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कंगना के दफ्तर में तोड़फोड़ करने वाला BMC दाऊद से जुड़े खतरनाक इमारत पर चुप क्यों? हाईकोर्ट लगा चुका है फटकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज कंगना रनौत के दफ्तर के हिस्सों को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी। बृहन्मुम्बई महानगरपालिका (BMC) और मुंबई पुलिस की टीम बुलडोजरों के साथ कंगना रनौत के दफ्तर पहुँची थी, जहाँ उसके कई हिस्सों को तोड़ भी डाला गया। इसके बाद कंगना रनौत भी मुंबई पहुँचीं। अब जब BMC पर कई सवाल उठ रहे हैं, ये भी याद करना ज़रूरी है कि उसने भिंडी बाजार में आतंकी दाऊद इब्राहिम से इमारत को लेकर हाईकोर्ट से डाँट सुनी थी।

जून 2020 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC और महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) को फटकार लगाते हुए पूछा था कि उन्होंने भिंडी बाजार में स्थित जीर्ण-शीर्ण इमारत को क्यों नहीं ध्वस्त किया? हाईकोर्ट की एकल पीठ ने तभी चेताया था कि मानसून आने पर अगर ये इमारत या इसका कोई हिस्सा गिरता है तो इससे जानमाल की क्षति हो सकती है। उस इमारत का नाम है- हाजी इस्माइल मुसाफिरखाना।

उन इमारतों की मरम्मत और प्रबंधन का काम देखने वाली SBUT ने तब कोर्ट में बताया था कि वो उसमें रह रहे किराएदारों को कहीं और शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है। अधिवक्ता फज़ल महमूद के जरिए इस इमारत में निचले फ्लोर पर रह रहे लोगों ने अर्जी दी थी कि इस इमारत को इसीलिए ध्वस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि एक तो इसके भीतर मस्जिद है और ऊपर से ये वक़्फ़ की संपत्ति है। वहीं MHADA ने लॉकडाउन में कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर इसे बाद में ध्वस्त करने की बात कही थी।

हालाँकि, अदालत ने कहा था कि अगर इस इमारत के भीतर मस्जिद है फिर भी जनता की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करनी ही पड़ेगी। जज ने आश्चर्य जताया था कि BMC और MHADA के पास पूरी ताकत होने के बावजूद इसे गिराया क्यों नहीं जा रहा? बता दें कि मुसाफिरखाना बिल्डिंग को अंडरवर्ल्ड आतंकी दाऊद इब्राहिम के भारत में अंतिम पते के रूप में जाना जाता है। वो यहीं पर रहा करता था। ये पकमोडिया स्ट्रीट के प्लाट नंबर 33 पर स्थित है।

दाऊद इब्राहिम 1986 में इसके दूसरे फ्लोर पर रहा करता था। उसने पूरे फ्लोर पर ही कब्जा किया हुआ था। उसके बाद उसकी अम्मी अमीनाबाई ने यहाँ कब्जा किया। बाद में टाडा कोर्ट ने इस पूरी संपत्ति को अटैच करने का आदेश दिया क्योंकि 1993 बम ब्लास्ट केस में दाऊद इब्राहिम भगोड़ा सिद्ध हो चुका था। दिसंबर 2019 में ही हाईकोर्ट ने इस इमारत को ध्वस्त करने की इजाजत दे दी थी। ये इमारत 80 साल पुराना है।

इधर BMC की करतूत पर कंगना रनौत ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और उसके गुंडे अवैध रूप से उनकी संपत्ति को ध्वस्त करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये सब जारी रखो, इससे उनके आत्मबल में और वृद्धि ही होती जाएगी। कंगना ने भावुक होकर ट्विटर पर लिखा कि ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ में पहली फ़िल्म ‘अपराजित अयोध्या’ की घोषणा हुई थी। कंगना रनौत ने कहा कि यह उनके लिए एक इमारत नहीं बल्कि राम मंदिर ही है, आज वहाँ बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा।

‘फेक न्यूज़’ फैलाने वाली पत्रकार राणा अय्यूब का कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव, नवी मुंबई में तलाश रहीं बेड

