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‘अनुराग’ के साथ काम करने के लिए ‘फिजिकली फ्रेंडली’ होना जरूरी: पायल घोष ने शेयर किया 2018 में #MeToo पर किया गया पोस्ट

अभिनेत्री पायल घोष ने 2018 में किए गए कुछ पोस्टों के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। इसमें उन्होंने 2015 में घटी घटना के बारे में बात की थी, जब निर्देशक अनुराग कश्यप ने उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की थी। हालाँकि, बाद में उनके मैनेजर ने ट्विट्स डिलीट कर दिए थे।

उन पोस्ट में, उसने खुले तौर पर उनका नाम नहीं लिया था, लेकिन ’प्रसिद्ध निर्देशक’ का इस्तेमाल किया। उन्होंने उन पोस्टों में आरोप लगाया था कि उनके साथ काम करने के लिए ‘फिजिकली फ्रेंडली’ होना जरूरी था। उनके साथ काम करने का ये मापदंड था।

ट्विटर पोस्ट में, उन्होंने तीन स्क्रीनशॉट शेयर किए और आरोप लगाया कि उनके मैनेजर और परिवार ने उन पोस्टों को डिलीट कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं कुछ और लोगों के लिए #metooindia का नाम बदलना सुनिश्चित करूँगी क्योंकि #metooindia नकली है और प्रभावशाली लोगों का गुलाम है।”

एक पोस्ट में, उन्होंने आरोप लगाया था कि ’प्रसिद्ध निर्देशक’ 600 से अधिक महिलाओं के साथ सोया था। एक अन्य पोस्ट में, उन्होंने कहा था, “मुझे बहुत सी बातें कहने का मन कर रहा है, लेकिन मेरा परिवार मुझे इस पर कुछ भी बात करने की अनुमति नहीं दे रहा है और मुझे सभी ट्वीट्स को हटाने के लिए कहा गया है।”

एक अन्य ट्वीट में, उन्होंने अपने मैनेजर और परिवार के बीच व्हाट्सएप चैट का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें वो सोशल मीडिया अकाउंट पर उनके पोस्ट को डिलीट करने पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने लिखा, “मेरे परिवार को मेरे मैनेजर का संदेश, क्योंकि वह बॉलीवुड के d *** e से डर गया था।”

उन्होंने इसके बारे में ट्वीट भी किया था, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी को टैग किया था और अनुराग कश्यप के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा था। बाद में उन्होंने मुंबई पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई। आरोपों के सत्य पाए जाने पर राष्ट्रीय महिला आयोग समर्थन में आया और कार्रवाई का वादा किया। वह महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से भी मिली थी। इस मुलाकात में उन्होंने अपने लिए न्याय की गुहार लगाई थी। 

बॉलीवुड अभिनेत्री पायल घोष की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस ने फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप को समन जारी कर दिया है। अनुराग से पुलिस ने कल (1 अक्टूबर) 11 बजे से पहले थाने में हाजिर होने को कहा है।

गौरतलब है कि 19 सितंबर को अनुराग कश्यप पर अभिनेत्री ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद पिछले हफ्ते निर्माता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ। केस में अनुराग पर दुष्कर्म, गलत इरादे से रोकने और महिलाओं का अपमान करने पर आईपीसी की यू /एस 376 (1), 354, 341, 342 सहित कई धाराएँ लगीं।

पायल घोष ने बीते दिनों मीडिया के साथ आपबीती साझा करते हुए बताया था कि अनुराग कश्यप ने उन्हें आपत्तिजनक वीड‍ियो दिखाए थे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अनुराग के 200 से अधिक लड़कियों से संबंध थे और अब यह संख्या 500 से ज्यादा हो सकती है।

यादों के झरोखों से: जब कारसेवकों ने बाबरी की रक्षा के लिए बना डाली थी ‘बेंगलुरु मॉडल’ वाली ह्यूमन चेन

इस देश में धर्म निरपेक्षता और पंथ निरपेक्षता की चर्चा अक्सर होती आई है। लेकिन जब भी बाबरी की याद आती है तो मुझे उसके सामने बाकी सभी लोगों की धर्म निरपेक्षता बनावटी और आडंबर ही महसूस होती है। इसके पीछे कारण वो चंद जज्बाती लोग थे, जिन्होंने भविष्य में होने वाली बातों की परवाह ना करते हुए ‘ह्यूमन चेन’ यानी मानव श्रृंखला बनाकर बाबरी की सुरक्षा की पूरी तैयारी की थी। हालाँकि, इस चेन में कहाँ चूक हुई, वह राज भी बाबरी के साथ ही चला गया।

याद कीजिए दिसम्बर, 1992 का वो दिन, जब जो कुछ भी बिना किसी षड्यंत्र के हुआ, और उसके चारों ओर प्रहरी की तरह खड़े कारसेवकों की तस्वीरों को। ये वो लोग थे, जो बेंगलुरु में हुए दंगों में बनी ह्यूमन चेन से कई साल पहले ही ह्युमन चेन बना डाली थी।

