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बॉलीवुड ‘सुपरस्टार’ के सामने ‘अपराधी’ शब्द बौना, ड्रग्स से लेकर हत्या/आत्महत्या और दंगों तक… कहाँ खड़ा होता है बॉलीवुड?

बॉलीवुड से जुड़े कई बड़े सितारों का नाम ड्रग्स मामले में सामने आ चुका है। कई से पूछताछ हो रही है और कई से पूछताछ होने वाली है। हर नए दिन कोई न कोई हैरान कर देने वाला खुलासा हो रहा है। जिन अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को चाहने वालों की संख्या लाखों-करोड़ों में है, उन पर जाँच की तलवार लटक रही है।

इस मुद्दे पर पूरा बॉलीवुड दो खेमों में बँट गया है, पहला जो चाहता है कि जाँच निष्पक्ष तरीके से हो और सच सामने आए। दूसरा जो लगातार बचाव कर रहा है। बॉलीवुड का यह दूसरा हिस्सा तमाम बेबुनियाद दलीलों के ज़रिए यह साबित करने पर तुला हुआ है – ‘सब चंगा सी’ 

इस बात की नज़ीर पेश हुई सितंबर 26, 2020) को ट्विटर पर। एक हैशटैग ट्रेंड हुआ #StandWithDeepika यानी हम दीपिका के साथ खड़े हैं। भले दीपिका ‘K’ से पूछ रही हों, “माल है क्या?” और ड्रग्स पर चैट करने वाले व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन हों… लेकिन हैशटैग ट्रेंड हुआ!

दीपिका के समर्थन में ट्विटर ट्रेंड (साभार – ट्विटर )

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है, जब बॉलीवुड ‘बॉलीवुड’ से जुड़े लोगों के कृत्यों का बचाव कर रहा है। बॉलीवुड का इतिहास ऐसे दृष्टान्तों से लदा हुआ है, जब बॉलीवुड के लोगों ने हर गलत बात को सिरे से खारिज करते हुए बचाव धर्म का निर्वहन किया। 

इससे पहले दीपिका पादुकोण ने जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हुई हिंसा को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। इसके बाद दीपिका ने कहा था कि उन्हें इस बात पर गर्व होता है कि आज लोग बिना डरे अपनी आवाज़ रख रहे हैं। इस बात पर बाद में खूब विवाद भी हुआ था क्योंकि दीपिका जिन लोगों के समर्थन में खड़ी थीं, उसमें 19 छात्रों के खिलाफ खुद जेएनयू प्रशासन ने मामला दर्ज किया था।

हालाँकि देश में हो रहे किसी भी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनना गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन सवाल यहाँ उठता है कि शामिल होने वाले की मंशा क्या है। संयोग की बात है कि उस दौरान ही दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘छपाक’ रिलीज़ होने वाली थी।

चूँकि मुद्दा महिलाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए महिलाओं के नज़रिए से ही शुरुआत करते हैं। साल 2018 के दौरान एक मुद्दे ने रातों रात पूरे देश को चर्चा की एक वजह दी, वह मुद्दा था- #Metoo, लेकिन इस मुद्दे पर कुछ लोगों के बयान ऐसे थे कि ज़िम्मेदार नागरिक की समझदारी दम तोड़ दे। तब बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफ़र सरोज खान ने खूब ‘नाम’ कमाया था। उन्होंने ‘मीटू’ और कास्टिंग काउच जैसे संवेदनशील मसले पर बेहद बेतुका बयान दिया था

सरोज खान ने कहा था, “यह कोई नई बात नहीं है, इस तरह की चीज़ें बाबा आदम के ज़माने से हो रही हैं। हर लड़की के ऊपर कोई न कोई हाथ साफ़ करने की कोशिश करता है। सरकार के लोग भी ऐसा करते हैं, तुम फिल्म इंडस्ट्री के पीछे क्यों पड़े हो? इंडस्ट्री कम से कम रोटी तो देती है। रेप करके छोड़ तो नहीं देती है।” बयान से स्पष्ट है कि सरोज खान के मुताबिक़ इंडस्ट्री में होने वाली शोषण और बलात्कार की घटनाएँ जायज़ हैं।

हाल ही में पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री और समाजवादी पार्टी से सांसद जया बच्चन ने भी ड्रग्स के मुद्दे चौंकाने वाली बात कही। दरअसल बॉलीवुड अभिनेता और भाजपा सांसद रवि किशन ने लोकसभा में बॉलीवुड और ड्रग्स नेटवर्क को लेकर आवाज़ उठाई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जया बच्चन ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया में फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल मुट्ठी भर लोगों के कारण आप पूरे बॉलीवुड को ड्रग्स एडिक्टेड नहीं बता सकते, उनकी छवि नहीं खराब कर सकते। 

जया बच्चन ने रवि किशन पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी थाली में छेद भी करते हैं। जया बच्चन ने रवि किशन पर निशाना साधते हुए कहा कि वो इस बात से शर्मिंदा हैं कि एक दिन पहले उसी सांसद ने बॉलीवुड में ड्रग्स की बात करते हुए पूरी इंडस्ट्री को भला-बुरा कहा, जो इसी का एक हिस्सा हैं।

ये तो हुई अभी की बात। लेकिन पहले सब दूध से धुला था, ऐसा नहीं है। आज से लगभग 26 साल पहले संजय दत्त के मामले में भी आज जैसी ही तस्वीर तैयार हुई थी और तस्वीर बनाने वाले कोई और नहीं बल्कि बॉलीवुड के लोग ही थे। 12 मार्च साल 1993 के दौरान मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इस मामले में बॉलीवुड से जुड़े कई लोगों का नाम सामने आया था।

