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हम आपकी चिंताओं को गंभीरता से ले रहे हैं: कॉन्ग्रेस के पत्र पर फेसबुक का जवाब

बीजेपी के प्रति झुकाव रखने का आरोप लगाते हुए कॉन्ग्रेस ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबई को दो पत्र लिखा था। इसके जवाब में फेसबुक ने कॉन्ग्रेस से कहा है कि उसकी चिंताओं को लेकर वह गंभीर है।

कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पिछले महीने जुकरबर्ग को दो पत्र भेजे थे। इसके जवाब में ट्रस्ट और सुरक्षा पॉलिसी टीम की देखरेख करने वाले फ़ेसबुक के निदेशक, नील पोट्स ने कहा, “हम भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की ओर से उठाई गई चिंता और सिफारिशों को गंभीरता से ले रहे हैं।”

फेसबुक की ओर से कॉन्ग्रेस को भरोसा दिलाया गया है कि वह एक निष्पक्ष संस्था है और किसी भी तरह की हेट स्पीच के खिलाफ है। कॉन्ग्रेस की ओर से जारी बयान के अनुसार, फेसबुक ने उसके द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया है। फेसबुक ने कहा है कि वह एक ऐसा मंच है, जहाँ लोग अपने विचार खुले मन से रख सकते हैं और वो किसी भी पक्ष के साथ न होकर निष्पक्ष है। इस पत्र में फेसबुक ने कहा है कि हमने पहले भी एक्शन लिया है और आगे भी लेते रहेंगे।

पत्र में कहा गया है कि सार्वजनिक हस्तियों द्वारा हेट स्पीच के सवाल पर, हम आपको आश्वस्त करना चाहते हैं कि हमारे सामुदायिक मानक धर्म, जाति, लिंग और राष्ट्रीयता सहित उनकी संरक्षित विशेषताओं के आधार पर लोगों के खिलाफ हमलों पर रोक लगाते हैं। हमारी हेट स्पीच की नीति के अनुरूप, हम सभी मामलों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को गंभीरता से लेते हैं और उसे तुरंत हटाते हैं। भारत में भी हमने ऐसे कई बयानों को हटाया है।

इसके अलावा, पोट्स ने कहा है कि फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्र और सुरक्षित अभिव्यक्ति के वातावरण को संचालित करने के तरीके में ईमानदारी के उच्चतम मानक बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

फेसबुक द्वारा कॉन्ग्रेस को भेजा गया जवाब

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने जुकरबर्ग को ई-मेल के जरिए पत्र भेजा था। उन्होंने जुकरबर्ग को सुझाव देते हुए कहा था, ”फेसबुक मुख्यालय की तरफ से उच्च स्तरीय जाँच आरंभ की जाए और एक या दो महीने के भीतर इसे पूरी कर जाँच रिपोर्ट कंपनी के बोर्ड को सौंपी जाए। इस रिपोर्ट को सार्वजनिक भी किया जाए।”

फेसबुक की नीतियों को लेकर यह विवाद अमेरिकी समाचार पत्र ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। इसमें फेसबुक के अनाम सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि फेसबुक के वरिष्ठ भारतीय नीति अधिकारी ने हेट स्पीच मामलों पर भाजपा का पक्ष लिया था।

वहीं, फेसबुक द्वारा आज, बृहस्पतिवार को ही तेलंगाना विधायक और भाजपा नेता टी राजा सिंह का अकाउंट प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके पीछे कारण हेट स्पीच बताया जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर कहा था कि फेसबुक इंडिया के अधिकारियों द्वारा दक्षिणपंथी विचारधारा के पेजों को हटाने का प्रयास किया गया।

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस पत्र में फेसबुक इंडिया की टीम पर राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि फेसबुक इंडिया में कई बड़े अधिकारी प्रधानमंत्री और कई कैबिनेट मंत्रियों के प्रति अपशब्द कहते हैं।

सुचारु रूप से चल रहा गीताप्रेस: प्रबंधन ने कहा- ठगों से रहें सावधान, सोशल मीडिया पर कोई चंदा नहीं माँग रहा प्रेस

विश्व में सबसे अधिक धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशक गीताप्रेस ने सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक सूचनाओं को रोकने के लिए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है। जिसके अनुसार प्रेस ने आर्थिक संकट के चलते लोगों से चंदा माँगने वाले दावे को खारिज कर दिया है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि गीताप्रेस का काम पहले की ही तरह पूरी कुशलता से चल रहा है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर चल रही फर्जी अफवाहों का खंडन करते हुए गीताप्रेस प्रबंधन ने भी बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है। ट्विटर सहित सभी सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए प्रेसनोट में बताया गया, “कुछ संगठित क्षेत्र के लोग सोशल मीडिया पर आर्थिक संकट के कारण गीताप्रेस के बंद होने की अफवाह फैला रहे हैं। गीताप्रेस की मदद के नाम पर लोगों से ठगी की जा रही है। गीताप्रेस ने कई बार सोशल मीडिया / प्रिंट मीडिया के माध्यम से इसका खंडन किया है, फिर भी गीताप्रेस के शुभचिंतक भी सही जानकारी के अभाव में इसे गीताप्रेस के हित मे जानकर ऐसी झूठी खबर को फारवर्ड कर देते हैं। गीताप्रेस का काम के सुचारु रूप से चल रहा है। संस्था किसी से भी किसी प्रकार का अनुदान नहीं लेती है।”

गीताप्रेस प्रबंधन ने लोगों से निवेदन किया, “इस बात को ध्यान में रखते हुए गीताप्रेस की इस प्रामाणिक सूचना का इतना प्रचार प्रसार करें कि गीताप्रेस के विषय मे इस तरह के भ्रामक प्रचार करने वालों के निहित स्वार्थ की कोशिश नाकाम हो जाए।”

