कर्नाटक कैथोलिक क्रिश्चियन एसोसिएशन (AKCCA) ने बेंगलुरु आर्कबिशप पीटर मैकाडो पर मल्टी-मिलियन डॉलर के घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया है। मैकाडो को पोप फ्रांसिस द्वारा बैंगलोर के महानगर आर्कबिशप के रूप में नियुक्त किया गया था। वह नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के एक मुखर आलोचक रहे हैं।
28 अगस्त को, AKCCA ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा आशा धर्मार्थ ट्रस्ट के वित्तीय गबन की जाँच करने की माँग की है, जो कि अभिलेखागार के स्वामित्व में है। समूह ने बेंगलुरु में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में ट्रस्ट पर 3 बिलियन ($ 42 मिलियन) के बेइमानी का आरोप लगाया है।
AKCCA नेता राफेल राज ने मीडिया को सूचित करते हुए बताया, “यह तीन अरब का घोटाला है, और इसकी जाँच की जरूरत है।” राज ने कहा कि विदेशों से धन इकट्ठा किया गया, मगर वादे के मुताबिक उसका इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया गया था, लेकिन अभिलेखागार ने इसे नजरअंदाज कर दिया और ‘दोषी’ के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए, मैकाडो ने बुधवार को कहा, “मैं किसी भी जाँच के लिए तैयार हूँ, क्योंकि मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। वे राई को पहाड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने ₹2 मिलियन ($ 28,000) की ‘हेरफेर’ के बारे में पता चलने के बाद एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा किया। कथित तौर पर इस मामले की बेंगलुरु पुलिस द्वारा जाँच की जा रही है।
गोवा क्रॉनिकल में एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश माइकल एफ सल्दान्हा ने 2018 में कूर्ग आपदा राहत कार्य के लिए एकत्रित 49.5 करोड़ रुपए के आपराधिक गबन के लिए पीटर मैकाडो और मैसुरु के बिशप केए विलियम के लिए दोषी ठहराया था।
विलियम पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए, उन्होंने लिखा, “हर कोई इस तथ्य को नजरअंदाज कर देता है कि यह आदमी वास्तव में धोखा दे रहा था और लूट रहा था क्योंकि चार महीने बाद भी पीड़ितों तक एक रुपया नहीं पहुँचा। प्राकृतिक आपदा के मामलों में राहत तत्काल और तेज होनी चाहिए। मगर इस मामले में कभी नहीं हुआ।”
पूर्व न्यायाधीश ने खुलासा किया कि विलियम और मैकाडो दोनों ने मिलकर दान के नाम पर 6 करोड़ रुपए जुटाए। उन्होंने कहा कि दोनों ने गायक सोनू निगम को सेंट जोसेफ हाई स्कूल ग्राउंड में मुफ्त में प्रदर्शन करने के लिए मना लिया, जबकि उन्होंने टिकट, प्रायोजकों से 13 करोड़ रुपए का शुल्क लिया। कुल मिलाकर, उन्होंने 49.50 करोड़ रुपए एकत्र किए।
विलियम ने राहत कार्य का वादा किया था, मगर प्रभावित लोग 24 महीने समाप्त होने के बाद अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। पूर्व न्यायाधीश ने अफसोस जताते हुए कहा कि इस आदमी ने यीशु का नाम लेकर कहा था कि पुनर्वास वास्तविक और सार्थक होगा।
मैकाडो पर गलत व्यवहार का आरोप लगाते हुए, पूर्व न्यायाधीश माइकल एफ सल्दान्हा ने लिखा, “शायद आर्कबिशप पीटर मैकाडो हमें बता सकते हैं कि बेघर व्यक्तियों के लिए कितने रैन बसेरों का निर्माण किया है क्योंकि संगीत समारोह के समय एक वर्ष पहले उनकी एक अपील यह भी थी। यदि यह अनुलग्नक में लिखा गया है तो वह निश्चित रूप से जवाबदेह है।”
Letter by Justice Michael F Saldanha – Page 1 (Image Courtesy: Goa Chronicle)
अपने बचाव में, पीटर मैकाडो ने कहा, “जस्टिस सलदान्हा के लिए बहुत सम्मान है लेकिन मुझे नहीं पता कि वह तथ्यों को सत्यापित किए बिना इस तरह के आरोप क्यों लगाते हैं। अगर हम पारदर्शी नहीं थे, तो हमने पुलिस को सूचना क्यों दी? सलदान्हा जैसे व्यक्ति से इस परिमाण के आरोप केवल चर्च की छवि को धूमिल करेंगे। हमें मिलने वाले हर पैसे का हिसाब है। हम हर साल अपने खातों का ऑडिट करते हैं और आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं।”
गौरलब है कि इससे पहले जनवरी में, बेंगलुरु आर्कबिशप ने प्रधानमंत्री से नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी। इस तथ्य की पूरी अवहेलना के साथ कि इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किया गया, पीटर मैकाडो ने एक ज्ञापन में कहा, “हम केंद्र सरकार से अपील करते हैं कि वह उनके धर्मों के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर अवैध प्रवासियों को नागरिकता न दें।” ध्रुवीकरण के ‘खतरों ’पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने आगे कहा, “धर्म कभी भी किसी देश की नागरिकता का मापदंड नहीं होना चाहिए। और न ही मतभेद होने पर हिंसा उसका समाधान हो सकता है।”
सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की मुश्किलें और भी बढ़ने वाली है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान गाजियाबाद में 51 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण किए गए आला हजरत हज हाउस की जाँच के आदेश दिए है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल नंदी ने हज हाउस के निर्माण में जरूरत से ज्यादा खर्च हुए धनराशि का पता चलने के बाद एसआईटी को जाँच के आदेश दिए है।
राज्य सरकार ने 31 अगस्त को यूपी पुलिस महानिदेशक एचसी अवस्थी को जारी किए आदेश में कहा कि विशेष जाँच दल (एसआईटी) को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करनी है।
गृह विभाग के अनुसार, यूपी राज्य हज समिति के सचिव और कार्यकारी अधिकारी राहुल गुप्ता ने 11 जून को एक विज्ञप्ति में योगी सरकार को हज हाउस के निर्माण में हुई गड़बड़ी के बारे में सचेत किया था। उन्होंने लिखा था कि निर्माण पर भारी धनराशि खर्च करने के बावजूद, कमियों को सुधारने और आम जनता के लिए प्रतिष्ठान को तैयार करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि एग्जेक्युटिंग एजेंसी, कंस्ट्रक्शन एंड डिज़ाइन सर्विसेज (C& DS) ने अब तक निर्माण के दौरान हुए खर्च का कोई विवरण नहीं दिया है।
