Home Blog Page 491

मुसीबुल शेख ने ‘प्रदीप’ नाम से बनवाए फर्जी दस्तावेज, लिव-इन में रहने लगा हिंदू लड़की के साथ: खुफिया इनपुट पर सूरत पुलिस ने पकड़ा, पूछताछ में बोला- ‘निकाह’ का था इरादा

गुजरात के सूरत में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 26 वर्षीय मुसीबुल मकबूल शेख ने खुद को हिंदू प्रदीप क्षेत्रपाल बताकर एक हिंदू लड़की को प्रेमजाल में फंसाया। पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के रहने वाले मुसीबुल ने सूरत में हिंदू इलाके में झूठी पहचान के सहारे एक मकान किराए पर लिया और नेपाली मूल की हिंदू लड़की के साथ लिव-इन में रहने लगा। यह साजिश तब खुली, सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को उसकी फर्जी पहचान के बारे में गुप्त सूचना मिली।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुसीबुल ने मोबाइल एप्लिकेशन की मदद से एक फर्जी आधार कार्ड तैयार किया था, जिसमें उसने अपना नाम प्रदीप सुजय क्षेत्रपाल बताया। यह सब उसने इसलिए किया क्योंकि मुस्लिम पहचान के कारण उसे हिंदू बहुल इलाके में मकान किराए पर नहीं मिल रहा था और उसे अपनी पहचान भी छिपानी थी। पुलिस जाँच में पता चला कि वह पिछले पाँच महीने से झूठे दस्तावेजों के सहारे हिंदू बनकर वहाँ रह रहा था।

जानकारी के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले मुसीबुल ने मुंबई में एक हिंदू लड़की से मुलाकात की थी। देश गुजराती की रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की नेपाली मूल की है। उसे फाँसने के लिए मुसीबुल ने खुद को प्रदीप बताकर लड़की का विश्वास जीता और उसे शादी और बेहतर जीवन का सपना दिखाया। लड़की उसके जाल में फंस गई और वह उसके साथ सूरत आ गई। मुसीबुल ने हिंदू इलाके में रहने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और लड़की के साथ लिव-इन में रहने लगा।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि रांदेर इलाके में एक व्यक्ति झूठे दस्तावेजों के सहारे रह रहा है। इसके बाद SOG ने कार्रवाई करते हुए मुसीबुल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने हिंदू बनकर लड़की को धोखा दिया। पुलिस ने मुसीबुल के पास से दो आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक आरसी बुक और ₹15,000 नकद बरामद किए हैं। मुसीबुल ने कबूल किया कि उसने यह साजिश सिर्फ इसलिए रची क्योंकि मुस्लिम पहचान के कारण उसे हिंदू इलाके में मकान नहीं मिल रहा था और वो जल्द ही ‘निकाह’ भी करने वाला था।

एएसआई जालूभाई मगनभाई की शिकायत पर एसओजी सूरत सिटी ने BNS की धाराओं 319, 336(2), 336(3) और 338 के तहत उस पर केस दर्ज किया है। पुलिस इस मामले को लव जिहाद के एंगल से जाँच रही है। अधिकारियों का मानना है कि मुसीबुल की इस साजिश में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि मुसीबुल का संपर्क किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं है। फिलहाल उसे रांदेर पुलिस को सौंप दिया गया है, जहाँ उससे आगे की पूछताछ की जा रही है।

कर्नाटक में 45% बढ़ा मेट्रो का किराया, पहले बस फेयर में हुआ था 15% इजाफा: लोगों ने कॉन्ग्रेस सरकार से पूछा- क्या यही आपका ‘खटाखट मॉडल’

कर्नाटक सरकार द्वारा फ्री बस यात्रा की रेवड़ी बाँटने के बीच अब आम जनता पर और बोझ डालने की तैयारी हो गई है। सरकार द्वारा फ्री यात्रा की सुविधा का ऐलान करने के बाद सरकार का खजाना खाली हो गया था और अब इसे भरने के लिए कर्नाटक सरकार ने जनता के परिवहन खर्च को बढ़ाने का कदम उठाया है। कर्नाटक में राज्य परिवहन निगम द्वारा बसों का किराया 15 प्रतिशत बढ़ाए जाने के बाद अब बेंगलुरु मेट्रो (Namma Metro) के किराए में भी 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाएगी। यह वृद्धि 20 जनवरी से लागू होने की संभावना है, जिससे मेट्रो में सफर करने वालों को बड़ा झटका लगेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंगलोर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने 17 जनवरी को अपनी बोर्ड मीटिंग में मेट्रो किराए में 45 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव मंजूर किया है। इस वृद्धि के तहत, मेट्रो का न्यूनतम किराया 10 रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो जाएगा, जबकि अधिकतम किराया 60 रुपये से बढ़कर 85 रुपये हो जाएगा। इस वृद्धि का कारण मुख्य रूप से ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी बताया जा रहा है। बिजली के खर्च और पुराने बुनियादी ढाँचे की मरम्मत में हो रही वृद्धि को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