वहीं संस्थान की तरफ से सोशल मीडिया पर चंदा माँगने वाली अफवाहों का ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल ने भी खंडन किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन की वजह से गीताप्रेस का काम भी रुक गया था। जिसकी वजह से कल्याण पत्रिका के अप्रैल, मई और जून के अंक ही प्रकाशित हो पाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इतने दिन चले लॉकडाउन की वजह से प्रेस में पुस्तकों का स्टाक लगभग खत्म हो चुका है। महामारी के भय से माँग के अनुसार पुस्तकों की छपाई नहीं हो पा रही हैं। साथ ही गीताप्रेस के संबंध में ट्वीटर पर चले अभियान के बाद ऑनलाइन पुस्तकों की डिमांड और बढ़ गई है।

गीताप्रेस लगभग 500 ऑनलाइन आर्डर की पुस्तकें पाठकों तक नहीं भेज पा रहा है। इतना ही नहीं महत्वपूर्ण हिंदू धार्मिक किताबें जैसे कि रामायण गीता आदि के भी स्टॉक 80 फीसद तक कम हो गए है। वहीं स्पेशल एडिशन मोटे अक्षरों वाली गीता व सुंदर कांड मूल की किताबें संस्थान में खत्म भी हो चुकी है। मिली जानकारी के अनुसार ऑनलाइन के अलावा दुकानदारों द्वारा आर्डर लगभग 2 लाख पुस्तकों की माँग की सप्लाई भी प्रेस नहीं कर पा रहा है। वहीं अगर रेलवे स्टेशन पर भी दुकानें खुल जाएगी तो यह संकट और भी बढ़ जाएगा।

गीताप्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने दैनिक जागरण को जानकारी दी कि पुस्तकों की माँग लगातार आ रही है लेकिन हम आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। आर्डर लंबित पड़े हुए हैं। शनिवार की बंदी खत्म होने से उत्पादन लगभग 16 फीसद बढ़ जाएगा।

हिंदू दंपती को फँसाने के लिए काटा ‘राजेश’ का सिर, दिल्ली में जिंदा मिला खालिद, अब्बू और भाइयों की थी साजिश

बिहार के बेतिया गाँव में खालिद के फर्जी हत्याकांड की गु्त्थी अब सुलझ गई है। पुलिस की सक्रियता के कारण अब उस सिर कटी लाश की भी पहचान हो गई है जिसे हिंदू दंपत्ति को फँसाने के लिए इस्तेमाल किया गया। वह लाश राजेश कुमार की थी। राजेश खालिद के भाई राजा का ही दोस्त था। उसे आरोपितों ने नगर परिषद सभापति गरिमा देवी सिकारिया और उनके पति रोहित सिकारिया को फँसाने के लिए मारा था।

इस पूरे हत्याकांड को अंजाम देने में खालिद के चार भाई और उसके पिता का हाथ था। इन सबने मिलकर पूरी साजिश रची थी। इस साजिश में खालिद के दोस्त रंजीत ने उन सबका साथ दिया।

अब मामले में सारा खुलासा होने के बाद मुफस्सिल थानाध्यक्ष उग्रनाथ झा के बयान पर थाने में दूसरी FIR हुई है। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया में मुन्ना मिश्रा के बंद पड़े आइसक्रीम फैक्ट्री के पास 22 अगस्त की रात 9 बजे पुलिस को सिर बरामद हुआ था। उसके चेहरे पर काफी चोट के निशाना थे। हालत ऐसी थी शिनाख्त करना मुश्किल हो गया। फिर खालिद के पिता अख्तर हुसैन ने उसे अपने बेटे की लाश बताया। साथ ही  इसी संबंध में एफआईआर भी करवा दी। हालाँकि, पुलिस ने जब जाँच शुरू की तो उन्हें पूछताछ के दौरान बयानों में कुछ गड़बड़ लगी और शक गहराता गया। इसके बाद पुलिस को मालूम चला कि खालिद की हत्या नहीं हुई है। 

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर का

पुलिस ने फौरन यह सूचना एसपी को दी और एक टीम का गठन हुआ। दो दिन पहले पुलिस खालिद को दिल्ली से जिंदा पकड़ने में सफल रही। पूरी साजिश का खुलासा होते ही नगर परिषद सभापति गरिमा सिकारिया और उनके पति रोहित सिकारिया ने राहत की साँस ली।

अब इस मामले में दर्ज एफआईआर में खालिद, उसके पिता, चार भाइयों समेत 6 को नामजद किया गया है। पूछताछ में इन्होंने बताया कि वो शव खालिद के भाई राजा के साथी राजेश कुमार का था। राजेश नरकटियागंज के एक होटल में काम करता था।

खालिद के मिलने के बाद पुलिस ने लाश की पहचान करने के लिए उसे कब्र खोदकर निकाला है और डीएनए टेस्ट करवाया है। शरीर के अन्य अंगों के साथ उसे मिलाने के बाद उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, खालिद ने पुलिस को बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया में उसकी माँ के नाम भी बियाडा की जमीन लीज पर थी। मगर, प्रशासन ने साल 2009 में उस जमीन पर रोहित सिकारिया का कब्जा करवा दिया। इसी कारण हिंदू दंपती को फँसाने की साजिश खालिद के अब्बा और उसके भाइयों ने मिलकर रची ।

कर्नाटक: राज्य सरकार के मंदिरों के धन से होगा गरीब जोड़ों की शादी, सप्तपदी योजना के तहत होगी खर्च की व्यवस्था