इसमें सबसे ज़्यादा चर्चित रहा संजय दत्त का नाम, जिन्हें अबू सलेम और रियाज़ सिद्दीकी से अवैध हथियार लेकर रखने और नष्ट करने का आरोपित पाया गया था। आखिरकार मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में शामिल होने के आरोप में 4 जुलाई साल 1994 को उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया गया था। संजय दत्त को आतंकवाद और विघटनकारी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (TADA Act) के तहत आरोपित पाया गया था। 

संजय दत्त के समर्थन में तथाकथित पूरा ‘बॉलीवुड परिवार’ (साभार – desimartini.com)

अगले दिन पूरा बॉलीवुड तख्तियाँ लेकर मुंबई की सड़कों पर नज़र आया। रातों रात ‘Sanju, we’re with u’ के हज़ारों पोस्टर छपवाए गए। तथाकथित पूरा ‘बॉलीवुड परिवार’ जिसमें दिलीप कुमार से लेकर यश चोपड़ा तक और सायरा बानो से लेकर अमरीश पुरी तक मौजूद थे।

इसके अलावा शाहरुख खान, सलमान खान, सैफ अली खान, अनुपम खेर, महेश भट्ट, करिश्मा कपूर, अजय देवगन, अक्षय कुमार, रवीना टंडन, जैकी श्रॉफ और उस ज़माने की मशहूर अदाकारा आशा पारेख भी मौजूद थीं। यह सभी कलाकार संजय दत्त के समर्थन में हाथ में तख्तियाँ और पोस्टर लेकर खड़े थे। सुनील दत्त कॉन्ग्रेस पार्टी से सांसद थे, इसके बावजूद उन्होंने खुद इस मामले में 1995 के दौरान शिवसेना मुखिया बाल ठाकरे से मदद माँगी थी

यह तो कुछ बचाव करने वाले लोग हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो इस बात का बेहतर उदाहरण हैं कि पहले बॉलीवुड कितना नॉन पॉलिटिकल (गैर राजनीतिक) था, मतलब उन्हें सिर्फ अपनी इंडस्ट्री से मतलब था, राजनीति कम घुसाते थे। अब राजनीति पहले घुसती है और इंडस्ट्री के खेमे अपने-अपने तंत्र के साथ खड़े होते हैं। ऐसे लोगों की सूची में सबसे पहला नाम है अनुराग कश्यप का, जो उपद्रवियों का बचाव करते करते गृह मंत्री के लिए अपशब्द तक कह देते हैं।

एक बार इसी तरह के घृणा भरे उन्माद में अनुराग कश्यप ने अमित शाह को ‘जानवर’ तक कह दिया था। जिस पर कई लोगों ने उन्हें साफ़ शब्दों में समझाया था कि विरोध की एक भाषा और शैली होती है, लेकिन वो जैसा कर रहे हैं, उसकी परिभाषा कुछ और ही है। 

ठीक ऐसे ही एक बार अनुराग कश्यप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए भी अभद्र रवैया अपनाया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था, “CAA/CAB कहीं नहीं जाने वाला है। इनके लिए कुछ भी वापस लेना नामुमकिन है, क्योंकि वो उनके लिए हार होगी। यह सरकार हर चीज़ को हार-जीत में ही देखती है। इनका ego ऐसा है कि सब जल जाएगा, राख हो जाएगा लेकिन मोदी कभी ग़लत नहीं हो सकता। क्यों? क्योंकि अनपढ़ लोग ऐसे ही होते हैं।”

ऐसा ही एक और नाम है वरुण ग्रोवर, जिन्होंने ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ नाम की कविता लिख कर सुर्खियाँ बटोरी थी। यह कविता उन्होंने नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के विरोध में लिखी थी और इसके ज़रिए खूब वाहवाही लूटने का प्रयास किया था। कविता का रंग-ढंग ऐसा था कि पूरा वामी और लिबरल गिरोह इस पर भावुक हो गया था, कई दिनों तक क्रांतिकारी महफ़िलों में यह कविता हवा भरती रही। गिरोह के हर सदस्य ने बराबर प्रयास किया कि कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो और आम जनता पर भी इसका बराबर प्रभाव पड़े। 

इसके बाद एक बेहद दिलचस्प घटना हुई। साल 2020 के जनवरी महीने में ट्विटर पर वरुण ग्रोवर ने ट्वीट करते हुए जानकारी दी थी कि वो मई-जून 2020 में स्टैंडअप कॉमेडी के लिए मशहूर ‘ऐसी-तैसी डेमोक्रेसी’ के साथ मिलकर अमेरिका में एक टूर करने जा रहे हैं। वरुण ने ट्वीट में लिखा है कि टिकट बुकिंग की जानकारी वो बाद में देंगे लेकिन अभी यह पोस्टर शेयर किया जाना ज्यादा जरूरी था। वरुण ग्रोवर के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनसे सवाल किया है कि वो अमेरिका में कागज दिखाएँगे या नहीं?    

