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फिल्म, गाना, मोबाइल गेम… सब पर फतवा, जुर्माना में उठक-बैठक और किया जाएगा टकला: TMC नेताओं ने किया स्वागत

पश्चिम बंगाल स्थित मुर्शिदाबाद के संप्रदाय विशेष बहुल गाँवों में अजीबोगरीबी फतवा जारी हुआ है। संप्रदाय विशेष लोगों के प्रभाव वाले गाँवों के प्रधानों ने जारी किए गए फतवे में कहा है कि टीवी देखना, कैरम खेलना, लॉटरी खरीदना और फ़ोन या कम्प्यूटर का इस्तेमाल कर के गाने सुनना ‘हराम’ है और इन सारी क्रियाकलापों को प्रतिबंधित किया जाता है। ये फतवा ‘सोशल रिफॉर्म्स कमिटी’ के बैनर तले जारी किया गया।

सोशल रिफॉर्म का अर्थ समाज सुधार होता है लेकिन यहाँ फतवा जारी कर के इस्लामी कट्टरवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। कमिटी ने कहा है कि अगर कोई भी इन फतवों का उल्लंघन करता पाया जाएगा तो उस पर 500 रुपयों से लेकर 7000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही इन फतवों को न मानने वालों के लिए कान पकड़ कर उठक-बैठक कराने की सज़ा देने का भी प्रावधान किया गया है।

ये फतवा मुर्शिदाबाद के अद्वैत नगर गाँव में एक बैठक के बाद जारी किया गया, जहाँ की जनसँख्या 12,000 है। ये सारे गाँव पश्चिम बंगाल और झारखण्ड की सीमा पर स्थित रघुनाथगंज अनुमंडल में आते हैं। अद्वैत नगर सोशल रिफॉर्म्स कमिटी के सचिव अज़हरुल शेख ने कहा कि कुछ क्रियाकलापों को प्रतिबंधित किया गया है क्योंकि युवा वर्ग इन सबकी वजह से नैतिक और सांस्कृतिक पतन की ओर उन्मुख हो रहा है।

उन्होंने कहा कि वो युवाओं को ऐसी फ़िल्में, गाने और सीरियल देखने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं दे सकते, जो इस्लाम के मजहबी नियम-क़ानूनों के अंतर्गत फिट नहीं बैठता हो। कमिटी ने रविवार (अगस्त 9, 2020) को ये फतवे जारी किए और साथ ही हिदायत दी कि अगर कोई भी इसका उल्लंघन करते पाया गया तो वो सजा भुगतने के लिए तैयार रहे। इस फतवे से जुड़े पोस्टर-बैनर्स को कई गाँवों में चिपकाया गया है।

मोबाइल फोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल कर के अगर कोई गाना सुनता हुआ पकड़ा गया तो उस पर फतवे के हिसाब से 1000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। कैरम खेलने वालों को 500 रुपए और लॉटरी खरीदने वालों को 2000 रुपए बतौर जुर्माना देना पड़ेगा। साथ ही इन ‘हराम’ क्रियाकलापों को करने वालों के बारे में सूचना देने वालों को इनाम देने की भी व्यवस्था की गई है। ‘हराम क्रियाकलापों’ गहनता को देखते हुए मुखबिरों को 200 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक के इनाम देने की घोषणा की गई है।

अगर कोई शराब बेचते हुए पाया गया तो उसे 7000 रुपए बतौर जुर्माना देना होगा। लेकिन, सिर्फ जुर्माना और उठक-बैठक का भी प्रावधान नहीं है बल्कि शराब बेचने वालों को टकला कर के उसे पूरे गाँव में घुमाया जाएगा। लॉटरी और टिकट गैम्ब्लिंग पर भी इसी सजा का प्रावधान है। अगर कोई शराब पिता हुआ पाया गया तो फिर उस पर 2000 रुपए के जुर्माने के साथ-साथ उसे 10 बार उठक-बैठक भी करनी पड़ेगी।

सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेताओं ने कहा है कि इस फतवा में कुछ भी गलत नहीं है और उन्होंने इन सबका समर्थन किया है। ‘द न्यू इंडियन एक्स्प्रेस’ के अनुसार, तृणमूल के प्रभाव वाले इलाके वसाइपैकर में पार्टी के नेता और पंचायत प्रधान अब्दुर रउफ ने कहा कि शराब को प्रतिबंधित करना एक अच्छा निर्णय है। साथ ही उन्होंने कैरम खेलने और गाने सुनने पर प्रतिबन्ध का स्वागत करने हुए कहा कि युवाओं को इन सबकी लत लग रही थी, इसीलिए ये ज़रूरी था।

वहीं शमशेरगंज ब्लॉक के प्रखंड विकास पदाधिकारी जॉयदीप चक्रवर्ती ने कहा कि अगर कोई भी क़ानून को अपने हाथ में लेता है तो उसके खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि पश्चिम बंगाल में आए दिन भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या आम बात हो गई है और आरोपित तृणमूल कॉन्ग्रेस से जुड़े होते हैं। साथ ही संप्रदाय विशेष के तुष्टिकरण के लिए ममता बनर्जी की सरकार शुरुआत से ही कुख्यात रही है।

अशफाक के प्यार में ‘अंधी’ शिखा रखने लगी रोजा… और फिर करवा दिया अपने ही 5 साल के बेटे का अपहरण

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक माँ ने अपने प्रेमी के साथ भागने के लिए अपने बच्चे का ही अपहरण करवा दिया। यह जानकारी पुलिस ने दी। पुलिस ने बताया कि 5 साल के ध्रुव की माँ शिखा को फेसबुक के जरिए तेलंगाना के अशफाक से प्यार हो गया था, इसलिए उसने क्राइम पेट्रोल देख कर फिरौती के पैसों के लिए यह साजिश रची। वह अशफाक के साथ भागना चाहती थी लेकिन अशफाक को जिम खोलने के लिए पैसे चाहिए थे।

पुलिस ने इस मामले में खुलासा करते हुए बताया कि ध्रुव की माँ शिखा, उसके प्रेमी अशफाक और कार चालक इमरान खान को गिरफ्तार कर लिया है। इनके कब्जे से अपहरण में इस्तेमाल की गई कार और दो मोबाइल बरामद किए गए हैं।

कैसे हुई अशफाक की गिरफ्तारी?