विवादास्पद पत्रकार एवं फेक न्यूज़ पेडलर राणा अय्यूब का कोरोना वायरस टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया है। उन्होंने इस बात की जानकारी बुधवार (9 सितंबर, 2020) को ट्वीटर के जरिए दी है। राणा ने ट्वीट किया कि बीती रात उनका ऑक्सीजन लेवल काफी डाउन हो गया, जिसके बाद उनका कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में इस बात का दावा किया वह खुद को किसी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए नवी मुंबई में एक बेड की तलाश कर रही है।

गौरतलब है कि मार्च 2020 में चीन से पूरी दुनिया मे फैले कोरोना वायरस महामारी के समय राणा अय्यूब का कहना था कि नैतिक रूप से भ्रष्ट होने के कारण भारत में हर कोई अंदर से इतना ‘मरा’ है, कि एक वायरस इन्हें (भारतीयों को) क्या मार सकता है?

इतना ही नहीं अयूब को काफी बार महामारी के दौरान गलत सूचना और फर्जी खबरें फैलाते हुए पकड़ा गया है। महामारी के दौरान उन्होंने एक वीडियो साझा किया था। जिसमें उन्होंने फर्जी दावा किया था कि भुखमरी की वजह से श्रमिक स्पेशल ट्रेन में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि उसकी मौत स्वास्थ्य स्थिति के कारण हुई थी।

वहीं राणा तबलीग़ी जमातियों का भी महिमामंडन करते हुए नजर आई थी जब कोरोना वायरस के शुरुआती दौर में इन लोगों ने वायरस के प्रसार में हॉटस्पॉट का काम किया था। इसके अलावा उन्होंने प्रवासी मजदूरों की फर्जी तस्वीरों को फैलाने और लोगों को गुमराह करने का काम भी किया था।

उच्च कोटि का मादक पदार्थ लेते हैं The Print वाले, सुषमा स्वराज की तुलना सुब्रमण्यम स्वामी से करने पर कम से कम यही महसूस होता है

सुशांत सिंह आत्महत्या के सिलसिले में हाई-प्रोफाइल ड्रग एंगल निकलने का बाद गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती, शोविक और अन्य ने गाँजा (मारिजुआना) के सेवन की बात कबूली। लेकिन ऐसा लगता है कि शेखर गुप्ता के The Print में काम कर रहे लोग भी किसी उच्चतम क्वालिटी के मादक पदार्थ का सेवन करते हैं। शेखर गुप्ता की वेबसाइट The Print पर हाल ही में प्रकाशित हुए लेख इस बात के प्रमाण हैं।

इससे पहले कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो उनके कार्यालय में जाकर The Print के साथ काम करने वाले कर्मचारियों का परीक्षण करने लगें, हम शुरुआत में ही यह स्पष्ट करना चाहेंगे कि हमारे द्वारा शेखर गुप्ता के ‘दी प्रिंट’ के पत्रकारों द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले वीड के नशे लेने की बात पूरी तरह से आलंकारिक है।

क्योंकि अगर ऐसा यह उच्च-गुणवत्ता वाले वीड का सेवन नहीं कर रहे हैं, तो फिर ‘दी प्रिंट’ ने क्यों एक ऐसा लेख प्रकाशित किया, जिसमें कहा गया है कि भाजपा आईटी सेल अपने ही नेताओं के साथ निष्ठुरता से पेश आ रही है?

‘दी प्रिंट’ ने सुब्रमण्यम स्वामी की आलोचना की तुलना सुषमा स्वराज से की है

‘दी प्रिंट’ के इस लेख ने भाजपा के दो नेताओं द्वारा ऑनलाइन आलोचना को एक समान बताने की कोशिश की है। लेखक के अनुसार, इन दोनों नेताओं को बीजेपी आईटी सेल के उपहास और आलोचना का शिकार होना पड़ा।

लेख में कहा गया है कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी पर भाजपा आईटी सेल के सदस्यों द्वारा उसी तरह से हमला किया जा रहा है, जैसे पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 2018 में एक हिंदू-मुस्लिम दंपति को पासपोर्ट देने के फैसले के लिए ऑनलाइन मजाक उड़ाया गया था।

सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि उन्हें भाजपा आईटी सेल के सदस्यों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें ऑनलाइन ट्रोल किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने JEE-NEET परीक्षा को स्थगित करने के समर्थन में बात की है, जो कि इस पर सरकार के रुख के विपरीत है। दी प्रिंट के इस लेख का कहना है कि भाजपा आईटी सेल के सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी पर अमित मालवीय के इशारे पर हमला कर रहे हैं।

