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‘अल्लाह आजादी के लड़ाकों को ताकत दे’: पाकिस्तानियों ने हंदवाड़ा मुठभेड़ का मनाया जश्न, ऑफिसर समेत 4 वीरगति को प्राप्त

जम्मू कश्मीर के हंदवारा में आतंकियों से मुठभेड़ के बीच भारतोय सेना और पुलिस के 4 ऑफिसर और जवान फँस गए थे, जिनसे सम्पर्क नहीं हो पा रहा था। अब उन सभी के वीरगति को प्राप्त होने की ख़बर आई है। इनमें दो वरिष्ठ रैंक के अधिकारी हैं, जिनमें एक कर्नल रैंक के और एक मेजर हैं। पाकिस्तानियों ने हंदवारा मुठभेड़ की इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर जश्न मनाना शुरू कर दिया है।

पाकिस्तानी ट्विटर हैंडलों ने इस घटना की तुलना अभिनन्दन प्रकरण से की। बता दें कि शनिवार (मई 2, 2020) की रात वहाँ 12 घंटों तक मुठभेड़ चली।

रात भर संशय के माहौल के बाद अब उन जवानों के वीरगति को प्राप्त होने की ख़बर आई है। उन जवानों में एक जम्मू कश्मीर पुलिस से हैं और एक दूसरे सिक्यॉरिटी फोर्स के। शनिवार दोपहर 3:30 बजे सशस्त्र बलों और आतंकियों के बीच फायरिंग चालू हुई थी। हंदवारा उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में स्थित है। इससे 1 दिन पहले उरी में पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया था, जिसमें 2 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

इसी बीच दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में स्थित डंगरपोरा में भी दो आतंकियों के मारे जाने की ख़बर है। वहाँ स्थानीय लोगों ने भी आतंकियों के समर्थन में पत्थरबाजी की। वहाँ सीआरपीएफ पर ग्रेनेड से हमला किया गया था। अगर हंदवारा की घटना पर लौटें तो सभी जवान चंजमुल्ला क्षेत्र में फँसे हुए थे। उनकी मुठभेड़ पाकिस्तान से घुसपैठ कर के आए आतंकियों से हुई।

इसी बीच पाकिस्तानी ट्विटर हैंडल्स ने आतंकियों की इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए भारत का मजाक बनाया। तैयब ज़हीर ने विंग कमांडर (तब) अभिनन्दन की फोटो शेयर करते हुए इसे कोरोना से जोड़ा और लिखा- ‘स्टे होम, स्टे सेफ‘। बता दें कि पाकिस्तानी एफ-16 को मार गिराने वाले अभिनन्दन वहाँ की फ़ौज के कब्जे में आ गए थे, जिसके बाद भारत ने उनकी सकुशल घर-वापसी सुनिश्चित की थी। तब पूरा देश उनकी राह देख रहा था।

राणा मुबाशिर अली ने बॉलीवुड फिल्मों से तुलना कर भारतीय जवानों और ख़ुफ़िया एजेंसियों को नीचा दिखाने की कोशिश की। उसने दिखाया कि रॉ एजेंट फिल्मों में ‘एक था टाइगर’ के सलमान ख़ान जैसे होते हैं जबकि असल में कुलभूषण जाधव की तरह। साथ ही उसने बच्चियों तक को नहीं छोड़ा। उसने दिखाया कि फिल्मों में कश्मीरी लड़की ‘बजरंगी भाईजान’ के मुन्नी की तरह होती है जबकि असली कश्मीरी लड़की के नाम पर उसने एक बच्ची की फोटो शेयर की, जिसका एक आँख जख्मी हो चुका था और वो पट्टी बाँधे है।

इमरान ख़ान की प्रोफाइल पिक्चर वाले ट्विटर यूजर मलिक ने उस दृश्य को शेयर किया, जहाँ पाकिस्तानी फ़ौज अभिनन्दन को लेकर जाते हुए प्रतीत हो रही है। साथ ही उसने लिखा कि इतिहास उसे फ़रवरी 2019 की याद दिला रहा है। अदनान राजपुर नामक व्यक्ति ने दावा किया कि ये सब पीएम मोदी द्वारा रचा गया ‘ड्रामा’ है, ताकि वो ‘जम्मू कश्मीर में किए जा रहे अत्याचार और कोरोना से निपटने में मिली नाकामी’ से लोगों का ध्यान हटा सकें। एक ने लिखा कि अल्लाह उन ‘आज़ादी के लड़ाकों’ को और ताक़त दे।

