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श्रीकालाहस्ती मंदिर: पंचमहाभूतों में से एक ‘वायु तत्व’ का प्रतीक, योग में इनसे मुक्त होने की वैज्ञानिक प्रक्रिया

यौगिक विज्ञान के अनुसार हमारा शरीर और यह सारा अस्तित्व पाँच तत्वों से मिलकर बना है। भूमि, जल, अग्नि, वायु और आकाश- ये ही वो पाँच तत्व हैं जो इस शरीर, धरती और सम्पूर्ण सृष्टि के आधार हैं।

इन्हीं पाँच तत्वों से सृष्टि का सृजन होता है। यदि ये पाँच तत्व नकरात्मक स्वरुप में मिलते हैं, तो कीचड़ बन जाते हैं और यदि सकारात्मक प्रकार से मिलते हैं, तो भोजन बन जाते हैं।

यदा-कदा वह मानव रूप भी ले लेते हैं तो कभी चैतन्य बन जाते हैं। आप इस सृष्टि में जो कुछ भी देखते हैं, वह बस इन पाँच तत्वों का ही खेला है।

हमारे पूर्वजों ने, योग में, पाँच तत्वों से मुक्त होने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया बनाई थी, जिसे भूत-शुद्धि कहते हैं। यदि आप इन तत्वों का शुद्धीकरण करते हैं, तो आप ऐसी स्थिति को प्राप्त कर लेते हैं जिसे भूत-सिद्धि कहते हैं।

योग-प्रणाली में भूत-शुद्धि की इस बुनियादी परम्परा से ही कई दूसरी परम्पराएँ निकली हैं। दक्षिणी भारत में, लोगों ने इन पाँच तत्वों के लिए पाँच बड़े मंदिर भी बनाए थे। ये मंदिर अलग-अलग तरह की साधना के लिए बनाए गए थे।

पंचभूत स्थलम

जल तत्व से मुक्त होने के लिए, आप एक विशेष मंदिर में जाते हैं और एक विशेष प्रकार की साधना करते हैं। वायु तत्व से मुक्ति हेतु, आप दूसरे मंदिर में जाते हैं और भिन्न साधना करते हैं।

इसी तरह, सभी पाँच तत्वों के लिए बनाए गए पाँच अद्भुत मंदिरों में विशेष प्रकार की ऊर्जा स्थापित की गई जो उस विशेष प्रकार की साधना में सहायता करती है। पुरातन योगी एक मंदिर से दूसरे मंदिर प्रस्थान करते थे और अपनी साधना करते थे।

पञ्चभूत स्थल दक्षिण भारत में पाँच शानदार प्राचीन मंदिर हैं, जिनका निर्माण मानव चेतना को विकसित करने के एक माध्यम के रूप में किया गया था। हर एक मंदिर का निर्माण पाँच विशेष तत्वों में से एक विशेष तत्व के लिए किया गया था।

श्रीकालाहस्ती मंदिर

श्रीकालाहस्ति में मंदिर वायु तत्व हेतु, कांचीपुरम में पृथ्वी तत्व, तिरुवन्नामलाई में अग्नि तत्व हेतु, चिदंबरम में आकाश तत्व एवं तिरुवनाईकवल में जल तत्च के लिए इन मंदिरों का निर्माण किया गया था।

श्रीकालाहस्ती मंदिर, आंध्र प्रदेश के श्रीकालाहस्ती शहर में स्थित है। यह भगवान शिव के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। यह मंदिर तिरुपति से 36 किलोमीटर की दूरी पर है और यह प्रसिद्ध वायु लिंग का स्थल है, जो पाँच तत्वों में से एक का प्रतीक है, यह मंदिर पंचमहाभूत में से एक तत्व पवन या वायु से जुड़ा है।

पाँचों मंदिरों का निर्माण यौगिक विज्ञान के अनुसार इस तरह किया गया है कि ये सभी मंदिर एक विशेष किस्म के भौगोलिक संरेखण में हैं तथा उनके द्वारा पैदा की जाने वाली अपार संभावनाओं का असर पूरे क्षेत्र पर होता है।

आने वाले कुछ हफ़्तों में आपको श्रीकालाहस्ति, कांचीपुरम, तिरुवन्नामलाई, चिदंबरम एवं तिरुवनाईकवल के मंदिरों की यात्राओं पर ले चलूँगा।

यह लेख मनीष श्रीवास्तव ने लिखा है।

आजमगढ़: मोबाइल पर धमकी, फिर मुस्लिमों ने बोला हमला, महिलाओं और बच्चों को भी नहीं छोड़ा

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिला में एक मामूली बात पर कहासुनी के बाद मुस्लिमों ने एक हिंदू के घर पर हमला कर दिया। धारदार हथियारों से किए गए हमले में 12 से अधिक लोग घायल हो गए। मामले में 10 अज्ञात सहित 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने पाँच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक आजमगढ़ जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर आयमा गाँव में बुधवार (10 जून, 2020) की देर शाम जयभीम को मोबाइल पर मिली धमकी को लेकर दो समुदाय के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इकट्ठा होकर दूसरे पक्ष के घर पर हमला बोल दिया।

