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अब मुख्तार अंसारी के वसूली गैंग के गुर्गे पर कार्रवाई, मऊ में एक करोड़ से अधिक की संपत्ति सील

बसपा के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के गैंग पर कार्रवाई का सिलसिला जारी है। प्रशासन ने गुरुवार (3 सितंबर, 2020) को अंसारी के वसूली गैंग के गुर्गे सुरेश सिंह की अवैध रूप से कमाई संपत्ति पर शिकंजा कसा। मऊ में उसकी एक करोड़ 5 लाख 40 हजार मूल्य की उसकी संपत्ति जब्त की गई है। इसमें कई वाहन शामिल हैं।

पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से मुख्तार गिरोह के सदस्यों में हड़कंप मचा हुआ है। दो दिन पहले भी गैंगस्टर एक्ट के तहत सुरेश सिंह की चार बसों को जब्त किया गया था, जिसकी कीमत 86 लाख रुपए है। अब तक की कार्रवाई को मिलाकर 1 करोड़ 91 लाख रुपए की वाहन को जब्त किया गया है।

सुरेश सिंह की जब्त संपत्ति में ये वाहन शामिल है:-

  1. बस नंबर यूपी 54टी 1566. (21 लाख)
  2. हुंडई क्रेटा यूपी 54एवी 5004. (17 लाख)
  3. टाटा इंडिका यूपी 54 टी 5004. (09 लाख)
  4. हीरो ग्लैमर यूपी 54 एन 3444. (90 हजार)
  5. हीरो ग्लैमर यूपी 54 क्यू 4144. (80 हजार)
  6. बस यूपी 54 डी 1399. (23 लाख)
  7. बस यूपी 61 एटी 0702. (23 लाख)
  8. स्प्लेंडर यूपी 54 जे 1703. (70 हजार)
  9. स्कार्पियो यूपी 54 जे 5004. (10 लाख)

इससे पहले 4 बसों को जब्त किया गया था:-

  1. बस नंबर यूपी 54टी 0874
  2. बस नंबर यूपी 54टी 2995
  3. बस नंबर यूपी 54टी 0360
  4. बस नंबर यूपी 54टी 0137

पुलिस अधीक्षक ने सुरेश सिंह ने बताया कि वह वसूली गैंग डी-32 का गुर्गा है। मऊ में लोग उसे वसूली माफिया के रूप में पहचानते हैं। उसके विरुद्ध थाना सरायलखंसी पुलिस द्वारा बीती 31 मई को 3(1) गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही की गई थी। फिलहाल वह जेल में बंद है।

गौरतलब है इससे पहले मऊ में जिला प्रशासन ने मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कहे जाने वाले रईस कुरैशी के बूचड़खाने पर बुलडोजर चलवाया था। इसकी कुल कीमत करीब 40 लाख रुपए थी। पुलिस क्षेत्राधिकारी नरेश कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भारी पुलिस बल के साथ इसे ध्वस्त कर दिया गया था।

वहीं लखनऊ प्रशासन ने अगस्त 27 को माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। प्रशासन ने डालीबाग कॉलोनी में अंसारी की एक अवैध संपत्ति को ध्वस्त किया था। इसके बाद खबरों में बताया गया था कि अवैध निर्माण को गिराने का खर्च भी यूपी सरकार मुख्तार अंसारी से ही वसूलेगी। अवैध आवासीय परिसर को गिराने की कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद था।

बता दें, इन सबसे पूर्व यूपी पुलिस ने अपराधियों पर नकेल कसते हुए अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन और अवैध तरीकों से अर्जित की गई 39.80 करोड़ रुपए की संपत्तियों को मुख्तार के करीबियों से मुक्त कराया था। इसके साथ ही मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े लोगों के 33 असलहों के लाइसेंस भी निलंबित कर पुलिस थानों में जमा करवाया था।

पालघर में साधुओं की लिंचिंग करने वाली भीड़ में मौजूद थे NCP नेता: फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य का दावा

महाराष्ट्र के पालघर में हुई साधुओं की हत्या के मामले में एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के सदस्य संतोष जनाठे (Santosh Jnathe) का दावा है कि एक एनसीपी नेता को उस भीड़ के बीच देखा गया था, जो पालघर में साधुओं की लिंचिंग की घटना में शामिल थे। फैक्ट फाइंडिंग टीम ने जिस NCP नेता को इस भीड़ हिंसा के बीच पाया है, उसका नाम काशीनाथ चौधरी है।

