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इंस्टाग्राम से नाबालिग छात्राओं को फँसाते, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करते, फिर कहते- मुस्लिम बनो, अपनी सहेलियों से मिलवाओ: अजमेर जैसे सेक्स स्कैंडल से राजस्थान के ब्यावर में बवाल

राजस्थान के ब्यावर शहर में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ स्कूली हिंदू छात्राओं को पहले झांसे में लेकर फँसाया, फिर ब्लैकमेल कर उनका शारीरिक शोषण किया गया। आरोपितों ने लड़कियों को होटल और रेस्टोरेंट में बुलाकर उनकी तस्वीरें और वीडियो बना लिए और बाद में उन्हें धमकाने और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की कोशिश की। इस मामले में पुलिस ने रिहान मोहम्मद (20 वर्ष), सोहेल अंसारी (19 वर्ष), लुकमान (20 वर्ष), अरमान पठान (19 वर्ष), साहिल कुरैशी (19 वर्ष) और 2 नाबालिगों को पकड़ा है।

इंस्टाग्राम पर दोस्ती, फिर जाल में फँसाने की साजिश

पुलिस जाँच में पता चला है कि आरोपित मुस्लिम युवक इंस्टाग्राम के जरिए स्कूल जाने वाली हिंदू छात्राओं से दोस्ती करते थे। वे पहले उन्हें मोबाइल फोन देते, फिर धीरे-धीरे अपने जाल में फंसाते। जब लड़कियाँ उन पर विश्वास करने लगतीं, तो वे उन्हें होटल और कैफे में मिलने के लिए बुलाते। वहाँ उनकी गोपनीय तस्वीरें और वीडियो बनाए जाते थे। इसके बाद ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू होता था। आरोपितों ने पीड़ित छात्राओं को उनकी सहेलियों से मिलवाने के लिए मजबूर किया। जब लड़कियों ने इंकार किया तो वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई।

तीन महीने से चल रहा था गंदा खेल

पुलिस की जाँच में खुलासा हुआ है कि यह पूरी साजिश पिछले तीन महीनों से चल रही थी। इस गैंग में करीब 15 युवक शामिल थे, जिन्होंने कम से कम पाँच स्कूली छात्राओं को अपना शिकार बनाया। सबसे छोटी पीड़िता महज 15 साल की है। सभी पीड़ित छात्राएँ दसवीं कक्षा में पढ़ती हैं। ये मामला तब खुला, जब एक पीड़ित छात्रा ने आरोपितों को देने के लिए अपने घर से पैसे चुराए। आरोपित इन छात्राओं ने पैसे भी वसूलते थे, ताकि वो अपना मुँह बंद रखें। वो लगातार पीड़ित छात्राओं पर धर्मांतरण का भी दबाव डालते थे।

शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई, 7 आरोपित गिरफ्तार

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। सीओ मसूदा सज्जन सिंह ने बताया कि पीड़ित छात्राओं के परिजनों की शिकायत के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट, धारा 376 (बलात्कार), और धर्म परिवर्तन के दबाव से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस ने अब तक 7 आरोपितों रिहान मोहम्मद (20 वर्ष), सोहेल अंसारी (19 वर्ष), लुकमान (20 वर्ष), अरमान पठान (19 वर्ष), साहिल कुरैशी (19 वर्ष) और 2 नाबालिगों को पकड़ा है। पुलिस ने तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। अन्य आरोपितों की तलाश में पुलिस की अलग-अलग टीमें दबिश दे रही हैं।

इस पूरे मामले को लेकर हिंदू संगठनों ने जमकर प्रदर्शन किया और कार्रवाई की माँग की। विहिप की अगुवाई में लोगों ने आरोपितों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की माँग की। विहिप के धनराज कावड़िया का कहना है कि पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया है।

बता दें कि ब्यावर का मामला अजमेर कांड से मिलता जुलता है, जिसमें सैकड़ों हिंदू लड़कियों की अस्मत लूटी गई थी। इस घिनौने मामले के खुलने के बाद कई लड़कियों ने आत्महत्या भी कर ली थी। उस मामले में अजमेर दरगाह से जुड़े लोगों, कॉन्ग्रेस के पदाधिकारियों पर आरोप लगे थे, जिसमें सजा भी सुनाई गई थी। इस मामले का खुलासा 1992 में हुआ था।

‘आखिरी किश्त मैं भर दूँगा, बस अपनी बेटी से शादी करवा दे’: बाइक लोन लेने वाले हिंदू को रिकवरी एजेंट ‘आहीम खान’ ने धमकाया, जाँच में जुटी UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में फाइनेंस कंपनी के एजेंट आहीम खान ने एक हिन्दू व्यक्ति को बाइक का लोन ना चुकाने पर प्रताड़ित किया। उसने हिन्दू व्यक्ति की पुत्री का निकाह अपने साथ करवाने का दबाव डाला। आहीम खान ने कहा कि अगर हिन्दू व्यक्ति बेटी का निकाह उससे करवा दे तो वह खुद ही बाकी EMI चुका देगा। इस मामले में पीड़ित ने FIR दर्ज करवाई है।

यह पूरा मामला लखीमपुर खीरी के भीरा थाने का है। यहाँ के रहने वाले पुत्तू लाल ने एक बाइक कर्ज के माध्यम से ली थी। वह इसकी लगातार किश्तें भी भर रहे थे। हालाँकि, पुत्तू लाल बाइक की अंतिम किश्त किसी कारण से नहीं भर पाए, जिसके बाद लोन रिकवरी एजेंट आहीम खान ने उन्हें प्रताड़ित करना चालू किया।

