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नवगछिया का 25 मुस्लिम परिवार, 250 लोग: स्क्रीनिंग से इनकार, कागज फाड़े-बदसलूकी की

कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए बिहार सरकार ने प्रभावित जिलों में डोर टू डोर स्क्रीनिंग अभियान चलाने का फैसला किया है। 16 अप्रैल से जिन जिलों में यह अभियान शुरू होना है उनमें सिवान, बेगूसराय, नालंदा और नवादा शामिल हैं। इस अभियान के तहत घर-घर जाकर यह पता लगाया जाएगा कि किसी घर में एक से 23 मार्च के बीच कोई बाहर से तो नहीं आया है।

इस बीच राज्य के भागलपुर जिले के नवगछिया नगर पंचायत से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहॉं के एक मुस्लिम बहुल वार्ड के 25 परिवारों ने स्क्रीनिंग से ही इनकार कर दिया। विवाद से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संबंधित टीम को भी आगे बढ़ जाने को कहा।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार घटना 12 अप्रैल की है। 25 मुस्लिम परिवारों ने स्क्रीनिंग से मना करने के साथ-साथ सरकारी कागज फाड़ दिए। टीम के सदस्यों के साथ बदसलूकी की। इन परिवारों में करीब 250 लोग रहते हैं। स्क्रीनिंग के दौरान उनसे 14 सवालों के जवाब लिए जाने थे।

दैनिक भास्कर के भागलपुर संस्करण में 15 अप्रैल 2020 को प्रकाशित खबर

आपको बता दें कि नवगछिया नगर पंचायत क्षेत्र में 4 अप्रैल को एक कोरोना पॉजीटिव पाया गया था। इसके बाद इलाके को प्रशासन ने पूरी तरह से सील कर दिया। साथ ही इलाके में रहने वाले करीब 40 हजार लोगों की स्क्रीनिंग कराने का फैसला किया गया। इसके बाद कोरोना की आशंका के चलते 70 लोगों का ब्लड सैंपल पटना जाँच के लिए भेजा गया। इनमें से 47 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है, जबकि 23 लोगों की रिपोर्ट अभी नहीं आई है।

ऐसे में 25 मुस्लिम परिवारों की मनमानी ने पूरे अभियान के मकसद पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉक्टर अरुण सिन्हा ने बताया कि इस इलाके में स्क्रीनिंग नहीं हो पाने की जानकारी अधिकारियों को दे दी गई है। एसडीओ मुकेश कुमार के हवाले से दैनिक भास्कर ने बताया है कि छूटे हुए लोगों की स्क्रीनिंग कराई जाएगी। यदि वे सहयोग नहीं करेंगे तो सख्त कार्रवाई होगी।

तबलीगी जमात के युवक से किया लव मैरिज, कोरोना के डर से ग्रामीणों ने दामाद को गाँव में घुसने पर लगाया प्रतिबंध

छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर के फरसाबहार इलाके में तबलीगी जमात से जुड़े होने के कारण एक युवक को गाँव में प्रवेश देने से मना कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, युवक बंगाल का रहने वाला है। मगर, कुछ समय पहले कोरंगामाल गाँव में काम करने आया और गाँव की एक महिला से प्रेम विवाह करके यही बस गया। इसके बाद बीच-बीच में उसका बंगाल आना-जाना लगा रहता था। लेकिन कोरोना के फैलने के बाद जब ग्रामीणों को उसके तबलीगी जमात से जुड़े होने की सूचना मिली। तो गाँव वालों ने फौरन पंचायत करके उसकी एंट्री गाँव में हमेशा के लिए बंद कर दी और पुलिस के सामने आरोप लगाया कि वो बांग्लादेश का है। हालाँकि, अभी तक छानबीन में उसके बांग्लादेशी होने का सबूत नहीं मिला है। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्ति के तबलीगी जमात से जुड़ी सूचना मिलने के बाद गाँव वालों ने उसकी गर्भवती पत्नी व दो बच्चों को क्वारंटाइन कर दिया है। साथ ही उनकी निगरानी भी की जा रही है। गाँववालों ने किसी भी कीमत पर युवक को गाँव में न घुसने देने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि जमाती युवक ने कुछ दिन पहले अपनी बीवी को गाँव लौटने की बात बताई थी। जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और ग्रामीणों ने भी पंचायत करके अपना फैसला सुना दिया।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित संबंधित खबर

