यूपीए की वर्तमान अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दो बार की सरकार को फ्रंट डोर से चलाने वाली मैडम सोनिया गाँधी पर इन दिनों केवल अपने सुपुत्र राहुल गाँधी को ट्रैक पर लाने का जिम्मा नहीं है। इस समय उन पर उनके कई और बेटों के मार्गदर्शन का भार है। सोशल मीडिया पर लंबे समय तक केवल अपने एक बेटे की नादानियों के कारण मीम्स में दिखने वाली सोनिया गाँधी अब भारत माँ और सीता माँ के साथ दिखने लगी हैं।
जाहिर है इसके लिए उन्हें और उनके करीबियों को अर्नब गोस्वामी को थैंक्स कहना चाहिए। मगर, कॉन्ग्रेसियों को एहसान फरामोशी की हद और मातृ ऋण चुकाने के बीच का फर्क़ बहुत महीन रेखा के इधर-उधर दिखता है। इसलिए, जिसकी नजर कमजोर होती है वे इधर-उधर निकल जाते हैं।
यकीन नहीं आता तो प्रमाण देखिए। अर्नब गोस्वामी ने सोनिया गाँधी को लेकर एक दिन तीखे सवाल किए। उससे पहले सोनिया गाँधी या कोई कॉन्ग्रेसी सुर्खियों में बहुत चाहते हुए भी कितनी जगह बटोर पा रहा था? शायद सुपरफास्ट 100 खबरों में 1 खबर के स्लॉट बराबर भी नहीं।
मगर जैसे ही उन्हें लेकर अर्नब ने टिप्पणी की, वे चारों ओर छा गईं। यहीं से सोनिया गाँधी के अन्य पुत्रों को मातृ ऋण चुकाने का भी अवसर मिला। पहले तो खुद को हनुमान-अंगद समझकर अपनी माँ की रक्षा में दो दूत अर्नब के सामने आ गए, लेकिन जब पकड़े गए तो स्थिति रावण के गुप्तचर शूक जैसी हो गई।
कहना गलत नहीं है कि त्रेतायुग में माता सीता के प्रति हनुमान जी का प्रेम जितना असीम था, उतना ही आज कॉन्ग्रेसियों का सोनिया गाँधी के लिए है। फर्क बस ये है कि पहले के समय में मातृ प्रेम की पराकाष्ठा को भक्ति कहा जाता था। लेकिन, कॉन्ग्रेसियों के संदर्भ में वो चमचागिरी कहलाती है।
जब, अर्नब पर हमला करके कॉन्ग्रेस के दो दूत पकड़े गए तो अगले दिन यूथ कॉन्ग्रेस नामक क्रच ने अपनी माँ के छवि निर्माण के लिए एक उपाय खोजा। उन्होंने तिरंगे के ऊपर सोनिया गाँधी की तस्वीर लगाई और फिर उस पर ‘माँ तुझे सलाम’ लिखा।
हालाँकि, भारत माता से तुलना करने पर कॉन्ग्रेसियों की थू-थू बहुत हुई। लेकिन माँ के नाम पर चढ़े चढ़ावे को चरणामृत मानकर इन्होंने उसके भी दो घूँट मार लिए और विथ कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल से उन्हें सीता माँ के समकक्ष रख दिया। आप कहेंगे कि यूथ कॉन्ग्रेस तो मालूम है। मगर, विथ कॉन्ग्रेस कैसी बला है?
अरे जनाब! विथ कॉन्ग्रेस भी यूथ कॉन्ग्रेस की तरह ही है। फर्क बस इतना है कि यूथ कॉन्ग्रेस क्रच के समान हैं, जहाँ देर-सवेर उन्हें माँ के दर्शन होते हैं। लेकिन विथ कॉन्ग्रेस अनाथालय की तरह है। जो माँ से मरहूम है लेकिन फिर भी उनकी छत्रछाया में काम किए जा रहा है।
इसी विथ कॉन्ग्रेस, जिसने एक पोस्टर शेयर किया है और संदेश दिया है कि जैसे सीता माँ नेपाल की थीं और त्रेतायुग में राक्षसों ने इनके चरित्र पर सावल उठाते हुए अपशब्द कहे थे। वैसे ही सोनिया माँ इटली की हैं और कलयुग में राक्षस (शायद अर्नब या देश की पूरी जनता ही) उन पर सवाल उठा रहे हैं, उनके चरित्र पर सवाल उठाकर अपशब्द कह रहे हैं।
अब इन पोस्टरों से और कोई बात प्रमाणित हुई हो या न हुई हो। लेकिन सोनिया गाँधी के सुर्खियों में आने से ये पता चल गया कि जिस प्रकार सीता माँ की भक्ति में वानरों ने उन्हें माँ का दे दर्जा दिया था, वैसे ही सोनिया गाँधी के चमचों ने चमचागिरी में उन्हें माँ का ओहदा दे दिया है।
इसलिए, हम कह सकते हैं कि अब कॉन्ग्रेस के पास कुर्सी के लिए बहुतेरे विकल्प हैं और राहुल गाँधी के अनेकों भाई-बहन। जिनका न केवल मातृ प्रेम सोनिया गाँधी के प्रति राहुल जितना है, बल्कि बुद्धि में भी वे उनसे कम नहीं हैं। जो समय आने पर अपनी माँ स्वरूप सोनिया गाँधी पर उठे सवाल को नारी शक्ति का अपमान बताते हैं लेकिन जब भी मौक़ा पाते हैं तो स्मति ईरानी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ, निर्मला सीतारमण जैसी अनेकों महिलाओं का मखौल उड़ाते हैं और ऐसा करके अपनी माँ व ‘एकमात्र भाई-बहन’ के दुलारे बने रहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र ने सोमवार (अप्रैल 27, 2020) को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। ये बैठक कोरोना वायरस संक्रमण आपदा से जुड़ी स्थिति की समीक्षा के लिए की गई। हालाँकि, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इस बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने बताया कि केरल सरकार की तरफ से लिखित में अपनी बात रख दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों को लॉकडाउन का सख्ती से प्लान कराने की हिदायत दी।
कोरोना आपदा के बीच ये प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की चौथी बैठक थी। इस दौरान 9 मुख्यमंत्रियों ने अपनी बात रखी। मेघालय, मिजोरम, पुडुचेरी, हिमाचल प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, ओडिशा और गुजरात के मुख्यमंत्रियों ने पीएम से बातचीत की, जबकि बाकी ने लिखित में अपनी बात रखी। मेघालय ने कहा कि वहाँ लॉकडाउन 3 मई के बाद भी जारी रहेगा। मेघालय के सीएम ने कहा कि वो केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप काम करते रहेंगे।
