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चेक गणराज्य के अध्यक्ष ने चीनी विदेश मंत्री को बताया चाइनीज ‘वुल्फ वॉरियर डिप्लोमैट’: ताइवान यात्रा पर दी थी धमकी

चीन के विदेश मंत्री वांग ई ने चेक गणराज्य के उच्च सदन सीनेट के अध्यक्ष मिलोस विस्त्रसिल की ताइवान यात्रा को ‘भड़काने वाला और अदूरदर्शी कदम’ करार देते हुए सोमवार (अगस्त 31, 2020) को चेतावनी दी कि जो कोई भी ‘एक चीन’ नीति को चुनौती देगा, उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। मिलोस विस्त्रसिल ने इसका जवाब देते हुए विदेश मंत्री के नाम एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने विदेश मंत्री वांग ई को एक चाइनीज ‘वुल्फ वॉरियर डिप्लोमैट’ कहा है।

बता दें कि चीन के कड़े विरोध के बावजूद चेक गणराज्य के उच्च सदन सीनेट के अध्यक्ष मिलोस विस्त्रसिल रविवार (अगस्त 30, 2020) को एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ ताइवान पहुँचे और वहाँ के शीर्ष अधिकारियों से भेंटवार्ता किया। चेक गणराज्य की संसद सीनेट के स्पीकर की ताइवान यात्रा से चीन तिलमिला गया है। तीखी प्रतिक्रिया में इसे चीन की वन चाइना पॉलिसी का उल्लंघन करार दिया है। 

चीन के विदेश मंत्री वांग ई ने कहा है कि सीनेट स्पीकर मिलोस विस्ट्रसिल को अपनी यात्रा की भारी कीमत चुकानी होगी। अगस्त में ही अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्री ने ताइवान का दौरा किया था जिससे चीन बौखला गया था। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।

यूरोपीय संघ के देशों की अपनी यात्रा के तहत सोमवार को जर्मनी पहुँचे वांग ई ने कहा कि चीन अपनी ‘एक चीन’ नीति का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ताइवान चीन क्षेत्र का अविभाज्य हिस्सा है तथा ताइवान मुद्दे पर एक चीन नीति को चुनौती देना यानी 1.4 अरब चीनियों को दुश्मन बनाना एवं अंतरराष्ट्रीय विश्वास एवं आचरण का उल्लंघन करना है।

वहीं ताइवान के साथ कारोबारी रिश्ते बढ़ाने के उद्देश्य से ताइवान पहुँचे मिलोस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनका देश चीन की आपत्तियों के आगे नहीं झुकेगा। ताइवान के साथ वह वैसे ही संबंध रखेगा, जैसे एक राष्ट्र को दूसरे राष्ट्र को रखने चाहिए। भारी कीमत झुकाने जैसी धमकी देना अदूरदर्शी व्यवहार को प्रदर्शित करता है। 

यह असहमति जताने वालों को डराने वाला प्रयास है। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वांग का बयान चेक गणराज्य के अंदरूनी मामलों में दखल है। उनके ताइवान के दौरे का आशय किसी तरह का राजनीतिक टकराव नहीं है। सोमवार को ताइपे यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में मिलोस ने कहा, “चेक और ताइवान स्वतंत्र देश हैं और हमारे बीच अच्छे रिश्ते होने चाहिए। उन्होंने ताइवान की लोकतांत्रिक जीवनशैली की प्रशंसा की।”

इस मौके पर ताइवान के वित्त मंत्री वांग मी हुआ ने कहा, “चेक गणराज्य और ताइवान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश हैं। हमारे पास मानवाधिकारों का पालन करने का शानदार इतिहास है।”

उधर प्राग में चेक गणराज्य के विदेश मंत्री टॉमस पेट्रिसेक ने स्पष्ट किया है कि सरकार मिलोस की यात्रा के समर्थन में नहीं है लेकिन चीन ने जैसी आपत्तिजनक प्रतिक्रिया व्यक्त की है उसके लिए चीन के राजदूत को तलब कर पूछा जाएगा कि भारी कीमत का आशय क्या है। पेट्रिसेक ने कहा, “विदेश मंत्री वांग का बयान बोलने की सीमारेखा को पार करने वाला है। इस तरह के कड़े शब्द संप्रभु राष्ट्रों के बीच नहीं बोले जाते। भावनाओं के बगैर कूटनीति नहीं चलती।”

फेसबुक पर फोटो शेयर करने पर वसीम ने अपनी बीवी अर्पिता जैन को किया आग के हवाले, निकाह के बाद फातिमा बनी शालिनी है गुमशुदा

वसीम शाह ने अर्पिता जैन से शादी की और उसका नाम मुस्कान रखा। शादी के बाद वसीम ने अपनी पत्नी अर्पिता उर्फ़ मुस्कान को सिर्फ इसलिए जला दिया क्योंकि वह फेसबुक पर अपनी तस्वीर शेयर करती थी। वसीम की पत्नी अर्पिता जैन उर्फ़ मुस्कान की हालत नाज़ुक बनी हुई है। पुलिस आरोपित पति वसीम शाह को गिरफ्तार कर चुकी है और आज मंगवलार (1 सितंबर 2020) को उसे अदालत में पेश किया गया। 