BMRCL अधिकारियों के अनुसार, नए किराए की घोषणा जल्दी ही की जाएगी और यह बढ़ोतरी 20 जनवरी से लागू हो सकती है। इसके अलावा स्मार्टकार्ड उपयोगकर्ताओं को 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, जो मेट्रो यात्रा को थोड़ा सस्ता बनाए रखने में मदद करेगा। हालाँकि यह फैसला यात्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि 45 प्रतिशत की वृद्धि एक बड़ा बदलाव है और इस कारण बेंगलुरु में मेट्रो के उपयोगकर्ता खर्च बढ़ने से परेशान हो सकते हैं।

इस फैसले का सोशल मीडिया पर विरोध भी हो रहा है। लोग कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की मुफ्त की रेवड़ियों को लेकर तंज भी कस रहे हैं।

शिल्पा नाम की एक्स यूजन ने इसे ‘खटा खट कॉन्ग्रेस मॉडल’ करार दिया।

सिद्दाराम नाम के यूजर ने इसे कॉन्ग्रेस की कार्यप्रणाली करार दिया है। उन्होंने नम्मा मेट्रो के किराए की बढ़ोतरी को जनता के साथ धोखा कहा।

बसों में बढ़ाया गया था 15% किराया

इससे पहले, कर्नाटक सरकार ने 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी बसों के किराए में की थी, और इसके पीछे भी वही कारण थे – ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और कर्मचारियों के खर्च में वृद्धि। कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच.के. पाटिल ने बताया था कि इन बढ़ती लागतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि राज्य परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सके। इन परिवहन सेवाओं में लगातार बढ़ती लागत के कारण राज्य सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि ईंधन और कर्मचारियों के खर्च में बढ़ोतरी के कारण राज्य परिवहन निगमों को लगभग 74.84 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, जिसे भरने के लिए यह कदम जरूरी था।

मेट्रो और बसों के किराए में बढ़ोतरी का यह कदम तब उठाया गया है, जब कर्नाटक सरकार ने अपने नागरिकों को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी थी और अब इसे भरने के लिए आम आदमी को और अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है। इस बढ़ोतरी का प्रभाव केवल मेट्रो और बसों के यात्रियों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि बेंगलुरु शहर के ट्रैफिक और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। कई लोग पहले ही बढ़ते हुए किराए की वजह से मेट्रो और बसों के उपयोग में संकोच कर सकते हैं, जिससे निजी वाहन उपयोग में वृद्धि हो सकती है और इससे शहर में ट्रैफिक की समस्या और बढ़ सकती है।

PM मोदी के सुरक्षा चूक मामले में 25 लोगों की गिरफ्तारी तय, एक आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज: फिरोजपुर कोर्ट ने बताया गंभीर मामला, प्रदर्शन की आड़ में फ्लाईओवर को किया था जाम

पंजाब के फिरोजपुर जिले की अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में 2022 में हुई चूक के मामले में बड़ा फैसला करते हुए एक प्रदर्शनकारी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। बता दें कि फिरोजपुर कोर्ट ने 25 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था और पुलिस को आदेश दिया था कि वो सभी आरोपितों को 22 जनवरी 2025 तक कोर्ट में पेश करे, लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए एक व्यक्ति ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी की सुरक्षा चूक मामले में फिरोजपुर के सेशन जज विरिन्दर अग्रवाल ने कथित प्रदर्शनकारी कमलजीत सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है और पुलिस को आदेश दिया है कि वो सभी आरोपितों को गिरफ्तार करे। इस मामले में मुख्य आरोपित किसानों में से एक कमलजीत सिंह ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे खारिज करते हुए अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में इस प्रकार की चूक बेहद गंभीर मामला है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा सकती।

अदालत ने पाया कि आरोपित कई बार समन और वारंट जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपितों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया और फिरोजपुर के कुलगढ़ी पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिया कि वह आरोपितों को गिरफ्तार कर 22 जनवरी 2025 तक अदालत में पेश करें।

