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विजय माल्या को अपने यहाँ शरण न दें: भारत ने ब्रिटेन से कहा- भगोड़ा कारोबारी अपील करे तो ठुकरा दें

भगोड़े शराब व्यवसायी विजय माल्या को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में उसने ब्रिटेन से विजय माल्या को अपने यहॉं शरण नहीं देने की अपील की है। भारत सरकार ने ब्रिटेन से कहा है कि यदि इस संबंध में वह अपील करे तो उसे ठुकरा दें। माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव लगातार ब्रिटेन के संपर्क में बने हुए हैं।

विदेश मंत्रायल के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि विजय माल्या के जल्द प्रत्यर्पण के लिए हम ब्रिटेन के अधिकारियों के संपर्क में हैं। हमने ब्रिटेन के पक्ष से भी अनुरोध किया है कि यदि माल्या की ओर से शरण की अवधि बढ़ाने को लेकर कोई अर्जी उनके पास आती है तो वह उस पर विचार न करें।

खबरों के मुताबिक विजय माल्या ने ब्रिटेन से इस आधार पर शरण माँगी है कि अगर उसे भारत में प्रत्यर्पित किया जाता है, तो उसे यातनाएँ दी जाएगी। इस मामले के बारे में जानकारी रखने वाले कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ब्रिटेन के पक्ष ने 4 जून को ब्रिटिश उच्चायोग के प्रवक्ता द्वारा दिए गए बयान से अलग माल्या के मामले में कोई और टिप्पणी नहीं की थी और यह लंबे समय से चली आ रही नीति के तहत है।

दरअसल एक हफ्ते पहले ब्रिटेन ने कहा था कि एक गोपनीय कानूनी पेंच के चलते माल्या का प्रत्यर्पण अटका हुआ है, लेकिन वह जल्द से जल्द इस मामले को निपटाने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद ही ब्रिटेन के रुख ने नई अटकलों को जन्म दिया कि भारत में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रहा 64 वर्षीय व्यवसायी विजय माल्या ब्रिटेन में शरण के लिए आवेदन कर सकता है।

आपको बता दें कि इससे पहले भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ विजय माल्या की अपील को हाईकोर्ट ने खारिज़ कर दिया था। माना जा रहा है कि इससे अब विजय माल्या के पास प्रत्यर्पण से बचने के लिए कोई कानूनी विकल्प नहीं बचेगा।

लंदन हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि विजय माल्या ने भारतीय बैंकों को धोखा दिया है और उसे प्रत्यर्पित किया जाना चाहिए। उस वक्त माल्या ने लोअर कोर्ट वेस्टमिनस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के प्रत्यर्पण के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहाँ भी उसे झटका लगा था।

गौरतलब है कि 64 वर्षीय विजय माल्या पर भारत के कई बैंकों के साथ 11 हज़ार करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी करने का आरोप है। माल्या मार्च 2016 में देश छोड़कर लंदन चला गया था।

अजय पंडिता की हत्या के बाद फिर कश्मीरी पंडितों का पलायन, 50 से ज्यादा हिंदू पंच-सरपंचों के कश्मीर छोड़ने का दावा

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में सरपंच अजय पंडिता की हत्या के बाद डर और खौफ का माहौल है। खबर है कि कश्मीरी पंडितों ने एक बार फिर घाटी से पलायन शुरू कर दिया है।

इंडिया टुडे के रिपोर्टर सुनील भट्ट की रिपोर्ट के अनुसार अब तक करीब 50 पंच-सरपंच घाटी छोड़कर जम्मू आ चुके हैं। यह दावा ऑल जम्मू एंड कश्मीर पंचायत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने की है।

अनिल शर्मा ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया कि अजय पंडिता की मौत के बाद उन्हें कई सरपंचों के कॉल आ रहे हैं। उनमें काफी डर है। अनिल ने कहा कि अब तक उनके 19 साथी इस बर्बरता का शिकार हो चुके हैं।

वे कहते हैं कि उन्होंने कई बार पंच-सरपंचों के लिए सुरक्षा माँगी थी। लेकिन समय रहते सुनवाई नहीं हुई। अनिल शर्मा बताते हैं कि उनकी जानकारी के अनुसार अब तक 50 से ज्यादा कश्मीरी पंडित पंच-सरपंच घाटी छोड़कर जम्मू आ गए हैं। उनमें अजय पंडिता की मौत से काफी डर है।