पुत्तू लाल को आहीम खान ने लगातार फोन करके गालियाँ दी और परेशान किया। एक दिन आहीम खान ने पुत्तू लाल को बेटी से निकाह करवाने को कह दिया। आहीम खान ने फोन पर पुत्तू लाल से कहा, “आखिरी किश्त मैं भर दूँगा, बस अपनी लड़की से शादी करवा दे।”

आहीम खान की इन धमकियों का एक ऑडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर गालियाँ भी बक रहा है। हालाँकि, इस ऑडियो की पुष्टि नहीं हो सकी है। आहीम खान की इस प्रताड़ना से तंग आकर पुत्तू लाल ने पुलिस को शिकायत दी और कार्रवाई की माँग की है।

शिकायत के बाद भीरा थाने में आहीम खान के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इसके बाद इस मामले में FIR दर्ज करवाई गई। ऑपइंडिया के पास इस मामले की FIR कॉपी मौजूद है। ऑपइंडिया ने इस मामले में भीरा थाना प्रभारी से भी बात की है।

पीड़ित ने करवाई FIR

ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया, “अभी आरोपित के विषय में सही डिटेल्स का पता नहीं लगा है। जैसे ही पूरी जानकारी सामने आती है, उसके खिलाफ दबिश डाली जाएगी। कार्रवाई के लिए मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, पीड़ित को लगातार फोन से परेशान किया जा रहा था। परेशान करने वाले के फोन के माध्यम से उसकी लोकेशन निकलवाई जा रही है।”

चुनाव आयोग से कॉन्ग्रेस की घृणा जारी, ज्ञानेश कुमार के CEC बनने पर राहुल गाँधी ने जताया ऐतराज: पार्टी नेता ने कहा- शेरो-शायरी वाला गया और कव्वाली वाला आया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई चयन समिति की बैठक में ज्ञानेश कुमार को भारत का नया मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) नियुक्त किया गया। वे राजीव कुमार की जगह लेंगे, जो मंगलवार (18 फरवरी 2025) को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। हालाँकि, इस नियुक्ति पर कॉन्ग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। वहीं, महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस नेता ने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया है। महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने उन्हें ‘कव्वाली’ वाला तक कह दिया।

ज्ञानेश कुमार को चुनने वाली समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी शामिल थे। बैठक के दौरान राहुल गाँधी ने इस चयन प्रक्रिया का विरोध किया और इसे सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका के चलते स्थगित करने की माँग की। उनका कहना था कि जब तक शीर्ष अदालत इस मुद्दे पर निर्णय नहीं ले लेती, तब तक नया सीईसी नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए था।

कॉन्ग्रेस का विरोध क्यों?

पिछले साल केंद्र सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति से संबंधित नया कानून पारित किया था, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को चयन प्रक्रिया से हटा दिया गया। पहले, यह नियुक्ति सीनियरिटी के आधार पर होती थी और चयन समिति में CJI भी शामिल होते थे। इस बदलाव को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहा है।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और यह संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि जब यह मामला 19 फरवरी को अदालत में सुना जाना है, तो सरकार को इतनी जल्दीबाजी नहीं करनी चाहिए थी।

कौन हैं ज्ञानेश कुमार?

ज्ञानेश कुमार, 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। वे उत्तर प्रदेश के आगरा के रहने वाले हैं। उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एनवायरमेंटल इकोनॉमिक्स में विशेषज्ञता हासिल की है। अपने करियर में वे केरल सरकार और भारत सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। वे भारत निर्वाचन आयोग में 14 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त नियुक्त हुए थे।

कॉन्ग्रेस नेता का विवादित बयान

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर कहा कि “शेरो-शायरी (राजीव कुमार) वाला गया और कव्वाली वाला (ज्ञानेश कुमार) आया”। उन्होंने आरोप लगाया कि चयनित नाम सरकार के हिसाब से काम करेंगे। पाटिल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ये नियुक्ति गलत है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का इंतजार करना चाहिए था।

इस बीच, सभी की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट में है। जिसमें बुधवार (19 फरवरी 2025) को मामले की सुनवाई होनी है।

गिरफ्तारी से बचा, पर कोई भी शो नहीं कर पाएगा रणवीर इलाहाबादिया: सुप्रीम कोर्ट ने ‘BeerBiceps’ को बताया ‘गंदे दिमाग वाला’, कहा- ये और इनके साथी निचले स्तर तक गिर चुके हैं

पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। उनकी गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने इलाहाबादिया को जाँच में सहयोग देने को कह़ा है। इलाहाबादिया के कोई भी नए शो करने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबादिया को राहत देते हुए उसकी काफी आलोचना की है।

इलाहाबादिया की तरफ से गिरफ्तारी पर रोक लगाने की माँग करने वाली याचिका की सुनवाई मंगलवार (18 फरवरी, 2025) को सुप्रीम कोर्ट ने की है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस कोटीश्वर सिंह ने की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “मुंबई और गुवाहाटी में दर्ज FIR के तहत याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाती है, बशर्ते कि वह समन किए जाने पर जाँच में शामिल हो। उसे गिरफ्तारी से अंतरिम राहत इस शर्त पर दी गई है कि वह पुलिस थाने के भीतर बिना किसी वकील के जाँच में पूरा सहयोग देगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबादिया को लताड़ लगाते हुए कहा, “इस तरह के व्यवहार की आलोचना की जानी चाहिए। आप समाज को हल्के में नहीं ले सकते क्योंकि आप लोकप्रिय हैं। क्या धरती पर कोई ऐसा है जो उसकी इस भाषा को पसंद करेगा। उसके दिमाग में बहुत गंदगी है जिसकी उसने उल्टी कर दी है। हम उसे राहत क्यों दे भला?”

