उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मारने की धमकी देने वाले को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित एटा जिले का रहने वाला है। पेशे से ट्रक ड्राइवर अमरपाल को पुलिस गिरफ्तार करके लखनऊ के हजरतगंज थाने लाई है। उससे पूछताछ की जा रही है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, हजरतगंज पुलिस स्टेशन के एसएचओ अंजलि पांडे ने बताया कि अपराधी को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया है। जिसकी पहचान अमरपाल के रूप में हुई है। वह इटावा का रहने वाला है।
पुलिस पूछताछ में अपराधी ने बताया कि उसने नशे की धुन में धमकी भरे व्हाट्सअप मैसेज यूपी के 112 नंबर पर भेजा था। उसने किसी के साथ कोई संबंध होने से इनकार किया है।
गौरतलब है कि बुधवार (सितम्बर 23, 2020) की सुबह 9:56 से लेकर 10:11 के बीच धमकी भरे मैसेज मिले थे। इनमें सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था। साथ ही धमकी देते हुए कहा गया था कि मऊ से 5 बार विधायक रहे मुख़्तार अंसारी को 24 घंटे के भीतर रिहा किया जाए।
अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो शुक्रवार (सितम्बर 25, 2020) को सरकार ‘मिटा’ दी जाएगी। पुलिस ने उस नंबर के डिटेल्स पता कर लिए हैं, जिससे ये मैसेज भेजे गए थे। पुलिस की एक टीम आरोपित की गिरफ़्तारी के लिए गठित कर दी गई थी। जिसके बाद आरोपित को गिरफ्तार भी कर लिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (सितंबर 26, 2020) को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया अलग दौर से गुजर रहा है। पूरी दुनिया कोरोना महामारी से निपट रही है। उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थितियों में हुआ था, उसका स्वरूप क्या आज भी प्रासंगिक है?
पीएम मोदी ने कहा कि अगर हम बीते 75 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों का मूल्यांकन करें, तो अनेक उपलब्धियाँ दिखाई देती हैं। अनेक ऐसे उदाहरण भी हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता खड़ी करते हैं। ये बात सही है कि कहने को तो तीसरा विश्व युद्ध नहीं हुआ, लेकिन इस बात को नकार नहीं सकते कि अनेकों युद्ध हुए, अनेकों गृहयुद्ध भी हुए। कितने ही आतंकी हमलों ने खून की नदियाँ बहती रहीं। इन युद्धों में, इन हमलों में, जो मारे गए, वो हमारी-आपकी तरह इंसान ही थे।
वो आगे कहते हैं कि पिछले 8-9 महीने से पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से संघर्ष कर रहा है। इस वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र कहाँ है? संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रियाओं में बदलाव, व्यवस्थाओं में बदलाव, स्वरूप में बदलाव, आज समय की माँग है। भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र के रिफॉर्म्स को लेकर जो प्रोसेस चल रहा है, उसके पूरा होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। भारत के लोग चिंतित हैं कि क्या ये प्रोसेस कभी लॉजिकल ऐंड तक पहुँच पाएगा। आखिर कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के डिसिजन मेकिंग स्ट्रक्चर से अलग रखा जाएगा।
Over the last 8 to 9 months, the whole world has been battling the pandemic of the Coronavirus. Where is the United Nations in this joint fight against the pandemic? Where is its effective response?: PM Modi addressing UNGA#ModiAtUNpic.twitter.com/e989NegUWH
वो लाखों मासूम बच्चे जिन्हें दुनिया पर छा जाना था, वो दुनिया छोड़कर चले गए। कितने ही लोगों को अपने जीवन भर की पूँजी गँवानी पड़ी, अपने सपनों का घर छोड़ना पड़ा। उस समय और आज भी, संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे? पिछले 8-9 महीने से पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से संघर्ष कर रहा है। इस वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र कहाँ है?
उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ 4-5 साल में 400 मिलियन से ज्यादा लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना आसान नहीं था। लेकिन भारत ने ये करके दिखाया। सिर्फ 4-5 साल में 600 मिलियन लोगों को ओपन डिफिकेशन से मुक्त करना आसान नहीं था। लेकिन भारत ने ये करके दिखाया। भारत की आवाज़ मानवता, मानव जाति और मानवीय मूल्यों के दुश्मन- आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स, मनी लॉन्डरिंग के खिलाफ उठेगी।
पीएम मोदी ने कहा कि विश्व के सब से बड़े लोकतंत्र होने की प्रतिष्ठा और इसके अनुभव को हम विश्व हित के लिए उपयोग करेंगे। हमारा मार्ग जनकल्याण से जगकल्याण का है। भारत की आवाज़ हमेशा शांति, सुरक्षा, और समृद्धि के लिए उठेगी।