फरसाबहार के एसडीएम एसएन भगत के मुताबिक, जमात से जुड़े एक युवक की कोरंगामाल गाँव में पत्नी के पास लौटने की उन्हें सूचना मिली थी। सूचना पर उन्होंने जब गाँव पहुँचकर जाँच की तो पता चला युवक तो कई महीनों से गाँव ही नहीं आया। लेकिन इस जानकारी के बाद टीम सतर्क हो गई और निगरानी बनी हुई है। यदि युवक लौटता है तो उसे पहले क्वारंटाइन सेंटर में रखा जाएगा। गाँव वाले भी इसे लेकर काफी सतर्क हैं।

बता दें, तबलीगी जमात के युवक के गाँव में न मिलने के बाद उसकी गर्भवती बीवी से पूछताछ में कई हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं। जैसे कि महिला को मालूम ही नहीं है कि उसके पति का स्थायी पता क्या है या उसकी सही पहचान क्या है? जिसे देखकर गाँव वालों की चिंता बढ़ गई है और इस बात पर चर्चा होने लगी है कि बाहर के लड़के गाँव की भोली-भाली लड़कियों को प्रेम जाल में फाँस लेते हैं और फिर उनसे विवाह भी कर लेते हैं। गाँव वालों का कहना है कि अगर महिला का पति लौटता है तो उससे कोरोना फैलने का डर होगा। इसलिए उसे गाँव में किसी भी हाल में घुसने नहीं दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस खबर के फैलने के बाद जिले के अन्य गाँवों में भी बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। ग्रामीणों ने अपने गाँव के मुख्य द्वारा पर बैरियर लगाए हैं और इसका ध्यान दिया जा रहा है कि ये ओडिशा व झारखंड से सटे इस गाँव के बैरियर केवल अतिआवश्यक कामों के लिए खोले जाएँ। सूचना है कि दोनो राज्यों की सीमा पर बने राहत कैंप में लोग पैदल चलकर आ रहे हैं।

WHO की फंडिंग पर अमेरिका ने लगाई रोक, चीन के साथ मिलीभगत पर ट्रंप ने लगाए गंभीर आरोप

इन दिनों कोरोना महामारी से बुरी तरह जूझ रहे अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को मिलने वाले फंड पर रोक लगा दी है। इसका ऐलान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने अपने प्रशासन को WHO की फंडिंग को रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ट्रंप ने कहा है कि कोरोना वायरस के चीन में उभरने के बाद इसके प्रसार को छिपाने और गंभीर कुप्रबंधन में संगठन की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।

ट्रंप ने मंगलवार मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “आज मैं अपने प्रशासन को विश्व स्वास्थ्य संगठन के वित्त पोषण को रोकने का निर्देश दे रहा हूँ। हर कोई जानता है कि वहाँ क्या चल रहा है। WHO को अमेरिकी करदाता प्रत्येक वर्ष 400-500 मिलियन डॉलर सहयोग के तौर पर देता है और वहीं इसके विपरीत चीन संगठन को लगभग 40 मिलियन डॉलर से भी कम प्रति वर्ष योगदान के रूप में देता है।

ट्रंप ने तर्क देते हुए कहा कि संगठन के प्रमुख प्रायोजक के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका का कर्तव्य है कि वह WHO की पूर्ण जवाबदेही पर जोर दे। राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया है कि चीन के वुहान शहर में जब कोरोना वायरस के मामले सामने आए तो WHO उसका आकलन करने में असफल रहा। उन्होंने पत्रकारों से पूछा कि क्या WHO ने मेडिकल एक्सपर्ट के जरिए चीन के जमीनी हालात का आकलन किया। या क्या इसका पता लगाया कि इस प्रकोप को उसके मूल स्थान पर ही सीमित किया जा सकता है या नहीं?

ट्रंप ने कहा कि अगर WHO इस तरह का प्रयास करता तो से हजारों जानें बच जातीं और विश्व की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान नहीं पहुँचता। इसके बजाय WHO चीन के ऐक्शन का बचाव ही करता रहा। एक आँकड़े के मुताबिक 15 अप्रैल तक विश्व में लगभग 20 मिलियन लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इसके लिए चीन और WHO को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इससे पहले भी ट्रंप ने डब्लूएचओ पर चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाया था।

यहाँ तक कि जनवरी में WHO के एक चीनी अधिकारी ने कहा था कि कोरोना वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। इसलिए वह (WHO) यात्रियों के लिए और वुहान से किसी भी विशिष्ट स्वास्थ्य उपायों की सिफारिश नहीं करता है।

