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वर्ल्ड में नंबर 3, इंडिया में नंबर वन: महेश भट्ट की सड़क-2 का ट्रेलर ने बनाए डिसलाइक के नए रिकॉर्ड

फिल्म ‘सड़क 2’ का ट्रेलर दुनिया में तीसरा सबसे ज्यादा नापसंद किया जाने वाला वीडियो है। यह भारत में यूट्यूब पर सबसे अधिक डिसलाइक किया जाने वाला वीडियो बन गया है। 1.1 करोड़ से अधिक डिसलाइक के साथ ‘सड़क 2’ तीसरे पायदान पर है। दूसरे नंबर पर 1.16 करोड़ डिसलाइक के साथ साल 2010 में आया पॉप स्टार जस्टिन बीबर का गाना ‘बेबी’ शामिल है। पहले नंबर पर 1.82 करोड़ डिसलाइक के साथ स्वयं यूट्यूब द्वारा पोस्ट किया गया ‘2018 रीवाइंड वीडियो’ है।

12 अगस्त को जारी किए गए ‘सड़क 2’ के ट्रेलर को नेपोटिज्म को बढ़ावा दिए जाने के चलते सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा ट्रोल किया गया। जून में बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से यह मुद्दा चर्चा में है। महेश भट्ट की इस फिल्म में उनकी दोनों बेटियाँ आलिया भट्ट और पूजा भट्ट हैं। इनके साथ संजय दत्त और निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर के छोटे भाई आदित्य रॉय कपूर भी हैं।

महेश भट्ट द्वारा निर्देशित और निर्मित फिल्म का ट्रेलर 12 अगस्त को जारी किया गया था। फिल्म के ट्रेलर को रिलीज़ होने के 48 घंटों के भीतर लगभग 90 लाख डिसलाइक मिली थी।

हालाँकि यह YouTube पर तीसरा सबसे अधिक नापसंद किया गया वीडियो है, मगर यह पहले से ही डिसलाइक शेयर में नंबर बन गया है। कुल लाइक और डिसलाइक में से, ट्रेलर का डिसलाइक शेयर 95% है, जबकि बाकी 5% ने इसे लाइक किया है। इसकी तुलना में, YouTube 2018 वीडियो की डिसलाइक शेयर 86% है, और जस्टिन बीबर के वीडियो के लिए 45% है, जिसका अर्थ है कि इसे डिसलाइक की तुलना में लाइक अधिक है।

गौरतलब है कि सड़क 2 आलिया भट्ट की पहली होम प्रोडक्शन फिल्म है और उनके पिता महेश भट्ट की 21 साल बाद निर्देशक के रूप में वापसी भी है। फिल्म 28 अगस्त को रिलीज होगी।

वीएचपी नेता विजय शंकर तिवारी ने फिल्म ‘सड़क-2’ को लेकर हिन्दू आस्था को अपमानित करने का आरोप लगाया था। ‘सड़क-2’ के बारे में कहा गया कि महेश भट्ट एक ऐसी कहानी लेकर आ रहे हैं, जिसमें एक साधु को बुरा दिखाया जाएगा और उसके काले कृत्यों का खुलासा किया जाएगा।

वीएचपी नेता विजय शंकर तिवारी ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “महेश भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म सड़क 2 में एक बार फिर हिन्दू आस्था को अपमानित किया गया है, जिसे हॉटस्टार में दिखाया जाएगा। फिल्म में केवल नेपोटिज्म के प्रोडक्ट्स भरे पड़े हैं, जिन्हें महेश भट्ट आगे बढ़ा रहे हैं। केन्द्र सरकार इस पर कार्यवाही करे।”

उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा था, “सुनील दत्त के बेटे हैं संजय दत्त, महेश भट्ट की बेटियाँ हैं पूजा और आलिया, सिद्धार्थ रॉय कपूर के भाई हैं आदित्य, इन सबकी फिल्म है सड़क-2। अब महेश भट्ट को बताना होगा कि तुम्हारा और तुम्हारी फिल्म का हश्र खान ब्रदर्स जैसा ही होगा। यही नेपोटिज्म है।”

तुर्की की फर्स्ट लेडी से मिले आमिर खान, शान में पढ़े कसीदे: भारतीय मुस्लिमों को कट्टर बनाने में लगा है पाक का नया यार

भारत के खिलाफ जहर उगलने और मुस्लिमों का मसीहा बनने की कोशिश में लगे तुर्की की प्रथम महिला एमीन एर्दोगन से बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने शनिवार (अगस्त 15, 2020) को मुलाकात की। इस्तांबुल के ह्यूबर मेंशन के राष्ट्रपति निवास में यह मुलाकात हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, आमिर खान ने मुलाकात का अनुरोध किया था। वे वाटर फाउंडेशन के काम के बारे में एर्दोगन को जानकारी देना चाहते थे। बता दें कि यह एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना आमिर खान और उकी पत्नी किरण राव ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी पहुँचाने के लिए की है।

मुलाकात के दौरान दोनों ने एक-दूसरे की प्रशंसा की। बॉलीवुड स्टार ने महिलाओं और बच्चों की शिक्षा के संबंध में कई मानवीय परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए एर्दोगन की प्रशंसा की, जबकि तुर्की की पहली महिला ने अभिनेता को उनकी फिल्मों में ‘सामाजिक समस्याओं’ को उठाने के लिए सराहा।

गौरतलब है कि फ़िलहाल भारत विरोधी रुख को लेकर तुर्की चर्चा में है। हाल में यह बात सामने आई थी कि तुर्की की तरफ से भारत के मुस्लिमों को कट्टर बनाने की भरपूर कोशिशें हो रही है। वह कट्टर मुस्लिमों को और कट्टर बना कर उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल करना चाहता है।

