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मृतक यास्मीन के ईलाज के लिए सलमान, सैयद ने फेसबुक से फर्जी क्राउड फंडिंग कर जुटाए ₹46 लाख, गिरफ्तार

हैदराबाद में पुलिस टास्क फ़ोर्स ने हैदराबाद यूथ करेज (HYC) NGO के अध्यक्ष सलमान खान और सैयद अयूब, दो ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है, जो पीड़ित लोगों के इलाज के नाम पर लोगों से पैसे इकट्ठा करते थे और बाद में उन्हें आपस में बाँट लेते थे। इस बार उन्होंने यास्मीन नाम की एक ऐसी महिला के लिए क्राउड फंडिंग की, जिसकी अस्पताल में मौत हो चुकी थी।

पुलिस के अनुसार, 29 वर्षीय सलमान खान और 31 वर्षीय सैयद अयूब ने हैदराबाद यूथ करेज (Hyderabad Youth Courage) नाम से एक एनजीओ बनाया, जिसका प्रेसिडेंट सलमान था। दोनों आरोपित एनजीओ ‘हैदराबाद यूथ करेज’ नाम के एक फेसबुक पेज का संचालन करते थे। जहाँ वे सोशल मीडिया के द्वारा कोरोना मरीजों की दर्द भरी वीडियो दिखाकर लाखों रुपए इकट्ठे करते थे।

हाल ही में, सलमान खान ने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट कर लोगों से यास्मीन सुल्ताना नाम की एक महिला के लिए क्राउड फंडिंग का अनुरोध किया था। कथित तौर पर महिला किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित थी। वीडियो में, आरोपितों ने वीडियो में एक बैंक खाता नंबर का उल्लेख भी किया। वह बैंक खाता यास्मीन की रिश्तेदार असरा बेगम का था। उन्होंने लोगों से उसी बैंक एकाउंट में पैसे डालने की अपील की थी।

टास्क फोर्स इंस्पेक्टर एस राघवेंद्र ने बताया, क्राउड फंडिंग के जरिए तीन दिनों के अंदर ही असरा के बैंक में 46 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ था। जिसमें से उसने सलमान खान के बैंक खाते में 15 लाख रुपए और सैयद अयूब के एक रिश्तेदार रूसेड के खाते में 15 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। इसके साथ ही उसने बाकी बचे रुपए को अपने पास रख लिया था।

चंद्रायंगुट्टा पुलिस ने दान देने वाले की तहरीर पर हाल ही में सलमान और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। बुधवार (जुलाई 29, 2020) को पुलिस ने सलमान और सैयद अयूब को हुमायूँ नगर से गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से तीन सेलफोन जब्त किए। असरा बेगम फिलहाल फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है।

बता दें कि इन लोगों ने जिस यास्मीन बेगम के नाम पर पैसे इक्कट्ठा किए थे, उसके इलाज के लिए भी इन्होंने मात्र 70,000 रुपए अस्पताल में जमा किए थे। जबकि, उसके इलाज और दवाई का खर्चा उससे ज्यादा था। सही इलाज न मिलने की वजह से यास्मीन बेगम की अस्पताल में मौत भी हो चुकी है।

जिनके कारण अंजाम तक पहुँचा राफेल डील, बीमारी के दिनों में राहुल गाँधी ने कैसे किया था उनका अपमान: फिर से याद कीजिए

भारत में पाँच राफेल मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट्स की लैंडिंग ने पूरे देश को उत्साह से भर दिया है और इसके लिए लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते नहीं थक रहे। लेकिन, एक और व्यक्ति ऐसा है जिसे आप भूल रहे हैं। सादगी की प्रतिमूर्ति और कर्मठता की मिशाल, जिसने राफेल डील पर हस्ताक्षर किए थे और जिसने अपने अंतिम दिनों तक गोवा की सेवा जारी रखी। जी हाँ, बात मनोहर पर्रिकर की हो रही है।

अप्रैल 2020 में ख़ुद केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि राफेल करार को एक नया जीवन दिया और उसे उसके अंजाम तक पहुँचाया। राजनाथ सिंह के शब्दों में समझें तो मनोहर पर्रिकर को उनके बेदाग़ करियर और निर्णय लेने की उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें रक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पद के लिए इसीलिए चुना गया था। उनके कारण ही आज 5 नेक्स्ट जनरेशन फिग़र जेट्स भारत के आकाश में मँडराए- एक सपना जो देश 30 सालों से देख रहा था।

तब राजनाथ सिंह ने कहा था कि काफी लम्बे समय तक भारत के पास कोई नेक्स्ट जेन फाइटर विमान नहीं आया। उन्होंने कहा था, “ये प्राकृतिक है कि हमारे जैसे देश को नेक्स्ट जेन फाइटर जेट्स की ज़रूरत है।” राजनाथ सिंह के शब्दों में, राफेल डील भी सालों से अटका पड़ा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनोहर पर्रिकर को इसे अंजाम तक पहुँचाने की जिम्मेदारी दी। और फिर आया शुक्रवार (सितम्बर 23, 2019) का दिन।

यही वो दिन था जब मनोहर पर्रिकर ने बतौर रक्षा मंत्री अपने फ्रेंच समकक्ष के साथ राफेल करार पर हस्ताक्षर किए। वही वो क्षण था, जब आज के सपने को पंख लगे थे। आज मनोहर पर्रिकर इस दुनिया में नहीं है लेकिन जहाँ से भी वो अपने उस सपने को साकार होते देख रहे होंगे जिसके लिए उन्होंने मेहनत की थी, वो ज़रूर खुश होंगे। उन्होंने देश के लिए जो किया, उसके परिणाम आज दिख रहे हैं।

