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‘मुंबई पुलिस से खतरा है तो दोबारा यहाँ मत आना’: शिवसेना नेता संजय राउत की कंगना को धमकी

शिवसेना नेता संजय राउत ने बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को धमकी दी है कि वह फिल्म ‘माफिया’ से ज्यादा शहर के पुलिस बल से डरने वाले अपने बयान के बाद वापस मुंबई जाने से परहेज करें।

दरअसल, अभिनेत्री कंगना ने ट्वीट किया था कि उन्हें हिमाचल या केंद्र सरकार से सुरक्षा की आवश्यकता होगी और बॉलीवुड में कथित ‘ड्रग माफिया’ का पर्दाफाश करने के लिए वह मुंबई पुलिस से सुरक्षा स्वीकार नहीं करेंगी क्योंकि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच अब रफ़्तार पकड़ रही है। अभिनेत्री ने अपने ट्वीट में बीजेपी विधायक राम कदम को भी टैग किया था।

शिवसेना नेता संजय राउत ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में रनौत के बयानों को खारिज करते हुए लिखा कि अभिनेत्री का ‘विश्वासघात’ शर्मनाक है और वह मुंबई में रहने के बावजूद शहर के पुलिस बल की आलोचना करती है।

राउत ने लिखा, “हम उनसे मुंबई न आने का अनुरोध करते हैं। यह मुंबई पुलिस का अपमान करने के अलावा और कुछ नहीं है। गृह मंत्रालय को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।”

इस बीच, भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि मुंबई पुलिस ‘मणिकर्णिका’ अभिनेत्री को सुरक्षा प्रदान नहीं करना चाहती है, जबकि कंगना रनौत कथित ड्रग माफियाओं को बेनकाब करना चाहती हैं।

इस विवाद में कूदते हुए महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने चेतावनी दी कि अभिनेत्री को पहले भाजपा नेता कदम के ‘खतरनाक अतीत’ का बैकग्राउंड चेक करना चाहिए।

आज ही कंगना ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा है, “मैं रणवीर सिंह, रणबीर कपूर, अयान मुखर्जी, विक्की कौशिक से ड्रग टेस्ट के लिए अपने रक्त के नमूने देने का अनुरोध करती हूँ। ऐसी अफवाहें हैं कि वे कोकीन का नशा करते हैं। मैं चाहती हूँ कि वे इन अफवाहों का भंडाफोड़ करें। ये युवा लाखों लोगों को प्रेरित कर सकते हैं यदि वे साफ़ नमूने पेश करते हैं।”

गौरतलब है कि अभिनेत्री कंगना रनौत दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के बाद से ड्रग माफिया और नेपोटिज्म की बहस में काफी खुलकर बयान दे रही हैं।

कंगना रनौत ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि जब वे माइनर थीं तब उनकी ड्रिंक्स में ड्रग्स मिला दी जाती थी ताकि वो पुलिस के पास ना जा सकें। लेकिन जब उन्हें बॉलीवुड पार्टीज में जाने की एंट्री मिलने लगी, तब उन्हें इस दुनिया की हकीकत पता चली कि इस रंगीन दुनिया के पीछे काला अंधेरा था और बॉलीवुड माफिया ने इस इंडस्ट्री को पूरी तरह मुट्ठी में दबा रखा था।

‘गां# बताऊँ तेरे को… बहन%*#’ – आरोपित ड्रग तस्कर जैद के पिता ने आजतक पत्रकार से की बदसलूकी

सुशांत सिंह राजपूत केस में रिया चक्रवर्ती की व्हॉट्सएप चैट से जिस ड्रग पेडलर का नाम सामने आया था, आज नारकोटिक विंग की कार्रवाई में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस गिरफ्तारी के बाद आजतक के पत्रकार उसके पिता से इस संबंध में बात करने उनके घर पहुँचे। लेकिन बात करने की जगह या बात करने से मना करने की जगह जैद के पिता ने पत्रकार पर हमला बोल दिया। उनके साथ गाली-गलौच किया और उन पर हाथ भी उठाया।

आजतक की एक्सक्लूसिव वीडियो में हम पत्रकार अरविंद ओझा के साथ हुई बदसलूकी देख सकते हैं। वीडियो में नजर आ रहा है कि जैद के बांद्रा वाले घर में रिपोर्ट करने गए पत्रकार से पहले बात करने से मना कर दिया जाता है। लेकिन फिर, दोबारा कोशिश करने पर जैद के पिता घर से बाहर निकलते हैं और धमकी के अंदाज में धक्का-मुक्की करते हुए कहते हैं, “मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूँ, इज्जत में समझ जाना… प्लीज गेट आउट, गेट आउट बास्टर्ड्स।”

