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फर्जी भारतीय पहचान पत्र बनवाने का था प्लान, लेकिन डांस बार में मुंबई के रईसजादों को पैसे लूटाते देख बदला इरादा: बांग्लादेश भागना चाहता था सैफ अली खान को चाकू मारने वाला शहजाद

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हमला करने वाले आरोपित मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद से पूछताछ में नई बातें सामने आई है। पड़ताल के दौरान उसने पुलिस को बताया है कि पहले उसे फर्जी भारतीय पहचान पत्र बनवाने के लिए पैसे चाहिए थे, लेकिन बाद में जब उसने मुंबई में अमीर लोग देखे, उन्हें पैसे उड़ाते देखा, तो उसका इरादा बदल गया। उसने सोचा कि अगर किसी अमीर व्यक्ति के घर चोरी करके ज्यादा रुपए हाथ लग जाएँ तो वो भागकर बांग्लादेश वापस चला जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स में जहाँ जानकारी आई थी कि वो हाउकीपिंग का काम करता था वहीं अब बताया जा रहा है कि शरीफुल ने मुंबई के डांस बार में भी काम किया था। यहीं उसने अमीर लोगों को जगह-जगह पैसे उड़ाते देखा और सोचा कि उसे भी इतने पैसे कमाने हैं। इसके बाद जल्दी में ज्यादा पैसे पाने की चाह में उसने बांद्रा इलाके को टारगेट पर लिया और सैफ अली खान के घर को चोरी के लिए चुना।

बताया जा रहा है कि शरीफुल का मकसद सैफ के घर में पहले चोरी करना था। इसके लिए वो सीढ़ियों के रास्ते 7वें फ्लोर तक चढ़ा और फिर शाफ्ट एरिया में जाकर पाइप के जरिए 12वीं मंजिल तक पहुँचा। उसे लगा था कि जिस टाइम में वो घर में घुस रहा है तब तक सब सो गए होंगे और वो चोरी करके निकल जाएगा।

हालाँकि, मेड की नजर उस पर पड़ते ही वो चिल्ला पड़ीं और सैफ-करीना अपने कमरे से बाहर आ गए। शहजाद ने खुद को चारों ओर से घिरा पाकर 1 करोड़ रुपए की माँग की। जब सैफ उसे पकड़ने आगे बढ़े तो उसने चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया और फिर फरार हो गया।

खबरों के मुताबिक, शहजाद न्यूज में पुलिस एक्शन देख देखकर अपने कदम आगे बढ़ा रहा था। उसे पकड़ने में पुलिस को 72 घंटे का समय लग गया। अब पुलिस पूरे क्राइम सीन को दोबारा से रीक्रिएट करवाएगी ताकि समझा जा सके कि उस दिन शहजाद ने क्या-क्या किया था। वहीं सैफ अली खान की बात करें तो पता हो कि सैफ डॉक्टर की निगरानी में हैं।

मुल्ला अफरोज ने की थी संभल हिंसा में बिलाल-अयान की हत्या, दुबई में रहने वाले गाड़ी चोर शारिक साठा का है गुर्गा: पुलिस पर फायरिंग का आरोप लगाने वालों के मुँह सिले, 9 पत्थरबाज भी पकड़ाए

संभल में नवम्बर में माह में हुई हिंसा में दो लोगों की हत्या करने के आरोपित मुल्ला अफरोज को पुलिस ने पकड़ा है। मुल्ला अफरोज ने पुलिस को निशाना बनाकर गोली चलाई थी लेकिन यह दो मुस्लिम युवकों के लगी, जिससे वह मारे गए। अफरोज शारिक साठा गैंग का गुर्गा है। पुलिस ने उसके पास से हथियार भी बरामद किए हैं।

यूपी पुलिस ने रविवार (19 नवम्बर, 2025) को मुल्ला अफरोज को पकड़ा है। वह संभल शहर का ही रहने वाला है। उसके पास से पुलिस को 32 बोर की एक पिस्टल और पुलिस से लूटे गए कारतूस भी बरामद हुए हैं। मुल्ला अफरोज दुबई में रहने वाले ऑटोलिफ्टर गैंग के सरगना शारिक साठा का गुर्गा है।

उसने पुलिस पूछताछ में बताया है कि शारिक साठा ने ही उन लोगों को हथियार मुहैया करवाए थे और हिंसा की साजिश रची थी। मुल्ला अफरोज ने बताया है कि शारिक साठा ने एक साथी के जरिए हिंसा का पूरा प्लान खींचा था और 24 नवम्बर, 2024 को मस्जिद के बाहर नेताओं द्वारा इकट्ठा भीड़ को निशाना बनाने की बात कही थी।