पुडुचेरी के सीएम वी नारायणसामी ने केंद्र से पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स) व अन्य मेडिकल उपकरणों की माँग की। उन्होंने वित्तीय मदद भी माँगी। उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उद्योग-धंधों को धीरे-धोरे चालू करने की बात कही। उन्होंने बताया कि उनके राज्य में मनरेगा सहित अन्य विकास कार्य शुरू हैं। हिमाचल प्रदेश ने आर्थिक सेवाएँ चालू करने की बात की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया कि कैसे ग़रीबों की मदद की जा रही है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कई सलाह दिए और कहा कि नेशनल लॉकडाउन 3 मई के बाद भी जारी रहना चाहिए लेकिन महत्वपूर्ण गतिविधियाँ चालू की जानी चाहिए। उन्होंने धार्मिक व राजनीतिक गैदरिंग के अलावा शिक्षण संस्थानों को बंद रखने की वकालत की। उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों को चालू किया जाना चाहिए। इसी तरह अन्य मुख्यमंत्रियों ने भी अपनी-अपनी बातें रखीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर विचार-विमर्श करना चाहिए कि किस जगह पर लॉकडाउन को कैसे ख़त्म किया जाएगा। उन्होंने इसके लिए ‘ग्रेडेड एग्जिट’ की योजना बनाने की सलाह दी। बता दें कि देश भर में मार्च 25, 2020 से ही लॉकडाउन चल रहा है, जिसकी अवधि मई 3 को ख़त्म हो रही है। सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि इसके बाद सरकार क्या करती है।
Prime Minister Narendra Modi holds video conference with the Chief Ministers of all States on COVID19 situation. pic.twitter.com/D9kiiXk4XK
बैठक के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वो व्यक्तिगत रूप से राज्य में कोरोना से निपटने की तैयारी की मॉनिटरिंग कर रही हैं और जब तक वो मौजूद हैं, तब तक राज्य के एक भी नागरिक को निःसहाय महसूस नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में फँसे बंगालियों की भी मदद की जा रही है। कोटा से छात्रों को वापस बुलाया जाएगा। ममता ने अधिकारियों को कई ज़रूरी निर्देश दिए।
पंजाब पुलिस ने रविवार को हिज्बुल मुजाहिदीन के एक आतंकी को गिरफ्तार किया। इसकी खबर देते हुए पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने उसे आतंकी की जगह ऐक्टिविस्ट का दर्जा दे दिया। जिसके बाद ट्विटर यूज़र्स ने इस बात को लेकर पंजाब सरकार को खूब खरी खोटी सुनाई। हिज्बुल मुजाहिदीन एक आतंकी संगठन है। खबरों के मुताबिक बुरहान वानी की मौत के बाद गिरफ्तार आतंकी को नया कमांडर बनाया गया था।
गौरतलब है कि जहाँ एक तरफ पंजाब सरकार इसे अपनी एक बड़ी सफलता मान रही है, वहीं हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी को ऐक्टिविस्ट का दर्जा देकर उसका सम्मान भी कर रही है। हद है तर्क की और ऐसी राजनीति की! मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से किए गए एक ट्वीट की वजह से सोशल मीडिया यूज़र्स का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ट्विटर पर हजारों लोगों ने सरकार के इस ट्वीट को लेकर अमरिंदर सिंह की आलोचना की है।
CM अमरिंदर सिंह के खिलाफ ट्वीट कर कई यूजर्स ने कॉन्ग्रेसी नेताओं के पुराने बयान को लेकर पार्टी की नीति पर भी सवाल उठाए हैं। यूजर्स ने दलील दी है कि हिज्बुल के जिस दहशतगर्द को पंजाब में पकड़ा गया है, उसके लिए ऐक्टिविस्ट नहीं टेररिस्ट शब्द का इस्तेमाल होना चाहिए था। हालाँकि जिस ट्वीट पर यह पूरा विवाद शुरू हुआ था, उसको अब पंजाब सरकार ने बदल दिया है।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब किसी कॉन्ग्रेसी नेता ने आतंकी का सम्मान किया हो। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह द्वारा ओसामा बिन लादेन को ओसामा जी कहा गया था। और तो और, रणदीप सुरजेवाला द्वारा अफजल गुरु को अफजल गुरु जी और हाफिज सईद को हाफिज जी कहते हुए भी सुना गया है। सबसे खास बात यह कि कॉन्ग्रेस पहले ऐसे बयान देती है और फिर पीछे हट जाती है। यानी जहाँ संदेश पहुँचाना है, पहुँचा दिया और जिन्हें बरगलाना है उन्हें बरगला भी दिया।
कौन था यह हिज्बुल का यह आतंकी
खबरों के अनुसार पंजाब पुलिस ने कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा थाने के नौगाम इलाके का रहने वाला हिलाल अहमद वागे को 25 अप्रैल को अमृतसर के मेट्रो मार्ट के पास से गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान हिलाल को हिज्बुल के चीफ रियाज अहमद नाइकू ने मेट्रो मार्ट के पास एक अज्ञात शख्स से पैसे लेने भेजा था। वहाँ एक शख्स बाइक पर आया और हिलाल को पैसे दे गया। हिलाल के साथ ट्रक में मौजूद दूसरे शख्स की पहचान अनंतनाग के रईस अहमद के रूप में हुई है।
“मुझे तो हिंदुस्तान में रहने में ही डर लग रहा है। क्या झारखण्ड पाकिस्तान बन गया है? अगर हमें इस तरह से प्रताड़ित किया जाता रहा तो हम कहाँ जाएँगे?”
