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17500 फीट की ऊँचाई पर ‘जीरो डिग्री’ तापमान में जूझते 3 चीनी नागरिकों की भारतीय सेना ने बचाई जान

भारत और चीन के बीच जारी तनातनी के बावजूद भारतीय सेना के जवान 0 डिग्री तापमान में 3 सितंबर, 2020 को फँसे 3 चीनी नागरिकों की मदद करने और मानव धर्म निभाने से पीछे नहीं हटे। मुसीबत में फँसे चीनी नागरिकों के लिए भारतीय सैनिक एक वरदान बनकर आए और उन्हें मौत के मुँह में जाने से बचाया। हमारी सेना ने हमेशा की तरह एक बार फिर शांति, सौहार्द्र और इंसानियत की मिसाल पेश की है।

दरअसल, उत्तरी सिक्किम में 17,500 फीट की ऊँचाई पर 3 चीनी नागरिक फँस गए थे। जहाँ जीरो डिग्री से भी कम तापमान के कारण सभी की जान मुश्किल में आ गई थी। इनकी दिक्कतों को समझते हुए भारतीय सेना के जवान तुरंत वहाँ पहुँचे। इन नागरिकों में 2 पुरुष और 1 महिला शामिल थी। भारतीय सेना के जवानों ने चीन से विवाद को दरकिनार रखकर इंसानियत को ऊपर रखा और इन चीनी नागरिकों को हर संभव मदद मुहैया कराई।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सेना ने कहा कि 3 सितंबर, 2020 को नॉर्थ सिक्किम के पठारी इलाकों में 17,500 फीट की ऊँचाई पर ये तीनों चीनी नागरिक रास्ता भटक गए थे। इनकी परेशानी को देख भारतीय सेना के जवानों ने उन्हें बचाने के लिए चिकित्सा सहायता, ऑक्सीजन, खाना और गर्म कपड़े दिए। इतना ही नहीं, सेना ने उन्हें उनकी मंजिल पर पहुँचने के लिए उचित रास्ता बताया और मार्गदर्शन किया।

वहीं चीनी नागरिकों ने अपनी त्वरित सहायता करने के लिए भारत और भारतीय सेना का आभार व्यक्त किया।

प्रश्नकाल पर प्रोपेगेंडा: 5 साल में 60% वक्त बर्बाद करने वाली विपक्ष की राजनीति का एक और नमूना

कोरोना वैश्विक महामारी की वजह से इस बार संसद का मॉनसून सत्र देर से शुरू हो रहा है। हालात देखते हुए इस सत्र में प्रश्नकाल स्थगित करने का फैसला किया गया है। इस फैसले से पहले सरकार ने सभी दलों से मशविरा भी किया था। लेकिन टीएमसी के सांसद से लेकर कॉन्ग्रेस के ट्रोल तक अब इस पर प्रोपेगेंडा फैलाने में लगे हैं। मीडिया गैंग के सदस्य भी इसमें शामिल हैं।

पर हकीकत यह है कि ऐसा न तो पहली बार हुआ है और न सरकार ने विपक्ष की राय जाने बिना यह फैसला किया है। एक सत्य यह भी है कि बीते 5 साल में संसद में प्रश्नकाल का 60 फीसदी वक्त विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ बर्बाद भी हुआ है।

इस बार मॉनसून सत्र की शुरुआत 14 सितम्बर को होगी। इसका समापन 1 अक्टूबर को प्रस्तावित है। लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक दो पाली सुबह 9 से 1 बजे और दोपहर 3 से 7 बजे शाम तक संसद चलेगी। पूरे सत्र में कोई छुट्टी नहीं होगी।

शनिवार एवं रविवार को भी संसद की कार्यवाही जारी रहेगी। कोरोना के कारण उपजे हालत को देखते हुए प्रश्नकाल को स्थगित रखा गया है। इस दौरान सिर्फ गैर तारांकित (Unstarred) प्रश्न ही उठाए जाएँगे।

प्रश्नकाल के निलंबन की कॉन्ग्रेस, तृणमूल कॉन्ग्रेस और भाकपा सहित कई विपक्षी दलों के नेता आलोचना कर रहे हैं। इनका आरोप है कि सरकार कोरोना महामारी के नाम पर ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘संसद को एक नोटिस बोर्ड’ बनाने की कोशिश कर रही है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सबसे पहले इस पर सवाल उठाया और उसके बाद विपक्ष के और नेताओं ने भी इसमें सुर मिलाया।

साभार: PRS Legislative Research

ऐसा नहीं है कि संसद का प्रश्नकाल पहली बार स्थगित किया गया है। इससे पहले भी कई मौके ऐसे आए हैं जब प्रश्नकाल नहीं चला है। 1962, 1975, 1976, 1991, 2004 और 2009 में विभिन्न कारणों से राज्यसभा का प्रश्नकाल रद्द किया गया था।

