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रिपब्लिक मीडिया के 2 रिपोर्टरों सहित 3 को महाराष्ट्र पुलिस ने किया गिरफ्तार: चैनल ने उद्धव सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

महाराष्ट्र पुलिस ने टीवी न्यूज़ चैनल रिपब्लिक भारत के रिपोर्टर समेत 3 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह जानकारी न्यूज़ चैनल ने अपने आधिकारिक ट्विटर एकाउंट से दी है। गिरफ्तार किए गए रिपब्लिक भारत के कर्मचारियों में एक रिपोर्टर, एक कैमरामैन और एक ड्राइवर शामिल हैं।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के मुताबिक, महाराष्ट्र पुलिस द्वारा अवैध तरीके से रिपोर्टर अनुज कुमार, कैमरामैन यशपालजीत सिंह और ओला कैब ड्राइवर प्रदीप दिलीप धनवडे को 4 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में लिया गया है। यह टीम रायगढ़ के कर्जत में इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करने गई थी। उन्होंने कहा, बिना किसी कानूनी कार्रवाई के हमारे कर्मचारियों को चार दिन के लिए जेल में डालना लोकतंत्र की हत्या है। रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क अपनी टीम को न्याय दिलाने के लिए उपलब्ध हरसंभव कानूनी मदद लेगा।

रिपब्लिक मीडिया समुह ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के अनुच्छेद 19 (डी) के तहत हर व्यक्ति को भारत में स्वतंत्र रूप से कहीं भी घूमने का अधिकार है। हमें पता चला है कि हमारे कर्मचारियों पर महाराष्ट्र की सरकारी मशीनरी द्वारा गुप्त सूत्रों की जानकारी को उगलवाने का दबाव डाला जा रहा है जिसकी जानकारी हमारे कर्मचारी पुलिस को कभी नहीं देंगे।

रिपब्लिक ने डेमोक्रेसी में मीडिया के महत्व पर जोर देते हुए कहा, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है और देश के किसी भी मुख्यमंत्री के पास यह अधिकार नहीं है कि वह उनके आवास के आसपास के क्षेत्रों में हो रही रिपोर्टिंग करने वालों को जेल में डाल दें। यह लोकतंत्र और रिपोर्टिंग करने के वाले व्यक्ति के अधिकार के ख़िलाफ़ है।

वहीं रायगढ़ पुलिस द्वारा जारी प्रेसनोट के अनुसार, सिक्युरिटी गार्ड रात में उद्धव ठाकरे के फार्महाउस पर ड्यूटी करने जा रहे थे उसी दौरान वैगनआर कार में तीन लोगों ने उससे फार्महाउस का पता पूछा। जिसका जवाब सिक्युरिटी गार्ड ने नहीं दिया। उसके बाद वे लोग जबर्दस्ती गार्ड रूम में घुस कर बतमीजी करने लगे। पुलिस का आरोप है कि तीनों लोग महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के रायगढ़ स्थित फार्म हाउस में बिना इजाज़त घुसने की कोशिश कर रहे थे।

रिपार्ट के अनुसार, पुलिस ने सिक्योरिटी गार्ड की शिकायत पर उन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 448, 323, 504, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।

कंगना का ऑफिस BMC ने तोड़ा, बॉलीवुड गैंग चुप: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Kangana Ranaut’s office illegally demolished by BMC

साल 2014 में मोदी सरकार आने के बाद से फासीवाद के आगमन की उलाहनाएँ दी जाती रहीं। कभी देश के लोकतंत्र को खतरे में बताया गया, तो कभी आपातकाल की स्थिति का ऐलान कर दिया गया। आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने पर भी सरकार को फासिस्ट करार दिया गया।

हालाँकि, फासीवाद का असली मतलब क्या होता है? इसके वास्तविक मायने पूरे देश को तब पता चला, जब बीएमसी ने कंगना के कार्यालय पर कार्रवाई करके उसे ध्वस्त कर दिया और राज्य सरकार की संलिप्ता इसमें साफ नजर आई।