कर्नाटक सरकार ने गरीब परिवार से आने वाले हिंदू जोड़ों की शादी के लिए एक अहम ऐलान किया है। कर्नाटक की राज्य सरकार ने कहा है कि मंदिरों में दान की गई राशि के एक हिस्से से सामूहिक विवाह कराए जाएँगे। यह सामूहिक विवाह सप्तपदी नाम की योजना के तहत कराए जाएँगे। योजना के अनुसार लगभग 100 से अधिक ए श्रेणी के मंदिरों को 26 अप्रैल से 24 मई के बीच हिंदू जोड़ों के सामूहिक विवाह का खर्च उठाना था।  

लेकिन कोरोना वायरस महामारी की वजह से यह आयोजन नहीं हो पाया था। जिस तरह के हालात फिलहाल बने हैं उनके आधार पर सामूहिक विवाहों के आयोजन की उम्मीदें भी कम हैं। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए डिपार्टमेंट ऑफ़ हिंदू चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन एंड रिलीजियस इंडोमेंट ने नया विकल्प खोजा है। विभाग अब विवाहों का आयोजन सामूहिक तौर पर कराने की जगह साल भर (केस बाई केस) आधार पर करेगा।  

हिंदू चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन एंड रिलीजियस इंडोमेंट विभाग के मंत्री कोटा श्रीनिवास पुजारी के मुताबिक़ इस योजना के मूलभूत ढाँचे में बदलाव किया जा चुका है। नए बदलाव के आधार पर कर्नाटक की राज्य सरकार के चयनित मंदिरों में आगामी एक साल के दौरान हिंदू जोड़ों की सुविधानुसार शादी कराई जा सकती है। इस प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है।  

यह योजना हर उस मंदिर पर लागू होगी जिसे सामूहिक विवाह का आयोजन कराने के लिए चुना गया था। इस मुद्दे पर जानकारी देते हुए मंत्री श्रीनिवास पुजारी ने कहा मंदिरों में विवाह कराए जाने के दौरान स्वास्थ्य विभाग के दिशा निर्देशों का पूरी तरह ध्यान रखा जाएगा। ऐसे किसी भी आयोजन के दौरान पूरी सावधानी बरती जाएगी जिससे कोई महामारी की चपेट में न आए।    

एक कन्नड़ समाचार समूह से बात करते हुए कोटा श्रीनिवास पुजारी ने इस मामले में और जानकारी दी। उन्होंने कहा, “आने वाले समय में सरकार के लिए सामूहिक विवाह कराना बहुत कठिन होगा। इसलिए हमने योजना में बदलाव लाने की तैयारी की और हमें अच्छे नतीजे भी हासिल हो रहे हैं। जिन्हें शादी करवानी हो वह एक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें एक महीने के भीतर मुहूर्त दिया जाएगा।” 

इस योजना की शुरुआत 5.5 करोड़ रूपए के बजट से शुरू की गई थी। इस योजना के तहत शादी करने वाले जोड़े को 8 ग्राम सोने का मंगलसूत्र, 10 हज़ार रूपए के उपहार और 5 हज़ार रूपए नगद दिए जाएँगे। अंत में श्रीनिवास पुजारी ने बताया कि मंदिरों की गतिविधियों के संचालन के लिए केंद्रीकृत बैंकिंग तंत्र तैयार किया गया है। धीरे-धीरे इसे राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों पर लागू किया जाएगा।  

‘कोरोना को जबर्दस्ती मरकज ले गए और…’ – अमित शाह के मरने की दुआ करने वाली YouTuber ऐमन रिजवी

शाहीनबाग में सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने वाली ऐमन रिज़वी ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक और वीडियो अपलोड किया है। वीडियो में वह मरकज़ निजामुद्दीन के सदस्यों पर कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के शुरुआती दौर में हुए कथित अत्याचारों पर गुस्सा जाहिर करती हुई नजर आ रही है। वह बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा विदेशी तबलीगी जमातियों के खिलाफ एफआईआर को खारिज करने और उस पर दिए गए आदेशों का उल्लेख करते हुए अपनी बात शुरू करती है।

रिज़वी अपनी वीडियो में दावा करते हुए कहती है कि भारत सरकार ने अपनी कथित लापरवाहियों से नागरिकों का ध्यान भटकाने के लिए मरकज़ सदस्यों पर भारत में कोरोनोवायरस फैलाने का आरोप लगाया। उसने कहा कि भारत सरकार ने महामारी से निपटने के लिए तब कोई कदम नहीं उठाया, जब चीन से कोरोना वायरस आया।

उसने यह भी आरोप लगाया कि क्योंकि पीएम मोदी और अंबानी और अडानी जैसे उद्योगपतियों के चीन के साथ अच्छे संबंध हैं, इसलिए भारत सरकार मूकदर्शक बनी रही और चीनी वायरस को भारत में फैलने दिया।

रिज़वी ने आरोप लगाया कि सरकार ने भारत में हिंदू और संप्रदाय विशेष के बीच नफरत फैलाने के लिए कोविड -19 का इस्तेमाल किया। भारत सरकार कोरोना वायरस को मरकज़ के अंदर ले गई और इस बीमारी को संप्रदाय विशेष के लोगों के मत्थे मढ़ दिया। उसने कहा, “ज़बरदस्ती ये (सरकार) उसको मरकज़ ले के जाते हैं और उससे कहते हैं तू मुस्लिम है। जबरदस्ती उसे इस्लाम कबूल करवा देते हैं और वहीं से शुरू होती है देश में नफ़रत की राजनीति।”

