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बंगाल: दिनदहाड़े BJP की महिला नेता के घर में घुसे गुंडे, पीटने के बाद सिर में मारी गोली; पार्टी ने TMC को ठहराया जिम्मेदार

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमले रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला राज्य के दक्षिण 24 परगना से आया है, जहाँ एक बीजेपी महिला कार्यकर्ता को गोली मारी गई है। गंभीर रूप से घायल महिला कार्यकर्ता का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने कहा कि भाजपा के महिला विंग की नेता को राज्य के दक्षिण 24 परगना जिले में अज्ञात बदमाशों ने गोली मार दी। पुलिस फिलहाल हत्यारों की धरपकड़ की कोशिश में लगी है।

पीड़ित महिला की पहचान राधारानी नस्कर के रूप में की गई है, जो दक्षिण 24 परगना जिले के बिष्णुपुर इलाके में बूथ समिति की उपाध्यक्ष और भारतीय जनता महिला मोर्चा की कैशियर हैं। उनके पति अरुण नस्कर बिष्णुपुर में भाजपा की स्थानीय बूथ समिति के अध्यक्ष हैं। जानकारी के मुताबिक तृणमूल कॉन्ग्रेस समर्थक सशस्त्र बदमाशों का एक समूह अरुण की तलाश में उनके घर में घुस गया। अरुण उस समय घर में मौजूद नहीं थे। भागने से पहले उन्होंने राधारानी की पिटाई की और सिर के पिछले हिस्से में गोली मारी। यह घटना दिन के उजाले में घटी।

हमले में वह घायल हो गई थी। इसके बाद महिला भाजपा नेता को इलाज के लिए एक स्थानीय चिकित्सा संस्थान में ले जाया गया। हालाँकि बाद में उन्हें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे तृणमूल कॉन्ग्रेस का हाथ है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी महिला मोर्चा की आवाज को चुप कराना चाहती है। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इस आरोप का खंडन किया और दावा किया कि यह भाजपा के अंदर गुटबाजी का नतीजा है। पुलिस ने कहा कि अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

भाजपा महिला मोर्चा की नेता अग्निमित्र पॉल ने इस घटना की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस समर्थित गुंडों द्वारा गोली चलाई गई थी। पूरे बंगाल में अराजकता व्याप्त है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अपराधियों को पता है कि जब तक वे तृणमूल समर्थक हैं, ममता बनर्जी के शासन में उन्हें कभी भी दंडित नहीं किया जाएगा। इधर गुस्साए ग्रामीणों ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग को लेकर गाँव में धरना दिया।

गौरतलब है कि इससे पहले पश्चिम बंगाल के कलना स्थित पथर घाटा में रॉबिन पॉल नाम के भाजपा कार्यकर्ता की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। मृतक के परिवार वालों का कहना था कि उनके घर के सामने मनरेगा के तहत काम हो रहा था। मनरेगा कर्मचारी घर के सामने मौजूद पेड़ काटने लगे तो रॉबिन ने इस पर आपत्ति जताई। दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई और कुछ ही देर में यह हिंसक हो गया। मौके पर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के लगभग 50 से अधिक कार्यकर्ता इकट्ठा हो गए और उन्होंने रॉबिन की लिंचिंग कर दी।

तृणमूल कॉन्ग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने पहले उसे मिल कर पीटा। फिर उसे नज़दीक के गाँव लेकर गए। वहाँ टीएमसी के डिप्टी चीफ ने उसके साथ जम कर मारपीट की। परिवार वालों ने आरोप लगाया कि जब रॉबिन को उसकी बेटी ने पानी देने का प्रयास किया तो तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उसे रोक दिया। उन्होंने रॉबिन की बेटी को मौके पर धमकाया कि अगर वह अपने पिता की मदद करती है तो उसका भी यही हाल कर दिया जाएगा।

सुशांत को जहर दिया गया था? 10 दिनों में पर्दा उठेगा, AIIMS की फोरेंसिक टीम करेगी विसरा जाँच

एम्स की 5 सदस्यों वाली फोरेंसिक टीम सुशांत सिंह की मेडिकल फ़ाइल खँगाल रही है। टीम विसरा टेस्ट भी करने जा रही है। इससे यह पता चलेगा कि सुशांत को ज़हर दिया गया था या नहीं।

एम्स के फोरेंसिक विभाग के मुखिया डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि इस टेस्ट की रिपोर्ट 10 दिन के अंदर आ जाएगी। डॉ. सुधीर उस मेडिकल बोर्ड के चेयरमैन भी हैं जिसका गठन सुशांत सिंह मामले की सीबीआई जाँच में मदद करने के लिए हुआ है। सीबीआई के अनुरोध के बाद पिछले हफ्ते इस बोर्ड का गठन हुआ था। बोर्ड सुशांत सिंह मामले से जुड़ी तमाम मेडिकल रिपोर्ट की जाँच भी करेगा। 

