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‘हॉं हम हिंदू हैं, हिंदुस्तान हमारा है’: राम मंदिर आंदोलन की एक साध्वी जिसे तोड़ नहीं पाई दिग्विजय की पुलिस

माँ-बाप ने नाम रखा निशा। लेकिन राम नाम की उसने ऐसी अलख जगाई कि दुनिया ने उसे साध्वी ऋतम्भरा के नाम से जाना। भक्तों की दीदी मॉं साध्वी ऋतम्भरा राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख किरदारों में से एक हैं।

ये साध्वी ऋतम्भरा ही थीं, जिन्होंने कहा, “हॉं हम हिंदू हैं, हिंदुस्तान हमारा है।” जिनमें खुलकर यह कहने का साहस था, “महाकाल बनकर दुश्मन से टकराएँगे, जहॉं बनी है मस्जिद, मंदिर वहीं बनाएँगे।”

साध्वी ऋतम्भरा का वह ओजस्वी भाषण आप नीचे सुन सकते हैं;

राम जन्मभूमि को वापस पाने का साध्वी ऋतंभरा का संघर्ष आसान नहीं था। उन्हें नीचा दिखाने की तमाम कोशिशें तत्कालीन सरकारों ने की थी। मुस्लिम तुष्टिकरण की मसीहा इन सरकारों ने इस तरह का माहौल बनाया गया जैसे वह साध्वी न होकर कोई आतंकी हों।

ऐसे ही एक वाकये का जिक्र करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने एक इंटरव्यू में बताया था, “एक बार दिग्विजय सिंह की सरकार ने मुझे गिरफ्तार कर बीच रास्ते में ही उतार दिया। रात का समय था। पैदल चलते समय मैं ठोकर खा कर गिर गई। एक पुलिसवाले ने मुझसे कहा- लाओ साध्वी तुम्हारा हाथ पकड़ लूँ। मैंने उसे जवाब देते हुए कहा- चंडी का हाथ पकड़ने का तुम में सामर्थ्य है?”

5 अगस्त को अयोध्या में भव्य राम मंदिर के भूमि पूजन से पहले दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने आंदोलन से जुड़ी यादें ताजा की है। साध्वी ऋतंभरा ने बताया कि उन्होंने सरयू का जल हाथ में लेकर राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। अब अयोध्या में 5 तारीख को इतिहास रचने जा रहा है। उन पलों का साक्षी बनना अपने आप में गौरव की बात है। वे कहती हैं, “मेरी तरुणाई श्रीराम जन्मभूमि को अर्पित हुई, इसका अगाध सुख है।”

वे कहती हैं राम मंदिर आंदोलन के लिए प्राण गँवाने वाले और जिन्होंने इस आंदोलन का नेतृत्व किया उनकी बस एक ही चाहत थी कि रामलला हमारे मंदिर में विराजमान हों। उनका संकल्प अब पूरा होने जा रहा है। 491 वर्षों तक श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का स्वप्न संजोए जिन लाखों रामभक्तों ने संघर्ष करते हुए अपना बलिदान दिया, ये दिन उनकी आत्मिक शांति को समर्पित होगा।

अयोध्या आंदोलन का सफर

साध्वी ऋतम्भरा 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा बनीं। विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा संचालित “श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन” का एक तेजस्वी चेहरा बनकर उभरीं। उन्होंने इस आंदोलन की सफलता के लिए सारे भारत में धर्म जागरण किया।

उन्होंने इस आंदोलन के लिए हिन्दू समाज की विभिन्न जातियों को एकता के सूत्र में बाँधा। इसी एकात्म हुई हिन्दू शक्ति ने इस आंदोलन की सफलता के रूप में अपने आराध्य श्री रामलला की जन्मभूमि पर अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण का सम्पूर्ण न्यायालयीन अधिकार प्राप्त किया।

राम मंदिर आंदोलन के समय की बातों का जिक्र करते हुए साध्वी ऋतंभरा बताती हैं कि कुछ लोगों ने उनका इस्तेमाल करने भी कोशिश की। आंदोलन के समय एयरपोर्ट पर लोग मुझे आतंकवादी के रूप में देखते थे। 10 घंटे मुझे बैठाया जाता था। मेरी चेकिंग की जाती थी। लेकिन मुझे पता था कि मैंने कोई अपराध नहीं किया था।।

उन्होंने बताया कि पुलिस से बचने के लिए वे उस समय भेष बदल कर यात्रा करती थीं। उस समय का दौर ऐसा था कि उन्हें खेतों, स्टेशनों, भिखारियों के बीच कितनी रातें भूखे-प्यास काटनी पड़ी। कई बार तो वे अनजान लोगों के घर भी आश्रय लेने को मजबूर हुईं। पुलिस के डर से लोग अपने घरों में उन्हें ठहराने से भी डरने लगे थे।

