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…अब बुलंदशहर मंदिर में 2 साधुओं की निर्मम हत्या: सोते हुए तलवार से काट डाला, CM योगी का सख्त कार्रवाई का निर्देश

महाराष्ट्र के पालघर के बाद उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में आज (अप्रैल 28, 2020) दो साधुओं का शव खून से लथपथ बरामद हुआ। घटना अनूपशहर के गाँव पगोना में घटी। यहाँ स्थित शिव मंदिर के परिसर में सो रहे दो साधुओं पर सोमवार देर रात धारदार हथियार से वार कर इनकी हत्या की गई। आरोपित युवक की पहचान मुरारी उर्फ राजू के रूप में हुई है। आरोपित को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया है। 

बताया जा रहा है कि आरोपित आदतन नशेड़ी है और कुछ दिन पहले उसकी बहस एक चिमटे को लेकर दोनों साधुओं से हुई थी। उस समय दोनों साधुओं ने उसे जमकर डाँटा था। जिसके कारण माना जा रहा है कि उसी ने साधुओं की हत्या की। इसके अलावा कुछ ग्रामीणों ने उसे तलवार हाथ में ले जाते हुए भी देखा था। इसलिए जैसे ही साधुओं की हत्या की बात फैली, वैसे ही ग्रामीणों ने उस पर शक जाहिर किया और उसे पकड़वाकर पुलिस को दे दिया।

जानकारी के अनुसार, बुलंदशहर स्थित अनूपशहर कोतवाली के गाँव पगोना में स्थित शिव मंदिर में पिछले करीब 15 वर्षों से साधु जगनदास (55 वर्ष) और सेवादास (35 वर्ष) रहते थे। दोनों साधु मंदिर में रहकर पूजा-अर्चना करते थे। ऐसे में जब मंगलवार सुबह ग्रामीण मंदिर में पहुँचे तो उन्हें साधुओं के खून से लथपथ शव पड़े मिले। इसे देखकर कोहराम मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर पर पहुँच गए।

एसएसपी संतोष कुमार ने बताया कि इस मामले में गाँव के ही एक युवक राजू को नशे की हालत में पुलिस ने घटनास्थल से करीब 2 किलोमीटर दूर दूसरे गाँव से अर्द्धनग्न अवस्था में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। बताया गया है कि 2 दिन पूर्व आरोपी युवक ने साधुओं का चिमटा गायब कर दिया था, जिसको लेकर साधुओं ने उस पर अपना गुस्सा जताया था। इसलिए आशंका है कि इसी बात से नाराज होकर उसने दोनों साधुओं की हत्या की। पुलिस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर संज्ञान ले लिया है। उन्होंने जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुँच कर घटना के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट देने और दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

याद दिला दें कि बीते 17 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर में भी दो साधुओं की हत्या की गई थी। यहाँ 200 लोगों की भीड़ ने उन्हें अपना निशाना बनाया था। इनके साथ एक ड्राइवर की भी हत्या कर दी गई थी।

साढ़े 12 घंटे तक मुंबई पुलिस की अर्नब से पूछताछ: कॉन्ग्रेस नेता ने गोस्वामी की जाति पर किया कॉमेंट

मुंबई पुलिस ने ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी से क़रीब 12:30 घंटों तक लगातार पूछताछ की। मंगलवार (अप्रैल 27, 2020) को दोनों चैनलों पर आने वाले अपने नियमित कार्यक्रमों में भी अर्नब उपस्थित नहीं हो सके। हालाँकि, पूछताछ के बाद वो फिर से चैनल पर दिखे और सोनिया गाँधी से सवाल पूछे। पूछताछ के बाद अर्नब गोस्वामी ने कहा कि वो अपने बयान पर अब भी कायम हैं।

अर्नब ने कहा कि उन्होंने पुलिस का पूरा सहयोग किया है और अगर उन्हें फिर से बुलाया जाता है तो भी वो जाएँगे। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें गिरफ़्तार होने का भी डर नहीं है। अर्नब गोस्वामी ने कहा कि मुद्दा वो नहीं हैं बल्कि असली मुद्दा पालघर में दो साधुओं सहित तीन लोगों की भीड़ द्वारा निर्मम हत्या का है। इस दौरान अर्नब के वकील सुजय कान्तवाला भी उनके साथ मौजूद रहे। अर्नब ने पूछताछ के दौरान कहा कि उन्होंने जो भी बयान दिया है, वो सच है।

अर्नब गोस्वामी ने कहा कि उनसे जो भी सवाल किए गए, उन सबका जवाब उन्होंने दिया और साथ ही अपने बयानों की सत्यता साबित करने के लिए सारे सबूत भी पेश किए। उन्होंने अपने वकील और मुंबई पुलिस का आभार जताते हुए कहा कि सच्चाई की अंततः जीत होगी। उनके वकील सुजय ने भी कहा कि अर्नब ने जाँच में पूर्ण सहयोग दिया है। पूछताछ के बाद स्टूडियो लौटते हुए गोस्वामी ने ‘सोनिया स्पीक अप नाउ’ टैग के साथ न्यूज़ शो में एंकरिंग की।