बता दें कि अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर तुर्की ने पाकिस्तान की बातों का समर्थन किया था। इसके बाद वह भारत विरोधी गतिविधियों का गढ़ बन चुका है। तुर्की में पनप रहे इस नए तरह के आतंकवाद को कोई और नहीं बल्कि वहाँ की एर्दोगन सरकार खुद बढ़ावा दे रही है।

पिछले दिनों खबर आई थी कि आमिर खान अपनी अगली फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग के लिए तुर्की गए हैं। तुर्की की मीडिया का कहना है कि आमिर खान वहाँ की तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, सिनेमा के लिए एडवांस फ़ैसिलिटी और वर्कफोर्स कैपेसिटी से खुश हैं। इससे पहले उन्होंने वहाँ के दौरों मे इन चीजों को देखा था। तुर्की का पर्यटन मंत्रालय उनकी सहायता कर रहा है।

ऐसे में, तुर्की जाने और एर्दोगन से मुलाकात करने को लेकर सोशल मीडिया में आमिर खान की तीखी आलोचना हो रही है। एक यूजर ने लिखा है, “आमिर खान इजरायल के पीएम से मिलने से बचते रहे, लेकिन उन्होंने भारतीय प्रतिद्वंद्वी के रूप में तुर्की के राष्ट्रपति से मुलाकात की और तथाकथित शांतिप्रिय राष्ट्र के लिए मानवीय और सामाजिक परियोजनाओं के बारे में बताया। अब कुछ बोलूँगा तो उनकी पत्नी को असुरक्षा महसूस होगा। फिर असहिष्णुता वाला नाटक शुरू होगा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा कि आमिर खान तुर्की में शूटिंग कर रहे हैं। उन्हें शर्म आनी चाहिए कि जो देश कश्मीर के खिलाफ बोलता है, वहाँ पर जाकर उसकी तारीफ करते हैं। यही देश हमारा फायदा उठाती है।

एक यूजर लिखता है, आमिर खान तुर्की गए और एर्दोगन से मिले। आमिर खान अच्छी तरह से जानते हैं कि एर्दोगन ने भारत विरोधी और कश्मीर विरोधी स्टैंड को बढ़ावा दिया है और कश्मीर के छात्रों को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर भारत के खिलाफ बोलने के लिए वित्त पोषित किया है। ऐसे में उनसे मुलाकात क्यों?

बता दें कि जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत आए थे तब तीनों खान ने उनका बहिष्कार किया था। कई बॉलीवुड हस्तियों को उनसे मिलने के लिए आमंत्रण दिया गया था, लेकिन आमिर खान सहित तीनों खान नहीं पहुँचे। समुदाय विशेष के कई लोगों ने तब ‘असली हीरो’ कह कर उनकी तारीफ की थी।

दिल्ली: शाहीन बाग के सामाजिक कार्यकर्ता शहजाद अली BJP में शामिल, कहा- CAA पर साथ मिलकर करेंगे काम 

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन और विरोध का मुख्य केंद्र रहे शाहीन बाग के सामाजिक कार्यकर्ता शहजाद अली रविवार (अगस्त 16, 2020) को बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता और श्याम जाजू ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। 

इस मौके पर शहजाद अली ने कहा, “मैं भाजपा में शामिल हुआ हूँ, ताकि हमारे समुदाय के उन लोगों को गलत साबित किया जा सके, जो सोचते हैं कि भाजपा हमारी दुश्मन है। हम सीएए के मुद्दे पर साथ मिलकर बैठकर बात करेंगे।”

आदेश गुप्ता ने कहा, “आज सैकड़ों भाई इस बात को महसूस करने के बाद पार्टी में शामिल हुए हैं कि हमारे साथ कोई भेदभाव नहीं है और हम उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाना चाहते हैं। मैं उन सभी महिलाओं को बधाई देना चाहता हूँ, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्रिपल तालक मामले में उठाए गए कदमों को देखने के बाद पार्टी में शामिल हुई हैं।”

वहीं श्याम जाजू ने कहा, “जब सीएए के बारे में बात की गई थी, तो कुछ राजनीतिक दलों ने समुदाय विशेष को गुमराह करने की कोशिश की थी। लेकिन अब देश के हर मुस्लिम भाई को पता चल गया है कि कुछ भी साबित करने की आवश्यकता नहीं है। किसी को भी वोट और राष्ट्रीयता के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। यह महसूस करने के बाद कि उन्हें इस पार्टी के माध्यम से ही न्याय मिलेगा, शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन में उपस्थित भारी संख्या में इस्लाम को मानने वाले आज पार्टी में शामिल हुए हैं।”

बता दें कि शहजाद अली कुछ दिनों पहले तक भाजपा के मुखर विरोधी थे और शाहीन बाग में सरकार के खिलाफ बुलंद आवाज करने वालों में से एक थे। शाहीन बाग में धरना खत्म होने के बाद से ही उनका रुख बदला-बदला नजर आ रहा था। उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार का पक्ष लेना शुरू कर दिया था।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश भर में विरोध हो रहा था। इस दौरान शाहीन बाग इस विरोध का केंद्र बनकर सामने उभरा था। यहाँ महिलाओं ने लगभग 3 महीने तक धरना दिया। इस दौरान पूरे देश से इसका विरोध करने वाले यहाँ जुटते रहे। शहजाद अली भी काफी ऐक्टिव थे और सीएए के विरोध में अपनी बात रखते थे। इससे पहले भी वह बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ बोलते रहे हैं।

₹1000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग, चीनी शेल कंपनियों के नाम पर अकाउंट, जासूसी नेटवर्क: चार्ली पेंग की दलाई लामा पर भी थी नजर

