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INS कोलकाता ने ऐसे किया 5 राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट्स का स्वागत, सुनें रोमांचित कर देने वाला ऑडियो

भारत में राफेल फाइटर विमानों की लैंडिंग हो गई है और इसके साथ ही पूरा देश 5 मेहमानों के स्वागत में मशगूल है। पाँचों राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट हरियाणा स्थित अम्बाला एयरबेस पर उतरे। उससे पहले वहाँ लोगों ने ख़ुशी में एक-दूसरे को मिठाइयाँ खिलाई। 36 विमानों की पहली खेप को अम्बाला में वाटर सलूट भी दिया गया। इससे पहले अरब सागर में तैनात INS कोलकाता ने राफेल से संपर्क स्थापित कर के उनका स्वागत किया।

INS कोलकाता और उड़ते हुए राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट के फ्लाइंग लीडर के बीच हुई बातचीत का वो हिस्सा आप भी सुन सकते हैं, जिससे हर भारतवासी को गर्व की अनुभूति होगी। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप इसे सुन सकते हैं:

INS कोलकाता: ऐरो लीडर, इंडियन वॉरशिप नेवल डेल्टा 63, भारतीय महासागर में आपका स्वागत है।
फ्लाइंग राफेल लीडर: बहुत-बहुत धन्यवाद। समुद्र में सुरक्षा के लिए मुस्तैद भारतीय वॉरशिप को देखना आश्वासित करने वाला है।
INS कोलकाता: हमारी कामना है कि आप आसमान को छूते हुए शोभा पाएँ। हैप्पी लैंडिंग्स।
फ्लाइंग राफेल लीडर: आपको भी सुन्दर वातावरण मिले। हैप्पी हंटिंग। ओवर एंड आउट।

ऊपर हमने दोनों के बीच हुई बातचीत के ऑडियो का हिन्दी अनुवाद पेश किया है, जिसे पढ़ कर आप भी गर्व की अनुभूति कर सकते हैं। अब नीचे हम आपको वो वीडियो दिखा रहे हैं, जिसमें दो सुखोई-30 MKI राफेल को लेकर अम्बाला एयरबेस जा रहे हैं। इस वीडियो में जब हमने उपर्युक्त बातचीत का ऑडियो डाला तो ये और भी निखर कर सामने आया। आप भी इस एडिटिंग का आनंद उठाइए:

वायुसेना प्रमुख राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने राफेल का अम्बाला में स्वागत किया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उड़ते हुए राफेल विमानों का वीडियो शेयर किया। देश भर में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उस वीडियो को गर्व से शेयर किया। फ्रांस से 36 राफेल विमान आने हैं, जिनमें से ये 5 की पहली खेप है। कुछ ही दिनों में 5 और भी आने वाले हैं। इससे भारतीय वायुसेना काफी मजबूत हो गई है।

नेपाल के गरीब किसान के बेटे की मदद को सामने आए भारतीय: IIM-अहमदाबाद में प्रवेश के लिए फीस भरने में आई कठिनाई

नेपाल के एक गरीब शिक्षक और किसान के 24 वर्षीय बेटे आशिक जयसवाल (Aashik Jayswal) ने कठिनाइयों का सामना करते हुए भारत के एक प्रतिष्ठित इंस्टिट्यूट आईआईएम का एंट्रेंस पास किया। आईआईएम-अहमदाबाद का एंट्रेंस निकलने से आशिक का बरसों पुराना सपना सच हो गया। लेकिन आशिक को कहाँ पता था कि इस सपने में रुकावट अभी आनी बाकी है।

दरअसल, आशिक ने फूड एंड एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट (PGPFABM) के जिस दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश लेना चाहा है। जिसकी फीस बहुत ज्यादा है। कोर्स की इतनी ज्यादा फीस का पता लगते ही आशिक का सपना जैसे कहीं अटक गया।

जयसवाल अपने परिवार के साथ पूर्वी चंपारण में भारत-नेपाल सीमा से लगभग 20 किलोमीटर दूर रहते हैं। जहाँ हर कोई खेती कर अपनी जिंदगी का गुजर करता है। आशिक के पिता एक अस्थायी शिक्षक के रूप में काम करते है। इसके साथ वे खेती भी करते हैं। जयसवाल ने 10 वीं तक की शिक्षा अपने गाँव में पूरी की। जिसके बाद वह अपने बाकी स्कूल ग्रेजुएशन के लिए काठमांडू चले गए। आशिक को भारतीय दूतावास से छात्रवृत्ति प्राप्त हुआ था। ताकि वे प्रयागराज से कृषि में बीएससी की पढ़ाई कर सके।

प्रयागराज में पढ़ाई के दौरान, उन्हें आईआईएम में कृषि में दो वर्षीय पाठ्यक्रम का पता चला। जयसवाल का परिवार भी नेपाल में कृषि से जुड़ा हुआ है। जिसको ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने गाँव की खेती को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

आशिक ने बताया, “अपने अंडरग्रेजुएशन के दौरान, मैंने अपने सीनियर्स को कैट के लिए प्रश्नपत्र को हल करने की कोशिश करते हुए देखा था। मुझे मैथ्स के सवाल बहुत पसंद थे। मैं उन्हें बहुत जल्दी हल कर लेता था। मेरे सीनियर्स ने मुझे बताया कि IIMA से कृषि में डिग्री मेरे लिए एमएससी से ज्यादा फायदेमंद होगी। इसलिए मैंने कैट की तैयारी शुरू कर दी।” आशिक ने कैट (कॉमन एडमिशन टेस्ट) की परीक्षा को पास कर लिया। लेकिन परीक्षा को पास करना ही बड़ी बात नहीं थी। असली कठिनाई तो अब शुरू हुई।