डॉ. गुप्ता ने बताया कि विसरा टेस्ट की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसकी मदद से हमारे लिए यह पता लगाना आसान होगा कि क्या सुशांत को ज़हर दिया गया था। विसरा टेस्ट की रिपोर्ट 10 दिनों में आ सकती है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हम सुशांत सिंह को दी गई दवाओं की भी जाँच करेंगे। उन दवाइयों की जाँच एम्स की प्रयोगशाला में की जाएगी।     

सुशांत सिंह की ऑटोप्सी रिपोर्ट सामने आने पर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी ज़हर दिए जाने की आशंका जताई थी। दरअसल रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि ऑटोप्सी में लगभग 12 घंटे की देरी हुई थी। इसके अलावा मौत का सही समय भी नहीं बताया गया था। इस पर ट्वीट करते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने लिखा था, “अब हत्यारों की शैतानी मानसिकता धीरे-धीरे सामने आ रही है। ऑटोप्सी में जान-बूझकर देरी की गई जिससे शरीर के पाचक तरल ज़हर को ख़त्म कर दें। जिससे इस बात की पुष्टि न हो पाए कि ज़हर दिया गया था। समय आ गया है कि जो आरोपित हैं उन पर कार्रवाई की जाए।”    

बीते दिन सुशांत सिंह राजपूत की गर्दन पर नज़र आए निशान को लेकर चर्चा काफी तेज़ हो गई थी। AIIMS के डॉक्टरों की टीम ने इस सम्बन्ध में कूपर हॉस्पिटल के उन डॉक्टरों से जवाब माँगा था, जिन्होंने सुशांत सिंह राजपूत का पोस्टमॉर्टम किया था। एम्स के तीन डॉक्टरों की टीम ने कूपर हॉस्पिटल के डॉक्टरों से पूछताछ की थी। एम्स के डॉक्टरों ने इस दौरान सुशांत के गले में बने निशान को लेकर भी सवाल दागे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सवाल यहाँ अटका हुआ था कि सुशांत के गले में दिखे जख्म के निशान उनके गले के बीच में थी और एकदम सीधी रेखा की तरह दिखाई दे रही है। जबकि अगर कोई व्यक्ति इस तरह से आत्महत्या करता है तो ये निशान तिरछा बनता है और गर्दन के ऊपर होता है। साथ ही ये खरोंच की तरह भी दिखता है। एम्स के 3 डॉक्टरों की टीम ने सुशांत का पोस्टमॉर्टम करने वाली 5 डॉक्टरों की टीम से इस बाबत सवाल-जवाब किया।

साथ ही ये सवाल भी पूछा गया कि पोस्टमॉर्टम में Ligature strangulation की आशंका को कैसे ख़ारिज कर दिया गया था? साथ ही गले पर के निशान कुर्ता से कैसे पैदा हो सकते हैं, ये भी पूछा गया। बताया गया था कि सुशांत सिंह राजपूत ने कुर्ते को ही फाँसी का फंदा बना कर आत्महत्या की थी। कई तथ्यों के आधार पर इसे हत्या कहा जा रहा है, इसे नकारने के लिए कूपर हॉस्पिटल के डॉक्टरों के पास क्या सबूत हैं, ये भी पूछा गया।

छोटी बच्ची की डॉक्सिंग करने वाले जुबैर पर FIR: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Alt News co-founder Zubair booked under POCSO

मोहम्मद जुबैर। दुनिया इन्हें प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्टन्यूज के सह-संस्थापक के रूप में जानती है। लेकिन सोशल मीडिया पर ये डॉक्सिंग व फेक न्यूज फैलाने के लिए भी कुख्यात हैं। अभी हाल में NCPCR ने एक नाबालिग लड़की की डॉक्सिंग करने के आरोप में इन पर FIR की थी।

डॉक्सिंग का अर्थ सोशल मीडिया पर किसी की भी प्राइवेट जानकारी को बिना उसकी मर्जी से सार्वजनिक कर देना होता है। जुबैर के अलावा इस काम के लिए वेबसाइट के संस्थापक प्रतीक सिन्हा भी कुख्यात हैं।

इनकी इन्हीं हरकतों की वजह कई बार कई यूजर्स को काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। किसी को नहीं मालूम होता कि आखिर ये लोग खुद कहाँ पर हैं। मगर, ये अपने संपर्कों और पहुँच का इस्तेमाल करके व्यक्ति विशेष से जुड़ी सभी जानकारी पब्लिक कर देते हैं। फिर कट्टरपंथी इन्हीं सूचनाओं का इस्तेमाल करके उस व्यक्ति को धमकी देने लगते हैं। इन्होंने ऐसा ही कुछ हमारे सीईओ के साथ भी किया था, वो भी तब जब उनकी नवजात बच्ची हुई थी।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