फिलहाल साध्वी ऋतंभरा श्रीकृष्ण की लीला स्थली वृंदावन में वात्सल्य ग्राम चलाती हैं। वात्सल्य ग्राम की पूरी परिकल्पना के माध्यम से वे भारतीय पारिवारिक व्यवस्था की सकारात्मकता पर जनमानस का ध्यान आकर्षित कर उसका प्रसार करने का सम्पूर्ण प्रयास कर रही हैं।

‘5 अगस्त से नाम होगा श्रीनगर’: 370 हटने का दर्द कम करने के लिए हाइवे का नाम बदलेगा पाकिस्तान

पिछले साल भारत सरकार ने 5 अगस्त को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को निरस्त कर दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर दो केंद्र शासित देशों में तब्दील हो गया। 

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान इस फैसले से सकपका गया। उसने इस दिन को ‘काला दिवस’ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया और अब कश्मीर पर कब्जे के मंसूबों को चकनाचूर होने के बाद अपने एक हाइवे का नाम श्रीनगर करने का फैसला किया है।

पाकिस्तान सरकार पिछले 70 सालों से जम्मू-कश्मीर को अपना हिस्सा बताकर उस पर कब्जा करने के झूठे सपने देखती रही। लेकिन, राज्य से अनुच्छेद 370 हटते ही सभी उम्मीदों पर पानी फिर गया। ऐसे में अब जब भारत 5 अगस्त को भारत में जम्मू और कश्मीर के एकीकरण की पहली वर्षगाँठ पूरी कर रहा है, तब पाकिस्तान ने एक प्रतीकात्मक कार्रवाई करने का फैसला किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, “हमारी मंजिल श्रीनगर है इंशाल्लाह… 5 अगस्त से अब कश्मीर हाइवे का नाम बदल कर श्रीनगर हाइवे कर रहे हैं। ये हमें हमारे लक्ष्य तक ले जाएगा ।”

अपने बयान में कुरैशी ने कहा कि उनकी सरकार अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों, सांसदों को नियंत्रण रेखा पर ले जाएगी और भारत की क्रूरता के कथित ‘पीड़ितों’ से बात करेगी। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के पाकिस्तानी जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता से खड़े होंगे और घाटी में भारत के कथित अत्याचारों को उजागर करेंगे।

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है कि पाकिस्तान ने इस प्रकार की प्रतिकात्मक रूप से प्रतिक्रिया दी हो। पिछले साल भी पाकिस्तान और चीन मिलकर इस मामले को UNSC ले गए थे। हालाँकि, वहाँ के सदस्यों ने इसे द्विपक्षीय मामला बताकर इसे दोनों देशों पर छोड़ दिया। अब उन्होंने इसी प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया के रूप में कश्मीर हाइवे को आधार बनाया है।

बता दें कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के प्रमुख रास्तों में कश्मीर हाइवे को गिना जाता है। यह रास्ता इस्लामाबाद के पश्चिम में स्थित पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पूर्व में स्थित ई-75 एक्सप्रेसवे से कनेक्ट करता है। इस हाइवे की कुल लंबाई 25 किलोमीटर है।

कॉन्ग्रेस नेता अनूप पटेल पकड़ा गया: AIMIM के कादिर खान संग माँ-बेटी को आत्मदाह के लिए उकसाया था

लखनऊ पुलिस ने गुरुवार (जुलाई 30, 2020) को कॉन्ग्रेस नेता अनूप पटेल को लखनऊ-बाराबंकी बॉर्डर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अनूप पटेल पर आरोप है कि उसने अमेठी की उन माँ-बेटी को उकसाया था, जिन्होंने 17 जुलाई को लोक भवन के सामने खुद में आग लगाई थी।

अनूप पटेल के अलावा इस मामले में पुलिस ने 17 जुलाई को AIMIM नेता कादिर खान के साथ सुल्तान और आसमाँ को हिरासत में लिया था। अनूप पटेल वहाँ से फरार हो गया था।

यूपी पुलिस ने इससे पहले इस मामले में 4 लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की थी। इसमें AIMIM के नेता कादिर खान और यूपी में कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अनूप पटेल का नाम शामिल था। पड़ताल में मालूम हुआ था कि इस घटना के पीछे आपराधिक षड्यंत्र था जिसमें दोनों नेताओं के साथ कुछ अन्य लोग भी शामिल थे। इन्हीं लोगों ने महिला को सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने के नाम पर आत्मदाह करने को कहा था।

डॉक्टर्स के अनुसार, माँ-बेटी द्वारा आत्मदाह के प्रयास में माँ का शरीर 80 प्रतिशत झुलस गया था जिसके चलते 22 जुलाई को उसकी मौत हो गई। इस मामले में अनूप पटेल के खिलाफ न्यायालय से गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था और पुलिस टीम संभावित स्थानों पर दबिश दे रही थी। आखिरकार, गुरुवार को पुलिस ने अनूप पटेल को दबोच लिया।

