Home Blog Page 4911

यहाँ PM को आतंकी कह सकते हैं, आतंकियों को कहेंगे तो सस्पेंड होंगे: कंगना ने Twitter को लताड़ा

लोकप्रिय अभिनेत्री कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया क्योंकि उन्होंने मोरादाबाद में मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई हिंसा की निंदा की थी और हमलावरों को कड़ी सजा देने की माँग की थी। उनके ट्विटर अकाउंट सस्पेंशन पर अब कंगना ने चुप्पी तोड़ी है। एक वीडियो जारी कर कंगना ने रंगोली का बचाव किया। कंगना ने कहा कि रंगोली ने अपनी ट्वीट में कहा था कि जो लोग डॉक्टरों और पुलिस पर हमले कर रहे हैं, उन्हें गोली से मार देना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि सुजैन की बहन फराह अली खान और ‘प्रतिष्ठित’ निर्देशिका रीमा कागती ने झूठा दावा किया कि रंगोली मुस्लिमों के नरसंहार की बात कर रही है। कंगना ने कि कहा कि अगर किसी भी ट्वीट में ऐसा प्रतीत होता है कि मुस्लिमों के लिए बात कही गई हो तो वो और उनकी बहन सार्वजनिक रूप से जनता के सामने आकर माफ़ी माँगेंगीं। कंगना ने कहा कि उनका ये मानना नहीं है कि सारे मुस्लिम डॉक्टरों पर अटैक कर रहे हैं लेकिन विरोध करने वालों के बयानों को देख कर लगता है कि वो समझते हैं कि हर मुस्लिम आतंकी है। कंगना ने कहा:

“मैं सरकार से अपील करना चाहती हूँ कि ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स वे हैं, जो यहाँ के ही करोड़ों-अरबों रुपए खा कर इसी कश्ती में छेद कर रहे हैं। यहाँ प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को आतंकवादी कहा जा सकता है। जनसेवा में लगे आरएसएस को आतंकी कहा जा सकता है। लेकिन, आतंकवादियों को आतंकवादी नहीं कहा जा सकता। मुझे पता है कि देश अन्य समस्याओं से भी जूझ रहा है लेकिन इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का दाना-पानी बंद होना चाहिए। इन प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह ध्वस्त कर हमारे नए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स खुलने चाहिए।”

कंगना ने बबीता फोगाट का भी समर्थन किया और कहा कि उन्हें कई लोगों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद की बात करने वाले लोगों का ऐसे ही शोषण किया जाता है। कंगना ने पूछा कि अगर आज बबीता को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने बबीता फोगाट को सुरक्षा मुहैया कराए जाने की भी माँग की। रंगोली की ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए खत्री ने रंगोली के खिलाफ जातिवाद का जहर उगलते हुए ‘चांडाल’ कहा था। इसी तरह कई लोगों ने उन पर हमले किए। आरजे सायमा ने तो उन पर एफआईआर दर्ज कराने की भी माँग की थी और हमलावरों का बचाव किया था।

मणिपुरी महिला पर थूका: 100 सीसीटीवी फुटेज खँगालने के बाद पुलिस ने मोहम्मद इलियास को दबोचा

मुंबई के सांताक्रूज इलाके में अभी हाल ही में एक मणिपुरी महिला पर थूके जाने का मामला सामने आया था। आरोपित को 6 अप्रैल को मुंबई के कलिना इलाके से गिरफ्तार किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना तब सामने आई जब पीड़िता के एक दोस्त लिंडा न्यूमी ने सोशल मीडिया पर भयावह घटना के बारे में पोस्ट किया और अपने दोस्त पर एक बाइक से थूके जाने की घटना के बारे में बताया।

आरोपित की पहचान आमिर मोहम्मद इलियास रूप मे हुई है। वह कुर्ला का रहने वाला है। मणिपुरी महिला अपने एक मित्र के साथ गीता विहार जंक्शन से सांताक्रूज में कलिना मिलिट्री कैंप की ओर जा रही थी, जहाँ 6 अप्रैल को किराने का और अन्य जरूरी सामान बाँटा जा रहा था। उसी दौरान आमिर मोहम्मद इलियास, जो एक डिलीवरी बॉय है, बाइक से उनके पास आया और अपना मास्क हटाकर कलिना सिग्नल के पास उन पर थूक दिया

इसकी शिकायत पीड़ित ने वकोला पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई। पीड़िता ने कहा, “बाइक सवार एक शख्स मेरे पास आया और अपना मास्क हटाकर मेरे ऊपर थूक दिया। उसकी इस हरक़त से मुझे कोरोना वायरस संक्रमण हो सकता है। इस घटना से मैं काफी सहम गई, जिसकी वजह से मैं बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर नोट नहीं कर पाई।”

पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित की तलाश शुरू की। इस बाबत वकोला पुलिस टीम ने लगभग 100 सीसीटीवी फुटेज चेक किया और साथ ही उन्होंने कम से कम 1.5 लाख मोबाइल यूजर्स के डंप डाटा को भी स्कैन किया जो घटना के दिन वहाँ पर थे। जाँच कर रही टीम ने तमाम तरीके से सबूतों को इकट्ठा किया। पुलिस को आरोपित की पहचान सीसीटीवी फुटेज की मदद से मिली, जिसमें बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर धुँधला दिख रहा था। इसके बाद पुलिस ने एक ऐप का इस्तेमाल करते हुए सही रजिस्ट्रेशन नंबर का पता लगाया और फिर उसे धर दबोचा।

जोन 8 के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस मंजूनाथ सिंघे ने मामले की जानकारी देते हुए कहा, “30 वर्षीय आमिर मोहम्मद इलियास को हमने गिरफ्तार कर लिया है। वह कुर्ला इलाके में रहता है।” पुलिस ने कहा कि इलियास ने दावा किया कि उसे पान चबाने की आदत है और उसने यह हरकत जान-बूझकर नहीं किया था। वकोला पुलिस ने अब इलियास के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 270 और 352 के तहत मामला दर्ज किया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते इसी तरह की एक घटना, राजस्थान के कोटा शहर से भी आई थी। जहाँ 4-5 महिलाओं के एक समूह को पॉलीथीन की थैलियों में थूककर लोगों के घरों मे फेंकते हुए देखा गया था। इससे पता चलता है कि किस तरह कोरोना वायरस को लेकर लोगों के मन में डर और दहशत पैदा किया जा रहा हैं।

केन्या में राहत पैकेज के साथ शराब बाँट रहे हैं गवर्नर, कहा- यह कोरोना को मारती है

पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। इससे बचने के लिए लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। वायरस से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। इस बीच केन्या में राहत सामग्री के साथ लोगों को शराब की छोटी बोतलें भी वितरित की जा रही है।

केन्याई गवर्नर माइक सोनको के मुताबिक शराब कोरोना वायरस को मार रही है और इसे लोगों को सैनेटाइज करने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर गवर्नर के बयान पर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे है। हालाँकि विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही कह चुका है कि शराब कोरोना महामारी से नहीं बचाता है।

नैरोबी के गवर्नर माइक सोनको जरूरतमंद लोगों के बीच राशन सामग्री वितरित कर रहे हैं। इसमें चौकाने वाली बात यह है कि इन पैकेट के अंदर लोगों को शराब की छोटी-छोटी बोतलें भी दी जा रही हैं। पिछले सप्ताह मीडिया के संबोधन में इस बात की पुष्टि करते हुए गवर्नर सोनको ने कहा था कि लोगों के बीच बाँटे जा रहे राहत पैकेज के अंदर कोगनेक और हैनेसी की छोटी बोतलें दी जा रही हैं।

वहीं ट्विटर पर मौजूद वीडियो में सोनको यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि हम हैनेसी की छोटी बोतलें अपने लोगों को खाद्य सामग्री के साथ दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ दूसरे स्वास्थ्य संगठनों द्वारा की गई रिसर्च के मुताबिक यह माना गया है कि शराब कोरोना वायरस के साथ ही कुछ अन्य वायरसों को भी मारने में सहायक है।

इस खबर के सामने आने के बाद WHO की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि शराब कोरोना वायरस से नहीं बचाती है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि शराब का सेवन संचार और गैर-संचारी रोगों और मानसिक स्वास्थ्य विकारों की श्रेणी से जुड़ा हुआ है, जो किसी व्यक्ति को COVID-19 के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है।

आपको बता दें कि चीन के वुहान शहर से निकले कोरोना वायरस अब तक विश्व के 200 से अधिक देशों में अपने पैर पसार चुका है। इतना ही नहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पूरे विश्व में मरने वालों की संख्या 1,54,401 जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 2,259,352 हो गई है।

TheTelegraph का झूठ: दलित का खाना सिराज अहमद ने नहीं खाया था लेकिन खबर RSS को बदनाम करने के लिए लिखी

मीडिया का प्रोपेगेंडा कैसे काम करता है, इसको TheTelegraph के झूठ से समझिए। TheTelegraph का झूठ विचार को लेकर नहीं बल्कि पत्रकारिता के साथ है, खबरों के साथ है। भ्रामक हेडलाइन, गुमराह करने वाली तस्वीरें और बेहद अतार्किक आँकड़े, दक्षिणपंथी सत्ता-विरोधी मीडिया गुटों का यह प्रमुख हथियार हमेशा से ही रहा है। लेकिन यह चिंता का विषय तब बन जाता है, जब द टेलीग्राफ़ (The Telegraph) जैसे प्रोपेगेंडा-प्रमुख, कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बीच भी ऐसे कुत्सित प्रयास करने से बाज नहीं आते।

द टेलीग्राफ़ ने उत्तर प्रदेश में एक व्यक्ति द्वारा दलित से खाना ना लेने की घटना को बेहद भ्रामक तरह से पेश करने का नया कारनामा किया है। इसमें उसने आरएसएस की छवि खराब करने का एक और असफल प्रयास किया है। लेकिन, अब कम से कम यह तो स्पष्ट है कि दलितों की तुलना कोरोना वायरस से करने वाले द टेलीग्राफ के लिए अस्पृश्यता और छुआ-छूत समाजिक चिंतन से कहीं अधिक उसके अपने निजी प्रोपेगेंडा का हिस्सा है और इससे अधिक कुछ नहीं।

