कोरोना महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के बाद से आर्थिक संकट से जूझ रहे कुपोषित परिवारों के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बड़ी राहत का ऐलान किया है। राज्य में पोषण की बिगड़ती स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रदेश सरकार ने ऐसे कुपोषित परिवारों, जिनके पास गाय रखने हेतु स्थान हो और जो लोग गौ-पालन के इच्छुक हों, उन्हें गाय देने का सभी जिला प्रशासन को निर्देश जारी कर दिया है।
दरअसल, योगी सरकार ‘माननीय मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ के तहत इस कार्य को करने जा रही है। इसके साथ ही गाय के भरण-पोषण हेतु हर महीने 900 रुपए की धन राशि मुहैया कराई जाएगी। राष्ट्रीय पोषण माह को लेकर लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को यह निर्देश जारी कर दिया है।
7 सितंबर से शुरू होने वाले राष्ट्रीय पोषण माह 2020 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले छ: महीनों में कुपोषण को एक प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा है। इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण का उन्मूलन करना और माताओं के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना है। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कुछ सबसे कुपोषित बच्चों के माता-पिता से भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बहराइच, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी और बाराबंकी जिलों के इस योजना के तहत लाभान्वित होने वाले माता-पिता से बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में भी जानकारी ली।
कुपोषित परिवारों को मिलेगी गाय: मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी
गाय की यह व्यवस्था ‘माननीय मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ के तहत की जाएगी। pic.twitter.com/LdV3vDLsg5
योगी सरकार ने राज्य में पीएम मोदी के पोषण माह की पहल के तहत पोषण अभियान शुरू किया है। पिछले महीने अपने मन की बात संबोधन में, पीएम मोदी ने घोषणा की थी कि सितंबर का महीना पोषण महीने के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक पोषण बैंक की स्थापना करेगी और हर कक्षा में एक पोषण निगरानी नियुक्त करेगी। छात्रों को पोषण कार्ड भी रिपोर्ट कार्ड की तरह मिलेगा।
सीएम योगी ने पोषण अभियान के संबंध में प्रशासन को दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को चिन्हित करके उन्हें समय से पोषण संबंधी सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने निर्देश दिया है कि प्रक्रिया शुरू होने से पहले बच्चों की ऊँचाई और वजन को मापने के लिए एक दिन का अभियान चलाया जाए। अभियान को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने कहा कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया जाएगा। मार्च 2021 में इसका मूल्यांकन किया जाना है। इस योजना के अंतर्गत बच्चों के साथ कुपोषित माँ को भी चिन्हित कर योजनाओं का लाभ देने के लिए कहा गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला स्तर पर कार्यक्रम की साप्ताहिक और मंडलायुक्तों को पाक्षिक समीक्षा करने का निर्देश दिया। समीक्षा की रिपोर्ट विभाग के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेजने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की विभागीय और मुख्य सचिव के स्तर पर मासिक समीक्षा हो।
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास एस. राधा चौहान ने बताया कि राजकीय शोक के कारण इस साल राष्ट्रीय पोषण माह सात सितंबर से शुरू किया जा रहा है। निदेशक राज्य पोषण मिशन कपिल सिंह ने राष्ट्रीय पोषण माह के बारे में एक प्रस्तुतीकरण भी किया। बताया कि पोषण माह की टैग लाइन ‘उत्तम पोषण-उत्तर प्रदेश रोशन’ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुपोषण की समस्या के समाधान के लिए केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा कार्यक्रमों को प्रभावित लोगों तक बेहतर ढंग से पहुँचाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय पोषण माह की सफलता के लिए इसे जन-आन्दोलन बनाना पड़ेगा। कुपोषण से होने वाले नुकसान एवं केन्द्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में जन-जागरूकता पैदा करनी पड़ेगी।
उन्होंने आगे कहा कि इस कार्यक्रम में सभी सम्बन्धित विभागों यथा स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्राम्य विकास, पंचायतीराज, कृषि, उद्यान आदि को सहयोग करना होगा। पोषण कार्यक्रम के साथ ही टीकाकरण कार्यक्रम को भी समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जाए। इन कार्यक्रमों का लाभ बालकों एवं बालिकाओं को बिना भेदभाव के उपलब्ध कराए जाने के संबंध में भी जागरूकता पैदा की जानी चाहिए। उन्होंने किचन गार्डन विकसित करने के लिए प्रेरित व प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया है।
दिल्ली के ओखला फेस-2 इलाके में आम आदमी पार्टी के ऑफिस के पास 3 सितंबर को दो पक्षों में आपसी झड़प का मामला सामने आया। घटना में बिरजू दास और उनका परिवार बुरी तरह घायल हो गया। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि उनके साथ भी मारपीट हुई। पुलिस ने इस केस को ‘पार्किंग को लेकर हुआ विवाद’ बताया है। हालाँकि, बिरजू दास के परिवार का कहना है कि यह पुरानी रंजिश के चलते हमला हुआ और गाड़ी पार्किंग सिर्फ एक बहाना था। घटना में बिरजू दास का पाँव टूट गया है। उनका इलाज फिलहाल एम्स में चल रहा है। संभवत: सोमवार को उनका ऑपरेशन किया जाएगा।
घायल बिरजू दास का बयान