पूरा मामला

17 जुलाई को साफिया नाम की महिला और उसकी बेटी गुड़िया ने सीएम ऑफिस के सामने आत्मदाह का प्रयास किया था। एसीपी हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा के मुताबिक अमेठी के जामो कोतवाली क्षेत्र के कस्बा निवासी साफिया की नाली के विवाद में दबंगों से 9 मई को मारपीट हुई थी। इसके बाद उसकी बेटी गुड़िया ने आरोपित के बेटे अर्जुन सहित चार पर छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया था। वहीं, अर्जुन की तहरीर पर साफिया, गुड़िया सहित तीन लोगों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया था। 

इसके बाद 17 जुलाई को यह घटना घटित हो गई। इसका विपक्ष ने जम कर फायदा उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में योगी सरकार को गरीबों की कोई चिंता नहीं है। सवाल उठाने वाले नेताओं में आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, बसपा की मायावती और सपा के अखिलेश यादव जैसे नेता शामिल थे। हालाँकि, बाद में पुलिस आयुक्त ने यह जानकारी दी कि दोनो माँ-बेटी को उकसाने में कॉन्ग्रेस नेता और ऑल इंडिया मजलिस एक इत्तेहाद उल मुस्लिमिन के कादिर खान का हाथ था।

उन्होंने बताया था कि इस मामले में AIMIM नेता कादिर खान, कॉन्ग्रेस के अनूप पटेल समेत 4 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) नवीन अरोड़ा ने भी इस घटना से जुड़ी कुछ बातें बताई। उन्होंने कहा, “एक महिला को पुलिस वालों ने बचा लिया जबकि दूसरी की हालत गंभीर है।” 

महबूबा मुफ्ती की हिरासत 3 महीने और बढ़ी, सज्जाद लोन बोले- मैं आजाद हूँ, लेकिन इसने मुझे बदल दिया

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की हिरासत शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को 3 महीने के लिए बढ़ा दी गई। पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने से पहले मुफ्ती समेत कई नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे कई नेताओं के हाउस अरेस्ट की अवधि खत्म की गई।

बता दें, मई में भी पूर्व मुख्यमंत्री की हिरासत को तीन महीने बढ़ाया गया था जो 5 अगस्त को खत्म होने वाली थी। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक मुफ्ती अपने आधिकारिक आवास फेयरव्यू बंगले में अगले 3 महीने और हिरासत में ही रहेंगी। इस बंगले को जेल घोषित किया गया है और उन्हें कोरोना महामारी के मद्देनजर यहाँ शिफ्ट किया गया है।

आदेश में कहा गया, “कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने हिरासत की अवधि आगे विस्तारित करने की सिफारिश की है और इस पर गौर करने के बाद इसे जरूरी समझा गया।”

वहीं, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद गनी लोन को शुक्रवार को हिरासत से रिहा कर दिया गया। इसकी जानकारी लोन ने ट्वीट पर दी है। लोन को भी अनुच्छेद 370 हटने के बाद हिरासत में लिया गया था।

उन्होंने लिखा, ”आखिरकार एक साल पूरे होने से 5 दिन पहले मुझे बताया गया है कि मैं आजाद हूँ। कितना कुछ बदल गया है, मैं भी बदला हूँ। जेल का अनुभव नया नहीं था। लेकिन पहले वाले शारीरिक प्रताड़ना वाले थे, ये मानसिक तौर पर थका देने वाला था। उम्मीद कर रहा हूँ जल्दी बहुत कुछ साझा करूँगा।”

लोन की रिहाई के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा कि सुनकर अच्छा लगा कि सज्जाद लोन को अवैध नजरबंद से रिहा कर दिया गया है। उम्मीद है कि इसी तरह अवैध नजरबंदी में बंद दूसरे लोगों को भी रिहा किया जाएगा।

बता दें, महबूबा मुफ्ती के साथ हिरासत में जाने वाले कई नेता थे। इसमें फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, सज्जाद लोन जैसे कई नेताओं का नाम शामिल था। लेकिन मार्च में हिरासत के आठ महीने बाद उमर अब्दुल्ला को रिहा किया गया। वहीं, सज्जाद लोन और पीडीपी नेता वाहीन को भी एमएलए हॉस्टल से मुक्त करके हाउस अरेस्ट में शिफ्ट किया गया था।

‘सुशांत को दवाइयाँ देती थी रिया चकवर्ती’: ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया, SC में बिहार सरकार

रिया चकवर्ती की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। सुशांत सिंह राजपूत के बॉडीगार्ड ने रिया पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही बिहार सरकार ने रिया की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट लगाई है।

रिया चक्रवर्ती के मामले को पटना से मुंबई में ट्रांसफर करने की माँग वाली याचिका पर आपत्ति जताते हुए बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कैविएट लगाई है। मुंबई पुलिस पर जॉंच के लिए आई बिहार पुलिस को सहयोग नहीं देने के भी आरोप लग रहे हैं। पूछताछ के लिए आई बिहार पुलिस को वापसी के लिए गाड़ी अंकिता लोखंडे ने उपलब्ध कराया।

