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SC ने CBI को सौंपी सुशांत मामले की जाँच, कहा- मुंबई पुलिस ने नहीं की उपयुक्त कार्रवाई, न हुई एक भी FIR दर्ज

सुप्रीम कोर्ट ने आज (अगस्त 19, 2020) सुशांत सिंह की मौत के मामले की जाँच का सारा दारोमदार सीबीआई (CBI) को सौंप दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पटना में दर्ज एफआईआर को सही माना। इसके साथ ही मुंबई पुलिस को लेकर कहा कि उन्होंने इस मामले में FIR नहीं दायर की और न अपनी जाँच शुरू की।

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए मुंबई पुलिस को लेकर कुछ महत्तवपूर्ण बातें कहीं। कोर्ट ने कहा, “वर्तमान मामले में, मुंबई पुलिस ने बिना किसी FIR किए धारा 174 के दायरे को बढ़ाने का प्रयास किया है और इसलिए, जैसा कि प्रतीत होता है, मुंबई पुलिस द्वारा संज्ञेय अपराध के लिए कोई जाँच नहीं की जा रही है। वहाँ अब भी FIR दर्ज होना बाकी है और न ही उन्होंने सीआरपीसी की धारा 175 (2) के तहत इस मामले में दृढ संकल्प दिखाया।”

कोर्ट ने कहा, हितधारकों द्वारा निष्पक्ष जाँच पर आशंका को देखते हुए, इस न्यायालय को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि सत्य की खोज एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की जाए, जो दोनों राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रित ना हो। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जाँच और जाँच प्राधिकरण की विश्वसनीयता को संरक्षित किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने दो अलग-अलग अदालतों में मामले के क्षेत्राधिकार पर आगामी संभावनाओं को मद्देनजर रखते हुए ये भी कहा कि ये मामला सीआरपीसी की धारा 186 व अन्य उपयुक्त धाराओं के तहत हल किया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि सभी बातों से ये मालूम होता है कि मुंबई पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 174 के तहत जो जाँच की, वह निश्चित कारण के लिए बहुत सीमित थी। इस केस को अपराध की धारा 157 के तहत नहीं जाँचा गया।

अदालत ने सुशांत के पिता की शिकायत को ध्यान में रखा और कहा कि शिकायतकर्ता ने कहा है कि वह पटना से अपने बेटे से संपर्क करने की कोशिश करते थे लेकिन आरोपितों ने कभी उनके इस प्रयास को पूरा नहीं होने दिया। जिसके कारण पिता-पुत्र के बीच बात नहीं हो पाई और उनके पास से अपने बेटे को बचाने की संभावना समाप्त हो गई।

फैसला सुनाते हुए अदालत ने विशेष रूप से कहा कि इस मामले के संज्ञान में आने के बाद धारा 154 के तहत एफआईआर होना अनिवार्य थी। पूर्व में हुए मामले बताते हैं कि जाँच के शुरुआती समय में ऐसा नहीं कहा जा सकता कि संबंद्ध थाने के बाद मामले में जाँच के प्रादेशिक क्षेत्राधिकार नहीं थे।

सुप्रीम कोर्ट ने केस में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा, “उपरोक्त प्रावधान यह स्पष्ट करता है कि सुप्रीम कोर्ट एक योग्य मामले में, न्याय प्रदान करने के लिए अनुच्छेद 142 शक्तियों को लागू कर सकता है। इस मामले में अजीब परिस्थितियों के लिए आवश्यक है कि इस मामले में पूर्ण न्याय किया जाए।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि मुंबई पुलिस ने इस मामले में एक्सिडेंटल मौत की रिपोर्ट को दर्ज किया था। इसमें सीमित जाँच शक्ति थी। अब चूँकि बिहार पुलिस ने एक पूरी एफआईआर दर्ज की है, जिसे पहले से ही सीबीआई को भेज दिया गया है। ऐसे में केंद्रीय एजेंसी को मामले की जाँच करनी चाहिए।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी सुनिश्चित किया कि राजपूत की हत्या के पीछे की जाँच में सीबीआई का एकमात्र अधिकार होने के बारे में किसी प्रकार का कोई भ्रम न हो और न ही कोई भी अन्य राज्य पुलिस इसमें हस्तक्षेप करे।

CBI सुशांत के मामले में न केवल एफआईआर दर्ज करने बल्कि राजपूत की मौत के मामले से जुड़ी किसी अन्य एफआईआर की जाँच करने का भी हक रखेगी। साथ ही सीबीआई को अपनी जाँच के लिए राज्य सरकारों की अनुमति की जरूरत नहीं होगी, वह जब चाहें, जिससे चाहें पूछताछ कर सकते हैं। सबूत इकट्ठा करने के लिए महाराष्ट्र सरकार से परमिशन नहीं लेनी होगी।