अस्पृश्यता, क्वारंटाइन में भी – TheTelegraph के झूठ का फैक्ट चेक

द टेलीग्राफ़ ने उत्तर प्रदेश की एक घटना में 3 तरह की कलाकारी कर के पेश की है, जो निम्नवत हैं –

शीर्षक – खबर का शीर्षक है: “क्वारंटाइन में भी अस्पृश्यता” (Untouchability, even in quarantine)
फीचर फोटो – इस खबर के साथ बेहद अप्रासंगिक तस्वीर लगाई गई है, जिसमें कि आरएसएस की ड्रेस पहने कुछ लोग खाना खिला रहे हैं
आरोपित का नाम – इस घटना में दलित से खाना ना लेने वाले का नाम सिराज अहमद है, जो कि ना ही खाना परोसने वाला आरएसएस कार्यकर्ताओं में से एक है, ना ही पीड़ित दलित! सिराज वह आदमी है, जिसने दलित प्रधान के हाथों से खाना लेने से इनकार कर दिया था।

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट

दलित महिला प्रधान के हाथ बना भोजन नहीं करने पर सिराज अहमद पर केस दर्ज

वास्तव में, यह घटना गत 10 अप्रैल को घटी है। घटना उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की है, जहाँ ग्राम प्रधान लीलावती देवी ने भुजौली खुर्द गाँव के स्कूल में बने क्वारंटाइन सेंटर में रसोईया ना होने की वजह से खुद ही क्वारंटाइन में रखे गए पाँच लोगों के लिए खाना बनाया था।

इन पाँच लोगों में से 2 मुस्लिम थे। इनमें से एक सिराज अहमद नाम के व्यक्ति ने दलित के हाथ बना खाना खाने पर बिरादरी से बहिष्कृत हो जाने की बात कहकर भोजन करने से इंकार कर दिया था।

इस घटना के बाद ग्राम प्रधान ने उप जिलाधिकारी देश दीपक सिंह और खंड विकास अधिकारी रमाकांत यादव को इस बारे में सूचना दी और पुलिस से लिखित शिकायत की। उन्होंने बताया कि इस मामले में सिराज अहमद के खिलाफ दलित अत्याचार विरोधी अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।

TheTelegraph का झूठ व्यापक स्तर तक

बंगाल से छपने वाले इस दैनिक अंग्रेजी ‘द टेलीग्राफ’ ने इस एक खबर के जरिए कई निशाने साधने की कोशिश की है। सबसे पहला मकसद तो यह कि लोगों का ध्यान खींचने में सफलता। क्योंकि भारत में ‘कॉन्ग्रेस काल’ से वैचारिकता दासता का प्रतीक यह तथाकथित समाचार पत्र निरंतर ही ऐसी हरकतें करता आया है, जिस कारण यह चर्चा का विषय बना रहा।

हाल ही में यही वामपंथी अखबार देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पर अपमानजनक और जातिसूचक व्यंग्य करते हुए उन्हें वायरस तक कह चुका है। अब द टेलीग्राफ़ के दोगले स्तर की पहचान यहीं पर की जा सकती है, कि महज कुछ दिन पहले ही समाज के वंचित समुदाय के किसी व्यक्ति को उसकी निजी गरिमा और पद को नजरअंदाज करते हुए उन्हें ‘वायरस’ तक कह देता है और कुछ ही दिन में अस्पृश्यता जैसे गंभीर विषय पर ज्ञान देते हुए एक हेडलाइन में बेचता नजर आता है।

द टेलीग्राफ के लिए अपनी विषैली मानसिकता के प्रसार के लिए तथ्यों से लेकर नैरेटिव को लेकर झूठ और भ्रम परोसना कोई नई बात नहीं है, वह सावरकर से लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक पर अपमानजनक व्यंग्य करता हुआ पाया गया है।

एक सबसे बड़ा ध्येय जो टेलीग्राफ का इस खबर के पीछे रहा, वह ये कि आरएसएस की छवि को धूमिल करने का प्रयास! इस रिपोर्ट में द टेलीग्राफ ने सभी बातों से ऊपर फीचर इमेज के लिए चुनी गई तस्वीर को रखा है, जिसमें आरएसएस के लोगों को खाना परोसते हुए दिखाया गया है, ताकि पहली दृष्टि में भ्रामक शीर्षक के साथ यही सन्देश जाए कि सिराज अहमद ने नहीं बल्कि खाना परोसने में आरएसएस लोगों को साथ जातिगत भेदभाव कर रहा है।