बिहार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि रिया चक्रवर्ती की याचिका पर कोई भी आदेश देने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए। इसके अलावा राज्य सरकार ने सुशांत के पिता द्वारा लगाए गए आरोपों का भी उल्लेख किया है।

बिहार सरकार के अटॉर्नी जनरल ने मुंबई पुलिस पर बिहार पुलिस को सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “जब एक राज्‍य की पुलिस दूसरे राज्‍य में जाँच के लिए जाती है तो संबंधित सरकार और उसके अधिकारी सहयोग करते हैं। यह दुर्भाग्‍यपूर्ण है कि वे (Mumbai Police) सहयोग नहीं कर रहे हैं।”

जब मुंबई पुलिस के इस रवैये को लेकर सवाल किया गया तो महाराष्ट्र के गृह राज्‍यमंत्री ने कहा, “बिहार पुलिस शायद इसलिए आई थी क्योंकि वहाँ एक अलग शिकायत दर्ज की गई थी। लेकिन मुंबई पुलिस की जाँच सही दिशा में है। मामले को सीबीआई को सौंपने की जरूरत नहीं है, महाराष्ट्र पुलिस जाँच करने में सक्षम है।”

रिया के खिलाफ पटना में सुशांत के पिता केके सिंह ने मामला दर्ज कराया था। वह सुशांत की गर्लफ्रेंड थीं। मुंबई पुलिस के रवैए पर उठ रहे सवालों के बीच केके सिंह ने पूछा है बिहार पुलिस की जाँच से रिया चक्रवर्ती डर क्यों रही हैं?

सुशांत के पिता द्वारा लगाए गए 15 करोड़ के हेराफेरी के आरोप में ईडी ने रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। ईडी ने केके सिंह से मिली जानकारी के आधार पर केस दर्ज किया है। आने वाले दिनों में रिया और उनके परिवार को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। प्रवर्तन निदेशालय सुशांत की रकम और उनके बैंक खातों के कथित दुरुपयोग के आरोपों की आगे की जाँच में जुटी है।

इस बीच सुशांत के बॉडीगार्ड ने रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में उनके पिता के आरोपों को सही ठहराया है। उन्होंने यह भी बताया कि रिया चक्रवर्ती और उनका परिवार सुशांत के पैसे पर मौज करता था। वह सुशांत को कोई दवाई देती थी, जिसके कारण वह ज्यादातर सोते रहते थे। बॉडीगार्ड ने बताया कि जब वह ये दवाई लेने मेडिकल शॉप पर जाता था तो दुकान वाले घूरकर उससे सवाल जरूर करते थे कि यह दवाई किसकी है।

‘रोड जाकर कहीं और बनाओ’: हैदराबाद में मस्जिद के पास वक्फ बोर्ड ने सड़क का निर्माण बंद करवाया

हैदराबाद से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहॉं एक मस्जिद की बाहरी दीवार को नुकसान पहुॅंचने की वजह से सड़क का निर्माण बंद करवा दिया गया।   

सियासत की रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद महानगर विकास प्राधिकरण शहर के हाइटेक सिटी इलाके में सड़क निर्माण कर रहा था। इस इलाके में क़ुतुब शाही नाम की मस्जिद मौजूद है। निर्माण कार्य के दौरान इस मस्जिद की दीवार का बाहरी हिस्सा टूट गया।  

घटना की जानकारी मिलते ही वक्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद सलीम घटनास्थल पर पहुंचे। उनके साथ बोर्ड के कुछ सदस्य और समुदाय के कुछ लोग भी थे। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद महानगर विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों पर निर्माण रोकने का दबाव बनाया।  

प्राधिकरण 100 फीट की सड़क का निर्माण कर रहा था। इसी दौरान मस्जिद की बाहरी दीवार टूट गई। इसके बाद हैदराबाद वक्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद सलीम ने कर्मचारियों को वह दीवार को वापस बनाने का आदेश दे डाला।

घटना से नाराज मुस्लिम इतने पर ही रुके नहीं और कहा इसके बाद कोई मस्जिद को हाथ नहीं लगाएगा। सड़क कहीं और बनवा लेने की बात भी कही। मोहम्मद सलीम का कहना था कि प्राधिकरण को उन्हें निर्माण कार्य के बारे में सूचित करना चाहिए था। उनके मुताबिक़ वक्फ़ बोर्ड की ज़मीन किसी और काम के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकती है। 

इसके पहले भी मस्जिद को लेकर तेलंगाना में समुदाय विशेष के लोग ऐसा ही रुख दिखा चुके हैं। हैदराबाद सचिवालय में पुनर्निर्माण कार्य चल रहा था। इस दौरान सचिवालय परिसर में स्थित मस्जिद और मंदिर को नुकसान पहुँचा था। इस घटना के बाद एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी समेत कई नेताओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की धमकी दी थी।  