चश्मदीदों का कहना है कि उनकी जुबान पर जो ‘एक धक्का और दो’ के नारे थे, उनका मतलब धक्का देकर इस ह्यूमन चेन की मजबूती का फैक्ट चेक करने से था। उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों में आडवाणी जी को ‘ह्यूमन चेन का जनक’ कहा जाएगा।

इतिहास के पन्नों से मिली हुई एक दुर्लभ तस्वीर आप इस ट्वीट में देख सकते हैं –

कारसेवकों द्वारा यह ‘बेस्ट मानव श्रृंखला’ तब बना दी गई थी, जब मानव श्रृंखला बनाना ‘कूल’ नहीं हुआ करता था। और फिर याद कीजिए कि किस तरह कट्टरपंथी मजहबी भीड़ ने पूरे बेंगलुरु को जलाने के बाद एक मंदिर के बाहर अपने ही आतंक से मंदिर को बचाने के लिए ऐसी ही ह्यूमन चेन बनाकर सेक्युलर भारत की नींव रखी थी। लेकिन बाबरी वालों को संघी और बेंगलुरु वालों को सेक्युलर कहा जाता रहा।

पुरातत्वविदों का कहना है कि अयोध्या में एक ‘ह्यूमन चेन’ के अवशेष प्राप्त हुए हैं। खोजी पत्रकारों का दावा है कि किसी भी विरासत को बचाने के लिए बनाई गई यह अब तक की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा सेक्युलर मानव श्रृंखला है। यूनेस्को भी इस मानव श्रृंखला को बेस्ट मानव श्रृंखला घोषित करने पर विचार कर रहा है।

वहीं, कुछ गुप्त सूत्रों का कहना है कि इसी की तर्ज पर अभी एक और ह्युमन चेन काशी और मथुरा के लिए भी रवाना की जानी हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि यह ‘बेस्ट सेक्युलर मानव श्रृंखला’ भजन-कीर्तन के साथ ही सूफी संगीत और कव्वालियों का आयोजन कर पौराणिक दीवारों की सुरक्षा करेगी।

यह रिपोर्ट लिखे जाने तक मानव श्रृंखला के अवशेषों को निकालने का काम प्रगति पर था। और बाकि किसी भी सूचना के मिलते ही इस पर आगे लिखा जाएगा।

‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ आडवाणी ने जताई खुशी, जोशी ने कहा- सभी को अब मंदिर निर्माण को लेकर उत्साहित होना चाहिए

अयोध्या के बाबरी ध्वंस मामले में फैसला सुनाते हुए लखनऊ की विशेष अदालत ने आज (सितंबर 30, 2020) सभी 32 आरोपितों को बरी कर दिया। इस पूरे मामले में श्री लाल कृष्ण आडवाणी का नाम प्रमुख लोगों में से था। आज उन्होंने कोर्ट का फैसला आते ही इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। साथ ही अपनी खुशी जाहिर की।

उन्होंने कहा, “स्पेशल कोर्ट का आज को जो निर्णय हुआ है वह काफी महत्वपूर्ण है। यह काफी खुशी का प्रसंग है। काफी दिनों बाद कोई खुशी का समाचार मिला है।”

उन्होंने आगे जय श्री राम का नारा लगाते हुए कहा, “फैसले ने मेरी निजी और बीजेपी की राम जन्मभूमि मूवमेंट भावना को भी सही साबित किया। मैं इस फैसले का तहेदिल से स्वागत करता हूँ।”

वहीं भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, “यह अदालत का ऐतिहासिक फैसला है। इससे साबित होता है कि अयोध्या में 6 दिसंबर की घटना के लिए कोई साजिश नहीं रची गई थी। हमारा कार्यक्रम और रैलियाँ किसी साजिश का हिस्सा नहीं थीं। हम खुश हैं, सभी को अब राम मंदिर निर्माण को लेकर उत्साहित होना चाहिए।”

गौरतलब है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने बुधवार (सितम्बर 30, 2020) को फैसला सुनाया। 28 वर्षों में ये पहली बार हुआ, जब अयोध्या बाबरी मस्जिद ध्वंस मामले में किसी अदालत का फैसला सुनाया। हालाँकि, इस फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

बता दें कि बाबरी घटना के बाद दिसंबर 6, 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वंस मामले में फ़ैजाबाद पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे। इस मामले में कुल 49 अभियुक्त थे लेकिन उनमें से 17 की पहले ही मौत हो चुकी है। आरोपितों पर आपराधिक साजिश रचने से लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे। ये मामला 28 वर्षों तक चला, जिनमें 351 गवाहों को पेश किया गया। अब तक 600 दस्तावेज पेश किए गए हैं। सीबीआई के स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव ने फैसला सुनाया। राज्यपाल का कार्यकाल पूरा करने के बाद कल्याण सिंह के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।

यह तो पहली झाँकी है, काशी-मथुरा बाकी है: बाबरी मस्जिद पर कोर्ट के फैसले के बाद आचार्य धर्मेंद्र

अयोध्या में 28 वर्ष पहले 6 दिसंबर, 1992 को विवादित बाबरी मस्जिद का ढाँचा ढहाए जाने के आपराधिक मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट ने बुधवार (सितंबर 30, 2020) को अपना फैसला सुना दिया। स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि बाबरी विध्वंस पूर्व नियोजित घटना नहीं थी, बल्कि आकस्मिक घटना थी।