उनके मुताबिक, इस घटना से केवल कश्मीरी पंडित नहीं घबराए हुए, बल्कि अल्पसंख्यक सिख समुदाय के सरपंच भी काफी डरे हुए हैं। इसी कारण वह जम्मू-कश्मीर एलजी और गृह मंत्री अमित शाह से माँग करते हैं कि उन्हें सुरक्षा मुहैया कराया जाए।

मीडिया चैनल से बात में उन्होंने अलगाववादियों को सुरक्षा मुहैया कराए जाने को लेकर अपनी नाराजगी जताई और बार-बार कहने के बावजूद पंचों को सुरक्षा न मिलने पर शिकायत की। उन्होंने कहा कि इस समय पंचों में ऐसा डर है कि उनकी माँग बस यही है कि उन्हें सुरक्षा दी जाए। वरना वह अपने-अपने पद से त्यागपत्र देने को तैयार हैं।

अनिल शर्मा के अलावा पुलवामा के एक सरपंच मनोज पंडिता ने इंडिया टुडे को बताया, “अजय पंडिता हमारे बहादुर साथी थे। हम उनकी हत्या से काफी हतप्रभ हैं। हमें अपनी जिंदगी का भी डर है। इसलिए हम घाटी छोड़ जम्मू आए हैं।”

इसके अलावा घाटी छोड़कर जम्मू आ चुकी एक महिला पंचायत सदस्य ने बताया, “मैं व्यक्तिगत काम से कुछ हफ्ते पहले जम्मू आई थी। लेकिन अब अजय पंडिता की हत्या के बाद, मैं घाटी नहीं लौटूँगी। प्रशासन हमें सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहा है।”

उल्लेखनीय है कि 90 के दशक में इस्लामिक बर्बरता के कारण साढ़े 3 लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ने पर मजबूर हो गए थे। आज हिंदू सरपंच की मौत ने घाटी में रह रहे सैंकड़ो हिंदुओं के मन में फिर से उस डर को व्याप्त कर दिया है। इसके कारण उन्हें पलायन के अलावा कोई और विकल्प नहीं दिख रहा।

बता दें, 8 जून को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के लोकभवन लरकीपोरा में सरपंच अजय पंडिता की गोली मारकर हत्या की गई थी। पुलिस ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि सोमवार (08 जून, 2020) की शाम करीब 6 बजे कुछ आतंकवादियों ने 40 वर्षीय सरपंच अजय पंडिता उर्फ भारती को गोली मार दी। घटना को अंजाम देकर आतंकवादी मौके से फरार हो गए थे। घटना को उस समय अंजाम दिया गया था कि जब सरपंच अपने बागान में गए थे।

J&K: इस साल 100 आतंकी ढेर, लॉकडाउन में 68 मारे गए, हथियारों की खेप के साथ आमिर वानी और वसीम वानी पकड़ा गया

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने इस साल अब तक 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। इनमें से 68 को 1 अप्रैल से 10 जून के बीच मार गिराया गया, जब कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू था। इस बीच, पंजाब पुलिस ने लश्कर के दो आतंकियों को गिरफ्तार कर घाटी में बड़े हमले की साजिश को नाकाम कर दिया है।

पंजाब पुलिस ने आमिर हुसैन वानी और वसीम हसन वानी को पठानकोट में पकड़ा। दोनों आतंकी हमले के लिए घाटी में हथियार लेकर जाने की कोशिश में थे। इनके पास से 10 हेंड ग्रेनेड, एक एके -47 राइफल, दो मैग्जीन और 60 कारतूस बरामद किए गए हैं।

आमिर और वसीम शोपियाँ जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। दोनों ट्रक से कश्मीर जा रहे थे। खबरों के मुताबिक इन दोनों आतंकियों से अश्फाक डार ने हथियार को पंजाब से कश्मीर लाने के लिए कहा था। अश्फाक पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस में था, जिसे पहले ही भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। अब अश्फ़ाक लश्कर के लिए काम करता है।

आँकड़ों के मुताबिक इस साल सबसे ज्यादा आतंकी हिज्बुल के मारे गए हैं। बुधवार (जून 10, 2020) को शोपियाँ में सुरक्षाबलों ने 5 आतंकियों को मार गिराया था। ये मारे गए आतंकी हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे।