इस मुद्दे पर ओवैसी समेत कई मौलवियों और नेताओं ने साझा तौर पर अपना बयान जारी किया था। जारी किए गए बयान में उन्होंने कहा था कि मस्जिद अल्लाह की संपत्ति है। इसे न तो नुकसान पहुँचाया जा सकता है और न ही इसकी जगह बदली जा सकती है। इसके बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने कहा था कि नए सचिवालय परिसर में नई मस्जिद बना कर दी जाएगी। 

मिलिए खुशबू सुंदर से, जानिए क्यों कहा- राहुल गाँधी माफ करें, पर मैं कठपुतली या रोबोट नहीं

34 साल बाद आई नई शिक्षा नीति का ज्यादातर तबकों में स्वागत हो रहा है। हालॉंकि कॉन्ग्रेस जैसे विपक्षी, मीडिया गिरोह और लिबरल बुद्धिजीवियों को यह भी नहीं पच रहा। इस बीच अभिनेत्री और कॉन्ग्रेस नेता खुशबू सुंदर ने पार्टी स्टैंड से हटकर नई नीति का समर्थन किया है।

खुशबू ने शिक्षा नीति को लेकर चार ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने कहा, “नई शिक्षा नीति 2020 पर मेरे विचार मेरी पार्टी से अलग हैं और मैं इसके लिए राहुल गाँधी से माफी माँगती हूँ। लेकिन मैं कठपुतली या रोबोट की तरह सिर हिलाने के बजाए तथ्यों पर बात करती हूँ। हर चीज पर हम अपने नेता से सहमत नहीं हो सकते हैं और एक नागरिक के तौर पर बहादुरी से अपनी राय रखने का साहस रख सकते हैं।”

दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा कि राजनीति सिर्फ हल्ला मचाने के लिए नहीं है। ये मिलकर काम करने का विषय है, जिसे भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री को समझना होगा। हम विपक्ष के रूप में इसे विस्तार से देखेंगे और इसकी कमियों को इंगित करेंगे।

उन्होंने आगे लिखा, “मैं सकारात्मक पहलुओं को देखना पसंद करती हूँ और नकारात्मक चीजों पर काम करती हूँ। हमें समस्याओं के समाधान की पेशकश करनी है न कि केवल आवाजें बुलंद करनी हैं। विपक्ष का मतलब देश के भविष्य के लिए काम करना भी है। मैं अटल जी की जिंदगी से एक अंश लेना चाहूँगी।”

अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “संघी ज्यादा खुश न हों। मैं बीजेपी में नहीं जा रही हूँँ। मेरी राय पार्टी से अलग है, लेकिन मैं खुद की सोच के साथ एक व्यक्ति हूँ। नई शिक्षा नीति में कुछ जगहों पर खामियाँ हैं, लेकिन मुझे अभी भी लगता है कि हम सकारात्मकता के साथ बदलाव को देख सकते हैं।”

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक ने बुधवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को मंजूरी देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है क्योंकि 34 साल तक देश की शिक्षा नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ था।

वहीं, नई शिक्षा नीति पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने कहा कि इस नीति गुणवत्ता, पहुँच, जवाबदेही, सामर्थ्य और समानता के आधार पर एक समूह प्रक्रिया के अंतर्गत बनाया गया है। जहाँ विद्यार्थियों के कौशल विकास पर ध्यान दिया गया है, वहीं पाठ्यक्रम को लचीला बनाया गया है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सके। उन्होंने कहा, “मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारत अपने वैभव को पुनः प्राप्त करेगा।”

‘हर जगह गिरे तुम्हारी सरकार, MP कॉन्ग्रेस से नफरत करते हैं’: कमलनाथ बने ‘भक्त’ तो चढ़ गए कट्टरपंथी

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ ने अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर के निर्माण का स्वागत किया है। उन्होंने शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि देशवासियों को लम्बे समय से इसकी अपेक्षा और आकांक्षा थी। मंदिर निर्माण हर भारतीय की सहमति से हो रहा है और यह केवल भारत में ही संभव है।

इस वीडियो में कमलनाथ के पीछे भगवान हनुमान की तस्वीर भी नजर आ रही थी। कभी अपने को हनुमान भक्त और कभी शिवभक्त दिखाने वाले कमलनाथ अब राम भक्त के रूप में हैं।

लेकिन कमलनाथ द्वारा श्रीराम मंदिर के समर्थन में दिए गए बयान के बाद एक विशेष समुदाय के लोगों को रास नहीं आई। ट्विटर पर ही कमलनाथ के इस वीडियो में कुछ लोगों ने कमेंट में लिखा है कि यह सभी भारतीयों की सहमति से नहीं बना है।

एक ट्विटर यूजर फ़राज़ ने कमलनाथ के इस वीडियो के जवाब में लिखा है कि राम मंदिर पर आपके इस नजरिए का अंजाम आपको अगले चुनाव में भुगतना पड़ेगा। वहीं, आफताब अहमद मलिक ने इस वीडियो के जवाब में बेहद निराशाजनक भाव में लिखा है कि वो MP कॉन्ग्रेस से नफरत करते हैं और अब तक वो कमलनाथ के समर्थक थे, लेकिन अब से नहीं हैं।