वास्तविकता तो यह है कि आरएसएस के कार्यकर्ता देशभर में क्वारंटाइन में भी वंचित, बेसहारा और भूखे लोगों को राशन उपलब्ध कराने से लेकर लोगों को हर प्रकार की मदद उपलब्ध करवा रहा है। लेकिन द टेलीग्राफ यहाँ पर बस यही साबित करता नजर आता है कि वह एक ‘घृणोपजीवी’ है और वह कभी भी विरोधी विचारधारा के कार्यों से संतुष्ट नहीं रहेगा। क्योंकि यदि वह ऐसा समझौता करता है, तो उसका अस्तित्व ही कुछ शेष नहीं रह जाता।

‘तारीफ मेरे ईमान के लिए खतरनाक, दुआ करें कि अल्लाह मेरी कमियों को नजरअंदाज करें’

तबलीगी जमात पर टिप्पणी कर सुर्खियों में आईं दबंग गर्ल बबीता फोगाट द्वारा जायरा वसीम का नाम लेने के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई है। इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व एक्ट्रेस जायरा ने लोगों से अपनी तारीफ न करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि यह उनके लिए सही नहीं है और उनके ईमान के लिए खतरनाक भी है।

जायरा वसीम ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “अस्सलाम वालेकुम। मैं विनम्रता के साथ यह स्वीकार करती हूँ कि सभी लोग मुझे प्यार करते हैं। साथ ही मैं इस बात पर ज्यादा जोर नहीं दे सकती कि मुझे मिल रही तारीफ कैसे मेरे लिए संतोषजनक नहीं है और कैसे यह मेरे लिए बहुत बड़ी परीक्षा है और कैसे यह मेरे ईमान के लिए खतरनाक है। मैं इतनी बड़ी धार्मिक नहीं हूँ कि लोगों को प्रभावित कर सकूँ?”

जायरा ने आगे लिखा है, “मैं सभी से आग्रह करती हूँ कि किसी भी तरह से मेरी तारीफ न करें। यह दुआ करें कि अल्लाह मेरी कमियों को नजरअंदाज करें, जो अनगिनत हैं। मेरे दिल को दया की रोशनी और ईमान के साथ भर दे। मेरे इरादे को सुधार दे और मुझे वह ज्ञान दे, जो फायदेमंद हो। एक जुबान और दिल दे, जो हमेशा उसे याद रखे और अक्सर उसके पास ही पश्चाताप के लिए जाऊँ। मुझे केवल उसके लिए धार्मिक काम करने की अनुमति दे। मुझे स्थिर रहकर मुस्लिम के रूप में जीने और मरने का मौका दे। (पूरी तरह उसे समर्पित कर दूँ)।”

माना जा रहा है कि यह पोस्ट दबंग गर्ल बबीता फोगाट के बयान के जवाब में आया है। बबीता ने कहा था कि लोग उन्हें जायरा न समझें, जो एक धमकी से घर बैठ जाए। बबीता ने कहा था कि मुझे लगातार सोशल मीडिया पर धमकियाँ मिल रही हैं, लेकिन मैं इनसे डरने वाली नहीं। मैं हमेशा सच के साथ हूँ। देश के लिए लड़ीं हूँ और देश के लिए ही लड़ूँगी। उन्होंने अपने उस ट्वीट पर भी कायम रहने की बात कही थी, जिसमें तबलीगी जमात को कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

ज्ञात हो कि सोशल मीडिया पर बबीता का ट्वीट आने के बाद मीडिया गिरोह के लोग उनपर अचानक हमलावर हो गए। लगातार उनके ख़िलाफ़ रिपोर्टिंग हुई और उनपर आरोप लगा दिए गए कि वे नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। हकीकत ये है कि अपने ट्वीट में उन्होंने सिर्फ़ जमातियों के बारे में टिप्पणी की है, जिनके कारण हर राज्य में कोरोना तेजी से फैला।

वाह! केजरीवाल सरकार अच्छा खाना खिलाते हो… अब जहाँगीरपुरी के Video से घिरी AAP सरकार

देश इस समय कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। इससे बचने का एकमात्र उपाय है- सोशल डिस्टेंसिंग। इसके लिए सरकार की तरफ से लगातार अपील की जा रही है। पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने एक वीडियो शेयर करते हुए केजरीवाल सरकार की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

ये वीडियो दिल्ली के जहाँगीरपुरी का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि खाने के लिए काफी संख्या में लोग एक जगह पर इकट्ठे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का कोई पालन नहीं हो रहा है। प्रवेश वर्मा ने सीएम केजरीवाल को टैग करते हुए वीडियो ट्विटर पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “दिल्ली को इस तरह खाना खिला रहे हैं आप (AAP)। ये वीडियो आया है जहाँगीर पुरी से। सामाजिक दूरी ताक पर, कितना निराशाजनक है इस तरह से लोगों को खाने के लिए झुंड में देखना। लोग मजबूर हैं और दिल्ली सरकार का प्रशासन क्या कर रहा है ये विज्ञापन से बाहर की सच्चाई।”