ये शब्द हैं ऋचा भारती के पिता के। राँची की वही ऋचा भारती, जिन्हें अदालत ने कुरान बाँटने की अजोबोग़रीब और विवादित सज़ा दी थी। उन्हें व उनके पूरे परिवार को जानबूझ कर प्रताड़ित किया जा रहा है। ये काम झारखण्ड पुलिस कर रही है, वो भी झारखण्ड सरकार के इशारों पर। गुरुवार (अप्रैल 23, 2020) को अचानक से 5-6 पुलिसवाले उनके घर आए और ऋचा भारती का मोबाइल फोन ले गए। मुद्दा क्या था, कारण क्या है, शिकायत किसने की- पुलिस ने ये सब कुछ भी नहीं बताया।
पुलिस से जब ऋचा भारती के पिता प्रकाश पटेल ने कहा कि वो कोई कागज़ दिखाएँ, जिसमें मोबाइल फोन जब्त करने का आदेश हो तो पुलिस कुछ नहीं दिखा पाई। बिना किसी सर्च वॉरंट वगैरह के पुलिस घर में घुस गई और परिवार के सभी सदस्यों का मोबाइल फोन खँगालने लगी। प्राइवेट मैसेजों का भी पड़ताल की है। ऋचा के भाई का फोन लेकर छानबीन की गई। वो लोग बार-बार पूछते रहे कि किसकी शिकायत पर ये हो रहा है, तो कुछ नहीं बताया गया।
पुलिस सिर्फ़ इतना बताती रही कि उन्हें मोबाइल लेना है और चेक करना है। ये पहली बार नहीं हुआ है। कुछ हफ़्तों पहले भी पुलिस आई थी और ऋचा भारती की माँ का मोबाइल फोन लेकर चली गई थी। तब भी कोई कारण नहीं बताया गया। मोबाइल फोन वापस लेने के लिए प्रकाश पटेल बार-बार थाने का चक्कर लगाते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थाना में कहा जाता रहा कि जब्ती सूची बना दी गई है। वो रेडमी ए-1 हैंडसेट था।
अप्रैल 23 को साइबर क्राइम की डीएसपी भी आई थीं, जिन्होंने कहा कि वो लिखित में देने को तैयार हैं कि पुलिस मोबाइल फोन लेकर जा रही है। लेकिन, ये नहीं बताया गया कि किसकी शिकायत पर यह सब किया जा रहा है। ऋचा ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए आशंका जताई है कि ट्विटर पर कुछ समुदाय विशेष के लोगों ने सरकरी नेताओं और पुलिस को टैग कर के कुछ शिकायत की होगी, जिसके बाद अचानक से पुलिस यूँ कार्रवाई करने लगी।
परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है। जब-तब पुलिस पहुँच जाती है और घर के सारे सदस्यों के मोबाइल फोन लेकर प्राइवेट मैसेजों तक को चेक करती है।
राँची, झारखंड: ऋचा भारती कोर्ट के निर्णय के ख़िलाफ़ खड़ी हुई थीं, जब उन्हें कुरान बाँटने कहा गया।
ऋचा के पिता प्रकाश व्यथा सुनाते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके और उनके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है कि उन्हें अब हिंदुस्तान में रहने में भी शर्म आ रही है। वो बताते हैं कि जब मोबाइल फोन जब्त कर के ले जाया गया, तो वो भी थाने पहुँचे ताकि पता चल सके कि मामला क्या है। उन्हें थाने में कोई नहीं मिला। फिर उसी दिन शाम को 15-20 की संख्या में पुलिसकर्मी फिर से ऋचा के घर पहुँचे।
बिना कुछ किए पीड़ित परिवार के साथ एकदम अपराधी की तरह व्यवहार किया गया। क़रीब एक घंटे तक साइबर क्राइम वालों ने घर के सारे मोबाइल फोन्स की जाँच की। उन्होंने जो-जो कहा, परिवार ने वो सब कर के जाँच में सहयोग किया। ऋचा की माँ की तबियत काफी खराब है। इन सब के बीच उनकी तबियत और बिगड़ गई। उन्हें डॉक्टर ने बेड रेस्ट की सलाह दी है। उनका कुछ दिनों पहले ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ था। इसके अलावा एक और सर्जरी हुई थी।
पुलिस की पूछताछ के दौरान ही उनकी तबियत अचानक से बिगड़ गई। इसके बाद पुलिस के ही सहयोग से ऋचा की माँ को किसी तरह हॉस्पिटल भेजा गया। वहाँ उनका इलाज चला, जिसके बाद उन्हें डिसचार्ज कर दिया गया। ऋचा के द्वारा क़ुरान बाँटने वाले प्रकरण के बाद ऋचा भारती के नाम से कई फेक फेसबुक एकाउंट्स बन गए हैं। उन्होंने थाने में ज्ञापन देकर उन फेक एकाउंट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की गुहार लगाई लेकिन पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया।
सबसे बड़ी बात तो ये है कि इलाक़े में समुदाय विशेष के बीच ऋचा भारती के परिवार के ख़िलाफ़ चर्चा आम हो गई हैं। एक व्यक्ति ने बताया कि उनके मेडिकल स्टोर पर शहजाद नामक आदमी ऋचा और उनके परिवार को लेकर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा था। उसने जब पुलिस द्वारा ऋचा के घर छानबीन किए जाने की ख़बर सुनी तो अफवाह उड़ा दी कि उन्हें पुलिस पकड़ के ले गई है। साथ ही वो बातें कर रहा था कि वो सब मिल कर ऋचा के परिवार को मार-पीट कर भगा देंगे।
ऋचा के परिवार के ख़िलाफ़ समुदाय विशेष के कुछ लोग मार-पीट कर भगाने की बात कर रहे थे, ऐसा एक मेडिकल स्टोर वाले ने बताया। इस सम्बन्ध में भी परिवार ने पुलिस को सूचित किया था। कुछ दिनों पहले की ही बात है जब ऋचा का परिवार छत पर बैठा हुआ था और उनकी चचेरी बहन किनारे पर खड़ी थी। तभी दूसरे समुदाय के दो-चार युवक वहाँ से गुजर रहे थे और बातें कर रहे थे कि यही ऋचा का घर है। इसके बाद उन्होंने घर के दरवाज़े पर ही थूक दिया।