‘काकावाणी’ ट्विटर हैंडल से पोस्ट करने वाले अली सोहराब ने कमलनाथ का यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा है – “सेक्युलरिज्म”

अली सोहराब के इस ट्वीट के जवाब में शेख अजहरुद्दीन ने कमलनाथ पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए लिखा है कि अच्छा हुआ मध्य प्रदेश में इनकी सरकार गिर गई और अब राजस्थान के साथ ही बाकी राज्यों में भी गिर जानी चाहिए।

अली सोहराब ने एक अन्य ट्वीट में बाबरी मस्जिद की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि आपका घर भी विवादित घोषित किया जा सकता है। अली सोहराब के इस ट्वीट के जवाब में मिस्त्र इरफ़ान ने लिखा है, “यह लोग इसी का तो फायदा उठा रहे हैं कि मुसलमान लोग हर चीज में शान्ति चाह रहे हैं। इनको हर जगह से दबा दिया जा रहा है। एक दिन यही शांति और हमारी खामोशी हमें ले डूबेगी।”

उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त को अयोध्या में होने वाले श्रीराम मंदिर भूमिपूजन को लेकर समुदाय के कई दिग्गज नेता से लेकर अन्य लोग भी अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में बयान दिया है कि बाबरी विध्वंस में कॉन्ग्रेस का भी हाथ था। उन्होंने कहा कि मस्जिद के विध्वंस में संघ के साथ कॉन्ग्रेस भी मिली हुई थी।

इसके अलावा ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा था, “हम भूल नहीं सकते कि 400 साल तक अयोध्या में बाबरी मस्जिद खड़ी रही थी और उसे 1992 में अपराधी भीड़ ने ढहा दिया था…।”

ट्विटर ट्रोल राणा अयूब ने भी आज ट्वीट करते हुए लिखा है कि देश में कोरोना के 55000 नए केस सामने आए हैं, चलो मंदिर बनाते हैं।

भूमि पूजन के लिए भेजी जाएगी दलित मंदिरों की मिट्टी, VHP ने कहा- दलितों के ऋणी हैं

दशकों के इंतजार के बाद अब जल्द ही वो घड़ी आने वाली है जिसका हर हिंदू को इंतजार था। 5 अगस्त को अयोध्या नगरी में राम मंदिर का भूमि पूजन होगा। इसे सुनकर हर जगह उत्सव मनाया जा रहा है। इसी बीच खबर आई है कि देश भर के बड़े दलित मंदिरों से इस भूमि पूजन के लिए मिट्टी एकत्रित की जा रही है।

इसकी जानकारी विश्व हिंदू परिषद ने गुरुवार (जुलाई 30, 2020) को दी। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि संत रविदास मंदिर (काशी), महर्षि वाल्मिकी आश्रम (सीतामढ़ी), वाल्मिकी आश्रम (दिल्ली) और तांत्या भिल मंदिर (मध्यप्रदेश ) की मिट्टी भूमि पूजन के लिए इकट्ठा की जा रही है। इसके अलावा भीम राव आंबेडकर के जन्मस्थान व नागपुर स्थित उस वाल्मिकी मंदिर की मिट्टी भी ली जाएगी जहाँ आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया।

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महासचिव मिलिंद परांडे ने इस संबंध में कहा कि भगवान राम ने सामाजिक एकता के संदेश पर जोर दिया था और राम मंदिर भारत की एकता का प्रतिनिधित्व करेगा।

वहीं, संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, “दलित समुदाय हिंदू समाज का एक अभिन्न अंग है… इस समुदाय ने धर्मांतरण का विरोध किया है और गौ रक्षा के लिए सबसे ज्यादा लड़ाई लड़ी है। विहिप उनका ऋणी है।”

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ राम मंदिर भूमि पूजन की तैयारियाँ अपने चरम पर हैं। वहीं विश्व हिंदू परिषद कुल 11 पवित्रस्थलों से मिट्टी इकट्ठा करके अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए भेजने वाला हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर आंदोलन की अगुवाई करने वाले विहिप ने हिंदू, जैन मंदिरों और सिख गुरुद्वारों को मिलाकर 11 पवित्रस्थलों के पानी और मिट्टी को इकट्ठा किया है।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, इनमें सिद्ध कालका पीठ, प्राचीन भैरव मंदिर, गुरुद्वारा शीशगंज, गौरीशंकर मंदिर, श्री दिगंबर जैन, लाल मंदिर, प्राचीन हनुमान मंदिर, प्राचीन शिव नवग्रह मंदिर, प्राचीन काली माता मंदिर, श्री लक्ष्मी नारायण बिरला मंदिर, भगवान वाल्मिकी मंदिर और बद्री घाट झंडेवालान मंदिर शामिल हैं।

जय श्रीराम उन्माद का नारा, मुस्लिमों पर हमले के लिए इस्तेमाल: हिंदू घृणा से लबालब ​विकिपीडिया

