मथुरा में विदेशी नाबालिग लड़की का बलात्कार करने के आरोप में कल (सितंबर 2, 2020) यूपी पुलिस ने एक पाकिस्तानी युवक को गिरफ्तार किया है। युवक टूरिस्ट वीजा लेकर भारत आया था और पिछले पाँच साल से लड़की को जानता था। घटना की शिकायत लड़की के घरवालों ने कोतवाली में दी थी।
जानकारी के अनुसार, यूक्रेन निवासी पीड़िता के पिता द्वारा कोतवाली में दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार 31 अगस्त को रात करीब 8:30 बजे पाकिस्तानी युवक लड़की के यहाँ आया और नाबालिग को अकेला पाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।
मथुरा के वृंदावन में नाबालिग विदेशी लड़की से रेप, आरोपी पाकिस्तानी युवक गिरफ्तार https://t.co/VDtcYmnAoU
शिकायत में पिता ने बताया कि जब वह 1 सितंबर को लौट कर आए तो उनकी बेटी ने उन्हें अपने साथ हुई घटना के बारे में जानकारी दी। कहा जा रहा है लड़की के पिता धार्मिक समारोह में जा जाकर भजन कीर्तन गाते थे। घटना वाली रात वह अपने गुरू से मिलने गए हुए थे। इसी दौरान आनंद कुमार नामक पाकिस्तानी ने रेप की घटना को अंजाम दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित भी संगीत का टीचर है।
लड़की के पिता ने शिकायत में यह भी कहा कि उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाला युवक उनकी पूर्व पत्नी के साथ पिछले काफी समय से लिव इन रिलेशनशिप में रह रहा है। वह मूल रूप से कराची पाकिस्तान का रहने वाला है और वर्तमान में बराहघाट स्थित एक अपार्टमेंट में रह रहा है। बता दें, पिता की तहरीर के बाद पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर लिया है।
नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, यूक्रेन की इस नाबालिग के माता-पिता इस्कॉन भक्त हैं। माता-पिता के बीच तलाक हो चुका है जिसक बाद से दोनों अलग-अलग रहते हैं। बच्ची अपने पिता के साथ रहती है। युवक भी कई सालों से टूरिस्ट वीजा पर भारत में रुका हुआ है।
मामले में एसपी (सिटी) उदय शंकर सिंह ने बताया, “पाकिस्तान के कराची शहर के नारायण पुरा इलाका निवासी आनन्द नामक युवक पिछले पाँच वर्ष से यूक्रेन निवासी एक किशोरी को संगीत की शिक्षा दे रहा था। वह यहाँ टूरिस्ट वीजा पर आया हुआ है। किशोरी के माता-पिता भी पिछले दस वर्ष से वृन्दावन में रहकर भजन-कीर्तन करते हैं।”
शिवसेना नेता संजय राउत की धमकी के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने अपने हालिया ट्वीट में खुलेआम मिली धमकी पर पूछा है कि आखिर क्यों मुंबई में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) जैसी लगने लगी है।
कंगना ने ट्वीट में लिखा, “संजय राउत ने खुलेआम मुझे धमकी दी और मुंबई वापस न आने को बोला। आजादी के नारों के बाद अब खुली धमकी। मुंबई पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की तरह क्यों लग रही है?”
Sanjay Raut Shiv Sena leader has given me an open threat and asked me not to come back to Mumbai, after Aazadi graffitis in Mumbai streets and now open threats, why Mumbai is feeling like Pakistan occupied Kashmir? https://t.co/5V1VQLSxh1
गौरतलब है कि इससे पहले कंगना ने एक ट्वीट में अपनी सुरक्षा हिमाचल या फिर केंद्र सरकार से माँगी थी। अपने ट्वीट में उन्होंने मुंबई पुलिस की सुरक्षा स्वीकारने से मना किया था। इसके बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में रनौत के बयानों को खारिज करते हुए उनके बयान को शर्मनाक बताया था।
राउत ने लिखा था, “हम उनसे मुंबई न आने का अनुरोध करते हैं। यह मुंबई पुलिस का अपमान करने के अलावा और कुछ नहीं है। गृह मंत्रालय को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।”
यहाँ बता दें कि सुशांत मामले में लापरवाही दिखाने के कारण मुंबई पुलिस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कंगना का पहले भी मानना था कि इस केस की जाँच सीबीआई ही निष्पक्ष होकर कर पाएगी और अब जब वह इस केस से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ गई हैं, तो उनके बयान लगातार चर्चा में हैं, इसलिए वह मुंबई पुलिस के ख़िलाफ़ भी मुखर होकर बोल रही है।
Liking derogatory tweets about people who are fighting against the murderers of Sushant, instead of condemning public teasing and bullying like this @CPMumbaiPolice is encouraging it, @MumbaiPolice has hit all time low … SHAME !! pic.twitter.com/9H4mhC9Nsk
उन्होंने मुंबई पुलिस से सुरक्षा लेने से मना भी। ऐसा अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए अपमानजनक ट्वीट को मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा लाइक करने को लेकर किया था। कंगना रनौत ने ट्वीट करते हुए पूछा था कि जब मुंबई पुलिस प्रमुख ही इस तरह बदमाशी और अपराध को बढ़ावा देंगे तो मुंबई में उनकी सुरक्षा को लेकर कौन जिम्मेदार होगा? वहीं जब मुंबई पुलिस ने कमिश्नर का बचाव किया तो कंगना ने उन्हें फोर्स के नाम पर धब्बा बता दिया।