ऑपइंडिया के संज्ञान में जब यह मामला आया। हमने अस्पताल में भर्ती बिरजू दास से पूरा मामला जानने का प्रयास किया। बिरजू ने आपबीती बताते हुए कहा, “वे लोग पहले से हमारी बेटियों के साथ छेड़छाड़ करते थे। हमारी बड़ी बेटी से पहले छेड़छाड़ हुई। फिर छोटी बेटी से भी बदसलूकी हुई। पिछले साल उसे घर में घुस कर मारा भी गया। हमने हर मामले में शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन हर बार बात आई-गई हो गई। इस बार उन्होंने गाड़ी पार्क के बहाने झगड़ा शुरू किया। उनके पास पिस्टल तक थी।”
बिरजू दास का बयान
बिरजू कहते हैं, “उन लोगों की प्लॉनिंग पहले से थी। उन्हें किसी बहाने से बस झगड़ा करना था। इसलिए उन्होंने उस दिन वहीं गाड़ी पार्क की जहाँ मैं करता था। हमने जब उनसे कहा कि भैया गाड़ी हटा लो। हमें गाड़ी पार्क करनी है। इतना सुनते ही उन्होंने पिस्टल निकाल ली और हमसे हाथापाई छीनाझपटी करने लगे। हमारा पाँव तोड़ दिया गया। जब बच्चे हमें बचाने आए, तो उनकी भी पिटाई कर दी।”
बिरजू का आरोप है कि घटना में उनका पाँव तक टूट गया। मगर, पुलिस ने उपयुक्त धाराओं में केस दर्ज नहीं किया। उनका कहना है कि इस केस में सामान्य धाराओं में केस दर्ज हुआ है। जिसके कारण आरोपितों को सिर्फ़ पूछताछ करके छोड़ दिया गया। जबकि वह अस्पताल में हैं। उनकी बेटियों और पत्नी को टाँके आए हैं। उनके पैर का ऑपरेशन भी सोमवार को किया जाएगा।
मामला दर्ज
यहाँ बता दें कि इस केस में 4 सितंबर 2020 को ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में एफआईआर दर्ज हुई है। जाँच की जिम्मेदारी पुलिस अधिकारी अखिलेश कुमार को सौंपी गई है। आरोपितों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 34,506,323,341 के तहत मामला दर्ज हुआ है।
शिकायत में बताया गया है कि उस रात करीब 9-9:30 बजे बिरजू अपनी बाइक खड़े करने गए थे। लेकिन दूसरी गाड़ी देखकर पूछा कि यह गाड़ी किसकी है। जिस पर सललन ने कहा कि गाड़ी नहीं हटेगी। तभी राजा उर्फ कुर्शीद ने पिस्टल निकाल ली। लेकिन बिरजू ने उनकी पिस्टल पकड़ ली। इसके बाद वे सारे लोग उन्हें मारने लगे, जिसकी वजह से वह रोड पर गिर गए। इसके बाद उन्हें नहीं पता कि कौन कहाँ गया। इसी बीच किसी ने 100 नंबर पर फोन मिला दिया और पुलिस ने उन्हें व उनकी पत्नी को एम्स में भर्ती कराके बयान लिखा। एफआईआर में माँग है कि सललन, अंसारी, व राजा उर्फ कुर्शीद पर कानूनी कार्रवाई हो।
एफआईआर में बयान का हिस्सा
पुलिस का बयान
ऑपइंडिया ने इस संबंध में जाँच अधिकारी अखिलेश कुमार को भी संपर्क किया। उन्होंने बताया कि इन लोगों का पार्किंग को लेकर आपस में झगड़ा हुआ था तो पूरे केस में क्रॉस मुकदमे दर्ज हुए हैं। दूसरे पक्ष ने भी मारपीट का केस किया। उन पर भी चोट लगी है। उनकी भी दो एमएलसी बनी है। हालाँकि, बिरजू दास की जो कंप्लेन हैं, उसकी कार्रवाई में 3 गिरफ्तार हुए हैं।
दूसरे पक्ष का आरोप
अखिलेश कुमार बताते हैं कि दूसरे पक्ष ने अपनी शिकायत में कहा है कि 20 दिन पहले उनके पिता की मृत्यु हुई थी और उस दिन वह इसी कारण से मजदूरों के लिए गाड़ी में खाना लेकर जा रहे थे। वे कहते हैं कि दूसरे पक्ष का आरोप है कि बिरजू दास की ओर से यह सब जानबूझकर किया गया है। उन्होंने ही आकर पहले गाड़ी हटाने को बोला और फिर गाली गलौच की। इसी के बाद दूसरे पक्ष ने कहा कि गाड़ी नहीं हटेगी।
बिरजू दास के आरोपों पर जाँच अधिकारी कहते हैं कि उनकी बातें केवल एक पक्ष हैं। इससे निर्णय नहीं लिया जा सकता। मगर, हकीकत जो है वो यही है कि पार्किंग विवाद पर पूरा मामला हुआ। उनकी मानें तो सरकारी कैमरे की फुटेज और आसपास के लोगों से पूछताछ करके मामले की जाँच चल रही है। पुलिस दोनों पक्षों को सुन रही है। बिना जाँच के 307 जैसी धाराएँ नहीं लग सकतीं। पुलिस ने हमसे बातचीत में दोनों पक्षों के बीच हुए पुराने विवाद की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इनके बीच रंजिश पुरानी है।
3 सितंबर को बिरजू दास की बेटियों की आपबीती
इस केस में एक ओर जहाँ बिरजू दास से मारपीट के मामले में दूसरे पक्ष ने खुद को भी पीड़ित बताया है। वहीं, यह गौर करने वाली बात है कि बिरजू दास की बेटियों का इस पूरे केस पर कुछ और ही मत है। अपने पिता के साथ हुई मारपीट के मामले में लड़कियाँ इस पूरी घटना की पृष्ठभूमि उनसे जुड़ी घटनाओं को बताती हैं। छोटी बेटी कहती हैं कि उसे घटना के चार दिन पहले ही धमकी मिल गई थी। आरोपित लड़कों ने उससे कहा था “देखो तुम्हारे साथ क्या करते हैं।”
घटना के समय की वीडियो का स्क्रीनशॉट
बिरजू दास की बड़ी बेटी ऑपइंडिया को बताती हैं, “उस दिन ये सब लोग पहले से उसी जगह मौजूद थे, जहाँ पापा की बाइक खड़ी होती थी। जब मारपीट हुई तो हमें किसी से पता चला कि हमारे पापा का झगड़ा हो गया। हम देखने गए। लेकिन हमने देखा कि पापा तो वहाँ जमीन पर पड़े थे और सललन घुटना रख कर उनकी छाती पर चढ़ा हुआ था। उन्होंने पापा को गाड़ियों के बीच में रखा हुआ था, ताकि दिखे न। लेकिन मेरी नजर वहाँ पड़ गई। हमने देखा पापा अधमरे पड़े हुए थे। उनकी टाँग तोड़ दी गई थी, उन पर चाकू से हमला भी हुआ था। हमने उन्हें हटने को कहा। तभी उस लड़के के भाई और 4-5 लड़कों ने मुझे घेर लिया और कहा- इस बहन की *&%$ मार। उन्होंने मेरी चोटी खींच कर मारा।”
हमले में बिरजू दास की बेटियों और पत्नी को आई चोटें
बिरजू की बड़ी बेटी ज्योति के अनुसार, ये सारे लड़के उन्हीं की झुग्गियों से थे। बस कुर्शीद बाहर से आया था। बिरजू की बड़ी बेटी कहती हैं कि दूसरे पक्ष की ओर से औरतों ने भी उन पर हमला बोला। उन्हें बेरहमी से मारा। ईंट-पत्थर-डंडे चलाए गए। छोटी बहन सोनी को भी मारा और उससे छोटी वाली बहन, जो कुछ बोलती-सुनती नहीं है उसे भी चाकू से हमला किया। हालाँकि उसको बस नोक लगी, जिससे उसके गड्ढा हो गया। उसे टाँके आए हैं। लड़की के अनुसार, घटना में उसके परिवार पर इतनी बुरी तरह हमला हुआ कि उनकी माँ को 6 टाँके आए हैं, एक बहन को 5 टाँके आए हैं। वहीं उससे छोटी बहन को 2-3 टाँके आए हैं।
बिरजू दास की पत्नी और बेटियों को आई चोटें