इसके अलावा दिल्ली बीजेपी ने पाने ट्विटर हैंडल से ये वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है, “मुख्यमंत्री जी, कोरोना महामारी के समय जहाँ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण है, जहाँगीरपुरी में लोगों का एक साथ एकत्रित होना बहुत चिंताजनक है। कृप्या, प्रचार-प्रसार से समय निकालकर इस ओर भी अपना ध्यान केंद्रित करें।”

जहाँगीरपुरी Video पर यूजर्स की प्रतिक्रिया

इस वीडियो के सामने आने के बाद ट्विटर यूजर्स ने भी इस पर आक्रोश जाहिर करते हुए कड़ी आपत्ति जताई। एक यूजर ने लिखा, “केजरीवाल जी ये क्या है? पहले शाहीन बाग, फिर आनंद विहार, फिर निजामुद्दीन कांड अब ये नया ड्रामा ? दिल्ली को सेफ रहने दो लॉकडाउन-2 चल रहा है।”

वहीं प्रवेश वर्मा के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा, “सही कह रहे हो वर्मा जी आप ने तो हद ही कर रखी है। आप का मतलब (AAP) है कुछ और मत समझ लीजिएगा।”

प्रियांशु सिंह नाम के एक यूजर ने लिखा, “वाह केजरीवाल सरकार अच्छा खाना खिलाए हो खिलाओ। खिलाओ अगली सरकार में पब्लिक तुम्हें खिलाएगी, वह भी घास। ना गिर गई यह सरकार तो देखना।”

प्रियांशु ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “अगर यहाँ मोदी सरकार होती। बीजेपी सरकार होती तो आज दिल्ली का नजारा ही कुछ अलग होता। दिल्ली की पब्लिक आज भूख से ना मर रही होती, ना ही जमाती इतना नुकसान करते देश का। अगली बार मोदी सरकार। अगली बार बीजेपी सरकार। दिल्ली में होगा बीजेपी राज। हर-हर मोदी, घर-घर मोदी मोदी है तो देश है। मोदी सरकार होगी तभी दिल्ली सुरक्षित होगी।”

आशीष खन्ना नाम के एक यूजर ने इसे केजरीवाल की सोची-समझी साजिश करार दिया।

एक ने लिखा, “भैया ये चाहते ही नही हैं कोरोना मुक्त हो भारत। रोज टीवी पर आकर ज्ञान देने से कोरोना मुक्त नहीं होगा भारत। अगर इनके हाथ में रहा तो 14000 से कब 150000 हो जाएँगे पता नही चलेगा। आप बीजेपी आलाकमान से बात कर दिल्ली को केंद्र सरकार के हवाले कर करवाई करे तब जा कर कोरोना मुक्त होगा भारत।”

एक अन्य यूजर का कहना है, “दिल्ली प्रशासन फेल हो चुका है। इनके विधायक और अवैतनिक वालंटियर सारा राशन गटक रहे हैं जरूरतमंद लाइन में ही खड़ा रह जाता है। ऐसी नीचता भरा काम इनके विधायक ही कर सकते है। जब राशन डीलरों से विधायक मंथली लेंगे फिर भला वह राशन क्यों नहीं ब्लैक करेंगे? सच्चाई यही है।” वहीं अनुराग सिंह चंदेल का कहना है कि केजरीवेल ने दिल्ली का सत्यानाश कर दिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रवेश वर्मा ने एक विडियो शेयर किया था, जिसने केजरीवाल के दावों की पोल खोल कर रख दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि गरीबों को खिचड़ी के नाम पर उल्टी जैसा दिखने वाला पीला पानी परोसा जा रहा है। वर्मा ने कहा था कि ये भोजन कीड़ों से भी भरा हुआ है।

‘मस्जिद के सदर ने उकसाया’: देवास में सफाईकर्मियों पर कुल्हाड़ी से हमला, आदिल, हबीब और गोप खान गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के देवास जिले के खातेगाँव में सफाईकर्मियों पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया गया है। मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एक आरोपित फरार है। खातेगाँव पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक सज्जन सिंह मुकाती ने बताया कि आशीष राजौर की शिकायत पर पुलिस ने आदिल खान, आदिल के पिता हबीब खान और गोप खान को भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है। आदिल का भाई आरिफ खान फिलहाल फरार है।

हमले में तीन सफाईकर्मी घायल हुए। एक सफाईकर्मी को गंभीर अवस्था में देवास रेफर किया। मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस पूछताछ में आदिल ने चाैंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया, “जामा मस्जिद के सदर गाेप खान ने हमले के लिए उकसाया था और कहा था कि जब से लाॅकडाउन चालू हुआ है, तब से ये लाेग हम नमाजियाें काे परेशान कर रहे हैं। तुम लाेग उन्हें माराे। इसी बहकावे में आकर हमने इस घटना को अंजाम दिया।”

आशीष ने पुलिस को बताया कि वह, दीपक कलोसिया और चंकी कोयला मोहल्ला में नाली की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान आदिल ने यह कहते हुए उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया कि नाली साफ करने से बहुत बदबू आती है। तीनों सफाईकर्मी वहाँ से भागे तो आदिल ने उनका पीछा किया और दीपक एवं चंकी पर भी कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। शोर सुनकर अन्य लोगों के आ जाने के बाद आदिल वहाँ से भाग गया। 