इस बार के प्रश्नकाल नहीं होने पर सिर्फ तृणमूल कॉन्ग्रेस को छोड़कर सभी दल सहमत थे। भले ही प्रश्नकाल को रद्द किए जाने के बाद बवाल मचाया जा रहा हो, लेकिन सच यह भी है कि पिछले 5 साल में संसद का प्रश्नकाल 60 फ़ीसदी से अधिक वक्त हंगामे, रिकॉर्ड देखने और अन्य कार्यों की वजह से जाया हुआ है।

राज्यसभा सचिवालय के अनुसार 2015 से 2019 के दौरान कुल प्रश्नकाल का 40 फ़ीसदी वक्त ही इस्तेमाल किया गया है। 5 साल की अवधि में राज्यसभा ने 332 बैठकें हुई। हर दिन 1 घंटे का प्रश्नकाल उपलब्ध होता है, लेकिन केवल 133 घंटे और 17 मिनट का ही उपयोग प्रश्न पूछने और जवाब सुनने के लिए किया गया है। 

सरकार की तरफ से कहा गया है कि प्रश्नकाल को स्थगित करने का निर्णय संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा दोनों सदनों के अधिकारियों को सूचित करने के बाद लिया गया है। सरकार ने राजनीतिक दलों से परामर्श किया था और व्यापक सहमति थी। इस फैसले के पीछे मंशा यह थी कि सदस्य कम समय के लिए दिल्ली में रहे और अपना कार्य पूरा कर अपने संसदीय क्षेत्र में लौट सके। केवल टीएमसी इसके खिलाफ थी।

लेकिन संसद के मॉनसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल को स्थगित करने पर हंगामा कर रही तृणमूल कॉन्ग्रेस का दोहरा रवैया भी सामने आ चुका है। एक तरफ पार्टी बीजेपी के खिलाफ हमला कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में उसकी अपनी सरकार ने भी इसी रास्ते का अनुसरण किया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने शुक्रवार (सितंबर 4, 2020) को बताया कि आगामी दो-दिवसीय मॉनसून सत्र में समय की कमी और कोरोना की स्थिति की वजह से कोई प्रश्नकाल नहीं होगा।

बता दें कि इससे पहले मोदी सरकार पर ‘लोकतंत्र की हत्या’ का आरोप लगाते हुए टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कई सारे ट्वीट किए थे। डेरेक ने ट्वीट किया, “सांसदों को प्रश्नकाल के लिए अपने प्रश्न 15 दिन पहले जमा करने होंगे। संसदीय सत्र 14 सितंबर को शुरू होगा। इसलिए प्रश्नकाल स्थगित? विपक्ष के सासंदों ने सरकार से सवाल करने का अधिकार खो दिया है। 1950 के बाद पहली बार? संसद का सारे कामकाज का समय एक जैसा रहता है, तो फिर प्रश्नकाल रद्द क्यों किया? लोकतंत्र की हत्या के लिए महामारी का बहाना।”

कॉन्ग्रेस ट्रोल साकेत गोखले ने भी इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए फैसले को मोदी सरकार का खतरनाक कदम बताया। उसका कहना था कि सरकार ने कोरोना, पीएम केयर्स, और अर्थव्यवस्था पर उठने वाले सवालों से बचने के लिए ऐसा किया है।

साकेत गोखले ने इसके लिए ऑनलाइन पिटीशन साइन करवाने का भी अभियान चलाया। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी कहा कि सरकार डरी हुई है। लेकिन बंगाल के आगामी विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल नहीं होने पर इन्होंने चुप्पी साध रखी है।

चूँकि यहाँ पर उनका प्रोपेगेंडा फिट नहीं बैठ रहा था, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। कॉन्ग्रेस, टीएमसी और अन्य लेफ्ट पार्टियों के दोहरे रवैये को देखना हो, तो इनके द्वारा शासित राज्यों में हुए हालिया विधानसभा सत्र पर गौर करने की जरूरत है। इनके द्वारा शासित पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र और केरल में हाल ही में विधानसभा सत्र हुए, जिसमें प्रश्नकाल नहीं रखा गया था और अब पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा सत्र में भी नहीं रखा गया है। 

ऐसा कई बार देखने को मिला है कि केंद्र सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाने वाली पार्टियाँ अपने सत्ता वाले राज्य में भी वही नीतियाँ लागू करती नजर आई। यह इन पार्टियों के दोहरे मानदंड के अलावा और कुछ नहीं है।

क्या होता है प्रश्नकाल (Parliament Question Hour)

प्रश्नकाल के दौरान सदन के सदस्य (जनता का प्रतिनिधि) प्रशासन और सरकारी गतिविधि के हर पहलू पर प्रश्न पूछ सकते हैं। राष्ट्रीय के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में सरकार की नीतियों पर भी चर्चा होती है. क्योंकि सदस्य प्रश्नकाल के दौरान प्रासंगिक जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