इलाहाबादिया की भाषा को सुप्रीम कोर्ट ने सभी को शर्मसार करने वाला बताया है। कोर्ट ने कहा, “आपने जो शब्द कहे, उससे माता-पिता, बेटियाँ और बहनें शर्मिंदा होंगी। पूरा समाज शर्मिंदा होगा। आप और आपके साथी निचले स्तर तक गिर चुके हैं। अब मामले में कानून का पालन होना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबादिया एक गंदे दिमाग वाला विकृत मानसिकता का व्यक्ति है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि केवल 2 FIR के बाद ही इलाहाबादिया तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया। कोर्ट ने कहा कि अगर सैकड़ों FIR होती तो राहत देने की बात होती, लेकिन 2 FIR पर ऐसा क्यों किया गया।

बेंच ने इलाहाबादिया को लेकर कहा, “एक बार जब आप ज्यादा FIR में उलझ जाते हैं तो आपके खुद का बचाव करने के अधिकार पर बहुत बड़ी बाधा आ जाती है। ऐसे में कोर्ट को आपकी रक्षा करनी चाहिए। लेकिन सिर्फ इसलिए कि आप सुप्रीम कोर्ट आने की हैसियत रहते हैं, ऐसे में आपकी मदद क्यों की जाए।”

इलाहाबादिया के अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर पर अभद्र कमेन्ट के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ लगाई। इलाहबादिया की तरफ से पेश वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने दावा किया कि उन्हें हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी जुबान काटने पर ₹5 लाख का इनाम रखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब रणवीर इलाहाबादिया के अश्लील कमेन्ट के मामले में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी और साथ ही उन्हें गिरफ्तारी से राहत मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा के लिए इलाहाबादिया को स्थानीय प्रशासन और कोर्ट के पास जाने को कहा है।

गौरतलब है कि इलाहाबादिया ने कॉमेडियन समय रैना के शो ‘इंडियाज गोट लैटेंट’ में एक प्रतिभागी से माता-पिता के सेक्स को लेकर आपत्तिजनक सवाल किया था। इस टिप्पणी के बाद देश भर में रैना समेत इलाहाबादिया का विरोध हुआ था। असम और मुंबई में उनके खिलाफ FIR भी दर्ज हुई थी।

केरल में उर्स पर निकला हमास आतंकियों के समर्थन में जुलूस, हाथियों पर लगाए गए थे पोस्टर: वामपंथी सरकार के मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भी हुए शामिल

केरल की वामपंथी सरकार पर इस्लामिक कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। इस बीच, पलक्कड़ में एक सालाना उर्स के मौके पर हमास-हिजबुल्लाह जैसे इंटरनेशनल आतंकी संगठनों के नेताओं की तस्वीरों का बाकायदा जुलूस निकाला गया, वो भी हाथियों पर सवार होकर। जुलूस में इन आतंकियों के समर्थन में नारे लगाए गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल के पलक्कड़ जिले के त्रिथला में रविवार (16 फरवरी 2025) की शाम हजारों लोगों की भीड़ के बीच एक जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में युवाओं ने हाथियों पर चढ़कर आतंकवादी कमांडरों याह्या सिनवार, इस्माइल हानिया और हसन नसरल्लाह के पोस्टर लहराए। इन तीनों को ही इजरायल ढेर कर चुका है।

इस आयोजन में कॉन्ग्रेस नेता वी.टी. बालाराम और केरल की वामपंथी सरकार के मंत्री और CPIM नेता एम.बी. राजेश की मौजूदगी को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। आयोजकों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इस्लामी कट्टरता को बढ़ावा देने के आरोपों के चलते यह मुद्दा सोशल मीडिया पर गर्माया हुआ है।

बीजेपी ने इस घटना को लेकर कॉन्ग्रेस और वामपंथी दलों पर जमकर निशाना साधा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने इस घटना को ‘चौंकाने वाला’ बताते हुए कहा कि केरल में इस्लामी कट्टरता को खुलेआम बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने माँग की है कि इस मामले में आयोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और जाँच की जाए कि इस तरह की घटनाओं के पीछे कौन लोग हैं।

इस पूरे विवाद के बीच कॉन्ग्रेस नेता वी.टी. बालाराम ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि त्रिथला उर्स किसी मजहबी आयोजन से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह एक सार्वजनिक सांस्कृतिक उत्सव है जिसमें हर समुदाय के लोग शामिल होते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक वर्ग इस घटना को सांप्रदायिक रंग देकर मुसलमानों और केरल की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हमास के नेताओं के पोस्टर लगाना एक अलग मुद्दा है, लेकिन साथ ही बीजेपी पर इस मामले को ‘सांप्रदायिक एजेंडा’ के तहत तूल देने का आरोप लगाया।

केरल में पहले भी हुए हैं ऐसे विवाद

यह पहली बार नहीं है जब केरल में इस तरह की गतिविधियाँ देखी गई हैं। 2024 में केरल विश्वविद्यालय के एक युवा महोत्सव का नाम ‘इंतिफ़ादा’ रखने पर विवाद हुआ था क्योंकि यह नाम हमास और फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष से जुड़ा हुआ था। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन को इस नाम को बदलना पड़ा।