उन्होंने बताया कि आदिल के साथ उसका भाई आरिफ और पिता हबीब भी सफाईकर्मियों को मारने दौड़े थे। पुलिस ने आदिल और उसके पिता हबीब खान को कन्नौद के पास जंगल से गिरफ्तार कर लिया। गोप खान को भी गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आदिल की तलाश की जा रही है। जानलेवा हमले के बाद सफाई कर्मचारियों के संगठन ने उस मोहल्ले में जाने से इनकार कर दिया है। हमले से अक्रोशित सफाईकर्मियों ने वीडियो जारी कर कहा कि वे वर्ग विशेष के बाहुल्य वाले इलाके में सफाई करने नहीं जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के खिलाफ अग्रिम मोर्च में जाकर लड़ाई लड़ रहे डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों और सफाईकर्मियों पर हो रहे हमले हैरान करने वाले हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से बार-बार अपील की जा रही है कि ऐसे लोगों को और समर्थन की जरूरत है। लेकिन फिर भी कुछ लोगों बेहद लापरवाह और अपील को अनसुना करते नजर आ रहे हैं।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के इंदौर से ऐसी दो घटनाएँ सामने आई थी। इनमें से एक में गश्ती कर रहे जवानों पर पत्थरबाजी की गई तो दूसरी घटना में बाइक सवार युवकों ने रोके जाने पर पुलिसकर्मियों पर थूक दिया। इसके अलावा कोरोना वायरस संदिग्ध की जाँच करने गई मेडिकल टीम पर मुस्लिम भीड़ ने पथराव करने के साथ ही पुलिस पर भी हमला किया था।

मुस्लिम नरसंहार के लिए मोदी सरकार कर रही कोरोना का इस्तेमाल: अरुंधति ने विदेशी मीडिया के जरिए फैलाया झूठ

घनघोर वामपंथन अरुंधति रॉय को भारतीय मीडिया में अब कवरेज नहीं मिल रहा है। ऐसे में उन्होंने अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए एक जर्मन मीडिया संस्थान का सहारा लिया। ‘डीडब्ल्यू न्यूज़’ को इंटरव्यू देते हुए अरुंधति ने न सिर्फ़ भारत में कोरोना वायरस के प्रसार को लेकर अफवाह फैलाई, बल्कि मोदी सरकार को बदनाम करने के चक्कर में लोगों के बीच डर का माहौल बनाने का भी प्रयास किया। बिना किसी सबूत के उन्होंने भारत में कोरोना के आँकड़ों को ग़लत बताना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि ये आधिकारिक आँकड़े मोदी सरकार के हैं, वो इस पर जरा भी विश्वास नहीं करतीं।

इसके बाद अरुंधति अपना वही पुराना ‘हिन्दू-मुस्लिम विवाद’ और ‘मुस्लिमों पर अत्याचार’ वाला राग लेकर बैठ गईं और कहा कि कोरोना के कारण भारत की ‘पोल खुल गई’ है। उन्होंने दावा किया कि भारत न सिर्फ़ कोरोना वायरस, बल्कि घृणा और भूख से भी बेहाल है। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण मुस्लिमों के ख़िलाफ़ घृणा में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को भी मुस्लिमों के नरसंहार करार दिया और कहा कि उसके बाद से ही घृणा में बढ़ोतरी हुई है। वो यहाँ तक झूठ बोल बैठीं कि दिल्ली में हुए दंगे सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर अत्याचार के रूप में हुए थे।

जमातियों को बचाने के लिए पगलाई हैं अरुंधति रॉय

दरअसल, अरुंधति रॉय का ये बयान तबलीगी जमात वालों को बचाने की मुहिम सी लगती है, जिन्होंने देश भर में कोरोना फैलाया। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में हज़ारों लोगों का जुटना और फिर लॉकडाउन तोड़ने वाली हरकत छिपी नहीं है। जगह-जगह मोहल्ले में पुलिस और मेडिकल टीम पर हमले हुए। इसलिए, अरुंधति एक ऐसा नैरेटिव बनाना चाह रही हैं, जैसे मुस्लिमों पर ही अत्याचार हुआ हो। ताज़ा हिंसा की घटनाओं को देखें तो स्पष्ट है कि कई कट्टरपंथी इसे ‘काफिरों को दिए सज़ा’ के रूप में देख रहे हैं।

तबलीगी जमात का मुख्यालय भारत में कोरोना का हॉटस्पॉट बन गया। जमातियों ने पुलिस व प्रशासन के साथ सहयोग नहीं किया। जमातियों को खोजने गई पुलिस पर हमले हुए। उनके मोहल्लों में मेडिकल टेस्ट करने गए स्वास्थ्यकर्मियों को खदेड़ दिया गया। इन सबका दोषी कौन है? क्या अरुंधति रॉय इसे ही ‘समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ अत्याचार’ मानती हैं? दिल्ली दंगों को लेकर उनके दावे झूठे हैं, क्योंकि ताहिर हुसैन जैसों की हरकतों पर उन्होंने चुप्पी साध ली। दिल्ली में हुए दंगे शाहीन बाग़ और जाफराबाद में मुस्लिम भीड़ द्वारा सड़कों पर कब्ज़ा किए जाने और स्थानीय लोगों को लगातार परेशान करने के बाद हुआ। पेट्रोल बम भी उन्होंने ही फेंके।