जिस पोते को शरद पवार ने कहा था ‘अपरिपक्व’… सुशांत केस में CBI जाँच पर उसने लिखा – ‘सत्यमेव जयते’

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच सीबीआई (CBI) को सौंपे जाने पर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के पोते और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने खुशी जताई है।

सुशांत केस में आज सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद पार्थ पवार ने ट्वीट कर लिखा, “सत्यमेव जयत।” बता दें कि सुशांत केस की जाँच को सीबीआई को सौंपे जाने की माँग करने वालों में से एक पार्थ पवार भी थे। उन्होंने पार्टी लाइन से अलग होकर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख को इसके लिए पत्र भी लिखा था। इस वजह से वो शिवसेना के लोगों के निशाने पर भी थे।

यही नहीं पार्थ की इस माँग पर शरद पवार भी खुश नजर नहीं आए थे, उन्होंने सार्वजनिक रूप से उन्हें ‘अपरिपक्व’ कह डाला था, जिसके बाद खबर आई थी पार्थ को लेकर एनसीपी और पवार के घर में क्लेश उत्पन्न हो गया है, फिलहाल आज एक बार फिर से पार्थ ने सुशांत केस पर प्रतिक्रिया दी है, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि पवार अब क्या रिएक्शन देते हैं।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत केस में शुरुआत से ही मुंबई पुलिस की जाँच पर सवाल उठ रहे हैं। सुशांत के परिवार ने भी मुंबई पुलिस की जाँच पर भरोसा न करते हुए रिया चक्रवती के खिलाफ बिहार पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस और बिहार पुलिस भी आमने-सामने आ गईं। मुंबई पुलिस के दो महीने तक केस में एफआईआर दर्ज न करने पर सवाल उठे।

इस पूरे प्रकरण में महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई पुलिस की जाँच पर भरोसा जताया और साथ ही केस को सीबीआई में ट्रांसफर करने की बात को राजनीति करार दिया। महाराष्ट्र सरकार ने सुशांत केस में राजनीति के पीछे बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव का हवाला दिया।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र सरकार सीबीआई को सुशांत के मामले की जाँच को सौंपे जाने का विरोध कर रही थी। महाराष्ट्र सरकार की दलील थी कि मुंबई पुलिस ही मामले की जाँच करे क्योंकि वो इस मामले में 56 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है।

उद्धव सरकार की तरफ से ये भी कहा गया था कि सुशांत की मौत का मामला मुंबई पुलिस के अधिकार क्षेत्र का है क्योंकि घटना मुंबई में हुई और पीड़ित, आरोपित व गवाह सभी मुंबई के हैं।

फैसला आने के बाद संजय राउत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जो भी सरकार में हैं, वो कानून जानते हैं। मुंबई पुलिस कमिशनर और एडवोकेट जनरल इस पर बात कर सकते हैं। इस पर मेरे द्वारा टिप्‍पणी करना उचित नहीं होगा।” 

वहीं महाराष्ट्र सरकार पर लग रहे आरोपों पर उन्‍होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुना दिया है। इस पर राजनीतिक बयानबाजी ठीक नहीं है। हमारे राज्‍य की न्‍याय व्‍यवस्‍था देश में बेहतर व्‍यवस्‍थाओं में से एक है। यहां सत्य और न्याय की हमेशा जीत होती है। कानून के ऊपर कोई नहीं है। सबको न्‍याय देना एक मानदंड है। हमारे राज्य की परपंरा है कि सबको न्याय मिले।”

शिवसेना नेता संजय राउत ने इससे पहले अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच सीबीआई को स्थानांतरित किए जाने को ‘गैरकानूनी’ करार दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि राजपूत के परिवार समेत सभी लोगों को कुछ समय चुप रहना चाहिए और मुंबई पुलिस को अभिनेता की मौत के मामले की अपनी जाँच पूरी करने देनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि नीतीश सरकार ने केस की जो सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी वो सही थी। महाराष्ट्र सरकार को अब जांच में सहयोग करना होगा। मुंबई पुलिस को इस मामले के सारे सबूत सीबीआई को सौंपने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि बिहार सरकार को इस मामले में जाँच का पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पटना में जो एफआईआर दर्ज की गई है वो कानून सम्मत है।

पाकिस्तान के लोकतंत्र को कहा- सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डेमोक्रेसी: मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट के सदस्य का वीडियो वायरल

