कॉन्ग्रेस नेता अलका लाम्बा ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस ने 2002 में ही ‘दोनों को नाप दिया होता’ तो आज भारत को ये दिन नहीं देखने पड़ते। लोगों ने कहा कि वो पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बात कर रही हैं। बता दें कि 2002 की बात कर वे गुजरात दंगों का जिक्र कर रही थीं।
जब इन दंगों की जाँच चल रही थी और मोदी से सीबीआई ने घंटों पूछताछ की थी, तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा कि इस ट्वीट से पता चलता है कि कॉन्ग्रेस ने कोशिश तो ख़ूब की, पर सफल नहीं हुए।
अलका लाम्बा ने ट्वीट कर लिखा कि कॉन्ग्रेस से बहुत बड़ी ग़लती हुई। उन्होंने लिखा कि ‘दोनों’ आज सत्ता में फन फैला कर बैठे हैं, जो कॉन्ग्रेस द्वारा उन्हें तभी ‘न नाप देने’ का नतीजा है। मालवीय ने कहा कि लाम्बा ने देश को इस बात की जानकारी देकर अच्छा किया है कि कॉन्ग्रेस ने पूरी कोशिश की।
एक व्यक्ति ने उन्हें रिप्लाई करते हुए याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस ‘नापने’ में एक्सपर्ट रही है और ख़ुद के नेताओं को भी नहीं छोड़ती। जैसे लाल बहादुर शास्त्री, संजय गाँधी और माधवराव सिंधिया। एक ने कहा कि देश तो आनंद मना रहा है, खामियाजा तो आज कॉन्ग्रेस पार्टी भुगत रही है।
बाद में अलका लाम्बा ने अपने इस बयान का बचाव भी किया। उन्होंने 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध की बात करते हुए दावा किया कि कॉन्ग्रेस की कोशिशें कभी नाकाम नहीं होतीं। उन्होंने 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण की बात कर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की याद दिलाई।
उन्होंने कहा कि कड़वी सच्चाई ये है कि कोशिश ही नहीं हुई और कोशिश होती तो ज़रूर कामयाब होते, जिससे देश को आज ‘ये दिन’ नहीं देखने पड़ते। एक व्यक्ति ने अलका को याद दिलाया कि जिस पाकिस्तान का नाम लेकर वो राजनीतिक रोटी सेंक रही हैं, कॉन्ग्रेस के नेता पीएम मोदी को हटाने के लिए फिर उसी पाकिस्तान के पास चले गए।
कांग्रेस की कोशिशें कभी नाकाम नहीं होती:), 1971 में पाकिस्तान की 90,000 सेना को घुटनों के बल लाकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने विश्व को दिखा दिया था, दुःख तो इस बात का है कि कोशिश हुई ही नहीं, कामयाब तो जरूर होते और आज देश को यह दिन ना देखने पड़ रहे होते.. कड़वी सच्चाई. https://t.co/j1Ktw62KGU
— Alka Lamba – अलका लाम्बा?? (@LambaAlka) April 18, 2020
अलका लाम्बा इससे पहले भी पीएम मोदी की फोटो लगा कर भाजपा नेताओं को ‘संघ की नाजायज पैदाइश’ बता चुकी हैं। उन्होंने हाल ही में पहलवान योगेश्वर दत्त के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। उन्होंने लिखा था, “अबे योगेश्वर दत्त, अपनी माँ से पूछ कि तेरा बाप कौन है? लगता है कि अपने बाप के साथ तस्वीर लगाने में भी तुझे शर्म आती है? ऐसा क्या? जिसके साथ तूने तस्वीर लगा रखी है, अगर तेरी माँ कहती है कि वही तुम्हारा बाप है तो मान जाना। ऐसा इसीलिए, क्योंकि तेरी माँ झूठ नहीं बोलती। यूँ ही दर्द नहीं हुआ है तुझे?”
जुलाई 2019 में भी उन्होंने पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि जो पति न हुआ, वो पिता कैसे होगा? तब वो आम आदमी पार्टी में थीं।
भारत में कोरोना वायरस (COVID-19) का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरे तबलीगी जमात पर देशवासियों की प्रतिक्रिया को लेकर सबा नकवी, आरफा खानम, राणा अयूब जैसे मजहब विशेष के सोशल मीडिया प्रतिनिधियों की पाकिस्तान स्थित कराची के पूर्व मेयर और पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ अजाकिया (Arif Aajakia) ने जमकर क्लास लगाई है।
आरिफ अजाकिया ने यूट्यूब पर अप्रैल 16 को एक वीडियो जारी किया है। इसकी शुरुआत में वे कहते हैं कि यह वीडियो भारत में उनकी बहन सबा नकवी वीडियो के जवाब में है। इसमें वे कहते हैं कि सबा नकवी पकिस्तान के मजहब विशेष के एहसानों को भी गिना रहीं थीं तो मुझे जरूरी लगा कि कुछ चीजों को हमें सही कर लेना चाहिए।
वीडियो में आरिफ अजाकिया कहते हैं, “90 के दशक में कराची-सिंध में जब मिलिट्री ऑपरेशन हो रहा था, उस वक्त हम पर जो जुल्म हो रहा था, उस वक्त भारत से बहुत कम लोग लिखते थे। उस समय सबा साहिबा के वालिद बड़े पैमाने पर हमारे लिए लिखते थे और हमें बहुत हौंसला मिलता था। लेकिन जब हक और सच की बात आती है तो इनके वालिद समेत हर हकपरस्त का यह संदेश होता है कि वो हक़ की बात करें।”
सबा नकवी द्वारा शेयर किए गए वीडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वो बात कर रहीं थीं कि इंडिया में आजकल समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। आरिफ अजाकिया ने कहा कि अगर इंडिया ना होता तो और भी बहुत बड़े स्तर पर आपको निशाना बनाया जाता, यह तो कुछ भी नहीं है।
आरिफ अजाकिया ने कहा, “सेक्युलरिज्म के अनुसार तो आपके यहाँ तबलीगी जमात का नाम लेने से भी समस्या आ रही है, इसे सिंगल सोर्स (एक ही स्रोत से) कहा जा रहा है। जब वहाँ नाम तक लेने की इजाजत नहीं है, जबकि इसी बेवकूफी से यह सब हो रहा है। देश के सभी लोग कुर्बानी दे रहे हैं, सब घर में हैं, और इतने लोगों की कुर्बानी अगर सिर्फ एक तरफ के लोगों से हो रहा है। बदसलूकी और पथराव तो उसी एक समुदाय ने किया है न। ये सब आपके सामने है। फिर भी आपका संविधान इजाजत नहीं दे रहा उस समुदाय का नाम लेने का। पाकिस्तान में एक-एक पत्रकार कह रहा है कि तबलीगियों को रोको, इनकी वजह से आ रहा है। आप इसको फ़ौरन इस्लामोफोबिया कह रही हैं?”