उन्होंने क़रीब 4-5 बार घर के दरवाज़े पर थूक फेंका था। जब तक परिवार के लोग वहाँ पहुँचते, वो लोग वहाँ से भाग निकले। परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार उकसाया जा रहा है ताकि वो जवाब में कुछ करें तो उसे बात का बतंगड़ बनाया जा सके। परिवार का आरोप है कि उनके साथ स्थानीय पुलिस जरा भी सहयोग नहीं कर रही है। ताज़ा मोबाइल फोन जब्ती वाली घटना के अगले दिन जब ऋचा के पिता थाने में आवदेन देने गए तो उन्हें थाना प्रभारी द्वारा प्रताड़ित किया गया।
थाना प्रभारी ने 3 बार उनसे थाने का चक्कर कटवाया और बाद में आवेदन लेने से भी इनकार कर दिया। आवेदन में पुलिस तरह-तरह की गलतियाँ निकालती रही। बाद में डीएसपी को शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने आवेदन तो लिया लेकिन उसमें काफ़ी कुछ बदलाव कर दिया। बिना शिकायतकर्ता की मर्जी के उस आवेदन के साथ छेड़छाड़ किया गया। ये काँके पिठौरिया थाना क्षेत्र की घटना है। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हतस्क्षेप की माँग की है, जो इस पर चुप हैं।
भयभीत है परिवार: ऋचा भारती ने पुलिस को दिया आवेदन
ऋचा के पिता प्रकाश पटेल ने बताया कि जब वो पुलिस से शिकायत करते हैं तो पुलिस झिड़क के कहती है कि हम क्या करें, आपके कारण सभी को गोली मार दें? बाद में तंग आकर प्रकाश पटेल ने थाना प्रभारी से कह दिया कि वो दूसरों को क्यों गोली मारेंगे, उनके पूरे परिवार को ही गोली मार दें। हालाँकि, अभी ऋचा का फोन लौटा दिया गया है लेकिन पुलिस द्वारा की जा रही प्रताड़ना के कारण परिवार अब भी सदमे में है।
ऋचा के पिता ने कहा कि जमशेदपुर में फल विक्रेताओं के दुकानों से हिन्दू वाला बैनर हटाने की बात हो या बंगाल में हिन्दुओं के मारे जाने की ख़बर, इन सब को सुन कर और उनके परिवार के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर ऐसा लगता ही नहीं है कि वो किसी धर्मनिपरपेक्ष राष्ट्र में रह रहे हैं। ऐसा लगता है, जैसे कोई इस्लामिक मुल्क़ में रह रहे हों। परिवार का कहना है कि अगर ऋचा के ख़िलाफ़ एक भी बनावटी सबूत मिल जाता तो उन्हें फिर से जेल में ले जाकर डाल दिया जाता।
ऋचा भारती के परिवार ने की सुरक्षा की माँग: थाना को दिया आवेदन
हमने जब ऋचा के पिता से पूछा कि वो किसी भी आरोपित का नाम पुलिस को क्यों नहीं बता रहे हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि जब वो नाम नहीं दे रहे हैं तो उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है तो अगर उन्होंने नाम दे दिया तो उनके ख़िलाफ़ और भी बड़ी साज़िश रची जाएगी। पिठौरिया के थानाध्यक्ष से भी ऑपइंडिया ने संपर्क किया, जिन्होंने आरोपों को नकार दिया। उन्होंने कहा कि ऋचा के परिवार की पुलिस जितनी मदद कर रही है, वो उतना ज्यादा ‘नौटंकी’ कर रहे हैं।
उन्होंने कहा की ऋचा की माँ की तबियत ख़राब होने पर उन्हें पुलिस की गाड़ी से ही इलाज के लिए भेजा गया। परिवार का कहना है कि डीएसपी के सहयोग के कारण ऐसा संभव हुआ, जो महिला ही हैं। थानाध्यक्ष ने कहा कि पुलिस उनके घर के पास से दिन भर में कई बार लॉकडाउन पेट्रोलिंग के दौरान गुजरती है, इसीलिए उनके द्वारा किए जा रहे ‘डर’ के दावों में कोई दम नहीं है। आवेदन में छेड़छाड़ होने की बात से भी उन्होंने इनकार कर दिया।
ऋचा भारती ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि समुदाय विशेष के कुछ लोगों के ट्वीट्स के आधार पर बार-बार उनके घर आकर पुलिस उनके मोबाइल फोन्स की छानबीन करती है। ऋचा ने पुलिस से कहा कि वो उन पर कार्रवाई करें, जो इधर-उधर थूक फेंक रहे हैं, जो हमारे जवानों का सम्मान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखण्ड में सरकार बदलते ही हिन्दुओं के साथ दुर्व्यवहार शुरू हो गया है।
जब परिवार बार-बार कह रहा है कि उनके घर के आसपास संदिग्ध लोगों का आना-जाना बढ़ गया है और समुदाय विशेष के स्थानीय लोग उन्हें मार भगाने की बात कर रहे हैं, फिर पुलिस कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही या सरकार उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं प्रदान कर रही? उलटा किसी के आरोपों को ‘नौटंकी’ बता कर ख़ारिज कर देना कहाँ तक सही है? वो भी तब जब परिवार ख़ुद कई दूसरी परेशानियों से जूझ रहा है।