उन्होंने कहा, “विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के तौर पर आज मैं वैश्विक समुदाय को एक और आश्वासन देना चाहता हूँ। भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और वैक्सीन डिलिवरी क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के लिए काम आएगी। महामारी के इस मुश्किल समय में भी भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयाँ भेजीं हैं।”
पीएम आगे कहते हैं, “भारत जब किसी से दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, तो वो किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होती। भारत जब विकास की साझेदारी मजबूत करता है, तो उसके पीछे किसी साथी देश को मजबूर करने की सोच नहीं होती। हम अपनी विकास यात्रा से मिले अनुभव साझा करने में कभी पीछे नहीं रहते। हम पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं। यह हमारी संस्कृति, संस्कार और सोच का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने हमेशा विश्व कल्याण को ही प्राथमिकता दी है।”
महामारी के बाद बनी परिस्थितियों के बाद हम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान, ग्लोबल इकॉनमी के लिए भी एक फोर्स मल्टिप्लायर होगा। भारत में ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी योजनाओं का लाभ, बिना किसी भेदभाव, प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे।
आज भारत अपने गाँवों के 150 मिलियन घरों में पाइप से पीने का पानी पहुँचाने का अभियान चला रहा है। कुछ दिन पहले ही भारत ने अपने 6 लाख गाँवों को ब्रॉडबैंड ऑप्टिकल फाइबर से कनेक्ट करने की बहुत बड़ी योजना की शुरुआत की है।
कानपुर शहर में हिन्दू लड़कियों को प्रेम संबंधों में फँसाकर जबरन धर्मपरिवर्तन कराने के खेल में पाकिस्तानी संगठनों का हाथ सामने आया है। एसआईटी (SIT) जाँच में मजहबी फरेब के इन मामलों में पाकिस्तानी कनेक्शन को लेकर कई चौकाने वाले खुलासे हुए है। खबरों के अनुसार, हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाने और उनके धर्मांतरण के लिए पाकिस्तानी संगठन फंडिग कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि मस्जिद से पूरी साजिश रची जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कानपुर में बढ़ते लव जिहाद के मामलों को देखते हुए मोहित अग्रवाल द्वारा जाँच पड़ताल के लिए एसआईटी की एक टीम का गठन किया गया था। एजेंसी की जाँच में 50 हज़ार से अधिक फॉलोवर्स वाले पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी का पता चला है। ये फॉलोवर्स पूरे शहर में घूम घूम कर अपने समुदाय के लोगों को इस्लाम धर्म के प्रति कट्टर बनाने और हिंदुओं के प्रति नफरत भरने और उन्हें बरगलाने का काम कर रहे है। एजेंडे के तहत उनके द्वारा भोली-भाली हिन्दू लड़कियों को फँसाने, इस्लाम कबूल करवाने के साथ ही कई हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा हैं।
एसआईटी के प्रभारी सीओ विकास पांडेय ने बताया कि सभी मामलों की जाँच करने के बाद पता चला कि सभी आरोपितों का जुड़ाव शहर की ऐसी मस्जिदों से है, जहाँ पाकिस्तान कट्टरपंथी विचारधारा के संगठन दावते इस्लामी का कब्जा है। संगठन के अनुयायी शहर का हेडक्वार्टर कही जाने वाली डिप्टी पड़ाव स्थित एक मस्जिद से संगठन का संचालन कर जबरन धर्मपरिवर्तन कराने की सोच का प्रचार प्रसार करते हैं।
लव जिहाद के पीछे के घिनौने सच को उजागर करते हुए उन्होंने आगे बताया कि हेडक्वार्टर से जुड़ी करीब दो दर्जन अन्य मस्जिदों में भी दावत ए इस्लामी का ही हस्तक्षेप होने की जानकारी मिली। जूही लाल कॉलोनी के सभी मामलों में आरोपितों और उनके परिजनों का जुड़ाव भी एक ही मस्जिद से होने की बात सामने आने के बाद एसआईटी ने अपनी जाँच का रुख इस ओर मोड़ दिया है। पहले भी इस संगठन का विरोधी घटनाओं से ताल्लुक पता लगने के बाद इसी जाँच में एटीएस जुटी हुई थी।
फंडिंग को लेकर SIT प्रभारी ने बताया कि थोड़े बहुत नहीं बल्कि इस्लामिक संगठन को देश से करोड़ों रुपयों का चंदा दिए जाने की बात का भी पता चला है। यह सारा पैसा SBI के एक एकाउंट में इकठ्ठा किया जाता है। जिसके जरिए शिकार बनाने वाले मजहबी युवकों को हिन्दू लड़कियों को जबर्दस्ती इस्लाम धर्म कबूल करवाने के लिए दबाव दिया जाता है। एसआईटी शहर से इस संगठन को दिए जाने वाले चंदे का भी डाटा खंगालने में जुटी है।
वहीं इस मामले में एसआईटी के एक और अधिकारी चीफ एसपी साउथ दीपक भूकर ने बताया कि सिर्फ दावत ए इस्लामी ही नहीं, लव जिहाद के खेल में कई संगठनों के विषय में जानकारी मिली है। जिनका पता लगाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इन संगठनों की गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। चौकाने वाली बात यह है कि इन संगठनों के विषय में जानकारी यू-ट्यूब पर भी उपलब्ध है। यूट्यूब के वीडियो में चंदे के लिए एकाउंट समेत कई जानकारी बताई गई है। शहर की मस्जिदों में मुखबिरों को सतर्क कर दिया गया है।