“बदकिस्मती से सबा साहेबा, आरफा, राना इन सबकी जो पत्रकारिता मैं देखता हूँ, तो यह सिर्फ एक समुदाय का बचाव करती हैं, बात यहाँ पर बेवकूफी की हो रही है। क्योंकि आपके मुल्ला निजी जगहों पर नमाज पढ़ रहे हैं, सब जगह नजर आ रहे हैं। क्या फोटोशॉप से उनके सर से टोपी हटा दें? उनकी दाढ़ियाँ हटा दें? क्या करें? और जब बात करते हैं तो आप उसे इस्लामोफोबिया कहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा है, “अब आपके कहे हुए एहसानों पर आते हैं – सबसे पहले आते हैं शाहरुख खान! किंग खान- वो पाकिस्तान में होते तो पल्ले दर्जे के एक्टर होते। वो इंडियन हैं इसी कारण वो मशहूर हैं दुनिया में। यह भारत पर शाहरुख़ का एहसान नहीं, बल्कि भारतीय होना शाहरुख़ खान का विशेषाधिकार है। यह उसका अपना मत भी है। उसने इंटरव्यू में यह बातें खुद कहीं हैं। उसने अपने बच्चों का धर्म हिन्दुस्तान बताया है। शाहरुख़ का सारा पैसा हिन्दुस्तान का है, उसमें से अगर उसने चैरिटी की है तो और लोगों ने भी की है। अक्षय ने भी की। दूसरों ने भी की, लिस्ट भरी पड़ी है।”
अजाकिया ने कहा, “मजहब की जब बात आती है तब आप फ़ौरन नाम लेना शुरू कर देते हैं। हिन्दुस्तान की जरूरत दुनिया को है, हॉलीवुड के स्टार पसंद करते हैं भारत में काम करना, क्रिकेट खेलने लोग इंडिया जाना चाहते हैं। टैलेंट को मजहब में तौलना हराम है वैसे भी। शाहरुख को अपने टैलेंट के बदले अच्छी कीमत मिली है। आपने सलमान का नाम क्यों नहीं लिया? उसने जम के चमाटें मारी हैं आजकल के वीडियो में।”
“आप कहती हैं, इंडिया में मुस्लिमों को मसला है… इंडिया में सिर्फ कुछ मुस्लिमों को मसला है भई! जिनकी वजह से इंडिया की एकता को मसला हो रहा है। उसमें मुस्लिम समुदाय को बहुत हो रहा है। खासकर लिबरल को मसला हो रहा है, मुस्लिम उनको काफिर कहता है और हिन्दू उन्हें कट्टरपंथी कहते हैं। आप जैसे लोगों की वजह से उन्हें समस्या आती हैं।”
“आप जैसे पत्रकारों का फर्ज है, इस समय गलती मुस्लिम नहीं बल्कि मुस्लिम लीडर्स की है। आप जैसे लोग का तो फर्ज है इसमें गलती आम मुस्लिम की नहीं है, चाहे वो धार्मिक नेता हैं, चाहे आप जैसे पत्रकार हैं, जो वकालत करती हैं, तमाम मुस्लिमों की। उनका फर्ज है कि पहले अपने समुदाय को समझाओ, आपका घोड़ा खुद आपके नियंत्रण में नहीं है। पहले उनको तो घरों में बंद करो भाई। जहाँ देखो वहाँ पथराव कर रहे हैं, घेराव कर रहे हैं।”
“हमने इतिहास में सुना है कि पुलिस पर पथराव होते हैं, फ़ौज पर पथराव होते हैं ये दुनिया की बदकिस्मत कौम है इंडिया की ये ‘सिंगल सोर्स’ कौम, जो अपने डॉक्टर्स पर, पुलिस पर पथराव कर रहे हैं। खुदा का खौफ करो…”
“पाकिस्तान का मीडिया भरा पड़ा है जो कह रहे हैं तबलीगियों को निकालने और टार्गेट करने के लिए। आपके यहाँ तो मीडिया नहीं बल्कि सोशल मीडिया कर रहा है। सोशल मीडिया तो आम आदमी की बात है। उसमें से अगर एक वर्ग को निकाल दो तो वो लोग भारत को रिप्रजेंट नहीं करते। आप खुद नफरत की दीवार बनाना चाह रही हैं।”
आरिफ अजाकिया ने सबा नकवी को भारत के उन मुस्लिमों की याद दिलाते हुए कहा, जिन्हें भारत में हिन्दुओं ने खूब स्नेह दिया, “आपके सदर रहे हैं इंडिया के मुस्लिम, उन्होंने सम्मान हासिल किया है। आज भी कलाम साहब लोग हिन्दुओं से लेकर सबके रोल मॉडल हैं। कई ऐसे मुस्लिम हैं, जिन्हें हिन्दू बहुत पसंद करते हैं। वहाँ मजहब नजर नहीं आता आपको?
“आप जावेद अख्तर को लिरिक्स लिखना छोड़ने को कह रहे हैं? उनको उनके एक-एक लफ्ज़ की कीमत दी गई है मोहब्बत की सूरत में, आर्थिक रूप से और फैन्स के रूप में। जावेद साहब तो खुद कहते हैं कि वो नास्तिक हैं, तो फिर आपसे सवाल पूछा जाना चाहिए कि फिर आपने उन्हें मुस्लिमों की लाइन में खड़ा क्यों किया?”
“अब आपके मुख्य मुद्दे पर आते हैं। ताजमहल! मुझे सिर्फ इतना बता दो कि ताजमहल क्या मंगोलिया से उठाकर लाया गया था? या वहाँ से पैसे लेकर आए थे और उनसे बनाया गया था? या पैसे, मजदूर, पत्थर लेकर आए थे और उनसे मुस्लिमों ने बनाया था?”