जयसवाल एक गरीब परिवार से हैं। उसके लिए आईआईएमए की मोटी फीस भर पाना बहुत बड़ी बात थी। ऑपइंडिया से बात करते हुए आशिका ने कहा, “मैं नेपाल में इमारत की सातवीं मंजिल पर था जब 2015 में आए भूकंप ने देश को तबाह कर दिया था। मैं बिना सैनिटाइजेशन के उपयोग के एक सप्ताह तक जीवित रहा। लेकिन मैंने वहाँ एक बड़ा सबक सीखा। मैंने सीखा कि मैं कठिन से कठिन दौर में भी जीवित रह सकता हूँ।”

जयसवाल ने कहा कि पहले, भारत में उसके रिश्तेदारों ने उसे पैसे की मदद करने का वादा किया था। हालाँकि, चीन से फैले कोरोना वायरस महामारी की वजह से वो लोग मुझे पैसे नहीं दे पाएँ। जयसवाल ने बैंकों से भी उधार लेने की कोशिश की। आशिक का परिवार 0.5 एकड़ आर्द्र भूमि और एक घर का मालिक है और उसके पिता की वार्षिक आय 3 लाख रुपए है।

नेपाल के बैंक आशिक को कोलैटरल के बिना फीस की रकम लोन देने की स्थिति में नहीं है। न ही वहाँ के बैंक उसे सिक्योर्ड लोन दे सकते है। भारतीय नागरिक को आईआईएमए में शिक्षा पूरी करने के लिए मदद की जाती है। लेकिन उसे यह मदद नहीं मिल सकती क्योंकि वह नेपाली है।

जयसवाल ने कहा, “मैं भारतीय बैंकों से ऋण नहीं ले सकता था क्योंकि मैं एक नेपाल नागरिक हूँ। एक गैर-भारतीय के रूप में मैं यहाँ ऋण के लिए पात्र नहीं था। मैं अपनी शिक्षा के लिए लोगों से क्राउडफंडिंग के रूप में पैसे नहीं इकट्ठा करना चाहता हूँ। मैं ऐसे कॉर्पोरेट्स से स्पांसरशिप लेना चाहूँगा, जो कृषि या ऋणों पर विश्वास करते हैं जिन्हें मैं बाद में लिए हुए पैसे लौटा दूँ। लोग दयालु हैं। वे मेरी मदद कर सकते हैं। लेकिन यह महामारी का समय सभी के लिए कठिन है। पैसों की अनिश्चितता बनी हुई है, तो वे जो पैसा आज मुझे दे सकते हैं वह कल उनके काम आ सकता है। इसलिए, मैं अपने मेरिट पर आगे बढ़ना चाहता हूँ। मेरी मदद को आगे आए लोगों की मैं सराहना करता हूँ। लेकिन मैं प्रत्येक व्यक्ति से मदद नहीं ले सकता हूँ।”

जयसवाल ने उन सभी से संपर्क किया है जो उनकी मदद कर सकता हो। जैसे कि- NBFCs, निजी निवेशक, SAARC के पूर्व छात्र । इसके अलावा IIMA के पूर्व छात्र भी उनकी मदद करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं।

नेपाली नागरिक की मदद के लिए जुटे भारतीय

इस बीच, कुछ मदद मिलनी शुरू हो गई है। अहमदाबाद स्थित एक एनजीओ ने उन्हें पहले सेमेस्टर की फीस देने में मदद की है। जो इस हफ्ते के अंत से शुरू होने वाला है। अहमदाबाद के उद्यमी पंकज मशरूवाला (जो कृषि व्यवसाय में काम करते हैं) वे भी उनकी मदद के लिए आगे आए हैं। मशरुवाला ने जयसवाल को बताया कि 40 साल पहले उनकी भी किसी ने फीस भरने में मदद की थी। उन्होंने वादा किया था कि समय आने पर वह इसका भुगतान करेंगे।

नागपुर के रहने वाले के एस चीमा ने भी बची हुई राशि के लिए जयसवाल को लोन देने की पेशकश की है। वहीं नेपाल के रहने वाले दिवेश बोथरा ने भी उनके साथ संपर्क किया है। जयसवाल की मदद के लिए दिवेश ने अपने नियोक्ताओं से भी बात की है।

गौरतलब है कि फीस की समस्या का आंशिक रूप से समाधान हो गया है। लेकिन जयसवाल को अभी भी दूसरे वर्ष की फीस की व्यवस्था करनी है। वह अभी भी व्यक्तियों, कॉर्पोरेटों और वित्तीय संस्थानों से बात कर रहे है जो उसकी मदद कर सकते हैं।

अगर आप भी इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आशिक जयसवाल की मदद करना चाहते हैं, तो आप उनके इस मेल आईडी [email protected] के जरिए उनसे संपर्क बना सकते हैं।

नई शिक्षा नीति को मोदी कैबिनेट की मंजूरी: 11 पॉइंट्स में समझिए भारत में कैसे बदलने वाली है शिक्षा की रूपरेखा

भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति (NEP) को मंजूरी देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया है। इसका उद्देश्य है कि पूरे देश की शिक्षा में आमूलचूल बदलाव किया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इसे हरी झंडी दी गई। NEP पर जल्द ही केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल निशंक अहम घोषणाएँ करते हुए महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा करेंगे।

इस बार कोरोना वायरस की वजह से अक्टूबर-नवम्बर में सेशन शुरू हो रहा है और केंद्र सरकार चाहती है कि इससे पहले NEP को सम्पूर्ण रूप से लागू कर इसके तहत पढ़ाई शुरू हो जाए। इसके ड्राफ्ट को इसरो प्रमुख रहे के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञों की समिति ने तैयार किया है और पीएम मोदी ने 1 मई को इसकी समीक्षा की थी। कुछ नॉन-हिंदी राज्यों ने इसमें हिंदी पर जोर देने की बात करते हुए आपत्ति जताई है, जिसके समधाम का भरोसा दिया गया है