1000 करोड़ रुपए के हवाला घोटाले के आरोपित चार्ली पेंग के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। चार्ली पेंग चीन का रहने वाला है और उसका असली नाम लुओ सैंग है। जाँच एजेंसियों को पता चला है कि चार्ली पेंग दिल्ली में कुछ लामाओं के संपर्क में था। पेंग के मामले की जाँच कर रही एजेंसियों को शक है कि वह बौद्ध धर्म के सर्वोच्च गुरु दलाई लामा और उनके सहयोगियों की जानकारी जुटा रहा था।

शुरुआती जाँच में पता चला है कि चार्ली पेंग ने दिल्ली में मजनू का टीला में कुछ लामाओं और अन्य व्यक्तियों को पैसे दिए थे। निगरानी से बचने के लिए, पेंग ने बातचीत करने के लिए चीनी एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन ‘वी चैट’ का इस्तेमाल करता था। 29 जुलाई को भारत सरकार ने सुरक्षा और गोपनीयता के मुद्दों का हवाला देते हुए 59 चीनी एप्स को प्रतिबंधित कर दिया था। 

भारत में रहकर हवाला रैकेट चला रहा चार्ली पेंग एक जासूसी नेटवर्क का भी हिस्‍सा था। उसने अन्‍य चीनी नागरिकों के साथ मिलकर चीनी शेल कंपनियों के नाम से बैंक खाते खोले और करीब 1000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की। 

फिलहाल इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट से लेकर कई एजेंसियाँ उससे पूछताछ कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूछताछ में पेंग ने खुलासा किया है कि चीनी खुफिया एजेंसियों ने उसके जरिए दिल्‍ली में निर्वासन में रह रहे तिब्‍बतियों को घूस देने की कोशिश की।

चीनी एजेंसियों के निशाने पर मजनू का टीला में रहने वाले लामा और भिक्षु थे। पेंग ने सीधे पैसा नहीं दिया लेकिन अपने ऑफिस स्‍टाफ के जरिए रकम भिजवाता रहा। जिन लोगों को पैसा दिया गया, उनकी पहचान अभी नहीं हो सकी है। पेंग का दावा है कि उसके स्‍टाफ ने जिन पैकेट्स में पैसे दिए, उनमें 2 से 3 लाख रुपए थे। 2014 के बाद से पेंग ने दिल्‍ली और हिमाचल प्रदेश में दलाई लामा की टीम में भी घुसपैठ करने की कोशिश की थी।

पेंग ने पूछताछ में बताया कि उसने पहली बार 2014 में भारत में कदम रखा था। चार्ली पेंग ने दिल्ली में सबसे पहले नूडल्स का कारोबार शुरू किया और इसमें आगे बढ़ते हुए बड़े हवाला रैकेट तक जा पहुँचा। पेंग को पहली बार साल 2018 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। हालाँकि कुछ दिन बाद वह जमानत पर रिहा हो गया था। इस बार उसे फिर गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि चार्ली पेंग 2009 में 6 तिब्बतियों के साथ पैदल नेपाल गया था। नेपाल में वह 2009 से 2014 तक काठमांडू के पास गेलुग मठ में रहा। पेंग ने वहाँ अपना औषधि और जड़ी-बूटियों का कारोबार शुरू किया था। इस काम में उसे अच्छी कमाई हुई। मठ में रहने के दौरान वहाँ के कुछ लोगों ने उसे भारत जाने का सुझाव दिया। उसे सुझाव में बताया गया कि वहाँ वह अच्छा पैसा कमा सकता है।

इसके बाद चार्ली पेंग साल 2014 में बस से काठमांडू से नई दिल्ली के मजनू का टीला आ गया। मजनू का टीला इलाके में वह पंजाबी बस्ती में रहा। नेपाल मठ और वहाँ के दस्तावेजों के आधार पर उसने तिब्बती आई कार्ड हासिल कर लिया था।

चार्ली पेंग का दिल्ली में धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा और उसने द्वारका में एक फ्लैट ले लिया। इसके बाद एक दलाल के माध्यम से उसने भारतीय आधार कार्ड और पैन कार्ड भी बनवा लिए। बाद में चार्ली पेंग द्वारका से गुरुग्राम शिफ्ट हो गया। अब हवाला नेटवर्क का पता चलने के बाद पुलिस उससे और भी कई मामलों में पूछताछ कर रही है।

AAP की आरती ने ‘नाजी सैल्यूट’ से की ‘वन्दे मातरम्’ की तुलना: CM केजरीवाल के हाथ नहीं उठाने पर भड़के BJP नेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74 वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किला पर ध्वजारोहण किया और उसके बाद देश को सम्बोधित किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्यों के साथ-साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी वहाँ उपस्थित थे। भाजपा नेताओं का आरोप है कि जब पीएम मोदी ने जब ‘वन्दे मातरम्’ का उद्घोष किया तो, केजरीवाल ने न इसे दोहराया और न हाथ उठाया

आदेश गुप्ता, मीनाक्षी लेखी, तजिंदर बग्गा, कपिल मिश्रा, मनोज तिवारी और प्रवेश साहिब सिंह वर्मा जैसे नेताओं ने इस आरोप को आगे बढ़ाया और भाजपा के दिल्ली व बिहार के आधिकारिक ट्विटर हैंडलों से इसे ट्वीट किया गया। अब खुद आम आदमी पार्टी (AAP) ही इसकी पुष्टि कर रही है कि दिल्ली सीएम ने उस समय बाकियों से अलग रुख अपनाया, जिसका अर्थ है कि उन्होंने ‘वन्दे मातरम्’ को न तो दोहराया और न ही हाथ उठाया।