इधर कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने भी अर्नब गोस्वामी को भला-बुरा कहा और इस पूरी कार्रवाई में जाति घुसा दी। उन्होंने अर्नब को ‘गोस्वामी जी’ कह कर सम्बोधित करते हुए ट्विटर पर लिखा कि अब वो ज़माना गया, जब किसी खास जाति का होने से प्रिविलेज मिल जाता था। उन्होंने अर्नब गोस्वामी के ‘थाने में हाजिरी लगाने’ पर ख़ुशी जताई। उदित राज ने कहा कि अब देश में मनुस्मृति नहीं बल्कि ‘बाबासाहब का संविधान’ चलता है।

इधर ‘रिपब्लिक टीवी’ ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि अर्नब गोस्वामी के बार-बार आग्रह करने के बाद भी उनके और उनकी पत्नी सामिय गोस्वामी पर हमला करने वाले दोनों कॉन्ग्रेस नेताओं को ₹15,000 पर जमानत दे दी गई। अर्नब और उनकी पत्नी पर किया गया हमला कॉन्ग्रेस की सोची-समझी साजिश थी और मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज करने से मना कर दिया। अर्नब गोस्वामी ने आरोप लगाया था कि मुंबई पुलिस उन पर हुए हमलों के मामले में कॉन्ग्रेस की साज़िश को कवर-अप करने में जुट गई है। 

4 दिनों तक गैंगरेप करते रहे शाहनवाज, अजहर, बरियान, सुफियान और पीटर खान: गुमला पुलिस तलाश में

झारखण्ड के गुमला में एक महिला के साथ गैंगरेप का मामला समाने आया है। ये घटना सदर थाना क्षेत्र का है, जहाँ 5 युवकों ने मिल कर एक विवाहिता का अपहरण कर लिया। विवाहिता को 4 दिनों तक बँधक बना कर रखा गया और इस दौरान गैंगरेप किया जाता रहा। जब परिजनों को इस बात की सूचना मिली तो किसी तरह पीड़िता को दरिंदों के चंगुल से छुड़ाया गया। गुमला पुलिस ने पाँचों आरोपितों के ख़िलाफ़ नामजद केस दर्ज किया है।

फ़िलहाल सभी आरोपित फरार हैं, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है। ये घटना अप्रैल 17, 2020 शाम 6:30 की है। गुमला में महिला घर से 200 मीटर की दूरी पर शौच करने गई थी, तभी पाँच युवक उसे वहाँ से जबरन उठा कर ले गए। पीड़िता के साथ चार दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म किया जाता रहा। साथ ही वो धमकी भी दे रहे थे कि अगर किसी को कुछ पता चला तो जान से मार डाला जाएगा। पीड़िता को एक घर में बंद कर के रखा गया था।

परिजनों को जब इस बात की सूचना मिली को पीड़ित महिला को बचाया गया। लेकिन लोकलाज और बदमाशों के डर के कारण परिजन चुप रहे। पुलिस में भी शिकायत नहीं दर्ज कराई गई थी। लेकिन रविवार (अप्रैल 26, 2020) को पीड़िता के बयान के आधार पर केस दर्ज किया गया। शाहनवाज खान, बरियान खान, अजहर खान, सुफियान खान और पीटर खान के ख़िलाफ़ मामल दर्ज किया गया। आरोपितों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज होने की सूचना मिलते ही वो भाग निकले।

पुलिस उनकी तलाश के लिए छापेमारी कर रही है। पीड़िता ने बताया कि शाहनवाज ने पिस्टल के दम पर उसे अगवा किया था। वो भागते-भागते गिर गई थी। शाहनवाज और उसके दोस्त पीड़िता को स्कूटी पर बिठा कर दूर ले गए। उसे अजहर के घर में रखा गया था। इसके तीन दिन बाद वो लोग पीड़िता को जंगल में ले जाकर मार डालने की बातें भी कर रहे थे। परिजनों के वहाँ पहुँचने पर सब भाग निकले।

‘दैनिक भास्कर’ के राँची संस्करण में प्रकाशित ख़बर

जाते-जाते शाहनवाज ने धमकी दी थी कि अगर पीड़िता ने मुँह खोला तो घरवालों को गोली मार दी जाएगी। पीड़िता ने कहा कि अब उसे मरने का डर नहीं है और वो आरोपितों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाना चाहती है। उसने कहा कि वो दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए ही पुलिस के पास आई है।