रिजवी ने आगे दावा किया कि कोरोना वायरस फैलने के लिए मरकज़ दोषी ठहराने के बाद, संप्रदाय विशेष के लोगों को भारत में मारा गया और उनकी मॉब लींचिंग की गई। उसने कहा चूँकि मरकज़ से सिर्फ 30 मीटर की दूरी पर एक पुलिस स्टेशन है, इसलिए यह संभव नहीं है कि वहाँ कोई भी भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल हो या योजना बनाई जा सके। रिज़वी ने आगे कहा कि, मौलाना साद ने उस वक्त कहा था कि उन्होंने 1800 जामातियों को पहले ही मरकज़ से भेज दिया था और बाकी को भेजने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अचानक लॉकडाउन हो गया।

रिजवी ने दूसरे देशों से आए जमातियों के पासपोर्ट छीनने के लिए केजरीवाल को भी दोषी ठहराया। उसने कहा कि मार्च में हुए नाटक के कारण मरकज़ निज़ामुद्दीन अभी भी बंद है। इसके साथ ही रिज़वी ने अपने अनुयायियों से उन मीडिया हाउसों के खिलाफ भी एक अभियान शुरू करने के लिए भी कहा, जिन्होंने जमातियों को कोरोना वायरस फैलाने के लिए दोषी ठहराया था।

इसके अलावा रिज़वी ने दिवंगत कॉन्ग्रेस नेता राजीव त्यागी की मौत की मौत के पीछे भाजपा नेता संबित पात्रा का हाथ बताया। उसने आरोप लगाया कि समाचार चैनल की बहस में संबित पात्रा द्वारा लगाए गए आरोपों की वजह से त्यागी की मृत्यु हो गई। उसने कहा कि मरने से पहले राजीव त्यागी के आखिरी शब्द थे, “इन मीडिया वालों ने मेरी जान ले ली। संबित पात्रा ने मेरी जान ले ली।”

मीडिया पर आरोप

रिजवी ने दावा किया कि मीडिया उन सभी के खिलाफ पक्षपाती है, जो संप्रदाय विशेष के लोगों के पक्ष में बोलते हैं। मीडिया वाले बोलने वालों के माइक को बहस के वक्त म्यूट पर लगा देते है, उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि वे किस पार्टी या विचारधारा के हैं। वे केवल न्यूज चैनल की बहस के दौरान बीजेपी के वक्ताओं को सिर्फ बोलने का मौका देते हैं।

कौन है ऐमन रिज़वी

ऐमन रिज़वी शाहीनबाग में सीएए के खिलाफ़ नियमित प्रदर्शन करने वाले चेहरों में से एक थी। उसने अपने एक यूट्यूब वीडियो में अपने अनुयायियों से गृह मंत्री अमित शाह की मृत्यु के लिए दुआ करने लिए कहा था। जब शाह कोविड-19 संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे। हालाँकि बाद में उसने अपने इस वीडियो को डिलीट कर दिया था।

वीडियो में उसने कहा था, “मैं 6 महीने से बोल रही हूँ। कोरोना का सिर्फ़ ड्रामा चल रहा है। कोई कोरोना नही है और अगर कोरोना है तो इस बार अमित शाह को मरना चाहिए। आप दुआ करें कि अगर वाकई इसे (अमित शाह) कोरोना हुआ है तो आप सब दुआ करें कि या खुदा ये मर जाए। हम कोरोना पर 1% तभी यकीन करेंगे जब अमित शाह मर जाएगा।”

भारत सरकार की कार्रवाई से फिर बिलबिलाया चीन, वाणिज्य मंत्रालय ने दी नियम-शर्तों की दुहाई

लद्दाख में भारत-चीन सेना के बीच चल रहा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद भारत सरकार ने भी चीन के ख़िलाफ़ एक्शन लेते हुए एक बार फिर 118 और चीनी एप्स को प्रतिबंधित कर दिया है। चीन इस फैसले से बौखला उठा है। उसने भारत सरकार के फैसले पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, चीनी वाणिज्‍य मंत्रालय ने एक बयान जारी करके भारत के इस फैसले पर विरोध जताया है। मंत्रालय ने कहा कि भारत का एप पर बैन लगाना चीनी निवेशकों और सर्विस प्रोवाइडरों के कानूनी हितों का उल्‍लंघन करता है। चीन इसको लेकर गंभीरतापूर्वक चिंतित है और पुरजोर विरोध करता है।

याद दिला दें, इससे पहले भी सीमा विवाद के बाद जून में भारत ने टिकटॉक समेत 59 एप पर बैन लगाया था। जुलाई में भी चीन से जुड़े 47 मोबाइल एप प्रतिबंधित किए गए थे। कुल मिलाकर अब तक 224 मोबाइल एप पर भारत सरकार की ओर से कार्रवाई की जा चुकी है।

पिछली बार भी भारत सरकार की कार्रवाई पर चीन ने नाराज होकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने चाइनीज एप पर प्रतिबंध को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इस पर पूरी तरह से नजर रख रहा है और इस कार्रवाई का कड़ा विरोध जता रहा है।

रोंग ने कहा था कि भारत ने इन एप को बैन करने का जो तरीका अपनाया है वो भेदभावपूर्ण है। डब्ल्यूटीओ का हवाला देते हुए चीनी दूतावास ने बयान दिया था कि कुछ चीनी एप प्रतिबंधित करने के लिए जिस तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया गया है, वो ठीक नहीं है और ये विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का उल्लंघन भी है।

चीनी प्रवक्ता के अलावा चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने भारत में चीनी एप पर रोक के बारे में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि चीन भारत द्वारा जारी नोटिस से अत्यधिक चिंतित है और स्थिति की जाँच कर रहा है।