बहुत से लोगों के लिए विकिपीडिया जानकारी का बड़ा माध्यम है। खुद को निष्पक्ष बताने वाले विकिपीडिया का लेफ़्ट की तरफ झुकाव लंबे समय से रहा है। हर मौके पर उसकी हिंदुओं से घृणा दिख ही जाती है। अयोध्या में भूमि पूजन से पहले उसने ‘जय श्रीराम’ के नारे पर दुष्प्रचार शुरू कर दिया है। इसे युद्धोन्माद (वार क्राई) के नारे के तौर पर पेश किया है।

विकिपीडिया ने जिस तरीके से जय श्रीराम नारे के बारे में बताया है वह हैरान करने वाला है। इस नारे के परिचय देने वाले शुरूआती हिस्से में लिखा गया है कि पिछले कुछ सालों में जय श्रीराम का उपयोग ऐसी भावनाएँ साझा करने के लिए किया गया है जो आस्था पर केन्द्रित हैं। इसके बाद लिखा है कि इस नारे का इस्तेमाल ज़्यादातर भारत की हिन्दू राष्ट्रवादी पार्टी, भाजपा करती है। उसने 20वीं शताब्दी के दौरान इस नारे का इस्तेमाल सार्वजनिक जगहों पर हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए किया।

जय श्रीराम का विकिपीडिया पेज

लेकिन जय श्रीराम नारे को लेकर विकिपीडिया का परिचय यहीं ख़त्म नहीं होता है। इसके आगे उसमें लिखा है, “भाजपा इसे लड़ाई के पहले कहे जाने वाले नारे की तरह इस्तेमाल करती थी। भाजपा इस नारे का इस्तेमाल अलग पंथ के लोगों पर सांप्रदायिक अत्याचार करने के लिए करती थी।” जबकि जय श्रीराम देश की हिन्दू आबादी के लिए हमेशा से ही एक पवित्र नारा रहा है। यह आज से नहीं बल्कि सदियों से दोहराया जा रहा है।  

ऐसे नारे के बारे में विकिपीडिया लिखता है, “भाजपा इस नारे का उपयोग चुनाव के दौरान करती है।” यह श्रीराम में आस्था रखने वालों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। इसके अलावा विकिपीडिया ने जय श्रीराम के बारे में लिखा है कि इसका इस्तेमाल मुस्लिमों के विरुद्ध भी किया जाता है। जबकि विकिपीडिया ने इस बात का ज़िक्र नहीं किया है कि मीडिया ने मुस्लिमों के साथ हुई इस तरह की जितनी भी घटनाओं का ज़िक्र किया था वह फ़र्ज़ी निकले थे।

विकिपीडिया ने इसके बाद “जय श्रीराम” नारे की नींव पहली बार कहाँ पड़ी इस बारे में भी बताया है। विकिपीडिया के मुताबिक़ 1980 में शुरू हुए रामानंद सागर कृत “रामायण” में जय श्रीराम का उपयोग खूब हुआ। इसके बाद यह नारा प्रचलन में आया और लोगों ने इसे वार क्राई की तरह इस्तेमाल करना शुरू किया।  

जय श्रीराम का विकिपीडिया पेज

विकिपीडिया में यह भी लिखा गया है कि हनुमान और वानर सेना ने भी इस नारे का उपयोग किया। जब वह सीता माता को रावण की कैद से आज़ाद कराने के लिए प्रयासरत थे। विकिपीडिया के मुताबिक़ उस वक्त भी जय श्रीराम का इस्तेमाल एक ऐसे नारे के तौर पर हुआ जो लड़ाई के पहले कहा जाता है। विकिपीडिया ने यह भी लिखा है कि इस नारे का इस्तेमाल बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान भी किया गया था।  

इन बातों के आधार पर विकिपीडिया का उद्देश्य स्पष्ट है : 

विकिपीडिया दोनों घटनाओं को एक जैसा दिखाना चाहता है। हनुमान जी ने भले इस नारे नारे का इस्तेमाल रावण से लड़ाई के दौरान किया हो। लेकिन यह मुस्लिमों के खिलाफ़ उपयोग किया जाने वाला नारा नहीं हो सकता है।  

दूसरा वह बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना का उल्लेख करके हिंदुओं की छवि खराब करना चाहता है। ऐसा करने के लिए विकिपीडिया ने बाबरी मस्जिद का पूरा घटनाक्रम नहीं बताया है।    

इसके बाद विकिपीडिया ने यह बताने का प्रयास किया कि कैसे हिंसा वाली घटनाओं में जय श्रीराम का इस्तेमाल हुआ। इसके लिए गार्गी कॉलेज की एक घटना की जानकारी दी गई थी। जिसमें ऐसा आरोप लगाया गया था कि भाजपा से संबंधित लोग (हिंदूवादी विचारधारा) जय श्रीराम का नारा लगाते हुए कॉलेज में दाखिल हुए। फिर उन्होंने लड़कियों के साथ ज़्यादती और बदतमीजी की।  