उधर आज ही उत्तर प्रदेश के शामली से एक ख़बर आई, जहाँ एक मुस्लिम युवक द्वारा एक हिन्दू लड़की से छेड़खानी के बाद उसके दोनों भाइयों को जख्मी कर दिया गया। जहाँ तक झारखण्ड की बात है, हाल के दिनों में वहाँ हिन्दुओं के ख़िलाफ़ अपराध की घटनाओं की कई ख़बरें आई हैं। हाल ही में राँची की ऋचा भारती को मुस्लिमों और स्थानीय पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने की खबर आई थी।

कॉन्ग्रेस MLA के पति सहित 3 वरिष्ठ IRS अधिकारियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट: टैक्स के नाम पर रचा था ‘डर का माहौल’

सोमवार (अप्रैल 27, 2020) को ‘द सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज’ ने तीन वरिष्ठ आईआरएस अधिकारियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की। तीनों अधिकारियों के ख़िलाफ़ नियमों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है और उन्हें दी गई जिम्मेदारियों को वापस ले लिया गया है। बता दें कि इन्होने ‘FORCE’ नामक एक डॉक्यूमेंट सार्वजनिक कर दिया था, जिसने 25 अप्रैल को मीडिया में जारी किया गया। इस डॉक्यूमेंट को तैयार करने में इन तीनों का अहम रोल है।

इनमें से एक अधिकारी का नाम प्रशांत भूषण है, जो आईआरएस के जनरल सेक्रेटरी हैं और उनकी पत्नी बेगूसराय से कॉन्ग्रेस विधायक हैं। आईआरएस के जॉइंट सेक्रेटरी प्रकाश दूबे के ख़िलाफ़ भी चार्जशीट दायर की गई है। इन दोनों के अलावा एक संजय बहादुर के ख़िलाफ़ भी जाँच शुरू की गई है, जो 1989 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं। उन्हें नार्थ ईस्ट रीजन में प्रिंसिपल डायरेक्टर, इन्वेस्टीगेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इन तीनों अधिकारियों के पास 3 दशक से भी अधिक का अनुभव है लेकिन उन्होंने 50 जूनियर अधिकारियों को बरगला कर ये रिपोर्ट तैयार करवाई। उन्होंने अपने पद का दुरूपयोग किया और नियमों के ख़िलाफ़ जाते हुए काम किया। नियमों के मुताबिक, जूनियर अधिकारियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट को पहले सरकार के पास भेजा जाना चाहिए था, जिस पर सरकार विचार करती। बजाय इसके तीनों वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे सार्वजनिक कर जनता के बीच डर का माहौल बनाने की कोशिश की।

जब देश कोरोना संक्रमण आपदा से जूझ रहा है, ऐसे में पब्लिक के मन में भय का माहौल बनाने वाले इन अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी। बता दें कि इस डॉक्यूमेंट में टैक्स सिफारिशें की गई थीं। इसे आईआरएस एसोसिएशन के ट्विटर हैंडल से डाला गया था। यह ट्वीट आने से कुछ देर पहले ‘द प्रिंट’ ने इस सम्बन्ध में अधिकारियों के बयान के साथ ख़बर पब्लिश की थी, जिसे आईआरएस एसोसिएशन ने रीट्वीट किया था। इसके कुछ देर बाद पूरा डॉक्यूमेंट ही डाल दिया गया।

‘द प्रिंट’ इससे पहले भी वित्तीय मामलों में ऐसे कारनामे कर चुका है। ‘दी प्रिंट’ ने अपनी एक खबर में बताया था कि वित्त मंत्री ने मुंबई के उद्योगपतियों का अपमान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी प्रिंट की यह खबर ट्वीट करते हुए पूछा था कि क्या यह कोई मजाक है? उन्होंने कहा था कि अगर यह मजाक न होकर गंभीर है तो फिर यह बदनाम करने के लिए और दुर्भावनापूर्ण है।

घर में घुस लड़की से छेड़खानी, भाइयों को घोंपा चाकू: इदरीश, शाहरुख़, फारुख शामली (UP) में गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और शामली में छेड़खानी की घटनाओं के कारण हिन्दू-मुस्लिम तनाव का पुराना इतिहास रहा है। अब फिर से एक मुस्लिम युवक द्वारा एक हिन्दू लड़की से छेड़खानी के बाद उसके दोनों भाइयों को जख्मी कर दिया गया। शामली में दबंग इदरीश ने एक हिंदू लड़की के साथ छेड़छाड़ की। पीड़िता ने जब अपने दोनों भाइयों को ये बात बताई तो वो सीधा आरोपित के पास पहुँच गए। लेकिन इदरीश ने दोनों पर चाकू से हमला बोल दिया।