2018 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को हिंदू-मुस्लिम दंपति को पासपोर्ट देने के उनके फैसले पर आलोचना का सामना करना पड़ा था। इस दंपति ने आरोप लगाया था कि चूँकि वह शादी के बाद भी अलग-अलग धर्म को मानते हैं, इसलिए उन्हें पासपोर्ट ऑफिस द्वारा पासपोर्ट जारी नहीं किया गया और उन्हें तंग भी किया जा रहा है। तन्वी सेठ नामक महिला ने आरोप लगाया था कि लखनऊ पासपोर्ट कार्यालय में तैनात अधिकारी विकास मिश्र ने उनके साथ धर्म के आधार पर भेदभाव किया। तन्वी सेठ और अनस सिद्दिकी ने 2007 में शादी की थी और इसके बाद उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला था।

वहीं, महिला के पति सिद्दिकी ने बताया कि पासपोर्ट ऑफिस के अधिकारी विकास मिश्र ने उनसे अपना नाम और धर्म बदलने को कहा था। हालाँकि इस मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी का तबादला कर दिया गया था। अधिकारी के तबादले के बाद कुछ लोगों ने विदेश मंत्रालय के इस फैसले पर सवाल खड़े किए थे। यहाँ गौर करने वाली बात है कि सुषमा स्वराज की आलोचना आईटी सेल द्वारा नहीं, बल्कि आम लोगों द्वारा किया गया था।

भाजपा के दोनों नेताओं की आलोचना के बीच अंतर बहुत गहरा है। लेकिन उस अंतर को समझने के लिए, यह आवश्यक है कि यह शांति और मर्यादा बनी रहे। हालाँकि, प्रतीत तो ये होता है कि मोदी घृणा से ओत-प्रोत ये पत्रकार अच्छी क्वालिटी का गाँजा लेने के बाद इससे कोसों दूर रहते हैं।

राजनाथ सिंह को भी किया गया था ट्रोल

यह लेख उस ट्रोलिंग का भी उल्लेख करता है, जिसे भारत के वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को कश्मीर में अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बाद उनके द्वारा किए गए ट्वीट के बाद सहना पड़ा था। तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया था कि कश्मीर के लोगों ने अमरनाथ यात्रियों पर हमले की निंदा की थी, यह दर्शाता है कि कश्मीरियत की भावना अभी भी जीवित है।

‘दी प्रिंट’ सुशांत सिंह के बहाने बिहारी परिवारों को भी कर चुका है अपमानित

लेकिन यह एकमात्र उदाहरण नहीं है जो दर्शाता है कि ‘द प्रिंट’ के लोग संभवतः मादक पदार्थ गाँजे के प्रभाव में हैं। कुछ दिनों पहले शेखर गुप्ता की वेबसाइट ‘दी प्रिन्ट’ के एक लेख में कहा गया था कि ‘टॉक्सिक’ बिहारी परिवारों में बच्चों पर ‘श्रवण कुमार’ बनने की जिम्मेदारी होती है। इस कथित लेख में सुशांत सिंह राजपूत के बहाने लिखा गया था कि सासें अपनी बहुओं को ‘डायन’ और ‘गोल्ड डिगर’ तक कहती हैं। साथ ही, दावा किया गया है कि युवाओं की शहरी गर्लफ्रेंड को सभी घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।

इस लेख में बताया गया था कि परिवार के लोग बड़े होने पर भी युवाओं को ‘मेरा लाड़ला’ समझते हैं और शादी के मामले में उसके विचारों को नहीं मानते। लिखा गया था कि गर्लफ्रेंड या पत्नी पुरुष को उसके परिवार से अलग कर देती है, बिहार में ऐसी धारणा है। साथ ही इसमें बिहारी लोकगीतों को भी लपेटा गया था और बाद में इसका दायरा बढ़ा कर उत्तर बिहार कर दिया गया। सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को भी बदनाम किया गया।

सुशांत सिंह राजपूत एक बिहारी थे और इस हिसाब से बॉलीवुड में ‘आउटसाइडर’ थे। यही कारण है कि बिहार में उनकी मौत एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। विवाद में सलमान खान का नाम आने पर उन्हें गाली देते हुए भोजपुरी गाने भी बने और राज्य में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। ये सब इसके बावजूद हुआ कि बिहार सलमान खान के बड़े बाजारों में से एक है।

इसलिए जिस स्तर तक गिरकर शेखर गुप्ता का दी प्रिंट ख़बरें प्रकशित कर रहा है, हर कोई एक बार के लिए यही संदेह करने पर विवश है कि कहीं दी प्रिंट के कर्मचारी किसी उच्चकोटि के भाँग का नशा तो नहीं करते हैं!