इसके बाद पत्रकार पूछता है कि वो धक्का क्यों दे रहे है? जिस पर जैद के पिता सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं और अरविंद ओझा से गाली-गलौच करने लग जाते हैं। वीडियो में वह कहते सुने जा सकते हैं, “तेरी माँ की #& जाता है क्या गां# कि अभी बताऊँ तेरे को बॉक्सिंग का बहन%*#… आगे हम वीडियो में देख सकते हैं कि जैद के पिता पत्रकार पर हाथ भी उठाते हैं। मगर, इस बीच यह सब कैमरामैन अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर लेता है।

गौरतलब है कि सुशांत मामले में जैद की गिरफ्तारी के बाद पता चला है कि वह लगातार रिया के भाई शौविक के संपर्क में था। शौविक ने ही जैद का नंबर सैम्यूल मिरांडा को दिया था। बता दें कि नारकोटक विंग की इस कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि कई और ड्रग पेडलर भी अब गिरफ्तार हो सकते हैं। 

इसके अतिरिक्त एनसीबी जल्द शौविक चक्रवर्ती और सैमुअल मिरांडा से भी पूछताछ कर सकती है। कहा जा रहा है कि इस केस की पड़ताल के दौरान मुंबई के अंधेरी इलाके से देर रात एक व्यक्ति हिरासत में लिया गया है। एनसीबी अपने दफ्तर में उससे भी पूछताछ कर रही है। 

नक्‍सलियों ने शृंगीऋषि धाम के पुजारी को अगवा कर की बेरहमी से हत्या, जनेऊ और पैर के अँगूठे से हुई क्षत-विक्षत शव की पहचान

बिहार के लखीसराय से एक पुजारी की बेरहमी से की गई हत्या का मामला सामने आया है। नक्सलियों ने कजरा थाना क्षेत्र के शृंगी ऋषि धाम के पुजारी नीरज झा की हत्या कर उनके शव को जंगल स्थि‍त हनुमान थान के समीप फेक दिया। स्थानीय लोग नक्सलियों की इस बर्बरता से काफी आक्रोश में हैं। इस घटना ने इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक सप्‍ताह पहले 23 अगस्त को कजरा थाना क्षेत्र के बाबा शृंगी ऋषि धाम से पुजारी नीरज झा का नक्सलियों ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद नक्सलियों ने उनके ही फोन का इस्तेमाल कर परिजनों से एक करोड़ रुपए की माँग की थी। नक्सलियों के भय से पुजारी के स्वजनों ने पुलिस को सूचना नहीं दी।

परिजनों ने बताया कि पिता राजेंद्र झा और माँ, बेटे की वापसी का इंतजार कर रहे थे। लेकिन, घर पर शव आने से उनका रो-रोकर बुरा हाल है। नक्सलियों ने नीरज झा की हत्या कर शव को हनुमान थान के समीप फेंक दिया था, जिसके बाद पुलिस को रविवार रात को सूचना मिली कि एक अज्ञात शव हनुमान थान के पास क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा है। उसके बाद काफी संख्या में पुलिस जंगल स्थित हनुमान थान गई और शव को कजरा थाना ले आई। शव की हालत इतनी खराब थी कि उसे पहचानने में परिजनों को भी परेशानी हो रही थी।

नक्सलियों द्वारा पुजारी की हत्या को इतनी दरिंदगी से अंजाम दिया गया था कि मृतक के भाई पंकज झा ने जनेऊ और पैर के अँगूठे से नीरज की पहचान की है।

वहीं लखीसराय के एएसपी (अभियान) अमृतेश कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि नक्सलियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर नक्सल प्रभावित चानन, पीरीबाजार, कजरा के जंगलों मे सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पुजारी नीरज झा हत्याकांड मामले में शामिल सभी आरोपितों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।

इससे पहले भी नक्सलियों ने एक शिक्षक सहित तीन लोगों का अपहरण किया था, जिनमें शिक्षक को बाद में छोड़ दिया गया था। वहीं लखीसराय-मुंगेर सीमा पर सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ भी हुई। बाद में यह रिपोर्ट सामने आई थी कि नक्सलियों द्वारा पंचायत के मुखिया और साहूकार को भी छोड़ दिया गया।

‘पुलवामा बम’ के लिए जिसने खरीदा था 4 kg पाउडर, उसे NEET देकर बनना है डॉक्टर, इंडिया टुडे ने बताया ‘होनहार छात्र’

पुलवामा हमले के लिए विस्फोटक एकत्रित करने वाला आतंकी NEET की परीक्षा देने का इच्छुक है। इस आतंकी का नाम वैज-उल-इस्लाम है। वैज ने अपनी जमानत के लिए याचिका डाली है। याचिका में उसने इच्छा जताई है कि वह NEET की परीक्षा देना चाहता है। यह परीक्षा 13 सितंबर को होनी है। लेकिन NIA ने इस याचिका का विरोध किया है। अब आगे इस पर सुनवाई 3 सितंबर को होगी। 

इस बीच एक अधिकारी का कहना है, “आतंकी ने अपना एग्जाम सेंटर श्रीनगर चुना है। जहाँ उसे अन्य बच्चों के साथ परीक्षा देनी होगी। ऐसे में वह भागने की कोशिश कर सकता है। इसलिए यह जोखिम नहीं लिया जा सकता।”