ज्योति का आरोप है कि जब पुलिस आई तो उन्होंने मामला सुनने की बजाय उलटा उन्हें हड़का दिया। वहीं दूसरे पक्ष ने उन पर मारपीट का आरोप जो लगाया है, वो गलत है। उन्होंने खुद ही खुद को बेल्ट से मारा। यह चीज सड़क चलते लोगों ने भी देखी कि वह खुद ही खुद को मार रहे थे। पुलिस के सामने भी ऐसी ही नाटक किया गया। सललन ने खुद अपने भाई अंसारी का गला दबाया था और खुद ही चिल्लाकर वहाँ लेट गया। जबकि उस समय उनके पापा तो सड़क पर पड़े हुए थे। उनकी हालत ऐसी थी कि 4 लोगों ने उन्हें उठाकर गाड़ी में रखा और अस्पताल लेकर गए।
लड़कियों से छेड़छाड़ और मारपीट कर चुके हैं आरोपित
ज्योति पिछले केस के बारे में बताती हैं कि उनकी छोटी बहन सोनी पर एक साल पहले अंसारी ने ही अपने माँ-बहन-भाई के साथ हमला किया था। वे कहती हैं, “हमले के समय सोनी घर में अकेली थी। तब भी हमने कंप्लेन करवाई थी। लेकिन उस बार समझौता हो गया था, क्योंकि अंसारी की मम्मी ने हमारे पापा के पास जाकर हाथ जोड़ने लगी थी। जिसकी पापा ने रिकॉर्डिंग भी की। लेकिन झगड़े वाले दिन दूसरे पक्ष ने उस दिन की घटना की रिकॉर्डिंग व उससे पहले की सारी रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी।”
ज्योति बताती हैं, “राजा उर्फ कुर्शीद मेरे पीछे काफी समय से पड़ा हुआ था और मुझसे शादी के लिए कहता था। जबकि वह खुद पहले से शादीशुदा है। लेकिन तब भी मुझसे कहता था, ‘मैं उसे भी रखूँगा और तुझे भी रखूँगा।’ इस पर भी पापा ने कुर्शीद के ख़िलाफ़ केस किया था। उस समय भी समझौता हुआ। फिर सोनी के साथ घटना घटी और कुछ दिन में उससे मारपीट हो गई। अब चौथी बार यह सब हुआ।”
ज्योति बताती हैं कि राजा ने उन्हें धमकी दी हुई थी। वह कहता है, “मैं तेरे परिवार को वैसे भी नहीं छोड़ूँगा।” उन्हें नहीं पता था कि वो सच में ऐसा कुछ कर देगा। वह बताती हैं कि ये लोग आपराधिक प्रवृति के हैं। एक बार साईं संध्या में भी इन्होंने कुछ अन्य लोगों के साथ मिल कर गोली चला दी थी और दो भाइयों को मारा भी था। इस केस में अब भी एक आरोपित जेल में बंद है जबकि सललन निकल आया।
पिछले साल दर्ज मामले में एफआईआर का हिस्सा
छोटी बेटी ने डर से छोड़ी रेगुलर पढ़ाई
बिरजू दास की छोटी बेटी ने जब ऑपइंडिया से बात की। तो उसने भी कई चौंकाने वाली बातें बताई। सोनी ने कहा कि उसके साथ यह सब इतनी बार हुआ है कि उसने डर कर स्कूल जाना भी छोड़ दिया और अब ओपन से पढ़ाई करती है। उसे कोचिंग जाते वक्त भी ये लोग अक्सर परेशान करते थे जिसकी वजह से उसने अपनी माँ को बताया भी था। इससे पहले जब उसके साथ छेड़खानी और मारपीट हुई थी, तब वह इतना घबरा गई थी कि महिला आयोग में शिकायत के बाद उसे 10 दिन तक घर से अलग रखा गया।
सोनी आपबीती सुनाते हुए कहती हैं कि इस घटना के घटने से पहले उनके साथ गली में आते-जाते छेड़छाड़ होती थी। अफसेन, इमरान और रियाज मिल कर छेड़ते थे और जिस अंसारी ने आज पापा पर हमला किया है, उसी ने उन्हें घर में अकेला पाकर अपने भाई-बहन-माँ के साथ मारा था। मगर तब समझौता हो गया था क्योंकि वह भी नाबालिग था। हालाँकि उसने तब भी धमकी देते हुए कहा था, “मेरे भाई (सल्लन) को छूटने दे, तब देख तेरे परिवार का क्या करता हूँ।” लेकिन तब सोनी ने इतना गौर नहीं किया।
आगे वे कहती हैं, “पर मैं एक हफ्ते अपने घर से अलग रही थी, ताकि कोई खतरा न हो। मुझे लगा जब घर में घुस कर हमला कर सकते हैं तो कुछ भी हो सकता है, इसलिए मैं चली गई और 10 दिन बाद लौटी। जब वापस आई तो एक महीने बाद उसका भाई छूट गया। इन लोगों ने हमारे पापा के ड्राइवर को भी मारा। फिर पापा ने केस किया। जब पुलिस वाले उठा कर ले गए तो पहले कहा कि मैंने नहीं मारा। लेकिन बाद में स्वीकार कर लिया कि उसे लगा था ड्राइवर हमारा रिश्तेदार है। इस मामले में भी समझौता हुआ था।
सोनी के अनुसार, “आए दिन कुछ न कुछ होता देख मैंने अपना स्कूल छोड़ दिया। मुझे लगा कुछ भी हो सकता है। इस बीच मेरी कंपार्टमेंट भी आई। मगर, स्कूल छोड़ने का कारण इन लोगों का डर ही था। मैंने सोचा इन लोगों के चक्कर में वैसे भी मेरी जिंदगी बेकार हो रही है। इसलिए मैंने ओपन से फॉर्म भरा। लेकिन इन्होंने तब भी मेरा पीछा नहीं छोड़ा। कोचिंग जाते हुए परेशान करने लगे। अंसारी के भाई सललन ने तब मुझे फ्रेंडशिप के लिए कहना शुरू किया “
सोनी के मुताबिक वह कहता था, “मैं तुझे पसंद करता हूँ, मुझसे दोस्ती कर ले। तुझे गली में सब दिखते हैं, मैं ही नहीं दिखता।” लेकिन उन्होंने कहा, “बाकी सबको मैं जानती हूँ, तुम लोगों से मुझे फ्रेंडशिप तो क्या बात करना भी नहीं पसंद। इसके बाद वो मेरा पीछा करने लगे। डर कर मैं कुछ दिन कोचिंग भी नहीं गई। फिर इस हालिया घटना से चार दिन पहले सललन ने मुझे पूछा कि आखिरी बार पूछ रहा हूँ तू मुझे फ्रेंडशिप करेगी कि नहीं। जिस पर मैने फिर मना कर दिया और उसने यह सुन कर कहा, ‘देख मैं तेरे साथ क्या करता हूँ।’ और देखो चार दिन बाद उसने क्या किया।”
मारपीट की घटना से पहले की बात बताते हुए सोनी कहती हैं, “मेरे पीछे 4 लड़के पड़े हुए थे और इधर-उधर हाथ लगाने की कोशिश करते थे। इसके बाद हालिया घटना में भी मुझे घेरने की कोशिश हुई। मुझ पर ईंट पत्थर चलाए गए। मैंने भागने की कोशिश की। लेकिन मेरे पाँव में चोट आ गई थी।” वह कहती हैं कि एक ने तो मुझे पीछे से आकर पकड़ भी लिया था। लेकिन मैंने उसे जब मारा तो उसने मुझे छोड़ा। सोनी का कहना है कि अगर उस दिन वह वहाँ से नहीं भागतीं तो उनके साथ कुछ भी हो सकता था।
पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट है बिरजूदास का परिवार
यहाँ बता दें कि बिरजू दास की बेटियाँ पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि पुलिस उनकी बात पर यकीन नहीं कर रही है। उन्होंने जब अपनी बातें बताईं तो उनसे कहा गया, “कहानी मत गढ़। झुग्गी में क्या तू ही खूबसूरत लड़की है जो बस तेरे पीछे आएगा वो?” सोनी पूछती हैं क्या किसी लड़की को खूबसूरत होने न होने पर ऐसे कहा जाना चाहिए?