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 7 अगस्त को शाम 4 बजे सूचना मिली कि मझोला थाना क्षेत्र के रहने वाले कलेक्शन एजेंट गौरव के 5 वर्षीय पुत्र ध्रुव का अपहरण हो गया है। फिरौती के रूप में 30 लाख रुपए माँगे गए।

सूचना मिलने पर आइजी रमित शर्मा व SSP के नेतृत्व में 300 पुलिस कर्मी ध्रुव की तलाश चारों दिशाओं में करने लगे। केस में पुलिस का दबाव बढ़ते ही अपहरणकर्ता घबरा गए और गाजियाबाद के कौशांबी बस अड्डे पर ध्रुव को छोड़ कर फरार हो गए।

ध्रुव की बरामदगी के बाद मझोला पुलिस किडनैपर्स की तलाश में जुटी। प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह व सर्विलांस सेल ने घटनास्थल के आसपास का सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा किए। सभी संदिग्धों को चिह्नित करके कुछ मोबाइल नंबर ट्रेस किए गए।

इसमें से एक मोबाइल नंबर ऐसा मिला, जो वारदात से ठीक पहले तेलंगाना के निजामाबाद से मुरादाबाद तक सफर में था और ध्रुव की बरामदगी के तत्काल बाद यही मोबाइल नंबर रखने वाला मुरादाबाद से निजामाबाद लौट गया।

मोबाइल नंबर के जरिए मिले इस सुराग के आधार पर पुलिस निजामाबाद पहुँची। वहाँ पुलिस ने मोबाइल नंबर चलाने वाले मुहम्मद अशफाक को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में अशफाक ने खुलासा किया ध्रुव की माँ के कहने पर ही उसने ध्रुव को उठाया था। इसके बाद पुलिस ने उस कार को भी बरामद किया, जिसमें ध्रुव को किडनैप किया गया और कार चालक इमरान को भी। दोनों आरोपितों के फोन भी जब्त किए गए।

कैसे हुआ शिखा और अशफाक में प्रेम?

साल 2018 में अशफाक ने फेसबुक पर स्वीटी नाम की आईडी बनाकर शिखा से संपर्क किया था। इसके बाद दोनों के बीच में बातें होना शुरू हो गई। करीब 4 माह तक ये सिलसिला चला। लेकिन फिर अशफाक ने उसे बता दिया कि वह लड़की नहीं एक लड़का है। शिखा को उससे बात करना इतना अच्छा लगने लगा था कि उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा।

इसके बाद एक के बाद एक झूठ से पर्दा उठा। लेकिन शिखा संभलने को तैयार नहीं थी। उसे अशफाक से बात करना इतना पसंद था कि जब उसने अपने मजहब और धर्म का खुलासा किया, तब भी शिखा की आँख नहीं खुली और जब उसने ये बताया कि वह इंजीनियर नहीं, निजामाबाद में शोभा इलेक्ट्रॉनिक्स में कर्मचारी है, तो भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ा।।

स्थिति ये हो गई कि अशफाक द्वारा धर्म परिवर्तन का दबाव भी शिखा को सही लगने लगा और उसका भरोसा जीतने के लिए उसने अपना नाम सोना रख कर रोजा रखना शुरू कर दिया। जब परिवार वालों को रोजे की बात पता चली तो सबने उसका विरोध किया। ससुराल वालों को छोड़ दें तो चंदौसी में रहने वाले उसके भाई और माता-पिता ने भी उसे समझाया। लेकिन किसी को यह नहीं मालूम चला कि आखिर इसके पीछे कारण क्या है।

जब पुलिस ने अशफाक को गिरफ्तार कर लिया तो उसने बताया कि उसने पिछले दो साल में मुरादाबाद तक 22 बार सफर किया और हर बार उसके होटल का खर्चा शिखा ने उठाया। मुरादाबाद के अलावा दोनों रामनगर और नैनीताल के होटलों में भी एक साथ ठहर चुके हैं।

अशफाक के पीछे पागल हो चुकी शिखा ने रची थी पूरी साजिश

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार अपहरण के पीछे के मनसूबे फिरौती के पैसे थे। प्लान ये था कि अपहरण के बाद शिखा फिरौती के पैसे लेकर आएगी और वह लोग कार में बैठकर तेलंगाना निकल जाएँगे जबकि ध्रुव को कपूर कंपनी पुल के पास छोड़ा जाएगा।

रिपोर्ट की मानें तो शिखा ने स्वयं ही ध्रुव को समझाया था कि वह अशफाक को परेशान न करे। बाद में खुद भी आने का वायदा किया। अशफाक ने भी बच्चे को घुमाने का लालच दिया और उसे लेकर नोएडा के एक होटल में पहुँच गया। लेकिन बाद में पुलिस ने अपहरण की सूचना पर जब कार्रवाई की तो घबराकर बच्चे को कौशांबी में छोड़ दिया गया।

एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि आरोपित शिखा की शादी 2011 साल में गौरव से हुई थी। दोनों को एक बेटी सादगी (8) और बेटा धुव (5) है। शादी के बाद दोनों का जीवन सामान्य तरीके से चल रहा था। लेकिन शिखा अपने इस जीवन से संतुष्ट नहीं थी। इसलिए 2 साल पहले जब तेलंगाना के निजामाबाद का अशफाक फेसबुक पर उसके संपर्क में आया तो शिखा ने सपने बुनने शुरू कर दिए।