अभिनेत्री कंगना रनौत का बंगला तोड़ने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई महानगर पालिका (BMC) के खिलाफ शुक्रवार (सितंबर 25, 2020) को तल्ख टिप्पणी की। दोनों पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि बीएमसी ने गलत नीयत से यह कार्रवाई की।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि बीएमसी ने कार्रवाई में काफी जल्दी दिखाई है। कोर्ट ने बीएमसी से पूछा कि क्या अवैध निर्माण को गिराने में वह हमेशा इतनी ही तेजी दिखाती है जितनी कंगना रनौत का बंगला गिराने में दिखाई? हाई कोर्ट ने बीएमसी को यह बताने को कहा है कि आखिर कंगना रनौत के खिलाफ कार्रवाई कानून के उन प्रावधानों के तहत क्यों नहीं की गई जिसमें कॉर्पोरेशन को आरोपों का जवाब देने के लिए कंगना को पर्याप्त समय दिया जाता।
कोर्ट ने कहा, “जितनी तेजी से आपने एक दिन पहले सर्वे किया और अगले दिन कार्रवाई की, इतनी जल्दी तो आप कोर्ट में रिप्लाई भी नहीं करते। बीएमसी के वो अधिकारी कौन थे जो कंगना रनौत के दफ्तर सर्वे करने गए थे। कोर्ट ने कहा कि पहली बार मामले को देखने पर यही लगता है कि गलत नीयत से कार्रवाई की गई है।”
कंगना रनौत के बंगले में तोड़-फोड़ मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख बीएमसी को लेकर सख्त फैसले आए। मामले की सुनवाई जस्टिस शाहरुख जिमी कथावाला और जस्टिस रियाज इकबाल चगला की खंडपीठ के सामने हुई।
बेंच ने बीएमसी को यह भी बताने को कहा कि उसने ग्राउंड फ्लोर पर तोड़–फोड़ क्यों की जब वहाँ कोई काम नहीं चल रहा था। कोर्ट की ओर से यह टिप्पणी और निर्देश कंगना रनौत के वकील की ओर से यह बताने के बाद आया कि बीएमसी ने रनौत के बंगले में तोड़-फोड़ के लिए मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन की धारा 354 (ए) का इस्तेमाल किया, जो निर्माणाधीन साइटों से संबंधित है।
वरिष्ठ वकील बिरेंद्र सराफ ने दो जजों की बेंच को बताया कि परिसर में कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा था जब बीएमसी स्टाफ ने 5 और 7 सितंबर को अवैध निर्माण मिलने का दावा किया। कोर्ट ने बीएमसी को वह फोन भी जमा कराने को कहा है कि जिसने कंगना रनौत के बंगले में 5 सितंबर को अवैध कब्जे का पता लगाया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उस अवैध निर्माण की कोई तस्वीर ली गई थी। बताया गया है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर बीएमसी टीम 7 सितंबर को निरीक्षण के लिए पहुँची थी।
बिरेंद्र सराफ ने कहा कि तोड़फोड़ की असली वजह अवैध निर्माण नहीं कंगना का शिवसेना नेता संजय राउत के साथ सोशल मीडिया पर टकराव था। जस्टिस एसजे काठावाला और जस्टिस आरआई चागला की पीठ कंगना रनौत की अपील पर सुनवाई कर रही है, जिसमें उन्होंने पहले 9 सितंबर को स्टे की माँग की थी। बाद में उन्होंने तोड़-फोड़ से हुए नुकसान को लेकर 2 करोड़ रुपए का हर्जाना माँगा है।
कंगना रनौत ने हाई कोर्ट से कहा कि उनके पास सबूत के तौर पर तस्वीरें हैं, जो उनके दावे को मजबूत करते हैं कि बीएमसी की ओर से अवैध कहे जा रहे निर्माण को 2019 में पूरा कर लिया गया था। इन्हें जनवरी 2020 में ली गई तस्वीरों से साबित किया जा सकता है। तस्वीरें परिसर में हुई पूजा के दौरान ली गई थीं।
बहुत पहले ही बात नहीं है, भारत ने अफग़ानिस्तान के गज़नी से आए 21 हिन्दू और सिख परिवारों को शरण दी थी। वहाँ पर इन परिवारों को जिस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है वह कोई राज़ की बात नहीं है। अफग़ानिस्तान में पहले ही युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, इसके ऊपर इस्लामी आतंकवाद और कट्टरपंथ ने वहाँ के अल्पसंख्यकों का जीवन नरक से भी बदतर बना दिया है।
हिन्दू और सिख परिवार तो भारत आ गए लेकिन इस दौरान एक व्यक्ति वहीं रह गया या यूँ कहें वहीं रुक गया। व्यक्ति ने वहाँ रुकने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उसे बचे हुए हिन्दू मंदिरों की सुरक्षा और देखरेख करनी थी। ऐसे ज़िंदा दिल और अटूट इरादों के व्यक्ति का नाम है ‘राजा राम’। भले उन्होंने कभी भारत की ज़मीन पर कदम नहीं रखा हो लेकिन उनके नाम और इस देश के बीच रिश्तों की सूरत बेहद खूबसूरत है।
राजा राम ने रेडियो फ्री से बात करते हुए कहा, “हम सभी अपनी मातृभूमि से प्यार करते हैं लेकिन हमला होने के बाद लोगों को यहाँ से जाना ही पड़ा। उन सभी के लिए कश्मीर ही मातृभूमि है।” इसके बाद उन्होंने कहा कि यहाँ पर हालात भयावह हो चुके थे, जिससे लोग पूरी तरह टूट चुके थे। जब लोगों के पास कोई विकल्प नहीं बचा, तब उन्होंने लाचार होकर अपनी ज़मीन छोड़ दी। राजा राम ने बताया कि एक बेहतर कल की आशा में उनकी पत्नी और बच्चे भारत आ चुके हैं। इसके बावजूद उन्होंने वहीं रहने का फैसला लिया, वहाँ स्थित मंदिरों की सेवा करने के लिए। अफग़ानिस्तान की सरकार ऐसा करने के लिए उन्हें हर महीने लगभग 100 डॉलर का भुगतान करती है।