इस दौरान लाठी-डंडों के साथ धारदार हथियारों से लैस आरोपितों ने घर में मौजूद महिलाओं और बच्चों के साथ भी मारपीट की और फिर वहाँ से फरार हो गए। दो समुदाय के बीच हुए विवाद की सूचना मिलते ही महाराजगंज थाना सहित कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची।

एसपी ग्रामीण एनपी सिंह ने बताया कि दो पक्षों में किसी बात को लेकर मारपीट हुई है। नौ लोगों को नामजद किया गया है। पाँच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। चार अन्य को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

वहीं थानाध्यक्ष महाराजगंज के मुताबिक मामूली सी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था। विनोद कुमार की तहरीर पर 19 लोगों के खिलाफ में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनमें से पाँच को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही कुछ लोगों से मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है। जल्द ही सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। गाँव में फिलहाल शांति है। फिर भी कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए गाँव में पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक भारी पुलिस बल की तैनाती से गाँव में सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं घटना के पीछे बच्चों के बीच खेलकूद में हुए विवाद को बताया जा रहा है, जबकि कुछ लोगों में प्रेम-प्रसंग की भी चर्चा है।

इससे पहले जौनपुर जिले के सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के गाँव भदेठी में मंगलवार (9 जून, 2020) को गाँव के ही शहबाज नामक लड़के का दलित बस्ती के बच्चों से बकरियाँ चराने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद दोनों समुदाय के लोगों में दिन में कहासुनी हो गई। देर रात में मुस्लिम पक्ष के सैकड़ों लोगों ने मिलकर लाठी-डंडों से लैस दलित बस्ती में हमला बोल दिया था और कई घरों को आग के हवाले कर दिया था। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए सीएम योगी ने आरोपितों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिए हैं।

असदुद्दीन ओवैसी की रैली में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने वाली अमूल्या लियोना को जमानत नहीं

एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख सांसद असदुद्दीन ओवैसी की रैली में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने वाली अमूल्या लियोना की जमानत याचिका बंगलुरु की एक स्थानीय अदालत ने बुधवार (10 मई, 2020) को खारिज कर दी। याचिका खारिज करते हुए सिविल और सेशन जज ने कहा कि अगर अमूल्या को जमानत दी जाती है, तो वह फरार हो सकती है।

ज विद्याधर शिरहट्टी ने यह भी कहा कि अमूल्या लियोना जमानत दिए जाने पर कार्यों में संलिप्त हो सकती हैं जो कि शांति को नुकसान पहुॅंचा सकता है। सरकारी वकील ने तर्क दिया कि आरोपित अमूल्या लोगों को कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा करने के लिए उकसाने की कोशिश कर रही थी। वकील ने अदालत के समक्ष यह भी बताया कि वह उन गतिविधियों में भी शामिल थी जिसमें एक छात्र प्रदर्शन के दौरान “फ## हिंदुत्व” लिखा हुआ पोस्टर लह​रा रहा था।

सरकारी वकील ने कहा कि उसे जमानत दे दी जाती है तो वह दोबारा से ऐसे अपराध कर सकती है। हालाँकि, आरोपित के बचाव में कहा गया कि वह पाकिस्तान और भारत सहित सभी देशों के जिंदाबाद के नारे लगा कर यूनिवर्सल ह्यूमैनिटी का संदेश देने की कोशिश कर रही थी।

बता दें फरवरी में बेंगलुरु में एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी की एंटी-सीएए रैली में अल्ट्रा-लेफ्ट विंग की प्रदर्शनकारी अमूल्या ने उनके सामने मंच पर पाकिस्तान के समर्थन नारे लगाकर हंगामा खड़ा कर दिया था।
इसके बाद अमूल्या लियोना का “पाकिस्तान ज़िंदाबाद” का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया था।

पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया और भारतीय दंड संहिता की धारा 124 A (देशद्रोह) के तहत मामला दर्ज होने के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

जाँच के दौरान, अल्ट्रा लेफ्ट-विंग प्रदर्शनकारी अमूल्या लियोना ने इस बात खुलासा किया था कि इन सब प्रदर्शनों के लिए उसे पैसे दिए गए थे। उसने यह भी कहा था कि कैसे पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ आंदोलन शुरू होने के बाद इस विरोध-प्रदर्शन को आयोजन करने वाले लोग उसके सारे खर्चे उठा रहे थे।

अमूल्या लियोना को गिरफ़्तारी से एक महीने पहले एक यूट्यूब चैनल पर इंटरव्यू देते हुए भी देखा गया था। जहाँ वो भारत विरोधी एजेंडे का समर्थन करने के लिए वामपंथियों के तौर-तरीकों को समझा रही थी। इंटरव्यू में उसने कहा था कि इन सब प्रदर्शनों के लिए उन्हें पैसे दिए जाते थे। साथ ही उनके भाषण और नारे ‘विरोध प्रदर्शन’ का आयोजन करने वाले समूह तैयार करते हैं।

आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं, याचिका पर नहीं होगी सुनवाई: OBC के लिए 50% आरक्षण मामले पर सुप्रीम कोर्ट

आरक्षण का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। ये बड़ी टिप्पणी गुरुवार (जून 11, 2020) को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मेडिकल कॉलेज में ओबीसी छात्रों को 50% रिजर्वेशन देने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इसी के साथ कोर्ट ने आगे इस याचिका पर कोई सुनवाई करने से भी इनकार कर दिया।