वसीम शाह मध्य प्रदेश, खंडवा जिले के शानशाहवली इलाके का रहने वाला है। वसीम ने अपनी पत्नी अर्पिता जैन को फेसबुक पर फोटो शेयर करने के कारण मिट्टी का तेल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया। फेसबुक पर फोटो शेयर करने के कारण वसीम को अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह होने लगा था। जिसके बाद उसने यह कदम उठाया।

पीड़िता अर्पिता मूल रूप से छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज से है। इसके पहले उसका विवाह जैन समुदाय के एक युवक से हुआ था। लेकिन उससे तलाक होने के बाद अर्पिता ने वसीम शाह से शादी की थी। लगभग 3 साल पहले उसकी वसीम शाह से मुलाक़ात हुई थी। शुरुआत में वसीम का व्यवहार बहुत अच्छा था, अर्पिता को बहुत अच्छे से रखता था, लेकिन कुछ समय बाद उसका असली चेहरा सामने आया। 

बताया जा रहा है कि हर दूसरी बात पर वसीम अर्पिता को रोकने-टोकने लगा और हर बात पर उसे प्रताड़ित करने लगा। बीती रात वसीम शाह ने अर्पिता को जला कर मारने का प्रयास किया। पुलिस अधीक्षक ललित गठरे ने भी इस मुद्दे पर बात करते हुए कई अहम जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि ललित गठरे को गिरफ्तार किया जा चुका है और फ़िलहाल उससे पूछताछ जारी है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा पुलिस ने आज वसीम शाह को अदालत में पेश किया था। उसके बारे में अन्य जानकारी भी निकाली जा रही है।

शालिनी से फातिमा बनी.. अब गुमशुदा

इसके पहले उत्तरप्रदेश के कानपुर में इस्लाम धर्म कबूल कर शादी करने का मामला सामने आया था। शालिनी यादव नाम की युवती 2 महीने से गायब थी, जिसका हाल ही में पता चला था। लेकिन तब तक उसका नाम, धर्म और मैरिटल स्टेटस बदल चुका था। शालिनी यादव ने एक वीडियो जारी कर बताया कि उसका नाम अब फिजा फातिमा हो चुका है। और उसने फैसल नाम के एक शख्स से शादी कर ली है।

शालिनी के परिजनों ने पुलिस को मोहम्मद फैसल के ​खिलाफ तहरीर दी थी। पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए गाजियाबाद जाकर कार्रवाई शुरू कर दी थी। बता दें कानपुर के बर्रा 6 की रहने वाली 22 वर्षीय शालिनी यादव 29 जून से ही लापता थी। उसने अपने घरवालों से परीक्षा देने का बहाना बनाया और लखनऊ चली गई। फिर उसी दिन से वह घर नहीं लौटी। परिजनों ने उसे खोजने की खूब कोशिश की लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।

तमिलनाडु: गणेश उत्सव झाँकी निकालने पर कट्टरपंथियों ने की अरुण कुमार की बेरहमी से हत्या

तमिलनाडु के रामनाथपुरम में गणेश चतुर्थी का उत्सव मनाते वक़्त कट्टरपंथियों ने अरुण कुमार नाम के एक शख्स की बेरहमी से हत्या कर दी। यह हत्या दिन के उजाले में की गई। बता दें कि गणेश विसर्जन के दौरान निकाले गए जुलूस में अरुण कुमार भी शामिल थे। वो भक्ति में लीन होकर उस पल का आनंद ले रहे थे, मगर उन्हें कहाँ पता था कि कट्टरपंथी उनके साथ क्या करने वाले हैं। 

बताया जा रहा है कि जुलूस बिना किसी हिंसा और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए निकाला जा रहा था। फिर भी कुछ कट्टरपंथियों ने जुलूस पर हमला कर दिया और अरुण कुमार की बेरहमी से हत्या कर दी। कथित तौर पर कट्टरपंथियों ने रामनाथपुरम के कलार स्ट्रीट पर गणेश चतुर्थी का नेतृत्व करने की वजह से अरुण कुमार और किशोर पर जानलेवा हमला किया। जिसमें अरुण कुमार की मृत्यु हो गई है और किशोर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

इस खौफनाक घटना से लोगों में काफी रोष है। सोशल मीडिया यूजर्स अरुण कुमार के लिए न्याय की माँग कर रहे हैं। इसके साथ ही वो हमले को अंजाम देने वाले कट्टरपंथियों की गिरफ्तारी और मामले में जाँच की माँग भी कर रहे हैं।

एक सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना की जानकारी देते हुए लिखा है, “तमिलनाडु के रामनाथपुरम में अरुण कुमार गणेश जुलूस का आनंद ले रहे थे, उन्हें पता नहीं था कि ‘शांतिपूर्ण’ लोगों के पास उनके लिए एक अलग योजना थी, जिन्होंने दिन के उजाले में उनकी हत्या कर दी। किसी भी मीडिया हाउस या किसी भी द्रविड़ राजनीतिक दल ने इसकी निंदा नहीं की। तमिलनाडु अब अगला केरल है।”

एक अन्य ट्विटर यूजर ने इसका जवाब देते हुए लिखा है, “पूरे भारत में वे एक ही तरह का काम कर रहे हैं। वे अच्छी तरह से जानते हैं कि हर राज्य में लालची राजनेता हैं, जो उन्हें सेक्युलरिज्म के नाम पर अपने समुदाय के वोट के लिए बचाएँगे। अगली बार जब वोट देने जाएँ तो कृपया सेक्युलरों की उपेक्षा करें। वे अधिक खतरनाक हैं।”