दरअसल, हंदवारा में एक इमारत में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद जॉइंट ऑपरेशन लॉन्च किया गया था। जवानों ने नागरिकों और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुँचाए बिना आतंकियों को मार गिराने का प्रयास किया। आतंकियों को मार गिराने के लिए चार जवान इमारत के भीतर गए, जिनसे संपर्क टूट गया था। वहाँ रजवार में घने जंगल भी हैं, जहाँ और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है।

श्रमिक ट्रेन में मजूदरों से किराया, लालू ने चलाई थी मुफ्त रेल: रवीश कुमार ने शेयर की ‘द हिन्दू’ की फेक न्यूज़

रवीश कुमार ने इस बार मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिए चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू यादव का गुणगान किया है, जो फ़िलहाल राँची जेल में बंद है। सरकार की पहल के बाद भारतीय रेलवे ने मजदूरों को उनके गृह राज्य भेजने का निर्णय लिया है, जिसके लिए उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा। रवीश ने झूठा दावा किया कि मजदूरों से किराया लिया जा रहा है जबकि कोसी बाढ़ के समय लालू ने मुफ्त में ट्रेनें चलवाई थी।

रवीश ने लिखा कि लालू प्रसाद ने टीवी के एक शो से मिला एक करोड़ रुपया बाढ़ पीड़ितों के लिए दान कर दिया था, जिसे उस समय की ख़बरों में प्राथमिकता दी गई जबकि तब अगर मोदी सरकार होती तो ख़बर लिखने वाला इसी बात से शुरू करता कि सरकार मुफ्त में लोगों को घर पहुँचाएगी। बकौल रवीश, गृह मंत्रालय ने जिस नोटिफिकेशन में ऐलान किया था कि श्रमिक स्पेशल चलेगी, उसमें लिखा था कि रेलवे पैसा लेगी। रेलवे गाइडलाइन तय करेगी कि टिकटों की बिक्री कैसे होगी।

यहाँ रवीश कुमार ने यह नहीं बताया कि रेलवे रुपए तो लेगी लेकिन किससे? मजदूरों से नहीं। सम्बंधित राज्य सरकारें अपने-अपने नागरिकों को घर लाने का पूरा किराया वहन करेगी। रवीश कुमार ने फेसबुक पर लिखे इस लेख में ज़रूर इस बात का जिक्र किया है कि रेलवे के प्रवक्ता के अनुसार किराया मजदूरों को नहीं, राज्य सरकारों को देना होगा। लेकिन, इसके बावजूद उन्होंने ‘द हिन्दू’ की वो ख़बर शेयर की है, जिसमें सही सूचना नहीं है।

इस ख़बर में ‘द हिन्दू’ ने लोगों के बीच भ्रम का माहौल बनाते हुए फेक न्यूज़ शेयर किया कि मजदूरों को अपने गृह राज्य जाने के लिए 50 रुपए अतिरिक्त किराया देना होगा। सोशल मीडिया पर रोहिणी सिंह जैसे पत्रकारों और सीताराम येचुरी जैसे नेताओं ने धड़ल्ले से इस ख़बर को शेयर कर के मोदी सरकार को बदनाम करने का प्रयास किया। असल में इन स्पेशल ट्रेनों के लिए आम लोगों द्वारा टिकट ख़रीदने का कोई प्रावधान ही नहीं है।

अगर राज्य सरकारें यात्रियों से रुपए वसूलती है तो इसमें मोदी सरकार का क्या दोष? ये एक अलग मुद्दा हो सकता है, अगर ऐसी स्थिति आती है तो। लेकिन, मोदी सरकार और रेलवे को बदनाम करने के लिए सब कुछ जानते हुए भी रवीश ने लिख दिया कि मज़दूर यात्रियों से किराया और 50 रुपए अतिरिक्त लिए जाएँगे। उन्होंने ‘आईटी सेल’ की रट लगाते हुए लिखा:

“आईटी सेल ही एकमात्र राजनीतिक जमात है, जो जनमत बनाता है। आप सभी आईटी सेल के लोगों से गुज़ारिश करें कि आईटी सेल मज़दूरों के हित के लिए लड़े। या फिर लालू प्रसाद के खिलाफ ट्रेंड कराए कि उन्होंने बिहार के बाढ़ पीड़ितों के लिए मुफ्त में ट्रेन चला कर रेलवे का नुकसान कर दिया। पीयूष गोयल के पक्ष में ट्रेंड कराए कि वे आर्थिक रूप से टूट चुके मज़दूरों से किराया लेकर रेलवे का फायदा कराया है। गोयल की मानवता लालू प्रसाद की मानवता से महान है।”

रवीश कुमार का प्रोपेगेंडा पोस्ट

रवीश कुमार ने आईटी सेल की रट लगाते हुए ख़ुद एक सजायाफ्ता घोटालेबाज का महिमामंडन किया और रेलवे के स्पष्टीकरण का जिक्र करते हुए भी उसको नज़रंदाज़ किया। गृह मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि ट्रेनों में सोशल डिस्टेन्सिंग से लेकर सभी नियम का पालन कराया जाएगा और 50% क्षमता ही भरी जाएगी। लेकिन क्या रवीश छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सवाल पूछेंगे, जिन्होंने कहा है कि मजदूरों का किराया राज्य सरकारों से लेना हास्यास्पद है?

शायद नहीं, क्योंकि बघेल कॉन्ग्रेस नेता हैं। सच्चाई ये है कि रेलवे ने मजदूरों और अन्य यात्रियों के लिए कम्प्लीमेंटरी मील और पीने का पानी की भी व्यवस्था की है, ख़ासकर लम्बी दूरी वाले ट्रेनों में। अलग-अलग प्रदेशों ने अपने नोडल अधिकारी तैनात किए हैं। राज्य ही अपने नागरिकों को रेलवे के पास लेकर जाएँगे, जिसके बाद उनकी यात्रा सुनिश्चित की जाएगी। रवीश कुमार ने एक बार फिर से ग़लत ख़बर फैलाई, जो उनकी आदत बन चुकी है।

राज्यपाल के कोरोना पर बयान से ममता बनर्जी नाराज, कहा- सत्ता हड़पने की कोशिश न करिए, आप सरकार का कुछ नहीं कर सकते

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल के बीच कोरोना संकट को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ को पत्र लिखकर उनकी भाषाशैली पर सवाल खड़े किए है। पत्र में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के खिलाफ राज्यपाल द्वारा प्रयोग की गई भाषा को निंदनीय बताया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ को लिखे 14 पृष्ठों के अपने जवाब में कहा कि एक राज्यपाल से एक निर्वाचित मुख्यमंत्री को इस तरह के शब्द और इस तरह की विषय-वस्तु, अभिप्राय और लहजे वाले पत्र भारत के संवैधानिक एवं राजनीतिक इतिहास में पूर्ण रूप से अभूतपूर्व हैं।

उन्होंने कहा कि मेरे और मेरे मंत्रियों तथा मेरे अधिकारियों के खिलाफ आपके शब्द अपमानजनक, असयंमित, भयादोहन करने वाले और निंदनीय बताए जा सकते हैं। ममता ने पत्र के माध्यम से आगे राज्यपाल पर उपदेश देने और संवैधानिक नियमों का खुद पालन किए बगैर उसका प्रवचन देने तथा उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल उनकी नीतियों से सहमत नहीं हो सकते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इसे उनके संज्ञान में लाने के अलावा उनके पास और कोई शक्ति नहीं है। कोरोना संकट के इस घड़ी में सत्ता हड़पने की कोशिश न करिए, आप सरकार का कुछ नहीं कर सकते है।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि इस संकट की घड़ी में सत्ता हड़पने की अपनी कोशिशों तेज करने से बाज आने की मैं आपसे विनती करती हूँ। आपको सोशल मीडिया पर अपने लगातार ट्वीट में आधिकारिक पत्र इस्तेमाल करने से दूर रहना चाहिए।

आपको बता दें कि राज्यपाल ने 24 अप्रैल को 14 पेज का एक पत्र सीएम ममता बनर्जी को भेजा था। इसमें राज्यपाल ने सीएम के पत्र के हर बिंदुओं का उल्लेख कर 37 मुद्दे लिखकर करारा जवाब भेजे थे। इसके बाद भी राज्यपाल ने एक और सीएम के नाम लिखकर ममता सरकार पर कुछ सवाल खड़े किए थे। इसके बाद से ही राज्यपाल और ममता सरकार के बीच कोरोना संकट पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