प्रश्नकाल का समय 11 बजे से 12 बजे तक का तय है। इसमें संसद सदस्यों द्वारा आम लोगों के किसी मामले पर जानकारी सरकार ने माँगते हैं। ये कई मुद्दों पर आधारित होता है ये उस वक्त पर तय करता है कि उस वक्त या कुछ महीनों पहले किस मुद्दे पर सरकार से सवाल कर सकते हैं। इसमें पूछे गए प्रश्नों के जवाब सरकार के प्रतिनिधि देते हैं। प्रश्नकाल के दौरान कई तरह के सवाल होते हैं। जैसे कि तारांकित प्रश्न, गैर-तारांकित प्रश्न, अल्पसूचना प्रश्न, गैर सरकारी सदस्यों से पूछे जाने वाले प्रश्न।

अवमानना मामले में प्रशांत भूषण को प्रैक्टिस से किया जा सकता है निलंबित: BCI ने दिया कार्रवाई के निर्देश, BCD करेगा ट्वीट्स की जाँच

भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण को अवमानना ​​का दोषी पाए जाने के कुछ दिनों बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) को उनके ट्वीट्स की जाँच करने और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

बीसीआई ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस रिलीज में कहा, “परिषद का मानना है कि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत बार काउंसिल में निहित वैधानिक कर्तव्यों, शक्तियों एवं कार्यों के आलोक में तथा खासकर अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 24ए एवं धारा 35 तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स के अध्याय दो, खंड- छह के दायरे में वकील प्रशांत भूषण और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जो फैसला दिया, उसका व्यापक अध्ययन और जाँच जरूरी है।”

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आगे दोहराया कि बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को ट्वीट की जाँच करनी चाहिए और उसके अनुसार आगे बढ़ना चाहिए। बैठक की अध्यक्षता वाईस प्रेसिडेंट सतीश ए. देशमुख ने द्वारा की गई थी।

एडवोकेट्स एक्ट की धारा 24ए के तहत अगर कोई वकील नैतिक भ्रष्टता से जुड़े किसी अपराध में दोषी पाया जाता है, तो वह कानूनी प्रैक्टिस नहीं कर सकता या किसी राज्य की बार काउंसिल के रोल पर नहीं रह सकता है। अधिवक्ता अधिनियम की धारा 24 में कहा गया है कि पेशेवर कदाचार के दोषी पाए गए वकील को अदालतों में प्रैक्टिस करने से निलंबित किया जा सकता है या उनके लाइसेंस पूरी तरह से रद्द कर दिया जा सकता है।

भूषण के बार लाइसेंस के निलंबन के फैसले में पैराग्राफ 89 की मिसाल रखी गई थी। पैराग्राफ 89 में यह कहा गया है, ”एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) अगर चाहे वह नामांकन को निलंबित कर सकती है।”

सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को अवमानना के दोषी वकील प्रशांत भूषण को मात्र 1 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि जुर्माना अदा नहीं करने पर भूषण को तीन महीने की कैद भुगतनी होगी और वे 3 साल तक वकालत करने से प्रतिबंधित रहेंगे। यह मामला दो ट्वीट्स से जुड़ा है, जहाँ प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट और विशेष रूप से CJI बोबडे के खिलाफ टिप्पणी की थी।

गौरतलब है कि इसके बाद प्रशांत भूषण ने न्यायालय की अवमानना मामले में मिली 1 रुपए जुर्माने की सजा को स्वीकार करते हुए कहा था कि वो यह जुर्माना भरेंगे और इसके ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका भी दायर करेंगे। एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस चीज़ के लिए उन्हें दोषी ठहराया है वो हर नागरिक के लिए सबसे बड़ा कर्तव्य है।

प्रशांत ने कहा कि उनके ट्वीट्स का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं था, वे सुप्रीम कोर्ट के अपने शानदार रिकॉर्ड से भटकने को लेकर नाराजगी की वजह से किए गए थे। भूषण ने कहा था, “सुप्रीम कोर्ट के द्वारा लगाए गए जुर्माने की रिव्यू पिटिशन फाइल करने का मुझे अधिकार है। कोर्ट ने मुझ पर जो जुर्माना लगाया है, उसका मैं एक नागरिक को तौर पर कर्तव्य निभाते हुए भुगतान करूँगा।”

AltNews के मोहम्मद जुबैर के खिलाफ FIR, बच्ची की ऑनलाइन प्रताड़ना का है मामला

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी है कि ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। NCPCR के अध्यक्ष ने ट्विटर पर इसकी सूचना देते हुए बताया कि आयोग की ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ के अनुसार, नाबालिग लड़की की ऑनलाइन प्रताड़ना के आरोप में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।