आम आदमी पार्टी की नेशनल सोशल मीडिया टीम का हिस्सा आरती चड्ढा ने ट्विटर पर भारत के राष्ट्रगीत के उद्घोष की तुलना जर्मनी में नाजी युग के सैल्यूट यानी हैल हिटलर (Heil Hitler) के साथ की। उन्होंने दो तस्वीरें साझा की जिसमें एक जर्मनी का है और जहाँ सारे लोग ‘हैल हिटलर’ पर हाथ उठा कर सम्मान देते हुए नज़र आते हैं, वहीं एक व्यक्ति है जो भीड़ में खड़ा है, कोई मूवमेंट नहीं कर रहा। इसकी तुलना आरती ने कल के केजरीवाल के वायरल फोटो के साथ की।

यानी, आरती का कहना है कि जिस तरह नाजी जर्मनी में ‘ हैल हिटलर’ पर हाथ उठा कर सम्मान नहीं दिया, ठीक वैसा ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वन्दे मातरम्’ के साथ किया। साथ ही आरती ने ये भी लिखा कि एक ऐसा व्यक्ति को बाकियों से अलग खड़ा होने की हिम्मत रखता है। आरती ने अरविन्द केजरीवाल को जन्मदिन विश करते हुए ऐसा कहा।

केजरीवाल की पार्टी ही इसकी पुष्टि कर रही है कि उन्होंने हाथ नहीं उठाया

अब पूरा माजरा समझते हैं। सबसे पहले भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री की आलोचना की। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में दिख रहा है कि जब पीएम मोदी ‘वन्दे मातरम्’ का उद्घोष करते हैं तो वहाँ उपस्थित सभी लोग अपने दोनों हाथ उठा कर इसे दोहराते हैं, लेकिन अरविन्द केजरीवाल चुपचाप मास्क लगा कर बैठे हुए हैं और उन्होंने कोई मूवमेंट नहीं की।

भाजपा नेता ने ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर करते हुए आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो से पूछा कि बाटला हाउस एनकाउंटर के आतंकवादियो के लिए तो आपके हाथ बड़ी जल्दी खड़े हुए थे, सर्जिकल स्ट्राइक के समय सेना से सबूत माँगने के लिए तो आपके हाथ बड़ी जल्दी खड़े हुए थे, तो आज आपको कौन सी बीमारी हो गई कि आपने ‘वन्दे मातरम्’ पर आपने हाथ खड़े करने से मना कर दिया?

तजिंदर बग्गा ने केजरीवाल से यह भी पूछा कि क्या ‘वन्दे मातरम्’ का सम्मान करने से उनका वोट-बैंक नाराज़ हो जाएगा? सोशल मीडिया पर इस ट्वीट की रिप्लाई में कई लोग भी दिल्ली सीएम से नाराज़ दिखे और लोगों इसका कारण पूछा कि आखिर उन्होंने भारत के राष्ट्रीय गीत से लिए गए उद्घोष का सम्मान नहीं किया? जबकि उनके आसपास बैठे बाकी सभी लोगों ने इस उद्घोष को पूरे जोश में दोहराया।

वहीं पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि 0.01% ऐसे रह जाते हैं, जो डिटॉल से भी नहीं जाते। वहीं अरविन्द केजरीवाल ने जब खुद झंडा फहराया तो उन्होंने अपने मंच से ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ के साथ-साथ ‘वन्दे मातरम्’ का नारा भी लगवाया। इस पर भाजपा सांसद मिनाक्षी लेखी ने कहा कि जब पीएम मोदी ने ये उद्घोष किया तो केजरीवाल शांत बैठे रहे और जब उन्होंने खुद ये नारा लगाया तो उनके पार्टी के नेताओं ने इसे नहीं दोहराया।

वहीं सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा कि ‘सड़ जी’ के वंदे मातरम कहने पर उनके पार्टी के मंत्री-कार्यकर्ता चुप्पी लगा गए। साथ ही उन्होंने ‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए’ वाली कहावत का जिक्र करते हुए पूछा कि कैसे लोग हैं ये? उन्होंने कहा कि जब यही नारा पीएम मोदी ने लगवाया तो केजरीवाल के मुँह से कुछ नहीं फूटा। वहीं बिहार भाजपा ने भी चुटकी लेते हुए कहा, “पहले लगा था कि केजरीवाल बिहार से दिल्ली जाने वाले श्रमिकों के खिलाफ हैं, लेकिन ये तो ‘वंदे मातरम’ बोलने के भी खिलाफ हैं जी!

दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी इस वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा कि आज लाल किले की प्राचीर से भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत माँ का जयघोष करवाया, लेकिन पता नही इस एक शख़्स को भारत माता की जय से क्या तकलीफ है? इसके बाद उन्होंने पूछा कि कहीं ये आप तो नहीं अरविन्द केजरीवाल जी? वहीं दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता भी नाराज़ नज़र आए।

आदेश गुप्ता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ‘वन्दे मातरम्’ ना बोलकर कौन सी धर्मनिरपेक्ष होने की राजनीति कर रहें हैं, ऐसा करके किसे खुश करना चाहते हैं? हर एक दिल्लीवासी आपकी इस राजनीति को देखकर दुखी होगा। इसके बाद उन्होंने पूछा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश ‘वन्दे मातरम्’ के नारे से गूँज रहा है तो केजरीवाल खामोश क्यों हैं? कई लोग भी इससे नाराज़ नज़र आए।

हालाँकि, ऑपइंडिया भाजपा नेताओं के इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता है, क्योंकि लाइव प्रसारण के दौरान केजरीवाल का चेहरा लम्बे समय तक केंद्रित नहीं था, इसीलिए पूरा फुटेज देखे बिना हम इसकी पुष्टि नहीं कर सकते। ऊपर से इस पर पार्टी का कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। लेकिन, अब आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय सोशल मीडिया टीम की सदस्य आरती ने ही इसकी पुष्टि कर दी है।