सरकार का मुख्य जोर शिक्षा में समानता पर है और साथ ही सभी को गुणवत्ता वाली शिक्षा की जद में कैसे लाया जाए, इस पर जोर दिया गया है। नए फ्रेमवर्क के जरिए 21वीं सदी में ज़रूरी स्किल्स पर जोर दिया गया है। साथ ही पर्यावरण, कला और खेल जैसे क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी गई है। भारत की विविध भाषाओं को ध्यान में रखते हुए इसे तैयार किया गया है। शिक्षा के आदान-प्रदान में ऊपर से नीचे तक तकनीक के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी गई है।

अब सवाल ये है कि NEP में है क्या? आधिकारिक घोषणा होने के बाद इस बारे में विस्तृत विवरण आएगा। तब तक आप निम्नलिखित बिंदुओं के जरिए इसे अच्छी तरह से समझ सकते हैं और इसके उद्देश्य को जान सकते हैं (साभार: Livemint की खबर):

  • शिक्षा का यूनिवर्सल एक्सेस: जिन्होंने स्कूल-कॉलेज ड्राप कर दिया है, उन्हें भी शिक्षा की पहुँच में लाना। 3-18 उम्र समूह के सभी छात्र-छात्राओं को। 2030 तक स्कूली शिक्षा के छत तले लाना।
  • नया पाठ्यक्रम, नए तौर-तरीके: पहले 5 वर्ष तक के बच्चों को फाउंडेशन स्टेज में रखा जाएगा। उसके बाद के 3 साल के बच्चों को प्री-प्राइमरी स्टेज में रखा जाएगा। अगले 3 वर्ष वाले प्रिपेटरी या लैटर प्राइमरी में रहेंगे। मिडिल स्कूल के पहले 3 साल में छात्रों अपर प्राइमरी समूह में रखा जाएगा। 9वीं से 12वीं तक तक छात्र सेकेंडरी स्टेज में रहेंगे।
  • आर्ट्स और साइंस के बीच न बने गैप: आर्ट्स, ह्यूमनिटीज, साइंस और स्पोर्ट्स के साथ-साथ वोकेशनल विषयों में अच्छे से पढ़ाई हो, छात्रों को इन्हें चुनने की स्वतंत्रता मिले और सब पर ध्यान दिया जाए।
  • स्थानीय भाषा/मातृभाषा में उपलब्ध हो शिक्षा: 8 साल तक के बच्चे किसी भी भाषा को आसानी से सीख सकते हैं और कई भाषाएँ जानने वाले छात्रों को भविष्य में करियर में भी अच्छा स्कोप मिलता है। इसीलिए, उन्हें कम से कम 3 भाषाओं की जानकारी दी जाए।
  • स्कूलों में त्रिभाषीय फॉर्मूला: इसे ‘थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला’ कहा गया है। स्थानीय क्षेत्रों और वहाँ की संस्कृति को ध्यान में रखते हुए इसे पिछली शिक्षा नीतियों की तरह ही रखा जाएगा।
  • भारत की क्लासिक भाषा की जानकारी: 6 से 8 कक्षा तक छात्रों को भारत की भाषा और उसे जुड़े इतिहास व साहित्य-संसाधन से परिचित कराया जाएगा। समृद्ध भाषाओं को बनाए रखने के लिए ये ज़रूरी है।
  • शारीरिक शिक्षा: फिजिकल सक्रियता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। खेल, योग, मार्शल आर्ट्स, व्यायाम, नृत्य और बागबानी सम्बंधित गतिविधियों में बच्चों की सक्रियता बढ़ाई जाएगी। स्थानीय शिक्षकों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • राज्यों के लिए संस्था: सभी राज्यों में पठन-पाठन पर नज़र बनाए रखने के लिए स्वतंत्र ‘स्टेट स्कूल रेगुलेटरी बॉडी’ का गठन किया जाएगा। ये सभी राज्यों में अलग-अलग होगी।
  • नेशनल रिसर्च फाउंडेशन: प्रोपोज़ल्स की सफलता के आधार पर रिसर्च के लिए पर्याप्त फंड्स मुहैया कराए जाएँगे। सभी विषयों में रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • राष्ट्रीय शिक्षा आयोग: NEP एक नया ‘नेशनल एजुकेशन कमीशन’ बनाने के लिए भी राह प्रशस्त करेगा, जिसके अध्यक्ष खुद प्रधानमंत्री होंगे। शिक्षा के परिदृश्य में समीक्षा, बदलाव और निगरानी के लिए यही संस्था कार्य करेगी।
  • शिक्षा मंत्रालय: मानव संसाधन मंत्रालय का नाम अब शिक्षा मंत्रालय होगा, जिससे शिक्षा पर जोर दिया जा सके।

इस तरह से भारत की शिक्षा में दशकों से हो रहे बदलाव की माँगों को पूरा किया गया है। अक्सर ये माँग उठती रहती है कि अब तक वामपंथियों के बनाए ढर्रे पर ही देश की शिक्षा व्यवस्था धक्के खा रही है, जो न तो नए युग के हिसाब से बच्चों को योग्य बना पाता है और न ही उन्हें अपने देश एवं संस्कृति का महत्व समझा पाता है। इतिहास में किए गए छेड़छाड़ को दूर करने की भी माँग उठती रहती है।

आडवाणी का ऐतिहासिक वीडियो, जिसके बाद ‘बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का’ नारा बना जन आंदोलन