भारत में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में भी वंशवादी राजनीति को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जा रहा है। पाकिस्तान में बढ़ते वंशवादी राजनीति के खतरे को उजागर करते हुए, वहाँ के एक वरिष्ठ सीनेट सदस्य ने हाल ही में देश की राजनीतिक प्रणाली को ‘सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डेमोक्रेसी’ और एक आनुवंशिक रूप से विरासत में मिला लोकतंत्र कहते हुए तीखी टिप्पणी की।

मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के वरिष्ठ सीनेट सदस्य मुहम्मद अली सैफ ने देश में प्रचलित वंशवादी राजनीति पर कटाक्ष करते हुए सीनेट में कहा कि पाकिस्तान की ऐसी व्यवस्था को लोकतंत्र कहना शर्मनाक है।

इंटरनेट पर वायरल हुए वीडियो में आप सुन सकते है कि एमक्यूएम (MQM) नेता सैफ पाकिस्तान के स्वघोषित लोकतंत्र को ‘सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डेमोक्रेसी’ और आनुवंशिक रूप से विरासत में मिला लोकतंत्र’ कहते हुए टिप्पणी करते है।

सीनेट मेंबर ने कहा, “पाकिस्तान में जम्हूरियत (लोकतंत्र) किसी की बेटी, किसी का बेटा है। यह शर्मनाक है कि लोकतंत्र के नाम पर, इस तरह के घृणित और शर्मनाक भाई-भतीजावाद को यहाँ चलाया जा रहा है।”

मोहम्मद अली सैफ ने आगे कहा, “मुझे शर्म आती है जब मैं डेमोक्रेसी के बारे में बोलता हूँ और लोकतंत्र समर्थक नारे यहाँ सुनता हूँ। यह हमारे लोकतंत्र की स्थिति है। ‘जेनेटिकली इनहेरिटेड डेमोक्रेसी’। ‘सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डेमोक्रेसी’। अगर यह हमारा लोकतंत्र है, तो मैं इस पर एक बार नहीं, बल्कि तीन बार शर्मिंदा होना चाहूँगा।”

बता दें अभी यह निश्चित नहीं है कि, एमक्यूएम नेता मुहम्मद अली सैफ ने ऐसी टिप्पणी कब की थी। हालाँकि, इस वीडियो में सैफ और अन्य सदस्यों को मास्क पहने देखा जा सकता है। जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह हालही का वीडियो है।

सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सैफ द्वारा दिए गए बयानों को यूजर सही बता रहे है। सोशल मीडिया यूज़र्स पाकिस्तान की वंशवादी राजनीति के मुद्दे पर बोलने के लिए एमक्यूएम नेता का समर्थन भी कर रहे है।

‘राम नहीं अल्लाह बोलो’ वाले अमानतुल्लाह खान के ‘भाई’ ने की महिला से बदसलूकी, गाली-गलौच: FIR दर्ज

आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान के करीबी व पार्टी कार्यकर्ता मिन्नतुल्लाह खान के ख़िलाफ़ एक लड़की ने ओखला थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। इस शिकायत में लड़की ने AAP कार्यकर्ता पर उसके साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया है।

पीड़ित लड़की ने FIR में बताया है कि मिन्नतुल्लाह खान ने उसके साथ उस समय बदसलूकी की, जब वह अपनी बहन को लेकर ESIC अस्पताल गई थी। FIR के मुताबिक, पीड़िता का कहना है कि मिन्नतुल्लाह खान ने उसे 17 अगस्त को कई बार फोन किया था। लेकिन वह उसका फोन नहीं उठा पाई और जब फोन उठाया तो मिन्नतुल्लाह खान उसे गालियाँ देने लगा।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने फोन पर ही मिन्नतुल्लाह को यह जानकारी दी कि वह अपनी बहन को लेकर ESIC अस्पताल में आई हुई है, जिसे जानकर वह भी अस्पताल के बाहर आ गया और सभी लोगों के सामने गाली-गलौच करने लगा।

मिन्नतुल्लाह का बर्ताव देखकर लड़की ने 100 नंबर पर कॉल किया। जिसके बाद पीसीआर आई और उसको हिरासत में लिया। बहन का इलाज कराके पीड़िता भी थाने गई और  शिकायत दर्ज करवाई। साथ ही मामले में उचित कार्रवाई की माँग की। इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा 354 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