राजनाथ सिंह मानते हैं कि राफेल डील की प्रक्रिया को तेज़ करने का श्रेय मनोहर पर्रिकर को ही जाता है। मनोहर पर्रिकर की श्रद्धांजलि सभा में पणजी में राजनाथ सिंह ने ये बातें कही थीं। पूर्व रक्षा मंत्री के योगदानों और राफेल डील में उनके रोल को याद करने के लिए आप वर्तमान रक्षा मंत्री को सुनिए। नीचे हम राजनाथ सिंह के यूट्यूब अकाउंट से उस वीडियो को ढूँढ कर आपके समक्ष पेश कर रहे हैं:

पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर के योगदानों पर क्या कहा था वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ ने?

लेकिन, वही पर्रिकर जब कैंसर बीमारी से जूझते हुए भी गोवा में बतौर सीएम जनता की सेवा कर रहे थे, तब राहुल गाँधी ने कैसे राफेल करार को लेकर उनका अपमान किया था, ये आपको नहीं भूलना चाहिए और याद रखना चाहिए। राहुल गाँधी ने एक ईमानदार छवि वाले नेता को बदनाम करने की कैसे कोशिश की, ये भी आज इस मौके पर याद करना चाहिए, जब 5 राफेल हमारी ज़मीन पर उतर गए हैं।

राहुल ने कहा था कि मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने उनसे मुलाकात के दौरान बताया कि पीएम मोदी ने राफेल डील बदलते वक्त उनसे नहीं पूछा। राहुल गाँधी ने उस मुलाक़ात के बाद कहा था:मैं कल पर्रिकर जी से मिला था। पर्रिकर जी ने स्वयं कहा था कि (राफेल) डील बदलते समय पीएम ने हिंदुस्तान के रक्षा मंत्री (तब मनोहर पर्रिकर) से नहीं पूछा। राहुल गाँधी ने अपने प्रोपेगंडा के लिए एक बीमार नेता का इस्तेमाल किया।

एडवांस पैंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित पर्रिकर तब काफ़ी दिनों से बीमार चल रहे थे। कई सरकारी कार्यक्रमों के दौरान उनके नाक में पाइप लगे देखा गया था। ये तस्वीरें वायरल भी हुई थीं। बीमारी के बावजूद कार्यभार संभाल रहे पर्रिकर की कई लोगों ने प्रशंसा भी की थी। राहुल गाँधी के बेतुके आरोपों के बाद मनोहर पर्रिकर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राहुल के दावों की पोल खोलते हुए कहा था कि उनके व्यवहार से वो काफ़ी आहत हुए हैं।

आज आप फिर से उस पत्र को पढ़ें, जिसे मनोहर पर्रिकर ने राहुल गाँधी के आरोपों का जवाब देते हुए लिखा था और एक-एक बात क्लियर की थी। नीचे हम उस पत्र का टेक्स्ट आज फिर से आपके समक्ष पेश कर रहे हैं, ताकि राफेल विमानों की डील को अंजाम तक पहुँचाने वाले का किसने अपमान किया, ये आप न भूलें:

प्रिय श्री राहुल गाँधी,
कल यानी 29 जनवरी 2019 को, बिना किसी पूर्व सूचना के आप मेरे स्वास्थ्य का हाल पूछने मेरे यहाँ आए थे। दलगत भावना से ऊपर उठकर एक अस्वस्थ व्यक्ति का हाल जानना एवं उसके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करना, राजनीतिक एवं सार्वजनिक जीवन की अच्छी परंपरा है, अतः मुझे भी आपका मेरा हाल जानने के लिए कार्यालय आना अच्छा लगा। आपके आने पर मैंने आपका स्वागत मेरे स्वास्थ्य एवं बीमारी प्रति आपकी अच्छी भावना के संदर्भ में किया।

लेकिन आज सुबह समाचार पत्रों में जिस ढंग से आपके ‘विजिट’ को लेकर बयान प्रकाशित हुए हैं, उन्हें पढ़कर मुझे आश्चर्य भी हुआ और मैं आहत भी हूँ। आपको कोट करते हुए सामाचार पत्रों में प्रकाशित है कि आपने कहा है, “बातचीत में मैंने आपको बताया है कि राफ़ेल प्रोसेस में मैं कहीं नहीं था, या मुझे कोई जानकारी नहीं थी।

मेरे लिए यह अत्यंत निराशाजनक और आहत करने वाली बात है कि मेरे स्वास्थ्य का हाल जानने के बहाने आपने अपने निम्न स्तरीय राजनीतिक हितों को साधने का कार्य किया है, इसकी मैं कल्पना भी नहीं कर पा रहा।

आपसे 5 मिनट की हमारी भेंट में ना तो ‘राफ़ेल’ का जिक्र हुआ और ना ही मैंने राफ़ेल संबंधी कोई चर्चा की। उन 5 मिनटों में इस संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई। इस तरह की कोई बात मेरी और आपके बीच न तो हाल की मीटिंग में हुई थी और ना ही पहले कभी हुई।