बता दें कि 1 सप्ताह से भी कम समय में शोपियाँ में यह तीसरी बड़ी मुठभेड़ थी, जिसमें 14 आतंकवादी मारे जा चुके हैं। इसके अलावा 2 हफ्ते (1 जून से 10 जून) में कई टॉप कमांडर्स समेत 23 आतंकी मारे गए हैं।

इससे पहले 8 जून को शोपियाँ के पिंजूरा इलाके में हुई मुठभेड़ में 4 आतंकी मारे गए थे। उससे एक दिन पहले यानी रेबेन इलाके में 5 आतंकियों को सुरक्षाबल ने ढेर किया था। कुल मिलाकर 24 घंटों में सुरक्षाबलों ने 9 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने इन लगातार मुठभेड़ों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हाल के अभियानों में हिजबुल मुजाहिदीन के 9 आतंकवादी मारे गए हैं। पिछले 2 सप्ताह में 9 बड़े ऑपरेशन किए गए, जिसमें 22 आतंकवादियों का खात्मा किया गया है। इनमें आतंकी संगठनों के 8 शीर्ष कमांडर शामिल हैं।

अखिलेश यादव के करीबी जावेद सिद्दीकी सहित 34 अन्य गिरफ्तार, सभी जौनपुर में दलितों पर बर्बरता के आरोपित

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के भदेठी गाँव में मंगलवार (जून 9, 2020) रात दलितों के साथ हुई बर्बरता के मामले में पुलिस ने अब तक कुल 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। घटनाक्रम से जुड़े मुख्य आरोपितों में से एक की पहचान सपा नेता जावेद सिद्दीकी के रूप में हुई है। जावेद को लेकर कहा जा रहा है कि वह इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड है और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का करीबी है। जावेद सिद्दीकी सहित 34 अन्य आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एबीपी के पत्रकार विकास भदौरिया ने जावेद और अखिलेश यादव की कुछ तस्वीरें ट्वीट करते हुए कहा है, “समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का बेहद क़रीबी जावेद सिद्दकी निकला जौनपुर में दलितों पर बर्बरता का मास्टरमाइंड, पुलिस ने किया गिरफ़्तार।”

गौरतलब है कि मंगलवार रात दलितों के गाँव में समुदाय विशेष के हमले का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। इस वीडियो को वकील प्रशांत पटेल ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है।

वीडियो में हम देख सकते हैं कि किस प्रकार उपद्रवी घटनास्थल पर उत्पात मचा रहे हैं और सामने खड़ी बाइक को भी खींचकर आग के हवाले कर देते हैं। इसके बाद सभी वहाँ से भाग जाते हैं।

यहाँ बता दें कि इस घटना के संबंध में पुलिस ने अब तक 57 नामजद, जबकि 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसके अलावा 35 आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद, बाकी आरोपितों को पकड़ने के लिए दिन रात छापेमारी की जा रही है।

इस मामले पर स्वंय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने दलितों के घर फूँकने के मुख्य आरोपित नूर आलम और जावेद सिद्दीकी समेत सभी आरोपितों पर तत्काल एनएसए के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

सीएम ने इलाके के थाना प्रभारी के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। सीएम योगी ने सभी दलित पीड़ितों को तत्काल आवास योजना के तहत आवास और अन्य सरकारी मदद देने की बात कही है।

पूरा मामला

जिले के सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के गाँव भदेठी में मंगलवार (9 जून, 2020) को गाँव के ही शहबाज नामक लड़के का दलित बस्ती के बच्चों से बकरियाँ चराने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद दोनों समुदाय के लोगों में दिन में कहासुनी हो गई, रात में मुस्लिम पक्ष के सैकड़ों लोगों ने मिलकर लाठी-डंडों से लैस दलित बस्ती में हमला बोल दिया।

Yogi Adityanath On Jaunpur Dalit House Fire; Uttar Pradesh Chief ...