इस बीच जहाँ पूरा देश कंगना के साथ खड़ा था। वहीं, बॉलीवुड के स्टार कलाकार न केवल इस घटना पर मौन रहे बल्कि ये जानने के बावजूद कि रिया चक्रवर्ती ने स्वीकार कर लिया है कि वह ड्रग्स का लेन-देन करती थीं, उन्हें पितृसत्ता से पीड़ित महिला बताया और उनके लिए इंसाफ की माँग भी की।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

CM रावत ने बद्रीनाथ को आध्यात्मिक शहर बनाने के लिए PM मोदी के सामने पेश किया ₹424 करोड़ का मास्टर प्लान

उत्तराखंड राज्य के प्रसिद्व चार धामों में से ही एक बद्रीनाथ धाम का जल्द ही कायाकल्प होगा। इसके लिए लगभग 424 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। उत्तराखंड सरकार ने बद्रीनाथ धाम के सौंदर्यीकरण और मंदिर के आसपास के श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार के लिए 424 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान बुधवार (सितम्बर 09, 2020) को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के समक्ष पेश किया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने ट्विटर अकाउंट से इसकी जानकारी साझा की है। प्रस्तुतिकरण के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव ओमप्रकाश तथा पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर मौजूद थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि श्री बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि वहाँ का पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व बना रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उत्तराखंड सरकार द्वारा बद्रीनाथ के सौंदर्यीकरण एवं श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में विस्तार हेतु बनाए गए 424 करोड़ रुपए के मास्टर प्लान के प्रस्तुतिकरण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि बद्रीनाथ को लघु, स्मार्ट और आध्यात्मिक शहर के रूप में विकसित किया जाए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बद्रीनाथ धाम व केदारनाथ धाम के विकास कार्यों में स्थानीय लोगों का सहयोग मिल रहा है और निकटवर्ती गाँवों में होम स्टे पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरस्वती व अलकनंदा के संगम स्थल केशव प्रयाग को भी विकसित किया जा सकता है। सीएम रावत ने कहा कि बद्रीनाथ धाम में व्यास व गणेश गुफा का विशेष महत्व है, जिनके पौराणिक महत्व की जानकारी भी श्रद्धालुओं को मिलनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि बद्रीनाथ के सौंदर्यीकरण का मास्टर प्लान केदारपुरी पुनर्निर्माण की तर्ज पर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार तैयार किया गया था। ज्ञात हो कि पीएम मोदी केदारनाथ धाम में पहले से ही चल रही परियोजनाओं की प्रगति की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं।

इस योजना के तहत बद्रीनाथ मंदिर के चारों ओर श्रद्वालुओं के आवागमन की सुविधा के साथ ही अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा । चमोली जनपद की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने के लिए हाल में संबधित अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की थी।

उन्होंने मास्टर प्लान के तहत प्रस्तावित निर्माण कार्यो के लिए प्रभावित होने वाली सरकारी एवं प्राइवेट भूमि, भवन और परिसंपत्तियों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश एसडीएम को दिए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, बद्रीनाथ धाम में तीन चरणों में विकास कार्य होने हैं। पहले चरण के तहत शेष नेत्र झील और बद्रीश झील का सौन्दर्यीकरण, दूसरे चरण के तहत मुख्य मंदिर एवं उसके आस-पास के क्षेत्र का सौन्दर्यीकरण और अंतिम चरण में मंदिर से शेष नेत्र झील को जोड़ने वाले रास्ते का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। शेष नेत्र झील नारायण पर्वत की तलहटी में स्थित है।

योजना के तहत बद्रीनाथ धाम में तालाबों के साथ ही मंदिर एवं घाटों का सौन्दर्यीकरण, बद्रीश वन को विकसित करना, पार्किंग सुविधा बढ़ाना, सड़कों का विस्तार एवं ‘रिवर फ्रंट’ विकास आदि भी प्रस्तावित हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बद्रीनाथ के मास्टर प्लान का स्वरूप पर्यटन पर आधारित न होकर पूर्ण रूप से आध्यात्मिक होना चाहिए। पीएम मोदी ने मास्टर प्लान में निकटवर्ती अन्य आध्यात्मिक स्थलों को भी जोडने तथा गृहनिवास (होम स्टे) विकसित करने के भी निर्देश दिए हैं।

2020-21 में सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में नहीं मिलेगा मराठा आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