बता दें कि इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कश्मीर के वैज को एक ‘होनहार छात्र’ बताया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक जैश ए मोहम्मद ने उसका ब्रेन वॉश नहीं किया था, वैज का कट्टरपंथी तत्वों से कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन 2019 में वह जैश से जुड़ा।

रिपोर्ट की मानें तो राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को ‘पढ़े-लिखे युवक’ और उसके परिवार से बहुत हमदर्दी है। लेकिन उसके ख़िलाफ़ सबूत इतने पुख्ता हैं कि उन्हें नकारा नहीं जा सकता। इसके बाद पारिवारिक बैकग्राउंड का जिक्र भी खबर में है। जैसे- वैज के पिता सरकारी अधिकारी हैं और उसके दो होनहार भाई भी हैं।

इसमें वैज के ‘होनहार छात्र’ से ‘आतंकी’ बनने का सफर भी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ समय पहले वह एक परिजन के यहाँ शोक समारोह में शामिल हुआ था, तभी उसे नौगाम आने को कहा गया और वहाँ उसकी मुलाकात पाकिस्तानी जैश कमांडर मोहम्मद इस्माइल से हुई।

अब चूँकि वैज के माता-पिता हज के लिए गए हुए थे, तो जैश के आतंकी उनका ब्रेनवॉश करने में सफल रहे और बाद में वह उसी के घर में रुके भी। पड़ताल में यह भी मालूम हुआ कि पाकिस्तानी आतंकियों के लिए वैज ने सामान खरीदा। बाद में खुद ही मोहम्मद इस्माइल उर्फ अदनान को उसे पहुँचाया भी। अदनान वही आतंकी है, जो खुद को मसूद अजहर का करीबी बताता है।

NIA द्वारा गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आतंकी वैज ने कहा कि उसे आतंकी मॉड्यूल को सामान पहुँचाने के लिए ऑनलाइन निर्देश दिए जाते थे। मगर, उसे पुलवामा हमले की जानकारी नहीं थी, ऐसा वह दावा कर रहा है।

उसने अपने अमेजॉन अकॉउंट से 4 किलोग्राम एलुमिनियम पाउडर भी मोहम्मद इस्माइल के कहने पर खरीदा था। इसके बाद वैज ने बैटरी, दस्ताने, मास्क और सैमसंग मोबाइल का फोन कवर भी खरीदा था। उसने इस्माइल के लिए जूते ऑर्डर किए थे। क्योंकि इस्लाइल की हाइट 6’6″ थी, और जूते का साइज 13 था, इसलिए उसके नाप के जूते कहीं भी नहीं मिलते थे।

वैज लगातार इस्माइल के अलावा एक स्थानीय समीर डार के संपर्क में था। मगर, उसकी मुलाकात उमर फारूक से कभी नहीं हुई। एक चैट में उसे 1 लाख रुपए का ड्रोन खरीदने को बोला गया था। पर, जब उसने ऐसा करने में असमर्थता जताई तो जैश को अपना आइडिया ड्रॉप करना पड़ा, शायद उन्हें लगा ऑनलाइन मॉनिट्रिंग से उनका राज खुल जाएगा।

खरीददारी करने के लिए शुरुआत में वैज ने अपने पिता का क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया। फिर, बाद में एक नाबालिग पड़ोसी के डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने लगा था।

उल्लेखनीय है कि टेरर मॉड्यूल के बीच वॉयस नोट से हुई बातचीत को फॉरेंसिक लैब ने रिट्रीव कर लिया है। इनका जिक्र चार्जशीट में भी है। इसमें यह भी बताया गया है कि लड़के को पुलवामा में ही एक और हमले के लिए सामान खरीदने के लिए बोला गया था। वैज के अमेजॉन अकॉउंट से पता चलता है कि उसने वहाँ से ऐसी सामग्री खरीदी, जिनका इस्तेमाल विस्फोटक बनाने में किया जाना था।

बता दें कि गिरफ्तारी के बाद से वैज जम्मू की अंबफाला जेल में बंद है। वह वहाँ रहकर अपनी परीक्षा के लिए तैयारी करता है। इसके अतिरिक्त इस आतंकी का बैकग्राउंड देखते हुए लाइब्रेरी का इंचार्ज भी बनाया गया है। वह ज्यादातर समय किताबों को पढ़ने में बिताता है।

याद दिला दें कि पिछले दिनों एनआईए ने इस मामले में 13500 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी। कई पाकिस्तानी आतंकी इस घटना में आरोपित बनाए गए थे। मसूद अजहर अलवी, रौफ अजगर अलवी, अम्मार अलवी, मोहम्मद इस्माइल , मोहम्मद उमर फारूख, मोहम्मद कामरान अली, कारि यासिर का नाम शामिल है।