उन्नाव में लव जिहाद: नाबालिग को अगवा कर ले गया हसीब, परिजनों ने SP से लगाई गुहार

उत्तर प्रदेश का कानपुर इन दिनों लव जिहाद (Love Jihad) के मामलों को लेकर चर्चा में है। कानपुर से सटे उन्नाव से भी इस तरह का मामला सामने आया है। आरोप है कि समुदाय विशेष के एक युवक ने पहले नाबालिग हिंदू को प्रेमजाल में फँसाया फिर बहला-फुसलाकर उसे अगवा कर ले गया।

आरोपित युवक लड़की के घर वालों को जान से मारने की धमकी भी दे रहा है। परिजनों ने एसपी आवास पहुँचकर बच्ची की घर वापसी की गुहार लगाई है। एसपी के निर्देश पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 363/ 366 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला बांगरमऊ थाना क्षेत्र के कोतवाली कस्बा का बताया जा रहा है। आरोप यह भी है कि शुरुआत में पुलिस ने रिपोर्ट लिखने में टालमटोल की थी। यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस ने आधार कार्ड न होने की वजह से रिपोर्ट लिखने से इनकार कर दिया। हमने इस बाबत बांगरमऊ पुलिस स्टेशन से बात करने की कोशिश की, मगर संपर्क नहीं हो पाया।

जानकारी के मुताबिक पुलिस के रिपोर्ट दर्ज न करने के बाद पीड़िता की माँ ने एसपी से मुलाकात कर पूरी घटना उन्हें बताई। एसपी ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित थाना प्रभारी को रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया। पीड़िता की माँ एसपी आवास पहुँचकर अपनी नाबालिग बेटी की घर वापसी के लिए गुहार लगाई है।

माँ ने बताया कि 4 सितंबर की रात 10 बजे उनकी 16 वर्षीय पुत्री को पड़ोस का युवक अपने घर बुला ले गया। इसके बाद गाँव के ही हसीब (पुत्र: हसीन) ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनकी नाबालिग बेटी का अपहरण कर लिया। उन्होंने बताया कि हसीब ने पहले नाबालिग को प्रेमजाल में फँसाया फिर ब्रेनवॉश कर बहला-फुसलाकर उसे कहीं ले गया। माँ के मुताबिक वारदात वाले घर से आरोपित का चप्पल और मोबाइल मिला है।

हिंदू जागरण मंच के जिला प्रभारी मंत्री विमल द्विदी ने कहा कि लव जेहाद की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी यूपी में तमाम जगहों पर इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन पुलिस हर बार मामलों को हल्के में लेकर निपटा देती है। पुलिस इन मामलों में सख्ती करे तो ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। उनका कहना है कि ऐसे पुलिस अधिकारियों की वजह से योगी सरकार की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने योगी सरकार और एसपी से बांगरमऊ कोतवाली प्रभारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद’ की बढ़ती घटनाओं के बीच सख्त हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस को इस मामले में कड़े निर्देश दिए थे। उन्होंने पुलिस से कहा था कि एक कार्ययोजना बना कर ऐसी घटनाओं को चिह्नित किया जाए और फिर कार्रवाई की जाए। लड़कियों को धोखे में डाल कर उन्हें प्रताड़ित किए जाने वाली घटनाओं को रोकने के लिए योगी सरकार ने गृह विभाग को निर्देश दिए थे।

बलरामपुर: मोहम्मद रजा के घर भीषण ब्लास्ट, बच्चे की मौत; आसपास के कई घर तबाह

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में मोहम्मद रजा के घर में सोमवार (सितम्बर 07, 2020) जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका इतना तीव्र था कि इसमें एक बच्चे की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। मोहम्मद रजा के पड़ोसी शहादत का भी घर इस धमाके से ढेर हो गया। साथ ही, आसपास के कई और मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए।

पुलिस के अनुसार, कोतवाली नगर स्थित मोहल्ला गदुराहवा में मोहम्मद रजा का घर है, जहाँ मोहम्मद रजा के भाई अकरम ने पटाखा बनाने का लाइसेंस ले रखा है। अकरम के पास पटाखों के भंडारण के लिए गोदाम है। लेकिन वह पटाखों को चोरी-छिपे घर में अवैध भंडारण कर रहा था।

पुलिस ने बताया की मौके पर छानबीन के दौरान बारूद की गंध महसूस हुई। छानबीन में पता चला कि सोमवार सुबह मोहम्मद रजा की पत्नी खाना बना रही थी। इसी समय अचानक गैस सिलेंडर में विस्फोट हुआ और उससे पटाखों में आग लग गई।

एसपी देवरंजन वर्मा के मुताबिक, यह विस्फोट बारूद की वजह से हुआ। मोहम्मद अकरम उर्फ बबलू के नाम से पटाखा बेचने का लाइसेंस है। खास बात यह है कि इस धमाके की गूँज करीब 4 किलोमीटर दूर तक हुई। इस मामले में जाँच की जा रही है।