इस मामले में ट्विटर को भी नोटिस भेजा गया था। ट्विटर के निवेदन के बाद NCPCR ने उसे मोहम्मद जुबैर के ट्वीट के सम्बन्ध में और अधिक जानकारी देने के लिए 10 दिनों का अतिरिक्त समय दिया है। जुबैर के ट्वीट के बाद उसे फॉलो करने वाले ट्विटर एकाउंट्स @de_real_mak और @syedsarwar ने भी बच्ची के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था, इसीलिए एफआईआर में उनका नाम भी शामिल है।

इससे पहले प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा छोटी बच्ची की तस्वीर सार्वजनिक करने, धमकियाँ देने और टॉर्चर करने के आरोप में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने ट्विटर को नोटिस भेजा था। आयोग ने कहा था कि वह इस मामले में स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और इसके लिए ट्विटर के सीनियर मैनेजर्स को 4 सितम्बर को उपस्थित होना होगा। अब उन्हें 10 दिन का फिर से समय दिया गया है।

ज़ुबैर के साथ दो अन्य ट्विटर यूजर्स के खिलाफ भी मामला दर्ज

फैक्ट चेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात समूह ऑल्टन्यूज़ के संस्थापकों में से एक मोहम्मद जुबैर ने शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने के लिए नाबालिग बच्ची की तस्वीर सार्वजानिक कर दी थी। बताया गया था कि यह बच्ची उस यूजर की पोती थी और उसे जुबैर के ट्वीट के बाद रेप की धमकियाँ मिली थी।

उत्तर प्रदेश: बसपा के पूर्व मंत्री बशीर चौधरी पर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने के आरोप में केस दर्ज

आगरा स्थित मंटोला थाना में बहुजन समाज पार्टी के पूर्व मंत्री बशीर चौधरी के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। हाल ही में उनका एक वीडियो में सामने आया जिसमें वह सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने वाले बयान देते हुए नजर आ रहे हैं। पूर्व मंत्री पर आरोप है कि उसने लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत करने की मंशा से यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। बशीर साल 2002 में बसपा के टिकट पर आगरा छावनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत चुके हैं। 

पुलिस के मुताबिक़, पूर्व मंत्री की यह हरकत दो समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश है। उनके इस बयान की वजह से कभी भी तनाव पैदा हो सकता था, इतना ही नहीं उन्होंने अपने वीडियो में एक हिंदूवादी संगठन (अखिल भारतीय हिंदू महासभा) के सदस्यों को मोहल्ले में न घुसने की चेतावनी दी। नतीजतन बशीर चौधरी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 A, 295 A और प्रावधान 67 आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस अपनी तरफ से इस मामले की विवेचना कर रही है।   

दरअसल, शनिवार 29 अगस्त को अखिल भारतीय हिंदू महासभा के कुछ सदस्यों ने हाथी घाट क्षेत्र के पास दो ऐसे वाहन पकड़े जिन पर माँस लदा हुआ था। इस घटना की जानकारी मिलते ही संगठन के तमाम लोगों ने आगरा के मंटोला क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने माँग उठाई कि शहर में होने वाली गौ हत्या और गौ तस्करी पर रोक लगाई जाए। ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। 

इस विरोध प्रदर्शन के बाद बशीर चौधरी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। जिसमें उन्होंने अखिल भारतीय हिंदू महासभा के सदस्यों को चेतावनी दी कि भविष्य में कभी मंटोला आने की हिम्मत न करें। इसके अलावा बशीर चौधरी ने वीडियो में माहौल बिगाड़ने वाली कई अन्य बातें कही। कुछ ही देर में लोगों ने इस वीडियो पर खूब प्रतिक्रिया दी और निंदा भी की। कथित तौर पर बशीर ने वीडियो में दो समुदायों के बीच घृणा फैलाने वाली बातें भी कही हैं। वीडियो वायरल होने के बाद मंटोला थाने की पुलिस ने बशीर चौधरी पर मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया। 

बसपा सरकार के पूर्व मंत्री का विवादों से संबंध नया नहीं है। पिछले महीने भी मंटोला थाना में बशीर चौधरी के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में बशीर बकरा बेचने वाले संप्रदाय विशेष के लोगों को पुलिस के विरुद्ध भड़का रहा था। बकरीद के दौरान महामारी को देखते हुए मंटोला पुलिस ने बाज़ार में बकरा मंडी लगाने की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस के इस आदेश को ताक पर रखते हुए बशीर चौधरी ने बकरा बेचने वाले संप्रदाय विशेष के लोगों से कहा उन्हें बिना रोक टोक बकरा बेचना चाहिए। बशीर ने कहा, “किसी को भागने या कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है, यहाँ कोई चरस गाँजा नहीं बेच रहा है। जब तक मैं यहाँ हूँ कोई तुम्हें छू भी नहीं सकता है। सब बेफ़िक्र होकर अपना धंधा करो।” 