यही नहीं, 2023 में, मलप्पुरम में जमात-ए-इस्लामी की युवा शाखा ‘सॉलिडेरिटी यूथ मूवमेंट’ के एक कार्यक्रम में हमास के पूर्व नेता खालिद मशाल ने वर्चुअल माध्यम से भाषण दिया था। इस दौरान ‘हिंदुत्व को खत्म करो’ और ‘जियोनिज्म को खत्म करो’ जैसे भड़काऊ नारे भी लगाए गए थे।

बीजेपी ने की जाँच की माँग, पुलिस ने साधी चुप्पी

बीजेपी ने इस मामले में पुलिस से तत्काल कार्रवाई की माँग की है। पार्टी का कहना है कि केरल में लगातार इस्लामी कट्टरता को बढ़ावा देने वाली घटनाएँ हो रही हैं और सरकार इस पर आँखें मूँदे बैठी है।

हालाँकि, स्थानीय पुलिस का कहना है कि अब तक इस घटना को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, इसलिए किसी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। लेकिन बढ़ते विवाद को देखते हुए प्रशासन इस पर नजर बनाए हुए है।

AAP नेता अनोख मित्तल ने बीवी को मरवा दिया, क्योंकि खुल गया था अवैध संबंधों का राज: सुपारी किलर्स से हत्या करवा लूट का मामला बनाया

लुधियाना पुलिस ने आम आदमी पार्टी (AAP) नेता अनोख मित्तल को अपनी पत्नी की हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मित्तल ने अपनी प्रेमिका प्रतिक्षा के साथ मिलकर सुपारी किलर्स को 2.50 लाख रुपये में हत्या के लिए हायर किया था। इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपित फरार है।

पुलिस कमिश्नर कुलदीप सिंह चहल के मुताबिक, शनिवार (15 फरवरी 2025) की रात अनोख मित्तल अपनी पत्नी मानवी उर्फ लिप्सी के साथ डिनर कर घर लौट रहा था। रास्ते में उसने कार रोकी और तभी पाँच हमलावरों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। उन्होंने तेज धारदार हथियारों से मानवी पर वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को लूटपाट जैसा दिखाने के लिए हमलावर मित्तल की कार और पत्नी की ज्वेलरी लेकर फरार हो गए।

पुलिस ने जब मामले की गहराई से जाँच की तो पता चला कि अनोख मित्तल ने खुद ही इस हत्या की साजिश रची थी। उसकी पत्नी को उसके प्रेम संबंध के बारे में जानकारी हो गई थी, जिस वजह से दोनों के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था। आए दिन झगड़े बढ़ रहे थे, जिसके चलते मित्तल ने अपनी प्रेमिका प्रतिक्षा के साथ मिलकर पत्नी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

पुलिस के मुताबिक, हत्या के लिए 2.50 लाख रुपये की डील हुई थी, जिसमें से 50,000 रुपये एडवांस दिए गए थे। बाकी पैसे हत्या के बाद देने की योजना थी।

पुलिस ने इस मामले में अनोख मित्तल, उसकी प्रेमिका प्रतिक्षा और चार सुपारी किलर्स-अमृतपाल सिंह उर्फ बली (26), गुरदीप सिंह (25), सोनू (24) और सागरदीप उर्फ तेजी (30) को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, एक अन्य आरोपित गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी अब भी फरार है।

पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई एक स्विफ्ट, आई-20 और रिट्ज कार को जब्त कर लिया है। साथ ही एक तलवार भी बरामद की गई है, जिससे वारदात को अंजाम दिया गया था।

अब नहीं चलेगा महात्मा गाँधी का ‘आइडिया’, इसे छोड़ना होगा: केरल हाई कोर्ट के जस्टिस मुहम्मद मुश्ताक, जानिए क्यों ‘ग्राम स्वराज’ को बताया अप्रासंगिक

केरल हाई कोर्ट के एक जज ने कहा है कि महात्मा गाँधी का दिया हुआ गाँव का आइडिया अब प्रासंगिक नहीं रहा है। उन्होंने कहा है कि इसे खत्म किए जाने की जरूरत है। उन्होंने व्यवस्था के केंद्रीकरण की भी वकालत की है। यह टिप्पणियाँ उन्होंने केरल सरकार के बनाए कानून को लेकर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए की हैं।

केरल हाई कोर्ट के जस्टिस ए मुहम्मद मुश्ताक ने सोमवार (17 फरवरी 2025) को कह़ा, “मेरा निजी विचार है कि गाँधी जी ने जिस तरह के गाँव की कल्पना की थी, जिसे अब संवैधानिक रूप दे दिया गया है। उसे खत्म कर देना चाहिए क्योंकि शासन में अब ज्यादा कठिनाइयाँ हैं।”

जस्टिस मुश्ताक ने कहा, “उस समय, केवल छोटी-छोटी चीजें किए जाने की जरूरत थी। लेकिन स्थानीय अधिकारियों के लिए चुनौती अब बहुत बड़ी है। शहरों की प्लानिंग एक बड़ी चुनौती है… कचरे का प्रबन्धन एक और बड़ी चुनौती है। इसे स्थानीय स्तर पर नहीं किया जा सकता। हमारे पास वह कानून है लेकिन इन सब मामलों के लिए एक केंद्रीकृत प्राधिकरण होना चाहिए।”