इस धमाके में मोहम्मद रजा के भाँजे ननकने अली पुत्र शहादत अली की मौके पर मौत हो गई। जबकि उसकी पत्नी शुबरा (40) और उसकी बेटी रूबी (14) गंभीर रूप से घायल हो गई, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पड़ोसियों का कहना है कि इस धमाके से तकरीबन एक दर्जन घरों के शीशे टूट गए, और आसपास के घरों की छतों व दीवारों में दरार आ गई है। धुएँ का गुबार करीब एक घंटे तक शहर के आसमान में नजर आया। आरोपित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई और उसे जेल भेजा जा रहा है। पुलिस की जाँच अभी जारी है।

IAS, IPS बनना है तो मजहब के लिए खड़ा होना होगा, उन्हें जवाब देना होगा: भगोड़ा जाकिर नाइक

कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह समुदाय विशेष के लोगों से IAS/IPS अधिकारी बनने से परहेज करने के लिए कह रहा है। भगोड़ा जाकिर नाइक फिलहाल मलेशिया में रह रहा है। 

अपने समुदाय के एक व्यक्ति द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ब्यूरोक्रेट बन सकता है, जाकिर नाइक ने जवाब दिया, “यदि तुम दीन (मजहब) का पालन कर सकते हो तो स्वीकार्य है, अन्यथा नहीं।” 

इसके बाद समुदाय विशेष के एक अन्य शख्स ने पूछा कि क्या उनके लिए IAS बनना संभव है? इस्लामिक उपदेशक ने इसका जवाब देते हुए कहा, “यह असंभव नहीं है लेकिन मुश्किल है।” इस धारणा के तहत कि एक समुदाय विशेष का IAS अधिकारी निश्चित रूप से अपने सहकर्मियों से भयभीत होगा, नाइक ने कहा, “जब वे आप पर, इस्लाम पर या पैगंबर पर हमला करते हैं, तो क्या आप उन्हें वापस जवाब दे सकते हैं? क्या आपके पास जवाब देने की हिम्मत है? यदि आप डरपोक और शर्मीले हैं, तो ऐसी नौकरी न करें। यदि आप उन्हें जवाब दे सकते हैं और बोल्ड हैं, तो इसके साथ आगे बढ़ें।”

बाद में वीडियो में उसने जोर दिया, “यदि आप एक मजबूत व्यक्ति हैं जो गैर-इस्लामिक लोगों की आलोचना का सामना कर सकते हैं, रिश्वत से दूर रह सकते हैं, सुन्नत और कुरान का पालन कर सकते हैं, तो ही इस नौकरी को करें।” इस दौरान जाकिर नाइक ने इस्लाम से ‘विचलित’ हुए अपने समुदाय के अधिकारियों के उदाहरणों का हवाला देकर समुदाय विशेष के आईएएस उम्मीदवारों को चेतावनी भी दी।

अपने समुदाय के लोगों के लिए उसकी सलाह इस विश्वास पर आधारित है कि IAS या IPS अधिकारी की प्रतिष्ठित नौकरी हासिल करने के पीछे का ‘उद्देश्य’ सहकर्मियों को जवाब देना, इस्लाम की रक्षा करना और अल्लाह एवं कुरान की शिक्षाओं का पालन करना है।

जाकिर नाइक बार-बार कहता है कि ‘वे’ कुरान और पैगंबर को बदनाम करेंगे। इसके साथ ही वह दावा करता है कि समुदाय विशेष के जिन लोगों को इन नौकरियों में चुना गया है, उन्हें ‘उनसे’ अपने मजहब का बचाव करना होगा।

जाकिर नाइक का वीडियो

इसी वीडियो में, नफरत फैलाने वाले जाकिर नाइक ने आईपीएस अधिकारियों के बारे में भी बयान दिए। नाइक ने दावा किया, “सभी नहीं, लेकिन अधिकांश IPS अधिकारी निश्चित रूप से भ्रष्ट हैं… अगर कोई ईमानदार अधिकारी वहाँ जाता है, तो वह या तो भ्रष्ट हो जाता है या उसे नौकरी छोड़नी पड़ती है… सेटअप ऐसा है कि अगर आप उनसे सहमत नहीं हैं, तब, वे आपके लिए जीवन को कठिन बना देंगे।”

कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के लिए इस तरह के दावे करना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले, उसने कहा था कि “समुदाय विशेष का पक्ष लेने” और “दमनकारियों के बदसूरत चेहरे को दिखाने” के उनके नेक प्रयासों के बावजूद, NDTV के स्टार पत्रकार रवीश कुमार को ‘जन्नत’ में जगह नहीं मिलेगी। गैर-इस्लामी दिल के कितने भी अच्छे क्यों न हों, उन्हें जाना नरक में ही है।