काशीनाथ चौधरी शरद पवार की ‘नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी’ का जिला सदस्य है। उन पर आरोप लगे हैं कि साधुओं की लिंचिंग कर उनकी निर्मम हत्या करने वाली भीड़ में वामपंथी पार्टी सीपीएम के पंचायत सदस्य व उसके साथ विष्णु पातरा, सुभाष भावर और धर्मा भावर भी शामिल थे।

इस भीड़ में एनसीपी और सीपीएम नेताओं की मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। एनसीपी महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी है और शिवसेना के साथ गठबंधन में मिल कर सरकार चला रही है।

फैक्ट फाइंडिंग समिति पहले भी इस निष्कर्ष पर पहुँच चुकी है कि क्षेत्र में काम करने वाले वामपंथी संगठन आदिवासियों के मन में सरकार और हिंदू धर्म गुरुओं, साधुओं और सन्यासियों के खिलाफ नफरत पैदा कर रहे हैं।

उनकी जाँच से यह निष्कर्ष निकला था कि कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया, काश्तकारी संगठन, भूमिसेना, आदिवासी एकता परिषद, सीपीएम जैसे संगठनों के बढ़ते प्रभाव के साथ क्षेत्र में बढ़ती हिंसा, साधुओं की हत्या के रूप में सामने आई थी।

इसके साथ ही इस केस को अभी तक भी सीबीआई के पास नहीं दिया गया है। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार ने इस केस में अपनी क्षेत्रीय गौरव को आगे रखा है और वह इसलिए भी नहीं चाहती कि यह केस सीबीआई के पास ट्रांसफर हो क्योंकि सीबीआई गृह मंत्रालय के दायरे में आती है। महाराष्ट्र सरकार की इस केस को लेकर बरती गई उदासीनता पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही उन्हें फटकार लगा चुकी है।

उल्लेखनीय है महाराष्ट्र स्थित पालघर के गढ़चिंचले गाँव में गत 16 अप्रैल को दो साधुओं और उनके वाहन चालक की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बाद में यह कहा गया कि वह बच्चों की चोरी होने के संदेह में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। जबकि, ये दोनों साधु ड्राइवर के साथ अपने गुरुभाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सूरत जा रहे थे।

भारत-नेपाल सीमा पर विवाद भड़काने के लिए कई संगठनों को पैसा दे रहा है चीन

एक ओर भारत और चीन की सेनाएँ पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में कुछ महीनों से आमने-सामने हैं और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव का माहौल लगातार बना हुआ है। वहीं, दूसरी ओर खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि चीन इस बीच भारत-नेपाल सीमा पर भारत-विरोधी विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग कर रहा है। चीन अक्सर नेपाल का इस्तेमाल अपनी वर्चस्ववादी नीतियों की संतुष्टि के लिए बफर जोन के रूप में मोहरे की तरह करता आया है।

ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कहा कि चीन ने भारत-नेपाल सीमा पर भारत के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने के लिए नेपाल के कई संगठनों को 2.5 करोड़ रुपए तक का भुगतान किया है। बताया जा रहा है कि काठमांडू स्थित चीन की एंबेसी नेपाल को भारत विरोधी अभियानों के लिए उकसा रही है। ज्ञात हो कि भारत-नेपाल सीमा 1,700 किमी तक फैली हुई है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के हवाले से समाचार पोर्टल ‘टाइम्स नाउ’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, “नेपाल में चीनी दूतावास ने भारत-नेपाल सीमा क्षेत्रों में भारत विरोधी प्रदर्शनों के आयोजन के लिए 2.5 करोड़ रुपए (NPR) की वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे कि नेपाल के आंतरिक और राजनीतिक मामलों में भारत के हालिया सीमा विवादों और हस्तक्षेपों का भी खुलासा होता है।”

मई 08, 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा उत्तराखंड स्थित धारचूला से जुड़े लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी सामरिक उद्देश्यों से बनी सड़क का उद्घाटन करने के बाद भारत-नेपाल संबंधों में खटास देखी गई थी। ऐसे में ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा किया गया यह खुलासा कई कड़ियों को जोड़ता नजर आता है। हाल ही में नेपाल ने बिहार से लगे बॉर्डर पर भारतीयों पर गोलीबारी भी की है।