राजदीप की फिर हुई बेइज्जती, सुशांत मामले पर कर रहा था बकवास, वकील ने दिखाई जगह

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या के मामले में पीड़ित परिवार के ‘इरादों’ को लेकर स्टूडियो में बैठ कर बात करने वाले ही अब पूछ रहे हैं कि इस मामले में मीडिया स्टूडियो में ट्रायल क्यों चल रहा है। ऐसा ही कुछ ‘इंडिया टुडे’ की स्टूडियो में भी हुआ, जहाँ बैठ कर ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने सुशांत सिंह राजपूत के वकील विकास सिंह को घेरना चाहा लेकिन उनकी खुद की बेइज्जती हो गई।

राजदीप सरदेसाई ने अपने शो में सुशांत के पिता के वकील विकास सिंह के आते ही उन पर दोष लगाना शुरू कर दिया और कहा कि आज वो सुशांत सिंह राजपूत के परिवार और उनके वकील पर आरोप लगाना चाहते हैं कि वो लोग टेलीविजन स्टूडियो का इस्तेमाल कर के मीडिया ट्रायल चला रहे हैं, ताकि जज पर सवाल उठाया जा सके। ज्ञात हो कि बुधवार (अगस्त 19, 2020) को ही रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट अपना जजमेंट देगा।

साथ ही उन्होंने ‘सीबीआई फॉर एसएसआर’ अभियान पर भी सवाल उठाए, जिसके माध्यम से सुशांत के परिवार लिए सहानुभूति रखने वाले सेलेब्रिटीज, उनके परिवार से जुड़े लोगों और फैंस ने इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग का समर्थन किया था। राजदीप सरदेसाई की दलील थी कि रिया चक्रवर्ती ने तो खुद सीबीआई जाँच की माँग की थी लेकिन जिस ‘तौर-तरीके’ से इस केस को आगे बढ़ाया जा रहा है, उससे ऐसा दिखाया जा रहा है कि रिया पहले से ही दोषी है।

सुशांत सिंह राजपूत के वकील ने राजदीप सरदेसाई को लताड़ा (वीडियो साभार: इंडिया टुडे)

राजदीप सरदेसाई ने वकील विकास सिंह से पूछा कि सुशांत मामले में स्टूडियो में ट्रायल चलाने का ये क्या तरीका है? इस पर विकास सिंह ने कहा कि अगर राजदीप की यही शिकायत है तो फिर उन्हें बात ही नहीं करनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या बात करने के लिए उनकी ओर से कहा गया था? उन्होंने कहा कि राजदीप जैसे लोग ही उन्हें मीडिया से बात करने कह रहे हैं और अगर वो नहीं बात करना चाहते हैं तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।

विकास सिंह ने कहा, “आप जैसे लोग हम पर दबाव बना रहे हैं कि हम मीडिया से बात करें। मैं मीडिया ट्रायल में कोई रुचि नहीं रखता हूँ। ये आप जैसे लोग हैं, जो हमारे पीछे पड़े रहते हैं कि आपके चैनल पर आकर हम बात करें।” इसके बाद विकास ने कहा कि राजदीप ये सवाल उनसे पूछ सकते हैं जो मीडिया ट्रायल में इंटरेस्टेड हों क्योंकि उन्हें मीडिया ट्रायल में कोई रुचि नहीं है। इसके बाद विकास सिंह ने ‘इंडिया टुडे’ के शो को अलविदा कह दिया और चले गए।

बता दें कि सुशांत के परिवार के वकील विकास सिंह ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत का इस्तेमाल किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिया के व्यवहार से ये बात स्पष्ट हो गई है। जैसे ही सुशांत से रिया की जरूरतें पूरी हो गईं, उन्होंने सुशांत को अपनी जिंदगी से निकाल बाहर किया। विकास ने आरोप लगाया कि सुशांत कमरे में सोते रहते थे और रिया अपने दोस्तों के साथ पार्टियों में मशगूल रहती थी।

उधर रिया ने पूछताछ में बताया है कि उनका आदित्य ठाकरे के साथ उठना बैठना नहीं था। वो उनको नहीं जानतीं। रिया के वकील सतीश मान शिंदे ने मीडिया से कहा है कि रिया के ऊपर लगे सभी आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि रिया ने कभी भी महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे से ना तो मुलाकात की है और ना ही फोन पर बात की है। हाँ, रिया ने शिवसेना नेता के बारे में सुन जरूर रखा है। हालाँकि, वो ठाकरे के अच्छे दोस्त डिनो मोरिया को जानती हैं, क्योंकि वो इंडस्ट्री में काफी सीनियर हैं।

बीजेपी नेता की हत्या करने वाले आतंकी उस्मान, सज्जाद बारामूला में ढेर: तीन आतंकियों में दो लश्कर के टॉप कमांडर

पिछले महीने जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में बीजेपी नेता शेख वसीम बारी के अलावा उनके पिता और भाई की हत्या करने वाले आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मौत के घाट उतार दिया है। बारामूला में सोमवार (अगस्त 17, 2020) को शुरू हुए मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकवादियों को ढेर किया है। इसमें लश्कर-ए-तैयबा के दो टॉप कमांडर्स सज्जाद उर्फ हैदर और उस्मान भी शामिल हैं।

आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने मंगलवार (अगस्त 18, 2020) को बताया कि सज्जाद हैदर ही बीजेपी नेताओं की हत्या का मुख्य साजिशकर्ता था, जबकि विदेशी आतंकी उस्मान ने वसीम बारी उनके पिता और भाई की हत्या की थी। इन दो आतंकियों का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता है। सज्जाद युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करता था और पुलिस, नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमलों में शामिल था।