महाराष्ट्र में शिक्षण संस्थानों में दाखिले और नौकरियों में मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत की बेंच ने कहा कि फिलहाल इसे मंजूरी नहीं दी जा सकती है। इस मामले पर बड़ी बेंच की ओर से फैसला लिया जाएगा, जिसका गठन मुख्य न्यायाधीश की ओर से होगा। अदालत ने यह भी साफ किया है कि इस आदेश का असर पोस्ट ग्रैजुएट मेडिकल कोर्सेज के दाखिलों पर नहीं होगा, जो पहले ही हो चुके हैं।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एलएन राव न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट्ट की पीठ ने कहा कि इस फैसले से अब तक इस कोटे का लाभ ले चुके लोगों के स्टेटस पर कोई असर नहीं होगा। कोर्ट के इस आदेश से उन लोगों को राहत मिली है, जिन्हें बीते करीब दो सालों में अब तक इस कोटे का लाभ मिला था।

कोर्ट के इस फैसले से मौजूदा शैक्षणिक सत्र में छात्रों को कोटे का फायदा नहीं मिल पाएगा। बेंच ने कहा है कि फिलहाल इस पर रोक लगाई जाती है और संवैधानिक बेंच की ओर से इसकी वैधता पर फैसला लिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे फैसला लेंगे।

बंबई उच्च न्यायालय ने पिछले साल जून में इस कानून को वैध ठहराते हुए कहा था कि 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं है और इसकी जगह रोजगार में 12 और प्रवेश के मामलों में 13 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश और इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में कहा गया है कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) अधिनियम, 2018, जो शिक्षा और नौकरियों में मराठा समुदाय को 12% और 13% कोटा प्रदान करता है, इंदिरा साहनी मामले में निर्धारित सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। इसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय कर दी थी।

गौरतलब है कि 27 जून, 2019 को, बॉम्बे हाई कोर्ट की एक पीठ ने अधिनियम की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर महाराष्ट्र राज्य को 16 प्रतिशत आरक्षण को घटाकर 12-13 फीसदी करने का निर्देश दिया। इसने आगे उल्लेख किया कि इंदिरा साहनी के मामले के अनुसार, विशेष परिस्थितियों में राज्य सरकार 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण दे सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित, UAE-इजराइल में शांति समझौते कराने के लिए आगे बढ़ाया गया नाम

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस साल के नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। कथिततौर पर नॉर्वे के सांसद ने इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते कराने के लिए ट्रंप का नाम आगे बढ़ाया है।

फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्वेजियन संसद के सदस्य और नाटो (NATO) संसदीय विधानसभा के अध्यक्ष क्रिश्चियन टाइब्रिंग-ग्जेडे Tybring-Gjedde ने नामांकन भरा है।

टाइब्रिंग-ग्जेडे ने कथिततौर पर दुनियाभर के देशों के बीच कई विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए ट्रंप की तारीफ भी की है। उन्होंने पहले भी ट्रम्प के लिए 2018 में सिंगापुर शिखर सम्मेलन के लिए नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने के लिए नामांकन भरा था। इस सम्मेलन की मेजबानी किम जोंग-उन ने थी।

नॉर्वे के नेता ने एक विशेष साक्षात्कार में फॉक्स न्यूज से कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए इस पुरस्कार के किसी भी दूसरे नामित सदस्य की तुलना में अधिक काम किया है।”

चार बार के सांसद टाइब्रिंग-ग्जेडे ने नोबेल शांति पुरस्कार समिति को अपने नामांकन पत्र में लिखा कि ट्रंप प्रशासन ने इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रिश्तों की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने फॉक्स न्यूज़ को आगे कहा कि, वैसे भी वह “ट्रम्प के बहुत बड़े समर्थक नहीं” है, “समिति को तथ्यों को देखना चाहिए और तथ्यों के अनुसार ही उनको जज करना चाहिए। न कि उस तरह से जैसा व्यवहार वह कभी-कभी करते है।”

नॉर्वे के नेता ने यह भी कहा कि हाल ही के वर्षों में जिन लोगों को शांति पुरस्कार मिला है, उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प की तुलना में बहुत कम काम किया है। जैसे कि, “बराक ओबामा ने कुछ नहीं किया।”