रिया चक्रवर्ती के मामले में भी बचाव करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। अनुराग कश्यप, विद्या बालन, फरहान अख्तर, सोनम कपूर, दिया मिर्ज़ा समेत बॉलीवुड के कई बड़े नामों ने रिया का समर्थन किया। रिया का समर्थन करने वालों को ड्रग्स नहीं नज़र आई और न ही ड्रग्स का सेवन, लेकिन तथाकथित ‘फेमिनिज्म’ ज़रूर नज़र आ गया। समर्थन करने वालों के लिए यह महिला सशक्तिकरण पर हमला और पैट्रीआर्की को बढ़ावा देता दिखा। उनके लिए इतने गंभीर आरोप अहम नहीं थे लेकिन रिया बेहद अहम थीं।       

यह तो कुछ ऐसी घटनाएँ हैं, जिनमें बॉलीवुड के लोगों की सच्चाई सामाजिक सतह पर नज़र आई। इसके अलावा भी ऐसे अनेक किस्से हैं, जिसमें बॉलीवुड ने ठीक वही काम किया, जिसका न तो कोई तर्क था और न ही उसे सही कहा जा सकता था।

चाहे बॉलीवुड का ड्रग्स मामला हो या सुपरस्टार्स के गलत कामों को सुधारने की कोशिश, गलत का विकल्प कैसे हो सकता है? फिर भी बॉलीवुड ‘बॉलीवुड’ का बचाव करने से पीछे नहीं हटता है, ऐसा करने के दौरान उनके लिए बचाव सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में ‘अपराध’ शब्द का कद ‘सुपरस्टार’ शब्द के सामने बौना साबित हो जाता है।    

पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का निधन, PM मोदी ने कहा- उन्होंने एक सैन्य अधिकारी और नेता के रूप में देशसेवा की

भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वयोवृद्ध नेता रहे जसवंत सिंह का रविवार (सितम्बर 27, 2020) की सुबह निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जसवंत सिंह के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि उन्होंने तत्परतापूर्वक देश की सेवा की, पहले तो एक सैनिक के रूप में और फिर राजनीति में अपनी लम्बी पारी के दौरान। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी जसवंत सिंह ने महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले।

बता दें कि भाजपा नेता जसवंत सिंह ने वाजपेयी सरकार में रक्षा, वित्त और विदेश जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाला था। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जसवंत सिंह के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि वो वरिष्ठ भाजपा नेता के निधन से काफी दुःखी हैं। राजनाथ ने कहा कि जसवंत ने अपनी संसदीय पारी में एक प्रभावशाली मंत्री के रूप में अपनी जगह बनाई। भाजपा के कई अन्य नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया।

जसवंत सिंह भारतीय सेना में भी सेवा दे चुके थे। उन्होंने 60 की दशक के अंत में ही राजनीति में कदम रखा था लेकिन जनसंघ में आने के बाद उन्हें सफलता मिलनी शुरू हुई और 1980 में वो राज्यसभा सांसद के रूप में संसद पहुँचे। केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने कई आर्थिक सुधारों को गति दी। वहीं विदेश मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भारत-पाकिस्तान तनाव का काल था, जिससे वो बखूबी निपटे।

‘रोओ मत, इमोशनल कार्ड मत खेलो’ – दीपिका पादुकोण 3 बार रोने लगीं, NCB अधिकारियों ने मोबाइल भी कर लिया जब्त

नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो ने शनिवार (सितम्बर 27, 2020) को ड्रग्स मामले में बॉलीवुड की तीन बड़ी अभिनेत्रियों दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर के साथ पूछताछ की। दीपिका पादुकोण सुबह के 10:30 बजे NCB के कोलाबा स्थित दफ्तर पहुँचीं और वहाँ दोपहर 3:30 तक रहीं। करीब 5 घंटे की पूछताछ के दौरान उनके मैनेजर करिश्मा के बयानों को लेकर भी उनसे सवाल किए गए।

NCB ने दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर के मोबाइल फोन्स को भी आगे की जाँच के लिए जब्त कर लिया। ‘इंडिया टुडे’ की खबर के अनुसार, दीपिका पादुकोण पूछताछ के दौरान 3 बार रो पड़ीं। इसके बाद जाँच एजेंसी के अधिकारियों ने उन्हें आगाह किया कि वो यहाँ पर अपना इमोशनल कार्ड न खेलें। दीपिका पादुकोण ने व्हाट्सप्प चैट्स में किए अपने मैसेज्स की स्वीकारोक्ति भी की।

हालाँकि, दीपिका पादुकोण ने किसी भी प्रकार का ड्रग्स कंज्यूम करने की बात से इनकार कर दिया। उनके मैनेजर करिश्मा प्रकाश के साथ उनके चैट्स वायरल हुए थे, जिसमें वो ‘माल’ की बातें कर रही थीं। इन तीनों अभिनेत्रियों के अलावा रकुल प्रीत सिंह, जया साहा और साइमन खम्भा के भी मोबाइल फोन्स जब्त कर लिए गए हैं। NCB ने दीपिका पादुकोण और करिश्मा को आमने-सामने बिठा कर उनके ड्रग्स वाले चैट को लेकर पूछताछ की।

दीपिका पादुकोण इससे पहल गोवा में एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थीं, जहाँ से समन मिलने के बाद वो अपने पति रणवीर सिंह के साथ मुंबई पहुँचीं। शुरुआत में रणवीर ने भी अर्जी दी थी कि उनकी पत्नी से पूछताछ के दौरान उन्हें कमरे में रहने की अनुमति दी जाए क्योंकि वो कई बार घबरा जाती हैं, जिसे अस्वीकृत कर दिया गया। हालाँकि, रणवीर भी एक गाड़ी से NCB दफ्तर तक पहुँचे थे लेकिन वो अंदर नहीं गए।