मुल्ला अफरोज ने बताया है कि इस साजिश के तहत 10-20 लोगों की हत्या की जानी थी, जिसमें आमलोगों और पुलिस को निशाना बनाया जाना था। मुल्ला अफरोज के अलावा और भी लोगों को इस काम के लिए हथियार मिले थे। जब 24 नवम्बर, 2024 को मस्जिद के बाहर मुस्लिम भीड़ ने हिंसा चालू की तो इसी में शामिल अफरोज फायरिंग करने लगा।

अफरोज ने पुलिस को निशाना बनाया लेकिन भगदड़ मचने के कारण यह गोली बिलाल और अयान को लग गई और वह मौके पर ही मारे गए। इस हत्या के लिए उसने 32 बोर का एक हथियार उपयोग किया था। इसके बाद वह छिप गया था। पुलिस ने अब उसे ढूंढ निकाला है।

मुल्ला अफरोज की गिरफ्तारी के बाद इस हिंसा में हुई मौतों के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताने वालों के भी मुँह सिल गए हैं। पुलिस पहले ही बता चुकी है कि आपसी फायरिंग में ही इस हिंसा में 4 लोग मारे गए थे। हालाँकि, मृतकों के परिवार समेत बाकी कॉन्ग्रेस के नेताओं ने पुलिस वालों पर ही मुकदमा दर्ज करने की बात कही थी।

पुलिस शारिक साठा गैंग की भी संलिप्तता भी बता चुकी है। शारिक साठा संभल का रहने वाला है और देश के कुख्यात ऑटोलिफ्टर में से एक है। वह भारत से लक्ज़री गाड़ियाँ चुरा कर नेपाल और बाकी जगह भेजता था। उसे पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था लेकिन बाद में वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे दुबई भाग गया था।

पुलिस ने संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज के अलावा 9 पत्थरबाज भी पकड़े हैं। इन सभी को पुलिस ने जेल भेज दिया है। पुलिस ने बताया है कि अब तक वह हिंसा मामले में 70 उपद्रवी पकड़ चुकी है। पुलिस इस हिंसा के बाकी आरोपितों की भी पहचान कर दबिश दे रही है।

प्रयागराज महाकुंभ में जिस गीता प्रेस के 180 टेंट हुए राख, उसके ट्रस्टी बोले- पश्चिम दिशा से किसी ने फेंकी आग: पुलिस बता रही गैस रिसाव, साजिश का अंदेशा गहराया

प्रयागराज महाकुंभ मेला क्षेत्र के सेक्टर-19 में रविवार (19 जनवरी 2025) को भीषण आग लग गई, जिसमें करीब 250 टेंट जलकर खाक हो गए। यह आग गीता प्रेस गोरखपुर और अखिल भारतीय धर्म संघ करपात्र धाम वाराणसी के संयुक्त शिविर में लगी। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन करोड़ों रुपये का सामान नष्ट हो गया। आग लगने की वजह को लेकर गीता प्रेस के ट्रस्टी और पुलिस के बीच बयान अलग-अलग हैं, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गीता प्रेस के ट्रस्टी कृष्ण कुमार खेमकर ने इस घटना को बाहरी साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि पश्चिम दिशा की ओर से किसी ने आग की कोई चीज फेंकी, जिससे शिविर में चिंगारी उठी और यह धीरे-धीरे बड़ी आग में तब्दील हो गई। उनका दावा है कि शिविर में आग से बचाव के लिए सभी प्रकार की सावधानियाँ बरती गई थीं। उन्होंने कहा कि शिविर के अंदर आग से जुड़ी किसी भी गतिविधि की सख्त मनाही थी, फिर भी आग ने इतना बड़ा रूप ले लिया। खेमकर के अनुसार, यह शिविर 180 टेंटों का एक बड़ा क्षेत्र था, जिसमें से अब कुछ भी नहीं बचा।

वहीं, पुलिस ने आग लगने का कारण सिलेंडर में गैस रिसाव को बताया है। पुलिस के मुताबिक, एक टेंट में गैस लीक होने के बाद आग लगी, जो तेज हवा के कारण तेजी से फैल गई। आग की चपेट में आने से सिलेंडरों में एक के बाद एक कई विस्फोट हुए, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। डीआईजी महाकुंभ वैभव कृष्ण ने कहा कि घटना के दौरान फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया। फिलहाल घटना की विस्तृत जाँच की जा रही है।

इस आगजनी के दौरान मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। श्रद्धालु अपने सामान और टेंट छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। चश्मदीदों ने बताया कि आग की लपटें इतनी ऊँची थीं कि दूर से ही धुआँ और आग का गुबार देखा जा सकता था। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को काबू में लाया गया, लेकिन तब तक 250 से अधिक टेंट पूरी तरह जल चुके थे।