ये मामला कांधला थाना क्षेत्र के कनियान गाँव का है। पीड़िता के परिजन खेतों में गेहूँ की कटाई के लिए गए थे और वो घर में अकेली थी। इसका फायदा उठा कर दबंग युवक इदरीश उसके घर में घुस गया और उसने छेड़खानी शुरू कर दी। युवती ने जब इसका विरोध किया तो उसने जान से मार डालने की धमकी भी दी। इसके बाद जब युवती के परिजन वापस लौटे तो पीड़िता ने आपबीती सुनाई, जिसके बाद वो गुस्सा हो गए।

ऑपइंडिया से बात करते हुए कांधला थाना क्षेत्र के एसएचओ करमवीर सिंह ने बताया कि इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शिकायतकर्ता की तहरीर पर शाहरुख़, फारुख और इदरीश नामक आरोपितों को गिरफ़्तार किया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में आईपीसी की धारा 452 (बिना अनुमति घर में घुसना, चोट पहुँचाने के लिए हमले की तैयारी, हमला या गलत तरीके से दबाव बनाना) सहित अन्य मामलों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

जब युवती के दोनों भाई इदरीश के पास पहुँचे थे तो उसने साथियों के साथ मिल कर उनके पेट में चाकू घोंप दिया था। इस घटना के बाद गाँव में हड़कंप मच गया और हिन्दू-मुस्लिम तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस बल ने मौके पर पहुँच कर स्थिति को सम्भाला। इदरीश ने 5 महीने पहले भी इसी युवती के साथ छेड़छाड़ की थी। उसने दोबारा ऐसी हरकत की है। घायलों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। उनकी हालत गंभीर है।

छेड़खानी कितनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकती है, यह 2013 में हुए दंगों से समझा जा सकता है। सितम्बर 2013 में केवल गाँव में एक छेड़खानी की घटना के बाद शाहनवाज नामक व्यक्ति की हत्या हुई थी, जिसके बाद सचिन और गौरव नामक दो युवकों को मुस्लिम भीड़ द्वारा मार डाला गया था। फिर एक मंदिर के पास महिला श्रद्धालुओं के साथ खुलेआम छेड़खानी की गई थी। इसके बाद शाहीन चौक की एक मस्जिद में भारी भीड़ जुटी थी, जिसने दंगों को हवा दी थी। यह आग इतनी फैली थी कि मंदिरों में सरेआम तोड़फोड़ की गई। इसके बाद भाजपा ने पूरे जिले में बंद की घोषणा की थी।

हाल ही में शामली जिले में लॉकडाउन का उल्लंधन कर पंचायत में हिस्सा लेने के आरोप में 28 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। बताया जा रहा है कि ये पंचायत इसलिए बुलाई गई थी, ताकि गाँव के एक शख्स को लेकर यह तय किया जा सके कि उसका बहिष्कार किया जाए या नहीं। नवम्बर 2018 में उत्तर प्रदेश एटीएस (आतंक-रोधी दस्ता) ने शामली से ही खालिस्तानी आतंकवादियों के मॉड्यूल को हथियार सप्लाई करने वाले आरोपितों को गिरफ़्तार किया था। 

केजरीवाल के मंत्री इमरान हुसैन ने उड़ाई लॉकडाउन की धज्जियाँ, पुलिस से बहस का वीडियो वायरल

दिल्ली में लॉकडाउन के बीच सरकार के मंत्री ही इसकी धज्जियां उड़ाते नज़र आए। दिल्ली के सदर बाजार का वीडियो सामने आया है, जिसमें अरविन्द केजरीवाल सरकार में मंत्री इमरान हुसैन लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन और पुलिस से झड़प करते दिख रहे हैं। हुसैन बल्लीरामन से विधायक हैं। दरअसल, वो अपने कार्यकर्ताओं के साथ गाड़ियों का काफिला लेकर घूम रहे थे। एसएचओ अशोक कुमार ने जब आपत्ति जताई तो मंत्री आग-बबूला हो गए।

लॉकडाउन में इमरान हुसैन ने की दिल्ली पुलिस से बहस

मंत्री के साथ वहाँ उपस्थित लोगों ने भी पुलिस से बहस की। पुलिस ने जब उनसे कहा कि वो उन्हें अपना काम करने दें तो मंत्री ने कहा कि वो किसी के भी काम में दखलअंदाज़ी नहीं कर रहे हैं। पुलिस ने भी मंत्री को समझा दिया कि वो मंत्री हैं, अपना काम करें लेकिन पुलिस के काम में दखलंदाज़ी न करें। पुलिस को इस बात से आपत्ति थी कि मंत्री अपने काफ़ी सारे समर्थकों के साथ घूम रहे थे। पुलिस ने उनसे पूछा कि आप कितने लोगों को लेकर घूम रहे हैं?