पैगंबर मुहम्मद पर कार्टून, फ्रेंच मैगजीन शार्ली एब्दो पर फ्रांस के प्रेसिडेंट ने कहा – ‘नहीं करूँगा निंदा, प्रेस की स्वतंत्रता है’

फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक मैगजिन शार्ली एब्दो के पैगम्बर मुहम्मद पर पुनः प्रकाशित किए जाने वाले कार्टून के फैसले को लेकर किसी भी प्रकार की निंदा नहीं की।

लेबनान की एक यात्रा के दौरान मैक्रों ने फ्रेंच ब्रॉडकास्टर बीएफएम टीवी से कहा,

“यह महत्वपूर्ण है कि फ्रांसीसी नागरिक एक-दूसरे के प्रति सम्मानजनक भावना रखें। साथ ही नफ़रत से भरे वाद-विवाद से बचें। लेकिन वे व्यंग्य पत्रिका के कार्टून को पुनः प्रकाशित करने के फैसले की आलोचना नहीं करेंगे।”

फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बल देते हुए कहा कि कोई भी प्रेसिडेंट पत्रकार या न्यूज़ रूम के संपादकीय की पसंद को लेकर कोई जजमेंट पास नहीं कर सकता। क्योंकि देश (फ्रांस) में प्रेस की स्वतंत्रता है।

उन्होंने आगे कहा, “फ्रांस में ईशनिंदा की आज़ादी अंतरात्मा की स्वतंत्रता से जुड़ी है। मैं इन सभी आज़ादी की रक्षा करने के लिए यहाँ हूँ। फ्रांस में कोई भी राष्ट्रपति, राज्यपाल, ईशनिंदा की आलोचना कर सकता है।”

साथ ही मैक्रों ने जनवरी 2015 में हुए हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए ट्रायल के पहले दिन को लेकर कहा कि वो उन सभी महिलाओं और पुरुषों के लिए दुखी हैं, जिन्हें कायरतापूर्ण गोली मार दिया गया क्योंकि उन्होंने बिना डरे अपनी बात को सबके सामने रखा।

बता दें कि फ्रांस के प्रेसिडेंट की यह टिप्पणी तब आई, जब 2015 में इस्लामी आतंकवादियों के हमले का शिकार होने वाले फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक शार्ली एब्दो ने मंगलवार को कहा कि वह पैगंबर मुहम्मद के कथित विवादास्पद कार्टूनों के कारण हुए हमले से जुड़े मुकदमे की शुरुआत में एक बार फिर पैगम्बर मुहम्मद पर कार्टून प्रकाशित करेंगे।

गौरतलब है कि मैगजीन के हालिया संस्करण में कवर पेज पर दर्जन भर कार्टून प्रकाशित किए गए हैं। कवर पेज के बीच में पैगंबर मुहम्मद का कार्टून भी मौजूद है, जिसे जीन काबूट ने बनाया था। 2015 में हुए आतंकी हमले में उनकी जान चली गई थी। पत्रिका के फ्रंट पेज की हेडलाइन है, “यह सब, बस उसी के लिए।”

मैगजीन के डायरेक्टर लौरेंट रिस सौरीस्यू ने लेटेस्ट एडिशन में कार्टून को फिर से छापने को लेकर लिखा, “हम कभी झुकेंगे नहीं, हम कभी हार नहीं मानेंगे।”

शार्ली एब्दो के इस फैसले ने ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की बहस को एक बार फिर जीवित कर दिया है। एक ओर जहाँ कुछ लोग इसे फ्री स्पीच का लीडर कह रहे हैं तो वहीं, दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि शार्ली एब्दो ने लाइन क्रॉस की थी।

फ्रांस के पेरिस में जनवरी 7, 2015 में 2 इस्लामी बंदूकधारी भाइयों ने व्यंग्य-पत्रिका ‘शार्ली एब्दो’ के दफ्तर पर हमला बोल दिया था। इस हमले में कम से कम 12 लोगों के मरने की खबर आई थी जबकि काफी लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

पत्रिका के संपादक स्टीफन चारबोनियर की भी हमले में मौत हो गई थी। बंदूकधारी हमलावर इस मैगजीन में छपे पैगंबर मुहम्मद के कार्टून से नाराज थे। पत्रिका काफी समय अपने कथित ‘इस्लाम विरोधी’ सामग्री की वजह से कट्टरपंथियों के निशाने पर थी।

रवीश ने खोली अपने ही NDTV की पोल: सुशांत मामले में दूसरों को घेर रहे थे, खुद के चैनल पर 162 वीडियो

मीडिया जगत में रवीश कुमार का जलवा खत्म होते-होते अब एनडीटीवी की पत्रकारिता भी दम तोड़ने की कगार पर है। मीडिया चैनल्स में मची टीआरपी की होड़ से खुद को अलग बताने वाला यह चैनल दूसरों पर निशाना साधने के चक्कर में खुद की जगहँसाई करवाने लगा है।