फैक्ट चेक: वाराणसी में लॉकडाउन के कारण भूखे 350 नाविक परिवारों और सोनू सूद की मदद की असलियत

यह सच है कि कोरोना वायरस की महामारी के कारण जारी देशव्यापी बंद के बीच देश का एक वर्ग बेरोजगारी और संसाधनों के लिए परिश्रम कर रहा है, लेकिन इसका फायदा उठाकर मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए कुछ प्रोपेगेंडाबाज, लोगों के रोजगार और उनके पेशे के बारे में कई प्रकार की झूठी कहानियाँ भी गढ़ रहे हैं।

इन्हीं में से सबसे नया फर्जीवाड़ा वाराणसी में नाव चलाकर अपना जीवन यापन करने वाले माझियों को लेकर सामने है। दरअसल, हाल ही में मुख्यधारा की मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में बनारस के माझियों की ‘स्थिति’ के बारे में कहा गया कि प्रतिबंध से कई माँझी परिवारों की आर्थिक स्थिति डगमगाने लगी है। जिस कारण ’84 घाटों में 350 कश्ती चलाने वाले परिवार आज दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं।’

क्या है मामला

कुछ मीडिया संस्थानों ने लिखा कि अपने पेट पालने के लिए माँझी परिवार गहने बेचने को भी मजबूर हैं। यही नहीं, बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद से जब कुछ लोगों ने इस बारे में अपील की तो उन्होंने कहा कि मदद पहुँच जाएगी और अब वो भूखे नहीं रहेंगे।

दैनिक भास्कर ने तो वाराणसी के निषाद समाज की इस झूठी कहानी की शुरुआत ही इस लाइन के साथ की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में नाविकों पर दोहरी मार पड़ी है। इसमें नाविकों के रोजगार ठप होने का जिक्र करते हुए उनके भूखे रहने की नौबत जैसी तमाम फर्जी बातें भी शामिल की गईं हैं। नवभारत टाइम्स ने भी सोनू सूद के मदद की खबर वैसे ही चलाई।

350 नाविकों के भूखे रहने की अफवाह और सोनू सूद की मदद को मीडिया ने प्रकाशित किया है

दैनिक भास्कर की ही रिपोर्ट के अनुसार, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के नाविकों पर दोहरी मार पड़ी है। पहले लॉकडाउन के चलते गंगा नदी में नौकायन ठप रहा तो अब बाढ़ के चलते 15 सितंबर तक के लिए नाव संचालन पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में काशी के 350 नाविक परिवारों के सामने पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है। कोई कर्ज लेकर बच्चों के लिए निवाले का इंतजाम कर रहा है तो कोई पत्नी के गहने बेच रहा है।”

अब वास्तविकता वाराणसी का निषाद समाज ऑपइंडिया के सामने रख चुका है कि उनके साथ कभी भी भूखे रहने और किसी बाहरी आदमी से अन्न के लिए मदद माँगने की आवश्यकता महसूस ही नहीं हुई, समाज और संस्थाएँ मजदूर वर्ग की स्वतः मदद को तत्पर रहीं और 350 नाविकों के परिवार की भुखमरी को लेकर चलाई जा रही बातें कोरोना के समय का लाभ उठाते हुए गढ़ी हुई सिर्फ एक और अफवाह है।

क्या है सच्चाई

जब ऑपइंडिया ने वाराणसी के इन नाविकों तक पहुँचकर वास्तविकता जानने का प्रयास किया तो नाविकों ने इन बातों का खंडन किया। हमने वहाँ के स्थानीय पार्षद और उपसभापति नरसिंह दास से भी बात की जो उस समय भी नायब तहसीलदार के साथ ज़रूरतमंदों को राशन बाँटने में लगे थे।

नरसिंह दास ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “कोरोना से पूरे देश पर असर है इससे इनकार नहीं है लेकिन बनारस में कोई भूख से मर जाए यह नहीं हो सकता। हर साल ही गंगा में पानी बढ़ता है, नावें बंद रहती हैं कुछ समय के लिए, या सीमित मात्रा में चलती हैं। लेकिन इससे रोजी-रोटी की ऐसी भी कोई समस्या नहीं है, जैसा मीडिया में चलाया गया!”

निगम पार्षद नरसिंह दास ने यहाँ तक कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उनके क्षेत्र में आने वाले घाट एरिया में ऐसी कोई समस्या काशी में नहीं आई है, जिसे लेकर मीडिया और सोनू सूद मदद पहुँचाने की बात कर रहे हैं। यहाँ के लोग खुद ही सक्षम हैं जिसे ज़रूरत पड़े खड़े हो जाते हैं साथ देने। समाज के बाकी लोग भी ज़रूरतमंदों की मदद के लिए एक पैर पर खड़े हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने इस बात की तरफ भी हमारा ध्यान आकर्षित किया कि पिछले 6 सालों में वाराणसी में पर्यटन बढ़ा है जिससे लगातार बनारस के लोगों की आय बढ़ी ही है।

आदिनाथ साहनी, दीपू साहनी, शोभनाथ साहनी, संतोष, विनोद, पप्पू, लल्लू साहनी जैसे कई और निषाद समाज के लोगों से भी ऑपइंडिया ने बात की, सबने मीडिया और सोशल मीडिया में चल रहे 18 दिन से 350 परिवारों के भूखे रहने वाली मनगढंत थ्योरी को नकारा है। कहा- बनारस में संस्थाएँ और सरकार लॉकडाउन के शुरुआत से ही राशन और खाने का प्रबंध कर रही है। हमें कभी भी ऐसी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।