राजा राम अभी तक इस बात के लिए आशावादी हैं कि ऐसा समय ज़रूर आएगा जब उनकी पत्नी और बच्चे उस जगह वापस लौट कर आएँगे जिसे वह अपना देश मानते हैं। इस मुद्दे पर वह कहते हैं, “मुझे ऐसा लगता है कि एक दिन अफग़ानिस्तान में शांति होगी, सब कुछ बेहतर होगा। ऐसा होने पर यहाँ रहने वाले सभी लोग वापस लौटेंगे। हिन्दू से लेकर सिख सभी इस ज़मीन की औलाद हैं, हम भी अफगान हैं।”
किसी ज़माने में अफग़ानिस्तान के भीतर हिन्दू और सिखों की संख्या 80 हज़ार थी। दोनों वहाँ पर मज़बूत अल्पसंख्यक की श्रेणी में आते थे लेकिन अब उनकी संख्या लगातार कम हो रही है। अल्पसंख्यकों की एक बड़ी आबादी या तो भारत आ चुकी है या फिर विदेशों की ओर चली गई है। भारत ने हमेशा प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को अपने यहाँ जगह दी है, जिससे उनके बच्चों को एक बेहतर भविष्य मिल पाए।
बेशक वह अपने देश को याद करते हैं, यह मानवीय स्वभाव है इसमें कोई गुरेज़ भी नहीं है। इसके अलावा वह इस बात के लिए आभारी भी रहते हैं जो भारत ने उन्हें अपने यहाँ शरण दी। उनके लिए इससे बेहतर बात क्या हो सकती है कि भारत उनके अस्तित्व को स्वीकार करता है। भारत पड़ोसी देशों (ख़ास कर इस्लामी देश) में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को शरण देना अपना कर्तव्य समझता है जिन्होंने हर तरह का अत्याचार झेला है।
इस कड़ी में सबसे पहला कदम था नागरिकता संशोधन क़ानून 2019, जिसकी मदद से इस्लामी मुल्कों में अत्याचार झेल रहे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को राहत मिलेगी। इसका बहुत से लोगों ने विरोध भी किया लेकिन अल्पसंख्यकों के हालात देख कर यह साफ़ हो जाता है कि इस क़ानून की कितनी ज्यादा ज़रूरत है। पाकिस्तान में रहने वाले सिख और हिन्दू समुदाय के लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार होता है वह किसी से छिपा नहीं है।
गज़नी के अंतिम हिन्दू राजा राम की कहानी इस बात का सबूत है कि वहाँ अल्पसंख्यकों को अपने मन मुताबिक़ पूजा करने के लिए कितना कुछ झेलना पड़ता है। इस तरह के मुश्किल हालातों में, अपने परिवार को छोड़ कर उन्होंने वहाँ रुकने का फैसला लिया। वह चाहते थे कि मंदिरों में दिया जलता रहे। इस तरह के बलिदानों की वजह से पूर्वजों की धरोहर ज़िंदा रहती है और एक सभ्यता जीवित रहती है।
ज़ी न्यूज़ पर बुधवार को प्रसारित हुए ‘ताल ठोक के’ शो के दौरान भाजपा नेता और प्रवक्ता संबित पात्रा ने शाहीन बाग की शेरनी बिलकिस बानो को लेकर विपक्षी दलों पर कटाक्ष किया। बता दें बिलकिस सीएए विरोध स्थल शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों में शामिल दादियों में से एक है। जिन्हें हाल में टाइम पत्रिका ने 2020 के ‘100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची’ में नामित किया है।
तनवीर अहमद द्वारा ‘प्रधान मंत्री के पद का सम्मान लेकिन नरेंद्र मोदी का नहीं’ जैसे एक विचित्र टिप्पणी के जवाब में संबित पात्रा ने कहा, “मैं आपको सबसे पहले बधाई देना चाहता हूँ। जैसा कि आपने कहा कि आप प्रधानमंत्री के पद का सम्मान करते हैं लेकिन नरेंद्र मोदी का नहीं। मैं आपको और सह-पैनलिस्ट सफूरा जहाँ को बधाई देना चाहता हूँ।”
पात्रा ने पैनलिस्ट में बैठे विपक्षी दलों का मजा लेते हुए कहा, “आप लोगों को दादी हुई है। आप लोग रखो न। आप प्रधानमंत्री के खिलाफ खड़ा भी कर दो दादी (बिलकिस बानो के संदर्भ में बोलते हुए) को। किसने मना किया है।”
संबित पात्रा ने कॉन्ग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए पार्टी सुप्रीमो सोनिया गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा, ”मैं तो कह रहा हूँ, मम्मी को हटा के दादी को लाओ। और कॉन्ग्रेस पार्टी सुने। मम्मी को हटाओ दादी लाओ। ओवैसी भी हटे दादी लाए। दादी हुई है आपको बहुत बधाई हो।”
शाहीन बाग ’शेरनी’ पर कटाक्ष करते हुए भाजपा नेता ने पूछा, “कितनी टैलेंटेड दादी है, 100 लीडर्स के नाम में दादी का नाम आ गया है ये कोई छोटी चीज है क्या? मैं तो कहता हूँ आज शाम को ही ये प्रपोजल पारित होना चाहिए कि दादी ही टक्कर दे सकती है मोदी जी को क्योंकि इनको मोदी जी तो पसंद नहीं है और दादी टक्कर भी दे सकती है। और सफूरा जहाँ बैठी भी यहाँ, पूछिए इनसे प्रपोजल के बारे में।”
सीएए के विरोध में प्रदर्शन विशेष कर शाहीन बाग का प्रदर्शन जो शुरू तो शांतिपूर्ण विरोध के रूप में हुआ लेकिन बाद में विरोध की सभी सीमाओं को पार करते हुए यह भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गया। शाहीनबाग से ही फरवरी में दिल्ली में हुए हिंसक दंगों की साजिश की शुरुआत की गई थी। इन दंगों में खासकर हिंदुओं को लक्षित किया गया और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दिल्ली दौरे के दौरान कई जगह जनाबूझ कर आगजनी की गई और काफ़ी खूनखराबा हुआ जिसका शिकार पुलिसकर्मी भी हुए।