बार एंड बेंच के अनुसार, DMK-CPI-AIADMK समेत तमिलनाडु की कई अन्य पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में NEET के तहत मेडिकल कॉलेज में सीटों को लेकर 50 फीसदी OBC आरक्षण के मामले पर याचिका दायर की थी।

इसी पर, सुनवाई करते हुए जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस एस रवींद्र भट की बेंच ने कहा“कोई भी आरक्षण के अधिकार के मौलिक अधिकार होने का दावा नहीं कर सकता है। आरक्षण देने से इनकार करना किसी भी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता है। रिजर्वेशन मौलिक अधिकार नहीं है और यही आज का कानून है। आप अपनी याचिका वापस लें और मद्रास हाईकोर्ट जाएँ।

यहाँ बता दें कि कुछ समय पहले राजनीतिक पार्टियों ने केंद्र द्वारा ऑल इंडिया कोटा के तहत तमिलनाडु में अंडर ग्रैजुएट, पोस्ट ग्रैजुएट मेडिकल और डेंटल कोर्स में ओबीसी को 50% कोटा ना दिए जाने के फैसले का विरोध किया था। इसमें कहा गया था कि कॉलेजों में नीट के तहत हो रही काउंसिलिंग पर फैसला आने तक रोक लगाई जाए।

अपनी याचिका में सभी राजनैतिक पार्टियों ने कहा था तमिलनाडु में ओबीसी, एससी, एसटी के लिए 69% रिजर्वेशन है। इसमें ओबीसी का हिस्सा 50% है।

याचिका में कहा गया था कि ऑल इंडिया कोटा के तहत तमिलनाडु को दी गई सीटों में से 50% पर ओबीसी कैंडिडेट्स को एडमिशन दिया जाना चाहिए।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट याचिकाओं में दिए गए तर्क से प्रभावित नहीं हुआ और सवाल किया कि जब आरक्षण का कोई मौलिक अधिकार नहीं है, तो अनुच्छेद 32 के तहत याचिका कैसे बरकरार रखी जा सकती है।

कोर्ट ने कहा, “किसके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है? आर्टिकल 32, केवल मौलिक अधिकारों के हनन के लिए अस्तित्व में है।”

कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “हमें लगता है कि आप सिर्फ़ तमिलनाडु के लोगों के अधिकारों से मतलब रखते हैं। लेकिन आरक्षण का अधिकार कोई मौलिक अधिकार नहीं है।”

अदालत ने कहा कि तमिलनाडु के विभिन्न राजनीतिक दलों को एक कारण के लिए एक साथ आने की सराहना करता है, लेकिन शीर्ष अदालत इस याचिका पर विचार नहीं कर सकती है।

जब कोर्ट को यह बताया गया कि मामलों का आधार तमिलनाडु सरकार द्वारा आरक्षण कानून का उल्लंघन है, तो पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को मद्रास उच्च न्यायालय जाना चाहिए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि AIADMK, DMK, तमिलनाडु कॉन्ग्रेस, वाइको, CPI और CPI (M) सहित सभी याचिकाकर्ता अपनी याचिका वापस ले लें और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएँ।

पश्चिम बंगाल में प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाया जा रहा Ugly का मतलब अश्वेत, अभिभावकों ने किया विरोध

पश्चिम बंगाल के बर्दवान (Burdwan) जिले के एक प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता ने उनकी किताब में दर्शाए गए एक चित्रण को लेकर विरोध किया है। इस चित्रण के जरिए काले रंग को बदसूरती का पर्याय बताने का प्रयास हुआ।

वर्णमाला और शब्दों का ज्ञान देने वाली बच्चों की इस किताब में U का अर्थ UGLY बताया गया और UGLY का मतलब समझाने के लिए इसमे एक काले व्यक्ति के चित्र को प्रयोग में लाया गया। अब इसी चित्र को पाठ्यक्रम की किताबों में देखते हुए, अभिभावकों ने अपनी आवाज उठाई।

यहाँ बता दें, यह किताब पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले के बर्दवान शहर में स्थित सरकारी सहायता प्राप्त म्युनिसिपल गर्ल्स हाई स्कूल के प्री-प्राइमरी डिपार्टमेंट की है।

इस पुस्तक में ब्लैक मैन को लेकर यह विवाद उस समय सामने आया है, जब अमेरिका के मिनियापोलिस में पुलिस हिरासत में एक काले व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद दुनिया, विशेष रूप से अमेरिका में नस्लवाद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में कोलकाता ईवनिंग कॉलेज के शिक्षक सुदीप मजूमदार ने कहा, “मेरी बेटी इस नगर निगम हाई स्कूल में पढ़ रही है। मैं अपनी बेटी को पढ़ाते हुए इस विषय पर आया था। इस तरह से एक काले व्यक्ति को बदसूरत कहकर बच्चों को शिक्षित करना पूरी तरह से गलत है।”

उन्होंने कहा, “इस किताब को जल्द ही वापस ले लिया जाना चाहिए। किसी भी स्थिति में, बच्चों को अश्वेतों के नाम पर दी जा रही शिक्षा उनके कोमल दिलों को हीन भावना से भरने और अश्वेतों के साथ भेदभाव करने का काम करेगी। यह गलत है।”