दीपिका पादुकोण ने इस बात से भी इनकार कर दिया कि उन्होंने किसी को ड्रग्स की सप्लाई की है। उनसे सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर कोई सवाल नहीं किए गए। इसी तरह श्रद्धा कपूर भी सुबह 11:45 बजे NCB के दफ्तर पहुँचीं। 6 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें 5:45 में छोड़ा गया। सारा अली खान से दोपहर के 1 बजे पूछताछ शुरू हुई और वो भी 5:45 बजे शाम को ही पूछताछ के बाद घर के लिए निकलीं।

सारा अली खान ने NCB के समक्ष पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि वो सिगरेट पीती हैं लेकिन ड्रग्स लेने की बात को उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि को पार्टियों के दौरान अक्सर दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत से मिलती-जुलती रहती थीं और फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग के दौरान वो उनके काफी करीब भी आ गई थीं। रिया के उन आरोपों का उन्होंने जवाब नहीं दिया, जिसमें उन्होंने सारा पर सुशांत का ड्रग्स से परिचय कराने के आरोप लगाए थे।

उधर रकुल प्रीत सिंह दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका लेकर पहुँची हैं, जिसमें उन्होंने माँग की है कि जाँच एजेंसी द्वारा उनसे जो भी पूछताछ हुई है, उस बारे में मीडिया डरा कुछ भी प्रसारित करने, छापने या प्रकाशित करने पर रोक लगाई जाए। दीपिका के प्रोफेशनल कार्यों को देखने वाली टैलेंट मैनेजमेंट कपनी KWAN भी जाँच एजेंसी के रडार पर है। जया साहा को इस नेटवर्क का किंगपिन भी माना जा रहा है। उधर करण जौहर के करीबी क्षितिज प्रसाद के गिरफ्तार होने के बाद उनपर भी उँगली उठ रही है।

करण जौहर ने भी बयान जारी करते हुए कहा है कि मीडिया रिपोर्ट्स में भ्रामक दावा किया जा रहा है कि जुलाई 28, 2019 को उनके यहाँ हुई पार्टी के दौरान ड्रग्स का इस्तेमाल हुआ था। बता दें कि इस पार्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रहा है। उन्होंने इस दावे को गलत बताते हुए इसे अपने खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि उनके परिवार और कम्पनी पर झूठा कलंक लगाने के मीडिया ऐसा कर रही है।

MP रवि किशन को ड्रग्स पर बोलने के कारण मिल रही धमकियाँ, कहा- बच्चों के भविष्य के लिए 2-5 गोली भी मार दी जाए तो चिंता नहीं

गोरखपुर से बीजेपी सांसद और एक्टर रवि किशन ने हाल ही में खत्म हुए संसद के मॉनसून सत्र में बॉलीवुड में ड्रग्स का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि देश के युवाओं के भविष्य के लिए इस मामले की गहराई से जाँच करने की बेहद जरूरत है। अब रवि किशन को ड्रग्स का मामला उठाने की वजह से कथित तौर पर धमकी मिल रही है। धमकियों पर उन्होंने कहा कि देश के भविष्य के लिए 2-5 गोली खा लेंगे तो कोई चिंता नहीं है।

जान से मारने की मिल रही धमकियों के बारे में पूछे गए एक सवाल पर शनिवार (सितंबर 26, 2020) को न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा, “मैं सही समय आने पर इस बारे में बात करूँगा। हमने देश के बच्चों के भविष्य के लिए, अपने भारत के लिए, फिल्म इंडस्ट्री के बच्चों के लिए, युवाओं के लिए आवाज उठाई है। उसमें हमने ये नहीं सोचा कि मुझे कोई जान से मार देगा। अगर कोई मार भी देता है तो देश के बच्चों के भविष्य के लिए अगर दो-पाँच गोली भी खा लेंगे तो कोई चिंता नहीं है।”

रवि किशन शुक्रवार (सितंबर 25, 2020) को दिल्ली से गोरखपुर आए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। ऐसा माना जा रहा है कि किसी धमकी भरे फोन के बाद वो योगी आदित्यनाथ से मिलने पहुँचे थे। सीएम से मुलाकात के बाद रवि किशन ने कहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ड्रग्स के कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ जो करवाई के निर्देश दिए हैं, वो उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं। उनके नेतृत्व में प्रदेश में ऐसे अराजक तत्वों का सफाया होगा जो इस काले कारोबार से जुड़े हैं।

रवि किशन ने संसद में कहा था, “नशीले पदार्थों की तस्करी और लत की समस्या बढ़ रही है। देश के युवाओं को नष्ट करने के लिए षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। हमारे पड़ोसी देश इसमें योगदान दे रहे हैं। पाकिस्तान और चीन से ड्रग्स की तस्करी हर साल की जाती है। इसे पंजाब और नेपाल के जरिए भारत में लाया जाता है।” उन्होंने कहा था, “ड्रग की लत फिल्म इंडस्ट्री में भी है। कई लोगों को पकड़ा गया है। NCB बहुत अच्छा काम कर रहा है। दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर, सजा देने और पड़ोसी देशों की साजिश के अंत के लिए मैं केंद्र सरकार से सख्त कार्रवाई करने का आग्रह करता हूँ।”