ताजमहल के इतिहास पर बात करते हुए आरिफ कहते हैं, “जिस मुहब्बत की निशानी को आप ये ताजमहल बताती हैं, वो मल्लिका 16वें बच्चे को जन्म देते हुए मरी थी, जिसकी मोहब्बत के गम में ये ताजमहल बना था। और उसी गम में फिर उसकी बहन से शादी की थी, और ये मल्लिका जिसके मरने के गम में ये महल बनाया गया था उसके शौहर को जंग में भेजा था। उसका कत्ल करवाया था और उससे फिर ये शादी रचाई गई थी… ये है आपके गम की निशानी।”
“इस्लाम की तारीख को ना कुरेदो… बहुत गंद है इसमें। इसी मोहब्बत के देवता शाहजहाँ के बेटे ने अपने भाइयों का कत्ल किया था। विनती है तारीखों को ना कुरेदें। ताजमहल की बुनियाद में करोड़ों हिन्दुओं की कब्रें हैं।”
“ताजमहल बनने में साल-दो-साल नहीं बीस साल लगे थे। हजारों मजदूरों ने कुर्बानी दी। वो सब मजदूर हिन्दुस्तानी थे। मुगल वहाँ से ‘कुछ’ लेकर नहीं आए थे… भर-भर के लाए थे। तमाम ताशकंद और बुखारा समरकंद में तरक्कियाँ हुईं थीं। इसी हिन्दुस्तान से लूटकर ले गए थे।”
आरिफ अजाकिया मुस्लिमों के इतिहास पर विस्तृत बात कहना चाहते थे लेकिन ‘वीडियो के लम्बे’ हो जाने की वजह से उन्होंने खुद को समेटते हुए कहा, “मुगलों का सेकुलरिज्म भी हमें ना दिखाया करें। सबको पता है। वीडियो लम्बी हो जाती हैं वरना मैं बैठकर चार-चार घंटे के आपको लेक्चर दे सकता हूँ।”
आरफा खानम शेरवानी और साम्प्रदायिक नारे
“जहाँ आपके जैसे पत्रकार और आरफा खानम कहती हैं कि भारत माता की जय मत कहो, यह सांप्रदायिक है… इसमें देवी की पूजा आ जाती है। भारत माता की जय का मतलब भारत माता जिंदाबाद… पाकिस्तान जिंदाबाद… यह तो हर मुल्क में है।”
“नागरिकता कानून के समय भी ये ट्वीट करती हैं कि ‘ला इलाहा इलल्लाह’ साम्प्रदायिक हैं। नहीं हैं, सेक्युलर हैं क्योंकि यह एक समूह के लोगों की ताकत है। इस तरह की राजनीति कर के आप इंडिया के लोगों को और तकलीफ में डाल देती हैं। अभी सिर्फ मुस्लिमो को ट्यूशन की जरूरत है, ना कि हिन्दुओं को। बाद में इस्लामोफोबिया और बाकी सारी चीजें करते रहें लेकिन इस समय सबसे पहली जरूरत आम मुस्लिम को समझाने की है।”
भारत में तबलीगी जमात के कारण हुए कोरोना वायरस के संक्रमण के तथ्य बताते हुए उन्होंने कहा, “33% कोरोना वायरस इंडिया में तबलीगी जमात की बेवकूफियों की वजह से फैला है। फिर आप बहाने बनाते नजर आते हैं कि सरकार ने ये क्यों नहीं किया, वो क्यों नहीं किया… आपकी कोई जिमेम्दारी नहीं थी क्या? समुदाय के रूप में आपकी क्या जिम्मेदारी है? ताने मारना? मुस्लिमों के एहसान गिनवाना?”
“इसके बाद आरिफ अजाकिया ने हाल ही में मुरादाबाद में डॉक्टर्स की टीम पर हुए हमले का जिक्र भी किया। और सवाल किए कि सबा नकवी जैसे लोगों ने अपने समुदाय को यह क्यों नहीं बताया कि आपका दुश्मन डॉक्टर्स नहीं, इन्डियन नहीं, बल्कि कोरोना वायरस है। उन्होंने कहा कि सबा नकवी ने उल्टा यह संदेश दिया कि देश मुस्लिमों का दुश्मन है। इस समय ताने मरना और एहसान जताना नहीं है।”
उन्होंने कहा कि हमें अपने गिरेबान में झाँकने की जरूरत है। इसके बाद मजहब में राजस्व तलाशने की बात करते हुए उन्होंने कहा, “ताजमहल से जो राजस्व आता है वह एक शासक के बनाए हुए स्मारक से आता है। उसे कभी भी मजहबी पैमाने में मत तौलिए। स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी, सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मारक भी अब एक राजस्व का स्रोत है। तो आप उसे सिर्फ हिन्दू स्मारक नहीं कह सकते हैं न?”
“स्मारकों के मजहब सिर्फ मजहबी जगहों पर होते हैं, जैसे मक्का में हैं, मदीना में हैं। वरना मजहबी नहीं होते। आपके अजमेर में एक मजार पे शायद मुस्लिमों से ज्यादा हिन्दू जाते हैं। मेरा उसी समुदाय से आने के कारण मेरी जिम्मेदारी बढ़ जाती है इस वजह से मैं इन सब बारे में बात कर रहा हूँ।”
एक तरफ पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। दूसरी ओर आतंकी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के सोपोर में घात लगाए आतंकवादियों ने CRPF के काफिले पर हमला किया। हमले में CRPF के तीन जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। वहीं दो जवान गंभीर रूप से घायल हैं। पूरे इलाके में सेना सर्च अभियान चला रही है।
#UPDATE Two jawans have lost their lives & another injured in a terrorist attack in Sopore, Baramulla in Jammu & Kashmir. https://t.co/u8vrWA6hm5
जानकारी के मुताबिकउत्तरी कश्मीर के बारामुला जिला के सोपोर में पहले से घात लगाए बैठे आतंकवादियों ने अचानक से CRPF के काफिले पर हमला बोल दिया। हमले के बाद आतंकी फरार हो गए। इसके बाद से ही सेना ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च अभियान चलाया हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि जंगलों में कई आतंकी छिपे हो सकते हैं।
हमला सोपोर में नूराबाद इलाके में अहद बाबा क्रॉसिंग के पास हुआ था। इस दौरान CRPF और पुलिस का संयुक्त दल क्रॉसिंग पर ड्यूटी पर तैनात था। वीरगति को प्राप्त हुए जवानों की पहचान हेड कॉन्स्टेबल राजीव शर्मा, कॉन्स्टेबल खरड़े, कॉन्स्टेबल सतपाल के रूप में हुई है। घायलों में हेड कॉन्स्टेबल एमसी घोष व कॉन्स्टेबल जावेद शामिल है।
डीजीपी पुलिस दिलबाग सिंह ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि ये सुरक्षाकर्मी रोजाना की तरह सोपोर कस्बे की मुख्य सड़क पर अपने वाहन के साथ ड्यूटी पर तैनात थे। आतंकवादियों को शायद इस बारे में पता था और उन्होंने पूरी योजना के साथ हमले को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों की धर-पकड़ के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है। सेना, CRPF और पुलिस के एसओजी के जवानों ने इलाके की घेराबंदी कर रखी है।
गौरतलब हो कि कोरोनावायरस संकट के बीच पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान भी लगातार सीमा पार से सीज फायर का उल्लंघन कर रहा है। शुक्रवार को भी जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के नीवा इलाके में CRPF की टुकड़ी पर आतंकी हमला किया गया था। इस हमले में गोली लगने की वजह से एक जवान घायल हो गया था। हालाँकि इस बीच चली मुठभेड़ में चार आतंकवादियों को जवानों ने मार गिराया था।