इस मामले में 3 जनवरी 2025 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया। अदालत ने यह आदेश उस एफआईआर के आधार पर दिया, जो 6 जनवरी 2022 को इस घटना के संबंध में दर्ज की गई थी। शुरुआत में यह एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थी, लेकिन विशेष जाँच दल (एसआईटी) द्वारा की गई जाँच के बाद 25 किसानों की पहचान की गई। इन किसानों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला), 341 (गलत तरीके से रोकना), 186 (सरकारी काम में बाधा), 149 (गैरकानूनी सभा) और नेशनल हाईवे एक्ट की धारा 8-बी के तहत आरोप लगाए गए हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी उस दिन हुसैनीवाला में शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए जा रहे थे। इसके साथ ही उन्हें पीजीआई फिरोजपुर के सैटेलाइट सेंटर का शिलान्यास भी करना था। लेकिन खराब मौसम और रैली में अपेक्षित भीड़ न होने के कारण उन्होंने हेलीकॉप्टर से यात्रा करने के बजाय सड़क मार्ग से जाने का फैसला किया। जब प्रधानमंत्री का काफिला फ्लाईओवर पर पहुँचा, तो भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) और क्रांतिकारी पेंडू मजदूर यूनियन के प्रदर्शनकारियों ने सड़क को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। इस अवरोध के कारण प्रधानमंत्री को अपनी यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी और उन्हें बठिंडा एयरपोर्ट लौटकर दिल्ली जाना पड़ा।

इस घटना के बाद सुरक्षा चूक को लेकर भारी विवाद हुआ। केंद्र सरकार ने इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही करार दिया। इस मामले की जाँच के लिए पंजाब पुलिस की एक विशेष जाँच दल का गठन किया गया। इस एसआईटी की अगुवाई फिरोजपुर के एसपी (इन्वेस्टिगेशन) कर रहे हैं। जाँच के दौरान कुल 26 लोगों की पहचान हुई थी, जिनमें से एक आरोपित, मेजर सिंह की मौत हो चुकी है। अब कुल 25 लोगों को इस मामले में आरोपित बनाया गया है।

इस घटना के बाद राज्य और केंद्र सरकारों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। विपक्ष ने इसे पंजाब सरकार की लापरवाही करार दिया था, जबकि पंजाब सरकार ने कहा था कि यह प्रदर्शन किसानों के आंदोलन का हिस्सा था। इस बीच, एसआईटी की जाँच में यह पाया गया कि प्रदर्शनकारियों ने योजना बनाकर फ्लाईओवर को जाम कर दिया था, जिससे प्रधानमंत्री के काफिले को वहाँ से गुजरने में मुश्किल हुई।

‘VHP की पुस्तकें विवादास्पद और संवेदनशील, अशांति फैलने का खतरा’: कोलकाता पुस्तक मेले में स्टॉल देने से इनकार, हाई कोर्ट पहुँचा विश्व हिंदू परिषद

पश्चिम बंगाल में आयोजित हो रहे 48वें अंतर्राष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) को स्टॉल लागने की अनुमति नहीं दी गई है। इसको लेकर विहिप ने शुक्रवार (17 जनवरी) को कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस हिंदू संगठन ने पिछले साल अक्टूबर में प्रकाशक और पुस्तक विक्रेता गिल्ड के पास एक स्टॉल के लिए आवेदन किया था।

अपने आवेदन में विश्व हिंदू परिषद ने कहा था कि वह कई वर्षों से पुस्तक मेले में भाग लेता रहा है और इस बार भी एक स्टॉल लगाना चाहता है। विहिप के आवेदन को ना ही स्वीकृत किया गया और ना ही खारिज किया गया। विहिप का कहना है कि उसके आवेदन को लंबित रखा गया। विहिप के बार-बार कहने के बावजूद प्रकाशक एवं पुस्तक विक्रेता गिल्ड की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

प्रकाशक एवं पुस्तक विक्रेता गिल्ड अब दावा कर रहा है कि 28 जनवरी 2025 से 9 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाले पुस्तक मेले में स्टॉल के लिए विहिप द्वारा दिया गया आवेदन ‘निर्दिष्ट फॉर्म में नहीं है’। इसलिए उसके आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया है। गिल्ड का यह भी आरोप है कि हिंदू अधिकार संगठन विहिप ने इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आवश्यक ‘शर्तों को पूरा नहीं किया’ है।

सुनवाई के दौरान गिल्ड की ओर से पेश वकील ने दावा किया, “विश्व हिंदू परिषद द्वारा प्रकाशित पुस्तकें संवेदनशील और विवादास्पद हैं। ये पुस्तकें अशांति फैला सकती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “गिल्ड ऐसी कोई अशांति नहीं चाहता। इसलिए उसने इस साल के मेले में वीएचपी को कोई स्टॉल आवंटित नहीं करने का फैसला किया है।”

कलकत्ता हाई कोर्ट की जस्टिस अमृता सिन्हा ने पूछा, “क्या गिल्ड को पता है कि वीएचपी के पास उसके प्रकाशन हैं? गिल्ड ने पहले भी वीएचपी को स्टॉल आवंटित किए थे। अचानक ऐसा क्या हुआ कि गिल्ड को लगने लगा कि वीएचपी के प्रकाशन इतने संवेदनशील और विवादास्पद हैं कि वे परेशानी खड़ी कर सकते हैं?” इस पर अगली सुनवाई सोमवार (20 जनवरी) को होगी।