जस्टिस मुश्ताक ने कहा कि छोटी छोटी ग्राम पंचायतें सब काम करने में सक्षम नहीं हैं, ऐसे में केंद्रीकृत व्यवस्थाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब चुनौतियों को देखते हुए एक संस्था बननी चाहिए, जो पूरे जिले का प्रबन्धन करें। उन्होंने कहा कि अत्यधिक विकेंद्रीकरण से अब नुकसान हो रहा है।

जस्टिस मुश्ताक ने कहा, “उस समय गांधीजी ने ग्राम स्वराज के माध्यम से छोटे-छोटे मुद्दों को सुलझाने की परिकल्पना की थी। अब यह बदल चुका है, हमें इन चीजों को बदलने की जरूरत है। प्रशासन एक बड़ी चुनौती बन चुका है और देश के बाकी हिस्सों में भी सुधारों की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि 1950 में जैसी चीजों की कल्पना की गई थी, उसे 2025 में भी वैसे ही किया जाए। जस्टिस मुश्ताक ने कहा कि इस पंचायती व्यवस्था के चलते राजस्व का संग्रह भी प्रभावित हो रहा है। यह सारी टिप्पणियाँ उन्होंने केरल सरकार की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की।

केरल की सरकार ने नगर निकायों और पंचायतों को लेकर दो कानून बनाए थे, जिन्हें केरल हाई कोर्ट की एक बेंच ने 2024 में असंवैधानिक बता दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने नगर निकायों के विस्तारीकरण को भी रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ ही राज्य सरकार दोबारा हाई कोर्ट पहुँची थी।

रोहिंग्या के बच्चों को सरकारी स्कूल में मिले एडमिशन… इनकार करने पर हाई कोर्ट जाइए: सुप्रीम कोर्ट, घुसपैठियों के बच्चों के समर्थन में याचिका

रोहिंग्या घुसपैठियों के बच्चों को अगर दिल्ली के सरकारी स्कूल एडमिशन नहीं देते हैं, तो वह हाई कोर्ट जा सकते हैं। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। रोहिंग्या घुसपैठियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में एडमिशन दिलाने की माँग करने वाली याचिका पर यह आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सोमवार (17 फरवरी, 2025) को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस कोटीश्वर सिंह की बेंच ने की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “इन बच्चों के लिए सही रास्ता यह होगा कि वह उन सरकारी स्कूलों में एडमिशन के लिए आवेदन करें, जिनके लिए वह स्वयं को पात्र समझते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, “एडमिशन के हकदार होने पर और इसे ना दिए जाने की स्थिति में यह बच्चे दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थति में इन बच्चों की मदद वह लीगल संस्थान करेगा, जिसने इनके लिए याचिका डाली है।

क्या था मामला?

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सोशल जूरिस्ट अ सिविल राइट्स ग्रुप नाम के संगठन ने डाली थी। इस संगठन ने दावा किया था कि दिल्ली में सरकारी स्कूल आधार कार्ड ना होने के चलते इन रोहिंग्या बच्चों को एडमिशन नहीं दे रहे हैं। उसने एडमिशन दिए जाने के आदेश की माँग की थी।

पहले यह संगठन दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचा था। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा था रोहिंग्या कोई शरणार्थी नहीं हैं और ना ही उन्हें सरकार ने यह दर्जा दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं से कहा था कि वह गृह मंत्रालय के पास अपनी माँग लेकर जाएँ ताकि इस पर कार्रवाई हो सके।

हाई कोर्ट ने कहा था कि यह मामलादेश की सुरक्षा और नागरिकता के प्रश्न से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने इसी के साथ यह याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद यह संगठन सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी, 2025 को इस मामले की सुनवाई करते हुए इस संगठन से उन बच्चों की जानकारी माँगी थी, जिन्हें एडमिशन से इनकार किया गया है।

संगठन ने 18 ऐसे बच्चों की सूची सुप्रीम कोर्ट सौंपी थी, जिस पर 17 फरवरी को उसने यह फैसला दिया और याचिका का निपटारा कर दिया। रोहिंग्या घुसपैठियों के इए नागरिकों जैसी माँग करने वाली यह अकेली याचिका नहीं है।

रोहिंग्या के समर्थन में बराबर पड़ रही याचिकाएँ

हाल ही में एक NGO ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि कोर्ट केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दे कि दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को स्कूलों और अस्पतालों तक पहुँच दी जाए। याचिका में इन रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए सरकारी अस्पतालों में मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ वाला वाले खाद्यान्न देने की माँग की गई थी। 

NGO द्वारा दायर याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकारों को निर्देश देने की माँग की गई है कि वे रोहिंग्या बच्चों को आधार कार्ड या भारतीय नागरिकता न होने के बावजूद मुफ्त शिक्षा दें। जनहित याचिका में आगे माँग की गई थी कि इन रोहिंग्या ‘शरणार्थियों’ को सरकार द्वारा पहचान पत्र माँगे बिना कक्षा 10, 12 और स्नातक सहित सभी परीक्षाओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए।

बांग्लादेश में जो पुलिस वाले रोक रहे थे हिंसा, यूनुस सरकार सबको कर रही अरेस्ट: निशाने पर 1000+, 41 जेल में – ‘ऑपरेशन डेविल हंट’ में 4700+ गिरफ्तार