अरुंधति का दावा है कि मोदी सरकार कोरोना की आड़ में मीडिया को दबा रही है। युवा नेताओं को गिरफ़्तार किया जा रहा है और विरोधियों को कुचला जा रहा है। वो राजद छात्र नेता हैदर की ओर इशारा कर रही थीं, जिसे दिल्ली दंगों में उसकी भूमिका के कारण गिरफ्तार किया गया है। अरुंधति दंगा करने वालों पर कार्रवाई का विरोध करती हैं। साथ ही वे जिन पत्रकारों और कथित एक्टिविस्ट्स की बात कर रही हैं, उनमें से कई हिंसा फैलाने के आरोपित हैं। किसे नहीं पता कि भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले में जो आज जेल में हैं, वो भी एक्टिविस्ट्स ही कहे जाते हैं।

विदेशी मीडिया के सहारे अरुंधति का प्रोपेगेंडा

साथ ही अरुंधति इसके बाद आरएसएस को गाली बकने लगीं। उन्होंने कहा कि भाजपा और संघ भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। यहाँ तक कि वो हिटलर के नाजी काल से मोदी सरकार की तुलना करने लगीं और कहा कि जैसे जर्मनी में उस दौर में यहूदियों के नरसंहार के लिए तिकड़म आजमाए जाते थे, ठीक उसी तरह आज कोरोना का इस्तेमाल भारत में किया जा रहा। जबकि, मुल्ला-मौलवियों ने ही अधिकतर सरकारी दिशा-निर्देशों को धता बताते हुए मेडिकल सलाहों का मखौल उड़ाया। मोदी सरकार कोरोना से प्रभावी तरीके से निपट रही है, ऐसे में अरुंधति का ‘नाजी कार्ड’ खेलना वामपंथियों का पुराना पेशा है।

ये वामपंथी ‘नरसंहार’ जैसे शब्द का ऐसे प्रयोग करते हैं, जैसे किसी को एक थप्पड़ लगने का मतलब भी यही हुआ। उन्होंने झूठा आरोप लगाया कि मोदी सरकार समुदाय विशेष के लिए डिटेंशन सेंटर बनवा रही है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे अरुंधति रॉय फिक्शन लिखते-लिखते कथा-कहानियों की दुनिया में ही जीने लगी हैं। अरुंधति रॉय फेक न्यूज़ फैलाने वाले और झूठे फैक्ट चेकिंग करने वाले ‘ऑल्टन्यूज़’ को भी डोनेशन देती रही हैं।

शरजील के खिलाफ चार्जशीट दाखिल: देशद्रोही भाषण देने और दंगे भड़काने का आरोप

सीएए और एनआरसी का विरोध करते-करते पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की बात कहने वाले शरजील के खिलाफ चार्जशीट अंततः दाखिल कर दी गई। दिल्ली पुलिस ने यह चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने शरजील को देशद्रोही भाषण देने और दंगे उकसाने के लिए आरोपित बनाया है।

शरजील पर 13 दिसंबर 2019 को जामिया में देशद्रोही भाषण देने और दंगे भड़काने का आरोप है। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 124 ए और 153 ए के तहत केस दर्ज किया गया था।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ में भड़काऊ भाषण देने के मामले में दिल्ली पुलिस ने शरजील को 28 जनवरी को बिहार के जहानाबाद से गिरफ्तार किया था। शरजील भड़काऊ भाषण देने के मामले में राजद्रोह का मामला दर्ज किए जाने के बाद से फरार था। दिल्ली पुलिस ने शरजील के खिलाफ 25 जनवरी को मामला दर्ज किया था।

चर्चा में क्यों आया शरजील?

एक ऑडियो क्लिप में शरजील इमाम को यह कहते हुए सुना गया कि असम को भारत के शेष हिस्से से काटना चाहिए और सबक सिखाना चाहिए क्योंकि वहाँ बंगाली हिंदुओं और मुस्लिम दोनों की हत्या की जा रही है या उन्हें निरोध केंद्रों में रखा जा रहा है। उसने यह भी कहा था कि अगर वह पाँच लाख लोगों को एकत्रित कर सकें, तो असम को भारत के शेष हिस्से से स्थायी रूप से अलग किया जा सकता है। अगर स्थायी रूप से नहीं तो कम से कम कुछ महीनों तक तो किया ही जा सकता है। भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की बात करते हुए शरजील ने कहा था कि ‘चिकेन्स नेक’ वाले क्षेत्र को ब्लॉक कर के पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग-थलग कर देने का लक्ष्य होना चाहिए।

शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील इमाम भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक वह कट्टरपंथ से बहुत ज्यादा प्रभावित है। पुलिस की पूछताछ में उसने कबूल किया था कि उसके ​अलग-अलग भाषणों के वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है और न ही उसे अपनी गिरफ्तारी पर कोई पछतावा है। उसने मस्जिदों में भड़काऊ पर्चे बँटवाए थे। उसने सीएए और एनआरसी को लेकर कई पैम्पलेट तैयार किए थे, जिनमें भयभीत करने वाली भड़काऊ बातें लिखी हुई थी।

कौन है शरजील इमाम?