शुरुआत में दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की सड़कों पर मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गया हिंसक विरोध प्रदर्शन विफल हो गया। जिसके बाद मुस्लिम समुदाय की कुछ महिलाओं ने शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं उन्होंने बस स्टॉप और एक राजमार्ग को भी ब्लॉक कर दिया था, जिससे आम जनता को काफी परेशानी हुई।
कथिततौर पर शाहीनबाग का विरोध प्रदर्शन संविधान को बचाने के लिए किया गया था जोकि एक सांप्रदायिक हिंसा में बदल दिया गया। उस दौरान यह बात भी सामने आई थी कि मुस्लिम भीड़ ने देश के दूसरे विभाजन की माँग करते हुए “जिन्ना वाली आज़ादी” जैसे पाकिस्तान समर्थक और हिंदुत्व विरोधी नारे लगाए थे।
दीपिका पादुकोण पर चर्चा से कुछ लोगों को दिक्कत है। करण जौहर को उनके कनेक्शंस के बारे में मीडिया की रिपोर्टिंग से दिक्कत है। अनुष्का शर्मा को कमेंट्री के दौरान उनका नाम आने से दिक्कत है। लेकिन, बॉलीवुड का इतिहास कहता है कि उन्हें महिलाओं पर भद्दे कमेंट्स और सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज से कोई दिक्कत नहीं है। तो क्या आजकल जो ‘इंस्टाग्राम फेमिनिज्म’ चल रहा है, उसे नाटक कहा जा सकता है? आइए, देखते हैं।
जब ‘My Choice’ का चोला ओढ़ कर आया था फेमिनिज्म
नैतिकता वो पाठ है, जिसे पढ़ाने वाले इसकी हदें पार कर के अघा चुके होते हैं। किसी ने सड़क पर कूड़ा फेंक दिया तो अनुष्का शर्मा ने गाड़ी रोक कर उसे न सिर्फ़ डाँटा, बल्कि इसका वीडियो भी बना लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। आज अनुष्का शर्मा को सुनील गावस्कर से समस्या है, जबकि वो उनके हित की ही बात कर रहे थे। इसी तरह ड्रग्स नेटवर्क में फँसे बॉलीवुड सितारों को अब नैतिकता याद आ रही है।
आपको दीपिका पादुकोण का ‘My Choice’ वाला वीडियो याद है? मार्च 2015 के अंतिम सप्ताह में आए इस वीडियो में बताया गया था कि ये उनका शरीर है, उनकी आत्मा है और उनका दिमाग है तो चॉइस उनकी ही होगी ना। इसमें उन्होंने कहा था, “मैं कब घर आती हूँ, ये मेरी चॉइस है।” इसकी एक और पंक्ति याद कीजिए, “मैं शादी से पहले सेक्स करूँ या फिर शादी के बाद विवाहेतर सेक्स करूँ- ये मेरी चॉइस है।“
यहाँ हम ऐसी किसी भी पंक्ति के लिए न तो किसी को गाली दे रहे हैं और न ही इसे आधुनिकता और ऑर्थोडॉक्सी के तराजू में तौल रहे हैं, बल्कि हमारा उद्देश्य ये है कि आप जिन चीजों को लेकर भाषण देकर ‘एक्टिविस्ट’ का चोला ओढ़ रहे हैं, आप खुद उसको व्यवहार में लाते हैं या नहीं, और, ये आपकी नज़र में सबके लिए सामान है या नहीं? आज जब पूरा बॉलीवुड ड्रग्स के जंजाल में जूझ रहा है, ये चीजें याद की जानी चाहिए।
दीपिका पादुकोण ने जिस ‘माय चॉइस’ पर प्रवचन दिया था, उसी पर आगे चलते हुए आज राहुल कँवल जैसे लोग कह रहे हैं कि व्हाट्सप्प चैट्स से ड्रग्स के आदान-प्रदान का खुलासा हो रहा है, ये प्राइवेसी पर हमला है। ये अलग बात है कि जब यही व्हाट्सप्प चैट्स उनके खुद के चैनल ने निकाले थे तो ये उनके लिए गर्व की बात थी। अब यही चीजें उनके लिए ‘चरित्रहनन’ हो गई हैं। अब फेमिनिज्म की आड़ में ड्रग्स को सही ठहराया जा रहा है।
नशेड़ियों तक को बचाने के लिए कभी प्रिवेसी का सहारा लिया जाता है। कभी किसी के महिला होने की बात कही जाती है, तो कभी कहा जाता है कि भगवान शिव भी ड्रग्स लेते हैं। वहीं खुद पर सबूतों के साथ भी आरोप लगे तो लम्बे-लम्बे इंस्टाग्राम पोस्ट्स और स्टोरीज के जरिए तुरंत ‘टॉक्सिक मैस्क्युलेनिटी’ वाला बहाना तैयार रहता है। ताज़ा मामला करण जौहर और दीपिका पादुकोण से जुड़ा हुआ है।
दीपिका पादुकोण का ‘माय चॉइस’ वाला वीडियो
जब इनकी कोई फिल्म आती है तो ये चाहते हैं कि मीडिया उसके बारे में ज्यादा से ज्यादा रिपोर्टिंग और चर्चा करे। तब ये इंटरव्यूज देते नहीं थकते। अब जब इनका नाम ड्रग्स में आया है तो इस पर मीडिया की चर्चा को ‘बदनाम करने की साजिश, भ्रामक, गलत और दुर्भावनापूर्ण अभियान’ करार दिया जा रहा है। तो पैट्रिआर्कि को स्मैश करने वाली कोई कह रही है कि जाँच एजेंसी से पूछताछ के दौरान उसके पति को भी साथ में रहने दिया जाए।
‘चरित्रहनन’- ये एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल ये लोग खुद पर लगे एक भी आरोप का जवाब देने के लिए करते हैं। ये तब किया जाता है, जब इनके सारे पीआर फेल हो जाते हैं, ये अपने पक्ष में लेख लिखवा कर थक जाते हैं और कुछ नहीं हो पाता। तब इनका अंतिम ब्रह्मास्त्र यही चलता है कि मैं विक्टम हूँ और मुझे निशाना बनाया जा रहा है। ‘चरित्रहनन’ क्या होता है, इसके लिए आज से साढ़े 5 वर्ष पीछे चलना होगा- फ़रवरी 2015 के पहले सप्ताह में।
AIB के शो में यौन अपराध का उड़ा था मजाक