राज्यपाल धनखड़ ने शुक्रवार(1 मई, 2020) को भी ममता सरकार पर राज्य में कोरोना संक्रमितों मरीजों और मौतों के आँकड़े छिपाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी को आँकड़े छिपाने की बजाय राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरूस्त करने का काम करना चाहिए। केंद्र सरकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए धनखड़ ने पश्चिम बंगाल में खराब स्थिति की बात कही थी।

राज्यपाल धनखड़ ने ममता बनर्जी सरकार की ओर से मीडिया पर निशाना साधने पर भी सवाल खड़े किए थे। राज्यपाल ने ट्वीट कर लिखा, “चिंतित ममता बनर्जी ने मीडिया को ‘सही से बर्ताव’ करने की चेतावनी दी है। मीडिया को भय में क्यों रखना? छिपाने के लिए कुछ भी नहीं होना चाहिए।”

ओवैसी के पार्षद मुर्तजा ने पत्रकार अमीश देवगन को दी धमकी, पुलिस के साथ कर चुका है बदसलूकी

पत्रकार अमीश देवगन को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के पार्षद मुर्तजा ने धमकी दी है। अमीश ने उनसे सवाल पूछे थे, इसीलिए गुस्से में AIMIM के नेता ने ‘न्यूज़ 18’ के पत्रकार अमीश देवगन को धमकाया। अमीश ने जब उनसे पूछा कि उन्होंने पुलिस के साथ बदसलूकी क्यों की और ऐसा क्यों कहा कि पहले मंदिर को बंद कराओ, मस्जिद को नहीं- तो पार्षद ने कहा कि आप गुंडागर्दी की बाद करेंगे तो मैं भी यही बात करूँगा।

मुर्तजा ने अमीश को ‘सोशल मीडिया का गुंडा’ बताते हुए सलाह दी कि वो एंकर बन कर बात करें। जब अमीश ने पूछा कि उन्होंने पुलिसकर्मी के गिरेबान और हाथ पकड़ने की कोशिश क्यों की तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में गुंडागर्दी वाला कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। जब अमीश ने अकबरुद्दीन ओवैसी के ’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’ वाले बयान की याद दिलाई तो उन्होंने कहा कि वो उनसे सिर्फ़ उनके बारे में सवाल करें।

बाद में वो कहने लगे कि पुलिसकर्मी ने नेमप्लेट छिपाया। मोहम्मद मुर्तजा अली कहने लगे कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी तो लॉकडाउन के बाद पूजा की। मोहम्मद मुर्तजा ने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वो माफ़ी भी नहीं माँगेंगे क्योंकि पुलिस वाले ने ग़लती की है। अब इस सवाल पूछने के कारण अमीश को अलग-अलग नंबरों से कॉल आ रहे हैं। शो के दौरान ही मुर्तजा बार-देवगन का नाम पूछते रहे।

अमीश देवगन को ओवैसी के पार्षद ने धमकाया

उन्होंने धमकाया कि आपको पता नहीं है क्या आप किससे बात कर रहे हैं, आप अपने जुबान को लगाम दीजिए। उन्होंने धमकाने के अंदाज में नाम पूछा और धमकी दी। अमीश को इसके बाद कई नंबरों से कॉल आए हैं और उन्हें धमकी दी जा रही है। हालाँकि, उन्होंने कहा है कि वो किसी ने नहीं डरेंगे और सच के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे। भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी अमीश को धमकी दिए जाने की निंदा की है।

बता दें कि मुर्तजा अली का एक वायरल वीडियो में बृहस्पतिवार (अप्रैल 30, 2020) को हैदराबाद के चवन्नी नदी अली बेग में एक मस्जिद के पास अपनी ड्यूटी कर रहे दो कॉन्स्टेबल को धमकाने और ड्यूटी में बाधा डालते हुए देखा गया था। ओवैसी की ही पार्टी का वारिस पठान पहले से ही दिल्ली दंगों के मामले में कई भड़काऊ बयान देने के कारण आरोपित है।

पश्चिम बंगाल: जनता को बताया 572 मामले, केंद्र को बताया 931, CM ममता के कोरोना गणित से राज्यपाल धनखड़ नाराज़