‘बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का’, ‘आडवाणी जी आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं’ ‘जन्मभूमि के काम न आए, वो बेकार जवानी है… ख़ून नहीं वो पानी है..।’ सोमनाथ से अयोध्या की रथयात्रा में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी रामजन्मभूमि पर मंदिर बनाने के संकल्प को लेकर जहाँ से भी गुजरे। वहाँ रामभक्त बस यही उद्घोष कर रहे थे। कहते हैं कि आडवाणी का रथ उस रथयात्रा में भले अयोध्या नहीं पहुँच पाई हो लेकिन उनका संकल्प जरूर जन-जन तक पहुँच गया था।

वर्ष 1990 ने भारतीय राजनीति और समाज में व्यापक परिवर्तन की नींव रखी थी। लाल कृष्ण आडवाणी ने, जो कि उस समय भाजपा के अध्यक्ष थे, 25 सितंबर से मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा शुरू कर दी। इस रथयात्रा को 30 अक्टूबर को ही अयोध्या पहुँचना था। लेकिन उससे पहले ही उनके रथ को रोक दिया गया था। लेकिन देशवासियों का संकल्प अपने रामलला के मंदिर निर्माण की दिशा में सदैव आगे बढ़ता रहा।

लंबे समय से प्रतीक्षारत अयोध्या श्रीराम मंदिर निर्माण और इसके भूमी पूजन की तारीख की घोषणा के बाद से पूरे देशभर में हिन्दुओं में उत्साह का माहौल है। पिछले साल 9 नवंबर को अपने एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए स्थल सौंपने और उसी के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया। इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को पाँच एकड़ उपयुक्त जमीन देने का निर्देश भी दिया।

लेकिन क्या हिन्दू आस्था के सबसे बड़े और अहम प्रतीक भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण का सफर इतना सरल और खुशनुमा था? इसका जवाब इस मंदिर के इतिहास और बाबरी मस्जिद विवाद के साक्षी लोगों से बेहतर और कौन दे सकता है।

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद पर अयोध्या भूमि विवाद भारत के सबसे लंबे भूमि विवाद में से एक है, जो दशकों तक जारी रहा। वर्ष 1528 में इस्लामिक आक्रान्ता बाबर के शासनकाल के दौरान, पुराने हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था और अयोध्या में उसी स्थान पर एक मस्जिद का निर्माण किया गया था, जिसे बाबर के नाम पर रखा गया था।

1859 में औपनिवेशिक ब्रिटिश प्रशासन ने इस साइट के चारों ओर एक बाड़ लगा दी, जो हिंदू और दूसरे मजहब के लिए पूजा के अलग-अलग क्षेत्रों को दर्शाता है। यही कारण है कि यह ढाँचा लगभग 90 वर्षों तक खड़ा रहा। हालाँकि, कानूनी रूप से यह विवाद पहली बार 1980 के दशक में शुरू हुआ और 2019 में दो दशकों से भी अधिक समय के बाद लगभग समाप्त हो गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार अपना फैसला दिया।

लेकिन, भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने हिन्दुओं के मन में इस राम मंदिर के लिए आस्था और उत्साह का जो संचार किया, वह आज भुलाया नहीं जा सकता है। इसी क्रम में वो दिन स्मरण हो आता है जब लालकृष्ण आडवाणी, अयोध्या पहुँचे थे।

1990 में वीपी सिंह बीजेपी के समर्थन से भारत के प्रधान मंत्री बने, जिन्होंने चुनाव में 58 सीटें जीती थीं। तब, तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने अयोध्या स्थित इस भूमि पर श्रीराम मंदिर बनाने के फैसले के समर्थन के लिए देशभर में एक रथ यात्रा निकाली थी। 23 अक्टूबर को, उन्हें यात्रा के दौरान बिहार में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद भाजपा ने सरकार को दिया हुआ अपना समर्थन वापस ले लिया।

इसी क्रम में जब लालकृष्ण आडवाणी जब सोमनाथ से अयोध्या के लिए निकले थे , तो उनकी राजनीतिक और धार्मिक रैली के हर पड़ाव में उनका समर्थन करने के लिए हजारों की संखा में भीड़ उमड़ी। रथयात्रा के दौरान जहाँ से भी अडवाणी का रथ गुजरा सड़कों पर लोगों के जनसैलाब ने आडवाणी को मंत्रों और फूलों के साथ सम्मानित किया। इस संकल्प के स्वागत के लिए, हर पड़ाव पर श्रीराम भक्तों के हाथों में भगवा झंडे, धनुष और त्रिशूल नजर आ रहे थे।

श्रीराम जन्मभूमि में मंदिर निर्माण का खाका वर्ष 1984-85 में तैयार किया गया था। इस पूरे मामले का केंद्र प्रयागराज में अशोक सिंहल का निवास ‘महावीर भवन’ बना। इसी जगह पर संत-महात्माओं के साथ रज्जू भैया, डॉ मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, सुब्रमण्यम स्वामी, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, विनय कटियार ने बातचीत की थी। लालकृष्ण आडवाणी ने जब रथयात्रा निकाली तो अशोक सिंहल का उन्हें पूरा सहयोग मिला। इसने देश भर में भगवान् श्री राम के मंदिर के लिए माहौल बना दिया था।

आखिरकार लम्बे इन्तजार के बाद, आने वाले 5 अगस्त को इस दिव्य मंदिर का भूमिपूजन किया जाना तय हुआ है। निश्चित ही हिन्दुओं ने जिस राम मंदिर के लिए इतने वर्षों तक इन्तजार किया है, उसके उद्घाटन और स्थापना को लेकर जनमानस में कितना उत्साह होगा, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती।