बशीर वही नेता है जिस पर साल 2018 के दौरान उसकी पत्नी ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था। साल 2013 में पूर्व मंत्री की गर्भवती पत्नी ने उसके विरुद्ध दहेज़ के लिए प्रताड़ित करने और अप्राकृतिक सेक्स का दबाव बनाने का मामला दर्ज कराया था। बशीर की तीसरी पत्नी नगमा ने यह आरोप भी लगाया है कि उसके किसी अन्य महिला से संबंध हैं। जब उसने इन बातों का विरोध किया तब बशीर ने उसके साथ मारपीट की। साल 2002 में बशीर ने आगरा की छावनी विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। 

इसके बाद वह कैबिनेट मंत्री भी बना था। फिर उसने देवरिया की विधायक चौधरी गज़ाला लारी से निकाह किया और समाजवादी पार्टी में शामिल हो गया। उसने समाजवादी पार्टी से भी चुनाव लड़ा लेकिन बसपा नेता से हार गया था। इसके बाद बशीर कॉन्ग्रेस में शामिल हुआ और उसने आगरा की दक्षिणी विधानसभा सीट से टिकट माँगा पर उसे टिकट नहीं दिया गया। साल 2012 में उसने राष्ट्रीय समता दल नाम के राजनीतिक दल से चुनाव लड़ा और वह भी हार गया।         

फेसबुक ओवरसाइट बोर्ड के 20 में से 18 सदस्यों का मोदी विरोधी जॉर्ज सोरोस से है कनेक्शन

फेसबुक के प्रस्तावित ओवरसाइट बोर्ड के 20 में से 18 सदस्य जॉर्ज सोरोस से जुड़े हुए हैं। RealClearInvestigations के शैरिल एकिन्स्टन की जॉंच से यह बात सामने आई है। यहूदी अमेरिकी अरबपति सोरोस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के लिए जाने जाते हैं। इस साल की शुरुआत में उन्होंने राष्ट्रवादियों से मुकाबले के लिए 100 करोड़ डॉलर का फंड की घोषणा की थी। कॉन्ग्रेस से भी उनके घनिष्ठ संबंध रहे हैं।

हाल ही में फेसबुक ने स्वतंत्र रूप से काम करने वाले ओवरसाइट बोर्ड के गठन की घोषणा की थी। इस बोर्ड का मुख्य काम फेसबुक पर मौजूद कंटेंट को रेगुलेट (नियंत्रित) करना और अश्लीलता, हेट स्पीच और नफ़रत फैलाने वाली सामग्री की निगरानी करना होगा। जाँच में यह बात सामने आई है कि इस बोर्ड के 90 फ़ीसदी सदस्यों का जॉर्ज के साथ कनेक्शन है। इनको सोरोस की ओपन सोसायटी फ़ाउंडेशन से आर्थिक सहयोग भी मिलता है।  

हेले थोर्निंग स्कमिड, डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री, कैटलीना बोटेरो मारीनो, अफिया असंतेवा असारे और सुधीर कृष्णस्वामी ओवरसाइट बोर्ड के ऐसे सदस्य हैं जिनका सोरोस से संबंध है। अरबपति लिबरल जॉर्ज सोरोस से जुड़े बोर्ड सदस्यों में रोनाल्डो लेमोस, माइकल मैक्कोनेल, एलन रसब्रिजर और एन्दस साजो भी शामिल हैं। 

अमेरिकी समाचार समूह न्यूयॉर्क टाइम्स में इस मुद्दे पर विस्तार से जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक़ फेसबुक ओवरसाइट बोर्ड के सदस्य अलग पेशे, संस्कृति और धार्मिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उन सभी के अपने सामाजिक और राजनीतिक अभिमत हैं। इनमें से कुछ फेसबुक की सार्वजनिक रूप से आलोचना भी करते रहे हैं।

जानकारी के अनुसार फेसबुक एक स्वतंत्र ओवरसाइट तंत्र बनाने की तैयारी लगभग पूरी कर चुका है। पिछले 18 महीनों में लगभग 2200 जानकारों और 88 देशों ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इससे फेसबुक के ओवरसाइट बोर्ड को अंतिम सूरत देने में मदद मिली। फ़िलहाल इस बोर्ड में 20 सदस्य हैं जिन्हें संभावित तौर पर 40 भी किया जा सकता है। इस साल के अंत तक बोर्ड के सक्रिय होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। 

यह काफी हद तक साफ़ हो चुका है कि सोशल मीडिया मंच रुढ़िवादी राजनीतिक विचारों की तरफ झुकाव रखते हैं। इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण ट्विटर है जिसने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर कार्रवाई की थी। इस घटना से एक बात स्पष्ट थी कि सोशल मीडिया मंचों का रवैया कितना पक्षपाती है। 

जब से जॉर्ज सोरोस के भारतीय राजनीति में दखल देने की ख़बरें सामने आई हैं, भारत के लोग भी चिंतित हैं। भारत में ऐसे तमाम गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) हैं जो सोरोस के संपर्क में हैं और देश की क़ानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करते रहते हैं। इसके अलावा हर्ष मंदर जैसे भी कई लोग हैं जो इनके साथ मिल कर भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा करते हैं।     