इतना ही नहीं WHO ने ताइवान को भी नजरअंदाज कर दिया था, जिसने बताया था कि उसके पास वायरस के मानव-से-मानव में पहुँचने के सबूत हैं। ताइवान ने इस बारे में 31 दिसंबर 2020 को WHO को लिखा था, लेकिन इसके बाद भी WHO जनवरी के मध्य तक कोरोना संक्रमण के मानव-से-मानव में पहुँचने से इनकार करता रहा। याद रहे कि ताइवान को चीन की आपत्तियों के कारण WHO की सदस्यता से वंचित किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह ढिलाई उस तबाही के लिए जिम्मेदार है, जिससे दुनिया आज लड़ रही है। चीनी प्रीमियर शी जिनपिंग की तरह WHO के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयिसस को भी इस घातक महामारी के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

टेड्रोस पर अपने गृह देश इथियोपिया में महामारी को कवर करने का आरोप लगाया गया था, जबकि वह WHO के निदेशक बनने से पहले सरकार के स्वास्थ्य मंत्री रहे थे। एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, जो WHO के शीर्ष स्थान के लिए टेड्रोस के प्रतिद्वंद्वी के लिए एक अनौपचारिक सलाहकार भी थे, ने उन पर इथियोपिया में तीन महामारी को कवर करने का आरोप लगाया था।

बेटे को दूध पिलाने में बिजी, शौहर को नहीं दे सकी चाय: हाजी अफजल ने दिया तलाक, बच्चे सहित घर से निकाला

कोरोना वायरस के कारण लागू किए गए लॉकडाउन में हर कोई अपने घरों में हैं। ऐसे में सबका ज्यादातर समय अपने माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बहन व बच्चों के बीच व्यतीत हो रहा है। कुछ लोग इस लॉकडाउन को परिवार के साथ रहने के लिहाज से अच्छा समय मान रहे हैं। तो कुछ ऐसे हैं, जो परिवार के साथ अत्यधिक समय बिता देने के कारण उन पर गुस्सा निकाल रहे हैं। ऐसे में एक अलग मामला सामने आया है। जहाँ शौहर ने घर पर बैठे-बैठे अपनी बीवी से चाय माँगी। मगर, जब बीवी ने उसकी बात नहीं सुनी तो उसने गुस्से में उसे तीन तलाक दे दिया और अपनी बीवी को 2 साल के मासूम समेत घर से बाहर कर दिया। 

घटना उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में रामनगर थाना क्षेत्र के सुंधियामऊ की है और चाय न मिलने पर नाराज होने वाले युवक का नाम हाजी अफजल है। जानकारी के मुताबिक लॉकडाउन के दिनों में घर में बैठे हाजी ने अपनी बीवी दरकशा से चाय माँगी। लेकिन किसी कारणवश उसकी बीवी ने उसकी बात नहीं सुनी और उसे चाय नहीं मिली। बस इसी बात को अफजल ने अपनी आन पर ले लिया। उसने न केवल इसके बाद अपनी बीवी दरकशा को तलाक दिया, बल्कि उससे मारपीट की और उसे बच्चे समेत घर से बाहर कर दिया।

फोटो साभार: आजतक

दरकशा द्वारा पेश किए गए सबूत के मुताबिक, 3 साल पहले पीड़िता का निकाह हाजी से हुआ था। इसके बाद इनका एक बेटा हुआ, जो वर्तमान में 2 साल का है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, दरकशा का कहना है कि उनकी शादी को तीन साल बीत गए हैं। उनका एक बेटा भी है। उनका कहना है कि जब हाजी ने उनसे चाय माँगी तो वे बेटे के लिए दूध की शीशी बना रही थीं। इस वजह से वे उसे चाय नहीं दे पाईं। बस इसी कारण अफजल ने उन्हें मारा और तीन तलाक देकर घर से बाहर कर दिया।

दरकशा का कहना है कि लॉकडाउन के कारण इस समय वह अपने घर लखनऊ भी नहीं जा सकतीं। इसलिए गाँव में अपने रिश्तेदार के यहाँ रह रही हैं। साथ ही पुलिस से न्याय की गुहार लगा रही हैं। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने महिला की शिकायत पर एक्शन लेते हुए हाजी अफजल पर व उसके परिवारवालों पर मामला दर्ज कर लिया है। अब आगे की पड़ताल कर मामले पर कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि पिछले साल तीन तलाक़ जैसी कुरीति से मुस्लिम महिलाओं को आजादी दिलाने के लिए मोदी सरकार ने इसे लोकसभा में पास करवाया था। बाद में तीन तलाक को अपराध बनाने वाले बिल पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हस्ताक्षर किया था। जिसमें कहा गया था कि 19 सितंबर 2018 के बाद जितने भी मामले तीन तलाक से संबंधित आए हैं, उन सभी का निपटारा इसी कानून के तहत किया जाएगा। कानून में इसके लिए कैद की सजा का प्रावधान भी है।