खुद मौके पर पहुँचे सीएम योगी, पीएम मोदी ने भी ली जानकारी

घटना के समय समय मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या की तैयारियों की समीक्षा कर रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद घटनास्थल पर पहुँचे और अधिकारियों को पीड़ित श्रद्धालुओं की हरसंभव मदद करने का निर्देश दिया। उन्होंने आग से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और उनके लिए आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुख्यमंत्री से हादसे की जानकारी ली और स्थिति पर नजर बनाए रखने को कहा।

फिलहाल की शुरुआती जाँच के अनुसार, यह आग सिलेंडर में गैस रिसाव के कारण लगी, लेकिन गीता प्रेस ट्रस्टी के दावे ने इस घटना को लेकर साजिश की आशंका खड़ी कर दी है। घटना के बाद पूरे मेला क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया गया है और प्रशासन ने सभी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।

‘अम्मी ने मुझे पैदा किया, इसलिए उन्हें हँसिये से काट डाला’: केरल में नशेड़ी बेटे ने सुबैदा को उतारा मौत के घाट, पकड़े जाने के बाद पुलिस को वजह बताई

केरल के कोझिकोड में एक ड्रग एडिक्ट युवक ने अपनी अम्मी की हत्या कर दी। वह लगातार अपनी अम्मी से झगड़ता रहता था। उसकी अम्मी ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के बाद आराम कर रही थी। उसने अपनी अम्मी की हत्या एक हँसिये से की। आरोपित युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना कोझिकोड के थमारास्सेरी में हुई। यहाँ शनिवार को अपनी बहन शकीला के घर में रह रही सुबैदा को उसके 25 वर्षीय बेटे आशिक ने मार दिया। आशिक दिन में ही अपने पड़ोसी के घर से एक हँसिया माँग कर लाया और अम्मी की उससे हत्या कर दी। पड़ोसी जब घटनास्थल पर पहुँचे तो उन्हें खून से लथपथ आशिक दिखाई पड़ा।

आरोपित आशिक अपनी अम्मी सुबैदा से लगातार झगड़ता रहता था। आशिक एक ड्रग एडिक्ट है और वह इसी के लिए पैसे माँगा करता था। सुबैदा कई बार आशिक को नशामुक्ति केंद्र में भेज चुकी थी और इस पर लाखों रूपए भी खर्च कर चुकी थी लेकिन आशिक पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

आशिक अपनी अम्मी सुबैदा की सम्पत्ति भी बेचना चाहता था। उसकी अम्मी सुबैदा का हाल ही में ब्रेन ट्यूमर के चलते ऑपरेशन हुआ था और वह वर्तमान में आराम कर रही थी। इसी बीच दोनों के बीच झगड़ा हुआ और उसने अपनी माँ को मार दिया। हालाँकि, यह सामने आया है कि हत्या करने के समय आशिक नशे में नहीं था।

सुबैदा को कुछ साल पहले उसके पति ने छोड़ दिया था और वह खुद काम करके अपने परिवार का गुजारा करती थी। मामले में घटना के बाद पुलिस ने हत्यारे बेटे आशिक को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके पूछताछ कर रहे हैं।

पुलिस पूछताछ में उसने अपनी अम्मी की हत्या का कारण ‘उसे जन्म देना’ बताया है। आशिक ने पुलिस से कहा कि वह अपनी माँ को जन्म देने के लिए सजा देना चाहता था, इसीलिए हँसिये से उसकी हत्या कर दी। आशिक सुबैदा का अकेला लड़का था। पुलिस ने मृतका की नमाज ए जनाजा करवा दी है।

लंदन में ‘इमरजेंसी’ की स्क्रीनिंग रुकवाने हॉल में घुसे खालिस्तानी, जमकर मचा हंगामा: दर्शकों से की मुँह-जोरी, भारत सरकार के खिलाफ लगाए नारे

लंदन के हरो सिनेमा हॉल ( Harrow cinema London ) में कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी की स्क्रीनिंग के दौरान खालिस्तानी कट्टरपंथियों ने जमकर हंगामा किया। जानकारी के मुताबिक, यूके की राजधानी लंदन में खालिस्तानी कट्टरपंथियों का ग्रुप अचानक सिनेमा हॉल में घुस आया और ‘इमरजेंसी’ फिल्म का विरोध करते हुए ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने लगा। इस हंगामे से सिनेमा हॉल में अफरा-तफरी मच गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हंगामा कर रहे खालिस्तानी समर्थक फिल्म को तुरंत रुकवाने की माँग कर रहे थे। उनका आरोप था कि यह फिल्म सिख समुदाय को गलत तरीके से पेश करती है। इस दौरान सिनेमा हॉल में मौजूद दर्शकों के साथ उनकी तीखी बहस भी हुई। कट्टरपंथी समर्थक फिल्म को रोकने के लिए दबाव बना रहे थे, जबकि दर्शकों ने उनका विरोध किया और फिल्म को जारी रखने की माँग की।

घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं, जिनमें यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि खालिस्तानी समर्थक सिनेमा हॉल के अंदर नारे लगा रहे हैं और दर्शकों से उलझ रहे हैं। इस हंगामे के बावजूद सिनेमा हॉल प्रशासन ने अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। हालाँकि सिनेमा हॉल प्रशासन ने घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएँ न दोहराई जाएँ, इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी।

घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और सिनेमा हॉल के सीसीटीवी फुटेज की जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि, अब तक किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जाँच जारी है। इस बीच यूके में कम से कम 3 जगहों पर ‘इमरजेंसी’ फिल्म की स्क्रीनिंग रोके जाने की भी रिपोर्ट्स आ रही हैं।

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और 1970 के दशक में लगाए गए आपातकाल की सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म इमरजेंसी शुरू से ही विवादों में रही है। फिल्म की कहानी को लेकर सिख संगठनों ने विरोध जताया था। उनका कहना था कि फिल्म में सिख समुदाय को नकारात्मक रूप में दिखाया गया है। इसी वजह से पंजाब में कई सिनेमा हॉल ने इस फिल्म को रिलीज करने से मना कर दिया।

फिल्म की रिलीज पहले सितंबर 2024 में होने वाली थी, लेकिन सेंसर बोर्ड ने इसे प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया। इसके बाद, फिल्म के निर्माताओं को कुछ बदलाव करने और कट्स लगाने के बाद इसे दोबारा सेंसर बोर्ड के पास जमा करना पड़ा। अंततः फिल्म 17 जनवरी 2025 को रिलीज हुई।

IIT मद्रास के डायरेक्टर ने ‘गौमूत्र’ में बताए औषधीय गुण… कॉन्ग्रेस-DMK नेताओं से नहीं हुआ बर्दाश्त: माफी मँगवाने पर अड़े, प्रदर्शन की भी धमकी; BJP नेता अन्नामलाई समर्थन में उतरे

IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर वी कामकोटी ने गौमूत्र के औषधीय गुणों के की तारीफ़ की है। उन्होंने गौमूत्र से एक साधु का बुखार ठीक होने की घटना भी बताई है। उनके इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस और DMK के नेता भड़क गए हैं। उनके इस बयान का तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बचाव किया है।

प्रोफ़ेसर वी कामकोटी ने गौमूत्र की यह तारीफ़ चेन्नई में एक कार्यक्रम में की। यह कार्यक्रम पोंगल के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गौमूत्र में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और पाचक गुण होते हैं। उन्होंने कहा कि गौमूत्र पेट की समस्याओं के लिए भी अच्छी दवा है। उन्होंने इसके बाकी औषधीय गुण भी बताए।

प्रोफ़ेसर कामकोटी ने गौमूत्र की विशेषता बताए हुए कहा इससे बुखार कम होने की बात कही। उन्होंने इस बीच एक सन्यासी का नाम भी लिया। प्रोफ़ेसर कामकोटी ने गौमूत्र के यह गुण आर्गेनिक फार्मिंग के फायदे बताते हुए गिनाए।

उन्होंने कहा, “अगर हम उर्वरकों का खाद का करेंगे तो हम भूमि माता को भूल जाएँगे। जितनी जल्दी हम जैविक, प्राकृतिक खेती की ओर रुख करेंगे, हमारे लिए उतना ही बेहतर होगा।” उन्होंने गोवंश की देशी नस्लों की वकालत भी की और। उन्होंने इसके अर्थव्यवस्था और खेती में महत्व पर भी बात की।

प्रोफ़ेसर कामकोटी के इस बयान पर DMK और कॉन्ग्रेस नेता भड़क गए। कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसे झूठा विज्ञान और गलत करार दिया। DMK के एक नेता ने इसे देश में शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का प्रयास बताया। तमिलनाडु के बाकी पेरियार समर्थक संगठनों ने इस बयान पर माफी की माँग की। उन्होंने प्रदर्शन की भी धमकी दी।

प्रोफ़ेसर कामकोटी के बयान का तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बचाव किया है और इसके राजनीतिकरण ना किए जाने की अपील की है। उन्होंने कहा, “IIT मद्रास के डायरेक्टर क्वांटम फिजिक्स के विशेषज्ञ हैं और वे शीर्ष सरकारी एजेंसियों के सदस्य भी रहे हैं। वह अपनी धार्मिक मान्यताओं और गाय के प्रति सम्मान में दृढ़ हैं, जो कहीं से गलत नहीं है।”

अन्नामलाई ने आगे कहा, “उन्होंने किसी को गाय का मूत्र पीने के लिए मजबूर नहीं किया और केवल अपनी मान्यताओं को व्यक्त किया। हमें ऐसे बयानों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। IIT-M के डायरेक्टर तमिलनाडु से हैं, जो हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। मैं उन्हें जानता हूँ और मैं इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहता।”