लंदन तक पहुँचा सुशांत की मौत से उठा बवंडर, रिया के क्रेडिट कार्ड से ड्रग्स का पेमेंट; दिवंगत अभिनेता के घर पर CBI

सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला बॉलीवुड और भारत से निकल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन रहा है। शुक्रवार (सितम्बर 4, 2020) को इस मामले में रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक और सैमुअल मिरांडा की गिरफ़्तारी के बाद ब्रिटेन में भी उनके फैंस ने ख़ुशी मनाई। ब्रिटेन के फैंस ने ‘जस्टिस फॉर सुशांत’ को दुनिया भर में ले जाने का फैसला किया है।

ब्रिटेन में मल्टीप्लेक्सों के सामने सितम्बर 14, 2020 को बड़े विरोध-प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। प्रदर्शन की तैयारी कर रहे लोगों का कहना है कि ब्रिटेन में ऐसा कर वे बॉलीवुड को सन्देश देना चाहते हैं कि वो जनता ही है, जिसने उनलोगों को यहाँ तक पहुँचाया है। उनका का कहना है कि बॉलीवुड के लोग भगवान नहीं हैं, ये उन्हें याद रखना चाहिए। ‘न्यूज़ 18’ पर इससे सम्बंधित विस्तृत रिपोर्ट में प्रर्दशनकारियों का नेतृत्व करने वालों से बात की गई है।

ऐसी ही एक महिला रूपा दीवान ने कहा कि अगर इस मामले में न्याय मिल भी जाता है तो लोग असली मुद्दे को भूल जाएँगे, जबकि हमारा असली उद्देश्य बॉलीवुड से नेपोटिज्म को ख़त्म करना है। पिछले सप्ताह एक ट्रक पर सुशांत सिंह राजपूत की तस्वीर लगा कर न्याय की माँग करते हुए इसे पूरे लंदन में घुमाया गया था। सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने भी ऐसी तस्वीरें अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स से पोस्ट की थी।

सुशांत सिंह राजपूत के वकील विकास सिंह ने भी कहा है कि NCB द्वारा शौविक और सैमुअल को गिरफ्तार किए जाने और ड्रग्स वाला एंगल सामने आने से इतना तो स्पष्ट हो गया है कि परिवार का ये डर सही निकला कि मुंबई पुलिस किसी बड़ी चीज को दबाना चाहती थी। उन्होंने कहा कि इस केस में कई एंगल थे। परिवार आशा करता है कि इस मामले में अभी और एंगल सामने आएँगे, जिनसे सच्चाई पता चलेगी।

सीबीआई ने भी सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच के क्रम में दिवंगत अभिनेता के बांद्रा स्थित फ्लैट का दौरा किया, जहाँ वो जून 14 को मृत पाए गए थे। ये भी पता चला है कि रिया चक्रवर्ती के क्रेडिट कार्ड से ड्रग्स का पेमेंट किया गया था। कहा जा रहा है कि इस सिंडिकेट में और भी लोग शामिल हैं, जिसका खुलासा जल्द होगा। रिया-शौविक से सम्बन्ध रखने वाले कुछ ड्रग सिंडिकेट के लोगों को हिरासत में भी लिया गया है।

इससे पहले खबर आई थी कि शौविक चक्रवर्ती ने NCB के सामने कथित तौर पर स्वीकार कर लिया है कि रिया के कहने पर उसने ड्रग्स खरीदे थे। इतना ही नहीं, शौविक का दावा है कि रिया ने उसके अलावा सुशांत के पूर्व मैनेजर सैमुएल मिरांडा से भी ड्रग मँगाए, क्योंकि वह कई ड्रग तस्करों के संपर्क में था। वहीं, सैमुएल ने स्वीकार किया कि वह सुशांत के घर के लिए ड्रग्स खरीदते थे।

ऊँचाई वाले 39 स्थलों पर ITBP के जवानों ने डाला डेरा, LAC पार भी चीन की गतिविधियों पर रहेगी नजर

भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल’ (LAC) पर जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है। भारतीय सेना के जवानों के अलावा इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों को भी मोर्चे पर लगाया गया है। कई ऐसी रणनीतिक ऊँचाई वाली जगहों पर ITBP के जवानों ने डेरा जमा लिया है, जहाँ से चीन के सैनिकों की गतिविधियों पर सीधे नजर रखी जा सकती है। इससे LAC के पार भी नजर रखी जा सकती है।

सब-सेक्टर नॉर्थ से लेकर सब-सेक्टर साउथ तक 5000 ITBP के जवानों को लद्दाख और चीन सीमा से सटे उससे जुड़े इलाकों में तैनात किया गया है। बता दें कि हाल ही में जब चीन ने सीमा पर मौजूदा स्थिति को बिगाड़ने का प्रयास किया था तो उसे नाकाम करने में ITBP के जवान भी शामिल थे। पांगोंग त्सो के दक्षिण में ऊँचाई वाली जगहों पर भारतीय सेना मौजूद है, जिससे चीन के हर इरादे को नाकाम किया जा सकता है।