वहीं, चीन सरकार के अनाधिकारिक प्रवक्ता के रूप में काम करने वाले और भारत को समय-समय पर झूठी गीदड़ भभकी देने वाले अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने ट्वीट कर बताया था कि पिछले महीने लद्दाख में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर हिंसक संघर्ष के बाद भारत सरकार की तरफ से चीन के 59 एप पर प्रतिबन्ध लगाने से TikTok की पैरंट कंपनी बाइटडांस को 6 अरब डॉलर (45,300 करोड़ रुपए) का बड़ा नुकसान हो सकता है।

बता दें कि बुधवार को जिन मोबाइल एप पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें पबजी, पबजी लाइट समेत बायदू, बायदू एक्सप्रेस एडिशन, वीचैट रीडिंग, गवर्नमेंट वीचैट, टेनसेंट वेयुन, कट कट, शेयरसेवा बाइ शाओमी और कैमकार्ड जैसे एप शामिल हैं। जिनके यूजर्स भारत में बहुत तादाद में हैं। केवल पबजी की बात करें, तो इसके सबसे अधिक यूजर भारत में ही हैं। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि सिर्फ 2020 के पहले क्वॉर्टर में पबजी को 6 करोड़ लोगों को डाउनलोड किया था। इसके अलावा, मई में पबजी दुनिया का सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाला मोबाइल गेम बना था। उसे 22.6 करोड़ डॉलर यानी करीब 1700 करोड़ रुपए का राजस्व मिला था।

फेसबुक ने बंद किया बीजेपी MLA टी राजा सिंह का अकाउंट, इंस्टाग्राम भी बैन; लगाया हेट स्पीच का आरोप

फेसबुक ने भाजपा विधायक टी राजा सिंह का फेसबुक अकाउंट प्रतिबंधित कर दिया है। तेलंगाना के विधायक सिंह को इंस्टाग्राम पर भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। फेसबुक ने यह कार्रवाई ऐसे वक्त में की है जब उस पर भाजपा और दक्षिणपंथी विचारधारा समर्थकों के प्रति पक्षपातपूर्ण नीतियों का आरोप लग रहा है।

फेसबुक के एक प्रवक्ता ने कहा है, “हमने राजा सिंह को हमारी उन नीतियों का उल्लंघन करने के लिए फेसबुक से प्रतिबंधित किया है, जो कि हिंसा को बढ़ावा देने या हिंसा भड़काने और हमारे मंच पर नफरत फ़ैलाने पर रोक लगाता है। संभावित उल्लंघनों का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया व्यापक है और इसी कारण हम उनके अकाउंट को प्रतिबंधित करने के फैसले पर पहुँचे हैं।”

ज्ञात हो कि इससे पहले भी भाजपा विधायक टी राजा सिंह के खिलाफ कथित तौर पर 7 बार हेट स्पीच के मामले सामने आ चुके हैं। मई 2017 में मुख्यमंत्री से ओल्ड सिटी में तलाशी अभियान चलाने का अनुरोध करते हुए टी राजा ने इस क्षेत्र को ‘मिनी पाकिस्तान’ बताया था। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया था कि वे वहाँ कई घरों से बम और अन्य विस्फोटक बनाने वाले लोगों को आसानी से पकड़ सकते हैं। पुलिस ने तब उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था।

जुलाई 2017 में पश्चिम बंगाल के बदुरिया और बशीरहाट जिलों में तनाव के दौरान, टी राजा ने राज्य में हिंदू समुदाय से अपील की थी कि जिस तरह से 2002 में गुजरात में हिंदुओं ने सांप्रदायिक हिंसा में शामिल लोगों को जवाब दिया। उसी तरह से बंगाल में भी जवाब देना चाहिए क्योंकि राज्य में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं।

इसके अलावा टी राजा कई बार ऐसे बयान भी दे चुके हैं, जिनमें उन्होंने एंटी नेशनल्स को भारत छोड़कर पकिस्तान चले जाने की बात कही है। यह बयान भी हेट स्पीच के अंतर्गत बताए गए थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब ’15 मिनट में हिन्दुओं को सबक सिखाने’ की धमकी देने वाले अकबरुद्दीन ओवैसी जैसे लोग सोशल मीडिया पर खुलेआम घूम सकते हैं तो फिर टी राजा को ही फेसबुक द्वारा निशाना क्यों बनाया गया?

भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने फेसबुक से राजा पर प्रतिबंध लगाने के मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने कहा कि अभद्र भाषा का निर्धारण किसी जगह के नियमों और कानूनों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “भारत में नफरत फैलाने वाले भाषण हमारे संवैधानिक ढाँचे और मौजूदा नियमों से तय होंगे। यह उनके राजनीतिक संबद्धता के बावजूद सभी के लिए उचित रूप से लागू किया जाना चाहिए। सोनिया गाँधी, जिनके विभाजनकारी भाषण को फेसबुक पर लाइव स्ट्रीम किया, जिसके कारण हाल ही में दिल्ली में व्यापक पैमाने पर दंगे और मौतें हुईं, यह भी उतना ही दोषी था जितना कि कोई और।” अमित मालवीय ने कहा कि हम दोहरे मानक नहीं रख सकते।

गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में केंद्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग को लिखे पत्र में कहा था कि फेसबुक को कुछ समूहों द्वारा ‘आंतरिक विभाजन और सामाजिक अस्थिरता’ बढ़ाने के लिए नवीनतम उपकरण की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

ऑपइंडिया Vs फेसबुक: पेज रीच को 20 लाख से दो लाख कर देना, मेल का जवाब 50 दिन में देना

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक को लेकर इन दिनों विवाद बहुत गर्माया हुआ है। ऐसे में आज ऑपइंडिया इस प्लेटफॉर्म पर रहते हुए अपने अनुभवों को आपके साथ साझा करने जा रहा है।