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एफआईआर में शिकायत का हिस्सा

मिन्नतुल्लाह खान के ख़िलाफ़ हुई इस एफआईआर के संबंध में सुदर्शन वाहिनी के उपाध्यक्ष सागर मलिक ने हमें बताया कि कुछ समय पहले भी मिन्नतुल्लाह खान का कोई ऐसा विवाद हुआ था और तब भी इसी महिला ने उसके खिलाफ़ शिकायत की थी।

बता दें कि ऑपइंडिया ने इस संबंध में पुलिस कार्रवाई जानने के लिए जाँच अधिकारी को संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन कई कोशिशों के बावजूद हमारी उनसे बात नहीं हो पाई। किंतु मामले में लगातार नजर बनाए रखने वाले सागर का कहना है कि इस केस में मिन्नतुल्लाह खान को पकड़ा गया और गैर जमानती धाराओं में केस होने के कारण उसे कुछ समय में छोड़ भी दिया गया।

मिन्नतुल्लाह खान पर एक महीने में दूसरा केस

उल्लेखनीय है कि पिछले एक महीने में मिन्नतुल्लाह खान के खिलाफ़ ये दूसरा मामला दर्ज हुआ है। इससे पहले 5 अगस्त के दिन भूमिपूजन के बाद एक हिंदू परिवार ने आरोप लगाया था कि मिन्नतुल्लाह खान ने 30-40 लोगों की भीड़ के साथ उनके ऊपर हमला किया और घर की महिलाओं से बदसलूकी की।

इस घटना में हिंदू परिवार का यह भी कहना था कि मिन्नतुल्लाह खान के घर से कुछ बच्चों ने पहले उनके बच्चों को राम-राम की जगह अल्लाह-अल्लाह बोलने को कहा, जिसके कारण पूरा विवाद शुरू हुआ। बाद में मिन्नतुल्लाह भीड़ के साथ आया और उनके घर में पत्थरबाजी की।

कालिंदी कुंज के मदन खादर में हुए इस केस में मिन्नतुल्लाह खान की ओर से भी मामला दर्ज हुआ था। जिसमें खान ने हिंदू परिवार के एक शख्स पर आरोप मढ़ा था कि उसने उन पर तलवार से हमला किया और मारने की कोशिश की।

इसके बाद इस केस में हिंदू पक्ष की ओर से 3 लोगों को जेल में डाला गया। 11 अगस्त को काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने हिंदू पक्ष की एफआईआर भी दर्ज की थी। हमने इस केस पर विस्तृत रिपोर्ट की थी। आगे की जानकारी आने उस बारे में भी सूचित करेंगे।

आम आदमी पार्टी से जुडे हैं मिन्नतुल्लाह खान

मिन्नतुल्लाह खान को लेकर ये कहा जाता है कि वह आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं और अमानतुल्लाह के बेहद करीबी हैं। पिछले केस में भी पीड़ित पक्ष ने उन पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वह खुद को अमानतुल्लाह खान का दाहिना हाथ बताता है और इस बार की एफआईआर में भी ये उल्लेख है कि लड़की ने कहा है कि मिन्नतुल्लाह खान अपने आप को अमानतुल्लाह खान का भाई बताता है।

इन पीड़ितों के दावों को यदि दरकिनार भी किया जाए तो भी पार्टी से जुड़े होने और अमानतुल्लाह खान के करीबी होने के सबूत खान की फेसबुक वॉल से मिलते हैं। जहाँ साफ लिखा है कि वह आम आदमी पार्टी में काम करते हैं।

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इसके अलावा उनकी कई तस्वीरें भी दिल्ली सीएम और ओखला विधायक के साथ हैं। कुछ औपचारिक मौकों पर और कुछ अनौपचारिक अवसरों पर। वह पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों और अमानतुल्लाह के कार्यों का भी अपनी फेसबुक पर प्रचार करते हैं।

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सैफ अली खान की बेटी.. लिटरली.. सैफ की बेटी मेरे पास चल कर आई और हाथ जोड़ कर कहा- काम दे दो: रोहित शेट्टी का Video

फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने शेयर किया है, जिसमें वो अभिनेत्री सारा अली खान के बारे में बातें करते दिख रहे हैं। रोहित शेट्टी का वीडियो इसीलिए भी चर्चा में है क्योंकि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद नेपोटिज्म को लेकर अक्सर चर्चा होते रहती है और रहित शेट्टी ने इसमें सारा अली खान को ऐसे प्रस्तुत किया है, जैसे वो बाकी कलाकारों से काफी ऊपर का दर्जा रखती हों।