मैंने पहले भी कई बार स्पष्ट किया है और इस पत्र के माध्यम से फिर कह रहा हूँ कि राफ़ेल सौदा इंटर गवर्नमेंट एग्रिमेंट (IGA) और डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसिज़र के नियमों के तहत हुआ है। इसमें दूर-दूर तक कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। यह पूरी खरीद प्रक्रिया राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं के आधार पर तय नियामकों के तहत हुई है।

शिष्टाचार भेंट के बहाने मेरे घर आकर, फिर इतने निम्न स्तर का झूठ आधारित राजनीतिक बयान देना, आपके मेरे घर आने के आने उद्देश्यों और इरादों को उजागर करता है। आपके मेरे घर आने पर यह एक बड़ा प्रश्नचिह्न और संदेह का घेरा भी है।

जैसा कि सभी जानते हैं, इन दिनों मैं बीमारी में अपने जीवन के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा हूँ। फिर भी अपने पूर्व के अनुशासनपूर्ण जीवन एवं वैचारिक शक्ति के माध्यम से गोवा की जनता की सेवा में निरंतर लगा हूँ, और लगा रहूँगा। मैंने सोचा था कि आपका आना और आपकी शुभकामनाएँ मेरे लिए इस प्रतिकूल स्थिति में सम्बल प्रदान करेगी, लेकिन मैं नहीं समझ सका कि आपके आने का वास्तविक इरादा क्या था।

घोर निराशा के साथ मुझे आपको लिखना पड़ रहा है कि आप सच को स्वीकारिए और सामने लाइए। साथ ही, यह भी निवेदन करूँगा कि किसी बीमार और अस्वस्थ व्यक्ति को अपने अवसरवादी राजनीति का शिकार बनाने की नीयत मत रखिए। मैं सदैव गोवा की जनता की सेवा में हर पल तत्पर हूँ।

सादर
मनोहर पर्रीकर

जैसा कि मनोहर पर्रिकर ने लिखा था, राहुल गाँधी ने शिष्टाचार के बहाने उनसे मुलाकात की और फिर राजनीति के लिए उनकी इस मुलाकात का इस्तेमाल कर लिया। एक बीमार व्यक्ति को राहुल ने अवसरवादी राजनीति का शिकार बनाया, ये खुद पर्रिकर के ही आरोप थे। स्वास्थ्य का हाल जानने आए राहुल ने कैसे उस मुलाकात के बाद झूठ बोल कर उन्हें बदनाम किया, उससे वो काफी आहत और दुःखी हुए थे।

आज जब अम्बाला में पाँच राफेल विमान उतरे हैं और लोग इसकी तस्वीरें देख कर ख़ुशी मना रहे हैं, हमें मनोहर पर्रिकर को याद कर के पल भर के लिए भावुक भी हो जाना चाहिए और राहुल गाँधी द्वारा अंतिम दिनों में किए गए उनके अपमान के लिए थोड़ी देर आक्रोश भी जताना चाहिए। जैसा कि वामपंथी गैंग और इस्लामी कट्टरवादी कहते हैं- “नहीं भूलेंगे“। अब राष्ट्रवादी भी इसे याद रखें।

NEP 2020: प्रारम्भिक शिक्षा में मातृभाषा से लेकर उच्च शिक्षा में मल्टीपल इंट्री और एग्जिट का विकल्प

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार (जुलाई 29, 2020) को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को मंजूरी देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया है। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है क्योंकि 34 साल तक देश की शिक्षा नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ।

नई शिक्षा नीति पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने कहा कि इस नीति गुणवत्ता, पहुँच, जवाबदेही, सामर्थ्य और समानता के आधार पर एक समूह प्रक्रिया के अंतर्गत बनाया गया है। जहाँ विद्यार्थियों के कौशल विकास पर ध्यान दिया गया है, वहीं पाठ्यक्रम को लचीला बनाया गया है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सके।

उन्होंने कहा कि मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारत अपने वैभव को पुनः प्राप्त करेगा।

उच्च शिक्षा अधिकारी अमित खरे ने इस बारे में कहा कि नई शिक्षा नीति और सुधारों के बाद, हम 2035 तक 50% सकल नामांकन अनुपात प्राप्त करेंगे। सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि GDP का 6% शिक्षा में लगाया जाए जो अभी 4.43% है। इसमें बढ़ोतरी करके शिक्षा का क्षेत्र बढ़ाया जाएगा।

शिक्षा नीति 2020 के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु –

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम का ऑफर दिया जाएगा। यह संस्थान के लिए अनिवार्य नहीं होगा।

नई शिक्षा नीति का सबसे महत्वपूर्ण हिसा ‘मल्टिपल एंट्री एंड एग्जिट’ बताया जा रहा है। इसके अनुसार, यदि 4 साल कोई कोर्स करने के बाद किसी कारण से यदि छात्र आगे नहीं पढ़ सकता है तो वो सिस्टम से अलग होने से बच जाएगा।

लेकिन, अब एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा तीन या चार साल के बाद डिग्री, यानी प्रथम वर्ष और द्वितीय वर्ष के क्रेडिट जुड़ते जाएँगे। यानी, उसे एकेडमिक क्रेडिट मिलेंगे। ऐसे में छात्रों को अपना कोर्स पहले साल से ही शुरू नहीं करना होगा।