पुलिस इस मामले में इमरान हुसैन के के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने जा रही है। उनकी पुलिस से नोंकझोंक का वीडियो भी वायरल हो गया, जो सोमवार (अप्रैल 27, 2020) की शाम 6 बजे का है। हुसैन पर सोशल डिस्टन्सिंग का पालन न करने और पुलिस के काम में बाधा डालने का आरोप लगाया जा सकता है। मंत्री जहाँ-जहाँ से गुजर रहे थे, वहाँ लोगों की भी भीड़ लग रही थी। वो दिल्ली सरकार में ‘फूड एंड सिविल सप्लाइज’ विभाग के मंत्री हैं।

पहले से ही विवादित रहे हैं इमरान हुसैन

कहा जा रहा है कि मंत्री के साथ 25 लोगों का काफिला था, जिन्हें वो साथ लेकर चल रहे थे। बता दें कि जुलाई 2019 में इमरान हुसैन दिल्ली सरकार के सबसे विवादित चेहरों में से एक हैं। चाँदनी चौक स्थित हौजकाजी के एक मंदिर में पत्थर बरसाने और तोड़ फोड़ करने वाले कट्टरपंथियों को आम आदमी पार्टी के विधायक इमरान हुसैन का समर्थन होने की बात सामने आई थी।

इस घटना के दौरान मूर्तियों को विखंडित कर दिया गया था और कट्टरपंथियों ने अल्लाहु अकबर के नारे भी लगाए थे। चश्मदीदों के मुताबिक विधायक हुसैन भी इस सांप्रदायिक भीड़ के समर्थन में मौके पर पहुॅंचे थे। अगस्त 2019 में जब वो विधायक पंकज पुष्कर के साथ राशन दुकानों की जाँच के लिए गए थे तो विधायक के साथ ही मारपीट की ख़बर आई थी। राशन की दुकानवाले और उनके परिजनों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी थी।

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में चुनौतियाँ और प्रगति: जेएनयू ने आयोजित किया 2 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने कोरोना वायरस से निपटने के उपायों पर चुनौतियों और हाल के स्थितियों पर चर्चा करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें दुनिया भर से करीब 1000 से अधिक लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया, जिनमें से सैकड़ों ने ऑनलाइन मोड के माध्यम से वेबिनार में सफलतापूर्वक भाग लिया।

इस बैठक का उद्घाटन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार ने द्वारा किया गया, उन्होंने पहल की प्रशंसा करते हुए आधुनिक शिक्षा प्रणाली में डिजिटल माध्यम की भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो. कुमार ने जोर दिया कि शिक्षा प्रणाली के डिजिटलीकरण से कोरोना के बाद के समय में बहुत लाभ मिलेगा और JNU इसका नेतृत्व करेगा, जो कि सभी तक शिक्षा पहुँचाने का एक अच्छा तरीका होगा।

आयोजन समिति में संयोजक के तौर पर जेएनयू के मॉलिक्यूलर मेडिसिन के विशेष केन्द्र से प्रो. गोवर्धन दास, कम्प्यूटेशनल और एकीकृत विज्ञान स्कूल के डॉ. अर्नब भट्टाचार्य, समन्वयक के तौर पर जेएनयू के कम्प्यूटर और तंत्र विज्ञान के डॉ. सौरभ कुमार शर्मा ने दो दिन का वेबिनार के द्वारा व्याख्यान सुनिश्चित किया। चीन, इटली, अमेरिका और भारत जैसे देशों सहित दुनिया भर के प्रमुख वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के लक्षणों के बारे में बताने के साथ इसे रोकने के उपायों से संबंधित अपने शोध प्रस्तुत किए।

25 अप्रैल को वेबिनार के पहले दिन के पहले वक्ता जेएनयू के मॉलिक्यूलर मेडिसिन के विशेष केंद्र से प्रो. गोवर्धन दास थे। उन्होंने बीसीजी वैक्सीन पर अपने चल रहे शोध पर चर्चा की जो कि कोरोना वायरस के वर्तमान प्रकोप से निपटने के लिए प्रभावी हो सकता है। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में डॉ. अर्नब भट्टाचार्य के समूह द्वारा किए गए कुछ दिलचस्प डेटा विश्लेषण प्रस्तुत किए। उसके बाद ICMR-NITM के निदेशक देवप्रसाद चट्टोपाध्याय ने महामारी का मुकाबला करने के लिए पारंपरिक चिकित्सा दृष्टिकोण पर चर्चा की।

चीन के शंघाई से प्रोफेसर युफांग शी एक वक्ता के रूप में वेबिनार में शामिल हुए और कोरोना वायरस के रोगियों में प्रतिरोधक क्षमता को लेकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे चीन ने कोरोना वायरस महामारी को काबू में किया और विशेष रूप से लॉकडाउन के महत्व को भी समझाया।