बांग्लादेश में तख्तापलट के सहारे सत्ता में आई मोहम्मद यूनुस सरकार लगातार दमन चक्र चला रही है। उसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को खत्म करने की कसम खा ली है। आवामी लीग के कार्यकर्ताओं और नेताओं को पकड़ने के लिए विशेष ओपरेशन चलाया जा रहा है। शेख हसीना की सरकार में हिंसा रोकने वाले पुलिसकर्मियों को भी जेलों में भरा जा रहा है।

शेख हसीना की पार्टी में रहे लोगों पर भी यूनुस सरकार दमनचक्र चला रही है। उन्होंने पकड़ने के लिए यूनुस सरकार ने ‘ओपरेशन डेविल हंट’ नाम का एक अभियान चलाया है। इसके तहत अब तक 4790 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश आवामी लीग और ऐसे ही संगठनों से जुड़े हुए लोग हैं।

मोहम्मद यूनुस की सरकार नहीं चाहती कि आवामी लीग के कार्यकर्ता उसकी कारस्तानियों को उजागर करें। इसके लिए देश भर में इन्हें पकड़ने के लिए सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों को लगाया गया है। मोहम्मद यूनुस की सरकार ने दावा किया है कि यह अभियान अपराधियों को पकड़ने और कानून व्यवस्था सुधारने के लिए चलाया गया है।

आवामी लीग के आम कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि पूर्व सांसद और मंत्री भी निशाने पर हैं। आवामी लीग के लगभग 100 सांसदों और पूर्व मंत्रियों को अब तक मोहम्मद यूनुस की सरकार अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार करके जेल में डाल चुकी है। इनमें महिला नेता दीपू मोनी भी शामिल हैं।

शेख हसीना के अलावा लगभग 200 नेता, अलग-अलग देशों को भाग चुके हैं। उन्होंने यह कदम यूनुस सरकार के दमनचक्र से बचने को उठाया है। देश में कथित अपराधियों को पकड़ रही यूनुस सरकार, शेख हसीना का घर दिनदहाड़े गिरा देने वाले एक भी कट्टरपंथी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त के दौरान हुई हिंसा को रोकने का काम करने वाले 1059 पुलिसकर्मी भी अब यूनुस सरकार के निशाने पर हैं। तख्तापलट के सहारे सत्ता में आई यूनुस सरकार इनको गिरफ्तार कर रही है। 41 को गिरफ्तार किया भी जा चुका है।

शेख हसीना की सरकार के दौरान बांग्लादेश में पुलिस के मुखिया रहे IGP अब्दुल्लाह अल मामून को भी गिरफ्तार किया गया है। उन पर मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा ढाका के पुलिस कमिश्नर रहे असदुज्ज्मान मियाँ को भी यूनुस सरकार ने गिरफ्तार किया है। उन पर ही यही आरोप लगाए गए हैं।

गिरफ्तारियाँ सिर्फ शीर्ष पुलिस अधिकारीयों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शेख हसीना की सरकार के दौरान बांग्लादेश के बड़े शहरों के पुलिस कमिश्नर रहे अधिकांश पुलिस अधिकारी जेलों में ठूंस दिए गए हैं। आलोचकों का कहना है कि यूनुस सरकार उनसे इस्लामी कट्टरपंथियों पर कार्रवाई करने का बदला निकाल रही है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भेड़िया धँसान भीड़ क्योंकि सिस्टम को नहीं है सिविक सेंस

15 फरवरी 2025 की रात पहली बार नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ नहीं मची। पहली बार मौतें नहीं हुईं। पहली बार जिम्मेदारों को बचाने के लिए भीड़ को दोषी साबित करने की कोशिश नहीं हुई।

लेकिन इस शोर में यह बात नहीं हुई कि हर बार भगदड़ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के उसी हिस्से में क्यों मचती है जो अजमेरी गेट की तरफ से करीब पड़ता है? हर बार भगदड़ में मरने वाले उन्हीं ट्रेनों में सवार होने के लिए क्यों आए रहते हैं जो यूपी-बिहार-झारखंड जैसे प्रदेशों (जिन्हें दिल्ली की राजनीतिक शब्दावली में पूर्वांचल कहते हैं) की ओर जा रही होती है? उस भय की भी बात नहीं हुई जिसके साथ हम पूर्वांचल के लोग हर बार इन ट्रेनों में सफर करते हैं और भारतीय रेलवे को गरियाते हुए अपने घरों तक जाते हैं।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर क्यों मची भगदड़

आधिकारिक जानकारियों पर ‘यकीन’ करें तो प्रयागराज जाने वाली स्पेशल ट्रेन का प्लेटफॉर्म बदलने की कोई घोषणा नहीं हुई। प्लेटफॉर्म 14 और 15 नंबर पर एक तरफ प्रयागराज स्पेशल पर चढ़ने के लिए लोग सवार थे, दूसरी तरफ स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस में चढ़ने के लिए लोग जुटे थे। इसी दौरान प्लेटफॉर्म नंबर 16 पर प्रयागराज स्पेशल ट्रेन आने की घोषणा हुई। लोगों को लगा कि उनकी ट्रेन अब 16 नंबर पर आएगी। 16 नंबर प्लेटफॉर्म तक जल्दी से जल्दी पहुँचने की होड़ में सीढ़ी पर किसी का पैर फिसला और फिर एक-एक कर लोग गिरते गए और उनके ऊपर से चढ़कर लोग बढ़ते गए।

भगदड़, भीड़ और सोशल मीडिया के ‘वीर’