सीबीआई ​मामले के सभी 32 आरोपितों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने के मामले में पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर सकी। इसलिए लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, आचार्य धर्मेंद्र और उमा भारती समेत सभी 32 आरोपितों को केस में बाइज्जत बरी किया जाता है। 

इस फैसले के बाद केस में आरोपित रहे आचार्य धर्मेंद्र ने कहा, “सत्य की जीत हुई है। इस पर मैं प्रणाम करूँगा। हम सब मिलकर जितने भी पुराने दाग हैं, उनको धोएँगे। यह तो पहली झाँकी है, काशी-मथुरा बाकी है। जहाँ-जहाँ भी दाग है, उनको धोकर साफ करेंगे।”

आचार्य धर्मेंद्र ने सुनवाई से पहले न्यूज चैनल आज तक से बात करते हुए कहा था, “मैं आरोपी नंबर वन हूँ। सजा से डरना क्या? जो किया सबके सामने चौड़े में किया। षड्यंत्र होता तो मैं सबके सामने बताता कि ये षड्यंत्र था? सौभाग्य से मौका मुझे मिला, लोग इस बात को भूल गए हैं, लेकिन मैं नहीं भूल सकता।”

बता दें कि आचार्य धर्मेन्द्र विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल में शामिल हैं। आचार्य महाराज का पूरा जीवन हिंदी, हिंदुत्व और हिन्दुस्थान के उत्कर्ष के लिए समर्पित है। उन्होंने अपने पिता महात्मा रामचन्द्र वीर महाराज के समान उन्होंने भी अपना सम्पूर्ण जीवन भारतमाता और उसकी संतानों की सेवा में, अनशनों, सत्याग्रहों, जेल यात्राओं, आंदोलनों एवं प्रवासों में संघर्षरत रहकर समर्पित किया है।

आठ वर्ष की आयु से आज तक आचार्य श्री के जीवन का प्रत्येक क्षण राष्ट्र और मानवता के अभ्युत्थान के लिए सतत तपस्या में व्यतीत हुआ है। उनकी वाणी अमोघ, लेखनी अत्यंत प्रखर और कर्म अदबुध हैं। आचार्य धर्मेन्द्र जी अपनी पैनी भाषण कला और हाजिर जवाबी के लिए जाने जाते है. वे एक ओजस्वी एवं पटु वक्ता एवं हिन्दी कवि भी हैं।

‘हिन्दू राष्ट्र में आपका स्वागत है, बाबरी मस्जिद खुद ही गिर गया था’: कोर्ट के फैसले के बाद लिबरलों का जलना जारी

सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने अयोध्या बाबरी विध्वंस मामले में फैसला सुनाते हुए सभी 32 आरोपितों को बरी कर दिया और साथ ही कहा कि ये घटना पूर्व-नियोजित नहीं थी, अचानक घट गई – इसके बाद लिबरल गैंग का ‘मेल्टडाउन’ का दौर चालू हो गया है। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और महंत नृत्यगोपालदास सहित सभी आरोपित बरी कर दिए गए। कोर्ट ने कहा कि संगठन ने रोकने की कोशिश की लेकिन ये घटना अचानक घट गई।

इधर इस मामले में फैसला आने के साथ ही सोशल मीडिया पर लिबरल गिरोह का रोना चालू हो गया है। राम मंदिर भूमिपूजन से बौखलाए लिबरल इस ताक में थे कि अयोध्या बाबरी ध्वंस मामले में भाजपा नेताओं को जेल होगी लेकिन अफ़सोस कि कोर्ट सोशल मीडिया से नहीं, गवाहों-सबूतों और संविधान के हिसाब से चलता है। यहाँ हम आपके समक्ष लिबरल गैंग के क्रंदन भरे शब्द पेश कर रहे हैं, आनंद लीजिए।

पेश है बॉलीवुड की ‘क्वीन’ और सबसे ‘बड़ी स्टार’ स्वरा भास्कर का ट्वीट:

पत्रकार अभिलाष मोहनन ने तंज कसते हुए लिखा, “बाबरी मस्जिद को किसी ने भी नहीं ध्वस्त किया। लॉन्ग लिव इंडियन जुडिशरी।” खुद को समुदाय विशेष का अख़बार बताने वाले ‘मिल्ली गैजेट’ ने लिखा, “इंसाफ हो गया ना भाई?” PFI महसचिव अनीश अहमद ने लिखा, ‘सभी आरोपितों को बरी कर कोर्ट ने साबित कर दिया है कि किसी ने भी बाबरी को ध्वस्त नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट ने न्याय को ध्वस्त किया तो सीबीआई कोर्ट ने इसे दफ़न कर डाला।

बता दें कि आज ये फैसला सुनाने के साथ ही जज सुरेंद्र यादव रिटायर हो रहे हैं। कोर्ट की कार्यवाही निर्बाध चलती रहे और मामला न लटके, इसीलिए उन्हें रिटायर होने के बावजूद एक्सटेंशन दिया गया था। प्रोपेगंडा पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी ने पूछा कि दंगों में 1800 लोगों को किसे मारा? उन्होंने पूछा कि भारत की आत्मा के साथ अपराध करने के लिए कौन जिम्मेदार है? उन्होंने भी कोर्ट पे सवाल उठाए।