उदाहरण के लिए, वर्तमान व्यवस्था में विज्ञान के साथ फैशन डिजायनिंग नहीं ली जा सकती, जबकि अब मेजर और माइनर प्रोग्राम लेने की सुविधा होगी। इसका फायदा यह होगा कि आर्थिक या अन्य कारणों से ड्रापआउट होने वाले लोगों का वर्ष बर्बाद नहीं होगा और अलग-अलग क्षेत्रों में रूचि रखने वाले छात्र अपनी रूचि के अनुसार प्रमुख विषय के साथ माइनर विषय को चुनने की आजादी रखेंगे।

उच्च शिक्षा में अब मल्टीपल इंट्री और एग्जिट का विकल्प दिया जाएगा। इसके तहत, पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल बाद डिग्री दी जाएगी। पाँच साल के इंटीग्रेटेड कोर्स करने वालों को एमफिल नहीं करना होगा। 4 साल का डिग्री प्रोग्राम, फिर MA, और उसके बाद बिना M.Phil के सीधा PhD कर सकते हैं।

अब कॉलेजों के एक्रेडिटेशन के आधार पर ऑटोनॉमी दी जाएगी। मेंटरिंग के लिए राष्ट्रीय मिशन चलाया जाएगा। हायर एजुकेशन के लिए एक ही रेग्यूलेटर रहेगा। हालाँकि, इसमें कानून एवं मेडिकल शिक्षा को शामिल नहीं किया जाएगा।

नई शिक्षा नीति के अनुसार, केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत निजी और सार्वजनिक उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए सामान्य मानदंड होंगे। नई शिक्षा नीति के अनुसार विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए आम प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी।

अन्य विशेषताओं में संस्थानों की श्रेणीबद्ध शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता शामिल हैं। ई-पाठ्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किया जाएगा; वर्चुअल लैब विकसित की जाएँगी और एक राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (NETF) बनाया जा रहा है।

शिक्षा (टीचिंग, लर्निंग और एसेसमेंट) में तकनीकी को बढ़वा दिया जाएगा। तकनीकी के माध्यम से दिव्यांगजनों में शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। ई-कोर्सेस आठ प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किया जाएँगे। नेशनल एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फोरम (एनईटीएफ) की स्थापना की जाएगी।

अब कला, संगीत, शिल्प, खेल, योग, सामुदायिक सेवा जैसे सभी विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इन्हें सहायक पाठ्यक्रम या फिर, अतिरिक्त पाठ्यक्रम नहीं कहा जाएगा। आयोग ने शिक्षकों के प्रशिक्षण में व्यापक सुधार के लिए शिक्षक प्रशिक्षण और सभी शिक्षा कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों या कॉलेजों के स्तर पर शामिल करने की सिफारिश की है।

प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा का इस्तेमाल

प्राथमिक स्तर पर शिक्षा में बहुभाषिकता को प्राथमिकता के साथ शामिल करने और ऐसे भाषा शिक्षकों की उपलब्धता को महत्व दिया दिया गया है, जो बच्चों के घर की भाषा समझते हों। यह समस्या राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्यों में दिखाई देती है।

पहली से पाँचवी कक्षा तक जहाँ तक संभव हो, मातृभाषा का इस्तेमाल शिक्षण के माध्यम के रूप में किया जाएगा। जहाँ घर और स्कूल की भाषा अलग-अलग है, वहाँ दो भाषाओं के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है।

लड़कियों की शिक्षा के लिए उनको भावनात्मक रूप से सुरक्षित वातावरण देने का सुझाव दिया गया है। कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय का विस्तार 12वीं तक करने का सुझाव नई शिक्षा नीति-2019 के मसौदे में किया गया है।

पढ़ाई की रुपरेखा “5+3+3+4” के आधार पर तैयारी की जाएगी। इसमें अंतिम 4 वर्ष 9वीं से 12वीं शामिल हैं। वर्ष 2030 को हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी। विद्यालयी शिक्षा से निकलने के बाद हर बच्चे के पास कम से कम लाइफ स्किल होगी। जिससे वो जिस क्षेत्र में काम शुरू करना चाहेगा कर सकेगा।

इसके अलावा, पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान पद्धतियों को शामिल करने, ‘राष्ट्रीय शिक्षा आयोग’ का गठन करने और प्राइवेट स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने से रोकने की सिफारिश की गई है।

रक्षा मंत्री ने कहा- ‘बर्ड्स सुरक्षित उतर गए’ तो PM मोदी ने संस्कृत के मन्त्रों से राष्ट्र रक्षा के प्रण को दोहराया, शेयर किए वीडियो

फ्रांस से 5 राफेल लड़ाकू विमानों का पहला बैच बुधवार (29 जुलाई, 2020) को अंबाला के IAF एयर फोर्स स्टेशन पर उतर चुका है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने अंबाला में राफेल बेड़े का स्वागत किया। ये पाँच लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के पायलटों द्वारा उड़ाया गया था। यह विमान करीब 7 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर भारत पहुँचा है। बीच में इन जेट्स को संयुक्त अरब अमीरात में उतारा गया था। वहीं, राफेल की एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग भी की गई थी।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर राफेल विमानों का स्वागत किया। खास बात ये है कि पीएम मोदी ने राफेल विमानों का स्वागत संस्कृत के एक श्लोक से किया।

पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा, ”राष्ट्ररक्षासमं पुण्यं, राष्ट्ररक्षासमं व्रतम्,राष्ट्ररक्षासमं यज्ञो, दृष्टो नैव च नैव च।। नभः स्पृशं दीप्तम्…स्वागतम्” इसका मतलब है कि राष्ट्र रक्षा के समान कोई पुण्य नहीं, राष्ट्र रक्षा के समान कोई व्रत नहीं, राष्ट्र रक्षा के समान कोई यज्ञ नहीं। पीएम ने वायु सेना के मैदान में जेट विमानों के उतरने का एक वीडियो भी पोस्ट किया।

वहीं इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा, “बर्ड्स सुरक्षित उतर गए हैं।’’ वायुसेना में लड़ाकू विमानों को ‘बर्ड’ (चिड़िया) कहा जाता है। ‘‘राफेल लड़ाकू विमानों का भारत पहुँचना हमारे सैन्य इतिहास के नए अध्याय की शुरुआत है। ये मल्टीरोल विमान भारतीय वायुसेना की क्षमताओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएँगे।’’

गौरतलब है कि जैसे ही राफेल जेट उतरे, नए 36 लड़ाकू विमानों की पहली खेप को अम्बाला में वाटर सलूट दिया गया। विमान को आधिकारिक तौर पर अगस्त की दूसरी छमाही में भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाएगा।

इससे पहले अरब सागर में तैनात INS कोलकाता ने राफेल से संपर्क स्थापित कर के उनका स्वागत किया। INS कोलकाता और उड़ते हुए राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट के फ्लाइंग लीडर के बीच हुई बातचीत में उन्होंने कहा:-

INS कोलकाता: ऐरो लीडर, इंडियन वॉरशिप नेवल डेल्टा 63, भारतीय महासागर में आपका स्वागत है।

फ्लाइंग राफेल लीडर: बहुत-बहुत धन्यवाद। समुद्र में सुरक्षा के लिए मुस्तैद भारतीय वॉरशिप को देखना आश्वासित करने वाला है।

INS कोलकाता: हमारी कामना है कि आप आसमान को छूते हुए शोभा पाएँ। हैप्पी लैंडिंग्स।

फ्लाइंग राफेल लीडर: आपको भी सुन्दर वातावरण मिले। हैप्पी हंटिंग। ओवर एंड आउट।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उड़ते हुए राफेल विमानों का वीडियो शेयर किया था।देश भर में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उस वीडियो को गर्व से शेयर किया। फ्रांस से 36 राफेल विमान आने हैं, जिनमें से ये 5 की पहली खेप है। कुछ ही दिनों में 5 और भी आने वाले हैं। इससे भारतीय वायुसेना काफी मजबूत हो गई है।

370 हटने के बाद J&K में हुए कई बदलाव, कश्मीरी युवकों के आतंकी समूहों में शामिल होने में आई 40% की कमी: रिपोर्ट

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहाँ से एक सुखद जानकारी सामने आई है। खबर ये है कि राज्य में आर्टिकल 370 हटने के बाद से कश्मीरी युवकों के आतंकी संगठन से जुड़ने का प्रतिशत काफी गिरा है

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि मोदी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खत्म किए जाने के बाद मुख्य रूप से पिछले साल में कश्मीरी युवाओं के आतंकवादी समूहों में शामिल होने में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है।

आतंकवादी समूहों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या एक साल पहले 105 थी। मगर इस साल 1 जनवरी और 15 जुलाई के बीच 67 तक गिर गई, जबकि इस अवधि के दौरान आतंकी घटनाएँ भी 188 से घटकर 120 हुई हैं।

इससे अलावा गृह मंत्री ने भी इस बात की जानकारी दी थी कि आर्टिकल 370 हटने के बाद जनवरी से मध्य जुलाई तक के बीच में 22 नागरिकों को मारा गया है। जबकि अब तक जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद के कारण स्थानीय और सुरक्षा कर्मियों सहित 41,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

इसी तरह इस बीच 136 आतंकियों को मारा गया है। इनमें से 110 स्थानीय थे और बाकी एलओसी पार करके आए थे। अनुच्छेद 370 हटने के बाद IED के हमलों की गिनती भी काफी गिरी है। जैसे पिछले साल 51 IED हमले हुए थे। इस साल इनकी संख्या 21 है। इस साल जितनी अवधि में एक IED हमला हुआ वहीं पिछले साल इतने समय तक में 6 IED हुए थे।

अब चूँकि जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर बढ़ रहे आतंकियों में भारी कमी आई है, तो वहीं पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह अब आतंकवादियों को कश्मीर में धकेल रहे हैं। इसके चलते नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर घुसपैठ की कोशिशें बढ़ गई हैं और कहा जा रहा है कि फिलहाल शांति कोरोना वायरल लॉकडाउन के कारण है।

एक जानकारी के मुताबिक, पिछले 7 महीनों में सुरक्षा बलों ने 136 आतंकियों को मारा है। जबकि साल 2019 में 126 आतंकवादी मारे गए थे। इसी प्रकार पूरे साल जहाँ पिछले वर्ष 75 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। वहीं इस साल हताहत होने वाले जवानों की संख्या 35 है।

इस साल सुरक्षाबलों ने कई आतंकियों को मारकर बड़ी सफलता हासिल की। जैसे हिजबुल के 50 आतंकियों को इस वर्ष मारा गया और उनका चीफ रियाज नायकू भी मौत के घाट उतार दिया गया। वहीं अन्य संगठन के आतंकी भी मुठभेड़ में मारे गए। फिर चाहे वह लश्कर ए तैयबा के हों या जैश ए मोहम्मद के।