मंगलवार (सितंबर 1, 2020) को कंगना ने मुंबई पुलिस पर जबरदस्त हमला बोलते हुए ट्वीट किया कि इस समय मुंबई पुलिस अब तक की सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। कंगना ने अपने ट्वीट में दो स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दावा किया मुंबई पुलिस कमिश्नर ऐसे अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट्स को लाइक कर रहे हैं, जो सुशांत को न्याय दिलाने की आवाज उठाने वाले लोगों के खिलाफ लिखे गए हैं। उन्होंने लिखा कि सार्वजनिक रूप से परेशान करने वालों और धमकाने वालों की निंदा करने का बजाय इसे प्रोत्साहित कर रहे हैं।
Liking derogatory tweets about people who are fighting against the murderers of Sushant, instead of condemning public teasing and bullying like this @CPMumbaiPolice is encouraging it, @MumbaiPolice has hit all time low … SHAME !! pic.twitter.com/9H4mhC9Nsk
सोशल मीडिया पर एक वीडियो चर्चा में है। वीडियो में बहुत सी गायों का एक झुंड मौजूद है। तभी एक आदमी गाय को डंडे से मारने लगता है लेकिन इसके बाद जो हुआ वह किसी के लिए भी हैरान कर देने वाला था। जिस दौरान वह व्यक्ति गाय को डंडों से मार रहा था तभी एक बछड़े ने उसे अपने पैरों से मार दिया।
सिर्फ 10 सेकेंड की अवधि का यह वीडियो भारतीय वन सेवा के अधिकारी सुशांता नंदा ने साझा किया है। उनके द्वारा ट्विटर पर साझा किए गए इस वीडियो को अब तक लगभग 22 हज़ार लोग देख चुके हैं। इसके अलावा लगभग 1.6 हज़ार लोग पसंद कर चुके हैं और 280 लोग रीट्वीट कर चुके हैं। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा “What goes around, Does come around” यानी जैसा आप दूसरों के साथ करते हैं, वैसा आपके साथ भी होता है।
हालाँकि, वीडियो कब और कहाँ का है इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं उपलब्ध है। लेकिन वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि सफ़ेद कपड़ों में एक व्यक्ति गाय को डंडे से पीट रहा है। तभी एक बछड़ा भागते हुए बीच में आता है और उस व्यक्ति के सीने पर अपने पिछले पैरों से पूरी ताकत लगा कर मारता है। इसके बाद व्यक्ति तुरंत मौके पर गिर जाता है। ट्विटर पर इस वीडियो को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आ रही हैं।
इंग्लैंड के गायक जॉन लेनन का एक गाना है ‘instant karma’ यह गाना 1970 में जारी किया गया था। इस गाने की शुरूआती पंक्ति है ‘Instant Karma’s gonna get you, Gonna knock you right on the head।’ मायने आपका कर्म आपके पास आता ही है और सीधा आपके सिर पर चोट करता है। जॉन लेनन के इस गाने के बाद इस शब्द का चलन बहुत ज्यादा बढ़ा है।
मोटे तौर पर इसका अर्थ हुआ हर कर्म या किए धरे का कुछ न कुछ परिणाम होता है। सोशल मीडिया के दौर में इस शब्द के इर्द गिर्द तमाम मीम, फोटो और वीडियो मिल जाएँगे। यह वीडियो इस बात का बेहद जीवंत उदाहरण है। बल्कि सोशल मीडिया पर यह शब्द (instant karma) अक्सर चर्चा में भी रहता है इसलिए तमाम सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस वीडियो को instant karma की सटीक मिसाल करार दिया।
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 का हवाला देते हुए भारत के दो लोगों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने की माँग उठाई। लेकिन पाकिस्तान की इस माँग को सुरक्षा परिषद ने सिरे से नकार दिया।
पाकिस्तान की इस माँग को खारिज करने में सुरक्षा परिषद के 5 सदस्य देशों ने अहम भूमिका निभाई। इनमें अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी और बेल्जियम हैं। इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने ट्वीट भी किया।
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “पाकिस्तान ने पिछले कुछ समय में लगातार प्रयास किए हैं कि आतंकवाद संबंधी प्रस्ताव 1267 का राजनीतिकरण हो। इसके अलावा पाकिस्तान ने इसे धार्मिक रंग देने का भी पूरा प्रयास किया है लेकिन सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान की इस कोशिश को पूरी तरह विफल कर दिया है। हम परिषद के हर उस सदस्य का आभार जताते हैं, जिन्होंने पाकिस्तान की इस कोशिश को नाकाम करने में योगदान दिया है।”
Pakistan’s attempt to name two Indians in 1267 Sanctions list derailed at UNSC. UK, USA, France and Germany blocked the move by Pakistan: Sources