इसके बाद स्कूल प्राथमिक शिक्षा के जिला निरीक्षक स्वप्न कुमार दत्त ने भी इस हरकत को गलत बताया। वहीं, इस मामले पर जिला इंस्पेक्टर ने कहा “इस तरह की किताब स्कूल द्वारा दी गई आधिकारिक किताब नहीं है। हम इसके बारे में अभी स्कूल से बात करेंगे। अगर जरूरत हो तो किताब बदलनी चाहिए। ”

गौरतलब है कि बंगाल के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई जाने वाली किताबों में ऐसी त्रुटि पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले पश्चिम बंगाल के ही एक स्कूल की किताब में फ्लाइंग सिख के नाम पर फरहान अख्तर की तस्वीर दिखाई गई थी। जबकि ये बात सर्वविख्यात है कि फ्लाइंग सिख की उपाधि भारतीय एथलीट मिल्खा सिंह को मिली थी।

इन्द्रलोक पुलिस चौकी पर पथराव-फायरिंग में पुलिसकर्मी जख्मी, सादकीन, शाहरुख, आसकीन गिरफ्तार

नॉर्थ दिल्ली के इंद्रलोक पुलिस चौकी पर कुछ लोगों द्वारा हमला करने की घटना सामने आई है। आरोपितों द्वारा लाठी-डंडे ही नहीं चलाए गए बल्कि पुलिस पर पथराव के साथ ही फायरिंग भी की गई है।

इस घटना को अंजाम देने वालों ने पुलिस पर शिकायत नहीं सुने जाने का आरोप लगाया जिसके बाद गुस्से में शिकायतकर्ता के साथ आए लोगों ने दिल्ली की इंद्रपुरी पुलिस चौकी पर हमला बोला दिया। शिकायतकर्ता के परिजनों द्वारा किए गए भारी पथराव में चौकी इंचार्ज घायल हो गए, भगदड़ मचने पर मौजूद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग तक करनी पड़ी।

ट्विटर पर राज शेखर झा ने इस घटना की जानकारी देते हुए लिखा है, “दिल्ली के इंद्रलोक इलाके में कल रात एक पुलिस चौकी पर हमला किया गया, पथराव किया गया और पुलिस पर गोलीबारी की गई। सादकीन, आस्कीन और शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया गया, अन्य की तलाश जारी। हादसा तब हुआ जब पुलिस लूट के एक मामले में उनसे पूछताछ कर रही थी।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, भीड़ द्वारा पथराव में चौकी इंचार्ज को काफी चोटें आई हैं। उन्हें फ़ौरन सेंट स्टीफेंस अस्पताल ले जाया गया, जहाँ पर उनका इलाज किया जा रहा है।

डीसीपी दिल्ली नॉर्थ के अनुसार अख़लाक काले नाम का एक व्यक्ति बुधवार (जून 10, 2020) रात इंद्रलोक पुलिस चौकी गया था। वहाँ उसने पुलिस को सादकीन और उसके भाइयों द्वारा उसके साथ कथित रूप से मारपीट और सामान लूटने की बात रखी।

अख़लाक़ की शिकायत पर पुलिसकर्मी आरोपित सादकीन और उनके भाइयों को पुलिस चौकी ले आए जहाँ इन सबका आपस में विवाद बढ़ने लगा। पुलिस का कहना है कि ये सभी पुलिस चौकी में ही झगड़े और मारपीट करने लगे और कुछ देर बाद वापस लौटने के बाद फिर से पुलिस चौकी पहुँचे।

वापस लौटते समय इन सबक हाथों में लाठी और डंडे थे और उन्होंने चौकी में हमला कर दिया। इस दौरान उनमें से एक आरोपित नावेद उर्फ पिला ने पुलिस चौकी पर फायरिंग भी की। आखिरकार आत्मरक्षा में एसआई पंकज द्वारा हवा में 2 राउंड फायर करने के बाद यह मामला थोड़ा शांत हुआ। हालाँकि, पुलिसकर्मी ज़ख्मी हो गए, और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

पुलिस ने घटना में आरोपित सादकीन, आशकीन और शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि बाकी लोगों की तलाश की जा रही है।

पुलिस चोकी पर हमला कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है हाल ही के कुछ समय में इस तरह के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जब भीड़ ने इस तरह किसी पुलिस चौकी पर हमला किया हो। ऐसे में पुलिस के आलाधिकारी इस घटना पर नजर बनाए हुए हैं और उचित कार्रवाई की बात कह रहे हैं।

कोरोना आपदा को बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट बनाना है: PM मोदी ने दिया PPP का विचार

PM नरेंद्र मोदी ने आज इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स (ICC) को संबोधित किया। ICC के 95वें वार्षिक पूर्ण सत्र में इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के योगदान के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि 95 वर्ष से निरंतर देश की सेवा करना, किसी भी संस्था या संगठन के लिए अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है। ICC ने पूर्वी भारत और नॉर्थ-ईस्ट के विकास में जो योगदान दिया है, विशेषकर वहाँ की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स को, वो भी ऐतिहासिक है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा – “इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने 1925 में अपने गठन के बाद से आज़ादी की लड़ाई को देखा है, भीषण अकाल और अन्न संकटों को देखा है और भारत के विकास पथ का भी आप हिस्सा रहे हैं। अब इस बार की ये AGM एक ऐसे समय में हो रही है, जब हमारा देश कई संकटों को चैलेंज कर रहा है।”