41 दिन के लिए टला हमास-इजरायल युद्ध, PM नेतन्याहू ने दी मंजूरी: 2 अमेरिकी नागरिक समेत 33 इजरायली होंगे रिहा, 735 जिहादी सौंपे जाएँगे

फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास के हमले के बाद इजरायल पिछले 15 महीनों से इस्लामी आतंकी समूहों पर कार्रवाई कर रहा है। अब हमास और इजरायल के बीच सीजफायर को लेकर समझौता हुआ है। इजरायल सरकार ने शनिवार (18 जनवरी 2025) को युद्धविराम समझौते को मंजूरी दे दी। यह समझौता रविवार (19 जनवरी) से प्रभावी होगा। इस समझौते के तहत बंधकों की अदला-बदली भी होगी।

इजरायल की सरकार ने शनिवार को इस मामले पर लगभग छह घंटे तक विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने बताया कि इजरायली कैबिनेट ने इस शांति समझौते को हरी झंडी दे दी है। इस समझौते में छह सप्ताह के लिए युद्धविराम की बात कही गई है। इस दौरान दोनों तरफ के बंधकों और कैदियों को तीन चरण में रिहा किया जाएगा।

हालाँकि, इस समझौते को लेकर इजरायल में ही विरोध के सुर उठ रहे हैं। इजरायल सरकार में इस समझौते के खिलाफ कुछ धुर दक्षिणपंथी मंत्रियों ने कड़े विरोध विरोध किए और इसके खिलाफ मतदान किया। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नेतन्याहू के 24 कैबिनेट सदस्यों ने युद्धविराम का समर्थन किया। इजरायली सुरक्षा कैबिनेट ने शुक्रवार (17 जनवरी) को इस समझौते को मंजूरी दे दी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जनवरी 2025 को हमास और इजरायल के बीच हुए इस समझौते की मध्यस्थता मिस्र, कतर और अमेरिका ने की है। समझौते के बाद जी-7 देशों ने इसका स्वागत किया और कहा कि ईरान और उसके सहयोगियों को इजरायल के खिलाफ किसी भी तरह के हमले से बचना चाहिए। समूह ने यह भी कहा कि अगर इस तरह के खतरे सामने आते हैं तो इजरायल की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

इजरायल के किबुत्ज में हमला करके हमास में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई और अदला-बदली के लिए तीन प्वॉइंट बनाए गए हैं। इनमें मिस्र की सीमा के पास स्थित केरेम शलोम, रीम शहर और एरेज़ शामिल हैं। बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल हमला करके 1,200 लोग मार दिया था और करीब 250 लोगों को बंदी बना लिया था। हमास के पास अभी भी 100 के आसपास बंधक हैं।

यह समझौता तीन चरण में पूरा होगा। पहले चरण में आतंकी समूह हमास बंधक बनाए गए इजराइल के 33 लोगों को रिहा करेगा। इनमें अमेरिकी नागरिक अमेरिकी कीथ सीगल और सागुई डेकेल-चेन शामिल हैं। वहीं, इजराइली सेना गाजा की सीमा से 700 मीटर पीछे लौटेगी। इजराइली सरकार 95 फिलिस्तीनी कैदियों की लिस्ट जारी की है, जिन्हें रिहा किया जाएगा। इनमें 69 महिलाएँ, 16 पुरुष और 10 नाबालिग शामिल हैं।

अगर पहला फेज तय नियमों के तहत आगे बढ़ता है तो समझौते का दूसरा चरण 3 फरवरी को लागू किया जाएगा। इसके लिए योजना को आगे बढ़ाने पर बातचीत शुरू हो जाएगी। इस दौरान किसी भी पक्ष द्वारा कोई भी हमला नहीं किया जाएगा। इस चरण में युद्ध को स्थायी तौर पर खत्म करने पर विचार किया जाएगा। दूसरा चरण सफल होने पर तीसरा चरण लागू किया जाएगा।

19 जनवरी से 1 मार्च तक के लिए लागू इस समझौते के तहत इजरायल 735 फिलिस्तीनियों को रिहा करेगा। इनमें विभिन्न मामलों में गिरफ्तार करके इजरायल की जेलों में रखा गया है। इन लोगों के नाम की लिस्ट भी जारी की गई है। इस लिस्ट में हमास के कई कुख्यात आतंकी भी शामिल हैं। इसके अलावा, हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं जिहादी भी शामिल हैं।