गौरतलब है गाजियाबाद में यह हज हाउस सपा के कार्यकाल के दौरान बनाया गया था। उस वक्त सपा मुखिया अखिलेश यादव को तमाम तरह के मामलों से घिरे थे। वहीं चोरी और जालसाजी जैसे कई मामलों में आरोपित सपा नेता आज़म खान उनके मंत्रिमंडल का हिस्सा थे। सऊदी अरब के मक्का की तीर्थयात्रा पर जाने वाले मुस्लिमों को सहायता देने के लिए 51 करोड़ रुपए की लागत से आला हजरत हज हाउस का निर्माण किया गया था।
4.3 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस परिसर में 47 डोरमेट्री हॉल और 36 वीआईपी कमरे शामिल हैं। हज हाउस में 1,886 व्यक्ति बैठ सकते हैं। इस हज हाउस का उद्घाटन यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और राज्य के पूर्व अल्पसंख्यक मंत्री आज़म खान ने 4 सितंबर 2016 को किया था। इसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट न होने के कारण फरवरी 2018 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सील कर दिया था।
वहीं योगी आदित्यनाथ सरकार ने कोरोना वायरस को मद्देनजर रखते हुए गाजियाबाद के अर्थला में बने आलीशन आला हजरत हज हाउस को 500 बेड के आइसोलेशन सेंटर में बदलने की घोषणा की थी। ताकि इसमें कोरोना वायरस से संक्रमित या ग्रसित मरीजों को रखा जा सके।
चीन संबंधी मामलों के जानकारी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पैदा की जा रही है चुनौतियों से निपटने के लिए चर्चा की। यह चर्चा एक वेबिनार के ज़रिए आयोजित की गई और इसका शीर्षक था ‘Emperor Has No Clothes: China Under Xi Jinping’। इस आयोजन में अपने विचार रखने वाले मुख्य लोग थे ह्यूमैनिटेरियन चीन के सह संस्थापक, अध्यक्ष और तियानानमेन छात्र नेता ज्होऊ फेंगसुओ। द तिब्बत ब्यूरो और जेनेवा के विशेष कर्मचारी थिनले चुक्की और पत्रकार आदित्य राज कौल।
अपने थियानमेन स्क्वायर प्रोटेस्ट के दौरान अपने संघर्षों को याद करते हुए ज्होऊ फेंगसुओ ने कहा ‘मेरी कहानी साल 1989 में शुरू हुई थी। जब थियानमेन विरोध प्रदर्शन हुआ था, इस विरोध प्रदर्शन ने चीन के लोगों ने आज़ादी और लोकतंत्र का सपना देखा था। यह पहला ऐसा मौक़ा था जब चीन के लोगों ने आज़ादी के लिए अपना प्यार और जुनून जाहिर किया था। तब से मैं संघर्ष कर रहा हूँ कि चीन का आने वाला कल आज़ादी और लोकतंत्र की बुनियाद पर खड़ा हो। सिर्फ इस वजह से ही आज मैं यहाँ पर हूँ।’
इसके बाद फेंगसुओ ने कहा ‘मेरा संस्था ह्यूमैनिटेरियन चाइना चीन में आम लोगों के मानवाधिकारों के लिए काम करती है। हम हर साल चीन की जेलों में बंद 100 से 200 राजनीतिक कैदियों की मदद करते हैं। यह संख्या काफी ज़्यादा है फिर हम ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचने की कोशिश करते हैं। दुर्भाग्य की बात है कि चीन में ऐसे राजनीतिक कैदियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। हमारा लक्ष्य है कि हम ऐसे लोग चीन में प्रताड़ित किए जा रहे हैं उन्हें बाहर की दुनिया और लोगों से जोड़ें। इसके अलावा चीन में आज़ादी के लिए जारी प्रदर्शन को बढ़ावा मिले।
इसके अलावा फेंगसुओ ने चीन के थियानमेन प्रदर्शन को नियंत्रित करने के तरीके और वुहान कोरोना कोरोना वायरस महामारी के बीच तुलना की। तुलना के दौरान उन्होंने कहा, “हाल ही में पेकिंग यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक को कई साल के कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। जेल में रहने हुए उन्होंने चीन में फैली इस महामारी पर एक पत्र लिखा था और दुनिया के देशों से निवेदन किया था कि वह इस मुद्दे पर कार्रवाई करें।”
वुहान काफी कुछ थियानमेन जैसा है, लोगों को यहाँ बात करने की आज़ादी नहीं है। लोगों के पास ऐसा कोई ज़रिया ही नहीं है जिसकी मदद से वह अपनी बात रख सकें। चीन की कम्युनिस्ट सरकार के तानाशाही रवैये की वजह से कोरोना वायरस महामारी एक वैश्विक ख़तरा बन गई। हैरानी की यह थी कि चीन के मेडिकल जनरल ने 26 फरवरी को दावा किया था कि उन्होंने कोरोना वायरस की वैक्सीन बना ली है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता ने इस बात पर भी ज़ोर किया कि कैसे चीन दुनिया के लिए एक ख़तरा है। उन्होंने भारत के चीनी एप्लीकेशन पर पाबंदी लगाने के फैसले की सराहना की। साथ ही यह भी कहा कि भारत की तरह दुनिया के अन्य देशों को ऐसे कदम उठाने चाहिए। फिर उन्होंने इस बात की उम्मीद भी जताई की भारत और ताइवान के बीच कूटनीतिक स्तर पर अच्छे संबंध बनें। इसके अलावा उन्होंने चीनी फायरवॉल पर भी चिंता जताई।
फ़िलहाल फेंगसुओ को चीन से देश निकाला दिया जा चुका है। थियानमेन में हुए नरसंहार के दौरान वह एक छात्र नेता थे। प्रदर्शन में शामिल होने की वजह से उन्हें भी जेल भेज दिया गया था। चीनी सरकार ने थियानमेन में हुए विरोध प्रदर्शन को दबाने का प्रयास किया था जिसके बाद नरसंहार हुआ था। इतने सालों के बावजूद इस बात का पता नहीं चल पाया है कि उस नरसंहार में कुल कितने लोग मारे गए थे।
उद्यमी अरुण पुदुर ने शुक्रवार (सितंबर 4, 2020) को ‘पत्रकार’ सबा नकवी द्वारा 2018 में पोस्ट किया गया एक पुराना ट्वीट खोज निकाला है। इस ट्वीट में सबा नकवी ने सांभर पाउडर मसाला के भगवाकरण के बारे में उल्लेख करते हुए अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाया है। ईस्टर्न कंडीमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (Eastern Condiments Pvt Ltd) द्वारा निर्मित ‘ब्राह्मण सांभर पाउडर’ की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए पत्रकार ने ट्वीट किया था, “कर्नाटक के तट के पास कारवार क्षेत्र में मेरी खोज। अनंत कुमार हेगड़े देश (एक हिंदू भूमि की तरफ इशारा करते हुए)…..”
My discovery in karwar region near coast of Karnataka. Anant Kumar hedge country…. pic.twitter.com/CeyFOjHjvI
सबा नकवी के आरोपों का जवाब देते हुए कि यह उत्पाद ब्राह्मणवादी वर्चस्व का परिणाम है, अरुण पुदुर ने ट्वीट किया, “पत्रकार’ ब्राह्मणों पर हमला करती रहती हैं, जबकि उनमें से किसी ने भी न तो कोई दंगा किया और न ही खुद को उड़ा लिया!” नकवी पर बौद्धिक बेईमानी का आरोप लगाते हुए उद्यमी ने उक्त मसाला पाउडर के पीछे की असली कहानी बताई।
‘Journalists’ keep attacking Brahmins even though none of them did any riots or blow themselves up!
Zero research too the company that makes Brahmin Sambar Powder, 500 crs Eastern Group of Companies is owned by Late Mr. Meeran who is Kerala Muslim.