बता दें, गत वर्ष 5 अगस्त को मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 निरस्त करके एक ऐतिहासिक फैसला लिया था। इसके बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील कर दिया गया था।

‘मुझे केंद्र से फ़ोन आए कि कारसेवक बाबरी गुंबद पर चढ़ गए हैं, मैंने कहा वो तोड़ भी रहे हैं, लेकिन गोली नहीं चलाऊँगा’

कारसेवक बाबरी पर चढ़ गए थे, तभी उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को केन्द्रीय गृह मंत्री का फ़ोन आया था, लेकिन उन्होंने जवाब दिया कि मैं गोली नहीं चलाऊँगा। दिसंबर 06, 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद को कारसेवकों ने गिरा दिया था।

उस समय उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और राज्य में मुख्यमंत्री के पद पर कल्याण सिंह विराजमान थे। कल्याण सिंह पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने बाबरी मस्जिद को टूटने से नहीं बचाया।

इसका नतीजा यह हुआ कि भाजपा के हाथों से उत्तर प्रदेश की सत्ता खिसक गई, जिससे समाजवादी पार्टी और बसपा जैसी पार्टियों के अच्छे दिन आए। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद कल्याण सिंह ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ये कहते हुए दिसम्बर 06, 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था कि मैंने ही आदेश दिया था कि कारसेवकों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए।

बाबरी विध्वंस के बाद उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने कहा था कि उन्हें सूचना दी गई कि कार सेवक बाबरी पर चढ़ गए हैं, लेकिन उन्होंने गोली चलाने के आदेश नहीं दिए। साथ ही, कल्याण सिंह इस भाषण में कहते देखे जा सकते हैं कि वो इसकी जिम्मेदारी लेते हैं और जो भी कार्रवाई करनी है, उन पर की जाए।

बाबरी विध्वंस के बाद दिए गए इस भाषण में कल्याण सिंह ने कहा – “सारी जिम्मेदारी मैं अपने ऊपर लेता हूँ। किसी कोर्ट में किसी को चलना है तो मेरे साथ चलो। किसी कमीशन में कोई कार्रवाई करनी है तो मेरे खिलाफ करो, किसी को दंड ही देना है तो किसी और को ना देकर मुझे दो।

केंद्र सरकार द्वारा फ़ोन कर दबाव बनाने का जिक्र करते हुए कल्याण सिंह ने कहा-

“मैं इस बात से जुड़े एक-एक बिंदु का स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार हूँ कि मैंने अथवा मेरे साथियों, सहयोगियों या मेरी सरकार ने कहीं किसी प्रकार से कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट नहीं किया है। क्या मैं गोली चला देता? NIC की मीटिंग में मैंने स्पष्ट किया कि गोली नहीं चलाऊँगा, गोली नहीं चलाऊँगा, गोली नहीं चलाऊँगा। 06 दिसम्बर को लगभग 01 बजे जब केंद्र सरकार के गृह मंत्री चौहान जी का मेरे पास फ़ोन आया और कहा कि मेरे पास यह सूचना है कि कार सेवक गुम्बद पर चढ़ गए हैं, आपके पास क्या सूचना है ? मैंने कहा मेरे पास एक कदम आगे की सूचना है कि कार सेवक गुम्बद पर चढ़ गए है और उन्होंने गुम्बद को तोड़ना भी शुरू कर दिया है। लेकिन एक बात ध्यान रखना कि गोली नहीं चलाऊँगा। लेकिन हाँ, गोली चलाने के अलावा जो भी काम हालात को नियंत्रण में लाने के लिए किया जा सकता है वो हम कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि बाबरी विध्वंश के समय केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव थे। इस बारे में एक किस्सा और मिलता है। पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी आत्मकथा में लिखा था कि जब बाबरी गिराई जा रही थी, उस समय नरसिम्हा राव पूजा पर बैठे थे।

इस किताब के अनुसार, ”मेरी जानकारी है कि राव की बाबरी मस्जिद विध्वंस में भूमिका थी। जब कारसेवक मस्जिद को गिरा रहे थे, तब वह पूजा में बैठे हुए थे। वह वहाँ से तभी उठे जब मस्जिद का आख़िरी पत्थर हटा दिया गया।”

इस घटना के इतने साल बाद बाद सियासत ने बड़ी करवट ली और एक बार फिर भाजपा उत्तर प्रदेश की सत्ता पर पूर्ण बहुमत के साथ विराजमान है। प्रदेश के मुख्यमंत्री इस समय योगी आदित्यनाथ हैं। केंद्र में भी भाजपा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ मौजूद है और नरेंद्र मोदी इस समय प्रधानमंत्री हैं।

रिया चक्रवर्ती ने अपने बचाव में जिस वकील को नियुक्त किया है, वो देश के सबसे महँगे वकीलों में से एक हैं

सुशांत सिंह राजपूत के पिता द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाने पर बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने देश के सबसे महँगे वकीलों में से एक, सतीश मनेशिंदे को केस में बचाव के लिए नियुक्त किया है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि आखिर कौनसा स्ट्रगलिंग कलाकार महँगे वकील की नियुक्त करने की क्षमता रखता है?