कभी गुजरना कश्मीरी पंडितों के मुहल्लों से भी… नरसंहार की बरसी पर छलका अनुपम खेर का दर्द, कहा- जिन 5 लाख हिंदुओं को बेरहमी से निकाला, उनके घर अभी भी वहीं हैं

कश्मीर पंडितों के नरसंहार के 35 साल होने पर बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने आज सोशल मीडिया पर एक कविता साझा की। इस कविता में उन्होंने विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों के दर्द बयां किया। कैप्शन में उन्होंने बताया कि ये कविता एक विस्थापित कश्मीरी पंडित सुनयना काचरू की है।

कविता थी- कश्मीरी पंडितों के घर

खूबसूरत डल झील से बस 4-5 किलोमीटर दूर
केसर की महक से लबरेज
बाजारों से पास ही पशमीना शॉल की दुकान के पीछे
पुराने शहर की तंग गलियों में
झेलम नदी के बूढ़े गले किनारों पर
याद और यादश्त की तारों में उलझे

अधजली चिताओं से घर
जो पोस्टकार्ड पर नहीं बिकते
न फिल्मों में दिखते हैं
ये भी तो कश्मीर ही है न

खिड़कियों के टूटे हुए चुभते शीशे
पुश्तैनी छतों से रिसते हुए पानी की छीटों से नम बूढ़ी यादें
आँगन पर कब्जा किए हुए
दीमक लगे मौसम, खुद से टकराती धूप
ऐसे गुजरती हैं यहाँ से जैसे रातों के सन्नाटों को चीर
मौत सूँघ का निकली हो यहाँ से
कभी गुजरना कश्मीरी पंडितों के मुहल्लों से भी
बिलखती हुई कहानी पैर पकड़ लेगी
यतीमखानों में फँसे बच्चे की तरह
जिसे न कोई अपनाता है न इंसाफ दिलाता है

इस कविता पाठ को करते हुए अनुपम खेर ने कैप्शन में लिखा- “19 जनवरी, 1990 कश्मीरी हिंदुओं का पलायन दिवस। 35 साल हो गए हैं, जब 5,00,000 से ज्यादा हिंदुओं को उनके घरों से बेरहमी से निकाल दिया गया था। वे घर अभी भी वहीं हैं, लेकिन उन्हें भुला दिया गया है। वे खंडहर हैं। इस त्रासदी की शिकार सुनयना काचरू भिडे ने उन घरों की यादों के बारे में दिल छूने वाली एक कविता लिखी। कविता की ये पंक्तियाँ उन सभी कश्मीरी पंडितों को वह मंजर याद दिला देंगी, जो इस भीषण त्रासदी के शिकार हुए थे। यह दुखद और सत्य दोनों है।”

बता दें कि अनुपम खेर ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ में भी अहम रोल निभाया था। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे इस्लामी आतंकियों के कारण लाखों कश्मीरी हिंदू परिवारों को अपनी जमीन और संपत्ति छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। वहीं सैंकड़ों कश्मीरी पंडित मारे गए थे।

जिस भारत की खाते हैं उसी से जंग की बात कर गए राहुल गाँधी, फिर भी क्लीनचिट दे रहा था ‘द लल्लनटॉप’: रजत सेठी ने दुरुस्त किया तो लाइन पर आए सौरव द्विवेदी

द लल्लनटॉप के संपादक ‘पत्रकार’ सौरभ द्विवेदी ने 18 जनवरी को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के विवादित बयान का बचाव करने की कोशिश की, लेकिन उनका यह प्रयास उल्टा पड़ गया। दरअसल, राहुल गाँधी ने हाल ही में भारतीय राज्य (Indian State) के खिलाफ अपनी लड़ाई की बात कही थी, जिस पर विवाद हो गया था। इस मामले में लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने बीजेपी को ही घेरने की कोशिश की और राहुल गाँधी के बयान का बचाव किया। ये अलग बात है कि शो में मौजूद राजनीतिक विश्लेषक रजत सेठी ने उन्हें आईना दिखाने में देरी नहीं की, जिसके बाद सौरभ द्विवेदी अपने दावे से पीछे हटते नजर आए।

राहुल गाँधी के बयान और बीजेपी के हमलों के बीच सौरभ द्विवेदी ने 18 जनवरी को अपने शो ‘नेता नगरी’ में राजनीतिक विश्लेषक रजत सेठी के साथ बातचीत के दौरान राहुल गाँधी का बचाव किया। सौरभ ने कहा, “जेपी नड्डा कह रहे हैं कि राहुल गाँधी ने भारत के खिलाफ लड़ाई की बात की है। जबकि राहुल गाँधी ने अपने भाषण में भारतीय सरकार (Indian Government) के खिलाफ लड़ाई का जिक्र किया था। भाजपा उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है।” सौरभ ने दावा किया कि राहुल गाँधी ने ‘बीजेपी, आरएसएस और भारतीय सरकार के खिलाफ’ लड़ाई की बात कही।