ईस्टर्न कंडीमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (Eastern Condiments Pvt Ltd) की वेबसाइट पर जाकर हमने कंपनी के इतिहास के बारे में पता किया। कंपनी (जो पहले ईस्टर्न ट्रेडिंग कंपनी के रूप में जानी जाती थी) की स्थापना एमई मीरान ने की थी। वो केरल में एक मुस्लिम परिवार से थे। उनके मुस्लिम धर्म के प्रति आस्था के बारे में पता लगाने के लिए हमने ऑनलाइन रिपोर्टों की जाँच की। इस दौरान हमें 2011 में उनकी मृत्यु के बाद प्रकाशित एक लेख मिला। जिसमें लिखा गया था कि उन्हें शाम पाँच बजे Adimaly Jamath Mosque में दफनाया जाएगा।
Screengrab of the Eastern Condiments website
इससे यह स्पष्ट होता है कि ‘ब्राह्मण सांभर पाउडर’ हिंदुओं द्वारा संचालित कंपनी द्वारा निर्मित नहीं है। ब्राह्मण भोजन या तमिल ब्राह्मण भोजन अनिवार्य रूप से ’सात्विक’ भोजन है, जिसमें प्याज या लहसुन शामिल नहीं है। कुछ पारंपरिक ब्राह्मण घरों में ड्रमस्टिक्स, लौकी, गाजर आदि शामिल नहीं हैं, क्योंकि उन्हें ‘सात्विक’ नहीं माना जाता है। हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे लोग इसे खरीद या खा नहीं सकते हैं। ‘ब्राह्मण सांभर पाउडर’ के मामले में भी यह किसी भयावहता के बजाय एक व्यंजन विशिष्ट घटक है।
सात्विक भोजन हलाल की तरह भेदभाव नहीं करता है
सात्विक भोजन के विपरीत, हलाल केवल एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है। इस प्रकार, हलाल फर्म में गैर-मुस्लिमों को स्वचालित रूप से रोजगार से वंचित कर दिया जाता है। हलाल में जानवर की गले की नस में चीरा लगाकर छोड़ दिया जाता है, और जानवर खून बहने से तड़प-तड़प कर मरता है।
इसके अलावा मारे जाते समय जानवर को मुस्लिमों के पवित्र स्थल मक्का की तरफ़ ही चेहरा करना होगा। लेकिन सबसे आपत्तिजनक शर्तों में से एक है कि हलाल मांस के काम में ‘काफ़िरों’ (‘बुतपरस्त’, गैर-मुस्लिम, जैसे हिन्दू) को रोज़गार नहीं मिलेगा। यानी कि यह काम सिर्फ मुस्लिम ही कर सकता है।
इसमें जानवर/पक्षी को काटने से लेकर, पैकेजिंग तक में सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम ही शामिल हो सकते हैं। मतलब, इस पूरी प्रक्रिया में, पूरी इंडस्ट्री में एक भी नौकरी गैर-मुस्लिमों के लिए नहीं है। यह पूरा कॉन्सेप्ट ही हर नागरिक को रोजगार के समान अवसर देने की अवधारणा के खिलाफ है। बता दें कि आज McDonald’s और Licious जैसी कंपनियाँ सिर्फ हलाल मांस बेचती है।
भारतीय रेलवे (Indian Railways) जल्द ही कई पदों पर भर्तियाँ करेगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार (सितंबर 5, 2020) को ट्वीट करते हुए बताया कि रेलवे में 1 लाख 40 हजार, 640 पद खाली पड़े हैं, जिस पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।
देश के बेरोजगार युवाओं की चिंता को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर कहा है कि रेलवे में विभिन्न पदों की सभी 3 श्रेणियों के लिए भर्ती प्रक्रिया के आवेदनों की जाँच पूर्ण की जा चुकी है, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का आयोजन 15 दिसंबर से शुरु किया जाएगा।
रेलवे में विभिन्न पदों की सभी 3 श्रेणियों के लिये भर्ती प्रक्रिया के आवेदनों की जांच पूर्ण की जा चुकी है, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिये परीक्षाओं का आयोजन 15 दिसंबर से शुरु किया जायेगा। pic.twitter.com/FUqXkfjxl7
पीयूष गोयल ने कहा इन पदों के लिए हमें 2 करोड़ 42 लाख आवेदन मिले हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण भारतीय रेलवे इन पदों के लिए एग्जाम का आयोजन नहीं करवा पाया था, इसलिए अब परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कंप्यूटर बेस टेस्ट के आधार पर इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बता दें कि कोरोना महामारी की वजह से कई सरकारी विभागों में नई बहाली लंबित है। ऐसे में बेरोजगार युवा काफी निराश हैं। इन नौजवानों का कहना है कि सरकार जब NEET व JEE जैसे परीक्षा को हर हाल में आयोजित करा रही है तो SSC व रेलवे की परीक्षाओं को लेकर सरकार कोई फैसला क्यों नहीं ले रही है।
गौरतलब है कि रेलवे ने बिहार में NEET और JEE परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए 2 से 15 सितंबर तक 20 जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला किया। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह सुविधा नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को भी दी जाएगी।
बिहार में JEE Mains, NEET व NDA में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा सेंटर तक आने-जाने की सुविधा हेतु भारतीय रेलवे ने 2 से 15 सितंबर तक 20 जोड़ी MEMU/DEMU स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। pic.twitter.com/3jNXvfUE2m
मंत्री ने ट्वीट किया था, “बिहार में JEE Mains, NEET व NDA में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा सेंटर तक आने-जाने की सुविधा हेतु भारतीय रेलवे ने 2 से 15 सितंबर तक 20 जोड़ी MEMU/DEMU स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है।” राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 13 सितम्बर को जबकि इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन एक से छह सितम्बर तक आयोजित करने की योजना बनायी गई है। कॉमन एनडीए 2020 परीक्षा 6 सितम्बर को निर्धारित है।
कोरोना महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के बाद से आर्थिक संकट से जूझ रहे कुपोषित परिवारों के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बड़ी राहत का ऐलान किया है। राज्य में पोषण की बिगड़ती स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रदेश सरकार ने ऐसे कुपोषित परिवारों, जिनके पास गाय रखने हेतु स्थान हो और जो लोग गौ-पालन के इच्छुक हों, उन्हें गाय देने का सभी जिला प्रशासन को निर्देश जारी कर दिया है।
दरअसल, योगी सरकार ‘माननीय मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ के तहत इस कार्य को करने जा रही है। इसके साथ ही गाय के भरण-पोषण हेतु हर महीने 900 रुपए की धन राशि मुहैया कराई जाएगी। राष्ट्रीय पोषण माह को लेकर लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को यह निर्देश जारी कर दिया है।