तब AIB का एक वीडियो आता है, जिसमें रणवीर सिंह और अर्जुन कपूर एंकर की भूमिका में मंच पर होते हैं। फिल्म निर्देशक करण जौहर और उनकी माँ भी मौजूद होती हैं। कई सितारों के परिवार वाले मौजूद होते हैं। इसे नाम दिया गया- ‘रोस्टिंग’। बड़े ही कूल तरीक से शो के पहले समझाया गया कि रोस्टिंग एक ‘Comedic’ एक्ट है, जिसकी शुरुआत न्यूयॉर्क में 1949 में हुई थी और अब पूरी दुनिया में इसे अपनाया गया है। अब विदेश में शुरू हुआ तो ‘कूल’ तो होगा ही न।
इस शो में ‘रोस्ट मास्टर’ वही थे, जो आज मीडिया को गाली दे रहे हैं क्योंकि उनके पूर्व-कर्मचारियों के नाम ड्रग्स मामले में आए हैं। इस शो में उनका इंट्रो भी मजेदार था। बताया गया कि ‘एक पायलट, एक सेलर, एक अभिनेता, एक मॉडल और एक आर्किटेक- हमारे सभी लोगों को ख़ुशी से फ़क करने वाले’। शो शुरू होते ही उन्होंने कह दिया था कि अगली ही पंक्ति में उनकी माँ बैठी हैं, जिन्हें शो ख़त्म होने तक एम्बुलेंस की ज़रूरत पड़ सकती है।
दर्शक दीर्घा में अनुराग कश्यप भी बैठे थे, जो आज दिन-रात सबको नैतिकता का पाठ पढ़ाते रहते हैं। इसमें एक कॉमेडियन के रंग को लेकर मजाक उड़ाया गया, एक महिला कॉमेडियन को ‘सबसे कम लोकप्रिय’ बताया गया और ‘Asshole’ जैसे शब्दों का जम कर प्रयोग किया गया था- जिसे किसी ने भी ‘चरित्रहनन’ नहीं कहा। करण जौहर ने रणवीर सिंह के लिए ‘Pervert’ शब्द का इस्तेमाल किया।
यहाँ दीपिका पादुकोण के लिए करण जौहर ने क्या कहा था, वो जानने लायक है। उन्होंने कहा था, “मैं ये नहीं कह रहा कि रणवीर सिंह सिर्फ बुरी फ़िल्में करते है, अंतिम बार अगर वो किसी अच्छी चीज के भीतर थे वो तो हैं- दीपिका पादुकोण।” एक फिल्म निर्देशक ने जब सरेआम ‘रणवीर के दीपिका के भीतर होने’ की बात कही तो ये दोनों ही ठहाके लगा रहे थे। हाँ, किसी ने ‘चरित्रहनन’ की शिकायत नहीं की थी।
अरे, ये रोस्ट था न? रुपए लेकर मंच पर गालियों के लेनदेन को रोस्ट कहते हैं न? हाँ, अगर आप ड्रग्स के लेनदेन वाले व्हाट्सप्प ग्रुप की एडमिन हैं और उस बारे में किसी ने कोई रिपोर्ट छाप दी तो ये ‘चरित्रहनन’ हो जाएगा, इतना पक्का है। यहाँ प्रतिक्रिया में करारा जवाब देते हुए ये कहा जा सकता है कि अरे, इन पुराने ख्याल वाले लोगों को तो ‘रोस्टिंग’ भी नहीं पता। जो भी हो, जो भी चीजें कही गईं, वो सार्वजनिक है।
ऐसा नहीं है कि इसमें अनुष्का शर्मा का नाम नहीं आया था। आया था। आज जब सुनील गावस्कर और उनके साथी कमेंटेटर ने ये कहा कि वीडियो में देखा था कि अनुष्का की बॉल को कोहली खेल रहे थे, तो फेमिनिस्ट ‘अनुष्का को इसमें क्यों घसीटा जा रहा है’ वाला बयान चेंपते हुए आ गए। उन्होने ये नहीं नहीं समझा कि कमेंटेटर्स दुःख जता रहे थे कि विराट और अनुष्का को इतनी भी प्राइवेसी नहीं मिल पाती।
करण जौहर ने AIB के शो में कहा था कि रणवीर सिंह ने फिल्मों में 4 साल पूरे कर लिए हैं, जिनमें से 3 साल तो उन्हें अनुष्का शर्मा से निपटने में लग गए। उनका कहना था कि अनुष्का के पीछे पड़े रणवीर को आगे बढ़ने में 3 साल लग गए। तब न तो किसी ने इंस्टाग्राम पोस्ट लिख कर पूछा कि क्यों अनुष्का को इसमें ‘Drag’ किया जा रहा है और न ही किसी ने इस टिप्पणी के लिए करण जौहर की आलोचना की।
AIB का ‘रोस्ट’ वाला शो
खुद अनुष्का शर्मा का इस शो के बारे में क्या कहना था? जब उनसे AIB की शो में महिलाओं पर किए गए भद्दे कमेंट्स के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि हर इंसान का एक नजरिया होता है – आपका अलग होगा, मेरा अलग होगा और किसी और का अलग होगा। अनुष्का शर्मा ने इसे ‘गुड ह्यूमर’ देते हुए कहा था कि इसे गंभीरता से लेने की ज़रूरत ही नहीं है। तब वो ‘डेमोक्रेटिक सेटअप’ की बात करते हुए कहने लगी थीं कि ये उनके विचार हैं, किसी और का अलग हो सकता है।
वहाँ उनके साथ बैठे एक व्यक्ति सवाल उठाते हैं कि भला भारत में ऐसा क्या बना दिया गया है जो लोग यहाँ ‘बहन@&’ नहीं कह सकते हैं और अनुष्का शर्मा हँस-हँस कर लोट-पोट हुई जा रही थीं। करण जौहर के कमेंट्स ह्यूमर थे, लेकिन ड्रग्स में नाम आना या क्रिकेट में कोई कुछ कहे तो फिर सारा डेमोक्रेटिक सेटअप धराशायी हो जाता है और किसी और के ओपिनियन के लिए इनकी दुनिया में जगह ही नहीं बचती।
यहाँ परिणीति चोपड़ा की अनुपस्थिति में कहा गया कि वो यहाँ इसीलिए नहीं आई हैं क्योंकि उन्हें कहा गया था कि 4000 लोगों के सामने 10 लोग उन्हें ‘फ़क’ करेंगे और करण जौहर के बारे में कहा गया कि वो इसीलिए यहाँ आए हैं, क्योंकि 4000 लोगों के सामने उन्हें ‘फ़क’ करेंगे। कॉमेडियन रोहन जोशी को कहा गया कि वो सिर्फ इसीलिए फेमस हैं, क्योंकि उन्होंने आलिया भट्ट की बहन को ‘डेट’ किया है। दर्शक-दीर्घा में बैठी आलिया तालियाँ पीटती रहीं।
तब करण जौहर और दीपिका पादुकोण नहीं हुए थे ऑफेंड, नहीं आए थे इंस्टाग्राम पोस्ट्स