रवि किशन के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद और अभिनेत्री जया बच्चन ने उन पर जमकर हमला बोला था। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद कर रहे हैं। वहीं फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने आरोप लगाया था कि रवि किशन खुद वीड लेते थे। अब नेता बन गए हैं तो शायद ये सब ना करते हों।

रवि किशन ने पिछले दिनों नेपोटिज्म पर बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म इतना ज्यादा हावी है कि उन्हें अपना सरनेम (शुक्ला) तक हटाना पड़ा था। भाजपा नेता ने बताया कि उन्होंने नेपोटिज्म के कारण बहुत कुछ खोया है। उन्होंने कहा कि वो इंडस्ट्री में रुपए कमाने और अपने माँ-बाप का नाम रौशन करने आए थे। उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद वो एक गरीब परिवार से मुंबई आए थे, इसीलिए उन्हें यहाँ आकर अपना सरनेम हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। 

छत्तीसगढ़: वन भूमि अतिक्रमण को लेकर आदिवासी और ईसाई समुदायों में झड़प, मामले को जबरन दिया गया साम्प्रदयिक रंग

छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग के कोंडागाँव जिले के कथित तौर पर वन भूमि अतिक्रमण के मुद्दे पर कुछ गाँवों के बीच आपस में झड़प का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक समूह के लोगों द्वारा 22 और 23 सितंबर को दूसरे समूह से संबंधित कुछ परिवारों के घरों को कथित तौर पर लूट लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ स्थानीय आदिवासी लोगों द्वारा कथित रूप से आदिवासी संस्कृति का पालन नहीं करने पर ईसाई परिवारों पर हमला किया गया था। कथित तौर पर आदिवासी ग्रामीणों ने ईसाई परिवारों से कहा कि यदि वे उनके साथ रहना चाहते है तो वे मूल देवताओं की पूजा करें।

हालाँकि, इस मामले को लेकर जिला पुलिस ने कहा कि मुद्दा काकडाबेड़ा, सिंगनपुर और सिलाती गाँवों के दो समूहों के बीच वन भूमि अतिक्रमण का है, न कि समुदायों के बीच झगड़े का। पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) सुंदरराज पी ने कहा कि स्थिति को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया है।

इस मामले में पुलिस द्वारा अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है क्योंकि घटनाओं के विवरण का पता लगाने के लिए प्रारंभिक जाँच की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ परिवार ऐसे हैं जो पिछले 6 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाँवों में आदिवासी समुदाय के स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन नहीं करने वाले ईसाई परिवारों के साथ कुछ मुद्दे थे।

आईजी ने आश्वासन दिया कि शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया, “वरिष्ठ अधिकारी स्थिति के बारे में जानकारी होने के बाद बुधवार को मौके पर पहुँचे और ग्रामीणों को शांत किया। वर्तमान में स्थिति को काबू में कर लिया गया है।”

छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने दावा किया कि हिंसा पुलिस की मौजूदगी में हुई और कुछ परिवार रायपुर भाग गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण ईसाई परिवारों पर ईसाई धर्म छोड़ने या अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को मिलने वाले लाभों से वंचित करने का दबाव डाल रहे थे।

हालाँकि, कोंडागांव के एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने सीसीएफ के उन दावों को खारिज कर दिया कि हिंसा पुलिस की मौजूदगी में हुई थी। उन्होंने कहा कि यह एक सांप्रदायिक हिंसा नहीं थी, बल्कि मामला भूमि अतिक्रमण से संबंधित था।

वहीं CCF के अध्यक्ष पन्नालाल ने एक रिटायर्ड हाईकोर्ट जज या जिला जज से उच्चस्तरीय जाँच के साथ-साथ ईसाई परिवारों के लिए 10-10 लाख रुपए के मुआवजे की माँग की है।

द वायर ने एडिटेड वीडियो से कृषि बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले के बारे में फैलाई फर्जी खबरें, यहाँ जाने सच

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि बिहार की राजधानी पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी (JAP) के कुछ सदस्यों के साथ मारपीट की।

यह हमला कथित रूप से उस समय हुआ जब मोदी सरकार द्वारा पारित कृषि बिलों के विरोध में JAP नेता पप्पू यादव पटना में एक ट्रैक्टर रैली निकाल रहे थे।

बिहार के पटना में किसान बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा तथाकथित हमलों का यह वीडियो ‘National Dastak’ नामक न्यूज पोर्टल ने ट्वीट किया था। घटना के वीडियो को पोस्ट करते हुए, समाचार संगठन ने दावा किया था कि मोदी समर्थकों ने कृषि बिलों का विरोध करने के लिए कुछ लोगों पर लाठियों से हमला किया था।

1:30 मिनट के इस वीडियो को काफी चतुराई से एडिट किया गया। इसमें देखा जा सकता है कि लोगों के एक समूह को पार्टी के कार्यकर्ताओं को लाठी से पिटाई करने के लिए JAP पोस्टर वाले वाहन पर चढ़ रहे थे। कथित तौर पर ये लोग भाजपा कार्यकर्ता थे।

जैसे ही कथित घटना का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, ‘लिबरल-सेक्युलर’ समुदाय के सदस्य पूरी घटना के बारे में गलत जानकारी फैलाने में जुट गए कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने किसान बिल का विरोध करने के लिए विपक्षी दलों के सदस्यों पर हमला किया। 