7 सितंबर से शुरू होने वाले राष्ट्रीय पोषण माह 2020 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले छ: महीनों में कुपोषण को एक प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा है। इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण का उन्मूलन करना और माताओं के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना है। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कुछ सबसे कुपोषित बच्चों के माता-पिता से भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बहराइच, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी और बाराबंकी जिलों के इस योजना के तहत लाभान्वित होने वाले माता-पिता से बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में भी जानकारी ली।
कुपोषित परिवारों को मिलेगी गाय: मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी
गाय की यह व्यवस्था ‘माननीय मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ के तहत की जाएगी। pic.twitter.com/LdV3vDLsg5
योगी सरकार ने राज्य में पीएम मोदी के पोषण माह की पहल के तहत पोषण अभियान शुरू किया है। पिछले महीने अपने मन की बात संबोधन में, पीएम मोदी ने घोषणा की थी कि सितंबर का महीना पोषण महीने के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक पोषण बैंक की स्थापना करेगी और हर कक्षा में एक पोषण निगरानी नियुक्त करेगी। छात्रों को पोषण कार्ड भी रिपोर्ट कार्ड की तरह मिलेगा।
सीएम योगी ने पोषण अभियान के संबंध में प्रशासन को दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को चिन्हित करके उन्हें समय से पोषण संबंधी सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने निर्देश दिया है कि प्रक्रिया शुरू होने से पहले बच्चों की ऊँचाई और वजन को मापने के लिए एक दिन का अभियान चलाया जाए। अभियान को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने कहा कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया जाएगा। मार्च 2021 में इसका मूल्यांकन किया जाना है। इस योजना के अंतर्गत बच्चों के साथ कुपोषित माँ को भी चिन्हित कर योजनाओं का लाभ देने के लिए कहा गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला स्तर पर कार्यक्रम की साप्ताहिक और मंडलायुक्तों को पाक्षिक समीक्षा करने का निर्देश दिया। समीक्षा की रिपोर्ट विभाग के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेजने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की विभागीय और मुख्य सचिव के स्तर पर मासिक समीक्षा हो।
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास एस. राधा चौहान ने बताया कि राजकीय शोक के कारण इस साल राष्ट्रीय पोषण माह सात सितंबर से शुरू किया जा रहा है। निदेशक राज्य पोषण मिशन कपिल सिंह ने राष्ट्रीय पोषण माह के बारे में एक प्रस्तुतीकरण भी किया। बताया कि पोषण माह की टैग लाइन ‘उत्तम पोषण-उत्तर प्रदेश रोशन’ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुपोषण की समस्या के समाधान के लिए केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा कार्यक्रमों को प्रभावित लोगों तक बेहतर ढंग से पहुँचाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय पोषण माह की सफलता के लिए इसे जन-आन्दोलन बनाना पड़ेगा। कुपोषण से होने वाले नुकसान एवं केन्द्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में जन-जागरूकता पैदा करनी पड़ेगी।
उन्होंने आगे कहा कि इस कार्यक्रम में सभी सम्बन्धित विभागों यथा स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्राम्य विकास, पंचायतीराज, कृषि, उद्यान आदि को सहयोग करना होगा। पोषण कार्यक्रम के साथ ही टीकाकरण कार्यक्रम को भी समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जाए। इन कार्यक्रमों का लाभ बालकों एवं बालिकाओं को बिना भेदभाव के उपलब्ध कराए जाने के संबंध में भी जागरूकता पैदा की जानी चाहिए। उन्होंने किचन गार्डन विकसित करने के लिए प्रेरित व प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया है।
दिल्ली के ओखला फेस-2 इलाके में आम आदमी पार्टी के ऑफिस के पास 3 सितंबर को दो पक्षों में आपसी झड़प का मामला सामने आया। घटना में बिरजू दास और उनका परिवार बुरी तरह घायल हो गया। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि उनके साथ भी मारपीट हुई। पुलिस ने इस केस को ‘पार्किंग को लेकर हुआ विवाद’ बताया है। हालाँकि, बिरजू दास के परिवार का कहना है कि यह पुरानी रंजिश के चलते हमला हुआ और गाड़ी पार्किंग सिर्फ एक बहाना था। घटना में बिरजू दास का पाँव टूट गया है। उनका इलाज फिलहाल एम्स में चल रहा है। संभवत: सोमवार को उनका ऑपरेशन किया जाएगा।
घायल बिरजू दास का बयान
ऑपइंडिया के संज्ञान में जब यह मामला आया। हमने अस्पताल में भर्ती बिरजू दास से पूरा मामला जानने का प्रयास किया। बिरजू ने आपबीती बताते हुए कहा, “वे लोग पहले से हमारी बेटियों के साथ छेड़छाड़ करते थे। हमारी बड़ी बेटी से पहले छेड़छाड़ हुई। फिर छोटी बेटी से भी बदसलूकी हुई। पिछले साल उसे घर में घुस कर मारा भी गया। हमने हर मामले में शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन हर बार बात आई-गई हो गई। इस बार उन्होंने गाड़ी पार्क के बहाने झगड़ा शुरू किया। उनके पास पिस्टल तक थी।”
बिरजू दास का बयान
बिरजू कहते हैं, “उन लोगों की प्लॉनिंग पहले से थी। उन्हें किसी बहाने से बस झगड़ा करना था। इसलिए उन्होंने उस दिन वहीं गाड़ी पार्क की जहाँ मैं करता था। हमने जब उनसे कहा कि भैया गाड़ी हटा लो। हमें गाड़ी पार्क करनी है। इतना सुनते ही उन्होंने पिस्टल निकाल ली और हमसे हाथापाई छीनाझपटी करने लगे। हमारा पाँव तोड़ दिया गया। जब बच्चे हमें बचाने आए, तो उनकी भी पिटाई कर दी।”
बिरजू का आरोप है कि घटना में उनका पाँव तक टूट गया। मगर, पुलिस ने उपयुक्त धाराओं में केस दर्ज नहीं किया। उनका कहना है कि इस केस में सामान्य धाराओं में केस दर्ज हुआ है। जिसके कारण आरोपितों को सिर्फ़ पूछताछ करके छोड़ दिया गया। जबकि वह अस्पताल में हैं। उनकी बेटियों और पत्नी को टाँके आए हैं। उनके पैर का ऑपरेशन भी सोमवार को किया जाएगा।
मामला दर्ज