जेएनयू के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के प्रोफेसर अरुण खरात ने कोरोनो वायरस महामारी के भारतीय परिदृश्य और लगातार बढ़ रहे इसके से प्रभाव को रोकने के संभावित उपायों पर चर्चा की। उन्होंने भारत के भीतर और दूसरे देशों में कोरोना वायरस के खिलाफ किए जा रहे प्रयासों के तुलनात्मक अध्ययन पर भी चर्चा की। इसके बाद जेएनयू के स्कूल ऑफ कम्प्यूटेशनल और एकीकृत विज्ञान स्कूल के डॉ. आरके ब्रजेन सिंह ने गणितीय मॉडल का उपयोग करते हुए महामारी के मूल्य सिद्धांत के माध्यम से SARS-CoV-2 जीनोम डेटा पर प्रमुखता से चर्चा की।

वेबिनार के दूसरे दिन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के उप-कुलपति और रेक्टर प्रो. राणा प्रताप सिंह ने अपने विचार रखे। प्रो. सिंह, जो एक विशिष्ट कैंसर जीवविज्ञानी हैं, ने एक संक्षिप्त अवलोकन प्रस्तुत किया कि कोरोनो वायरस कैसे लोगों की मृत्यु का कारण बन रहा है। इसके दूसरे सत्र में प्रो सौमित्र दास, जो अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एक वायरोलॉजिस्ट हैं और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG) के वर्तमान निदेशक भी हैं, द्वारा व्याख्यान दिया गया।

इसी क्रम में जेएनयू के मॉलिक्यूलर मेडिसिन के विशेष केंद्र की प्रोफेसर विभा टंडन ने कोरोनो वायरस संक्रमण की संभावित दवा के रूप में छोटे अणुओं की पहचान करने के लिए प्रयोगात्मक तरीकों पर चर्चा की। इसके अलावा ICGEB की ग्रुप लीडर प्रो.नील सरोवर भावेश ने कोरोनो वायरस दवाओं की सिलिको डिस्कवरी में विभिन्न मॉलिक्यूलर बॉयोलोजिकल पहलुओं पर चित्रित प्रस्तुति पेश की।

एकीकृत समाधान अनुसंधान के निदेशक प्रो. एनरिको बुसी, जो कि संयुक्त राज्य अमेरिका से वेबिनार में शामिल हुए, ने SARS-CoV-2 महामारी की उत्पत्ति और चमगादड़ से मनुष्यों में इसके संभावित ट्रांसमिशन के बारे में चर्चा की।

नेचर सेल डेथ और डिफरेंसिएशन जर्नल के प्रधान संपादक प्रो गेरी मेलिनो सत्र की अंतिम वक्ता रहीं, जो कि इटली से वेबिनार में शामिल हुई और उन्होंने इटली और चीन में फैले कोरोना वायरस के हालात के अंतर को दिखाने वाले एक तुलनात्मक अध्ययन पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। वेबिनार के संयोजक प्रो. गोवर्धन दास और डॉ. अर्नब भट्टाचार्य के धन्यवाद ज्ञापन के साथ वेबिनार सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।

कुल मिलाकर वेबिनार को प्रतिभागियों की ओर से बड़ी संख्या में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। आयोजकों को दो-दिवसीय वेबिनार के लिए 1000 से अधिक रजिस्ट्रेशन प्राप्त हुए थे, जिनमें से करीब 300 संकाय के सदस्य थे। इसके साथ ही जेएनयू, आईआईटी, डीयू, बीएचयू, कनाडाई इंस्टीट्यूट फॉर जीनोमिक्स एंड सोसाइटी, शंघाई इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज, चीन, एनपीआरसी टेक्सास और रोम विश्वविद्यालय, इटली समेत 84 राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों से करीब 800 छात्र शामिल हुए।

वेबिनार का आयोजन ‘लैबीफाई’ के सहयोग से किया गया था, जो कि एक वेब-आधारित एप्लीकेशन है और अनुसंधान प्रयोगशालाओं को परियोजना निधि और अनुपालन दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखने में मदद करता है।

दाल-चावल खा जबड़े दुख रहे हैं, मुझे चिकन, मछली और तंदूरी दो: कोरोना संक्रमित सईद भोपाली की फरमाइश

दाल-चावल खाकर मेरे जबड़े दुख रहे हैं। मैं ये सब नहीं खा सकता। अब मुझे चिकन-मुर्गा और मछली-तंदूरी चाहिए। यह माँग किसी हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्रा की नहीं, बल्कि कोरोना संक्रमित मरीज की है जो भोपाल के एक अस्पताल में भर्ती है।

सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी कुछ लोग अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। एक बार फिर अस्पताल में भर्ती एक कोरोना पॉजिटिव मरीज ने अस्पताल में मिलने वाले खाने को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में आप देख सकते हैं कि सईद भोपाली नाम का व्यक्ति अस्पताल में मिलने वाले खाने को नापसंद करते हुए अपनी फरमाइश सुना रहा है। यह मध्य प्रदेश के भोपाल का बताया जा रहा है।

वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कह रहा है कि दाल-चावल खाते-खाते मसूड़े दुख गए हैं। मेरा नाम सईद भोपाली है, मैं डेली मटन खाता हूँ। भाई शेर की औलाद हूँ। मैं ये खाना अब नहीं खाऊँगा, बीमार था तब तक खा लिया। अब मैं स्वस्थ हूँ। मुझे अब चाहिए चिकन-मुर्गा, मछली-तंदूरी। वह वीडियो में कह रहा है कि ये खाना ले जाओ। मैं नहीं खाऊँगा। हालाँकि सईद ने आखिरी में कहा कि मैंने खाने की बुराई नहीं की है। ये बहुत अच्छा है, लेकिन मेरे अब मसूड़े दुख रहे हैं।

आपको बता दें कि खाने पर सवाल खड़ा और उसको अपमानित करने वाला यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब क्वारंटाइन किए गए जमातियों ने अपनी पसंद के खाने की फरमाइश की।

एक मामला उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर से आया था, जहाँ गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती जमातियों की हरकतों से पूरा अस्पताल प्रशासन परेशान है। उनकी मनमानी और उपद्रव को मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. आरती लालचंदानी ने मंगलवार को बयॉं करते हुए कहा था कि बीते सोमवार को जमातियों ने वार्ड बॉय के साथ मारपीट की। खाने की थाली में लात मार दी और वे बिरयानी और नॉनवेज मॉंग रहे हैं।

डॉ. आरती लालचंदानी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में 70 लोग भर्ती हैं। इनमें से 60 कोरोना पॉजिटिव हैं। इनमें से अधिकांश जमाती हैं। उनका कहना है कि जब से वार्ड में कुछ नौजवान जमाती भर्ती हुए हैं, तब से ही इन लोगों ने पूरे स्टाफ को परेशान कर रखा है। इन लोगों को समय से खाना मिल रहा। मिनरल वाटर और फल दिया जा रहा। लेकिन, उनकी फरमाइश खत्म नहीं हो रही।

मुंबई: अर्नब गोस्वामी पर हमले के आरोप में गिरफ्तार हुए यूथ कॉन्ग्रेस के आरोपितों को भोजवाड़ा कोर्ट ने दी जमानत

रिपब्लिक टीवी के संस्थापक अर्नब गोस्वामी पर पिछले दिनों हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए यूथ कॉन्ग्रेस के दोनों कार्यकर्ताओं को मुंबई के भोजवाड़ा कोर्ट ने सोमवार को जमानत दे दी। कोर्ट ने दोनों को 15-15 हजार रुपए के बांड पर जमानत दी है। इससे पहले सोनिया गाँधी पर की गई टिप्पणी मामले में अर्नब गोस्वामी पूछताछ के सिलसिले में मुंबई पुलिस के सामने पेश हुए। इतना ही नहीं पूछताछ के बाद अर्नब विक्ट्री साइन दिखाते हुए थाने से बाहर आए थे।

वहीं पालघर मामले में सोनिया गाँधी के चुप्पी साधने पर सवाल खड़े करने वाले अर्नब के खिलाफ में महाराष्ट्र सरकार में कॉन्ग्रेस कोटे से मंत्री नितिन राउत की ओर से एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। राउत ने मामला नागपुर में दर्ज कराया था। इसके बाद मुंबई पुलिस ने 12 घंटे के अंदर अर्नब को 2 नोटिस जारी किए थे।

जिस पर रिपब्लिक टीवी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि मुंबई पुलिस ने पिछले 12 घंटे में अर्नब को 2 नोटिस भेजे हैं। कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में अर्नब पूछताछ के लिए गए। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को मुंबई ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।

बता दें कि एक शो के दौरान अर्नब गोस्वामी की टिप्पणी से बौखलाए कॉन्ग्रेसियों ने अर्नब के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में बताई गई कि छत्तीसगढ़ के 27 जिलों में ही 101 FIR दर्ज कराई गई है। इसके अलावा अर्नब गोस्वामी के खिलाफ पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान और झारखंड के अलग-अलग थानों में एक दर्जन से अधिक FIR कॉन्ग्रेस नेताओं के द्वारा दर्ज कराई गई थी।

नागपुर में दंगे भड़काने के आरोप में अर्नब के खिलाफ आईपीसी की धारा 153, 153A, 153B, 295A, 208, 500, 504, 505(2), 506, 120B और 117 में केस दर्ज किया गया। इसके बाद अपने खिलाफ विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को लेकर अर्नब ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की गिरफ़्तारी पर 3 सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। इस दौरान वे अग्रिम जमानत भी माँग सकते हैं।

गौरतलब है कि 22-23 अप्रैल की रात एडिट कॉल निपटा कर लौटते हुए अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर कॉन्ग्रेस के दो मोटरसाइकिल सवार गुंडों ने हमला किया था। रिपब्लिक टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी ने खुद इस हमले की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी कार के आगे अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर दी और फिर हमला किया।