वह कहती हैं कि इस केस में उनके पापा पर गोली चलाने के लिए दूसरे पक्ष द्वारा पिस्टल निकाली गई थी। लेकिन चूँकि पापा ने पिस्टल पकड़ ली तो उन पर उलटा इल्जाम लग गया। सोनी के अनुसार, बयान में यह लिख दिया गया था कि बिरजू ने भी गोली चलाई,जबकि यह झूठ था। इसलिए उन्होंने शिकायत में से यह सब हटाने को कहा और तभी साइन किया।
बेटियों के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से उन्हें खाने-पीने की बहुत दिक्कत है। अब उनके पापा के पैर के ऑपरेशन के लिए पैसा चाहिए। उनकी चिंता है कि यह सब कैसे होगा। इस पर पुलिस का ऐसा रवैया उन्हें बहुत दुखी करता है।
वे दुखी मन से पूछती हैं, ”अगर हमारा किसी से बात करने का मन नहीं है, तो हम कैसे कर लें। लड़कियाँ जब किसी के साथ जाती हैं, तो आपसी सहमति होती है। लेकिन जब लड़की राजी नहीं है, तो ये सब करना जरूरी होता है क्या? उन लोगों ने मुझे यहाँ तक कहा है, ’जो तू इतनी खूबसूरती लेकर घूमती है न, इस पर ऐसा दाग लगाऊँगा कि तू कभी सोच भी नहीं सकती है।’ मैंने तब भी कुछ नहीं कहा। सिर्फ़ मम्मी को बताया, पापा को वो भी नहीं। क्योंकि वो पढ़ाई रुकवा देते। आज मैं ओपन से पढ़ रही हूँ। लेकिन अब आगे ऐसा तो नहीं हो सकता न कि मैं इन लोगों के चक्कर में बस घर में बैठूँ।”
सीसीटीवी फुटेज
बता दें, इस घटना की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई हैं। वीडियो में पूरा झगड़ा कैद हुआ है। लड़कियों पर लाठी-डंडे से हमले की घटना इसमें साफ देखी जा सकती है। इसके अलावा जगह पर कई लोगों की भीड़ दिख रही है। जो संभवत: बिरजूदास और उनके परिवार पर हमला बोल रहे हैं। इस बीच कुछ महिलाओं में भी आपसी झड़प देखने को मिल रही हैं। ज्योति और सोनी का कहना है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने ही उन पर हमला बोला। उन लोगों के पास कुछ नहीं था। लाठी-डंडे भी दूसरे पक्ष ने चलाए। हालाँकि, पुलिस के मुताबिक, दूसरे पक्ष से भी मारपीट हुई है।
दिल्ली में सुदर्शन वाहिनी के उपाध्यक्ष सागर मलिक कर रहे इंसाफ की माँग
ओखला फेस 2 में 3 सितंबर को घटी इस घटना के मद्देनजर सुदर्शन वाहिनी के उपाध्यक्ष सागर मलिक भी इस मामले में बिरजूदास के परिवार के लिए इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जब पहले मामले (छेड़खानी) में शिकायत दर्ज हुई थी। उस समय तीन (अफसेन, रियाज और इमरान) लोग गिरफ्तार हुए थे। जब आरोपित छूटा तो ये घटना घटी। आज भी पुलिस ने गैर जमानती धाराएँ लगा दी हैं। टाँग टूठने के बावजूद अंग भंग का मुकदमा नहीं दर्ज किया गया।
इसके अलावा घटना जानते हुए और परिवार से बात करने के बाद वह मानते हैं कि यह हत्या के प्रयास की कोशिश थी। बावजूद इसके धारा 307 इसमें शामिल नहीं की गई। उनका भी यह कहना है कि 3 सितंबर को जो भी हुआ वह पुरानी रंजिश के चलते हुआ है। क्योंकि पुराने केस में आरोपित लड़के जेल गए थे। इसलिए यह सब सुनियोजित ही लग रहा है, परिवार पर बहुत बुरी तरह हमला बोला गया है। हमले में चाकू-छूर्रियों को भी इस्तेमाल हुआ है।
इंटरनेट पर भी वायरल हुआ मामला
उल्लेखनीय है कि इस केस को लेकर सोशल मीडिया पर भी उचित कार्रवाई की माँग उठ रही है। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल उमराँव ने घटना का जिक्र करते हुए अपने ट्विटर पर लिखा है, “संसद से 12KM दूर ओखला में हिंदू परिवार ने बेटी के छेड़खानी पर पुलिस में शिकायत की तो समुदाय ने परिवार पर हमला कर पिता के पैर तोड दिए और माँ का यह हाल कर दिया पर देश की सबसे भ्रष्ट दिल्ली पुलिस कार में अकेले व्यक्ति का चालान करने व पैसे लेकर आरोपियों को बचाने में व्यस्त है। “
संसद से 12KM ओखला में हिंदू परिवार नें बेटी के छेड़खानी पर पुलिस में शिकायत की तो समुदाय नें परिवार पर हमला कर पिता के पैर तोड दिए और मां का यह हाल कर दिया पर देश की सबसे भ्रष्ट @DelhiPolice कार में अकेले व्यक्ति का चालान करने व पैसे लेकर आरोपियों को बचाने में व्यस्त है। @CPDelhipic.twitter.com/XzsuPIYJjo
इसी प्रकार सुदर्शन चैनल के रिपोर्टर गौरव मिश्रा भी इस केस को लेकर लगातार ट्वीट कर रहे हैं। उन्होंने बिरजू दास की बेटी की वीडियो साझा की है। इसमें लड़की बता रही है कि आरोपित अभी भी सरेआम घूम रहे हैं और उन्हें धमकियाँ दे रहे हैं।
मैंने इन जेहादियों के डर से 3 सालों से स्कूल जाना तक छोड़ दिया,सल्लन मुझसे ज़बरन शादी करना चाहता था मुझे जान से मारने की धमकियां देता था,अखोला के जे.जे कॉलोनी में डर के साये में जी रहा है ये हिंदू परिवार पिता अस्पताल में है और बेटियां न्याय के इंतज़ार में है। pic.twitter.com/NxUfUE2O03
इसके अलावा एक अन्य ट्वीट में गौरव मिश्रा लिखते हैं, “दिल्ली के अखोला में एक हिंदू परिवार ने अपने बेटी के छेड़छाड़ से परेशान होकर पुलिस में कंप्लेंट क्या करवाई। जेहादियों ने झुंड बनाकर घर के ऊपर हमला कर दिया, पिता के पैर तोड़ दीए जो अब रॉड लगाने पर जॉइंट हो पाएगा,आख़िर दिल्ली में कब तक हिंदुओं के घरों पर होते रहेंगे हमले?”