उलजुलूल बयनाबाजी, माफ़ी माँगना, सेना को बलात्कारी बताना, राफेल को विमानवाहक पोत (??????- ???????? ??????? ????) बताना, आदिवासियों की भूमि पर अवैध कब्जा… संस्थाओं के खिलाफ लोगों को भड़काना। इस सबके बावजूद यदि कोई यह मानता है कि अरुंधति रॉय (Arundhati Roy) की पहली दुश्मनी सामान्य तर्क क्षमता, बुद्धि-विवेक के साथ ना होकर दक्षिणपंथ और हिदुओं से है तो वह गलत है। कोरोना वायरस ने अरुंधति रॉय को एक बार फिर हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा भुनाने के लिए चर्चा में आने का अवसर दिया है। लेकिन उनके नाम के साथ ही गूगल में साल-दर-साल कुछ अलंकरण जुड़ते जाते हैं, जिनके बारे में बात की जानी चाहिए।
Google की एक ख़ासियत है कि वह वामपंथियों की तरह चीजों को भूलता नहीं है। यदि आप गूगल में अरुंधति रॉय सर्च करते हैं तो अरुंधति रॉय से जुड़े हर साल किए गए कुछ ना कुछ गैरकानूनी या अवैध काम आपके सामने नजर आने लगते हैं। इस तरह से एक ‘अर्बन नक्सल विचारक’केदोहरेपन कीपूरी सिलसिलेवार टाइमलाइन तैयार हो जाती है। हालाँकि, एक वामपंथी ‘अर्बन नक्सल’ के लिए यह एक उपलब्धि ही हो सकती है कि उसका नाम हर बार किसी ना किसी कानून के उल्लंघन और विवाद के कारण चर्चा का विषय रहा।
आपको यह जानकार हैरानी होगी (या, हो सकती है) कि बातों और विचारों में गरीब-पिछड़ों के उद्धारक नजर आने वाले वामपंथी जिस बंगले में रहते हैं वह किसी आदिवासी की वन भूमि का गैरकानूनी अधिग्रहण और दस्तावेजों में हेर-फेर कर बनाया गया है।
कानूनन अवैध है अरुंधति रॉय का आलीशान बंगला
दिसम्बर 2010 – बुकर पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरण प्रेमी लेखिका अरुंधति रॉय के फिल्म निर्माता पति प्रदीप कृष्ण के मध्य प्रदेश पचमढ़ी में बने विवादास्पद बंगले (Dream Home) के नामांतरण को वैध ठहराने की अपील होशंगाबाद की कमिश्नर कोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने प्रदीप कृष्ण के साथ ही तीन अन्य बंगलों का नामांतरण भी अवैध माना था। ख़ास बात यह है कि यह भूमि उन्होंने वर्ष 1994 में किसी आदिवासी से ‘खरीदी’ थी।
अरुंधति रॉय के पति प्रदीप कृष्ण ने मध्य प्रदेश के पचमढ़ी से सात किमी दूर बारीआम गाँव में एक खूबसूरत बंगला बनवाया था। दिलचस्प बात यह है कि यह क्षेत्र पचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा है और केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय ने इसे पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत इको-संवेदी क्षेत्र घोषित कर रखा है।
इस मामले में पचमढ़ी स्पेशल एरिया डवलपमेंट अथॉरिटी ने कहा था कि अरुंधती रॉय के पति प्रदीप कृष्ण समेत चारों लोगों ने इस जमीन का लैंड यूज (भू-उपयोग) गलत तरीके से बदलवाया था। इसके बाद वन विभाग ने भी इन बंगलों को अभयारण्य क्षेत्र में होने के कारण अवैध करार दे दिया था।
क्या यह हास्यास्पद नहीं है कि जल-जंगल-जमीन जैसे कर्णप्रिय ‘वामपंथी मुहावरों’ के मसीहा नजर आने वाले लोगों ने अपनी छुट्टियों का पूरा लुत्फ़ लेने के लिए आदिवासी इलाकों में वन भूमि के दस्तावेजों में हेर-फेर कर एक आलीशान बंगला बनाकर रखा है?
इसके बाद कोर्ट द्वारा इस अवैध बंगले को तोड़ने के भी आदेश जारी किए गए थे। लेकिन वामपंथी अरुंधति रॉय और उनके पति निरंतर इसके खिलाफ याचिका दायर करते नजर आए हैं, जो कि हर बार खारिज होती रही है।
हिन्दू विरोधी होने के लिए तार्किक होना पहली आवश्यकता नहीं
तारीफ़ अगर किसी चीज की कि जानी चाहिए तो वह अरुंधति रॉय जैसे सभ्यता और अधिकारों की आड़ में अपनी विषैली विचारधारा की रोटियाँ सेंकने वाले लोगों के आत्म सम्मान की! क्योंकि तमाम फर्जीवाड़ों, आडम्बरों में सर से पाँव तक घिरे होने के बावजूद ये लोग सफलतापूर्वक इस बात का दिखावा करने में सहज रहते हैं कि ये सामाजिक चिन्तक और विचारक हैं।
अरुंधति रॉय अपनी सहूलियत के अनुसार ही बिल से बाहर निकलती हैं। इस बार भी वह हिन्दू-मुस्लिम के मुद्दे पर ही बाहर निकली हैं। उनका मानना है कि सरकार ने कोरोना की महामारी के द्वारा मुस्लिमों की छवि को नुकसान पहुँचाने का काम किया है, जबकि होना यह चाहिए था कि वो यह कहती कि मुस्लिमों को ऐसे काम नहीं करने चाहिए जिससे उनके समुदाय का नाम और छवि खराब होती है।
पहले भी वो राफेल को विमानवाहक पोत बताकर अपने विवेक का परिचय अपने भगत-जनों को दे चुकी हैं। यही नहीं, हिन्दू, दक्षिणपंथ और उसके समर्थकों के लिए उनके भीतर भरे हुए जहर को बाहर निकालते हुए वह अक्सर कहती देखी गई हैं कि पूर्वोत्तर में आदिवासी, कश्मीर में मुस्लिम, पंजाब में सिख और गोवा में ईसाइयों से भारतीय राज्य लड़ रहा है।
गोआ पर 450 सालों से चले आ रहे पुर्तगाली स्वामित्व के बाद 1961 में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए गोवा मुक्ति संघर्ष ऑपरेशन को इसी अरुंधति रॉय ने सवर्ण भारतीय सेना का क्रिश्चियनों के खिलाफ साजिश बताते हुए कहना था कि ऐसा लगता है जैसे यह अपरकास्ट हिंदुओं का ही स्टेट हो। अरुंधति रॉय जैसे लोग जानते हैं कि उनका विषय तबलीगी जमात या मुस्लिमों की छवि नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के प्रयासों को ढकना है। यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो फिर प्रश्नचिन्ह उस विलुप्त होती विचारधारा पर लग सकता है, जिसके मसीहा आज अरुंधति रॉय जैसी हस्तियाँ हैं।
आपने अक्सर सिर्फ माँ को ही अपने बच्चों के लिए दुख, दर्द अपने सिर लेते देखा होगा। मगर बिहार के नालंदा से माँ-बेटे के रिश्ते की एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। माँ को भूखा देख एक बेटा सारे कानून तोड़कर चोर बन गया और माँ का पेट भरने के लिए चोरी तक कर डाली। यहाँ तक कि इस अपराध की सजा को माफ़ करते हुए खुद जज ने उसे राशन और कपड़े दिलवा दिए।