आदिनाथ साहनी ने ऑपइंडिया को दिए बयान में कहा – “मैं आदिनाथ साहनी, नावचालक! अफवाह फैलाने वाले तो फैलाते हैं कि मल्लाह लोग खाए बिना मर रहे हैं लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है।”

वाराणसी के कथित सामाजिक कार्यकर्ता दिव्‍यांशु उपाध्‍याय ने नाविक परिवारों की ‘हालत’ की जानकारी अभिनेता सोनू सूद को ट्वीट कर दी थी। दिव्‍यांशु उपाध्‍याय ने ट्विटर पर लिखा, “वाराणसी के 84 घाटों में 350 कश्ती चलाने वाले परिवार आज दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं। इन 350 नाविक परिवारों की आप आखिरी उम्मीद हो। गंगा में बाढ़ आने के कारण और मुश्किलें इनकी बढ़ गई हैं। काशी में 15 से 20 दिन तक इनके बच्चों को भूखे पेट न सोना पड़े।”

इस पोस्ट को संज्ञान लेकर बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने तुरन्त प्रतिक्रिया दी और भरोसा दिया कि उन तक आज मदद पहुँच जाएगी। लेकिन निषाद परिवारों से जब ऑपइंडिया ने बात की तो उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में उन्हें कभी भी किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हुई है और निषाद समाज जब भी जरुरत हुई मदद मिलती रही है, राशन कार्ड पर राशन मुफ्त में मिला ही है, जिन परिवारों को ज़रूरत थी ले आए। बाकी सब सक्षम हैं, देश के साथ हर आपदा झेल जाने के लिए। ऐसी कोई बात नहीं है।

भाजपा कार्यकर्ता नवीन कपूर ने भी वाराणसी के नाविकों में से ही निषाद परिवार के एक सदस्य भारत निषाद के बयान का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “माँ अन्नपूर्णा एवं बाबा विश्वनाथ के इस नगरी में कोई भूखा नहीं सो सकता है। अतः काशी में निषादों के भूखा सोने की गलत अफवाह फैलाई गई है जो पूर्णतया गलत है। काशी का निषाद समाज माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हजारों लोगों को भोजन कराने में सक्षम है।

इस बयान में भारत निषाद कह रहे हैं, “मेरा नाम भारत निषाद, काशी का रहने वाला। ये जो अभी अफवाह उड़ाई जा रही है कि वाराणसी में निषाद भूखे सो रहे हैं यह गलत है। बाबा विश्वनाथ और माँ अन्नपूर्णा के शहर में कोई भी प्राणी भूखा नहीं सोता है। और माननीय प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र में हम बहुत अच्छा जीवन जीते आए हैं और लॉकडाउन में हमें बहुत मदद मिली है। हम उनकी सराहना करना चाहते हैं और जो ट्वीट हुआ है कि 350 निषाद परिवार भूखे सोए हैं, या उनकी मदद करने के लिए कोई आगे नहीं आया है, यह एकदम गलत है। हम लोग तहेदिल से प्रधानमंत्री जी के सहयोग का स्वागत कर रहे हैं।”

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र का दुष्प्रचार है पहला मकसद

वास्तव में, मीडिया द्वारा निषाद समाज को भूखा और बेसहारा साबित करने के इस प्रयास के पीछे एक प्रमुख कारण यह जताना है कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और इसके बावजूद भी वहाँ कोरोना वायरस के दौरान लोग रोजाना की दिनचर्या में भी मुसीबतों से जूझ रहे हैं।

कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान कई वामपंथी मीडिया संस्थानों ने वाराणसी को लेकर कई प्रकार की मनगढ़ंत कहानियाँ भी प्रकशित कीं। इन्हीं में से एक फर्जी रिपोर्ट के लिए प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘दी वायर’ की एक पत्रकार पर एक अनुसूचित जाति की महिला द्वारा भी दलित उत्पीड़न का केस दर्ज किया गया था।

इस महिला ने आरोप लगाया था कि ‘दी वायर’ ने उसे अनुसूचित जाति का होने के कारण ही उन्हें भूखा और बेसहारा कहकर मनगढ़ंत रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसने उनकी सामाजिक छवि को ठेस पहुँचाया है।

केरल दोहरे हत्याकांड में कॉन्ग्रेस MP का आया नाम, DFYI ने ऑडियो टेप जारी करके लगाए आरोप

केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की युवा विंग DYFI से जुड़े 2 कार्यकर्ताओं की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में 4 कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले में कॉन्ग्रेस सांसद अदूर प्रकाश का नाम सामने आया है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, रविवार को DYFI ने एक ऑडियो जारी की है। इस ऑडियो में कथिततौर पर एक आरोपित शजीथ (shajith) सांसद अदूर प्रकाश से बात कर रहा है। इसी ऑडियो के आधार पर औद्योगिक मंत्री ईपी जयाराजन ने दोहरे हत्याकांड के तार अदूर प्रकाश से जुड़े बताए हैं। उन्होंने इस हत्याकांड में कॉन्ग्रेस सांसद की भूमिका पर जाँच करने की माँग की है। जयाराजन का कहना है कि आरोपित ने खून करने के बाद सीधे अदूर प्रकाश को फोन किया था।