ताजा मामला सुशांत केस में मीडिया कवरेज को लेकर है। जहाँ रवीश कुमार अपने प्राइम टाइम में मीडिया संस्थानों पर निशाना साधने के चक्कर में अपने चैनल की विश्वसनीयता पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर देते हैं। वह कहते हैं कि कुछ बड़े चैनलों ने इतनी प्रमुखता से इस मुद्दे पर कवरेज की है कि अब उनके नामों में कोई अंतर नहीं रह गया।

आगे रवीश बताते हैं कि एक बड़े चैनल के यूट्यूब चैनल पर 20 से 29 अगस्त के बीच 550 के करीब वीडियो अपलोड हुई और इनमें से 400 के करीब वीडियो सुशांत मामले पर थी। इसके अलावा यदि केवल 3 दिन की बात कर रहें तो उसी यूट्यूब चैनल पर 250 वीडियो अपलोड की गई। इसमें से 210 केवल सुशांत सिंह मामले में थी। वह चैनल पर निशाना साधते हुए हर दिन अपलोड की जाने वाली वीडियो की औसत निकालते हैं और कहते हैं कि हर दिन उस चैनल पर 70 वीडियो क्लिप सुशांत मामले को लेकर अपलोड की जाती है।

फिर, एक अन्य चैनल को घेरते हुए रवीश कहते हैं कि इसी प्रकार दूसरे चैनल पर 20-29 अगस्त के बीच 190 वीडियो अपलोड हुई। इसमें से 160 वीडियो सुशांत सिंह राजपूत को लेकर है। 3 दिनों में इस चैनल ने 67 वीडियो अपलोड की। इनमें से 66 वीडियो सुशांत सिंह राजपूत की थी। यानी कोई दूसरी खबर तक नहीं थी। इसके बाद एक तीसरे चैनल पर भी सुशांत मामले में उन्हें 100 वीडियो दिखती है।

अब खास बात ये है कि सुशांत मामले में मीडिया कवरेज की बात रवीश कुमार अपने उस प्राइम टाइम में लेकर आए हैं, जिसमें वह NEET, JEE, SSC, Railway के परीक्षार्थियों के आंदोलन पर बात कर रहे थे। शायद ऐसा करते हुए उन्हें खुद ही नहीं पता था कि उनका चैनल पर इस दौरान सुशांत सिंह से जुड़ी कई वीडियोज अपलोड हो चुकी है।

‘पॉलिटिकल कीड़ा’ नाम के ट्विटर हैंडल से NDTV के पाखंड की पोल खोलती एक वीडियो सामने आई है। उनका दावा है कि जब रवीश कुमार अपने प्राइम टाइम में ये बातें कर रहे थे, उस बीच चैनल पर 162 वीडियो डाली गईं।

इसके अलावा यदि हम खुद भी एनडीटीवी का यूट्यूब चैनल एक्सेस करते हैं, तो मालूम चलेगा कि सुशांत मामले पर अभी तक एनडीटीवी बहुत सी वीडियो अपलोड कर चुका है। अब इसी हिपोक्रेसी को देख कर लोगों का कहना है कि रवीश जैसे पत्रकार अपने या अपने मालिक के गिरेबान में झाँकने की हिम्मत क्यों नहीं रखते।

रवीश कुमार अपने प्राइम टाइम में दावा करते हैं कि गोदी मीडिया के चैनल भी इस समय सुशांत मामले में इस तरह दिलचस्पी दिखा रहे हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री के मन की बात तक अच्छी नहीं लग रही। वह दर्शकों को बताते हैं कि लोग चाहे या न चाहें, मीडिया उन्हें सुशांत को ही दिखा रहा है। उनका रिमोट अब उनके हाथ में नहीं है। उनका रिमोट मीडिया के हाथ में है, अगर वह उनकी दिखाई कवरेज नहीं देखेंगे तो उनके घरों में बाउंसर भेजा जाएगा और उनके घर के सोफा सेट और क्रॉकरी तक तोड़ दी जाएगी।

इसके बाद रवीश कुमार बीच में राहुल गाँधी की वीडियो का प्रमोशन करते भी नजर आते हैं। वह कहते हैं कि पता लगाइए क्या नरेंद्र मोदी की वीडियो को डिस्लाइक करने वाले राहुल गाँधी की वीडियो को लाइक कर रहे हैं या फिर उनसे दूरी बना रहे हैं। रवीश कुमार छात्रों के आंदोलन की बातें करते-करते जीडीपी डिग्रोथ पर निशाना साधना नहीं चूँकते।

वह एक बार भी कोरोना महामारी के कारण उपजी स्थिति का जिक्र किए बिना गिरी हुई जीडीपी को मुख्य मुद्दा बनाते हैं। वह मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि ऐसा किसी के कार्यकाल में नहीं हुआ था। आगे अपने दर्शकों को 5 ट्रिलियन इकॉनमी का सपना न देखने की सलाह देते हुए रवीश कहते हैं कि अपने आगे के आर्थिक जीवन को सोचते-समझते हुए विचार करें।