कोरोना के कारण देशव्यापी लॉकडाउन से गरीब वर्ग को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में शुक्रवार (अप्रैल 17, 2020) को बिहार के नालंदा जिले स्थित बिहारशरीफ में चोरी के आरोप में एक नाबालिग किशोर का राशन चोरी का मामला सामने आया।
नालंदा जिले के बिहारशरीफ में एक नाबालिग बच्चे को चोरी के आरोप में पुलिस ने जज के सामने पेश किया। लेकिन जज को जब पता चला कि युवक ने भूख से तड़प रही अपनी माँ के लिए खाना जुटाने के लिए चोरी की तो उन्होंने उसे सजा देने की बजाय शाबाशी दी। इतना ही नहीं, रिहाई के समय किशोर को पर्यवेक्षण गृह के अधीक्षक ने खाने का सामान, चावल, आटा, आलू, तेल व विधवा माँ के लिए कपड़े भी दिए।
नालंदा जिले के इस्लामपुर में रहने वाले नाबालिग को पुलिस ने किशोर न्याय परिषद के प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र की कोर्ट में पेश किया। बच्चे पर आरोप था कि उसने चोरी की है। जज ने पूरी बात सुनी और चोरी का कारण सुन किशोर को मुक्त कर दिया। साथ ही पदाधिकारियों को उसे हरसंभव मदद करने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने का आदेश दिया।
इसके साथ ही अदालत ने हर 4 महीने में किशोर से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट सौंपने के निर्देश पुलिस को दिए हैं। जज ने बीडीओ को परिवार को राशन कार्ड, सभी सदस्यों के आधार कार्ड, किशोर की माँ को विधवा पेंशन, गृह निर्माण के लिए अनुदान राशि समेत सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कराने के लिए कहा है।
परिवार में सिर्फ विधवा माँ और छोटा भाई
रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपित किशोर के पिता की कुछ वर्ष पहले ही मृत्यु हो गई थी। उसके परिवार में उसकी माँ के अलावा एक छोटा भाई भी है। परिवार में आय का स्रोत सिर्फ यही युवक था, जो मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। कोरोना वायरस के कारण घोषित देशव्यापी बंद के कारण उन्हें राशन और खाने की समस्या हुई। इसी दौरान आरोपित युवक को चोरी के आरोप में इस्लामपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर किशोर न्याय परिषद में भेजा था।
बंद के दौरान पर्यवेक्षण गृह में जज मानवेंद्र मिश्रा, जिला जज श्याम किशोर झा, एडीजे वन आलोक राज व जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव आदित्य पांडेय युवक से मिले थे। जहाँ इस युवक ने उन्हें चोरी के पीछे कारण बताकर चोरी की बात को स्वीकार किया। इसके बाद की गई जाँच में जब युवक की आर्थिक हालात की बातें सच निकलीं, तो जज ने यह फैसला लिया।
देश में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के बीच तबलीगी जमात से जुड़े एक के बाद एक चौंकाने वाले आँकड़े सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक देश में कुल सामने आए कोरोना मरीजों में से 29 प्रतिशत मामले दिल्ली मरकज से निकले तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं। शनिवार को आई स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट उनलोगों की आईना दिखाती है जो मीडिया पर जमातियों को बदनाम करने का आरोप लगा रहे हैं।
#WATCH Out of total 14378 cases, 4291 (29.8%) cases are related to Nizamuddin Markaz cluster from single source&affected 23 States&UTs. 84% cases in TN, 63% cases in Delhi, 79% cases in Telangana, 59% cases in UP & 61% in Andhra Pradesh are related to the event: Health Ministry pic.twitter.com/UMsz1hx3tz
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने शनिवार मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि देश में अब तक कोरोना के 14378 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 4291 यानी कि 29 फीसदी मामले तब्लीगी जमात से जुड़े हुए हैं। दिल्ली में कोरोना के 63 फीसदी, तेलंगाना में 79 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 59 फीसदी और आंध्रप्रदेश में 61 फीसदी मामले तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं।
संयुक्त सचिव ने बताया कि दिल्ली, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश सहित देश के 23 राज्यों मे जमात से जुड़े ज्यादातर मामले सामने आए हैं। उन्होंने बताया है कि पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना के 991 नए मामले सामने आए हैं और 43 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 1992 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हो चुके हैं।स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कोरोना के कारण देश में मृत्यु की दर 3.3 फीसदी है और सबसे अधिक 75 फीसदी मौत बुजुर्गों की हुई है।
गौरतलब है कि दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में मार्च माह में हुए तबलीगी जमात एक कार्यक्रम में 9000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया था। यहाँ से दिल्ली पुलिस ने 2300 जमातियों को बाहर निकालकर सभी को क्वारंटाइन कराया था। यह जगह कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। इतना ही नहीं इससे पहले देशभर में प्रचार के लिए मरकज से निकले जमातियों के कारण महामारी एक के बाद एक दूसरे राज्यों में फैलती चली गई।
वहीं इनमें सैकड़ों की संख्या में विदेशी जमाती भी शामिल हुए थे। इसके बाद सभी राज्यों में इनकी तलाशी के लिए पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर सभी को क्वारंटाइन कराया। इस दौरान कई स्थानों पर जमातियों ने कोरोना योद्धाओं पर जानलेवा हमले भी किए।
इस दौरान गृह मंत्रालय की प्रवक्ता ने बताया कि कोरोना संकट के चलते भारत में फँसे विदेशियों की वीजा अवधि बढ़ाई जाएगी। बिना शुल्क वीजा अवधि बढ़ाई जाएगी। फँसे विदेशी तीन मई तक आवेदन कर सकते हैं। साथ ही गृह मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी तरह की मदद के लिए 112 पर कॉल कर सकते हैं।