वहीं, अदूर प्रकाश ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मंत्री की जिम्मेदारी थी कि वह आरोपों को सिद्ध करें। उनका दावा यह है कि दोहरे हत्याकांड के किसी आरोपित ने उन्हें कॉल नहीं किया। उनका कहना है कि उन्होंने उचित मामलों को छोड़ कर पुलिस थाने में कोई फोन नहीं किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने अब तक इस मामले में 4 गिरफ्तारी की है। कल इस केस में अंसार और उन्नी की गिरफ्तारी हुई है। यह दोनों हत्या में प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे।

उधर, सीपीएम ने अपने कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद बुधवार को काला दिवस मनाकर प्रदर्शन करने की बात की है। सीपीएम का आरोप है कि हत्याकांड के तार क़ॉन्ग्रेस लीडरशिप से जुड़े हैं। इसलिए उनकी यही माँग है कि हर आरोपित व साजिशकर्ता को जल्द से जल्द गिरफ्तार होना चाहिए।

यहाँ बता दें कि एक ओर जहाँ इस हत्याकांड के बाद कॉन्ग्रेस नेतृत्व के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग हो रही है। वहीं कॉन्ग्रेस का कहना है कि सीपीएम इन हत्याओं का लाभ उठा चाहती है। इसमें किसी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता का हाथ नहीं है।

उल्लेखनीय है कि माकपा के यूथ विंग से जुड़े दोनों कार्यकर्ताओं की हत्या तिरुवनंतपुरम के वेंजरामूड़ू इलाके में 30 अगस्त को रात 11:30 बजे हई। उस दिन सत्ताधारी दल सीपीआई (एम) के यूथ विंग DYFI के 2 सदस्य मिथिल राज और हक मुहम्मद रात में टू-व्हीलर पर जा रहे थे।

इसी दौरान मिथिल (32) और हक मुहम्मद (24) की संदिग्ध कॉन्ग्रेसी कार्यकर्तओं से कहासुनी हुई और उन्होंने हमला कर दिया। हमले में घायल मिथिल राज की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि हक मुहम्मद ने बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

पुलिस ने पड़ताल में पाया कि लोकसभा चुनाव के वक्त से दोनों ग्रुप के बीच तनातनी चल रही थी। संदिग्धों में शुमार अंसार नाम का शख्स पहले ही इस तरह के मामले में जेल जा चुका है।

मिथिल और हक मुहम्मद

शार्ली एब्दो फिर प्रकाशित किया पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून, कहा- ‘हम झुकेंगे नहीं, हम कभी हार नहीं मानेंगे’

2015 में इस्लामिक आतंकवादियों के हमले का शिकार होने के बाद फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक शार्ली एब्दो (Charlie Hebdo) ने मंगलवार (सितम्बर 01, 2020) को कहा कि वह पैगंबर मोहम्मद के कथित विवादास्पद कार्टूनों पर हुए हमले पर इस सप्ताह के अंत में होने जा रहे मुकदमे की शुरुआत में ही एक बार फिर पैगम्बर मुहम्मद पर कार्टून प्रकाशित करेगा। मैगजीन के डायरेक्टर लौरेंट रिस सौरीस्यू ने लेटेस्ट एडिशन में कार्टून को फिर से छापने को लेकर लिखा, “हम कभी झुकेंगे नहीं, हम कभी हार नहीं मानेंगे।”

इसकी संपादकीय टीम ने इसे आवश्यक बताते हुए लिखा कि अब कार्टून को पुनः प्रकाशित करने का सही समय है, क्योंकि ट्रायल शुरू हो रहा है। पत्रिका का कहना है कि उन्हें 2015 से ही पैगम्बर मोहम्मद पर और भी कैरिकॉर्ड्स को प्रिंट करने का निवेदन आता रहा है।

सम्पादकों का कहना है कि इसके बावजूद हमने हमेशा ऐसा करने से इनकार किया है, इसलिए नहीं कि यह निषिद्ध है – कानून हमें ऐसा करने की अनुमति देता है – लेकिन क्योंकि ऐसा करने के लिए एक अच्छे कारण की आवश्यकता थी, एक कारण, जिसका कोई मकसद हो।

गौरतलब है कि इस मामले में पेरिस में बुधवार से ट्रायल शुरू हो रहा है। मैगजीन के हालिया संस्करण में कवर पेज पर दर्जनभर कार्टून प्रकाशित किए गए हैं। कवर पेज के बीच में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून भी मौजूद है जिसे जीन काबूट ने बनाया था। 2015 में हुए आतंकी हमले में उनकी जान चली गई थी। पत्रिका के फ्रंट पेज की हेडलाइन है, “यह सब, बस उसी के लिए।”

शार्ली एब्दो के इस फैसले ने ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की बहस को एकबार फिर जीवित कर दिया है। एक ओर जहाँ कुछ लोग इसे फ्री स्पीच का लीडर कह रहे हैं तो वहीं, दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि शार्ली एब्दो ने लाइन क्रॉस की थी।

फ्रांस के पेरिस में जनवरी 7, 2015 में 2 इस्लामिक बंदूकधारी भाइयों ने व्यंग्य-पत्रिका ‘शार्ली एब्दो’ के दफ्तर पर हमला बोल दिया था। इस हमले में कम से कम 12 लोगों के मरने की खबर आई थी जबकि काफी लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पत्रिका के संपादक स्टीफन चारबोनियर की भी हमले में मौत हो गई थी। बंदूकधारी हमलावर इस मैगजीन में छपे पैगंबर मुहम्मद के कार्टून से नाराज थे। पत्रिका काफी समय अपने कथित ‘इस्लाम विरोधी’ सामग्री की वजह से कट्टरपंथियों के निशाने पर थी।