प्रमुख बातें –

  • कोरोना वायरस से पूरी दुनिया लड़ रही है, भारत भी लड़ रहा है लेकिन अन्य तरह के संकट भी निरंतर खड़े हो रहे हैं। कहीं बाढ़ की चुनौती, कहीं टिड्डी का कहर, कहीं ओलावृष्टि, असम की ऑयल फील्ड में आग, लगातार छोटे-छोटे भूकंप की खबरें।
  • कभी-कभी समय भी हमें परखता है, हमारी परीक्षा लेता है। कई बार अनेक कठिनाइयाँ, अनेक कसौटियाँ एक साथ आती हैं। लेकिन हमने ये भी अनुभव किया है कि इस तरह की कसौटी में हमारा कृतित्व, उज्ज्वल भविष्य की गारंटी भी लेकर आता है।
  • हमारे यहाँ कहा जाता है- मन के हारे हार, मन के जीते जीत। यानी हमारी संकल्पशक्ति, हमारी इच्छाशक्ति ही हमारा आगे का मार्ग तय करती है। जो पहले ही हार मान लेता है उसके सामने नए अवसर कम ही आते हैं।
  • हर वो चीज, जिसे आयात करने के लिए देश मजबूर है, वो भारत में ही कैसे बने, भविष्य में उन्हीं उत्पादों का भारत निर्यातक कैसे बने, इस दिशा में हमें और तेजी से काम करना है।
  • हर देशवासी अब इस संकल्प से भी भरा हुआ है कि इस आपदा को अवसर में परिवर्तित करना है, इसे हमें देश का बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट भी बनाना है। ये टर्निंग पॉइंट क्या है? आत्म निर्भर भारत, आत्मनिर्भरता का ये भाव बरसों से हर भारतीय ने एक आकांक्षा की तरह जिया है।
  • किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए जो निर्णय हाल में हुए हैं, उन्होंने एग्रीकल्चर इकोनॉमी को बरसों की गुलामी से मुक्त कर दिया है। अब भारत के किसानों को अपने उत्पाद, अपनी उपज देश में कहीं पर भी बेचने की आज़ादी मिल गई है।
  • बीते 5-6 वर्षों में, देश की नीति और रीति में भारत की आत्मनिर्भरता का लक्ष्य सर्वोपरि रहा है। अब कोरोना क्राइसिस ने हमें इसकी गति और तेज करने का सबक दिया है। इसी सबक से निकला है।
  • आत्म निर्भर भारत, आत्मनिर्भरता का, सेल्फ रिलायंस का ये भाव बरसों से हर भारतीय ने एक महत्वाकांक्षा की तरह जिया है। लेकिन फिर भी एक बड़ा काश, एक बड़ा काश, हर भारतीय के मन में रहा है, मस्तिष्क में रहा है।
  • जनता केन्द्रित, और प्लेनेट फ्रेंडली डेवलपमेंट की अप्रोच अब देश में गवर्नेंस का हिस्सा बन गई है। जो हमारे तकनीकी हस्तेक्षेप हैं, वो भी People, Planet और Profit के विचार के अनुकूल ही है।

PM मोदी ने कहा कि अब देश में बैंकिंग सर्विस का दायरा उन लोगों तक भी पहुँच पाया है, जिनको लंबे समय तक Have nots की श्रेणी में रखा गया था। DBT, JAM यानी जनधन, आधार, मोबाइल के माध्यम से बिना लीकेज करोड़ों लाभार्थियों तक जरूरी सहायता पहुँचाना संभव हुआ है।

PM मोदी ने कहा:

People, Planet and Profit एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। ये तीनों एक साथ उन्नति कर सकते हैं, साथ में तरक्की कर सकते हैं। मैं आपको कुछ उदाहरण देकर समझाता हूँ। जैसे LED बल्ब। 5-6 वर्ष पहले एक LED बल्ब साढ़े तीन सौ रुपए से भी ज्यादा में मिलता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है।

बंगाल और नॉर्थ-ईस्ट के विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा – “आप सभी नॉर्थ ईस्ट, पूर्वी भारत में इतने दशकों से काम कर रहे हैं। सरकार ने जो तमाम कदम उठाए हैं, इनका बहुत बड़ा लाभ East और North East के लोगों को होगा। मैं समझता हूँ कि कोलकाता भी खुद फिर से एक बहुत बड़ा लीडर बन सकता है। देश-निर्माण में बंगाल की ऐतिहासिक श्रेष्ठता को हमें पुनर्जीवित करना होगा। हम हमेशा सुनते आए हैं- ‘बंगाल जो आज सोचता है, भारत उसे आने वाले कल में सोचता है।’ हमें इससे प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना होगा।”

बछड़े की पीट-पीट कर हत्या, CCTV में कैद वीडियो हुआ वायरल: आगरा में UP पुलिस ने पकड़े दो आरोपित