दोनों आरोपितों की पहचान प्रतीक कुमार श्याम सुंदर मिश्रा और अरुण दिलीप बुराडे के रूप में हुई थी। इतना ही नहीं दोनों आरोपितों ने स्वीकार किया था कि वे लोग यूथ कॉन्ग्रेस से हैं। अर्नब का आरोप है कि उन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि उन पर हमला करने वाले लोग वे थे, जो सत्ताधारी पार्टी से जुड़े थे। इसलिए बार-बार कहने पर भी उनकी बात को अनसुना किया जाता रहा।

दरअसल, मॉब लिंचिंग पर सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर अर्नब ने कहा था, “सोनिया गाँधी तो खुश हैं। वो इटली में रिपोर्ट भेजेंगी कि देखो, जहाँ पर मैंने सरकार बनाई है, वहाँ पर हिन्दू संतों को मरवा रही हूँ। वहाँ से उन्हें वाहवाही मिलेगी। लोग कहेंगे कि वाह, सोनिया गाँधी ने अच्छा किया। इनलोगों को शर्म आनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि हिन्दू चुप रहेंगे? आज प्रमोद कृष्णन को बता दिया जाना चाहिए कि क्या हिन्दू चुप रहेंगे? पूरा भारत भी यही पूछ रहा है। बोलने का समय आ गया है।”

जमातियों के सपंर्क में आए पश्चिमी यूपी के 38000 लोग, तलाश में जुटी एसटीएफ

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए एसटीएफ को लगाया गया है। निजामुद्दीन इलाके से 3 लाख से अधिक बीटीएस डाटा की स्कैनिंग के बाद पश्चिमी यूपी के 38 हजार लोगों के जमातियों से संपर्क मिले हैं। एसटीएफ इनकी तलाश कर रही है।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक एसटीएफ ने 27 मार्च को दिल्ली निजामुद्दीन मरकज के आसपास के मोबाइल टावरों के बेस ट्रांससीवर स्टेशन (बीटीएस) का डाटा उठाया। तीन लाख से भी ज्यादा नंबर इस डाटा में आए। इसके बाद बड़े स्तर से अभियान शुरू कर इन सभी की आईडी जाँच कर एसटीएफ ने प्रदेश के सभी जनपदों को सूची भेजी।

स्कैनिंग से पता चला है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब 38 हजार लोग कहीं न कहीं जमातियों से संपर्क आए हैं। पुलिस के मुताबिक दिल्ली मरकज से निकले हुए जमाती होटलों में, रास्ते में रुके, खाना खाया या फिर मस्जिद में रुके। कुछ जमाती अपने सगे, संबंधियों और रिश्तेदारों के यहाँ भी ठहरे।

अब पुलिस प्रदेश में कोरोना की चेन तोड़ने के लिए इन सभी लोगों के संदिग्ध मान रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन सभी लोगों की जाँच बेहद जरूरी है। इसके बाद एसटीएफ ने प्रदेश में ऐसे लोगों की तलाश तेज कर दी है।

मेरठ जोन के आठ जिलों की बात करें तो इनमें से 14,342 लोगों को रडार पर लेकर इनकी तलाश की जा रही है। इसके लिए सर्विलांस टीमों और प्रत्येक जिले में गठित कोरोना सेल को भी मामले में लगाया गया है। इतना ही नहीं इसकी रोजाना की रिपोर्ट शासन को भी भेजी जा रही है।

आपको बता दें कि निजामुद्दीन घटना के बाद से ही प्रदेश में जमातियों को खोजने का अभियान जारी है। इतना ही नहीं इसमें सरकार को बड़ी सफलता भी मिली है। आँकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ में 1530, बागपत में 920, सहारनपुर में 1220, मुजफ्फरनगर में 1830, हापुड़ में 1240, बुलंदशहर में 1320, गाजियाबाद में 1530 और शामली जिले में 1220 जमातियों को खोजकर निकाला जा चुका है। पकड़े गए सभी जमातियों को क्वारंटाइन किया जा चुका है।

इससे पहले इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि तबलीगी जमात के सैकड़ों सदस्य अभी भी लापता हैं। इन सदस्यों को ट्रैक किया जा रहा है और एजेंसियाँ ​​इन्हें ढूँढने की पुरजोर कोशिश में लगी हैं। इसके बावजूद भी इनका पता लगाना काफ़ी मुश्किल हो रहा हैं।

गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, देश के 23 राज्यों में 4,291 से अधिक संक्रमण के मामलें ऐसे हैं जो तबलीगी जमात के सदस्यों से जुड़े हैं। 40,000 से अधिक लोगों को विभिन्न राज्यों में सारी सुविधाओं के साथ क्वारंटाइन भी किया गया है।