नेपाली सरकार ने इस सड़क के उद्घाटन के खिलाफ अपने अधिकार की आवाज उठाई थी और नए नक्शे के साथ लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने इलाके के रूप में दिखाया। वहीं, पड़ोसी देश नेपाल के उच्च सदन ने जून में सर्वसम्मति से तीन भारतीय क्षेत्रों को शामिल करते हुए देश के नक्शे को अपडेट करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक भी पारित किया।

नेपाल द्वारा जारी किया गया यह नया नक्शा विवाद का विषय बना था जिस पर भारत सरकार ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि यह नक्शा ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ है। गौर करने की बात है कि नेपाल सरकार द्वारा यह सभी विवाद ठीक उसी दौरान उठाए गए, जब भारत और चीन के बीच सीमा गतिरोध को लेकर कई प्रकार की तनातनी और बैठकें आयोजित की जा रहीं थीं।

उल्लेखनीय है कि चीन और भारत के सैनिक 29-30 अगस्त को चीनी सैनिकों द्वारा की गई घुसपैठ की कोशिश के बाद एक बार फिर आमने-सामने हैं। बताया जा रहा है कि इस झड़प के दौरान भारतीय सेना ने चीन के करीब 500 सैनिकों को घेर लिया। इसके बाद भारतीय सैनिक 4 किलोमीटर अंदर घुस गए जहाँ पहले चीन का कब्जा हुआ करता था। चीन अब लगातार भारतीय सेना से इस इलाके से हटने की माँग कर रहा है।

‘नाक से बोलता है, हाइट भी कम…’: आदिपुरुष में सैफ अली खान के रावण बनने की खबर सुन बिफरे नेटिजन्स

ओम राउत फिल्म ‘आदिपुरुष’ के प्रोड्यूसर और निर्देशक हैं। हाल ही में उन्होंने इस फिल्म का एक पोस्टर साझा किया था। साथ ही जानकारी दी थी कि फिल्म में सैफ अली खान रावण का किरदार निभाएँगे।

आदिपुरुष पिछले काफी समय से सुर्ख़ियों में बनी हुई है। फिल्म में मुख्य भूमिका दक्षिण भारत के सुपरस्टार प्रभास की है। फिल्म की कहानी रामायण पर आधारित होगी। लोग बेसब्री से इस फिल्म का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन सैफ के रावण बनने की खबर ने बहुतों को नाराज कर दिया है।

करीना कपूर ने अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर फिल्म का पोस्टर साझा करते हुए लिखा, “पेश करती हूँ इंडस्ट्री का सबसे सुंदर दानव।”

लेकिन सोशल मीडिया पर तमाम लोग ऐसे भी हैं जिन्हें सैफ अली खान का रावण की भूमिका अदा करना पसंद नहीं आ रहा। इसके लिए उन्होंने कई तरह की वजहें भी दी है और बताया है कि क्यों सैफ इस किरदार के लिए सही कलाकार नहीं हैं। इसमें सैफ का अभिनय कौशल, आवाज़, ऊँचाई और सबसे अहम इतिहास पर उनका नज़रिया है।

तान्हा जी रिलीज़ होने के बाद सैफ ने अनुपम चोपड़ा को एक साक्षात्कार दिया था। इसमें उन्होंने कहा था अंग्रेज़ों के आने के पहले तक ‘भारत’ शब्द का कोई वजूद ही नहीं था। इसके अलावा सैफ ने यह भी कहा था कि तान्हा जी काल्पनिक इतिहास पर आधारित है।   

सैफ के मुताबिक़ उन्हें तान्हा जी फिल्म की स्क्रिप्ट पर बिलकुल भरोसा नहीं था, क्योंकि उसका भारतीय इतिहास से कोई संबंध नहीं था। भारत के बहुसंख्यक रामायण में विश्वास करते हैं, वह रामायण को भारत के इतिहास की तरह ही देखते हैं। इसलिए लोगों के लिए यह बात हजम करना मुश्किल है जो इंसान अंग्रेज़ों के आने से पहले भारत की अवधारणा में भरोसा नहीं रखता था, वह लंकेश का किरदार निभा रहा है।       

कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा सैफ का व्यक्तित्व ही ऐसा नहीं है कि वह रावण का किरदार निभा सके। इनका कहना है कि सैफ बोलने की दौरान नाक का सहारा लेते हैं और उनकी ऊँचाई भी कम है। लोगों का कहना है कि प्रभास 6 फीट 2 इंच लम्बे हैं, उनके सामने सैफ बिलकुल मज़बूत नहीं नज़र आएँगे। इसके अलावा भी नेटिजन्स ने कई तरह की वजहें बताई कि क्यों वह सैफ को रावण के किरदार में नहीं देखना चाहते हैं।   