कंगना के समर्थन में आईं नामी हस्तियाँ: छोटे पर्दे, बॉलीवुड, पत्रकारों से लेकर राजनेता भी उठा रहे आवाज

कंगना रनौत की संपत्ति पर बीएमसी की कार्रवाई ने महाराष्ट्र सरकार को एक बार फिर सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। ट्विटर पर लोग लगातार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग कर कर पूछ रहे हैं कि ये सब आखिर कितना उचित था? राजनीति से लेकर बॉलीवुड से जुड़े कई मशहूर नाम BMC की इस ‘गुंडागर्दी’ की खुल कर आलोचना कर रहे हैं।

बॉलीवुड कलाकार अनुपम खेर ने इस कार्रवाई को बिलकुल गलत बताया है। उन्होंने लिखा, “ग़लत ग़लत ग़लत है!! इसको bulldozer नहीं #Bullydozer कहते हैं। किसी का घरोंदा इस बेरहमी से तोड़ना बिल्कुल ग़लत है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव या प्रहार कंगना के घर पर नहीं बल्कि मुंबई की ज़मीन और ज़मीर पर हुआ है। अफ़सोस अफ़सोस अफ़सोस है।”

वहीं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडणवीस ने वीडियो जारी कर इस कदम का विरोध किया है और कहा है कि ऐसा इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि अपने खिलाफ बात करने वालों को हम रास्ते में रोक के मारेंगे और ऐसा सरकार के समर्थन से होगा, ऐसा महारष्ट्र के इतिहास में कभी भी नहीं हुआ। उन्होंने आगे कहा कि सरकार के इस कार्रवाई के कारण महाराष्ट्र का देश में अपमान हो रहा है।

वह कहते हैं, “अगर अवैध निर्माण है तो जरूर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन सबके साथ ये कार्रवाई होती तो सही कार्रवाई होती। किसी ने जब आपके ख़िलाफ़ बात कही तब जो आप कार्रवाई करते हो तो ये कायरता है, बदले की भावना है और महाराष्ट्र में इस प्रकार की भावना का कोई सम्मान नहीं हो सकता।”

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय लिखते हैं, “कोरोना प्रबंधन में ऐसे रिकॉर्ड होने के बावजूद शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस का गठबंधन सोचता है कि उनके लिए कंगना रनौत के कार्यालय को ध्वस्त करना सबसे पहली प्राथमिकता है। राज्य मिशनरी का इस तरह का दुरुपयोग सिर्फ़ इसलिए हो रहा है कि क्योंकि एक महिला के पास अपना दिमाग है और वो बोलने से डरती नहीं है। “

छोटे पर्दे की मशहूर कलाकार देवोलीना उर्फ गोपी बहू ने भी कंगना के साथ हुई घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना को दुखद बताते हुए कहा, “एक जाना-पहचाना चेहरा होने के चलते, मुझे नहीं लगता कि उन्होंने कोई अवैध निर्माण किया होगा और उन्होंने ये भी कहा है कि उनके पास बीएमसी द्वारा दी गई परमीशन के सबूत भी हैं। ऐसे में उनके मुंबई पहुँचने और कागजात दिखाने से पहले बिल्डिंग गिराना, सही नहीं है। मुझे लगता है कि उन्हें इंतजार करना चाहिए था और उन्हें एक अल्टीमेटम देना चाहिए था, अगर कुछ गलता था और उसे फिक्स किया जाना था तो लेकिन उनकी अनुपस्थिति में ऑफिस का तोड़ा जाना गलता है।”

देवोलीना का कहना है, “ये उनके द्वारा किया गया बहुत अजीब काम है और मैं इसे बिल्कुल सपोर्ट नहीं करती हूँ। अगर कुछ मौखिक रूप से शुरू हुआ है तो उन्हें इस पर मौखिक रूप से ही जवाब देना चाहिए था।”

इसी तरह न्यूज नेशन के एंकर दीपक चौरसिया लिखते हैं, “वो लोग जो दिनभर फ़ासीवाद और तानाशाही का राग अलापते रहते हैं, उन्हें महाराष्ट्र सरकार के फ़ैसले पर फ़ासीवाद नहीं दिख रहा है। कंगना रनौत के घर पर बुलडोजर चलना मतलब एक महिला से डरकर पूरी सरकार हिल रही है।”

समाचार चैनल ‘आज तक’ के पत्रकार रोहित सरदाना बीएमसी की इस कार्रवाई पर कहते हैं, “फ़ासिज़्म-फ़ासिज़्म चिल्लाने वाले अब कहाँ घुस गए? असली फ़ासिज़्म देख के साँप सूँघ गया क्या?”