गौरतलब है कि 8 जुलाई को 27 वर्षीय शेख वसीम बारी के अलावा, उनके पिता शेख बशीर अहमद और भाई शेख उमर की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हमला बांदीपोरा पुलिस स्टेशन के ठीक बाहर हुआ, जब तीनों अपनी दुकान पर थे। वसीम बारी बांदीपोरा जिले के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष भी थे। उमर भाजपा की जिला युवा इकाई का सदस्य थे, जबकि उनके पिता बशीर शेख भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे।

वसीम बारी की हत्या के बाद आतंकियों की तरफ से फरमान जारी किया गया था। जिसमें आतंकियों ने बीजेपी नेताओं को इस्तीफा देने के लिए कहा था। यह आतंकियों का खौफ ही था कि तब से अब तक करीब एक दर्जन बीजेपी नेता पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। हालाँकि, ज्यादातर ने इस्तीफे के पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है।

जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले में सुरक्षा बलों के अभियान में मंगलवार को तीसरा आतंकवादी भी मारा गया है। सोमवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के दो जवानों और एक पुलिसकर्मी के आतंकवादियों की गोलीबारी में वीरगति को प्राप्त होने के बाद यह अभियान शुरू किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि उत्तर कश्मीर जिले के क्रीरी इलाके में मुठभेड़ में सोमवार को घायल हुए सेना के दो जवान भी वीरगति को प्राप्त हो गए हैं।

सुरक्षा बलों ने हमले के बाद आतंकवादियों का पीछा किया था और उनमें से दो को मार गिराया, जिनमें उत्तर कश्मीर में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक शीर्ष कमांडर सज्जाद हैदर भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि एक अन्य आतंकवादी को अभियान के दूसरे दिन मार गिराया गया। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल पर आतंकवादियों के पास से हथियार में गोलाबारूद सहित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। 

सीआरपीएफ के एक नाका दल पर हमला होने के शीघ्र बाद लश्कर आतंकवादियों के खिलाफ यह अभियान शुरू किया गया। इस हमले में बल के दो जवान और जम्मू-कश्मीर के एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) बलिदान हो गए। अधिकारियों ने बताया कि तलाश अभियान जारी है।

आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए IAF ने किए स्वदेशी फाइटर जेट तेजस पाक बॉर्डर पर तैनात

चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच भारतीय वायुसेना (IAF) ने पाकिस्तान सीमा के साथ पश्चिमी मोर्चे पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस तैनात किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन का सहयोग करते हुए पाकिस्तान, भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाने का प्रयास कर सकता है। ऐसे में उसे करार जवाब देने के लिए पाकिस्तान से लगने वाले पश्चिमी सीमा पर तेजस को तैनात किया गया है। तेजस भारत का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान है। वायु सेना ने इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से खरीदा है।

सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “एलसीए तेजस को भारतीय वायुसेना द्वारा पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान सीमा के करीब तैनात किया गया है, ताकि वहाँ से होने वाली किसी भी संभावित कार्रवाई पर कड़ी निगरानी रखी जा सके और उसका माकूल जवाब दिया जा सके।”

सूत्रों ने बताया कि दक्षिणी वायु कमान के तहत सुलूर से बाहर पहले तेजस स्क्वाड्रन ’45 स्क्वाड्रन (फ्लाइंग डैगर्स)’ को एक ऑपरेशनल भूमिका के तहत तैनात किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान स्वदेशी तेजस विमान की प्रशंसा की थी और कहा था कि ‘एलसीए मार्क-1 ए’ संस्करण को खरीदने का सौदा जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है। 

एक तरफ जहाँ तेजस लड़ाकू विमानों का पहला स्क्वॉड्रन इनिशियल ऑपरेशनल क्लियरेंस वर्जन का है, वहीं दूसरी तरफ दूसरा स्क्वॉड्रन (18 स्क्वॉड्रन) ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस वर्जन का है। इस स्क्वॉड्रन का एयर फोर्स चीफ एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने 27 मई को सुलुर एयरबेस पर ऑपरेशन शुरू किया था।

उम्मीद की जा रही है कि एयर फोर्स और रक्षा मंत्रालय इस साल के आखिर तक 83 ‘मार्क-1 ए’ एयरक्राफ्ट की डील को फाइनल कर लेंगी। सीमा पर चीन की आक्रामकता के बीच एयर फोर्स ने चीन के साथ-साथ पाकिस्तान सीमा पर भी अपने लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ाई है।

एयर फोर्स के अग्रिम मोर्चे पर स्थित एयरबेसों को वेस्टर्न और नॉर्दर्न फ्रंट की स्थितियों पर नजर रखने के लिए पूरी तरह सुसज्जित किया गया है। इन एयर बेसों से पिछले कुछ दिनों से रात हो या दिन लड़ाकू विमान आसमान में उड़ान भरते देखे जा सकते हैं।

फाइटर जेट तेजस की खासियत

तेजस हवा से हवा में और हवा से जमीन पर मिसाइल दाग सकता है। इसमें एंटीशिप मिसाइल, बम और रॉकेट भी लगाये जा सकते हैं। तेजस 42% कार्बन फाइबर, 43% एल्यूमीनियम एलॉय और टाइटेनियम से बनाया गया है। तेजस सिंगल सीटर पायलट फाइटर जेट है, लेकिन इसका ट्रेनर वेरिएंट 2 सीटर है। तेजस एक बार में 54 हजार फीट की ऊँचाई तक उड़ान भर सकता है।