पत्रकार हरिंदर ने दावा किया कि पहले तो सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के बाबरी विध्वंस को ‘आपराधिक कृत्य’ कहा था लेकिन अब 28 वर्षों बाद ‘अचानक हुई घटना’ बताया जा रहा है। उन्होंने ये नहीं बताया था कि सुप्रीम कोर्ट ने ये नहीं कहा था कि ‘इन्हीं आरोपितों ने बाबरी को ध्वस्त किया’। वहीं प्रोपगंडा पत्रकार राना अयूब ने लिखा, “Yee..न्याय..भारत के स्टाइल में“। साथ ही उन्होंने लिखा कि हम साँस भी नहीं ले सकते।

इसी तरह ‘एडिटरजी’ के संस्थापक विक्रम चंद्रा ने दावा किया कि सभी आरोपितों को रिहा कर दिया गया, जबकि कइयों के ऊपर लगे आरोप दूसरों से ज्यादा गंभीर थे। उन्होंने दावा किया कि कुछ ने तो अपने किरदार के बारे में सार्वजनिक रूप से बताया भी था।वहीं ‘द हिन्दू’ की पत्रकार सुहासिनी हैदर ने लिखा, “किसी ने कुछ भी नहीं किया, ये बस हो जाता है।” वकील प्रशांत भूषण ने लिखा, “वहाँ कोई मस्जिद ही नहीं था, ये नए भारत का न्याय है।”

लिबरल क्रन्दन के क्रम में मराठी पत्रकार निखिल वागले ने दावा किया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस भारतीय संविधान पर सबसे गंभीर हमला था। उन्होंने दावा किया कि अगर हम दोषियों को सज़ा नहीं दे सकते तो हमें खुद को सेक्युलर राष्ट्र बताना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने लिखा, “हिन्दू राष्ट्र में आपका स्वागत है!” उन्होंने कहा कि ये किसी भी अपराध के लिए ‘ओपन लाइसेंस’ की तरह है।

वहीं खुद को एक्टिविस्ट बताने वाले तीस्ता सेतलवाड़ ने लिखा, ‘RIP भारतीय संविधान!‘ साथ ही उन्होंने लिखा कि ये सब पोस्ट-ट्रुथ है कि ये नेता लोग भीड़ को भड़का नहीं रहे थे बल्कि उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे।

इधर देश के क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के घर पर पहुँचे और उन्हें बधाई दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी ट्वीट कर इस फैसले पर ख़ुशी जताई।

1 अक्टूबर को 11 बजे के पहले थाने में हाजिर हो: अनुराग कश्यप को अभिनेत्री से रेप के मामले में मुंबई पुलिस का समन

बॉलीवुड अभिनेत्री पायल घोष की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस ने फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप को समन जारी कर दिया है। अनुराग से पुलिस ने कल (1 अक्टूबर) 11 बजे से पहले थाने में हाजिर होने को कहा है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, मुंबई पुलिस ने फिल्ममेकर को कल सुबह 11 बजे वर्सोवा पुलिस स्टेशन पूछताछ के लिए बुलाया है। इस कार्रवाई से एक दिन पहले पायल घोष ने केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के साथ महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में उन्होंने अपने लिए न्याय की गुहार लगाई थी।

रामदास अठावले ने पायल घोष से वादा किया था कि वह उनकी लड़ाई में उनका साथ देंगे। उन्होंने घोष के समर्थन में धरना देने की बात तक कही थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा था, “मुंबई पुलिस अनुराग कश्यप को गिरफ्तार करे, नहीं तो हम जल्द धरना पर बैठेंगे।”

वहीं, घोष ने भी चेतावनी देते हुए कहा था अगर उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो वह भूख हड़ताल पर बैठेंगी। उन्होंने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अभी तक निर्देशक की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है। 

गौरतलब है कि 19 सितंबर को अनुराग कश्यप पर अभिनेत्री ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद पिछले हफ्ते निर्माता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ। केस में अनुराग पर दुष्कर्म, गलत इरादे से रोकने और महिलाओं का अपमान करने पर आईपीसी की यू /एस 376 (1), 354, 341, 342 सहित कई धाराएँ लगीं।

इसके बाद अभिनेत्री ने हाल ही में राज्यपाल से मिलने के बाद अपने लिए Y श्रेणी की सुरक्षा की माँग की थी। मीडिया से बातचीत में पायल ने कहा था, “उनके सामने हमने अपनी बात रखी है और उनके रिकॉर्ड के लिए कंप्लेंट पेपर भी उनको दिया है। हमने उनसे Y सिक्योरिटी की माँग की है और उन्होंने बहुत अच्छे से हमारे साथ कॉपरेट किया। हमें अच्छा रिस्पॉन्स उनसे मिला है।”