रेहान ने लाल किले के पास झाड़ियों में किया बंगाल की युवती का रेप, शादी से मना करने पर ईंट से किया वार

बंगाल की युवती से लाल किले के पास झाड़ियों में रेप करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। युवक की पहचान रेहान के रूप में हुई है। रेहान पर आरोप है कि उसने युवती पर पहले शादी करने के लिए दबाव बनाया और बाद में जब वह नहीं मानी तो उस पर पत्थर से वार करके फरार हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने मंगलवार को बताया कि आरोपित और पीड़िता दोनों बेघर हैं। साथ ही एक दूसरे को पहले से जानते भी थे। इस घटना की सूचना मिलने के बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस का कहना है कि आरोपित का नाम रेहान है और लड़की पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। शनिवार दोपहर को आरोपित ने लालकिले के पास झाड़ियों में उसके साथ रेप किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपित पीड़िता से शादी करने के लिए कह रहा था। पीड़िता राजी नहीं हुई। तो दोनों में झगड़ा हो गया। इसी बीच रेहान ने पीड़िता पर ईंट से वार कर दिया।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को एक व्यक्ति ने महिला के सिर से खून बहता देख पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) को फोन किया था। पुलिस उसे अस्पताल ले गई, जहाँ उसने डॉक्टरों को अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया।

महिला ने पुलिस को बताया कि आरोपित ने उससे बलात्कार किया और विरोध करने पर उसके सिर पर पत्थर से वार किया। उसने बताया कि आरोपित ने उसकी बेटी का अपहरण कर लिया है, हालाँकि, पुलिस बाद में बच्ची को खोजने में सफल रही।

उल्लेखनीय है कि इस केस के अलावा दिल्ली के नजदीक नोएडा में भी कल लड़की के साथ जबरदस्ती का एक मामला सामने आया है। वहाँ जेपी अस्पताल में कोरोना संक्रमित छात्रा के साथ छेड़छाड़ हुई और छेड़छाड़ करने वाला एक संक्रमित डॉक्टर ही है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि डॉक्टर लड़की के बगल में कोविड वार्ड में भर्ती था। लड़की की शिकायत के बाद पुलिस ने इस मामले में धारा 354 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

मुंबई पुलिस ने सुशांत के परिजनों पर बनाया था दबाव, CM नीतीश की सहमति के बाद पिता ने दर्ज कराई FIR

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में उनके पिता द्वारा पटना में दर्ज कराई गई एक एफआईआर (FIR) में उनकी गर्लफ्रेंड रही रिया चक्रवर्ती पर लगे आरोपों की जाँच के लिए बिहार पुलिस की टीम मुंबई पहुँची है। कृष्ण कुमार सिंह (सुशांत सिंह राजपूत के पिताजी) ने ये एफआईआर राजीव नगर थाने में दर्ज कराई है। अब एक नई बात सामने आई है कि बिहार में मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में एफआईआर (FIR) संभव हो पाया है।

‘न्यूज 18’ ने अपनी ‘इनसाइड रिपोर्ट’ में सूत्रों के हवाले से बताया है कि एफआईआर (FIR) दर्ज कराए जाने से पहले सुशांत सिंह राजपूत का परिवार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से संपर्क में था। परिजनों ने नीतीश के समक्ष कुछ स्पष्ट सबूत रखे थे, जिसके बाद उन्हें सीएमओ की तरफ से इस मामले में कानूनी रूप से आगे बढ़ने की हरी झंडी के साथ-साथ सहयोग का भी आश्वासन मिला। नीतीश ने पूरे मामले की गहराई को समझते हुए एफआईआर (FIR) के लिए सहमति दी।

पटना पुलिस की 4 सदस्यीय टीम का मुंबई पहुँचना और एसएसपी द्वारा इस मामले की निगरानी करने जैसी खबरों से स्पष्ट है कि बिहार सरकार इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने की ओर अग्रसर है। बिहार में चुनाव भी आने वाले हैं, ऐसे में सरकार अपनी ओर से कोई नाकामी नहीं दिखाना चाहेगी। इसीलिए, एफआईआर (FIR) दर्ज होते ही पटना पुलिस मुंबई के लिए रवाना हो गई और जाँच तेजी से चल पड़ी।

हालाँकि, सारे वित्तीय लेनदेन मुंबई में हुए हैं और सभी आरोपित भी मुंबई के ही निवासी हैं, ऐसे में बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि बिहार पुलिस और मुंबई पुलिस के बीच का समन्वय कैसा है। जहाँ बिहार में जदयू-भाजपा की सरकार है, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस की सरकार है। दोनों राज्यों के सत्ताधारी दल राजनीतिक रूप से अलग-अलग छोर पर खड़े हैं।

FIR रविवार (जुलाई 26, 2020) को दर्ज कर ली गई थी लेकिन मंगलवार को पुलिस जाँच के लिए निकली, उसके बाद ही मीडिया को ये ख़बर हाथ लगी। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का पूरा मामला बांद्रा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है, ऐसे में बिहार की राजधानी पटना में एफआईआर (FIR) दर्ज कराए जाने के फैसले को ‘खास परिस्थितियों’ की उपज बताया जा रहा है। सुशांत सिंह राजपूत के पिता 74 वर्ष के हैं, ऐसे में उनका कहना है कि वो ज्यादा भागदौड़ भी नहीं कर सकते।

उधर सुशांत सिंह राजपूत के पिता के वकील ने कहा है कि मुंबई पुलिस एफआईआर (FIR) दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी और परिवार पर दबाव बना रही थी कि वो केवल बड़े प्रोडक्शन हाउसेज का ही नाम लें। विकास सिंह ने कहा कि परिजन शॉक में थे क्योंकि मुंबई पुलिस एफआईआर (FIR) दर्ज करने में विफल रही थी। बिहार में लोजपा के चिराग पासवान, राजद के तेजस्वी यादव और भाजपा के मनोज तिवारी ने इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग की है।