मुंबई बना ‘आजादी गैंग’ का नया हब: मोदी की मॉर्फ्ड तस्वीर, दीवारों-सड़कों पर कंगना, संबित पर अपमानजनक ग्राफिटी

मुंबई ‘आज़ादी गैंग’ का नया पसंदीदा केंद्र बनता जा रहा है। कुछ बदमाश शहर भर में अपमानजनक भित्ति चित्र (graffiti) बना रहे हैं। BJYM के राष्ट्रीय संयोजक देवांग दवे ने दो ट्वीट शेयर किए हैं, जिसमें उन्होंने शहर में बनाई गई ‘आज़ादी’ भित्ति चित्रों का उल्लेख किया है। 

दूसरे ट्वीट में, उन्होंने अभिनेत्री कंगना रनौत, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा, रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी और ZEE न्यूज के प्रधान संपादक सुधीर चौधरी को निशाना बनाते हुए अपमानजनक भित्ति चित्रों की तस्वीरें शेयर की है।

उन्होंने एक दीवार की तस्वीर भी शेयर की है, जिस पर ‘आज़ादी’ को काले अक्षरों में चित्रित किया गया है।

यह तस्वीर दिसंबर 2019 की है।

भित्ति चित्र बनाने के पीछे का शख्स

आज़ादी के नारे और अपमानजनक भित्ति चित्र दोनों के पीछे एक ही शख्स का हाथ है और वह शख्स इंस्टाग्राम यूजर है। शख्स का इंस्टाग्राम हैंडल “tylerstreetart” है। उसका पूरा इंस्टाग्राम अकाउंट मॉर्फ्ड इमेज, भड़काऊ भित्ति चित्र और बीजेपी विरोधी रेंटपोस्ट से भरा हुआ है।

Image shared by ‘Tyler’

एक तस्वीर में उसने पीएम मोदी की फोटो को मॉर्फ्ड करके उन्हें मिडिल फिंगर दिखाते हुए बनाया है। इस तस्वीर को अन्य लोगों के साथ-साथ बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी लाइक किया है।

Another image by ‘Tyler’

एक अन्य तस्वीर में उसने पीएम मोदी की तस्वीर को जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर के साथ मॉर्फ्ड किया है। इस तस्वीर को भी स्वरा भास्कर ने लाइक किया है।

Another such morphed image

इसके अलावा उसने एक अन्य तस्वीर में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के हाथ में d*ck को चित्रित किया है।

यह तस्वीर भी स्वरा भास्कर के द्वारा लाइक किया गया है।

‘फेसबुक अविश्वसनीय फैक्ट चेकर्स के भरोसे कैसे बैठ सकता है’: रविशंकर ने जुकरबर्ग को पत्र लिखकर संस्थान के पूर्वग्रहों पर लगाई फटकार

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर कहा कि फेसबुक इंडिया के अधिकारियों द्वारा दक्षिणपंथी विचारधारा के पेजों को हटाने का प्रयास किया गया। केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस पत्र में फेसबुक इंडिया की टीम पर राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि फेसबुक इंडिया में कई बड़े अधिकारी प्रधानमंत्री और कई कैबिनेट मंत्रियों के प्रति अपशब्द कहते हैं।

हाल ही में विपक्ष और लिबरल गिरोह द्वारा द्वारा फेसबुक इंडिया पर चुनावों के दौरान भाजपा के हित में काम करने का आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले कॉन्ग्रेस ने फेसबुक सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर कार्रवाई की माँग की थी।

रविशंकर प्रसाद ने अपने पत्र में लिखा, “भारत के एमडी से लेकर उनके अन्य वरिष्ठ अधिकारी, वे सभी एक विशेष राजनीतिक मत का समर्थन करते हैं।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोगों को बाँटने और सामाजिक तनाव पैदा करने में फेसबुक इनका नवीनतम हथियार है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण सामने आए, जहाँ फेसबुक का इस्तेमाल ‘अराजक और कट्टरपंथी’ तत्वों द्वारा किया गया, लेकिन उनके खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने इस पत्र में लिखा है कि फेसबुक के संगठन में सत्ता संघर्ष चल रहा है।

उन्होंने इस पत्र में लिखा है, “मैं यह बताना चाहूँगा कि हाल ही में ऐसे कई उदाहरण सामने आए, जहाँ फेसबुक का उपयोग अराजक और कट्टरपंथी तत्वों द्वारा किया गया है, जिनका एकमात्र उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था को नष्ट करना, लोगों की भर्ती करना और हिंसा के लिए उन्हें इकट्ठा करना है। हालाँकि, हमने अभी तक भी ऐसे तत्वों के खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं देखी है।”

“मैं यह पत्र गंभीर चिंता जाहिर करने के लिए लिख रहा हूँ, जिनमें से कुछ हमने अतीत में फेसबुक के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी उठाए हैं। मैंने अक्सर आपको और आपके वरिष्ठ प्रबंधन को ‘कनेक्टिविटी’ के फायदों के बारे में और विशेष रूप से आपके बारे में यह सुना है कि फेसबुक का मिशन लोगों को समुदायों के निर्माण और दुनिया को करीब लाने का है।”