गौरतलब है कि हाल ही में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एक हाई-प्रोफाइल ‘लव जिहाद’ मामले से संबंधित FIR में जाकिर नाइक और पाकिस्तान मूल के दो कट्टर प्रचारकों को आरोपित बनाया है। हाई-प्रोफाइल मामले में चेन्नई के एक व्यापारी की बेटी और बांग्लादेश के एक शीर्ष राजनेता का बेटा शामिल है। जिसका संबंध पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) से है।

महिला के पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी लंदन में पढ़ रही थी, इसी दौरान बांग्लादेशी नागरिक नफीस ने उसे लुभाना शुरू कर दिया। वो महिला को रिलेशनशिप में आने के लिए जाल बिछा रहा था। इस काम में आरोपित का पिता सरदार शेखावत हुसैन के साथ-साथ यासीर और नौमान अली खान नामक दो अन्य लोग भी शामिल थे। आरोप है कि नफीस इन सबकी मदद से पीड़िता का अपहरण कर बांग्लादेश ले गया। बांग्लादेश ले जाकर महिला से जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया।

‘मैं आदमी हूँ, औरत बनकर रहना अच्छा लगता है’: बंगाली शुभम माँ काली की अश्लील तस्वीर बनवा रहा लोगों की DP

सोशल मीडिया पर एक बार फिर कुछ हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरों को लेकर अपमानजनक पोस्ट सामने आए हैं। एथीस्ट रिपब्लिक के संस्थापक अर्मिन नवाबी द्वारा शेयर की गई माँ काली की अश्लील तस्वीर के बाद @AtheistRonnie नाम का एक ट्विटर अकॉउंट लोगों से इसे अपनी प्रोफाइल फोटो बनाने की अपील कर रहा है। शुभम बिस्वास नाम का यह युवक कोलकाता का निवासी है।

‘एथीस्ट रॉनी’ नाम के इस अकॉउंट से माँ काली की अभद्र तस्वीर पर न केवल कमेंट किया गए है, बल्कि ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ ग्रुप का सदस्य होने के नाते इसके माध्यम से लोगों से अपील की गई है कि जो भी कोई भारत में ईशनिंदा कानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करना चाहते हैं वह उस तस्वीर को अपनी डीपी पर लगा ले।

सोशल मीडिया पर हिन्दुओं की आराध्य माँ काली की अपमानजनक तस्वीर शेयर करने के मामले में भारत के ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ संस्था के कॉर्डिनेटर के ख़िलाफ़ ‘हिंदू आईटी सेल’ नामक ट्विटर अकॉउंट केस दर्ज कराने जा रहा है। उन्होंने अपने ट्विटर पर जानकारी दी है कि जो कोई भी इस समूह के ख़िलाफ़ एफआईआर या शिकायत दर्ज करवाना चाहाता है, वह उनसे संपर्क करे।

हम सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे कुछ स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि यह ट्विटर अकाउंट माँ काली की इस अभद्र तस्वीर को प्रोफाइल फोटो बनाने के लिए लोगों को उकसा रहा है और जब कुछ ओछी मानसिकता के लोग बिना सोचे-समझे यह काम कर रहे हैं तो उनका स्वागत ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ समूह में कर रहा है।

Hate Patrol Squad के मुताबिक इस लड़के का नाम शुभम बिस्वास है। यह कल्याणी यूनिवर्सिटी में पढ़ता है और उसी समूह का सदस्य है, जिसके संस्थापक ने अभी हाल में माँ काली की अभद्र तस्वीर को शेयर करते हुए उनके लिए ‘सेक्सी’ शब्द का प्रयोग किया था।

गणेश भगवान पर शेयर किया गया अपमानजनक ट्वीट

इसी शुभम बिस्वास ने लड़कियों के लिबास में अपने अकॉउंट पर कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं। इसके अलावा, उसके ट्विटर पर अधिकतर हिंदू देवी-देवताओं की ऐसी तस्वीरें भी देखी जा सकती हैं, जिनमें उनका चित्रण बेहद आपत्तिजनक रूप से किया गया है। ‘माँ काली’ के सम्बन्ध में भी इस युवक की वॉल पर कई घटिया पोस्ट हैं। साथ ही, अभद्रता से चित्रित की गई भगवान गणेश की तस्वीरें भी शेयर की गई हैं।

‘हेट पैट्रोल स्कॉड’ के ट्विटर पर इसी ‘एथीस्ट रॉनी’ की तस्वीर शेयर करते हुए उसके ही नाम से एक बयान लिखा गया है, “हाँ मैं दिमागी तौर पर बीमार, डिप्रेस्ड आदमी हूँ जिसे, औरत बनकर रहना अच्छा लगता है, ताकि मैं महिलाओं के वॉशरूम में जा सकूँ, क्योंकि मैं अब भी उनकी ओर आकर्षित होता हूँ। और हाँ, मैं आर्ट डिग्री पढ़ते हुए 3 विषयों में फेल भी हुआ लेकिन ऑनलाइन मैं साइंस का विशेषज्ञ बनता हूँ।”