यहाँ बता दें कि इस केस में 4 सितंबर 2020 को ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में एफआईआर दर्ज हुई है। जाँच की जिम्मेदारी पुलिस अधिकारी अखिलेश कुमार को सौंपी गई है। आरोपितों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 34,506,323,341 के तहत मामला दर्ज हुआ है।
शिकायत में बताया गया है कि उस रात करीब 9-9:30 बजे बिरजू अपनी बाइक खड़े करने गए थे। लेकिन दूसरी गाड़ी देखकर पूछा कि यह गाड़ी किसकी है। जिस पर सललन ने कहा कि गाड़ी नहीं हटेगी। तभी राजा उर्फ कुर्शीद ने पिस्टल निकाल ली। लेकिन बिरजू ने उनकी पिस्टल पकड़ ली। इसके बाद वे सारे लोग उन्हें मारने लगे, जिसकी वजह से वह रोड पर गिर गए। इसके बाद उन्हें नहीं पता कि कौन कहाँ गया। इसी बीच किसी ने 100 नंबर पर फोन मिला दिया और पुलिस ने उन्हें व उनकी पत्नी को एम्स में भर्ती कराके बयान लिखा। एफआईआर में माँग है कि सललन, अंसारी, व राजा उर्फ कुर्शीद पर कानूनी कार्रवाई हो।
एफआईआर में बयान का हिस्सा
पुलिस का बयान
ऑपइंडिया ने इस संबंध में जाँच अधिकारी अखिलेश कुमार को भी संपर्क किया। उन्होंने बताया कि इन लोगों का पार्किंग को लेकर आपस में झगड़ा हुआ था तो पूरे केस में क्रॉस मुकदमे दर्ज हुए हैं। दूसरे पक्ष ने भी मारपीट का केस किया। उन पर भी चोट लगी है। उनकी भी दो एमएलसी बनी है। हालाँकि, बिरजू दास की जो कंप्लेन हैं, उसकी कार्रवाई में 3 गिरफ्तार हुए हैं।
दूसरे पक्ष का आरोप
अखिलेश कुमार बताते हैं कि दूसरे पक्ष ने अपनी शिकायत में कहा है कि 20 दिन पहले उनके पिता की मृत्यु हुई थी और उस दिन वह इसी कारण से मजदूरों के लिए गाड़ी में खाना लेकर जा रहे थे। वे कहते हैं कि दूसरे पक्ष का आरोप है कि बिरजू दास की ओर से यह सब जानबूझकर किया गया है। उन्होंने ही आकर पहले गाड़ी हटाने को बोला और फिर गाली गलौच की। इसी के बाद दूसरे पक्ष ने कहा कि गाड़ी नहीं हटेगी।
बिरजू दास के आरोपों पर जाँच अधिकारी कहते हैं कि उनकी बातें केवल एक पक्ष हैं। इससे निर्णय नहीं लिया जा सकता। मगर, हकीकत जो है वो यही है कि पार्किंग विवाद पर पूरा मामला हुआ। उनकी मानें तो सरकारी कैमरे की फुटेज और आसपास के लोगों से पूछताछ करके मामले की जाँच चल रही है। पुलिस दोनों पक्षों को सुन रही है। बिना जाँच के 307 जैसी धाराएँ नहीं लग सकतीं। पुलिस ने हमसे बातचीत में दोनों पक्षों के बीच हुए पुराने विवाद की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इनके बीच रंजिश पुरानी है।
3 सितंबर को बिरजू दास की बेटियों की आपबीती
इस केस में एक ओर जहाँ बिरजू दास से मारपीट के मामले में दूसरे पक्ष ने खुद को भी पीड़ित बताया है। वहीं, यह गौर करने वाली बात है कि बिरजू दास की बेटियों का इस पूरे केस पर कुछ और ही मत है। अपने पिता के साथ हुई मारपीट के मामले में लड़कियाँ इस पूरी घटना की पृष्ठभूमि उनसे जुड़ी घटनाओं को बताती हैं। छोटी बेटी कहती हैं कि उसे घटना के चार दिन पहले ही धमकी मिल गई थी। आरोपित लड़कों ने उससे कहा था “देखो तुम्हारे साथ क्या करते हैं।”
घटना के समय की वीडियो का स्क्रीनशॉट
बिरजू दास की बड़ी बेटी ऑपइंडिया को बताती हैं, “उस दिन ये सब लोग पहले से उसी जगह मौजूद थे, जहाँ पापा की बाइक खड़ी होती थी। जब मारपीट हुई तो हमें किसी से पता चला कि हमारे पापा का झगड़ा हो गया। हम देखने गए। लेकिन हमने देखा कि पापा तो वहाँ जमीन पर पड़े थे और सललन घुटना रख कर उनकी छाती पर चढ़ा हुआ था। उन्होंने पापा को गाड़ियों के बीच में रखा हुआ था, ताकि दिखे न। लेकिन मेरी नजर वहाँ पड़ गई। हमने देखा पापा अधमरे पड़े हुए थे। उनकी टाँग तोड़ दी गई थी, उन पर चाकू से हमला भी हुआ था। हमने उन्हें हटने को कहा। तभी उस लड़के के भाई और 4-5 लड़कों ने मुझे घेर लिया और कहा- इस बहन की *&%$ मार। उन्होंने मेरी चोटी खींच कर मारा।”
हमले में बिरजू दास की बेटियों और पत्नी को आई चोटें
बिरजू की बड़ी बेटी ज्योति के अनुसार, ये सारे लड़के उन्हीं की झुग्गियों से थे। बस कुर्शीद बाहर से आया था। बिरजू की बड़ी बेटी कहती हैं कि दूसरे पक्ष की ओर से औरतों ने भी उन पर हमला बोला। उन्हें बेरहमी से मारा। ईंट-पत्थर-डंडे चलाए गए। छोटी बहन सोनी को भी मारा और उससे छोटी वाली बहन, जो कुछ बोलती-सुनती नहीं है उसे भी चाकू से हमला किया। हालाँकि उसको बस नोक लगी, जिससे उसके गड्ढा हो गया। उसे टाँके आए हैं। लड़की के अनुसार, घटना में उसके परिवार पर इतनी बुरी तरह हमला हुआ कि उनकी माँ को 6 टाँके आए हैं, एक बहन को 5 टाँके आए हैं। वहीं उससे छोटी बहन को 2-3 टाँके आए हैं।
बिरजू दास की पत्नी और बेटियों को आई चोटें
ज्योति का आरोप है कि जब पुलिस आई तो उन्होंने मामला सुनने की बजाय उलटा उन्हें हड़का दिया। वहीं दूसरे पक्ष ने उन पर मारपीट का आरोप जो लगाया है, वो गलत है। उन्होंने खुद ही खुद को बेल्ट से मारा। यह चीज सड़क चलते लोगों ने भी देखी कि वह खुद ही खुद को मार रहे थे। पुलिस के सामने भी ऐसी ही नाटक किया गया। सललन ने खुद अपने भाई अंसारी का गला दबाया था और खुद ही चिल्लाकर वहाँ लेट गया। जबकि उस समय उनके पापा तो सड़क पर पड़े हुए थे। उनकी हालत ऐसी थी कि 4 लोगों ने उन्हें उठाकर गाड़ी में रखा और अस्पताल लेकर गए।
लड़कियों से छेड़छाड़ और मारपीट कर चुके हैं आरोपित
ज्योति पिछले केस के बारे में बताती हैं कि उनकी छोटी बहन सोनी पर एक साल पहले अंसारी ने ही अपने माँ-बहन-भाई के साथ हमला किया था। वे कहती हैं, “हमले के समय सोनी घर में अकेली थी। तब भी हमने कंप्लेन करवाई थी। लेकिन उस बार समझौता हो गया था, क्योंकि अंसारी की मम्मी ने हमारे पापा के पास जाकर हाथ जोड़ने लगी थी। जिसकी पापा ने रिकॉर्डिंग भी की। लेकिन झगड़े वाले दिन दूसरे पक्ष ने उस दिन की घटना की रिकॉर्डिंग व उससे पहले की सारी रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी।”
ज्योति बताती हैं, “राजा उर्फ कुर्शीद मेरे पीछे काफी समय से पड़ा हुआ था और मुझसे शादी के लिए कहता था। जबकि वह खुद पहले से शादीशुदा है। लेकिन तब भी मुझसे कहता था, ‘मैं उसे भी रखूँगा और तुझे भी रखूँगा।’ इस पर भी पापा ने कुर्शीद के ख़िलाफ़ केस किया था। उस समय भी समझौता हुआ। फिर सोनी के साथ घटना घटी और कुछ दिन में उससे मारपीट हो गई। अब चौथी बार यह सब हुआ।”