बता दें, आज मुंबई पहुँचने के बाद कंगना ने अपने ट्विटर पर कुछ वीडियोज साझा की है। इन वीडियोज में हम देख सकते हैं बीएमसी ने उनके कार्यालय के भीतर किस तरह तोड़फोड़ मचाई है। हर जगह सामान टूटे पड़े हैं। दीवारें गिरी हुई हैं। शीशे चकनाचूर हैं। तारें भी काट दी गई हैं। ऐसे में उन्होंने उद्धव ठाकरे को संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा:

“उद्धव ठाकरे, तुझे क्या लगता है, तूने फिल्म माफिया के साथ मिल कर मेरा घर तोड़ कर मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है। आज मेरा घर टूटा है। कल तेरा घमंड टूटेगा। ये वक्त का पहिया है। याद रखना हमेशा एक जैसा नहीं रहता। मुझे लगता है तुमने मुझपर बहुत बड़ा एहसान किया है। क्योंकि मुझे पता तो था कि कश्मीरी पंडितों पे क्या बीती होगी, लेकिन आज मैंने महसूस किया है। और आज मैं इस देश को वचन देती हूँ कि मैं सिर्फ़ अयोध्या पर ही नहीं कश्मीरी पंडितों पर भी एक फिल्म बनाऊँगी। मैं अपने देशवासियों को जगाऊँगी क्योंकि मुझे पता था हमारा साथ होगा तो होगा। लेकिन ये मेरे साथ हुआ है। इसका कोई मतलब है इसके कोई मायने हैं और उद्धव ठाकरे ये जो क्रूरता और आतंक है। अच्छा हुआ ये मेरे साथ हुआ क्योंकि इसके कुछ मायने हैं। जय हिंद! जय महाराष्ट्र!

देशद्रोही पत्रकार, सुपारीबाज कलाकार का समर्थन करना भी ‘हरामखोरी’: शिवसेना के मुखपत्र सामना में कंगना-अर्नब पर निशाना

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत और मुंबई अस्मिता का मामला उठाते हुए शिवसेना ने मुखपत्र ‘सामना’ में अभिनेत्री कंगना रनौत और रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी पर निशाना साधा है।

बिना नाम लिए अर्नब और कंगना पर निशाना

सामना में फिर एक बार आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए शिवसेना ने लिखा है कि राजनीतिक एजेंडे को सामने लाने के लिए देशद्रोही पत्रकार और सुपारीबाज कलाकारों के राजद्रोह का समर्थन करना भी ‘हरामखोरी’ ही है। इससे पहले दोनों के खिलाफ दो विधायक एक दिन पहले विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी लाए थे।

‘मुंबई का अपमान बिगड़ी मानसिकता के लक्षण’

कंगना के मुंबई की तुलना पाक अधिकृत कश्मीर से करने वाले बयान पर सामना में लिखा है कि मुंबई किसकी? यह सवाल कोई न पूछे। मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी और देश का सबसे बड़ा आर्थिक लेन-देन का केंद्र भी है। इसी मुंबई के लिए 106 मराठी लोगों ने बलिदान दिया है। मुंबई ईमान से रहने वाले सब लोगों की है। मुंबई की तुलना ‘पाक अधिकृत’ कश्मीर से करना और मुंबई पुलिस को माफिया बोलकर खाकी वर्दी का अपमान करना बिगड़ी हुई मानसिकता के लक्षण हैं।

बेईमानों के साथ खड़े लोगों को लगेगी बद्दुआ

संपादकीय में यह भी लिखा गया कि जो लोग महाराष्ट्र के बेईमानों के साथ खड़े हैं, उन्हें 106 शहीदों की बद्दुआ तो लगेगी ही। साथ ही, राज्य की 11 करोड़ जनता भी उन्हें माफ नहीं करेगी। छत्रपति शिवाजी के महाराष्ट्र पर नशे की पिचकारी फेंकने वाले को केंद्र सरकार विशेष सुरक्षा का सम्मान दे रही है।