एक बार फिर पश्चिम बंगाल की सरकार कोरोना मरीजों की संख्या को लेकर सवालों से घिर गई है। इस बार ममता बनर्जी सरकार ने राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या हेल्थ बुलेटिन में 572, जबकि उसी समय में केन्द्र सरकार को 931 बताई है। इसे लेकर प्रदेश के राज्यपाल जगदीप घनखड़ ने ममता सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही ममता सरकार पर एक बार फिर सही आँकड़ों को छिपाने के आरोप लगाए हैं।

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने शनिवार (2 मई, 2020) को इस पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बंगाल सरकार कोरोना संक्रमण के आँकड़ों पर पर्दा डाल रही है और राज्य वासियों तथा केंद्र सरकार को अलग-अलग जानकारी दे रही हैं। अपने दो ट्वीट में राज्यपाल ने लिखा, कोविड-19 संक्रमण के आँकड़ों पर पर्दा डालने के अभियान को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बंद करना चाहिए। इसे पारदर्शी रूप से साझा करें।

राज्यपाल ने ट्वीट करके राज्य सरकार के हेल्थ बुलेटिन और केंद्र सरकार को लिखी चिट्ठियों को साझा किया है। राज्यपाल के आरोपों के मुताबिक, ममता सरकार ने 30 अप्रैल तक कोरोना मरीजों की संख्या हेल्थ बुलेटिन 572, जबकि उसी दिन केन्द्र सरकार को स्वास्थ्य सचिव द्वारा भेजी गई चिट्ठी में राज्य के अंदर कोरोना मरीजों की संख्या 931 बताई गई है।

राज्यपाल जगदीप घनखड़ द्वारा ट्वीट की गई चिट्ठी में आप देख सकते हैं कि हेल्थ बुलेटिन में सरकार इस बात का दावा कर रही है कि बंगाल में 30 अप्रैल तक कोरोना पॉजिटिव मामले 572 हैं।

राज्यपाल द्वारा ट्वीट किया गया पत्र

वहीं ट्वीट में केन्द्र सरकार को लिखी गई चिट्ठी में आप देख सकते हैं कि पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य ने केंद्र सरकार को राज्य में 30 अप्रैल तक कोरोनो मरीजों की संख्या 931 बताई है। साथ ही विस्तार से राज्य के ग्रीन, ओरेंज और रेज जोन में आने वाले जिलों के नाम भी दिए गए हैं। इसे लेकर ही राज्यपाल ने ममता बनर्जी को पारदर्शिता बरतने की नसीहत दी है। राज्यपाल ने सवाल करते हुए लिखा कि आखिर आँकड़ों में यह विषमता क्यों है? यह सामंजस्य नहीं होने का परिणाम है।

राज्यपाल द्वारा ट्वीट किया गया केन्द्र सरकार को लिखा पत्र

आपको बता दें कि इससे पहले भी राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। राज्यपाल ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि निःशुल्क राशन गरीबों के लिए हैं, तिजोरियों में बंद करने के लिए नहीं है। धोखाधड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

धनखड़ ने कहा था कि बंगाल में लॉकडाउन का पालन कराने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर विचार होना चाहिए। दरअसल, बंगाल के कई इलाकों में मुफ्त राशन वितरण में भारी अनियमितताएँ बरते जाने की खबरें सामने आई थीं। इतना ही नहीं पहले भी ममता सरकार पर कोरोना मरीजों की संख्या को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा: मस्जिद के सामने इफ्तार पार्टी आयोजित कर रहा पप्पू और मौसम धराया, 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

देश में जारी लॉकडाउन के बीच सभी प्रकार के धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों पर प्रतिबंध है, साथ ही सरकार ने रमजान के बीच लोगों से घरों में ही नमाज अदा करने की अपील की है। इसके बाद भी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में लॉकडाउन के नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार करते हुए 19 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (मई 1, 2020) की शाम को ग्रेटर नोएडा के मोहल्ला चौथइया पट्टी में स्थित जामा मस्जिद के सामने पप्पू नाम के एक युवक ने रमजान माह में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। इसके बाद लॉकडाउन के नियमों की अनदेखी करते हुए इफ्तार पार्टी में काफी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इतना ही नहीं, पार्टी में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ाई गईं।