वामपंथी वेबसाइट ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक -सिद्धार्थ वरदराजन भी इस होड़ में शामिल हो गए, जिनका फेक न्यूज़ फ़ैलाने का पुराना इतिहास रहा है। वरदराजन ने ‘नेशनल दस्तक’ द्वारा शेयर किए गए वीडियो को पोस्ट किया और दावा किया कि विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया हमला ‘काम पर फासीवाद’ के अलावा कुछ नहीं था।

Image Source: Siddharth Varadarajan

एक अन्य स्व-घोषित ‘पत्रकार ’और इस्लामवादी –आरफ़ा खानम शेरवानी, ‘द वायर’ के अपने संपादक के नक्शेकदम पर चलते हुए, उसी भ्रामक वीडियो को यह दावा करने के लिए पोस्ट कर दिया कि किसान बिल समर्थक कृषि बिल विरोधियों पर हमला कर रहे हैं।

हिंदू और भाजपा विरोधी के रूप में पहचानी जाने वाली आरफा खानम शेरवानी ने एंटी-सीएए और कृषि विरोधी बिल विरोधों के बीच एक समानता बताते हुए संकेत दिया कि कृषि बिल समर्थकों ने कृषि बिल विरोधियों पर उसी तरह से हमला किया, जैसा उन्होंने सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ किया। शेरवानी ने पूछा कि क्या लोगों को ‘गरीब-विरोधी और जन-विरोधी कानूनों के पारित होने’ के खिलाफ विरोध करने की अनुमति नहीं है।

Image Source: Arfa Khanum Sherwani

फर्जी-न्यूज़ पेडलर और अदालत के अवमानना मामले में दोषी प्रशांत भूषण ने भी भाजपा-विरोधी एजेंडा फैलाने के लिए एक बार फिर से बेशर्मी के साथ सोशल मीडिया पर आए और दावा किया कि विरोध कर रहे तथाकथित ‘किसानों’ को कुछ लोगों ने पीटा, जिन्हें उन्होंने स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में ‘मोदी भक्तों’ और ‘गुंडों’ की संज्ञा दी।

Image Source: Prashant Bhushan

हालाँकि, बीजेपी सरकार पर हमला करने और बिहार विधानसभा चुनावों से पहले अपने भाजपा-विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने की जल्दी में, वरदराजन और भूषण जैसे वामपंथी ‘कार्यकर्ताओं’ ने सावधानीपूर्वक एडिटेड वीडियो का सहारा लिया, जिसमें बीजेपी कार्यकर्ताओं को हमलावर के रूप में दिखाया गया था और विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ता को पीड़ित के रूप में।

फैक्ट-चेक

ऑपइंडिया ने पटना बिहार में पप्पू यादव द्वारा आयोजित किसान बिल के विरोध प्रदर्शन का ओरिजिनल वीडियो हासिल किया, जहाँ पर कथित तौर पर यह घटना हुई थी। इसमें देखा जा सकता है कि विपक्षी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं का समूह पटना के वीरचंद पटेल मार्ग स्थित भाजपा कार्यालय के भीतर घुसने की कोशिश कर रहा था।

गुस्साए कृषि बिल विरोधियों को भाजपा कार्यालय के गेट पर नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। जबकि बिहार पुलिस JAP के सदस्यों को वहाँ से हटा रही है, जिन्होंने कथित रूप से पटना में भाजपा कार्यालय पर हमला किया था।

पार्टी कार्यालय पर हमला के बाद कृषि बिल विरोधियों से खुद को बचाव करने के लिए बीजेपी कार्यकर्ता सड़क पर निकल आए। बचाव के क्रम में ही वो JAP की गाड़ी पर चढ़ गए, इस दौरान JAP के सदस्यों के साथ भिड़ंत हो गई।

यह भी देखा जा सकता है कि विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पटना की सड़कों पर ट्रैफिक जाम कर दिया था। कुछ भाजपा कार्यकर्ता, जो पार्टी कार्यालय के खिलाफ JAP हमले का बचाव कर रहे थे, उन्हें भी ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’, ‘भाजपा जिंदाबाद’ कहते सुना गया।

इस घटना के दोनों पक्षों की रिपोर्ट करने के बजाय, सिद्धार्थ वरदराजन और आरफा शेरवानी जैसे तथाकथित ‘निष्पक्ष’ पत्रकारों ने जानबूझकर भाजपा कार्यकर्ताओं पर प्रारंभिक हमले को नजरअंदाज कर दिया और इस घटना के बारे में आधे सच को आगे फैलाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कृषि बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था।

ड्रग्स में संलिप्त कलाकारों को निर्माता नहीं दें काम, सुशांत के मामले को भी जल्द सुलझाए CBI: रामदास अठावले

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शनिवार को सुशांत मामले की जाँच को लेकर सीबीआई पर निशाना साधा है। सुशांत की कथित हत्या के मामले में सामने आए ड्रग्स के एंगल ने कई फिल्मी हस्तियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है लेकिन इन सब में मुख्य मुद्दा सुशांत की मौत के पीछे छुपे रहस्य का मामला दब सा गया है। जिसपर पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने दिशा के मामले में भी सीबीआई की जाँच की माँग की है।

वहीं अब केंद्रीय मंत्री ने कहा, “नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की जाँच चल रही है। मुझे नहीं पता CBI क्या कर रही है। NCB की जाँच चल रही है लेकिन सुशांत की मौत मामले की जाँच भी होनी चाहिए। CBI की टीम को ज्यादा समय नहीं लेना चाहिए।”