तेजस 2222 किमी/घंटे की स्पीड से उड़ान भरने में सक्षम है। यह फाइटर जेट 3000 किमी तक एक बार में उड़ान भर सकता है. तेजस 43.4 फीट लंबा और 14.9 फीट ऊँचा है। सभी हथियारों के साथ तेजस का वजन 13,500 किलोग्राम है। हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें – डर्बी, पाइथन-5, आर-73, अस्त्र, असराम, मेटियोर तेजस में फिट किए जा सकते हैं।

वहीं, हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें – ब्रह्मोस-एनजी और डीआरडीओ एंटी-रेडिएशन मिसाइल और ब्रह्मोस-एनजी एंटी शिप मिसाइल भी इसमें फिट होते हैं। इसके अलावा इस पर लेजर गाइडेड बम, ग्लाइड बम और क्लस्टर वेपन लगाए जा सकते हैं।

PM Cares मामले में CM योगी ने राहुल पर साधा निशाना, कहा- अपरिपक्व, ओछी राजनीति के लिए दें जवाब

प्राइम मिनिस्टर्स सिटिजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमर्जेंसी सिचुएशंस (PM CARES) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका खारिज कर दी गई। याचिका खारिज होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पीएम केयर्स पर सवाल उठाना राहुल गाँधी की अपरिपक्वता का उदाहरण था। सुप्रीम कोर्ट ने बुद्धिजीवियों को आइना दिखा दिया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद योगी आदित्यनाथ ने एक के बाद एक दो ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “कोरोना महामारी में जनहित की सुरक्षा के दृष्टिगत पीएम नरेंद्र मोदी के नूतन प्रयास PM CARES का विशिष्ट योगदान रहा है। इस पर सवाल उठाना राहुल गाँधी की अपरिपक्वता का उदाहरण था। आज माननीय सुप्रीम कोर्ट ने PM CARES की महत्ता को वैधानिकता प्रदान कर दी। सत्यमेव जयते!”

इस ट्वीट के बाद योगी ने दूसरा ट्वीट किया और कहा कि राहुल गाँधी को अब जवाब देना होगा। योगी ने लिखा, “कोरोना काल में आमजन का सहारा बने PM CARES के संबंध में कुप्रचार कर रहे ‘स्वयंभू’ बुद्धिजीवियों को आज सुप्रीम कोर्ट ने आईना दिखा दिया। PM CARES जन संपत्ति है। जनहित में ही इसका उपयोग हो रहा है। ओछी राजनीति के लिए राहुल गाँधी और स्वयंभू बुद्धिजीवियों को जनता को जवाब देना होगा।”

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि शीर्ष कोर्ट के फैसले से पीएम केयर्स फंड को लेकर राहुल गाँधी के नापाक मंसूबों पर पानी फिर गया। जेपी नड्डा ने ट्वीट किया, “पीएम केयर्स पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने राहुल गाँधी और उनके भाड़े के आदमियों (रेंट-ए-कॉज बैंड) के कुटिल मंसूबों पर पानी फेर दिया है। यह दर्शाता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों के गलत इरादे और दुर्भावनापूर्ण प्रयासों के बावजूद सच्चाई सामने आती है।”

उन्होंने आरोप लगाया, “राहुल गाँधी के इस बारे में हल्ला मचाने को आम आदमी ने बार-बार खारिज किया है, जिन्होंने पीएम-केयर्स में भारी योगदान दिया है। शीर्ष कोर्ट ने भी अपना फैसला सुना दिया है, क्या राहुल और उनके रेंट-ए-कॉज कार्यकर्ता खुद में सुधार लाएँगे या आगे भी शर्मिदा होते रहेंगे।”

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, “गाँधी परिवार ने पीएमएनआरएफ को दशकों से व्यक्तिगत संपत्ति के रूप में संचालित किया। पीएमएनआरएफ से नागरिकों की मेहनत से अर्जित धन को अपने परिवार के ट्रस्टों को ट्रांसफर कर दिया है। देश बहुत अच्छी तरह से जानता है कि पीएम केयर्स फंड के खिलाफ अभियान कॉन्ग्रेस द्वारा अपने पापों को धोने का एक प्रयास है।”

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया, “सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अभियान चलाए जाने की उम्मीद कर सकते हैं, क्योंकि शीर्ष अदालत ने NDRF को पीएम केयर्स फंड के ट्रांसफर का आदेश देने से इनकार कर दिया है।” अमित मालवीय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि पीएम केयर्स फंड पब्लिक चैरिटेबल फंड की तरह ही है। इसे एनडीआरएफ को ट्रांसफर किए जाने की जरूरत नहीं है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (अगस्त 18, 2020) को पीएम केयर्स फंड में जमा पैसों को राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में ट्रांसफर करने की माँग ठुकरा दी। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये दोनों फंड अलग हैं। नवंबर 2019 में बनी योजना ही पर्याप्त है। अलग से योजना बनाने की जरूरत नहीं है।

नेताजी की पुण्यतिथि: अफवाह या सच? PM मोदी द्वारा कोई संदेश न दिया जाना क्या संदेश देता है?

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के नायक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु को ‘मनाने’ की जितनी दिलचस्पी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू में थी उतनी ही आज की कॉन्ग्रेस में भी मौजूद नजर आती है। इस वर्ष भी 18 अगस्त की तारीख आई लेकिन इस बात पर शायद ही किसी का ध्यान गया हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तथाकथित पुण्यतिथि पर किसी भी प्रकार का कोई संदेश जारी नहीं किया।

यह भी सम्भव है कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की कॉन्ग्रेस द्वारा घोषित पुण्यतिथि 18 अगस्त पर पीएम नरेंद्र मोदी का मौन कुछ संदेश देना चाहता हो। नेताजी की देहांत को लेकर अभी तक यही प्रचलित मत रहा है कि अगस्त 18, 1945 को विमान हादसे के शिकार हो गए थे।

नेताजी की पुण्यतिथि: अफवाह या सच?