वहीं ITBP के 30 जवानों ने पूर्वी लद्दाख में ब्लैक टॉप एरिया में डेरा जमाया है, जहाँ से चीन की गतिविधि पर सीधे नज़र रखी जा सकती है। इस जगह का अपना ही रणनीतिक महत्व है। फुरचुक ला पास से गुजरते हुए ITBP के जवानों ने उन रणनीतिक स्थलों पर डेरा जमाया है, जहाँ पहले सशस्त्र बलों की कोई उपस्थिति नहीं थी। फिंगर 2 और फिंगर 3 के पास पांगोंग के उत्तर में धन सिंह पोस्ट सहित कई जगहों पर ITBP के लोग मौजूद हैं।

ये सभी स्थल इतनी ऊँचाई पर है, जहाँ से LAC पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा की जाने वाली गड़बड़ियों को तुरंत भाँपते हुए त्वरित कार्रवाई की जा सकती है। पूर्वी लद्दाख के पांगोंग त्सो क्षेत्र में ITBP के जवाब चीन को अपनी ताकत दिखा चुके हैं। सुरक्षा एजेंसी के मुखिया एसएस देसवाल 6 दिनों के लिए LAC के दौरे पर थे, जहाँ उन्होंने जवानों की तैयारी का जायजा लिया। उन्होंने दौलतबेग से लेकर दक्षिणी लद्दाख तक दौरा किया।

फ़िलहाल LAC पर 39 ऐसी जगहें हैं, जहाँ ITBP के जवानों ने रणनीतिक रूप से अपने अधिकार में ले रखा है। बता दें कि विस्तारवादी चीन की चाल इस बार असफल रही है। भारतीय सेना के मुताबिक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए के करीब 500 सैनिकों ने 29-30 अगस्त की रात काला टॉप और हेमलेट टॉप इलाकों पर यथास्थिति बदलने की कोशिश की, लेकिन सतर्क भारतीय सैनिकों ने ऐसा नहीं होने दिया।

कन्नड़ अभिनेत्री संयुक्ता पर कॉन्ग्रेस नेत्री कविता रेड्डी और उनके समर्थकों ने किया हमला, देखें Video

उभरती हुई कन्नड़ अभिनेत्री संयुक्ता हेगड़े को कॉन्ग्रेस नेता कविता रेड्डी और उनके समर्थकों ने गाली दी और फिर हमला कर दिया। हमला करते हुए कॉन्ग्रेस नेता और उनके साथ मौजूद लोगों ने कन्नड़ अभिनेत्री पर बुरा बर्ताव करने का आरोप लगाया। यह घटना बेंगलुरु शहर स्थित अगारा झील के नज़दीक हुई। 

संयुक्ता हेगड़े ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए पूरी घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शाम के वक्त वह अपने दो दोस्तों के साथ ‘हूला हूप्स’ (जिमनास्टिक अभ्यास) कर रही थीं। इसी दौरान एक महिला उनके नज़दीक आई और गलत व्यवहार करने का आरोप लगा कर अपशब्द कहने लगी। फिर उन्हें पता चला कि मॉरल पुलिसिंग के नाम पर बदतमीजी कर रही महिला कॉन्ग्रेस की नेता कविता रेड्डी है। 

संयुक्ता ने बताया कि कविता रेड्डी और उनके समर्थक थोड़ी ही देर में हाथापाई भी करने लगे। उन्होंने इस घटना का एक वीडियो अपने ट्विटर एकाउंट पर साझा किया है। इसमें बेहद साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि पहले कविता रेड्डी और उनके समर्थक बहस करते हैं। इसके थोड़ी ही देर बाद अभिनेत्री और उनकी दो दोस्तों के साथ हाथापाई और मारपीट पर उतर आते हैं। 

संयुक्ता ने बताया कि जब वह हूला हूप्स का अभ्यास कर रही थी तभी एक उम्र दराज़ महिला उनके नज़दीक आई। वह जैसे ही कुछ समझ पाती इसके पहले महिला ने उनके पहनावे को लेकर अभद्र टिप्पणी शुरू कर दी। कॉन्ग्रेस नेता कविता रेड्डी ने कहा, “क्या तुम कैबरे डांसर हो? यह किस तरह के कपड़े पहने हुए हैं? A@&&&@s! अगर इस तरह के कपड़े पहनने पर तुम्हारे साथ कुछ होता है तो रोते हुए मेरे पास मत आना।” 