इस बात की जानकारी जैसे ही जेवर पुलिस को हुई, वह तत्काल टीम के साथ मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके से इफ्तार पार्टी के आयोजक पप्पू और मौसम नाम के व्यक्ति को करीब शाम 7 बजे गिरफ्तार कर लिया। साथ ही पुलिस ने पूछताछ के बाद इप्तार पार्टी में शामिल होने वाले 19 लोगों के खिलाफ में लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस उपायुक्त (जोन तृतीय) राजेश कुमार सिंह ने बताया कि थाना जेवर पुलिस को सूचना मिली कि मोहल्ला चौथाइया पट्टी में जामा मस्जिद के सामने पप्पू इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रहा है। सूचना पर पहुँची जेवर पुलिस ने पप्पू तथा मौसम को गिरफ्तार कर लिया, जबकि इस मामले में 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। साथ ही अन्य फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है।

इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, असम के लखीमपुर और कर्नाटक के कोलार की मस्जिदों में लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। इन सभी के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया है।

आपको बता दें कि कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मरीजों की संख्या से चिंतित सरकार ने तीसरी बार लॉकडाउन की अवधि को बढ़ा दिया है, जो कि 17 मई तक लागू रहेगा। इससे पहले योगी सरकार ने प्रदेश के धर्मगुरुओं से बात करते हुए कहा था कि हम आम तौर पर पूजा के लिए मंदिर और नमाज के लिए मस्जिद जाते हैं, लेकिन पूजा-नमाज घर से भी की जा सकती है, क्योंकि आज सबसे अधिक जान बचाना जरूरी है।

इसके बाद धर्मगुरुओं ने लॉकडाउन के चलते लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और घरों में रहने की अपील की थी। साथ ही रमजान के महीने में घरों में ही नमाज अदा करने और लोगों से घरों में रहकर ही परिवार के साथ इफ्तार करने की अपील भी की थी, लेकिन इन सब के बाद भी कुछ कट्टरपंथी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

ताहिर हुसैन को कोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज: दिल्ली दंगो और अंकित शर्मा हत्या का है आरोपित

दिल्ली हिंदू विरोधी हिंसा के मामले में आरोपित और आम आदमी पार्टी से निष्कासित पूर्व निगम पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने शनिवार को खारिज कर दिया है। इसके बाद अब ताहिर हुसैन को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। दरअसल ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस ने आईबी अंकित शर्मा की हत्या और दिल्ली हिंसा में संलिप्तता के चलते गिरफ्तार किया गया था।

दरअसल, अपनी जमानत याचिका में ताहिर हुसैन ने कहा था कि वो निर्दोष है। दिल्ली हिंसा में उसका हाथ नहीं है और पुलिस के पास उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत भी नहीं हैं। पुलिस उसे गलत तरीके से फँसा रही है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के खिलाफ कठोर अवैध गतिविधियाँ अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया है।

आपको बता दें कि ताहिर हुसैन पर आइबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या में शामिल होने के साथ-साथ, दिल्ली में हिंसा भड़काने, साजिश रचने समेत कई अन्य मामले दर्ज किए गए हैं। इससे पहले ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हिंसा मामले में 5 मार्च को गिरफ्तार किया था। दरअसल ताहिर हुसैन अपने वकील के साथ राऊज एवेन्यू कोर्ट में मुँह पर मास्क लगाए सरेंडर करने के लिए पहुँचा था, लेकिन पहले से वहाँ मौजूद दिल्ली पुलिस के विशेष जाँच दल ने गिरफ्तार कर लिया था।

चश्मदीदों के अनुसार, उसकी इमारत में करीब तीन हजार दंगाई जमा थे। वहॉं से हिंदुओं को निशाना बना पत्थरबाजी हुई। पेट्रोल बम फेंके गए। गोलियॉं चलाई गई। उसकी इमारत से पत्थरों और पेट्रोल बम का जखीरा बरामद किया गया था। शुरुआत में आम आदमी पार्टी ने उसका बचाव करने की कोशिश की, लेकिन, जब एक के बाद एक सबूत सामने आते गए तो निलंबित कर आम आदमी पार्टी ने उससे पल्ला झाड़ने की कोशिश की।