सोशल मीडिया के धुरंधरों का कहना है कि भीड़ इसलिए मची क्योंकि पूर्वांचल के लोगों में ‘सिविक सेंस’ नहीं है। कुछ का कहना है कि हमारी ‘क्रयशक्ति’ बढ़ गई है इसलिए हम सफर अधिक करने लगे हैं। अपने तीर्थ स्थलों पर भेड़िया धँसान जाने लगे हैं। साथ में अपने बच्चों, बुजुर्ग माँ-बाप, कुटुम्बों को लेकर जा रहे हैं। उपदेश भी दिया जा रहा है कि जब भीड़ है तो महाकुंभ में क्यों जा रहे हैं। भीड़ है तो ट्रेन में चढ़ने क्यों आ रहे हैं। भविष्य के लिए चेतावनी भी दी जा रही है कि इतने लोग जुटेंगे तो कोई कुछ नहीं कर सकता। माने आपको अकाल मौत मरना ही होगा। इनके अलावा हर मामले में ‘षड्यंत्र’ सूँघ लेने वाली प्रजाति अलग ही स्तर पर थेथरई कर रही है।

मैं भी उस भीड़ का हिस्सा हूँ जो अभिशप्त और अभ्यस्त है

मैं भी उसी भीड़ का हिस्सा हूँ जिसमें सिविक सेंस नहीं है। मैं भी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के उन्हीं प्लेटफॉर्मों से ट्रेन पकड़ता हूँ, जहाँ भगदड़ मचती है। मैं भी उन्हीं ट्रेनों में सवार होता हूँ, जिसमें चढ़ने के लिए आने वाले लोग भगदड़ में मर जाते हैं। आपको लगेगा कि मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मैं छठ की उस भीड़ का हिस्सा नहीं था। गर्मी छुट्टी में घर जाने वाली उस भीड़ का हिस्सा मेरी पत्नी-बच्चे नहीं थे। महाकुंभ जाने वाली उस भीड़ का हिस्सा मेरे माता-पिता नहीं थे।

पर मैं भाग्यशाली नहीं हूँ, ​क्योंकि मैं जब भी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आता हूँ तो मुझे ऐसी ही भीड़ मिलती है। हर बार मुझे ट्रेन के कोच में अपनी बर्थ से बाथरूम तक पहुँचने में कसरत करनी पड़ती है। कभी भी मुझे आसानी से टिकट नहीं मिलता है। यहाँ तक कि मुझे ट्रेन में चढ़ाने के लिए आया हुआ व्यक्ति भी अक्सर रेलवे स्टेशन के बाहर से ही चला जाता है, क्योंकि पूर्वांचल की तरफ जाने वाली ट्रेनों के प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री कब बंद कर दी जाए, इसका कोई पूर्वानुमान नहीं लगा सकता।

मैं लाइन से ही रेलवे स्टेशन में घुसा था

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, भारत के किसी गाँव-देहात का खुला रेलवे स्टेशन नहीं है। इस रेलवे स्टेशन में प्रवेश करने के लिए लोगों को लाइन में लगना पड़ता है। स्कैनर से गुजरना होता है। अपने सामान बैगेज स्कैनर में डालने होते हैं। एक पौवा भी दिखने पर सुरक्षाकर्मी आपको लाइन से अलग कर किनारे ले जाते हैं। जाँच की प्रक्रिया से गुजरकर ही आप स्टेशन के भीतर प्रवेश करते हैं। उस प्लेटफॉर्म पर पहुँचते हैं, जहाँ आपकी ट्रेन आने की सूचना होती है। इसमें भीड़ के हिसाब से कभी भी सहूलियत नहीं दी जाती है। देनी भी नहीं चाहिए। इस दौरान कहीं भी यह सुनिश्चित नहीं किया जाता है कि आपके पास ट्रेन में चढ़ने का या प्लेटफॉर्म का टिकट है या नहीं। यही प्रक्रिया भी है।

पर आप जब प्लेटफॉर्म पर पहुँचते हैं तो हमेशा ट्रेन की क्षमता से इतने अधिक लोग होते हैं जिसे भीड़ कहा जा सके। ट्रेन में चढ़ने के लिए वैसी ही मारामारी होती है जैसा भीड़ की स्थिति में होता है। यह जरूर है कि इसकी तीव्रता सामान्य कोच में सबसे ज्यादा, उससे कम शयनयान कोच और उससे कम वातानुकूलित तृतीय श्रेणी में होता है। वातानुकूलित प्रथम श्रेणी में ऐसा हुड़दंग नहीं दिखता है।

जाहिर है मैं सिविक सेंस के साथ ही रेलवे स्टेशन के भीतर घुसा था। आपकी व्यवस्था के हिसाब से ही आगे बढ़ा था। पर प्लेटफॉर्म पर व्यवस्था का कोई ‘सिविक सेंस’ नहीं है, मजबूरन मैं भीड़ हो जाता हूँ।