कन्नड़ अभिनेत्री संयुक्ता ने इस घटना का पूरा वीडियो भी बनाया है जिसमें वह डरी और सहमी हुई नज़र आ रही हैं। वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि अभिनेत्री के साथ कई लोगों ने सार्वजनिक तौर पर अभद्रता की। संयुक्ता ने आरोप लगाया कि कविता रेड्डी के साथ मौजूद 10 आदमियों के उन्हें धमकी देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि वह ड्रग स्कैंडल मामले में संयुक्ता का नाम भी शामिल करवा देंगे। 

संयुक्ता ने कहा, “कई लोगों ने हमें चारों तरफ से घेर लिया। फिर कविता रेड्डी ने मेरी दोस्त के साथ मारपीट की, मैंने अपने मोबाइल में इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया। इसके बाद हम स्थानीय पुलिस थाने गए और वहाँ तक सभी हम पर चिल्ला रहे थे। हमारी किस्मत अच्छी थी कि एक पुलिसकर्मी ने कहा हमने कुछ गलत नहीं किया और हमें वापस भेज दिया।”      

वहीं घटना के दौरान जो पुलिसकर्मी अगारा झील के पास मौजूद थे वह कविता रेड्डी को कुछ कहने की जगह उल्टा अभिनेत्री को चुप रहने और वीडियो न बनाने की नसीहत दे रहे थे। वीडियो में एक पुलिसकर्मी को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है कि बिना वीडियो बनाए भी विवाद सुलझाया जा सकता है। अभिनेत्री संयुक्ता ने आरोप लगाया कि झील के पास मौजूद पुलिसकर्मियों ने कविता रेड्डी और उनके समर्थकों से कुछ नहीं कहा। 

संयुक्ता ने बताया कि पुलिसकर्मी ने उन्हें और उनकी दोस्तों को चुपचाप वापस लौटने के लिए कह दिया, जबकि मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हम रोज़ अभ्यास करने के लिए आते हैं और किसी भी तरह की अभद्रता नहीं करते हैं। ख़बरों के अनुसार संयुक्ता इस घटना की वजह से अवसाद में हैं, उनका कहना है हमने पता नहीं ऐसा क्या किया था जिसकी वजह से हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया गया। इस तरह का बर्ताव किसी के साथ नहीं होना चाहिए और मॉरल पुलिसिंग की ऐसी घटनाओं पर लगाम लगनी चाहिए।     

मुंबई की मेयर ने कंगना को बताया ‘कंस का वरदान’, टाँग तोड़ने की शिवसेना MLA की धमकी पर महिला आयोग सख्त

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कंगना रनौत को धमकी देने वाले शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है। इस बीच मुंबई की मेयर ने कंगना को ‘कंस का वरदान’ बताया है।

धमकी देने के मामले में NCW ने महाराष्ट्र के डीजीपी को पत्र लिखा है। रेखा शर्मा ने कहा कि कंगना को शिवसेना विधायक की धमकी काफी आपत्तिजनक है। विधायक ने कहा था कि अगर अभिनेत्री मुंबई में घुसती हैं तो उनकी टाँगें तोड़ दी जाएँगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया है। रेखा शर्मा ने पहले ही बताया था कि वो इस मामले में स्वतः संज्ञान ले रही हैं। रेखा शर्मा ने कहा कि कंगना रनौत की किसी भी ट्वीट से ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि वो देशद्रोही हैं या फिर उन्होंने किसी को भी धमकी दी हो। उनकी ट्वीट्स आपत्तिजनक नहीं थीं।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने आगे कहा कि इस खबर से शिवसेना नेताओं की विचारधारा के बारे में भी पता चलता है, अगर कोई महिला स्वतंत्रता के बारे में बात कर रही है तो वो लोग इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। उधर केंद्रीय मंदिर रामदास आठवले ने भी संजय राउत द्वारा कंगना रनौत को मुंबई न आने की धमकी भरे बयान की निंदा करते हुए कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है और कंगना सहित सभी लोग सुशांत मामले में न्याय के लिए आवाज़ उठा रहे हैं।

मुंबई की मेयर और शिवसेना नेता किशोर पडनेकर ने भी कंगना रनौत पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘कंस मामा का वरदान’ बताया है। मेयर ने ‘टीवी 9 मराठी’ के एक ट्वीट की रिप्लाई में मराठी भाषा में ये टिप्पणी की। उस खबर में बताया गया था कि कंगना ने मुंबई को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा है कि वो इस शहर को माँ यशोदा के रूप में देखती हैं, जिसने उन्हें अपनाया और उन्हें अपनी कर्मभूमि के लिए प्यार को साबित करने की कोई ज़रूरत नहीं।

उधर कंगना रनौत ने अपने हालिया ट्वीट में मराठी लिबास में तस्वीर साझा की और संजय राउत की धमकियों का जवाब देते हुए लिखा, “किसी के बाप का नहीं है महाराष्ट्र, महाराष्ट्र उसी का है जिसने मराठी गौरव को प्रतिष्ठित किया है। मैं डंके की चोट पे कहती हूँ, हाँ मैं मराठा हूँ, उखाड़ो मेरा क्या उखाड़ोगे।”