आज जब केजरीवाल व कुछ अन्य नेता, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की पुण्यतिथि बता रहे हैं। कॉन्ग्रेस, जो एक दौर में INA के अस्तित्व तक को समर्थन नहीं दे सकी थी, वह अब नेताजी की पुण्यतिथि को लेकर हमेशा से ही कौतुहल में नजर आती है। लेकिन क्या नेताजी सच में आज की तारीख को दिवंगत हुए थे?

क्या नेताजी सुभाषचंद्र बोस का विमान फोरमोसा (अब ताइवान) में दुर्घटना का शिकार हो गया था और इसमें नेताजी मारे गए थे? या फिर वह बच गए थे और सर्बिया चले गए थे? या फिर ‘विमान हादसा’ महज एक जरिया था, उन्हें सुरक्षित निकल जाने देने के लिए? आइए जानते हैं इस कथित पुण्यतिथि के आसपास घूमती कहानियाँ, वे कहानियाँ, जो दंतकथा न होकर सम्बन्धित विषय पर इतिहासकारों एवं शोधकर्ताओं द्वारा किए गए शोध व साक्ष्य पर आधारित हैं।

प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते कुछ मोर्चों पर असफल होने के कारण चालीस हज़ार से भी अधिक पराक्रमी सैनिकों वाली आज़ाद हिन्द फ़ौज को नेताजी विखंडित कर ही चुके थे और कुछ समय बाद हुए द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमरीका ने ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ लड़ने वाली आज़ाद हिन्द फौज के सहयोगी मित्र जापान के दो शहरों में सन 1945 दिनांक 6 व 9 को परमाणु बम गिरा दिए।

हफ्ते भर के भीतर जापान आत्मसर्पण कर चुका था, इसलिए नेताजी के सामने दुविधा आज़ाद हिन्द फौज के सैनिकों का ध्यान रखते हुए आत्मसमर्पण कराने को लेकर थी कि उनका समर्पण जापान के साथ सामूहिक होगा या व्यक्तिगत!

इसी से संबंधित वार्ता करने हेतु सुभाष सिंगापुर से बैंकाक और वहाँ से टोक्यो में जापान के उच्च अधिकारीयों से भेंट कार्यक्रम निर्धारित कर 15 अगस्त को निकल पड़े। 16 को बैंकाक, फिर 17 अगस्त को आज़ाद हिन्द फ़ौज के अपने कुछ साथियों समेत वियतनाम के शहर साइगोन पहुँचे।

17 अगस्त की शाम को फिर उनके जहाज ने उड़ान भरी और अगले दिन तायपेई पहुँचकर रुके, जिसके बाद ये माना जाता है कि उड़ान भरते ही उनका जहाज क्रैश कर गया और उनके थर्ड डिग्री तक जल जाने के कारण उनकी मौत हो गयी।

उनके साथ मौजूद उनके करीबी हबीब उर रहमान ने कथित तौर पर उनका क्रियाकर्म करवाया और अस्थियाँ जापानी प्रशासन को सौंप दी, जिन्हें आज भी जापान के रैंकोजी मंदिर में रखा गया है और अस्थियों पर भी विवाद जारी है, शाह नवाज जाँच कमिटी के अनुसार यह भी जिक्र आता है कि वह अस्थियाँ जापानी सिपाही इचिरो ओकरा के नाम से रखी गईं।

इसके अलावा, मुखर्जी आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से इस बात को नकार दिया गया था कि नेताजी की मृत्यु विमान हादसे में हुई थी। हालाँकि, तब सरकार ने मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट स्वीकार नहीं की थी।

मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट का हिस्सा

अगर प्लेन क्रैश नहीं हुआ तो नेताजी गए कहाँ ?

स्वभाविक सा प्रश्न है कि यदि प्लेन क्रैश में नेताजी कि मृत्यु नहीं हुई तो वे गए कहाँ? नेताजी की प्लेन क्रैश घटना के ग्यारह दिन बाद 29 अगस्त को नेताजी पर कॉंग्रेस द्वारा जारी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अमरीकी सेना को कवर करने वाले शिकागो ट्रिब्यून के पत्रकार अल्फ्रेड वैग ने जवाहर लाल नेहरू को प्रेस ब्रीफिंग के बीच में टोका और बताया कि उनके साथियों ने चार दिन पहले अर्थात 25 अगस्त को नेताजी को सागौन शहर में देखा (अख़बार कि कतरन संलग्न है)।

इस क्षण से आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोस की मृत्यु को लेकर संदेह उभरने शुरू हो गए और स्वंत्रता के बाद भी भारत की सत्ता पर आसीन सत्ताधारियों व अंग्रेज़ों के बीच यह तय हुआ कि बोस के पाए जाने पर उन्हें जीवित या मृत, अलाइड शक्तियों के हवाले कर दिया जाना चाहिए क्योंकि जापानियों के सहयोग से अंग्रेज़ों के खिलाफ भारत की स्वतन्त्रता के लिए लड़ने वाले बोस ‘वॉर क्रिमिनल’ (युद्ध के अपराधी) थे।

इस तथ्य को पत्थर को वालेट साबित करने की क्षमता रखने वाले ऑल्टन्यूज़ जैसे ही तमाम कॉन्ग्रेस पोषित संस्थान सदियों से प्रयास करते आए हैं और इसे विवादित साबित करने के अनेकों प्रयास भी किए और इस तथ्य को विवादित या फिर संदेहास्पद बनाने का कारनामा किया है।

हारकर भी अपने संघर्ष का लोहा मनवाने वाली आज़ाद हिन्द फौज और नैवेल म्यूटिनी के बारे में इस श्रृंखला की अगली कड़ी में।