साल 2019 के दौरान पाकिस्तान ने प्रस्ताव 1267 के तहत कुल 4 भारतीय नागरिकों को आतंकवादियों की सूची में डालने की माँग उठाई थी। चीन ने भी इस मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया था। सुरक्षा परिषद ने पहले ही दो नामों को इस सूची में डालने से मना कर दिया था। वहीं दो और नाम अंगारा अप्पाजी गोविंदा पट्टनाइक दुग्गीवालसा को कल (2 सितंबर 2020) आतंकवादी घोषित करने से मना कर दिया। सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान के पास अपने दावों को साबित करने के लिए किसी भी तरह के ठोस सबूत नहीं थे।
इसके पहले फ्रांस समेत अन्य सदस्यों ने पाकिस्तान को अपने दावे सिद्ध करने का मौक़ा दिया था। उन्होंने पाकिस्तान को इस संबंध में सबूत पेश करने के लिए कहा था लेकिन पाकिस्तान ऐसा नहीं कर पाया था। बल्कि इस मुद्दे पर अंतिम आदेश जारी करने से पहले पाकिस्तान के सबूतों का इंतज़ार भी किया गया। इसके बावजूद इस्लामाबाद अपनी बात साबित नहीं कर पाया। जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान की माँग को पूरी तरह खारिज करते हुए अपना फैसला सुनाया।
पाकिस्तान की इस चाल को बदले की भावना के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल बीते वर्ष 1 मई को भारत जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने में कामयाब हुआ था। जिसके जवाब में पाकिस्तान ने यह चाल चली थी लेकिन बदले की भावना से उठाए गए इस कदम में पाकिस्तान कामयाब नहीं हुआ।
इसके ठीक एक हफ्ते पहले भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पाकिस्तान को फटकार लगा चुका है। बुधवार (26 अगस्त 2020) को सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तानी दूत के बयान को अस्वीकार कर दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि पाकिस्तानी दूत का यह बयान आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं किया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने बयान दिया था। बयान में उन्होंने भारत को लेकर कई तरह के दावे किए थे। अंत में पता चला कि उनके सारे झूठे हैं और भारत को लेकर दुष्प्रचार करते हैं। सोमवार के दिन पाकिस्तान जैसे गैर सदस्यों को सुरक्षा परिषद की बैठक शामिल होने की इजाज़त नहीं मिली थी।
पाकिस्तान की तरफ से जारी किए गए बयान के बाद भारत की तरफ प्रतिक्रिया आई थी। तिरुमूर्ति ने ट्वीट करते हुए लिखा ‘हमने देखा कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान मिशन की तरफ से बयान जारी किया गया था। बयान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि की तरफ से जारी किया गया था। लेकिन हम एक बात नहीं समझ पाए कि जब सुरक्षा परिषद की सभा गैर सदस्यों के लिए खुली ही नहीं थी तो उन्होंने बयान कहाँ दर्ज कराया था।’
दिल्ली दंगों पर आधारित किताब की लेखिकाएँ अब Bloomsbury Publishing India Pvt के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवा रही हैं। आज दोपहर 3 बजे वह पुलिस हेडक्वार्टर में पुलिस आयुक्त कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करवाएँगी। इसकी जानकारी बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों के समूह (group of intellectuals and academicians) द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज में दी गई है।
रिलीज के मुताबिक, किताब की लेखिकाओं का आरोप है कि ब्लूम्सबरी ने उनकी आने वाले किताब ‘दिल्ली रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ की मैनुस्क्रिप्ट कई मीडिया पोर्टल्स और कार्यकर्ताओं को दी।
बता दें कि पिछले दिनों भी ब्लूम्सबरी पर किताब की मैनुस्क्रिप्ट लीक करने के आरोप लगे थे। हालाँकि तब शिकायत नहीं हुई थी। पर, अब इस किताब की लेखिकाओं ने कार्रवाई करने का फैसला ले लिया है।
मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितालकर और प्रेरणा मल्होत्रा की यह वही किताब है, जिसे वामपंथियों और इस्लामी कट्टरपंथियों के दबाव में आकर प्रकाशन ने प्रकाशित करने से रद्द कर दिया था और एक बयान में हवाला यह दिया था कि लेखकों ने उसे किताब की वर्चुअल प्री पब्लिकेशन लॉन्च के आयोजन के बारे में नहीं बताया था।
इसके बाद कुछ ही दिन में इस किताब की मैनुस्क्रिप्ट व्हाट्सएप पर वायरल होने लगी। कई नेटिज़न्स ने सवाल भी उठाया था कि आखिर कैसे पूरी पुस्तक को अवैध रूप से जारी किया गया। उनका कहना था कि इस तरह से पुस्तक को सोशल मीडिया पर सर्कुलेट नहीं किया जा सकता।
फिर, यह बात सामने आई कि वायरल हो रही कॉपी वही है, जो ब्लूम्सबरी के पास थी। क्योंकि मैनुस्क्रिप्ट का दूसरे पन्ने पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह एक कॉपी है। इसे ब्लूम्सबरी द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।
इसके अलावा यह भी सोचने वाली बात थी कि आम तौर पर लेखकों, प्रकाशन हाउस और संपादक के अलावा इस रूप में मैनुस्क्रिप्ट किसी और के पास उपलब्ध नहीं होती। इसलिए यह स्पष्ट है कि लेखकों द्वारा इस मैनुस्क्रिप्ट को वायरल नहीं किया जाएगा, क्योंकि इससे पुस्तक की बिक्री को नुकसान पहुँचेगा, जो अब गरुड़ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।