आपको बता दें कि देश में कोरोना महामारी से अब तक 488 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 14,378 हो गई है। यही कारण है कि सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाकर 3 मई कर दिया है।
पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी कोरोना वायरस का संक्रमण फैलता जा रहा है। इसको देखते हुए सरकार ने 21 दिनों के लिए पूर्ण लॉकडाउन किया हुआ था। फिर हालात को मद्देनजर रखते हुए इसकी समयसीमा बढ़ाकर 3 मई तक कर दी गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यावसायिक घरानों से अपील की थी कि वे किसी भी कर्मचारी को उनकी नौकरी से न निकालें। साथ ही उन्होंने उनसे कर्मचारियों के प्रति संवेदना दिखाते हुए उनकी सैलरी भी कम करने या फिर नहीं काटने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि लॉकडाउन के कारण कई कर्मचारी बिना वेतन के अपनी आश्यकताएँ पूरी नहीं कर सकेंगे।
इन दिनों देश कोरोना वायरस महामारी से निपट रहा है और साथ ही आर्थिक मंदी से भी जूझ रहा है। मगर ऐसे में भी कुछ मीडिया घराने हैं, जो मोदी सरकार को निशाना बनाने में पीछे नहीं रहते और फ़र्जी खबरें फैला कर लोगों में दहशत पैदा करने का काम कर रहे हैं। यह फर्जी खबरें ‘द हिंदू’और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के द्वारा तब प्रकाशित की गई, जब देश महामारी के दौर से गुजर रहा है। इसमें प्रसार भारती को निशाना बनाने के मकसद से लेख लिखा गया। जिसमें यह आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री के अनुसार लॉकडाउन की अवधि को देखते हुए और कर्मचारियों को को जॉब से न निकालने के निर्देश के बावजूद AIR ने कोरोना वायरस के महामारी की बीच अपने कर्मचारियों को दिया है।
इंडियन एक्सप्रेस ने फर्जी खबरें फैलाईं
इंडियन एक्सप्रेस ने ‘दिल्ली कॉन्फिडेंशियल’ नाम के एक सेक्शन में ‘अगेंस्ट अपील’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया। 16 अप्रैल, 2020 को प्रकाशित लेख में दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री से अपील के बावजूद प्रसार भारती ने अपने कर्मचारियों का वेतन कम कर दिया था।
लेख में कहा गया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों और लेबर के प्रति संवेदनशील होने को कहा। साथ ही वित्त मंत्रालयों ने उल्लेख किया था कि संविदा और आकस्मिक श्रमिकों को पूर्ण भुगतान भी किया जाना चाहिए और लॉकडाउन के दौरान भी उन्हें ड्यूटी पर माना जाना चाहिए। हालाँकि, ऑल इंडिया रेडियो ने दोनों की सलाह को नज़रअंदाज़ किया। कई कैजुअल कर्मचारी, जो आकाशवाणी के लिए प्रस्तुतकर्ता, निर्माता, पटकथा-लेखक आदि के रूप में काम करते हैं, उन्हें केवल उन दिनों के लिए भुगतान किया जाता है, जब उन्हें मार्च में बुलाया गया था, हालाँकि उनमें से कई लोगों ने और भी शो में आने की इच्छा जताई थी।”
इंडियन एक्सप्रेस के लेख में निम्नलिखित बातों का उल्लेख किया गया है:
1. भारत की सार्वजनिक सेवा प्रसारक स्वयं प्रधानमंत्री की अपील का पालन नहीं कर रही है।
2. प्रसार भारती के “कर्मचारियों” को पूरी तरह से भुगतान नहीं किया जा रहा।
3. प्रसार भारती उन ‘कर्मचारियों’ को ही भुगतान कर रही है, जिसे उसने अपनी आवश्यकता के अनुसार बुलाया था और उन्हें पूरी राशि देने के बजाए सिर्फ उतनी राशियों का ही भुगतान कर रहा है जितने दिन उन्हें बुलाया गया था।
4. कर्मचारी काम करना चाहते हैं और इसके लिए भुगतान भी चाहते हैं, लेकिन प्रसार भारती लॉकडाउन के दौरान लागत में कटौती के प्रयास में उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दे रहा है।
इसमें सबसे बड़ी बात यह थी कि “हो सकता है कि इन्होंने सलाह को अनदेखा किया है।” हालाँकि इस झूठी खबर की पुष्टि करने के लिए इंडियन एक्सप्रेस के पास कोई आधार नहीं था। उसके लेख से स्पष्ट था कि उसने द्वेष और फर्जी खबर फैलाने के लिए इस तरह का लेख लिखा। मगर उनका यह झूठ अधिक समय तक नहीं छिप सका। ऑपइंडिया ने प्रसार भारती द्वारा इंडियन एक्सप्रेस को लिखा गया पत्र ढूँढ़ निकाला। जिसमें उसके झूठ की सारी पोल-पट्टी खुल गई है।
पत्र में प्रसार भारती का कहना है कि यह लेख तथ्यात्मक रूप से गलत है। यह न केवल ऑल इंडिया रेडियो की छवि को खराब कर रहा है, बल्कि इसमें पाठकों को गुमराह करने की भी कोशिश की गई है।
प्रसार भारती ने अपने संस्थान की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कुछ बातें बताई हैं।
1. प्रसार भारती द्वारा इंडियन एक्सप्रेस को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि इंडियन एक्सप्रेस जिनके बारे में बात कर रहा है, वह प्रसार भारती के “कर्मचारी” नहीं हैं, बल्कि “अंशकालिक फ्रीलांसर हैं जो केवल एक जरूरत के आधार पर लगे हुए हैं और कैजुअल असाइनमेंट के रूप में काम करते हैं। उन्हें उनके द्वारा किए गए असाइनमेंट के लिए भुगतान किया जाता है।”
2. स्पष्ट कर दें कि इन व्यक्तियों और प्रसार भारती के बीच कोई नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं है।
3. इन कैजुअल असाइनी को लॉकडाउन के दौरान भी उनके द्वारा किए गए असाइनमेंट के लिए भुगतान किया जा रहा है। इनका असाइनमेंट के अलावा ऑल इंडिया रेडियो से भुगतान प्राप्त करने का कोई अनुबंध नहीं है। ये जितना असाइनमेंट करते हैं, उन्हें उसके लिए भुगतान किया जाता है।
4. वे अपनी इच्छानुसार किसी अन्य सार्वजनिक या फिर निजी संगठनों में नौकरी करने या फिर बिजनेस के लिए स्वतंत्र हैं। ऐसे व्यक्ति शिक्षक, मैनेजर, इंजीनियर, डॉक्टर, वकील या बिजनेसमैन हो सकते हैं। ये अपने खाली समय में कैजुअल असाइनी के रूप में ऑल इंडिया रेडियो में योगदान दे सकते हैं।
दरअसल प्रसार भारती के सूत्र ने ऑपइंडिया को बताया कि कई असाइनी आकाशवाणी सेवाओं जैसे- एफएम रेनबो, विविध भारती, आकाशवाणी जैसे अन्य समाचार के लिए लॉकडाउन के दौरान भी काम कर रहे हैं।