ज्योति बताती हैं कि राजा ने उन्हें धमकी दी हुई थी। वह कहता है, “मैं तेरे परिवार को वैसे भी नहीं छोड़ूँगा।” उन्हें नहीं पता था कि वो सच में ऐसा कुछ कर देगा। वह बताती हैं कि ये लोग आपराधिक प्रवृति के हैं। एक बार साईं संध्या में भी इन्होंने कुछ अन्य लोगों के साथ मिल कर गोली चला दी थी और दो भाइयों को मारा भी था। इस केस में अब भी एक आरोपित जेल में बंद है जबकि सललन निकल आया।
पिछले साल दर्ज मामले में एफआईआर का हिस्सा
छोटी बेटी ने डर से छोड़ी रेगुलर पढ़ाई
बिरजू दास की छोटी बेटी ने जब ऑपइंडिया से बात की। तो उसने भी कई चौंकाने वाली बातें बताई। सोनी ने कहा कि उसके साथ यह सब इतनी बार हुआ है कि उसने डर कर स्कूल जाना भी छोड़ दिया और अब ओपन से पढ़ाई करती है। उसे कोचिंग जाते वक्त भी ये लोग अक्सर परेशान करते थे जिसकी वजह से उसने अपनी माँ को बताया भी था। इससे पहले जब उसके साथ छेड़खानी और मारपीट हुई थी, तब वह इतना घबरा गई थी कि महिला आयोग में शिकायत के बाद उसे 10 दिन तक घर से अलग रखा गया।
सोनी आपबीती सुनाते हुए कहती हैं कि इस घटना के घटने से पहले उनके साथ गली में आते-जाते छेड़छाड़ होती थी। अफसेन, इमरान और रियाज मिल कर छेड़ते थे और जिस अंसारी ने आज पापा पर हमला किया है, उसी ने उन्हें घर में अकेला पाकर अपने भाई-बहन-माँ के साथ मारा था। मगर तब समझौता हो गया था क्योंकि वह भी नाबालिग था। हालाँकि उसने तब भी धमकी देते हुए कहा था, “मेरे भाई (सल्लन) को छूटने दे, तब देख तेरे परिवार का क्या करता हूँ।” लेकिन तब सोनी ने इतना गौर नहीं किया।
आगे वे कहती हैं, “पर मैं एक हफ्ते अपने घर से अलग रही थी, ताकि कोई खतरा न हो। मुझे लगा जब घर में घुस कर हमला कर सकते हैं तो कुछ भी हो सकता है, इसलिए मैं चली गई और 10 दिन बाद लौटी। जब वापस आई तो एक महीने बाद उसका भाई छूट गया। इन लोगों ने हमारे पापा के ड्राइवर को भी मारा। फिर पापा ने केस किया। जब पुलिस वाले उठा कर ले गए तो पहले कहा कि मैंने नहीं मारा। लेकिन बाद में स्वीकार कर लिया कि उसे लगा था ड्राइवर हमारा रिश्तेदार है। इस मामले में भी समझौता हुआ था।
सोनी के अनुसार, “आए दिन कुछ न कुछ होता देख मैंने अपना स्कूल छोड़ दिया। मुझे लगा कुछ भी हो सकता है। इस बीच मेरी कंपार्टमेंट भी आई। मगर, स्कूल छोड़ने का कारण इन लोगों का डर ही था। मैंने सोचा इन लोगों के चक्कर में वैसे भी मेरी जिंदगी बेकार हो रही है। इसलिए मैंने ओपन से फॉर्म भरा। लेकिन इन्होंने तब भी मेरा पीछा नहीं छोड़ा। कोचिंग जाते हुए परेशान करने लगे। अंसारी के भाई सललन ने तब मुझे फ्रेंडशिप के लिए कहना शुरू किया “
सोनी के मुताबिक वह कहता था, “मैं तुझे पसंद करता हूँ, मुझसे दोस्ती कर ले। तुझे गली में सब दिखते हैं, मैं ही नहीं दिखता।” लेकिन उन्होंने कहा, “बाकी सबको मैं जानती हूँ, तुम लोगों से मुझे फ्रेंडशिप तो क्या बात करना भी नहीं पसंद। इसके बाद वो मेरा पीछा करने लगे। डर कर मैं कुछ दिन कोचिंग भी नहीं गई। फिर इस हालिया घटना से चार दिन पहले सललन ने मुझे पूछा कि आखिरी बार पूछ रहा हूँ तू मुझे फ्रेंडशिप करेगी कि नहीं। जिस पर मैने फिर मना कर दिया और उसने यह सुन कर कहा, ‘देख मैं तेरे साथ क्या करता हूँ।’ और देखो चार दिन बाद उसने क्या किया।”
मारपीट की घटना से पहले की बात बताते हुए सोनी कहती हैं, “मेरे पीछे 4 लड़के पड़े हुए थे और इधर-उधर हाथ लगाने की कोशिश करते थे। इसके बाद हालिया घटना में भी मुझे घेरने की कोशिश हुई। मुझ पर ईंट पत्थर चलाए गए। मैंने भागने की कोशिश की। लेकिन मेरे पाँव में चोट आ गई थी।” वह कहती हैं कि एक ने तो मुझे पीछे से आकर पकड़ भी लिया था। लेकिन मैंने उसे जब मारा तो उसने मुझे छोड़ा। सोनी का कहना है कि अगर उस दिन वह वहाँ से नहीं भागतीं तो उनके साथ कुछ भी हो सकता था।
पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट है बिरजूदास का परिवार
यहाँ बता दें कि बिरजू दास की बेटियाँ पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि पुलिस उनकी बात पर यकीन नहीं कर रही है। उन्होंने जब अपनी बातें बताईं तो उनसे कहा गया, “कहानी मत गढ़। झुग्गी में क्या तू ही खूबसूरत लड़की है जो बस तेरे पीछे आएगा वो?” सोनी पूछती हैं क्या किसी लड़की को खूबसूरत होने न होने पर ऐसे कहा जाना चाहिए?
वह कहती हैं कि इस केस में उनके पापा पर गोली चलाने के लिए दूसरे पक्ष द्वारा पिस्टल निकाली गई थी। लेकिन चूँकि पापा ने पिस्टल पकड़ ली तो उन पर उलटा इल्जाम लग गया। सोनी के अनुसार, बयान में यह लिख दिया गया था कि बिरजू ने भी गोली चलाई,जबकि यह झूठ था। इसलिए उन्होंने शिकायत में से यह सब हटाने को कहा और तभी साइन किया।
बेटियों के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से उन्हें खाने-पीने की बहुत दिक्कत है। अब उनके पापा के पैर के ऑपरेशन के लिए पैसा चाहिए। उनकी चिंता है कि यह सब कैसे होगा। इस पर पुलिस का ऐसा रवैया उन्हें बहुत दुखी करता है।
वे दुखी मन से पूछती हैं, ”अगर हमारा किसी से बात करने का मन नहीं है, तो हम कैसे कर लें। लड़कियाँ जब किसी के साथ जाती हैं, तो आपसी सहमति होती है। लेकिन जब लड़की राजी नहीं है, तो ये सब करना जरूरी होता है क्या? उन लोगों ने मुझे यहाँ तक कहा है, ’जो तू इतनी खूबसूरती लेकर घूमती है न, इस पर ऐसा दाग लगाऊँगा कि तू कभी सोच भी नहीं सकती है।’ मैंने तब भी कुछ नहीं कहा। सिर्फ़ मम्मी को बताया, पापा को वो भी नहीं। क्योंकि वो पढ़ाई रुकवा देते। आज मैं ओपन से पढ़ रही हूँ। लेकिन अब आगे ऐसा तो नहीं हो सकता न कि मैं इन लोगों के चक्कर में बस घर में बैठूँ।”
सीसीटीवी फुटेज
बता दें, इस घटना की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई हैं। वीडियो में पूरा झगड़ा कैद हुआ है। लड़कियों पर लाठी-डंडे से हमले की घटना इसमें साफ देखी जा सकती है। इसके अलावा जगह पर कई लोगों की भीड़ दिख रही है। जो संभवत: बिरजूदास और उनके परिवार पर हमला बोल रहे हैं। इस बीच कुछ महिलाओं में भी आपसी झड़प देखने को मिल रही हैं। ज्योति और सोनी का कहना है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने ही उन पर हमला बोला। उन लोगों के पास कुछ नहीं था। लाठी-डंडे भी दूसरे पक्ष ने चलाए। हालाँकि, पुलिस के मुताबिक, दूसरे पक्ष से भी मारपीट हुई है।
दिल्ली में सुदर्शन वाहिनी के उपाध्यक्ष सागर मलिक कर रहे इंसाफ की माँग
