर दिवंगत अभिनेता के पैसों की हेर-फेर का भी आरोप है। जिसकी जाँच ईडी कर रही है।

इस मामले में ड्रग्स चैट सामने आने के बाद एनसीबी ने दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, सोहा अली खान, रकुल प्रीत जैसी अभिनेत्रियों से भी पूछताछ कर चुकी है। बताया जाता है कि कई और बड़े बॉलीवुड सितारे भी एजेंसी की रडार पर हैं।

पाकिस्तान: 29 महीने की मासूम को रेप के बाद तड़पा-तड़पा कर मारा, छाती और पेट खुला शव मिला

पाकिस्तान के पेशावर जिले के चारसद्दा (Charsadda) से 29 महीने की मासूम को अगवा कर बलात्कार और निर्मम हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस को बच्ची का शव पेशावर के जब्बा कोरोना इलाके में मिला। शव देखकर साफ पता चलता है कि उसे मारने से पहले बहुत तड़पाया गया होगा। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ़ केस दर्ज किया है।

पाकिस्तानी मीडिया डॉन के मुताबिक, बच्ची मंगलवार (अक्टूबर 6, 2020) को शेख कल्ले क़िला स्थित अपने घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेलने के लिए निकली थी। इसके बाद वह लापता हो गई और बुधवार (अक्टूबर 7, 2020) को उसका शव मिला। प्रांग (Prang) और Daudzai (दौडजई) पुलिस ने शव बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में भेजा।

चारसद्दा के जिला पुलिस अधिकारी मोहम्मद शोएब खान ने कहा कि पुलिस ने बच्ची की पिता की शिकायत पर अज्ञात अपहरणकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। शव बरामद होने के बाद मामले को पीपीसी (पाकिस्तान पेनल कोड) की धारा 302 में दर्ज किया गया है।

खान ने बताया कि शुरुआती जाँच में उन्हें पता चला है कि बच्ची को मारने से पहले बहुत तड़पाया गया। उन्होंने कहा कि बच्ची के शरीर पर प्रताड़ना के निशान मिले हैं। अब मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद मामले को अलग-अलग धाराओं में दर्ज किया जाएगा।

बच्ची के पिता का कहना है कि उनके पिता की किसी के साथ दुश्मनी नहीं थी। वे रोते हुए कहते हैं, “आज मेरी जैनब थी कल किसी और की जैनब इससे गुजरेगी।” बता दें कि खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री महमूद खान ने इस मामले को दिल दहलाने वाला बताया। उन्होंने इस पर संज्ञान लेते हुए आईजीपी और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह फौरन गुनहगार को पकड़े। मुख्यमंत्री ने कहा है कि गुनहगार किसी कीमत पर बच नहीं पाएँगे। परिवार को न्याय दिलवाया जाएगा।

गौरतलब है कि इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर #AnotherZainab हैशटैग के साथ बच्ची के लिए इंसाफ माँगा जा रहा है। वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी अपने ट्विटर पर लिखा है, “एक और जैनब। एक और बलात्कार। 29 माह की जैनब को चारसद्दा में अपहरण किया गया। अब उसका कटे-फटे शरीर बरामद हुआ है। उसकी छाती और पेट खुले हुए थे। उसका रेप हुआ और फिर बलात्कार।”

बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान के कराची में 7 सितंबर को एक 5 साल की मासूम के रेप और हत्या का मामला सामने आया था। बच्ची का अधजला शव कूड़ेदान से बरामद हुआ था। 4 सितंबर को उसका अपहरण किया गया था।