कई लोगों ने इस बारे में राणा डग्गुबाती की तारीफ़ की जिन्होंने बाहुबली फिल्म में भल्लाल देव का किरदार निभाया था। इसी ब्लॉकबस्टर फिल्म में प्रभास ने महेंद्र बाहुबली का किरदार निभाया था, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया था।   

आदिपुरुष का आधिकारिक रूप से ऐलान 18 अगस्त को हुआ। कुछ ही समय बाद यह पता चला था कि प्रभास इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले हैं। यह फिल्म 2021 तक सिनेमाघरों में नज़र आ सकती है।    

तमिलनाडु पुलिस ने SDPI नेता के भतीजे को अरुण कुमार की हत्या के मामले में किया गिरफ्तार

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के नेता के भतीजे पर तमिलनाडु के रामनाथपुरम में एक अरुण कुमार नाम के युवक की बेरहमी से हत्या करने आरोप लगा है। एसडीपीआई कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) की राजनीतिक शाखा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरेश गैंग के दो सदस्य बदमाश बनने के बाद गैंग छोड़कर चले गए। वे इलाके में अपना ड्रग कार्टेल शुरू करना चाहते थे। जिसके बाद सुरेश ने अपने गैंग के नौ सदस्यों को शेख के नेतृत्व में भेजा, ताकि दोनों को मारा जा सके। लेकिन उन्होंने गलती से वहाँ पर खड़े अरुण कुमार नाम के एक व्यक्ति की हत्या कर दी। ऐसा भी कहा जा रहा है कि गैंगस्टरों ने अरुण कुमार को उन्हीं दो बदमाशों का साथी समझ के मार डाला।

तमिलनाडु के एक हिंदू समूह इंदु मक्कल काची ने आरोप लगाया है कि अरुण को इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह अपने क्षेत्र में गणेश चतुर्थी समारोह का प्रमुख था।

स्वराज्य न्यूज़ पोर्टल के अनुसार उन्होंने इस घटना पर वहाँ के एक स्थानीय नेता से बात की। जिसनें उन्हें बताया कि सुरेश गिरोह के महत्वपूर्ण सदस्य विक्की और कामातचाई ने उनका कार्टेल छोड़ दिया था। वे अपना खुद का ड्रग कारोबार शुरू करना चाहते थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शेख रामनाथपुरम में एसडीपीआई के जिला सचिव नजीमुद्दीन का भतीजा है। शेख ने ही गिरोह के 9 बदमाशों की टीम का नेतृत्व किया था। जिसे गैंग के दो विद्रोहियों को मारने का काम सौंपा गया था।

स्थानीय नेता ने कहा, “शेख के नेतृत्व वाले नौ सदस्यों के गिरोह ने कल रात विक्की और कामातची पर हमला किया जब वे एक ऑटोरिक्शा स्टैंड पर खड़े थे। हालाँकि, इस हमले में वे दोनों बच गए, लेकिन वहाँ खड़े अरुण कुमार इस हमले के दौरान फँस गए।” उन्होंने आगे कहा कि गिरोह ने यह सोच कर अरुण पर हमला किया होगा कि वह उन दोनों के साथ था। वहीं हमले के बाद अस्पताल ले जाते समय कुमार की मृत्यु हो गई।

अरुण की मौत के बाद, पुलिस ने तुरंत सुरेश को हिरासत में ले लिया। इसके साथ ही पुलिस ने हत्या में शामिल गिरोह के नौ सदस्यों को खोजने के लिए एक अभियान भी शुरू किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर पुलिस ने तट के पास एक जंगल जैसे क्षेत्र को घेर लिया है। जहाँ वे सभी छिपे हुए हैं।

पुलिस ने इस मामले में दिया एक अलग एंगल

रामनाथपुरम के पुलिस अधिकारियों ने स्वराज्य को बताया कि तीन दोस्तों के विवाद के बीच अरुण मारा गया। तीन दोस्तों में से एक बदमाश था, जिसकी वजह से अरुण कुमार की हत्या हुई। उस उपद्रवी व्यक्ति की वजह से एक व्यक्ति अस्पताल में भर्ती है वहीं दूसरे की मौत हो गई है। जबकि स्थानीय नेता ने एक अन्य व्यक्ति के घायल होने के उनके दावों का खंडन किया है।