बता दें कि एक ओर जहाँ लगातार अनुराग कश्यप के ख़िलाफ़ दर्ज हुआ मामला गर्माता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर फिल्ममेकर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा था, “क्या बात है, इतना समय ले लिया मुझे चुप करवाने की कोशिश में। चलो कोई नहीं। मुझे चुप कराते-कराते इतना झूठ बोल गए कि औरत होते हुए दूसरी औरतों को भी संग घसीट लिया। थोड़ी तो मर्यादा रखिए मैडम। बस यही कहूँगा कि जो भी आरोप हैं आपके सब बेबुनियाद हैं। बाक़ी मुझपर आरोप लगाते-लगाते, मेरे कलाकारों और बच्चन परिवार को संग में घसीटना तो मतलब नहले पे चौका भी नहीं मार पाए।”

अनुराग ने यह भी कहा था, “मैडम दो शादियाँ की हैं, अगर वे जुर्म हैं तो मंज़ूर है और बहुत प्रेम किया है, वह भी क़बूलता हूँ। चाहे मेरी पहली पत्नी हो, या दूसरी पत्नी हो या कोई भी प्रेमिका या वे बहुत सारी अभिनेत्रियाँ जिनके साथ मैंने काम किया है, या वे पूरी लड़कियों और औरतों की टीम जो हमेशा मेरे साथ काम करती आईं हैं, या वे सारी औरतें जिनसे मैं मिला बस, अकेले में या जनता के बीच मैं इस तरह का व्यवहार न तो कभी करता हूँ न तो कभी किसी क़ीमत पर बर्दाश्त करता हूँ। बाक़ी जो भी होता है देखते हैं। आपके वीडियो में ही दिख जाता है कितना सच है कितना नहीं, बाक़ी आपको बस दुआ और प्यार। आपकी अंग्रेज़ी का जवाब हिंदी में देने के लिए माफ़ी।”

काली, बदसूरत… सुहाना खान ने झेला गोरे-काले का भेद, पापा शाहरुख हैं Fair & Handsome के ब्रांड एम्बेसडर

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान ने मंगलवार (सितंबर 29, 2020) को एक तस्वीर साझा करते हुए इंस्टाग्राम पर दावा किया कि उन्हें उनकी भूरी त्वचा के कारण बदसूरत कहा गया था।

उन्होंने लिखा कि एक ओर जहाँ इस समय कई चीजें चल रही हैं। उनमें से पहली चीज जो सुधारने की आवश्यकता है वो यह कि किसी को भी उसकी त्वचा के रंग को लेकर परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

सुहाना ने बताया कि जब वह 12 साल की थीं, तो उन्हें युवाओं द्वारा कहा गया कि वह अपनी स्किन टोन की वजह से बदसूरत हैं। वह आगे लिखती हैं कि इस तथ्य के अलावा कि वह असल में युवा थे। दुख की बात यह है कि वह भारतीय थे, जो हम सभी को ऑटोमेटिकली ब्राउन बनाता है।

स्टार किड सुहाना लिखती हैं कि केवल भूरी त्वचा के कारण अपने लोगों से नफरत करना सिर्फ INSECURITY के अलावा कुछ नहीं है। उनकी मानें तो किसी को भी सोशल मीडिया द्वारा तैयार किए गए सौंदर्य मानकों का पालन नहीं करना चाहिए। वह 5″3 हाइट के साथ भूरी हैं और इसे लेकर वह बहुत खुश हैं।

पूरा पोस्ट:

इस समय कई चीजें चल रही हैं और यह ऐसा मुद्दा है, जिसको सही करना बहुत जरूरी है। यह सिर्फ मेरे बारे में नहीं है, यह उन सब लड़के और लड़कियों के बारे में हैं, जो बिना किसी बात के हीन भावना से ग्रस्त होते हुए बड़े हुए हैं। यहाँ मेरी अपियरेंस को लेकर कुछ टिप्पणियाँ की गई हैं। जब मैं 12 साल की थी, तो मुझे य़ुवाओं ने कहा कि मैं अपनी स्किन टोन की वजह से बदसूरत हूँ, इस तथ्य के अलावा कि वह असल में युवा थे। दुख की बात यह है कि हम सभी भारतीय हैं और जो हम सभी को ऑटोमेटिकली ब्राउन बनाता है। हाँ हम अलग-अलग रंगों में आते हैं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप मेलेनिन से खुद को दूर करने की कितनी कोशिश करते हैं, आप बस यह नहीं कर सकते। अपने ही लोंगो से नफरत करने का मतलब है कि आप असुरक्षित हैं। मुझे खेद है कि अगर सोशल मीडिया, भारतीय मैचमेकिंग या यहाँ तक ​​कि आपके स्वयं के परिवारों ने भी आपको आश्वस्त किया है, कि यदि आप 5″7 और साफ रंग के नहीं हैं, तो आप सुंदर नहीं हैं। मुझे आशा है कि यह जानने में आपकी मदद करेगा कि मैं 5″3 और ब्राउन रंग की हूँ और मैं इसको लेकर काफी खुश हूँ। और आपको भी होना चाहिए।