रोहित शेट्टी ने कहा कि सारा अली खान अब स्टार बन गई हैं, इसीलिए वो अब इस बारे में बात कर सकते हैं कि उन्होंने कैसे उनके साथ काम किया। शेट्टी ने कहा कि सारा ने उनके सामने आकर हाथ जोड़े और कहा कि सर, मुझे काम दे दो। हाथ जोड़ते हुए रोहित शेट्टी ने दिखाया कि कैसे सारा ने उनके सामने हाथ जोड़े थे और कहा कि इसने ‘लिटरली’ ऐसे कर के उनसे फिल्म में काम की माँग की थी

इसके बाद ‘सिंघम’ और ‘गोलमाल’ सीरीज के फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी ने कहा कि वो सैफ अली खान की बेटी हैं। उन्होंने कहा कि अमृता सिंह और सैफ अली खान की बेटी का अकेले चल कर उनके दफ्तर में आना और डायरेक्टर के सामने बैठ कर हाथ जोड़ के कहना कि ‘मुझे काम दे दो प्लीज’, इससे उन्हें रोना आ गया। बकौल रोहित शेट्टी, इसके बाद उन्होंने सारा अली खान से कहा कि तू पिक्चर कर ले।

बता दें कि शेट्टी ने सारा को रणवीर सिंह और सोनू सूद अभिनीत पुलिस कॉप फिल्म ‘सिम्बा’ में निर्देशित किया था। इसी दौरान वो लोग फिल्म के प्रमोशन के लिए ‘द कपिल शर्मा शो’ में आए थे, जहाँ उन्होंने ये बातें कही। उनकी बातें सुन कर नवजोत सिंह सिद्धू भी इम्प्रेस नज़र आए और उन्होंने कहा- ‘क्या बात है!‘। इसके बाद वहाँ शो में उपस्थित ऑडियंस ने ताली बजा कर दोनों को सराहा।

‘पोल खुलने के डर से कुछ लोग छटपटा रहे हैं… रिया चक्रवर्ती की औकात नहीं है…’ – DGP गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने सुशांत सिंह राजपूत मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई जाँच का आदेश दिए जाने के बाद ख़ुशी जताते हुए कहा कि बिहार पुलिस सही निकली। बता दें कि बिहार पुलिस की एफआइआर पर ही सीबीआई ने मामला दर्ज किया। डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय इस पर काफ़ी मुखर रहे थे। उन्होंने इसे अन्याय पर न्याय की जीत बताया और कहा कि ये 130 करोड़ देशवासियों की जीत है, सत्य की विजय है।

भाव-विह्वल नज़र आ रहे बिहार पुलिस के मुखिया ने कहा कि माननीय सु्प्रीम कोर्ट का फैसला सर्वमान्य होगा। उन्होंने कहा, “आज तक मैंने सुना था कि न्यायाधीश भगवान का रूप होते हैं, आज मैंने देख भी लिया। मैं न्यायाधीश को सैल्यूट नहीं बल्कि इस फैसले के लिए साष्टांग प्रणाम करता हूँ।” साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि कैसे गलत तरीके से मुंबई में बिहार पुलिस के विजय तिवारी को क्वारंटाइन कर दिया गया था।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि देशवासियों के मन में इस फैसले से सर्वोच्च न्यायालय ने लोकतंत्र के प्रति आस्था मजबूत की है। शिवसेना के संजय राउत द्वारा दिए गए तरह-तरह के बयानों पर डीजीपी ने कहा कि किसी भी राजनीतिक व्यक्ति के बयान पर वो प्रतिक्रिया नहीं दे सकते लेकिन इतना स्पष्ट है कि बिहार पुलिस का स्टैंड सही था, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भी यही प्रमाणित होता है।

हालाँकि, वो ये कहने से नहीं चूके कि कुछ लोगों को बेचैनी थी और छटपटाहट रही होगी कि कहीं उनकी पोल न खुल जाए। वहीं रिया चक्रवर्ती के बयानों पर डीजीपी ने कहा कि अभिनेत्री की अभी इतनी हैसियत नहीं है कि वो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर टिप्पणी करे, पूरे देश में लोग रिया को शक की नजर से देख रहे। उन्होंने कहा कि नीतीश के समर्थन से ही सुशांत के परिवार वालों में न्याय की उम्मीद जगी है। उन्होंने इस मामले में आगे कहा:

“नतीजा आएगा, निश्चित आएगा क्योंकि ये केवल एक आदमी की लड़ाई नहीं है, एक परिवार की लड़ाई नहीं है, गुप्तेश्वर पांडेय की कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, ये हिंदुस्तान की 130 करोड़ जनता, जो न्याय चाहती है उसकी लड़ाई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लोगों के मन में एक उम्मीद जगी है कि सुशांत सिंह के मामले में न्याय होगा। ये पूरे देश के लिए बहुत बड़ी बात है। पूरा देश सुप्रीम कोर्ट की तरफ टकटकी लगाए देख रहा था। हमारे ऊपर भी यह आरोप लग रहे थे कि हमने क़ानून और संविधान के हिसाब से ठीक काम नहीं किया। कोर्ट के फैसले से सब कुछ साफ हो गया है।”

गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि सुशांत मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सभी लोग ख़ुश हैं। उन्होंने कहा कि हमारी जाँच के दौरान मुंबई पुलिस ने क्या किया, ये किसी से छिपा नहीं है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस से कहा है कि वो सीबीआई का सहयोग करे और जाँच एजेंसी को इस मामले में कहीं भी दर्ज हुए एफआईआर के आधार पर नया केस दर्ज करने की छूट दी है, जिससे रिया चक्रवर्ती को झटका लगा है।

जनता PM मोदी को डंडे से मारेगी, आर-पार की लड़ाई: सोनिया-राहुल के हेट स्पीच पर BJP ने उठाए सवाल

फेसबुक पर हेट स्पीच को लेकर चल रहे विवाद में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कॉन्ग्रेस के गाँधी परिवार पर आरोप लगाते हुए पूछा है कि क्या सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के भाषण हेट स्पीच के अंतर्गत नहीं आते? उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई मौकों पर सोनिया और राहुल ने हेट स्पीच दिया है। उन्होंने कहा कि सोनिया गाँधी ने अपने भाषण में ‘आर-पार की लड़ाई’ की बात करते हुए हेट स्पीच को बढ़ावा दिया था।

साथ ही उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि राहुल गाँधी ने कहा था कि जनता पीएम मोदी को डंडे से पीटेगी। ज्ञात हो कि फ़रवरी 2020 में एक चुनावी रैली में राहुल ने कहा था कि इस देश का युवा मोदी की 6 महीने बाद डंडों से पिटाई करेगा और उन्हें इस देश से बाहर फेंक देगा। वहीं पीएम मोदी ने बजट सेशन में इसका जवाब देते हुए कहा था कि वो सूर्य नमस्कार कर के अपनी पीठ मजबूत करेंगे।

रविशंकर प्रसाद ने इन बयानों की याद दिलाते हुए गाँधी परिवार से पूछा कि इसका अर्थ क्या है? उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस नेताओं ने जम कर हेट स्पीच दिए थे। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी की समस्या ये है कि वो सोचते हैं कि जो भी उनसे सहमति नहीं रखता है वो भाजपा-आरएसएस के दबाव में ऐसा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों का राजनीतिक दायरा गिर कर इतना नीचे आ पहुँचा है, वो लोग अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रभाव रखने के लिए ये हंगामा कर रहे हैं।

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कोई किसी भी विचारधारा का है, उसे इन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी बात रखने की इजाजत है। उन्होंने कहा कि जिनका सियासी वजूद ही ख़त्म हो गया है, वो लोग फेसबुक पर एकाधिकार के लिए ये सब कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कोरोना पर भी कॉन्ग्रेस के आरोप का जवाब देते हुए बताया कि पीएम केअर फण्ड से 3100 करोड़ रुपए ट्रांसफर हुए, जिनमें से 2000 करोड़ रुपए सिर्फ वेंटिलेटर के लिए खर्च किए गए, जबकि 50,000 वेंटिलेटर खरीदने के लिए 1000 करोड़ रुपए राज्यों को दिए गए।

उन्होंने राहुल गाँधी पर कोरोना के खिलाफ जंग को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो पहले दिन से ही ऐसा कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने राजीव गाँधी फाउंडेशन में चीन से फंड आने पर भी सवाल किया। उन्होंने पूछा कि उसके स्पेशल स्टडी में ये कैसे कह दिया गया कि भारतीय बाजार चीनी माल के लिए खोल दिया जाए? उन्होंने पूछा कि इस चीज के रिकमेन्डेशन किसे दिया था?