प्रसार भारती की स्पष्टीकरण के बाद यह बात साफ हो गई है कि संस्थान ने किसी भी तरह से प्रधानमंत्री द्वारा की गई अपील को नजरअंदाज नहीं किया है। कैजुअल असाइनमेंट्स के लिए उसी तरह से भुगतान किया जा रहा है, जैसे पहले किया जाता था। इसके अलावा इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि प्रसार भारती अपने “कर्मचारियों” को कम भुगतान कर रहे हैं, जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत है और मनगढ़ंत है।
अब हम आपको बताते हैं कि किस तरह से द हिंदू ने कोरोनोवायरस लॉकडाउन के बीच प्रसार भारती से कर्मचारियों को निकालने की फर्जी खबर फैलाई।
फर्जा खबर फैलाने के लिए जाना जाने वाले द हिंदू ने एक बार फिर से ऐसा ही किया है। 16 अप्रैल को प्रकाशित एक लेख में, द हिंदू ने दावा किया कि दिल्ली एफएम गोल्ड के 80 रेडियो जॉकी (RJs) काम से बाहर हैं और सरकार के आदेशों के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया गया है।
Fake news published by The Hindu
दिलचस्प बात यह है कि लेख में लेखक ने यह स्वीकार किया कि वे कैजुअल वर्कर हैं। कैजुअल वर्कर होने के नाते, उन्हें केवल तभी बुलाया जाता है जब उनकी जरूरत होती है और इसलिए उनके बीच नियोक्ता-कर्मचारी का कोई संबंध नहीं होता है। दिल्ली एफएम गोल्ड ऑल इंडिया रेडियो की पेशकश है और इसलिए यह लेख सरकार को टारगेट करने के लिए लिखा गया लगता है।
यहाँ पर गौर करने वाली बात ये है कि जब कोई नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं है, और इन RJ को जरूरत पड़ने पर बुलाया जाता है तो फिर ये किसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है कि वो उन पर दबाव डाले कि उन्हें असाइनमेंट के लिए बुलाया ही जाए। यह संस्थान के ऊपर निर्भर करता है कि वो कब उन्हें असाइनमेंट के लिए बुलाएँगे, कब नहीं। दरअसल इनकी हेडलाइन ही अतार्किक और हास्यास्पद है, क्योंकि कोई भी रेडियो चैनल पेरोल पर 80 रेडियो जॉकी नहीं रखता है।
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने भी द हिंदू की खबर का खंडन किया।
#PIBFactCheck Claim: A prominent newspaper says 80 Radio Jockeys (RJs) of Delhi FM Gold are out of work and not been paid despite govt orders Fact: They are not employees, but part-time freelancers, engaged on a need-basis for assignments.They are free to accept jobs elsewhere pic.twitter.com/kz0jSlU8s5
प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर ने कहा, “विभिन्न पैनल से निकाले गए कई कैजुअल असाइनी उनकी उपलब्धता और आवश्यकता के आधार पर @AkashvaniAIR के नेटवर्क पर लगे रहते हैं और 6 असाइनमेंट की उचित सीमा के भीतर काम करते हैं।” दिलचस्प बात यह है कि शशि शेखर ने यह भी खुलासा किया कि प्रति व्यक्ति 6 असाइनमेंट की सीमा है जो पहले से ही ऑल इंडिया रेडियो से संबंधित है।
It will be the continued endeavour of @prasarbharati across its networks of DD and @AkashvaniAIR to harness young and upcoming talent and give opportunities to new voices and faces through this system of casual assignment after following due process.
उन्होंने आगे कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मीडिया तथ्यात्मक स्थिति की पुष्टि किए बिना कैजुअल असाइनी की स्थिति के बारे में भ्रामक विवरण प्रकाशित कर रहा था।
झूठ फैलाने का इंडियन एक्सप्रेस का पुराना इतिहास रहा है। बुधवार (अप्रैल 15, 2020) को इंडियन एक्प्रेस में एक खबर प्रकाशित हुई जिसमें दावा किया गया कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल में धर्म व मजहब को देखते हुए मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड बनाए गए हैं। रिपोर्ट में वजन डालने के लिए ये भी कहा गया कि अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट गुणवंत एच राठौड़ ने खुद दावा किया है कि सरकार के फैसले के अनुसार हिंदुओं और मजहब विशेष के लिए अलग-अलग वार्ड तैयार किए गए हैं। गुजरात सरकार ने ऐसे किसी भी वर्गीकरण को ख़ारिज कर दिया। गुजरात के स्वास्थ्य विभाग ने भी इस बिंदु को पूरी तरह से खारिज करते हुए अपनी ओर से बयान जारी किया।
इसमें कहा गया कि स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल में किसी भी मरीज के लिए धार्मिक आधार पर विभाजन नहीं किया गया है। कोरोना मरीजों को उनके लक्षण, उनकी गंभीरता के आधार पर और डॉक्टरों की सिफारिशों आदि पर इलाज किया जा रहा है।
इसके अलावा डॉक्टर राठौर का खुद भी इस संबंध में बयान आया था। उन्होंने कहा था, ”मेरा बयान कुछ खबरों में गलत तरीके से पेश किया जा रहा है कि हमने हिंदू और दूसरे मजहब के लिए अलग-अलग वार्ड बनवाएँ। मेरे नाम पर गढ़ी गई ये रिपोर्ट झूठी और निराधार है। मैं इसकी निंदा करता हूँ।”
यूनाइटेड अरब अमीरात की प्रिंसेस हेंड अल कासिमी ने एक व्यक्ति को इसीलिए देश से बाहर निकाल फेंकने की धमकी दी, क्योंकि उसने तबलीगी जमात के उन लोगों का बचाव न करने की सलाह दी थी, जिन्होंने दुनिया भर के कई देशों में कोरोना का संक्रमण फैलाया। भारत में भी दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ मस्जिद में हज़ारों जमाती जुटे थे, जो लॉकडाउन के बावजूद मजहबी कार्यक्रमों में शिरकत कर रहे थे। इसके बाद वो कई राज्यों में फ़ैल गए, जिससे कोरोना का संक्रमण देश भर में तेज़ गति से फैला।
सौरभ उपाध्याय नामक व्यक्ति ने लिखा था कि मजहब विशेष को तबलीगी जमात वालों को बचाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उन्होंने लिखा कि जो क्षति पहुँचाई गई है, वो हो चुका है और आप कम से कम इसको स्वीकार कर के इसकी निंदा तो कर ही सकते हैं। उन्होंने लोगों को इस्लामी कट्टरपंथियों की तरह व्यवहार न करने की सलाह दी। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि कोई भी हिन्दू आसाराम के अपराधों का बचाव नहीं करता। उपाध्याय ने मौलाना साद को आतंकी बताते हुए सलाह दी थी कि उनके तलवे चाटना बंद करें।