यहाँ बता दें कि सुहाना ने यह पोस्ट उन्हें सोशल मीडिया पर मिल रही टिप्पणियों के जवाब में लिखा है जहाँ उन्हें काली और बदसूरत कहा गया था। दिलचस्प बात यह है कि सुहाना बॉलीवुड के किंग खान की बेटी हैं और शाहरूख खान एक फेयरनेस क्रीम ‘fair and handsome’ के एम्बेसडर हैं जिसे आदमियों के लिए बनाया गया है और जो अपने विज्ञापनों में पुरुषों को गोरी त्वचा के सपने दिखाती है।

सुहाना ने फिल्म की पढ़ाई लंदन में की हैं और अपनी आगे की पढ़ाई वह न्यू यॉर्क में कर रही हैं। हाल में उन्होंने अपने एक्टिंग का डेब्यू एक शॉर्ट फिल्म से किया था। उसका नाम The Grey Part of Blue था और उसे निर्देशित Theodore Gimeno ने किया था।

बाबरी मस्जिद साजिश के तहत नहीं तोड़ी गई, यह अचानक घटी: कोर्ट ने सभी 32 आरोपितों को किया बरी

अयोध्या के बाबरी ध्वंस मामले में सीबीआई के स्पेशल जज एसके यादव ने 2000 पन्नों का जजमेंट (फैसला) दिया। इस मामले में सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या में बाबरी ध्वंस साजिशन नहीं हुआ, ये पूर्व-नियोजित नहीं था। इसे संगठन ने रोकने की भी कोशिश की, लेकिन घटना अचानक घट गई। इसके साथ ही सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है।

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और महंत नृत्य गोपाल दास उम्र और अस्वस्थता के कारण अदालत में उपस्थित नहीं थे। उमा भारती कोरोना की वजह से नहीं आ सकीं। सतीश प्रधान भी नहीं थे। हालाँकि, ये सभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फैसला सुनाने के समय उपस्थित थे। इस दौरान मीडिया तक को भी कोर्ट परिसर में जाने की अनुमति नहीं थी। सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है। आसपास की दुकानें भी बंद थीं।

अयोध्या बाबरी मस्जिद मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने बुधवार (सितम्बर 30, 2020) को फैसला सुनाया। 28 वर्षों में ये पहली बार हुआ, जब अयोध्या बाबरी मस्जिद ध्वंस मामले में किसी अदालत का फैसला सुनाया। हालाँकि, इस फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। दिसंबर 6, 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वंस मामले में फ़ैजाबाद पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे।

शाम के 5:15 बजे SHO प्रियंवदा नाथ शुक्ला ने एक एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें डकैती, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालना, किसी धर्म के अपमान के उद्देश्य से धार्मिक स्थल को नुकसान पहुँचाना और दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का मामला दर्ज किया गया। इसके 10 मिनट बाद सब-इंस्पेक्टर गंगा कुमार तिवारी ने दूसरी एफआईआर दर्ज की।

इसमें लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और अशोक सिंघल (अब दिवंगत) सहित कई नेताओं को आरोपित बनाया गया। इसके बाद 47 और भी एफआईआर दर्ज हुए। पहले स्थानीय पुलिस और फिर CB-CID ने इस मामले की जाँच संभाली। दिसंबर 16, 1992 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने ललितपुर मजिस्ट्रेट की स्पेशल अदालत का गठन किया। फ़रवरी 27, 1993 को CB-CID ने चार्जशीट दायर की।

जुलाई 8, 1993 को हाईकोर्ट ने एक अन्य नोटिफिकेशन दायर कर के जहाँ सुनवाई कर रही कोर्ट के बैठने के स्थानको ललितपुर से रायबरेली स्थानांतरित कर दिया गया। इस मामले में बचे 48 एफआईआर को अगस्त 1993 में राज्य सरकार ने सीबीआई के पास भेजने की अनुशंसा की। अक्टूबर 5, 1993 को सीबीआई ने लखनऊ में 40 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। सितम्बर 1997 में लखनऊ कोर्ट ने समन भेजते हुए चार्जेज फ्रेम करने की अनुमति दी।

इस मामले में कुल 49 अभियुक्त थे लेकिन उनमें से 17 की पहले ही मौत हो चुकी है। आरोपितों पर आपराधिक साजिश रचने से लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामला 28 वर्षों तक चला, जिनमें 351 गवाहों को पेश किया गया। अब तक 600 दस्तावेज पेश किए गए हैं। सीबीआई के स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव ने फैसला सुनाया। राज्यपाल का कार्यकाल पूरा करने के बाद कल्याण सिंह के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।

हाँ, मैंने ढाँचे को तुड़वाया, अब फाँसी भी मिलती है तो सौभाग्य: डॉ रामविलास वेदांती ने कहा – रामलला को नहीं छोड़ूँगा

अब जब बुधवार (सितम्बर 30, 2020) अयोध्या बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई कोर्ट के फैसले का दिन है, आरोपितों में से एक डॉक्टर रामविलास वेदांती ने अपनी बात रखी है। भाजपा के पूर्व-सांसद रामविलास वेदांती ने कहा कि फैसला जो भी हो, उसे वो स्वीकार करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि जिसे लोग विवादित कहते हैं, वो विवादित नहीं था बल्कि राम जन्मभूमि मंदिर का खंडहर था। बाबरी विध्वंस के मामले में 28 वर्षों बाद फैसला आना है।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से 1998 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर सांसद बने रामविलास वेदांती ने कहा कि उन लोगों को पता था कि जब तक इस विवादित ढाँचे को तोड़ा नहीं जाएगा, तब तक भव्य राम मंदिर का निर्माण नहीं हो सकता है। वो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के सदस्य भी हैं। डॉक्टर रामविलास वेदांती ने ‘आजतक’ संवाददाता कुमार अभिषेक के साथ बातचीत में कहा,