संप्रदाय विशेष के लोगों ने नहीं किया पुणे के ‘डॉक्टर’ का अंतिम संस्कार: तबलीगी जमात की छवि चमकाने के लिए पुरानी तस्वीर से खेल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर इन दिनों एक तस्वीर शेयर की जा रही है। इस तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि पुणे में कोरोना वायरस के कारण मरने वाले हिंदू डॉक्टर रमाकांत जोशी का अंतिम संस्कार संप्रदाय विशेष के लोगों ने किया।

इस तस्वीर को कई यूजर्स अपने अकॉउंट्स से साझा कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह संप्रदाय विशेष के लोग तबलीगी जमात के हैं, जिन्होंने अपने मजहबी कार्य को छोड़कर हिंदू डॉक्टर का दाह संस्कार करवाया। साथ ही ये भी दावा किया जा रहा कि डॉ जोश की का एक लड़का है जो अमेरिका में रहता है और पत्नी की आयु 74 साल है।

वायरल की जा रही तस्वीर के साथ यह भी दावा किया जा रहा है कि रमाकांत चाहते थे कि वह चार कंधे पर जाएँ। लेकिन उन्हें कोरोना होने के कारण कोई उनके नजदीक नहीं आ रहा था। ऐसे में संप्रदाय विशेष के युवकों ने मजहबी प्रचार का काम छोड़ उन्हें कंधे पर उठाया और श्मशान घाट तक लेकर गए। वहाँ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

तस्वीर को लेकर झूठा दावा
तस्वीर को लेकर झूठा दावा
तस्वीर को लेकर झूठा दावा

अब टाइम्स ऑफ इंडिया का कहनाD

टाइम्स ऑफ इंडिया में 30 अप्रैल को प्रकाशित खबर

टाइम्स ऑफ इंडिया ने तस्वीर से संबंधित अपने ही खबर का उल्लेख करते हुए, फैलाए जा रहे झूठे दावे को खारिज किया है। उनकी खबर का टाइटल fasting muslim men take out funeral procession of hindu priest in meerut है। यह खबर 30 अप्रैल को प्रकाशित हुई थी।

साभार: ट्विटर

इस रिपोर्ट में पुरानी तस्वीर, माथुर, और मजहब विशेष के युवकों का जिक्र है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अलावा मेरठ की यह घटना कई लोकल चैनल ने भी कवर की थी। इनमें से एक का लिंक नीचे है।

बता दें, माथुर की मौत कोरोना के कारण नहीं हुई थी, जैसा कि तबलीगी जमातियों की छवि निर्माण के लिए बताया जा रहा है। इसके अलावा यह भी मालूम रहे कि जिन लोगों की मौत कोरोना से होती है, उनके दाह संस्कार को भीड़-भाड़ के साथ करने की अनुमति गाइडलाइन्स कभी नहीं देती।

मेरठ की घटना पर यूट्यूब चैनल की कवरेज

हम आपकी चिंताओं को गंभीरता से ले रहे हैं: कॉन्ग्रेस के पत्र पर फेसबुक का जवाब

बीजेपी के प्रति झुकाव रखने का आरोप लगाते हुए कॉन्ग्रेस ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबई को दो पत्र लिखा था। इसके जवाब में फेसबुक ने कॉन्ग्रेस से कहा है कि उसकी चिंताओं को लेकर वह गंभीर है।

कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पिछले महीने जुकरबर्ग को दो पत्र भेजे थे। इसके जवाब में ट्रस्ट और सुरक्षा पॉलिसी टीम की देखरेख करने वाले फ़ेसबुक के निदेशक, नील पोट्स ने कहा, “हम भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की ओर से उठाई गई चिंता और सिफारिशों को गंभीरता से ले रहे हैं।”

फेसबुक की ओर से कॉन्ग्रेस को भरोसा दिलाया गया है कि वह एक निष्पक्ष संस्था है और किसी भी तरह की हेट स्पीच के खिलाफ है। कॉन्ग्रेस की ओर से जारी बयान के अनुसार, फेसबुक ने उसके द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया है। फेसबुक ने कहा है कि वह एक ऐसा मंच है, जहाँ लोग अपने विचार खुले मन से रख सकते हैं और वो किसी भी पक्ष के साथ न होकर निष्पक्ष है। इस पत्र में फेसबुक ने कहा है कि हमने पहले भी एक्शन लिया है और आगे भी लेते रहेंगे।