दिल्ली के अखोला में एक हिंदू परिवार ने अपने बेटी के छेड़छाड़ से परेशान होकर पुलिस में कंपलेंट क्या करवाई जेहादियों ने झुंड बनाकर घर के ऊपर हमला कर दिया, पिता के पैर तोड़ दीये जो अब रॉड लगाने पर जॉइंट हो पायेगा,आख़िर दिल्ली में कब तक हिंदुओं के घरों पर होते रहेंगे हमले? pic.twitter.com/kyM3mIZxIk
पिछले हफ्ते हैदराबाद में कोर्ट के आदेश को ताक पर रखते हुए सैकड़ों लोग मुहर्रम के जुलूस में शामिल हुए। कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में न सिर्फ सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं, बल्कि लोगों ने चेहरे पर मास्क जैसे जरूरी बातों की भी अनदेखी की। बड़ी संख्या में लोग पुराने हैदराबाद में एकत्रित हुए और ‘बीबी का आलम’ जुलूस निकाला। इस दौरान ज्यादातर लोग बिना मास्क के देखे गए।
उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी को देखते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट ने मुहर्रम के दिन हैदराबाद के पुराने शहर में जुलूस निकालने के लिए इजाजत नहीं दी थी। इसके बावजूद यहाँ पर लोगों ने भारी संख्या में जुलूस निकाला।
हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए, सैकड़ों की संख्या वाला यह जुलूस डाबेरपुरा से शुरू हुआ और संप्रदाय विशेष बहुल क्षेत्र चारमीनार, गुलजार हुज, पुरानी हवेली और दारुलशिफा से गुजरते हुए चर्मघाट पर खत्म हुआ।
अपने आदेश में, तेलंगाना हाई कोर्ट ने मुहर्रम के जुलूस के लिए न केवल अनुमति देने से इनकार किया था, बल्कि आदेश का उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में पुलिस आयुक्त को किसी भी उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुहर्रम जुलूस निकालने की माँग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा था, “अगर हम जुलूस निकालने की अनुमति दे देंगे तो इससे आराजकता फैलेगी और फिर एक समुदाय विशेष को कोरोना फैलाने के नाम पर लक्षित किया जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहेगा।”
हालाँकि, ऐसा लगता है कि तेलंगाना पुलिस ने संप्रदाय विशेष के समूहों को एक जुलूस आयोजित करने में सहायता किया है, क्योंकि खुद शहर के पुलिस आयुक्त ने ‘आलम’ का जुलूस निकालने की अनुमति दी थी। भले ही पुलिस आयुक्त ने समुदाय से पुलिस के साथ सहयोग करने और मार्ग पर इकट्ठा न होने की अपील की थी, लेकिन शहर की पुलिस ने रविवार को जुलूस को सुरक्षा दी।
बता दें कि राज्य में मुहर्रम के जुलूस की अनुमति देने का निर्णय टीआरएस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राज्य में गणेश चतुर्थी जुलूसों को प्रतिबंधित करने के एक हालिया आदेश के परिपेक्ष्य में आता है।
तेलंगाना सरकार ने अपने आदेश में कोरोना वायरस महामारी का हवाला देते हुए राज्य भर में गणेश उत्सव और मुहर्रम के जुलूसों को सार्वजनिक रूप से मनाने से मना कर दिया था। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि राज्य में गणेश उत्सव के लिए कोई पंडाल, सामूहिक सभा, जुलूस, लाउडस्पीकर या फिर डिस्को जॉकी की अनुमति नहीं दी जाए।
इसी तरह से मुहर्रम के दौरान ‘आलम’ का जुलूस निकालने से मना किया गया था।
इससे पहले टीआरएस सरकार ने हैदराबाद में हिंदुओं को गणेश जुलूस निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, हालाँकि, पिछले सप्ताह संप्रदाय विशेष के लोगों को शहर में मुहर्रम का जुलूस निकालने की अनुमति दे दी। हैदराबाद पुलिस ने हैदराबाद के पुराने शहर में संप्रदाय विशेष को ‘अलाम’ का जुलूस निकालने की अनुमति दी थी।
हाई कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद संप्रदाय विशेष समूहों को जुलूस निकालने की अनुमति देने और गणेश चतुर्थी के दौरान हिंदुओं को जुलूस से मना करने के फैसले ने अब राज्य में एक बहस छेड़ दी है। केसीआर की अगुवाई वाली राज्य सरकार की अब अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की घिनौनी हरकत के लिए आलोचना हो रही है।
भारत में माँ काली के लिए ईरानी-कनाडाई कॉमेडियन अर्मिन नवाबी ने ‘सेक्सी’ शब्द का प्रयोग किया था। इसको लेकर विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) ने शिकायत दर्ज कराई है। नवाबी ‘एथेइस्ट रिपब्लिक’ का संस्थापक है और खुद को नास्तिक बताता है। उसने सोशल मीडिया पर माँ काली का अपमान करते हुए उन्हें ‘सेक्सी’ बताया था।
विहिप ने महाराष्ट्र के डीजीपी और मुंबई के पुलिस कमिश्नर को लिखे औपचारिक शिकायत-पत्र में कहा कि अर्मिन नवाबी ने माँ काली की तस्वीर शेयर करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की है, जिनकी हिन्दुओं द्वारा पूजा की जाती है। विहिप ने कहा कि इससे हिन्दुओं की आस्था को चोट पहुँची है। संस्था ने ट्विटर के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की माँग की, क्योंकि उन्होंने इस ट्वीट पर कोई एक्शन नहीं लिया और तमाम शिकायतों के बावजूद इसे नहीं हटाया।
साथ ही विहिप ने माँग की है कि ट्विटर के पास एक नीति होनी चाहिए, जिसके हिसाब से वो ऐसे कंटेंट्स को फ़िल्टर कर सके जो धर्म के खिलाफ हों। संस्था ने कहा कि इस ट्वीट का उद्देश्य हिन्दुओं को भड़का कर समाज में शांति को भंग करना है। चूँकि इसे सोशल मीडिया पर डाला गया है, इसीलिए पूरी दुनिया में लोगों ने इस ट्वीट को देखा। विहिप ने अर्मिन नवाबी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
वीएचपी के प्रवक्ता विनोद बंसल ने अपने ट्वीट में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्री और भारत में मौजूद ईरान और कनाडा के राजदूत को भी टैग किया है। उन्होंने बताया है कि शिकायत की कॉपी कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी को भी भेजी गई है।
अर्मिन नवाबी ने ट्विटर पर माँ काली की एक तस्वीर ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, “मैं हिन्दू धर्म से प्यार करने लगा हूँ। मुझे पहले नहीं पता था कि तुम्हारी देवियाँ इतनी कामुक हैं। फिर कोई और धर्म क्यों अपनाएगा?” जिस तरह से उसने अपने ट्वीट में देवी काली को चित्रित किया है उस पर कई लोगों ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह नास्तिकता नहीं, बल्कि बलात्कारी मानसिकता को दर्शाता है।
गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले अर्मिन नवाबी, जो एक पूर्व ईरानी मुस्लिम और AtheistRepublic.com (एथीस्ट रिपब्लिक) का संस्थापक है, ने संप्रदाय विशेष की पाक किताब कुरान पर थूककर उसे फाड़ दिया था और साथ ही लोगों से अपनी निजी जिम्मेदारी पर ऐसा ही करने की सलाह भी दी थी। लोगों का कहना है कि अर्मिन नवाबी अब हिन्दुओं को सिर्फ इसलिए निशाना बना रहा है क्योंकि वह कुरान को अपमानित करने के बाद संप्रदाय विशेष का ध्यान भटकना चाहता है।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया चकवर्ती पर शिकंजा कसता जा रहा है। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) इस मामले में ड्रग्स एंगल की पड़ताल कर रही है। इंडिया टुडे के अनुसार एनसीबी की क्राइम रिपोर्ट में बताया गया है कि रिया न केवल ड्रग्स का इस्तेमाल करती थी, बल्कि इसे खरीदने और बेचने में भी लिप्त थी।
इस मामले में रिया के भाई शौविक चकवर्ती और सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुएल मिरांडा को एनसीबी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। शनिवार (5 सिंतबर 2020) को दोनों को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों को 9 सितंबर तक एनसीबी की हिरासत में भेजने का निर्देश दिया।
बताया जा रहा है कि रविवार को एनसीबी रिया और शौविक को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर सकती है। यह बात पहले ही सामने आ चुकी है कि रिया के कहने पर ड्रग्स खरीदने की बात शौविक कबूल चुका है। ड्रग्स का पेमेंट रिया के क्रेडिट कार्ड से करने की बात भी सामने आई है। सैमुएल भी सुशांत के घर के लिए ड्रग्स खरीदने की बात कबूल कर चुका है।
रिया चक्रवर्ती के व्हाट्सएप चैट से ड्रग्स खरीदने, उसका इस्तेमाल करने और बेचने की बात सामने आई है। चैट में जिस तरह की ड्रग्स का ज़िक्र है वह एनडीपीएस एक्ट के दायरे में आता है। प्रथम दृष्टया इस मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)/22/27/28/29 का उल्लंघन नजर आता है।
We will be asking her (actor Rhea Chakraborty) to join the investigation, and maybe to some other people as well: Mutha Ashok Jain, Deputy DG, South-Western Region, NCB in Mumbai https://t.co/iXO16p360n