यह कथन ‘हेट पैट्रोल स्कॉड’ ने तंज में लिखा है या ये वाकई शुभम बिस्वास का कथन है, इसकी पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता है। मगर, इसी शुभम बिस्वास द्वारा ही शेयर की गई एक पोस्ट में यह कैप्शन लिखा देखा जा सकता है, “समाज मुझे मर्द बनाना चाहता है। लेकिन मैं नहीं बनना चाहता।”

वहीं, एक अन्य पोस्ट भी मौजूद है, जिसमें यही शुभम बिस्वास जीसस, मुहम्मद और कृष्णा पर मीम बनाने को लेकर अपनी बात रखता है। इसमें यह लिखता है, “क्या कोई जीसस, मुहम्मद और कृष्ण, इन तीनों पर मीम (MEME) बना सकता है। ताकि इन तीनों सबसे बड़े धर्मों को एकसाथ आहत किया जा सके?“

बता दें कि ‘हेट पैट्रोल स्कॉड’ द्वारा सोशल मीडिया पर यह ‘ज्ञानवर्धक’ पोस्ट शेयर किए जाने के बाद शुभम ने इसका स्क्रीनशॉट ट्वीट किया है और कहा है, “अगर तुम्हें ये जानकारी मिल पाई है, तो तुम्हारे कनेक्शन बिलकुल अच्छे नहीं हैं।”

मगर यदि हम उसके ही 6 सितंबर के ट्वीट को देखें, तो ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ ग्रुप के साथ शुभम बिस्वास वीडियो कॉल करता दिख रहा है। इस फोटो में उसके नाम पर शुभम के साथ ही ‘पूर्व हिंदू’ लिखा नजर आ रहा है।

‘मैं भक्त हूँ, बुरे से बुरे सपने में भी लिबरल नहीं बनूँगी: गोडसे प्रेमी कहने वाली आरफा खानम को कंगना ने धोया

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को शिवसेना नेताओं से मिल रही धमकियों के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा Y-कैटेगरी सुरक्षा दी गई है। जिसकी पुष्टि करते हुए अभिनेत्री ने केंद्र सरकार और अमित शाह का आभार जताया।

कंगना रनौत के इस ट्वीट पर प्रोपेगेंडा वेबसइट ‘दी वायर’ की ही पत्रकार आरफा खानम ने उन्हें ‘गोडसे प्रेमी’ कहते हुए ‘लिबरल मूल्यों’ पर ज्ञान देने की कोशिश की। जवाब में कंगना रनौत ने उन्हें बताया कि वो उदारवादी नहीं बल्कि ‘भक्त’ हैं।

दी वायर की प्रोपेगेंडा पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने कंगना रनौत का ट्वीट रीट्वीट करते हुए लिखा, “यह उदारवादी मूल्यों की ताकत है। तुम आत्ममुग्ध, घृणा से भरे हुए, बहुलवादी, फ़ासिस्ट समर्थक हो सकते हो, लेकिन फिर भी तुम खुद को एक फासिज़्म से लड़ाई लड़ रहे इंसान के तौर पर ही दिखाना चाहते हो। तुम गोडसे के बड़े प्रेमी हो सकते हो. लेकिन आखिर में गाँधी ही तुम्हें सामाजिक स्वीकार्यता दिलाएँगे।”

आरफा खानम के इस बिन माँगे ज्ञान के जवाब में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने आरफा को जवाब दिया, “आरफा मैम, सालों तक अध्ययन के बाद मैं इस नतीजे पर पहुँची हूँ कि गाँधीवादी और कुछ नहीं बल्कि भगवान राम के ही मूल्यों का बेहद छिछला संस्करण है। खुद गाँधी ने भी स्वीकार किया था कि वह राम राज्य की अवधारणा का ही अनुसरण करते हैं। मैं अपने बुरे से बुरे स्वप्न में भी लिबरल बनने का हौसला नहीं करूँगी। मैं बस एक भक्त हूँ।”

गौरतलब है कि इससे पहले गृह मंत्रालय द्वारा कंगना रनौत को Y-श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने के फैसले पर कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये इस बात का प्रमाण है कि अब किसी देशभक्त आवाज़ को कोई फ़ासीवादी नहीं कुचल सकेगा।

कंगना ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताते हुए कहा कि वो चाहते तो हालातों के चलते उन्हें कुछ दिन बाद मुंबई जाने की सलाह देते। मगर उन्होंने भारत की एक बेटी के वचनों का मान रखा, हमारे स्वाभिमान और आत्मसम्मान की लाज रखी। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर ‘जय हिन्द’ भी लिखा।