करण जौहर को विंग कमांडर नमृता चंडी ने फटकारा, जान्हवी से कहा- ऐसी फिल्में दोबारा न करना

जान्हवी कपूर की फिल्म गुंजन सक्सेना लगातार विवादों में है। भारतीय वायुसेना की तरफ से फिल्म को लेकर आपत्ति जताई जा चुकी है। वायुसेना ने सेंसर बोर्ड से इसकी शिकायत भी की है। सोशल मीडिया पर भी लगातार फिल्म का विरोध हो रहा है। इस बीच वायु सेना के एक पूर्व अधिकारी ने फिल्म के निर्माताओं को एक चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में कहा है कि वे क्रिएटिव फ्रीडम के नाम पर दर्शकों के सामने झूठ नहीं परोस सकते।

गुंजन सक्सेना फिल्म के निर्माताओं को संबोधित अपने पत्र में विंग कमांडर नमृता चंडी (सेवानिवृत्त) ने भारतीय सशस्त्र बलों, विशेष रूप से भारतीय वायु सेना के नकारात्मक चित्रण को लेकर एक विस्तृत प्रतिक्रिया लिखी है। साथ ही उन्होंने फिल्म में दिखाए गए महिला के साथ भेद-भाव, दुर्व्यवहार और उनके साथ उत्पीड़ने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। 

विंग कमांडर चंडी (सेवानिवृत्त) ने अपने पत्र में कहा है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों ने सशस्त्र बलों में एक साथ प्रशिक्षण लिया है। आउटलुक में प्रकाशित पत्र के अनुसार उन्होंने गुंजन के साथ प्रशिक्षण लिया है और एक-दूसरे को सबसे खराब परिस्थितियों में देखा है।

उन्होंने करण जौहर की धर्मा प्रोडक्शन्स और उनके बेकार लेखकों और उनकी घटिया कहानियों को दोषी ठहराया, जिन्होंने प्राउड ब्लू यूनीफॉर्म को बहुत ही नकारात्मक तरीके से पेश किया।

विंग कमांडर नमृता ने कहा, “मैंने इस फिल्म को थोड़ी उम्मीद के साथ देखा। बहुत कम फिल्में सत्य के साथ कोई न्याय करती हैं, इस फिल्म के साथ भी यही हुआ। फिल्म निर्माताओं ने डिस्क्लेमर जारी किया और सिनेमाई लाइसेंस एवं क्रिएटिव फ्रीडम की आड़ में खुद को दोषमुक्त कर लिया।”

वायु सेना अधिकारी ने कहा कि सिनेमा लाइसेंस और क्रिएटिव फ्रीडम को ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी बबल गम फिल्मों पर लागू किया जा सकता है, लेकिन भारतीय वायु सेना जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के तहत निर्धारित नियमों और स्थापित प्रोटोकॉल के पूर्ण दायरे में इसे फिट नहीं किया जा सकता है।

नमृता ने फिल्म निर्माताओं पर ‘झूठ बोलने’ का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “श्रीविद्या राजन पहली महिला पायलट थीं जिन्होंने कारगिल से उड़ान भरी थी, न कि गुंजन। हालाँकि, मुझे पूरा विश्वास है कि श्रीविद्या को इस क्रेडिट के छिन जाने को लेकर कोई शिकायत नहीं होगी।”

उन्होंने कहा कि वो इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि गुंजन ने फिल्म निर्माताओं के शोधकर्ताओं को क्रू रूम में अपने अनुभवों के बारे में क्या बताया है, लेकिन वो पूरे यकीन के साथ कह सकती है कि जिसने भी वर्दी पहनी है, पाँच-छ: साल के लिए गुंजन की तरह ही सही, वो कभी भी सिनेमा के लिए इस तरह के तुच्छ परिदृश्य को नहीं दर्शाएगा।

भारतीय वायु सेना में अपने स्वयं के अनुभव को बताते हुए, नमृता चंडी ने कहा, “मैंने खुद एक हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में देश की सेवा की है और मैंने कभी भी उस तरह के दुर्व्यवहार और उत्पीड़न का सामना नहीं किया है जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है। जबकि सच्चाई यह है कि, वर्दी में पुरुष सच्चे सज्जन और पेशेवर होते हैं। वे महिला अधिकारियों को सहज और समायोजित करने की पूरी कोशिश करते हैं।”

वो आगे कहती हैं, “हाँ, शुरू में बिना किसी कमरे या विशेष लेडीज टॉयलेट्स जैसी शुरुआती परेशानियाँ थीं; फिर भी पुरुषों ने हमारे लिए जगह बनाई। कभी-कभी जब मैं चेंज करती थी तो मेरे ब्रदर ऑफिसर्स पर्दे के बाहर पहरा दिया करते थे। मेरे 15 साल के पूरे करियर में कभी भी मेरे साथ बदसलूकी या मेरा अपमान नहीं हुआ।”

पूर्व अधिकारी ने यह भी कहा कि वे लोग जो सभी ऑपरेशनल स्क्वाड्रनों में बोझ उठाते हैं, वे महान पेशेवर क्षमता के पुरुष होते हैं, ना कि उस तरह के, जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है। उन्होंने आगे कहा, “वायु सेना में हर पायलट को खुद को साबित करना होता है, चाहे वो पुरुष हो या महिला।”

तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर अपना नैरेटिव सेट करने वाले मूवी मेकर्स पर तीखा हमला करते हुए वायु सेना अधिकारी ने कहा कि सिनेमा लाइसेंस अलग चीज है, लेकिन जब आप किसी संस्था के ऊपर काम करते हो तो आप उसके तथ्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें थोड़ा सा विस्तार दिया जा सकता है, मगर झूठ नहीं फैलाया जा सकता।