जुलाई 2019 में एक मामले में राँची की अदालत ने ऋचा को कुरान बाँटने का आदेश दिया था। ऋचा ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि आज अदालत उन्हें कुरान बाँटने को कह रही है, कल को इस्लाम मज़हब अपनाने को भी कहा जा सकता है। ऋचा ने पूछा था कि क्या कभी किसी अदालत ने किसी आरोपित को रामायण या भगवद्गीता बाँटने को कहा है? बाद में विरोध के बाद राँची की अदालत ने अपना आदेश वापस ले लिया था।
पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने आरोप लगाया है कि मुंबई पुलिस उन पर हुए हमलों के मामले में कॉन्ग्रेस की साज़िश को कवर-अप करने में जुट गई है। उन्होंने मुंबई के एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर को पत्र लिख कर ये आरोप लगाए। मंगलवार (अप्रैल 23, 2020) को अर्नब गोस्वामी ने ख़ुद पर हुए हमले के मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में दो यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता धरे गए थे।
क्या लिखा अर्नब गोस्वामी ने मुंबई पुलिस को भेजे पत्र में?
अर्नब ने पत्र में लिखा कि एक राष्ट्रीय पार्टी की इस हमले में भागीदारी है, जिसे पुलिस नज़रअंदाज़ कर रही है। अर्नब ने कहा कि एफआईआर फॉर्म में सिर्फ़ पकड़े गए यूथ कॉन्ग्रेस के दोनों कार्यकर्ताओं का नाम है, जबकि उनके साथ इस साज़िश में शामिल अन्य लोगों के नाम नहीं हैं। अर्नब ने कहा कि शिकायत कॉपी में उन सभी के नाम, डिटेल्स और लिंक्स दिए गए थे। इस पर अर्नब के सिक्योरिटी इंचार्ज ने भी हस्ताक्षर किया था, जो शिकायतकर्ताओं में से एक है।
‘रिपब्लिक टीवी’ ने भी कुछ सबूत पुलिस को उपलब्ध कराए थे, जिसे एफआईआर फॉर्म से गायब कर दिया गया है। अर्नब की गाड़ी पर जो द्रव्य पदार्थ फेंका गया था, उसके एसिड या फिर अन्य ज्वलनशील वस्तु होने की आशंका है लेकिन आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में कोई जाँच की ही नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर और उनके परिवार पर जो ख़तरा मँडरा रहा है, उसे देखते हुए उचित धाराएँ नहीं लगाई गई हैं।
अर्नब गोस्वामी और उनकी उनकी पत्नी समयब्रत राय गोस्वामी पर उनके घर से 500 मीटर की दूरी पर हमला हुआ था। उनकी पत्नी ‘रिपब्लिक टीवी’ में एडिटर के पद पर काबिज हैं। ये हमला उनके टोयोटा कार पर बुधवार (अप्रैल 23, 2020) को रात 12:20 में किया गया। अर्नब गोस्वामी ने आरोप लगाया कि दोनों आरोपितों ने स्वीकार किया था कि उन्हें कॉन्ग्रेस के उच्चाधिकारियों ने ‘उन्हें सबक सिखाने’ के लिए भेजा था।
यूथ कॉन्ग्रेस के दोनों कार्यकर्ता ‘मार डालेंगे’ और ‘ख़त्म कर देंगे’ जैसी बातें भी चिल्ला रहे थे। अर्नब गोस्वामी ने आरोप लगाया कि अब ऐसा प्रचारित किया जा रहा है कि दोनों आरोपितों ने अपनी व्यक्तिगत कैपेसिटी में हमला किया था, जो ग़लत है। उन्होंने कहा कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी की साज़िश है, उन्हें चुप कराने की, उनकी आवाज़ दबाने की। दोनों ने पकड़े जाते ही अपना कॉन्ग्रेस कनेक्शन जाहिर कर दिया था।
अर्नब गोस्वामी ने पुलिस को लिखे पत्र में कई आरोप लगाए
आरोपित अरुण बोराडे सिओन कोलीवाड़ा यूथ कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष है जबकि उसका साथी प्रतीक मिश्रा सिओन कोलीवाड़ा यूथ कॉन्ग्रेस का जनरल सेक्रेटरी होने का दावा करताहै। वो पहले से ही इंतज़ार कर रहे थे कि अर्नब निकले और वो हमला करें। अर्नब का कहना है कि वो ‘ऊपर से आए आदेश’ का अनुसरण कर रहे थे। अर्नब गोस्वामी के सिक्योरिटी इंचार्ज शिवाजी होसमानी ने शिकायत की कॉपी पर हस्ताक्षर किया था।
अर्नब गोस्वामी को भेजे गए 2 नोटिस
इससे पहले मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को तत्काल पूछताछ के लिए 12 घंटे के भीतर दो नोटिस भेजा था। उन्होंने पालघर मॉब लिंचिंग में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे। रिपब्लिक टीवी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मुंबई पुलिस ने पिछले 12 घंटे में अर्नब को 2 नोटिस भेजे हैं। कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में अर्नब आज (27 अप्रैल, 2020) पूछताछ के लिए जाएँगे।
महाराष्ट्र सरकार में कॉन्ग्रेस कोटे से मंत्री नितिन राउत की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर पर यह नोटिस सीआरपीसी 41ए के तहत भेजा गया। राउत ने मामला नागपुर में दर्ज कराया था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को मुंबई ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। अर्नब गोस्वामी को सोमवार सुबह 9 बजे पेश होने को कहा गया है।