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्हें सूचित किया गया है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में, फेसबुक इंडिया प्रबंधन द्वारा एक पहल की गई थी कि पेजों को न केवल हटाया जाए बल्कि उनकी पहुँच (रीच) को भी कम किया जाए। इसके साथ ही, ऐसे पेजों को कोई सपोर्ट या अपील का अधिकार भी प्रदान नहीं किया गया, जो लोग केंद्र की विचारधारा के समर्थक हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे इस बात की भी जानकारी है कि फेसबुक प्रबंधन को लिखे दर्जनों ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला। पूर्वग्रह और निष्क्रियता के उपरोक्त मामले आपकी फेसबुक टीम में लोगों के राजनीतिक दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।”

केन्द्रीय मंत्री ने फेसबुक को ना सिर्फ निष्पक्ष और तटस्थ रहने के लिए कहा, बल्कि एक बड़े वर्ग के मत और विचारधारा के प्रति ऐसा करते नजर आने की भी सलाह दी है। उन्होंने लिखा है कि हर व्यक्ति की अपनी राय और विचारधारा हो सकती है लेकिन इसके कारण किसी संस्थान की पॉलिसी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा, “यह समस्या की बात है फेसबुक के कर्मचारी वरिष्ठ पदों पर होने के बाद लगातार देश के प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को गाली दे रहे हैं। उससे भी बड़ी समस्या की बात यह है कि एक व्यक्ति के निजी पूर्वग्रह किसी प्लेटफ़ॉर्म के ही पूर्वग्रह बन जाते हैं। और यह स्वीकार करने लायक बात नहीं है कि यही राजनीतिक पूर्वग्रह के लाखों लोगों के विचारों पर थोप दिया जाता है।” रविशंकर प्रसाद ने लिखा कि हाल ही के अनाम, स्रोत-आधारित रिपोर्टों का आधार फेसबुक के भीतर ‘वैचारिक आधिपत्य’ के लिए एक आंतरिक शक्ति संघर्ष के अलावा कुछ नहीं है।

थर्ड पार्टी फैक्ट चेकर्स पर सवाल उठाते हुए केन्द्रीय मंत्री ने फेसबुक के सीईओ को लिखा है कि एक बड़ा विषय आउटसोर्स किए गए फैक्ट चेकर्स भी हैं। उन्होंने कहा, “कोई अन्य तर्क यह नहीं बता सकता है कि कैसे एक वैकल्पिक वास्तविकता को चित्रित करने की कोशिश करने के लिए आपकी कंपनी के भीतर से ‘सेलेक्टिव लीक’ द्वारा तथ्यों को काटा जा रहा है। गॉसिप के माध्यम से भारत की राजनीतिक प्रक्रिया में यह हस्तक्षेप निंदनीय है। फेसबुक कर्मचारियों के एक समूह की यह मिलीभगत है।”

अपने पत्र में उन्होंने लिखा, “फेसबुक के साथ एक प्रमुख मुद्दा थर्ड-पार्टी फैक्ट-चेकर्स के लिए फैक्ट-चेकिंग की आउटसोर्सिंग है। फेसबुक यूजर्स को गलत सूचना से बचाने के लिए फ़ेसबुक अपनी ज़िम्मेदारी से बचने के साथ ही बाहरी फैक्ट चेकर्स पर निर्भर रहता है, जो कि पहले से ही राजनीतिक पूर्वग्रहों से ग्रसित हैं। रोजाना ही इन फैक्ट चेकर्स के फैक्ट चेक्स को लोगों द्वारा स्वयं ही फैक्ट चेक कर दिया जाता है।”

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत में कोरोना महामारी के दौरान भी इन फैक्ट चेकर्स ने कई प्रकार के झूठ फैलाए, फेसबुक इन सब चीजों से अपनी नजर कैसे हटा सकता है? केन्द्रीय मंत्री ने कहा है कि वैचारिक विविधताओं के देश में फेसबुक को अपनी गाइडलाइन्स को बनाना चाहिए और इन मुद्दों पर अमल करना चाहिए।

‘कुरान के पन्नों को फाड़ा, फिर उन पर थूका’: स्वीडन के बाद नॉर्वे में इस्लामीकरण रोकने के लिए निकली रैली

स्वीडन में शुक्रवार (अगस्त 28, 2020) को कुरान जलाने की घटना सामने के बाद इस्लामिक भीड़ ने वहाँ जम कर हिंसा की। अल्लाह हू अकबर के नारों के साथ भीड़ ने पत्थरबाजी की। सड़कों को जाम करके आगजनी की कोशिश की गई। इसी बीच नॉर्वे में भी स्वीडन जैसी एक रैली निकाले जाने की खबर अगले ही दिन सामने आई।

जानकारी के मुताबिक, नॉर्वे की राजधानी ओसलो में शनिवार को यह रैली निकाली गई। इस रैली को Stop Islamisation of Norway (SIAN) नामक समूह ने आयोजित किया। ये रैली संसद की बिल्डिंग के पास निकाली गई। सैंकड़ों लोग इसमें शामिल हुए। यहाँ रैली का विरोध करने वाले भी आए। मगर, पुलिस ने उन्हें उस समय रोक दिया।

रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि धुर दक्षिणपंथियों का यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। स्‍टॉप इस्‍लामाइजेशन ऑफ नार्वे के नेता लार्स थोर्सन ने वहाँ इस्‍लाम विरोधी कई बयान दिए। उन्होंने पैगंबर के बारे में बातें कहीं और संस्था के लोग नारेबाजी करते रहे।