इससे पहले, मनेशिंदे ने 1998 में सलमान खान के काले हिरन के शिकार मामले और 1993 मुंबई ब्लास्ट केस में संजय दत्त जैसे फिल्म अभिनेताओं का बचाव किया था। रिया के वकील सतीश मनेशिंदे ने जानकारी दी है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में अपने खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई है। जिसमें उन्होंने पटना में दर्ज मामले को मुंबई ट्रांसफर करने की माँग की है।

कौन हैं सतीश मनेशिंदे?

सतीश मनेशिंदे ने अपने करियर की शुरुआत वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी के जूनियर के रूप में की थी, जहाँ उन्होंने सिविल और आपराधिक कानून का अभ्यास किया। उन्होंने 1993 के मुंबई ब्लास्ट मामले में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त का बचाव किया था।

वह संजय दत्त का बचाव करने वाली कानूनी टीम का हिस्सा थे, जिसमें दिल्ली के वरिष्ठ वकील राजेंद्र सिंह के पोते फरहान शाह और करण सिंह शामिल थे। दत्त को 2006-2007 में एके -56 राइफल और 9 एमएम पिस्टल रखने के लिए आर्म्स एक्ट के तहत एक विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था। उन्हें छह साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था लेकिन सजा घटाकर पाँच साल कर दी गई थी।

मनेशिंदे को पालघर लिंचिंग मामले में विशेष सरकारी वकील के रूप में भी नियुक्त किया गया है, जिसमें कि दो साधुओं और उनके एक ड्राईवर को भीड़ ने मार दिया था। घटना के वायरल वीडियो में पुलिस को मूकदर्शक के रूप में खड़ा देखा गया था, जबकि भीड़ ने दोनों साधुओं की निर्मम हत्या की थी।

गौरतलब है कि जून 14, 2020 को, 34 वर्षीय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए। इस मंगलवार को, सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना में एक प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि सुशांत की प्रेमिका रिया ने उनसे रूपए ऐंठने के साथ ही उन्हें आत्महत्या करने के लिए उकसाया था। इस प्राथमिकी में कहा गया है कि उसने 15 करोड़ रुपए, लैपटॉप, आभूषण ले लिए और सुशांत को छोड़ दिया था।

सुशांत के पिता ने आरोप लगाया कि रिया चक्रवर्ती सुशांत के संपर्कों का उपयोग करके फिल्म इंडस्ट्री में खुद को स्थापित करने के मकसद के चलते उनके जीवन में आई और उनके रिश्तेदारों के मामलों में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया था।

J&K पुलिस ने अलग-अलग सर्च अभियान में किया अबरार, वकार, मुनीर को गिरफ्तार, आतंकियों को पहुँचाते थे मदद

जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा में आज (जुलाई 29, 2020) पुलिस ने 3 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इन तीनों की पहचान बाग़ बांदीपोरा के अबरार गुलजार, चित्तय बंदे के मोहम्मद वकार और कुइल मुकाम बांदीपोरा के मुनीर अहमद शेख के रूप में की गई है। 

इन्हें बांदीपोरा पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर के तहत गिरफ्तार किया गया है। जाँच के मुताबिक ये तीनों बांदीपोरा जिले में सक्रिय आतंकवादियों को कई तरह की सहायता प्रदान करते थे, साथ ही तमाम देश विरोधी गतिविधियों में भी शामिल थे।

बांदीपोरा के एसएसपी ने बताया कि इन तीनों को अलग-अलग सर्च ऑपरेशन में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपितों के घर से कई आपत्तिजनक सामग्रियाँ बरामद की गई हैं। मामले में आगे की जाँच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि तीनों को थाना बांदीपोरा के एफआईआर नंबर 74/2020 U/S और धारा 16, 18 , 39UAPA, 7/27IA के तहत गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि इस कामयाबी से पहले जम्मू कश्मीर में एक और सफलता हाथ लगी थी। 12 जुलाई को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने पुलवामा हमले की जाँच के दौरान मोहम्मद इकबाल राठेर को गिरफ्तार किया था। वह बडगाम जिले के चरार-ए-शरीफ के फुतलीपुरा इलाके का निवासी था।

NIA द्वारा जारी प्रेस रिलीज से मालूम हुआ था कि मो इकबाल पर आरोप है कि उसने जैश ए मोहम्मद के आतंकवादी और अहम साजिशकर्ता मोहम्मद उमर फारूक की मूवमेंट में मदद की। शुरुआती जाँच में ये भी पता चला था कि मोहम्मद इकबाल लगातार पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश से मैसेजिंग ऐप के जरिए संपर्क में था। वह JeM के “परिवहन मॉड्यूल” का भी हिस्सा था।

उससे पहले किश्तवाड़ से हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी रुस्तम अली को गिरफ्तार किया था। रुस्तम पिछले साल अप्रैल में आरएसएस कार्यकर्ता चंद्रकांत शर्मा और उनके पीएसओ की हुई हत्या में शामिल था। रुस्तम का नाम एनआईए की चार्जशीट में भी शामिल था। चंद्रकांत किश्तवाड़ ज़िला अस्पताल में ही फार्मासिस्ट थे।

धारदार हँसिए से पेट फाड़कर नबीउल्ला खाँ ने अपनी पत्नी को आग में झोंका, अस्पताल में मौत