AltNews के मो. जुबैर को नाबालिग लड़की की डॉक्सिंग केस में दिल्ली HC से राहत, 8 हफ्ते के अंदर दिल्ली सरकार से माँगा गया जवाब

नाबालिग बच्ची की ऑनलाइन डॉक्सिंग करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आज (सितंबर 9, 2020) ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर को राहत प्रदान की है। कोर्ट ने जुबैर की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है।

इस याचिका में जुबैर ने अपने ख़िलाफ़ आईपीसी धारा 509बी, आईटी धारा 67 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की माँग उठाई थी। अदालत ने इस मामले में सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय बाल आयोग को भी निर्देश दिया है।

अदालत ने NCPCR से कहा कि वह याचिकाकर्ता की जानकारी सार्वजनिक करके जुबैर के ख़िलाफ़ लगे आरोपों पर जवाब दें। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली की एफआईआर में pocso एक्ट नहीं डाली गई थी।

गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर को लेकर इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी थी कि ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।

NCPCR के अध्यक्ष ने ट्विटर पर इसकी सूचना देते हुए बताया था कि आयोग की ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ के अनुसार, नाबालिग लड़की की ऑनलाइन प्रताड़ना के आरोप में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई

इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा था कि इस मामले में ट्विटर को भी नोटिस भेजा गया था। ट्विटर के निवेदन के बाद NCPCR ने उसे मोहम्मद जुबैर के ट्वीट के सम्बन्ध में और अधिक जानकारी देने के लिए 10 दिनों का अतिरिक्त समय दिया। जुबैर के ट्वीट के बाद उसे फॉलो करने वाले ट्विटर एकाउंट्स @de_real_mak और @syedsarwar ने भी बच्ची के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था, इसीलिए एफआईआर में उनका नाम भी शामिल है।

यहाँ बता दें फैक्ट चेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात समूह ऑल्टन्यूज़ के संस्थापकों में से एक मोहम्मद जुबैर ने शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने के लिए नाबालिग बच्ची की तस्वीर सार्वजानिक कर दी थी। बताया गया था कि यह बच्ची उस यूजर की पोती थी और उसे जुबैर के ट्वीट के बाद रेप की धमकियाँ मिली थी।

कंगना रनौत के दफ्तर में तोड़फोड़ को शरद पवार ने बताया ‘गैरजरूरी’, कहा- मुंबई में और भी हैं अवैध निर्माण

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के बांद्रा स्थित ऑफिस पर बीएमसी (BMC) की कार्रवाई को शिवसेना की सहयोगी एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने गलत बताया है। शरद पवार ने कहा कि बीएमसी की कार्रवाई गैर जरूरी है, मुंबई में और भी अवैध निर्माण हैं। शरद पवार ने कहा कि बीएमसी की कार्रवाई ने अनावश्यक रूप से (कंगना को) बोलने का अवसर दे दिया है। मुंबई में कई अन्य अवैध निर्माण हैं। यह देखने की जरूरत है कि अधिकारियों ने यह निर्णय क्यों लिया।

एक्ट्रेस कंगना रनौत और शिवसेना सांसद संजय राउत के बीच शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बीएमसी द्वारा मंगलवार (सितंबर 8, 2020) को उनके ऑफिस (मणिकर्णिका फिल्म्स) पर अवैध निर्माण का नोटिस लगाने के बाद बुधवार (सितंबर 9, 2020) को इसे तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की। हालाँकि इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है।

कंगना के बेबाक बयानों से शिवसेना बौखलाई हुई है। कंगना के मुंबई के कथित अपमान पर शिवसेना खासकर उसके सांसद संजय राउत इस कदर भड़के हुए हैं कि वे असंसदीय भाषा समेत अवैध तरीके से कंगना के खिलाफ कार्रवाई करने से भी गुरेज नहीं कर रही।