“जब हमने इस ढाँचे को तोड़ा था तो उसके बाद हुई सुनवाई में जज साहब ने हमसे पूछा कि क्या प्रमाण है कि ये राम मंदिर है। इस पर हमने उन्हें इस स्थल का नक्शा दिखाने को कहा। जब पुराने राम मंदिर का नक्शा दिखाया गया तो 14 कसौटी के खम्भे में हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ खुदी हुई थीं। प्रवेश-द्वार पर ही हनुमानजी की मूर्ति थी। इसके अलावा 12 अन्य देवी-देवताओं की मूर्ति थी, जिनमें माँ दुर्गा और भगवान विष्णु की भी मूर्ति थी। साथ ही ॐ और स्वस्तिक के निशान बने हुए थे।”

साथ ही उन्होंने बताया कि उसमें धनुष-बाण के चिह्न और शंख-चक्र-गदा के चिह्न थे। वेदांती ने कहा कि दुनिया की किसी भी मस्जिद में हिन्दू देवी-देवताओं के चिह्न नहीं होते हैं। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उन लोगों ने किसी भी मस्जिद को तोड़ा है। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने तो बस मंदिर के ही खँडहर को तोड़ा है, ताकि भव्य राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके। उन्होंने आरोपों को गलत बताया।

बाबरी फैसले पर डॉटर रामविलास वेदांती (वीडियो साभार: आजतक)

डॉक्टर रामविलास वेदांती ने इन आरोपों से भी इनकार किया कि बाबरी ध्वंस एक साजिश के तहत हुआ और इसके लिए आपराधिक षड़यंत्र किया गया। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने खुलेआम तोड़ा, जहाँ लेखों कारसेवक थे और कई पत्रकार, पुलिस बल के लोग और जाँच एजेंसियों के लोग शामिल थे। वेदांती ने कहा कि उन्होंने डर कर कुछ नहीं किया, जो भी किया वो खुलेआम किया। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

‘नवभारत टाइम्स’ की खबर के अनुसार, फैसले से पहले रामविलास वेदांती ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि मंदिर था, मंदिर है और मंदिर ही रहेगा। उन्होंने कहा कि उस ढाँचे को तोड़वाने के लिए उन्हें गर्व है। उन्होंने कहा कि अगर इसके लिए उन्हें फाँसी की सज़ा होती है या फिर आजीवन कारावास की सज़ा होती है, तो रामलला के लिए वो भी भोगने के लिए तैयार हैं लेकिन रामलला को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि ये स्पष्ट है कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था लेकिन साथ ही पूछा कि जब मुग़ल बादशाह बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं ता तो फिर अयोध्या में बाबरी मस्जिद कहाँ से आ गई? उन्होंने कहा कि 2005 में एक महीने की गवाही में वो लोग सिद्ध कर चुके हैं कि वहीं रामलला का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि वो अदालत में आत्मसमर्पण के लिए तैयार हैं और सज़ा सज़ा मिलती है तो ये उनका सौभाग्य होगा। उन्होंने कहा- “हाँ, मैंने ढाँचा तुड़वाया।

मंदिर तोड़ मीर बाकी के मस्जिद बनवाने से लेकर बाबरी ध्वंस पर अदालत के फैसले तक: बाबरी मस्जिद टाइमलाइन

अयोध्या के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में फैसला आने वाला है और पूरे देश की नज़र इस पर लगी हुई है। राम मंदिर मामले का तो निपटारा हो चुका है, जिसमें हिन्दुओं की जीत हुई और रामलला को उनकी खोई हुई जमीन वापस मिली। लेकिन, दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद ध्वस्त किए जाने को लेकर चल रहे मामले पर बुधवार (सितम्बर 30, 2020) को सीबीआई का विशेष कोर्ट फैसला सुनाएगा।

इस मामले में 32 अभियुक्त हैं, जिनमें पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी (92), उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह (88), पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती (61), पूर्व भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी (86), ‘बजरंग दल’ के संस्थापक विनय कटियार (65), ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास (82) और सदस्य चम्पत राय, ‘दुर्गा वाहिनी’ की संस्थापक साध्वी ऋतम्भरा (56) और पूर्व-सांसद व हिन्दू संत डॉक्टर रामविलास वेदांती (61) प्रमुख नाम हैं। इनमें से सभी बुजुर्ग हैं।

इस मामले में कुल 49 अभियुक्त थे लेकिन उनमें से 17 की पहले ही मौत हो चुकी है। आरोपितों पर आपराधिक साजिश रचने से लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामला 28 वर्षों तक चला, जिनमें 351 गवाहों को पेश किया गया। अब तक 600 दस्तावेज पेश किए गए हैं। सीबीआई के स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव फैसला सुनाएँगे। आइए, इस सुनवाई और इससे जुड़े घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन पर एक नज़र डालते हैं।