इस दौरान आरोपितों ने हवाई फायरिंग, वाहनों में तोड़फोड़ और कई घरों को आग के हवाले कर दिया था। घटना में एक भैंस और तीन बकरियाँ जल कर राख हो गईं। वहीं एक सिलेंडर में लगी आग के बाद हुए विस्फोट से भारी नुकसान हुआ।

हालात को काबू करने के लिए कई थानों की पुलिस फोर्स को रात में ही तैनात कर दिया गया था। घटना के बाद गाँव भदेठू पहुँचे जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह व पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने घटना स्थल मुआयना किया और स्थिति को नियंत्रण करने में लगे रहे, जिसके बाद जिलाधिकारी ने हिंसा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही।

कानपुर मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य आरती लालचंदानी का तबादला, जमातियों पर टिप्पणी को लेकर चर्चा में थीं

तबलीगी जमातियों पर टिप्पणी करने के कारण चर्चा में आईं कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर आरती लालचंदानी का बुधवार देर रात तबादला कर दिया गया

उनकी जगह डॉ.आरबी कमल को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया। वहीं, प्रो. आरती को लखनऊ में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा, कार्यालय से सम्बद्ध किया गया। इससे पहले प्रो. आरती को झाँसी भेजे जाने की अटकलें लग रही थीं। लेकिन बुधवार को यह खबर आने के बाद इस चर्चा पर विराम लग गया।

जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात 1 बजे के बाद प्रोफ़ेसर आरती को चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक लखनऊ से सम्बद्ध में तबादले का आदेश जारी हुआ। इसके बाद आदेश को लागू कराने के लिए देर रात जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारी मेडिकल कॉलेज पहुँचे।

वहाँ, जिलाधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी ने एसीएम जयेंद्र और सीओ स्वरूप नगर को भेजकर चार्ज हैंड ओवर करवाया। गुरुवार सुबह 4 बजे तक लखनऊ में कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया चली।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर प्रोफेसर आरती की एक वीडियो वायरल हुई थी। इस वीडियो में वह तबलीगी जमात के लोगों की हरकतों से नाराज होकर उनपर अपनी राय रखती दिखीं थी।

उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मेडिकल कॉलेज से लेकर पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया था और इस दौरान उनपर कार्रवाई की माँग भी उठने लगी थी। इस बीच कुछ मुस्लिम संगठनों ने उनके ख़िलाफ़ मोर्चा भी खोला था।

एक तरफ अधिवक्ता नासिर खान द्वारा डीआईजी को पत्र लिख प्राचार्य के खिलाफ अभियोग पंजीकृत करने अनुरोध किया था। वहीं दूसरी और पूर्व सांसद व सीपीआईएम की नेता सुभाषिनी अली ने भी आरती लालचंदानी को नौकरी से निकालने और उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की माँग की थी।

मामला आगे बढ़ने के बाद आरती लालचंदानी को जान से मरने की धमकी भी दी जाने लगी थी। इसकी वजह से उन्होंने डीआईजी अनंत देव तिवारी को प्रार्थना पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने ब्लैकमेल और जान से मारने की धमकी की शिकायत और अपनी सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए उनसे एक गनर की माँग भी की थी।

मुस्लिम असलम का अपराध हिन्दुओं के नाम: आजतक समेत मेन्स्ट्रीम मीडिया ने नाम छुपाया, गलत शब्द लिखे

मुस्लिमपरस्ती में मीडिया का एक धड़ा इस कदर मदमस्त है कि उसे गलती से कहीं कोई अपराधी मुस्लिम समुदाय का या कई बार ईसाई भी दिख गया तो ये पूरा गिरोह चटपट येन-केन प्रकारेण अर्थात कुछ भी करके पाठकों के सामने ऐसा स्पिन देने की कोशिश में लग जाएगा कि समुदाय विशेष का अपराध भी ढक जाए और कोई निरपराध समुदाय या व्यक्ति खास तौर हिन्दू धर्म प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सवालों के घेरे में भी आ जाए।

अभी ताजा मामला आजतक द्वारा प्रकाशित एक लेख का है। जिसमें विजुअल और लेख के गड़बड़झाले से असल अपराधी असलम को पूरी तरह से गायब कर लेख में ‘बाबा’ और ‘भक्त’ जैसे शब्दों का जानबूझकर प्रयोग करते हुए पाठकों को बरगलाने और समुदाय विशेष के असलम को बचाने की शातिराना कोशिश की गई है।

क्या है असल में मामला

मध्य प्रदेश के रतलाम के नयापुरा क्षेत्र में झाड़ फूँक और पानी फूँककर इलाज करने वाले असलम की मौत हाल ही में कोरोना से होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। क्योंकि जब प्रशासन ने असलम के संपर्क में आए लोगों की लिस्ट निकाली तो वो काफी लंबी-चौड़ी निकली। इसके बाद उन लोगों का सैंपल लिया गया, जिसमें से 19 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