इमरान ने सनातन में की घरवापसी तो भड़का लैंडलॉर्ड इफ्तिखार, घर में घुस पत्नी को धमकाया: बोला- ’24 घंटे में वापस मुस्लिम बन, वरना तुझे उठा लूँगा’

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक युवक और उसकी पत्नी को सनातन धर्म अपनाने के बाद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 14 जनवरी को इमरान नाम के युवक ने अपनी पत्नी के साथ विधि-विधान से हिंदू धर्म अपनाया और अपना नाम बदलकर ईश्वर रख लिया। महादेवगढ़ में इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद ईश्वर और उनकी पत्नी खुश होकर अपने किराए के मकान में लौटे। लेकिन उनका यह फैसला उनके मुस्लिम मकान मालिक इफ्तिखार को रास नहीं आया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईश्वर के धर्म परिवर्तन की जानकारी मिलने के बाद इफ्तिखार उनके घर आया और गाली-गलौच करने लगा। गुस्से में उसने ईश्वर और उनकी पत्नी को जान से मारने की धमकी दी। ईश्वर ने बताया कि इफ्तिखार ने यह चेतावनी दी कि अगर 24 घंटे के भीतर दोनों ने इस्लाम मजहब में वापसी नहीं की, तो वह उन्हें मार डालेगा।

24 घंटे में अपनाओ इस्लाम, वर्ना पत्नी को रख लूँगा

घटना यहीं खत्म नहीं हुई। ईश्वर ने अपनी शिकायत में बताया कि इफ्तिखार ने उनकी पत्नी के साथ दुर्व्यवहार किया। उस समय ईश्वर की पत्नी घर पर अकेली थी। इफ्तिखार घर में जबरन घुसा और उनकी पत्नी की कलाई पकड़कर उसे धमकाने लगा। उसने कहा कि अगर उसने अपने पति को इस्लाम मजहब में वापस लाने के लिए मजबूर नहीं किया, तो वह उसे अपनी पत्नी बनाकर अपने साथ रख लेगा। महिला ने शोर मचाया और अपने पति को फोन किया। ईश्वर के घर पहुँचने पर मामला और गंभीर हो गया। इफ्तिखार ने ईश्वर के साथ मारपीट की और फिर पड़ोसियों के जमा होने पर मौके से भाग गया।

ईश्वर और उनकी पत्नी ने बताया कि उन्होंने महादेवगढ़ में पूरे विधि-विधान से हिंदू धर्म अपनाया था। इस प्रक्रिया में उनके परिवार के कुछ सदस्य और परिचित भी शामिल थे। इसके बाद उन्हें उम्मीद थी कि उनका जीवन शांति और सुकून से आगे बढ़ेगा। लेकिन उनके मकान मालिक ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं। पड़ोसियों का कहना है कि इफ्तिखार अक्सर गुस्सैल रहता है और उसने पहले भी कुछ लोगों के साथ झगड़ा किया है। लेकिन इस बार उसने सारी हदें पार कर दीं। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस से जल्द से जल्द कार्रवाई करने की माँग की है।

इफ्तिखार फरार, पुलिस कर रही तलाश

इस घटना के बाद दंपति जावर थाने पहुँचा। जहाँ उन्होंने इफ्तिखार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने ईश्वर और उनकी पत्नी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। जावर थाना प्रभारी जीपी वर्मा ने बताया कि आरोपित इफ्तिखार के खिलाफ छेड़छाड़, मारपीट और जान से मारने की धमकी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि आरोपित को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

‘भोलेनाथ का पुत्र, डरूँगा नहीं’

ईश्वर ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि वह भोलेनाथ का पुत्र है और किसी की धमकी से डरने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी मर्जी से सनातन धर्म अपनाया है। यह मेरी आस्था का मामला है और मैं इसी धर्म में रहूँगा। मुझे किसी का डर नहीं है, चाहे वह मुझे मारने की धमकी ही क्यों न दे।” पुलिस से सुरक्षा की माँग करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने धर्म के आधार पर जीने का अधिकार है और किसी को भी इसमें दखल देने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

बरेली में पाकिस्तानी महिला 9 साल से कर रही थी सरकारी टीचर की नौकरी, पोल खुलने पर बर्खास्त: जाँच में फर्जी निकले सारे प्रमाण-पत्र, 2021 में अम्मी भी ऐसे ही पकड़ी गई थी

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शुमायला खान नाम की महिला ने खुद को भारतीय नागरिक बताकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल कर ली। यह नौकरी उन्होंने 2015 में शुरू की और 9 साल तक सरकारी वेतन भी लिया। मामला तब खुला जब एक शिकायत के बाद प्रशासन ने उनके निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की जाँच की। फिलहाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 3 अक्तूबर, 2024 को शुमायला खान को निलंबित कर दिया। इसके बाद, उन्हें नियुक्ति की तिथि से ही पद से हटा दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुमायला ने रामपुर के एसडीएम कार्यालय से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाया था। तहसीलदार की जाँच में पता चला कि यह प्रमाण पत्र गलत तथ्यों पर आधारित था। तहसीलदार की रिपोर्ट ने यह साफ किया कि शुमायला वास्तव में पाकिस्तान की नागरिक हैं। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने शुमायला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उसके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया।