57 विदेशी तबलीगी बिहार में गिरफ्तार: आए थे टूरिस्ट वीजा पर लेकिन कर रहे थे इस्लाम का प्रचार, मस्जिद था ठिकाना

दिल्ली मरकज से बड़ी संख्या में निकाले गए जमातियों के बाद से देश भर में जमातियों को खोजने का अभियान जारी है। कुछ इसी तरह बिहार में चलाए जा रहे अभियान के तहत बिहार पुलिस ने मंगलवार को विभिन्न जिलों में मौजूद तबलीगी जमात से जुड़े 57 विदेशी जमातियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इन जमातियों को पुलिस ने मस्जिद में छिपने, पुलिस को सूचना न देने और वीजा नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

लगातार मस्जिदों में की जा रही छापेमारी के दौरान मंगलवार को बिहार पुलिस ने प्रदेश के विभिन्न जिलों की मस्जिदों में छिपे बैठे तबलीगी जमात से जुड़े 57 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया। इन सभी विदेशी नागरिकों पर वीजा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। गिरफ्तार किए गए सभी विदेशियों को पुलिस ने जेल भेज दिया है। इसके बाद सभी को अदालत में पेश किया जाएगा।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उपेंद्र शर्मा ने बताया कि किर्गिस्तान निवासी कुल 17 लोग पर्यटन वीजा पर भारत आए थे और वीजा नियम का उल्लंघन करते हुए धार्मिक प्रचार कार्य कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इन लोगों के खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें जेल भेज दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक 23 मार्च को पुलिस ने इन लोगों को पटना के दीघा और फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र से हिरासत में लेकर उनकी पटना एम्स में मेडिकल जाँच कराई थी और कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं पाए जाने पर सभी को क्वारंटाइन किया गया था।

वहीं किशनगंज के पुलिस अधीक्षक कुमार आशीष ने बताया कि पर्यटन वीजा पर देश में आए 10 इंडोनेशिया और एक मलेशिया के नागरिक को वीजा नियम का उल्लंघन किए जाने और किशनगंज आने की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं देने के मामले में इनके विरुद्ध सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

उन्होंने कहा कि 31 मार्च को इनकी मेडिकल जाँच कराई गई थी, जिसकी रिपोर्ट चार दिनों के बाद आई और जाँच में सभी में कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं पाया गया था। वहीं अररिया जिला में वीजा के नियमों का उल्लंघन के आरोप में तब्लीगी जमात से जुड़े 18 विदेशियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधीक्षक धूरत सायली ने बताया कि गिरफ्तार किए गए विदेशियों में नौ मलेशियाई और नौ बांग्लादेशी शामिल हैं।

इनमें से 9 मलेशियाई नागरिकों के खिलाफ अररिया नगर थाने में जबकि 9 बांग्लादेशी नागरिकों के विरूद्ध नरपतगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। दिल्ली से अररिया पहुँचे इन मलेशियाई नागरिकों की 24 मार्च को मेडिकल जाँच कराई गई थी और उनमें कोरोना वायरस के लक्षण नहीं पाए गए थे, इसके बाद भी सभी को क्वरंटाइन किया गया था, लेकिन क्वरंटाइन का पीरियड समाप्त होते ही पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

नहीं बिकेगी शराब, तंबाकू, गुटका खाकर थूकना प्रतिबंधित: लॉकडाउन 2.0 की नई गाइडलाइन, किसानों को छूट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाए जाने की घोषणा के बाद बुधवार को गृह मंत्रालय की ओर से इस लॉकडाउन के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है। यह नई गाइडलाइन 3 मई तक लागू रहेगी। संशोधित गाइडलाइन के अनुसार, मुँह पर मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया है और सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू, गुटका आदि खाकर थूकना या शराब बेचना प्रतिबंधित कर दिया गया है। बावजूद इसके कोई व्यक्ति ऐसा करता पाया गया तो उस पर जुर्माना होगा।