लेकिन, जब मीडिया में इस न्यूज़ की रिपोर्टिंग हुई तो पूरा गिरोह असलम को बाबा, भक्त, भगवा को आगे कर बचाने की हड़बड़ी में लग गया। इन्हीं 19 कोरोना पॉजिटिव लोगों को आजतक ने ‘भक्त’ और झाड़फूँक कर इलाज का ढोंग करने वाले असलम को ‘बाबा’ लिखा है।

मीडिया गिरोह का हिन्दूफ़ोबिक प्रपंच

इस तरह से स्पिन देने के मामले में वैसे ‘आजतक’ अकेला नहीं है, ‘नई दुनिया’ से लेकर ज़्यादातर वामपंथी धड़े के मीडिया समूह सालों से खुला-खेल फर्रुखाबादी की तरह अक्सर मुस्लिम आलिम, मौलवी, मुल्ला या किसी झाड़फूँक करने वाले फकीर या ढोंगी को ये बाबा, तांत्रिक, साधु आदि नामों और भगवा, त्रिशूल, त्रिपुण्ड के विजुअल में छिपाते आए हैं।

बहुत ही बारीकी से कभी प्रतीकात्मक तस्वीर के नाम पर तो कभी सीधे खुल्ले में खेलते हैं कि कौन सी जनता जा रही है तहकीकात करने? अगर बाद में पता भी चला तो क्या हो जाएगा? क्योंकि आजतक कभी इन्हें अपनी इन हरकतों पर कोई बड़ा आउटरेज नहीं झेलना पड़ा।

इस तरह से फेक न्यूज़ के माध्यम से ही सही लेकिन समुदाय विशेष के शातिर मुस्लिम अपराधी को बचाने और बेहद सहिष्णु समुदाय अर्थात हिन्दुओं और उनके धार्मिक प्रतीकों को बदनाम करने का उनका मकसद लम्बे समय से पूरा होता आया है।

यहाँ एक बात विचारणीय है कि सोशल मीडिया के दौर में जब पब्लिक ही इन मीडिया गिरोहों के झूठ को पकड़ के इन्हें लताड़ती है तो भी ये पूरा वामपंथी इकोसिस्टम और मीडिया गिरोह उस सच्चाई उजागर करने वाले को ही हेट फ़ैलाने वाला कहकर अपने अपराधों और झूठ से पल्ला झाड़ती नजर आती है। बेनकाब होकर भी अपने किए की न कभी माँगते है और न ही इन्हें कोई अफ़सोस होता है।

गौरतलब है कि नई दुनिया समेत कई अन्य मीडिया पोर्टल ने भी इसी तरह से एक बार फिर से असलम के आगे ‘बाबा’ लगाकर इसे हिंदू स्पिन देने की कोशिश की। वैसे ये पहला मामला नहीं है, जब किसी अखबार ने ऐसा करने की कोशिश की हो।

इससे पहले भी आरोपित ‘मुस्लिमों’ की न केवल पहचान छिपाई गई, बल्कि इस चक्कर में हिंदुओं को बदनाम करने के लिए कई अन्य युक्तियाँ भी प्रयोग में लाई गई। जैसे हाल ही में रेप आरोपित एक और मुस्लिम आलिम असलम फैजी को ‘तांत्रिक’ बताया गया था और साथ ही जादू-टोना करने वाले मौलवी की जगह एक पुजारी का स्केच लगा दिया गया था।

मीडिया गिरोह के लोग शायद अभी भी चेत नहीं रहे हैं। नहीं तो ऐसी गलती जानबूझकर बार-बार नहीं दोहराते। वो भी तब जब इन्हें पता है कि कोई भी दो चार कीवर्ड टाइप कर तुरंत ही उनकी पोल खोल देगा।

संभवतः मेरी समझ समझ से ऐसा करने का सबसे बड़ा कारण यही है कि इन मीडिया गिरोहों को पता है कि उनका एक फिक्स पाठक या दर्शक वर्ग है। जो ऐसी स्पिन दी हुई चीजों को हाथों-हाथ लपककर उन्हें वायरल कराता है जिससे इनके अतिप्रिय समुदाय विशेष के तमगे में उसके शांतिप्रिय होने का भाव तो जो बेकसूर है हिन्दू समुदाय उसके प्रतीकों और नामों के प्रति लोगों के अंदर घृणा और दुर्भावना फैलती है। और ऐसा करना ही इनका असल मकसद है।