हालाँकि, रजत सेठी ने सौरभ द्विवेदी की इस बात को तुरंत गलत ठहराया। उन्होंने कहा, “सौरभ जी, राहुल गाँधी ने भारतीय सरकार नहीं, बल्कि भारतीय राज्य (Indian State) का जिक्र किया था। उन्होंने यह बयान अंग्रेजी में दिया था और उनके शब्द साफ-साफ थे।”

रजत सेठी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “भारतीय राज्य का मतलब भारतीय संविधान, उसकी संस्थाएँ और उसकी संरचना से है। राहुल गाँधी ने जो कहा, वह एक बड़ी चूक हो सकती है, लेकिन इसके निहितार्थ गंभीर हैं। अगर कोई भारतीय राज्य के खिलाफ बोलता है, तो यह देशद्रोह के दायरे में आता है। राहुल गाँधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि उनकी लड़ाई और युद्ध भारतीय राज्य के खिलाफ है। वो कोई आम आदमी नहीं, बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं।”

सौरभ द्विवेदी ने आखिरकार रजत सेठी की बात मानते हुए कहा, “हाँ, राहुल गाँधी ने अपने बयान में भारतीय सरकार नहीं, बल्कि भारतीय राज्य कहा था। यह मेरे द्वारा दी गई जानकारी में गलती थी।”

क्या है पूरा मामला?

14 जनवरी को नई दिल्ली में कॉन्ग्रेस के नए हेडक्वार्टर के उद्घाटन के अवसर पर राहुल गाँधी ने अपने संबोधन में कहा, “यह मत सोचिए कि हम एक निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर आप यह मानते हैं कि हम भाजपा और आरएसएस जैसे एक राजनीतिक संगठन से लड़ाई लड़ रहे हैं, तो यह सही नहीं है। उन्होंने देश की लगभग हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हम सिर्फ भाजपा और आरएसएस से नहीं, बल्कि भारतीय राज्य (Indian State) से लड़ रहे हैं।”

राहुल गाँधी के इस बयान पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी खुलकर देश के खिलाफ बोल रहे हैं। यह कॉन्ग्रेस की मानसिकता को दिखाता है, जो देश के खिलाफ षड्यंत्र कर रही है।”

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “राहुल गाँधी का यह बयान देश के खिलाफ है। भारतीय राज्य का मतलब संविधान और उसकी संरचनाओं से है। ऐसे में राहुल गाँधी का यह बयान संविधान का अपमान है। कॉन्ग्रेस को इस पर तुरंत सफाई देनी चाहिए।”

बहरहाल, राहुल गाँधी के ‘भारतीय राज्य से लड़ाई’ वाले बयान ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा इसे देशविरोधी बयान करार दे रही है, जबकि कॉन्ग्रेस इसे भाजपा और आरएसएस के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बता रही है। इस विवाद में सौरभ द्विवेदी का राहुल गाँधी का बचाव करना और फिर अपनी गलती मानना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि इस बयान का आगामी चुनावों में कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर क्या असर पड़ता है।

प्रयागराज महाकुंभ में लगी आग दुर्घटना या साजिश? पता करने में जुटी UP पुलिस, गीता प्रेस के टेंट से निकलकर फैली: मेला क्षेत्र में जायजा लेने खुद पहुँचे CM योगी

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज महाकुंभ मेले में रविवार (19 जनवरी 2025) को आग लग गई। कहा जा रहा है कि यह आग खाना बनाते समय एक टेंट में लगी और यह दूसरे टेंटों में भी फैल गई। इसके कारण टेंटों में रखे गैस सिलेंडरों में लगातार ब्लास्ट हुए। कहा जा रहा है कि अब तक लगभग 20-25 (कुछ रिपोर्ट में 50) टेंट जल चुके हैं। मौके पर दमकल की कई गाड़ियाँ बुलाई गई हैं। हालात फिलहाल नियंत्रण में है।

यह आग अखाड़े से आगे वाली सड़क पर लोहे के एक ब्रिज के नीचे लगी। यह घटना कुंभ मेले के सेक्टर-19 इलाके में हुई है। पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। वहाँ हवा तेज चलने के कारण आग के और फैलने का खतरा बना हुआ है। कुछ लोगों के झुलसने की बात भी कही जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद हालात का जायजा लेने के लिए खुद महाकुंभ क्षेत्र में पहुँचे हुए हैं।

आग के कारण आसमान में धुएँ का गुबार दिखाई दे रहा है। कहा जा रहा है कि जिस शिविर में आग लगी वह धर्म संघ का शिविर है। इस आग में अब तक 50 से अधिक शिविर जलने की बात कही जा रही है। सेक्टर-20 में स्थित गीता प्रेस गोरखपुर का शिविर भी चपेट में आ गया है। मौके पर एनडीआरएफ की 4 टीमें​​​​​​,​ फायर ब्रिगेड की 12 से अधिक गाड़ियाँ और एंबुलेंस मौके पर पहुँच गई हैं।