ताहिर हुसैन मामले में कोर्ट के आदेश की कॉपी

उल्लेखनीय है कि सीएए, एनआरसी विरोध के नाम पर 23-24 फरवरी को दिल्ली में शुरू हुई हिंदू विरोधी हिंसा में 53 लोगों ने अपनी जान गँवा दी थी। इस हिंसा में 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस दौरान दंगाइयों ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में सरकारी और निजी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुँचाया था।

हिंसक भीड़ ने मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूँक दिया था और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया था। इस हिंसा मे राजस्थान के सीकर के रहने वाले दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की गोली लगने से मौत हो गई थी और डीसीपी और एसीपी सहित कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वहीं आईबी में कार्यरत अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश को नाले में फेंक दिया गया था।

एंटोनिया माइनो से खुल कर चर्चा | Nitin Rivaldo in candid conversation with Antonia Maino

इस ‘व्यंग्य साक्षात्कार’ में एंटोनिया माइनो ने कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी, पालघर समेत अपनी सेकुलर विचारधारा पर बातचीत की।

पूरी वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

आरोग्य सेतु ऐप प्राइवेसी के लिए ख़तरा, लोगों की जासूसी करता है: राहुल गाँधी के आरोप का पात्रा ने दिया जवाब

जहाँ एक तरफ केंद्र सरकार ने जन-जन को जागरूक करने, उन तक पहुँचने और कोरोना वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए ‘आरोग्य सेतु ऐप’ जारी किया है, राहुल गाँधी और कार्ति चिदंबरम सहित अन्य नेताओं को ये रास नहीं आ रहा है। राहुल गाँधी ने तो यहाँ तक कह डाला कि ये एक जटिल सर्विलांस सिस्टम है, जो प्राइवेसी का हनन करता है, नागरिकों की जासूसी करता है। उन्होंने दावा किया कि ये संस्थागत निरीक्षण के अभाव में डेटा प्राइवेट कंपनियों तक जा रही है।

बकौल पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष, ‘आरोग्य सेतु ऐप’ से लोगों के डेटा और प्राइवेसी को लेकर चिंताएँ खड़ी हो गई हैं। उन्होंने माना कि तकनीक का इस्तेमाल करके समस्याओं को सुलझाया जा सकता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि सरकार इसका फायदा उठा कर लोगों की अनुमति लिए बिना ही उन्हें ट्रैक करने लगे, उनकी जासूसी करने लगे। हालाँकि, अपने आरोपों को साबित करने के लिए राहुल ने कोई सबूत नहीं दिए। इसी तरह का हंगामा आधार को लेकर किया गया था

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गाँधी के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने एक बार फिर से ‘आरोग्य सेतु ऐप’ की आलोचना की है। उन्होंने बताया कि सरकार न जाने कितनी बार ये स्पष्ट कर चुकी है कि इस एप्लीकेशन का सर्विलेंस से कोई लेना-देना नहीं है और ये एक नागरिक के लिए उसके पर्सनल बॉडीगार्ड का काम करता है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के इस्तेमाल से भारत कोरोना से निपटने में सक्षम होगा।

संबित पात्रा ने कहा कि सब कुछ जानते-समझते हुए भी कॉन्ग्रेस पार्टी सभी प्रकार के अफवाह और फेक न्यूज़ फैला रही है क्योंकि आपदा के वक़्त भी अपनी राजनीति करना कॉन्ग्रेस की पुरानी आदत है। बता दें कि सभी पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर एम्प्लाइज के लिए इस ऐप को अनिवार्य कर दिया गया है। कॉन्ग्रेस नेताओं ने राहुल गाँधी का समर्थन करते हुए आरोग्य सेतु को कोर्ट में चैलेन्ज करने की भी बात कही।

बता दें कि जल्द ही सरकार देश के करीब 90 करोड़ लोगों तक पहुँचने वाली है और सिर्फ स्मार्टफोन्स पर ही नहीं, बल्कि बटन वाले फीचर फोन्स तक भी इस ऐप को पहुँचाने की तैयारी की जा रही है। ये ऐप कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में सरकारी दिशानिर्देशों और मेडिकल सलाहों को जनता तक पहुँचाने का सबसे बड़ा माध्यम साबित हो रहा है। लोगों को सभी भाषाओं में कॉल कर के जानकारी दी जाएगी।