पत्र में कहा गया है कि सार्वजनिक हस्तियों द्वारा हेट स्पीच के सवाल पर, हम आपको आश्वस्त करना चाहते हैं कि हमारे सामुदायिक मानक धर्म, जाति, लिंग और राष्ट्रीयता सहित उनकी संरक्षित विशेषताओं के आधार पर लोगों के खिलाफ हमलों पर रोक लगाते हैं। हमारी हेट स्पीच की नीति के अनुरूप, हम सभी मामलों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को गंभीरता से लेते हैं और उसे तुरंत हटाते हैं। भारत में भी हमने ऐसे कई बयानों को हटाया है।

इसके अलावा, पोट्स ने कहा है कि फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्र और सुरक्षित अभिव्यक्ति के वातावरण को संचालित करने के तरीके में ईमानदारी के उच्चतम मानक बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

फेसबुक द्वारा कॉन्ग्रेस को भेजा गया जवाब

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने जुकरबर्ग को ई-मेल के जरिए पत्र भेजा था। उन्होंने जुकरबर्ग को सुझाव देते हुए कहा था, ”फेसबुक मुख्यालय की तरफ से उच्च स्तरीय जाँच आरंभ की जाए और एक या दो महीने के भीतर इसे पूरी कर जाँच रिपोर्ट कंपनी के बोर्ड को सौंपी जाए। इस रिपोर्ट को सार्वजनिक भी किया जाए।”

फेसबुक की नीतियों को लेकर यह विवाद अमेरिकी समाचार पत्र ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। इसमें फेसबुक के अनाम सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि फेसबुक के वरिष्ठ भारतीय नीति अधिकारी ने हेट स्पीच मामलों पर भाजपा का पक्ष लिया था।

वहीं, फेसबुक द्वारा आज, बृहस्पतिवार को ही तेलंगाना विधायक और भाजपा नेता टी राजा सिंह का अकाउंट प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके पीछे कारण हेट स्पीच बताया जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर कहा था कि फेसबुक इंडिया के अधिकारियों द्वारा दक्षिणपंथी विचारधारा के पेजों को हटाने का प्रयास किया गया।

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस पत्र में फेसबुक इंडिया की टीम पर राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि फेसबुक इंडिया में कई बड़े अधिकारी प्रधानमंत्री और कई कैबिनेट मंत्रियों के प्रति अपशब्द कहते हैं।

सुचारु रूप से चल रहा गीताप्रेस: प्रबंधन ने कहा- ठगों से रहें सावधान, सोशल मीडिया पर कोई चंदा नहीं माँग रहा प्रेस

विश्व में सबसे अधिक धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशक गीताप्रेस ने सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक सूचनाओं को रोकने के लिए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है। जिसके अनुसार प्रेस ने आर्थिक संकट के चलते लोगों से चंदा माँगने वाले दावे को खारिज कर दिया है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि गीताप्रेस का काम पहले की ही तरह पूरी कुशलता से चल रहा है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर चल रही फर्जी अफवाहों का खंडन करते हुए गीताप्रेस प्रबंधन ने भी बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है। ट्विटर सहित सभी सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए प्रेसनोट में बताया गया, “कुछ संगठित क्षेत्र के लोग सोशल मीडिया पर आर्थिक संकट के कारण गीताप्रेस के बंद होने की अफवाह फैला रहे हैं। गीताप्रेस की मदद के नाम पर लोगों से ठगी की जा रही है। गीताप्रेस ने कई बार सोशल मीडिया / प्रिंट मीडिया के माध्यम से इसका खंडन किया है, फिर भी गीताप्रेस के शुभचिंतक भी सही जानकारी के अभाव में इसे गीताप्रेस के हित मे जानकर ऐसी झूठी खबर को फारवर्ड कर देते हैं। गीताप्रेस का काम के सुचारु रूप से चल रहा है। संस्था किसी से भी किसी प्रकार का अनुदान नहीं लेती है।”

गीताप्रेस प्रबंधन ने लोगों से निवेदन किया, “इस बात को ध्यान में रखते हुए गीताप्रेस की इस प्रामाणिक सूचना का इतना प्रचार प्रसार करें कि गीताप्रेस के विषय मे इस तरह के भ्रामक प्रचार करने वालों के निहित स्वार्थ की कोशिश नाकाम हो जाए।”