बता दें कि वाल स्ट्रीट जर्नल द्वारा फेसबुक पर आरोप लगाया गया है कि वह भाजपा का समर्थन करता है और हेट स्पीच के मामले में उचित कार्रवाई करने से बचता है। अमेरिकी अखबार ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ की इस रिपोर्ट के बाद यह बहस बड़े स्तर पर विवाद का विषय बन चुकी है। इस पूरे विवाद के बीच ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ अपनी इस रिपोर्ट का पेड प्रोमोशन करते हुए देखा जा रहा है, जिससे यह सवाल पैदा हो रहे हैं कि वाल स्ट्रीट जर्नल के इस कारनामे से अंततः किसे फायदा पहुँचने वाला है।

सुशांत की तस्वीर लगा एकता कपूर ने जुटाना शुरू किया फंड, परिवार ने कहा – ‘डिप्रेशन का पोस्टर बॉय न बनाएँ’

‘बालाजी टेलीफिल्म्स’ की मालकिन एकता कपूर पर सुशांत सिंह राजपूत के नाम पर रुपए ऐंठने के आरोप लगे हैं। एकता कपूर ने ZEE5 के सीईओ तरुण कटियाल के साथ मिल कर ‘पवित्र रिश्ता फण्ड’ की शुरुआत की, जिसमें सुशांत सिंह राजपूत की तस्वीर लगी हुई थी। बता दें कि सुशांत के पहले सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ को भी एकता कपूर ने ही बनाया था। इसकी घोषणा सुशांत की मौत के 1 महीने बाद ही कर दी गई थी, जिसे अब ऑनलाइन डाला गया।

तरुण ने कहा कि उनका उद्देश्य जागरूकता फैलाना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद की जा सके। उन्होंने कहा कि जो लोग मानसिक बीमारी से ग्रस्त हैं, उनकी मदद के लिए इस फण्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। हालाँकि, एकता कपूर के एक ‘मेन्टल हेल्थ अवेयरनेस इनिशिएटिव’ के कारण लोग नाराज़ हो गए और उन्होंने कहा कि वो अपने किसी फण्ड के लिए दिवंगत अभिनेता के नाम का इस्तेमाल कैसे कर सकती हैं, वो भी बिना परिवार की अनुमति लिए।

फैंस का आरोप था कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत आत्महत्या, डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य की वजह से हुई, ऐसा जबरदस्ती साबित करने वाले गैंग की मदद करने के लिए एकता कपूर जानबूझ कर इन चीजों को दिवंगत अभिनेता के नाम के साथ जोड़ रही हैं। एकता कपूर की वेबसाइट पर ‘पवित्र रिश्ता’ फण्ड को ‘मेन्टल वेलनेस’ से जोड़ते हुए सुशांत की तस्वीर लगा ‘हर रिश्ता है खास’ वाली टैगलाइन के साथ पेश किया गया।

इसमें लिखा गया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताएँ उससे ज्यादा सामान्य हैं, जितना हम समझ रहे हैं। लिखा गया कि हम में से कई लोग इस पर बात करने से भी हिचकते हैं। वेबसाइट पर लिखे दावे के अनुसार, हम पेटदर्द या किसी शारीरिक चोट के बारे में तो खुल कर बात करते हैं लेकिन अपने मानसिक स्थिति को छिपा लेते हैं, उनसे भी जो हमारे क़रीबी हैं। मेन्टल हेल्थ को लेकर जागरूकता की कमी, गोपनीयता और धब्बा वाली मानसिकता रुकनी चाहिए।

उधर सुशांत सिंह राजपूत के जीजा विशाल कीर्ति ने उनके नाम पर बिजनेस चला कर सुर्खियाँ बटोरने वालों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि दिवंगत अभिनेता की बहन श्वेता और वो सुशांत के नाम पर किसी भी प्रकार के कॉमर्शिलाइजेशन के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर लोग सुशांत का नाम लेकर कुछ कर रहे हैं तो ये प्रॉफिट कमाने के इरादे से नहीं होना चाहिए। परिवार ने सुशांत के नाम का इस्तेमाल करते हुए किसी भी लाभकारी गतिविधि का समर्थन नहीं किया है।

वहीं एकता कपूर ने सोशल मीडिया पर फैन्स के गुस्से के बाद अपने फण्ड के एडवर्टाइजमेंट में से सुशांत सिंह राजपूत की तस्वीर हटा दी। बता दें कि एकता अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर भी सुशांत को लेकर दुःख जताती रही हैं। उनके बेटे ने भी सुशांत को श्रद्धांजलि दी थी। सुशांत के जीजा ने कहा कि अगर किसी ने उनके नाम पर बिजनेस चलाया तो उससे कोर्ट में निपटा जाएगा। उन्होंने कहा कि सुशांत को मेन्टल हेल्थ का पोस्टर बॉय नहीं बनाएँ।

‘सिद्दार्थ ने सुशांत के कमरे में ली थी सबसे पहले एंट्री, फंदा काट कर उतारा था शव’ – हेल्पर नीरज ने किया खुलासा

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में उनके डोमेस्टिक हेल्पर नीरज ने टाइम्स नाउ से बातचीत में नया खुलासा किया है। नीरज ने बताया है कि 14 जून को सुशांत की मौत के बाद उनके फ्लैट में जाने वाला पहला शख्स कौन था?