कोरोना महामारी से जंग के बीच देश की 91% जनता का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सही दिशा में काम कर रही है। इससे पहले मार्च माह में 83% लोगों का मानना था कि कोरोना को रोकने के लिए केंद्र सरकार सही कदम उठा रही है। इसी क्रम में अमेरिका की बात करें, तो उनके देशों में मार्च महीने में मात्र 42 प्रतिशत लोगों का ऐसा मानना था कि उनकी सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए उपयुक्त कदम उठाए। वहीं, इंग्लैंड (यूनाइटेड किंग्डम) में ये आँकड़ा मार्च तक 49% था।
इन आँकड़ों का खुलासा एक सर्वे के बाद हुआ। इस सर्वे को स्विट्जरलैंट के पोलिंग संगठन गैलअप इंटरनेशनल एसोसिएशन ने कराया। इस स्नैप पोल को विश्व के 28 देशों में कराया गया। इसके मुताबिक, भारत की 91% जनता का मानना है कि नरेंद्र मोदी सरकार कोरोना महामारी में बहुत अच्छा काम कर रही है। जबकि 7% इससे इंकार करते हैं और 2% इस पर कुछ नहीं कहना चाहते।
इस सर्वे के अनुसार, मार्च से लेकर अप्रैल तक में नरेंद्र मोदी पर विश्वास जताने वालों में इजाफा दिखा है। ग्राफ में हम देख सकते हैं, पहले मात्र 83% लोग इस कथन पर अपनी सहमति दे रहे थे। लेकिन अप्रैल में मोदी सरकार के प्रयासों को देखकर ये आँकड़ा बढ़ा और 91% तक पहुँच गया।
सर्वे में लॉकडाउन के प्रश्न पर करीब 97% जनता ने माना कि कोरोना रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन समय की माँग थी और वे सरकार के निर्णय का समर्थन करते हैं। इसके अलावा 75% का मानना है कि वे अब बुरे दौर को पीछे छोड़ चुके हैं। आने वाले समय में चीजें सुधरना शुरू करेंगीं।
इसी प्रकार 69% जनता ने माना कि विदेशी ताकतों के कारण कोरोना का प्रसार हुआ। जबकि 66% लोगों ने कहा कि एक धार्मिक समुदाय के कारण यहाँ कोरोना आँकड़ों में औचक बढ़ोतरी हुई। इसके अतरिक्त मात्र 34 % लोगों ने इस बात को कहा कि उन्हें लॉकडाउन में बुनियादी जरूरतों, खाना और सब्जियों को लेकर दिक्कत हुई।
ऐसे ही कोरोना महामारी के कारण उपजे हालातों में इस पोल में मानवाधिकारों के त्याग पर भी सवाल किया गया। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए 91% लोगों ने कहा कि अगर उनके मानवाधिकारों के बलिदान होने से देश को कोरोना से लड़ने में मदद मिल सकती है, तो वे इसके लिए तैयार हैं। बता दें कि मार्च में मानवाधिकारों के त्याग की बात पर भी 86% लोगों ने सहमति जताई थी। मगर, अप्रैल के हालातों को देखकर ये आँकड़ा भी बढ़ा दिखा।
इतना ही नहीं, इस सर्वे ने कोरोना महामारी को फैलने से रोकने की दिशा में भारतीयों की प्रतिबद्धता को अन्य देशों के मुकाबले अधिक दिखाया। भारत में लॉकडाउन के दौरान जहाँ 45 % लोगों ने अस्थायी रूप से अपने काम पर रोक लगाई। वहीं वैश्विक स्तर पर ये आँकड़ा 28 प्रतिशत रहा।
गौरतलब है कि गैलप इंटरनेशनल एसोसिएशन स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में पंजीकृत पोल संगठनों का संघ है। जिसने विश्व के 28 देशों में ये सर्वे कराया और जिसमें उसने भारत के अलावा जर्मनी, इटली, रूस, यूएसए को भी शामिल किया। इस सर्वे का उद्देश्य देश के आम लोगों की ये राय जानना था कि वे कोरोना महामारी के बीच अपनी सरकार द्वारा उठाए प्रयासों से कितने सहमत हैं? तीन सर्वेक्षणों की कड़ी में ये से दूसरा सर्वे था। इससे पहले एक सर्वे मार्च में कराया गया था।
बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के प्रयासों की पहली बार तारीफ नहीं हुई है। इससे पहले भी वे इस संकट की घड़ी में अपना लोहा मनवाते हुए प्रिय ग्लोबल लीडर बन चुके हैं।
कोरोना संक्रमण के कारण कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता बदरुद्दीन शेख का निधन हो गया है। रविवार रात उन्होंने अंतिम साँस ली। वे 68 साल के थे। बदरुद्दीन शेख अहमदाबाद महानगर पालिका में विपक्ष के पूर्व नेता थे। साथ ही गुजरात कॉन्ग्रेस के विभिन्न पदों और मनपा में विपक्ष के नेता भी रह चुके थे।
अहमदाबाद मिरर के रेजिडेंट एडिटर के अनुसार रविवार देर रात एसवीपी अस्पताल में बदरुद्दीन शेख ने अंतिम साँस ली। कोरोना वायरस की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। वे पिछले कई दिनों से वेंटिलेटर पर थे।
गुजरात कॉन्ग्रेस के विधायक इमरान खेड़ावाला का टेस्ट पॉजिटिव
इस महीने की शुरुआत में, गुजरात कॉन्ग्रेस के विधायक इमरान खेड़ावाला का भी कोरोनावायरस टेस्ट पॉजिटिव आया था। जिसके बाद उन्हें एसवीपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कॉन्ग्रेस के दो अन्य नेताओं गयासुद्दीन शेख और शैलेश परमार के साथ खेड़ावाला मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से मिले थे, जिस दिन उनका टेस्ट पॉजिटिव आया था। फिलहाल रूपानी और अन्य लोगों में कोरोनावायरस के अभी तक कोई लक्षण नहीं दिखाए हैं।
मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को तत्काल पूछताछ के लिए 12 घंटे के भीतर दो नोटिस भेजा है। उन्होंने पालघर मॉब लिंचिंग में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे।
महाराष्ट्र सरकार में कॉन्ग्रेस कोटे से मंत्री नितिन राउत की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर पर यह नोटिस सीआरपीसी 41ए के तहत भेजा गया है। राउत ने मामला नागपुर में दर्ज कराया था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को मुंबई ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। अर्नब गोस्वामी को सोमवार सुबह 9 बजे पेश होने को कहा गया है।
Maharashtra: This FIR was originally filed in Nagpur but Supreme Court had ordered to transfer this matter to Mumbai. Arnab Goswami is to appear before Police in Mumbai tomorrow at 9.00 am. https://t.co/8arG08EVzL
रिपब्लिक टीवी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मुंबई पुलिस ने पिछले 12 घंटे में अर्नब को 2 नोटिस भेजे हैं। कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में अर्नब कल पूछताछ के लिए जाएँगे।
Mumbai Police sends Arnab 2 notices in 12 hours, to immediately interrogate him. As a law-abiding citizen, Arnab will subject himself to interrogation tomorrow, here’s his full statement pic.twitter.com/dLBTCfPc54
अर्नब ने इस बाबत बयान जारी करते हुए कहा, “मैं कानून का पालन करने वाला नागरिक हूँ। मैं जाँच में सहयोग करूँगा। मैं खुद पुलिस स्टेशन जाऊँगा। कल सुबह पूछताछ में शामिल होऊँगा। सत्य की जीत होगी।” उन्होंने कहा है कि मैं मुंबई पुलिस से अपील करता हूॅं कि मुझ पर हुए हमले को लेकर भी वह इसी तरह की तत्परता दिखाए। 23 और 24 अप्रैल की दरम्यानी रात यूथ कॉन्ग्रेस के गुंडों ने मुंबई में अर्नब की कार पर हमला किया था। उस वक्त वे कार में अपनी पत्नी के साथ थे।
अर्नब ने कहा है कि उन्होंने मुंबई पुलिस से बार-बार इस बात को मेंशन करने के लिए कहा कि इस हमले में कॉन्ग्रेस-वाड्रा परिवार की भूमिका थी, मगर पुलिस ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने हमले में कॉन्ग्रेस की भूमिका को साबित करने के लिए कुछ सबूत भी पेश किए। उन्होंने कहा, “मुझे यकीन है कि मुंबई पुलिस वाड्रा कॉन्ग्रेस की भूमिका पर उपलब्ध विस्तृत सबूतों को नष्ट नहीं करेगी।”
सुप्रीम कोर्ट से अर्नब गोस्वामी को राहत
बता दें कि इससे पहले शुक्रवार (अप्रैल 24, 2020) को सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी की गिरफ़्तारी पर 3 सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस दौरान वे अग्रिम जमानत भी माँग सकते हैं। अर्नब गोस्वामी ने याचिका दायर करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत भाषण की अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का एक प्रयास किया गया है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने सुनवाई की।
गौरतलब है कि 22-23 अप्रैल की रात एडिट कॉल निपटा कर लौटते हुए अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर कॉन्ग्रेस के दो मोटरसाइकिल सवार गुंडों ने हमला किया था। रिपब्लिक टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी ने खुद इस हमले की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी कार के आगे अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर दी और फिर हमला किया।
हैदराबाद में सब्जी की दुकान पर भगवा झंडा देख आजम नवाज नाम के एक शख्स ने आपत्ति जताई है। इसको लेकर ट्वीट करते हुए उसने साइबारबाद पुलिस को टैग किया है। उसने पुलिस से कार्रवाई की मॉंग की। इसके बाद पुलिस भी हरकत में आ गई।
This Has Started In HYDERABAD Location Attapur | vegetables vendors Sanghis are installing saffron flags
आजम नवाज ने ट्वीट कर कहा हैदराबाद के अत्तरपुर में कुछ संघी सब्जी विक्रेताओं ने अपनी रेहड़ियों पर भगवा झंडा लगाना शुरू किया है। हम गंगा-जमुनी तहजीब में भरोसा करते हैं, जो लोग भेदभाव करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और लोगों से अनुरोध है कि इनका बहिष्कार करें।
आजम के ट्वीट पर पुलिस ने किया रिट्वीट
आपकों बता दें कि इससे पहले झारखंड के जमशेदपुर के कदमा में 6 फल विक्रेताओं पर सिर्फ़ इसलिए करवाई की गई, क्योंकि उन्होंने अपनी दुकानों पर ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ और ‘हिंदू फल दुकान’ लिखा पोस्टर लगा रखा था। हालॉंकि पीड़ित दुकानदारों से मुलाकात कर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