एक अन्य रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि विवेकानंद सेवा समिति वाराणसी के टेंट में खाना बनाते हुए आग लगी है। हालाँकि, असली वजह का पता किया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि अब तक 20 से अधिक सिलेंडर ब्लास्ट हो चुके हैं। हालात को सँभालने के लिए वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँच गए हैं। इनमें मेलाधिकारी विजय किरण आनंद और मेला क्षेत्र के SSP राजेश द्विवेदी भी शामिल हैं।

राजेश द्विवेदी का कहना है कि सेक्टर-19 में गीता प्रेस के कैंप में आग लगी थी। आग पर काबू पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि कोई कैजुअल्टी नहीं हुई है। बता दें कि टेंटों के जलने, सिलेंडर ब्लास्ट होने और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की संख्या को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट में अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

वहीं, प्रयागराज के डीएम रविंद्र कुमार ने बताया, “सेक्टर 19 में गीता प्रेस के टेंट में शाम 4.30 बजे आग लग गई। आग आस-पास के 10 टेंटों में फैल गई। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है। आग बुझा दी गई है। किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। स्थिति नियंत्रण में है…।”

वहीं, महाकुंभ मेला डीआईजी वैभव कृष्ण ने कहा, “गीता प्रेस के टेंट में आग लग गई। किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। आग से हुए नुकसान का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है। आग पर काबू पा लिया गया है। यह जाँच का विषय है (आग की घटना के पीछे का कारण)। केवल टेंट और कुछ चीजें जली हैं।”

बिहार चुनाव से पहले जाति के जिस गुब्बारे को फूला रहे थे तेजस्वी यादव, उसमें राहुल गाँधी ने ही कर दिया भूर: कॉन्ग्रेस नेता ने किया सेल्फ गोल या लालटेन की लौ हुई कम?

कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गाँधी शनिवार (18 जनवरी 2025) को एकदिवसीय दौरे पर बिहार की राजधानी पहुँचे। यहाँ उन्होंने एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और बिहार के महागठबंधन के सबसे बड़े सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुखिया लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गाँधी ने एक कार्यक्रम में कुछ ऐसा बोल दिया कि बिहार की राजनीति का तापमान बढ़ गया।

‘संविधान सुरक्षा सम्मेलन’ में बोलते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि बिहार की जातीय जनगणना फेक है और लोगों को बेवकूफ बनाने वाला है। इससे सच्ची स्थिति का आकलन नहीं हो पाया है और ना ही इसका लाभ राज्य के लोगों को मिला है। राहुल गाँधी ने कहा कि वह पूरे देश में जाति गणना कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में कानून पास कराएँगे। उन्होंने इसे देश का एक्स-रे और एमआरआइ जैसा बताया।

राहुल गाँधी ने कहा कि इसके आधार पर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक भागीदारी तय की जाएगी। वर्तमान में किसकी कितनी भागीदारी है, इसका आकलन होने के बाद ही देश का सही तरीके से विकास संभव है। उन्होंने आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी देने का समर्थन किया। राहुल गाँधी ने आरक्षण की सीमा को भी 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की बात कही और कहा कि वे ऐसा जरूर करेंगे।

राहुल गाँधी ने बिहार की जातीय गणना को फेक बताकर बिहार की राजनीति में दबाव बना दिया है। दरअसल, राहुल गाँधी ने पटना में तय कार्यक्रम को उलट दिया। वे पहले बापू सभागार में आयोजित ‘संविधान सुरक्षा सम्मेलन’ में बोलने वाले थे। उसके बाद राजद के नेताओं से मिलने वाले थे, लेकिन एयरपोर्ट से वे सीधे मौर्या होटल पहुँचे और वहाँ राजद के कार्यकारिणी की बैठक के बीच तेजस्वी यादव से काफी देर तक बंद कमरे में बातचीत की। हालाँकि, यह मुलाकात और वो भी इतनी जल्दी में करने की क्या वजह थी, इसको लेकर स्पष्ट रूख नहीं है।

हालाँकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गाँधी की यह मुलाकात कुछ दिन पहले तेजस्वी यादव द्वारा INDI गठबंधन को लेकर दिए बयान के संदर्भ में थी। दरअसल, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कुछ दिन पहले कह दिया था कि इस चुनाव में कोई ‘खेला’ नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि लोकसभा चुनाव के लिए बने ‘INDI’ गठबंधन का अब अस्तित्व नहीं है। हालाँकि, बिहार में ‘महागठबंधन’ की प्राथमिकता पर उन्होंने बल दिया।