गर्भवती हथिनी और गाय को विस्फोटक खिलाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि उत्तर प्रदेश के आगरा में मंगलवार (9 जून 2020) को दो युवकों ने एक बछड़े को डंडे से पीट-पीट कर मार डाला। यह घटना पास लगे सीसीटीवी में कैद हो गई। वहीं पुलिस के आला अधिकारियों ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरी घटना

एत्माउद्दौला थाना क्षेत्र के रानी नगर में राजकुमार नाम के युवक ने अपने घर के बाहर ही अपनी गायों और भैसों को बाँध रखा था। वहीं उनके खाने के लिए चारे को भी डाल रखा था। इसी बीच भूख से बेहाल सड़क पर घूमते हुए एक बछड़े की नज़र उन चारों पर गई और वह भी गाय-भैसों के साथ चारा खाने लगा।

एक अनजान बछड़े को अपनी गाय-भैसों का चारा खाते देख राजकुमार का बेटा राहुल बौखला कर बछड़े को डंडे से पीटने लगा। साथ ही उसके दोस्त रवि ने भी बछड़े पर जम कर लाठियाँ बरसानी शुरू कर दीं। दोनों युवकों ने बछड़े को इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। बछड़े को पीटते हुए दोनों युवक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए। बाद में इस हैवानियत की वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गई।

सोशल मीडिया में सीसीटीवी फुटेज वायरल होने के बाद और स्थानीय लोगों द्वारा इसकी शिकायत पर पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है। बछड़े के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भी भेज दिया गया है।

घटना की जानकारी देते हुए एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि दोनों आरोपित पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और गोवध निवारण अधिनियम के तहत धारा 429, 11(3) और 3/8 मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब आगे की कार्रवाई करने में जुटी है।

यूपी में गौहत्या पर नया अध्यादेश जारी

गौरतलब है कि मंगलवार को ही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोहत्या पर पूर्ण लगाम लगाने के लिए ‘Cow-Slaughter Prevention (Amendment) Ordinance, 2020’ को पास किया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश गो वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश, 2020’ को मंजूरी दे दी गई।

जहाँ गोहत्या के आरोपित 7 साल के कारावास की सज़ा के प्रावधान को बढ़ा कर 10 साल कर दिया गया है। साथ ही गोहत्या पर लगने वाले जुर्माने को भी 3 लाख रुपए से बढ़ा कर 5 लाख रुपए कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में अब जो भी गोहत्या या जो-तस्करी में संलिप्त होगा, उसके फोटो भी सार्वजनिक रूप से चस्पाए जाएँगे। मंगलवार (जून 9, 2020) को यूपी कैबिनेट ने ये फ़ैसला लिया।

गाय और हथिनी को खिलाया गया था विस्फोटक

बता दें इससे पहले हिमाचल में बिलासपुर जिले के झंडुत्ता इलाके में एक गर्भवती गाय को विस्फोटक खिला दिया गया था, जिससे गाय बुरी तरह से घायल हो गई थी। जख्मी गाय ने इलाज के दौरान एक बछड़े को जन्म दिया था। मगर पशु चिकित्सकों का कहना था कि गाय अब नॉर्मल दिनों की तरह ढेर सारा चारा एक साथ नहीं खा सकेगी।

वहीं कुछ दिनों पहले केरल के मलप्पुरम एक 15 वर्षीय गर्भवती हथिनी एक अमानवीय कृत्य का शिकार हो गई थी। जहाँ उपद्रवी शख्स ने उसे पटाखों से भरा अनानास खिला दिया था, जिससे हथिनी के मुँह में विस्फोट हो गया और वह बुरी तरह जख्मी हो गई। हथिनी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि वह गर्भवती थी। उसका जबड़ा टूट गया था और मुँह में विस्फोट के कारण वह अनानास चबाने के बाद कुछ खा नहीं पा रही थी।

कोरोना से बेहाल दिल्ली के LNJP अस्पताल का हाल: जमीन पर नंगी पड़ी लाश, बेहोश पड़े मरीज, देखें वीडियो

दिल्ली के लोक नायक जय प्रकाश नारायण (LNJP) अस्पताल की दुर्व्यवस्‍था और कोरोना संक्रिमत मरीजों की दुर्गति का खुलासा करते हुए इंडिया टीवी ने एक विशेष रिपोर्ट पेश किया है।

देश की राजधानी दिल्ली में कोविड- 19 के इलाज और इस महामारी में हजारों मरीजों की देखभाल के लिए समर्पित इस अस्पताल से बेहद ही चौकाने वाली वीडियो सामने आई है। जोकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बिगड़ते स्वास्थ्य ढाँचे की झलक को पेश करते हैं। भारत में अब मुंबई के बाद दिल्ली इस महामारी से सबसे बुरी तरह प्रभावित हो चुका है।

लोकनायक अस्पताल के अंदर इंडिया टीवी के पत्रकारों द्वारा लिए गए इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह बिना कपड़ों की लाश फर्श पर लावारिस अवस्था में पड़ी थी, जिसके आस-पास कोई अस्पताल का कर्मचारी नहीं था, जो उसे उठा सके या ले जा सके।