ऐसे में सवाल उठा कि क्या पब्लिशिंग हाउस द्वारा मैनुस्क्रिप्ट की कॉपी को लीक किया गया है? ध्यान देने वाली बात यह भी है कि व्हाट्सएप पर मैनुस्क्रिप्ट के वायरल होने से पहले वामपंथी पोर्टल TheQuint द्वारा इसे सबसे पहले एक्सेस किया गया था।
हाल ही में विवादित चिकित्सक कफील खान को मथुरा कारागार से रिहा किया गया। कुछ लोगों को रिहाई की इस ख़बर से कुछ ज़्यादा ही तसल्ली और सुकून मिला। ऐसा ही एक नाम है कॉन्ग्रेस के मुखपत्र की संपादक मृणाल पांडे का।
मृणाल पांडे इस बात पर इतनी ख़ुश हुईं कि कफील खान की श्रीकृष्ण से तुलना कर दी। मृणाल पांडे की तरफ से ऐसी प्रतिक्रिया हैरान करने वाली नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति उनकी नफ़रत किसी से छुपी नहीं है।
मृणाल पांडे ने कफील खान की मथुरा जेल से रिहाई को श्रीकृष्ण जैसा बता दिया। मृणाल पांडे इतने पर ही नहीं रुकी। इसके बाद उन्होंने यह भी कह डाला कि जैसे श्रीकृष्ण ने कंस का अंत किया था, ठीक वैसे ही कफील भी बच्चों के हत्यारे से मुक्ति दिलाएँगे। कफील खान उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुई बच्चों की मौत के मामले में आरोपित रहे हैं।
इसके अलावा कफील खान पर इस मामले में फेक न्यूज़ (फ़र्ज़ी ख़बरें) फैलाने को लेकर भी जाँच जारी है। निलंबित किए जाने के बाद भी अस्पताल में दाख़िल होने और मरीजों का इलाज करने के मामले में भी उन पर जाँच चल रही है। पिछले साल दिसंबर महीने में कफील खान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन अधिनियम पर भड़काऊ भाषण दिया था।
जिसकी वजह से जनवरी 2020 में कफील खान को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने कफील खान पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लगाया था। हालाँकि बीते दिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में कफील खान की रिहाई के आदेश दिए थे। कॉन्ग्रेस की सचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने न्यायालय के इस आदेश की सराहना की थी।
कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी इस बात पर फूली नहीं समाई थी। प्रियंका ने मंगलवार को ट्वीट करते हुए लिखा, “आज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डॉ कफील खान के ऊपर से रासुका हटाकर उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया। आशा है कि यूपी सरकार डॉ कफील खान को बिना किसी विद्वेष के अविलंब रिहा करेगी। डॉ कफील खान की रिहाई के प्रयासों में लगे तमाम न्याय पसंद लोगों व यूपी कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को मुबारकबाद।”
नागरिकता संशोधन कानून और NRC को लेकर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जेल में बंद डॉ कफील खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 1, 2020 को बड़ी राहत प्रदान की थी। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने खान के ऊपर से NSA हटाया। साथ ही सरकार को उन्हें अविलंब रिहा करने के आदेश दिए।
सोशल मीडिया के बड़े प्लेटफॉर्म फेसबुक की निष्पक्षता को लेकर हर राजनैतिक दल के मन में बड़ा सवाल है। सत्ताधारी पार्टी को लग रहा है कि फेसबुक विपक्ष से साँठ-गाँठ किए बैठा है और विपक्ष को लग रहा है कि फेसबुक के भाजपा से लिंक हैं।
ऐसी उठा पटक के बीच में बुधवार (सितंबर 2, 2020) को संसदीय समिति की बैठक हुई। इस बैठक में फेसबुक भारत के प्रमुख अजित मोहन शामिल हुए। समिति की अध्यक्षता शशि थरूर ने की। यह बैठक करीब 3 घंटे चली। इस बैठक में दोनों पक्षों ने अजित मोहन के सामने फेसबुक के झुकाव के बारे में बात की।
एक ओर कॉन्ग्रेस सांसदों की ओर से हेटस्पीच के कई उदाहरण दिए गए। वहीं, दूसरी ओर से भाजपा के सांसदों ने फेसबुक से कई तीखे सवाल कर डाले। भाजपा ने अजित मोहन से जय श्रीराम के नारे से लेकर कश्मीर मुद्दे पर उनकी राय माँगी।
उन्होंने पूछा कि क्या जय श्रीराम कहना फेसबुक की पॉलिसी के हिसाब से सांप्रदायिक है? उन्होंने मोहन से पूछा कि क्या वह मानते हैं कि कश्मीर में सुरक्षा के नाम पर भारत सरकार आतंक फैला रही है, जैसा कि उन्होंने अपने आलेखों में लिखा है?
इसके अलावा चुनावों में फेसबुक की भूमिका और फेसबुक के कॉन्ग्रेस से संबंधों के बारे में खुल कर पूछा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों फेसबुक अपने को भारत में बिचौलिया कहता है? फेसबुक के अफसरों का कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल से क्या रिश्ते हैं? फेसबुक के फैक्ट चैकिंग बोर्ड में शामिल कोई पार्टनर क्या कॉन्ग्रेस के डाटा एनेलेटिक्स में काम कर चुका है?