उत्तर प्रदेश के सीतापुर हरगाँव थाना क्षेत्र में शौहर नबीउल्ला खाँ ने धारदार हँसिए से हमला करने के बाद अपनी पत्नी पर पेट्रोल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में आठ आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया है। साथ ही, मुख्य आरोपित नबीउल्ला खाँ से पूछताछ कर रही है।

ससुराल वाले पहले से करते थे प्रताड़ित

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के भाई अजीम ख़ाँ ने थाने में तहरीर दी कि उसकी बहन खलीकुन निशा का विवाह तेरह वर्ष पूर्व हरगाँव के मिल बगिया बाजार निवासी नबी उल्ला खाँ के साथ हुआ, जिसके बाद नबी उल्ला खाँ के अवैध संबंधों को लेकर उनका हमेशा झगड़ा होता रहता था।

उसके भाई अजीम खाँ ने आरोप लगाया कि उसी आपसी विवाद के चलते ही ससुराल वालों ने मिल कर उसकी बहन खलीकुन को लाठी, डंडों से पीटा और धारदार हथियार से पेट व गले पर हमला किया। धारदार हथियार (हँसिए) से उन लोगों ने खलीकुन का पेट फाड़ डाला। पेट फटने के बाद आरोपित नबी उल्ला खाँ ने खलीकुन पर पेट्रोल डाल कर उसे आग के हवाले कर दिया।

आग से झुलसती खलीकुन निशा ने दर्द से चीखना शुरू कर दिया। जिसको सुनकर गाँव वाले महिला को बचाने के लिए दौड़े। लोगों को घर की तरफ आता देख नबी उल्ला खाँ अपने घर वालों के साथ फरार हो गया। लोगों ने फौरन पुलिस को इसकी जानकारी दी और महिला को आग से निकाल लिया।

मौके पर पहुँची पुलिस ने गंभीर रुप से घायल खलीकुन को जिला अस्पताल में भर्ती किया था। जहाँ उसकी हालत को नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया। लेकिन लखनऊ के सिविल अस्पताल में देर शाम खलीकुन निशा की मौत हो गई।

मृतक खलीकुन निशा के भाई ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी बहन 13 साल से घरेलू हिंसा शिकार हो रही थी। ससुराल वाले उसकी बहन पर मायके जाने का दबाव बनाते थे। मायके नहीं जाने पर वे उसकी बहन और उसके दो बच्चे आसिफ व आयका को भी आए दिन मरते पीटते रहते थे। एक वर्ष पहले बहनोई नबी उल्ला खाँ ने खलीकुन निशा की नाक काट दी थी। मामला थाने पहुँचा था, लेकिन सुलह समझौता हो गया था।

एडिशनल एसपी डॉ राजीव दीक्षित ने पीड़ित के मौत की जानकारी देते हुए कहा कि, मामले में पहले से केस दर्ज है। अब धाराएँ बढ़ाकर कार्रवाई की जाएगी। आरोपित नबी उल्ला खाँ को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बाकी आरोपितों की तलाश जारी है। उन्होंने लोगों को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया।

खालिद ने ईशनिंदा के आरोपित ताहिर को बीच कोर्ट में मारी गोली, बोला- ‘मुझे सपने में पैगंबर ने इसे मारने को कहा’

पाकिस्तान के पेशावर में आज (जुलाई 29, 2020) एक मुस्लिम युवक को अदालत के अंदर गोली मार दी गई। उस पर आरोप था कि उसने खुद को पैगंबर बताकर इस्लाम का अपमान किया।

हालाँकि, अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि कड़ी सुरक्षा के बावजूद गोली मारने वाला कोर्ट में कैसे आया। मगर, घटना के बाद उसकी गिरफ्तारी हो गई है। पूछताछ में उसने अपना नाम खालिद खान बताया है। जबकि मृतक का नाम ताहिर शमीम है।

पुलिस ने बताया कि ताहिर को 2 साल पहले ईशनिंदा के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। उसने उस समय खुद को इस्लामिक पैगंबर बताया था।

पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने भी अपने ट्विटर पर इस मामले को शेयर किया है। उनका दावा है कि खालिद ने पकड़े जाने के बाद कहा, “इस्लाम के पैगंबर मेरे सपने में आए और मुझसे इस आदमी को मारने को कहा।”

राहत का कहना है कि इस घटना के बाद पाकिस्तान में युवक को बहुत सराहा जा रहा है और उसे नायक की तरह दर्शाया जा रहा है। वहीं उसके परिवार को तोहफे भी मिल रहे हैं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में ईशनिंदा एक दण्डनीय अपराध है। यहाँ यदि कोई इस अपराध के तहत गिरफ्तार होता है तो उसे आजीवन कारावास की सजा या फिर मौत की सजा सुनाई जा सकती है। लेकिन अगर वह आम जनता के हत्थे चढ़ जाए तो उसे मौके पर मौत दे दी जाती है।

कुछ समय पहले पंजाब प्रांत के राज्यपाल को उनके अपने सुरक्षाकर्मी ने मार दिया था। उनकी गलती ये थी कि उन्होंने एक ऐसी ईसाई महिला आसिया बीबी का साथ दिया जो ईशनिंदा की आरोपित थी। अंतराष्ट्रीय मीडिया में इस बात के तूल पकड़ने के बाद महिला को 8 महीने बाद रिहा कर दिया गया था। लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथियों की धमकियों का उसे लगातार सामना करना पड़ा। आखिरकार इन सबसे खुद को बचाते हुए वह पिछले साल कनाडा अपनी बेटी के पास चली गई।