एक अन्य ट्वीट में उपाध्याय ने पूछा कि ‘शांतिदूतों’ और थूकने में क्या कनेक्शन है? उन्होंने पूछा था कि क्या ये 2020 में जिहाद के लिए एक नया तरीका गढ़ा गया है? सौरभ ने लिखा कि उन्हें लगता है कि ‘वो’ अभी भी 1400 साल पहले ही अटके हुए हैं और वो विकास को जरा भी पसंद नहीं करते। इसी बात पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए यूएई की प्रिंसेज ने कहा कि ये रेसिज्म और भेदभाव को बढ़ावा देने वाला ट्वीट है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सज़ा दी जाएगी और उन्हें देश छोड़ने को कहा जाएगा।
Anyone that is openly racist and discriminatory in the UAE will be fined and made to leave. An example; pic.twitter.com/nJW7XS5xGx
— Princess Hend Al Qassimi (@LadyVelvet_HFQ) April 15, 2020
दरअसल, खाड़ी देशों में लोगों को इस्लामोफोबिया फैलाने का आरोप लगा कर सज़ा दिलवाने की कोशिश की जाती है। भारतीय कट्टरपंथियों के एक खास वर्ग द्वारा हिंदुओं को निशाना बनाने का भयावह प्रयास चल रहा है। ये वर्ग खास तौर पर खाड़ी देशों में रहने वाले हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की कार्यशैली पर लॉकडाउन के बीच राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने सवाल उठाए हैं। राज्यपाल ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि निशुल्क राशन गरीबों के लिए हैं, तिजोरियों में बंद करने के लिए नहीं है। धोखाधड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दरअसल, बंगाल के कई इलाकों में मुफ्त राशन वितरण में भारी अनियमितताएँ बरते जाने की खबरें सामने आई हैं।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा, सत्ताधारी दल के लोगों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) पर कब्जा कर लिया है। पीडीएस एक बड़ा घोटाला बनती जा रही है। मुझे शक है कि यह अब तक सबसे बड़ा घोटाला भी हो सकता है। @KailashOnline@shalabhmanihttps://t.co/jOgdu3hk0q
राज्यपाल धनखड़ ने कहा कि कोविद-19 के खिलाफ हमें जमीन पर एकजुट होकर लड़ना होगा न कि मीडिया और लोगों के बीच जाकर। इस पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) में घोटाले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। यह एक बड़ी चिंता का विषय है। पीडीएस का राजनीतिक अपहरण हो रहा है जो कि बड़ा अपराध है। जरूरतमंदों के लिए मुफ्त राशन है न की तिजोरी में रखने के लिए है। इस में गड़बड़ी करने वालों से सख्ती से निपटा जाए।
आपको बता दें कि इससे पहले धनखड़ ने कहा था कि बंगाल में लॉकडाउन का पालन कराने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर विचार होना चाहिए। उन्होंने लॉकडाउन का पालन कराने में अक्षम पुलिस अधिकारियों को भी प्रदेश सरकार से तुरंत हटाने की माँग की थी।
वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राशन वितरण में गड़बड़ी को लेकर मिली कई शिकायतों के बाद तत्काल प्रभाव से राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव को हटा दिया है। उसके बाद भी कई जगहों पर अनियमितता के मामले सामने आ रहे हैं। विपक्षी दल खासकर भाजपा और माकपा निशुल्क राशन के राजनीतिक आवंटन का आरोप लगा रहे हैं।
Concerned as regards illegalities and irregularities in making available benefit of free food grains to the poor and needy under Pradhan Mantri Garib Kalyan Ann Yojna, have sought urgent details through my office in this behalf from the State Chief Secretary @MamataOfficial
— Governor West Bengal Jagdeep Dhankhar (@jdhankhar1) April 18, 2020
इससे पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ का नाम लिए बिना उनपर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ लोगों के पास राजनीति में शामिल होने के अलावा कोई और काम नहीं है। ममता ने बेहतरीन काम करने के लिए राज्य पुलिस और प्रशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह संकट के समय राजनीति और आलोचना करने वालों को ‘सच्चे इंसान’ नहीं मानतीं।
फेसबुक लाइव और सोशल मीडिया पर अपशब्दों के लिए बॉलीवुड अभिनेता एजाज खान (Ajaz Khan) को मुम्बई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने हाल ही में पत्रकारों को गाली देते हुए कहा था कि उन्हें और उनके परिवार को कोरोना हो जाए। एजाज खान पर मानहानि , घृणा फैलाने और बन्द के नियमों के उलंघन का केस दायर किया गया है।
गत बुधवार रात 12:30 बजे एजाज खान ने फेसुबक लाइव किया था। उन्होंने लाइव में मजहब को लेकर कई बातें कही। लाइव में उन्होंने कहा कि हर बात के लिए उनके मजहब वालों को ही जिम्मेदार माना जाता है।
मुम्बई के खार पुलिस स्टेशन में एजाज खान के खिलाफ आईपीसी 153A, 117, 121 धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
उन्होंने जनता से भी लाइव में प्रश्न पूछते हुए कहा- “लेकिन कभी सोचा है कि आखिर ये कौन हैं? जो ये साजिश कर रहे हैं।” वीडियो में एजाज ने इन सब चीज़ों के लिए पीएम मोदी और भाजपा को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने वीडियो में ये भी कहा कि ये एक साजिश है, जिससे कोरोना से ध्यान हटाने के लिए सभी लोगों का ध्यान सांप्रदायिक जैसे गंभीर मुद्दे की ओर चला जाए। वीडियो के अंत में उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जो देश में ऐसा कर रहे हैं, उन सबको ही कोरोना हो जाए।
इसके ठीक अगले दिन एजाज खान ने ट्विटर पर कुत्ते की फोटो डालकर भाजपा समर्थकों पर भद्दे व्यंग्य किए थे, जिसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुम्बई पुलिस को इस पर संज्ञान लेने को कहा था।
ज्ञात हो कि यह पहली बार नहीं है जब एजाज कहना को मुम्बई पुलिस ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया हो। आखिरी बार जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था, तो वो जेल से वापस लंगड़ाते हुए बाहर आए थे।