शुमायला ने अपनी अम्मी से प्रेरणा लेते हुए फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय माधौपुर में सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी पाई। जाँच में पाया गया कि शुमायला के माता-पिता पाकिस्तानी नागरिक थे। रामपुर तहसील से निवास प्रमाण पत्र बनवाते समय उन्होंने यह तथ्य छिपाया।

फतेहगंज पश्चिमी के खंड शिक्षा अधिकारी भानु शंकर ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर फतेहगंज पश्चिमी थाने में शुमायला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। अब उनके खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों की हेराफेरी के आरोपों में कानूनी कार्रवाई हो रही है। पुलिस शुमायला की गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है।

बता दें कि शुमायला की अम्मी माहिरा अख्तर को साल 2021 में बर्खास्त कर दिया गया था, जब वो रिटायरमेंट से सिर्फ 2 दिन दूर थी। 11 मार्च 2021 को रिटायर होने जा रही शुमायला की अम्मी माहिरा अख्तर को 9 मार्च 2021 को बर्खास्त किया गया था, जबकि शुमायरा को सस्पेंड किया गया था। माहिरा अख्तर ने भी खुद को भारतीय नागरिक बताया था, लेकिन जाँच में वे पाकिस्तानी पाई गईं। माहिरा का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुँचा और अभी हाईकोर्ट में लंबित है।

यह मामला शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाना न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक संगठित तरीके से सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा सकता है।

बहरहाल, शिक्षा विभाग ने इस घटना के बाद जाँच प्रक्रिया को और सख्त बनाने का निर्णय लिया है। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है और इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकारी दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया में सुधार की कितनी जरूरत है।

5 साल में AAP नेता मनीष सिसोदिया की संपत्ति में 7 गुना इजाफा, कमाई भी 7 गुना बढ़ी: हलफनामे से खुलासा, बेटी के विदेश में चल रहे 3 खाते

दिल्ली उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया की चल सम्पत्ति में बीते पाँच वर्षों में 7 गुना की बढ़ोतरी हुई है। उनकी सालाना कमाई भी लगभग 7 गुना की बढ़ोतरी हुई है। उनकी पत्नी के पास भी प्रॉपर्टी बढ़ गई है। यह सब जानकारी उनके चुनावी हलफनामे से बाहर आई है। सिसोदिया आम आदमी पार्टी के जंगपुरा विधानसभा सीट से AAP के उम्मीदवार हैं।

AAP ने इस बार उनकी सीट बदल दी है। उन्होंने जंगपुरा सीट से गुरुवार (16 जनवरी, 2025) को नामांकन किया है। इसी में उन्होंने अपना हलफनामा दिया है, जिसके भीतर उनकी प्रॉपर्टी की जानकारी सामने आई है। मनीष सिसोदिया ने बताया है कि उनके पास ₹34.43 लाख की चल सम्पत्ति है।

उन्होंने बताया है कि उनके पास 4 बैंक खाते और फिक्स्ड डिपाजिट (FD) हैं। मनीष सिसोदिया ने खुलासा किया है कि इनमें ₹34 लाख जमा हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया के खाते में ₹2 लाख जमा हैं। हलफनामे में मनीष सिसोदिया ने बताया है कि उनके और उनकी पत्नी के पास ₹40 हजार नकद हैं।

मनीष सिसोदिया के हलफनामे से यह भी खुलासा हुआ है कि उनकी बेटी मीर सिसोदिया के विदेश में तीन खाते हैं। यह तीनों खाते कनाडा के ओंटारियो शहर में हैं। इन खातों में ₹2.4 लाख जमा हैं। उनकी पत्नी के पास ₹10 लाख से ज्यादा का लगभग 150 ग्राम सोना है। कुल मिलाकर दंपती के पास ₹47.30 लाख की चल सम्पत्ति है।

मनीष सिसोदिया की चल सम्पत्ति 2020 के चुनाव के दौरान ₹4.74 लाख और उनकी पत्नी की सम्पत्ति ₹2.66 लाख थी। इसकी तुलना वर्तमान सम्पत्ति से की जाए तो मनीष सिसोदिया की सम्पत्ति 700% जबकि उनकी पत्नी की सम्पत्ति 483% बढ़ गई है।