इसी बीच एक्ट्रेस कंगना रनौत मुंबई पहुँच गई हैं। एयरपोर्ट पर सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं। उधर, उनके समर्थक में कई लोग सामने आए हैं। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के समर्थक एयरपोर्ट पर मौजूद हैं। इसके साथ ही शिवसेना के कई समर्थक हाथों में काले झंडे और बैनर लेकर पहुँचे हैं। ये लोग कंगना के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

उनकी सुरक्षा में मुंबई पुलिस के फील्ड मार्शल, सीआईएसएफ और मुंबई पुलिस के 24 से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं। आरपीआई के कार्यकर्ता एयरपोर्ट पर उनके समर्थन में लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। कंगना के साथ उनकी बहन भी हैं।

इससे पहले कंगना रनौत ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और उसके गुंडे अवैध रूप से उनकी संपत्ति को ध्वस्त करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये सब जारी रखो, इससे उनके आत्मबल में और वृद्धि ही होती जाएगी। कंगना ने भावुक होकर ट्विटर पर लिखा कि ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ में पहली फ़िल्म ‘अपराजित अयोध्या’ की घोषणा हुई थी। कंगना रनौत ने कहा कि यह उनके लिए एक इमारत नहीं बल्कि राम मंदिर ही है, आज वहाँ बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा।

गौरतलब है कि संजय राउत और शिवसेना की धमकी को नजरअंदाज कर कंगना ने पहले ही कह दिया था कि वह 9 सितंबर को मुंबई पहुँच रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि जिसमें दम है, वह उन्हें रोक कर दिखाए।

महाराष्ट्र में जारी चकल्लस पर कॉन्ग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने किया अपनी ही पार्टी पर तंज, कॉन्ग्रेसी ट्रोल्स ने दी दूसरा सचिन पायलट ना बनने की सलाह

चीन के साथ सीमा पर जारी गतिरोध पर कॉन्ग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाने के बाद कॉन्ग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा कंगना रनौत के खिलाफ चलाए जा रहे द्वेषपूर्ण अभियान पर भी बेहद अस्पष्ट ढंग से अपनी ही पार्टी के पक्ष पर कटाक्ष किया है।

बुधवार (सितम्बर 09, 2020) को कॉन्ग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक तंज भरा ट्वीट किया। मिलिंद देवड़ा ने बिना किसी का नाम लेते हुए लिखा, “बताइए, एक तर्कहीन सांस्कृतिक जंग छेड़ने के लिए महामारी से बेहतर समय नहीं हो सकता?”

दरअसल, मिलिंद देवड़ा का इशारा महाराष्ट्र सरकार द्वारा सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच से लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को लेकर छेड़ी गई लड़ाई की ओर है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में इस समय एनसीपी, शिवसेना और कॉन्ग्रेस की सरकार है। और महाराष्ट्र के नेता इस समय अपनी मराठा छवि, क्षेत्रीय गौरव और जय मराठा जैसे राग अलाप रहे हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस में राहुल गाँधी के समकक्ष युवा नेता मिलिंद देवड़ा ने अपनी ही पार्टी के पक्ष पर चोट करते हुए ट्वीट किया है।

मिलीं देवड़ा के इस ट्वीट पर उनके समर्थक कई प्रकार की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। उनके इस ट्वीट को देखते हुए कॉन्ग्रेसी ट्रोल भी उन पर कूद पड़े। किसी ने उनसे पूछ दिया कि हाल-फिलहाल उन्होंने राहुल गाँधी के कितने ट्वीट या वीडियो को शेयर किया है तो कोई उन्हें दूसरा सचिन पायलट बताने पर लगा हुआ है।

यही नहीं, कुछ कॉन्ग्रेस समर्थकों ने देवड़ा पर आरोप लगाया है कि इसी तरह से कॉन्ग्रेसी नेताओं के नैतिकता में आगे रहने की ललक ने कॉन्ग्रेस को डुबोया है।

उल्लेखनीय है कि गत जून के माह ही चीन के साथ सीमा संघर्ष के बीच भी कॉन्ग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने अपनी ही पार्टी को घेरते हुए ट्विटर पर लिखा था कि एकजुट होने के वक्त हो रही राजनीतिक कीचड़बाजी से हम दुनिया में तमाशा बन गए हैं। देवड़ा ने कहा कि चीन के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है।