  • 1528-29: मुग़ल बादशाह बाबर ने दिल्ली से अपना साम्राज्य विस्तार करते-करते अयोध्या तक दस्तक दी। उसके सेनापति मीर बाकी ने अयोध्या में राम मंदिर तोड़वा कर उस पर बाबरी मस्जिद बनवाई। भगवान राम के जन्मस्थान को इस्लामी आक्रांताओं ने तबाह कर इसका अतिक्रमण कर लिया।
  • 1853: निर्मोही अखाड़ा ने मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाए जाने के खिलाफ आंदलन शुरू किया। अवध में इस स्थल को लेकर हिंसा हुई।
  • 1859: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को 2 साल बीतने के बाद अंग्रेज ताकतवर हो गए थे। ब्रिटिश शासकों ने एक दीवार बना कर हिन्दुओं को बाहर पूजा करने और मुस्लिमों को भीतर नमाज पढ़ने की अनुमति दी।
  • 1885: मामला पहली बार न्यायिक दरवाजे तक पहुँचा। हिन्दू संत रघुबर दास ने फ़ैजाबाद कोर्ट में मंदिर बनाने के लिए इजाजत माँगी। अदालत ने इसे ठुकरा दिया लेकिन तारीखों का एक दौर शुरू हो गया।
  • 1934: दंगों के कारण मस्जिद की दीवारों और और गुम्बदों को नुकसान पहुँचा। अंग्रेजों ने फिर से इसकी मरम्मत कराई।
  • 1949: भगवान राम की मूर्ति स्थापित की गई। मुस्लिम पक्ष ने प्रतिकार करते हुए अदालत में मामला दर्ज कराया। दोनों पक्षों के अदालत जाने के बाद इस स्थल को विवादित घोषित कर यहाँ सारी गतिविधियों को रोक दिया गया।
  • 1950: मस्जिद को ढाँचा बताया गया। महंत गोपाल सिंह विशारद फ़ैजाबाद कोर्ट पहुँचे। महंत रामचंद्र बिष्ट भी हिन्दुओं के पूजा के अधिकार के लिए अदालत गए।
  • 1959-61: निर्मोही अखाड़ा ने इस स्थल के मालिकाना हक़ के लिए मामला दर्ज कराया। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड भी अदालत पहुँचा।
  • 1984: श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए विहिप के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया। गोरखपुर धाम के महंत अवैद्यनाथ ने आंदोलन की बागडोर थामी। उन्होंने अपने शिष्यों को राम मंदिर के लिए लड़ने वाली पार्टी को ही वोट देने को कहा।
  • फरवरी 1986: यहाँ हिन्दुओं को मजिस्ट्रेट ने पूजा करने की अनुमति दी। राम मंदिर का ताला खोला गया। मुस्लिम पक्ष ने बाबरी एक्शन कमिटी बनाई।
  • जून 1989: भाजपा और विहिप ने कंधे से कन्धा मिला कर लड़ने की योजना बनाई। विहिप के देवकीनंदन अग्रवाल मंदिर के लिए कोर्ट पहुँचे।
  • नवम्बर 1989: मंदिर का शिलान्यास किया गया।
  • सितम्बर 1990: लालकृष्ण आडवाणी ने मंदिर आंदोलन का नेतृत्व पूरी तरह अपने हाथों में लिया और रथयात्रा निकाली। अयोध्या में हजारों कारसेवक जमा हुए। कई राज्यों में दंगे भड़के। आडवाणी को बिहार में लालू यादव की सरकार ने गिरफ्तार करवाया। भाजपा ने वीपी सिंह की सरकार गिरा दी।
  • अक्टूबर 1990: पहली बार कारसेवा हुई। ढाँचे के ऊपर चढ़ कर रामभक्तों ने झंडा फहराया। मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों की हत्या करवा कर ‘मुल्ला मुलायम’ का टैग लिया।
  • जून 1991: चुनावों में मुलायम सिंह यादव को जनता ने सबक सिखाया और उनकी सरकार चली गई। भाजपा उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ हुई।
  • दिसंबर 1992: कारसेवा की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अदालत में मस्जिद की रक्षा के विषय में हलफनामा दिया। हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुँच कर बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। अस्थायी राम मंदिर बनाए गए। देश भर में कई स्थलों पर दंगे हुए। सीबीआई जाँच के लिए अनुशंसा जारी।
  • 1993: केस को अलग-अलग जिलों में ट्रांसफर किया गया।

अयोध्या में राम मंदिर के मामले में मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ भूमि जिले में ही कहीं और देने का सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया। हालाँकि, बाबरी ध्वंस मामले में इन अभियुक्तों का क्या किरदार था और उनहें क्या सज़ा मिलेगी – इसका निर्णय आज होगा। दिसंबर 6 से 21 तक 1992 में इस मामले में 47 एफआईआर दर्ज किए गए थे। उससे पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने ही 2 एफआईआर दर्ज करवाए थे।