यहाँ गौर करने वाली बात है कि एक ओर जहाँ टीआरपी की भागमभाग में हर चैनल सुशांत मामले पर कवरेज कर रहा है। वहीं एनडीटीवी ऐसा चैनल है, जो अपना औचित्य बनाए रखने के लिए अन्य खबरों के बीच में उसी प्रकार सुशांत का जिक्र कर देता है, जैसे कि इस वीडियो में किया।

दूसरे चैनल्स को गोदी मीडिया करार देने वाला एनडीटीवी प्रत्यक्ष रूप से राहुल गाँधी की पूरी वीडियो को अपने प्राइम टाइम के स्लॉट में जगह दे देता है और प्रत्यक्ष रूप से उसका प्रमोशन भी करता है और फिर साथ में ये भी कह देता है कि आप जो देखना चाहते हैं, वो दूसरे मीडिया चैनल आपको देखने नहीं दे रहे।

‘माँ काली की मूर्ति को जिहादियों ने जला डाला’ – BJP सांसद का आरोप, बंगाल पुलिस ने कहा: ‘आग लगने से हुई दुर्घटना’

भारतीय जनता पार्टी के सांसद अर्जुन सिंह ने मंगलवार की देर रात (1 सितंबर, 2020) को एक ट्वीट किया। ट्वीट के अनुसार पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के एक मंदिर में माँ काली की मूर्ति जला दिया गया। सांसद ने आरोप लगाया कि यह काम जिहादी प्रवृति के कुछ लोगों द्वारा किया गया है।

सांसद अर्जुन सिंह ने कहा:

“एक संप्रदाय विशेष से संबंधित कुछ लोगों ने एक मंदिर पर हमला किया, मंदिर को नष्ट कर दिया और देवी माँ काली की मूर्ति को जला दिया।”

मुर्शिदाबाद पुलिस ने सांसद अर्जुन सिंह के आरोपों का खंडन किया है। ट्विटर पर पुलिस ने जो बताया, उसके अनुसार मंदिर समिति ने कहा है कि माँ काली की मूर्ति को जो क्षति हुई है, वो आग लगने की सामान्य घटना के कारण हुई है।

पश्चिम बंगाल की मुर्शिदाबाद पुलिस के दावे के अनुसार यह घटना 31 अगस्त और पहली सितंबर की रात को हुई थी। इस घटना में केवल मूर्ति नष्ट हुई है। बाकी मंदिर को क्षति नहीं पहुँची है।

ऑपइंडिया ने मंदिर के अधिकारियों के दिए नंबर पर कॉल किया। लेकिन कॉल उठाया नहीं गया। इस पूरी घटना पर जैसे ही हमें अधिक जानकारी मिलेगी, हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे या नई सूचना के साथ नई रिपोर्ट आप तक लेकर आएँगे।

7-8 बख्तरबंद गाड़ियों के साथ आ रहे थे चीनी सैनिक, बीच रास्ते में खड़ी हो गई भारतीय सेना: तीसरी घुसपैठ ऐसे हुई नाकाम

पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सेना के बीच तनाव की स्थिति लगातार बनी हुई है। ऐसे में हालातों को सुधारने के लिए कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत भी चल रही है। मगर, बावजूद इसके चीन भारत में घुसपैठ के प्रयास बंद नहीं कर रहा। ताजा जानकारी के अनुसार चीन ने दो बार नाकाम होने के बाद तीसरी बार भारत में घुसने का प्रयास किया। हालाँकि, सीमा पर मुस्तैद भारतीय सेना ने फिर उन्हें कामयाब नहीं होने दिया। 

कहा जा रहा है इस बार चीनी सेना 7-8 बख्तरबंद गाड़ियों के साथ भारत की ओर आगे बढ़ी थी। लेकिन भारतीय सेना ने उनकी गतिविधि को भाँपते हुए अपने वाहन भी रास्ते में खड़े कर दिए। इसके बाद भारतीय सेना को देख उन्हें वापस अपने कैंप की ओर जाना पड़ा। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मंगलवार को सैन्य उच्चाधिकारियों के साथ LAC हालातों पर चर्चा की।

आपको बता दें कि इससे पहले चीनी सेना ने 29-30 अगस्त की रात पूर्वी लद्दाख में उकसावे की कार्रवाई करते हुए पेंगोंग झील के दक्षिण में एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने का प्रयास किया था, लेकिन भारतीय सैनिकों ने उसे भी नाकाम कर दिया। फिर, 31 अगस्त को भी चीनी सेना ने घुसपैठ का प्रयास किया था।

इसके बाद विदेश मंत्रालय ने चीन की तरफ से की गई घुसपैठ की हरकत पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन पर निशाना साधा और कहा, “जिस दौरान भारत और चीन दोनों के ग्राउंड कमांडर हालात को सुलझाने के लिए चर्चा में शामिल थे, उसी वक्त चीनी सेना एक बार फिर भड़काने वाली कार्रवाई में शामिल रही। हालाँकि, समय पर अपनाए गए रक्षात्मक रवैये से भारतीय सेना चीन द्वारा LAC के स्टेटस को बदलने की कोशिश को नाकाम करने में सफल रही।”