कंगना को वाई श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने पर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र की 11 करोड़ मराठी जनता और मुंबई का अपमान देशद्रोह जैसा अपराध है। लेकिन जब ऐसा अपराध करने वाले लोगों के साथ राष्ट्रभक्त मोदी सरकार का गृह मंत्रालय सुरक्षा कवच देकर खड़ा होता है, तब हमारे 106 शहीद स्वर्ग में आँसू बहा रहे होंगे।

पीओके से तुलना कर हमारी देवी का अपमान

इसमें आगे कहा गया है कि मुंबई पर अपना हक जताने वाले बहुत सारे लोग आगे आए हैं। लेकिन मुंबई मुंबा देवी का ही प्रसाद है। मुंबई या मुंबा देवी कोली लोगों की कुलदेवी हैं। ‘मुंग’ नामक एक कोली ने इस देवी की स्थापना की इसलिए उसका नाम पहले ‘मुंगाची आई’ पड़ा और ‘महा-अंबाआई’ और फिर उसके बाद ‘मुंबाई’ का आसान नाम देवी को मिला, ऐसा कई लोगों को लगता है। कोई कहता है कि मुंबई ‘मृण्मयी’ का ही रूप है। ऐसी ‘देवी’ स्वरूप माँ की तुलना पाक अधिकृत क्षेत्र से करके हमारी देवी का अपमान किया गया।

कंगना के बहाने चीन पर केंद्र को घेरा

कंगना विवाद के बहाने शिवसेना ने चीन से जारी सीमा विवाद को लेकर भी मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की है। सामना ने लिखा, “आज जिस प्रकार से सारे भाजपा वाले महाराष्ट्र द्रोहियों के साथ खड़े हैं, उसी विश्वास से हमारी सीमा में घुसे चीनी बंदरों के बारे में हिम्मत दिखाई होती तो लद्दाख और अरुणाचल की सीमा पर देश की बेइज्जती ना होती।”

‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम’ होगा अयोध्या एयरपोर्ट का नाम: अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की भी तैयारी

भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में बनने जा रहे एयरपोर्ट का नाम ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम’ होगा। इसके साथ ही सरकार ने एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की भी कवायद शुरू कर दी है। यह उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर का 5वाँ एयरपोर्ट होगा एयरपोर्ट का निर्माण 2021 में दिसंबर माह तक पूरा करने की योजना है।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बाद भविष्य की जरूरतों के लिहाज से अयोध्या तैयार हो रही है। अयोध्या के कायाकल्प के लिए यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार कोई कमी नहीं कर रही है।

एक अधिकारी ने बुधवार (सितंबर 9, 2020) को बताया कि श्रीराम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। इसके मद्देनजर राज्य सरकार ने एयरपोर्ट के विस्तार की योजना बनाई है।

गौरतलब है कि अप्रैल 2017 तक अयोध्या एयरपोर्ट का विकास दो चरणों में करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए हुए टेक्नो-इक्नोमिक सर्वे में पहले चरण में एटीआर-72 विमानों के लिए विकसित किया जाना था। इसमें रन-वे की लंबाई 1680 मीटर रखी जानी थी। दूसरे चरण में ए-321, 200 सीटर विमानों के संचालन के लिए एयरपोर्ट विकसित होना था।

इसमें रन-वे की लंबाई 2300 मीटर प्रस्तावित थी। बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस एयरपोर्ट को बोइंग-777 विमानों के योग्य बनाने और उसका नाम बदलने की घोषणा की थी। इसके बाद भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने पिछले साल पाँच मई को भौतिक सर्वे करने के बाद संशोधित रिपोर्ट प्रस्तुत किया था।

उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कहा, “योगी सरकार ने अयोध्या स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने के लिए 525 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें 300 करोड़ रुपए अब तक खर्च किया जा चुका है। जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है, इस बारे में जल्दी ही एक समीक्षा बैठक भी अधिकारियों की बुलाई जाएगी।”

रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में ए-321 विमानों के संचालन के लिए 463.10 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। इसमें रन-वे की लंबाई 3,125 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी। दूसरे चरण में बाइंग 777 जैसे बड़े विमानों के संचालन के लिए 122.87 एकड़ जमीन की अतिरिक्त आवश्यकता होगी।

इसमें रन-वे की लंबाई 3,750 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी। वहीं, एयरपोर्ट के संचालन व सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों के आवासीय क्षेत्र के लिए आसपास 15 एकड़ भूमि की जरूरत बताई गई। इस तरह एयरपोर्ट के लिए कुल 600 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी।

मौजूदा समय में पर्यटन विभाग की ओर से समेकित पर्यटन के लिए विकास के कई काम जारी हैं। कुछ काम पूरे भी हो चुके हैं। इसके अलावा सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर थीम बेस्ड गेट के निर्माण, परिक्रमा पथों के विकास, कुंडों का जीर्णोद्घार, टूरिस्ट फैसिलिटेशन के निर्माण, पार्किंग, यात्री सुविधाओं और फूडकोर्ट के निर्माण आदि के लिए केंद्र सरकार को 200 करोड़ का प्रस्ताव भी विभाग की ओर से शीघ्र ही केंद्र को भेजा जाना है।

मुख़्तार अंसारी से जुड़े 25 वाहनों को किया गया जब्त, ₹4.29 करोड़ है कीमत: गैंगस्टर एक्ट के तहत वसूली गैंग पर शिकंजा

उत्तर प्रदेश में पूर्व सांसद मुख़्तार अंसारी पर कार्रवाई लगातार जारी है और उसकी व उसके गुर्गों की संपत्ति को एक-एक कर जब्त किया जा रहा है। उसके गिरोह IS-191 के लिए काम करने वाले करीबियों पर मऊ जनपद पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक उसकी 25 वाहनों को सीज किया जा चुका है। सभी सीज किए वाहनों की कीमत 4.29 करोड़ रुपए बताई गई है। मऊ में हो रही इस कार्रवाई से हिस्ट्रीशीटर नेता की कमर टूट गई है।

हालिया कार्रवाई में मुख़्तार अंसारी के वसूली गैंग के करीबी सुरेश सिंह के नाम से चलने वाले 2 ट्रकों को जब्त किया गया, जिनकी कीमत 68 लाख रुपए है। सुरेश पर पिछले 10 दिनों से कार्रवाई जारी है और लगातार वाहनों को जब्त किया जा रहा है। मऊ में पुलिस संगठित अपराध के खिलाफ अभियान चला रही है और इसी क्रम में उसके अवैध वसूली गैंग के सहयोगी सुरेश सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।

‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, उसके दो ट्रकों को थाना कोतवाली पुलिस द्वारा 14(1) गैंगेस्टर एक्ट के तहत जब्त करने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। ट्रक यूपी 54 टी 8109 और ट्रक यूपी 54 एटी 1231को जब्त किया गया। दोनों की कीमत 34-34 लाख रुपए है। इससे पहले सितम्बर 1 को भी 86 लाख रुपए की कीमत वाली 4 बसों को जब्त किया गया था। इसके बाद सितम्बर 3 को 1.54 करोड़ रुपए की 9 वाहनों को सीज किया गया।

इसके बाद सितम्बर 7 को 1.7 करोड़ रुपए की कीमत वाले 10 वाहनों को भी इसी एक्ट के तहत जब्त किया गया। अब तक के कुल आँकड़ों को देखें तो 4 करोड़ 28 लाख और 95 हज़ार रुपए की कीमत वाली 25 वाहनों को जब्त किया जा चुका है। सुरेश सिंह ने अवैध वसूली के धन से ये वाहन खरीदे थे। एसपी मनोज कुमार सोनकर ने जानकारी दी है कि सुरेश सिंह मुख्तार के वसूली गिरोह डी-34 का सक्रिय सदस्य है।

गौरतलब है इससे पहले मऊ में जिला प्रशासन ने मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कहे जाने वाले रईस कुरैशी के बूचड़खाने पर बुलडोजर चलवाया था। इसकी कुल कीमत करीब 40 लाख रुपए थी। पुलिस क्षेत्राधिकारी नरेश कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भारी पुलिस बल के साथ इसे ध्वस्त कर दिया गया था। लखनऊ में प्रशासन ने डालीबाग कॉलोनी में अंसारी की एक अवैध संपत्ति को भी ध्वस्त किया था।