असलम के असल कारनामें

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक असलम खुद कोरोना पॉजिटिव पाया गया था वह लोगों का हाथचूमकर, झाड़फूँक कर, या पानी फूँककर देकर इलाज करता था। इस वजह से तबलीगी जमात की ही तरह उसके संपर्क में आने वाले लोगों के कोरोना पॉजिटिव आने का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है।

लोगों के लगातार संक्रमित पाए जाने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया और प्रशासनिक अमले के निर्देश पर शहर एसडीएम लक्ष्मी गामड़ की मौजूदगी में शहर में अलग-अलग बैठकर झाड़ फूँक और पानी से उपचार करने का दावा करने वाले 29 लोगों को एहतियात के तौर पर क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया है। जिसमें बीमारी के लक्षण नजर आएँगे उनका कोरोना टेस्ट कराया जाएगा।

गौरतलब है कि रतलाम के नयापुरा में असलम के पास लोग कोरोना का इलाज कराने आते थे और वह लोगों का हाथ चूमकर कोरोना को भगा रहा था। रतलाम में मंगलवार (जून 9, 2020) को मिले 24 कोरोना पॉजिटिव में से 13 लोग नयापुरा के झाड़-फूँक करने वाले असलम के संपर्क में आने वाले हैं।

असलम की 4 जून को कोराेना से मौत हो गई थी। उसके संपर्क में आने वालों के सैंपल लिए थे। इससे पहले 7 जून को नयापुर से 6 कोरोना पॉजिटिव मिले थे। ये भी असलम के संपर्क में आए थे। यानी कि अब तक जिले के कुल 85 मरीजों में से 19 तो असलम के कारण ही संक्रमित पाए गए। 

मंगलवार को 200 लोगोंं की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें से 24 पॉजिटिव व 176 निगेटिव निकले। नोडल अधिकारी डॉ प्रमोद प्रजापति ने बताया कि संक्रमण का पता चल सका, ये बड़ी बात है। सभी संक्रमितों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जाएगी। एक भी संक्रमित हुआ तो कई को खतरा हो सकता है। प्रमोद प्रजापति का कहना है कि ऐसे लोगों से इसलिए खतरा है, क्योंकि ये झाड़-फूँक करते हैं और फूँका हुआ पानी आदि लोगों को देते हैं।

जन्मदिन विशेष: प्रिय लालू यादव जी, आप 120 साल जीएँ, ऐसे ही फोटो में हमेशा दिखें

आज बिहार के सबसे ‘बड़े’ नेता लालू प्रसाद यादव का जन्मदिन है। बड़े लोगों का जन्मदिन मनाना भी चाहिए। मैं बिहार के उस दौर को याद करके सोचता हूँ कि गोलियों से बींधी हुई दीवार को देख कर भी एक बच्चे के रूप में मुझे सामान्य क्यों लगता था? मैं सोचता हूँ कि आखिर मुझे घर छोड़कर भागना क्यों पड़ा? मैं वो दिन याद करता हूँ जब पिताजी घर से बाहर न जाने की सलाह देते थे।

अपना आधा नाम छुपाना, बदल लेना, खुद को कहीं और का बताना… ये सब शर्म की वो परतें हैं जो हर बिहारी कभी न कभी झेलता है। जो पहचान राष्ट्र के सबसे अच्छे विद्वानों, शासकों, कूटनीतिज्ञों, महापुरुषों की जन्म और कर्मस्थली रहा है, वो आखिर पंद्रह साल में ऐसी गर्त में कैसे गई कि वो अब एक गाली है?