बेबाकी के कारण कंगना रनौत से नाराज है ‘लिबरल वर्ग’

यूँ तो कंगना रनौत बॉलीवुड को लेकर अपने नजरिए के कारण अक्सर ही इस इंडस्ट्री के लोगों की नजरों में रहा करती थीं, लेकिन दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से वह पत्रकारिता के लोगों की आँखों में भी चुभने लगी हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कंगना रनौत के मैदान में उतरते हुए एक के बाद एक कर कई तरह के खुलासे होने लगे।

ऐसे में, बॉलीवुड में व्याप्त नेपोटिज़्म पर जब बहस छिड़ी तो इस डिबेट में कई बड़े नाम भी शामिल हो गए। धीरे-धीरे सुशांत सिंह की मौत में ड्रग्स का एंगल निकल आया तो समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ जैसे संस्थान और इसके जैसे ही अन्य लोगों ने भी मानो सुशांत सिंह राजपूत की मौत में आरोपित उनकी पूर्व प्रेमिका रिया चक्रवर्ती की जगह कंगना रनौत को ही निशाने पर ले लिया।

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘दी वायर’ की पत्रकार आरफा खानम ही नहीं बल्कि उनके साथ ही रोहिणी सिंह भी कंगना रनौत को घेरने का विफल प्रयास कर चुकी हैं। सबसे दिलचस्प तो इस पूरे प्रकरण में यह देखना है कि निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता की दुहाइयाँ देते रहने वाले यह तमाम गिरोह कंगना रनौत के मुँह खोलते ही बौखला गए हैं।

इन सभी पत्रकारों, विचारकों, महिला अधिकारों के ध्वजवाहकों के दोहरे चरित्र को अकेले कंगना रनौत ने जगह दिखा दी है। यदि इसी वर्ग से नागरिकता कानून के विरोध-प्रदर्शनों की तख्तियाँ वापस टटोलने के लिए कहा जाए तो वहाँ शायद अभी भी वो पोस्टर कहीं पड़े होंगे, जहाँ कुछ दिनों पहले तक ये फैज को पढ़ते हुए उन्हें गा रहे थे। इन्हीं कुछ तख्तियों में से किसी एक में जरूर लिखा होगा, “बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे, बोल ज़बाँ अब तक तेरी है, तेरा सुत्वाँ जिस्म है तेरा, बोल कि जाँ अब तक तेरी है।”

यह भी कमाल की बात है कि इस गिरोह की समस्या ही यही बन गई कि कंगना बोल रही है। उनका दफ्तर बिना किसी पूर्व सूचना के उजाड़ा जा रहा है। महाराष्ट्र की सत्ता कंगना को खुली धमकियाँ दे रही है। एक मुखर महिला को हरामखोर कह दिया गया। महाराष्ट्र सरकार डीके फासिज्म चरम पर है लेकिन लिबरल गिरोह और प्रोपगेंडाबाज़ गाँधीवाद का पाठ कंगना रनौत को पढ़ा रहे हैं।

काशी-मथुरा की मुक्ति के लिए अखाड़ा परिषद का प्रस्ताव, कहा- बात से नहीं सुलझा मामला तो होगी कानूनी लड़ाई

प्रयागराज में सोमवार (सितम्बर 7, 2020) को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक हुई। इसमें 8 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है काशी और मथुरा की मुक्ति का प्रस्ताव। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इस कार्य में विश्व हिन्दू परिषद का भी सहयोग माँगा है। संगमनगरी में हुई इस बैठक में इस कार्य के लिए सभी पक्षों की सहमति लेने की बात भी कही गई।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में माँग की गई कि अब जब अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन हो गया है, काशी में बाबा विश्वनाथ और मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर को मुक्त कराने की ओर प्रयास किया जाए। बता दें कि बाबा विश्वनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल हैं। बाघंबरी मठ में आयोजित इस बैठक में 13 प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस बैठक में संगम तट पर माघ मास में लगने वाले माघ मेला, प्रयागराज की परिक्रमा और हरिद्वार में कुंभ की तैयारियों से जुड़े प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई गई। हर मुद्दे की धार्मिक और पौराणिक महत्वों पर भी चर्चा की गई। इन प्रस्तावों को पीएम नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भेजा जाएगा। सभी मुद्दों पर निगरानी रखी जाएगी।

प्रस्ताव पास हुआ कि काशी और मथुरा की मुक्ति के लिए रणनीति तैयार की जाए और उसी हिसाब से आगे के क्रियाकलाप हों। कहा गया कि इसके लिए पहले तो बातचीत के जरिए सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन अगर सभी पक्ष राजी नहीं होते हैं तो कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। अखाड़ा परिषद ने सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश में किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की गई और अपराध व कोरोना से निपटने के लिए उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की गई।