वहीं संस्थान की तरफ से सोशल मीडिया पर चंदा माँगने वाली अफवाहों का ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल ने भी खंडन किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन की वजह से गीताप्रेस का काम भी रुक गया था। जिसकी वजह से कल्याण पत्रिका के अप्रैल, मई और जून के अंक ही प्रकाशित हो पाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इतने दिन चले लॉकडाउन की वजह से प्रेस में पुस्तकों का स्टाक लगभग खत्म हो चुका है। महामारी के भय से माँग के अनुसार पुस्तकों की छपाई नहीं हो पा रही हैं। साथ ही गीताप्रेस के संबंध में ट्वीटर पर चले अभियान के बाद ऑनलाइन पुस्तकों की डिमांड और बढ़ गई है।

गीताप्रेस लगभग 500 ऑनलाइन आर्डर की पुस्तकें पाठकों तक नहीं भेज पा रहा है। इतना ही नहीं महत्वपूर्ण हिंदू धार्मिक किताबें जैसे कि रामायण गीता आदि के भी स्टॉक 80 फीसद तक कम हो गए है। वहीं स्पेशल एडिशन मोटे अक्षरों वाली गीता व सुंदर कांड मूल की किताबें संस्थान में खत्म भी हो चुकी है। मिली जानकारी के अनुसार ऑनलाइन के अलावा दुकानदारों द्वारा आर्डर लगभग 2 लाख पुस्तकों की माँग की सप्लाई भी प्रेस नहीं कर पा रहा है। वहीं अगर रेलवे स्टेशन पर भी दुकानें खुल जाएगी तो यह संकट और भी बढ़ जाएगा।

गीताप्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने दैनिक जागरण को जानकारी दी कि पुस्तकों की माँग लगातार आ रही है लेकिन हम आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। आर्डर लंबित पड़े हुए हैं। शनिवार की बंदी खत्म होने से उत्पादन लगभग 16 फीसद बढ़ जाएगा।

हिंदू दंपती को फँसाने के लिए काटा ‘राजेश’ का सिर, दिल्ली में जिंदा मिला खालिद, अब्बू और भाइयों की थी साजिश

बिहार के बेतिया गाँव में खालिद के फर्जी हत्याकांड की गु्त्थी अब सुलझ गई है। पुलिस की सक्रियता के कारण अब उस सिर कटी लाश की भी पहचान हो गई है जिसे हिंदू दंपत्ति को फँसाने के लिए इस्तेमाल किया गया। वह लाश राजेश कुमार की थी। राजेश खालिद के भाई राजा का ही दोस्त था। उसे आरोपितों ने नगर परिषद सभापति गरिमा देवी सिकारिया और उनके पति रोहित सिकारिया को फँसाने के लिए मारा था।

इस पूरे हत्याकांड को अंजाम देने में खालिद के चार भाई और उसके पिता का हाथ था। इन सबने मिलकर पूरी साजिश रची थी। इस साजिश में खालिद के दोस्त रंजीत ने उन सबका साथ दिया।

अब मामले में सारा खुलासा होने के बाद मुफस्सिल थानाध्यक्ष उग्रनाथ झा के बयान पर थाने में दूसरी FIR हुई है। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया में मुन्ना मिश्रा के बंद पड़े आइसक्रीम फैक्ट्री के पास 22 अगस्त की रात 9 बजे पुलिस को सिर बरामद हुआ था। उसके चेहरे पर काफी चोट के निशाना थे। हालत ऐसी थी शिनाख्त करना मुश्किल हो गया। फिर खालिद के पिता अख्तर हुसैन ने उसे अपने बेटे की लाश बताया। साथ ही  इसी संबंध में एफआईआर भी करवा दी। हालाँकि, पुलिस ने जब जाँच शुरू की तो उन्हें पूछताछ के दौरान बयानों में कुछ गड़बड़ लगी और शक गहराता गया। इसके बाद पुलिस को मालूम चला कि खालिद की हत्या नहीं हुई है। 

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर का

पुलिस ने फौरन यह सूचना एसपी को दी और एक टीम का गठन हुआ। दो दिन पहले पुलिस खालिद को दिल्ली से जिंदा पकड़ने में सफल रही। पूरी साजिश का खुलासा होते ही नगर परिषद सभापति गरिमा सिकारिया और उनके पति रोहित सिकारिया ने राहत की साँस ली।