शेखर गुप्ता के ‘दी प्रिंट’ ने फैलाया झूठ, स्वास्थ्य मंत्रालय ने सही करते हुए कहा: सत्य से बहुत दूर है यह खबर

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शेखर गुप्ता की वेबसाइट ‘दी प्रिंट’ द्वारा प्रकाशित एक फर्जी, मनगढ़ंत रिपोर्ट को फेक और खुराफात से भरा हुआ बताते हुए कहा है कि यह रिपोर्ट सत्य से बहुत दूर है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (15 अगस्त) को कहा कि लड़कियों की शादी की उपयुक्त उम्र क्या होनी चाहिए, इस बारे में सरकार विचार कर रही है और इस सिलसिले में एक समिति भी गठित की गई है। जिसने शेखर गुप्ता के दी प्रिंट को फेक और मनगढ़ंत खबर प्रकाशित करने का मौका दे दिया।

दी प्रिंट ने आज मंगलवार (अगस्त 18, 2020) को एक रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए दावा किया कि महिलाओं की विवाह की उम्र को लेकर मंत्रालय और अधिकारियों के बीच विवाद है और इसके साथ ही कुछ बेहद काल्पनिक तथ्यों को मंत्रालय के हवाले से रख दिया है।

लेकिन मंत्रालय ने शेखर गुप्ता की वेबसाइट दी प्रिंट के इस काल्पनिक दावे का खंडन किया है और स्पष्ट किया है कि वे वास्तव में इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं, जिसे लेकर शेखर गुप्ता के पोर्टल ने फर्जी खबर प्रकाशित की है। मंत्रालय ने लड़कियों के लिए शादी की उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन करने का अपना कारण भी बताया।

हालाँकि, ‘दी प्रिंट’ ने बेहद चालाकी से इसी रिपोर्ट में दावा किया है कि उन्होंने इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रवक्ता मनीषा वर्मा से बात करने की कोशिश की लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक उनसे बात नहीं हो पाई। लेकिन, शायद इसका मतलब यह नहीं था कि यदि किसी मंत्रालय से आधिकारिक बयान मिलने में देरी हो जाए तो काल्पनिक खबर को बेबुनियाद आधारों पर ‘सूत्रों के हवाले से’ प्रकाशित कर दिया जाए।

‘दी प्रिंट’ ने काल्पनिक सूत्रों के हवाले से इस रिपोर्ट में कहा है कि पिछले साल तक सरकार पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता लाने के लिए पुरुषों की शादी की उम्र को 21 की वर्तमान सीमा से 18 तक कम करने की ओर जोर दे रही थी। इसके साथ ही दी प्रिंट के ‘दूसरे सूत्रों’ ने उन्हें बताया कि अधिकारियों ने सरकार को यही करने की सलाह देते हुए कहा कि महिलाओं की उम्र बढाने की जगह पुरुषों की उम्रसीमा बढ़ने पर विचार करना चाहिए।

दी प्रिंट ने इस रिपोर्ट में कहा है कि अधिकारियों ने तर्क देते हुए उन्हें बताया कि लड़कियाँ 21 से पहले यौन रूप से सक्रिय हो जाती हैं और यदि सरकार शादी की उम्र बढ़ाती है, तो उनमें से कई अपने प्रजनन या यौन अधिकारों के लिए औपचारिक स्वास्थ्य प्रणाली का लाभ नहीं उठा सकेंगी।

‘सूत्रों’ द्वारा दी प्रिंट के पत्रकारों को दिए गए एक अन्य बयान में अधिकारियों ने कहा कि यदि लड़कियों के विवाह की उम्र 18 से 21 कर दी जाती है तो इससे बाल विवाह के भी केस सामने आएँगे।

प्रिंट ने कहा है कि अधिकारियों ने बताया है कि ‘अभी बाल विवाह मान्य नहीं हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में कहा था कि नाबालिग पत्नी के साथ सेक्स करना बलात्कार है – इसलिए, हम ऐसी स्थिति में हैं, जहाँ 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ शादी अवैध नहीं है, लेकिन उसके साथ सेक्स करना अपराध है।

मंत्रालय ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए और दी प्रिंट की इस रिपोर्ट को फेक बताते हुए कमेटी को भेजा गए अपने नजरिए को रखा है, जिसमें मंत्रालय ने कहा है कि लड़कियों की विवाह की उम्र बढ़ाने के पीछे का मकसद उन्हें आर्थिक, वैचारिक और मानसिक रूप से परिपक्व होने देना है। मंत्रालय ने कहा है कि लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाना उन्हें अपने हर प्रकार के फैसले लेने का अधिकार भी देगा।

ख़ास बात यह है कि दी प्रिंट ने इस स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा फेक ठहराई गई इस रिपोर्ट के बीचों-बीच ‘गुड जर्नलिज्म मैटर्स’ का हवाला देते हुए अच्छी पत्रकारिता को जिन्दा रखने के लिए लोगों से उन्हें दान देने की भी अपील की है –

हर रात अपनी माँ को जगत जननी के नाम से खत लिखते थे पीएम मोदी: ‘Letters to Mother’ के रूप में प्रकाशित हुए वो पत्र

अपने परिवार से सामाजिक नाता तोड़ने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संघ के एक पुत्र बन कर रहे हैं। इसलिए अपने युवावस्था में, जब वे पत्र लिखने के लिए बैठते थे, तो वो इसे ‘जगत जननी’ या ‘देवी माँ’ को संबोधित करते थे।

वह शख्स, जिसे आज देश का सबसे ताकतवर पद हासिल है, उनका बचपन काफी दुष्कर रहा है। 17 साल की उम्र में पीएम मोदी घर संसार के बंधनों से मुक्त होकर हिमालय पर साधना के लिए चले गए थे। मोदी ने एक बार इसको लेकर कहा था, “मैं अनिर्दिष्ट और अस्पष्ट था। मुझे नहीं पता था कि मैं कहाँ जाना चाहता था, मैं क्या करना चाहता था और क्यों करना चाहता था। लेकिन मुझे इतना पता था कि मैं कुछ करना चाहता था।”