इंडिया एक्सप्रेस की खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इस बार चुमार सेक्टर में चीनी वाहनों के एक बेड़े की गतिविधियाँ देखी गईं थी, पर यह चीनी सेना की रूटीन गश्त का हिस्सा लगा न कि किसी तरह की घुसपैठ को अंजाम देने का।

दूसरी तरफ एलएसी पर भारतीय सैन्य उपकरणों और हथियारों के मूवमेंट पर एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, “जिस जगह के लिए जो जरूरत पड़ रही है, वहाँ वो चीजें पहुँचाई जा रही हैं। पहाड़ों और मैदानी इलाकों पर सेना ही रहेगी, इसलिए वहाँ के हिसाब से हथियारों के बेहतर प्लेटफॉर्म पहुँचा दिए गए हैं।”

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ चीन लगातार भारत कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है। तो वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय से भी उन्हें जवाब मिल रहा है। जैसे, उन्होंने 31 अगस्त की कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा था कि भारतीय सेना ने 31 अगस्त को दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद बनी सहमति को तोड़ा।

चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने कहा कि भारत ने जो किया है वह दोनों पक्षों की ओर से जमीन पर हालात ठीक करने के मकसद के खिलाफ है और चीन इसका कड़ा विरोध करता है। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने मंगलवार को कहा कि चीनी पक्ष ने उन बातों की अनदेखी की, जिन पर पहले सहमति बनी थी और 29 अगस्त एवं 30 अगस्त देर रात को उकसावे वाली सैन्य कार्रवाई के जरिए दक्षिणी तटीय इलाकों में यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि साल की शुरुआत से ही वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी पक्ष का व्यवहार और कार्रवाई स्पष्ट रूप से द्विपक्षीय समझौतों एवं प्रोटोकाल का ‘स्पष्ट उल्लंघन’ है जो दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति स्थापना सुनिश्चित करने के लिए हुई थी। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति की भी पूर्ण अनदेखी है।

उन्होंने कहा कि हमने राजनयिक और सैन्य माध्यमों से चीनी पक्ष के समक्ष हाल के उकसावे वाली और आक्रामक कार्रवाई के विषय को उठाया है और उनसे अपील की है कि वे अपने अग्रिम पंक्ति के सैनिकों को ऐसी उकसावे वाली कार्रवाई के संबंध में अनुशासित एवं नियंत्रित रखें।

यहाँ बता दें कि LAC के हालातों पर दिल्ली में मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैन्य उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे और डीजीएमओ भी शामिल थे।

बताया जा रहा है कि लगभग दो घंटे चली बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भारतीय सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ सभी संवेदनशील क्षेत्रों में अपना आक्रामक रुख जारी रखेगी ताकि चीन के किसी भी ”दुस्साहस” से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

वामपंथी DYFI के 2 कार्यकर्ता हक मोहम्मद और मिथिलाज की हत्या, एक महिला सहित 4 कॉन्ग्रेसी नेता गिरफ्तार

केरल में 4 कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं और एक महिला को मंगलवार (सितंबर 2, 2020) को वेंजरामूदु में डीवाईएफआई के दो कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस रिमांड रिपोर्ट के मुताबिक राजनीति के चलते हत्या को अंजाम दिया गया।

पुलिस ने इस मामले में एक्शन लेते हुए पहले दिन कॉन्ग्रेस के चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद शाम को प्रीजा नाम की एक महिला की गिरफ्तारी की गई। कथित तौर प्रीजा ने अपराध के बाद आरोपितों को फरार होने में मदद की थी।

पुलिस ने कहा, “वर्तमान में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। महिला को अपराध के बाद आरोपितों को फरार होने में मदद करने के चलते गिरफ्तार किया गया। दो अन्य आरोपित फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं।”

वहीं एक स्थानीय अदालत में पेश पुलिस की रिमांड रिपोर्ट में कहा गया कि हत्या राजनीति से प्रेरित थी और 30 अगस्त को रची गई साजिश के बाद यह अपराध किया गया था।

बता दें माकपा की युवा इकाई डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के कार्यकर्ता मिथिलाज (30 साल) और हक मोहम्मद (24 साल) की 30 अगस्त को तिरुवंनतपुरम के करीब ही कथित तौर पर कॉन्ग्रेस की युवा इकाई के कार्यकर्ताओं ने हत्या कर दी थी।

रिमांड रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों का डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं के साथ 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान आपस में झगड़ा हुआ था, जिसके चलते अब इनकी हत्या की साजिश रची गई।