इसके बाद साल 2019 में लोकसभा चुनावों में दक्षिणपंथी अकाउंट्स को हटाने की बात भी भाजपा सांसदों ने उठाई। उन्होंने पूछा कि क्या यह सही है कि राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े वे 700 पेज हटाए गए, जिनकी कुल फॉलोइंग 26 लाख से अधिक थी। वहीं कॉन्ग्रेस और वामपंथी विचारधारा से जुड़े जो लेख हटाए गए, उनकी कुल फॉलोइंग 2 लाख थी?
सांसदों ने पूछा कि साल 2019 में फेसबुक ने चुनावों को कितना प्रभावित किया? नरेंद्र मोदी के बयानों के कितने फैक्ट चेक हुए और सोनिया गाँधी के बयानों को कितनी बार चेक किया गया। भाजपा सांसदों ने इस दौरान फेसबुक पर ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी नीति अपनाने पर भी सवाल किए। उन्होंने पूछा कि क्या 21 वीं सदी की ईस्ट इंडिया कम्पनी फेसबुक है, जो भारतीय कानूनों को नहीं मानती और बाँटो एवं राज करो के नियम में यकीन करती है?
यहाँ बता दें, इस संसदीय बैठक में दोनों पक्षों ने फेसबुक कार्रवाई के बारे में अजित मोहन से पूछा। भाजपा ने फैक्ट चेक टीम में प्रतीक सिन्हा के अपॉइंटमेंट पर सवाल उठाए। साथ ही यह भी पूछा कि क्या भाजपा, शिवसेना, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल या आरएसएस से किसी की नियुक्ति वहाँ की गई? जिसका कंपनी ने कोई डेटा उपलब्ध नहीं कराया।
समिति बैठक में शामिल मंत्रियों ने पूछा कि ‘फेसबुक फॉर मुस्लिम’ जैसे ग्रपु पर क्या एक्शन लिया गया। जिस पर फेसबुक की ओर से प्रतिनिधि ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई पॉलिसी नहीं है कि वह उसे ब्लॉक करें या ऑब्जेक्ट करें।
कमिटी ने फेसबुक से कंंटेंट को हटाने की संपूर्ण जानकारी माँगी। विशेष तौर पर उस कंटेंट को हटाने की, जो साल 2019 में चुनाव के दौरान हटाए गए। उन्होंंने उदाहरण देते हुए पूछा कि सिख फॉर जस्टिस ग्रुप पर भारत का एक विकृत नक्शा दिखाया गया। लेकिन फेसबुक ने उसे नहीं हटाया जबकि जय श्री राम और देवी-देवताओं की तस्वीर हेट पोस्ट कहकर हटा दी गईं।
कुल मिलाकर इस बैठक में 150 से अधिक प्रश्नों के जवाब अजित मोहन से सांसदों को नहीं मिल पाए। इस बैठक में थरूर के अलावा, निशिकांत दुबे, राज्यवर्धन सिंह राठौर, महुआ मित्रा, सन्नी देओल, लॉकेट चटर्जी, नीतिक प्रमाणिक और नसीर हुसैन शामिल हुए।
इससे पहले याद दिला दें कि कानून मंत्री रविशंकर ने फेसबुक सीईओ को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने फेसबुक पर एकतरफा होने की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि कैसे साल 2019 में फेसबुक ने दक्षिणपंथियों के अकॉउंटस बंद कर दिए थे या फिर उनकी रीच घटा दी थी। जबकि फेसबुक को तो संतुलित और निष्पक्ष होना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा था कि फेसबुक इंडिया टीम में कई वरिष्ठ अधिकारी एक विशेष राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हैं।
बीती रात (2-3 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एकाउंट हैक कर लिया गया था। फ़िलहाल इसे रिकवर यानी हैकर्स की पहुँच से बाहर निकाला जा चुका है। इस मामले पर ट्विटर की तरफ से भी प्रक्रिया आई है। ट्विटर ने अपना पक्ष रखते हुए यह बात स्वीकारी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर एकाउंट हैक किया गया था।