नए दिशा-निर्देशों में भी हवाई, रेल और सड़क मार्ग से यात्रा करना, शैक्षणिक और प्रशिक्षण संस्थानों का संचालन, औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियाँ, सिनेमा हॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर जारी रोक लागू रहेगी। लेकिन इस लॉकडाउन में कृषि से जुड़े कामों के लिए रियायत दी जाएगी। साथ ही ट्रेनों या बसों में कोरोना वॉरियर्स को आवाजाही की इजाजत दी जाएगी। इसके अलावा इसमें राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे निर्माण कार्यों में भी छूट मिली है।

गाइडलाइन के मुताबिक इस लॉकडाउन में सभी सामाजिक, राजनीतिक और अन्य आयोजनों पर भी रोक जारी रहेगी और सभी धार्मिक स्थलों को बंद रखा जाएगा। संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, कार्यालयों को सैनिटाइजर उपलब्ध कराने, गाइडलाइन्स के अनुसार शिफ्ट चलाने, थर्मल स्क्रीनिंग कराने के आदेश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त केंद्र ने मनरेगा के तहत कार्यों को जारी रखने का निर्देश दिया है, लेकिन साथ ही उनसे सोशल डिस्टेन्सिंग बनाए रखने की अपील की गई है। इसके साथ राज्य सरकार की ओर से कराए जा रहे कंस्ट्रक्शन वर्क में भी रियायत दी गई है।

गौरतलब है कि इस लॉकडाउन में केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देते हुए कृषि से जुड़े कामों को इजाजत दे दी है। किसानों को अपनी फसल काटने और बुआई करने की छूट दी गई है। साथ ही एजेंसियों को किसानों की उपज खरीदने की इजाजत दी गई है। इस छूट के जरिए सरकार का उद्देश्य दूसरे लॉकडाउन के दौरान किसानों और श्रमिकों तथा दैनिक वेतन भोगियों को राहत प्रदान करना है।

बता दें कि इस लॉकडाउन में सरकार की ओर कहा गया है कि जिन इलाकों में कोरोना के मामले नहीं आएँगे, उन्हें 20 अप्रैल के बाद रियायत मिल सकती है। मगर, 20 अप्रैल तक हर इलाकों की कड़ी समीक्षा की जाएगी। इस समीक्षा के बाद कुछ इलाकों में मामूली छूट मिलेगी।

रियायत देने से पहले राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से गाइडलाइन के पालन के सारे उपाय किए जाएँगे, ताकि ऑफिस, वर्कप्लेस, फैक्ट्री या संस्थानों में सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन हो। इसके अलावा कोरोना के हॉटस्पॉट क्षेत्रों में किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। इन इलाकों में स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। साथ ही किसी को भी बाहर निकलने की इजाजत नहीं होगी। आवश्यक सामानों की होम डिलिवरी होगी। एरिया की सुरक्षा में लगे जवान और मेडिकल स्टाफ का ही मूवमेंट होगा।

महिला डॉक्टर पर गंदे कॉमेंट्स… गेट तोड़ कर हमला की कोशिश: तबलीगी कोरोना मरीजों का दिल्ली में हंगामा

दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए गई महिला डॉक्टर के साथ मरीज ने अभद्रता की और जब एक पुरूष डॉक्टर उन्हें बचाने वहाँ पहुँचा तो मरीजों ने उन पर भी हमला कर दिया। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने खुद को ड्यूटी रूम में छिपाया। बाद में उन्होंने इसकी जानकारी सुरक्षाकर्मियों को दी, मगर उनकी गुहार किसी ने नहीं सुनी।

ऑपइंडिया ने जब लोकनायक अस्पताल में कॉल कर इस घटना से संबंधित जानकारी जुटाई तो मरीजों के तबलीगी जमात से जुड़े होने की बात सामने आई। कोरोना संक्रमण के बीच हर स्वास्थ्यकर्मी अपना घर-परिवार सब छोड़कर मरीजों की सेवा में जुझारू रूप से जुटा है। ऐसे में उनके साथ होती अभद्रता बिलकुल भी बर्दाश्त योग्य नहीं है। पिछले दिनों गाजियाबाद समेत कई इलाकों से महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हुई बदसलूकी की खबरें आईं और अब मामला राष्ट्रीय राजधानी का है।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा शेयर की गई जानकारी के अनुसार, इस घटना के संबंध में डॉक्टरों ने लोकनायक अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर को भी पत्र लिखा। जिसमें पूरी घटना का जिक्र करते हुए सिक्यॉरिटी की कमी पर ध्यान आकर्षित कराया गया। पत्र में बताया गया कि कल यानी 14 अप्रैल को सर्जिकल ब्लॉक के वार्ड नंबर 5a में शाम 5:20 पर एक मरीज ने महिला डॉक्टर पर फब्तियाँ कसनी शुरू की और उन पर अभद्र टिप्पणी करने लगा। तभी उनके साथी डॉक्टर ने जब इस पर आपत्ति जताई, तो मरीज इकट्ठा हो गए और डॉक्टरों को धमकाने लगे। ऐसे में जब डॉक्टरों ने खुद को बचाने के लिए ड्यूटी रूम में बंद कर लिया तो मरीजों की भीड़ गेट खुलवाने के लिए उसे तोड़ने पर आतुर हो गई।