दोनों ने अपनी अचल सम्पत्ति की भी हलफनामे में जानकारी दी है। मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी के पास ₹93 लाख के 2 फ़्लैट हैं। एक फ़्लैट दिल्ली तो वहीं दूसरा गाजियाबाद में हैं। एक की कीमत ₹23 लाख और दूसरे की ₹70 लाख है। उन्होंने इस हलफनामे में अपने मुकदमों और कमाई के बारे में भी बताया है।

उनके मुकदमे शराब घोटाला से जुड़े हैं। वहीं सालाना कमाई में भी अच्छी खासी बढ़त हुई है। हलफनामे के अनुसार, 2021-22 में उन्होंने अपने ITR में बताया है कि उनकी कमाई ₹1.59 लाख थी। यह 2023-24 में बढ़ कर ₹11.59 लाख हो गई। उनकी पत्नी ने भी ₹78 हजार सालाना कमाई का खुलासा किया है।

महिलाओं को हर माह ₹2100, गर्भवतियों को ₹21000: दिल्ली के लिए BJP ने संकल्प पत्र किया जारी; बुजुर्गों और गरीबों का भी रखा खास ख्याल

दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शुक्रवार (17 जनवरी 2025) को अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया। इसे ‘संकल्प पत्र’ नाम दिया गया है, जिसमें पार्टी ने महिलाओं, गरीबों, बुजुर्गों और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी कार्यालय में इस संकल्प पत्र का पहला भाग पेश किया।

बीजेपी ने इस बार महिलाओं को प्राथमिकता देते हुए महिला समृद्धि योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत हर महिला को प्रतिमाह 2,500 रुपये दिए जाएँगे। इसके साथ ही हर गर्भवती महिला को 21,000 रुपये की आर्थिक मदद का वादा किया गया है। पार्टी का कहना है कि यह योजनाएँ सरकार बनने के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में लागू की जाएँगी। महिलाओं को एलपीजी सिलेंडर पर 500 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी, साथ ही होली और दिवाली के अवसर पर एक-एक सिलेंडर मुफ्त मिलेगा।

बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू करने का वादा किया है। इसके तहत प्रत्येक दिल्लीवासी को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। बुजुर्गों के लिए भी पार्टी ने विशेष प्रावधान किए हैं। 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को अतिरिक्त 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा, जिससे यह कुल बीमा कवर 10 लाख रुपये हो जाएगा। पेंशन योजनाओं में भी वृद्धि का ऐलान किया गया है। बुजुर्गों की पेंशन 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये की जाएगी, वहीं विधवाओं और दिव्यांगों को 3,000 रुपये की पेंशन दी जाएगी।

बीजेपी ने झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों के लिए अटल कैंटीन योजना शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत पाँच रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। नड्डा ने कहा कि यह योजना झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीबों को राहत पहुँचाएगी। पार्टी ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार की मोहल्ला क्लीनिक योजना में भ्रष्टाचार की जाँच कराई जाएगी और दोषियों को सजा दी जाएगी।

जेपी नड्डा ने आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्य पार्टियों ने केवल वादे किए, लेकिन बीजेपी ने हर राज्य में अपने वादों को पूरा किया है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के पास 99.9% वादे निभाने का रिकॉर्ड है। नड्डा ने कहा कि पार्टी दिल्ली को विकसित राजधानी के रूप में बदलने का संकल्प लेकर आई है।

दिल्ली में 70 विधानसभा सीटों के लिए 5 फरवरी को मतदान होगा। नड्डा ने कहा कि यह संकल्प पत्र दिल्ली के हर वर्ग के कल्याण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी सत्ता में आने के बाद दिल्ली में चल रही सभी मौजूदा जनकल्याण योजनाओं को जारी रखेगी।

बीजेपी के संकल्प पत्र (भाग-1) की बड़ी बातें

  • एलपीजी सिलेंडर पर 500 रुपये की सब्सिडी
  • महिला समृद्धि के तहत महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये
  • गर्भवती महिलाओं को 21000 रुपये दिए जाएँगे
  • होली-दिवाली पर एक-एक सिलेंडर मुफ्त दिया जाएगा
  • एलपीजी सब्सिडी 500 रुपये दी जाएगी
  • गर्भवती महिलाओं को न्यूट्रीशनल किट दिए जाएँगे
  • पाँच लाख रुपये तक का अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा
  • आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू किया जाएगा
  • अटल कैंटीन योजना को लॉन्च करेंगे
  • झुग्गियों में पाँच रुपये में राशन दिया जाएगा
  • वरिष्ठ नागरिकों को 3000 रुपये तक की पेंशन दी जाएगी

बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में दिल्ली के विकास को प्राथमिकता दी है। इसमें महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, गरीबों और बुजुर्गों के जीवन स्तर को सुधारने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। पार्टी ने जनता से अपील की है कि वह इस बार बीजेपी को मौका दें और दिल्ली को नई दिशा में ले जाने में सहयोग करें।