देवड़ा ने ट्विटर पर लिखा था, “यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब चीन के अतिक्रमण के खिलाफ राष्ट्र की एक आवाज होनी चाहिए, तब उसकी जगह राजनीतिक कीचड़बाजी हो रही है। हम दुनिया में तमाशा बन गए हैं। चीन के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है।”

देवड़ा ने यह बयान तब दिया था जब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी चीन के खिलाफ भारत सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे थे। वहीं, अब वर्तमान में महाराष्ट्र सरकार द्वारा कंगना रनौत के खिलाफ छेड़ी गई जंग में द्वेषपूर्ण तरीके अपनाने पर भी कॉन्ग्रेस महाराष्ट्र सरकार के साथ खड़ी नजर आ रही है। कम से कम कॉन्ग्रेस की अब तक इस मामले पर चुप्पी तो यही साबित करती है कि वह इस पूरे प्रकरण में शिवसेना को रोकने के मूड में नहीं है।

‘एक धक्का और दो इस घर को तोड़ दो’: प्रियंका गाँधी के ‘अवैध’ बंगले को तोड़ने की उठी माँग, गुस्साए लोगों ने कहा- कानून एक जैसा हो!

मुंबई में अभिनेत्री कंगना रनौत के कार्यालय पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर जगह महाराष्ट्र सरकार की आलोचना हो रही है। कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के गठबंधन वाली महाविकास अघाड़ी सरकार पर द्वेषपूर्ण राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर भी कंगना के समर्थकों ने एक नई माँग उठा दी है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की सरकार से गुहार लगाई है कि शिमला में प्रियंका गाँधी की अवैध संपत्ति को फौरन ध्वस्त कर दिया जाए, या उस पर कार्रवाई हो।

कंगना के मुंबई स्थित ऑफिस पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। खबर लिखने तक इस हैशटैग के अंतर्गत 15 हजार से ज्यादा ट्वीट हो चुके थे। इन ट्विट्स में यूजर्स प्रियंका गाँधी की उस प्रॉपर्टी को गिराने की माँग हिमाचल सरकार से उठा रहे हैं, जिसके लिए 3 साल पहले भी हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस भेजा था।

जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने यह नोटिस प्रियंका गाँधी को आशी भट्टाचार्या की याचिका पर जारी किया था। इस याचिका में आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रियंका की जमीन का विवरण और हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम के तहत राज्य सरकार से मिलने वाली अनुमति की जानकारी माँगी थी।

लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली, प्रदेश में घर नहीं खरीद सकता है, इसलिए यह घर अवैध है। इसे जल्द से हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं।

एक यूजर लिखते हैं, “शिवसेना और कॉन्ग्रेस की तरह भाजपा राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं जानी जाती है। इसलिए यही बढ़िया है कि प्रियंका गाँधी के घर को छोड़ दिया जाए। क्योंकि हमें कॉन्ग्रेस का साल 2024 में पूरा सफाया चाहिए। ऐसे में गाँधी परिवार को आराम करने के लिए घर की जरूरत पड़ेगी।”

कंगना की संपत्ति पर इस तरह का हमला देखने के बाद लोगों का कहना है कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है। कुछ लोग इस हैशटैग पर प्रियंका के बंगले की तस्वीर शेयर करके लिख हिमाचल सरकार को टैग करके लिख रहे हैं, “एक धक्का और दो, इस घर को तोड़ दो।”

गौरतलब है कि प्रियंका गाँधी के पास शिमला के छराबड़ा में एक घर है। यह घर शिमला के वीवीआईपी इलाके में बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 का हवाला देकर इस संपत्ति पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। इस धारा के अंतर्गत प्रावधान है कोई भी बाहरी प्रदेश में हिमाचल प्रदेश में जमीन नहीं ले सकता है।

यदि कोई इच्छुक भी हो, तो उसे भूअधिनियम की धारा 118 के तहत अनुमति लेनी होती है। इसकी परमिशन राज्य सरकार कैबिनेट में देती है। हालाँकि, कहा जाता है कि प्रियंका ने इस प्रक्रिया का पालन किया है। पर, फिर भी कार्यकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं की माँग ये है कि इस जमीन से जुड़े दस्तावेज ऑन रिकॉर्ड लेकर आए जाएँ।