अब इस मामले में दर्ज एफआईआर में खालिद, उसके पिता, चार भाइयों समेत 6 को नामजद किया गया है। पूछताछ में इन्होंने बताया कि वो शव खालिद के भाई राजा के साथी राजेश कुमार का था। राजेश नरकटियागंज के एक होटल में काम करता था।

खालिद के मिलने के बाद पुलिस ने लाश की पहचान करने के लिए उसे कब्र खोदकर निकाला है और डीएनए टेस्ट करवाया है। शरीर के अन्य अंगों के साथ उसे मिलाने के बाद उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, खालिद ने पुलिस को बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया में उसकी माँ के नाम भी बियाडा की जमीन लीज पर थी। मगर, प्रशासन ने साल 2009 में उस जमीन पर रोहित सिकारिया का कब्जा करवा दिया। इसी कारण हिंदू दंपती को फँसाने की साजिश खालिद के अब्बा और उसके भाइयों ने मिलकर रची ।

कर्नाटक: राज्य सरकार के मंदिरों के धन से होगा गरीब जोड़ों की शादी, सप्तपदी योजना के तहत होगी खर्च की व्यवस्था

कर्नाटक सरकार ने गरीब परिवार से आने वाले हिंदू जोड़ों की शादी के लिए एक अहम ऐलान किया है। कर्नाटक की राज्य सरकार ने कहा है कि मंदिरों में दान की गई राशि के एक हिस्से से सामूहिक विवाह कराए जाएँगे। यह सामूहिक विवाह सप्तपदी नाम की योजना के तहत कराए जाएँगे। योजना के अनुसार लगभग 100 से अधिक ए श्रेणी के मंदिरों को 26 अप्रैल से 24 मई के बीच हिंदू जोड़ों के सामूहिक विवाह का खर्च उठाना था।  

लेकिन कोरोना वायरस महामारी की वजह से यह आयोजन नहीं हो पाया था। जिस तरह के हालात फिलहाल बने हैं उनके आधार पर सामूहिक विवाहों के आयोजन की उम्मीदें भी कम हैं। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए डिपार्टमेंट ऑफ़ हिंदू चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन एंड रिलीजियस इंडोमेंट ने नया विकल्प खोजा है। विभाग अब विवाहों का आयोजन सामूहिक तौर पर कराने की जगह साल भर (केस बाई केस) आधार पर करेगा।  

हिंदू चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन एंड रिलीजियस इंडोमेंट विभाग के मंत्री कोटा श्रीनिवास पुजारी के मुताबिक़ इस योजना के मूलभूत ढाँचे में बदलाव किया जा चुका है। नए बदलाव के आधार पर कर्नाटक की राज्य सरकार के चयनित मंदिरों में आगामी एक साल के दौरान हिंदू जोड़ों की सुविधानुसार शादी कराई जा सकती है। इस प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है।  

यह योजना हर उस मंदिर पर लागू होगी जिसे सामूहिक विवाह का आयोजन कराने के लिए चुना गया था। इस मुद्दे पर जानकारी देते हुए मंत्री श्रीनिवास पुजारी ने कहा मंदिरों में विवाह कराए जाने के दौरान स्वास्थ्य विभाग के दिशा निर्देशों का पूरी तरह ध्यान रखा जाएगा। ऐसे किसी भी आयोजन के दौरान पूरी सावधानी बरती जाएगी जिससे कोई महामारी की चपेट में न आए।    

एक कन्नड़ समाचार समूह से बात करते हुए कोटा श्रीनिवास पुजारी ने इस मामले में और जानकारी दी। उन्होंने कहा, “आने वाले समय में सरकार के लिए सामूहिक विवाह कराना बहुत कठिन होगा। इसलिए हमने योजना में बदलाव लाने की तैयारी की और हमें अच्छे नतीजे भी हासिल हो रहे हैं। जिन्हें शादी करवानी हो वह एक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें एक महीने के भीतर मुहूर्त दिया जाएगा।” 

इस योजना की शुरुआत 5.5 करोड़ रूपए के बजट से शुरू की गई थी। इस योजना के तहत शादी करने वाले जोड़े को 8 ग्राम सोने का मंगलसूत्र, 10 हज़ार रूपए के उपहार और 5 हज़ार रूपए नगद दिए जाएँगे। अंत में श्रीनिवास पुजारी ने बताया कि मंदिरों की गतिविधियों के संचालन के लिए केंद्रीकृत बैंकिंग तंत्र तैयार किया गया है। धीरे-धीरे इसे राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों पर लागू किया जाएगा।