रविवार को ही वीडियो जारी कर के महंत नरेंद्र गिरि ने काशी विश्वनाथ मंदिर में ज्ञानवापी मस्जिद के निर्माण को अवैध करार दिया था। उन्होंने ये भी कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि में मस्जिद जबरन बनाई गई है। उन्होंने दोनों स्थलों को हिन्दुओं की आस्था का केंद्र करार देते हुए कहा कि इन्हें जल्द से जल्द मुक्त कराया जाए। संतों ने एक सुर में कहा कि माघ मेले पर रोक न लगे और संस्थाओं पर रोक लगाकर संत-महात्माओं और कल्पवासियों को मेले में स्थान दिया जाए।

ज्ञात हो कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर की नींव रखी थी, तब मंदिर का भूमि पूजन कराने वाले आचार्य पंडित गंगाधर पाठक की बातों में सबसे ज़्यादा उल्लेखनीय था प्रधानमंत्री मोदी से दक्षिणा का निवेदन। आचार्य गंगाधर पाठक ने दक्षिणा में गोहत्या पर पाबंदी और काशी तथा मथुरा की मुक्ति की माँग रख दी थी। उन्होंने पीएम मोदी को अपना यजमान करार देते हुए ये संकल्प कराया था।

तब कठुआ पर बाल्टी भर आँसू और अब जुबैर का समर्थन: बच्चे को गाली देने वाली स्वरा भास्कर का पाखंड

प्रोपेगेंडा वेबसाइट आल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर पर एक बच्ची को ऑनलाइन प्रताड़ित करने के आरोप में FIR दर्ज को गई है। यह जुबैर के साथी प्रतीक सिन्हा सहित पूरे लिबरल गैंग को नागवार गुजरा है। गैंग जुबैर के समर्थन में अभियान चला रहा है। इसे 4 साल के बच्चे को गाली देने वाली स्वरा भास्कर का समर्थन भी मिला है।

स्वरा भास्कर ने मोहम्मद जुबैर के समर्थन में ट्वीट कर उनसे हिम्मत बनाए रखने का कहा है। स्वरा के इसी पोस्ट के बाद यूजर्स की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोग जुबैर पर लगे आरोपों के बाद भी उनके समर्थन में खड़े नजर आए तो कुछ ने स्वरा भास्कर को पाखंडी बताया।

एक यूजर ने स्वरा भास्कर के दो चेहरों की पोल खोलते हुए दो तस्वीरें शेयर की। एक उनके हालिया ट्वीट की जिसमें उन्होंने जुबैर को समर्थन दिया। दूसरी कठुआ रेप के दौरान उनकी प्रतिक्रिया की। क्रिश नाम के यूजर ने लिखा कि स्वरा भास्कर के 2 चेहरे हैं। पहला कठुआ रेप केस में वह प्लेकार्ड लिए दिखती है और दूसरी तरफ एक बच्ची को प्रताड़ित करने वाले का समर्थन करती हैं। यूजर लिखता है कि अब स्वरा अपने पाखंड के माउंट एवरेस्ट पर पहुँच चुकी हैं।

कुछ लोग सोशल मीडिया पर उनकी वह वीडियो भी शेयर कर रहे हैं जिसमें स्वरा भास्कर कसम खाकर कहती हैं कि उन्हें पाकिस्तान में बहुत प्यार मिलता है। वह न्यूयॉर्क, लंदन, पेरिस, इस्तांबुल जैसी बहुत जगह घूमी हैं, लेकिन उन्हें लाहौर के सामने सब फेल लगते हैं।

इसके अलावा एक यूजर पूछता है कि आखिर यह कैसा दोग@#* है कि आज स्वरा भास्कर उस बच्ची के साथ न खड़े होकर, बच्ची का इस्तेमाल करने वाले भेड़िए के साथ खड़ी है।

वहीं एक अन्य यूजर लिखता है, “एक बच्ची को अब्यूज करने वाले के साथ आप खड़ी हैं। वैसे कोई हैरानी भी नहीं हुई। आप हमेशा टुकड़े-टुकड़े गैंग, आतंकवादियों और देश के खिलाफ बोलने वालों के साथ ही खड़ी पाई गई हैं।”

गौरतलब है कि 5 सितंबर को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी थी कि ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। NCPCR के अध्यक्ष ने ट्विटर पर इसकी सूचना देते हुए बताया कि आयोग की ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ के अनुसार, नाबालिग लड़की की ऑनलाइन प्रताड़ना के आरोप में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई।

इससे पहले प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा छोटी बच्ची की तस्वीर सार्वजनिक करने, धमकियाँ देने और टॉर्चर करने के आरोप में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने ट्विटर को नोटिस भेजा था। आयोग ने कहा था कि वह इस मामले में स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और इसके लिए ट्विटर के सीनियर मैनेजर्स को 4 सितम्बर को उपस्थित होना होगा। अब उन्हें 10 दिन का फिर से समय दिया गया है।