बता दें कि #DemolishPriyankaHimachalHome के अलावा इस समय कुछ लोग अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद-मजार तोड़ने की माँग भी उठाने लगे हैं जिन्हें हाईवे और सड़क के बीच में खड़ा करके देश की प्रगति को रोका गया। लोगों का कहना है कि कानून तो सबके लिए समान होना चाहिए।

लोगों की माँग है कि महाराष्ट्र सरकार की करनी का जवाब हिमाचल सरकार ऐसे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करके दे। वहीं कुछ लोग हैं जो कंगना रनौत के मामले में पीएमओ से दखल करने की अपील कर रहे हैं। साथ ही इस पूरे फैसले को कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच चल रही तनातनी बता रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग मीम्स शेयर करके ये बताना चाह रहे हैं कि अवैध प्रॉपर्टी पर बीएमसी की कार्रवाई सुन कर कॉन्ग्रेस अपनी कई संपत्तियों को लेकर सोच में हैं।

कंगना रनौत पहुँचीं मुंबई: एयरपोर्ट पर शिवसेना और करणी सेना आमने-सामने, मिल रहा है तगड़ा समर्थन

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत मुंबई पहुँच चुकी हैं। Y-कैटेगरी सुरक्षा प्राप्त कंगना रनौत के मुंबई पहुँचते ही उनके पक्ष में जबरदस्त नारेबाजी हुई। मुंबई एयरपोर्ट पर पहले से ही करणी सेना के लोग डटे हुए थे, जिनका कहना है कि वो कंगना के काफिले के साथ ही रहेंगे क्योंकि उन्हें महाराष्ट्र की सरकार पर भरोसा नहीं है। कंगना रनौत के घर के बाहर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और एयरपोर्ट पर भी भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

उधर कंगना रनौत के वकील रिजवान सिद्दीकी ने कहा है कि बीएमसी द्वारा दिया गया नोटिस अवैध है और उनलोगों ने अवैध रूप से परिसर में घुस कर संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। हालाँकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को रोक दी है लेकिन फिर भी उद्धव ठाकरे की सरकार ने अपनी हनक दिखाने के लिए ये कार्रवाई की, ऐसा लोगों का कहना है। मुंबई एयरपोर्ट पर कंगना रनौत के विरोध के लिए भारी संख्या में शिवसैनिक भी पहुँचे हुए हैं।

इससे पहले कंगना रनौत ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और उसके गुंडे अवैध रूप से उनकी संपत्ति को ध्वस्त करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये सब जारी रखो, इससे उनके आत्मबल में और वृद्धि ही होती जाएगी। कंगना ने भावुक होकर ट्विटर पर लिखा कि ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ में पहली फ़िल्म ‘अपराजित अयोध्या’ की घोषणा हुई थी। कंगना रनौत ने कहा कि यह उनके लिए एक इमारत नहीं बल्कि राम मंदिर ही है, आज वहाँ बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा।

कंगना रनौत ने आगे कहा कि राम मंदिर फिर टूटेगा मगर बाबर को ये याद रखना चाहिए कि यह मंदिर फिर बनेगा। साथ ही उन्होंने बीएमसी और मुंबई पुलिस की वो तस्वीरें भी शेयर की, जो उनके दफ्तर के हिस्सों को तोड़ने की प्रक्रिया में लगी हुई थी।

मुंबई पहुँची कंगना, ऑफिस पर अब नहीं चलेगी BMC की JCB: बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई रोक

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कंगना रनौत की संपत्ति पर BMC (बृहन्मुंबई नगर निगम) की तोड़फोड़ पर रोक लगाई है। इस मामले पर कल दोपहर तीन बजे फिर से सुनवाई होगी। बुधवार (सितम्बर 09, 2020) को बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई पहुँचने से पहले ही BMC ने उनके मुंबई स्थित ‘मणिकर्णिका फिल्म्ज’ ऑफिस में कथित अवैध निर्माण में तोड़फोड़ शुरू कर डाली। कंगना के वकील ने कहा है कि BMC इस इमारत को उनके जवाब को अस्वीकर करने से पहले ही तोड़ने के लिए तैयार थी।