शरजील इमाम बिहार के जहानाबाद का रहने वाला है। वह जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज का छात्र है। शरजील की फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक, वह आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रैजुएशन भी कर चुका है।

बरेली में नर्स पर हमला: इमामबाड़ा के पास घेरा, बदसलूकी, रजिस्टर फाड़ा, भागकर बचाई जान

कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग में केंद्र सहित सभी राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर जुटी हैं। वहीं दूसरी ओर वर्ग विशेष के कुछ लोग जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। कोरोना से लोगों को बचाने में लगे डॉक्टर, नर्स और पुलिस टीम पर हमले की कई घटनाएँ चुकी है। अब उत्तर प्रदेश के बरेली में नर्स पर हमला हुआ है।

यहाँ सर्वे करने गई नर्स को निशाना बनाया गया। नर्स ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। आरोपितों की संख्या 20-25 बताई जा रही है। इससे पहले यूपी के मुरादाबाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम पर हमला किया गया था।

नर्स का आरोप है कि बरेली के फरीदपुर तहसील के ऊँचा मोहल्ला में वह सर्वे करने गई थी। इस दौरान लोगों ने उसका रजिस्टर और मोबाइल छीन लिया और बदतमीजी की। नर्स ने किसी तरह वहाँ से भागकर जान बचाई।

जानकारी के मुताबिक, प्रवासी और संदिग्ध लोगों के बारे में सर्वे करने के लिए फतेहगंज पूर्वी के नवीन प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र पर तैनात एएनएम महादेव और ऊँचा मोहल्‍ले में गई थी। नर्स के अनुसार कई परिवारों ने अपना नाम और पता बताया, लेकिन कुछ लोग जानकारी देने से इनकार करने लगे। 

मोबाइल छीना, रजिस्टर फाड़े और अभद्रता की

नर्स मोहल्‍ले से बाहर आई तो इमामबाड़ा के पास काफी लोगों ने उसे घेर लिया और तरह-तरह के सवाल करने लगे। आईडी कार्ड की माँग की। आरोप है कि आईडी कार्ड दिखाने के बाद भी भीड़ में शामिल कई लोगों ने उससे रजिस्टर छीन लिया, उसे फाड़ने का प्रयास किया और मोबाइल भी झपट लिया। उनसे अभद्रता करने लगे। इसके बाद वह रजिस्‍टर और मोबाइल को लेकर किसी तरह अपनी जान बचाकर भागी।

एएनएम ने उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। फरीदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर वासित अली मौके पर पहुँचे। लोगों से जानकारी लेकर रिपोर्ट अफसरों को दी। इसके बाद विभाग की ओर से कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ फरीदपुर थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी हुई है। घटना अंजाम देने के संदेह में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है।

एसएसपी शैलेश पाण्डेय ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों के साथ अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी बदसलूकी करेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आशा कार्यकर्ता से अभद्रता के मामले में जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

पहले भी हो चुके हैं स्वास्थ्यकर्मी और पुलिस पर हमले

गौरतलब है कि इससे पहले मुरादाबाद में मेडिकल टीम पर हमले का ऐसा ही मामला सामने आया था। वहाँ डॉक्टरों समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। जाँच दल के साथ पत्थरबाजी की घटना में चोटिल डॉ. एससी अग्रवाल ने कहा, “हम मुरादाबाद के नवाबपुरा में एक COVID-19 पॉजिटिव मरीज के 4 परिवार वालों को लेने गए थे। जैसे ही हमने उन्हें एम्बुलेंस में बिठाया, कुछ लोगों ने हमें घेर लिया और विवाद शुरू हो गया। लोगों ने हम पर हमला कर दिया।”

कुछ दिनों पहले बेंगलुरु के सादिक मोहल्ले में कोरोना संक्रमण के लक्षणों की जाँच पड़ताल करने और नमूने लेने के लिए गई नर्स और आशा कार्यकर्ता पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। आशा वर्कर ने बताया कि मस्जिद से घोषणा करने के बाद तकरीबन 100 लोगों की भीड़ ने आकर उन्हें घेर लिया। इस हमले के बाद से हेल्थ वर्कर्स को लेकर लोगों की चिंताएँ भी बढ़ गई हैं। वहीं कश्मीर में कोरोना संदिग्ध की जाँच करने पहुँची मेडिकल टीम को स्थानीय लोगों ने बंधक बना लिया था। जब पुलिस उन्हें छुड़ाने पहुँची तो उन पर भी पथराव किया गया।