कभी कोई टोक देता है, तो आप उसे कुछ कह नहीं सकते कि वापस क्यों नहीं जा रहे… कुछ कर क्यों नहीं पा रहे अपने राज्य के लिए, वहाँ के लोगों के लिए! एक विवशता है कि आप कुछ करना भी चाहें तो तंत्र आपको वैसा करने ही नहीं देगा। आपका मनोबल टूट जाता है और आप हार मान लेते हैं।

लालू प्रसाद यादव ने स्वयं की ‘मसीहाई’ से वो आतंक के दिन बिहार को दिखाए हैं कि आत्मा सिहर जाती है। इसे जो मसीहा कहते हैं, वो शायद राजनैतिक मजबूरियों के कारण कहते होंगे, क्योंकि कोई भी सामान्य बुद्धि-विवेक से चलने वाला व्यक्ति इस आदमी के लिए घृणा के अलावा और कोई भाव ला ही नहीं सकता।

बिहार की बर्बादी के जनक लालू प्रसाद यादव का लम्बे समय तक जीवित रहना अत्यावश्यक है ताकि वो अपनी आँखों से देखे और शरीर के हर अंग से महसूस करे कि जो बर्बादी उसने लिखी थी उसका कर्मफल कैसा मिल रहा है।

आदरणीय लालू प्रसाद जी के जन्मदिन पर मेरा स्नेह सन्देश:

एक बिहारी का लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन पर सन्देश

कोरोना संक्रमित माँ 6 घंटे बेड का इंतजार कर मर गई, 8 दिन से गायब दादी का शव अस्पताल के टॉयलेट में मिला

महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण से देश का सर्वाधिक प्रभावित राज्य है। यहॉं के एक सरकारी अस्पताल की लापरवाही के कारण एक परिवार के दो लोगों की मौत 9 दिन के भीतर हो गई। मामला जलगाँव सिविल अस्पताल का है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, हर्षल नेहेते (Nehete) ने बताया कि उनकी माँ टीना (60) और दादी मालती (82), दोनों कोरोना संक्रमित थीं। उनकी माँ ने अस्पताल में 6 घंटे तक आईसीयू बेड का इंतजार किया। बाद में उनकी मौत गई।

इसी प्रकार बुधवार को 8 दिनों से गायब उनकी दादी का शव अस्पताल के एक शौचालय से बरामद हुआ। हॉस्पिटल प्रशासन की ओर से बताया गया है कि शव वार्ड नंबर 7 के टॉयलेट से मिला।

रिपोर्ट के मुताबिक बुजुर्ग महिला 2 जून से लापता थी। लेकिन अस्पताल ने उनके परिजनों से कहा कि वह वहाँ से जा चुकी हैं। इसके बाद पूरे 8 दिन दिन तक अस्पताल का कोई सफाई कर्मचारी शौचालय को साफ करने नहीं गया।

प्रशासन ने शव मिलने पर बताया, शौचालय का दरवाजा अंदर से बंद था और बदबू आने के बाद इसे तोड़ा गया। महिला का शव मिलने के बाद बुधवार रात अस्पताल के डीन डॉ. बीएस खैर समेत अस्पताल के पाँच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। मामले में जाँच के आदेश भी दिए गए हैं।

कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मूल रूप से भुसावल की रहने वाली वृद्ध महिला को 1 जून की शाम सात बजे जलगाँव सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 2 जून की रात महिला अचानक गायब हो गईं। हॉस्पिटल ने उनकी तलाश शुरू की। परिवार के लोगों से पूछताछ हुई, लेकिन अगले दिन वह अपने आप हॉस्पिटल में लौट आई। वह सारी रात कहाँ थीं इस बारे में कुछ पता नहीं चला। 

फिर, 5 जून को मालती दोबारा लापता हो गईं। जब परिजनों से संबंध में पूछा गया तो उन्हें भी इस बारे में कुछ नहीं मालूम था। महिला के काफी टाइम न मिलने पर उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दी गई। लेकिन अस्पताल को चेक नहीं किया गया।

बुधवार सुबह जब हॉस्पिटल की इंचार्ज डॉ. किरण पाटिल नियमित दौरे के लिए वार्ड नंबर 7 में गईं। तब, उन्होंने नर्सों और सफाई कर्मचारियों से शौचालय के पास से आती बदबू के बारे में पूछा। शौचालय की कुंडी अंदर से बंद होने के कारण गेट को तोड़ा गया, तो वृद्धा का शव शौचालय में पड़ा मिला।

शव की सूचना पाते ही पुलिस मौके पर पहुँची और उसे अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम में यह बात सामने आई कि महिला की मौत 5 दिन पहले हुई थी। 

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, स्थानीय पुलिस ने इस मामले में बताया कि उन्हें महिला के गुमशुदगी की रिपोर्ट 6 जून को मिली थी। अब वह इस मामले में आगे की जाँच कर रहे हैं।