कौन लोग बनाते हैं मुझे ट्रेन की भीड़

  • मौजूदा नियम है कि आप अपनी यात्रा से 60 दिन पहले टिकट आरक्षित करवा सकते हैं। पूर्वांचल की तरफ जाने वाली ट्रेनों में आरक्षण खुलते ही सीटें फुल हो जाती हैं। उसके बाद धकाधक वेटिंग काटी जाती है। लोग पैसा देकर भी वेटिंग इस उम्मीद में नहीं लेते कि टिकट कन्फर्म हो जाएगा। यह तो भगवान भरोसे है। वेटिंग टिकट इसलिए लेते हैं क्योंकि यात्रा की तिथि आगे बढ़ाने पर भी किस्मत नहीं बदलनी है। कमोबेश सालभर यही हाल होता है।
  • आप बिना सामान्य टिकट के भी इन ट्रेनों में सवार हो सकते हैं। रेलवे की तरफ से प्लेटफॉर्म पर ही टीसी तैनात किए जाते हैं। वे फाइन के साथ आपका टिकट बना देते हैं, अब आप किसी भी डिब्बे में अब चढ़ सकते हैं। जबकि रेलवे को पहले से ही पता होता है कि ट्रेन की क्षमता से कहीं अधिक टिकट बुक हो चुके हैं।
  • रेलवे सुरक्षाकर्मी पैसे लेकर सामान्य डिब्बों में लोगों को घुसाते हैं। इन डिब्बों में इतनी अधिक भीड़ होती है कि टिकट चेक करना भी संभव नहीं होता है। यानी कुछ रुपए देकर आप दिल्ली से दरभंगा जैसी जगहों पर जा सकते हैं।
  • कोच अटेंडेंट अपनी सीट बेचते हैं। पैंट्री कार की सीट बेची जाती है। यहाँ तक कि जेनरेटर यान में गार्ड के लिए बने कक्ष की भी बिक्री होती है। जिनकी तैनाती नियम-कायदों का पालन सुनिश्चित करवाने, यात्रियों की सहूलियत सुनिश्चित करने के लिए की जाती है, उन्हीं लोगों ने पूर्वांचल जानी वाली सभी ट्रेनों में मिल बाँटकर खाने वाला पूरा सिस्टम विकसित कर रखा है।

माना है कि हमें सिविक सेंस नहीं है। लेकिन आपके सिस्टम का यह कैसा ‘सिविक सेंस’ है जो मुझे अपनी मेहनत की कमाई से आरक्षित की गई सीट पर भी आराम से सफर करने की सहूलियत नहीं दे पाता है।

मुझे भीड़ बनने से कैसे बचा सकते हैं

  • हमारे इलाकों से मजबूरी का पलायन होता है। कारण रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा-स्वास्थ्य की सुविधा हमें अपने इलाकों में ही उपलब्ध करवाइए, उद्योग-धंधे दीजिए, ताकि मजबूरी का पलायन रुके। फिर एक साथ घर लौटने की ऐसी होड़ भी नहीं दिखेगी जो भीड़ बन जाती है।
  • य​दि ऐसा नहीं कर सकते तो फिर रेलवे को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने ही होंगे। वह चाहे प्लेटफार्म की संख्या बढ़ानी हो, अजमेरी गेट की तरफ से स्टेशन का विस्तार करना हो या फिर ट्रेन की संख्या बढ़ानी हो। वेटिंग टिकट काट-काटकर, फाइन वाले टिकट-काट काटकर राजस्व बढ़ाने की प्रवृत्ति छोड़नी होगी। स्पेशल ट्रेनों को समयबद्ध करना होगा। ऐसी हर एक ट्रेन की अलग पहचान सुनिश्चित करनी होगी।
  • रेलवे कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करनी होगी। सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी स्थिति में आरक्षित सीटों से अधिक यात्री डिब्बे में सफर नहीं करें। सामान्य डिब्बों में भी संख्या सुनिश्चित करनी होगी। यात्री जैसे ही भीड़ बनते दिखे उन्हें डायवर्ट करने की तत्काल व्यवस्था करनी होगी।

हमारी इन आकांक्षाओं का भार PM मोदी पर ही है

व्यवस्था पर सवाल करना, जवाबदेही तय करने की माँग करना, सरकार की नीयत पर संदेह जताना नहीं है। वैसे भी जो प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) देश के गाँव-गाँव में रहने वाले लोगों के आवास, शौचालय, राशन तक की चिंता करता हो, उसे पूर्वांचल के लोगों को ट्रेनों में होने वाली तकलीफों का पता नहीं हो, यह माना नहीं जा सकता। यह सत्य है कि इस सरकार में दशकों से अटकी परियोजनाओं पर काम हुआ है। रेलवे के आधुनिकीकरण ने जोर पकड़ा है। यह भी सत्य है कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की एक क्षमता है और उससे अधिक बोझ नहीं बढ़ाया जा सकता। यह भी सत्य है कि इस समस्या का रातोंरात समाधान नहीं हो सकता है।

लेकिन इसका समाधान हादसों पर पर्दा डालना भी नहीं है। ‘भक्तों’ को समझना होगा कि कभी-कभी जबरन की छवि बचाने की कोशिश, छवि को कितना नुकसान कर जाती है, इसका पता तक नहीं चलता है। नहीं तो क्या कारण है कि जिसके नेतृत्व में बीजेपी ने राजनीति की नई ऊँचाइयों को छुआ, उसके ही अगुआई में 240 पर आ गई और सरकार उन सहयोगियों के भरोसे पर टिक गईं जिनके अपने क्षेत्रीय एजेंडे हैं।

हमने नरेंद्र मोदी जैसा लोक की चिंता करने वाला नेतृत्व नहीं देखा। इसलिए हमारे सवाल तीखे हैं। हमारी आकांक्षाओं का बोझ भारी है। इसलिए हम अभिशप्त और अभ्यस्त वाली स्थिति से बाहर आने को तड़फड़ा रहे हैं।