बता दें कि इस मामले में रिया चक्रवर्ती के अलावा इंद्रजीत चक्रवर्ती, संध्या चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सैमुअल मिरिंडा, श्रुति मोदी और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, बेइमानी, बंधक बनाकर रखने और आत्महत्या के लिए मजबूर करने सहित कई आरोप लगाए गए हैं। वकील का कहना है कि उन्हें बिहार पुलिस पर भरोसा है लेकिन अभी तक परिवार ने सीबीआई जाँच की माँग नहीं की है। उन्होंने नीतीश कुमार पर आस्था जताई।

सुशांत के पिता ने FIR में 7 सवाल किए हैं, जिनमें से एक में उन्होंने उन सभी डॉक्टर्स पर भी संदेह व्यक्त किया है, जो-जो उनके बेटे सुशांत का इलाज कर रहे थे। सुशांत के पिता ने आरोप लगाया कि अगर उनके बेटे की मानसिक हालत ठीक नहीं चल रही थी तो उसके परिवार वालों को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई? जबकि इसकी पहली सूचना परिवार को मिलनी चाहिए थी। FIR में कहा गया है कि सुशांत के करोड़ों रुपए पर भी रिया की नजर थी।

Pak एजेंट से 5 करोड़ रुपए लेकर दीपिका गई थी JNU: पूर्व रॉ अधिकारी एनके सूद का दावा

‘छपाक’ फिल्म के प्रमोशन के दौरान JNU प्रोटेस्ट में नजर आने वाली दीपिका पादुकोण एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने जेएनयू में प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर सिर्फ़ खड़े होने के लिए पाकिस्तानी एजेंट अनिल मुसर्रत से करीब 5 करोड़ रुपए लिए थे। मामला उजागर होने के बाद ईडी अब इसकी जाँच कर रही है।

दीपिका पर ऐसे गंभीर आरोपों का खुलासा करने वाला कोई आम नागरिक नहीं बल्कि भारतीय खूफिया एजेंसी रॉ के पूर्व अधिकारी एनके सूद हैं। एनके सूद का कहना है कि अनील मुसर्रत ने दीपिका को फोन करके जेएनयू जाने के लिए कहा था।

पिछले दिनों सुशांत सिंह की मौत के बाद बॉलीवुड की काली सच्चाई और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के पाकिस्तानी एजेंटों के बीच संबंधों का खुलासा होने से ये पूरा मामला गरमाया हुआ है। इसी बीच एनके सूद ने अपनी एक वीडियो में दीपिका के जेएनयू जाने के पीछे छिपे सच से पर्दा उठाया है। इससे पहले खबर थी कि ये उनका कोई पीआर स्टंट है।

एनके सूद ने अपनी वीडियो में अनील मुसर्रत के पेशे के बारे में बताया और साथ ही ये भी जानकारी दी कि कैसे अनील मुसर्रत पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान का करीबी है। जिसके कारण उसने इमरान खान की पार्टी पीडीआई को भी बहुत समर्थन दिया हुआ है। इसके अलावा अनील के करीबी संबंध पाकिस्तानी आर्मी व पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी ISI से भी हैं।

बावजूद इन सब बातों के कई बॉलीवुड हस्तियाँ है, जो अनील से लगातार जुड़ी हुई हैं। इसमें करण जौहर, अनिल कपूर जैसे कई जाने-माने चेहरे प्रमुख नाम हैं। अनील की बेटी की शादी में भी कई बॉलीवुड कलाकारों ने शिरकत की थी और जब अनिल कपूर की बेटी यानी सोनम कपूर की शादी हुई तो भी पाक एजेंट अनील उसमें नजर आए थे।

एनके सूद के अनुसार, अनील मुसर्रत भारत विरोधी कई सारे गतिविधियों को अपना समर्थन देते हैं और जब लंदन में सीएए विरोधी प्रदर्शन हुए थे तब भी उसने ही उस प्रोटेस्ट को फंडिंग की थी। इसके अतिरिक्त वे फिल्में, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं को अभद्रता के साथ दिखाया जाता है, उन्हें भी अनील मुसर्रत फाइनेंस करने को तैयार हो जाते हैं। अनील मुसर्रत से ब्रिटिश प्रशासन ने काफी बार मनी लॉन्ड्रिंग और टेटर फंडिंग जैसे मामलों पर पूछताछ की है।

24 जुलाई को Indian Security Research Group नाम के यूट्यूब चैनल पर डाली गई वीडियो के 3:35 के स्लॉट पर आप सुन सकते हैं कि एनके सूद दीपिका पादुकोण के जनवरी में जेएनयू जाने की बात का जिक्र कर रहे हैं।

वे कहते हैं कि दीपिका साल 2020 के जनवरी महीने में जेएनयू गई। वहाँ टुकड़े-टुकड़े गैंग का प्रदर्शन चल रहा था। वह वहाँ उनका समर्थन करने और अपने फिल्म का प्रमोशन करने गई थी। लेकिन उन्होंने ये सब अनील मुसर्रत के कहने पर किया था।

वे बताते हैं कि अनील मुसर्रत उस वक्त दुबई में थे और उन्होंने वहाँ से दीपिका को कॉल किया। जिसके बाद दीपिका इस प्रदर्शन में शामिल हुईं। वे पूछते हैं कि क्या दीपिका अनील से ऐसा ही कुछ पाकिस्तान में करने को कहतीं तो वो करते? नहीं, क्योंकि वो बिके हुए हैं। उस समय पाकिस्तान के आर्मी प्रवक्ता ने भी दीपिका को सपोर्ट किया था।