ओखला फेस 2 में 3 सितंबर को घटी इस घटना के मद्देनजर सुदर्शन वाहिनी के उपाध्यक्ष सागर मलिक भी इस मामले में बिरजूदास के परिवार के लिए इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जब पहले मामले (छेड़खानी) में शिकायत दर्ज हुई थी। उस समय तीन (अफसेन, रियाज और इमरान) लोग गिरफ्तार हुए थे। जब आरोपित छूटा तो ये घटना घटी। आज भी पुलिस ने गैर जमानती धाराएँ लगा दी हैं। टाँग टूठने के बावजूद अंग भंग का मुकदमा नहीं दर्ज किया गया।
इसके अलावा घटना जानते हुए और परिवार से बात करने के बाद वह मानते हैं कि यह हत्या के प्रयास की कोशिश थी। बावजूद इसके धारा 307 इसमें शामिल नहीं की गई। उनका भी यह कहना है कि 3 सितंबर को जो भी हुआ वह पुरानी रंजिश के चलते हुआ है। क्योंकि पुराने केस में आरोपित लड़के जेल गए थे। इसलिए यह सब सुनियोजित ही लग रहा है, परिवार पर बहुत बुरी तरह हमला बोला गया है। हमले में चाकू-छूर्रियों को भी इस्तेमाल हुआ है।
इंटरनेट पर भी वायरल हुआ मामला
उल्लेखनीय है कि इस केस को लेकर सोशल मीडिया पर भी उचित कार्रवाई की माँग उठ रही है। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल उमराँव ने घटना का जिक्र करते हुए अपने ट्विटर पर लिखा है, “संसद से 12KM दूर ओखला में हिंदू परिवार ने बेटी के छेड़खानी पर पुलिस में शिकायत की तो समुदाय ने परिवार पर हमला कर पिता के पैर तोड दिए और माँ का यह हाल कर दिया पर देश की सबसे भ्रष्ट दिल्ली पुलिस कार में अकेले व्यक्ति का चालान करने व पैसे लेकर आरोपियों को बचाने में व्यस्त है। “
संसद से 12KM ओखला में हिंदू परिवार नें बेटी के छेड़खानी पर पुलिस में शिकायत की तो समुदाय नें परिवार पर हमला कर पिता के पैर तोड दिए और मां का यह हाल कर दिया पर देश की सबसे भ्रष्ट @DelhiPolice कार में अकेले व्यक्ति का चालान करने व पैसे लेकर आरोपियों को बचाने में व्यस्त है। @CPDelhipic.twitter.com/XzsuPIYJjo
इसी प्रकार सुदर्शन चैनल के रिपोर्टर गौरव मिश्रा भी इस केस को लेकर लगातार ट्वीट कर रहे हैं। उन्होंने बिरजू दास की बेटी की वीडियो साझा की है। इसमें लड़की बता रही है कि आरोपित अभी भी सरेआम घूम रहे हैं और उन्हें धमकियाँ दे रहे हैं।
मैंने इन जेहादियों के डर से 3 सालों से स्कूल जाना तक छोड़ दिया,सल्लन मुझसे ज़बरन शादी करना चाहता था मुझे जान से मारने की धमकियां देता था,अखोला के जे.जे कॉलोनी में डर के साये में जी रहा है ये हिंदू परिवार पिता अस्पताल में है और बेटियां न्याय के इंतज़ार में है। pic.twitter.com/NxUfUE2O03
इसके अलावा एक अन्य ट्वीट में गौरव मिश्रा लिखते हैं, “दिल्ली के अखोला में एक हिंदू परिवार ने अपने बेटी के छेड़छाड़ से परेशान होकर पुलिस में कंप्लेंट क्या करवाई। जेहादियों ने झुंड बनाकर घर के ऊपर हमला कर दिया, पिता के पैर तोड़ दीए जो अब रॉड लगाने पर जॉइंट हो पाएगा,आख़िर दिल्ली में कब तक हिंदुओं के घरों पर होते रहेंगे हमले?”
दिल्ली के अखोला में एक हिंदू परिवार ने अपने बेटी के छेड़छाड़ से परेशान होकर पुलिस में कंपलेंट क्या करवाई जेहादियों ने झुंड बनाकर घर के ऊपर हमला कर दिया, पिता के पैर तोड़ दीये जो अब रॉड लगाने पर जॉइंट हो पायेगा,आख़िर दिल्ली में कब तक हिंदुओं के घरों पर होते रहेंगे हमले? pic.twitter.com/kyM3mIZxIk
पिछले हफ्ते हैदराबाद में कोर्ट के आदेश को ताक पर रखते हुए सैकड़ों लोग मुहर्रम के जुलूस में शामिल हुए। कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में न सिर्फ सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं, बल्कि लोगों ने चेहरे पर मास्क जैसे जरूरी बातों की भी अनदेखी की। बड़ी संख्या में लोग पुराने हैदराबाद में एकत्रित हुए और ‘बीबी का आलम’ जुलूस निकाला। इस दौरान ज्यादातर लोग बिना मास्क के देखे गए।
उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी को देखते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट ने मुहर्रम के दिन हैदराबाद के पुराने शहर में जुलूस निकालने के लिए इजाजत नहीं दी थी। इसके बावजूद यहाँ पर लोगों ने भारी संख्या में जुलूस निकाला।
हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए, सैकड़ों की संख्या वाला यह जुलूस डाबेरपुरा से शुरू हुआ और संप्रदाय विशेष बहुल क्षेत्र चारमीनार, गुलजार हुज, पुरानी हवेली और दारुलशिफा से गुजरते हुए चर्मघाट पर खत्म हुआ।
अपने आदेश में, तेलंगाना हाई कोर्ट ने मुहर्रम के जुलूस के लिए न केवल अनुमति देने से इनकार किया था, बल्कि आदेश का उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में पुलिस आयुक्त को किसी भी उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुहर्रम जुलूस निकालने की माँग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा था, “अगर हम जुलूस निकालने की अनुमति दे देंगे तो इससे आराजकता फैलेगी और फिर एक समुदाय विशेष को कोरोना फैलाने के नाम पर लक्षित किया जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहेगा।”
हालाँकि, ऐसा लगता है कि तेलंगाना पुलिस ने संप्रदाय विशेष के समूहों को एक जुलूस आयोजित करने में सहायता किया है, क्योंकि खुद शहर के पुलिस आयुक्त ने ‘आलम’ का जुलूस निकालने की अनुमति दी थी। भले ही पुलिस आयुक्त ने समुदाय से पुलिस के साथ सहयोग करने और मार्ग पर इकट्ठा न होने की अपील की थी, लेकिन शहर की पुलिस ने रविवार को जुलूस को सुरक्षा दी।
बता दें कि राज्य में मुहर्रम के जुलूस की अनुमति देने का निर्णय टीआरएस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राज्य में गणेश चतुर्थी जुलूसों को प्रतिबंधित करने के एक हालिया आदेश के परिपेक्ष्य में आता है।
तेलंगाना सरकार ने अपने आदेश में कोरोना वायरस महामारी का हवाला देते हुए राज्य भर में गणेश उत्सव और मुहर्रम के जुलूसों को सार्वजनिक रूप से मनाने से मना कर दिया था। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि राज्य में गणेश उत्सव के लिए कोई पंडाल, सामूहिक सभा, जुलूस, लाउडस्पीकर या फिर डिस्को जॉकी की अनुमति नहीं दी जाए।
इसी तरह से मुहर्रम के दौरान ‘आलम’ का जुलूस निकालने से मना किया गया था।
इससे पहले टीआरएस सरकार ने हैदराबाद में हिंदुओं को गणेश जुलूस निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, हालाँकि, पिछले सप्ताह संप्रदाय विशेष के लोगों को शहर में मुहर्रम का जुलूस निकालने की अनुमति दे दी। हैदराबाद पुलिस ने हैदराबाद के पुराने शहर में संप्रदाय विशेष को ‘अलाम’ का जुलूस निकालने की अनुमति दी थी।