न्यूज एजेंसी एनटीबी ने दावा किया कि इस रैली में एक SIAN की एक महिला सदस्य ने पहले पवित्र कुरान के पन्नों को फाड़ा और फिर उन पर थूक भी दिया। इसके अलावा उसने दूसरे पक्ष के प्रदर्शनकारियों से यह भी कहा, “देखों अब मैं कुरान को अपवित्र कर दूँगी।”

इसके बाद इस्‍लाम‍ समर्थकों ने पुलिस के बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और स्‍टॉप इस्‍लामाइजेशन ऑफ नार्वे के समर्थकों से भिड़ गए। दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। हालाँकि, बाद में प्रशासन ने पेपर स्प्रे और टियर गैस का इस्तेमाल करके दोनों समूहों को अलग कर दिया।

पुलिस ने इस संबंध में 29 लोगों को गिरफ्तार भी किया। जबकि एक व्‍यक्ति घायल हो गया। कहा जा रहा है कि भड़काऊ बातें करने वाली महिला पर पहले ऐसे प्रोटेस्टों में हेट स्पीच के आरोप लग चुके हैं।

स्वीडन के मालमो में शुक्रवार की घटना के बाद नॉर्वे में यह मामला प्रकाश में आया था। स्वीडन में दक्षिणपंथियों द्वारा कुरान की प्रति जलाने के बाद हिंसा भड़की थी और इस्लामिक भीड़ ने काफी तबाही मचाई थी। वहीं इससे पहले नवम्बर 2019 में भी नार्वे में इस्लाम के ख़िलाफ़ हुई रैली में एक व्यक्ति ने कुरान जला दी थी, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया था।

यहाँ बता दें कि पाकिस्तान ने नॉर्वे और स्वीडन में हुई इन घटनाओं की निंदा करते हुए रविवार को अपना बयान जारी किया और कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मजहबी नफरत को जस्टिफाई नहीं कर सकती। इसके अलावा विदेश कार्यालय के प्रवक्ता जाहिर हाफिज चौधरी ने कहा, “इस तरह से इस्लामोफोबिक घटनाओं की बढ़ोतरी किसी भी मजहब की भावना के ख़िलाफ़ है।”

उन्होंने आगे कहा, “दूसरों की धार्मिक मान्यताओं के लिए सम्मान सुनिश्चित करना एक सामूहिक जिम्मेदारी है और वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए बिल्कुल महत्वपूर्ण है।”

गुजरात में पादरी ने नाबालिग लड़की को ब्लैकमेल कर किया न्यूड फोटो शूट, ईसाई धर्म अपनाने के लिए डालता था दबाव: शिकायत दर्ज

गुजरात के अहमदाबाद के अमराईवाडी इलाके में एक पादरी के खिलाफ एक नाबालिग से छेड़छाड़ करने और उसका न्यूड वीडियो बनाने के आरोप में शिकायत दर्ज की गई है। गुजराती दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक उसने राबड़ी कॉलोनी में रहने वाली नाबालिग लड़की को प्यार का झूठा झाँसा देकर फँसा लिया। इसके बाद उसने वीडियो कॉल के माध्यम से उसका न्यूड वीडियो बना लिया और फिर बाद में उसे ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की।

रिपोर्ट के मुताबिक, पादरी ने नाबालिग लड़की के चाचा को यह वीडियो भेजा। जब लड़की के माता-पिता को इसका पता चला, तो उन्होंने पुलिस स्टेशन पहुँचकर पादरी गुलाबचंद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि पादरी 11 वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की को धमकाता था। नाबालिग लड़की 25 दिसंबर, 2019 को क्रिसमस के मौके पर अपने पड़ोसी के साथ अपने घर के पास वाले एक चर्च में गई थी। पादरी ने लड़की से बात की और उसे अपने माता-पिता को चर्च में लाने के लिए कहा।

हालाँकि, उसने अपने माता-पिता से इस बारे में कोई बात नहीं की। कुछ दिनों बाद, पादरी के भतीजे ने लड़की के माता-पिता को फोन किया और उन्हें चर्च बुलाया। लगभग एक महीने बाद, लड़की अपने माता-पिता के साथ फिर से चर्च गई। इसके बाद पादरी गुलाबचंद और उनके भतीजे ने नाबालिग के घर पर भी ‘प्रार्थना’ सभा का आयोजन किया।

पादरी नाबालिग को उसके पिता के फोन पर कॉल करता था। कथित तौर पर उसने नाबालिग लड़की को ‘चुंबन’ वाली तस्वीर भेजी थी और ‘आई लव यू’ भी बोला था। उसने उसके साथ प्यार में पड़ने का नाटक किया और उसका पीछा भी किया। जब भी वह अकेली होती, वह उसे वीडियो कॉल पर कपड़े उतारने के लिए कहता। मना करने पर वह उसे धमकी देता था कि अगर वह उसकी बात नहीं मानेगी तो वो उसे बदनाम कर देगा।

पादरी ने लगभग एक हफ्ते पहले लड़की का वीडियो उसके चाचा को भेजा था। तब जाकर उसके पिता को सारी बात पता चली। इसके 2-3 दिन बाद भी उसने कथित तौर पर फिर से उसकी न्यूड तस्वीरें भेजी थी। मामले में फिलहाल पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और जाँच की जा रही है।