सुशांत की मृत्यु से पहले उनके पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की आत्महत्या के मामले को लेकर अठावले ने कहा, “वो मुंबई में रहती थीं। आठ जून को उनकी हत्या हुई। उसी दिन उनके घर में पार्टी थी। पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला है। अगर किसी के घर में पार्टी हो तो वो उस दिन आत्महत्या क्यों करेगा? दिशा सालियान की मौत की सीबीआई जाँच भी होनी चाहिए।”

ड्रग्स में शामिल कलाकारों को लेकर उन्होंने यह भी कहा, “ड्रग्स में संलिप्त कलाकारों को निर्माता काम नहीं दें। ड्रग्स में संलिप्त कलाकारों को फिल्में देना बंद नहीं हुआ तो आरपीआई कार्यकर्ता विरोध दर्ज कराते हुए शूटिंग बंद करने भी पहुँचेंगे।”

पूछताछ के लिए बुलाई जा रहीं टॉप अभिनेत्रियों को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, “ड्रग्स के उपयोग के संदेह पर NCB द्वारा केवल महिला एक्ट्रेस से पूछताछ की जा रही है। अगर इसमें अभिनेताओं के नाम हैं, तो उनसे भी पूछताछ की जानी चाहिए। पुरुषों और महिलाओं के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। लेकिन केवल अभिनेत्रियों के नाम कैसे आ रहे हैं, इस सवाल को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।”

बता दें कि 8 जून को दिशा सालियान की उनके अपार्टमेंट की 14 वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। दिशा सालियान, सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। सुशांत 14 जून को बांद्रा स्थित अपने किराए के फ्लैट में फंदे पर लटके पाए गए थे।

वहीं अब सामने आए ड्रग्स मामले में NCB ने आज क्षितिज रवि प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया है। क्षितिज धर्मा प्रोडक्शन में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर (EP) थे। उसका नाम ड्रग पेडलर अंकुश अरनेजा ने लिया था। इसके बाद एनसीबी के सामने पूछताछ में अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने भी उनके बारे में जानकारी दी थी।

मुख्तार अहमद से राहुल बनने की साजिश में वकील फातिमा ने की मदद: SIT को मिली लव जिहाद से जुड़े मास्टरमाइंड की कड़ी

उत्तरप्रदेश में शादी के बहाने जबरन धर्मांतरण की बढ़ती संख्या की जाँच के लिए कानपुर पुलिस ने आठ सदस्यीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया है। वहीं अब जाँचदल ने लव जिहाद मामले के आरोपित का कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में एक महिला वकील फातिमा का पता लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस को आशंका है कि एडवोकेट फातिमा ने कानपुर और आसपास के अन्य इलाकों से सामने आए कई लव जिहाद मामलों में आरोपितों की मदद की है। पुलिस उसके फ़ोन रिकॉर्ड को खंगाला रहीं है। पुलिस इस महिला एडवोकेट के जरिए लव जिहाद के मास्टरमाइंड तक पहुँचना चाहती है जो कि संगठित अपराध को अंजाम दे रहे हैं।

गौरतलब है कि यह खुलासा कानपुर के लव जिहाद मामले के बाद सामने आया है। जहाँ नौबस्ता मछलियाँ के रहने वाले 32 साल के मुख्तार अहमद ने हिंदू लड़की से राहुल बन कर दोस्ती की थी। 22 वर्षीय लड़की आवास विकास में रहने वाली है। साथ ही वह पॉलिटेक्निक की छात्रा थी। दोस्ती के बाद मुख्तार ने लड़की को झूठे दावे करते हुए अपने प्यार में फँसा लिया और उसे धर्म के प्रति बरगलाने लगा। अहमद ने लड़की का ब्रेनवाश किया और बिना किसी की जानकारी के 17 अप्रैल 2019 को कोर्ट मैरिज कर ली। जिसके बाद यह बात सबसे छिपाते हुए दोनों अपने-अपने घर रहने लगे।

वहीं शादी के बाद लड़की को हाल ही में पता चला कि जिस मुख्तार के प्यार में आकर उसने अपने परिजनों को बिना बताए शादी की थी वह पहले से ही शादीशुदा है और उसके बच्चें भी है। इतना ही नहीं मुख्तार की पहली पत्नी भी दूसरे समुदाय की ही निकली।

पीड़िता के पिता ने घटना की जानकारी पुलिस को देते हुए आरोपित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया था। पुलिस की पूछताछ में जब युवक ने अपना असली नाम मुख्तार अहमद बताया तो स्वजनों के होश उड़ गए थे। जब लड़की से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि मुख्तार ने उससे राहुल बनकर दोस्ती की थी। उसने इस तरह से मुझे अपने काबू में कर लिया था कि वह जो कहता मैं करती चली जाती। उसने फिर परिजनों से अपने मरियम फातिमा बनने को लेकर भी खुलासा किया।

वहीं पुलिस को लव जिहाद के इस घिनौने खेल के पीछे पाकिस्तानी संगठन का पता चला है। यह संगठन मुस्लिम युवकों को हिंदू लड़कियों का ब्रेनवाश और धर्मांतरण करने के लिए फंडिंग करता था। साथ ही इस पूरे मामले की साजिश के पीछे एक मस्जिद का भी नाम सामने आया है। पुलिस मुखबिरों से मामले से जुड़ी और जानकारी पता लगाने की कोशिश कर रहीं है।