तब रणवीर सिंह को AIB के एक कॉमेडियन ने भरे मंच से राष्ट्रीय स्तर का ‘सेक्स ऑफेंडर’ कहा। हाँ, तब किसी ने ये बात नहीं उठाई थी जब कोई सेक्स ऑफेंडर होता है तो कोई पीड़ित भी होता है और ऐसा बोल कर इस अपराध को हल्का साबित करने की कोशिश हो रही है। क्या ‘यौन अपराध’ मजाक का विषय है? हाँ है, अगर बॉलीवुड का इलीट गैंग बैठ कर मजे ले रहा हो तब। दूसरे मामलों में तो थप्पड़ मारने का मजाक बनाना भी उनके लिए 2 किलोमीटर लम्बे इंस्टाग्राम पोस्ट का विषय बन सकता है।
आजकल पायल घोष के साथ यही तो हो रहा है। उन्होंने फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप पर बलात्कार का आरोप लगाया है, लेकिन उन्हें ‘मी टू’ अभियान को कमजोर करने वाला और ‘असली’ पीड़ितों के दर्द को हल्का करने वाला बताया जा रहा है, क्योंकि आरोप अनुराग कश्यप पर हैं। जिस बॉलीवुड के लोगों ने यौन अपराध का मजाक बनाया, वही लोग आज पायल घोष को अपराधी ठहरा रहे हैं, उनके महिला होने का सर्टिफिकेट ही रद्द कर दिया गया है।
जिन लोगों को AIB के शो में अपनी मां को फ्रंट रो में बैठाकर उनके सामने ये बताना कि बतौर गे वो सेक्स के दौरान क्या करते हैं,मास्टरबेशन, ब्लो जॉब पर छिछोरे जोक मारना, मां-बहन की गाली देना कूल लगता था आज उन्हें ड्रग्स के मामले में जांच और उसकी रिपोर्टिंग चरित्र हनन लग रहा है।गजबे है।
फरीदा जलाल और रीमा लागू जैसी वरिष्ठ अभिनेत्रियों के लिए AIB के उस शो में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। रघु राम ने दर्शकों को ही ‘चू#@या’ कहा, मंच से ‘भो%$ड़ी के’ कहते हुए कहा, वहाँ उपस्थित लोगों को ‘#@त’ कहा, कोई ऑफेंड नहीं हुआ। करण जौहर के बारे में फिल्म क्रिटिक राजीव मसंद ने कहा कि वो अनुराग कश्यप से घृणा करते-करते उनसे प्यार करने लगे, इसीलिए वो कल्कि कोचलिन के उलट हैं। कोई ऑफेंड नहीं हुआ।
बॉलीवुड ड्रग्स कनेक्शन मामले में पूछताछ और गिरफ्तारी का दौर जारी है। शनिवार (सितंबर 26, 2020) को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने क्षितिज रवि प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया। क्षितिज धर्मा प्रोडक्शन में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर (EP) था।
उसका नाम ड्रग पेडलर अंकुश अरनेजा ने लिया था। इसके बाद एनसीबी के सामने पूछताछ में अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने भी उसके बारे में जानकारी दी थी।
बता दें कि गिरफ्तारी से पहले एनसीबी ने क्षितिज से लंबी पूछताछ की है। उसे शुक्रवार को एजेंसी ने उसके घर से उठाया था। आरोप है कि क्षितिज ड्रग डीलर से ड्रग लेता था।
जानकारी के मुताबिक कुछ तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें धर्मा प्रोडक्शन के एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर क्षितिज प्रसाद और असिस्टेंट डायरेक्टर अनुभव चोपड़ा एक ड्रग पेडलर के साथ खड़े दिख रहे थे। ड्रग कनेक्शन में इस तस्वीर को क्षितिज प्रसाद और अनुभव चोपड़ा के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, एनसीबी ने क्षितिज से पूछताछ और सबूत मिलने के बाद ही उसे गिरफ्तार किया है। क्षितिज धर्मा प्रोडक्शन से जुड़ा बताया जा रहा है जिसके मालिक करण जौहर हैं।
हालाँकि करण जौहर का दावा है कि वे क्षितिज प्रसाद और अनुभव चोपड़ा को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते हैं। उनका कहना है कि ये दोनों अपनी व्यक्तिगत ज़िन्दगी में क्या करते हैं, इससे उनका या धर्मा प्रोडक्शंस का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने क्षितिज प्रसाद के बारे में बताया कि उसे धर्मा प्रोडक्शंस से जुड़ी कम्पनी धर्मेटिक एंटरटेनमेंट में एक कंटेंट के लिए बतौर एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर बहाल किया गया था, जो पूरा ही नहीं हो सका।
करण जौहर ने सोशल मीडिया पर अपना बयान जारी कर कहा था, “कुछ न्यूज चैनल, प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गलत और भ्रामक रूप से रिपोर्ट कर रहे हैं कि मैंने 28 जुलाई, 2019 को अपने घर पर पार्टी का आयोजन किया जिसमें नशीले पदार्थों का सेवन किया गया। मैं पहले ही कह चुका है कि सभी आरोप झूठे हैं। मैं दोबारा से दोहरा रहा हूँ कि आरोप पूरी तरह से निराधार और झूठे हैं। पार्टी में किसी भी मादक पदार्थ का सेवन नहीं किया गया था। मैं कहना चाहता हूँ कि मैं नशीले पदार्थों का न सेवन करता हूँ न ही इसे प्रमोट करता हूँ।”
एनसीबी के अधिकारियों का एक दल क्षितिज रवि को पूछताछ के लिए उनके आवास से शुक्रवार को अपने कार्यालय लेकर आया। अधिकारियों का दल सुबह उपनगर वर्सोवा में रवि के आवास पर पहुँचा। एनसीबी ने गुरुवार को रवि के आवास पर छापा मारा था। तलाशी के दौरान मारिजुआना और कुछ मात्रा में गाँजा आदि बरामद किया गया था। इसके बाद उन्हें शुक्रवार को एनसीबी जाँच दल के सामने पेश होने को कहा गया था।