फिल्म में एक दृश्य के बारे में बताते हुए जहाँ एक आर्मी मेजर गुंजन सक्सेना के चरित्र पर कुछ टिप्पणी करता है, सेवानिवृत्त अधिकारी चंडी ने कहा कि यहाँ तक कि एक मूर्ख को भी पता है कि जब आप एक कमीशन अधिकारी होते हैं, तो आप भारत के संविधान के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने मूवी मेकर्स से कहा कि एक नागरिक को यह कल्पना भी नहीं करना चाहिए कि आदेशों की अवज्ञा करना संभव है।

उन्होंने बताया कि कैसे भारतीय सशस्त्र बल महिला पुरुष में भेदभाव किए बिना काम करती है। उन्होंने कहा, “मैं खुद पहली महिला अधिकारी रही हूँ। मैंने 1996 में पाकिस्तान के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर उड़ान भरी थी। मुझे हर उस अधिकारी पर विश्वास था, जो क्रू रूम में मेरे साथ बैठे थे। मैं लेह में तैनात होने वाली पहली महिला पायलट थी और सियाचिन ग्लेशियर में चीता हेलिकॉप्टर उड़ाती थी, एक ऐसा क्षेत्र जहाँ वहम था कि जब भी कोई महिला बेस कैंप का दौरा करती थी तो सेना को हताहत होना पड़ता था! लेकिन एक बार भी मेरे सहकर्मियों या फ्लाइट कमांडर ने मेरे उड़ान या क्षमता पर आपत्ति नहीं जताई थी। मेरे पति और मैं दोनों दिसंबर 2000 से दिसंबर 2002 तक लेह में एक साथ तैनात थे। अगर मुझे संदेह होता, तो वह आपत्ति करने वाले पहले व्यक्ति होते।”

उन्होंने कहा कि उनकी महिला अधिकारी सहकर्मी भी हैरान और दुखी हैं कि इस फिल्म के माध्यम से क्या दिखाया गया है। नमृता चंडी ने खुलासा कि गुंजन सक्सेना को शौर्य चक्र मिला, यह खबर बिल्कुल असत्य है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माताओं ने तथ्यों के साथ खिलवाड़ किया है, जो वास्तविक शौर्य चक्र विजेताओं की बहादुरी को अपमानित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं फिर से दोहराती हूँ कि हममें से किसी के भी मन में गुंजन के खिलाफ कुछ भी नहीं है। हमारी सबसे बड़ी आपत्ति उस तरीके को लेकर है जिस तरह से महिला अधिकारियों को दिखाया गया है। मेरी साथी महिला अधिकारी, और मैं, वर्षों से, हमारे पुरुष सहयोगियों का प्रखरता से बचाव करते हैं। उन्होंने हमारा स्वागत किया है और हमें समान सम्मान दिया है।”

विंग कमांडर नमृता चंडी (सेवानिवृत्त) ने कहा, “मैंने एक हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में पूरे 15 साल तक सेवा की और खुद को एक बहुत ही गौरवशाली भारतीय वायु सेना अधिकारी मानती हूँ। मैं किसी को भी इस तरह से फोर्स की छवि को धूमिल करने की इजाजत नहीं दूँगी, फिर चाहे वो क्रिएटिविटी या सिनेमाई लाइसेंस की आड़ में ही क्यों न हो।”

नमृता चंडी ने पत्र के अंत में फिल्म में गुंजन का किरदार निभाने वाली जान्हवी को संदेश देते हुए कहा है कि अगर वो खुद को प्राउड भारतीय महिला मानती हैं, तो इस तरह की फिल्में दोबारा न करें। भारतीय पेशेवर महिलाओं और पुरुषों की इस तरह से नकारात्मक छवि दिखाना बंद करें।

गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय महिला आयोग ने फिल्म पर आपत्ति जताई है। इससे पहले भारतीय वायुसेना ने फिल्म पर अपनी खराब छवि दिखाने का आरोप लगाते हुए इसे प्रतिबंधित करने की माँग की थी। राष्ट्रीय महिला आयोग ने अब निर्माताओं से कहा है कि ‘गुंजन सक्सेना’ की स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई जाए। साथ ही राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा है कि ‘गुंजन सक्सेना’ ने भारतीय वायुसेना की जिस तरह से नकारात्मक छवि दिखाई है, उसके लिए इसके निर्माताओं को माफ़ी माँगनी चाहिए।

ममता बनर्जी राजभवन की ही करवा रही हैं जासूसी? खुद राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने लगाए गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता बनर्जी सरकार पर जासूसी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार राजभवन को निगरानी में रख रही है। उनके मुताबिक़ इस कदम से राजभवन की पवित्रता पर प्रभाव पड़ेगा। पत्रकारों से बात करते हुए जगदीप धनखड़ ने इस मुद्दे पर कई बातें कहीं।    

उन्होंने कहा “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि राजभवन सर्विलांस पर है। ऐसे कदम राजभवन की शुचिता कम करते हैं। मैं राजभवन की पवित्रता बरकरार रखने के लिए जितना कुछ हो पाएगा, सब करूँगा।” उन्होंने यह भी कहा कि राजभवन ने सर्विलांस से जुड़ी एक सूची तैयार की है। जिसे उनके आदेश के बाद जारी किया जा सकता है।    

इस मामले की एक जाँच भी शुरू कर दी गई है, जिससे सच्चाई सामने आ सके। बीते दिन (15 अगस्त 2020) स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजभवन में परंपरागत समारोह का आयोजन था। इसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं हुई थीं। राज्यपाल ने इस मुद्दे पर ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की थी। उनका कहना था कि वह इस बात से स्तब्ध हैं।  

रविवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं हुईं। जिस पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने लिखा कि संविधान से दूरी बनाने की एक और घटना सामने आई है। राज्यपाल धनखड़ ने इसके आगे लिखा:

“राज्य में क़ानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई है और राजनीतिक हिंसा और हत्याएँ चरम पर हैं। लेकिन राज्य सरकार ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठा रही है। लोगों में न तो संविधान के प्रति आस्था है और न ही क़ानून का भय।”     

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है, जब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का राज्य सरकार से टकराव सामने आया है। अप्रैल में उन्होंने ममता बनर्जी को 11 पन्नों का पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार पर अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का आरोप लगाया था।

उन्होंने उस घटना का भी ज़िक्र किया था, जब ममता बनर्जी ने तबलीगी जमात के लोगों द्वारा कोरोना वायरस फैलाने पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा था, “मुझे सांप्रदायिक सवाल नहीं पूछे जाएँ।” जगदीप धनखड़ ने अपने पत्र में यह भी लिखा था कि एक अपराधी कभी निर्दोष को नहीं बचा सकता है।         

अखिलेश यादव की ‘राम’ राजनीति जारी, अब कहा- विष्णु भगवान के सभी अवतार हमारे

देश की राजनीति में श्रीराम को अपना बताने की होड़ सी मची है। इसके अलावा सपा और बसपा ने राज्य में परशुराम की मूर्ति लगवाने का भी ऐलान किया था। इस मुद्दे पर अभी तक राजनीति बयानबाज़ी जारी है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बयान दिया है। अखिलेश यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम के सभी अवतार हमारे हैं। भारतीय जनता पार्टी को इस बात से क्या परेशानी है। इसके बाद उन्होंने भाजपा की कार्यप्रणाली पर भी कई तरह के सवाल खड़े किए।     

रविवार (16 अगस्त 2020) को लखनऊ एक्सप्रेस वे से सैफई जाते हुए अखिलेश यादव ठठिया मंडी के पास रुके। वहाँ उनसे परशुराम की मूर्ति पर राजनीति होने से संबंधित सवाल किया गया। जिस पर अखिलेश यादव ने कहा, “भगवान विष्णु हमारे, भगवान राम हमारे और भगवान कृष्ण हमारे। विष्णु भगवान के सभी अवतार हम सभी के हैं इससे भाजपा को कैसी परेशानी हो सकती है? हम तो नवरात्र में देवियों की पूजा करते हैं, क्या देवियाँ भी भारतीय जनता पार्टी की हैं?” इसके बाद अखिलेश यादव ने कहा प्रदेश में बढ़ते अपराध की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बस राम के नाम पर राजनीति की जा रही है।     

उन्होंने उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन की आलोचना करते हुए कहा यहाँ सिर्फ आम जनता ही नहीं बल्कि विधायक भी सुरक्षित नहीं हैं। इस तरह के हालत ठोक दो नीति के कारण हो रहा है। अलीगढ़ के विधायक कांड से जुड़े सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा जब मुख्यमंत्री सदन के भीतर कहेंगे “ठोक दो” तब ऐसे हालत बनना स्वाभाविक है। पुलिस को नहीं पता है किसे ठोकना है और न ही विधायक को पता है किसे ठोकना है? आखिर यह सब सिखा कौन रहा है? उनके ही विधायक परेशान हैं और उन्हें ही अपमानित होना पड़ रहा है। सरकार का प्रदेश की क़ानून-व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं है।            

दरअसल हाल ही में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी दोनों ने राज्य में परशुराम की मूर्ति बनवाने का ऐलान किया था। सपा ने वादा किया था कि वो भगवान परशुराम की 108 फीट ऊँची प्रतिमा का निर्माण करवाएगी। इसके लिए जगह ढूँढने की बात भी कही जा रही है। बताया गया है कि प्रतिमा बनवाने के लिए समाजवादी पार्टी देश के लोकप्रिय मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति और लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में लगी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य मूर्ति बनाने वाले राजकुमार के संपर्क में है। इतना ही नहीं, सपा हर जिले में भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाने और ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कराने की योजना बना रही है। 

इसके पहले मायावती ने भी उत्तर प्रदेश में परशुराम की मूर्ति लगवाने की बात कही थी। पार्टी की मुखिया मायावती ने तो यहाँ तक कहा था कि वह सपा से भी ऊँची परशुराम की प्रतिमा लगवाएँगी। उन्होंने भगवान परशुराम के नाम पर अस्पताल बनवाने से लेकर साधु-संतों के ठहरने के लिए स्थल बनाने तक की बात कही। 

उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण समाज को बसपा ने पूरा प्रतिनिधित्व दिया है और ब्राह्मणों का बसपा पर पूरा विश्वास है। मायावती का पूरा जोर इस बात पर है कि वो ब्राह्मण हितों की रक्षा के मामले में सपा से ऊपर हैं। उन्होंने सपा से पूछा कि जब वो सत्ता में थी तब उसने परशुराम की मूर्ति क्यों नहीं लगवाई?

गणेश भगवान की मूर्ति पटक-पटक कर तोड़ रही बुर्का पहने महिला: वीडियो वायरल, इस्लामी कट्टरपंथी मना रहे जश्न

एक दुकान में भगवान गणेश की मूर्तियों को तोड़ने वाली बुर्का पहने एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। नीचे आप उस वीडियो को देख सकते हैं।

वीडियो में, बुरका पहने दो महिलाओं को पास में खड़े देखा जा सकता है। उनसे सटे ही हिंदू देवताओं (खासकर भगवान गणेश की) की मूर्तियाँ एक रैक पर रखी हुई हैं। दोनों महिलाओं में से एक वहाँ रखी मूर्तियों को एक-एक कर उठाती है और फिर उन्हें फर्श पर फेंक कर तोड़ती जाती है।

किसी मॉल या दुकान के अंदर शूट हुआ यह वीडियो जल्द ही वायरल हो जाता है। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने मूर्तियों को तोड़ने और ऐसा करने के लिए महिला को प्रोत्साहित करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया।