BMC (बृहन्मुंबई नगर निगम) की इस कार्रवाई के खिलाफ कंगना ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने BMC (बृहन्मुंबई नगर निगम) की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। BMC की टीम बुधवार सुबह ही बुलडोजर और JCB मशीनें लेकर बाँद्रा के पाली हिल बंगले पर पहुँची और कंगना रनौत के ऑफिस को गिराने लगी। इस पर कंगना ने एक ट्वीट में कहा कि मैंने कभी गलत नहीं किया और मेरे दुश्मन बार-बार यह साबित कर रहे हैं कि मुंबई अब पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) क्यों है।

कंगना रनौत मुंबई स्थित छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुँच चुकी हैं, जहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचने के लिए एयरपोर्ट के बाहर भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।

BMC द्वारा कंगना रनौत का दफ्तर तोड़े जाने को लेकर कंगना ने ट्वीट कर कहा, “मणिकर्णिका फिल्म्स में पहली फिल्म अयोध्या की घोषणा हुई, यह मेरे लिए एक इमारत नहीं राम मंदिर ही है। आज वहाँ बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा राम मंदिर फिर टूटेगा मगर याद रख बाबर यह मंदिर फिर बनेगा यह मंदिर फिर बनेगा, जय श्री राम, जय श्री राम , जय श्री राम।”

राजदीप सरदेसाई ने पूछा, कानून रिया चक्रवर्ती के अधिकार की रक्षा कब करेगा?

वहीं इंडिया टुडे के प्रोपेगेंडा पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा कंगना के ऑफिस में की जा रही तोड़फोड़ पर रोक लगाए जाने की सूचना देते हुए कहा है कि कानून राज्य के विरुद्ध नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करता है, क्या ऐसा ही रिया चक्रवर्ती के मामले में भी होगा?

गौरतलब है कि राजदीप सरदेसाई शुरू से ही बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत में आरोपित रिया चक्रवर्ती का बचाव करते हुए उनके मीडिया मैनेजर की भूमिका में नजर आ रहे हैं। कुछ ही दिन पहले राजदीप सरदेसाई ने अपने चैनल पर रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू कर उन्हें ‘क्लीन चिट’ देने का भी प्रयास किया था।

असम: 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ रिकी अहमद ने किया 20 से भी ज्यादा बार बलात्कार, गिरफ्तार

असम के डिब्रूगढ़ जिले में रिकी अहमद नाम के युवक द्वारा 15 साल की नाबालिग लड़की के साथ कई बार बलात्कार करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में आरोपित रिकी अहमद को नालीपुल के कावेरी पैटी क्षेत्र से मंगलवार (9 सितंबर, 2020) को गिरफ्तार कर लिया है। परिजनों ने बताया पीड़िता के साथ 20 बार से ज्यादा दुष्कर्म किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डिब्रूगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मनाव बरुआ ने कहा, “पीड़िता के परिवार के सदस्यों द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी के आधार पर, हमने नालिपुल के कावेरी पैटी क्षेत्र से एक व्यक्ति ( रिकी अहमद उर्फ बिक्की) को गिरफ्तार किया है।”

पद्मनाव बरुआ ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि एफआईआर के मुताबिक, रिकी अहमद द्वारा 20 से भी अधिक बार नाबालिग के साथ बलात्कार किया गया था। वहीं इस मामले की जानकारी पीड़िता के परिजनों को भी नहीं थी।

बरुआ ने कहा, “आरोपित के खिलाफ डिब्रूगढ़ पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 448/376 डी (ए) / 506, यौन अपराध अधिनियम से बच्चों की सुरक्षा की धारा 4 के तहत (1513/20) मामला दर्ज किया है।”

पुलिस अधिकारी ने बताया, इस अपराध में आरोपित ने अपनी भूमिका से इनकार कर दिया है। लेकिन हमारे पास आरोपित के खिलाफ कई सबूत मौजूद हैं। जिसको मद्देनजर रखते हुए रिकी अहमद को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

अतिरिक्त एसपी ने कहा, “एक सप्ताह के भीतर, हम चार्जशीट पेश करेंगे और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई की दरख्वास्त करेंगे।” गौरतलब है कि कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान असम में आपराधिक मामलों में काफी बढ़त हुई है।