ट्विटर ने अपनी तरफ से जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर एकाउंट हैक किया गया था। फ़िलहाल वो इस मामले की जाँच कर रहे हैं। कुछ समय पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और एलन मस्क जैसी कई नामी हस्तियों के एकाउंट हैक किए गए थे। उसके बाद बिटकॉइन की माँग की गई थी।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए ट्विटर ने इस मुद्दे पर जानकारी दी। ट्विटर ने कहा है कि उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एकाउंट के साथ क्या हुआ है। और वो इस मामले को पूरी तरह सुधारने में लगे हुए हैं। हालाँकि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि किसी अन्य ट्विटर एकाउंट के साथ भी ऐसा हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर एकाउंट पर तमाम तरह की जानकारी साझा की जाती है। विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी की निजी वेबसाईट narendramodi.in और NaMo App से जुड़े अपडेट्स भी साझा किए जाते हैं। इस पर ट्विटर का साफ़ तौर पर कहना है कि वह इस मामले की पड़ताल में लगे हुए हैं और जल्द ही उन्हें नतीजे हासिल होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट (www.narendramodi.in) का टि्वटर अकाउंट रात में हैक हो गया था। जॉन विक (John Wick) नाम के हैकर ने अकाउंट हैक करने के बाद कोविड-19 रिलीफ फंड के लिए बिटक्वॉइन में डोनेशन की माँग की।
2-3 सितंबर की रात में 3 बजकर 9 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट का टि्वटर अकाउंट हैक रहा। इस दौरान हैकर ने कुल चार ट्वीट किए। इनमें से तीन ट्वीट कोविड-19 रिलीफ फंड के लिए पैसे की माँग को लेकर थी।
रात के 3 बजकर 16 मिनट पर हैकर जॉन विक ने यह बताया कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट का ट्विटर अकाउंट हैक कर लिया है। पेटीएम मॉल की डेटा चोरी में भी इसी हैकर ग्रुप जॉन विक का नाम आया था। साइबर सिक्योरिटी फर्म साइबल ने तब इस बात का दावा किया था। लेकिन PM मोदी के पर्सनल ट्विटर अकाउंट को हैक करने वाले ने अपने आखिरी ट्वीट में इस बात से इनकार किया है।
मेवात के नगीना थाने के उलेटा गाँव में गत 21 अप्रैल को गाँव की बहुसंख्यक आबादी के कुछ युवकों ने एक दलित परिवार को अपनी दबंगई का निशाना बनाया। एक मामूली सी बात पर 24 साल के राहुल पर धारदार फरसे से हमला किया गया और उसके परिवार को जातिसूचक शब्द बोलकर धमकाया गया कि यदि गाँव में रहना है तो जूती के नीचे रहना होगा।
लगातार दो दशकों से ऐसे अत्याचार सहने के बाद दलित परिवार ने पुलिस में मुकदमा दायर करने की ठानी और इंसाफ की गुहार लगाने लगे। प्रशासन की ढिलाई कहिए या बहुसंख्यक आबादी का दबाव, लेकिन घटना के 4 महीने बीत जाने के बाद भी राहुल का परिवार आरोपितों की गिरफ्तारी की आस लगाए बैठा है।
अब इस मामले में गिरफ्तारी कब होगी, ये बाद में पता चलेगा। मगर, उससे पहले खबर यह है कि राहुल के मामले में जो ग्रामीण गवाही देने को आगे आए थे, उनके साथ मारपीट हुई है।
राहुल और उसके परिजन (पीड़ित परिवार)
राहुल के चाचा जसवंत ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इस घटना की जानकारी दी। वह बताते हैं कि उनके गवाह साबिर के साथ 19 अगस्त को मारपीट हुई है। इसके अलावा, गवाह के बड़े भाई को भी पीटा गया है। जसवंत बताते हैं कि यह हमला रात के अंधेरे में करीब 8 बजे हुआ।
राहुल के चाचा बताते हैं कि साबिर के भाई सलीम पर भी बड़े सुनियोजित ढंग से हमला बोला गया। जब वह हमले की शिकायत थाने में कराने जा रहे थे, तो एक आदमी उनके पीछे लग गया और उसने नगीना में बैठे लोगों को सलीम के आने की जानकारी दे दी। इसके बाद उनकी बाइक को एक पिक-अप गाड़ी से टक्कर मारी गई, फिर उन पर लाठी बरसानी शुरू कर दी। इसके बाद आसपास के दुकान वालों व उनके ही गाँव के कुछ लोगों ने उनकी जान बचाई।
बता दें, इस हमले के संबंध में राहुल के मामले में गवाह साबिर और उनके बड़े भाई ने नगीना थाने में अपनी दरख्वास्त दी है। इसकी कॉपी इसी रिपोर्ट में संलग्न की गई है।
साबिर की दरख्वास्त
साबिर अपनी दरख्वास्त में घटना के मद्देनजर लिखते हैं कि 19 अगस्त को रात 8 बजे वह अपने परिवार के साथ घर पर थे। तभी अचानक 8-10 लोगों ने उनके घर पर लाठी-डंडों के साथ हमला बोल दिया। साथ ही उन्होंने कहा, “तुझे मजा चखाते हैं, तू हमारे ख़िलाफ गवाही देगा!”