इंडिया टीवी से बात करते हुए, एलएनजेपी अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सुरेश कुमार ने दावा किया कि हो सकता है नग्न लाश फर्श पर गिर गई हो जब डॉक्टर नॉन रेस्पॉन्सिव मरीज की छाती को दबा कर उसे पुनर्जीवित या होश में लाने की कोशिश कर रहे हो। उन्होंने बताया कि सीपीआर और चेस्ट कम्प्रेशन के दौरान मरीज के शरीर से कैथिटर, ड्रिप और कपड़ों को निकाल दिया जाता है।

हालाँकि, डॉक्टर इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाए कि फर्श पर बिना कपड़ों के नंगी लाश क्यों पड़ी थी।

इंडिया टीवी की तरफ से शेयर किए गए वीडियो में यह भी दिखाया गया है कि कुछ मरीज अस्पताल में बेहोश पड़े थे, जिनको देखने के लिए वहाँ कोई भी मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था।

इंडिया टीवी की रिपोर्ट ने यह दावा किया कि उनके रिपोर्टर काफी समय तक अस्पताल के अंदर थे, मगर उन्होंने बेहोश पड़े मरीजों के इलाज के लिए किसी भी हेल्थकेअर स्टाफ को उन्हें अटेंड करते हुए नहीं देखा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई घण्टों तक वहाँ न कोई हेल्थकेयर कर्मी मरीजों की देखभाल के लिए आया, न ही वहाँ बेसहारा पड़ी लाशों को हटाया गया।

इंडिया टीवी से बात करते हुए, मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने दावा किया कि ये सभी वीडियो भ्रामक है और उनके पास कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएँ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एलएनजेपी इस वक्त देश का सबसे बड़ा अस्पताल है जो कोरोनो वायरस संक्रमितों का इलाज कर रहा है। साथ ही उन्होंने अब तक 3,000 से अधिक रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज किया है।

डॉ. सुरेश कुमार ने यह भी कहा कि एलएनजेपी एक तृतीयक देखभाल सुविधा है और उन्हें अक्सर ऐसे मरीजों का इलाज करना पड़ता हैं, जो पहले से ही गंभीर हैं। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल मरीजों के उपचार और शवों के दाहसंस्कार के सभी प्रोटोकॉल का पालन करता हैं।

लोकनायक अस्पताल में कोरोना मरीज को भर्ती न करने पर उसकी मौत

वहीं कुछ दिन पहले दिल्ली की रहने वाली अमरप्रीत के पिता की कोरोना वायरस से मौत हो गई। अमरप्रीत का दावा किया था कि LNJP हॉस्पिटल ने उनके पिता को भर्ती करने से मना कर दिया था। उनके पिता तेज बुखार से पीड़ित थे और गंगाराम हॉस्पिटल से एलएनजेपी शिफ्ट किए गए थे। वह दिल्ली सरकार के एलएनजेपी अस्पताल के बाहर उन्हें भर्ती किए जाने के इंतजार में बैठी रहीं मगर भर्ती नहीं होने की वजह से उनकी मृत्यु हो गई।

लोकनायक अस्पताल में शवों की दुर्गति

गौरतलब है हाल ही में लोक नायक अस्पताल में शवों की बदत्तर स्थिति को देखते हुए दिल्ली हाइकोर्ट ने दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगमों को नोटिस जारी किया है। जहाँ अस्पताल स्थित कोविड-19 मॉर्चरी में 80 शवों वाले रेक के भरने के बाद 28 कोरोना संक्रिमत शव ज़मीन पर एक जे ऊपर एक पड़े थे।

जिस पर अस्पताल अधिकारी ने शवगृह की हालत बताते हुए कहा था कि, अभी तक पाँच दिन पहले जिनकी मौत हुई थी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। जिसकी वजह से मॉर्चरी में हर दिन संख्या बढ़ती चली जा रही है। पिछले हफ्ते जमीन पर 28 की जगह 34 शव रखें हुए थे।

दिल्ली में कोरोना संक्रमित के अबतक के आँकड़े

दिल्ली में 11 जून को कोरोना वायरस संक्रिमतों के करीब 1500 नए केस दर्ज किए गए हैं। जिसकी वजह से कोविड-19 के संक्रिमतों का आँकड़ा 32810 पहुँच गया हैं। जिनमें से 19581 एक्टिव केसेस हैं। अब तक 984 लोगों की जान इस महामारी की वजह से जा चुकी हैं और 12,245 मरीज इस महामारी से ठीक भी हो चुके हैं।

झारखण्ड की 2 आदिवासी महिला को बंधक बनाकर नूर इस्लाम, अली असगर, सुरेश ने किया गैंगरेप: बेंगलुरु से गिरफ्तार

लॉकडाउन में जब देश समस्याओं से जूझ रहा था उसी समय कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में झारखण्ड के दुमका की दो आदिवासी महिलाओं को बंधक बनाकर गैंगरेप किया गया। लॉकडाउन के दौरान घटी इस घटना के बाद दोनों आदिवासी श्रमिक महिलाएँ अपनी जान बचाने के लिए जंगल में छिपी हुई थीं। हेमंत सोरेन सरकार के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने दोनों को वहाँ से खोज निकाला। साथ ही FIR दर्ज कर आरोपितों को गिरफ्तार करने के साथ, गैंगरेप का शिकार हुई आदिवासी महिलाओं को ‘भारत केमिकल प्रॉडक्ट्स’ जहाँ वो काम करती थीं वहाँ से उन्हें रेस्क्यू कर लिया गया है।