अपने एक अन्य वीडियो में उन्होंने बताया है कि अब ईडी ने बॉलीवुड कलाकारों पर अपना शिकंजा कस लिया है। वह ऐसे हस्तियों की जाँच कर रही है, जिनके विदेशों में बैंक अकाउंट है या फिर प्रॉपर्टी है। इसके अतिरिक्त दीपिका पर तो पहले से ही जाँच होनी शुरू हो गई है क्योंकि उन पर ये आरोप था कि उन्हें पाँच करोड़ रुपए जेएनयू में जाने के लिए पाक एजेंट से मिले।

बता दें कि साल 2020 की शुरुआत में जेएनयू में हुए प्रदर्शन में जाकर दीपिका ने अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ उसमें भाग नहीं लिया। लेकिन वहाँ जाकर खड़ी जरूर हुई थीं। जिसके बाद दीपिका पर कई तरह के सवाल उठे थे।

सेक्स दो, मार्क्स लो: बंगाल के वामपंथी प्रोफेसर की बीवी ने खोले राज, वायरल हुआ ऑडियो क्लिप

पश्चिम बंगाल में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ बर्दवान में अंग्रेजी के एक प्रोफेसर पर बड़े आरोप लगे हैं। उक्त प्रोफेसर वामपंथी विचारक भी हैं, जो वामपंथी धारणाओं को आगे बढ़ाते हैं। उनके ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद उनके अश्लील व्यवहारों के बारे में पता चला है। वो छात्राओं का पीछा करते थे। वायरल ऑडियो क्लिप उनकी पत्नी की है, जिसमें वो प्रोफेसर के अश्लील व्यवहारों और यौन शोषण के आरोपों की पुष्टि करती सुनी जा सकती हैं।

आरोप लगे प्रोफेसर का नाम अंगशुमन कर है, जो यूनिवर्सिटी ऑफ बर्दवान में अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर हैं। सीपीएम के मुखपत्र ‘गणशक्ति’ में उनके लिखे हुए लेख अक्सर प्रकाशित होते रहते हैं। इनके द्वारा वो समय-समय पर वामपंथी प्रोपगंडा फैलाते रहे हैं। सीपीएम के साहित्यिक पत्र ‘नंदन’ में भी उनके लिखे लेख छपते हैं। ‘ऑर्गेनाइजर’ ने उक्त प्रोफेसर पर लगे आरोपों को लेकर ख़बर प्रकाशित की है।

प्रोफेसर का नाम अब एक सैक्स स्कैन्डल में आया है। उनकी पत्नी के हवाले से दावा किया गया है कि वो पिछले 20 वर्षों से छात्राओं का पीछा कर के उनका यौन शोषण करते आ रहे हैं। इससे उनके ‘सेक्सुअल प्रीडेटर’ होने की बात पता चली है। उनकी पत्नी के वायरल ऑडियो क्लिप में वो उन छात्राओं के नाम गिना रही हैं, जिनसे उन्होंने अश्लील हरकतें कर के यौन फायदे लिए। उन छात्राओं के साथ उन्होंने अपनी यौन इच्छाएँ पूरी की।

बदले में उन्होंने इन छात्राओं को परीक्षा में मार्क्स दिए। साथ ही आरोपित प्रोफेसर ने अकादमिक रूप से उन लड़कियों को कई अन्य फायदे भी पहुँचाए, ऐसा आरोप भी लगा है। उनकी कई पूर्व छात्राएँ फिलहाल विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में स्थायी पदों पर कार्यरत हैं। एक छात्रा का नाम लेते हुए उनकी पत्नी ने ऑडियो क्लिप में कहा कि उससे यौन फायदा लेने के बाद प्रोफेसर ने उसे मार्क्स और अच्छे कॉलेजों और कंपनियों में प्लेसमेंट की भी गारंटी दी।

इस ऑडियो क्लिप में यूनिवर्सिटी ऑफ बर्दवान के प्रोफेसर की पत्नी उन छात्राओं के नाम ले रही हैं, जिन्हें ‘सेक्सुअल फेवर्स’ के बदले विभिन्न तरह के फायदे मिले। वो सभी महिलाएँ फिलहाल कई कॉलेजों में कार्यरत हैं, पत्नी ने उन सबके भी नाम लिए। इस ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद प्रोफेसर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ बर्दवान से कहा जा रहा है कि वो आरोपित प्रोफेसर पर कार्रवाई करे।

इससे पहले स्मृति कुमार सरकार यूनिवर्सिटी ऑफ बर्दवान के कुलपति थे। उनके कार्यकाल में प्रोफेसर पर परीक्षा के पेपर्स को लीक करने के आरोप भी लगे थे। हालाँकि, वामपंथी दलों के साथ-साथ ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस में भी उनकी पैठ ने उन्हें किसी तरह बचा लिया और वो इस मामले से निकल गए। इसके बाद उन्होंने कुलपति को संघी करार दिया था और उन पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया था।

इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में विभिन्न प्रोफेसरों पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं। जाधवपुर यूनिवर्सिटी में दो प्रोफेसरों पर ऐसे ही आरोप लगे थे। ताज़ा मामले में बर्दवान यूनिवर्सिटी ने मामले को आंतरिक कमिटी के पास जाँच के लिए भेज दिया है। कुलपति निर्माण चंद्र साहा ने कहा कि एक महिला की अध्यक्षता वाली कमिटी इसकी जाँच करेगी। कमिटी में 9 सदस्य हैं, जिनमें से एक NGO से हैं और एक क़ानूनविद भी हैं।

‘पावर में आए तो मस्जिद फिर से बनेगा’ कहने वाला सरफराज कह रहा ‘भाई मुझे माफ कर दो’, लोगों ने पूछा- अब क्या हो गया?

अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन से पहले ट्विटर पर कई लोगों की असली मंशा साफ नजर आने लगी है। ऐसे में एक यूजर सरफराज ने भी अपनी कट्टरता दिखाते हुए राम मंदिर भूमि पूजन से पहले विवादित ट्वीट किया। इस ट्वीट में उसने राम मंदिर की जगह दोबारा से मस्जिद बनाने की बात कही और जैसे ही अन्य यूजरों ने इसका स्क्रीनशॉट लेकर रिपोर्ट करनी शुरू की। ये माफी माँगने पर आ गया।

इस ट्वीट में सरफराज ने लिखा, “ये मस्जिद हमारा था और हमारा रहेगा। आज वो पावर में हैं तो मंदिर बना लिया। हम पावर में होंगे तो फिर से मस्जिद होगा। क्योंकि इतिहास रिपीट होता है।”

हालाँकि, सरफराज नाम के इस ट्विटर यूजर के ज्यादा फॉलोवर नहीं है और न ही वो ट्विटर पर ज्यादा सक्रिय लगता है। लेकिन सरफराज का ये ट्वीट चूँकि, पीएम मोदी और ओवैसी के किसी ट्वीट पर रिप्लाई में आया। तो अन्य यूजरों ने इस पर ध्यान दिया और इसके ख़िलाफ़ शिकायत करनी शुरू की।

नाइट वॉरियर्स नाम के यूजर ने इसकी शिकायत यूपी पुलिस और सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग करके की और उसपर साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।

अपने ख़िलाफ़ होती शिकायत की गंभीरता को समझते हुए सरफराज फौरन अपने ट्वीट के लिए माफी माँगने लगा। सरफराज ने इस ट्वीट के नीचे लिखा, “भाई मैं दिल से माफी माँगता हूँ, प्लीज ट्वीट को डिलीट कर दो। अपना छोटा भाई समझ कर मेरी गलती को इग्नोर कर दो। मैं अब से कोई भी पोस्ट ऐसे नहीं करूँगा। जय हिंद जय भारत।”

इसके अलावा सरफराज ने अपने अकाउंट से भी माफी माँगी और डीपी पर अपनी फोटो हटाकर तिरंगा लगा लिया। सरफराज ने लिखा,”सभी जनता से माफी माँगता हूँ। मैंने जो पोस्ट किया, उसके लिए मुझे माफ कर दो और ट्वीट को प्लीज डिलीट कर दें। मैंने डिलीट कर दिया है। आप भी कर दें। मुझे नहीं पता था कि ये इतना भद्दा और खराब मैंने लिख दिया।”

इन माफी वाले ट्वीट्स को देखकर भी यूजर्स का गुस्सा उस पर शांत नहीं हुआ। लोगों ने कहा, “तुम जैसे लोगों को ऐसी सीख देनी जरूरी है। ताकि दोबारा कोई ऐसे प्रयास न करें। तुम जैसे लोग देश के लिए खतरा हो। साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने के लिए सख्त से सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए।”

DU में इंग्लिश के प्रोफेसर हनी बाबू गिरफ्तार, नक्सली गतिविधियों और साजिश रचने का है आरोप

भीमा कोरेगाँव यलगार परिषद मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (जुलाई 28, 2020) को दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर हनी बाबू एमटी पुत्र कुन्हु मोहम्मद को गिरफ्तार किया। NIA ने प्रोफेसर पर माओवादी विचारधारा फैलाने का आरोप लगाया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू को बुधवार को मुंबई में NIA की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। NIA के प्रवक्ता ने बताया कि 54 वर्षीय प्रोफेसर हनी बाबू उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के रहने वाले हैं। वह डीयू के इंग्लिश डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एनआईए को जाँच के दौरान पता चला कि हनी बाबू नक्सली गतिविधियों और माओवादी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे। साथ ही अन्य आरोपितों के साथ साजिश रचने में शामिल भी थे। हनी बाबू को मुंबई में एनआईए की विशेष कोर्ट में आज पेश किया जाएगा। एनआईए ने इस साल जनवरी में इस मामले की जाँच शुरू की थी और इसके बाद 14 अप्रैल को आनंद तेलतुंबड़े और गौतम नौलखा को गिरफ्तार किया था।

इससे पहले पिछले वर्ष भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में पुणे पुलिस और नोएडा पुलिस की संयुक्त टीम ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हनी बाबू के नोएडा स्थित आवास पर छापेमारी भी की थी। यह छापेमारी भी प्रोफेसर सिंह के नक्सलियों से सम्बन्ध को लेकर की गई थी।

हनी बाबू डीयू के प्रोफ़ेसर हैं और ‘द कमिटी ऑफ सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स’ के सदस्य हैं। इस कमिटी का गठन जीएन साईबाबा द्वारा किया गया था। डीयू प्रोफ़ेसर साईबाबा को 2017 में महाराष्ट्र की एक अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। साईबाबा के प्रतिबंधित माओवादी संगठन सीपीआई से सम्बन्ध सामने आए थे।

क्या है मामला

31 दिसंबर 2017 को यलगार परिषद सम्मेलन का आयोजन किया गया था। यहाँ कुछ बुद्धिजिवियों द्वारा भड़काऊ भाषणों देने के बाद अगले दिन 1 जनवरी 2018 को पुणे जिले के भीमा कोरेगाँव युद्ध स्मारक के निकट हिंसा भड़क गई थी। इसमें एक युवक की जान चली गई थी। साथ ही करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ था। इस मामले में अरुण थॉमस फेरेरिया, रोना जैकब विल्सन, सुधीर प्रल्हाद धवले समेत 19 लोगों को आरोपित बनाया गया था।