बता दें कि अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े मामले में NCB की पूछताछ के दौरान क्षितिज रवि प्रसाद का नाम लिया था। उन्होंने बताया था कि क्षितिज ने उनके कुछ क़रीबियों को ड्रग्स की सप्लाई की थी।
गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत के मौत मामले में एनसीबी ड्रग्स एंगल की जाँच कर रही है। ड्रग्स के लेन-देन में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों के ड्रग्स के लेन-देन और सेवन करने की बात का खुलासा हुआ है। इस मामले में दीपिका पादुकोण के नाम तब खुलासा हुआ जब उनकी मैनेजर करिश्मा प्रकाश की व्हाट्सएप चैट सामने आई। जानकारी के मुताबिक रिया ने करिश्मा के साथ ड्रग चैट वाली बात कबूल कर ली है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने करण थापर को 44 मिनट 28 सेकेंड का इंटरव्यू दिया। इसमें उन्होंने बहुत ही ज्यादा जहर उगला है। इस दौरान उनके द्वारा बोले गए 4-5 लाइन ही उनका एजेंडा समझने के लिए काफी हैं।
उन्होंने दावा किया कि कश्मीर के लोग खुद को न तो भारतीय मानते हैं और न ही भारत के साथ रहना चाहते हैं। फारूक जैसे लोग अपनी निजी खुन्नस या विचार को कश्मीरियों के सामूहिक विचार के रूप में बेचना चाहते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल 5 अगस्त को उन्होंने (मोदी सरकार ने) जो किया, वह ताबूत में आखिरी कील था। उनका कहना था कि कश्मीर के लोग इस बात से खुश हैं कि चीन भारत पर हावी हो रहा है, वो चाहते हैं कि चीन भारत पर कब्जा कर ले, वो भी ये जानते हुए कि वह उइगरों के साथ क्या कर रहा है।
बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने शनिवार (सितंबर 26, 2020) को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की पूछताछ के दौरान अपनी मैनेजर करिश्मा प्रकाश के साथ ड्रग्स को लेकर चैट करने की बात कबूल कर ली। जाँच एजेंसी ने दीपिका पादुकोण और करिश्मा प्रकाश को आमने-सामने बैठाकर 2017 में की गई चैट के बारे में पूछताछ की। सूत्रों ने बताया कि इस दौरान अभिनेत्री ने चैट की बात स्वीकार कर ली।
बताया जा रहा है कि अभिनेत्री ने जाँच एजेंसी को संतोषजनक जवाब नहीं दिया, जिसकी वजह से उनसे दूसरे राउंड की पूछताछ की जा रही है। दोनों से दीपिका के K से ‘माल’ और ‘हैश’ की माँग करने को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। इसके अलावा ‘कोको’ में पार्टी किए जाने की बात पर भी सवाल पूछे जा रहे हैं। रिपब्लिक भारत के सूत्रों का कहना है कि करिश्मा ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को बताया कि हैश ड्रग्स नहीं है।
दीपिका पादुकोण से एनसीबी की 5 सदस्यी टीम सवाल कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दीपिका के कुछ जवाबों से एनसीबी संतुष्ट नहीं है। करिश्मा ने शुक्रवार (सितंबर 25, 2020) को पूछताछ में ड्रग्स लेने की बात से इनकार किया था। कहा था कि वे सिर्फ सिगरेट पीती हैं। आज जब दीपिका-करिश्मा को आमने-सामने बिठाकर ड्रग्स चैट को लेकर सवाल पूछा गया तो दोनों ने कहा कि ड्रग्स नहीं लेते हैं। NCB ने पूछा कि फिर चैट में ये वीड/हैश किसके लिए मँगवा रही हैं। इस पर दोनों ने गोल-गोल जवाब दिए हैं।
Shraddha Kapoor & Sara Ali Khan deny consumption of drugs: Sources.
इसके साथ ही NCB की टीम सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से ड्रग्स कनेक्शन पर पूछताछ कर रही है। टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के मुताबिक, सोर्सेज से जानकारी मिली है कि श्रद्धा ने सुशांत के साथ पार्टी की बात कुबूल की है लेकिन ड्रग्स लेने से इनकार कर दिया। हालाँकि, उन्होंने जया साहा के साथ सीबीडी ऑयल मँगवाने वाली चैट पर चुप्पी साध रखी है। वहीं सारा अली खान ने भी कहा है कि वह ड्रग्स नहीं लेतीं। सारा ने थाईलैंड जाने की बात कुबूली। वहीं सारा ने कहा कि पार्टीज होती थीं वहाँ ड्रिंक्स सर्व किए जाते थे।
वहीं दीपिका को मैनेज करने वाली टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी KWAN की भूमिका भी इस मामले में एजेंसी की रडार पर है। इससे पहले टैलेंट मैनेजर जया साहा और कंपनी के फाउंडर पार्टनर धुव चिटगोपेकर से भी मामले में पूछताछ की गई थी।
जया साहा को मामले का ‘किंगपिन’ कहा जा रहा है। दीपिका और KWAN के अन्य सदस्य ‘DP + Ka + KWAN’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्य थे, जिसकी एडमिन दीपिका थी। इससे पहले पूछताछ में जया साहा ने कुबूल किया था कि उन्होंने श्रद्धा कपूर के लिए सीबीडी ऑयल खरीदा था। उसने कुबूल किया था कि सुशांत सिंह राजपूत, रिया चक्रवर्ती, फिल्म मेकर मधु मांटेना वर्मा और खुद के लिए भी CBD ऑयल मँगवाया था। हालाँकि ड्रग्स के लिए किसी भी पैडलर से संपर्क होने की बात से जया ने इनकार किया था। उसका कहना था कि CBD ऑयल का इंतजाम उसने ऑनलाइन किया था।