हाई कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद संप्रदाय विशेष समूहों को जुलूस निकालने की अनुमति देने और गणेश चतुर्थी के दौरान हिंदुओं को जुलूस से मना करने के फैसले ने अब राज्य में एक बहस छेड़ दी है। केसीआर की अगुवाई वाली राज्य सरकार की अब अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की घिनौनी हरकत के लिए आलोचना हो रही है।
भारत में माँ काली के लिए ईरानी-कनाडाई कॉमेडियन अर्मिन नवाबी ने ‘सेक्सी’ शब्द का प्रयोग किया था। इसको लेकर विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) ने शिकायत दर्ज कराई है। नवाबी ‘एथेइस्ट रिपब्लिक’ का संस्थापक है और खुद को नास्तिक बताता है। उसने सोशल मीडिया पर माँ काली का अपमान करते हुए उन्हें ‘सेक्सी’ बताया था।
विहिप ने महाराष्ट्र के डीजीपी और मुंबई के पुलिस कमिश्नर को लिखे औपचारिक शिकायत-पत्र में कहा कि अर्मिन नवाबी ने माँ काली की तस्वीर शेयर करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की है, जिनकी हिन्दुओं द्वारा पूजा की जाती है। विहिप ने कहा कि इससे हिन्दुओं की आस्था को चोट पहुँची है। संस्था ने ट्विटर के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की माँग की, क्योंकि उन्होंने इस ट्वीट पर कोई एक्शन नहीं लिया और तमाम शिकायतों के बावजूद इसे नहीं हटाया।
साथ ही विहिप ने माँग की है कि ट्विटर के पास एक नीति होनी चाहिए, जिसके हिसाब से वो ऐसे कंटेंट्स को फ़िल्टर कर सके जो धर्म के खिलाफ हों। संस्था ने कहा कि इस ट्वीट का उद्देश्य हिन्दुओं को भड़का कर समाज में शांति को भंग करना है। चूँकि इसे सोशल मीडिया पर डाला गया है, इसीलिए पूरी दुनिया में लोगों ने इस ट्वीट को देखा। विहिप ने अर्मिन नवाबी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
वीएचपी के प्रवक्ता विनोद बंसल ने अपने ट्वीट में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्री और भारत में मौजूद ईरान और कनाडा के राजदूत को भी टैग किया है। उन्होंने बताया है कि शिकायत की कॉपी कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी को भी भेजी गई है।
अर्मिन नवाबी ने ट्विटर पर माँ काली की एक तस्वीर ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, “मैं हिन्दू धर्म से प्यार करने लगा हूँ। मुझे पहले नहीं पता था कि तुम्हारी देवियाँ इतनी कामुक हैं। फिर कोई और धर्म क्यों अपनाएगा?” जिस तरह से उसने अपने ट्वीट में देवी काली को चित्रित किया है उस पर कई लोगों ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह नास्तिकता नहीं, बल्कि बलात्कारी मानसिकता को दर्शाता है।
गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले अर्मिन नवाबी, जो एक पूर्व ईरानी मुस्लिम और AtheistRepublic.com (एथीस्ट रिपब्लिक) का संस्थापक है, ने संप्रदाय विशेष की पाक किताब कुरान पर थूककर उसे फाड़ दिया था और साथ ही लोगों से अपनी निजी जिम्मेदारी पर ऐसा ही करने की सलाह भी दी थी। लोगों का कहना है कि अर्मिन नवाबी अब हिन्दुओं को सिर्फ इसलिए निशाना बना रहा है क्योंकि वह कुरान को अपमानित करने के बाद संप्रदाय विशेष का ध्यान भटकना चाहता है।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया चकवर्ती पर शिकंजा कसता जा रहा है। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) इस मामले में ड्रग्स एंगल की पड़ताल कर रही है। इंडिया टुडे के अनुसार एनसीबी की क्राइम रिपोर्ट में बताया गया है कि रिया न केवल ड्रग्स का इस्तेमाल करती थी, बल्कि इसे खरीदने और बेचने में भी लिप्त थी।
इस मामले में रिया के भाई शौविक चकवर्ती और सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुएल मिरांडा को एनसीबी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। शनिवार (5 सिंतबर 2020) को दोनों को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों को 9 सितंबर तक एनसीबी की हिरासत में भेजने का निर्देश दिया।
बताया जा रहा है कि रविवार को एनसीबी रिया और शौविक को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर सकती है। यह बात पहले ही सामने आ चुकी है कि रिया के कहने पर ड्रग्स खरीदने की बात शौविक कबूल चुका है। ड्रग्स का पेमेंट रिया के क्रेडिट कार्ड से करने की बात भी सामने आई है। सैमुएल भी सुशांत के घर के लिए ड्रग्स खरीदने की बात कबूल कर चुका है।
रिया चक्रवर्ती के व्हाट्सएप चैट से ड्रग्स खरीदने, उसका इस्तेमाल करने और बेचने की बात सामने आई है। चैट में जिस तरह की ड्रग्स का ज़िक्र है वह एनडीपीएस एक्ट के दायरे में आता है। प्रथम दृष्टया इस मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)/22/27/28/29 का उल्लंघन नजर आता है।
We will be asking her (actor Rhea Chakraborty) to join the investigation, and maybe to some other people as well: Mutha Ashok Jain, Deputy DG, South-Western Region, NCB in Mumbai https://t.co/iXO16p360n
एनसीबी के डिप्टी डीजी (दक्षिण-पश्चि) एम. अशोक जैन ने इस मामले में रिया से पूछताछ के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि रिया सहित कुछ और लोगों को बुलाया जा सकता है।
इससे पहले शनिवार की सुबह सीबीआई की टीम बांद्रा स्थित सुशांत सिंह राजपूत के घर पहुँची थी। एम्स की फोरेंसिक टीम भी साथ थी। इस दौरान सुशांत सिंह की बहन मीतू सिंह, सिद्धार्थ पिठानी, केशव और बावर्ची नीरज भी मौजूद थे। सुशांत सिंह के आवास पर क्राइम सीन को रिक्रिएट किया गया था और इसके आधार पर सुराग खोजने का प्रयास किया गया।
बता दें, इससे पहले सुशांत केस की जाँच में जुटी NCB ने ड्रग तस्कर कैजान इब्राहिम को गिरफ्तार किया था। यह इस मामले में जाँच एजेंसी द्वारा पाँचवी गिरफ्तारी थी। इसके अलावा रिपब्लिक टीवी का दावा है कि उनके स्टिंग में एक ड्रग तस्कर ने इस बात को स्वीकार किया है कि बॉलीवुड हस्तियों का पार्टियों पर ड्रग लेना बेहद आम बात है। अपने दावे के साथ उन्होंने स्टिंग की टेप भी जारी की है। इसमें तस्कर को कहते सुना जा सकता है कि बॉलीवुड सितारे अक्सर सफेद पदार्थ, कोकीन और हशीश ही लेते हैं।