18000 से 50000+ की छलाँग दे सकता है 8वाँ वेतन आयोग, जानिए कैसे तय होती है सैलरी-पेंशन में बढ़ोतरी: फिटमेंट फैक्टर है सबसे अहम, सब कुछ इसी से होगा तय

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय कैबिनेट ने गुरुवार (16 जनवरी, 2025) को 8वें वेतन आयोग को मंजूरी दे दी। इस आयोग का गठन केन्द्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन तय करने के लिए किया गया है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही 2026 से सैलरी और पेंशन का निर्धारण होगा।

इस आयोग का गठन सातवें वेतन आयोग की अवधि पूरे होने से लगभग एक वर्ष पूर्व किया गया है। 7वां वेतन आयोग 31 दिसम्बर, 2025 को समाप्त हो जाएगा। वेतन आयोग को मोटे तौर लोग सैलरी-पेंशन बढ़ने से ही जोड़ते हैं। नए वेतन आयोग के ऐलान के साथ ही कयास लगने लगे हैं कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद सैलरी-पेंशन कितने बढ़ेंगे।

यह भी चर्चा चल रही है कि कब से यह बढ़ी हुई पेंशन मिलेगी। इस बीच पाँचवे, छठे और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद सैलरी और पेंशन कितनी बढ़ी थी। इसके अलावा इस नए वेतन आयोग पर काम कितनी जल्दी चालू होगा, इसको लेकर भी चर्चाएँ चल रही है।

8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी-पेंशन?

8वें वेतन आयोग के लिए कुछ दिनों के भीतर चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति सरकार कर देगी। इसके बाद यह आयोग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (IW) समेत बाकी तमाम तथ्यों को ध्यान में रख कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। इस रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन कितनी बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

आयोग सैलरी और पेंशन बढ़ाने के लिए ‘फिटमेंट फैक्टर’ का इस्तेमाल करता है। फिटमेंट फैक्टर वह संख्या होती है, जिससे पिछले आयोग में तय की गई बेसिक सैलरी और पेंशन को गुणा करके नई बेसिक सैलरी और पेंशन तय की जाती है। इसको उदाहरण से समझा जाना चाहिए।

यदि आज किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹20 हजार है और इस पर 2 का फिटमेंट फैक्टर लगाया जाता है तो यह बढ़ कर ₹40 हजार हो जाएगी। यदि किसी की बेसिक सैलरी ₹1 लाख है तो यह बढ़ कर ₹2 लाख हो जाएगी। आयोग इसके अलावा कर्मचारियों को मिलने वाले बाकी भत्ते और भुगतान तय करेगी।

8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में बेसिक सैलरी पर 2.86 का फिटमेंट फैक्टर लगाए जाने की चर्चा चल रही है। कहीं-कहीं यह फिटमेंट फैक्टर 2.28 लगाए जाने की चर्चा भी चल रही है। ऐसे में अभी के सभी ग्रेड के बेसिक सैलरी इसी से तय होंगे। वर्तमान में सबसे निचले स्तर के कर्मचारी को ₹18000 की बेसिक सैलरी मिलती है।

यदि इस पर 2.28 का फिटमेंट फैक्टर लगा तो यह बढ़ कर ₹41 हजार से ज्यादा हो जाएगा। यदि 2.86 का फिटमेंट फैक्टर लगा तो यह बढ़ कर ₹51 हजार से अधिक हो जाएगी। जो भी जिस कर्मचारी का पे बैंड और ग्रेड होगा, उसी हिसाब से उसका वेतन तय किया जाएगा। इस ग्राफ से आप यह समझ सकते हैं।

वेतन आयोग

पिछले वेतन आयोगों में कितना बढ़ा?

2016 में लागू किए गए 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लगाया गया था। यानि तब बेसिक सैलरी में 257% की बढ़ोतरी हुई थी। इसके अलावा इस दौरान पेंशन को भी 2.57 के फिटमेंट फैक्टर से बढ़ाया गया था। तब बेसिक पेंशन भी ₹3500 से बढ़ कर ₹9 हजार हो गई थी।

इसी तरह 2006 में केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए 6ठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 का था। तब बेसिक सैलरी ₹3700 से बढ़ कर ₹7000 हुई थी। इस वेतन आयोग के चलते देश में बड़े बदलाव देखने को मिले थे।

इसके अलावा 5वें वेतन आयोग में 40% की बढ़त बेसिक सैलरी पर दी गई थी। यानी इसमें 1.4 का फिटमेंट फैक्टर लगाया गया था। यही फिटमेंट फैक्टर पेंशन पर भी लागू किया गया था।