INDI गठबंधन के खत्म होने के लेकर पहले भी बयानबाजी होती रही है। राजद सुप्रीमो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान का समर्थन कर चुके हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि राहुल गाँधी से INDI गठबंधन नहीं संभल रहा है और वे इसका नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। तब लालू यादव ने खुलेआम ममता बनर्जी की तरफदारी की थी और कहा था कि उन्हें मौका दिया जाना चाहिए।

ऐसे में राहुल गाँधी की पटना यात्रा के दौरान माना जाता है कि उनकी तेजस्वी यादव के साथ इसी मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई। इसमें INDI गठबंधन के अस्तित्व को नकारने और जरूरत पड़ने की गठबंधन का नेतृत्व ममता बनर्जी को देने को लेकर भी चर्चा है। जानकारों का कहना है कि तेजस्वी यादव अपने बयान पर अडिग रहे और उन्होंने राहुल गाँधी को कोई स्पष्ट भरोसा नहीं दिया और पूरा फोकस बिहार विधानसभा चुनाव पर रखने की बात कही।

यह बात राहुल गाँधी को नहीं जँची। वहाँ से निकल राहुल गाँधी संविधान सुरक्षा सम्मेलन में पहुँचे और तेजस्वी यादव के जाति जनगणना के दावे की हवा निकाल दी। राहुल गाँधी ने बिहार की जातीय सर्वे को फेक बता दिया। इस जातीय गणना का पूरा श्रेय लेने की कोशिश तेजस्वी यादव करते रहे हैं। ये कई मौकों पर कह चुके हैं कि उनके दबाव में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में जातीय जनगणना कराई थी।

बिहार की जातीय गणना को फेक बताकर राहुल गाँधी ने एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है। एक तरफ वो दलित एवं पिछड़ों में ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि नीतीश कुमार और तेजस्वी द्वारा कराया गया जातीय सर्वे में आँकड़े सही नहीं हैं और दूसरा तेजस्वी यादव द्वारा इस गणना का श्रेय लेने की कोशिश पर भी पानी फेर दिया है। वहीं, नीतीश कुमार के हाथ से भी इस मुद्दे को छीन लिया है।

दरअसल, जिस वक्त नीतीश कुमार की जदयू और तेजस्वी का राजद की गठबंधन वाली सरकार ने यह जातीय गणना कराया था, उस सरकार में राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस भी सहयोगी थी। इसके बावजूद उन्होंने इस पर सवाल उठा दिया है। दरअसल, इसके पीछे राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस के कभी समर्पित वोटर रहे दलितों में पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश के तौर पर बनाई गई रणनीति भी माना जा रहा है।

ऐसे में अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करके इनके दो प्रमुख नेतृत्वों पर निशाना साध रहे हैं। इनमें पहला निशाना नीतीश कुमार हैं और दूसरा तेजस्वी यादव। एक अन्य कारण अगले कुछ महीनों में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों में टिकट बँटवारे को लेकर दबाव बनाने की राजनीति भी है। पिछले कुछ समय से मीडिया में लगातार खबर आ रही है कि कॉन्ग्रेस बिहार चुनाव में उसे अधिक सीटें देने का दबाव बना रही है।

शायद INDI गठबंधन को नकार कर तेजस्वी यादव यही संदेश देने की कोशिश कर रहे थे कि राष्ट्रीय स्तर पर कॉन्ग्रेस का कोई सहयोगी नहीं, लेकिन में वहीं उसकी नैया पार कराने वाली पार्टी है। इसलिए जो सीटें दी जा रही हैं वे उसे स्वीकार कर लें। हालाँकि, राहुल गाँधी ने अपने बयान में तेजस्वी यादव के मुख्य मुद्दे पर प्रहार करके उन्हें राजनीति के मैदान में शस्त्रविहीन कर दिया है।

बता दें कि तेजस्वी ने जातीय गणना को ही बिहार चुनावों में मुख्य मुद्दे के रूप में पेश करने की बात कही थी। तेजस्वी यादव नेे कहा था, “हमने विकास के साथ-साथ जाति आधारित गणना कराई और आरक्षण की सीमा भी बढ़ाई। हमने जो कहा, वह किया।” दरअसल, जल्दबाजी में पिछली सरकार ने बिहार में आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दिया था, जिस पर पटना हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है।

बिहार में जातीय गणना की बात राहुल गाँधी ने बहुत सोच-समझ कर की है। उन्हें पता है कि बिहार में चुनाव का मुख्य केंद्र जाति ही होती है। जातीय गोलबंदी के आधार पर ही यहाँ टिकट के बँटवारे से लेकर गठबंधन तक की राजनीति होती है। ऐसे में तेजस्वी यादव पर एक तरह महागठबंधन को सम्मानजनक तरीके से बनाए नैतिक भार डाल दिया है।