बता दें कि आरोग्य सेतु ऐप को मात्र 13 दिन में 50 मिलियन लोगों ने डॉउनलोड कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया था। भारत सरकार द्वारा लॉन्च किए गए इस ऐप को डाउनलोड करने की सलाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संबोधन में दी थी।

पश्चिम बंगाल: कम और घटिया राशन दे रहा था डीलर हलीम शेख, लोगों ने घर घेरा, ममता बनर्जी के खिलाफ लगे नारे

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रही तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार कोरोना वायरस से निपटने में असफल रही है। मुर्शिदाबाद में ख़राब राशन मिलने के बाद लोगों ने हंगामा किया और सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाजी करने लगे। वायरल हुए वीडियो में लोग मारामारी करते हुए और कुर्सी उठापटक करते दिख रहे हैं। लोगों का कहना है कि पीडीएस प्रणाली के तहत उन्हें काफ़ी ख़राब गुणवत्ता वाला राशन दिया जा रहा है।

लोगों का ये भी कहना था कि ममता के पश्चिम बंगाल में न सिर्फ़ घटिया राशन दिया जाता है बल्कि काफ़ी कम मात्रा में भी दिया जाता है। लोगों ने पुलिस के सामने ही तोड़फोड़ मचाई। बाद में पुलिस ने किसी तरह मामले को काबू किया। सालार क्षेत्र में हुए इस हंगामे के दौरान सैकड़ों लोगों ने एक राशन डीलर के घर को घेर लिया। उनकी माँग थी कि सरकार राशन प्रणाली को दुरुस्त करे। भीड़ ने राशन डीलर हलीम शेख के घर की कई चीजें तोड़ डालीं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान भारी पत्थरबाजी भी हुई। आगजनी भी की गई। जनता का आरोप था कि शेख राशन वितरण में काफ़ी गड़बड़ियाँ करता है और जितना मिलना चाहिए, उसका आधा राशन ही देता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि सभी कार्डधारियों को पाँच-पाँच किलो राशन दिया जाएगा। राज्य के कई हिस्सों से राशन वितरण में गड़बड़ियों की ख़बर आई है। खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने दावा किया है कि वो कड़ी नज़र रख रही हैं।

उन्होंने कहा कि कोई भी राशन डीलर गड़बड़ियों में लिप्त पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ न सिर्फ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी बल्कि उसे सजा भी मिलेगी और साथ ही लाइसेंस कैंसल कर दिया जाएगा। अब तक अनियमितताओं के मामले में पूरे राज्य में 283 राशन डीलरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा चुकी है। कई मामलों में लाइसेंस रद्द किए गए हैं। पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में इस कारण तनाव व्याप्त है।

इससे पहले शुक्रवार (अप्रैल 29, 2020) को काकद्वीप के नारायणपुर, बीरभूम के लाभपुर और मुर्शिदाबाद के झलांगी से सामने आई थी। मंत्री मलिक का कहना है कि भाजपा और कॉन्ग्रेस हिंसा भड़का रही है जबकि उनकी पार्टी इस मामले में राजनीति नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 21,000 डीलर और 9.96 करोड़ लोग डायरेक्ट राशन योजना से लाभान्वित हुए हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राशन चोरी की जा रही है।

नदिया हबीबपुर में एक ट्रक द्वारा राशन समाग्री को चुरा कर कहीं ले जाने की बात सामने आई है। चावल और अन्य राशन से भरा वो ट्रक स्थानीय डीलर के पास आया था, जिसे कृष्णा राइस मिल भेजा जा रहा है। ग्रामीणों को इसका पता लग गया और उन्होंने इसे बीच में रोक कर ही विरोध प्रदर्शन किया। शुक्रवार की रात उस राइस मिल के सामने विरोध प्रदर्शन हुआ। तृणमूल कॉन्ग्रेस नेताओं ने इस पर कमेंट करने से इनकार किया है।

इससे पहले एक व्यक्ति ने बंगाल के स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोली थी। तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि उसने कोरोना वायरस के मरीजों से जुड़े आँकड़े में छेड़छाड़ किया है और टेस्टिंग में भी कमी कर दी है। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार राज्य में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई को कमजोर कर रही है। उन्होंने सीएम ममता से आग्रह किया था कि मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति छोड़ कर अब पश्चिम बंगाल को बचाने की ओर ध्यान देना चाहिए।