परिवार के साथ मारपीट होती है। उनके घर में लूटपाट होती है। सामानों को तोड़ा-फोड़ा जाता है। इसी बीच मज्जलिश नाम का एक युवक धारदार फरसे से साबिर की भाभी राहिसन के सिर पर मार देता है। जबकि, अलीम व अन्य आरोपित लाठी व सरिया से घर वालों को मारते हैं।
इस दौरान शोरगुल सुनकर उनके पड़ोसी भी वहाँ आ जाते हैं और उन्हें बचा लेते हैं। लेकिन तब तक साबिर की भाभी गंभीर रूप से घायल हो चुकी थीं। दरख्वास्त में बताया गया है कि हमले में घायल राहिसन को बहुत गहरी चोट आई। इसलिए उन्हें माँडीखेड़ा अस्पताल ले जाया गया। जहाँ से उन्हें नल्हड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
इस दरख्वास्त में साबिर ने दलित परिवार का जिक्र करके हमले की वजह भी स्पष्ट बताई है। उनका कहना है कि चूँकि वह गाँव के दलित परिवार के गवाह हैं, इस लिए उन पर हमला हुआ। वहीं साबिर के भाई सलीम ने अपनी दरख्वास्त में बताया कि यह लोग घर में आकर साबिर से केस वापस लेने की बात कह रहे थे।
सलीम के मुताबिक हमलावरों ने अचानक हमला करते हुए कहा, “तुम च#रों (जातिसूचक शब्द/गाली) की गवाही वापस ले लो, नहीं तो तुम्हें जान से मार देंगे।”
उन्होंने भी वही घटना अपनी दरख्वास्त में लिखी, जिसका जिक्र जसवंत करते हैं। सलीम लिखते हैं कि 19 अगस्त की घटना के बाद जब वह नगीना जा रहे थे, तो उन पर जान से मारने की नीयत से हमला हुआ। एक पिक-अप ने उन्हें टक्कर मारी और फिर कुछ लोगों ने लाठी बरसानी शुरू कर दी।
इसके बाद, उनकी जेब से 1200 निकाले गए जिनमें 400 रुपए छीना झपटी में फट गए और मोबाइल भी टूट गया। खुद को फँसा देख उन्होंने मदद के लिए शोर मचाया जिसके बाद उनके गाँव के ही कुछ अन्य युवकों ने उन्हें आकर बचाया। इन दरख्वास्तों में अलीम, मकसूद, आरिफ, तारिफ, वारिस, सद्दाम के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की माँग की गई है।
सलीम की दरख्वास्त
दलित परिवार का साथ देने पर पहले भी लोगों को बनाया गया निशाना
ऐसी घटना पहली बार नहीं हुई है कि दलित परिवार का समर्थन करने पर गाँव की बहुसंख्यक संप्रदाय विशेष की आबादी ने अपने समुदाय के लोगों से मारपीट की हो या उन्हें प्रताड़ित किया हो। इससे पहले भी दलित परिवार के बेहद करीबी हकीमुद्दीन के परिवार पर हमला बोल दिया गया था। साथ ही, उनके भाई के घर में जाकर काफी तोड़फोड़ मचाई गई थी। 29 जून को करीब 6 बजे यह घटना हुई थी। मगर, पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत कुछ दिन बाद दायर करवाई थी।
शिकायत के मुताबिक, हकीमुद्दीन के भाई मोहम्मद उमर से कहा गया, “तू अगर राहुल वगैरह के साथ कार्रवाई करने गया तो तुझे इस बात का मजा चखाएँगे।” जिस पर उन्होंने कहा कि वे लोग गरीब आदमी हैं, इसलिए वह उनका साथ देंगे।
बस इतना सुनते ही उन पर लात-घूँसों से हमला कर दिया गया। किसी तरह वह वहाँ से अपनी जान छुड़ाकर अपने भाई शौकत के घर में घुस गए। मगर मजलिस, मकसूद, आरिफ, सद्दाम, फारूख, लियाकत, मोमिन जुहरू, सानिर व अन्य हथियारों से लैस वहाँ भी आ गए व घर के पुरुषों के साथ-साथ घर की महिलाओं पर भी हमला बोल दिया।
मोहम्मद उमर की एफआईआर
इस दौरान यहूदा और कलसुम ने आमिर की पत्नी शबनम की चोटी पकड़ कर उसे मारा, वहीं 5 माह की गर्भवती घर की दूसरी बहू समीना को भी जमीन पर गिराया गया, जिसके बाद उसके पेट में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। घर के पुरुषों को भी बड़ी बेहरमी से पीटा गया। बर्तनों को तोड़ दिया गया। घर में डीजल का ड्रम गिरा दिया गया तथा वॉशिंग मशीन और चारा कूटने वाली मशीन को भी तोड़ दिया गया।
आरोपित पक्ष में शामिल महिलाओं (मरियम, आसूबी, आमीना, कलसुम) ने घर में खूब पत्थर बरसाए। इस बीच मोहम्मद को और उनके भाई को कमरे में बंद कर दिया गया। हालाँकि, शोर मचने के बाद पड़ोसियों ने इकट्ठा होकर उन लोगों की जान बचाई और हमलावरों को भागने पर मजबूर किया। लेकिन इन उपद्रवियों ने जाते-जाते धमकी दी, “आज इन लोगों ने बचा लिया, मौका मिलने पर तुझे जान से मार देंगे।”
मोहम्मद उमर पर हमला करने के दौरान घर में हुई तोड़फोड़
दलित परिवार का साथ देने पर नहीं पढ़ने दी गई मस्जिद में नमाज
दलित परिवार के पड़ोसी हकीमुद्दीन ऑपइंडिया को बताते हैं कि इन लोगों की दबंगई गाँव में इतनी ज्यादा है कि उन्हें इस रमजान में घर के एकदम पास मस्जिद में नमाज तक पढ़ने को नहीं दी गई। वे कहते हैं कि जब उन्होंने मस्जिद में जाने की कोशिश की तो उन्हें कहा गया कि उनका उस पर कोई अधिकार नहीं है।