नीरज के मुताबिक, उस दिन सबसे पहले सिद्दार्थ पिठानी ने सुशांत के फ्लैट का दरवाजा खोला था, जहाँ सुशांत को उन्होंने मृत पाया। इसके बाद उन्होंने फंदे को काटा और शव बिस्तर पर गिर गया।

नीरज ने कहा, “सुशांत के सुसाइड के बाद जब उनका कमरा खुला तो सबसे पहले सिद्धार्थ पिठानी ही अंदर गए थे। उनको इस हालत में देख सभी के होश उड़ गए थे। मैं दरवाजे पर ही खड़ा था। तभी सिद्धार्थ को क‍िसी का फोन आया क‍ि बॉडी उतार दो, साँसें चल रही होंगी तो अस्‍पताल ले जाएँगे। इसके बाद सिद्धार्थ ने सुशांत सर की बॉडी को नीचा उतारा था।”

नीरज बताते हैं कि सुशांत जरूर किसी बीमारी से गुजर रहे थे तभी उन्होंने ये कदम उठाया। वे कहते हैं कि सुशांत की मौत से करीब 1-1.5 घंटे पहले उन्होंने एक ग्लास ठंडा पानी माँगा था।

गौरतलब है कि इससे पहले बिहार पुलिस ने सुशांत के सिम नंबर को लेकर खुलासा करते हुए बताया था कि सुशांत अपने नाम से कोई सिम इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। उनका एक सिम तो सिद्धार्थ पिठानी के ही नाम पर रजिस्टर था। इसके अलावा यह भी खुलासा हुआ था कि सिद्धार्थ पिठानी ने जो दावा किया था कि उन्होंने शव देखकर वॉचमैन को सूचित किया, वो भी झूठा था। क्योंकि वॉचमैन का कहना था कि उसे इस बारे में कुछ नहीं बताया गया।

सुशांत के पिता के वकील विकास सिंह भी सिद्धार्थ को इस पूरे मामले में मुख्य आरोपित की तरह देख रहे हैं। उनका आरोप है कि सिद्धार्थ बहुत शातिर अपराधी है। उनका कहना है कि पिठानी शुरू में सुशांत के परिवार की मदद करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन जैसे ही रिया के ख़िलाफ़ शिकायत हुई, उसका रवैया बदल गया।

विकास के अनुसार, “सुशांत की मौत के बाद बहुत सारे सवाल हैं, जिनका जवाब अब तक मिलना बाकी है। आखिर जरूरी होने पर भी फौरन कमरे का दरवाजा क्यों नहीं खोला गया? और आखिर बाद में क्यों दरवाजा खोलकर बॉडी को नीचे रखने की इतनी जल्दी थी, जब उनकी बहन 10 मिनट में पहुँचने वाली थी?”

गौरतलब है कि सुशांत के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धनशोधन के आरोप में रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार पर जाँच की जा रही है। इसके अलावा मुंबई पुलिस की जाँच भी इस मामले में संदिग्ध हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसला दे दिया कि सीबीआई आगे इस मामले में जाँच करेगी

सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच करेगी CBI, महाराष्ट्र सरकार करे मदद: सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रिया को झटका

सुशांत सिंह राजपूत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जाँच सीबीआई (CBI) करेगी और महाराष्ट्र सरकार को इसमें मदद करनी है। सीबीआई (CBI) इस मामले में नया केस जल्द रजिस्टर कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में दर्ज FIR को भी सही ठहराया है। सारा विवाद इसी बात को लेकर था कि बिहार में इस केस को क्यों ले जाया गया और इसे वापस ट्रांसफर किया जाए। साथ ही मुंबई पुलिस को जाँच में सहयोग करने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस को बड़ा झटका लगा है। ख़बरों के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार इस फैसले को चुनौती भी दे सकती है।

बता दें कि सुशांत के परिवार के वकील विकास सिंह ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत का इस्तेमाल किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिया के व्यवहार से ये बात स्पष्ट हो गई है। जैसे ही सुशांत से रिया की जरूरतें पूरी हो गईं, उन्होंने सुशांत को अपनी जिंदगी से निकाल बाहर किया। विकास ने आरोप लगाया कि सुशांत कमरे में सोते रहते थे और रिया अपने दोस्तों के साथ पार्टियों में मशगूल रहती थी।