संसदीय समिति के समक्ष फेसबुक इंडिया प्रमुख का हाजिर होना और कानून मंत्री का उदाहरण देते हुए फेसबुक के CEO मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखना… यह पिछले 2-3 दिनों में हुआ है। सवाल उठे हैं कि फेसबुक दक्षिणपंथी विचारधारा के पेज व अकॉउंट्स को ब्लॉक करता है। जाहिर है लेफ्ट इकोसिस्टम के ख़िलाफ और लीक से अलग चलने पर हमारे भी अनुभव फेसबुक पर बहुत अच्छे नहीं रहे।

हमने जब ऑपइंडिया हिंदी शुरू किया, तो यह पोर्टल लोगों की नजरों में आता गया। इस दौरान वामपंथियों ने कई बार हमें बेवजगह टारगेट करने का प्रयास भी किया गया। पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहते हुए हमें असल प्रताड़ना का सामना तब करना पड़ा, जब फेसबुक ने अप्रत्यक्ष रूप से हमें रोकने के लिए हमला बोला।

कई बार हमारे फेसबुक पेज की रीच को सामान्य रीच से घटाकर 10% तक कर दिया गया। हमें उस कंटेंट पर निशाना बनाया गया, जो पहले से हर मीडिया पोर्टल कवर कर रहे थे। इसके बाद यह सिलसिला हमारे साथ चलता रहा।

जब हम मेल के जरिए अपने सवालों का जवाब माँगते, तो हमें 40 से 50 दिनों में रिप्लाई आता। कई बार हमारे फेसबुक पेज की रीच को कम करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे आजमाए गए। हमारे पेज से इंस्टैंट आर्टिकल की सर्विस बंद कर दी गई। नतीजतन हमें इसका असर सीधा अपने ट्रैफिक पर देखने को मिला।

आगे बढ़ने से पहले बता दें, इंस्टैंट आर्टिकल की सुविधा किसी भी डिजिटल मीडिया पोर्टल की सबसे बड़ी माँग है। इसी सुविधा के चलते पाठक बिना समय गँवाए वेबसाइट्स के आर्टिकल्स को बिना किसी दिक्कत के पढ़ पाते हैं और इस दौरान साइट को भी खासा ट्रैफिक मिलता है।

कुल मिलाकर इंस्टैंट आर्टिकल से पाठक और डिजिटल मीडिया दोनों को सुविधा होती है। बावजूद इस सच्चाई के, ऑपइंडिया के साथ कई बार ऐसा हुआ कि अलग-अलग कारण देकर हमें पाठकों तक आसानी से पहुँचने से प्रतिबंधित कर दिया गया।

13 जुलाई, 2020 तक ऑपइंडिया के पेज की रीच 20 लाख प्रतिदिन पहुँच चुकी थी। इसके बाद हमने देखा कि अचानक हमारा ट्रैफिक एक बार फिर गिरना शुरू हुआ। 20 लाख से ये ट्रैफिक गिर कर 1,71,000 प्रति दिन पर सीमित हो गया। हम जान चुके थे कि फेसबुक ने हमारे पोस्टों पर लिमिट लगा दी है।

हमने फिर फेसबुक से बात करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने हमें हमारी पेज क्वालिटी चेक करने को बोल दिया। पेज क्वालिटी वाले टैब पर सीधा लिखा हुआ था कि ‘यह पेज अनपब्लिश होने के कगार पर है’। किसी भी पेज को ‘अनपब्लिश’ (यानी फेसबुक से हटा लेना) तब किया जाता है जब उसकी गुणवत्ता वाले टैब पर ‘कम से कम तीन स्ट्राइक लगते हैं। स्ट्राइक से मतलब है कि हमने फेसबुक की नीतियों का उल्लंघन किया है।

तीन बार तो छोड़िए, ऑपइंडिया ने एक भी बार, सही तरीके से ऐसा कोई उल्लंघन नहीं किया है। एक स्ट्राइक जो हमारे पेज पर लगी, वो भी उस खबर पर है जो टाइम्स ऑफ इंडिया की एक पत्रकार ने ट्वीट की थी, और हमने उस ट्वीट के बारे में लिखा था। इस पर एक ‘संदिग्ध’ फैक्ट चेकर साइट ने उसे ‘फेक न्यूज’ कहा, जो कि विचित्र बात थी। खैर, उसे भी अगर एक स्ट्राइक मान लिया जाए तो भी हमारा पेज ‘अनपब्लिश’ होने की कगार पर कैसे हो गया? औक उस कारण पेज की रीच बीस लाख से सीधे दो लाख तक ला दी गई!

खैर! हमारे लिए हैरानी की बात यह थी कि हमने जब फेसबुक पर कम्युनिटी गाइडलाइन्स के विरुद्ध कुछ भी प्रकाशित नहीं किया तो यह सब कैसे हुआ? अब यह मामला लगभग डेढ़ महीने से पुराना हो चुका है, लेकिन फेसबुक को लिखे गए मेल में सिवाय इसके कि ‘कोई अपडेट मिलते ही हम सूचित करेंगे, हमें कोई ढंग की सूचना नहीं मिली है, न ही रीच में बहुत ज्यादा सुधार हुआ है।

इस संबंध में हमने पहला मेल फेसबुक को 29 जुलाई को भेजा था। मगर, तब से अब तक हमें किसी संतोषजनक रिप्लाई की जगह यह जवाब मिला है – ‘we are looking in to it’ – सोचिए! तब से अब तक हमारी वेबसाइट के ट्रैफिक पर कितना असर पड़ा होगा। इससे पहले 25 सितंबर 2019 को हमारे पेज को कम्युनिटी गाइडलाइन के विरुद्ध जाने पर सीमित किया गया था। 