वहीं मोहम्मद उमर बताते हैं कि आरोपित पक्ष इतने दिन बीतने के बाद भी उन्हें आते-जाते धमकी देते हैं। वह कहते हैं कि एक उनका घर गाँव के बीच में पड़ता है। इसके कारण उन्हें दरवाजा बंद ही करके रखना पड़ता है। दूसरा पक्ष उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ देता है।
उमर के अनुसार, उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बल्कि दूसरे दबंग पक्ष ने उनके ऊपर झूठा इल्जाम डाल दिया। उनकी मानें तो गाँव के सरपंच अलीम ने पूरे गाँव में आतंक मचा रखा है। हर जगह पैसे देकर काम कराता है।
इससे पहले याद दिला दें कि सरपंच अलीम को लेकर जॉब कार्ड के फर्जीवाड़े का मामला भी उजागर हुआ था। कई ग्रामीणों ने इस पर शिकायत दर्ज करवाई थी। जिस पर ऑपइंडिया ने एक विस्तृत रिपोर्ट की थी।
सरपंच अलीम के हाथों फर्जीवाड़े का शिकार हुए ग्रामीण
पुलिस ने कहा – ‘जल्द होंगे आरोपित अरेस्ट’
मेवात के इस गाँव में दलित परिवार पर और उनका साथ देने वाले लोगों के ख़िलाफ़ बहुसंख्यक आबादी के दबंगों पर पुलिस कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए ऑपइंडिया ने नगीना थाने में संपर्क किया। जहाँ पुलिस ने साबिर और सलीम के मामले पर अनभिज्ञता जताई। वहीं, राहुल केस में उन्होंने बताया कि इस केस में एफआईआर दर्ज हुई थी। लेकिन बाद में हरिजन एक्ट हट गया।
इसके बाद कुछ आरोपितों को लड़ाई-झगड़े की धारा में गिरफ्तार किया गया। मगर बाद में इसकी जाँच डीएसपी पुन्हाना को सौंपी गई। डीएसपी पुन्हाना ने इस मामले में दोबारा हरिजन एक्ट लगा दिया है।
नगीना थाने में एसएचओ रमेश चंद्र के मुताबिक, अब उन्होंने इस संबंध में आरोपितों को दोबारा अरेस्ट करने के लिए अनुमति माँगी है। मामला कोर्ट में है। 7 सितंबर को सुनवाई होगी। जैसे ही फैसला आता है, फौरन इस मामले पर आरोपित अरेस्ट किए जाएँगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट (www.narendramodi.in) का टि्वटर अकाउंट रात में हैक हो गया था। जॉन विक (John Wick) नाम के हैकर ने अकाउंट हैक करने के बाद कोविड-19 रिलीफ फंड के लिए बिटक्वॉइन में डोनेशन की माँग की।
हैक करने के बाद सबसे पहला ट्वीट
हैकर जॉन विक का दूसरा ट्वीट
2-3 सितंबर की रात में 3 बजकर 9 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट का टि्वटर अकाउंट हैक रहा। इस दौरान हैकर ने कुल चार ट्वीट किए। इनमें से तीन ट्वीट कोविड-19 रिलीफ फंड के लिए पैसे की माँग को लेकर थी।
रात के 3:14 पर तीसरा ट्वीट
जॉन विक (John Wick) नाम के हैकर ने हालाँकि चालाकी बहुत दिखाई लेकिन बिटक्वॉइन में डोनेशन की माँग कर वह मूर्खता कर बैठा। आपको बता दें कि भारत में बिटक्वॉइन की कानूनन मान्यता नहीं है। इसलिए संवैधानिक पद (प्रधानमंत्री) की ओर से इस मुद्रा में कोविड-19 रिलीफ फंड के लिए पैसे माँगने पर लोग चौंके और सोशल मीडिया पर उसी तरह के रिएक्शन भी देखने को मिले।
‘हाँ, मैंने यह अकाउंट हैक कर लिया है’
रात के 3 बजकर 16 मिनट पर हैकर जॉन विक ने यह बताया कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट का ट्विटर अकाउंट हैक कर लिया है। हालाँकि इसके तुरंत बाद PM मोदी के इस पर्सनल ट्विटर अकाउंट को रिस्टोर किया गया और हैकर द्वारा किए गए सभी ट्वीट्स डिलीट कर दिए गए।
सब कुछ ठीक होने के बाद PM मोदी के पर्सनल वेबसाइट का ट्विटर हैंडल पहले के जैसा
हैकर जॉन विक ग्रुप
पेटीएम मॉल की डेटा चोरी में भी इसी हैकर ग्रुप जॉन विक का नाम आया था। साइबर सिक्योरिटी फर्म साइबल ने तब इस बात का दावा किया था। लेकिन PM मोदी के पर्सनल ट्विटर अकाउंट को हैक करने वाले ने अपने आखिरी ट्वीट में इस बात से इनकार किया है।
ट्विटर और हैकिंग
15 जुलाई को हाई-प्रोफाइल बिजनस लीडर और राजनेताओं के पर्सनल या उनसे संबंधित ट्विटर अकाउंट हैक किए गए थे। ट्विटर के 14 साल के इतिहास में इसे सबसे बड़ा हैकिंग माना गया। इसके बाद ट्विटर ने एक बयान जारी कर कहा था:
“ऐसा कुछ आम हैकरों और इंजिनियरों (social engineering attack) द्वारा एक साथ मिल कर किए गए हैकिंग के कारण हुआ। कुछ लोगों (हैकरों) ने संभवतः हमारे कुछ कर्मचारियों और हमारी आंतरिक प्रणालियों तक अपनी पहुँच बनाने में सफलता पाई। कंपनी (ट्विटर) की आंतरिक प्रणालियों से समझौता हुआ है। इस हैकिंग में ट्विटर यूजर की गलती नहीं है।”