इसके अलावा यह आरोप भी लगाया गया था कि सीएए का समर्थन करने वाले कुछ लोग जिनके हाथ में भगवा झंडे भी थे, वह कॉलेज में दाखिल हुए। इसके बाद उन्होंने लड़कियों के साथ ज़्यादती की। लेकिन जिस व्यक्ति ने इस घटना का अपने ट्वीट में ज़िक्र किया था, उसने कुछ ही समय बाद अपना ट्वीट हटा लिया था। बाद में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज में भी देखा था लेकिन उसमें भगवा झंडे की मौजूदगी का कोई सबूत नहीं मिला था।  

जय श्रीराम का विकिपीडिया पेज

इस मामले पर पुलिस उपायुक्त अतुल ठाकुर ने भी जानकारी दी थी। उनका कहना था कि जाँच के दौरान ऐसी कोई बात सामने नहीं आई कि आरोपित किसी राजनीतिक दल से संबंधित थे। उसमें से ज़्यादातर छात्र थे या जान-पहचान के लोग। उनका भाजपा या संघ से किसी भी तरह का संबंध नहीं था। कुछ महिलाओं ने तो इस मामले में शिकायत भी वापस ले ली थी और बयान दर्ज कराने से भी मना कर दिया था। इस मामले में अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी हुई है लेकिन घटना का किसी राजनीतिक दल से संबंध सामने नहीं आया है।  

इसके अलावा विकिपीडिया ने इस तरह की कई घटनाओं का ज़िक्र किया है जिसमें उसका वामपंथ के प्रति झुकाव साफ़ नज़र आता है। विकिपीडिया पर North East Delhi riots नाम का एक लेख है। DBigXray नाम के यूज़र ने यह लेख 25 फरवरी के दिन साझा किए गया था। इस पेज पर जाते ही दंगों की तस्वीर नहीं बल्कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा की तस्वीर नज़र आती है। इतना ही नहीं कपिल मिश्रा का नाम अलग से लिखा गया है, जिसमें उन्हें इन दंगों का आरोपित ठहराया गया है।

कुछ लोगों ने आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान का ज़िक्र किया था। जिसे विकिपीडिया ने खुद हटा दिया। अमानतुल्लाह ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ़ हो रहे प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके बाद उस पर दंगे फैलाने के लिए मामले दर्ज हुए थे। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान शाहरुख नाम के व्यक्ति ने पिस्टल लहराई और कई राउंड फ़ायर किए थे। लेकिन उसके नाम का कहीं ज़िक्र ही नहीं है। शाहरुख की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सीएए का विरोध करने वालों ने उसे सीएए का समर्थक बताया दिया, जबकि वह शुरू से ही इस दंगाइयों के साथ मिला हुआ था।  

इसके अलावा एक और लेख में यह लिखा हुआ है कि अशोक नगर स्थित एक मस्जिद पर जय श्रीराम कहते हुए भीड़ ने हमला कर दिया था। जबकि इसके उलट, इस्लामी भीड़ द्वारा किए गए हमलों का कहीं कोई उल्लेख ही नहीं मौजूद है। ऐसे तमाम वीडियो मौजूद हैं जिसमें भीड़ अल्लाह-हु-अकबर और नारा-ए-तकबीर चिल्ला रही है।लेकिन विकिपीडिया के लेख में इन घटनाओं का कोई ज़िक्र नहीं है। विकिपीडिया ने दिल्ली में हुए दंगों पर पाबंदी तक लगा रखी है, उसे कुछ रजिस्टर्ड लोग ही एडिट कर सकते हैं। जबकि विकिपीडिया इस बात का दावा करता है कि वहाँ मौजूद हर लेख कोई भी एडिट कर सकता है।  

ऑपइंडिया ने उन दंगों के बारे में विस्तार से रिपोर्ट तैयार की है। जिसे यहाँ और यहाँ पढ़ा जा सकता है।  

इस तरह की और भी कई घटनाएँ हैं जिसमें विकिपीडिया का असल चेहरा सामने आता है। एक इस्लामी यूज़र ने संघ के एक पेज पर हमला करते हुए उसे आतंकवादी संगठन बताया। जिस व्यक्ति ने यह बदलाव किया उसका बहुत पुराना हिन्दू विरोधी इतिहास रहा है। विकिपीडिया ने हाल ही में एक और लेख हटाया था जिसमें इस बात की जानकारी दी हुई थी कि कैसे तबलीगी जमात ने कोरोना वायरस फैलाया। ऐसा ही एक और बदलाव विकिपीडिया ने नाओखली दंगों के मामले में किया है। इसमें उसने हिन्दू शब्द को मुस्लिम शब्द से बदल दिया है। विकिपीडिया के इस पक्षपाती रवैये का खुलासा लैरी सेंगर ने किया था। उनका कहना था कि विकिपीडिया का स्वभाव वामपंथी विचारधारा से प्रेरित है और वह अपना रास्ता भटक चुका है।