28 नवंबर 2019 को हमने फेसबुक से अपने कुछ पोस्टों के बारे में जानकारी माँगी थी। ऐसे पोस्टों के बारे में, जिनके कारण फेसबुक की नीतियों का हनन हुआ था।

22 मेल भेजने के बाद (जी हाँ, 22 मेल), जिनमें से ज्यादातर केवल यह याद दिलाने के लिए थे कि वह हमारे मेल पर संज्ञान नहीं ले रहे, उन्होंने दिसबंर 2019 के कुछ पोस्ट हमें भेजे और कहा कि हमारे पेज ने इमेज पॉलिसी को फॉलो नहीं किया है। 

है न हैरानी की बात? दिसंबर 2019 के पोस्ट दिखाकर हमें यह बताया गया कि हमारे पेज से नवंबर 2019 में इंस्टैंट आर्टिकल की सुविधा क्यों बंद कर दी गई थी।

खैर! यह सब पहली बार नहीं हुआ था। हर बार फेसबुक से जवाब में हमें ऐसे ही बेवकूफाना रिप्लाई मिल चुके थे। हम यही देख रहे थे कि वही तस्वीर, वही स्टोरी अन्य मीडिया पोर्टल धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं और उन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

मसलन, 22 सितंबर 2019 को उत्तर प्रदेश के कौशांबी में एक दलित नाबालिग का गैंगरेप हुआ। हमने उस नाबालिग की तस्वीर को ब्लर करके इस्तेमाल किया और हेडलाइन में सिर्फ़ आरोपितों का नाम दे दिया। इस खबर को फेसबुक ने हमें बिना कोई कारण बताए पेज से ही हटा दिया।

इस संबंध में हमने जब जवाब माँगा तो तस्वीर का हवाला दिया गया। इसके अलावा यह भी कहा गया कि AI इस बात को निर्धारित करती है कि क्या चीज फेसबुक गाइडलाइन के विरुद्ध है। खास बात यह है कि वही खबर उसी फोटो के साथ दूसरी वेबसाइट पर मौजूद रही। अगर बात एल्गोरिदम की होती, तो कार्रवाई उस वेबसाइट पर भी होनी चाहिए थी!

इन उदाहरणों का मतलब तो यही हुआ कि ऑपइंडिया फेसबुक में बैठे कर्मचारियों द्वारा निशाना बन रहा था न कि AI का। हमें कई बार कई खबरों पर चुनिंदा शब्दों के इस्तेमाल करने से रोका गया और अप्रत्यक्ष ढंग से थोड़ा ‘हल्का’ रहने को बोला गया।

वहीं दूसरी ओर, कई ऐसे मामले भी देखे गए जब ‘जय श्रीराम’-‘जय आंजनेय’ या फिर ‘सूअर’ बोलने के कारण लोगों को फेसबुक ने ब्लॉक ही कर दिया। ऑपइंडिया ने उन दिनों इस समस्या पर एक रिपोर्ट भी की थी। इसमें उन लोगों के पोस्ट थे, जिन्हें फेसबुक ने खुद ही हाइड कर दिया था।

फेसबुक के साथ सबसे ज्यादा दिक्कत यह नहीं है कि वह निष्पक्ष होकर इस प्लेटफॉर्म को हैंडल नहीं करते, बड़ी दिक्कत यह है कि यदि कोई उनसे अपनी गलती जान कर सुधारने की कोशिश करता है तो वह उसे पूरे महीने-दो महीने तक जवाब नहीं देते। यह समय इतना अधिक होता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद पेज को मात्र एक हफ्ते में कई लाखों का नुकसान हो जाता है।

फेसबुक में मेलबाजी की प्रक्रिया बस हाथी के दाँतों जैसी है। वहाँ कुछ समाधान नहीं मिलता। वहाँ आपको मेल का दवाब न दे कर थका दिया जाएगा और आपके साइट को लगातार आठ सप्ताह तक नुकसान उठाना पड़ता है। फिर बिना किसी जवाब के चीजें ठीक होने लगती हैं। इसका मतलब बस यह है कि फेसबुक आपको परोक्ष रूप से धमकी देता है कि हमारे हिसाब से हेडलाइन लिखो, पोस्ट करो वरना हम तुम्हारी रीच तो कम करेंगे ही, मेल का जवाब भी नहीं देंगे। छोटे पोर्टल इससे डर जाते हैं, वो खास समुदाय से जुड़ी खबरें करना बंद कर देते हैं, अपने कर्मचारियों के लिए निर्देश जारी करते हैं कि वो किन-किन शब्दों को प्रयोग न करें।

आज भी फेसबुक का इस्तेमाल करते हुए हमें दिक्कत वही है। ऑपइंडिया ने कुछ गलत नहीं किया और फेसबुक भी यह मान चुका है। फिर भी 13 जुलाई 2020 के बाद से हमारे ट्रैफिक पर हर हफ्ते लाखों का नुकसान होता है। हमें अब तक यह नहीं बताया गया कि आखिर परेशानी का समाधान कब होगा।

सुशांत सिंह राजपूत के परिवार ने कभी नहीं कहा आत्महत्या है, मुंबई पुलिस ने मराठी में लिखे बयान पर जबरन करवाए हस्ताक्षर: वकील

सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के वकील विकास सिंह ने मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज किए गए बयान के बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह के परिवार से बयान जबरन मराठी भाषा में रिकॉर्ड करवाया गया, जिस कारण परिवार ने इस पर आपत्ति भी जताई। गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर मुंबई पुलिस की विश्वसनीयता पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं।

उन्हें कथित तौर पर इस बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए भी मजबूर किया गया था, जबकि परिवार को इसकी कोई भी जानकारी नहीं थी कि इसमें मराठी में क्या लिखा गया। सिंह ने आगे स्पष्ट किया कि सुशांत सिंह की कोई बीमा पॉलिसी नहीं थी और उनके परिवार पर लगाए गए आरोप बेहद अपमानजनक हैं।

दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के वकील, विकास सिंह ने अपने नवीनतम संवाददाता सम्मेलन में उन सभी बातों का खंडन किया है जिनमें यह कहा जा रहा था कि सुशांत सिंह के परिवार को उनके कथित मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी थी। उनके अनुसार, सुशांत के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में उनके परिवार के लोगों को जानकारी होने जैसी बातें फैलाई गई हैं।

दरअसल, इस बात को लेकर जबरदस्त बहस हो रही है कि सुशांत सिंह के मर्डर का दावा कर रहा परिवार उनकी आत्महत्या की बात मुंबई पुलिस को दिए बयान में स्वीकार कर चुकी है। इस विवाद पर सुशांत सिंह के परिवार के वकील विकास सिंह ने परिवार की ओर से इन खबरों से इनकार करते हुए मुंबई पुलिस पर यह आरोप लगाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुशांत के परिवार के वकील विकास सिंह ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि परिवार ने कभी ऐसा स्टेटमेंट नहीं दिया है कि सुशांत ने आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि ये स्टेटमेंट मुंबई पुलिस ने मराठी में रिकॉर्ड किए थे और परिवार ने इस पर आपत्ति भी जताई थी कि अगर वो परिवार से इस पर हस्ताक्षर करवा रहे हैं तो कृपया मराठी में मत लिखें। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उनसे जबरदस्ती मराठी में लिखे बयान पर साइन करवाया गया और उन्हें नहीं पता था कि क्या लिखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “ये बयान सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को पढ़कर नहीं सुनाए गए। वो सिर्फ मराठी में लिखे गए थे। किसी को पढ़कर भी नहीं सुनाए गए। अगर आप मराठी में पढ़कर सुनाएँगे भी तो सामने वाले को जो मराठी नहीं जानता है, वही बताएँगे, जो आप सुनाना चाहते हैं। वो कैसे चेक करेगा क्या लिखा हुआ है। ये एक सिंपल सा लॉजिक है।”

वकील विकास सिंह का यह भी दावा है कि FIR में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह रिया चक्रवर्ती ही थी, जो दिवंगत अभिनेता की समस्याओं के लिए जिम्मेदार थी। कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि अभिनेत्री ने उन्हें जो भी दवाइयाँ दीं या डॉक्टर से सलाह ली, उनका कभी भी परिवार के सामने खुलासा नहीं किया गया।

इसके अलावा, उनका कहना है कि जो पर्चे उनके साथ साझा किए गए थे, उनमें कभी किसी तरह की बीमारी का जिक्र नहीं था। केवल कुछ दवाओं के नाम ही उन पर लिखे गए थे। वकील के मुताबिक, सुशांत सिंह राजपूत 8 जून की पोस्ट पर काफी डरे हुए थे, जिसके बारे में उन्होंने अपनी बहन को भी बताया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने वेतन से ₹2.25 लाख दान कर की थी ‘पीएम केयर्स फंड’ की शुरुआत

पीएम केयर्स फंड को लेकर एएक बहुत अच्छी बात सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी निजी बचत से 2.25 लाख रूपए पीएम केयर्स फंड में दान किए थे। 31 मार्च 2020 के दौरान फंड संबंधी रसीद और भुगतान के मुताबिक़ शुरूआती तौर पर 2.25 लाख रूपए दान किए गए थे।  

पीएम केयर्स फंड में हुए भुगतान की तस्वीर

इसके बाद 30,75,85,32,035 रूपए स्वैच्छिक तौर पर पीएम केयर्स फंड में दान किए गए थे। इसमें लगभग 39,67,748 रूपए विदेश से दान किए गए थे। रेगुलर खाते में इंटरेस्ट इनकम (ब्याज आय) और विदेशी सहयोग 35,32,728 और 575 रूपए था। वहीं 2049 रूपए का भुगतान बतौर सर्विस टैक्स कुल फंड से विदेशी धनराशि के परिवर्तन में किया गया था। 31 मार्च 2020 तक पीएम केयर्स फंड में कुल धनराशि 30,76,62,56,047 रूपए थी।

इस संबंध में एबीपी न्यूज़ के पत्रकार ने ट्विटर पर ट्वीट करके जानकारी भी दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स फण्ड की शुरुआत अपनी बचत के 2.25 लाख रुपए दान देकर की थी। ये रकम पीएम ने अपनी तनख्वाह से चुकाई थी, ABP न्यूज़ के पास फण्ड की ऑडिटेड स्टेमेन्ट की कॉपी है। यह कॉपी विपक्ष के सवालों का करारा जवाब है।’

कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप और प्रभाव बढ़ने के बाद 28 मार्च को पीएम केयर्स फंड (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations) की शुरुआत की गई थी। इसके अलावा एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की शुरुआत ‘Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund’ (PM CARES Fund)’ के नाम से की जाएगी। यह एक नेशनल फंड होगा जो कोरोना वायरस जैसी महामारी और आपदाओं का सामना करने के लिए समर्पित होगा।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रस्ट के चेयरमैन होंगे और इसके सदस्यों में गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं। भारत का हर वह नागरिक जो दान करना चाहता है वह pmindia.gov.in पर अपनी इच्छानुसार दान कर सकता है। दान करने के लिए अन्य जानकारी यह हैं: 

  • Name of the Account ——— PM CARES
  • Account Number ————– 2121PM20202
  • IFSC Code ———————— SBIN0000691
  • SWIFT Code ——————— SBININBB104
  • Name of Bank & Branch —– State Bank of India, New Delhi Main Branch