मीडिया अगर किसी भी सेलेब्रिटी की गाड़ी का पीछा करेगी तो मुंबई पुलिस गाड़ी जब्त कर ड्राइवर पर करेगी कार्रवाई: DCP

मुंबई पुलिस ने शनिवार (सितंबर 26, 2020) को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा ड्रग्स की जाँच के लिए बुलाए जाने वाले सेलेब्स के वाहनों का पीछा करने के खिलाफ मीडिया वाहनों को चेतावनी दी। एक सख्त बयान में, डीसीपी (जोन I) संग्राम सिंह निशंदर ने कहा कि आज पुलिस ने कई मीडिया वाहनों का अवलोकन किया, जिन्होंने एनसीबी जाँच के लिए बुलाए गए लोगों का पीछा करते हुए पाए गए।

संग्रामसिंह निशंदर ने कहा, “आज दोपहर को कई मीडिया चैनल्स पूछताछ के लिए बुलाए गए लोगों का पीछा करते हुए पाए गए। कई गाड़ियाँ पीछे से साइड से, उतर कर, अपनी जान खतरे में डालकर, सामने वाली की जान खतरे में डालकर और सड़क पर चलने वाले सामान्य लोगों की जान खतरे में डालकर ये काम कर रहे हैं। इसे हम कदापि सहन नहीं करेंगे। अगर आगे से इस तरह का काम करते हुए किसी को पाया जाता है, तो हम उस गाड़ी को जब्त करेंगे और उसके ड्राइवर पर कार्रवाई करेंगे।”

ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से, बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच के बाद से, कुछ मीडिया-वाहनों द्वारा इस तरह से पीछा किया जा रहा है। उनमें रिया चक्रवर्ती, दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और कई अन्य जैसे सेलेब्स शामिल थे, जिन्हें सुशांत मामले में ड्रग एंगल जाँच के संबंध में बुलाया गया था।

सुशांत सिंह राजपूत केस में ड्रग्स एंगल की जाँच करने के लिए आई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की एंट्री ने बॉलीवुड में ड्रग्स के धंधे को उजागर कर दिया है। ड्रग्स मामले में अब एनसीबी की रडार पर बॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टार्स हैं, जिनमें से अब कुछ नाम सामने आ गए हैं। सुशांत सिंह राजपूत ड्रग्स केस में रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद अब दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुल प्रीत सिंह जैसी फिल्म अभिनत्रियों के नाम इसमें आए हैं।

जानकारी के मुताबिक, दीपिका ने एनसीबी पूछताछ के दौरान ड्रग्स चैट की बात मान ली है। ड्रग्स के रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए एनसीबी ने आज दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर को पूछताछ के लिए बुलाया था।

ये तीनों अभिनेत्रियाँ आज यानी शनिवार को जाँच में शामिल होने पहुँची थी। इन सभी लोगों से एनसीबी की पूछताछ खत्म हो गई है। एनसीबी ने दीपिका से लगभग 5.30 घंटे तक उनसे पूछताछ की है। जाँच एजेंसी ने दीपिका पादुकोण और करिश्मा प्रकाश को आमने-सामने बैठाकर 2017 में की गई चैट के बारे में पूछताछ की। 

बताया जा रहा है कि अभिनेत्री ने जाँच एजेंसी को संतोषजनक जवाब नहीं दिया, जिसकी वजह से उनसे दूसरे राउंड की पूछताछ के लिए रविवार (सितंबर 27, 2020) को भी बुलाया गया है। सारा अली खान से लगभग चार घंटे और श्रद्धा से भी लगभग इतनी ही देर पूछताछ हुई। बता दें कि शुक्रवार को रकुल प्रीत सिंह से चार घंटे तक पूछताछ हुई थी।

CM योगी को धमकाने वाला ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार: मुख़्तार अंसारी को 24 घंटे के भीतर रिहा करने की दी थी धमकी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मारने की धमकी देने वाले को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित एटा जिले का रहने वाला है। पेशे से ट्रक ड्राइवर अमरपाल को पुलिस गिरफ्तार करके लखनऊ के हजरतगंज थाने लाई है। उससे पूछताछ की जा रही है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, हजरतगंज पुलिस स्टेशन के एसएचओ अंजलि पांडे ने बताया कि अपराधी को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया है। जिसकी पहचान अमरपाल के रूप में हुई है। वह इटावा का रहने वाला है।

पुलिस पूछताछ में अपराधी ने बताया कि उसने नशे की धुन में धमकी भरे व्हाट्सअप मैसेज यूपी के 112 नंबर पर भेजा था। उसने किसी के साथ कोई संबंध होने से इनकार किया है।

गौरतलब है कि बुधवार (सितम्बर 23, 2020) की सुबह 9:56 से लेकर 10:11 के बीच धमकी भरे मैसेज मिले थे। इनमें सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था। साथ ही धमकी देते हुए कहा गया था कि मऊ से 5 बार विधायक रहे मुख़्तार अंसारी को 24 घंटे के भीतर रिहा किया जाए।

अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो शुक्रवार (सितम्बर 25, 2020) को सरकार ‘मिटा’ दी जाएगी। पुलिस ने उस नंबर के डिटेल्स पता कर लिए हैं, जिससे ये मैसेज भेजे गए थे। पुलिस की एक टीम आरोपित की गिरफ़्तारी के लिए गठित कर दी गई थी। जिसके बाद आरोपित को गिरफ्तार भी कर लिया गया है।