इसके बाद इस पत्र में सुरक्षा अभाव पर प्रकाश डालते हुए इस घटना से संबंधित कुछ वाकये बताए गए। उन्होंने लिखा कि ऐसी स्थिति में फँसने के बाद दोनों डॉक्टरों ने दो फ्लोर इंचार्ज को संपर्क किया। मगर, उनका फोन नहीं लगा। ऐसे में उन्हें व्हॉट्सअप से सूचित किया गया। लेकिन घटना जानने के बाद भी वो खुद वहाँ नहीं आए और न ही सुरक्षाकर्मियों को भेजा। उनका कहना है कि फ्लोर इंचार्ज ने उनके कॉल की अनदेखी की और मुश्किल में फँसे डॉक्टर्स को वहीं फँसे रहने दिया। इसके अलावा सीएमओ ने भी उनकी कॉल नहीं उठाई। कुछ सिक्यॉरिटी अधिकारियों ने भी डॉक्टरों का साथ नहीं दिया। सुरक्षा गार्डों ने भी सिक्यॉरिटी अलार्म सुनने के बाद प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं मार्शल व गार्ड्स भी सुरक्षा उपकरण न होने के कारण वार्ड में आने से इंकार कर दिया।

पत्र के माध्यम से शिकायत करते हुए डॉक्टरों ने सभी स्थिति को साफ करते हुए पूछा है कि अगर इस बीच उन्हें कुछ हो जाता, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होता। पत्र में डॉक्टरों ने आरोपित मरीजों पर फौरन एफआईआर की माँग की है। इसके अलावा हथियारों सहित पुलिसकर्मियों की तैनाती की गुहार भी लगाई है। डॉक्टरों ने कैज्युएलटी में तैनात सुरक्षाकर्मियों को निलंबित करने का मुद्दा उठाया है और घटना के समय सर्जिकल वार्ड के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों के ख़िलाफ़ एक्शन लेने को कहा है। इसके अतिरिक्त दोनों फ्लोर इंचार्ज समेत ड्यूटी पर तैनात सीएमओ से स्पष्टीकरण की माँग की है।

बता दें कि इस घटना से पहले गाजियाबाद से भी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बदसलूकी की खबर आई थी। खुद सीएमओ ने गाजियाबाद कोतवाली में पत्र लिखकर बताया था कि आइसोलेशन वार्ड में रखे गए संभावित कोरोनावायरस तबलीगी जमाती मरीज बिना कपड़े, पैंट के नंगे घूम रहे हैं। यही नहीं, आइसोलेशन में रखे गए जमाती अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही नर्सों को गंदे-गंदे इशारे भी कर रहे हैं।

गुजरात कॉन्ग्रेस MLA इमरान खेड़ावाला कोरोना पॉजिटिव, सीएम विजय रुपाणी से भी की थी मुलाकात

देश में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के बीच गुजरात से एक कॉन्ग्रेस विधायक को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इस बात की जानकारी कॉन्ग्रेस कमिटी के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने मंगलवार मीडिया को दी। चिंता की बात यह कि विधायक ने मंगलवार सुबह को ही प्रदेश के मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री और गृह राज्यमंत्री से मुलाकात की थी। दरअसल कॉन्ग्रेस विधायक पिछले कई दिनों से मस्जिदों में छिपे तबलीगी जमात से जुड़े लोगों की तलाश में जुटे हुए थे।

गुजरात प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने बताया कि अहमदाबाद में जमालपुर इलाके से कॉन्ग्रेस के इमरान खेड़ावाला का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है। इमरान खेड़ावाला ने मंगलवार को ही अन्य 2 कॉन्ग्रेस विधायकों के साथ मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल और राज्य के गृहमंत्री से मुलाकात की थी। हालाँकि मुलाकात के दौरान सीएम विधायक से 15-20 फीट की दूरी पर थे।