विहिप के प्रवक्ता ने भी एक के बाद एक ट्वीट कर इस मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने पूछा कि क्या भारत मे हिंदू होना अपराध है? या विहिप बजरंग दल व भगवा से जुड़ना अपराध है? उनका सवाल था कि क्या जिन मीट की दुकानों, बूचड़खानों या पैकेटों पर हलाल शब्द लिखे होंगे, उन सभी साम्प्रदायिक व धार्मिक विद्वेष फैलाने वाली शब्दावली को भी ये सरकारें बंद करेंगीं? यह बड़ा मामला है क्योंकि सिर्फ़ बैनर नहीं हटाया गया है। भगवान श्रीराम व भगवान शिव की तस्वीर भी हटाई गई है।
वहीं, बिहार के नालंदा में फल, सब्जी और किराने की दुकान पर भगवा झंडा लगाने को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की है। यहाँ पर बजरंग दल के दो सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्थानीय हिंदुओं से आग्रह किया था कि वे अपनी जरूरत की वस्तुएँ जैसे फल, सब्जी, राशन इत्यादि हिंदुओं की दुकान से ही खरीदें।
बजरंग दल नालंदा के सदस्य कुन्दन कुमार और धीरज कुमार के साथ ही 5 अज्ञात के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। इन पर आईपीसी की धारा 147, 149, 188, 153 (A) और 295 (A) के तहत कार्रवाई की गई है।
जब इस बाबत ऑपइंडिया ने लहेरी पुलिस स्टेशन के SHO रंजीत राय से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने मीडिया को कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, “आप जाकर गूगल पर सर्च कीजिए। हम आपसे फोन पर बात नहीं करेंगे।” दरअसल हमने ये जानने की कोशिश की थी कि 295 (A) क्यों लगाया गया है? 295 (A) की धारा तभी लगाई जाती है, जब किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाई जाती है। मगर यहाँ पर तो किसी की भी धार्मिक भावना को ठेस नहीं पहुँचाया गया था और ना ही अपमान किया गया था।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में राजदीप सरदेसाई इंडिया टुडे पर अपने प्राइम टाइम शो की मेजबानी करते हुए देखे जा सकते हैं। इसमें भारत का गलत नक्शा प्रदर्शित किया गया है। वीडियो में एक ग्राफिकल प्रस्तुति में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के बिना भारतीय मानचित्र को दर्शाया गया है।
इतना ही नहीं पाकिस्तान के नक्शे में कश्मीर के भारतीय क्षेत्र को शामिल करके दिखाया गया है। यह ठीक उसी तरह है जैसे पाकिस्तान की सरकार अपने आधिकारिक नक्शे में प्रस्तुत करती है।
Archbishop @aroonpurie‘s channel showed POK in Pakistan on a map shown during Congress IT cell member @sardesairajdeep‘s show
गौर से देखने पर पाकिस्तान के विभिन्न नक्शों के बीच दिखाई देने वाले अंतर इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि इंडिया टुडे ने पाकिस्तान के नक्शे में जम्मू और कश्मीर का क्षेत्र शामिल कर दिया है।
फोटो क्रेडिट- पॉलिटिकल कीड़ा
आपको बता दें कि वर्ष 2016 में केंद्र सरकार द्वारा भू-स्थानिक सूचना विनियमन विधेयक के तहत एक नया कानून प्रस्तावित किया गया था। इसमें POK या अरुणाचल प्रदेश के बिना भारतीय मानचित्र को दर्शाने पर 100 करोड़ के जुर्माने के साथ 7 साल की जेल की सजा भी हो सकती है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के 69(ए) के तहत ऐसी वेबसाइटों को भारत सरकार द्वारा ब्लॉक किया जा सकता है।
गौरतलब है कि इंडिया टुडे विकृत तथ्यों और गलत सूचनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए पहले से ही बदनाम रहा है। इससे पहले चैनल के प्रबंध संपादक राहुल कंवल ने भी एक इन्फोग्राफिक रखा था, जिसमें कोरोना से भारत के सबसे अधिक प्रभावित 12 राज्यों के अस्पतालों में उपलब्ध पीपीई किटों की संख्या को सूचीबद्ध कर दिखाया गया था। कंवल के मुताबिक महाराष्ट्र में पीपीई किटों की अधिकतम संख्या 1,22,133 थी, जबकि सबसे कम तेलंगाना में पीपीई किटों की संख्या 3,132 थी।
उसी पर प्रतिक्रिया देते हुए तेलंगाना के मंत्री केटीआर ने इंडिया टुडे और राहुल कंवल को उनकी गलत रिपोर्टिंग के लिए लताड़ा था। एक ट्वीट में केटीआर ने राहुल कंवल से कहा था कि अगर आपके पास सही जानकारी नहीं है तो इस संकट के समय में ‘बकवास और भ्रमित करने वाला डेटा’ प्रकाशित न करें।
केटी रामराव ने कहा कि क्या इंडिया टुडे और राहुल कंवल माफी मांगेंगे, अगर उन्होंने साबित किया कि तेलंगाना के पास इंडिया टुडे द्वारा पेश किए गए आँकड़ों से 100 गुना ज्यादा पीपीई किट हैं। तेलंगाना के मंत्री ने आगे ट्वीट में लिखा था, “क्षमा करें, लेकिन यह अपमानजनक पत्रकारिता है राजदीप सरदेसाई।”