प्रधानमंत्री 1971 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हुए। माँ के प्रति पीएम मोदी की श्रद्धा, प्रेम और आस्था के बारे में पूरी दुनिया जानती है। जून माह में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की रिलीज हुई किताब ‘Letters to Mother’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देवी माँ के प्रति आस्था से रूबरू करवाती है। फिल्म समीक्षक भावना सोमाया मे इस किताब का ट्रांसलेशन किया है। यह 2014 में मूल गुजराती पुस्तक ‘Saakshi Bhaav’ का अंग्रेजी अनुवाद है। हार्परकॉलिंस इंडिया ने इस पुस्तक को प्रकाशित किया है। 

प्रधानमंत्री मोदी युवा काल में रोज अपनी माँ को जगत जननी के नाम से पत्र लिखकर सोते थे। प्रधानमंत्री मोदी रोज अपनी सोच और भावनाओं को डायरी के पत्रों में उकेरते थे। उन्हें प्रतिदिन पत्र लिखने की आदत हो गई थी। वे इन पत्रों को गुजराती भाषा में लिखते थे। 

युवा नरेंद्र मोदी जो डायरी लिखते थे, हर 6-8 महीनों में उन पन्नों को जला देते थे। एक दिन एक प्रचारक ने उसे ऐसा करते हुए देखा और उन्हें ऐसा करने से मना किया, बाद में इन पत्रों ने एक पुस्तक का रूप ले लिया। यह 1986 की उनकी लिखी डायरी के बचे हुए पन्ने हैं। 

मोदी ने किताब के बारे में कहा है, “यह साहित्यिक लेखन में एक प्रयास नहीं है, इस पुस्तक में पेश किए गए अंश मेरे अवलोकन और कभी-कभी अपरिवर्तित विचारों के प्रतिबिंब हैं, जो बिना किसी परिवर्तन के व्यक्त किए गए हैं। मैं लेखक नहीं हूँ, हम में से अधिकांश नहीं हैं, लेकिन हर कोई अभिव्यक्ति चाहता है, और जब इसे जाहिर करने का आग्रह प्रबल हो जाता है, तो कलम और कागज के अलावा कोई विकल्प नहीं होता, जरूरी नहीं कि लिखना हो लेकिन आत्मचिंतन करने और दिल व दिमाग में क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है, इसके लिए करना होता है।”

2017 में पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त करने वाली और सिनेमा पर कई किताबें लिख चुकीं भावना सोमाया ने कहा कि मेरे विचार से, एक लेखक के रूप में नरेंद्र मोदी की ताकत उनका भावनात्मक हिस्सा है।

पुस्तक की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार हैं, 

“माँ मुझे शंकाओं से मुक्त कर दो,

निराशाओं

भय और चिंताओं से

विजय और पराजयों से

नुकसान से, संपत्ति से

मुझे सदा के लिए मुक्त कर दो।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि जब मैं 36 साल का था तब जगत जननी माँ के साथ मेरे संवाद का एक संकलन है साक्षी भाव। यह पाठक को मेरे साथ जोड़ता है और पाठक को न केवल समाचार पत्रों के द्वारा, बल्कि मेरे शब्दों के द्वारा मुझे जानने में सक्षम करता है।

अक्षय कुमार ने असम बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दिए ₹1 करोड़: CM सोनोवाल ने दिया धन्यवाद

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार एक बार फिर अपनी दरियादिली के कारण चर्चा में है। इस बार उन्होंने असम में आई बाढ़ से पीड़ित लोगों की मदद के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है। यह जानकारी स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने अपने ट्विटर पर ट्वीट करके दी है।

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने अपने ट्वीट में अक्षय कुमार का धन्यवाद करते हुए लिखा, “असम बाढ़ में राहत की दिशा में 1 करोड़ के अपने योगदान के लिए अक्षय कुमार जी का आभार। आपने हमेशा संकट के समय सहानुभूति और समर्थन दिया है। असम के एक सच्चे दोस्त के रूप में, भगवान आपको वैश्विक क्षेत्र पर अपना प्रताप ले जाने के लिए आशीर्वाद दें।”

बता दें इससे पहले अक्षय कुमार ने बिहार में आई बाढ़ के दौरान भी राहत कोष में 1 करोड़ रुपए दिए थे। उन्होंने इस मदद को पहुँचाने से पहले दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से बात की थी और मदद का आश्वासन दिया था। इस बातचीत के बाद उन्होंने बिहार और असम को 1-1 करोड़ रुपए दान दिए।

उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड कलाकार अक्षय कुमार अक्सर मुश्किल घड़ी में प्रभावित क्षेत्रों की मदद के लिए आगे बढ़कर आते हैं। उन्होंने कोरोना महामारी के समय में भी आगे बढ़कर 25 करोड़ रुपए के दान का ऐलान किया था।

वहीं मुंबई पुलिस फाउंडेशन के लिए उन्होंने 2 करोड़ रुपए और बीएमसी के कोरोना प्रयासों के लिए 3 करोड़ रुपए की मदद का भी ऐलान किया था। अम्फान चक्रवात के समय भी उन्होंने 1 करोड़ रुपए दिए थे और आज जब देश के कई राज्य बाढ़ से प्रभावित हैं। हर जगह पानी घुस गया है तब भी अक्षय कुमार आगे आए हैं।

एक जानकारी के अनुसार, बिहार में बाढ़ से प्रभावित होने वाली कुल संख्या 75 लाख लोगों की है। वहीं असम में 14 हजार लोग इससे जूझ रहे हैं।