एनसीबी के डिप्टी डीजी (दक्षिण-पश्चि) एम. अशोक जैन ने इस मामले में रिया से पूछताछ के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि रिया सहित कुछ और लोगों को बुलाया जा सकता है।
इससे पहले शनिवार की सुबह सीबीआई की टीम बांद्रा स्थित सुशांत सिंह राजपूत के घर पहुँची थी। एम्स की फोरेंसिक टीम भी साथ थी। इस दौरान सुशांत सिंह की बहन मीतू सिंह, सिद्धार्थ पिठानी, केशव और बावर्ची नीरज भी मौजूद थे। सुशांत सिंह के आवास पर क्राइम सीन को रिक्रिएट किया गया था और इसके आधार पर सुराग खोजने का प्रयास किया गया।
बता दें, इससे पहले सुशांत केस की जाँच में जुटी NCB ने ड्रग तस्कर कैजान इब्राहिम को गिरफ्तार किया था। यह इस मामले में जाँच एजेंसी द्वारा पाँचवी गिरफ्तारी थी। इसके अलावा रिपब्लिक टीवी का दावा है कि उनके स्टिंग में एक ड्रग तस्कर ने इस बात को स्वीकार किया है कि बॉलीवुड हस्तियों का पार्टियों पर ड्रग लेना बेहद आम बात है। अपने दावे के साथ उन्होंने स्टिंग की टेप भी जारी की है। इसमें तस्कर को कहते सुना जा सकता है कि बॉलीवुड सितारे अक्सर सफेद पदार्थ, कोकीन और हशीश ही लेते हैं।
भारत और चीन के बीच जारी तनातनी के बावजूद भारतीय सेना के जवान 0 डिग्री तापमान में 3 सितंबर, 2020 को फँसे 3 चीनी नागरिकों की मदद करने और मानव धर्म निभाने से पीछे नहीं हटे। मुसीबत में फँसे चीनी नागरिकों के लिए भारतीय सैनिक एक वरदान बनकर आए और उन्हें मौत के मुँह में जाने से बचाया। हमारी सेना ने हमेशा की तरह एक बार फिर शांति, सौहार्द्र और इंसानियत की मिसाल पेश की है।
#BREAKING: Indian Army rescues Chinese citizens in North Sikkim. Indian Army extended a helping hand to 3 Chinese citizens who lost their way in Plateau area of North Sikkim at an altitude of 17,500 feet on 3 Sept. 2020. (Even amidst such bitter border standoff, humanity shown) pic.twitter.com/URiErSUheW
दरअसल, उत्तरी सिक्किम में 17,500 फीट की ऊँचाई पर 3 चीनी नागरिक फँस गए थे। जहाँ जीरो डिग्री से भी कम तापमान के कारण सभी की जान मुश्किल में आ गई थी। इनकी दिक्कतों को समझते हुए भारतीय सेना के जवान तुरंत वहाँ पहुँचे। इन नागरिकों में 2 पुरुष और 1 महिला शामिल थी। भारतीय सेना के जवानों ने चीन से विवाद को दरकिनार रखकर इंसानियत को ऊपर रखा और इन चीनी नागरिकों को हर संभव मदद मुहैया कराई।
Indian Army rescued 3 Chinese nationals who lost their way in North Sikkim’s plateau area at 17,500 ft altitude on 3 Sept & provided medical assistance incl oxygen, food & warm clothes. Army also gave them appropriate guidance after which they returned to their destination: Army pic.twitter.com/can1mjcrSQ
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सेना ने कहा कि 3 सितंबर, 2020 को नॉर्थ सिक्किम के पठारी इलाकों में 17,500 फीट की ऊँचाई पर ये तीनों चीनी नागरिक रास्ता भटक गए थे। इनकी परेशानी को देख भारतीय सेना के जवानों ने उन्हें बचाने के लिए चिकित्सा सहायता, ऑक्सीजन, खाना और गर्म कपड़े दिए। इतना ही नहीं, सेना ने उन्हें उनकी मंजिल पर पहुँचने के लिए उचित रास्ता बताया और मार्गदर्शन किया।
वहीं चीनी नागरिकों ने अपनी त्वरित सहायता करने के लिए भारत और भारतीय सेना का आभार व्यक्त किया।
कोरोना वैश्विक महामारी की वजह से इस बार संसद का मॉनसून सत्र देर से शुरू हो रहा है। हालात देखते हुए इस सत्र में प्रश्नकाल स्थगित करने का फैसला किया गया है। इस फैसले से पहले सरकार ने सभी दलों से मशविरा भी किया था। लेकिन टीएमसी के सांसद से लेकर कॉन्ग्रेस के ट्रोल तक अब इस पर प्रोपेगेंडा फैलाने में लगे हैं। मीडिया गैंग के सदस्य भी इसमें शामिल हैं।
पर हकीकत यह है कि ऐसा न तो पहली बार हुआ है और न सरकार ने विपक्ष की राय जाने बिना यह फैसला किया है। एक सत्य यह भी है कि बीते 5 साल में संसद में प्रश्नकाल का 60 फीसदी वक्त विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ बर्बाद भी हुआ है।
इस बार मॉनसून सत्र की शुरुआत 14 सितम्बर को होगी। इसका समापन 1 अक्टूबर को प्रस्तावित है। लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक दो पाली सुबह 9 से 1 बजे और दोपहर 3 से 7 बजे शाम तक संसद चलेगी। पूरे सत्र में कोई छुट्टी नहीं होगी।
The hypocrisy of Congress, TMC and Left parties in opposing the cancellation of the ‘Question Hour’ in the upcoming Monsoon session of the Parliament is totally exposed.
शनिवार एवं रविवार को भी संसद की कार्यवाही जारी रहेगी। कोरोना के कारण उपजे हालत को देखते हुए प्रश्नकाल को स्थगित रखा गया है। इस दौरान सिर्फ गैर तारांकित (Unstarred) प्रश्न ही उठाए जाएँगे।
प्रश्नकाल के निलंबन की कॉन्ग्रेस, तृणमूल कॉन्ग्रेस और भाकपा सहित कई विपक्षी दलों के नेता आलोचना कर रहे हैं। इनका आरोप है कि सरकार कोरोना महामारी के नाम पर ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘संसद को एक नोटिस बोर्ड’ बनाने की कोशिश कर रही है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सबसे पहले इस पर सवाल उठाया और उसके बाद विपक्ष के और नेताओं ने भी इसमें सुर मिलाया।
साभार: PRS Legislative Research
ऐसा नहीं है कि संसद का प्रश्नकाल पहली बार स्थगित किया गया है। इससे पहले भी कई मौके ऐसे आए हैं जब प्रश्नकाल नहीं चला है। 1962, 1975, 1976, 1991, 2004 और 2009 में विभिन्न कारणों से राज्यसभा का प्रश्नकाल रद्द किया गया था।
इस बार के प्रश्नकाल नहीं होने पर सिर्फ तृणमूल कॉन्ग्रेस को छोड़कर सभी दल सहमत थे। भले ही प्रश्नकाल को रद्द किए जाने के बाद बवाल मचाया जा रहा हो, लेकिन सच यह भी है कि पिछले 5 साल में संसद का प्रश्नकाल 60 फ़ीसदी से अधिक वक्त हंगामे, रिकॉर्ड देखने और अन्य कार्यों की वजह से जाया हुआ है।
राज्यसभा सचिवालय के अनुसार 2015 से 2019 के दौरान कुल प्रश्नकाल का 40 फ़ीसदी वक्त ही इस्तेमाल किया गया है। 5 साल की अवधि में राज्यसभा ने 332 बैठकें हुई। हर दिन 1 घंटे का प्रश्नकाल उपलब्ध होता है, लेकिन केवल 133 घंटे और 17 मिनट का ही उपयोग प्रश्न पूछने और जवाब सुनने के लिए किया गया है।
सरकार की तरफ से कहा गया है कि प्रश्नकाल को स्थगित करने का निर्णय संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा दोनों सदनों के अधिकारियों को सूचित करने के बाद लिया गया है। सरकार ने राजनीतिक दलों से परामर्श किया था और व्यापक सहमति थी। इस फैसले के पीछे मंशा यह थी कि सदस्य कम समय के लिए दिल्ली में रहे और अपना कार्य पूरा कर अपने संसदीय क्षेत्र में लौट सके। केवल टीएमसी इसके खिलाफ थी।
There will be no Question Hour during the upcoming two-day monsoon session of the West Bengal Assembly due to shortage of time and the ongoing #COVID19 situation: Biman Banerjee, Speaker, West Bengal Legislative Assembly
लेकिन संसद के मॉनसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल को स्थगित करने पर हंगामा कर रही तृणमूल कॉन्ग्रेस का दोहरा रवैया भी सामने आ चुका है। एक तरफ पार्टी बीजेपी के खिलाफ हमला कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में उसकी अपनी सरकार ने भी इसी रास्ते का अनुसरण किया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने शुक्रवार (सितंबर 4, 2020) को बताया कि आगामी दो-दिवसीय मॉनसून सत्र में समय की कमी और कोरोना की स्थिति की वजह से कोई प्रश्नकाल नहीं होगा।
MPs required to submit Qs for Question Hour in #Parliament 15 days in advance. Session starts 14 Sept. So Q Hour cancelled ? Oppn MPs lose right to Q govt. A first since 1950 ? Parliament overall working hours remain same so why cancel Q Hour?Pandemic excuse to murder democracy
— Derek O’Brien | ডেরেক ও’ব্রায়েন (@derekobrienmp) September 2, 2020
बता दें कि इससे पहले मोदी सरकार पर ‘लोकतंत्र की हत्या’ का आरोप लगाते हुए टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कई सारे ट्वीट किए थे। डेरेक ने ट्वीट किया, “सांसदों को प्रश्नकाल के लिए अपने प्रश्न 15 दिन पहले जमा करने होंगे। संसदीय सत्र 14 सितंबर को शुरू होगा। इसलिए प्रश्नकाल स्थगित? विपक्ष के सासंदों ने सरकार से सवाल करने का अधिकार खो दिया है। 1950 के बाद पहली बार? संसद का सारे कामकाज का समय एक जैसा रहता है, तो फिर प्रश्नकाल रद्द क्यों किया? लोकतंत्र की हत्या के लिए महामारी का बहाना।”
This is shocking!