उधर मुख़्तार अंसारी के गुर्गे मेराज अहमद खान का शस्त्र लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया है। मेराज अहमद खान गाजीपुर का निवासी है और काफी समय से मुख्तार गैंग से जुड़ा हुआ है। जैतपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर के पुलिस कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है। दरअसल, फर्जी तरीके से पिस्टल का लाइसेंस रिनुअल कराने के मामले में मेराज अहमद खान के खिलाफ जाँच चली थी, जिसमें आरोप को सही पाया गया। 

मैं इस देश को वचन देती हूँ, अब न सिर्फ़ अयोध्या पर फिल्म बनाऊँगी, बल्कि कश्मीर पर भी बनाऊँगी: CM उद्धव को कंगना का संदेश

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत आज दोबारा मुंबई लौट आईं। उन्हें कड़ी सुरक्षा में एयरपोर्ट से बाहर निकाल कर उनके घर पहुँचाया गया। घर जाते ही कंगना ने अपने ट्विटर पर कुछ वीडियो साझा कीं। इन वीडियोज को शेयर करते हुए उन्होंने बीएमसी की कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार दिया। अपनी हर वीडियो पर उन्होंने #DeathOfDemocracy लिखा।

इन वीडियोज में हम देख सकते हैं बीएमसी ने उनके कार्यालय के भीतर किस तरह तोड़फोड़ मचाई है। हर जगह सामान टूटे पड़े हैं। दीवारें गिरी हुई हैं। शीशे चकनाचूर हैं। तारें भी काट दी गई हैं।

इन वीडियोज के बाद अपनी एक अन्य वीडियो में उन्होंने उद्धव ठाकरे को संदेश दिया है। कंगना ने कहा, “उद्धव ठाकरे, तुझे क्या लगता है, तूने फिल्म माफिया के साथ मिल कर मेरा घर तोड़ कर मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है। आज मेरा घर टूटा है। कल तेरा घमंड टूटेगा। ये वक्त का पहिया है। याद रखना हमेशा एक जैसा नहीं रहता। मुझे लगता है तुमने मुझपर बहुत बड़ा एहसान किया है। क्योंकि मुझे पता तो था कि कश्मीरी पंडितों पे क्या बीती होगी, लेकिन आज मैंने महसूस किया है। “

वह आगे कहती हैं, “और आज मैं इस देश को वचन देती हूँ कि मैं सिर्फ़ अयोध्या पर ही नहीं कश्मीरी पंडितों पर भी एक फिल्म बनाऊँगी। मैं अपने देशवासियों को जगाऊँगी क्योंकि मुझे पता था हमारे साथ होगा तो होगा। लेकिन ये मेरे साथ हुआ है। इसका कोई मतलब है इसके कोई मायने हैं और उद्धव ठाकरे ये जो क्रूरता और आतंक है। अच्छा हुआ ये मेरे साथ हुआ क्योंकि इसके कुछ मायने हैं। जय हिंद! जय महाराष्ट्र!”

बता दें, कंगना ने घर पहुँचने से पहले कहा था, महाराष्ट्र सरकार और उसके गुंडे अवैध रूप से उनकी संपत्ति को ध्वस्त करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये सब जारी रखो, इससे उनके आत्मबल में और वृद्धि ही होती जाएगी। कंगना ने भावुक होकर ट्विटर पर लिखा कि ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ में पहली फ़िल्म ‘अपराजित अयोध्या’ की घोषणा हुई थी। कंगना रनौत ने कहा कि यह उनके लिए एक इमारत नहीं बल्कि राम मंदिर ही है, आज वहाँ बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा।

कंगना रनौत ने आगे कहा कि राम मंदिर फिर टूटेगा मगर बाबर को ये याद रखना चाहिए कि यह मंदिर फिर बनेगा। साथ ही उन्होंने बीएमसी और मुंबई पुलिस की वो तस्वीरें भी शेयर की, जो उनके दफ्तर के हिस्सों को तोड़ने की प्रक्रिया में लगी हुई थी।