जिलाधिकारी अविनाश डांगे ने भी कहा कि यह अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही है। अस्पताल के बाथरूम को हर दिन साफ किया जाता है। ऐसे में किसी की भी नजर पिछले 8 दिनों से बुजुर्ग पर नहीं पड़ी। जिलाधिकारी ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की बात कही।

73 के हुए लालू तो जदयू ने गिनाई 73 प्रॉपर्टी, जो उनके कुनबे ने राजनीतिक धौंस से हथियाया

लालू प्रसाद यादव को उनके 73वें जन्मदिन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू (JDU) ने अलग अंदाज में बधाई दी है। जदयू ने एक पोस्टर लगवाया है, जिसमें 73 संपत्तियों का जिक्र कर दावा किया गया है कि लालू और उनके परिवार के सदस्यों ने राजनीतिक धौंस के दम पर ये हथियाए हैं।

पोस्टर में यह भी कहा गया है कि राजनीतिक धौंस से बटोरी गई संपत्तियों की श्रृंखला और भी शेष है। जदयू ने यह पोस्टर लालू को जन्मदिन की बधाई देने वाले राजद के पोस्टर के ठीक बगल में लगवाए हैं।

लालू यादव बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वे करोड़ों रुपयों के घोटालों में आरोपित हैं। देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में उन्हें साढ़े तीन साल की सजा सुनाई जा चुकी हैं। इन दिनों वे रॉंची के बिरसा मुंडा जेल में बंद है।

देवघर मामले के अलावा, आरजेडी प्रमुख को भागलपुर कोषागार चारा मामले में पाँच साल, चाईबासा कोषागार चारा घोटाले में पाँच साल की जेल और दुमका कोषागार मामले में 14 साल जेल की सजा सुनाई गई है, जबकि कई अन्य चारा घोटाला के मामलों की सुनवाई अभी भी अदालतों में हो रही है।

भागलपुर मामले में उन्हें जमानत मिल चुकी है। चारा घोटाले के अलावा, वह भारतीय रेलवे के टेंडर केस, आय से अधिक संपत्ति के मामले, कर चोरी, बेनामी संपत्ति आदि मामलों में जाँच का सामना कर रहे हैं।

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। जदयू और राजद के बीच पोस्टर वार पिछले साल से ही देखा जा रहा है।

बंगाल: 13 अधजली लाशों के साथ दुर्व्यवहार के वीडियो को अस्पताल ने बताया फेक

सोशल मीडिया में अधजली लाशों का एक वीडियो वायरल हुआ था। दावा किया जा रहा था कि ये शव पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण से मारे गए लोगों के हैं। एनआरएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिंपल ने इस वीडियो को फेक बताया है। उन्होंने इस संबंध में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा है।

ABP न्यूज़ चैनल के जर्नलिस्ट विकास भदौरिया ने एक विडियो शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा है – “तस्वीरें विचलित कर सकती हैं। कोलकाता नगर निगम 13 बुरी तरह सड़े हुए शवों को जलाने के लिए न्यू गोरिया श्मशान घाट लाया। उनसे तेज़ दुर्गंध उठ रही थी। स्थानीय निवासियों के विरोध के चलते लाशों को वापस ले जाना पड़ा। शवों के साथ अमानवीय और शर्मनाक व्यवहार, सरकार के असभ्य रवैये का प्रतीक है।”

नीचे वीडियो है, जो हृदय विदारक है – एकदम विचलित कर सकने वाली!

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग तेज बदबू के कारण अपनी नाक बंद कर रहे हैं जबकि कुछ लोग बेहद बुरी तरह से आधी जली हुई लाशों को एम्बुलेंस में भरकर किसी और जगह ले जाने की तैयारियाँ कर रहे हैं।

गौरतलब है कि बंगाल में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 9328 मामले सामने आ चुके हैं जबकि यहाँ का रिकवरी रेट 36.60% की दयनीय स्थिति में है। ममता बनर्जी के बंगाल में अब तक कोरोना वायरस के कारण कुल 432 मौतें हो चुकी हैं। जबकि पूरे भारत में अब तक इस वायरस के संक्रमण से कुल 8102 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके साथ ही भारत में अब तक कुल 1,37,448 मामले कोरोना संक्रमण के सामने आ चुके हैं।