इनमें से कुछ लोगों की राय दिलचस्प भी रही। उनके अनुसार मूर्तियों केवल तभी तोड़ा जाना चाहिए जब अल्लाह इसकी आज्ञा दे। अल्लाह कैसै आज्ञा देगा, यह नहीं बताया। और हाँ, ऐसे लोगों के अनुसार अल्लाह से सीधे निर्देश के बिना मूर्तियों को तोड़ना अनुचित है।

ट्विटर के अलावा फेसबुक पर भी बहरीन की इस महिला के ‘साहस’ को जम कर सलाम किया गया।

फेसबुक पर मोदी, संप्रदाय विशेष, बीफ तक ले गए लोग इस बहस को

इस्लामी कट्टरपंथियों ने फेसबुक पर भी इसका जश्न मनाया। नीचे के दो स्क्रीनशॉट इसके उदाहरण हैं।

मूर्ति तोड़ने पर वाहवाही और प्रोत्साहन!
अल्लाह हू अकबर – भीड़ हो या दंगा या मूर्ति-भंजन… यह आवाज कट्टरपंथियों के मुँह से निकल ही आती है

इस पूरे प्रकरण में अंततः एक अच्छी खबर आई। बहरीन के गृह मंत्रालय ने वायरल वीडियो के बारे में एक बयान जारी किया। बयान के अनुसार स्थानीय पुलिस ने 54 वर्षीय महिला को जानबूझकर एक दुकान में धार्मिक मूर्तियों को तोड़ने के लिए समन (बुलावा भेजा) किया है। मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले में कानूनी कार्यवाही चल रही है।

सुशांत की बॉडी, काला बैग थामे एक व्यक्ति और एक मिस्ट्री महिला: नए वीडियो से बढ़ा रहस्य, परिवार ने उठाए सवाल

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मामले में एक और बड़ा रहस्य सामने आया है। एक तरफ सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियाँ इस मामले की जाँच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सामने आए एक वीडियो में एक मिस्ट्री बैग और एक संदिग्ध महिला के देखे जाने के बाद चर्चा का बाजार फिर से गर्म हो गया है। इस वीडियो में एक और व्यक्ति भी दिख रहा है, जिसकी पहचान हो गई है।

ये वीडियो ‘रिपब्लिक टीवी’ ने जारी किया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि सुशांत सिंह राजपूत के मृत शरीर के पास एक व्यक्ति काले रंग का बैग लेकर खड़ा है। गुलाबी रंग की टोपी पहने उस आदमी को सुशांत सिंह राजपूत का हाउस मैनेजर दीपेश सावंत बताया जा रहा है, जो काला बैग लेकर सीढ़ियों से उतर रहा है। साथ ही एक महिला भी दिख रही है, जो नीले और सफ़ेद रंग की स्ट्रीप्ड शर्ट पहनी हुई है।

इस वीडियो में उक्त महिला को सुशांत के अपार्टमेंट वाली कंपाउंड में दौड़ते हुए देखा जा सकता है। वो लड़की दौड़ते हुए आकर उस आदमी से मिलती है, जो काला बैग थामे हुए है। अगले फुटेज में उस आदमी के हाथ से बैग गायब नज़र आता है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि जब ये होता है, तब मुंबई पुलिस वहीं पर मौजूद रहती है। इस बैग का क्या रहस्य है और वो ‘मिस्ट्री वुमन’ कौन है, इस पर सवाल उठ रहे हैं।

इस वीडियो के सामने आने के बाद सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के वकील ने भी बैग, उसे थामे व्यक्ति और लड़की को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वकील विकास सिंह ने कहा कि इस वीडियो में जो दिख रहा है वो सब संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि उक्त व्यक्ति क्या सामान लेकर जा रहा है और वो लड़की कौन है, इसका खुलासा होना चाहिए। उन्होंने पूछा कि कहीं ये सब सबूत मिटाने के लिए तो नहीं क्या गया?

विकास सिंह का पूछना था कि मुंबई पुलिस की मौजूदगी में अनजान लोग घटनासरथल पर कैसे आवाजाही कर रहे हैं? उन्होंने पूछा कि क्राइम सीन में ये सब कैसे हो रहा है? साथ ही उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि उनके पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का समय नहीं लिखा हुआ है, जो कि एक महत्वपूर्ण डिटेल है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को मारा गया या फिर मार कर लटकाया गया, ऐसा मौत का समय जाने बिना स्पष्ट नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि सुबह में सुशांत के जूस पीने की बात कही गई, लेकिन किसी ने भी उन्हें जूस पीते नहीं देखा है। उन्होंने कूपर अस्पताल को बदनाम हॉस्पिटल बताते हुए कहा कि वहाँ से किसी को भी सर्टिफिकेट मिल जाता है। उन्होंने कहा कि कूपर में सुशांत को ले जाना ही संदिग्ध है। वहीं वीडियो में बैग थामे व्यक्ति और मिस्ट्री लड़की को बातें करते हुए भी देखा जा सकता है, जिस पर चर्चा हो रही है।

वहीं सुशांत सिंह राजपूत के दोस्त रहे गणेश हीरवरकर ने भी बड़ा दावा करते हुए कहा कि निर्देशक संदीप सिंह को सुशांत की मौत की जानकारी पहले से ही थी, ऐसा उनकी टीम से जुड़े सूत्रों ने उन्हें जानकारी दी है। उन्होंने मुम्बई पुलिस की आत्महत्या वाली थ्योरी को नकारते हुए इसे हत्या करार दिया। गणेश ने पुलिस से सुरक्षा माँग करते हुए कहा है कि वो सीबीआई के सामने सारी बातों को रखेंगे।