अमित चावड़ा ने बताया कि इमरान खेड़ावाला पिछले कई दिनों से पुलिस टीम के साथ ओल्ड सिटी की मस्जिदों में तबलीगी जमात से जुड़े लोगों को खोजकर उनके टेस्ट करवाने में जुटे हुए थे। इसके बाद अहमदाबाद के पुराने शहर और दानीलिम्बडा इलाकों में पुलिस प्रशासन ने कर्फ्यू घोषित कर दिया है।

साथ ही अब स्वास्थ्य विभाग की टीम विधायक के संपर्क में आने वाले लोगों की तलाश कर उनकी सूची बनाने में जुट गई है। दरअसल कोरोना पॉजिटिव विधायक ने कॉन्ग्रेस के भी कई विधायकों से मुलाकात की थी। इसके बाद उन विधायकों में भी हड़कंप मच गया है।

इसी के साथ गुजरात में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 28, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 650 हो गई है। अहमदाबाद में कोरोना वायरस के 53 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या 373 हो गई। वहीं सूरत में इस वायरस के नौ मामले सामने आए। इसके बाद वडोदरा में छह, भावनगर में तीन, छोटा उदयपुर और मेहसाणा में दो-दो मामले और आणंद, दाहोद, और गाँधीनगर में एक-एक मामले सामने आए हैं।

मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) जयंती रवि के मुताबिक राहत की खबर यह है कि राज्य में इस संक्रमण के कुल 59 मरीज ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं। गौरतलब है कि देश में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने लॉकडाउन की अवधि बढ़ाकर 3 मई तक कर दी है। हालाँकि 20 अप्रैल के बाद कुछ नियमों के साथ लॉकडाउन में डील दी जा सकेगी।

प्रवासियों को उकसाने वाला विनय दुबे गिरफ्तार, लॉकडाउन में बांद्रा की मस्जिद के पास जुटे थे सैकड़ों

मुंबई पुलिस ने विनय दुबे को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर प्रवासी मजदूरों को गुमराह करने और लॉकडाउन में उन्हें सड़क पर उतरने के लिए उकसाने का आरोप है। मुंबई में सोमवार को बांद्रा और व मुंब्रा में हजारों प्रवासी सड़क पर आ गए थे। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को बल का प्रयोग कर व मजहबी नेताओं को अल्लाह का हवाला देकर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ना।

इस संबंध में नवी मुंबई पुलिस ने विनय दुबे नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया। विनय पर आरोप है कि वह 18 अप्रैल को कुर्ला में प्रवासी मजदूरों के बड़े आंदोलन की धमकियाँ पुलिस को दे रहा था। इसके अलावा उसका एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें वह न केवल राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के ख़िलाफ़ ह़़जारों प्रवासियों को भड़काता दिख रहा है, बल्कि सरकार को चेतावनी भी दे रहा है।

पुलिस ने बताया कि दुबे को IPC की धारा 117, 153 A, 188, 269, 270, 505 (2) और महामारी रोग अधिनियम की धारा 3 के तहत गिरफ्तार किया गया है।

फेसबुक पर पोस्ट वीडियो में दुबे उत्तर प्रदेश तक प्रवासियों की पदयात्रा का नेतृत्व करने की बात कर रहा है। इसलिए अगर, लोग उसका साथ देना चाहते हैं, तो वे उससे व्हॉट्सअप पर संपर्क करें। इसके अलावा विनय अपनी वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की और केंद्र सरकार की आलोचना करता दिखा। उसने लॉकडाउन के संबंध में केंद्र सराकर को अल्टीमेटम दिया कि या तो वे 14 और 15 अप्रैल तक सभी परेशानियों का निवारण करें वरना वो 20 अप्रैल से पदयात्रा शुरू कर देगा। खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी बताने वाले विनय दुबे भाजपा के खिलाफ लगातार जहर उगलता रहा है। एनसीपी और मनसे के नेताओं से उसकी करीबी दिखाई पड़ती है। उसके फेसबुक अकाउंट से अपलोड फोटोज में से एक में वह मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ दिखाई देता है।