Afraid of being questioned over its handling of the pandemic, the Modi govt is cancelling question hour from the Parliament session.
A brazen move towards dictatorship. They must NOT be allowed to do this!
कॉन्ग्रेस ट्रोल साकेत गोखले ने भी इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए फैसले को मोदी सरकार का खतरनाक कदम बताया। उसका कहना था कि सरकार ने कोरोना, पीएम केयर्स, और अर्थव्यवस्था पर उठने वाले सवालों से बचने के लिए ऐसा किया है।
The cancelling of Question Hour in the upcoming Parliament session is a brazen move by Modi govt. to prevent questions regarding Covid-19 handling, PM CARES, China, GDP, the economy etc.
साकेत गोखले ने इसके लिए ऑनलाइन पिटीशन साइन करवाने का भी अभियान चलाया। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी कहा कि सरकार डरी हुई है। लेकिन बंगाल के आगामी विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल नहीं होने पर इन्होंने चुप्पी साध रखी है।
There will be no Question Hour during upcoming two-day monsoon session of the West Bengal Assembly due to shortage of time and the ongoing COVID19 situation: Biman Banerjee, Speaker, West Bengal Legislative Assembly. What Delhi does yday, Kolkata does today?
चूँकि यहाँ पर उनका प्रोपेगेंडा फिट नहीं बैठ रहा था, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। कॉन्ग्रेस, टीएमसी और अन्य लेफ्ट पार्टियों के दोहरे रवैये को देखना हो, तो इनके द्वारा शासित राज्यों में हुए हालिया विधानसभा सत्र पर गौर करने की जरूरत है। इनके द्वारा शासित पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र और केरल में हाल ही में विधानसभा सत्र हुए, जिसमें प्रश्नकाल नहीं रखा गया था और अब पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा सत्र में भी नहीं रखा गया है।
ऐसा कई बार देखने को मिला है कि केंद्र सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाने वाली पार्टियाँ अपने सत्ता वाले राज्य में भी वही नीतियाँ लागू करती नजर आई। यह इन पार्टियों के दोहरे मानदंड के अलावा और कुछ नहीं है।
क्या होता है प्रश्नकाल (Parliament Question Hour)
प्रश्नकाल के दौरान सदन के सदस्य (जनता का प्रतिनिधि) प्रशासन और सरकारी गतिविधि के हर पहलू पर प्रश्न पूछ सकते हैं। राष्ट्रीय के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में सरकार की नीतियों पर भी चर्चा होती है. क्योंकि सदस्य प्रश्नकाल के दौरान प्रासंगिक जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
प्रश्नकाल का समय 11 बजे से 12 बजे तक का तय है। इसमें संसद सदस्यों द्वारा आम लोगों के किसी मामले पर जानकारी सरकार ने माँगते हैं। ये कई मुद्दों पर आधारित होता है ये उस वक्त पर तय करता है कि उस वक्त या कुछ महीनों पहले किस मुद्दे पर सरकार से सवाल कर सकते हैं। इसमें पूछे गए प्रश्नों के जवाब सरकार के प्रतिनिधि देते हैं। प्रश्नकाल के दौरान कई तरह के सवाल होते हैं। जैसे कि तारांकित प्रश्न, गैर-तारांकित प्रश्न, अल्पसूचना प्रश्न, गैर सरकारी सदस्यों से पूछे जाने वाले प्रश्न।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी पाए जाने के कुछ दिनों बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) को उनके ट्वीट्स की जाँच करने और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
बीसीआई ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस रिलीज में कहा, “परिषद का मानना है कि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत बार काउंसिल में निहित वैधानिक कर्तव्यों, शक्तियों एवं कार्यों के आलोक में तथा खासकर अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 24ए एवं धारा 35 तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स के अध्याय दो, खंड- छह के दायरे में वकील प्रशांत भूषण और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जो फैसला दिया, उसका व्यापक अध्ययन और जाँच जरूरी है।”
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आगे दोहराया कि बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को ट्वीट की जाँच करनी चाहिए और उसके अनुसार आगे बढ़ना चाहिए। बैठक की अध्यक्षता वाईस प्रेसिडेंट सतीश ए. देशमुख ने द्वारा की गई थी।
एडवोकेट्स एक्ट की धारा 24ए के तहत अगर कोई वकील नैतिक भ्रष्टता से जुड़े किसी अपराध में दोषी पाया जाता है, तो वह कानूनी प्रैक्टिस नहीं कर सकता या किसी राज्य की बार काउंसिल के रोल पर नहीं रह सकता है। अधिवक्ता अधिनियम की धारा 24 में कहा गया है कि पेशेवर कदाचार के दोषी पाए गए वकील को अदालतों में प्रैक्टिस करने से निलंबित किया जा सकता है या उनके लाइसेंस पूरी तरह से रद्द कर दिया जा सकता है।
भूषण के बार लाइसेंस के निलंबन के फैसले में पैराग्राफ 89 की मिसाल रखी गई थी। पैराग्राफ 89 में यह कहा गया है, ”एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) अगर चाहे वह नामांकन को निलंबित कर सकती है।”
सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को अवमानना के दोषी वकील प्रशांत भूषण को मात्र 1 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि जुर्माना अदा नहीं करने पर भूषण को तीन महीने की कैद भुगतनी होगी और वे 3 साल तक वकालत करने से प्रतिबंधित रहेंगे। यह मामला दो ट्वीट्स से जुड़ा है, जहाँ प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट और विशेष रूप से CJI बोबडे के खिलाफ टिप्पणी की थी।
गौरतलब है कि इसके बाद प्रशांत भूषण ने न्यायालय की अवमानना मामले में मिली 1 रुपए जुर्माने की सजा को स्वीकार करते हुए कहा था कि वो यह जुर्माना भरेंगे और इसके ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका भी दायर करेंगे। एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस चीज़ के लिए उन्हें दोषी ठहराया है वो हर नागरिक के लिए सबसे बड़ा कर्तव्य है।
प्रशांत ने कहा कि उनके ट्वीट्स का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं था, वे सुप्रीम कोर्ट के अपने शानदार रिकॉर्ड से भटकने को लेकर नाराजगी की वजह से किए गए थे। भूषण ने कहा था, “सुप्रीम कोर्ट के द्वारा लगाए गए जुर्माने की रिव्यू पिटिशन फाइल करने का मुझे अधिकार है। कोर्ट ने मुझ पर जो जुर्माना लगाया है, उसका मैं एक नागरिक को तौर पर कर्तव्य निभाते हुए भुगतान करूँगा।”