गौरतलब है कि DYFI ने अपने कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद एक ऑडियो जारी किया था। ऑडियो में कथित तौर पर एक आरोपित शजीथ (shajith) सांसद अदूर प्रकाश से बात कर रहा था। इसी ऑडियो के आधार पर औद्योगिक मंत्री ईपी जयाराजन ने दोहरे हत्याकांड के तार अदूर प्रकाश से जुड़े बताए थे। साथ ही उन्होंने इस हत्याकांड में कॉन्ग्रेस सांसद की भूमिका पर जाँच करने की माँग की थी।

जयाराजन का कहना था कि आरोपित ने खून करने के बाद सीधे अदूर प्रकाश को फोन किया था और आरोपितों का सांसद के साथ “क्लोज लिंक” है। वहीं, अदूर प्रकाश ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया था। उनका कहना था कि यह मंत्री की जिम्मेदारी थी कि वह आरोपों को सिद्ध करें। उन्होंने दावा किया था कि दोहरे हत्याकांड के किसी आरोपित ने उन्हें कॉल नहीं किया।

श्रम ऐप (ShramApp): लॉकडाउन में बेरोजगार श्रमिकों, प्रवासी मजदूरों को उपलब्ध कराएगा रोजगार, है बिल्कुल FREE

कोरोना वायरस के बीच जब लॉकडाउन हुआ तो प्रवासी मजदूर, श्रमिक अलग-अलग राज्यों से मजबूरन वापस उत्तर प्रदेश लौटने लगे। कोरोना वायरस के चलते देश में बेरोजगारी जैसी समस्या उत्पन्न हो गई। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव दूसरे राज्यों में काम कर रहे मजदूरों पर पड़ रहा है, जिनके पास काम न होने से परिवार को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन श्रमिकों को काम देने के लिए प्रशासन की ओर से निर्देश दिए गए हैं और सरकार अपनी तरफ से कोशिश भी कर रही है।

अब जब धीरे-धीरे लॉकडाउन खुल रहा है, तो छोटे-बड़े लगभग सभी कारोबार खुल रहे हैं। मगर काम करने वाले मजदूर गायब हैं। ऐसा नहीं है कि उन्हें काम की जरूरत नहीं है। सच्चाई यह है कि न तो श्रमिकों को काम का पता मिल पा रहा है और न ही काम देने वालों को श्रमिकों का। श्रमिकों और काम देने वालों के बीच की इस दूरी को पाटने का काम किया है- श्रम ऐप (Shram App) ने।

बता दें कि श्रम ऐप से काम पाना काफी आसान है। इसके लिए बस आपको अपने फोन में प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से इस ऐप को डाउनलोड करना है और अपना नाम और काम से जुड़ी जानकारी को अपलोड कर देना है। श्रम ऐप पर घर में रोज के काम जैसे- प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, टेलर, कारपेंटर, सफाईकर्मी, मेड, घर का सामान रिपेयर करने वाले श्रमिक सिर्फ एक क्लिक पर मिल जाएँगे।

श्रम ऐप भारत के नागरिकों द्वारा बनाया गया पूर्ण स्वदेशी ऐप है, जो सभी के लिए नि:शुल्क है। ये ऐप सभी कुशल (Skilled) और अकुशल (Unskilled) मजदूरों के लिए है। यह ऐप लोगों से लोगों को जोड़ने और श्रमिकों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए है। इस ऐप के जरिए कोई भी श्रमिक अपना प्रोफाइल बना सकता है, या फिर उसके पास स्मार्टफोन न होने पर उससे जुड़े लोग- हम या आप उनका मोबाइल नंबर डालकर अकाउंट बना सकते हैं। इससे काम के लिए सीधे उनके नंबर पर कॉल जाएगा।

हम ही उनके जॉब प्रोवाइडर भी बन सकते हैं। उदाहरण के लिए हमारे घर में एसी रिपेयरिंग का काम होगा, तो हम ऐप पर जाकर अपने इलाके में इस काम के लिए उपलब्ध श्रमिक को कॉल करेंगे। इससे उन्हें भी काम मिलेगा और हमारा भी काम होगा। इतना ही नहीं, इस ऐप के माध्यम से कारखानों के मालिक, कंपनियाँ या फिर HR सीधे श्रमिकों के संपर्क में रह सकते हैं और उन्हें काम उपलब्ध करा सकते हैं। कुल मिलाकर यह ऐप बेरोजगार और विस्थापित मजदूरों के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है। 

इस ऐप को Shri Shakti Infomotion Private Limited नाम की ऑर्गेनाइजेशन ने बनाया है। यह एक स्वदेशी ऑर्गेनाइजेशन है। संगठन के मार्केटिंग और विज्ञापन का काम रंजना देब देखती हैं। खाली समय में, वह अपने NGO शक्ति फाउंडेशन की देखभाल करती हैं। वहीं गौरव पंडित Shri Shakti Infomotion Private Limited में टेक्नोलॉजी और प्रॉडक्ट डेवलपमेंट का विभाग सँभालते हैं। इस ऐप को प्ले स्टोर पर भी काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। आप इस लिंक पर क्लिक करके ऐप से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।