उल्लेखनीय है कि वीडियो में दुबे ने न केवल महाराष्ट्र के प्रवासियों को सड़कों पर आने के लिए उकसाया बल्कि पूरे देश के प्रवासियों से लॉकडाउन को खारिज करने की माँग की। उसने वीडियो में बार-बार दोहराया कि भूख से मरने से अच्छा है कि कोरोना से मर जाया जाए। दुबे ने वीडियो में मजदूरों को इस बात का भी आश्वासन दिया पदयात्रा के दौरान वह सभी लोगों के खाने-पीने का ध्यान रखेगा। उसने प्रवासियों को उकसाते हुए कहा कि उनके पास सिर्फ दो विकल्प शेष हैं- या तो वह जहाँ हैं वहाँ भूख से मर जाएँ या फिर अपने परिवार तक पहुँच जाएँ, क्योंकि उनके घरों में उनके बच्चे, उनके माता-पिता, पत्नी व उनका गाँव उनका इंतजार कर रहा है।

बता दें, विनय की एक वीडियो यूट्यूब पर भी 14 अप्रैल को डाली गई थी। इसमें वह प्रवासियों से अपील करता दिखा कि वह निकलकर बाहर आएँ और लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर एकत्रित हों। गौरतलब हो कि सिर्फ़ मुंबई ही नहीं, इस वीडियो में उसने पूरे देश के प्रवासियों से अपने आसपास के रेलवे स्टेशन पर एकत्रित होने की बात की। उसने कहा कि लोग लाखों की तादाद में आएँ और केंद्र व राज्यसरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करें। अपनी वीडियोज में उसने बालासाहेब ठाकरे के प्रति प्रेम भी व्यक्त किया। साथ ही महाराष्ट्र सीएम को उसकी माँगों पर ध्यान देने की नसीहत दी। उसने कहा कि अगर बालासाहेब ठाकरे जिंदा होते तो शिवसेना के लोग उनकी बातों पर ध्यान देते।

महाराष्ट्र में प्रवासियों को सरकार के ख़िलाफ़ भड़काकर इकट्ठा करने वाले इस शख्स के बारे में ज्ञात हो कि ये शाहीन बाग में हुए एंटी सीएए प्रदर्शनों में भी गया था। जहाँ इसने न केवल भाषण दिया था बल्कि अभद्र टिप्पणी भी की थी। अब इस मामले में इसका नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का दावा है कि महाराष्ट्र मंत्री अनिल देशमुख इसे निजी तौर पर जानते हैं।

शिवसेना नेताओं ने मस्जिद के सामने भीड़ जुटने का ठीकरा ABP पर फोड़ा, अल्लाह का नाम गूँजने पर साधी चुप्पी

महाराष्ट्र के मुंबई स्थित बांद्रा में एक मस्जिद के सामने हज़ारों लोगों की भीड़ जुट गई और लोगों को अल्लाह के नाम पर समझाया जा रहा था। जैसा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, किसी ने अफवाह फैला दी थी और इसी अफवाह के कारण वहाँ लोग जुट गए। हालाँकि, अफवाह किसने फैलाई, इस पर सीएम चुप्पी साध गए। अब ख़बर आई है कि एबीपी माझा ने एक न्यूज़ चलाई थी, जिसमें कहा गया था कि रेलवे ने मजदूरों के लिए विशेष ट्रेन का प्रावधान किया है, जिससे उन्हें अपने घर जाने का मौका मिलेगा।

अगर ऐसा है कि ये सवाल भी उठ रहे हैं कि किस सूत्र ने एबीपी को इस तरह की ख़बर दी थी? वेस्टर्न रेलवे ने ऐसी किसी भी ख़बर को नकार दिया है। अब महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय ने भी इसी चैनल पर आरोप लगाया है। मंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि जिन्होंने भी अफवाह फैलाई है, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। कई शिवसेना नेताओं ने भी एबीपी का वीडियो शेयर कर के दावा किया कि उसने फेक न्यूज़ फैलाई, जिससे लोगों की भीड़ जुटी। हालाँकि, मस्जिद के सामने भीड़ जुटने और अल्लाह का नाम लिए जाने पर उन्होंने चुप्पी साधी हुई है।

कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र का गृह मंत्रालय भी इसी ख़बर को भीड़ जुटने की वजह मान रहा है। फिर ये सवाल उठता है कि तब पुलिस और प्रशासन क्या कर रहा था, जब ये भीड़ जुटनी शुरू हुई। क्या पुलिस देखती रही और भीड़ जुटती रही? क्या महाराष्ट्र सरकार ने न्यूज़ चैनल से सम्पर्क कर के बताया कि स्पेशल ट्रेनें नहीं चलेंगी?