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी है कि ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। NCPCR के अध्यक्ष ने ट्विटर पर इसकी सूचना देते हुए बताया कि आयोग की ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ के अनुसार, नाबालिग लड़की की ऑनलाइन प्रताड़ना के आरोप में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।
इस मामले में ट्विटर को भी नोटिस भेजा गया था। ट्विटर के निवेदन के बाद NCPCR ने उसे मोहम्मद जुबैर के ट्वीट के सम्बन्ध में और अधिक जानकारी देने के लिए 10 दिनों का अतिरिक्त समय दिया है। जुबैर के ट्वीट के बाद उसे फॉलो करने वाले ट्विटर एकाउंट्स @de_real_mak और @syedsarwar ने भी बच्ची के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था, इसीलिए एफआईआर में उनका नाम भी शामिल है।
@NCPCR_ में प्राप्त ATR के अनुसार, @Twitter पर एक बच्ची को धमकाने और प्रताड़ित करने के लिए कथित व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। @TwitterIndia द्वारा किए गए अनुरोध के अनुसार प्रासंगिक जानकारी प्रदान करने के लिए उन्हें 10 दिनों का अतिरिक्त समय प्रदान किया गया है।
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) September 5, 2020
इससे पहले प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा छोटी बच्ची की तस्वीर सार्वजनिक करने, धमकियाँ देने और टॉर्चर करने के आरोप में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने ट्विटर को नोटिस भेजा था। आयोग ने कहा था कि वह इस मामले में स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और इसके लिए ट्विटर के सीनियर मैनेजर्स को 4 सितम्बर को उपस्थित होना होगा। अब उन्हें 10 दिन का फिर से समय दिया गया है।
ज़ुबैर के साथ दो अन्य ट्विटर यूजर्स के खिलाफ भी मामला दर्ज
फैक्ट चेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात समूह ऑल्टन्यूज़ के संस्थापकों में से एक मोहम्मद जुबैर ने शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने के लिए नाबालिग बच्ची की तस्वीर सार्वजानिक कर दी थी। बताया गया था कि यह बच्ची उस यूजर की पोती थी और उसे जुबैर के ट्वीट के बाद रेप की धमकियाँ मिली थी।
आगरा स्थित मंटोला थाना में बहुजन समाज पार्टी के पूर्व मंत्री बशीर चौधरी के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। हाल ही में उनका एक वीडियो में सामने आया जिसमें वह सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने वाले बयान देते हुए नजर आ रहे हैं। पूर्व मंत्री पर आरोप है कि उसने लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत करने की मंशा से यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। बशीर साल 2002 में बसपा के टिकट पर आगरा छावनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत चुके हैं।
पुलिस के मुताबिक़, पूर्व मंत्री की यह हरकत दो समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश है। उनके इस बयान की वजह से कभी भी तनाव पैदा हो सकता था, इतना ही नहीं उन्होंने अपने वीडियो में एक हिंदूवादी संगठन (अखिल भारतीय हिंदू महासभा) के सदस्यों को मोहल्ले में न घुसने की चेतावनी दी। नतीजतन बशीर चौधरी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 A, 295 A और प्रावधान 67 आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस अपनी तरफ से इस मामले की विवेचना कर रही है।
दरअसल, शनिवार 29 अगस्त को अखिल भारतीय हिंदू महासभा के कुछ सदस्यों ने हाथी घाट क्षेत्र के पास दो ऐसे वाहन पकड़े जिन पर माँस लदा हुआ था। इस घटना की जानकारी मिलते ही संगठन के तमाम लोगों ने आगरा के मंटोला क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने माँग उठाई कि शहर में होने वाली गौ हत्या और गौ तस्करी पर रोक लगाई जाए। ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
इस विरोध प्रदर्शन के बाद बशीर चौधरी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। जिसमें उन्होंने अखिल भारतीय हिंदू महासभा के सदस्यों को चेतावनी दी कि भविष्य में कभी मंटोला आने की हिम्मत न करें। इसके अलावा बशीर चौधरी ने वीडियो में माहौल बिगाड़ने वाली कई अन्य बातें कही। कुछ ही देर में लोगों ने इस वीडियो पर खूब प्रतिक्रिया दी और निंदा भी की। कथित तौर पर बशीर ने वीडियो में दो समुदायों के बीच घृणा फैलाने वाली बातें भी कही हैं। वीडियो वायरल होने के बाद मंटोला थाने की पुलिस ने बशीर चौधरी पर मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया।
बसपा सरकार के पूर्व मंत्री का विवादों से संबंध नया नहीं है। पिछले महीने भी मंटोला थाना में बशीर चौधरी के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में बशीर बकरा बेचने वाले संप्रदाय विशेष के लोगों को पुलिस के विरुद्ध भड़का रहा था। बकरीद के दौरान महामारी को देखते हुए मंटोला पुलिस ने बाज़ार में बकरा मंडी लगाने की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस के इस आदेश को ताक पर रखते हुए बशीर चौधरी ने बकरा बेचने वाले संप्रदाय विशेष के लोगों से कहा उन्हें बिना रोक टोक बकरा बेचना चाहिए। बशीर ने कहा, “किसी को भागने या कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है, यहाँ कोई चरस गाँजा नहीं बेच रहा है। जब तक मैं यहाँ हूँ कोई तुम्हें छू भी नहीं सकता है। सब बेफ़िक्र होकर अपना धंधा करो।”
बशीर वही नेता है जिस पर साल 2018 के दौरान उसकी पत्नी ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था। साल 2013 में पूर्व मंत्री की गर्भवती पत्नी ने उसके विरुद्ध दहेज़ के लिए प्रताड़ित करने और अप्राकृतिक सेक्स का दबाव बनाने का मामला दर्ज कराया था। बशीर की तीसरी पत्नी नगमा ने यह आरोप भी लगाया है कि उसके किसी अन्य महिला से संबंध हैं। जब उसने इन बातों का विरोध किया तब बशीर ने उसके साथ मारपीट की। साल 2002 में बशीर ने आगरा की छावनी विधानसभा सीट से चुनाव जीता था।
इसके बाद वह कैबिनेट मंत्री भी बना था। फिर उसने देवरिया की विधायक चौधरी गज़ाला लारी से निकाह किया और समाजवादी पार्टी में शामिल हो गया। उसने समाजवादी पार्टी से भी चुनाव लड़ा लेकिन बसपा नेता से हार गया था। इसके बाद बशीर कॉन्ग्रेस में शामिल हुआ और उसने आगरा की दक्षिणी विधानसभा सीट से टिकट माँगा पर उसे टिकट नहीं दिया गया। साल 2012 में उसने राष्ट्रीय समता दल नाम के राजनीतिक दल से चुनाव लड़ा और वह भी हार गया।