गौरतलब है कि ये दोनों महिलाएँ झारखंड के दुमका की रहने वाली थीं और बेंगलुरु में रहकर एक केमिकल फैक्ट्री ‘भारत केमिकल प्रॉडक्ट्स’ में मजदूरी करती थीं। यह फैक्ट्री बेंगलुरू के केन्गेरी होबली (Kengeri Hobli) में थी। पुलिस के मुताबिक, दोनों श्रमिक महिलाओं को बंधक बनाकर रखा गया था, जहाँ लॉकडाउन के समय उनमें से एक के साथ गैंगरेप हुआ और उनकी बेरहमी से पिटाई भी की गई। इस मामले में पुलिस ने कुल 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। हालाँकि, अभी तक फ़ैक्ट्री मालिक पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

क्या है पूरा मामला

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन से पहले दोनों महिला श्रमिकों को फैक्ट्री से निकाल दिया गया। दोनों महिलाओं के साथ 5 और 8 साल के उनके दो बच्चे भी थे। कहा जा रहा है कि फ़ैक्ट्री से निकाले जाने के बाद सभी को खाने-पीने की भयंकर समस्या आ गई। चूँकि, लॉकडाउन हो जाने के कारण दोनों महिलाएँ अपने घर दुमका भी नहीं आ सकती थीं। तब बेंगलुरु में एक ठेकेदार संजीव ने दोनों को मदद के नाम पर फैक्ट्री वापस लाकर एक निर्माणाधीन मकान में रख दिया था।

न्यूज़ मिनट के अनुसार, आरोप है कि यहाँ ठेकेदार संजीव ने उन दोनों महिलाओं को पीटा और उन्हें धमकी दी। उसके साथ काम करने वाले नूर इस्लाम अंसारी और सुरेश गौर ने मिलकर दुमका की उन आदिवासी महिलाओं में से एक का गैंगरेप किया।

कुछ सप्ताह बाद अली असगर (Ali Asghar) नाम के एक और ठेकेदार ने उन्हें भोजन और रहने की जगह देने के नाम पर उनमें से एक महिला श्रमिक के साथ रेप किया। पहचान के बाद उस पर भी FIR दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। बेंगलुरु की कर्नाटक जनशक्ति और स्टेंडर्ड वर्कर्स एक्शन नेटवर्क (स्वान) संगठन की पहल पर यह मामला सामने आया था।

पुलिस ने पिछले दिनों दुमका की दो प्रवासी महिला मजदूरों को बेंगलुरु में बंधक बनाकर रखने और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई ट्विटर पर मामला संज्ञान में आने के बाद झारखंड पुलिस के हस्तक्षेप के बाद हुआ। जिसके बाद बेंगलुरु के कुंबलगुडु (Kumbalagudu police station) पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर आरोपितों नूर इस्लाम अंसारी (Nur Islam Ansari) और सुरेश गौर (Suresh Gour) तथा एक और आरोपित अली असगर को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

2019 में मानव तस्कर ले गए थे दिल्ली

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड जनाधिकार महासभा नामक संगठन ने ट्विटर पर सीएम हेमंत सोरेन को दुमका की दोनों आदिवासी महिलाओं के साथ हो रहे शोषण और गैंगरेप की जानकारी दी थी। गौरतलब है कि दुमका की दोनों महिला मजदूरों को मानव तस्कर अक्टूबर 2019 में दिल्ली ले गया था। वहाँ से कोई दूसरा तस्कर व्यक्ति दोनों को 9000 और 7000 रुपए प्रति माह पर नौकरी दिलाने के नाम पर बेंगलुरु में एक केमिकल फैक्ट्री में ले गया।

वहाँ बंधुआ मजदूर की तरह दोनों से काम लिया गया। केमिकल फैक्ट्री में उनसे 15 घंटे प्रतिदन काम कराया गया और लेकिन तय मजदूरी से बेहद कम मात्र 200 रुपए प्रति सप्ताह के दर से उन्हें मजदूरी दी गई। साथ ही तीन समय का भोजन भी दिया जाता रहा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान लेने पर हुई कार्रवाई

रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड जनाधिकार महासभा नामक संगठन ने टि्वटर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दुमका की दोनों आदिवासी महिलाओं के साथ हो रहे शोषण की जानकारी दी थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर झारखंड पुलिस ने इस मामले में हस्तक्षेप किया था। उसके बाद बेंगलुरु के कुंबलगुडु पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज हुई और छानबीन के बाद इस मामले में तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

झारखंड पुलिस ने ट्विटर पर सीएम हेमंत सोरेन को यह जानकारी भी दी कि पीड़िता को 4.12 लाख रुपए का मुआवजा भी दिया गया है। दुमका डीसी राजेश्वरी बी ने भी पत्रकारों को बताया था कि उन्हें मामले की जानकारी ट्विटर से मिली थी। डीसी ने तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी और पीड़िता को मुआवजा मिलने की भी पुष्टि की थी। उसी समय डीसी ने बेंगलुरु सिटी पुलिस से ट्विटर पर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध करते हुए इसकी सूचना सीएमओ कनार्टक को भी दी थी।